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स्टुअर्टपुरम का ‘रॉबिनहुड’ चोर, जो चेन्नई जेल तोड़ कर भाग गया: दिलचस्प है कहानी, कश्मीर फाइल्स और ‘कार्तिकेय 2’ के प्रोड्यूसर की अगली पैन-इंडिया फिल्म में रवि तेजा

आंध्र प्रदेश के बापतला जिले के चिराला में स्थित एक गाँव है स्टुअर्टपुरम, जो आजकल खासी शोहरत बटोर रहा है। एक जमाने में इसे चोरों का गाँव भी कहा जाता है, लेकिन अब ये गाँव इससे निकलने में पूरी जोर-आजमाइश कर रहा है। गाँव के चर्चा में आने का कारण है ‘टाइगर नागेश्वर राव’ नाम की एक फिल्म, जिसमें रवि तेजा मुख्य भूमिका में होंगे। अभिषेक अग्रवाल इस फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। ये तेलुगु अभिनेता रवि तेजा की पहली पैन-इंडिया फिल्म होगी।

अभिषेक अग्रवाल का नाम अगर आपने नहीं सुना होगा, तो आपको पता होगा चाहिए कि उन्होंने ही ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ का निर्माण किया था। जहाँ एक फिल्म में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को दुनिया के सामने लाया गया, वहीं दूसरी फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े रहस्यों और उनकी महिमा पर बात की गई। अब अभिषेक अग्रवाल अपनी एक और बड़ी फिल्म को लेकर व्यस्त हैं। ‘Tiger Nageswara Rao’ एक ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म होगी।

आंध्र प्रदेश का स्टुअर्टपुरम और चोर ‘टाइगर नागेश्वर राव’: दिलचस्प है कहानी

फिल्म के लिए स्टुअर्टपुरम गाँव का पूरा का पूरा सेट तैयार किया गया। खबरों में सामने आया था कि सिर्फ इस सेट को तैयार करने में 7 करोड़ रुपए लगे थे। फिल्म के पोस्टर्स भी सामने आए हैं, जिनसे लोगों की उत्सुकता और बढ़ी है। 70 और 80 के दशक को दिखाने वाली कई फ़िल्में आजकल रिलीज हुई हैं और इसके लिए अलग से पूरा सेट तैयार करना पड़ता है, बड़ी तैयारी चाहिए होती है। रवि तेजा के बॉडी लैंग्वेज, एक्शन दृश्य और गेटअप से लेकर सब कुछ इस बार अलग होने वाला है।

आगे बढ़ने से पहले आइए जानते हैं उस व्यक्ति के बारे में, जिस पर ये फिल्म बन रही है। असल में ‘नागेश्वर राव’ नाम के सचमुच एक चोर हुआ करता था, जिसे लोगों ने ‘टाइगर’ नाम दे दिया था। उसके इलाके में उसकी छाव ‘रॉबिनहुड’ की थी। वहाँ के लोग कहते थे कि वो उन अमीरों को लूटता था जो गरीबों का शिक्षण करते थे, इसके बाद उस धन को गरीबों में बाँट देता था। नागेश्वर राव का गाँव स्टुअर्टपुरम को आज भी उसी के नाम से पहचाना जाता है। किसी चोर-डकैत से किसी को भी प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए, लेकिन बड़े पर्दे पर ऐसी कहानियों को लोग मनोरंजन के लिए देखना पसंद करते हैं।

आंध्र प्रदेश के स्टुअर्टपुरम गाँव में आज भी सभी लोग टाइगर नागेश्वर राव को याद करते हैं। उसके किस्से-कहानियाँ बच्चों को सुनाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि वो गरीबों के अधिकार के लिए लड़ता था। 80 के दशक में उसे जानने वाले लोग कहते हैं कि वो एक काफी दयालु व्यक्ति था, जो हमेशा गाँव के ज़रूरतमंदों की मदद करता था। वो अपनी चीजें भी किसी ज़रूरतमंद को देने से हिचकता नहीं था। लोगों का कहना है कि अपनी दयालुता और उदारता के कारण वो गाँव में लोकप्रिय हो गया था।

असल में स्टुअर्टपुरम गाँव की भी अपनी एक कहानी है। अंग्रेजों के ज़माने में कई इलाकों के चोर-डाकुओं को एक साथ बसाने के लिए तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के सदस्य हेरोल्ड स्टुअर्ट के नाम पर इस गाँव को स्थापित किया गया था। ऐसे में ब्रिटिश सरकार को उन और एक साथ नजर रखने में आसानी होती थी। इसी गाँव में 70 के दशक में और उसके बाद 15 वर्षों तक नागेश्वर राव का दबदबा रहा। आंध्र प्रदेश , तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक – आज जो ये 4 राज्य हैं, इन चारों के इलाकों में वो चोरी करता था।

उसके गाँव के लोग कहते हैं कि वो अपने अच्छे कर्मों की वजह से लोकप्रिय बन गया था। हालाँकि, पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे कई वर्ष जेल में गुजारने पड़े थे। उस पर चोरी और डकैती के कई आरोप थे। बताया जाता है कि जेल में भी वो बाक़ी कैदियों को बढ़ई और सिलाई के काम सिखा कर उनकी मदद करता था। उसके गाँव में कई लोग उसे आज भी हीरो मानते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि वो गाँव का एक लीजेंड है, जिसके किस्से-कहानियों के चर्चे होते रहते हैं।

हालाँकि, पुलिस-प्रशासन और वहाँ के सामाजिक कार्यकर्ता इन बातों से इत्तिफाक नहीं रखते और उनका कहना है कि चोरी-डकैती की घटनाओं को अंजाम देने वालों को सज़ा मिलनी ही चाहिए, क्योंकि जिनका पैसा उन्होंने चुराया होता है, वो भी परेशानी में जीते हैं। सज़ा इसीलिए भी आवश्यक है, ताकि कोई और इस धंधे में न आए। टाइगर नागेश्वर राव के खिलाफ कार्रवाई करने वाले एक पूर्व पुलिस अधिकारी कहते हैं कि लोगों को चोर-डाकुओं की जगह पुलिस का साथ देना चाहिए, हालाँकि, वो ये भी कहते हैं कि पुलिस में भी सब दूध के धुले नहीं होते।

पूर्व पुलिस अधिकारी बताते हैं नागेश्वर राव चोरी में इतना दक्ष था कि लोगों के घर के दरवाजे-खड़कियाँ तोड़ कर भीतर घुसता था और रुपए-गहने चुरा लेता था। हालाँकि, 1987 में एक पुलिस मुठभेड़ में आखिरकार नागेश्वर राव की मौत हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में पुलिस के खिलाफ लोग आक्रोशित थे। 1974 में नांदयाल जिले के बनगानपल्ली में आधी रात को पुलिस थाने के सामने स्थित बैंक में लूट की घटना पूरे देश में सुर्खियाँ बनी थीं।

नागेश्वर के भाई प्रभाकर ने BBC को एक इंटरव्यू में बताया था कि बैंक लूट को अंजाम देने वाले गिरोह में 10 सदस्य थे, जिसमें ये दोनों भाई भी शामिल थे। उस ज़माने में 35 लाख रुपया एक बड़ा रकम था। 14 किलो सोना और 50,000 रुपए नकद लेकर सारे डकैत श्मशान घाट गए, जहाँ इसका बँटवारा होना था। लेकिन, पुलिस ने गाँव को घेर रखा था। नागेश्वर राव तब बच निकला था, लेकिन प्रभाकर को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।

नागेश्वर राव को ‘चेन्नई जेल ब्रेक’ के लिए भी जाना जाता है। 1976 में उसे और प्रभाकर को गिरफ्तार किया गया था। तभी उसने अपने भाई से कह दिया था कि वो अब जेल में नहीं रह सकता। बकौल प्रभाकर, जब वो अधिकारियों पर हमला कर के चेन्नई जेल से भाग खड़ा हुआ था, तब इन्हीं पुलिस वालों ने उनसे कहा था, “तुम्हारा भाई वास्तव में टाइगर है।” आज स्टुअर्टपुरम में हालात बदल रहे हैं और बच्चे बाहर जाकर पढ़ रहे हैं, लोग अच्छा काम कर रहे हैं।

इस फिल्म को ‘अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स’ नामक कंपनी प्रोड्यूस कर रही है। अभिषेक अग्रवाल कहते हैं कि वो उस तरह के सिनेमा को आगे बढ़ाने में यकीन रखते हैं, जिसकी जड़ें भारत और भारतीय संस्कृति में हों। वो कहते हैं फिल्मों का निर्माण करना उनका पैशन है, इसीलिए वो प्रोड्यूसर बने। उनका कहना है कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और विरासत को प्रमोट करने में उन्हें यकीन है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ इसका ही एक उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि कैसे जब अधिकतर प्रोड्यूसर इसमें पैसा लगाने को तैयार नहीं हो रहे थे, उन्होंने इसका जिम्मा उठाया। इसी तरह, उन्होंने ‘कार्तिकेय 2’ का निर्माण किया, जो तकनीकी रूप से भी काफी अच्छी फिल्म थी।

उत्तर भारत में बीता बचपन, दक्षिण भारत में सुपरस्टारडम: अब पैन-इंडिया फिल्म में दिखेंगे रवि तेजा

जहाँ तक रवि तेजा का सवाल है, उनका नाम तेलुगु राज्यों में किसी पहचान का मोहताज नहीं है। फिल्म में मुख्य अभिनेता होने के साथ-साथ वो कॉमेडी के तड़के के लिए जाने जाते हैं। साउथ के अधिकतर बड़े स्टार्टस की तरह वो भी एक्शन हीरो हैं, लेकिन उनका स्टाइल और उनकी कॉमेडी टाइमिंग उन्हें बाकियों से अलग खड़ा करती है। उन्हें साउथ में ‘मास महाराजा’ के नाम से भी जाना जाता है। 55 वर्षीय रवि तेजा पहली बार पैन-इंडिया फिल्म का हिस्सा बने हैं।

उन्होंने 1990 में ‘कर्तव्यम्’ नाम की फिल्म में एक छोटे से किरदार के साथ अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी। लीड रोल तक पहुँचने में उन्हें लगभग एक दशक लग गया। 1999 में ‘नी कोसम’ नामक रोमांटिक ड्रामा से उनकी बतौर मुख्य अभिनेता शुरुआत हुई। उन्होंने 2 साल बाद ही ‘इटलु श्रावणी सुब्रमण्यम’ से खुद को स्थापित किया। ये भी जानने वाली बात है कि उनका बचपन उत्तर भारत में ही बिता है। उनकी स्कूलिंग जयपुर, दिल्ली, मुंबई और भोपाल से हुई।

यही कारण है कि वो तेलुगु के साथ-साथ हिंदी भाषा भी अच्छी तरह बोलते-समझते हैं। SS राजामौली के निर्देशन में बनी उनकी फिल्म ‘विक्रमकुडू (2006)’ की कई भाषाओं में रीमेक बनी। अक्षय कुमार अभिनीत ‘राउडी राठौड़ (2012)’ भी इसी की रीमेक है। उनकी फिल्म ‘किक’ (2009) के भी कई भाषाओं में रीमेक बने। हिंदी में सलमान खान ने इसमें अभिनय किया। बीच में उनकी कुछ फ़िल्में नहीं चली, लेकिन हाल ही में उनकी फिल्म ‘धमाका’ ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार किया है और ‘रावणासुर’ को अच्छी समीक्षा मिली है।

10 लाख मकान, हर रोज आधा लीटर दूध, 3 मुफ्त गैस सिलिंडर: कर्नाटक में घोषणा पत्र जारी कर BJP ने साधा कॉन्ग्रेस पर निशाना, कहा- हम डबल इंजन, वो ट्रबल इंजन

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी (BJP) ने सोमवार (1 मई 2023) को बेंगलुरु में अपना घोषणा पत्र (विजन डॉक्यूमेंट) जारी किया। इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा मौजूद थे।

घोषणा पत्र जारी करने के बाद जेपी नड्डा ने कहा, “हम 30,000 करोड़ रुपए के एक कृषि कोष का गठन करेंगे। इसके तहत सभी ग्राम पंचायतों में माइक्रो कोल्ड-स्टोरेज सुविधाएँ और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी। हम एपीएमसी का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण करेंगे और कृषि-मशीनीकरण में तेजी लाएँगे।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए कहा, “हम डबल-इंजन की सरकार हैं, उनकी ट्रबल-इंजन है। हम यहाँ विकास को गति देने आए हैं, वे विकास को केवल ‘ब्रेक’ देते हैं। आज कर्नाटक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए शीर्ष स्थान बन गया है।”

दरअसल, बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में 6-ए का जिक्र किया है। इसमें अन्न (Anna), अक्षर (Akshara), आरोग्य (Aarogya), अभिवृद्धि (Abhivruddhi), आद्या, (Aadaya) और अभय (Abhaya) शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा किया है।

घोषणा पत्र के अनुसार, गरीब परिवारों को हर साल उगादी, गणेश चतुर्थी और दीपावली के मौकों पर 3 मुफ्त गैस सिलेंडर दिए जाएँगे। नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में किफायती, गुणवत्ता वाला और स्वस्थ भोजन देने के लिए अटल आहार केंद्र स्थापित होंगे। पोषण योजना के तहत बीपीएल परिवार को हर दिन आधा लीटर नंदिनी दूध और हर महीने राशन किट के माध्यम से 5 किलो ‘श्री अन्न- श्री धन्य’ प्रदान किया जाएगा।

इसके अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। बेघर लोगों के लिए दस लाख मकान तैयार किए जाएँगे। एससी एसटी घरों की महिलाओं लिए 5 साल की 10 हजार रुपए की एफडी कराई जाएगी। सरकारी स्कूलों अपग्रेड किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों का हर साल मुफ़्त चेकअप कराया जाएगा।

बता दें कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए एक ही चरण में 10 मई को मतदान होगा और 13 मई 2023 को नतीजे घोषित किए जाएँगे।

अमेरिका के जिस ‘फर्स्ट रिपब्लिक बैंक’ को बचाने के लिए कई बैंकों ने किया निवेश, उसकी भी नैया डूबी: 2 महीने में US से आया तीसरा मामला

सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के बाद अमेरिका का फर्स्ट रिपब्लिक बैंक भी डूब गया। इस बैंक को बचाने के लिए देश के कई बड़े बैंकों ने इसमें निवेश किया था। लेकिन इसके बाद भी इसे डूबने से बचाया नहीं जा सका। बैंक डूबने के बाद रेगुलेटर्स ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद अब इस बैंक को जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने खरीद लिया।

अमेरिकी फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (FDIC) ने एक बयान जारी कहा है कि वह फर्स्ट रिपब्लिक बैंक के खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा के लिए इस बैंक की संपत्तियों को जेपी मॉर्गन चेस बैंक, नेशनल एसोसिएशन, कोलंबस और ओहियो को बेचा जा रहा है। इसमें सभी जमा राशि और काफी हद तक फर्स्ट रिपब्लिक बैंक की सभी संपत्तियाँ शामिल है।

फर्स्ट रिपब्लिक बैंक की बिक्री पूरी होने के बाद अब अमेरिका के 8 राज्यों में फर्स्ट रिपब्लिक बैंक के 84 ऑफिस जेपी मॉर्गन चेस बैंक, नेशनल एसोसिएशन के नाम से जाने जाएँगे। बड़ी बात यह है कि फर्स्ट रिपब्लिक बैंक भले ही डूब गया लेकिन सोमवार (1 मई 2023) को बैंक फिर से खुलेगा। बस नाम बदला हुआ होगा। यही नहीं, इस बैंक के सभी खाताधारकों का पूरा पैसा सुरक्षित होगा। अमेरिकी रेगुलेटर्स का अनुमान है कि रिपब्लिक फर्स्ट बैंक के बीमा के को कवर करने के लिए उसे करीब 13 अरब डॉलर का भुगतान करना पड़ेगा।

बैंक डूबने का कारण

गौरतलब है कि फर्स्ट रिपब्लिक की हालत मार्च 2023 की शुरुआत से खराब होती जा रही थी। उसके शेयरों में लगातार गिरावट दर्ज हो रही थी। 2 मार्च 2023 को बैंक के शेयरों की कीमत 119.74 डॉलर थी। जो कि अब गिरकर महज 3.51 डॉलर रह गई है। शुरुआती गिरावट के बाद ही बैंक को डूबने से बचाने के लिए 16 मार्च को अमेरिका के 11 बड़े बैंकों ने फर्स्ट रिपब्लिक बैंक में में 30 बिलियन डॉलर यानि करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया था। इसमें जेपी मॉर्गन और बैंक ऑफ अमेरिका समेत अन्य बैंक शामिल थे। हालाँकि इसके बाद भी बैंक को बचाया नहीं जा सका।

यही नहीं, इससे पहले गत सोमवार को फर्स्ट रिपब्लिक बैंक ने कहा था कि उसके ग्राहकों ने इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही 102 बिलियन डॉलर निकाल लिए हैं। 2022 के अंत में बैंक का डिपॉजिट 176 बिलियन डॉलर के करीब था। इसका मतलब यह था कि खाताधारकों ने आधे से अधिक पैसा निकाल लिया था। वहीं, बैंक ने इस दौरान 92 बिलियन डॉलर उधार भी लिए थे। यह सब मिलाकर बैंक के डूबने की बड़ी वजह बने।

2 महीने में डूब गए 3 बड़े बैंक

अमेरिका में आर्थिक मंदी जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। बीते 2 महीनों के भीतर 3 बड़े बैंको का डूबना इस बात का सबसे बड़ा संकेत है। फर्स्ट रिपब्लिक बैंक से पहले सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक भी डूब चुके हैं। इसमें सिलिकॉन वैली बैंक अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक था। लेकिन शेयरों में आई भारी गिरावट के चलते बैंक डूब गया।

‘भाई-बहनोई के साथ हलाला कर, तभी साथ रहूँगा’ : सऊदी से लौटे शौहर ने बीवी के सामने रखी शर्त, बात न सुनने पर तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के बांदा में तीन तलाक का मामला सामने आया है। शौहर ने अपनी बीवी को तीन बार तलाक-तलाक-तलाक कहकर शर्त रखी है कि अब वह उसके साथ तभी रहेगा जब महिला अपने देवर के साथ या फिर ननद के शौहर के साथ हलाला करेगी।

पूरा मामला बांदा के शहर कोतवाली क्षेत्र का है। गायत्रीनगर रहने वाली पीड़िता ने थाने पहुँच कंप्लेन दी। उसने बताया कि उसे उसके शौहर ने कहा था कि अगर वो ट्रिपल तलाक की शिकायत कहीं करती है तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

महिला ने अपने लिए न्याय माँगते हुए शौहर समेत ससुराल के 4 लोगों पर इल्जाम लगाए। पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद केस को पीड़िता की शिकायत के आधार पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट, धमकी और मुस्लिम अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिला का निकाह 22 जुलाई 2015 को साबाद गाँव के युवक से हुआ था। कुछ वक्त बाद ही ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान करने लगे। उसके साथ मार-पीट और गाली-गलौच होता। निकाह के कुछ समय बाद उसका शौहर भी सऊदी चला गया और उस वक्त ससुरालवालों ने उस पर अत्याचार बढ़ा दिए। प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने अपने मायके रहना शुरू किया।

जब शौहर से बात हुई तो उसने ससुराल वालों की हरकत के बारे में बताया। इस पर उसके शौहर ने उलटा उसे ही धमकी दे दी और कहा कि वो दूसरा निकाह कर लेगा पर उसके साथ नहीं रहेगा। 2022 में वो दुबई से लौटकर आया और तब उसने बीवी के घर जाकर उसे तलाक कह दिया।

बताया जा रहा है कि उसने बीवी के सामने शर्त रखी थी अगर उसे दोबारा उसके साथ रहना है तो हलाला करना होगा। शौहर ने ये भी कहा कि ये हलाला उसको अपने देवर से और ननद के शौहर से करना होगा। अगर वो ऐसा नहीं करेगी तो उनका रिश्ता आगे नहीं चल सकता। महिला के मना करने पर वो उसे तीन तलाक देकर चला गया।

गौरतलब है कि बीते दिनों 2018 का एक ऐसा ही मामला सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ था। उस केस में पीड़िता को ससुर और भाई से हलाला करने को मजबूर किया गया था। पीड़िता को तीन तलाक देकर हलाला के नाम पर ससुर से उसका रेप करवाया गया था। वहीं देवर के साथ हलाला करने को लगातार दबाव बनाया जा रहा था। महिला ने बरेली में अपनी शिकायत दी थी।

‘अमर चित्र कथा’ ने आतंकवादियों की हमदर्द अरुंधति रॉय का किया महिमामंडन: विरोध होने पर माफ़ी माँगने की जगह दी सफाई, भारत के खिलाफ उगलती है ज़हर

धार्मिक, ऐतिहासिक कॉमिक्स और ग्राफिक उपन्यासों के लिए जाने जाने वाले प्रतिष्ठित कॉमिक्स प्रकाशक ‘अमर चित्र कथा (ACK)’ ने हाल ही में विवादित वामपंथी लेखिका अरुंधति रॉय के बारे में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया। ‘द अमर चित्र कथा स्टूडियो’ ने अपनी पोस्ट में रॉय के जीवन और करियर के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, “1961 में शिलांग में जन्मी अरुंधति रॉय एक आर्किटेक्ट, स्क्रीनप्ले राइटर और लेखिका हैं।”

ACK ने लिखा, “उनका पहला उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ ने 1997 में बुकर पुरस्कार जीतकर इतिहास रचा। कथा साहित्य के अलावा उन्होंने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों के बारे में नॉन-फिक्शन किताबें और निबंध लिखे हैं। पटकथा लेखन में उनके काम की भी सराहना की गई है। उनकी पहली पटकथा को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है।”

यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसका जमकर विरोध किया। ‘द जयपुर डायलॉग्स’ ने 28 अप्रैल को इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर कर अमर चित्र कथा स्टूडियो को खरी खोटी सुनाई। उन्होंने अरुंधति रॉय को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए और हैरानी जताई कि कोई उनके बारे में इस तरह से कैसे लिख सकता है, जबकि सभी जानते हैं कि वह भारत के खिलाफ जहर उगलने से कभी बाज नहीं आती है।

‘द जयपुर डायलॉग्स’ ने लिखा, “अरुंधति रॉय, जिन्हें हम सब भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए जानते हैं। वह लगातार राष्ट्र के हितों के खिलाफ एक एजेंडे पर काम कर रही हैं। लेकिन, उनकी पृष्ठभूमि के बारे में जानने के बाद भी अमर चित्र कथा जैसा एक इंडिक समूह उसे बढ़ावा दे रहा है, जो हैरान करने वाला है।” सोशल मीडिया पर इस पोस्ट का अन्य लोगों ने भी जमकर विरोध किया, जिसके बाद एसीके स्टूडियो द्वारा इसे डिलीट कर दिया गया।

इसके बाद अमर चित्र कथा (एसीके) ने सोमवार (1 मई, 2023) को अरुंधति रॉय के बारे में अपनी पोस्ट के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया। प्रतिष्ठित कॉमिक्स प्रकाशक ने भारत विरोधी प्रचारक अरुंधति रॉय को लेकर किए गए पोस्ट को लेकर सफाई दी कि ACK उनके कार्यों, ब्लॉगों या सोशल मीडिया पोस्ट में शामिल किसी भी व्यक्ति के राजनीतिक विचारों का समर्थन नहीं करता है। एसीके ने दावा किया कि अरुंधति रॉय के बारे में पोस्ट भारतीय लेखकों (जैसे अमृता शेरगिल, अनीता देसाई, खुशवंत सिं​ह, सतीश गुजरात आदि) के बारे में सीरीज का केवल एक हिस्सा था और उन्होंने कभी भी किसी भी तरह से अरुंधति रॉय का सहयोग करने की योजना नहीं बनाई।

दिलचस्प बात यह है कि एसीके की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स के आक्रोश व्यक्त करने के बाद यह ‘स्पष्टीकरण’ आया है। उन्होंने भारत और हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार करने वाली लेखिका को बढ़ावा देने और उसकी प्रशंसा करने के लिए एसीके को खरी-खोटी सुनाई थी। इसके बाद भी एसीके ने आज की पोस्ट में अपनी लापरवाही के लिए माफी नहीं माँगी, बल्कि स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, “हमारा मिशन हमेशा भारतीय बच्चों को उनकी जड़ों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करना रहा है।”

बता दें कि अरुंधति रॉय का फेक न्यूज फैलाने और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने का पुराना इतिहास रहा है। रॉय ने सिर्फ सरकार को नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों को भी बदनाम किया है। कश्मीर में आतंकवाद निरोधी अभियानों को उन्होंने लगातार “सरकार प्रायोजित” आतंकवाद के रूप में संदर्भित किया।

साल 2002 के अपने कुख्यात भाषण में रॉय ने कहा था, “वर्तमान भारत सरकार की फासीवादी नीतियों के फलस्वरूप, जिसने कश्मीर घाटी में सरकारी आतंकवाद (आतंकवाद से लड़ने के नाम पर) के अपराध के अलावा गुजरात में मुस्लिमों के खिलाफ हाल ही में राज्य की निगरानी में हुए जनसंहार से आँखें मूँद ली हैं। हम भारत के सैकड़ों ही नहीं बल्कि लाखों लोग शर्मिंदा और नाराज हैं। यह सोचना बेतुका होगा कि जो लोग भारत सरकार की आलोचना करते हैं वे ‘भारत विरोधी’ हैं।”

‘नए सिरे से शुरू हो सुनवाई’: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में इलाहाबद HC ने मस्जिद पक्ष को दिया झटका, शाही ईदगाह पर सुनवाई के खिलाफ था वक्फ बोर्ड

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका दिया है। दरअसल, हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह ट्रस्ट और सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने मथुरा के जिला जज को पूरे मामले की नई सिरे सुनवाई करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट का फैसला सोमवार (1 मई, 2023) को आया।

दरअसल, भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से मथुरा जिला अदालत में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह की पूरी जमीन को श्रीकृष्ण विराजमान के नाम घोषित किए जाने की माँग की गई थी। इस याचिका को स्वीकार करते हुए जिला अदालत ने सुनवाई शुरू करने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ शाही ईदगाह और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

निर्णय देते हुए हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस प्रकाश पडिया ने कहा है कि इस मामले में फैसला पहले ही आ चुका है, ऐसे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने मथुरा जिला जज को मामले की सुनवाई नए सिरे से शुरू करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि शाही ईदगाह और सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका के चलते इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से मथुरा कोर्ट में दाखिल केस में रोक लगा दी थी। हालाँकि कोर्ट के फैसले के बाद यह रोक भी हट गई। हालाँकि अब कोर्ट को एक बार फिर दोनों पक्षों के दावों पर शुरू से सुनवाई करनी होगी।

क्या है मामला?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि का यह विवाद श्रीराम जन्मभूमि की तरह ही है। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान का दावा है कि औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाकर यहाँ मस्जिद बनवाई। वहीं, मुस्लिम पक्ष इस बात का विरोध कर रहा है। यह पूरा विवाद 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा हुआ है। फिलहाल भगवान श्रीकृष्ण विराजमान के पास 10.9 एकड़ जमीन का मालिकाना हक है। शेष जमीन शाही ईदगाह का कब्जा है।

इसको लेकर ही भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से मथुरा कोर्ट में एक केस दायर किया गया था। इस केस में 20 जुलाई 1973 के फैसले को रद्द कर 13.37 एकड़ भूमि को कटरा केशव देव की जगह श्रीकृष्ण विराजमान के नाम घोषित किए जाने की माँग की गई थी। श्रीकृष्ण विराजमान का कहना था कि जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। उक्त समझौते के आधार पर साल 1973 में दिया गया फैसला इसमें लागू नहीं होता, क्योंकि उस समय वह पक्षकार नहीं था।

पिता मल्लिकार्जुन खड़गे से भी आगे निकले बेटे प्रियांक, PM मोदी को बताया ‘नालायक बेटा’: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को कहा था ‘साँप’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इन दिनों कॉन्ग्रेस नेता हर रोज आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहे हैं। कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें ‘जहरीला सांप’ कहा था। अब उनके बेटे ने पीएम मोदी को ‘नालायक बेटा’ कहा है।

प्रियांक खड़गे ने कर्नाटक चुनाव से पहले कलबुर्गी में पीएम मोदी की एक रैली के बाद उनपर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी मालखेड़ा में बंजारा समुदाय से बोलते हैं कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनका बेटा दिल्ली में बैठा हुआ है। लेकिन वो ऐसे नालायक बेटे का क्या करें। ऐसे नालायक बेटे के साथ अपना घर कैसे चलाएँ। प्रियांक खरगे ने कहा कि खुद को बंजारा समुदाय का बेटा बताकर पीएम ने बंजारा समुदाय के लिए ही आरक्षण की समस्या खड़ी कर दी।

भारतीय जनता पार्टी ने प्रियांक खड़गे के इस बयान पर आपत्ति जताई है। कर्नाटक भाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि पीएम मोदी को नालायक बेटा कहकर प्रियांक खड़गे अपने बेटे मल्लिकार्जुन खड़गे से भी आगे निकल गए हैं।

भाजपा नेता नारायणस्वामी ने कहा, “उनका मुँह गंदा ही है। क्या ये सब चुनाव में जरूरी है। मैं खड़गे जी का आदर करता हूँ क्योंकि मैंने उनके साथ काम किया है। वे बेंगलुरु में ऐसे नहीं रहे। मुझे नहीं पता उन्हें दिल्ली जाकर क्या हुआ। अब उनका बेटा भी यही कर रहा है। उन्होंने हमारे पीएम के लिए गंदे शब्द बोले हैं।”

बता दें कि इससे पहले कर्नाटक अध्यक्ष ने कर्नाटक चुनाव के दौरान कहा था, “पीएम मोदी ‘जहरीले साँप’ की तरह हैं। आप सोच सकते हैं कि यह जहर है या नहीं। यदि आप इसे चाटते हैं, तो आप मर मर जाएँगे।” खड़गे के इसी बयान पर पीएम ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था,

“आज जब मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा हूँ, तो कॉन्ग्रेस सबसे ज्यादा परेशान है। कॉन्ग्रेस अब धमकी दे रही है। वे कहते हैं ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी।’ वे मेरी तुलना साँप से कर रहे हैं और लोगों से वोट माँग रहे हैं। मेरे लिए देश की जनता भगवान शिव का रूप है। मैं भगवान रूपी जनता के गले का साँप बनना स्वीकार करता हूँ। कर्नाटक की जनता उन्हें मुँहतोड़ जवाब देगी। 10 मई को उत्तर दें।”

विरोध होने के बाद खड़गे ने इस बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जहरीला सांप पीएम मोदी को नहीं बीजेपी को दिया था।

‘ऐसे ही नाचती रही तो ब्रिटेन वाले खुद आकर कोहिनूर लौटा जाएँगे’: किंग चार्ल्स III के कोरोनेशन में सोनम कपूर को बुलावा, वीडियो शेयर कर बोले लोग – गुलामी का बदला

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर (Sonam Kapoor) का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III के कोरोनेशन सेरेमनी में परफॉर्मेंस देने के लिए उन्हें बुलाया गया है, उससे पहले उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना का कारण बन रहा है। वायरल वीडियो में एक्ट्रेस को एक फैशन शो में परफॉर्म करते हुए देखा जा सकता है। इस परफॉर्मेंस को देखने के बाद यूजर्स उनका जमकर मजाक उड़ा रहे हैं।

दरअसल, लंदन के वेस्टमिंस्टर एब्बे में 6 मई, 2023 को किंग चार्ल्स III का राज्याभिषेक होने जा रहा है। करीब एक हफ्ते तक यह राज्याभिषेक समारोह मनाया जाएगा। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth) के निधन के करीब आठ महीने बाद किंग चार्ल्स III आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन की राजगद्दी संभालेंगे।

कोरोनेशन कॉन्सर्ट 7 मई, 2023 को विंडसर कैसल (Windsor Castle) में आयोजित किया जाएगा। इस इवेंट में केटी पेरी (Katy Perry), टॉम क्रूज (Tom Cruise) और लियोनेल रिची (Lionel Richie) के अलावा बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर को भी आमंत्रित किया गया है। इस बीच सोनम कपूर के इस वायरल वीडियो को शेयर कर लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं। उन्हें बी ग्रेड का कलाकार कह रहे हैं।

ध्यान देने वाली बात ये है कि इस वीडियो को लोगों ने किंग चार्ल्स III के राज्याभिषेक समारोह का समझ लिया, लेकिन असल में ये वहाँ का नहीं है। ये पुराना है। ये कार्यक्रम अभी अभी हुआ नहीं है और उसमें सोनम कपूर का परफॉर्मेंस भी अभी नहीं हुआ है। पत्रकार भारती जैन लिखती है कि जहाँपनाह, कोहिनूर अब दे ही दीजिए वरना चार राउंड और लगाऊँगी।

एक यूजर लिखता है, “यूके की अर्थव्यवस्था कितनी बुरी हालत में है ब्रो, ये लोग सोनम कपूर को बुला रहे हैं।”

एक और यूजर लिखता है कि पैसा दो तो यही सोनम कपूर तुम्हारे मोहल्ले में इससे भी अच्छा नाचेगी।

अभिनव खरे ने सोनम कपूर का मजाक उड़ाते हुए ब्रिटेन पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि ब्रिटिश साम्राज्य का अधिकारिक रूप से सूर्य अस्त हो चुका है। कम बजट में बी ग्रेड कलाकार आधे मन से परफॉर्म कर रहे हैं। ब्रिटेन में आर्थिक संकट।

रोजी नाम की यूजर ने एक्ट्रेस की परफॉर्मेंस का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “सोनम कपूर ने किंग चार्ल्स के राज्याभिषेक समारोह में इस तरह की परफॉर्मेंस देकर अंग्रेजों से हमारा बदला ले लिया।”

बताया जा रहा है कि सोनम कपूर कॉमनवेल्थ के वर्चुअल क्वायर को इंट्रोड्यूस करेंगी और स्पीच भी देंगी। फिलहाल, सोनम अपने पति आनंद अहूजा और बेटे वायु के साथ लंदन में ही हैं।

बता दें कि कुछ समय पहले सोनम नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘AK vs AK’ में दिखी थीं। अब वह डायरेक्टर शोम मखीजा की फिल्म ‘ब्लाइंड’ में काम कर रही हैं, जिसे सुजॉय घोष प्रोड्यूस कर रहे हैं। यह कोरियन फिल्म का रीमेक है। सोनम के साथ इसमें पूरब कोहली, विनय पाठक और लिलेट दुबे भी नजर आएँगे।

‘चुनाव जीतने के लिए इन्होंने करा दी सैनिकों की हत्या’: PM मोदी पर कॉन्ग्रेस नेता का विवादित बयान, अभिनेत्री बेटी भी चुनाव में माँगती हैं वोट

पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर कॉन्ग्रेस नेता विवादित बयान देते रहे हैं। अब भागलपुर से विधायक अजीत शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा है कि पीएम मोदी ने 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पुलवामा हमला कराया था। उन्होंने यह भी कहा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले फिर से इसी तरह का हमला हो सकता है।

दरअसल, भागलपुर से कॉन्ग्रेस विधायक अजीत शर्मा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 100वें एपिसोड को लेकर सवाल पूछा गया था। इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा है कि वह चुनाव जीतने के लिए पुलवामा में सैनिकों को मरवा सकते हैं, ये भी उनके ‘मन की बात’ है। देश की जनता सब जानती है। उन्होंने कहा, “2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी ये इसी तरह कुछ न कुछ करेंगे। चाहे ये सैनिकों की हत्या करवा दें या फिर देश में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर दें।”

अजीत शर्मा के इस बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि कॉन्ग्रेस नेता बहुत विषैला बोल रहे हैं। पूरी कॉन्ग्रेस भाषा की मर्यादा भूल चुकी है। कॉन्ग्रेस को इसका जवाब कर्नाटक चुनाव में मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो भी देश के प्रधानमंत्री को गाली देगा, बलिदानियों का अपमान करेगा, देश का अपमान करेगा उसको देश की जनता माफ करने वाली नहीं है।

एक्ट्रेस नेहा शर्मा के पिता हैं अजीत शर्मा

बता दें कि अजीत शर्मा बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा शर्मा के पिता हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नेहा शर्मा कई बार अपने पिता के लिए वोट माँगते नजर आ चुकी हैं। नेहा शर्मा बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘तानाजी’ में नजर आ चुकी हैं। इसके अलावा ‘तेरी मेरी कहानी’, ‘यंगिस्तान’, ‘यमला पगला दीवाना 2’ में भी एक्टिंग कर चुकी हैं।

गौरतलब है कि इसी साल कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पुलवामा हमले की बरसी पर ही विवादित ट्वीट किया था। दिग्विजय ने लिखा था, “आज हम CRPF के उन 40 जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं, जो पुलवामा में खुफिया एजेंसियों की विफलता के कारण बलिदान हो गए। मुझे उम्मीद है कि बलिदान हुए जवानों के परिवारों का अच्छी तरह से पुनर्वास किया गया है।” इसके अलावा, कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद बीके हरिप्रसाद, नवजोत सिंह सिद्धू समेत कई नेता इसी तरह विवादित बयान देते रहे हैं।

केंद्र सरकार ने 14 मैसेंजर ऐप्स पर लगाया बैन, इन्हीं का इस्तेमाल कर के घाटी में आतंक फैला रहे थे पाकिस्तान में बैठे सरगना: देखें लिस्ट

भारत सरकार ने 14 मैसेंजर ऐप्स को बैन कर दिया है। इन ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे आतंकी भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। ऐसे में केन्द्र सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए ऐप्स को प्रतिबंधित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच एजेंसियों ने सरकार को जानकारी दी थी कि पाकिस्तानी आतंकी जम्मू-कश्मीर में बैठे अपने समर्थकों व अन्य आतंकियों से बातचीत करने के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन ऐप्स के जरिए घाटी में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ रहीं थीं। कहा जा रहा है कि भारतीय सेना, खुफिया एवं जाँच एजेंसियाँ इस मामले में जाँच कर रहीं थीं। इन सभी के इनपुट के बाद सरकार ने यह कार्रवाई की है।

केंद्र सरकार द्वारा जिन ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार, क्रायपवाइजर, एनिग्मा, सेफस्विस, विकरमे, मीडियाफायर, ब्रियर, बीचैट, नंदबॉक्स, कॉनियन, आईएमओ, एलिमेंट, सेकेंड लाइन, जांगी, थ्रेमा पर बैन लगाया गया है। सरकार की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी एक बार फिर सिर उठाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन समय रहते ही सरकार ने उन पर लगाम लगा दिया।

‘टाइम्स नाउ’ ने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि सरकार ने जिन ऐप्स पर बैन लगाया है उनमें से अधिकांश ऐप्स को ऐसे डिजाइन किया गया था कि उसमें यूजर अपनी पहचान छिपाकर चैट कर सकता है। साथ ही इसके इंटरफेस के चलते यूजर्स की पहचान कर पाना भी मुश्किल था। यही नहीं, न तो ऐप्स को भारत से संचालित नहीं किया जा रहा था और न ही इन्हें बनाने वाले लोग भारत में हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार इससे पहले भी देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे 250 से अधिक चीनी ऐप्स को बैन कर चुकी है। इन ऐप्स में टिकटॉक, पबजी, फ्री फायर, शेयरइट, वीचैट, हैलो, लाइकी, यूसी ब्रॉउसर, यूसी न्यूज, बिगो लाइव जैसे कई अन्य ऐप शामिल हैं।