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असम में PFI से जुड़े 3 संदिग्ध गिरफ्तार: संगठन पर बैन लगने के बाद SDPI में हुए शामिल, वॉट्सऐप के जरिए फैला रहे थे कट्टरपंथ

असम पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से जुड़े सदस्यों पर बड़ी कार्रवाई की है। इस एक्शन के दौरान PFI और उसकी छात्र शाखा CFI (कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) से जुड़े 3 सक्रिय संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के नाम ज़ाकिर हुसैन, अबू समा और शाहिदुल इस्लाम हैं। आरोपितों के पास कैश और कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। यह कार्रवाई शनिवार (8 अप्रैल 2023) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्रवाई असम के बारपेटा जिले में हुई है। गिरफ्तार किए गए 2 आरोपितों में PFI के राज्य सचिव ज़ाकिर हुसैन और अबू सामा हैं जबकि तीसरा आरोपित CFI का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शाहिदुल इस्लाम है। असम पुलिस के ADGP (SB) हिरेन नाथ के मुताबिक इन सभी के पास से पुलिस को डेढ़ लाख रुपए (150000), 4 मोबाइल फोन और SDPI के पर्चे बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपितों से पुलिस की पूछताछ जारी है।

अब SDPI से जुड़ गए हैं PFI वाले

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि PFI पर बैन लगने के बाद उसके तमाम सदस्य SDPI से जुड़ गए हैं। बताया यह जा रहा है कि कर्नाटक में अभी भी PFI मेंबर SDPI से जुड़ कर काफी एक्टिव हैं और वो वॉट्सऐप ग्रुपों के माध्यम से अपनी चरमपंथी सोच का प्रचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं PFI के वही सदस्य अब राजनैतिक जमीन पर भी उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

इंडिया टुडे ने चाँद पाशा, मुनीब आदि लोगों का स्टिंग भी प्रकाशित किया है। दावा किया गया है कि ये सभी लोग अलग-अलग प्रत्याशियों के प्रचार में जुटे हुए हैं।

पाकिस्तान सहित 155 देशों की नदियों-समुद्रों के जल से रामलला का होगा जलाभिषेक: अयोध्या में CM योगी करेंगे पूजा, जानिए तारीख

वैश्विक हिंदू एकता के संकेत के रूप में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) 155 विभिन्न देशों की नदियों के जल से अयोध्या में राजा रामचंद्र का ‘जलाभिषेक’ करेंगे। यह समारोह 23 अप्रैल 2023 को भगवान राम के जन्म के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाएगा।

समारोह की तैयारियाँ जोरों पर हैं और प्रशासन 155 अलग-अलग देशों की नदियों से पानी इकट्ठा कर रहा है। इन नदियों के पानी को एक विशेष कंटेनरों में एकत्र किया जाता है। इसके बाद इस जल से रामलला का वैदिक मंत्रोच्चार से जलाभिषेक किया जाएगा।

बता दें कि राममंदिर के पहले फेज का काम खत्म करने की समय सीमा दिसंबर 2023 है। यह काम लगभग पूरा होने वाला है। कहा जा रहा है कि दिसंबर 2023 में मंदिर का काम पूरा होने के बाद जनवरी 2024 में मकर संक्राति के दिन मंदिर के गर्भगृह में रामलला को प्रतिष्ठित किया जाएगा।

जलाभिषेक समारोह धार्मिक आयोजन होने के साथ-साथ शांति, सद्भाव और वैश्विक हिंदू एकता को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर के लोगों को समावेशी और भाईचारे का एक शक्तिशाली संदेश भेजने की उम्मीद है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के अनुसार, योगी आदित्यनाथ 23 अप्रैल को अयोध्या के मनीराम दास छावनी सभागार में भाजपा नेता विजय जॉली के नेतृत्व वाली टीम से कलश प्राप्त करेंगे। इसमें 155 विभिन्न देशों की नदियों का पानी है। इस दौरान सभागार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ‘जल कलश’ की पूजा करेंगे।

इस कलश में पाकिस्तान की रावी नदी समेत 155 देशों की नदियों का पानी शामिल होगा। चंपत राय ने कहा कि पाकिस्तान से हिंदू रावी नदी का पानी दिल्ली लाने से पहले दुबई भेजा गया। इसके बाद वहाँ से भारत लाया गया। पाकिस्तान के अलावा तिब्बत, चीन, सूरीनाम, यूक्रेन, रूस, कजाकिस्तान, कनाडा आदि देशों की नदियों से भी पानी लाया गया है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए नदियों और समुद्रों से जल एकत्र करने की पहल दिल्ली स्थित एक गैर-सरकारी संगठन, दिल्ली स्टडी ग्रुप द्वारा की गई थी। दिल्ली के पूर्व भाजपा विधायक विजय जॉली संगठन के अध्यक्ष हैं। जॉली ने कहा कि उन्हें स्वर्गीय अशोक सिंघल और पीएम मोदी से दुनिया भर से पानी इकट्ठा करने और भगवान राम का जलाभिषेक करने की प्रेरणा मिली थी।

राम मंदिर आंदोलन की गोरक्षपीठ ने की थी अगुवाई

बताते चलें कि योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ राम मंदिर के लिए लगभग 200 वर्षों से लड़ाई लड़ने वाले गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। नाथ संप्रदाय ने इस लड़ाई को पूरी तन्मयता से साथ लड़ी। गोरक्षपीठ और योगी आदित्यनाथ भगवान राम के प्रति गहरी आस्था के लिए जाने जाते हैं।

सन 1855 से 1885 तक गोरक्षनाथ पीठ के पीठाधीश्वर रहे महंत गोपालनाथ महाराज ने 1850 से 60 के बीच राम जन्मभूमि विवाद लगभग हल करने की ओर थे। क्रांतिकारी अमीर अली और आंदोलन में सक्रिय रहे बाबा रामचरण दास को साथ लेकर विवाद हल करने की पहल शुरू की। अमीर अली जन्मभूमि हिंदुओं को सौंप देना चाहते थे।

अंग्रेजों को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने इस विवाद को बनाए रखने के लिए दोनों को फाँसी दे दिया। इसके बाद आगे चलकर नाथ पंथ के ही योगीराज बाबा गंभीर नाथ और ब्रह्मनाथ जी महाराज ने भी राममंदिर विवाद को सुलझाकर राम मंदिर बनाने की कोशिश की।

साल 1935 से 1969 तक गोरखनाथ मंदिर के मठाधीश रहे महंत दिग्विजय नाथ को राम मंदिर निर्माण आंदोलन का सूत्रधार कहा जाता है। 23 सितंबर 1949 को बाबरी ढाँचे के नीचे जब रामलला की मूर्ति प्रकट हुई थी, उस दौरान महंत दिग्विजय नाथ साधु संतों के साथ भजन कीर्तन कर रहे थे।

मंहत दिग्विजय नाथ के परमधाम जाने के उनके शिष्य और पीठ के महंत अवैद्यनाथ ने कमान संभाली। उनकी अगुवाई में 1984 में राम जन्मभूमि न्यास का गठन हुआ था। महंत अवैद्यनाथ न्यास के पहले अध्यक्ष चुने गए। महंत अवैद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद आंदोलन की कमान योगी आदित्यनाथ के हाथों में आ गई। 

घरों पर फेंका जाता है खून, गली में अवैध मस्जिद-मदरसे बन रहे: दावा- दिल्ली के ब्रह्मपुरी में हिन्दू पलायन को मजबूर, अमित शाह को पत्र लिखा

दिल्ली में साल 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों के शिकार रहे ब्रह्मपुरी के हिन्दुओं ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने नमाज़ और मदरसे के नाम पर गली में बाहरी मुस्लिमों के जमावड़े की शिकायत की है। पीड़ितों ने खुद को घरों से बाहर निकलने में भी दिक्कत बताते हुए पलायन को मजबूर होने की आशंका जताई है। बुधवार (5 अप्रैल 2023) को भेजे गए इस पत्र में आरोपित के रूप में खासतौर पर अब्दुल रफीक का नाम लिखा गया है।

इस शिकायती पत्र में शिकायतकर्ता के तौर पर शीशपाल तिवारी हैं। उनके साथ इस चिट्ठी पर ब्रह्मपुरी के ही कई अन्य लोगों के भी दस्तखत हैं। चिट्ठी में विषय के तौर पर हिन्दुओं को भगाने के लिए गैरकानूनी मस्जिद और मदरसों को बनाने का जिक्र किया गया है। रफीक के खिलाफ साल 2018 में दिल्ली पुलिस के DCP द्वारा कराए गए समझौते को तोड़ने का भी आरोप है। इस समझौते में सिर्फ गली के लोगों को नमाज़ पढ़ने की अनुमित दी गई थी लेकिन शिकायत के अनुसार अब वहाँ बाहरी लोग नमाज़ पढ़ने पहुँच रहे हैं।

शिकायतकर्ताओ ने इसे जानबूझ कर की जा रही हरकत बताया है। उनका कहना है कि हिन्दू परिवारों का घर से बाहर निकलना भारी पड़ रहा है जिस से वो घर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं। शिकायत में आगे बताया गया है कि गली नंबर 8 ले मकान C-76/4,में साल 2017-2018 में हिन्दुओ को भगाने के लिए मस्जिद व मदरसों का निर्माण शुरू किया गया था। इस निर्माण का हिन्दू समाज ने काफी विरोध किया था। तब स्थानीय प्रशासन ने साल 2018 में दोनों समुदायों को बुला कर आपसी समझौता लिखित करवा दिया था। शिकायतकर्ताओं ने इस समझौते की कॉपी भी अटैच की है। सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार सागर कुमार ने इस पत्र को शेयर किया है।

शीशपाल तिवारी व अन्य लोगों के मुताबिक उनके घरों में आरोपितों द्वारा खून तक डाल दिया जाता है। तब इसकी शिकायत न्यू उस्मानपुर थाने में की जाती है। नए आरोप में गली के निवासियों ने कहा है कि मास्टरमइंड अब्दुल रफीक 2018 में पुलिस द्वारा कराए समझौते का उल्लंघन कर रहा है। रफीक पर बाहरी लोगों को बुला कर गली में नमाज़ पढ़वाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने रफीक की इस हरकत के पीछे हिन्दुओं को पलायन करवाने की साजिश की आशंका जताई है।

नमाज़ के नाम पर जुटने वाले बाहरी लोगों में कई असामाजिक तत्व होने की भी शिकायत की गई है। साथ ही गली में एक नए मदरसे के निर्माण की तैयारी की तरफ भी इशारा किया गया है। अंत में अब्दुल रफीक और उसके साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई। इस कार्रवाई को अपने पलायन रोकने के लिए बेहद जरूरी बताया गया है। पत्र की प्रतियाँ केंद्रीय गृहमंत्रालय के साथ दिल्ली के उपराज्यपाल, पुलिस कमिश्नर, इलाके के SHO, ACP और DCP को भी भेजी गईं हैं। पत्र में ACP सीलमपुर की मुहर भी लगी है और तारीख 5 अप्रैल 2023 की है।

8-10 साल से चल रही ये साजिश

ऑपइंडिया ने इस शिकायत की पुष्टि के लिए शिकायतकर्ता रामनाविवास शर्मा से बात की। उन्होने पत्र भेजने की पुष्टि करते हुए बताया कि नमाज़ के नाम पर उन्हें और गली वालों को कुछ मुस्लिमों द्वारा काफी परेशान किया जा रहा है। शर्मा ने आरोप लगाया कि गली में जगह बदल-बदल कर नमाज़ पढ़ी जा रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

ऑपइंडिया ने इस मामले पर हुई कार्रवाई आदि की जानकारी के लिए दिल्ली पुलिस के DCP नार्थ ईस्ट को सम्पर्क किया तो एक बार उनका फोन व्यस्त बताया और दूसरी बार उन्होंने कॉल नहीं उठाई। ACP सीलमपुर का ऑफिसियल नंबर स्विच ऑफ बताया। मामले में पुलिस का वर्जन आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

‘अडानी को बाहरी संस्थाएँ बना रहीं निशाना’: NCP प्रमुख शरद पवार ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर उठाए सवाल, कॉन्ग्रेस को कहा- इस मुद्दे पर संसद ठप करना ठीक नहीं

NCP सुप्रीमो शरद पवार ने शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को कॉन्ग्रेस को जबरदस्त झटका दिया है। उन्होंने कहा कि अडानी समूह को अज्ञात संस्थाओं द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के नेतृत्व में विपक्षी दल अडानी ग्रुप के खिलाफ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जाँच की लगातार माँग करते आ रहे हैं।

अडानी समूह के टीवी चैनल NDTV को दिए इंटरव्यू में शरद पवार ने शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर JPC की माँग पर अपनी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष द्वारा संसद को ठप करने से सहमत नहीं हैं।

JPC की माँग को लेकर उन्होंने कहा, “इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया गया। जो मुद्दे उठाए गए, किसने उठाए? इनके (हिंडनबर्ग) बारे में हमने कभी नहीं सुना। उनकी पृष्ठभूमि क्या है? जब वे ऐसे मुद्दे उठाते हैं जो पूरे देश में हंगामा खड़ा कर देते हैं तो इसकी कीमत देश की अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ती है। इन बातों को नज़रअंदाज नहीं कर सकते। ऐसा लगता है कि यह निशाना बनाया गया था।”

पवार की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “ये NCP के अपने विचार हो सकते हैं, लेकिन 19 समान विचारधारा वाले विपक्षी दल मानते हैं कि पीएम से जुड़ा अडानी समूह का मुद्दा वास्तविक और बहुत गंभीर है। सभी विपक्षी दल संविधान और लोकतंत्र को भाजपा से बचाने तथा उसके विभाजनकारी और विनाशकारी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक एजेंडे को हराने में साथ रहेंगे।

वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर कहा, “अडानी के स्वामित्व वाला चैनल अडानी के दोस्तों का साक्षात्कार कर रहा है, ताकि हमें बताया जा सके कि उन्हें कैसे निशाना बनाया जा रहा है। भारतीय मीडिया ज़िंदाबाद — आप वास्तव में एक दुर्लभ प्रजाति हैं! संयोग से टीएमसी ने अडानी मुद्दे की जेपीसी जाँच की कॉन्ग्रेस की माँग का समर्थन नहीं किया है।”

वहीं, भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा, “एक विदेशी शॉर्ट-सेलर द्वारा लेबल किए गए आरोपों के कारण एक भारतीय कॉर्पोरेट की जाँच नहीं की जा सकती। जो पार्टियाँ देश की प्रशासनिक और वाणिज्यिक व्यवस्था से अवगत हैं, वे सच्चाई जानती हैं और वे अपनी बात रख रही हैं।”

बता दें कि अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई आरोप लगाए हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप हैं। हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अडानी समूह ने मॉरीशस और कैरेबियन द्वीप समूह जैसे टैक्स हेवन में संस्थाओं का उपयोग करके अपनी कंपनियों की सूचीबद्ध शेयरों को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया। 

इन आरोपों के बाद से कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अडानी समूह के खिलाफ मुद्दा उठाते रहे हैं। इस मामले को लेकर न्यायालय ने जाँच का आदेश दे रखा है। इसके बावजूद राहुल गाँधी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) जाँच की लगातार माँग कर रहे हैं। बताते चलें कि हिंडनबर्ग के स्वयं का इतिहास भी काला है। उस पर अमेरिका में जाँच हो रही है।

प्रयागराज में BJP महिला नेता के बेटे पर बाइक सवारों ने किया बम से हमला, घटना CCTV में कैद

उमेश पाल हत्याकांड के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बमबाजी की घटना सामने आई। बाइक सवार हमलावरों ने भाजपा की महिला नेता विजयलक्ष्मी चंदेल के बेटे को निशाना बनाते हुए बम से हमला किया था। हालाँकि इस हमले में वह बाल-बाल बच गए। घटना गुरुवार (6 अप्रैल 2023) रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना प्रयागराज के झूँसी इलाके की है। जहाँ भाजपा की महिला नेता विजयलक्ष्मी चंदेल का बेटा विधान सिंह अपने दोस्त प्रांशु यादव के साथ अपनी मौसी के घर गया हुआ था। जहाँ घर के बाहर मौसी के बेटे का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान दो बाइकों में सवार होकर आए हमलावरों ने बारी-बारी से कार पर बमबाजी कर दी।

गनीमत यह रही कि हमले के वक्त विधान सिंह अपनी सफारी कार के अंदर बैठा हुआ था। इसलिए बम के हमले से वह और उसका दोस्त पूरी तरह सुरक्षित रहे। घटना का वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो विधान सिंह जहाँ खड़ा था वहाँ लगे एक सीसीटीवी का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि मुँह में कपड़ा बाँधे हुए हमलावर एक के बाद एक दो बम कार में मार रहे हैं। हमले के तुरंत बाद विधान सिंह को अपनी कार तेजी से बढ़ाते हुए भी देखा जा सकता है। इस दौरान स्कूटी सवार एक महिला भी दुर्घटना का शिकार होते-होते बची।

दरअसल, विजयलक्ष्मी चंदेल भाजपा की जिला महामंत्री हैं। इसके अलावा वह थानापुर ग्राम की ग्राम प्रधान भी हैं। कहा जा रहा है कि बीते दिनों कौशांबी में तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल शिव बचन यादव के बेटे शिवम यादव से विधान सिंह का विवाद हुआ था। इस मामले में कॉन्स्टेबल और उसके बेटे ने विधान सिंह से माफी माँग ली थी। लेकिन अब विधान सिंह ने कॉन्स्टेबल के बेटे और उसके दोस्तों पर ही जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने कॉन्स्टेबल के बेटे शिवम यादव समेत 6 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

भाजपा नेता विजयलक्ष्मी चंदेल का कहना है कि कॉन्स्टेबल के बेटे शिवम यादव ने ही हमलाकर उनके बेटे की जान लेने की कोशिश की है। भगवान का शुक्र है उनका बेटा बच गया। हमलावरों के पास असलहे भी थे। उन्होंने पुलिस से आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी अपील की।

बमबाजी में गई थी उमेश पाल की जान

राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह उमेश पाल 24 फरवरी 2023 को गवाही के बाद वह घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी। गोली और बम से किए गए हमले में उमेश पाल के गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी। अब तक इस मामले में पुलिस कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं, कुछ आरोपित पुलिस मुठभेड़ में भी ढेर हुए हैं। हालाँकि मुख्य शूटर और अतीक अहमद की पत्नी तथा बेटे अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस ने इन पर इनाम घोषित किया है।

रामनवमी हिंसा के बाद बिहार में बह रही इफ्तारी बयार, ‘तुष्टिकरण’ की नैया के खेवैया बने नीतीश कुमार

हिंसाग्रस्त बिहार में अब इफ्तार पार्टी की राजनीति का मौसम है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने आज शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को मुख्यमंत्री आवास में इफ्तार पार्टी का आयोजन करके मुस्लिम वोटरों को एक संदेश देने की कोशिश की। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से यह पहले नीतीश कुमार की यह गर्मजोशी बहुत कुछ कहती है।

नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बाद उनकी सरकार में भागीदार राजद ने भी इफ्तार पार्टी की तारीख तय करके बता दिया कि वह भी पीछे नहीं रहने वाली है। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (JDU) ने 8 अप्रैल को अलग से इफ्तार पार्टी की तारीख मुकर्रर की है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस की तरफ से अभी तारीखों की घोषणा नहीं की गई है।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की माँ राबड़ी देवी 13 अप्रैल 2023 को अपने आवास पर इफ्तार पार्टी का आयोजन करेंगी। वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) HAM के सुप्रीमो जीतनराम माँझी भी पीछे रहने वाले नहीं हैं। उन्होंने 16 अप्रैल 2023 को अपने आवास पर इफ्तार का आयोजन किया है।

नीतीश कुमार ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग पर इफ्तार का आयोजन किया। इसके लिए उन्होंने राज्यपाल और भाजपा के नेताओं से लेकर तमाम नेताओं को न्यौता दिया। हालाँकि, भाजपा इफ्तार की राजनीति से अब तक दूर ही रही है। भाजपा ने इसमें शामिल होने से साफ मना कर दिया। वैसे सुशील कुमार मोदी ऐसे अकेले भाजपाई थे, जो इफ्तार पार्टी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। अब वे भी बिहार से बाहर हैं।

इफ्तार राजनीतिक खिचड़ी पकाने का एक आयोजन है और साथ ही यह भी दिखाने का एक मौका कि ‘देखो मुस्लिमों का एक मात्र खामख्वाह मैं ही हूँ।’। हालाँकि, मुख्यमंत्री के इस आयोजन का भाजपा ने तीखी आलोचना की है। भाजपा के नेता विजय सिन्हा ने कहा कि बिहार जल रहा है और मुख्यमंत्री अपने आवास में इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे हैं।

दरअसल, रामनवमी के बाद से बिहार के सासाराम, बिहार शरीफ, मुंगेर, मुजफ्फरपुर सहित कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा में हैं। इसकी आग लंबे समय तक लोगों को झुलसाती रही। इस पर चुप्पी को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा कर दिया और हिंसा के लिए उनकी मौन सहमति बता दी। हालाँकि, नीतीश इससे विचलित नहीं हुए और इसी दरम्यां वे फुलवारी शरीफ के इफ्तार पार्टी में पहुँच गए।

उस दौरान भी नीतीश कुमार की खूब आलोचना हुई। किसी ने उन्हें नीरो कहा तो किसी ने मुहम्मद बिन तुगलक तो किसी ने उन्हें तुष्टिकरण की हद पार करने वाला मौकापरस्त राजनेता बता दिया। हालाँकि, राजनीतिक मंच और सोशल मीडिया में लोग अपनी बातें कहते रहे और नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर फैसले लेते रहे। इस नफा-नुकसान के पीछे उनकी महत्वकांक्षा भी एक आधार है।

यहाँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षा का जिक्र करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वह लंबे समय से प्रधानमंत्री बनने के लिए जी तोड़ कोशिश करते रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कई प्रयास भी किए। कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी से लेकर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी तक से वे मिले, लेकिन ये सारे नेता खुद ही पीएम पद के उम्मीदवार हैं। इसलिए बात बनती नहीं दिखी।

अंत में उन्हें खुद आगे आकर कहना पड़ा कि प्रधानमंत्री पद में उनकी कोई रुचि नहीं है। हालाँकि, राजनीति में कथनी और करनी के बीच भयानक शत्रुता होती है। ऐसे में राजनीति की थोड़ी-बहुत समझ रखने वाले लोग भी ये मानने को तैयार नहीं है कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री के सांसारिक ख्वाबों से परे हो गए हैं और उनका मकसद सिर्फ जनता की सेवा रह गया और यह सेवा वे सीएम रहते हुए भी कर सकते हैं।

नीतीश ने भले कह दिया कि वे पीएम नहीं बनना चाहते, लेकिन बिहार में हिंसा के बीच जब वे फुलवारी शरीफ में इफ्तार पार्टी में शामिल हुए तो नेपथ्य में लगी तस्वीरों ने लोगों को चौंका दिया। नीतीश कुमार जहाँ बैठे हुए थे, उसके ठीक पीछे लाल किले की तस्वीर लगी हुई थी। फिर क्या, बिहार की राजनीति में बवाल हो गया। लोग हिंसा में मरते रहे और नीतीश कुमार इधर राजनीति में व्यस्त दिखी।

हालाँकि, लाल किले की तस्वीर के सामने मसनद पर पसर कर भले ही नीतीश कुमार गंभीर दिख रहते रहे, लेकिन लोगों में मन खुसफुहाट बनी रही कि वे आम जनता की सुरक्षा को लेकर वे गंभीर नहीं हैं। बिहार की राजनीति में कभी उनके बेहद करीबी रहे भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने ही नीतीश कुमार पर तंज कसा था। सुशील मोदी ने कहा कि लाल किला ही क्यों, नीतीश कुमार अपना मन बहलाने के लिए ह्वाइट हाउस का बैनर लगाकर फोटो खिंचवा लें। 

जाहिर है कि सुशील मोदी कहना चाह रहे हैं कि नीतीश के लिए दिल्ली अभी दूर ही नहीं….. बहुत दूर है। हालाँकि, पिछली बार के इफ्तार पार्टी में तेजस्वी यादव को शॉल ओढ़ाकर स्वागत करने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा को सत्ता से ही बाहर कर दिया, लेकिन इस बार वे क्या गुल खिलाते हैं यह अभी देखना बाकी है।

‘मैदान तय कर लो राहुल बाबा, हम दो-दो हाथ करने को तैयार हैं’: अमित शाह ने राहुल गाँधी को दिया चैलेंज, बोले- हम नहीं डरते

राहुल गाँधी के विदेश में दिए गए बयानों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को चैलेंज देते हुए कहा है कि वह मैदान तय कर लें बीजेपी वाले दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। उन्होंने यह बयान शुक्रवार (7 मार्च 2023) को दिया।

दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश के कोशांबी में आयोजित कोशांबी महोत्सव में जन सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा है, “‘कल ही संसद समाप्त हुई। आजादी के इतिहास में कभी नहीं हुआ कि देश के बजट सत्र में चर्चा करे बिना संसद समाप्त हुई हो। विपक्ष के नेताओं ने सदन को चलने नहीं दिया। इसका कारण यह है कि राहुल गाँधी को संसद पद से अयोग्य घोषित किया गया।” उनके इस बयान को 9:20 मिनट के बाद से सुना जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा है, “सूरत कोर्ट ने राहुल गाँधी को सजा दी है। सजा होते ही सांसदी चली जाती है, चाहे कोई भी हो। अब तो 17 विधायक और सांसदों की सदस्यता रद्द की जा चुकी है। इसी तरह राहुल गाँधी की भी हुई। इसको लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं ने काले कपड़े पहनकर संसद नहीं चलने दी। मैं राहुल गाँधी को कहना चाहता हूँ कि कानून का पालन करना हर नागरिक का धर्म होता है। वह सांसद थे, उन्हें कोर्ट के फैसले को ऊँची अदालतों में चुनौती देते अदालत में लड़ते। लेकिन उन्होंने देश की संसद का वक्त बलि चढ़ा दिया। इस देश की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी।”

गृह मंत्री ने आगे कहा, “देश के किसी भी नेता को दूसरे देश में जाकर भारत की बुराई नहीं करनी चाहिए। यहॉं खुला मैदान पड़ा है। राहुल बाबा कौन डरता है। मैदान तुम तय कर लो, भारत में कहीं भी हो भाजपा वाले दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। हम नहीं डरते। देश के बाहर जाकर सार्वजनिक रूप से देश की बुराई करते हैं। किस प्रकार की राजनीति भारत में शुरू करना चाहते हैं? उन्हें लगता है कि देश की जनता कुछ नहीं समझती। लेकिन देश की जनता सब समझती है। 10 साल से विपक्ष के नेता का पद खाली है। राहुल बाबा फिर से एक बार 300 से अधिक सीटों से मोदी जी की सरकार बनने जा रही है।”

अमित शाह ने यह भी कहा है, “ये कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। लोकतंत्र खतरे में नहीं है। बल्कि आपका परिवार खतरे में हैं। आपने इस लोकतंत्र को जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टिकरण के तीन नाखूनों में घेर कर रखा था। सोनिया जी हों, राहुल जी हों या और कोई भी हो, जब भी मोदी जी को गाली दी है, जनता ने इन गालियों के कीचड़ में कमल को और मजबूत करके खिलाया है।”

‘दोस्त कहते हैं कलमा पढ़ लो, मुस्लिम बन जाओ’ : पाकिस्तान में हिंदू सांसद पर धर्मांतरण का दबाव, संसद में उठा मुद्दा

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत किसी से छिपी नहीं है। अब वहाँ के हिंदू सांसद दानिश कुमार ने संसद में कहा है कि साथी सांसद उन पर इस्लाम अपनाने का दबाव डालते हैं। उन्होंने यह भी कहा, “जो लोग मुझे इस्लाम अपनाने के लिए कहते हैं वे पहले मुनाफाखोरों को मुस्लिम बनाएँ इसके बाद उपदेश दें।” दानिश कुमार ने यह बात गुरुवार (6 अप्रैल 2023) को कही।

दरअसल, दानिश कुमार पाकिस्तान में उपजे मौजूदा खाद्य संकट और महँगाई को लेकर संसद के उच्च सदन में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान में महँगाई बढ़ रही है। रमजान से पहले केले की कीमत 150 रुपए थी। अब यह 400-450 रुपए पहुँच गई है। इसी तरह अन्य चीजों की कीमतें भी बढ़ गईं हैं। उन्होंने कहा है, “मैं गैर-मुस्लिम हूँ लेकिन मुझे शर्म आ रही है कि यहाँ कैसे लोग हैं जो अपने मुस्लिम भाइयों का ही खून चूस रहे हैं।”

दानिश कुमार ने आगे कहा है, “सर मैं आपको बताता हूँ, यहाँ पर मेरे दोस्त हैं जो मुझसे कहते हैं कि दानिश कुमार कलमा पढ़ लो, मुस्लिम हो जाओ। पहले आप उन शैतानों को जो मुनाफाखोर हैं, उन्हें मुस्लिम बनाएँ। फिर दानिश कुमार को उपदेश दें। मैं चाहता हूँ कि ये लोग वादा करें जब तक ये उन्हें मुस्लिम नहीं बनाते, तब तक मुझे उपदेश नहीं देंगे।”

कौन हैं दानिश कुमार

दानिश कुमार पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन सीनेट के सदस्य हैं। वह अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर संसद से सड़क तक मुखर रहे हैं। साल 2018 में बलूचिस्तान अवामी पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित सीट टिकट दिया था। जहाँ से जीतकर वह सांसद बने। इससे पहले वज बलूचिस्तान की प्रांतीय विधानसभा के सदस्य (विधायक) भी रह चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र भी जता चुका है चिंता

बता दें कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार विशेषज्ञ भी चिंता चुके हैं। इसी साल जनवरी में यूएन के विशेषज्ञों ने कहा था कि पाकिस्तान में अपहरण, जबरन विवाह, और नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

यूएन के मानवाधिकार विशेषज्ञों की एक टीम ने कहा था, “हमें यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि 13 साल से उम्र की लड़कियों को उनके घरों से अगवा किया जा रहा है। इसके बाद तस्करी करके इन लड़कियों को घरों से दूर स्थानों पर भेजा जा रहा है। कभी-कभी उनकी उम्र से दोगुनी उम्र के पुरुषों से शादी करने और इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन है।”

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने यह भी कहा था, “हम बहुत चिन्तित हैं कि इस तरह के विवाह और धर्मांतरण, इन लड़कियों और महिलाओं या उनके परिवारों को हिंसा की धमकी देकर करवाए जा रहे हैं।” इन विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में, जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यक पीड़ित परिवारों को न्याय न मिल पाने को लेकर भी निराशा जताई थी।

केजरीवाल ने BRS को भिजवाए ₹15 करोड़, कोड वर्ड ’15 किलो घी’ था: महाठग सुकेश का नया दावा, कहा- ‘मेरे पास 700 पन्नों की चैट है’

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने एक बार फिर से चिट्ठी जारी की है। इस बार उसने आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चिट्ठी में आरोप लगाया गया है कि सीएम केजरीवाल का दक्षिण भारतीय ग्रुप और तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेताओं के साथ साँठगाँठ है।

सुकेश चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के कहने पर ही बीआरएस दफ्तर में 15 करोड़ रुपए पहुँचाए गए थे। महाठग ने दावा किया है कि उसके पास वह चैट मौजूद है जिसमें केजरीवाल द्वारा रुपए पहुँचाने और बीआरएस नेता द्वारा उसे स्वीकारे जाने की बात कही जा रही है। सुकेश के अनुसार उसके पास मौजूद चैट के स्क्रीनशॉट से साफ है कि बीआरएस नेता ने अरुण पिल्लई (शराब कारोबारी) को 15 करोड़ रुपए देने को कहा और उसने वह बॉक्स काले रंग की रेंज रोवर गाड़ी में रखी जिसपर MLC का स्टिकर लगा हुआ था।

इस चैट से केजरीवाल और दक्षिण भारतीय ग्रुप के बीच के संबंधों पर मुहर लगती है। खत में सुकेश का दावा है कि चैट में 15 करोड़ रुपए को कोड वर्ड में 15 किलो घी कहा गया है। उसका दावा है कि केजरीवाल और बीआरएस के नेता लंबे समय से एक दूसरे के संपर्क में हैं। केजरीवाल और बीआरएस नेताओं के बीच कई बार पैसों का लेनदेन हो चुका है।

इतना ही नहीं सुकेश ने कहा है कि यदि उसकी बातों पर किसी को भरोसा नहीं है तो वो नार्को या पॉलीग्राफ टेस्ट या किसी भी तरह का परीक्षण कराने को तैयार है। उसने कहा, “मैं सिर्फ बातें ही नहीं कर रहा बल्कि हर बात के सबूत पेश करने वाला हूँ। सुकेश का दावा है कि उसके पास अरविंद केजरीवाल के साथ व्हाट्सएप और टेलीग्राम चैट के कुल 700 पेज सुरक्षित हैं। उसने कथित तौर पर साल 2020 में बीआरएस कार्यालय को 75 करोड़ रुपए देने की भी बात कही है।

मुंबई में जहाँ हुई ‘रामसेतु’ और ‘आदिपुरुष’ की शूटिंग, ₹1000 करोड़ के उस स्टूडियो पर BMC का बुलडोजर चलाः पूर्व मंत्री असलम शेख ने किया था अवैध निर्माण

उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता असलम शेख के फिल्म स्टूडियो पर बीएमसी ने बुलडोजर चलाया। आरोप है कि असलम शेख ने मड-मार्वे इलाके में 1000 करोड़ रुपए की लागत से अवैध रूप से स्टूडियो बनाया था। इस स्टूडियो में रामसेतु और आदिपुरुष जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। बीएमसी ने यह कार्रवाई शुक्रवार (7 मार्च 2023) को की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को अवैध स्टूडियो के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद ही बीएमसी ने यह कार्रवाई की है। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि अस्थाई स्टूडियो बनाने की अनुमति दी गई थी। इस अनुमति का दुरुपयोग करते हुए स्थायी स्टूडियो बनाया गया। इसलिए यह स्टूडियो अवैध है।

कैसे सामने आया मामला

दरअसल, बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्रालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में उन्होंने कहा था कि असलम शेख और उसके सहयोगियों ने मड-मार्वे इलाके में अवैध रूप से फिल्म स्टूडियो बनाए हैं। इसके बाद मामले की जाँच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए।

असलम शेख के स्टूडियो पर हो रही इस कार्रवाई को लेकर किरीट सोमैया मौके पर पहुँचे। इस दौरान उन्होंने कहा है, “आदित्य ठाकरे खुद यहाँ आए थे और उनके आशीर्वाद से यह स्टूडियो बनाया गया था। बीएमसी आयुक्त इकबाल चहल को अवैध स्टूडियो के बारे में बहुत पहले से पता था। लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद हमने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने बीएमसी से सवाल किया कि अवैध निर्माण की अनुमति कैसे दी गई? मैंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की जाँच का आदेश देने का अनुरोध किया है।”

एनजीटी का आदेश…

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने अपने आदेश में कहा था कि अस्थाई निर्माण के लिए अनुमति ली गई थी। लेकिन फिल्म स्टूडियो में स्टील और कंक्रीट समेत कई अन्य सामग्री का उपयोग कर स्थाई निर्माण किया गया था। स्टूडियो निर्माण करने वाले व्यक्ति का दावा है कि निर्माण पर्यावरण के अनुकूल है। लेकिन जाँच में पाया गया है कि पूरा निर्माण कार्य नियमों की अनदेखी कर किया गया।