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पश्चिम बंगाल के बीरभूम में मिली विस्फोटकों से लदी लावारिस कार: 17 बक्सों में 3400 जिलेटिन की छड़ें बरामद, इससे पहले मिले थे डेटोनेटर

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में एक गाड़ी से 17 बक्से मिले हैं। इन बक्सों में विस्फोटक भरे हुए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सोमवार (10 अप्रैल, 2023) दोपहर को स्थानीय लोगों ने पुलिस को बीरभूमि के मुररई में लावारिश गाड़ी खड़ी होने की सूचना दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने जब गाड़ी की जाँच की तो उसमें जिलेटिन से भरे विस्फोटक प्राप्त हुए।

पुलिस ने जिलेटिन से भरे बक्सों को जब्त कर लिया है। इसकी जाँच की जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने संदिग्ध कार से 17 बक्से बरामद किए जिनमें 3400 जिलेटिन की छड़ें रखी हुई थीं। पुलिस ने कार और विस्फोटकों को कब्जे में ले लिया है।

बीरभूम जिले के एसपी भास्कर मुखोपाध्याय ने का कहना है कि पूरे मामले की जाँच की जा रही है। शुरुआती जाँच में गाड़ी से प्राप्त विस्फोटक के संबंध में हमें कोई दस्तावेज नहीं मिले। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि विस्फोटक कहाँ से और क्यों लाए जा रहे थे। भास्कर मुखोपाध्याय ने कहा कि पुलिस संदिग्ध गाड़ी के मालिक का भी पता लगा रही है।

इसके पहले भी मुर्शिदाबाद और वीरभूमि जिले से विस्फोटक बरामद किए जा चुके हैं। जिसकी जाँच एनआईए कर रही है। बता दें वीरभूम जिले से जुलाई 2022 में 81 हजार डेटोनेटर बरामद किए गए थे। अधिकारी इस बात की भी जाँच कर रहे हैं कि सोमवार को मिले जिलेटिन की छड़ों और जुलाई में प्राप्त डेटोनेटर्स के तार एक ही जगह से तो नहीं जुड़ रहे।

बता दें इलाके में उत्खनन के लिए भी विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक से दो खदानों को छोड़ बाकी के पत्थर खदान वालों के पास विस्फोटक के लाइसेंस नहीं है। बिना लाइसेंस के खादान वाले अवैध तरीके से हासिल विस्फोटक का उपयोग कर पत्थर तोड़ते और प्राप्त करते हैं। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में रामनवमी के बाद कई जिलों में हिंसा भड़की थी। ऐसे में अवैध रूप से मिलने वाले विस्फोटकों से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े होना स्वाभाविक है।

300 दिन, 100 करोड़ हनुमान चालीसा का पाठ: अयोध्या के भव्य मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ‘शतकोटि अभियान’, आप भी बन सकते हैं संकल्प का हिस्सा

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा का महोत्सव 15 जनवरी 2024 को निर्धारित किया गया है। इससे पहले देश भर में ‘राम प्रतिष्ठा शतकोटि हनुमान चालीसा अभियान’ शुरू किया गया है। इसके तहत राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले पूरे देश में हनुमान चालीसा का 100 करोड़ पाठ करने का संकल्प लिया गया है।

21 मार्च 2023 से शुरू हो चुका यह अभियान 15 जनवरी 2024 तक चलेगा। यानी 300 दिन तक यह अभियान चलेगा। इसका उद्देश्य देश भर में सांस्कृतिक चेतना जागृत करना है। राम-प्रतिष्ठा ऐप में इस अभियान के बारे में पूर्ण जानकारी दी गई है। संकल्प पूर्ण करने वाले प्रत्येक भक्त का नाम एवं पाठ संख्या प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात् श्रीरामजी के चरणों में अर्पित की जाएगी।

सभी राम भक्तों को अपनी शक्ति एवं सामर्थ्यानुसार प्रतिदिन हनुमान चालीसा पाठ का संकल्प कर नियमित पाठ करने को कहा गया है। इस शुभ आह्वान में सभी रामभक्त अपनी इच्छानुसार प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करने का संकल्प ले सकते हैं।

हाल ही में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्र ने बताया था, “14-15 जनवरी 2024 में रामलला को गर्भगृह में विराजमान किया जाएगा। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले पूरे देश में 100 करोड़ हनुमान चालीस का पाठ किया जाएगा।” जी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा था, “7 मई 2023 तक राम मंदिर की छत बनकर तैयार हो जाएगी। श्री राम जन्मभूमि परिसर में नेपाल की देवशिला को रखा जाएगा। अगली रामनवमी से पहले रामलला अपने मूल गर्भ में विराजमान होंगे।” उन्होंने कहा था, “राम मंदिर के भूतल का निर्माण कार्य दिसंबर 2023 तक पूरा हो जाएगा। रामलला की मूर्ति बाल्यकाल (4-5 साल) की होगी। भगवान राम की मूर्ति खड़ी अवस्था में होगी।”

बता दें कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में बन रहा भगवान श्रीराम का मंदिर अब आकार ले रहा है। राम मंदिर के प्रथम तल का निर्माण 70 फीसदी पूरा हो चुका है। गर्भगृह का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। हाल ही में गर्भगृह की तस्वीर सामने आई थी। इसके अनुसार गर्भगृह के सभी स्तंभ खड़े हो चुके हैं। बाकी काम भी जोरों पर है। रामलला के दर्शन करने के लिए भक्तों को 32 सीढ़ियाँ चढ़नी होंगी।

‘चप्पल पर नहीं लिखा था राम, इसलिए डूबे जीसस’: कॉमेडियन यश राठी पर देहरादून में केस

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में कॉमेडियन और ब्लॉगर यश राठी के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उसने भगवान राम का नाम चप्पल पर लिखने की बात कही है। कहा जा रहा है कि पुलिस जल्द ही उसे गिरफ्तार कर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड के देहरादून में नंदा की चौकी स्थिति शीला फार्म में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान ही उसने कॉमेडी के नाम पर भगवान राम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में यश राठी मंच पर दिखाई दे रहा है।

इस दौरान उसने कहा था, “जीसस ने जब पहली बार पानी में चलने की कोशिश की थी, तब वह डूब गए थे। उनके दोस्त ने उन्हें बाहर निकाला और कहा कि इतना ओवर कॉन्फिडेंस। अगर चलना नहीं आता तो तैरना तो सीखते। तब जीसस कहता है कि एक छोटी से गलती हो गई है। मैं चप्पल के ऊपर राम लिखना भूल गया।”

भगवान राम का अपमान करने को लेकर विभिन्न राजनीतिक तथा हिंदूवादी धार्मिक संगठनों ने कार्यक्रम स्थल पर जाकर प्रदर्शन किया। साथ ही सोमवार (10 अप्रैल, 2023) को स्थानीय प्रेम नगर थाने में जाकर यश राठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की माँग की। इसके बाद भैरव भवानी संगठन के अध्यक्ष सागर जायसवाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। कहा जा रहा है कि उसे जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

सागर जायसवाल ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि शनिवार (8 अप्रैल 2023) को नंदा की चौकी इलाके में स्थित शीला फार्म में यूथ फ़ॉर यू कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान यश राठी ने भगवान श्रीराम के लिए अमर्यादित भाषा का उपयोग किया है। इसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल है। उसकी इस टिप्पणी से हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं।

फिर गुजरात से UP लाया जा रहा है अतीक अहमद, कहा- इनकी नीयत ठीक नहीं, मुझे मारना चाहते हैं: पिछली बार गाय से टक्कर के बाद बाल-बाल पलटने से बची थी गाड़ी

माफिया अतीक अहमद को एक बार फिर से गुजरात कr साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा है। उसे एक बार फिर से एनकाउंटर का डर सताने लगा है। उमेश पाल मर्डर मामले में आरोपित बनाए जाने के बाद अतीक के खिलाफ वारंट जारी हुआ है। इसके बाद यूपी पुलिस की टीम साबरमती जेल पहुँचकर कई घंटों की प्रक्रिया के बाद अतीक को लेकर निकल गई।

अतीक अहमद को लाने की जिम्मेदारी यूपी पुलिस की उसी टीम को सौंपी गई है, जो पहले उसे लेकर प्रयागराज पहुँची थी। पिछली बार अतीक अहमद जिस वैन में था, उस वैन से फोरलेन पर एक गाय टकरा गई थी। इस टक्कर में गाय की मौत हो गई थी और अतीक अहमद की वैन पलटने से बाल-बाल बच गई थी।

पुलिस की टीम के साथ वाहन में सवार होने के बाद अतीक अहमद ने मीडिया के सामने एक बार फिर से अपना डर जाहिर किया। उसने कहा, “इनकी (यूपी पुलिस की) नीयत सही नहीं है। ये परेशान करना चाहते हैं। मुझे मारना चाहते हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी कराओ तो क्यों ले जा रहे हैं? वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो सकती थी।”

यूपी पुलिस की टीम अतीक को लेकर लगभग 1300 किलमोटीर के सफर पर निकल गई। बताया जा रहा है कि अतीक को पहले वाले रूट यानी राजस्थान के उदयपुर होते हुए मध्य प्रदेश के शिवपुर के रास्ते झाँसी होते हुए प्रयागराज ले जाया जाएगा। इस बार भी अतीक की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं।

आगे क्या होगा ?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूपी पुलिस की टीम इस बार वारंट-बी लेकर साबरमती जेल पहुँची थी। जिस आरोपित के खिलाफ वारंट-बी जारी होता है, उसे कोर्ट में हाजिर करना होता है। अतीक अहमद अब उमेश पाल हत्याकांड का आरोपित है। अतीक को हत्या मामले में कोर्ट में पेश कर रिमांड माँगी जाएगी। पिछली बार उसे उमेश पाल के अपहरण मामले में कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस बार मामला हत्या का है।

अतीक अहमद के प्रयागराज लाए जाने की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर एक बार फिर से #AtiqueAhmed और साबरमती जेल ट्रेंड कर रहा है। इसके पहले जब 26 मार्च 2023 को अतीक अहमद साबरमती जेल से प्रयागराज लाया जा रहा था, तब भी सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड हुआ था। नेटिजन्स ने जमकर मीम्स भी शेयर किए थे।

इंदौर के मंदिर में फिरोज, राशिद और इमरान ने की तोड़फोड़, पूजा कर रही महिलाओं से भी बदसलूकी: मंदिर नहीं हटाने पर जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के इंदौर में सोमवार (10 अप्रैल 2023) की शाम को शीतला माता मंदिर में तोड़फोड़ और वहाँ के लोगों से मारपीट की गई। आरोप है कि कुछ मुस्लिम युवकों ने मंदिर में पूजा करने पहुँची महिलाओं को मंदिर न हटाने पर जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद महिलाएँ और हिंदूवादी संगठन के लोग थाने पहुँचे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना चंदन नगर के बाँक इलाके का है। यहाँ 50 साल पुराना शीतला माता का एक मंदिर है, जिसकी मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा है। सोमवार की शाम को मजदूर मान सिंह (40) और छगन लाल (50) मंदिर में मरम्मत का काम कर रहे थे। वहीं, मंदिर में कुछ महिलाएँ पूजा कर रही थीं।

कहा जा रहा है कि उसी समय राजकुमार नगर निवासी राशिद, इमरान और फिरोज मंदिर में आए और मजदूरों को रोक दिया। इसके बाद उन्होंने मजदूरों से मारपीट की पूजा कर रहीं महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। बदमाशों ने मंदिर को वहाँ से हटाने की चेतावनी दी। महिलाओं के अनुसार, मुस्लिम युवकों ने मंदिर नहीं हटाने पर सबको जान से मारने की धमकी दी।

मंदिर में हंगामे और तोड़-फोड़ की जानकारी मिलते ही हिंदूवादी संगठन के लोग एकत्र हो गए। पुलिस स्टेशन पहुँचकर लोगों ने कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने इलाके में बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती की है। पुलिस के पहरे में मंदिर के निर्माण का काम चल रहा है। पुलिस तोड़फोड़ करने और धमकी देने वालों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।

हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब मंदिर में उत्पात मचाने की कोशिश की गई है। इसके पहले मंदिर परिसर में कई बार मांस फेंके गए। पूजा करने आने वालों के साथ मारपीट की जाती है। अब मंदिर में तोड़-फोड़ भी होने लगे हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ यदि कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ पूजा स्थल को नुकसान पहुँचाने और मजदूरों को पीटने का मामला दर्ज किया है। मजदूरों की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295, 294, 323, 506 के तहत मुकदमा दर्ज की गई है। हालात और लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने आरोपितों की धर-पकड़ के लिए टीमों का गठन किया है।

स्वातंत्र्यवीर गौरव दिवस… वीर सावरकर की जयंती को कुछ इस तरह मनाएगी महाराष्ट्र सरकार, बोले CM शिंदे – राष्ट्रीय विकास में उनका बहुत बड़ा योगदान

स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर (Veer Savarkar) को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने कहा है कि वीर सावरकर की जयंती यानि 28 मई को ‘स्वातंत्र्यवीर गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। वीर सावरकर की जयंती मनाने का प्रस्ताव महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री उदय सामंत ने रखा था। इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सीएम शिंदे ने मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को घोषणा की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट कर कहा है, “मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है कि 28 मई को स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की जयंती को राज्य सरकार द्वारा ‘स्वातंत्र्यवीर गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन स्वतंत्र वीर सावरकर के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।”

एक अन्य ट्वीट में मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है, “स्वातन्त्र्य वीर सावरकर का देश की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय विकास में बहुत बड़ा योगदान है। उद्योग मंत्री उदय सामंत ने उनकी देशभक्ति, साहस और प्रगतिशील विचारों को आगे बढ़ाने और उसके माध्यम से उन्हें नमन करने के लिए ‘स्वातंत्र्य वीर गौरव दिवस’ मनाने की माँग की थी।”

बता दें कि इससे पहले सीएम एकनाथ शिंदे ने पूरे महाराष्ट्र में ‘सावरकर गौरव यात्रा’ निकालने की घोषणा की थी। गत 2 अप्रैल से इस यात्रा की शुरुआत भी हो चुकी है। ‘सावरकर गौरव यात्रा’ का आयोजन महाराष्ट्र की सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों में किया जाना है।

राहुल गाँधी के बयान ने शुरू हुई सियासी खींचतान

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद राहुल राहुल गाँधी लंबे समय से वीर सावरकर को लेकर हमलावर रहे हैं। हाल ही में लोकसभा सदस्यता रद्द होने के बाद राहुल गाँधी ने कहा था कि वह सावरकर नहीं हैं। इसलिए माफी नहीं माँगेगे। इसके बाद भाजपा समेत कई सियासी दलों ने राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोला था। कॉन्ग्रेस की मदद से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे उद्धव ठाकरे ने कहा था कि वह वीर सावरकर का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यही नहीं, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने राहुल गाँधी को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी थी। साथ ही उन्होंने कहा था कि देश की आजादी में वीर सावरकर के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।

पोस्टर पर केवल गाँधी-गायब हुआ गाँधी परिवार, काॅन्ग्रेस की चेतावनी के बाद भी गहलोत सरकार के खिलाफ अनशन: राजस्थान में चुनाव से पहले किधर लैंड करेंगे सचिन पायलट

राजस्थान में चुनाव से पहले सत्ताधारी कॉन्ग्रेस में एक बार फिर तनाव देखने को मिल रहा है। साल 2018 में सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गुर्जर नेता सचिन पायलट के बीच खींचतान बढ़ गई थी। हालात ये हो गए कि पायलट ने उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अशोक गहलोत पर दबाव की राजनीति शुरू कर दी।

चुनाव नजदीक आता देख एक बार फिर सचिन पायलट एक बार फिर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पायलट ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अपने प्रतिद्वंद्वी एवं सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ अनशन करने की घोषणा कर दी। इसके लिए उन्होंने 11 अप्रैल 2023 की तरीख भी चुनी।

11 अप्रैल को प्रख्यात समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती है। इस अनशन के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी ने सचिन पायलट को चेतावनी भी दी थी और कहा था कि उनका यह कदम पार्टी हितों के खिलाफ है। अगर उन्हें कोई दिक्कत है तो ये पार्टी को बताएँ।

राजस्थान के कॉन्ग्रेस प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने कहा था, “सचिन पायलट कल (मंगलवार) दिन भर का अनशन करने वाले हैं। उनका यह अनशन पार्टी हितों के खिलाफ है। पार्टी विरोधी गतिविधि है। अगर अपनी ही सरकार के साथ उनकी कोई समस्या है तो मीडिया और जनता के बजाय पार्टी के प्लेटफॉर्म पर चर्चा की जा सकती है।”

रंधावा ने आगे कहा था, “मैं 5 महीने से राजस्थान कॉन्ग्रेस का प्रभारी हूँ। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर मुझसे कभी चर्चा नहीं की। मैं उनके संपर्क में हूँ और अभी भी उनसे बातचीत की अपील करता हूँ। वह निर्विवाद रूप से कॉन्ग्रेस पार्टी के एक मजबूत स्तंभ हैं।”

हालाँकि, पार्टी की चेतावनी की अनदेखी करके सचिन पायलट जयपुर के शहीद स्मारक के पास अनशन पर बैठ गए। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही है कि अनशन के दौरान जो बैनर लगाया गया है, उसमें ना ही ना ही गाँधी परिवार के किसी व्यक्ति की तस्वीर है और ना ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अथवा सिंबल की। जाहिर है कि पायलट आर-पार के मूड में दिख रहे हैं।

बैनर में महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ लिखा गया है, ‘वसुंधरा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध अनशन’। पायलट ने मुख्यमंत्री गहलोत पर आरोप लगाया था कि वे वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में हुए भ्रष्टाचार को दबा रहे हैं। वो वसुंधरा राजे को बचा रहे हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री बनने का सपना देख सचिन पायलट सीएम गहलोत के साल 2018 से विरोधी बन गए। उस समय पायलट प्रदेश अध्यक्ष थे। दोनों ने भाजपा की सरकार के खिलाफ जमकर प्रचार किया और अंत में पार्टी को जीत दिलाई। पार्टी की जीत होने पर सचिन पायलट ने इसका सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश की और मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी कर दी।

हालाँकि, बाद में दोनों के बीच मनमुटाव सार्वजनिक हो गया। उस समय पायलट के समर्थकों ने कहा कि पार्टी में 2.5-2.5 साल का फॉर्मूला तय किया गया था, लेकिन गहलोत उससे नहीं मान रहे हैं। साल 2020 में पायलट ने अपने गुट के 18 विधायकों के साथ मिलकर पार्टी से बगावत भी कर दी। इसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से बर्खास्त कर दिया।

इस दौरान सीएम गहलोत ने उन्हें निकम्मा और नकारा तक कह दिया था। सीएम गहलोत ने कहा था, “मैं जानता था कि वो (सचिन पायलट) निकम्मा है, नकारा है, कोई काम नहीं करता है। लेकिन मैं यहाँ बैंगन बेचने नहीं आया हूँ, मुख्यमंत्री बनकर आया हूँ। हम नहीं चाहते थे कि दिल्ली में लगे कि राजस्थान में कल्चर लड़ाई-झगड़ा वाला है।”

बाद में पायलट प्रियंका गाँधी से अपनी पैरवी लगवाने लगे और मामला शांत हुआ। पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सचिन पायलट राहुल गाँधी के साथ नजर आए थे। इस दौरान सीएम गहलोत ने पायलट को गद्दार कह दिया था। उन्होंने कहा था कि एक गद्दार मुख्यमंत्री नहीं बन सकता।

सीएम गहलोत ने कहा था, “एक गद्दार मुख्यमंत्री नहीं हो सकता। हाईकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बना सकता। वे ऐसे आदमी हैं, जिनके पास 10 विधायक नहीं हैं। उन्होंने बगावत की। उन्होंने पार्टी को धोखा दिया। वह गद्दार हैं। गद्दार को कोई विधायक स्वीकार नहीं करेगा।”

उन्होंने आगे कहा था, “देश के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि एक पार्टी अध्यक्ष ने अपनी ही सरकार को गिराने की कोशिश की। इसके लिए बीजेपी की तरफ से पैसा दिया गया था। बीजेपी के दिल्ली दफ्तर से 10 करोड़ रुपए आए थे। इसका मेरे पास सबूत है। इन पैसों में से किसे कितना दिया गया, ये मुझे नहीं पता।” 

पिछले साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अशोक गहलोत का नाम आया था। इस दौरान गहलोत ने अपने किसी नजदीकी को मुख्यमंत्री पद देने की कोशिश की। जब सचिन पायलट ने बनाया और हाईकमान ने पायलट का साथ दिया, तब गहलोत ने पार्टी अध्यक्ष के प्रत्याशी पद से अपना नाम वापस लेकर सचिन पायलट के दाँव को फेल कर दिया था।

पायलट को पता है कि वे राजनीति में अशोक गहलोत से नहीं जीत सकते और उनके रहते मुख्यमंत्री भी नहीं बन सकते। अशोक गहलोत के सामने वे हर बार मात खाए हैं। ऐसे में वे अन्य विकल्प भी तलाश रहे हैं। ज्योतिर्रादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस से भाजपा में आने के बाद पायलट को भी लुभाने की कोशिश हुई थी।

अब माना जा रहा है कि पायलट के रूख के कारण पार्टी हाईकमान भी नाराज है और उन्हें किसी तरह का समर्थन नहीं देगा। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पायलट चुनाव से पहले या तो भाजपा में शामिल हो सकते हैं या फिर नई पार्टी बना सकते हैं।

इसीलिए वे भ्रष्टाचार के नाम पर अनशन करके इसकी भूमिका बना रहे हैं। हालाँकि, राजनीति दाँव-पेंच का खेल और इसमें कभी सभी पक्ष विजयी हो जाते हैं तो कभी सभी पक्ष हार जाते हैं। हालाँकि, जीतकर भी हार जाते हैं और हारकर भी जीत जाते हैं। सचिन पायलट मामले में अभी तक उन्हें सिर्फ अपनी हार ही देखने को मिली है।

मनीष कश्यप मामले में बिहार-तमिलनाडु सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, एक हफ्ते में माँगा जवाब: अब 21 अप्रैल को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (11 अप्रैल 2023) को बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप (Manish Kashyap) की याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस कृष्ण मुरारी और संजय करोल की पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इस मामले में केंद्र, बिहार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2023 को होगी।

मनीष कश्यप ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अपने खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में दर्ज एफआईआर को एक साथ करने की माँग की है। याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिसमें बिहार में तीन और तमिलनाडु में दो प्राथमिकी शामिल हैं। साथ ही अंतरिम जमानत की माँग भी की है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान कश्यप की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि वह दो राज्यों में पाँच मुकदमों का सामना कर रहे हैं। दवे ने कहा, “तमिलनाडु में दो प्राथमिकी दर्ज की गई है और बिहार में एक जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। एक अपराध के मामले में कई कार्रवाई नहीं की जा सकती। अर्नब गोस्वामी मामले में भी ऐसा ही किया गया था।” दवे ने कहा कि कई एफआईआर दर्ज होने के कारण कश्यप को तमिलनाडु ले जाया गया है, लेकिन उन्हें वहाँ की भाषा समझ नहीं आती। वहीं तमिलनाडु राज्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि फर्जी खबरों के कारण कई मौतें हुईं। यह कोई छोटी बात नहीं है।

बता दें कि मनीष कश्यप पर तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों पर हमले को लेकर फर्जी वीडियो बनाने का आरोप है। वहीं मनीष कश्यप का कहना है कि नीतीश सरकार के इशारे पर उनके खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में झूठी FIR दर्ज कराई गई है। कश्यप ने 18 मार्च को बिहार के बेतिया में सरेंडर किया था। इसके बाद 29 मार्च को तमिलनाडु पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। मदुरै की एक अदालत में पेश करने के बाद उन्हें तीन दिनों की रिमांड पर भेजा गया था। रिमांड खत्म होने के बाद फिर से उनकी मदुरै जिला कोर्ट में पेशी हुई। जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल वह 19 अप्रैल 2023 तक न्यायिक हिरासत में है। उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

‘सर पर डंडा मारा, चाकुओं से गोदा, मारते-मारते ले गए मस्जिद…’: छत्तीसगढ़ में मार डाले गए भुनेश्वर के परिजनों को सुनिए, कहा- पुलिस हत्यारों को उकसा रही थी

छत्तीसगढ़ के मेतरा जिले में शनिवार (8 अप्रैल, 2023) को अब्दुल, अकबर, इस्माइल समेत 11 हमलावरों ने भुनेश्वर साहू नाम के युवक की हत्या कर दी। यहाँ के साजा विधानसभा में आने वाले गाँव बिरनपुर में दो स्कूली छात्रों के बीच साइकिल की टक्कर से इस झगड़े की शुरुआत हुई थी। हमले में तलवारों और काँच की की बोतल का इस्तेमाल हुआ था। अब साहू के परिवार वालों ने पूरी घटना का खुलासा किया है। आरोप है कि हमलावरों को पुलिस का सहयोग था और महिलाओं को भी निशाना गया था।

भिलाई टाइम्स के यूट्यूब चैनल पर भुनेश्वर के पिता और भाई का इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है। भुनेश्वर के पिता ने एक कबाड़ी की दुकान की तरफ इशारा करते हुए बताया कि खाली समय में वहाँ 5-6 लड़के बैठ कर गपशप किया किया करते हैं। उन्होंने बताया कि कबाड़ी की दुकान पर जमा लोग हिन्दू-मुस्लिम बच्चों के झगड़े को और ज्यादा बढ़ावा देते हुए उकसाते हैं। घटना के दिन उसी दुकान के पास एक बच्चे की पिटाई हुई थी। आरोप है कि मना करने के लिए पीड़ित बच्चे की माँ जब कबाड़ी की दुकान पर गई तब उनकी भी पिटाई की गई थी।

मृतक भुनेश्वर के पिता ने आगे बताया कि घटना के दिन गाँव के ही कुछ हिन्दू समाज के लोग ज्योति विसर्जन कर के लौटे थे। उन्होंने कबाड़ी की दुकान पर जमा लोगों द्वारा महिला की पिटाई पर नाराजगी जताई और एक मीटिंग आयोजित की। घटना के विरोध में हिन्दू समाज की मीटिंग हुई थी। मृतक भुनेश्वर ट्रैक्टर चलाने का काम करता था जो हिन्दू समाज की मीटिंग में शामिल हुआ था। भुनेश्वर के पिता का आरोप है कि इसी मीटिंग में मुस्लिमों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। उन्होंने मुस्लिमों के साथ पुलिस वालों के भी होने का दावा किया।

भुनेश्वर के पिता ने आगे बताया कि दोनों तरफ से हुई पत्थरबाजी के दौरान हमलावरों ने भुनेश्वर को खींच लिया। हिन्दुओं की मीटिंग में सभी निहत्थे बताए जा रहे हैं जिसमें से अधिकतर बीच-बचाव में जुटे थे। भुनेश्वर की मौत की जानकारी उनके पिता को फोन पर मिली। उनका दावा है कि जब वो लाश लेने के लिए जाने लगे तो हिन्दू समाज के लोग उन्हें ही डराने लगे और जाने से रोकने लगे। अंत में खुद पीड़ित पिता और उनकी पत्नी ही अपने बच्चे को बेहोशी की हालत में घर लाए।

भुनेश्वर के पिता ने एम्बुलेंस आने में डेढ़ घंटे की देरी होने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा, “पुलिस वाले तो उनकी ही तरफ थे।” भुनेश्वर के भाई कृष्णा साहू ने भी खुद को हमलावर भीड़ द्वारा चोटिल बताया। उन्होंने बताया, “हिन्दू समाज को पूरा गाली दी गई। जब लड़का लोग के हाथ काटिस वतने समय पुलिस कहाँ गइलिस (जब बच्चे लोगों का हाथ काटा गया था तब पुलिस कहाँ थी)।” पुलिस को मुस्लिम पक्ष का ही सपोर्टर बताते हुए भुनेश्वर के भाई ने कहा, “पुलिस वाले ही उनको सहयोग किए। मारो इनको, ऐसा पुलिस वाले ही कहे थे।”

तेली को मारना है

मृतक के दाह संस्कार के दौरान उनके पिता ने बताया, “पहले से तैयारी थी। ‘तेली को मारना है’ जैसी बातें भी की जा रही थी।” वहीं मृतक के भाई ने किसी मस्जिद का जिक्र करते हुए बताया है कि हमलावरों ने पहले से ही ईंट-पत्थर जमा किए थे। पीड़ितों ने ये भी बताया कि भीड़ ने घेर कर डंडा मारा, चाकुओं से गोदा और फिर मारते-मारते ले गए।

‘हत्यारे मुस्लिम, घर-घर में अवैध हथियार’

एक रिपोर्ट में भाजपा सांसद विजय बघेल के हवाले से बताया गया है कि भुनेश्वर को मार कर मस्जिद के बगल फेंका गया था। भाजपा सांसद ने हमलावरों की तादाद अधिक होने और पुलिस द्वारा इसे कम दिखाने का भी आरोप लगाया है।

सांसद बघेल ने आगे कहा, “हत्या करने वाले मुस्लिम लोग हैं जो अपने घरों में दुबके पड़े हैं। घर-घर अगर छानबीन हो जिसके लिए हमने पुलिस को कहा है कि वहाँ पर मौत के औज़ार मिलेंगे। मौत का जखीरा मिलेगा। अवैध हथियार मिलेंगे। वहाँ पर अवैध रूप से ये लोग धंधा करते हैं। चोरी के सामान मिलते हैं। उस जगह पर जाने से दहशत महसूस होता है। ये लोग कौन हैं, कहाँ से आए और क्यों आए इसकी छानबीन होनी चाहिए। अगर इस पर शीघ्र कार्रवाई न हुई तो आंदोलन होगा।”

‘कड़ा भी पहनो, कटार भी चलाओ’: हिंदू लड़कियों से बोले रामभद्राचार्य, लव जिहाद पर कहा- विधर्मी गलत दृष्टि से देखें तो आँखें निकाल लो, मुकदमे का मैं देख लूँगा

तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने हिंदू लड़कियों को विधर्मी लोगों से सतर्क रहने और ‘लव जिहाद’ पर बड़ा बयान दिया है। सोशल मीडिया पर उनका वीडियो वायरल हो रहा है। उत्तर प्रदेश के आगरा में रामकथा सुनाने के दौरान उन्होंने मंगलवार (11 अप्रैल, 2023) को कहा, “हमारी हिंदू लड़कियों को विधर्मी लोग फँसा रहे हैं। बहनों, जो तुम्हारी ओर गलत दृष्टि से देखे, उसकी आँख निकाल लो। फिर जो मुकदमा होगा मैं देख लूँगा।”

रामभद्राचार्य ने अपनी बात को जारी रखते हुए हिंदू लड़कियों से अपनी इज्जत स्वयं बचाने और हाथ में कड़ा पहनने के साथ-साथ कटार चलाने का अभ्यास करने को भी कहा। उन्होंने आगे कहा, “हमने जातिवाद नहीं फैलाया। ये जातिवाद कुर्सी के भेड़िये नेताओं ने फैलाया है।”

जगदगुरु रामभद्राचार्य ने आरक्षण खत्म करने की माँग की और नेताओं को ललकारते हुए कहा, “मैं तुम लोगों को चुनौती देता हूँ। अगर माँ का असली दूध पिया है तो तुम जाति के आधार पर निश्चित आरक्षण समाप्त करवाओ। फिर जिसके यहाँ कहोगे, मैं रोटी खाने को तैयार हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामभद्राचार्य ने रामकथा सुनाने के दौरान यह भी कहा, “ऐसा कहा जा रहा है कि ब्राह्मणों ने जातिवाद को जन्म दिया। लेकिन हमने जातिवाद को जन्म नहीं दिया। बेईमान लोगों ने केवल वोट की राजनीति के लिए देश को बाँटा। अगर हमने जातिवाद फैलाया होता तो शबरी माता के झूठे बेर राम क्यों खाते? जब रामचरितमानस राष्ट्रीय ग्रंथ बनेगी, तभी समाज का सुधार हो सकेगा।”

गौरतलब है कि बीते दिनों तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने रामकथा के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन और 90 के दशक की घटनाओं को याद करते हुए कहा था, “हम 1990 की घटना को नहीं भूले हैं और न कभी भूल पाएँगे। हमने किसी का अपमान नहीं किया, लेकिन हमारे धर्मग्रंथों का अपमान हुआ। हिंदुत्व का भी अपमान हुआ।” रामभद्राचार्य ने कहा था, “निहत्थे राम भक्तों पर गोलियाँ चलाई गई थी। सरयू मैया खून से लाल हो गई थीं। कोठारी बंधुओं को घर से लाकर गोली मारी गई। हमको ऐसी समरसता नहीं चाहिए। मेरे लिए कहा जा रहा कि मैं भाजपा का एजेंट हूँ’ लेकिन मैं भाजपा का एजेंट नहीं हूँ। भाजपा मेरी एजेंट हो सकती है।”

कौन हैं जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य

जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य का असली नाम गिरधर मिश्रा है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जन्मे स्वामी रामानन्द सम्प्रदाय के 4 जगदगुरु रामानन्दाचार्यों में से एक हैं। 1988 से वह इस पद पर हैं। बताया जाता है कि जब वह 2 महीने के थे, तभी उनकी आँखों की रोशनी चली गई थी। इसके बावजूद वह 22 भाषाओं के जानकार हैं और अब तक कुल 80 पुस्तकों व ग्रंथों की रचना कर चुके हैं।