बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को जुमे की नमाज़ में बाद हंगामे की खबर है। बताया जा रहा है कि एक ही समुदाय के 2 पक्षों में हुई भिड़ंत के बाद 7 लोग घायल हुए हैं। घायलों में एक महिला भी शामिल है। हमलावरों ने लाठी-डंडों का भी प्रयोग किया है। मौके पर पहुँची पुलिस ने मामले को शांत करवाया और घायलों को अस्पताल भेजा है। दोनों ही पक्षों ने थाने में एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। शिकायत में जानलेवा हमले के साथ लूटपाट का भी आरोप है। अब तक 4 आरोपितों के हिरासत में होने की खबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुजफ्फरपुर के थानाक्षेत्र नगर का है। यहाँ के तिलक मैदान रोड पर शुक्रवार को जुमे की नमाज़ हो रही थी। इस बीच किसी बात पर वहाँ 2 पक्षों में झगड़ा होने लगा। कुछ ही देर में दोनों पक्षों से कई लोग जमा हो गए। कोई कुछ समझ पाता इस से पहले दोनों पक्षों में भिड़ंत हो गई। इस झड़प में महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले में बाँस और लाठियों का प्रयोग किया गया। इसके अलावा लात-घूँसे भी खूब चले। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दोनों पड़ोसी हैं, एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। दोनों पक्षों के बीच प्राथमिकी दर्ज की गई है एवं विधि सम्मत कार्रवाई भी की गई है।
— Muzaffarpur Police (@MuzaffarpurPol3) April 9, 2023
इस मामले में मुजफ्फरपुर पुलिस का कहना है कि दोनों पक्ष एक ही समुदाय से हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों तरफ से FIR दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है। घायलों में राजद नेता वसीम भी बताए जा रहे हैं। वसीम का आरोप है कि जब वो मस्जिद से नमाज़ पढ़ कर निकले तब उनके साथ मारपीट की गई। हमलावरों में उन्होंने मोहम्मद तैयब आज़ाद का नाम लिया है। बताया जा रहा है कि हमले की वजह राजद नेता वसीम द्वारा विपक्षियों के खिलाफ नगर निगम में किया गया कोई केस है। यह केस किसी अवैध तौर पर लगने वाले ठेले से जुड़ा हुआ है जिसे वापस लेने का वसीम पर दबाव बनाया जा रहा है। घायलों की हालत स्थिर है। पुलिस द्वारा मामले की जाँच की जा रही है।
समाज के एक बड़े तबके द्वारा मुगल शासन, खासकर कट्टरपंथी औरंगजेब को धर्मनिरपेक्ष बताने की कोशिश की जाती है। हालाँकि, इतिहास में ऐसे कई तथ्य अब भी मौजूद हैं, जो औरंगजेब के बारे में किए जाने वाले ऐसे दावों का खंडन करते हैं। उनमें एक साक्ष्य औरंगजेब का वो आदेश है, जिसे 9 अप्रैल को काशी सहित देश के सभी मंदिर को तोड़ने के लिए दिया गया था।
औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669 को हिंदुओं के मंदिरों के साथ-साथ विद्यालयों को भी गिराने का आदेश दिया। इस आदेश को काशी-मथुरा के मंदिरों से लेकर उसके सल्तनत के अधीन आने वाले सभी 21 सूबों में लागू किया गया था। मंदिरों को तोड़ने के साथ ही हिंदुओं को त्योहारों को मनाने एवं धार्मिक प्रथाओं को अपनाने पर भी रोक लगा दी गई थी।
The Islamic record of Maasir-i-Alamgiri states that on April 9, 1669, Aurangzeb had issued a ‘farman’ decree, “to governors of all the provinces to demolish the schools and temples of the infidels and strongly put down their teachings and religious practices.”
औरंगजेब के इस आदेश का जिक्र उसके दरबारी लेखक साकी मुस्ताइद खान ने अपनी किताब ‘मआसिर-ए-आलमगीरी’ में किया है। 1965 में प्रकाशित वाराणसी गजेटियर के पेज नंबर- 57 पर भी इस आदेश का जिक्र है। इतिहासकारों का मानना है कि इस आदेश के बाद सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केशवदेव समेत सैकड़ों मंदिरों को गिरा दिया गया।
औरंगजेब के आदेश के बाद समय-समय पर जिन मंदिरों को गिराया गया था उनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा के केशवदेव मंदिर, अहमदाबाद का चिंतामणि मंदिर, बीजापुर का मंदिर, वडनगर के हथेश्वर मंदिर, उदयपुर में झीलों के किनारे बने 3 मंदिर, उज्जैन के आसपास के मंदिर, सवाई माधोपुर में मलारना मंदिर, मथुरा में राजा मानसिंह द्वारा 1590 में निर्माण कराए गए गोविंद देव मंदिर आदि प्रमुख हैं।
औरंगजेब के आदेश पर ना सिर्फ मंदिरों को तोड़ा गया, बल्कि वहाँ लगाए गए शिलालेखों को भी नष्ट किया गया, ताकि हिंदू अपने वास्तविक इतिहास से हमेशा के लिए अनजान रह जाएँ। हिंदुओं को उनकी धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को आयोजित करने पर दंडित किया जाता था।
औरंगजेब को अपने हिंदू विरोधी फैसलों के लिए जाना जाता है। अपने शासन काल के 11 वर्ष में ‘झरोखा दर्शन’ पर प्रतिबंध लगा दिया था। झरोखा दर्शन राजाओं द्वारा अपने किले/महलों की बालकनी (झरोखा) से लोगों को संबोधित करने की दैनिक की क्रिया थी। इस दौरान जनता अपनी समस्या सीधे राजा से कहती थी और राजा उसका निवारण करते थे।
अपने शासन के 12वें वर्ष में औरंगजेब ने ‘तुलादान प्रथा’ पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। इस प्रथा के अंतर्गत राजा/महाराजा या किसी व्यक्ति को तराजू में एक तरफ बैठा दिया जाता था और उसके भार के बराबर अनाज आदि तौल कर गरीबों में बाँट दिया जाता था या पशु-पक्षियों को खिला दिया जाता था।
हालाँकि, इरफान हबीब जैसे इतिहासकार औरंगजेब के कट्टरपंथी स्वभाव को उदार दिखाने की कोशिश करते रहे हैं। वे मंदिर आदि तुड़वाना ताकत की निशानी का दिखावा बताते हैं। मुगलों के प्रति आदर का भाव रखने वाले इतिहासकार इरफान हबीब का कहना है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़वाए थे, क्योंकि उस दौरान कोई दूसरा राजा उस साम्राज्य को जीतता था तो वह सबसे पहले उस साम्राज्य के प्रतीक को खत्म करना चाहता था।
इरफान हबीब ने ब्राह्मण वंश के शुंग एवं पल्लव का उदाहरण दिया है। उनका कहना है कि मौर्य वंश के बाद जब शुंग वंश के राजा पुष्यमित्र ने सत्ता संभाला तो सैकड़ों बौद्ध मठों को नष्ट करवाया था और बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं की हत्या करवाई थी। उनका यह भी कहना है कि सन 642 में पल्लव राजा नरसिंहवर्मन ने चालुक्यों की राजधानी वातापी में गणेश के मंदिर को लूटा और उसके बाद तोड़ दिया था।
कथित इतिहासकार राजीव द्विवेदी तो यहाँ तक तर्क देते हैं कि औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को आमेर के राजा जयसिंह की निगरानी में गिरवाया था। द्विवेदी का यह तर्क पूर्वाग्रह और पक्षपात से जुड़ा हुआ नजर आता है।
क्या राजा जयसिंह की निगरानी में हुआ विश्वनाथ मंदिर विध्वंस?
राजीव द्विवेदी जैसे कथित इतिहासकारों का कहना है कि मंदिर गिराने का आदेश औरंगज़ेब ने जरूर दिया था, लेकिन मंदिर को गिराने का काम आमेर के राजा जय सिंह की देख-रेख में किया गया था। जिस समय औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को गिरवाया था, उससे पहले ही शिवाजी महाराज की मदद करने के कारण औरंगजेब उन्हें जहर देकर मरवा चुका था।
औरंगजेब ने मंदिरों को गिराने का आदेश 9 अप्रैल 1669 को दिया था। वहीं, औरंगजेब ने 8 सितंबर 1667 ईस्वी को बीजापुर से लौटते समय मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में राजा जय सिंह की हत्या अपने विश्वासपात्रों के जरिए जहर देकर करवा दी थी। इस तरह मंदिर विध्वंस के फरमान निकलने से दो साल पहले ही जय सिंह की मृत्यु हो चुकी थी।
दरअसल, दक्षिण में शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठों के शक्तिशाली होते जाने के कारण पूर्व के सभी अभियानों में सफल रहे आमेर के महाराजा जय सिंह के नेतृत्व में 1.40 लाख सैनिकों को औरंगजेब ने भेजा था। जयसिंह के साथ औरंगजेब ने दिलेर खान को भी भेजा था। यहाँ जयसिंह ने कूटनीति का परिचय देते हुए मुगलों की तरफ से शिवाजी के साथ पुरंदर की संधि कर ली। इससे शिवाजी महाराज को समय मिल गया।
11 जून 1665 को हुई पुरंदर की संधि होने के बाद राजा जयसिंह ने शिवाजी को औरंगजेब से मिलने की सलाह दी। साथ ही यह भी वचन दिया कि औरंगजेब उन्हें बंदी नहीं बनाएगा। बीजापुर अभियान में होने के कारण उन्होंने खत के जरिए इसकी जानकारी औरंगजेब और अपने बेटे राम सिंह को दी। हालाँकि, जैसे ही शिवाजी औरंगजेब से मिलने आगरा पहुँचे तो उन्हें उनके 9 साल के बेटे संभाजी के साथ बंदी बना लिया गया।
इससे जयसिंह बहुत दुखी और औरंगजेब से नाराज हुए। उन्होंने अपने वचन का पालन करने के लिए शिवाजी को मुक्त कराने की तरकीब निकालनी शुरू कर दी। उन्होंने अपने बेटे राम सिंह के साथ इसकी चर्चा की और अंत में बेटे की मदद से शिवाजी को कैद से भगा दिए। इससे औरंगजेब चिढ़ गया और जयसिंह की रास्ते में ही हत्या करा दी।
जय सिंह की निगरानी में काशी विश्वनाथ मंदिर गिराने की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है कि इसका पुनर्निर्माण अकबर के समय उनके पूर्वज राजा मानसिंह ने कराया था। इस तरह अपना वचन निभाने के लिए औरंगजेब की कैद से शिवाजी महाराज को भगाने वाले राजा जय सिंह अपने पूर्वज के किए धर्मार्थ कार्य को कभी मिटा नहीं सकते थे।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉक्टर कुलपति तिवारी कहते हैं कि हिस्ट्री ऑफ बनारस में उल्लेख है कि राजा मान सिंह व राजा टोडरमल मुंगेर (बिहार) की लड़ाई से दिल्ली लौटते समय काशी में अपने पितरों का श्राद्ध कर्म कराया। मंदिर निर्माण के लिए नारायण भट्ट ने मानसिंह से आग्रह किया। इसके बाद राजा मानसिंह ने अकबर से मंदिर बनाने के लिए फरमान जारी का आग्रह किया। फरमान जारी होने के बाद टोडरमल ने धन की व्यवस्था की और मंदिर का निर्माण हुआ।
औरंगजेब की क्रूरता छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने रची कहानी
इरफान हबीब की कहानी के अलावा, कुछ अन्य धर्मनिरपेक्षवादियों द्वारा काशी मंदिर को औरंगजेब द्वारा तोड़े जाने के पीछे ‘कच्छ की रानी’ की फर्जी कहानी बताई जाती है। इस कहानी में कहा जाता है कि रानी काशी दर्शन के लिए गई थीं। उस दौरान मंदिर के पुजारियों ने उनका अपमान किया। इसके बाद औरंगजेब ने इसे ढ़हाने का आदेश दिया था।
इरफान हबीब के अलावा, प्रोफ़ेसर हेरंब चतुर्वेदी और डॉक्टर विश्वंभर नाथ पांडे जैसे कथित हिंदू विरोधी इतिहासकार भी सीतारमैय्या की इस प्रोपगेंडा को सही मानते हैं और इसे खूब फैलाते भी हैं। पांडे ने तो अपनी पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति, मुग़ल विरासत: औरंगज़ेब के फ़रमान’ में सीतारमैय्या की किताब के हवाले से इसका जिक्र भी कर दिया है।
हेरंब चतुर्वेदी जैसे पूर्वाग्रही इतिहासकार यहाँ तक कह दिए जिस कच्छ की रानी के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारियों द्वारा दुर्व्यवहार करने की बात सीतारमैय्या ने लिखी है, वह कोई और आमेर की रानी थी। चतुर्वेदी के पास इस साबित करने का कोई तथ्य नहीं है। बस खुद को इतिहासकार मानकर ऐलान कर देना ही तथ्य को योग्य समझते हैं।
यहाँ चतुर्वेदी उस सीतारम्मैया की बात को अलग दिशा देकर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, जो खुद एक मौखिक बयान पर इस प्रोपगेंडा का अपनी किताब में छापा था। सीतारम्मैया ने ‘कच्छ की रानी’ वाली कहानी की एक मौलाना के कहने पर छापी थी। दूसरी बात, हेरंब चतुर्वेदी जैसे कथित इतिहासकारों को पता होना चाहिए कि कच्छ से आमेर की दूरी लगभग 900 किलोमीटर है।
‘कच्छ की रानी’ की कहानी का सबसे पहले उल्लेख कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे पट्टाभि सीतारमैय्या ने अपनी किताब में किया था। साल 1942 से 1945 तक जेल में रहने के दौरान सीतारमैय्या ने एक जेल डायरी लिखी थी, जो 1946 में ‘Feathers And Stones के नाम से छपी थी। इसमें सीतारम्मैया ने अपने एक मौलाना मित्र की पांडुलिपि का जिक्र करते हुए विश्वानाथ मंदिर को तोड़ने के आदेश का जिक्र किया था।
तेलुगु नियोगी ब्राह्मण परिवार में जन्मे सीतारम्मैया ने अपनी किताब ‘फीदर एंड स्टोन्स’ में लिखा था, “एक बार औरंगजेब बनारस के पास से गुजर रहे थे। सभी हिंदू दरबारी अपने परिवार के साथ गंगा स्नान और भोलेनाथ के दर्शन के लिए काशी आए। मंदिर में दर्शन कर जब लोगों का समूह लौटा तो पता चला कि कच्छ की रानी गायब हैं। हर जगह तलाश करने के बाद भी उनकी कोई जानकारी नहीं मिली।”
पटाभि सीतारमैय्या की किताब का एक पृष्ठ
सीतारमैय्या आगे लिखते हैं, “सघन तलाशी के बाद वह मंदिर में एक तहखाने का पता चला। दो मंजिला दिखने वाले मंदिर के तहखाने में जाने वाला रास्ता बंद मिला। दरवाजा तोड़ने पर वहाँ बिना आभूषण के रानी दिखाई दीं। पता चला कि यहाँ का महंत अमीर और आभूषण पहने श्रद्धालुओं को मंदिर दिखाने के नाम तहखाने में लाता था और लूटा लेता था।”
सीतारमैय्या ने उस किताब में दावा किया कि जब औरंगजेब को यह कहानी पता चली तो वह गुस्सा हो गया और उसने मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया। इसके बाद वहाँ मस्जिद बना दिया गया। हालाँकि, जिस नामचीन मौलाना की पांडुलिपि के आधार पर उन्होंने यह दावा किया था, उस मौलाना का उन्होंने कभी नाम नहीं उजागर किया और ना ही कभी उस पांडुलिपि को खुद देखा। इस तरह यह फर्जी कहानी प्रचलित हो गई।
बता दें कि सन 1948 से 1949 तक कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे सीतारम्मैया वही व्यक्ति हैं, जिन्हें 1939 में कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के खिलाफ महात्मा गाँधी ने खड़ा किया था। तब महात्मा गाँधी ने कहा था कि ‘पट्टाभि सीतारमैय्या की हार मेरी हार होगी’। फिर भी सीतारमैय्या नेताजी से जीत नहीं पाए थे।
कच्छ की रानी कभी काशी गई ही नहीं
आमतौर पर किसी राजा या रानी या फिर अन्य दरबारी से किसी पुजारी द्वारा इस तरह की दुस्साहस करने की कल्पना नहीं की जा सकती। राघव चेतन जैसे कुछ दरबारी अपवाद हैं, जो अपनी रानी के कारण अलाउद्दीन खिलजी के पास जा पहुँचा था। कुछ अन्य मंत्रियों या दरबारियों द्वारा साजिश रचने का इतिहास में जिक्र है, लेकिन मंदिर में बंधक बनाने की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।
शास्त्रों के अनुसार, राजा को धरती पर देवताओं का प्रतिनिधि माना गया है। राजा की आज्ञा ही ‘राजाज्ञा’ कहलाया है, जो राज्य के कानून का आधार होता था। इस राजाज्ञा से अछूता ना ही राजपरिवार का कोई सदस्य होता था और ना ही कोई ब्राह्मण या पुजारी। गलती करने पर सबको दंड दिया जाता था। हालाँकि, भारत में यह वर्ग ज्ञान परंपरा को समर्पित रहा है।
कुछ कालखंड में धर्म की आड़ में पुजारी शक्तिशाली जरूर बने, जिसके कारण देवदासी जैसी प्रथाओं ने जन्म लिया। हालाँकि, ये सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। बेबीलोन, साइप्रस, मिस्र आदि सभ्यताओं में पुजारी वर्ग के शक्तिशाली होने पर ऐसी ही प्रथा पनपी। हेरोडोटस ने इसका जिक्र किया है।
सीतारमैय्या की कहानी को लेकर कच्छ के राजपरिवार से जुड़े कृतार्थ सिंह जाडेजा का कहना है कि कच्छ के इतिहास में कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि राज्य की कोई रानी औरंगजेब के समय बनारस की तीर्थयात्रा गई हो। कृतार्थ सिंह के मुताबिक, उस समय कच्छ भौगोलिक तौर पर इतना कटा हुआ था कि काशी तो दूर, नजदीक के द्वारका की धार्मिक यात्रा पर भी जल्दी जाना संभव नहीं था।
इसका यह पहलू यह भी है कि कच्छ के तत्कालीन महाराजा महाराव तमाची ने औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को अपने यहाँ शरण दी थी। कच्छ के भुज शहर 1659 ईस्वी में दारा शिकोह को एक बगीचे में ठहराया गया था। इस बगीचे को आज भी दारावाड़ी के कहा जाता है। इस तरह अपने दुश्मन भाई को शरण देने वाले राज्य की रानी के लिए इतना भलमानस शायद ही दिखाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर कर्नाटक स्थित बांदीपुर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी में हिस्सा लिया। इस दौरान कैमरे के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसके बाद लोग उनके स्टाइलिश लुक्स को लेकर बातें कर रहे हैं। ये राष्ट्रीय उद्यान पश्चिमी घाट और मैसूरु-ऊटी हाइवे के बीच में स्थित है। बांदीपुर टाइगर रिजर्व नीलगिरि की जैविक गतिविधियों का एक अहम हिस्सा है। नागरहोले स्थित राजीव गाँधी नेशनल पार्क भी इसी का हिस्सा है।
ये नेशनल पार्क इसके उत्तर-पश्चिम में स्थित है, जबकि इसके दक्षिण में तमिलनाडु का मुदुमलै वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी है। वहीं इसके दक्षिण-पश्चिम में केरल का वायनाड वाइलफ्लाईफ़ सैंक्चुरी है। पीएम मोदी ने रविवार (9 अप्रैल, 2023) को जंगल सफारी का आनंद लिया। मुदुमलै टाइगर रिजर्व चामराजनगर के गूंदलुपेट तालुका और मैसूरु के एचडी कोटे और नंजनगुड तालुका का हिस्सा है। इसका गठन 19 फरवरी, 1941 को बनाए गए वेणुगोपाल वाइल्ड्लाइफ़ पार्क को विस्तारित कर के हुआ था।
1985 में इस पूरे क्षेत्र को विस्तार देकर 874.20 स्क्वायर फ़ीट का कर दिया गया। फिर इसे बांदीपुर नेशनल पार्क नाम दिया गया। आज 912.04 स्क्वायर किलोमीटर का क्षेत्र इस टाइगर रिजर्व के नियंत्रण में आता है। मोदी सरकार बाघों के संरक्षण को लेकर गंभीर है। 1973 में इसे ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत लाया गया था। मुख्य रूप से यहाँ बाघ और हाथी रहते हैं, लेकिन कई अन्य पशु-पक्षियों की भी भरमार है। पाइथन, भालू और गीदड़ भी यहाँ बहुतायत में हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोम्मन और बेल्ली से भी मुलाकात की, जिनके ऊपर ऑस्कर जीतने वाले डॉक्यूमेंट्री ‘The Elephant Whisperers’ बनी है। दोनों हाथियों का पालन-पोषण करते हैं। बांदीपुर टाइगर रिजर्व में पीएम मोदी ने 20 किलोमीटर की जंगल सफारी में हिस्सा लिया। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी द्वारा किए गए काम का श्रेय पीएम मोदी ले रहे हैं। तिगर रिजर्व के फिल्ड डायरेक्टर्स व अन्य अधिकारियों से भी पीएम मोदी ने मुलाकात की।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपत्तिजनक वेब सीरीज को बैन करने के लिए सरकार द्वारा जरूरी कदम उठाए जाने की घोषणा की है। यह ऐलान उन्होंने शनिवार (8 अप्रैल 2023) को भोपाल में किया। इस दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी मौजूद थे। शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश को धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व की जमीन बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के एक धार्मिक कार्यक्रम में CM शिवराज सिंह चौहान पांडाल में मौजूद श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि धर्मगुरु देवकीनंदन ठाकुर ने विवादित वेब सीरीज पर रोक लगाने की जरूरत पर बल दिया है क्योंकि इस से युवा अपनी मूल संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसी के बाद उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य में आपत्तिजनक वेब सीरीज पर बैन लगाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।
#WATCH | Madhya Pradesh: You have said about web series…so for sure the government will try to save the young generation from being alienated from culture: Chief Minister Shivraj Singh Chouhan on action against ‘objectionable web series’ pic.twitter.com/mpsZmTKAZJ
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देवकीनंदन ठाकुर के इस कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की हैं। उन्होंने लिखा, “राधे राधे। आज दशहरा मैदान, भोपाल में पूज्य महाराज देवकीनंदन ठाकुर जी के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रभु से यही प्रार्थना है कि मेरे मध्य प्रदेश वासियों के जीवन का हर क्षण सुख, शांति एवं आनंद से भरा रहे।”
।। राधे राधे ।।
आज दशहरा मैदान, भोपाल में पूज्य महाराज श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 8, 2023
इस कार्यक्रम के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने आधुनिक शिक्षा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मॉर्डन शिक्षा नौनिहालों के भविष्य को खराब कर रही है। स्कूलों में फ़िल्मी गानों पर बच्चों को डांस कराए जाने के कल्चर पर भी देवकीनंदन ठाकुर ने आपत्ति जताई और इसे बंद करने की माँग की है।
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी OTT प्लेटफार्म पर बढ़ती अश्लीलता और आपत्तिजनक दृश्यों पर नाराजगी जताई थी। तब उन्होंने कहा था कि अश्लीलता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (8 अप्रैल 2023) को चेन्नई दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी भाजपा के एक दिव्यांग कार्यकर्ता के साथ खुद आगे बढ़ कर सेल्फी ली। इस सेल्फी को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर किया है। दिव्यांग कार्यकर्ता का नाम थिरु एस मणिकंदन है। मणिकंदन की कहानी ट्विटर पर शेयर करते हुए मोदी ने खुद को गौरवान्वित बताया है। सेल्फी की यह तस्वीर वायरल हो गई है और सोशल मीडिया के कई यूजर्स इस पर मोदी की तारीफ कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस फोटो को ‘स्पेशल सेल्फी’ और इरोड के रहने वाले मणिकंदन को गौरवशाली कार्यकर्ता करार दिया है। वह भाजपा में बूथ अध्यक्ष के पद पर हैं। मोदी के मुताबिक मणिकंदन दुकान चलते हुए कमाई का एक हिस्सा भारतीय जनता पार्टी को दान भी करते हैं। PM मोदी ने आगे लिखा, “मुझे ऐसी पार्टी में होने पर गर्व महसूस होता है जहां श्री एस मणिकंदन जैसे लोग मौजूद हैं।” अंत में मणिकंदन की विचारधारा को सभी के लिए प्रेरणा देने वाला बताते हुए मोदी ने उन्हें भविष्य की शुभकामना दी है।
I feel very proud of being a Karyakarta in a Party where we have people like Thiru S. Manikandan. His life journey is inspiring and equally inspiring his commitment to our Party and our ideology. My best wishes to him for his future endeavours. pic.twitter.com/4S6FryHqCq
प्रधानमंत्री ने यह ट्वीट अंग्रेजी और तमिल दोनों भाषाओं में किया है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल होने के बाद तमाम यूजर्स ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है। उन्होंने इसे संवेदना और मानवीयता जैसे शब्दों से सम्बोधित किया है। एडवोकेट आशुतोष दुबे ने खुद को भावुक बताते हुए लिखा, “यह अंदाज़ हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के देख कर हम गर्व से कहते हैं हाँ ये भारत के प्रधानमंत्री हैं।” मोटिवेशनल स्पीकर अमित शर्मा ने लिखा, “यही तो मोदी जी की खासियत है वो लोगों के कितने करीब हैं। नहीं तो इस से पहले जितने भी प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री को छोड़ कर किइस ने देश के बारे में नहीं सोचा।”
सेल्फी पर सोशल मीडिया रिएक्शन
सुनील शर्मा ने लिखा, “आपकी देशभक्ति, त्याग व समर्पण युगों-युगों तक समस्त देशवासियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। आप समाज के हर वर्ग से जुड़े हैं। हम आप पर गर्व करते हैं कि आप हमारे प्रधानमंत्री हैं।” शरण ने इस स्पेशल सेल्फी पर लिखा, “आपके बारे में जितना बोलूँ कम है। भगवान का कृतज्ञ हूँ जो आपके कार्यकाल को देखने का नसीब दिया। नमन है आपको। भगवान आपको स्वस्थ और लम्बी उम्र दे।”
मुस्लिमों के लिए पाक रमजान के महीने में इस्लामी आतंकियों ने अफ्रीकी देशों में एक बार फिर नरसंहार को अंजाम दिया है। बुर्किना फासो में आतंकियों ने 44 लोगों की हत्या कर दी है। वहीं, नाइजीरिया में हुए हमले में कम-से-कम 80 और कांगो गणराज्य में करीब 20 लोगों को मार दिया गया है।
पूर्वी कांगो गणराज्य में आतंकियों ने बड़ा हमला किया है। इस हमले में कम-से-कम 20 लोग मारे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हथियारों से लैस बड़ी संख्या में आतंकी एक गाँव घुस गए और लोगों का कत्ल कर दिया। लोगों की हत्या के लिए आतंकियों ने चाकू का इस्तेमाल किया। इस हमले की जिम्मेदारी कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली है।
Around 20 people killed in an attack on a village in eastern Democratic Republic of Congo; Islamic State claimed responsibility for the attack, Reuters reported
इलाके के सैन्य प्रशासक चार्ल्स ओमेगा ने कहा कि मुसंदबा गाँव से 20 लोगों के शव शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को बरामद किए गए। वहीं, एक स्थानीय कार्यकर्ता ने कहा कि अस्पताल में 22 शव लाए गए। शनिवार (8 अप्रैल 2023) को इस्लामी स्टेट ने इसकी जिम्मेदारी ली।
मारे गए लोगों में पुरुष और महिलाएँ हैं। ये सभी लोग किसान हैं। आतंकियों ने इन लोगों की गला काटकर हत्या की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में भीड़ लकड़ी के फ्रेम से बँधे एक व्यक्ति को घेर लेती है और फिर उसका गला काट दिया जाता है। इस तरह 20 लोगों के साथ यही अंजाम दिया गया था। ADF अब तक हजारों लोगों की हत्या कर चुका है।
हालाँकि, सेना और स्थानीय अधिकारियों ने पूर्वी कांगो में स्थित एक युगांडाई समूह एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) पर हत्या का आरोप लगाया है। ADF एक इस्लामी समूह है, जिसे यूगांडा और कांगो ने आतंकियों की सूची में डाला है। कांगो और यूगांडा में नरसंहार के लिए ADF कुख्यात है। साल 2019 में ADF इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बन गया।
इसी सप्ताह ADF ने इदुरी प्रांत में 30 लोगों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। पिछले महीने एक गाँव में आग लगाकर 39 लोगों को इस आतंकी संगठन ने मार दिया था। पिछले महीने संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने ADF के सरगना सेका मूसा बालुकु के बारे में सूचना देने वाले को 5 मिलियन डॉलर (लगभग 41 करोड़ रुपए) इनाम की घोषणा की थी।
बुर्किना फासो में जिहादियों ने 44 लोगों की हत्या की
आतंकियों द्वारा हमेशा नरसंहार झेलने के लिए अभिशप्त बने पश्चिमी अफ्रीकी देश बुर्किना फासो के उत्तरी इलाके में जिहादियों ने दो गाँवों में हमले किए। इन हमलों में कम-से-कम 44 लोगों के मारे जाने की खबर है। बुर्किना फासो की सरकार ने बताया कि कोराकौ में 31 और तोंडोबी में 13 लोगों की हत्या की गई है।
साहेल क्षेत्र के गवर्नर लेफ्टिनेंट कर्नल पीएफ रोडोल्फ सोरगो ने कहा कि आतंकियों ने सेनो प्रांत के कूराकू और तोंदोबी गाँवों पर हमला किया। इन हमलों को ‘घृणित तथा बर्बर‘ बताया और कहा कि सरकार इलाके में शांति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गुरुवार (6 अप्रैल 2023) की शाम को हथियारों से लैस बड़ी संख्या में इस्लामी आतंकी गाँवों में घुस आए और लोगों पर अंधाधुन फायरिंग करने लगे। इसमें कम से कम 44 लोग मारे गए। मृतकों के शव अगले दिन मिला।
स्थानीय लोगों कहना है कि कुछ दिन पहले मवेशी चुराने की कोशिश करने वाले दो जिहादियों को गाँव वालों ने मार दिया था। इसके प्रतिशोध में इस गाँव को निशाना बनाया गया था। बता दें कि फरवरी 2023 में देस के उत्तरी इलाके देउ पर हमला कर आतंकियों ने 51 सैनिकों को मार दिया था। साल 2015 से अब तक आतंकियों ने 10,000 से अधिक लोगों की हत्या कर दी है।
नाइजीरिया में 80 हत्या और 80 का अपहरण
अफ्रीकी देश नाइजीरिया में आतंकियों ने शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को वसूली के लिए 80 लोगों का अपहरण कर लिया। इनमें अधिकतर महिलाएँ और बच्चे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना जमफारा के त्सफे क्षेत्र के वानजमाई गाँव में हुआ। यह वह इलाका है कि जहाँ आतंकी अपहरण की घटना को सबसे अधिक अंजाम देते हैं।
दूसरी तरफ देश के एक अन्य हिस्से में अंधाधुन फायरिंग कर बंदूकधारियों ने कम-से-कम 30 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) की देर शाम को उत्तर-मध्य नाइजीरिया में स्थित विस्थापित लोगों के एक शिविर पर हमला कर दिया गया है।
पुलिस अधिकारी सेवेसी एनेने ने कहा कि बंदूकधारियों ने बेन्यू राज्य के मगबान गांव में नागरिकों पर हमला किया। यह भी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि हमला किसने किया है, लेकिन माना जाता है कि चरमपंथी इस्लामी ग्रुप फुलानी द्वारा इसे अंजाम दिया गया है। इसके एक दिन पहले उमाजिदी गाँव में हमला कर 50 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में मामूली विवाद के चलते मुस्लिमों ने तलवार से हमला कर एक हिंदू युवक की हत्या कर दी। हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों के बीच हुए इस विवाद में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालात से निपटने के लिए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। घटना शनिवार (8 अप्रैल, 2023) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा के बिरनपुर गाँव का है। वहाँ दो स्कूली छात्रों के बीच साइकिल की टक्कर हो गई थी। इसको लेकर एक मुस्लिम युवक ने एक हिंदू छात्र के हाथ पर काँच की बोतल से हमला कर दिया। इस हमले में हिंदू छात्र का हाथ फैक्चर हो गया। घटना की जानकारी दोनों छात्रों के घर पर पहुँचने से विवाद और बढ़ गया। मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के घर में घुसकर तलवार से हमला कर दिया। हमले में भुनेश्वर साहू नामक व्यक्ति की मौत हो गई।
साजा पुलिस थाने के बीरनपुर में एक बच्चे से मारपीट की घटना सामने आई थी जिसके बाद 2 पक्षों में झड़प हुई। झड़प में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर शांति बनाने की कोशिश कर रही थी कि तभी पुलिस पर भी हमला हुआ। हमले में 3 पुलिस कर्मी घायल हुए: बेमेतरा SP,छत्तीसगढ़(1/2) pic.twitter.com/LxD4gQO3TU
हिंदू और मुस्लिमों के बीच हुए इस विवाद में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए साजा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। वहीं गंभीर रूप से घायलों को राजधानी रायपुर रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलने पर मामले को शांत कराने के लिए पुलिस जब बिरनपुर गाँव पहुँची तो मुस्लिमों ने पुलिस टीम पर भी हमला कर दिया। इस हमले में सब इंस्पेक्टर बीआर ठाकुर समेत 3 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
4 महीने पुराने मामले को कहा जा रहा विवाद की जड़
बिरनपुर गाँव में करीब 4 महीने पहले भी सांप्रदायिक विवाद हुआ था। दरअसल, तब एक मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की से शादी कर ली थी। हिंदू संगठनों ने इस शादी का विरोध किया था। कहा जा रहा है कि इस शादी को लेकर दोनों पक्षों के बीच झगड़ा भी हुआ था। हालाँकि, उस समय यह झगड़ा शांत हो गया। लेकिन गाँव में हिंदू और मुस्लिमों के बीच हुआ यह विवाद खाई में बदल गया। इसके बाद अब साइकिल की टक्कर की टक्कर के मामूली विवाद में मुस्लिमों ने हिंदू की हत्या कर दी।
धारा 144 लागू, छावनी में तब्दील हुआ बिरनपुर
रिपोर्ट्स में जलील खान, नवाब खान, रसीद खान, बसीर खान, रसीद खान, शेरा खान, अब्दुल खान, अकबर खान, नाजीर खान, जनाब मोहम्मद, अयूब खान, आलीम खान, शकील खान, इस्माइल खान, जाहेद खान, कलाम खान, अनवर खान, हाफीज खान, अमीर खान, जूदगु खान को हत्या और हमला करने का आरोपित बताया जा रहा है। पुलिस 9 आरोपितों को गिरफ्तार चुकी है। अन्य की तलाश की जा रही है। फिलहाल गाँव मे धारा 144 लागू कर दी गई है। जगह-जगह पुलिस की भी तैनाती की गई।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने NCERT की किताबों से मुगलों के चैप्टर हटाए जाने पर प्रतिक्रिया दी है। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि मुगलों का इतिहास नहीं मिटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि किताबों से मुगलों के चैप्टर भले हटा दिए गए हों लेकिन लोग उन मुगल शासकों को कैसे भूलेंगे जिन्होंने हम पर 800 सालों तक हुकूमत की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग बाबर, अकबर, शाहजहाँ, औरंगजेब और जहाँगीर को कैसे भूलेंगे? जब लोग ताजमहल देखने जाएँगे तो क्या बताया जाएगा इसे किसने बनवाया? हुमायूँ के मकबरे और लाल किले को कैसे छिपाएँगे? एनसी अध्यक्ष ने कहा कि वे लोग अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। हम रहें न रहें इतिहास रहेगा।
J&K | History cannot be erased. How can you forget Shah Jahan, Akbar, Humayun or Jahangir? During the 800 years of rule (by the Mughals), no Hindu, Christian or Sikh ever felt threatened. How to hide Red Fort, Humayun’s Tomb? It (centre) is shooting itself in the foot: NC chief… pic.twitter.com/Bz6d0qXAhc
एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में हुए इस बदलाव का कई मुस्लिम नेता विरोध कर चुके हैं। 3 अप्रैल को सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा था कि मुगलों ने लंबे समय तक हिंदुस्तान में राज किया है। मुगलों का इतिहास पूरी दुनिया में पढ़ाया जाता है। देश की किताबों से मुगलों की जानकारी हटाने से कुछ नहीं होगा। महमूद ने आगे कहा था कि मुगलों ने भारत को ताजमहल, लाल किला, और कुतुब मीनार जैसी इमारतें दी हैं।
बता दें कि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 12वीं के पाठ्यक्रम में कई बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव इतिहास, नागरिक शास्त्र और हिन्दी की किताबों में हुआ है। इतिहास की किताब से मुगल इतिहास से जुड़ी जानकारी हटाई गई है। वहीं हिंदी के पाठ्यक्रम से कविताएँ और पैराग्राफ हटाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा 10वीं और 11वीं के पाठ्यक्रम से भी मुगल इतिहास से जुड़ी जानकारी हटाई गई है। सिलेबस में जो भी बदलाव किया गया है उसे मौजूदा शैक्षणिक सत्र यानी 2023-24 से ही लागू कर दिया जाएगा।
अडानी समूह को लेकर विपक्षी एकता में फूट पड़ती दिख रही है। शरद पवार के हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के आधार पर अडानी समुह के खिलाफ JPC की माँग पर असहमति जताए जाने के बाद कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा ने उनपर जबरदस्त हमला बोला है। लांबा ने शरद पवार के लिए बिना नाम लिए लालची और चोरों को बचाने वाले चौकीदार जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है।
शनिवार शाम को कॉन्ग्रेस नेत्री ने ट्विटर पर शरद पवार और गौतम अडानी की तस्वीर पोस्ट की। उन्होंने लिखा, “डरे हुए लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं। देश के लोगों की लड़ाई एक अकेला राहुल गाँधी लड़ रहा है। पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी।”
डरे हुए – लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं – देश के लोगों की लड़ाई एक अकेला @RahulGandhi लड़ रहा है – पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी.#Modanipic.twitter.com/JNt88bjTNU
दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के नेतृत्व में विपक्षी दल अडानी ग्रुप के खिलाफ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जाँच की लगातार माँग करते आ रहे हैं। इस पर शरद पवार ने 7 अप्रैल, 2023 को एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि वह इस मामले पर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष द्वारा संसद को ठप करने से सहमत नहीं हैं। पवार ने कहा कि इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया गया। इनके (हिंडनबर्ग) बारे में हमने कभी नहीं सुना। उनकी पृष्ठभूमि क्या है? जब वे ऐसे मुद्दे उठाते हैं जो पूरे देश में हंगामा खड़ा कर देते हैं तो इसकी कीमत देश की अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ती है।
शरद पवार के बयान के बाद बाद कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा था कि शरद पवार और उनकी पार्टी इस मुद्दे पर अलग विचार रख सकती है लेकिन विपक्षी के अन्य 19 दल इस मुद्दे पर एक हैं।
शरद पवार के बाद उनके भतीजे और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) विधायक अजित पवार ने शनिवार (8 अप्रैल, 2023) को EVM मामले में अपनी पार्टी के सहयोगी दलों से अलग राय रख दी। EVM से छेड़छाड़ के तमाम आरोपों को उन्होंने निराधार बताते हुए कहा कि ऐसा करना सम्भव ही नहीं है। अजित पवार ने यह भी कहा कि EVM पर सवाल वही उठाते हैं जो इलेक्शन हार जाते हैं। साथ ही पवार ने कॉन्ग्रेस, तृणमूल और JMM पार्टी की सरकारों के गठन में भी EVM से हुए चुनाव को याद रखने की नसीहत दी।
इसके बाद शाम को कॉन्ग्रेस नेता अलका लांबा का गुस्से से भरा ट्वीट सामने आया था। राहुल गाँधी समेत कॉन्ग्रेस के अन्य नेता और कार्यकर्ता अब भी अडानी को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
सिंगापुर के एक शॉपिंग मॉल के बाहर सीढ़ियों से गिरने के बाद भारतीय मूल के एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान थेवंद्रन शनमुगम (Thevandran Shanmugam) के रूप में हुई। आरोप है कि मुहम्मद अफजरी अब्दुल काहा नामक व्यक्ति ने थेवंद्रन को सीढ़ियों से धक्का दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, थेवेंद्रन शनमुगम मार्च में सिंगापुर के ऑर्चर्ड रोड स्थित कॉनकॉर्ड शॉपिंग मॉल गए थे। यहाँ मॉल के बाहर बनी सीढ़ियों से मुहम्मद अफजरी अब्दुल काहा नामक व्यक्ति ने थेवंद्रन को धक्का दे दिया। इसके बाद इलाज के लिए उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। जहाँ हुई जाँच में उनके सिर पर फ्रैक्चर पाए गए। इलाज के दौरान हॉस्पिटल में ही थेवेंद्रन शनमुगम की मौत हो गई। शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) शाम मंडई श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
थेवेंद्रन शनमुगम की हत्या का आरोपित मुहम्मद अजफरी अब्दुल काहा पहले भी जेल जा चुका है। सजा में छूट मिलने के बाद वह जेल से बाहर आया था। इसके बाद अब उसने इस घटना को अंजाम दिया है। हालाँकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपित अब्दुल काहा थेवेंद्रन को जानता था या नहीं। शॉपिंग मॉल के बाहर जहाँ यह घटना हुई है वहाँ कई नाइट क्लब और बार हैं। हालाँकि, नाइट क्लब ने कहा है कि जिस दिन हत्या हुई, उस दिन थेवेंद्रन क्लब नहीं आए।
मुहम्मद अजफरी अब्दुल काहा को हो सकती है 10 की जेल
थेवेंद्रन शनमुगम की हत्या के आरोपित मुहम्मद अजफरी अब्दुल काहा को अदालत दोषी करार देती है तो उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है। यही नहीं, उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। दोषी पाए जाने पर उसे 178 दिनों तक की अतिरिक्त सजा भी हो सकती है। सिंगापुर के कानून के अनुसार, एक कैदी को अपनी सजा का एक हिस्सा जेल से बाहर बिताने की अनुमति दी जाती है। इसके लिए छूट का आदेश जारी किया जाता है।