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बचपन से ही ‘नवाबी शौक’ वाला था अतीक अहमद का बेटा असद, खुद को कहता था ‘छोटे सांसद जी’: एनकाउंटर में UP एसटीएफ ने कर दिया ढेर

माफिया अतीक अहमद का बेटा असद अहमद गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में झाँसी में मारा गया। उसका शूटर गुलाम भी एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया। दोनों उमेश पाल की हत्या के बाद से फरार चल रहे थे। असद ने इंस्टाग्राम पर कई ऐसे पोस्ट शेयर किए हैं, जो उसकी दबंगई को दिखाते हैं। सितंबर 2021 में उसने एक फोटो शेयर की थी, जिसमें वह कई लोगों को कुछ कहते हुए दिखाई दे रहा है। इस फोटो के साथ उसने लिखा था, “वक्त आने पर बता देंगे तुझे ये आसमाँ, हम अभी से क्या बताएँ, क्या हमारे दिल में है।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

एक और पोस्ट में उसने लिखा था, “लोग हथियार दिखाते हैं दहशत बनाने के लिए, हमारी आँखें ही काफी हैं, तेरी धड़कन बढ़ाने के लिए भाई।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बचपन से ही ‘नवाबी शौक’ रखने वाला अतीक अहमद का बेटा असद खुद को छोटे सांसद जी कहता था।

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

एक पोस्ट में असद ने लिखा था, “आदतें बुरी नहीं हैं हमारी, बस शौक नवाबों वाले हैं।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

असद ने 14 मार्च 2019 को अपने दोस्तों के साथ एक पोस्ट शेयर करते हुए यह भी लिखा था, “चलो आज फिर थोड़ा मुस्कुराया जाए, बिना माचिस के कुछ लोगों को जलाया जाए।”

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा वह अपने अब्बा की पहुँच की सबको धौंस भी दिखाता था। उसने एक पोस्ट में यह भी लिखा था, “जेल की सलाखों में इतना दम नहीं कि हमारे हौसलों के फौलाद को रोक सकें। जिस दिन मर्जी होगी जंजीर तोड़कर खुले आसमान का मंजर देख लेंगे।” उसने अपने इंस्टाग्राम पर एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी की तस्वीर भी शेयर की हुई है।

असद अहमद के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बता दें कि यूपी एसटीएफ ने उमेश पाल मर्डर केस में आरोपित असद अहमद और शूटर मोहम्मद गुलाम पर 5-5 लाख रुपए का इनाम रखा था। दोनों का एनकाउंटर करने वाली टीम को डीएसपी नवेंदु और विमल लीड कर रहे थे। दोनों के पास से विदेशी हथियार भी बरामद हुए हैं।

माफिया अतीक अहमद के बेटे के एनकाउंटर पर गमजदा हुए अखिलेश यादव और ओवैसी, एक ने ‘भाईचारा’ का राग अलापा तो दूसरे ने छेड़ा ‘मजहबी’ तान

माफ‍िया अतीक अहमद के बेटे असद और उसके गुर्गे गुलाम के एनकाउंटर पर राजनीति शुरू हो गई है। दोनों उमेश पाल की हत्या में वांछित थे। 13 अप्रैल 2023 को यूपी एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में झाँसी में ढेर हो गए। यह बात भी सामने आई है कि दोनों पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बना रहे थे। लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एनकाउंटर को फेक बताया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा है, “झूठे एनकाउंटर करके भाजपा सरकार सच्चे मुद्दों से ध्यान भटकाना चाह रही है। भाजपाई न्यायालय में विश्वास ही नहीं करते हैं। आज के व हालिया एनकाउंटरों की भी गहन जाँच-पड़ताल हो व दोषियों को छोड़ा न जाए। सही-गलत के फैसलों का अधिकार सत्ता को नहीं होता है। भाजपा भाईचारे के खिलाफ है।”

अतीक का सपा कनेक्शन

माफिया अतीक अहमद ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बतौर निर्दलीय 1989 में इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर की थी। अगले 2 चुनावों में वह इसी सीट से निर्दलीय विधायक बनता रहा। इसके बाद साल 1996 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया। सपा के टिकट पर वह चौथी बार इस सीट से विधायक बना। इसके बाद वह अपना दल में शामिल हुआ। कुछ समय बाद फिर सपा में लौट आया और 2004 में फूलपुर से सांसद बन गया।

2014 के लोकसभा चुनाव में भी अतीक अहमद को समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था। उमेश पाल की हत्या के बाद विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि माफियाओं को समाजवादी पार्टी आश्रय देती रही है। अपराधी और माफिया उसके द्वारा पाले गए हैं। उन्होंने पूछा था कि क्या यह सच नहीं है कि जिसके खिलाफ FIR दर्ज हैं उसे सपा ने सांसद बनाया था? सीएम ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था, “आप अपराधी को पालते हैं और उसके बाद तमाशा बनाते हैं। हम इस माफिया को मिट्टी में मिला देंगे।”

ओवैसी ने कहा धर्म देखकर हो रहा एनकाउंटर

असद और गुलाम के एनकाउंटर पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी सवाल उठाए हैं। निजामाबाद में उन्होंने कहा कि एनकाउंटर के नाम पर कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। अगर गोली से इंसाफ करने का ही सरकार ने फैसला कर लिया है तो फिर अदालतों को बंद कर दिया जाना चाहिए। पूरे मामले की मजहबी रंग देते हुए उन्होंने कहा, ” क्या जुनैद और नसीर को जिसने मारा भाजपा उसका भी एनकाउंटर करवाएगी। नहीं करवाएगी, क्योंकि वे मजहब के नाम पर एनकाउंटर करते हैं।”

उल्लेखनीय है कि 2021 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा छोड़कर अतीक अहमद का पूरा कुनबा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) में शामिल हो गया था। अतीक की बीवी शाइस्ता परवीन और उसका बेटा अली प्रयागराज में ओवैसी की जनसभा में भी नजर आए थे। उमेश पाल की हत्या में शाइस्ता की भी तलाश है।

₹15 अरब की टैक्स चोरी, कोर्ट में आरिफ पटेल और जफर अली दोषी करार: जानिए ब्रिटेन के सबसे बड़े फ्रॉड में से एक को कैसे दिया अंजाम

जाली कपड़ों के घोटाले के मास्टरमाइंड भारतीय मूल के आरिफ पटेल (Arif Patel) को ब्रिटेन में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी 150 मिलियन पाउंड (15 अरब से अधिक रुपए) का दोषी ठहराया गया है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेस्टर क्राउन कोर्ट में 14 सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को पटेल को गलत बही खाता पेश करने, सरकारी राजस्व में धोखाधड़ी करने के लिए साजिश रचने, ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया।

प्रेस्टन के सॉक्स निर्माता 55 वर्षीय आरिफ पटेल पर एक आपराधिक गिरोह के साथ मिलकर कपड़ा और मोबाइल फोन के फर्जी निर्यात पर वैट भुगतान का दावा कर £97m (9 अरब से अधिक रुपए) का टैक्स चोरी करने का आरोप है। इन पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन और लंदन में संपत्ति खरीदने के लिए किया। बताया जा रहा है कि वह बहुत पहले प्रेस्टन से भाग गया है और अभी वह दुबई में रह रहा है।

इस मामले में आरिफ के सह आरोपित दुबई के 58 वर्षीय मोहम्मद जफर अली को भी राजस्व में धोखाधड़ी करने और मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया है। आरिफ और अली को अगले महीने सजा सुनाई जाएगी।

आरिफ पटेल ने कैसे रचा 150 मिलियन पाउंड का फ्रॉड?

आरिफ पटेल और Faisaltex ग्रुप की कंपनियों ने 2004 में नकली कपड़ों के थोक आयात की ओर रुख किया था। अगले तीन वर्षों के दौरान नकली डिजाइनर कपड़ों वाले दर्जनों कंटेनरों को पूरे ब्रिटेन में बंदरगाहों पर रोक दिया गया था। यूके के व्यापारियों को इसकी पुष्टि तब हुई जब ग्लासगो थोक व्यापारी को होने वाली एक डिलीवरी पुलिस द्वारा रोक दी गई। इसके बाद जाँच में ब्रांड के नाम पर जाली कपड़ों की बिक्री करने का मामला सामने आया था।

इस घोटाले को Carousel Fraud के रूप में जाना जाता है, जहाँ माल वास्तविक खरीदारों को बेचा जाता है, लेकिन पूरी प्रक्रिया अपराधियों द्वारा कंट्रोल होती है। आरिफ पटेल अक्सर मोहम्मद जफर अली से मिलने के लिए दुबई जाता था। इसके अलावा वह ब्रांड के नाम पर जाली कपड़े बनाने वाले निर्माताओं के साथ डील करने के लिए चीन और तुर्की भी जाया करता था। आरिफ पटेल के बारे में कहा जाता है कि वह शानदार जीवन जीने का शौकीन था। इस पैसों का इस्तेमाल उसने प्रेस्टन में संपत्ति खरीदने के लिए किया था, जिसमें लंकाशायर सिटी की मेन शॉपिंग स्ट्रीट फिशरगेट पर कमर्शियल प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।

जलियाँवाला बाग नरसंहार: रवींद्रनाथ टैगोर करना चाहते थे विरोध सभा, क्यों नहीं मिला महात्मा गाँधी और कॉन्ग्रेस का साथ?

13 अप्रैल 1919 दिन बैसाखी का था। उस दिन अमृतसर के जलियाँवाला बाग में अग्रेंजों के काले कानून रौलेट एक्ट और अमृतसर के 2 नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू, डॉ. सतपाल की गिरफ्तारी का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी। इस सभा में स्वतंत्रा संग्राम सेनानी भाषण देने वाले थे। शहर में उस समय कर्फ्यू लगा हुआ था, हजारों की संख्यों में लोग इकट्ठा हुए थे। जब ब्रिटिश हुकूमत ने जलियाँवाला बाग पर इतने लोगों की भीड़ देखी, तो वह परेशान हो गए। वह भारतीयों की आवाज कुचलना चाहते थे और उस दिन अंग्रेजों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी।

जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर नाम के अंग्रेज अफसर ने बिना कोई चेतावनी दिए उस सभा में मौजूद 5 हजार से अधिक लोगों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया और देखते ही देखते सभा स्थल लाशों के ढेर में बदल गया। गोलियों का निशाना बनने वालों में जवान, महिलाएँ, बूढ़े-बच्चे सभी थे। जनरल डायर की गोलियों का शिकार वो लोग भी बने, जो केवल जलियाँवाला बाग में मेला देखने आए थे।

गोलियाँ चलते ही वहाँ अफरातफरी की स्थिति हो गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। इस दौरान फायरिंग और भगदड़ में भी सैकड़ों लोग मारे गए। जलियाँवाला बाग उस समय मकानों के पीछे रहा एक खाली मैदान था और वहाँ तक जाने या बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक संकरा रास्ता था और चारों ओर मकान थे। भागने का कोई रास्ता नहीं था इसलिए फायरिंग के समय कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद कुएँ में कूद गए लेकिन अधिकतर लोगों के ऐसा करने से कुआँ देखते ही देखते लाशों से भर गया।

उस वक्त अमृतसर में क‌र्फ्यू लगा हुआ था इसलिए घायलों को इलाज के लिए कहीं ले जाया नहीं जा सका। लोगों ने वहीं तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। ब्रिटिश सरकार के अनुसार जलियाँवाला बाग के इस नरसंहार में 379 लोग मारे गए थे और 1200 घायल हुए थे। लेकिन पंडित मदन मोहन मालवीय ने जलियाँवाला बाग का दौरा किया था। उन्होंने मरने वालों की संख्या 1000 से ऊपर बताई थी।

जनरल डायर के आदेश पर हजारों लोगों की जान ले ली गई। जगह-जगह ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध हो रहा था… देश का खून खौल रहा था लेकिन मोतिलाल नेहरू ब्रिटिश हुकूमत की तारीफ करने में जुटे हुए थे। कॉन्ग्रेस का 34वाँ अधिवेशन अमृतसर में बुलाया गया था। पहले दिन यानी 27 दिसंबर, 1919 को मोतीलाल नेहरू अपने अध्यक्षीय भाषण में ब्रिटिश शासन की शान में कसीदे पढ़ रहे थे।

उस दौरान जॉर्ज फ्रेडेरिक (V) यूनाइटेड किंगडम के राजा और भारत के सम्राट कहे जाते थे। उनके उत्तराधिकारी प्रिंस ऑफ़ वेल्स, एडवर्ड अल्बर्ट (VIII) का 1921 में भारत दौरा प्रस्तावित था। अधिवेशन में मोतीलाल ने सर्वशक्तिमान भगवान से प्रार्थना करते हुए भारत की समृद्धि और संतोष के लिए एडवर्ड की बुद्धिमानी और नेतृत्व की सराहना की। मोतीलाल नेहरू ने ब्रिटिश शासन की उदारता और अपनी निष्ठा का भी जिक्र किया।

यानी जलियाँवाला बाग के नरसंहार के अभी 6-7 महीने भी नहीं हुए थे, मोती लाल नेहरू और कॉन्ग्रेस का अग्रेंजो के प्रति पूरी तरह हृदय परिवर्तन हो चुका था। जैसे इतनी बड़ी नरसंहार की घटना कोई मामूली घटना हो। कॉन्ग्रेस इस हत्याकांड का विरोध नहीं कर रही थी।

क्रूरता की हद लाँघने वाले जनरल डायर की ब्रिटिश पार्लियामेंट भी तारीफ कर रही थी और मोतीलाल नेहरू भी अग्रेजों का विरोध करने के बजाय उनके शान में कसीदे पढ़ रहे थे।

ब्रिटिश संसद और जनरल डायर

जिस ब्रिटिश शासन की मोतीलाल नेहरू तारीफ़ कर रहे थे वहाँ की ब्रिटिश संसद जनरल डायर का गुणगान कर रही थी। पार्लियामेंट ऑफ़ यूनाइटेड किंगडम की 19 जुलाई, 1920 को एक प्रस्ताव में कहा गया, “जनरल डायर बहुत क्षमता वाले अधिकारी हैं, उससे भी ज्यादा, उन्होंने कुशलता और मानवता के गुणों से अत्यंत प्रभावित किया हैं।” ब्रिटेन का यह नजरिया क्रूरता, फासीवाद और तानाशाही का एक उदाहरण था। इससे भी खतरनाक और शर्मनाक था लेकिन कॉन्ग्रेस ने ब्रिटिश पार्लियामेंट के इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया तक नहीं देना… विरोध करना तो बहुत दूर की बात है।

ब्रिटिश सरकार ने 1920 में डिसऑर्डर इन्क्वायरी कमेटी की रिपोर्ट प्रकाशित की। इस रिपोर्ट के मुताबिक नरसंहार के दिन 5000 से ज्यादा लोग वहाँ मौजूद थे। डायर के साथ 90 लोगों की फौज थी जिसमें 50 के पास राइफल्स और 40 के पास खुर्की (यानी छोटी तलवार) थी। डायर ने लिखित में बताया था कि जितनी भी गोलियाँ चलाई गई, वह कम थी। अगर उसके पास पुलिस के जवान ज्यादा होते तो जनहानि भी अधिक हुई होती। जनरल डायर यह तय करके आया था कि अगर उसके आदेश नहीं माने गए तो वह गोलियाँ चला देगा और हुआ भी यही। बिना चेतावनी के लगातार 10 मिनट तक वह गोलियाँ चलवाता रहा।

जलियाँवाला बाग में मृतकों की संख्या

एक ब्रिटिश अधिकारी जेपी थॉमसन ने एचडी क्रैक को 10 अगस्त, 1919 को पत्र लिखा, “हम इस स्थिति में नहीं हैं जिसमें हम बता सकें कि वास्तविकता में जलियाँवाला बाग में कितने लोग मारे गए। जनरल डायर ने मुझे एक दिन बताया कि यह संख्या 200 से 300 के बीच हो सकती है। उसने बताया कि उनके फ्रांस के अनुभव के आधार पर 6 राउंड शॉट से एक व्यक्ति को मारा जा सकता है। उस दिन कुल 1650 राउंड गोलियाँ चलाई गई। उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने डायर के अनुमान के आधार पर 291 लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर दी। इसमें 186 हिन्दू, 39 मुस्लिम, 22 सिख और 44 अज्ञात बताए गए। इस प्रकार वहाँ मरने वालों की संख्या निर्धारित की गई। (राष्ट्रीय अभिलेखागार, होम पॉलिटिकल, 23-1919)

डिसऑर्डर इन्क्वायरी कमेटी ने तो 379 लोगों की जान और इसके तीन गुना लोग घायल होने की बात कही। पंडित मदन मोहन मालवीय ने जलियाँवाला बाग का दौरा किया था। उन्होंने बताया कि मरने वालों की संख्या 1000 से ऊपर है। (राष्ट्रीय अभिलेखागार, होम पॉलिटिकल, 23-1919)

इस नरसंहार पर कॉन्ग्रेस ने एक तरह से अंग्रेजों के सामने हथियार डाल दिए थे, विरोध तो दूर। कॉन्ग्रेस ब्रिटिश हुकूत की तारीफ में जुटी हुई थी। कसीदें पढ़ रही थी। दूसरी ओर इस क्रूरतम घटना पर कवींद्र रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार की नाइटहुड उपाधि वापस लौटा दी।

नरसंहार से तीन दिन पहले 10 अप्रैल 1919 को पंजाब में किसी भी समाचार के प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ मार्शल लॉ लागू किया गया। नतीजा ये हुआ कि पंजाब शेष भारत से पूरी तरह कट गया। मार्शल लॉ और सेंसरशिप के कारण दुनिया को तुरंत इस जेनोसाइड का पता नहीं चल सका।

18 अप्रैल 1919 को महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों के दमन के लिए अंग्रेजों के बजाय अपने देशवासियों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए सत्याग्रह वापस ले लिया। इससे अंग्रेज और भी खुलेआम दमन और अपमान के लिए प्रेरित हुए। रवींद्रनाथ को नरसंहार की तत्काल जानकारी नहीं मिली। एक-दो दिन के भीतर महात्मा गाँधी द्वारा आंदोलन वापस लेने की खबर अखबार में छपी।

टैगोर ने गाँधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया और शांतिनिकेतन से कोलकाता चले गए तथा वहाँ नरसंहार के खिलाफ एक विरोध सभा आयोजित करने की कोशिश की, लेकिन चित्तरंजन दास समेत किसी भी नेता का उन्हें समर्थन नहीं मिला। उन्होंने सीएफ एंड्रूज को गाँधी के पास यह अनुरोध करने के लिए भेजा। तब महात्मा गाँधी ने जवाब दिया कि वह सरकार को शर्मिंदा नहीं करना चाहते। इसके बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने खुद नाइटहुड की उपाधि त्यागने का फैसला लिया और हाथ से लिखकर एक पत्र वायसराय को भेजा।

ये विरोध की अकेली आवाज थी, लेकिन उन्होंने देश के साथ-साथ बाहर के लोगों को भी अपने यादगार गीत ‘एकला चलो रे’ को सच साबित कर दिखाया।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 1919 की अमृतसर कॉन्ग्रेस में रवींद्रनाथ के उस त्याग का कोई जिक्र नहीं हुआ, जबकि वायसराय काउंसिल से सीएस नायर के इस्तीफे की प्रशंसा की गई। यहाँ तक कि पट्टाभि सीतारमैया ने भी द हिस्ट्री ऑफ द इंडियन कॉन्ग्रेस में रवींद्रनाथ के इस साहसिक कृत्य का कोई जिक्र नहीं किया।

रवींद्रनाथ का त्याग अनूठा था, उनमें लोकप्रिय होने की कोई इच्छा नहीं थी। गंभीर संकट के क्षणों में वह आम लोगों के साथ खड़े हुए।

वहीं अमर बलिदानी भगत सिंह घटनास्थल से रक्तरंजित मिट्टी उठा कर अपने घर ले गए और देश को स्वाधीन कराने का संकल्प लिया। इस नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी ऊधम सिंह ने 21 वर्ष बाद 1940 में ब्रिटेन जाकर जनरल डायर को गोलियों से भून दिया। जो इतिहास हम सब जानते ही हैं। जलियाँवाला बाग नरसंहार के सभी बलिदानियों को शत-शत नमन।

काफिले पर हमला कर अतीक अहमद को छुड़ाने का था प्लान, UP पुलिस ने बताया- क्या थे इनपुट, कैसे ढेर हुए असद और गुलामः उमेश पाल मर्डर में अब तक 4 का एनकाउंटर

झाँसी में मार गिराए गया अतीक अहमद का बेटा असद और उसका गुर्गा गुलाम के पास से यूपी पुलिस ने अत्याधुनिक और विदेशी हथियार भी बरामद किए हैं। दोनों पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बना रहे थे। इसका इनपुट मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और एनकाउंटर में दोनों ढेर हो गए।

उत्तर प्रदेश के स्पेशल डीजी (डीजी लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने एनकाउंटर के बाद यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को इनपुट मिले थे कि पुलिस काफिले पर हमला कर अतीक को छुड़ाने का प्लान बनाया गया है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर एसटीएफ ने झाँसी में कुछ लोगों को रोका तो उन्‍होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो लोग घायल हो गए, जिनकी बाद में मौत हो गई। इनकी पहचान असद और गुलाम के तौर पर हुई। दोनों उमेश पाल की हत्या में शामिल थे।

उमेश पाल मर्डर मामले में यूपी पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 अप्रैल 2023 को असद और उसके शूटर मोहम्मद गुलाम का एनकाउंटर किया है। दोनों पर 5-5 लाख का इनाम था। दी गई जानकारी के मुताबिक झाँसी में छिपे असद और गुलाम का लोकेशन प्राप्त होने के बाद पुलिस की टीम उन्हें गिरफ्तार करने पहुँची। पुलिस को आता देख असद और गुलाम ने फायरिंग कर फरार होने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में ढेर हो गए।

उमेश पाल हत्याकांड

24 फरवरी 2023 को दिनदहाड़े गोलियों और बमों से हमला कर उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उमेश पाल के सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को भी गोलियों से भून दिया था। पेशे से वकील रहे उमेश पाल बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मुख्य गवाह थे। राजूपाल की हत्या 2005 में कर दी गई थी। राजूपाल की हत्या का आरोप अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद पर है। राजू पाल हत्या मामले के गवाह उमेश पाल को अतीक अहमद ने अगवा भी करवाया था। इस मामले में कोर्ट ने पिछले दिनों उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उमेश पाल हत्याकांड के आरोपित

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस ने अतीक अहमद समेत 18 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है। इनमें ज्यादातर लोग अतीक के परिवार वाले हैं। आरोपितों में अतीक के अलावा उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन, भाई अशरफ अहमद, असद के अलावा अन्य चार बेटे, बहन आयशा, बहनोई डॉ. अखलाक, गुड्डू मुस्लिम, शदाकत, अरमान, विजय चौधरी उर्फ उस्मान, मोहम्मद गुलाम, अरबाज, साबिर, कैस अहमद, राकेश, अरशद कटरा, नियाज, इकबाल अहमद, शाहरुख समेत कुछ अज्ञात लोग शामिल हैं।

उमेश पाल की हत्या में शामिल 4 आरोपितों को अबत क एनकाउंटर में मार गिराया गया है। इनमें अतीक का तीसरा बेटा असद, शूटर उस्मान, अरबाज और मोहम्मद गुलाम शामिल हैं। इसके अलावा अतीक के परिवार की मदद करने वाले 3 आरोपितों और करीबियों के घर पर बुलडोजर भी चल चुका है। बुल्डोजर की कार्रवाई एनकाउंटर में ढेर हुए मोहम्मद गुलाम के घर पर भी हुई थी।

गुलाम के भाई ने कहा था लाश भी नहीं लेंगे

गुलाम के मकान और दुकान पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने बुलडोजर कार्रवाई की थी। इस दौरान गुलाम के भाई ने मीडिया से कहा था कि उसने बहुत गलत किया है। यूपी पुलिस यदि उसका एनकाउंटर करती है तो हम न तो उसका चेहरा देखेंगे न ही उसकी लाश लेंगे। बता दें पुलिस को अभी अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन, अतीक की बहन आयशा, गुड्डू मुस्लिम समेत 6 आरोपितों की तलाश है। अतीक की पत्नी शाइस्ता भी घटना के बाद से ही फरार है।

‘नेकलाइन न दिखे’ : सलमान खान ने KKBKKJ के सेट पर लड़कियों के लिए तय कर रखा था ड्रेस कोड, श्वेता तिवारी की हिरोइन बेटी पलक ने किया खुलासा

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ 21 अप्रैल 2023 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। फिल्म में सलमान के साथ पूजा हेगड़े, शहनाज गिल, जस्सी गिल और टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी की बेटी पलक तिवारी (Palak Tiwari) भी नजर आएँगी।

पलक फरहाद सामजी के डायरेक्टशन में बनने वाली इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं। इसी बीच पलक ने अभिनेता के साथ काम करने के बारे में दिलचस्प खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी फिल्मों में काम करने वाली सभी एक्ट्रेस पर एक नियम लागू होता है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पलक तिवारी ने सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में बताया कि सलमान खान ने ‘किसी का भाई किसी की जान’ के सेट पर लड़कियों से पूरे कपड़े पहनकर आने के लिए कहा था। पलक ने खुलासा किया, “वह ‘अंतिम: द फाइनल ट्रुथ’ के सेट पर एक सहायक निर्देशक के रूप में काम कर रही थीं, तो सलमान सर का एक नियम था, “मेरे सेट पर किसी भी लड़की की नेकलाइन नजर नहीं आनी चाहिए। सभी लड़कियाँ पूरी तरह से ढकी हुई होनी चाहिए, पूरे कपड़े पहनकर आए, अच्छी लड़कियों की तरह।”

पलक ने आगे कहा कि उनकी माँ श्वेता तिवारी ने जब उन्हें शर्ट और जॉगर्स में सेट पर जाते हुए देखा तो पूछा, “तुम कहाँ जा रही हो? तुमने इतने अच्छे कपड़े कैसे पहने हैं? इस पर मैंने कहा कि मैं सलमान सर के सेट पर जा रही हूँ। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि वाह, बहुत अच्छा।”

पलक के अनुसार, “सलमान सर बहुत ट्रेडिशनल हैं। वह कहते हैं कि जो पहनना है पहनो। लेकिन वह यह भी पसंद करते हैं कि लड़कियाँ हमेशा सुरक्षित रहें। अगर सेट पर ऐसे आदमी हैं, जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं, तो वहाँ वह हर किसी पर भरोसा नहीं करते थे। उनके मुताबिक लड़कियाँ हमेशा सुरक्षित होनी चाहिए।”

बता दें कि ‘किसी का भाई किसी की जान’ फिल्म के अलावा पलक तिवारी ‘द वर्जिन ट्री’ फिल्म में संजय दत्त के साथ नजर आएँगी। वहीं, सलमान ‘टाइगर 3’ में भी दिखाई देंगे। अप्रैल 2024 से शाहरुख के साथ वह ‘टाइगर वर्सेज पठान’ की भी शूटिंग शुरू करने वाले हैं।

असद-गुलाम के बाद बमबाज गुड्डू मुस्लिम के एनकाउंटर के चर्चे, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा- UP एसटीएफ ने घेरा: उमेश पाल की हत्या में था शामिल

अतीक अहमद के बेटे असद और उसके गुर्गे गुलाम को ढेर किए जाने के बाद बमबाज गुड्डू मुस्लिम के एनकाउंटर के भी चर्चे हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि यूपी एसटीएफ ने उसे भी घेर लिया है। असद और गुलाम को भी झाँसी में 13 अप्रैल 2023 को एसटीएफ ने ही ढेर किया है।

उमेश पाल की हत्या के बाद से ही गुड्‌डू मुस्लिम की तलाश हो रही है। बताया जा रहा है कि उसे जालौन में घेरा गया है। एसटीएफ की टीम गुड्डू मुस्लिम को जिंदा पकड़ने की कोशिश कर रही है। उस पर 5 लाख रुपए का इनाम भी है। मीडिया में चल रही खबरों की माने तो किसी भी वक्त गुड्डू मुस्लिम को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

यूपी एसटीएफ ने उमेश पाल मर्डर केस में आरोपित असद अहमद और शूटर मोहम्मद गुलाम पर भी 5-5 लाख रुपए का इनाम था। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दोनों का एनकाउंटर करने वाली टीम को डीएसपी नवेंदु और विमल लीड कर रहे थे। दोनों के पास से विदेशी हथियार भी बरामद हुए हैं।

कौन है गुड्डू मुस्लिम

उमेश पल हत्याकांड में गुड्डू मुस्लिम मुख्य आरोपित है। सीसीटीवी में वह बम फेंकता नजर आया था। इससे पहले भी कई हत्याओं में उसका नाम आ चुका है। वह राजू पाल की हत्या में भी शामिल रहा था। गुड्डू मुस्लिम अतीक अहमद का काफी पुराना गुर्गा है। गुड्डू बम बनाने का एक्सपर्ट बताया जाता है। अतीक और उसका याराना लगभग 2 दशक पुराना है। गुड्डू के बारे में यहाँ तक कहा जाता है कि वह बाइक पर चलते हुए भी बम बाँध कर उसे टारगेट पर फेंक सकता है।

भागकर गुड्डू मुस्लिम अतीक की बहन के यहाँ गया था

अतीक की बहन आयशा नूरी और उसके शौहर डॉक्टर अखलाक अहमद ने 5 मार्च 2023 को गुड्डू मुस्लिम से मेरठ स्थित अपने घर पर मुलाकात की थी। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। अखलाक ने गले लगाकर उसका स्वागत किया था। पुलिस ने इसके बाद अखलाक को गिरफ्तार कर लिया था।

‘ये मेरे बेटे को श्रद्धांजलि’: असद-गुलाम के एनकाउंटर पर बोलीं उमेश पाल की माँ, डिप्टी सीएम ने ‘UP एसटीएफ’ को दी बधाई; सोशल मीडिया में छाया ‘मिट्टी में मिला देंगे’

उत्तर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद के बेटे असद अहमद का झांसी में एनकाउंटर होने के बाद उमेश पाल के घरवालों ने प्रदेश मुख्यमंत्री सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया है।

मृतक उमेश की माँ ने एनकाउंटर की खबर सुनने के बाद कहा, “न्याय देने के लिए मैं सीएम योगी का आभार प्रकट करती हूँ और अपील करती हूँ कि ऐसे ही आगे भी हमें न्याय दिलाया जाए।” उन्होंने इस पुलिस कार्रवाई पर कहा- “ये मेरे बेटे को श्रद्धांजलि है।”

वहीं प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने इस एनकाउंटर के बाद यूपी के एसटीएफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उमेश पाल के एडवोकेट और पुलिस के जवानों के हत्यारों का यही हश्र होना था।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं यूपी की एसटीएफ को इस कार्रवाई के लिए बधाई देता हूँ। पुलिस ने गोली जवाबी कार्रवाई में चलाई। ये नए भारत में अपराधियों के लिए संदेश है। यूपी में योगी सरकार है न कि समाजवादी पार्टी जो अपराधियों को संरक्षण देगी।”

इस एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर सीएम योगी की सराहना की जा रही है। सीएम योगी की वो वीडियो क्लिप शेयर की जा रही है जिसमें उन्होंने कहा था- मिट्टी में मिला देंगे। इस वीडियो को शेयर करके यूजर्स बोल रहे हैं- “मैं जो कहता हूँ, वो करता हूँ। मिट्टी में मिला दिया।” अमन सिंह ने लिखा- “बाबा जो कहते हैं- वहीं करते हैं। मिट्टी में मिला दिया।”

हनुमान जयंती रैली पर मस्जिद के पास पथराव, कई दुकानों एवं गाड़ियों में लगाई आग: ओडिशा में हिंसा के बाद धारा 144 लागू, इंटरनेट बंद

ओडिशा के संबलपुर में हनुमान जन्मोत्सव पर बुधवार (12 अप्रैल 2023) को निकाली गई मोटरसाइकिल रैली को कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने निशाना बनाया। मस्जिद के पास पहुँचते ही भीड़ ने रैली में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। पथराव की इस घटना में 10 पुलिस वाले घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद संबलपुर में धारा 144 लागू कर दी गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा में विशुवा संक्रांति या पाना संक्रांति का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इसी अवसर पर हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। इस साल यह उत्सव 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। इसके पहले 12 अप्रैल को हनुमान जयंती समन्वय समिति व बजरंग दल की तरफ से बाइक रैली का आयोजन किया गया। रैली जब धानुपाली इलाके के एक मस्जिद के पास पहुँची तो अचानक रैली में शामिल लोगों पर पथराव शुरू हो गया।

पथराव के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। पथराव की घटना में संबलपुर के ASP सहित 10 पुलिस वालों को भी चोटें आई हैं। पुलिस वालों के अतिरिक्त और कितने लोग जख्मी हुए हैं, इस बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है। रैली पर पथराव के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मस्जिद के पास मुस्लिम भीड़ इकट्ठी होकर पत्थरबाजी कर रही है। कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा एवं उपद्रव के बाद रैली में शामिल 2 पहिया गाड़ियाँ सड़कों पर बिखरी पड़ी हैं। एक महिला पुलिस अधिकारी को गंभीर चोट लगी है।

पथराव के बाद फैली हिंसा में कई स्थानीय दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। कई मोटरसाइकिल और कारों को क्षति पहुँचाई गई। बढ़ती हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने फौरी तौर पर इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया। जिले के सभी 6 पुलिस स्टेशनों में धारा 144 लगा दी गई है।

संबलपुर के एसपी बी गंगाधर की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, मामले की जाँच की जा रही है। अब तक 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस बल सभी संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च कर रहे हैं। शहर के संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बलों की तैनाती की गई है।

इससे एक दिन पहले जयब्रत डे नाम के एक स्थानीय नेता के फोन में कुछ वीडियो मिला था, जिसमें ‘हिंसा भड़काने’ की बात थी। इसके बाद जयब्रत को गिरफ्तार कर लिया गया। जयब्रत भाजयुमो (BJYM) के पूर्व नेता थे, जो बाद में बीजद में शामिल हो गए थे। बाद में उन्हें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के लिए बीजद से भी निष्कासित कर दिया गया था।

रिपोर्टों में कहा गया है कि डे के फोन में आम जनता को लाठी और पत्थरों के साथ तैयार होकर आने के मैसेज भरे हुए मिले। उन्हें दहनुपाली थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था जहां वह पहले भी हिंसा से जुड़ी घटनाओं में गिरफ्तार हो चुका है।

चीन में उइगर मुस्लिमों के रोजा रखने पर पूरी तरह प्रतिबंध, नजर रखने लिए जासूस तैनात: जातीय सफाया के लिए अल्पसंख्यकों की नसबंदी से लेकर अंगों की तस्करी

उइगर मुस्लिमों पर चीन का कहर जारी है। रजमान के महीने में रोजा रखने की भी उन्हें इजाजत नहीं है। कोई मुस्लिम रोजा ना रख सके, इसके लिए चीन जासूसों की मदद ले रहा है। चीन ने जासूस के रूप में आम लोगों को ही रखा है। चीनी अधिकारी इन्हें ‘Ears’ कहते हैं। बता दें कि साल 2017 से ही चीन ने मुस्लिमों को रोजा रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इसके बाद साल 2021 और 2022 में प्रतिबंध में आंशिक रूप से ढील दी गई थी। इसके बाद 65 से अधिक मुस्लिमों को रोजा रखने की अनुमति मिली थी। इस दौरान पुलिस ने घरों की तलाशी और सड़क पर गश्ती जैसी गतिविधियों को कम कर दिया था।

हालाँकि, इस साल चीन सरकार ने रोजा पर प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार ने उम्र, लिंग या पेशे की परवाह किए बिना सभी को रोजा रखने से रोक दिया। बता दें कि इस साल 22 मार्च से 20 अप्रैल तक रमजान का महीना है। इस दौरान मुस्लिम रोजा रखते हैं। रोजा इस्लाम के पाँच स्तंभों में से एक है।

शिनजियांग प्रांत के तुरपुन सिटी पुलिस स्टेशन के अधिकारी के अनुसार, इस बार पूर्ण प्रतिबंध के बाद चीन के अधिकारियों ने रमजान के पहले सप्ताह में 56 उइगर निवासियों और पूर्व बंदियों को उनकी गतिविधियों के बारे में पूछताछ करने के लिए बुलाया। इस दौरान पाया कि उनमें से 54 ने रोजा रखकर कानून का उल्लंघन किया।

कानून का उल्लंघन करने वाले मुस्लिमों को क्या सजा दी गई या उनका क्या हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इतना ही नहीं, पुलिस अधिकारियों ने भी इस संबंध में जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, हर गाँव तीन जासूसों को रखा गया है, जो रोजा रखने वालों या हाल ही में जेल से निकलकर आए लोगों पर नजर रखते हैं। ये जासूस आम नागरिक, पुलिसकर्मी और ग्राम समिति के सदस्य होते हैं।

दरअसल, चीनियों के उइगर भाषा भी एक बड़ा बाधक है। इसलिए वे उइगर समुदाय के लोगों एवं वहाँ के स्थानीय लोगों को ही जासूस के रूप में नियुक्त कर किए हैं। पुलिस थाने में 70-80 उइगर पुलिसकर्मी हैं, जो इसमें मदद करते हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासन में उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार और बढ़ गए हैं।

दरअसल, मुस्लिम बहुल शिनजियांग प्रांत में उइगर विद्रोहियों को लगभग खात्मा कर चुका चीन इस्लामी कट्टरपंथ पर नकेल कसने के लिए मजहब को पूरी तरह नियंत्रित कर रहा है। इस्लाम को दबाने का काम साल 2018 के बाद से शुरू हुआ, जब चीनी कैबिनेट ने एक गुप्त निर्देश पास किया कि मस्जिदों और मदरसों में अरब के बढ़ते प्रभाव को रोका जाए।

इसके बाद उनकी धार्मिक पहचान मिटाने के लिए वेश-भूषा, खानपान, भाषा से लेकर संस्कृति और इतिहास तक मिटाया जा रहा है। मस्जिदों को ढहा दिया गया, अरबी पढ़ने पर रोक लगा दी, बुर्का और नमाजी टोपी पहनने पर रोक लगा दी गई।

चीन में उइगर मुस्लिमों की आबादी घटना के लिए चीन योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है। चीन सिर्फ एक निकाह करने की इजाजत दे रहा है। इसके साथ ही मुस्लिम पुरुषों की जबरदस्ती नसबंदी की जा रही है। यहाँ तक उइगर महिलाओं को नियमित रूप से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया जाता है और उनका जबरन गर्भपात करा दिया जाता है। उनके गर्भाशय में यंत्र फिट कर गर्भधारण की जानकारी जुटाई जाती है।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थित अख़बार ‘द हेराल्ड सन’ ने साल 2021 में खुलासा किया था कि चीन उइगर मुस्लिम के अंगों की तस्करी भी कर रहा है और उससे धन कमा रहा है। उइगर मुस्लिमों के स्वस्थ लिवर को चीन 1,60,000 डॉलर्स (1.20 करोड़ रुपए) में बेचा जा रहा है।

अख़बार ने दावा किया था कि इस तरह के धंधों से चीन को 1 बिलियन डॉलर (7492 करोड़ रुपयों) की कमाई हो रही है। इसका अर्थ है कि चीन के जिन प्रताड़ना कैंपों (Detention Centres) में इन उइगर मुस्लिमों को रखा जा रहा है, वहाँ जबरदस्ती उनके अंग निकाल लिए जाते हैं।