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80 जख्म के साथ बाबर से लड़े, घायल अवस्था में भी मुगलों को ललकारने की योजना बना रहे थे: तोपों और विस्फोटक के सामने यूँ चमकी थी मेवाड़ी तलवार

एक ऐसा शख़्स, जिसने इस्लामी आक्रांताओं को भारत की धरती पर प्रवेश करने से रोकने के लिए सारे प्रयास किए, लेकिन तकनीक के सामने असफल रहा। मेवाड़ की जब भी बात आती है तो हमें महाराणा प्रताप याद आते हैं, लेकिन आज हम उस शूरवीर की बात करने जा रहे हैं जो जज़्बा, वीरता, हठधर्मिता और देशभक्ति के मामले में प्रताप से भी दो क़दम आगे था। महाराणा सांगा का जन्म सन् 1482 में 12 अप्रैल के दिन ही हुआ था।

महाराणा सांगा की मृत्यु के साथ ही दिल्ली में मुग़ल सत्ता स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया और देश तब तक इस्लामी आक्रांताओं का ग़ुलाम रहा, जब तक उन्हें 18वीं शताब्दी के बाद सिखों, मराठों और अंग्रेजों के वर्चस्व का सामना न करना पड़ा। लेकिन यह सब कुछ सिर्फ़ एक युद्ध के परिणाम से तय हो गया था। वह था- खानवा का युद्ध।

16वीं शताब्दी की शुरुआत में जब बाबर ने काबुल पर कब्ज़ा किया, तभी से उसके मन में एक ही शब्द घूम रहा था और वह था- हिंदुस्तान। अपने पूर्वज तैमूर की कहानियाँ सुन कर बड़ा हुआ बाबर को ज्ञात था कि कैसे तैमूर ने झटके में शहर के शहर तबाह किए थे और हजारों को मौत के घाट उतारा था। वह तैमूर द्वारा पंजाब में जीते गए कुछ क्षेत्रों को वापस हथियाना चाहता था। जब बाबर ने दिल्ली में लोदी को हरा कर उसके सारे धन-वैभव पर कब्ज़ा जमाया, तब आम धारणा यह थी कि वह भी तैमूर की तरह लूटपाट कर वापस चला जाएगा लेकिन अति-महत्वकांक्षी बाबर के इरादे नेक नहीं थे।

बाबर के दिल्ली में साम्राज्य स्थापित करने की ख़बर सुनते ही राणा सांगा के कान खड़े हो गए। राणा का मानना था कि बाबर का दिल्ली में बैठना लोदी से भी बड़े ख़तरे का संकेत था। बाबर के अनुसार, राणा के पास 2 लाख सैनिकों की एक मज़बूत सेना थी। राणा ने बाबर के ख़िलाफ़ कई राजाओं का गठबंधन बनाने की हरसंभव कोशिश की और उसमें वह बहुत हद तक सफल भी हुए। राजस्थान के राजपूत राज्य, जैसे- हरौती, जालौर, सिरोह, डूंगरपुर, धुंधर और अम्बर। तुर्क़-अफ़ग़ान के अवशेषों पर एक हिन्दू राज्य की स्थापना का स्वप्न लिए राणा ने बाबर के इरादों की भनक लगते ही उसे सबक सिखाने का मन बना लिया था।

दिल्ली में हिन्दू राज्य की स्थापना के लिए महाराणा सांगा ने अफ़ग़ान तक की भी मदद ली। उन्होंने विशाल सेना-सेनापतियों की एक ऐसी फ़ौज खड़ी की, जिसके ‘जय एकलिंग’ का नाद करते ही आसमान भी थर्रा कर काँप उठता था।

बाबर ने इस युद्ध को हिन्दू बनाम मुस्लिम बना दिया। जैसा कि आज के ज़िहादी आतंकी कहते आए हैं, उसने राणा के साथ युद्ध को इस्लाम की रक्षा से जोड़ कर अपनी सेना में जोश भर दिया। बाबर ने अपने सिपहसालारों से क़ुरानशरीफ़ पर हाथ रख कर राणा जैसी ताक़त को ख़त्म करने की शपथ दिलाई। खानवा में हुए युद्ध से एक शाम पहले बाबर ने एक ऐसा उत्तेजित भाषण दिया- जिसने भावी युद्ध को कथित काफ़िर बनाम इस्लाम के रक्षक से जोड़ दिया। बाबर ने इस्लाम की आन, बान और शान की हिफ़ाज़त के लिए अपनी सेना से एक सच्चे मुस्लिम की तरह लड़ने का वादा लिया। सच्चे मुस्लिम की परिभाषा में फ़िट बैठने के लिए उसने शराब के मर्तबान पटक डाले और शराब छोड़ने की क़सम खाई।

खानवा का युद्ध भारतीय इतिहास का एक ऐसा युद्ध है, जिसके दूरगामी परिणाम हुए। सांगा के बलिदान के बाद दिल्ली में मुग़ल सत्ता की स्थापना हुई लेकिन इस युद्ध में देश की माटी की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले राणा सांगा ने जिस वीरता और देशभक्ति का परिचय दिया- उसकी मिसाल इतिहास में शायद ही कहीं और मिले। युद्ध की शुरुआत में ही राणा सांगा ने बाबर की सेना पर ऐसा हमला किया, जिस से पूरी इस्लामिक फ़ौज में हड़कंप मच गया। राणा के ताबरतोड़ आक्रामक से बाबर की सैन्य संरचना बिखर सी गई।

लेकिन, राणा सांगा एक जगह चूक गए थे। बाबर ने जिस तरह पानीपत में इब्राहिम लोदी को हराया था, उस से उन्होंने कोई सीख नहीं ली थी। भारतीय वीरों की उस सूची में राणा का भी नाम है, जिन्होंने अपनी वीरता के बावज़ूद दुश्मन के छल, कपट और पैंतरेबाज़ी का अंदाज़ा लगाना उचित नहीं समझा। युद्ध के पहले बाबर ने युद्धस्थल का पूरी तरह मुआयना किया था। किस तरफ से, कहाँ और किस ओर वार करना है- ये सब उसने पहले ही सुनिश्चित कर लिया था। खानवा और आगरा की दूरी 35 मील के क़रीब है।

राणा सांगा ने इन सब की जरूरत नहीं समझी। अपनी हाथी सेना और तलवारबाज़ों की क्षमता पर भरोसा करने वाले राणा को इस बात का अंदाज़ा न था कि बाबर की तोपों के सामने वीरता का प्रदर्शन कर बलिदान तो दिया जा सकता है, लेकिन तीर और भाले से मशीनों को शायद ही जीता जा सकता है। मालवा और गुजरात की संयुक्त सुल्तानी सेना को धुल चटाने वाले राणा सांगा बाबर की पैंतरेबाज़ी ने वाक़िफ़ न थे। उन्होंने संगठन, सेना और रणनीति- इन सब पर ध्यान दिया था, लेकिन दुश्मन की चाल को समझने की कोशिश न करना उन्हें भारी पड़ा।

बाबर ने खानवा में भी पानीपत वाला तरीका ही आज़माया। उसने ख़ुद को मध्य में रख बाकी दोनों तरफ से सेना का ऐसा चक्रव्यूह बनाया, जिस से एक बार में कई तरफ से आक्रमण किया जा सके। अगर राणा पानीपत के युद्ध से थोड़ी भी सीख ले लेते, तो शायद इस तकनीक की काट की योजना तैयार कर सकते थे। तन-बदन पर लगे अनगिनत घावों से जूझते राणा सांगा ने सीधा बाबर की तरफ प्रस्थान किया और दुश्मन के मुखिया का ही काम तमाम करने के लिए पूरी ताक़त से धावा बोला।

लेकिन बीच में ही राणा की सेना बिखर गई। बाबर द्वारा कई तरफ से हो रहे आक्रमण और तोपों द्वारा काफ़ी कम दूरी से किए जा रहे फायर ने राणा के योद्धाओं को तितर-बितर कर डाला। हालाँकि, राजपूत सेना की हार देख योद्धाओं ने राणा को युद्धस्थल छोड़ने की सलाह दी। हठी राणा ने साफ़ मना कर दिया। हालाँकि, किसी तरह राणा को वहाँ से निकाल लिया गया लेकिन उनके ज़ख्म ऐसे थे, कि वह फिर युद्ध में लौट नहीं सके। राणा के जाते ही उनकी सेना की हार हुई और बाबर ने इस्लामिक साम्राज्य को एक नया विस्तार दिया। साम्राज्यवाद का यह रथ बाद में क़रीब दो दशकों के लिए रुका, जिसका श्रेय शेरशाह सूरी और हेमचन्द्र विक्रमादित्य को जाता है।

लेकिन राणा हार मानने वालों में से नहीं थे। अपनी पराजय उन्हें स्वीकार न थी। इतिहासकार प्रदीप बरुआ लिखते हैं कि अगर बाबर ने तोपों की मदद नहीं ली होती और पानीपत वाली रणनीति न दोहराई होती, तो शायद दिल्ली में मेवाड़ का केसरिया ध्वज फहरा रहा होता। इस युद्ध के बाद राणा का गठबंधन बिखर गया।

लेकिन इस युद्ध में राणा सांगा ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसकी तुलना महाभारत काल के योद्धाओं से की जा सकती है। राणा के शरीर पर 80 ज़ख्म थे। पहले की कई युद्धों में लड़ते-लड़ते उनका एक हाथ जा चुका था। एक ही आँख से देख पाते थे, दूसरी युद्ध की बलि चढ़ गई थी। एक ही पाँव से ठीक से चल पाते थे, दूसरा अपाहिज हो चुका था। फिर भी उन्होंने बाबर से टक्कर लेने का निर्णय लिया और उसे नाकों चने चबाने को मज़बूर किया। यह जज़्बा प्रशंसनीय है।

आज (30 जनवरी) के दिन ही 1528 में उनका स्वर्गवास हो गया। ज़ख्मों से जूझ रहे राणा दिल्ली में बैठे बाबर को फिर से ललकारने की योजना तैयार कर रहे थे। लेकिन, उनके दरबारियों और अन्य राजाओं को ये पसंद नहीं था। उन्हें दिल्ली और आगरा कब्ज़ा कर बैठा बाबर अपराजेय नज़र आ रहा था। उनके निधन के बाद भी बाबर उन्हें अपना सबसे बड़ा ख़तरा मानता रहा, जब तक वह निश्चित नहीं हो गया कि राणा सचमुच नहीं रहे। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि बीमार राणा के दोबारा युद्ध की योजना से तंग आकर उनके ही लोगों ने उन्हें ज़हर दे दिया था।

जो भी ही, अगर हम अहिंसा के पुजारी गाँधीजी को याद करते हैं, तो 30 जनवरी को वीरों के वीर महाराणा सांगा को भी याद करना चाहिए। राणा ने जिस जज़्बे की नींव रखी, उस पर चल कर प्रताप, हेमू और बाजीराव जैसे कितने योद्धा अमर हो गए। राणा का अखंड हिन्दू साम्राज्य का स्वप्न भले ही उनके जीवन रहते सफल न हो पाया हो, लेकिन उनके व्यक्तित्व से पूरा राजस्थान प्रेरणा लेता है, उनकी वीरता भारत के कण-कण में समाहित है।

शराब पीते लोगों से भरे बार में चलने लगी रामायण; राम-रावण युद्ध संवाद की कर दी एडिटिंग… मैनेजर और मालिक सहित 3 पर FIR, 2 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक शॉपिंग मॉल में बने बार के अंदर रामायण के एडिटेड दृश्य चलाने पर विवाद खड़ा हो गया है। ये दृश्य भगवान राम और रावण बने कलाकारों के युद्ध के समय का था। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में कड़ी आपत्ति जताई तो पुलिस ने बार के मालिक और मैनेजर सहित कुल 3 लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। सोमवार (10 अप्रैल 2023) को 2 आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला नोएडा के सेक्टर 39 थाना क्षेत्र का है। यहाँ गार्डन गलेरिया नाम का एक मॉल है, जिसके अंदर बार बना हुआ है। इसका नाम ‘लॉर्डर्स ऑफ़ ड्रिंक्स बार’ है। बताया जा रहा है कि घटना के दिन यहाँ शराब पार्टी हुई थी। नशे में लोग हाथ में शराब का ग्लास लेकर नाच रहे थे।

इस दौरान बार की स्क्रीन पर रामायण सीरियल का दृश्य चलने लगा। उस दृश्य में राम और रावण बने कलाकार एक दूसरे से संवाद करते दिखाई दे रहे हैं। इस संवाद में असली आवाज को काट कर दूसरी आवाज की डबिंग कर दी गई थी। बार में ही मौजूद किसी ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

13-14 सेकेंड के इस वायरल हो रहे वीडियो में सामने कुछ लड़के और लड़कियों को भी हाथ में ग्लास लेकर नाचते देखा जा सकता है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई। उन्होंने बार के मालिक मानक चौधरी और मैनेजर अभिषेक पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की।

आखिरकार पुलिस ने 3 आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 153 A और 295 A के तहत केस दर्ज कर लिया। तीसरे आरोपित के तौर पर DJ पर म्यूजिक बजा रहे व्यक्ति का नाम है। पुलिस की जाँच में बार के मैनेजमेंट ने गलती से रामायण की क्लिप चलने कहकर सफाई दी थी।

नोएडा पुलिस ने इस मामले में 2 आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ जाँच जारी होने की जानकारी दी है। तीसरे आरोपित की भी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

₹122 करोड़ में नीलाम हुई गाड़ी की नंबर प्लेट, खरीदने वाले का नाम रहेगा गुप्त: जानिए क्यों दुनिया में सबसे महँगी बिकी है P7

दुबई में एक खास नंबर प्लेट नीलाम हुई है। इसने दुनिया की सबसे महँगी नंबर प्लेट का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। VIP कार नंबर प्लेट P7 55 मिलियन दिरहम यानी करीब 122 करोड़ रुपए में खरीदी गई है। मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ग्लोबल इनिशिएटिव्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी दी गई है। पोस्ट में बताया गया है, “दुनिया की सबसे महँगी नंबर प्लेट (P7) 55 मिलियन दिरहम में बेची गई।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुमेराह के फोर सीजन्स होटल में नीलामी का कार्यक्रम रखा गया था। नंबर प्लेट के लिए सबसे ऊँची बोली लगाने वाले शख्स ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त रखी है। इस कार्यक्रम में कई अन्य वीआईपी नंबर प्लेट और फोन नंबर की भी नीलामी की गई। नीलामी के दौरान एक शख्स ने बताया कि सोलह साल पहले अबू धाबी में एक नंबर प्लेट 52.5 मिलियन दिरहम में बिकी थी। इस बार उसका रिकॉर्ड टूट गया है।

सोशल मीडिया पर इस नीलामी की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं। नीलामी में जमा रकम को खास मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। बताया जा रहा है कि नीलामी से जमा की हुई इस रकम का इस्तेमाल रमजान के दौरान लोगों को खाना खिलाने के लिए किया जाएगा। इस रकम को 1 बिलियन मील एंडोमेंट अभियान (1 Billion Meals campaign) को सौंप दिया जाएगा। ये संस्था गरीबों और जरुरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध करवाती है। इसकी नींव दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद ने रखी थी।

बता दें कि इस नीलामी से 100 मिलियन दिरहम (27 मिलियन डॉलर) यानी 2 अरब से ज्यादा रुपए आए हैं। कार लाइसेंस प्लेट और प्रीमियम सेलफोन नंबर कुल 9.792 करोड़ दिरहम में नीलाम किए गए हैं।

‘केजरीवाल ने कहा, सुकेश चंद्रशेखर ने ₹15 करोड़ BRS ऑफिस पहुँचाए’: तेलंगाना CM की बेटी कविता के साथ कथित चैट का स्क्रीनशॉट वायरल

दिल्ली के मंडोली जेल में बंद 200 करोड़ रुपए की ठगी के आरोपित सुकेश चंद्रशेखर ने विधान पार्षद कविता के साथ ह्वाट्सएप पर बातचीत के कई स्क्रीनशॉट जारी किए हैं। हालाँकि, चैट की प्रामाणिकता को लेकर संदेह जारी किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कविता के साथ बातचीत में तेलुगु के शब्द भी इस्तेमाल किए गए हैं, जबकि सुकेश तेलुगु नहीं जानता है।

सुकेश द्वारा MLC कविता के साथ बातचीत के कथित ह्वाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट में अकका शब्द भी दिखाई दे रहा है। अक्का शब्द तेलुगु का है और इसका अर्थ बड़ी बहन होता है। चैट में सुकेश ने कविता को कई बार ‘अक्का’ कहा है। बता दें कि कविता तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी और भारत राष्ट्र समिति (BRS) से MLC हैं।

एबीपी के पत्रकार आशीष ने चैट के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा है, “सुकेश चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उन्हें हैदराबाद स्थित कार्यालय में 15 करोड़ रुपए देने का निर्देश दिया था।” हालाँकि, इसको लेकर अभी किसी पक्ष का बयान नहीं आया है।

इसके पहले 6 अप्रैल 2023 को सुकेश चंद्रशेखर ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल के कहने पर ही BRS दफ्तर में 15 करोड़ रुपए पहुँचाए गए थे। महाठग ने दावा किया था कि उसके पास वह चैट मौजूद है, जिसमें केजरीवाल द्वारा रुपए पहुँचाने और BRS नेता द्वारा उसे स्वीकारे जाने की बात कही जा रही है। सुकेश के अनुसार उसके पास मौजूद चैट के स्क्रीनशॉट से साफ है कि बीआरएस नेता ने अरुण पिल्लई (शराब कारोबारी) को 15 करोड़ रुपए देने को कहा और उसने वह बॉक्स काले रंग की रेंज रोवर गाड़ी में रखी जिसपर MLC का स्टिकर लगा हुआ था।

इस चैट से केजरीवाल और दक्षिण भारतीय ग्रुप के बीच के संबंधों पर मुहर लगती है। खत में सुकेश का दावा है कि चैट में 15 करोड़ रुपए को कोड वर्ड में 15 किलो घी कहा गया है। उसका दावा है कि केजरीवाल और बीआरएस के नेता लंबे समय से एक दूसरे के संपर्क में हैं। केजरीवाल और बीआरएस नेताओं के बीच कई बार पैसों का लेनदेन हो चुका है।

इतना ही नहीं सुकेश ने कहा है कि यदि उसकी बातों पर किसी को भरोसा नहीं है तो वो नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट या किसी भी तरह का परीक्षण कराने को तैयार है। उसने कहा, “मैं सिर्फ बातें ही नहीं कर रहा बल्कि हर बात के सबूत पेश करने वाला हूँ। सुकेश का दावा है कि उसके पास अरविंद केजरीवाल के साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट के कुल 700 पेज सुरक्षित हैं। उसने कथित तौर पर साल 2020 में बीआरएस कार्यालय को 75 करोड़ रुपए देने की भी बात कही है।

हिंदू दोस्त की नाबालिग बेटी को घर बुलाया, पैर बाँधकर किया रेपः गुजरात पुलिस ने रफीक को किया गिरफ्तार, 9वीं की छात्रा है पीड़िता

गुजरात के राजकोट में एक नाबालिग हिंदू लड़की से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित रफीक आरब पीड़िता के पिता का दोस्त है। उसने चाबी देने के बहाने हिंदू दोस्त की बेटी को घर बुलाया और फिर उसके साथ दरिंदगी की। राजकोट महिला थाना पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर रफीक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता 9वीं कक्षा में पढ़ाई करती है।

पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक रफीक पीड़िता के पिता का दोस्त है। रफीक पीड़िता के घर से कुछ ही दूरी पर रहता है। उनका एक-दूसरे के घर आना-जाना लगा रहता है। रफीक ने अपने हिंदू दोस्त के घर फोन किया जिसे पीड़िता ने उठाया। रफीक ने किशोरी से कहा कि वह अपनी एक्टिवा की चाबी भूल आया है, वह उसके घर पहुँचा जाए। 16 साल की किशोरी जब चाबी लेकर रफीक के घर पहुँची उस वक्त वह अकेला था। इसका फायदा उठाकर उसने पीड़िता को कैद कर लिया।

जानकारी के मुताबिक उसने पीड़िता के पैर बाँध दिए और दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने पीड़िता को धमकी दी कि यदि इसके बारे में किसी को बताया तो वह प्रचारित कर देगा कि उसका कोई बॉयफ्रेंड है। घर आने के बाद किशोरी के पेट में दर्द होने लगा। परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहाँ पीड़िता ने परिजनों से सारी बात बता दी।

किशोरी के माता-पिता ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने रफीक को उसके कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। शुरुआत में रफीक ने आरोपों से साफ इनकार कर दिया। लेकिन पुलिस द्वारा सख्ती से पूछताछ करने के बाद उसने अपना जुर्म कबूल लिया। आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मीका सिंह ने क़तर में भारतीय करेंसी से की खरीददारी, वीडियो बना कर PM मोदी को कहा थैंक्यू: ऐसे डॉलर को टक्कर दे रहा भारतीय रुपया

बॉलीवुड के मशहूर सिंगर मीका सिंह (Mika Singh) ने अपने ट्विटर हैंडल पर बुधवार (12 अप्रैल, 2023) सुबह एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में वह कहते हैं, “गुड मॉर्निंग। मैं कतर की राजधानी दोहा में हूँ। मुझे दोहा एयरपोर्ट पर लुइसविटन स्टोर में खरीदारी करते समय भारतीय रुपए का इस्तेमाल करने पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है। आपको यहाँ जो भी शॉपिंग करनी हैं आप इंडियन करेंसी दे सकते हैं। आप किसी भी रेस्टॉरेंट में रुपए का इस्तेमाल कर सकते हैं.. है न कमाल की बात? नरेंद्र मोदी जी इसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। अब हिंदुस्तानी पैसा भी डॉलर की तरह पूरे वर्ल्ड में चलेगा। कतर में तो चल रहा है।”

सोशल मीडिया पर मीका सिंह का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसको लेकर एक यूजर ने लिखा, “मीका सिंह दोहा हवाई अड्डे पर लुइसविटन स्टोर में भारतीय रुपए में खरीदारी करते हुए। जल्द ही, उदारवादी उन पर हमला करेंगे, क्योंकि वह इसके लिए भारत की सराहना कर रहे हैं।”

आंध्र प्रदेश में बीजेपी के महासचिव विष्णु वर्धन रेड्डी ने भी मीका सिंह का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “मशहूर सिंगर मीका सिंह बता रहे हैं कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश बदल रहा है। केंद्र सरकार के प्रयासों से भारतीय करेंसी वैश्विक हो रही है और कई देशों में इसे स्वीकार किया जा रहा है।”

भारतीय रुपए को इंटरनेशल करेंसी बनाने पर ज़ोर

जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते संकट में फँसी हुई थी, उस वक्त पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने रुपए (Indian Rupee) को डॉलर के बाद दूसरी बड़ी इंटरनेशनल करेंसी (International Currency) बनाने की पहल शुरू की। भारत सरकार ने जुलाई 2022 में यह महत्वाकांक्षी पहल शुरू की। इसका मकसद उन देशों को वैकल्पिक ट्रांजेक्शन सिस्टम उपलब्ध करवाना है, जो अमेरिकी डॉलर की कमी का सामना कर रहे हैं। RBI अब तक 18 वोस्ट्रो अकाउंट (Vostro Accounts) खोल चुका है।

इनमें से रूस के लिए 12 अकाउंट्स, श्रीलंका के लिए 5 अकाउंट्स और मॉरीशस के लिए 1 अकाउंट शामिल हैं। यानी इन तीनों देशों में अब भारतीय रुपए (Indian Rupee) को एक इंटरनेशल करेंसी के रूप में पूरी तरह मान्यता प्राप्त है। भारतीय वहाँ जाकर रुपए से कोई भी चीज खरीद सकते हैं। अमेरिकी डॉलर (US Dollars) की कमी का सामना कर रहे ताजिकिस्तान, क्यूबा, लक्जेमबर्ग और सूडान के अलावा जर्मनी, इजरायल जैसे विकसित देशों समेत 64 देशों ने भारतीय रुपए के जरिए कारोबार करने में दिलचस्पी दिखाई है।

अगर 30 देशों के साथ भारत का रुपए में कारोबार शुरू हो गया तो इंडियन करेंसी अंतरराष्ट्रीय करेंसी बन जाएगा।

‘मेक इन इंडिया’ और इसका इम्पैक्ट

भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को ‘मेक इन इंडिया‘ कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलना है। ‘मेक इन इंडिया’ योजना में घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाना, आधुनिक और कुशल बुनियादी संरचना, विदेशी निवेश के लिए नए क्षेत्रों को खोलना और सरकार एवं उद्योग के बीच एक बेहतर साझेदारी का निर्माण करना है।

हर साल भारत का निर्यात उसके आयात से कम होता था, इसी ट्रेंड को बदलने के लिए सरकार ने वस्तुओं और सेवाओं को देश में ही बनाने की मुहिम को ‘मेक इन इंडिया’ के रूप में शुरू की थी।

‘लाल किला इफ्तार’ के बाद 2024 की ठेकेदारी लेने राहुल गाँधी से मिले नीतीश कुमार, कहा- विपक्षी दलों को जोड़ेंगे, पर चेहरे पर साध ली चुप्पी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को बिहार की सत्ताधारी जदयू के नीतीश कुमार और राजद के तेजस्वी यादव का साथ मिला है। बुधवार (12 अप्रैल 2023) को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दिल्ली में राहुल गाँधी से मुलाकात की और गठबंधन पर चर्चा की। हालाँकि, अभी भी पीएम पद को लेकर असमंजस की स्थिति है।

बैठक के बाद राहुल गाँधी ने कहा कि विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टियों को साथ लाएँगे। जितनी भी पार्टियाँ साथ चलेंगी, सबको साथ लाएँगे। जोड़ना एक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि देश के लिए विपक्ष की दृष्टि विकसित करेगा।

राहुल गाँधी ने आगे कहा, “देश में वैचारिक लड़ाई चल रही है। जो संविधान पर आक्रमण हो रहा है, जो देश पर आक्रमण हो रहा है, उसके खिलाफ हम सब एक साथ मिलकर खड़े होंगे। एकजुट होकर संस्थानों पर हमले से लड़ेंगे।”

बैठक के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि देश की अधिक से अधिक विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन दलों के नेता एक साथ बैठ कर चर्चा करेंगे और जिस पर सहमति बनेगी, उसको लेकर आगे की रूपरेखा बनाई जाएगी। इस बात पर इस बैठक में सहमति बन गई है।

अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। यह बैठक कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित की गई थी। नीतीश कुमार मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को दिल्ली पहुँचे थे। नीतीश के और भी कई नेताओं से मिलने की उम्मीद है।

वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी दिल्ली में हैं। वे मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए थे। जमीन के नौकरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए ED ने उन्हें बुलाया था।

‘मिट्टी में मिल गया हूँ, अब सरकार छोड़ दे’: गुजरात से UP के सफर में गिड़गिड़ाता दिखा अतीक अहमद, बोला- मीडिया की वजह से एनकाउंटर का डर नहीं लग रहा

उमेश पाल हत्याकांड (Umesh Pal Murder Case) में गुजरात के साबरमती जेल से प्रयागराज लाए जा रहे गैंगस्टर अतीक अहमद (Gangster Atiq Ahmad) ने खुद को असुरक्षित बताया है। मीडिया को अपनी सुरक्षा ढाल बताते हुए अतीक ने कहा कि उसका परिवार बर्बाद हो चुका है। वह मिट्टी में मिल चुका है।

अतीक ने अपनी माफियागीरी खत्म होने जाने की बात कबूलते हुए उमेश पाल की हत्या में अपनी संलिप्तता से इनकार किया। इसी मामले में उसके भाई अशरफ को भी बरेली जेल से लाया जा रहा है। जब पत्रकार ने अतीक से डरने के बारे में सवाल किया तो अतीक ने कहा, “आप लोग हो इसलिए डर नहीं लग रहा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साबरमती से प्रयागराज की यात्रा के बीच अतीक अहमद को झाँसी पुलिस लाइन में 1 घंटे 21 मिनट तक रोका गया। इस दौरान अतीक अहमद ने कहा, “मैं 6 सालों से जेल में बंद हूँ। मुझे परेशान किया जा रहा है। मैंने जो किया है वो अदालत में तय होगा।”

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, अतीक ने कहा, “मेरा परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। मैंने जेल में था। मैंने वहाँ से कोई साजिश नहीं रची है। मैंने वहाँ से कोई फोन नहीं किया। वहाँ जैमर लगे हुए हैं। प्रदेश से माफियागीरी पहले ही खत्म हो चुकी है। अब तो सिर्फ रगड़ा जा रहा है।” अतीक अहमद ने खुद से पूछताछ के लिए साबरमती जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग को बेहतर बताया।

अतीक ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा खुद को प्रयागराज लाए जाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया। अतीक अहमद ने आगे कहा, “सरकार ने कहा है कि मिट्टी में मिला देंगे। मिट्टी में तो मिल चुके है। अब सरकार से से अपील है कि घर की औरतों-बच्चों को ना परेशान करे। हालाँकि, असद के बारे में सवाल करने पर अतीक ने कहा, “मैं क्या जानूँ। मैं तो जेल में हूँ।”

अतीक अहमद ने दावा किया है कि उसकी बीवी शाइस्ता अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। गौरतलब है कि उमेश पाल हत्याकाण्ड में अतीक की बीवी शाइस्ता नामजद है और वह फिलहाल फरार है। पुलिस ने शाइस्ता पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है।

‘टीम से हटाया तो अंजाम अच्छा नहीं होगा’: अपने ही देश के बोर्ड से भिड़ा पाकिस्तान का क्रिकेटर, चयनकर्ताओं को धमकाया

पाकिस्‍तान के ऑलराउंडर इमाद वसीम (Imad Wasim) उन्हें बिना किसी कारण के टीम से बाहर निकालने पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) पर जमकर बरसे। उन्होंने हाल ही में एक पाकिस्तानी चैनल में इंटरव्यू के दौरान चयनकर्ताओं को धमकी देते हुए कहा कि अगर उन्हें अब टीम से बिना जानकारी दिए ड्रॉप किया गया तो इसका अंजाम अच्‍छा नहीं होगा।

इमाद वसीम ने निराश होते हुए कहा, “चयन समिति ने मुझे बिना किसी कारण के एक साल से अधिक समय तक पाकिस्तान टीम से दूर रखा। मुझे किसी ने नहीं बताया कि मुझे क्यों ड्रॉप किया गया। मुझे कोई चोट, फिटनेस या फॉर्म की समस्या नहीं थी। मैं घरेलू सर्किट में अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। अगर मेरे साथ दोबारा ऐसा होता है, तो मैं बोर्ड के पास जाऊँगा और उनसे मुझे वाजिब कारण बताने को कहूँगा। अगर वे मुझे कारण नहीं बताते हैं, तो मैं उन कार्रवाई करूँगा।”

34 वर्षीय खिलाड़ी ने दावा किया कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम से बाहर होने के बाद उन पर आर्थिक रूप से कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वह पाकिस्तान की टीम का हिस्सा होते हुए जितना कमा पाते, उससे दस गुना अभी कमाते हैं। दरअसल, वसीम दुनिया भर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भाग लेते रहे हैं।

पाकिस्‍तान के ऑलराउंडर ने कहा, ” मुझे अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। अगर मैं ऐसा गेंदबाज होता, जो परिस्थितियों पर निर्भर रहता, तो ऑस्‍ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में टी20 लीग की टीम ने मेरा चयन नहीं किया होता।”

बता दें कि इमाद वसीम को हाल ही में अफगानिस्‍तान के खिलाफ तीन टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज के लिए पाकिस्‍तान टीम में चुना गया था। उन्होंने आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच नवंबर 2021 में दुबई में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। पाकिस्तानी क्रिकेटर अब न्‍यूजीलैंड के खिलाफ पाँच टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज में भी खेलेंगे, जो 14 अप्रैल से लाहौर में शुरू होने वाली है। इमाद वसीम ने अपने इंटरनेशनल टी20 करियर में पाकिस्तान के लिए 61 मैच खेले हैं, जिसमें 15.50 की औसत और 130.72 की स्ट्राइक रेट से 434 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक भी शामिल है।

अशोक गहलोत बनाम सचिन पायलट पर कटाक्ष, लालू यादव के करप्शन पर निशाना: राजस्थान को पहला ‘वंदे भारत’ दे PM मोदी ने साधे कई निशाने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने राजस्थान (Rajasthan) को वंदे भारत (Vande Bharat) ट्रेन की सौगात दी। पीएम ने वर्चुअली रेलवे को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने रेलवे और लोगों के लिए उसकी आवश्यकता पर महत्वपूर्ण बातें कीं। उन्होंने कहा कि यह भारत का महत्वपूर्ण अंग है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजस्थान की धरती को 13 अप्रैल को पहली वंदे भारत ट्रेन मिली रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कैंट अजमेर वंदे भारत एक्सप्रेस से जयपुर से दिल्ली आना-जाना और आसान हो जाएगा। ये राजस्थान के पर्यटन में भी बहुत सहायक होगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय रेलवे की हालत के लिए विपक्षी दलों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, “हमारे देश का दुर्भाग्य रहा कि रेलवे जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था, जो सामान्य मानव के जीवन का इतना बड़ा हिस्सा है, उसे भी राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया था।”

देश की आजादी के दौरान रेलवे की स्थिति का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आजादी के बाद भी भारत को एक बड़ा रेलवे नेटवर्क मिला था, लेकिन रेलवे के आधुनिकीकरण पर हमेशा राजनीतिक स्वार्थ हावी रहा। राजनीतिक स्वार्थ को देखकर ये तय किया जाता था कि कौन रेल मंत्री बनेगा, कौन नहीं बनेगा।”

रेलवे में भ्रष्टाचार को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “राजनीतिक स्वार्थ ही तय करता था कि कौन सी ट्रेन किस स्टेशन पर चलेगी। राजनीतिक स्वार्थ ने ही बजट में ऐसी-ऐसी ट्रेनों की घोषणा करवाई, जो कभी चली ही नहीं। हालत ये थी कि रेलवे की भर्तियों में राजनीति होती थी, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था। हालत ये थी कि गरीब लोगों की जमीन छिनकर उन्हें रेेलवे में नौकरी का झाँसा दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “देश में मौजूद हजारों मानवरहित क्रॉसिंग को भी अपने ही हाल पर छोड़ दिया गया था। रेलवे की सुरक्षा, रेलवे की स्वच्छता, रेलवे प्लेटफॉर्म की स्वच्छता… सब कुछ नजरअंदाज कर दिया गया था। इन सारी परिस्थितियों में बदलाव 2014 के बाद से आना शुरू हुआ।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “जब से यह आधुनिक ट्रेन शुरू हुई है, तब से करीब 60 लाख लोग इसमें सफर कर चुके हैं। तेज रफ्तार इस ट्रेन की सबसे बड़ी व‍िशेषता है और इससे यात्रियों का समय बचता है। वंदे भारत ट्रेन आज विकास, आधुनिकता, स्थिरता और आत्म-निर्भरता का पर्याय बन चुकी है।”

पीएम मोदी ने कहा कि वंदे भारत की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन है, जो मेड इन इंडिया है। यह पहली ऐसी ट्रेन है, जो इतनी कॉम्पैक्ट और कुशल है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत पहली स्वदेशी सुरक्षा तंत्र कवच के अनुकुल है। पीएम ने कहा, “आज की वंदे भारत की यात्रा, कल हमें विकसित भारत की यात्रा की ओर ले जाएगी।”

इस दौरान पीएम मोदी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए कहा कि इन दिनों वे राजनीतिक आपाधापी और संकट से गुजर रहे हैं। इन सब के बावजूद वह विकास कार्य के लिए समय निकाल लिए, यह बड़ी बात है।

अशोक गहलोत को अपना मित्र बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके दोनों हाथ में लड्डू है। पीएम मोदी ने सीएम गहलोत ने कहा, “आपके रेल मंत्री राजस्थान के हैं और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन भी राजस्थान के हैं। आपके तो दोनों हाथों में लड्डू है।”