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रमजान में रोजे के दौरान शौच के बाद कैसे धोएँ… ताकि गुदाद्वार से पेट में न चला जाए पानी: मुफ्ती का वीडियो वायरल – Fact Check

इस्लाम को मानने वालों के लिए रमजान का महीना चल रहा है। सोशल मीडिया पर रमजान से ही संबंधित एक वीडियो वायरल हो रही है। रोजा रखते हुए इस्तिन्जा (Ramzan me istinja) कैसे करें, इसके बारे में एक मुफ्ती वीडियो में बता रहे हैं। इस्तिन्जा का हिंदी में मतलब समझिए – शौच (पखाना) के बाद पिछवाड़ा धोने की प्रक्रिया।

रमजान में चूँकि मुस्लिम लोग दिन भर कुछ खाते भी नहीं हैं, पानी भी नहीं पीते हैं, इसलिए वायरल वीडियो में मुफ्ती बता रहे हैं कि रोजे के दौरान शौच (पखाना) के बाद पिछवाड़ा कैसे धोया जाए ताकि पानी गुदाद्वार से अंदर पेट में न चला जाए। मुफ्ती मामुर बदर कासमी का वीडियो देखिए, जो वायरल हो रहा है। बहुत मजा है इस वीडियो में।

मुफ्ती बता रहे हैं कि इस्तिन्जा करते समय साँस रोक लें। इसके बाद वो हाथ हिला कर (पिछवाड़ा धोने की प्रक्रिया) बता रहे हैं कि पानी का इस्तेमाल करें। साँस रोकने को लेकर मुफ्ती तर्क देते हैं कि इससे पखाने का सुराख (गुदाद्वार) खुलेगा नहीं, टाइट रहेगा। इस कारण से इस्तिन्जा के वक्त पानी गुदाद्वार से होते हुए पेट के अंदर नहीं जाएगा।

रोजे के टूटने की बात कहते हुए मुफ्ती बताते हैं कि कोई चीज अगर मुँह के रास्ते से या पखाने के रास्ते से पेट में चली जाए तो उस कारण से रोजा का टूटना माना जाएगा। अपनी बात में वजन लाने के लिए इस्लामी मजहबी किताबों के कुछ उदाहरण भी देते हैं मुफ्ती।

रोजे में पखाने के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ?

क्या सच में इस्लाम को मानने वाले लोग ऐसे-ऐसे सवाल करते हैं? क्या सच में मौलाना-मुफ्ती लोगों के ऐसे सवालों का जवाब देते हैं। हमने इन सवालों को तलाशने का काम किया।

वायरल वीडियो सिर्फ 47 सेकंड का है, इसलिए हमारा सबसे पहला काम था पूरे वीडियो को खोजना। यूट्यूब पर मिल भी गया मुफ्ती मामुर बदर कासमी का ऑफिशिअल अकाउंट। यहाँ 5 अप्रैल 2023 को एक शॉर्ट वीडियो अपलोड किया गया है। इसमें मुफ्ती खुद को बदनाम करने की साजिश बताते हुए वायरल वीडियो को एडिटेड बताते हैं।

इस शॉर्ट वीडियो के बाद हमने मुफ्ती मामुर बदर कासमी का ऑरिजनल वीडियो खोजा, जिसको एडिट करके सोशल मीडिया में वायरल किया जा रहा है। यह वीडियो भी हमें मिल गया। 2 साल पहले अपलोड किया गया था। 7 मिनट 18 सेकंड का वीडियो है यह।

पूरे वीडियो को देखने के बाद यह क्लियर है कि मुफ्ती मामुर बदर कासमी ने ‘रोजे में पखाने के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ’ को लेकर चल रही भ्रांतियों पर बात रखी थी। उन्होंने अपने यूजर को वीडियो में बताया कि इस्तिन्जा करते समय पखाने के रास्ते से पेट में पानी जाने वाली बात असंभव है। हाँ, एक संभावना यह बताई कि जिस इंसान के पखाने का रास्ता (गुदाद्वार) बहुत ढीला हो, उसके पेट में इस्तिन्जा करते समय पानी जा सकता है।

मुफ्ती मामुर बदर कासमी के अनुसार पखाने का रास्ता (गुदाद्वार) बहुत टाइट होता है, उसमें कोई चीज अगर घुसाना चाहें तो वो बड़ी मुश्किल से और बहुत दिक्कत से अंदर जाती है। मुफ्ती ने यह भी बताया कि जब कभी कब्ज हो जाती है तो इसी कारण से पखाना करते समय जान लगानी पड़ती है। मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि इससे सिद्ध होता है कि पखाने का रास्ता बहुत सख्त होता है, टाइट होता है।

अपने शॉर्ट वीडियो में मुफ्ती ने यह कहा कि कोई बरेलवी मौलाना हैं, जो यह बता रहे हैं कि रोजे में किस तरह से इस्तिन्जा करना चाहिए। तो आखिर कौन है वो मौलाना, जो यह बताता है कि रोजे में गुदाद्वार को चिपका कर इस्तिन्जा करना चाहिए? और क्या सच में इस्लाम को मानने वाले लोग ऐसे-ऐसे सवाल करते हैं? क्या सच में मौलाना-मुफ्ती लोगों के ऐसे सवालों का जवाब देते हैं। हमने इसको लेकर भी वीडियो सर्च किए।

मुफ्ती मामुर बदर कासमी ने अपने वीडियो में जिस बरेलवी मौलाना का जिक्र किया है, उनका वीडियो भी मिल गया यूट्यूब पर। 5 साल पुराना है। 2 मिनट 25 सेकंड के वीडियो में अलग-अलग यूजर मौलाना से दो सवाल पूछता है। मौलाना के साथ वाला टेक्नॉलजी से जुड़ा हुआ है, आई-पैड पर सवालों को लिखता है। इसके बाद मौलाना इन सवालों का जवाब देता है। दूसरा सवाल इस्तिन्जा से जुड़ा है, सुनिए मौलाना का इसको लेकर जवाब।

“रोजे के हालत में साँस ज्यादा न लें। थोड़ा सिमट कर बैठें, ज्यादा फैल कर न बैठें। इससे पानी पेट तक पहुँच सकता है, जिससे रोजा टूट जाएगा।”

रमजान में शौच के बाद पिछवाड़ा धोने वाले वीडियो का सच

फैक्ट-1: मुफ्ती मामुर बदर कासमी के जिस वीडियो को सेशल मीडिया में वायरल किया जा रहा है, वो वीडियो क्रॉप्ड है। उनका पूरा वीडियो देखने से क्लियर है कि “रमजान में शौच के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ” मामले पर उन्होंने ज्ञान नहीं दिया है।

फैक्ट-2: “रमजान में रोजे के दौरान शौच के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ” – इस्लाम को मानने वाले लोग ऐसे वाहियात सवाल करते हैं। मौलाना-मुफ्ती लोगों के ऐसे सवालों का जवाब भी देते हैं।

इधर असद का एनकाउंटर, उधर कोर्ट में रोया-चक्कर खाकर गिर पड़ा अतीक अहमद, लगे ‘योगी जिंदाबाद’ के नारेः मीडिया में चल रही खबरें, झाँसी में यूपी STF ने किया ढेर

उत्तर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद का आज (13 अप्रैल 2023) यूपी की एसटीएफ ने एनकाउंटर कर दिया। ये एनकाउंटर झाँसी में हुआ। इस दौरान शूटर मोहम्मद गुलाम को भी ढेर किया गया।

उमेश पाल मर्डर केस में ये दोनों आरोपित थे। इनके ऊपर प्रयागराज में 5-5 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार जिस टीम ने इनका एनकाउंटर किया उसे DySP नवेंदु और DySP विमल झाँसी में लीड कर रहे थे। छानबीन में पुलिस को दोनों आरोपितों के पास से विदेशी हथियार बरामद हुए हैं।

इस एनकाउंटर की जानकारी होने पर अतीक अहमद के फूट-फूटकर पर रोने और चक्कर खाकर गिरने व बेहोश होने की भी खबर सोशल मीडिया में दी जा रही है। बताया जा रहा है कि असद के मारे जाने की सूचना पाकर अतीक खुद को संभाल नहीं पा रहा। वहीं कोर्ट में इस घटना के बाद ‘योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए हैं।

उमेश पाल की माँ ने इस एनकाउंटर के बाद यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया और कहा कि आगे भी उनके साथ ऐसा ही न्याय किया जाए।

उल्लेखनीय है कि एनकाउंटर की खबर ऐसे वक्त में आई है जब अतीक अहमद और उसके भाई को आज कोर्ट में पेश किया गया। इससे पहले अतीक ने गिड़गिड़ाते हुए कहा था, “मेरा परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। मैं जेल में था। मैंने वहाँ से कोई साजिश नहीं रची है। मैंने वहाँ से कोई फोन नहीं किया। वहाँ जैमर लगे हुए हैं। प्रदेश से माफियागीरी पहले ही खत्म हो चुकी है। अब तो सिर्फ रगड़ा जा रहा है।”

याद दिला दें कि उमेश पाल की हत्या के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माफियाओं को मिट्टी में मिलाने की बात कही थी। जिस पर अतीक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “सरकार ने कहा है कि मिट्टी में मिला देंगे। मिट्टी में तो मिल चुके है। अब सरकार से से अपील है कि घर की औरतों-बच्चों को ना परेशान करे।” हालाँकि, असद के बारे में सवाल करने पर अतीक ने कहा, “मैं क्या जानूँ। मैं तो जेल में हूँ।”

BBC पर ED ने दर्ज किया केस, पैसों के हेरफेर को लेकर FEMA के तहत कार्रवाई: मीडिया संस्थान के दफ्तरों में तीन दिन चला था आयकर सर्वे

वित्तीय अनियमितता को लेकर इंग्लैंड की मीडिया कंपनी BBC के खिलाफ छापेमारी के बाद अब उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बीबीसी इंडिया के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत कार्रवाई की है। बीबीसी पर विदेशी फंडिंग में अनियमितता का आरोप है। 

बता दें कि वित्तीय अनियमितता को लेकर फरवरी में आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बीबीसी के दिल्ली और मुंबई दफ्तरों की तीन दिनों तक तलाशी ली थी। इसके बाद यह मामला अंतर्राष्ट्री स्तर पर उठा था। हालाँकि, इसको लेकर इंग्लैंड और अमेरिका ने इस पर कमेंट करने से इनकार कर दिया था।

अधिकारी सर्वे के दौरान बीबीसी के ऑफिस से इकट्ठा किए गए कई दस्तावेज और डेटा को भी अपने साथ लेकर गए थे। हालाँकि, उन्होंने जुटाए गए दस्तावेजों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी थी।

विदेशी मीडिया हाउस में यह सर्वे अर्जित किए गए लाभ को विदेश भेजने और ट्रांसफर प्राइसिंग रूल्स के उल्लंघन के कारण आयकर विभाग ने यह एक्शन लिया था। इसके पहले अधिकारियों ने इससे संबंधित बीबीसी को कई बार नोटिस भेजा था, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आया।

आयकर विभाग ने कहा था कि हस्तांतरण मूल्य निर्धारण नियमों (Transfer Pricing Rules) को जानबूझकर नजरअंदाज करने और विशाल लाभ को विदेश भेजने के मामले में सर्वे किया गया। अधिकारियों का यह भी कहना था कि यह छापेमारी या तलाशी नहीं है। आयकर नियमों के तहत इस तरह के सर्वे नियमित रूप से किए जाते हैं।

इन नियमों की अनदेखी के कारण आयकर विभाग ने बीबीसी को कई नोटिस भेजे थे, लेकिन बीबीसी ने जानबूझकर उनका जवाब नहीं दिया। बीबीसी कार्यालय में सर्वे का मुख्य कारण सूत्रों टैक्स का फायदा सहित अनधिकृत लाभों में हेरफेर है।

आयकर विभाग ने मंगलवार (14 फरवरी 2023) को बीबीसी के दफ्तर पर छापेमारी की थी। कहा जाता है कि उस दौरान अधिकारियों ने कर्मचारियों के मोबाइल और लैपटॉप रखवा लिया था। इसके साथ ही वहाँ के कर्मचारियों को सहयोग करने के लिए कहा था।

बीबीसी ने मंगलवार की शाम को कहा था, “आयकर अधिकारी नई दिल्ली और मुंबई में बीबीसी कार्यालयों में हैं। कई कर्मचारियों ने अब इमारत छोड़ दी है, लेकिन कुछ को वहाँ मौजूद रहने के लिए कहा गया है। वे पूछताछ में सहयोग कर रहे हैं।”

इस सर्वे को लेकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। सरकार और भारत विरोधी तत्वों ने कहा था कि बीबीसी ने हाल में एक ही डॉक्यूमेंट्री रिलीज की थी, जिसमें गुजरात दंगों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर सवाल उठाया गया था। हालाँकि, जो लोग इस बात को समझ रहे थे, वे इससे सहमत नहीं थे।

बता दें कि बीबीसी के कंटेंट को लेकर उस पर दुनिया भर में पक्षपात के आरोप लगते रहते हैं। ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने बीबीसी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। दरअसल, सोशल मीडिया कंपनी ने बीबीसी को ‘सरकार द्वारा वित्तपोषित मीडिया’ संगठन के रूप में गोल्ड टिक दिया गया है। उसके ब्लू टिक को हटा दिया गया था। इतना ही एक इंटरव्यू में उन्होंने बीबीसी पर झूठ बोलने का भी आरोप लगाया।

पाकिस्तान के न्यूज चैनल में काम करने वाले हिंदू को घर के बाहर से किया किडनैप, गार्ड और 2 नौकर को भी साथ ले गए: पीड़ित माँ ने पूछा- इस मुल्क में ऐसा क्यों होता है?

पाकिस्तान में ‘बोल न्यूज’ चैनल के लिए काम करने वाले हिंदू युवक आकाश राम को अगवा कर लिया गया है। आकाश बोल न्यूज में मार्केटिंग हेड के तौर पर काम करते हैं। आकाश की माँ ने वीडियो जारी कर पाकिस्तान के हुक्मरानों और किडनैपर्स से उनके बेटे को छोड़ने की अपील की है। आकाश का अपहरण मंगलवार (12 अप्रैल 2023) की सुबह किया गया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आकाश को कराची स्थित उनके घर के बाहर से ही अगवा कर लिया गया। बोल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक मार्केटिंग हेड आकाश को उनके सुरक्षा गार्ड और दो अन्य नौकरों के साथ सुबह 6 बजे अगवा किया गया। दावा है कि उन्हें सिल्वर कलर की कार से अगवा किया गया। इस कार को पहले ‘बोल न्यूज’ के दफ्तर के चक्कर लगाते देखा गया था। दावा है कि इलाके के सीसीटीवी कैमरों को भी नष्ट कर दिया गया है।

आकाश के अपहरण के बाद से ही उनकी माँ का रो-रोकर बुरा हाल है। बोल न्यूज के पत्रकार गुलाम अब्बास शाह ने ट्विटर पर आकाश की माँ का वीडियो शेयर किया है। आकाश की माँ इस वीडियो में रोते हुए बेटे को वापस करने की माँग कर रही हैं। आकाश की माँ ने पूछा, “इस मुल्क में ऐसा क्यों होता है? मेरे बेटे ने इस मुल्क (पाकिस्तान) के लिए क्या कुछ नहीं किया? उसने हमेशा गरीबों की मदद की। उसका कसूर क्या है?”

आकाश की माँ ने बताया कि उनके छोटे बेटे ने आकाश के अपहरण की जानकारी दी। उसके बाद से वह कहाँ है इसकी कोई खबर नहीं है। उन्होंने कहा,”मुझे इसका अंदाजा नहीं है कि मेरे बेटे को क्यों अगवा किया गया है। मुझे बस मेरा बेटा चाहिए।”

बता दें कि पाकिस्तान में लगातार हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। मार्च 2023 में ही तीन अल्पसंख्यकों की टारगेट किलिंग की गई थी। 31 मार्च को पेशावर में दयाल सिंह नाम के शख्स को तब गोली मारी गई जब वे अपनी दुकान में बैठे थे। 20 मार्च को कराची में एक हिंदू डॉक्टर बिरबल जेनानी को गोली मार दी गई थी। पाकिस्तान के हैदराबाद में 7 मार्च को एक अन्य डॉक्टर धरम देव राठी की उनके ही ड्राइवर ने हत्या कर दी थी। बताया गया कि डॉ. राठी के ड्राइवर ने धारदार हथियार से उनका गला काट दिया था।

‘पहले गढ़े ई-मेल, फिर जाकिर खान को कहकर आगे भिजवाया’: शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया का ‘ई-मेल वाला फ्रॉड’ ED ने कोर्ट को बताया

शराब घोटाले को लेकर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को राहत मिलती नहीं दिख रही है। मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (12 अप्रैल) को अपनी दलील पूरी की। इस दौरान एजेंसी ने कहा कि मनीष सिसोदिया ही पूरे मामले के अहम साजिशकर्ता बताया हैं। उन्होंने आबकारी नीति से संबंधित फर्जी ईमेल कराए।

प्रवर्तन निदेशालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष जज एमके नागपाल की अदालत को बताया कि आबकारी नीति लागू कराने में पूर्व उपमुख्यमंत्री की मुख्य भूमिका रही है। उन्होंने आबकारी नीति पर जनता की सहमति दिखाने के लिए फर्जी ईमेल कराए। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 18 अप्रैल 2023 को होगी।

आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ED ने कहा, “मनीष सिसोदिया ने ईमेल प्लांट किए थे। ये ईमेल न सिर्फ आबकारी विभाग के आधिकारिक ईमेल पर आए, बल्कि मनीष सिसोदिया के व्यक्तिगत ईमेल में भी भेजे गए। इसकी सामग्री मनीष सिसोदिया ने दी थी, जो उनके एजेंडे के अनुकूल थी।”

ED ने आगे कहा कि इन प्री-ड्राफ्ट ईमेल को भेजने के निर्देश दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जाकिर खान को दिए गए थे। ED के वकील जोहेब हुसैन ने अदालत को बताया, “ज़ाकिर खान ने तब अपने इंटर्न से ये ईमेल भेजने के लिए कहा था। एक नीति के लिए सार्वजनिक स्वीकृति दिखाने के लिए यह मनगढ़ंत ईमेल था।”

ED ने अदालत को बताया कि उत्पाद शुल्क नीति बिना किसी चर्चा के बनाई गई थी और किसी भी ज्ञात विवेक के विपरीत थी। हुसैन ने अदालत को बताया कि विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाया गया मॉडल यह था कि व्यक्ति आवेदन करेंगे और दो खुदरा वेंडर प्राप्त करेंगे।

वकील हुसैन ने कहा, “यह कार्टेलाइज़ेशन से बचने के लिए था। यह लॉटरी सिस्टम के जरिए होना था। हालाँकि, मनीष सिसोदिया ने सीमित इकाई मॉडल को प्राथमिकता दी।” हुसैन ने कहा कि नीति का निर्माण गोपनीयता से नहीं की जाती। गोपनीय तरीके से साजिश रची जाती है।

हुसैन ने अदालत से कहा कि मनीष सिसोदिया का यह तर्क कि ‘ये नीतिगत विचार है और अदालत को दूसरा अनुमान नहीं लगाना चाहिए’ पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण टेलीपैथिक रूप से नहीं होता है। एक नीति पारदर्शी और निष्पक्ष होती और उसे विचार-विमर्श के साथ पेश किया जाता है।

जमानत का विरोध करते हुए ED ने कहा कि मामले की जाँच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनकी जाँच हो रही है। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा, “ऐसा गोपनीय ढंग से नहीं किया जाना चाहिए। सीलबंद लिफाफे का धंधा रोका जाए। अगर मेरे खिलाफ किसी चीज का इस्तेमाल मुझे मेरी आजादी से वंचित करने के लिए किया जाता है तो उसे मेरे सामने भी रखा जाना चाहिए।”

इस पर प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि आरोपित की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ जाँच पूरी करने के लिए एजेंसी को 60 दिन दिए गए थे। यह अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। ED ने कहा कि वह इसे 60 दिनों के बाद अदालत के सामने रखेगी। मनीष सिसोदिया के वकील ने अपना पक्ष रखने के लिए समय माँगा। इसके बाद सुनवाई 18 अप्रैल तय कर दी गई।

AAP सांसद संजय सिंह का ED पर आरोप

उधर, AAP सांसद संजय सिंह ने बुधवार (12 अप्रैल 2023) को ED पर जबरन अपने अनुसार बयान देने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आबकारी नीति मामले में छह गवाहों ने हाईकोर्ट जाकर ईडी की साजिश का पर्दाफाश किया।

सांसद ने कहा कि चंदन रेड्डी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि ED ने उन्हें इतना मारा-पीटा कि उनके दोनों कान के पर्दे फट गए। परिवार की धमकी देकर कहा गया कि जैसा वे कहते है, वैसा लिखो वरना तुम्हारे परिवार का वो हाल किया जाएगा कि तुम कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहोगे। उन्होंने कहा कि चंदन को थर्ड डिग्री देकर हस्ताक्षर कराया गया।

सांसद संजय सिंह ने आगे कहा कि अरुण पिल्लई की पत्नी, बेटी और परिवार के लोगों को धमकाया गया। इसके बाद उनका बयान लिया। संजय सिंह ने दावा किया कि अरुण पिल्लई ने न्यायालय के सामने कहा कि उनसे ED ने जबरन झूठा बयान लिया है। समीर महेंद्रू को धमकाने के लिए उनकी पत्नी को बुलाकर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उनसे झूठा बयान लिया गया। 

संजय सिंह ने यह भी कहा कि भूषण बेलगावी को भी प्रताड़ित किया गया और जबरन झूठा बयान लिया। सांसद ने कहा कि बेलगावी ने भी कोर्ट के सामने कहा कि ED ने जबरदस्ती बयान लिया है। इसी तरह मनस्विनी प्रभुणे को भी धमकाकर झूठा बयान लिया गया।

तेलंगाना के ऐतिहासिक मंदिर में ‘क्रिश्चियन प्रेयर’, माँसाहारी खाना भी परोसाः हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पादरी और उसके साथियों पर FIR

पिछले दिनों तेलंगाना के वारंगल स्थित एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें कुछ लोग मंदिर में ईसाई प्रार्थना (Christian prayer) करते दिखे थे। अब इस मामले में पादरी गंधम अरुण कुमार और उसके साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मंदिर परिसर में माँसाहारी खाना परोसने का भी आरोप है। वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने इसे देवी-देवताओं का अपमान बताते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

एक नॉन प्रॉफिट एक्टिविस्ट ग्रुप ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ की तरफ से ट्विटर पर इस घटना को लेकर जानकारी साझा की गई है। बताया गया है कि मंदिर में क्रिश्चियन प्रेयर का वीडियो वायरल होने के बाद सब इंस्पेक्टर डी.सांबैया की शिकायत पर पादरी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। घटना में शामिल पादरी अरुण कुमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295-A, 153A, 153B, 504, 505 r/w 34 के तहत केस दर्ज हुआ है।

जिस मंदिर का वीडियो वायरल हुआ था, वह वारंगल किले में है। काकतीय राजवंश ने इसका निर्माण करवाया था। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। तेलंगाना बंदोबस्ती विभाग (Telangana Endowments Department) इसकी देखरेख करता है। वीडियो वायरल होने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने पादरी और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए प्रदर्शन किया था। इसे हिंदू देवी-देवताओं का अपमान बताया था।

हिंदू संगठन के लोगों ने डीसीपी श्रीकांत राव और एसीबी रामाला सुनीता से मामले की शिकायत की थी। मीडिया से बात करते हुए संगठन के लोगों ने पूछा कि आखिर दूसरे पंथ के लोगों ने ऐतिहासिक मंदिर परिसर में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कैसे किया? संगठन के नेताओं ने जानकारी दी कि मंदिर में भगवान राम के पद चिन्ह (पाद मुद्रा) और शंकु चक्र देखे जा सकते हैं। यहाँ धूम-धाम से शिवरात्रि मनाया जाता है। ऐसे में ईसाई सभा, प्रार्थना और माँसाहारी खाना परोसा जाना धार्मिक अशांति फैलाने वाला कदम है। हिंदू संगठनों की तरफ से चेतावनी दी गई थी कि यदि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

सफेद कुर्ता-पायजामा, चेहरे पर नकाब, गोलियाँ बरसाई-कुल्हाड़ी से भी किए वार: बठिंडा आर्मी कैंप में फायरिंग करने वाले नकाबपोश कौन, कहाँ गायब हो गए

पंजाब के बठिंडा छावनी में बुधवार (12 अप्रैल 2023) को तड़के हुई गोलीबारी में चार जवानों की मौत हो गई। एशिया की सबसे बड़ी सैन्य छावनी में हमल को लेकर पुलिस ने FIR दर्ज की है। एफआईआर (FIR) में कहा गया है कि चार जवान ड्यूटी के बाद अपने कमरे में सो रहे थे। उसी दौरान सफेद कुर्ता-पजामा पहने दो नकाबपोश आए और उन पर गोलियाँ बरसा दीं।

बठिंडा छावनी में जवानों की हत्या करने वाले एक शख्स को आर्मी ने हिरासत में ले लिया है। सेना उससे पूछताछ कर रही है। वहीं, सेना की टुकड़ी फरार दूसरे शख्स की तलाश कर रही है। अधिकारियों की तरफ से अभी हमलावरों की पहचान जाहिर नहीं की गई है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दो लोगों को हिरासत में लेने की बात कही जा रही है।

मिलिट्री स्टेशन की मेस में बुधवार तड़के 4.35 बजे आए एक हमलावर के दाहिने हाथ में INSAS रायफल थी और दूसरे हमलावर के हाथ में कुल्हाड़ी होने की बात कही जा रही है। फायरिंग के बाद दोनों हमलावरों को मेस के पीछे से जंगल में जाते हुए देखा गया था। कहा जा रहा है कि अंधेरे का लाभ उठाकर हमलावर भागने में सफल रहे थे।

पकड़े गए जवान ने बताया है कि वे दो लोग सादे कपड़ों में थे। उन्होंने इंसास राइफल से सोए हुए 4 जवानों पर 19 गोलियाँ बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी। सेना ने मौके से इंसास (INSAS) रायफल के अलावा गोलियों के 19 खोखे भी बरामद किए हैं।

इस हमले में जिन लोगों की जान गई है, वे हैं- गनर सागर, गनर कमलेश, गनर योगेश कुमार और गनर संतोष। इन सबकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और ये सभी 80 मीडियम रेजिमेंट से ताल्लुक रखते थे। ड्यूटी खत्म होने के बाद ये जवान मेस के पास स्टाफ के रुकने के लिए बनी बैरक में सो रहे थे। इसी दौरान इन्हें गोलियाँ मार दी गईं।

इस इंसास रायफल से इन जवानों को गोली मारी गई है, वह 9 अप्रैल 2023 को गुम हुई थी। इसके साथ ही 28 गोलियाँ भी चोरी कर ली गई थीं। यह रायफल लान्स नायक मूपदी हरीश के नाम पर 31 मार्च 2023 को अलॉट की थी। पंजाब पुलिस ने मेजर आशुतोष के बयान पर हत्या और आर्म्स एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है।

सेना ने कहा कि बठिंडा कैंप में सर्च टीम ने मैगजीन के साथ INSAS रायफल बरामद की है। सेना को मौके से गोलियों के 19 खोखे भी बरामद हुए हैं। सेना और पुलिस की संयुक्त टीमें और अधिक जानकारी दिलाने के लिए हथियार को फोरेंसिक जाँच के लिए भेजेगी। इस मामले में पंजाब पुलिस के साथ मिलकर सेना जाँच कर रही है।

इसका मतलब कि चार जवानों को हमलावरों ने 19 गोलियाँ मारी हैं। इस घटना पर थलसेना अध्यक्ष मनोज पांडे खुद निगाह रखे हुए हैं। उन्होंने हर छोटी से छोटी जानकारी ली और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष उसकी ब्रीफिंग की। उन्होंने हर एक घटना की जानकारी दी।

बता दें कि बठिंडा छावनी एशिया की सबसे बड़ी सैन्य छावनी है। इसकी बाउंड्री करीब 45 किलोमीटर की है। बठिंडा का एम्युनिशन डिपो देश के सबसे बड़े डिपो में से एक है। यह शहर से भी लगी हुई है। पहले यह छावनी शहर से कुछ दूर थी, लेकिन शहर फैलने के साथ ही यह रिहायशी इलाके से सट गई है।

बठिंडा के एसएसपी गुलनीत खुराना ने कहा है कि रक्षा प्रतिष्ठान द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस समय किसी आतंकी खतरे का संदेह नहीं है। SSP खुराना ने कहा, “प्रारंभिक जानकारी में कहा गया है कि सेना के कुछ लोगों ने एक-दूसरे पर अंधाधुन गोलियाँ चलाई है।”

3 चौराहे, 3 मूर्ति… राजस्थान के भरतपुर में बवाल, पत्थरबाजी और आगजनी

राजस्थान के भरतपुर में महाराजा सूरजमल और डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर बवाल मच गया है। बुधवार (12 अप्रैल 2023) की देर रात तक पथराव और आगजनी होती रही। मौके पर पहुँची पुलिस की टीम पर भी पथराव किया गया। प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले दागे। देर रात तक उपद्रव जारी रहा।

दरअसल, भरतपुर के नदबई में नगरपालिका द्वारा तीन स्थानों पर मूर्तियाँ लगवाई जा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, तय किया गया कि कुम्हेर चौराहे पर महाराजा सूरजमल, बैलारा चौराहे पर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और नगर चौराहे पर भगवान परशुराम की मूर्ति लगाई जाएगी।

स्थानीय जाट समुदाय के लोग नगरपालिका के फैसले से खुश नहीं हैं। वे बैलारा चौराहे पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के स्थान पर महाराजा सूरजमल की प्रतिमा लगाने की माँग कर रहे हैं। इसको लेकर वे हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, बैलारा चौराहे पर महाराजा सूरजमल की प्रतिमा लगाने की माँग को लेकर जाट समुदाय के लोगों ने स्थानीय विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना के खिलाफ धरना भी दिया। विधायक जोगेंद्र सिंह अवाना ने ही नदबई में मूर्तियाँ लगाने का ऐलान किया था। दरअसल, नदबई का मुख्य चौराहा बैलारा है, ऐसे में यहाँ महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगाने की माँग जाट समाज कर रहा है।

धरना देने वालों को राजस्थान के पर्यटन मंत्री और महाराजा सूरजमल के भरतपुर राजपरिवार से जुड़े विश्वेंद्र सिंह ने समझा-बुझा कर धरना खत्म करने के लिए मना लिया। खबर है कि मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने बैलारा चौराहे पर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और डेहरा मोड़ चौराहे पर महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगाने का ऐलान किया। इसे लेकर मंत्री की तरफ से एक लेटर भी जारी किया गया।

जाट समुदाय के लोग बैलारा चौक पर ही महाराजा सूरजमल की मूर्ति लगवाना चाहते थे। शाम होते-होते आसपास के जाट समुदाय के लोग बैलारा चौराहे की तरफ बढ़ने लगे। भीड़ को जमा होता देख बैलारा चौराहे पर पुलिस बलों की भी तैनाती कर दी गई।

प्रदर्शनकारियों ने पहले तो सड़कों को जाम कर दिया, उसके बाद सड़कों पर आगजनी शुरू कर दी। पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया गया। हंगामा रात 2.00 बजे तक जारी रहा। पुलिस बल ने आँसू गैस के गोले छोड़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को खदेड़ा। गुरुवार (13 अप्रैल) सुबह तक इलाके में तनाव था।

‘और कितने आयोग…’: ईसाई-मुस्लिम बने दलितों को भी SC दर्जा पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल, रंगनाथ मिश्रा कमिटी की रिपोर्ट केंद्र ने खारिज की

ईसाई और मुस्लिम दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई की रूपरेखा जुलाई 2023 में तय होगी। लगभग 20 सालों से लंबित इस मामले पर निर्णय लेेने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है। वहीं, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन के नेतृत्व में बनी कमेटी की रिपोर्ट का वह इंतजार कर रही है।

दरअसल, केंद्र सरकार ने पूर्व CJI रंगनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में बनाई गई कमिटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट में ईसाई और मुस्लिम दलितों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की सिफारिश की गई थी, ताकि उन्हें शिक्षा एवं नौकरी में दलितों की भाँति आरक्षण का लाभ मिल सके।

साल 2007 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की गठबंधन में मनमोहन सिंह सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था। जस्टिस रंगनाथ मिश्रा ने साल 2009 में अपनी रिपोर्ट दी थी। 

मिश्रा कमिटी की रिपोर्ट को खारिज करते हुए केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि यह रिपोर्ट बिना फील्ड स्टडी और किसी से सलाह के बिना तैयार की गई थी। इसके बाद 7 अक्टूबर 2022 को केंद्र की मोदी सरकार ने बालाकृष्णन के नेतृत्व में 3 सदस्यीय आयोग गठित किया। इस आयोग को कहा गया कि वे पता लगाएँ कि धर्मांतरित ईसाई और मुस्लिमों दलित को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की जरूरत है या नहीं। इसके लिए 2 साल का समय दिया गया है।

इस मामले की इसकी अगली सुनवाई 11 जुलाई 2023 को की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई में विचार करेगा कि सरकार द्वारा स्वीकार ना की जाने वाली कमीशन की रिपोर्ट पर भरोसा किया जाना चाहिए या नहीं। अगर विश्वास किया जा सकता है तो किस हद तक।

केंद्र द्वारा केजी बालाकृष्णन की रिपोर्ट का इंतजार करने के आग्रह पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर और कितने कमीशन बनेंगे?  इनका क्या औचित्य है? ये भी नहीं पता कि वर्तमान कमीशन की रिपोर्ट भी पहले जैसी नहीं होगी? अदालत ने कहा कि पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा कमिटी की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया गया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह एक संवैधानिक सवाल है कि क्या राज्य धर्म के आधार पर भेदभाव कर सकता है?  सरकार अब कह रही हैं कि उसने दो साल के कार्यकाल वाले एक नया आयोग को नियुक्त किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अदालत को सरकार के इस बयान पर फिर इंतजार करना चाहिए?

प्रशांत भूषण ने तर्क दिया, “हम शामिल करने के लिए नहीं, बल्कि दलित ईसाइयों और दलित मुस्लिमों के बहिष्कार को असंवैधानिक, अवैध और मनमाना कह रहे है। दरअसल, केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के लोगों को अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी गई है और उन्हें नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिया गया है।

बता दें कि इससे पहले केंद्र ने कहा था कि जिन लोगों ने ईसाई एवं इस्लाम में धर्मांतरण कर लिया है, उन्हें एससी का दर्ज नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे केंद्र ने तर्क दिया था कि इस्लाम और ईसाइयत में भेदभाव नहीं होता और ना ही पिछड़ापन है।

दरअसल, 1936 में ब्रिटिश शासन ने भी अपने आदेश में कहा था कि धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने दलितों को शोषित नहीं माना जाएगा। 1950 में राष्ट्रपति की तरफ से जारी ‘दि कॉन्स्टिट्यूशन (शेड्यूल्ड कास्ट्स) ऑर्डर’ में इस बात का प्रावधान किया गया है कि सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध समुदाय से जुड़े दलितों को ही अनुसूचित जाति का दर्जा मिलेगा।

इसके पीछे कारण दिया कि ईसाई और मुस्लिम समाज में जाति व्यवस्था नहीं होती है। इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद हिंदू से ईसाई या मुस्लिम बने दलित लोगों को सामाजिक भेदभाव नहीं होता है और वे इस आधार पर खुद को अलग दर्जा देने की माँग नहीं कर सकते। 

साल 1980 के दशक में 1950 में दिए गए राष्ट्रपति आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। ‘सूसाई बनाम भारत सरकार’ नाम के इस केस का फैसला 1985 में आया था और इसमें सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरित ईसाई और मुस्लिम दलितों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने से मना कर दिया था।

इसके बाद साल 2004 में गाज़ी सादुद्दीन नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मुस्लिम दलितों को भी आरक्षण का लाभ देने की माँग की। इसके बाद ईसाई संगठनों की तरफ से भी ऐसी ही कई याचिकाएँ दाखिल की गईं। तब से यह मामला लंबित है।

दुनिया में बजेगा भारत का झुनझुना… अकेले अमेरिका देगा ₹3280 करोड़ का ऑर्डर, यूरोप से भी बढ़ रही माँग: मोदी सरकार की नई नीतियों का प्रभाव

दुनिया भर के देशों में भारतीय खिलौने अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले हैं। यूरोप और अमेरिका के वैश्विक खिलौना विक्रेताओं ने भारतीय खिलौना निर्माताओं से संपर्क किया है। रिपोर्टों के अनुसार बताया जा रहा है कि विक्रेता कंपनियों ने अनुपालन आवश्यकताओं (Compliance requirements) को पूरा करने के लिए भारतीय खिलौना निर्माताओं की मदद का भी भरोसा दिया है। सरकारी अधिकारी की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार वैश्विक खिलौना मार्केट के दिग्गज विक्रेता भारत से बड़े पैमाने पर खिलौनों की खरीददारी करना चाहते हैं।

‘प्लेग्रो टॉयज इंडिया’ के प्रमोटर और ‘टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के चेयरमैन मनु गुप्ता ने जानकारी दी कि अमेरिका के एक खिलौना रिटेलर ने भारतीय खिलौना उद्योग जगत से संपर्क किया है। अमेरिकी कारोबारी राइड-ऑन, ऑउटडोर, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल खिलौनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यदि यह डील फाइनल होती है तो भारतीय कारोबारियों को 400 मिलियन (3279.31 करोड़ रुपए) अमरीकी डॉलर का ऑर्डर मिल सकता है। वहीं इटली की एक फर्म ने भी भारत से सोर्सिंग के लिए खिलौना निर्माताओं से संपर्क किया है।

बता दें कि भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा भारत में खिलौना निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। DPIIT के अधिकारी भारतीय खिलौना उद्योग जगत को वैश्विक कंपनियों से जुड़ने और ऑर्डर हासिल करने में मदद कर रहे हैं। अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियाँ उन मैन्यूफैक्चरर्स से सामान खरीदती हैं जो उनके उत्पाद और सामाजिक अनुपालन को पूरा करती हैं।

मनु गुप्ता ने के अनुसार भारतीय खिलौने माँग के मुताबिक मानकों को पूरा कर सकें इसके लिए विदेशी फर्म भारतीय खिलौना निर्माताओं के मौजूदा कार्यबल, अपस्किलिंग और रीस्किलिंग करने के लिए तैयार हैं। ताकि हम जल्द से जल्द वैश्विक कंपनियों के मानकों को पूरा कर सकें। दूसरी तरफ भारत अब खिलौनों का आयात कम कर रहा है। 2021-22 में भारत में खिलौनों का कुल आयात 70 प्रतिशत घटकर 870 करोड़ रुपए रह गया था।