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‘जानबूझकर रामनवमी पर दंगा, पुलिस-प्रशासन असली दोषी’: बंगाल हिंसा पर पूर्व HC जज वाली फैक्ट फाइंडिंग टीम ने बताया, कहा- NIA करे जाँच

देशवासी इस बात अंदेशा जता रहे थे कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार नहीं चाहती कि रामनवमी पर हुई हिंसा की सही जानकारी सामने आए। इसके पीछे प्रमुख वजह यह थी कि मानवाधिकार संगठन की फैक्ट फाइंडिंग टीम को घटनास्थल पर जाने से पुलिस बार-बार रोक रही थी।

अब टीम ने फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस अंदेशा को सही साबित किया है। मानवाधिकार संगठन के 6 सदस्यीय टीम के अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा सुनियोजित थी। इसके लिए जानबूझकर उकसाया गया और दंगे भड़काए गए थे।

पूर्व जज ने रेड्डी ने रविवार (9 अप्रैल 2023) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “रिशड़ा और शिबपुर हिंसा मामलों की NIA जाँच यह जानने के लिए जरूरी है कि क्या ये दंगे सुनियोजित तरीके से अंजाम किए गए थे। स्पष्ट बिंदु हैं कि दोनों मामलों में घटना के लिए पुलिस जिम्मेदार है।

फैक्ट फाइडिंग समिति के सदस्य और सेवानिवृत IG (क्राइम) राजपाल सिंह ने कहा, “असली अपराधी पुलिस और प्रशासन हैं। प्रशासन व्यवस्था सुधारने में नाकाम रहा है। निर्दोष लोगों पर मामला दर्ज किया जा रहा है और मुख्य अपराधियों को शरण दी जा रही है।”

दरअसल, जब यह टीम हिंसा प्रभावित इलाकों में लोगों से मिलकर सच्चाई जानने के लिए जा रही थी, तब पुलिस अधिकारियों ने इन्हें रास्ते में रोक दिया था। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि इलाके में CrPC की धारा 144 लगी हुई है। इसलिए वे आगे नहीं जा सकते।

टीम के सदस्यों के एक बार नहीं बल्कि बार-बार और कम-से-कम तीन पर रोका गया। इस दौरान पुलिस ने समिति के सदस्यों के साथ बदतमीजी भी की थी। तब समिति के सदस्यों ने कहा था कि इलाके में धारा 144 जैसी स्थिति नहीं दिख रही है। इसका बहाना बनाकर पुलिस उन्हें जाने से रोक रही है, ताकि सच्चाई बाहर ना आ सके।

टीम के एक सदस्य ने कहा था कि पुलिस ने उन्हें रोका था। उन्होंने कहा कि वे लोग घायलों से बात कर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने जा रहे थे। टीम के सदस्यों ने ये भी कहा था कि 8 अप्रैल 2023 को भी रिसड़ा जाने के दौरान रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। समिति ने कहा था कि कहा कि बंगाल की ममता सरकार राज्य की जनता के बारे में कुछ नहीं सोचती।

मानवाधिकर संगठन की फैक्ट फाइंडिग समिति के अलावा, इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) को भी दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा करने से रोक दिया गया था। इस फ्रंट के सदस्यों ने भी कहा था कि कुछ राजनीतिक ताकतें तनाव और हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही हैं। कुछ लोगों ने यहाँ अशांति फैलाने की कोशिश की।

‘मुगल महान, हिंदुओं ने बौद्ध मंदिर तोड़े’: TV पर मुगलों के ‘प्रवक्ता’ राजदीप सरदेसाई को साथी पत्रकार गौरव सावंत ने धोया, याद दिलाया कैसे मारे गए 40000 हिंदू

NCERT किताबों में मुगल इतिहास पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में हर न्यूज रूम में इस पर बहस हो रही है। एक पक्ष का कहना है कि स्कूली शिक्षा में मुगलों के बारे में पढ़ाया जाना अनिवार्य होना चाहिए ताकि पता चले कि उन्होंने भारत के लिए कितना कुछ किया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि मुगलों का इतिहास शिक्षा का हिस्सा हो लेकिन उसे बिन किसी तोड़-मरोड़ के पेश किया जाए ताकि ये पता चले कि मुगलों ने भारत में कितनी तबाही मचाई।

अब यही बहस न्यूजरूम्स तक भी पहुँच गई है। इंडिया टुडे के एंकर व कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई भी ऐसी ही एक चर्चा में शामिल हुए जहाँ उन्होंने अपने ‘प्रोपेगेंडा’ को गोल-मोल करके पेश करने का प्रयास किया। हालाँकि, इस दौरान शो में बैठे एंकर व मैनेजिंग एडिटर गौरव सावंत ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई। उन्हें तथ्यों से वाकिफ करवाते हुए बताया कि आखिर किस तरह मुगलों ने भारत में हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा था जिसे इतिहास की किताबों में चालाकी से छिपा दिया गया।

इंडिया टुडे के डेमोक्रेटिक न्यूजरूम शो में देख सकते हैं कि राजदीप सरदेसाई कहते हैं, “इतिहास की बातें इतिहासकारों के हाथ में छोड़ दी जानी चाहिए, न कि उसे राजनेताओं को लिखने को देना चाहिए, क्योंकि ऐसा होते ही इतिहास में जहर भर जाता है। आप इतिहास से मुगलों को नहीं मिटा सकते। उन्होंने भारत के बहुलवादी संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया है। आप उन्हें मिटाकर कैसे सिर्फ विलन दिखा सकते हैं। मैं नहीं कहता कि अकबर महान था। मगर कम-से-कम हमारे युवाओं को अकबर के बारे में पढ़ने तो दो। उन्हें देश के अन्य राजाओं के बारे में पढ़ने दो। लेकिन इस प्रकार चुन-चुनकर इतिहास मिटाना ताकि वो राजनैतिक एजेंडे को सूट करे वहाँ मुझे आपत्ति होती है। यही पाकिस्तान ने भी इतिहास के साथ किया था जिस वजह से वहाँ की पीढ़ी भारत पर निशाना साधती रहती है।”

गौरव सावंत ने लगाई राजदीप को लताड़

राजदीप की बात सुनने के बाद गौरव सावंत ने अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि वह राजदीप से सहमत हैं कि मुगल इतिहास को कभी भी बच्चों की किताबों से नहीं मिटाया जाना चाहिए। इस देश को पता होना चाहिए कि अकबर ने आखिर किया क्या था। पता होना चाहिए कि बाबर इस धरती का एक विध्वंसक था जो कहीं और से आया था। चित्तौड़ के युद्ध में कैसे 40 हजार हिंदू मारे गए थे और उनकी संख्या मापने के लिए उनके जनेऊ गिने गए थे।

उन्होंने कहा ये सब राजनेताओं द्वारा लिखित इतिहास की किताब में नहीं लिखा गया बल्कि इसे जेम्स स्टॉर्ट ने लिखा है। इसी तरह अकबर ने प्रयागराज और बनारस में क्या किया। बदायूनी को इसलिए ईनाम से नवाजा था क्योंकि उसने काफिरों के खून में अपने दाढ़ी भिगाने की बात कही थी। इसके बाद फादर मॉनसेराट ने भी लिखा है कि कैसे मुसलमानों ने हिंदुओं के मंदिरों और उसकी मूर्तियों को तोड़ा।

‘दीन-ए-इलाही’ की आड़ में छिपाया हिंदुओं का नरसंहार

कार्यक्रम में राजदीप सरदेसाई को कहते सुना जा सकता है कि गौरव नफरत फैलाने के अलावा भी बहुत सारा इतिहास है। उन्होंने दीन-ए-इलाही का उदाहरण रखकर इस्लामी बर्बरता पर सफाई देने का प्रयास किया। वहीं गौरव सावंत ने उन्हें ये कहकर चुप कराया कि मार्क्सवादियों द्वारा लिखे गए इतिहास में यही तो था कि उसमें दीन-ए-इलाही बता दिया गया, लेकिन ये नहीं बताया गया कैसे चित्तौड़ में हिंदू मरे। जहाँगीर के बारे में यह नहीं बताया गया कि कैसे उसने सिखों के पाँचवे गुरु को गर्म तवे पर बैठाकर मारा था।

राजदीप ने हिंदू राजाओं पर उठाए सवाल, मिला करारा जवाब

डेमोक्रेटिक न्यूजरूम की यह बहस यही नहीं रुकी। इस कार्यक्रम में राजदीप ने बहादुर शाह जफर को महान विद्वान बताया और ये भी कहा कि उन्होंने विलियन डार्लिम्पल के पॉडकास्ट से जफर के योगदान के बारे में जाना। कहा कि जिस दिल्ली में हम रहते हैं यहाँ भी मुगलों ने काफी योगदान दिया है। इस पर गौरव सावंत ने उनसे पूछा कि आखिर दिल्ली के बड़े-बड़े मंदिर कहाँ हैं। राजदीप ने आगे यहाँ तक कहा कि हिंदुओं ने बौद्धों के मंदिरों को तोड़ा जिसे सुन ट्विटर के ट्रू इंडोलॉडी अकॉउंट ने उन्हें चुनौती दी कि वो बस तीन ऐसे हिंदू राजाओं के बारे में बता दें, उसके बाद वह तमाम हिंदू राजओं के बारे में बताएँगे जिन्होंने बौद्ध धर्म के लिए कितना कुछ किया।

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ दिनों से ये चर्चा हो रही है कि 12 वीं की एनसीईआरटी किताबों से मुगल इतिहास के अध्याय हटाए जा रहे हैं। जबकि एनसीईआरटी के डायरेक्टर का कहना है कि ऐसा दावा करने वाले न्यूज आउटलेट सिर्फ झूठ फैला रहे हैं।

‘अवांछित कारोबारियों से राहुल गाँधी के संबंध’: गुलाम नबी आजाद ने ‘विदेश में मीटिंग’ से उठाया पर्दा, शरद पवार ने ‘PM की डिग्री’ पर विपक्ष को रगड़ा

राजनीति में समय और शब्दों की बहुत अहमियत होती है। समय चुनावी मौसम का है और शब्द कॉन्ग्रेस एवं राहुल गाँधी के खिलाफ। कॉन्ग्रेस छोड़कर कर गए वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने राहुल गाँधी पर एक व्यवसायी के साथ संबंधों का आरोप लगाया है। वहीं, UPA गठबंधन के साझेदार NCP प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री की डिग्री को गैर-जरूरी मुद्दा बताया।

नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की डिग्री को लेकर विपक्षी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि डिग्री कोई मुद्दा नहीं है। नेता इस पर अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। देश कई मुश्किलों का सामना कर रहा है कि इस वक्त इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

पवार ने कहा, “आज कॉलेज डिग्री का सवाल बार-बार पूछा जा रहा है। क्या ये राजनीतिक मुद्दा है?” पवार ने कहा कि केंद्र सरकार को बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, महंगाई जैसे मुद्दों पर घेरा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म और जाति के आधार पर लोगों में अलगाव पैदा किया जा रहा है। बेमौसम बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं । ऐसे मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।

इससे पहले शरद पवार अडानी समूह पर हिंडेनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को भी नकार चुके हैं। उन्होंने कहा था कि विदेशी संस्थाएँ अडानी समूह को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा अडानी मामले की में संयुक्त संसदीय समिति (JCP) द्वारा जाँच की माँग को भी खारिज कर दिया। यह तीसरी बार है, जब पवार ने गठबंधन से अलग रुख अपनाया है।

उधर, कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे गुलाम नबी आजाद ने राहुल गाँधी पर ‘अवांछित कारोबारियों’ से संबंध होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी विदेश जाकर एक ‘अवांछित बिजनेसमैन’ (Undesirable Businessmen) से मुलाकात की थी। बीजेपी ने राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए पूछा है कि ये बिजनेसमैन कौन है।

दरअसल, राहुल गाँधी ने 8 अप्रैल 2023 को एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में कॉन्ग्रेस छोड़ने वाले पुराने नेताओं का उद्योगपति गौतम अडानी के साथ कनेक्शन जोड़ा था। इस लिस्ट में उन्होंने गुलाम नबी आजाद को भी निशाना बनाया था। इसके जवाब में उन्होंने राहुल गाँधी पर यह आरोप लगाया है।

गुलाम नबी आजाद ने कहा, “मेरा कभी किसी उद्योगपति से संबंध नहीं रहा है, जबकि उनके समेत पूरे परिवार के उद्योगपतियों से संबंध रहे हैं। मेरे अंदर उस परिवार (गाँधी परिवार) के लिए बहुत सम्मान है, वरना मैं बताता कि वह देश से बाहर कहाँ-कहाँ गए थे और उद्योगपतियों से मिले थे। यहाँ तक कि ऐसे लोगों से भी मिले, जो अनडिजायरेबल बिजनेसमैन थे।”

कॉन्ग्रेस छोड़कर डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव आजाद पार्टी (DPAP) नाम की राजनीतिक पार्टी बनाने वाले गुलाम नबी आजाद ने इससे पहले कहा था कि कॉन्ग्रेस अब भी ‘रिमोट कंट्रोल’ से संचालित की जा रही है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी में अनुभवहीन चापलूसों की नई मंडली इसका कामकाज संभाल रही है। 

बिल नहीं चुकाया, चाबी भी रख ली, चेकआउट के समय पर गायब: वाराणसी के होटल ने तेज प्रताप यादव के आरोपों की खोली पोल, कहा – ID प्रूफ तक नहीं दिया

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शुक्रवार (7 अप्रैल, 2023) की देर रात लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव को देर रात एक होटल से निकाले जाने की खबर आई थी। तब तेज प्रताप के सहायक मिशान सिन्हा ने वाराणशी के सिगरा थाने में होटल प्रबंधन के खिलाफ दुर्व्यवहार का मामला दर्ज कराया था। अब इस मामले में होटल के मैनेजर का बयान सामने आया है। होटल प्रबंधन ने इस पूरे विवाद की वजह तेज प्रताप को ही बताया है। उन पर होटल का बिल भी न चुकता करने का आरोप है। वहीं पुलिस ने भी होटल मैनेजमेंट द्वारा उठाए गए कदम को नियम के मुताबिक बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिगरा थानाक्षेत्र स्थित आर्केडिया होटल के मैनेजर ने इस पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि तेज प्रताप को पहले ही होटल में चेक इन और चेक आउट की तारिख बता दी गई थी। तब तेज प्रताप यादव को कमरा 6 अप्रैल के लिए बता कर दिया गया था क्योंकि 7 और 8 अप्रैल को उसमें किसी और की बुकिंग पहले से हो रखी थी। होटल प्रबंधन के मुताबिक तेज प्रताप ने अगले दिन कमरा खाली नहीं किया जिस से एडवांस बुकिंग किए गेस्ट होटल में पहुँच कर कई घंटों तक इन्तजार करते रहे।

होटल मैनेजर ने आगे बताया कि तेज प्रताप ने 2 कमरे बुक कराए थे। पहला कमरा खुद उनके लिए और दूसरा उनके सहयोगियों के लिए था। सफाई में बताया गया है कि जिस सामान को निकालने का आरोप तेज प्रताप लगा रहे हैं, वह उनके सहयोगियों के कमरे का था। होटल प्रबंधन ने इस कार्रवाई की बाकायदा रिकॉर्डिंग भी करवाई है। तेज प्रताप यादव पर होटल में कमरे के लिए अपनी ID प्रूफ भी न जमा करने के साथ अभी तक कमरे के बिल का भुगतान न करने का भी आरोप है।

होटल प्रबंधन के मुताबिक, अभी तक तेज प्रताप वाले कमरे को चेकआउट भी नहीं किया गया है। इस पूरे विवाद के बाद अभी तक तेज प्रताप के किसी भी प्रतिनिधि के होटल में न जाने और यहाँ तक की कमरे की चाभी भी अपने ही पास रखने का आरोप है।

होटल प्रबंधन ने नियमों के तहत किया काम

ऑपइंडिया ने इस मामले में वाराणसी पुलिस के एडिशनल कमिश्नर IPS संतोष सिंह से बात की। संतोष सिंह ने हमें बताया, “तेज प्रताप को 12 बजे कमरा खाली करना था लेकिन 4 बजे तक वो होटल में नहीं आए। बाहर से आए पहले से बुकिंग किए कस्टमर काफी देर इंतजार किए और आख़िरकार होटल प्रशासन ने तेज प्रताप के ही सहयोगी के आगे कमरे को खाली करवाया।” इस मामले में किसी कानूनी कार्रवाई के सवाल पर एडिशनल कमिश्नर संतोष सिंह ने कहा कि जब अपराध ही नहीं हुआ तो कार्रवाई किस आधार पर होगी।

‘अभी तो तुम्हारी हिंदी सुधरी है, आगे-आगे देखो होता है क्या’: करण जौहर को कंगना ने फिर लताड़ा, कहा- कभी मुझे अंग्रेजी के लिए बेइज्जत किया था

बॉलीवुड निर्देशक करण जौहर ने सोशल मीडिया पर एक नोट लिखा है। इस नोट में उन्होंने हिंदी में बिन किसी का नाम लिए उन पर निशाना साधा जो उनकी आलोचना करते रहे हैं। ये पोस्ट कंगना के उस आरोप के बाद सामने आया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रियंका को बैन करने के पीछे करण का हाथ था। उनके इस हिंदी पोस्ट के बाद अब कंगना ने दोबारा इस पर प्रतिक्रिया दी है और दोबारा से करण को आड़े हाथों लिया है।

करण जौहर ने अपने पोस्ट में लिखा था, “लगा लो इल्जाम, हम झुकने वालों में से नहीं हैं… झूठ के गुलाम बन जाओ, हम बोलने वालों में से नहीं… जितना नीचा दिखाओगे, जितने आरोप लगाओगे हम गिरने वालों में से नहीं… हमारा करम हमारी विजय है… आप उठा लो तलवार… हम मरने वालों में से नहीं हैं। “

करण जौहर और कंगना रनौत

कंगना ने इसी पोस्ट को देख लिखा, “एक वक्त था जब चाचा चौधरी इलाइट नेपो माफिया वालों के साथ नेशनल टेलीविजन पर मुझे शर्मिंदा करता था क्योंकि मुझे इंग्लिश नहीं आती थी। आज इनकी हिंदी देखकर ख्याल आया, अभी तो तुम्हारी हिंदी सुधरी है। आगे-आगे देखो होता क्या है।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी का करियर खत्म करने की बातों पर कंगना रनौत ने करण जौहर की क्लास लगाई। इससे पहले उन्होंने एक वीडियो शेयर की थी जिसमें अनुष्का शर्मा के साथ बैठकर करण कह रहे थे कि वो अनुष्का का करियर का बर्बाद करना चाहते थे। उन्होंने रब दे बना दी जोड़ी में उनकी कास्टिंग का विरोध भी किया था। हालाँकि बाद में बैंड बाजा बारात देख उन्हें लगा कि वो कितने गलत थे। करण की यह बात सुन वीडियो में अनुष्का हँस रहीं थी जबकि कंगना ने इस पर भी कहा था कि चाचा चौधरी पर बर एक यही काम है।

‘इफ्तार पार्टी से निकली नकाबपोश भीड़ ने मंदिर को बनाया निशाना’: VHP ने बताया किसने जलाया जमशेदपुर, कहा- हिंदू ही पीड़ित और हिंदुओं पर ही कार्रवाई

झारखंड के जमशेदपुर में हिंसा के बाद धारा 144 लागू कर दी गई है। इंटरनेट बंद कर दिया गया है। सोमवार (10 अप्रैल 2023) की सुबह सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च किया। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अनुसार इफ्तार पार्टी से निकली नकाबपोश भीड़ ने रविवार को एक मंदिर को निशाना बनाया। आगजनी की। इसके बाद हिंसा भड़की। इस इफ्तार पार्टी का आयोजन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से किए जाने का दावा किया गया है।

आरोप है कि हिंसक भीड़ ने एक मंदिर को निशाना बनाया। आसपास की 2 दुकानों में आगजनी और पत्थरबाजी की। एक ऑटोरिक्शा को भी आग के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। मौके पर भारी फ़ोर्स की तैनाती की गई है। हिन्दू संगठनों ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जमशेदपुर के शास्त्री नगर का है। हिंसा के दौरान मजहबी नारे लगने का दावा किया जा रहा है। विवाद की शुरुआत शनिवार को एक धार्मिक झंडे पर माँस का टुकड़ा बाँधने से हुई थी। हिंदू संगठनों ने झंडे को अशुद्ध करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही दूसरे पक्ष के लोग भी एकजुट होने लगे। लेकिन पुलिस ने बीच में पड़ मामले को शांत करवा दिया था।

रविवार की हुई हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे कदमा इलाके में इंटरनेट बैन कर दिया गया है। कुछ क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई है। जमशेदपुर के SSP प्रभात कुमार ने कुछ लोगों के हिरासत में लेने और हालात काबू में होने की जानकारी दी है। जमशेदपुर की DC ने सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक और भकड़ाऊ बातें न शेयर करने की अपील की है।

JMM की इफ्तार पार्टी से निकले पत्थरबाज

ऑपइंडिया को VHP के जमशेदपुर जिला पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि 9 मार्च को हिंसा के दौरान निशाना बने मंदिर के बगल वाले मोहल्ले में JMM के पवन कुमार और बब्बन राय नाम के 2 नेताओं ने इफ्तार पार्टी रखी थी। उनका दावा कि इसी इफ्तार पार्टी से निकली भीड़ ने चेहरे पर नकाब पहन कर पहले मंदिर पर पत्थरबाजी की और बाद में आसपास की दुकानों में आग लगा दी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए संजीव कुमार ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को जिला प्रशासन ने रामनवमी पर DJ आदि नहीं बजाने की चेतावनी दी थी। DJ सीज भी किए गए। शनिवार को मंदिर के झंडे पर माँस की थैली लटका दी गई थी।

संजीव कुमार ने बताया, “ईद आने की वजह से प्रशासन दूसरे पक्ष के लोगों पर कार्रवाई में संकोच कर रहा है। हिन्दू पक्ष से लगभग 10 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिसमें VHP प्रचार प्रमुख उत्तम दस और बजरंग दल नगर संयोजक शामिल हैं। कई अन्य हिन्दू नेताओं की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। हिन्दू ही आसान टारगेट है यहाँ।”

‘सरकारी पैसे से चलता है BBC’: ट्विटर के लेबल पर बोला मीडिया संस्थान- हम स्वतंत्र, एलन मस्क ने पूछा- आखिर बीबीसी का मतलब क्या होता

एलन मस्क के ट्विटर खरीदने के बाद सोशल मीडिया साइट पर नए-नए कारनामे होते रहते हैं। कुछ दिन पहले ट्विटर की डिस्प्ले पिक्चर से लोगो बदल दिया गया था। अब खबर है कि ट्विटर ने बीबीसी के ऊपर ‘सरकार द्वारा पोषित (गवर्नमेंट फंडेड मीडिया)’ होने का ठप्पा लगा दिया है।

ट्विटर पर देख सकते हैं कि बीबीसी के अकॉउंट के साथ नीचे में ‘गवर्नमेंट फंडेड मीडिया’ लिखा आ रहा है। बीबीसी के अलावा ट्विटर ने यह ठप्पा पीबीएस, एनपीआर और वॉयस ऑफ अमेरिका पर भी लगाया है।

दिलचस्प बात यह है कि बीबीसी के मुख्य अकॉउंट जिसपर 2.2 मिलियन (22 लाख) के करीब फॉलोवर हैं उसी पर सरकार द्वारा पोषित होने का ठप्पा लगाया गया है। ये लेबल बीबीसी के अन्य ट्विटर अकॉउंट (बीबीसी न्यूज, वर्ल्ड, बीबीसी ब्रेकिंग न्यूज) पर नहीं है।

बीबीसी पर लगा ठप्पा

बीबीसी ने कहा कि वो इस मामले में ट्विटर से बात करके मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। मीडिया हाउस के मुताबिक, “बीबीसी हमेशा से स्वतंत्र रहा है। हमें लाइसेंस फीस के जरिए सिर्फ ब्रिटेन की पब्लिक फंड देती है।” वहीं गवर्नमेंट फंडेड मीडिया का अर्थ होता है कि उस चैनल को सरकार सहयोग दे रही है और कभी भी उस चैनल की नीतियों को अपने फैसलों के अनुसार प्रभावित कर सकती है।

इस बदलाव के बाद कई जगह ट्विटर यूजर्स सफाई दे रहे हैं कि कैसे ट्विटर ने यह गलत किया है और बीबीसी अभी भी स्वतंत्र ही है। हालाँकि इस बीच कुछ लोग इस बदलाव का मजाक भी उड़ा रहे हैं जिसमें एलन मस्क ने भी बीबीसी की चुटकी ली और एक ट्वीट पर रिप्लाई देते हुए कहा, “आखिर ये बीबीसी का पूरा मतलब क्या है? मैं हर बार भूल जाता हूँ।”

ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि बीबीसी पर अक्सर ब्रिटिश सरकार का प्रोपेगेंडा चलाने का आरोप लगता रहा है। इसके अलावा उसकी फुल फॉर्म भी ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन है। लोग बीबीसी की तिलमिलाहट देख पूछ रहे हैं कि क्या तुम ब्रिटिश सरकार से कुछ पैसा नहीं लेते? अगर जवाब हाँ है तो फिर विरोध क्यों कर रहे हो।

बता दें कि इससे पहले बीबीसी ने अमेरिकन एनपीआर नेटवर्क पर भी राज्य पोषित मीडिया होने का ठप्पा लगाया था। इसके बाद एनपीआरल ने कहा था कि वो अपने अकॉउंट से तब तक कोई ट्वीट नहीं करेंगे जब तक कि ये ठप्पा उनके ऊपर से नहीं हटाया जाता।

‘रामनवनी पर हिंसा, रमजान में इफ्तार’ : CM नीतीश से हिंदुओं के सवाल, राबड़ी देवी के घर हुई ‘पार्टी’ की तस्वीर सामने आई

बीते दिनों हिंदुओं के पर्व पर हिंसा होने के कारण खबरों में रहा बिहार अब इफ्तार पार्टियों के कारण चर्चा में है। बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने बिहार के दिग्गज नेताओं को अपने घर पर इफ्तार पार्टी दी। इस दौरान सीएम नीतीश भी पार्टी में बैठे दिखे। वहीं तेजस्वी यादव तो भूरे पठान सूट में सिर पर हरे रंग की टोपी पहन मेजबानी करते दिखे।

इन तस्वीरों के आने के बाद यूजर्स ने प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ये कैसा तुष्टिकरण है कि रामनवमी पर प्रदेश में हिंसा होती है और रमजान में इफ्तार की पार्टियाँ सीएम खुद आयोजित करते हैं।

एक यूजर ने कहा कि ये लोग जब इतनी इफ्तार पार्टियाँ करते हैं तो ये धर्मांतरण ही क्यों नहीं कर लेते।

कुहेली नाम की यूजर ने पूछा कि क्या बिहार में कोई काम भी हो रहा है या सिर्फ इफ्तार पार्टियाँ ही चल रही हैं।

संदीप नाम के यूजर पूछते हैं कि वोटों के लिए कितने तुष्टिकरण की जरूरत पड़ती है।

स्वाश ने कहा, “ये हर दिन इफ्तार में कैसे जा रहे हैं? नवरात्रि में तो एक दिन भी जगराते में नहीं जाते।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बिहार में नीतीश कुमार ने इफ्तार पार्टी दी थी और अब राबड़ी देवी के घर इसका आयोजन हुआ है। ऐसे में भाजपा ने दंगों के बीच पार्टी का पोस्टर लगाकर विरोध जताया। भाजपा के नेताओं ने नीतीश के घर रखी इफ्तार पार्टी का विरोध करते हुए कहा था कि एक तरफ बिहार हिंसा की आग में जल रहा है और दूसरी तरफ नीतीश कुमार इफ्तार पार्टियों में लगे हैं।

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में तोड़ा गया छत्रपति शिवाजी की मूर्ति का सिर, केस दर्ज: भड़के लोग प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे, लगे ‘भारत माता की जय’ के नारे

तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किए जाने का मामला सामने आया है। घटना बीती रात की है। सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं किस तरह शिवाजी महाराज की मूर्ति सिर से तोड़ी गई।

इस संबंध में कन्याकुमारी के पुलिस अधीक्षक हरि कृष्ण प्रसाद ने कहा, “हमें नहीं पता कि इसमें तोड़फोड़ की गई है या नहीं। मूर्ति को थोड़ा नुकसान हुआ है। हमने मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने के लिए एक टीम बनाई है कि क्या इसमें बदमाश शामिल हैं या वास्तव में कुछ और हुआ। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों को मुस्तैद कर दिया गया है। हम आगे की जाँच कर रहे हैं।”

घटना के बाद इलाके में आक्रोशित लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार कन्नियाकुमारी जिले के कुल्लितुरई के पास वट्टाविलई में लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई और मूर्ति तोड़ने वाले उपद्रवियों की गिरफ्तारी की माँग की। इस दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’ के नारे भी प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए। वीडियो में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस बल को तैनात हुए भी देखा जा सकता है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त मूर्ति को कपड़े से ढंक दिया है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि मूर्ति निजी स्थान पर है। वह लोगों से बात करके इलाके में कैमरे और रौशनी का प्रबंध करने को कह रहे हैं।

मुगलों को उसकी क्रूर सच्चाई के साथ पढ़ाएँ, अखंड भारत के महापराक्रमी नायकों का भी लिखें इतिहास: शत्रु और शौर्य का बोध जरूरी

तल्ख़ी-ए-ज़हर अभी शामिल-ए-जाँ रहने दे
मुझ पे जो गुज़री है कुछ उस का निशाँ रहने दे

देख उजड़े हुए मंजर अभी दिल सोज़ नहीं
और कुछ रोज़ यूँही रंग-ए-ख़िज़ाँ रहने दे

पिछले एक हफ़्ते से एक विषय जो तथाकथित बुद्धिवादियों के विमर्श का केन्द्रीय विषय बना हुआ है, वह है NCERT द्वारा पाठ्य पुस्तकों से मुग़ल इतिहास का ग़ायब किया जाना। मैं इस बात से पूरी तरह आश्वस्त तो नहीं हूँ कि यह वाक़ई हुआ है क्योंकि मेरे पास इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी नहीं है, जो भी जानकारी है उसका माध्यम मीडिया है।

इरफ़ान हबीब जैसे इतिहासकार काफ़ी आक्रोशित हैं और तमाम ‘काम’पंथी नेता, एक्टिविस्ट और तथाकथित पत्रकारों की एक जमात मुँह फुला रही है इस घटना पर। अगर देश के पहले मुनाफिक ‘मक्कार‘ शिक्षामंत्री की आत्मा यदि कहीं होगी तो वह भी विषाद योग से ग्रस्त ज़रूर होगी कि उनका करा-धरा सब कुछ ख़त्म होने जा रहा है।

जिस एहसास-ए-कमतरी का भाव हिन्दुओं में जगाने के लिए यह सब किया गया था, वह समाप्त होने जा रहा है अब। तथाकथित बुद्धिवादियों का तर्क है कि पुस्तकों से ग़ायब कर दोगे तो क्या इतिहास मिट जाएगा? रवीश कुमार को तो जैसे ऑक्सीजन मिल गई है इस विषय के रूप में।

कुतुबमीनार, ताजमहल, लाल क़िले के बारे में अगली पीढ़ियाँ पूछेंगी तो क्या जवाब दोगे – यह सवाल है इन सभी तथाकथित बुद्धिवादियों का।

मेरा इस विषय में अलग विचार है कि अगर इनको वाक़ई ग़ायब कर दिया गया है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। अगर इनको ग़ायब कर दिया गया तो देश की एक बड़े आबादी की अगली पीढ़ी की सन्ततियाँ यह कैसे समझ पाएँगी कि कौन आक्रान्ता थे इस देश में और क्या कुकर्म किए यहाँ आकर? हमारे महान नायकों को नेपथ्य में धकेलने के षड्यंत्र कौन रच रहा था?

उनको यह कैसे पता चलेगा कि श्रीराम की जन्मस्थली को कलंकित करने वाला कौन था? योगेश्वर की जन्मस्थली के ध्वंस का कारक कौन था? राजा भोज जैसे शिल्प विशेषज्ञ द्वारा बनवाई गई जल संरचना भोजपाल ताल, जिसे अब भोपाल ताल कहते हैं, की बांध संरचना को ध्वस्त करने वाला क्रूर और जाहिल वह दैत्य कौन था, जिसके नाम पर होसंगाबाद शहर आज भी आबाद है? भोजपुर के विश्व विख्यात शिवालय को नष्ट करने वाला कौन था? तक्षशिला और नालंदा जैसे शिक्षा केन्द्रों ने किसके मन में ईर्ष्या के बीज प्रस्फुटित कर दिए और उसने अपनी कुंठा मिटाने की ख़ातिर जला दिया इनको?

ऐसे बहुत सारे प्रश्न हैं, जो आज की पीढ़ी के दिल में चुभन पैदा कर शत्रु बोध जगाने का काम करते हैं। ऐसे बहुत सारे प्रश्नों के कारण ही आज की पीढ़ी दोगुने उत्साह के साथ अपनी जड़ों को खोजने में अग्रसर है।

मेरा विचार यह है कि इनको ग़ायब न कर इनमें सुधार की ज़रूरत है।

अब तक इन आक्रान्ताओं के इतिहास को जो महिमामंडित कर पढ़ाया जा रहा था, मुग़ले-आज़म जैसी फ़िल्मों में दिखाया जा रहा था, उसके उलट इन आक्रान्ताओं की सच्चाई को पढ़ाने-दिखाने की ज़रूरत है।

यह जो पढ़ाया जाता है कि औरंगजेब टोपी सिलकर ख़र्चा निकालता था, यह पढ़ाया जाना चाहिए कि फ़क़ीरों को बुलवा कर उनको भी लूट लिया था।

यह पढ़ाया जाना चाहिए कि सत्ता के लालच में मुग़ल किस तरह भाइयों का भी कत्ल कर देते थे, जिस्मानी हवस में रिश्ते भूल जाते थे।

यह पढ़ाया जाना चाहिए कि किस तरह सालार मसूद को महाराजा सोहेल देव ने तलवार से काट डाला।

यह पढ़ाया जाना चाहिए कि कृष्ण देव राय का इतना भय था इन आक्रान्ताओं में कि छल से जीत जाने पर भी विश्वास नहीं हुआ इनको जीत का और कई घंटों बाद प्रवेश करने की हिम्मत जुटा सके।

मुग़ल इतिहास को पढ़ाया जाना जरूरी है लेकिन उसकी सच्चाई के साथ ताकि हमें शत्रु बोध बना रहे, ऐसा मेरा मानना है। मेरा ऐसा मानना इसलिए भी है ताकि भविष्य में ऐसी सम्भावना न बन सके कि कोई और आक्रान्ताओं फिर से ऐसी हरकत को दोहराने का साहस कर सके।

मुग़ल इतिहास की क्रूर सच्चाई के साथ-साथ ही अखंड भारत के हमारे जिन महापराक्रमी और निपुण नायकों को इतिहास में सही तरह से उभार नहीं मिल सका, उनको आगे लाने की भी ज़रूरत है। शत्रु बोध के साथ-साथ हमारे अंदर शौर्य बोध का चैतन्य भी बना रहे, समय की यह भी जरूरत है। असल इतिहास को दबा कर नहीं बल्कि पढ़ा कर ही आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाया जा सकता है।