गुजरात के गीर सोमनाथ जिले की पुलिस ने हिन्दू कार्यकर्ता काजल हिंदुस्तानी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर रामनवमी के दौरान ‘हेट स्पीच’ देने का आरोप है। ALTNews वाला मोहम्मद जुबैर और उसका पूरे गिरोह काजल हिंदुस्तानी के पीछे पड़ा हुआ था और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ भड़काऊ बातें कर रहा था। कुछ इसी तरह भाजपा की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा के लिए भी किया गया था, जिसके बाद ‘सर तन से जुदा’ गिरोह ने कइयों की हत्या कर दी थी।
काजल हिंदुस्तानी का असली नाम काजल सिंगला है। उना में हुई भगवान राम की शोभायात्रा में 30 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। जुलूस के बाद त्रिकोण बाग के पास रावणवाड़ी में धार्मिक सभा का आयोजन किया गया। इसमें काजल हिंदुस्तानी ने भाषण दिया। काजल हिंदुस्तानी ने अपने भाषण में लव जिहाद और लैंड जिहाद समेत कई मुद्दों पर बात की थी। इसके अगले जुमे को ‘सर तन से जुदा’ नारे के साथ उनके भाषण को उग्र बताते हुए मुस्लिम सड़कों पर उतर आए।
गुजरात की स्थानीय मीडिया ने काजल हिंदुस्तानी की गिरफ़्तारी की खबर प्रकाशित की है। उन्हें गिरफ्तार कर के अदालत में पेश किया गया। इसके बाद काजल हिंदुस्तानी को जेल भेज दिया गया। काजल हिंदुस्तानी पर दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक खास समुदाय को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बातें कही। इसके बाद मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर उतर कर जम कर प्रदर्शन किया और उनकी हत्या की बातें कही।
उना में इसी मुद्दे पर एक कारोबारी और उसके कर्मचारियों के बीच भी बहस हो गई, जिसके बाद सड़क पर उतरे कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस घटना के विरोधस्वरूप स्थानीय ‘चैंबर ऑफ कॉमर्स’ ने उना बंद भी बुलाया। याद हो कि गुजरात में भी रामनवमी के दौरान शोभा यात्रा पर जम कर पत्थरबाजी हुई थी, जिसके बाद सख्त रुख अख्तियार करते हुए पुलिस-प्रशासन ने कइयों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद हनुमान जन्मोत्सव शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुआ।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार शायद नहीं चाहती कि रामनवमी पर हुई हिंसा की सही जानकारी सामने आए। दरअसल, हिंसा की जाँच करने पहुँची निजी फैक्ट फाइंडिंग टीम को बंगाल पुलिस ने एक बार फिर रविवार (9 अप्रैल 2023) को हावड़ा जाने से रोक दिया। इतना ही नहीं, पुलिस ने टीम के सदस्यों के साथ बदतमीजी भी की।
रामनवमी पर बंगाल में हुई हिंसा की जाँच के लिए मानवाधिकार संगठन की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम राजधानी कोलकाता पहुँची थी। टीम के सदस्यों को पुलिस ने हिंसाग्रस्त हावड़ा जाने से रविवार को रोक दिया। इससे पहले टीम को बंगाल पुलिस ने रोसड़ा जाने से रोक दिया था।
पुलिस ने तर्क दिया कि हिंसा के कारण इलाके में धारा 144 लागू है। इसलिए मानवाधिकार संगठन के टीम इन इलाकों में नहीं जा सकते। टीम रविवार को हावड़ा में संबंधित घटनास्थल पर जाना चाहता था और वहाँ के पीड़ित परिवारों से बात करके स्थिति का सही जायजा लेना चाहता था।
हालात का जायजा के लिए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुँची है। पुलिस ने टीम को हुगली जिले का दौरा करने से रोक दिया था।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश नरसिम्हा रेड्डी ने कहा, “वे (पुलिस अधिकारी) कह रहे हैं कि इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लगाई गई है, लेकिन यहाँ कुछ भी नहीं है। वे डरे हुए हैं, क्योंकि उनका पर्दाफाश हो जाएगा।”
Howrah, West Bengal | A six-member fact-finding team led by former Patna High Court Chief Justice Narasimha Reddy was stopped by the police from visiting the violence-hit Hooghly district.
They (police) are saying that CrPC section 144 has been imposed but nothing is here. They… pic.twitter.com/x91fECGkd4
टीम के एक सदस्य ने कहा कि पुलिस ने उन्हें रोका था उन्होंने कहा कि वे लोग घायलों से बात कर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे घटना की जाँच करने नहीं जा रहे हैं। वहाँ के लोगों में विश्वास जगाने जा रहे हैं।
टीम के सदस्यों का कहना है कि इसके पहले शनिवार (8 अप्रैल 2023) को रिसड़ा जाने के दौरान रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। उन्होंने कहा, “हम पैदल जाना चाहते थे, क्योंकि बंगाल में कहीं भी कर्फ्यू नहीं है। आज दूसरे दिन हुगली पुलिस ने कार को रोक दिया।” उन्होंने कहा कि बंगाल की ममता सरकार राज्य की जनता के बारे में कुछ नहीं सोचती।
तथाकथित पत्रकार अहमद खबीर ने ट्वीट ने कर दावा किया था कि तेलंगाना में हिंदुओं ने तीन मुस्लिमों को पीटा और शराब पीने के मजबूर किया। हालाँकि, खबीर का यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। दरअसल, तेलंगाना पुलिस ने इस घटना में किसी भी प्रकार से सांप्रदायिक एंगल होने की बात से इनकार किया है।
Ahmed Khabeer posted fake news that 3 Muslim youths allegedly beaten by Hindutva groups, forced to drink alcohol in Telangana.
Fact: Telangana Police denied any communal angle in the assault case and said that the incident was not hate crime but a dispute over fruit prices. pic.twitter.com/w7m2c30k7Y
प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘जामिया टाइम्स’ के संपादक के रूप में काम करने वाला खबीर हिंदुओं को लेकर गलत खबरें फैलाता रहा है। सोशल मीडिया पर कई बार आलोचना झेलने के बाद भी हिंदुओं के प्रति घृणा के चलते वह लगातार झूठी बातें करता रहता है।
Now a self-proclaimed journalist Ahmed Khabeer, once upon a time only used his social media accounts to flirt only. Let’s see how an amature young journalist used to socialize!(3/12) pic.twitter.com/u3Ex2lRBUu
प्रोपेगेंडा और फेक न्यूज को लेकर लगातार ट्वीट करन वाले ट्विटर हैंडल ‘डी-इंटेंट डेटा’ ने शनिवार (8 अप्रैल, 2023) को अहमद खबीर के इतिहास को लेकर ‘खुलासा’ किया। ‘डी-इंटेंट डेटा’ के अनुसार, अहमद खबीर का ट्विटर अकांउट पहले लड़की के नाम से था। इस अकाउंट में वह खुद को लड़की बताते हुए लड़कियों की फोटो ट्वीट करता था। ऐसा माना जा रहा है कि खबीर ने यह सब ट्विटर पर फ़ॉलोअर्स बढ़ाने के लिए किया होगा। सोशल मीडिया में खुद को एक महिला या किसी और व्यक्ति के रूप में दिखाने को ‘कैटफिशिंग’ कहा जाता है। मतलब यह है कि खबीर ‘कैटफिशिंग’ कर रहा था।
खबीर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र है। साल 2019 में नागरिकता संसोधन कानून (CAA) को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान वह पुलिस से भिड़ गए था। यही नहीं वह फेसबुक पर दिल्ली दंगों के आरोपित शाहरुख पठान का महिमामंडन भी कर रहा था।
‘डी-इंटेंट डेटा’ के अनुसार, अहमद खबीर कई विपक्षी नेताओं से मिलता रहा है। उसकी फोटोज भी सामने आईं हैं। उसे राहुल गाँधी की राजनीतिक यात्रा ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का समर्थन करते भी देखा गया था।
There are several photos available in which he can be seen with many oppositions’ politicians. Where that is OK to have personal preferences, but when a so called “Journalist” openly post about that in social media, it is heavily destabilize his creditability.(5/12) pic.twitter.com/LphEFYNW2z
यही नहीं, अहमद खबीर इससे पहले ‘TwoCircles.Net’ में भी काम कर चुका है। प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘टू सर्किल’ हाल ही में तब चर्चा में आया था जब इसके संपादक इरफान मेहराज को 20 मार्च 2023 को टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।
‘डी-इंटेंट डेटा’ ने एक ट्वीट में कहा है कि खबीर न केवल फर्जी खबरें फैलाता है बल्कि युवाओं का आतंकवादी संगठनों में शामिल होना भी उसे सही लगता है। खबीर यह भी दावा करता है कि सेना ने कश्मीर पर कब्जा कर लिया है। इसलिए कश्मीर से सभी सुरक्षा बलों की वापसी होनी चाहिए। यही नहीं, सेना की गोलियों से मारे गए आतंकियों को सामान्य नागरिक बताकर एक झूठा नरेटिव गढ़ने की कोशिश करता रहा है।
Ahmed not only spread fake news but also justified youths joining terrorist outfits. He claimed army has occupied #Kashmir,raised voice for the withdrawal of all security forces from Kashmir & above all showcased fake narrative about Injuries-death of militants as civilian(8/12) pic.twitter.com/0hLJnVfpJX
इसके अलावा अहमद खबीर आतंकवादी अफजल गुरु का भी समर्थक है। उसने दावा किया था कि भारत के हिंदुओं को खुश करने के लिए अफजल गुरु को फाँसी दी गई। खबीर ने हाल ही में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के अकाउंट से भारत की निंदा करने वाले एक ट्वीट को रीट्वीट किया था। साथ ही वह फेक न्यूज फैलाने वाले मीर फैसल और मकतूब मीडिया का भी समर्थन करता है।
He retweeted recent tweet from Organisation of Islamic Cooperation (OIC), Gulf accounts condemning India. Also shown support for another fake propaganda spreader Meer Faisal and #Muktoob media.(10/12) pic.twitter.com/60UHL8lMAx
अहमद खबीर लगातार यह दिखाने की कोशिश करता है कि भारत में मुस्लिम बहुत अधिक पीड़ित हैं। कश्मीर, दलित समेत अन्य मुद्दों पर भी वह फर्जी ख़बरें फैलाता रहा है। इन्हीं सब चीजों के चलते उसका ट्विटर अकाउंट भी सस्पेंड किया जा चुका है। यही नहीं वह अपने फर्जी प्रोपेगेंडा को फैलाने के लिए अपने फ़ॉलोअर्स से चंदा माँगता हुआ भी देखा गया था।
Because of spreading hate and fake news once his twitter account got suspended too, which restored after an online campaign by anti-national ecosystem. He asks followers to donate for covering CAA&NRC protest, farmers protest, campaign to release political prisoners .(12/12) pic.twitter.com/MbRzEXk4fZ
चूँकि प्रोपेगेंडा पोर्टल चलाने वाला अहमद खबीर अक्सर हिंदू विरोधी फर्जी खबरें फैलाता रहा है। ऐसे में यह स्वाभाविक सी बात है कि ट्विटर पर उसे ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह, अलीशान जाफरी, लीसेस्टर हिंसा के दौरान फर्जी नरेटिव फैलाने वाली ‘द गार्डियन’ की पूर्व पत्रकार आइना खान, राजद नेता तेजस्वी यादव, टीएमसी प्रवक्ता साकेत गोखले, दिल्ली दंगों का आरोपित अतीक इकबाल तन्हा समेत उसकी जैसी विचारधारा वाले कई लोग उसे फॉलो करते हैं।
झारखंड के जमशेदपुर में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ एक धार्मिक झंडे पर माँस का टुकड़ा बाँध देने एक बाद दो पक्ष आमने-सामने आ गए। हिंदू संगठनों ने झंडे को अशुद्ध करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। हिन्दू संगठनों के विरोध-प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही दूसरे पक्ष के लोग भी एकजुट होने लगे। हालाँकि पुलिस ने बीच में पड़ कर मामले को शांत करवाया। घटना शनिवार (8 अप्रैल 2023) की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ममला जमशेदपुर के कदमा शास्त्रीनगर का है। यहाँ ब्लॉक 3 के चौक के पास कुछ धार्मिक झंडे लगे हुए थे। आरोप है कि उन झंडों पर किसी असामाजिक तत्व ने माँस की थैली लटका दी थी। स्थानीय लोगों के माध्यम से इस बात की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई। मौके पर पहुँचे हिन्दू संगठनों ने आरोपितों पर कार्रवाई की माँग करते हुए धरना देना शुरू कर दिया। इस दौरान नारेबाजी हुई जिसके बाद दूसरे पक्ष के लोग भी एकजुट होने लगे।
बढ़ रहे तनाव को भाँपते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हिन्दू संगठन के लोगों ने अपने धार्मिक ध्वज को अशुद्ध करने वालों पर कार्रवाई की माँग की। पुलिस अधिकारी दोनों पक्षों से बात करते हुए मामले को शांत करवाने की कोशिश करने लगे। पॉलीथीन में रखे गए माँस को भी मौके से हटा दिया गया। घंटों चली बातचीत के बाद हिन्दू संगठन के सदस्यों ने पुलिस द्वारा आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के आश्वासन पर अपने धरने को समाप्त किया।
इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठन के सदस्यों ने झंडे को बदल दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़क पर टायर भी जलाए गए। घटना स्थल पर सड़क पर ही बैठ कर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। पाठ के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती भी की। जिस स्थान पर झंडे को अशुद्ध करने का आरोप लगा है उस चौक का नाम बजरंग चौक करने की भी माँग उठी। साथ ही प्रशासन द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में CCTV कैमरे लगवाने की अपेक्षा जताई गई। चौक पर माँस बेचने वाली दुकानों को भी हटाने के लिए प्रशासन से अपील की गई है। प्रशासन को आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया गया है।
हिंडेनबर्ग रिसर्च की कथित रिपोर्ट के बाद से देश में राजनीतिक उथल-पुथल मचा हुआ है। राहुल गाँधी इसे जबरन मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, उनके गठबंधन के साथ शरद पवार ने कह दिया कि अदानी समूह को विदेशी संस्थाओं द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा माँग की जा रही JPC जाँच के औचित्य को भी नकार दिया।
इस बीच अपनी बदजुबानी क लिए पहचानी जाने वाली कॉन्ग्रेस की नेता अलका लांबा ने नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार को लालची बताते हुए उन पर निशाना साधा है। इसको लेकर लांबा ने एक ट्वीट भी किया है।
अपने ट्वीट में शरद पवार और गौतम अडानी की कथित तस्वीर शेयर करते हए अलका लांबा ने लिखा, “डरे हुए लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं। देश के लोगों की लड़ाई एक अकेला राहुल गांधी लड़ रहा है। पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी।”
डरे हुए – लालची लोग ही आज अपने निजी हितों के चलते तानाशाह सत्ता के गुण गा रहे हैं – देश के लोगों की लड़ाई एक अकेला @RahulGandhi लड़ रहा है – पूंजीपति चोरों से भी और चोरों को बचाने वाले चौकीदार से भी.#Modanipic.twitter.com/JNt88bjTNU
शरद पवार पर इस बयान को लेकर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने अलका लांबा से पूछा कि क्या यह कॉन्ग्रेस का आधिकारिक बयान है। शहजाद पूनावाला के साथ ही महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी अलका लांबा के बयान को भयावह बताया और कहा कि पवार भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं।
इस पर अलका लांबा ने कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक बयान नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत बयान है। अलका लांबा ने कहा कि पार्टी का आधिकारिक बयान उनकी पार्टी के सोशल मीडिया अकाउंट से जारी किया जाता है। वह एक स्वतंत्र कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हैं और उनके निजी हैंडल से किया जाने वाला ट्वीट उनका स्वतंत्र विचार है। दरअसल, कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA का हिस्सा NCP भी है। हालाँकि, अडानी पर उन्होंने UPA से अलग विचार रखा था।
बताते चले हैं कि अलका लांबा ने जिस तस्वीर को पोस्ट का यह दोनों के बीच नजदीकी का आरोप लगाया है, वह छुपा हुआ तथ्य नहीं है। गौतम अडानी और उनकी दोस्ती लगभग दो दशक पहले की है। शरद पवार ने साल 2015 में मराठी में आई अपनी आत्मकथा ‘लोक भूलभुलैया संगति…’ में अडानी की तारीफ भी की है।
इसमें शरद पवार ने गौतम अडानी को सरल, जमीन से जुड़ा व्यक्ति और मेहनती बताया है। उन्होंने लिखा है कि अडानी ने हर चुनौती स्वीकार की और आगे बढ़े। पवार ने इसमें आगे लिखा है, “मेरे ही कहने पर ही अडानी ने थर्मल पावर सेक्टर में कदम रखा था। वह हीरा उद्योग में अच्छी कमाई कर रहे थे, लेकिन गौतम को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी। इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में प्रवेश करने की उनकी महत्वाकांक्षा थी।”
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शुक्रवार (7 अप्रैल 2023) को जुमे की नमाज़ में बाद हंगामे की खबर है। बताया जा रहा है कि एक ही समुदाय के 2 पक्षों में हुई भिड़ंत के बाद 7 लोग घायल हुए हैं। घायलों में एक महिला भी शामिल है। हमलावरों ने लाठी-डंडों का भी प्रयोग किया है। मौके पर पहुँची पुलिस ने मामले को शांत करवाया और घायलों को अस्पताल भेजा है। दोनों ही पक्षों ने थाने में एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी है। शिकायत में जानलेवा हमले के साथ लूटपाट का भी आरोप है। अब तक 4 आरोपितों के हिरासत में होने की खबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला मुजफ्फरपुर के थानाक्षेत्र नगर का है। यहाँ के तिलक मैदान रोड पर शुक्रवार को जुमे की नमाज़ हो रही थी। इस बीच किसी बात पर वहाँ 2 पक्षों में झगड़ा होने लगा। कुछ ही देर में दोनों पक्षों से कई लोग जमा हो गए। कोई कुछ समझ पाता इस से पहले दोनों पक्षों में भिड़ंत हो गई। इस झड़प में महिलाएँ भी शामिल थीं। हमले में बाँस और लाठियों का प्रयोग किया गया। इसके अलावा लात-घूँसे भी खूब चले। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दोनों पड़ोसी हैं, एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। दोनों पक्षों के बीच प्राथमिकी दर्ज की गई है एवं विधि सम्मत कार्रवाई भी की गई है।
— Muzaffarpur Police (@MuzaffarpurPol3) April 9, 2023
इस मामले में मुजफ्फरपुर पुलिस का कहना है कि दोनों पक्ष एक ही समुदाय से हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों तरफ से FIR दर्ज करके कार्रवाई की जा रही है। घायलों में राजद नेता वसीम भी बताए जा रहे हैं। वसीम का आरोप है कि जब वो मस्जिद से नमाज़ पढ़ कर निकले तब उनके साथ मारपीट की गई। हमलावरों में उन्होंने मोहम्मद तैयब आज़ाद का नाम लिया है। बताया जा रहा है कि हमले की वजह राजद नेता वसीम द्वारा विपक्षियों के खिलाफ नगर निगम में किया गया कोई केस है। यह केस किसी अवैध तौर पर लगने वाले ठेले से जुड़ा हुआ है जिसे वापस लेने का वसीम पर दबाव बनाया जा रहा है। घायलों की हालत स्थिर है। पुलिस द्वारा मामले की जाँच की जा रही है।
समाज के एक बड़े तबके द्वारा मुगल शासन, खासकर कट्टरपंथी औरंगजेब को धर्मनिरपेक्ष बताने की कोशिश की जाती है। हालाँकि, इतिहास में ऐसे कई तथ्य अब भी मौजूद हैं, जो औरंगजेब के बारे में किए जाने वाले ऐसे दावों का खंडन करते हैं। उनमें एक साक्ष्य औरंगजेब का वो आदेश है, जिसे 9 अप्रैल को काशी सहित देश के सभी मंदिर को तोड़ने के लिए दिया गया था।
औरंगजेब ने 9 अप्रैल 1669 को हिंदुओं के मंदिरों के साथ-साथ विद्यालयों को भी गिराने का आदेश दिया। इस आदेश को काशी-मथुरा के मंदिरों से लेकर उसके सल्तनत के अधीन आने वाले सभी 21 सूबों में लागू किया गया था। मंदिरों को तोड़ने के साथ ही हिंदुओं को त्योहारों को मनाने एवं धार्मिक प्रथाओं को अपनाने पर भी रोक लगा दी गई थी।
The Islamic record of Maasir-i-Alamgiri states that on April 9, 1669, Aurangzeb had issued a ‘farman’ decree, “to governors of all the provinces to demolish the schools and temples of the infidels and strongly put down their teachings and religious practices.”
औरंगजेब के इस आदेश का जिक्र उसके दरबारी लेखक साकी मुस्ताइद खान ने अपनी किताब ‘मआसिर-ए-आलमगीरी’ में किया है। 1965 में प्रकाशित वाराणसी गजेटियर के पेज नंबर- 57 पर भी इस आदेश का जिक्र है। इतिहासकारों का मानना है कि इस आदेश के बाद सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केशवदेव समेत सैकड़ों मंदिरों को गिरा दिया गया।
औरंगजेब के आदेश के बाद समय-समय पर जिन मंदिरों को गिराया गया था उनमें गुजरात का सोमनाथ मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, मथुरा के केशवदेव मंदिर, अहमदाबाद का चिंतामणि मंदिर, बीजापुर का मंदिर, वडनगर के हथेश्वर मंदिर, उदयपुर में झीलों के किनारे बने 3 मंदिर, उज्जैन के आसपास के मंदिर, सवाई माधोपुर में मलारना मंदिर, मथुरा में राजा मानसिंह द्वारा 1590 में निर्माण कराए गए गोविंद देव मंदिर आदि प्रमुख हैं।
औरंगजेब के आदेश पर ना सिर्फ मंदिरों को तोड़ा गया, बल्कि वहाँ लगाए गए शिलालेखों को भी नष्ट किया गया, ताकि हिंदू अपने वास्तविक इतिहास से हमेशा के लिए अनजान रह जाएँ। हिंदुओं को उनकी धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को आयोजित करने पर दंडित किया जाता था।
औरंगजेब को अपने हिंदू विरोधी फैसलों के लिए जाना जाता है। अपने शासन काल के 11 वर्ष में ‘झरोखा दर्शन’ पर प्रतिबंध लगा दिया था। झरोखा दर्शन राजाओं द्वारा अपने किले/महलों की बालकनी (झरोखा) से लोगों को संबोधित करने की दैनिक की क्रिया थी। इस दौरान जनता अपनी समस्या सीधे राजा से कहती थी और राजा उसका निवारण करते थे।
अपने शासन के 12वें वर्ष में औरंगजेब ने ‘तुलादान प्रथा’ पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। इस प्रथा के अंतर्गत राजा/महाराजा या किसी व्यक्ति को तराजू में एक तरफ बैठा दिया जाता था और उसके भार के बराबर अनाज आदि तौल कर गरीबों में बाँट दिया जाता था या पशु-पक्षियों को खिला दिया जाता था।
हालाँकि, इरफान हबीब जैसे इतिहासकार औरंगजेब के कट्टरपंथी स्वभाव को उदार दिखाने की कोशिश करते रहे हैं। वे मंदिर आदि तुड़वाना ताकत की निशानी का दिखावा बताते हैं। मुगलों के प्रति आदर का भाव रखने वाले इतिहासकार इरफान हबीब का कहना है कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़वाए थे, क्योंकि उस दौरान कोई दूसरा राजा उस साम्राज्य को जीतता था तो वह सबसे पहले उस साम्राज्य के प्रतीक को खत्म करना चाहता था।
इरफान हबीब ने ब्राह्मण वंश के शुंग एवं पल्लव का उदाहरण दिया है। उनका कहना है कि मौर्य वंश के बाद जब शुंग वंश के राजा पुष्यमित्र ने सत्ता संभाला तो सैकड़ों बौद्ध मठों को नष्ट करवाया था और बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुओं की हत्या करवाई थी। उनका यह भी कहना है कि सन 642 में पल्लव राजा नरसिंहवर्मन ने चालुक्यों की राजधानी वातापी में गणेश के मंदिर को लूटा और उसके बाद तोड़ दिया था।
कथित इतिहासकार राजीव द्विवेदी तो यहाँ तक तर्क देते हैं कि औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को आमेर के राजा जयसिंह की निगरानी में गिरवाया था। द्विवेदी का यह तर्क पूर्वाग्रह और पक्षपात से जुड़ा हुआ नजर आता है।
क्या राजा जयसिंह की निगरानी में हुआ विश्वनाथ मंदिर विध्वंस?
राजीव द्विवेदी जैसे कथित इतिहासकारों का कहना है कि मंदिर गिराने का आदेश औरंगज़ेब ने जरूर दिया था, लेकिन मंदिर को गिराने का काम आमेर के राजा जय सिंह की देख-रेख में किया गया था। जिस समय औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को गिरवाया था, उससे पहले ही शिवाजी महाराज की मदद करने के कारण औरंगजेब उन्हें जहर देकर मरवा चुका था।
औरंगजेब ने मंदिरों को गिराने का आदेश 9 अप्रैल 1669 को दिया था। वहीं, औरंगजेब ने 8 सितंबर 1667 ईस्वी को बीजापुर से लौटते समय मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में राजा जय सिंह की हत्या अपने विश्वासपात्रों के जरिए जहर देकर करवा दी थी। इस तरह मंदिर विध्वंस के फरमान निकलने से दो साल पहले ही जय सिंह की मृत्यु हो चुकी थी।
दरअसल, दक्षिण में शिवाजी महाराज के नेतृत्व में मराठों के शक्तिशाली होते जाने के कारण पूर्व के सभी अभियानों में सफल रहे आमेर के महाराजा जय सिंह के नेतृत्व में 1.40 लाख सैनिकों को औरंगजेब ने भेजा था। जयसिंह के साथ औरंगजेब ने दिलेर खान को भी भेजा था। यहाँ जयसिंह ने कूटनीति का परिचय देते हुए मुगलों की तरफ से शिवाजी के साथ पुरंदर की संधि कर ली। इससे शिवाजी महाराज को समय मिल गया।
11 जून 1665 को हुई पुरंदर की संधि होने के बाद राजा जयसिंह ने शिवाजी को औरंगजेब से मिलने की सलाह दी। साथ ही यह भी वचन दिया कि औरंगजेब उन्हें बंदी नहीं बनाएगा। बीजापुर अभियान में होने के कारण उन्होंने खत के जरिए इसकी जानकारी औरंगजेब और अपने बेटे राम सिंह को दी। हालाँकि, जैसे ही शिवाजी औरंगजेब से मिलने आगरा पहुँचे तो उन्हें उनके 9 साल के बेटे संभाजी के साथ बंदी बना लिया गया।
इससे जयसिंह बहुत दुखी और औरंगजेब से नाराज हुए। उन्होंने अपने वचन का पालन करने के लिए शिवाजी को मुक्त कराने की तरकीब निकालनी शुरू कर दी। उन्होंने अपने बेटे राम सिंह के साथ इसकी चर्चा की और अंत में बेटे की मदद से शिवाजी को कैद से भगा दिए। इससे औरंगजेब चिढ़ गया और जयसिंह की रास्ते में ही हत्या करा दी।
जय सिंह की निगरानी में काशी विश्वनाथ मंदिर गिराने की कहानी इसलिए भी झूठी लगती है कि इसका पुनर्निर्माण अकबर के समय उनके पूर्वज राजा मानसिंह ने कराया था। इस तरह अपना वचन निभाने के लिए औरंगजेब की कैद से शिवाजी महाराज को भगाने वाले राजा जय सिंह अपने पूर्वज के किए धर्मार्थ कार्य को कभी मिटा नहीं सकते थे।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉक्टर कुलपति तिवारी कहते हैं कि हिस्ट्री ऑफ बनारस में उल्लेख है कि राजा मान सिंह व राजा टोडरमल मुंगेर (बिहार) की लड़ाई से दिल्ली लौटते समय काशी में अपने पितरों का श्राद्ध कर्म कराया। मंदिर निर्माण के लिए नारायण भट्ट ने मानसिंह से आग्रह किया। इसके बाद राजा मानसिंह ने अकबर से मंदिर बनाने के लिए फरमान जारी का आग्रह किया। फरमान जारी होने के बाद टोडरमल ने धन की व्यवस्था की और मंदिर का निर्माण हुआ।
औरंगजेब की क्रूरता छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने रची कहानी
इरफान हबीब की कहानी के अलावा, कुछ अन्य धर्मनिरपेक्षवादियों द्वारा काशी मंदिर को औरंगजेब द्वारा तोड़े जाने के पीछे ‘कच्छ की रानी’ की फर्जी कहानी बताई जाती है। इस कहानी में कहा जाता है कि रानी काशी दर्शन के लिए गई थीं। उस दौरान मंदिर के पुजारियों ने उनका अपमान किया। इसके बाद औरंगजेब ने इसे ढ़हाने का आदेश दिया था।
इरफान हबीब के अलावा, प्रोफ़ेसर हेरंब चतुर्वेदी और डॉक्टर विश्वंभर नाथ पांडे जैसे कथित हिंदू विरोधी इतिहासकार भी सीतारमैय्या की इस प्रोपगेंडा को सही मानते हैं और इसे खूब फैलाते भी हैं। पांडे ने तो अपनी पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति, मुग़ल विरासत: औरंगज़ेब के फ़रमान’ में सीतारमैय्या की किताब के हवाले से इसका जिक्र भी कर दिया है।
हेरंब चतुर्वेदी जैसे पूर्वाग्रही इतिहासकार यहाँ तक कह दिए जिस कच्छ की रानी के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारियों द्वारा दुर्व्यवहार करने की बात सीतारमैय्या ने लिखी है, वह कोई और आमेर की रानी थी। चतुर्वेदी के पास इस साबित करने का कोई तथ्य नहीं है। बस खुद को इतिहासकार मानकर ऐलान कर देना ही तथ्य को योग्य समझते हैं।
यहाँ चतुर्वेदी उस सीतारम्मैया की बात को अलग दिशा देकर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, जो खुद एक मौखिक बयान पर इस प्रोपगेंडा का अपनी किताब में छापा था। सीतारम्मैया ने ‘कच्छ की रानी’ वाली कहानी की एक मौलाना के कहने पर छापी थी। दूसरी बात, हेरंब चतुर्वेदी जैसे कथित इतिहासकारों को पता होना चाहिए कि कच्छ से आमेर की दूरी लगभग 900 किलोमीटर है।
‘कच्छ की रानी’ की कहानी का सबसे पहले उल्लेख कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे पट्टाभि सीतारमैय्या ने अपनी किताब में किया था। साल 1942 से 1945 तक जेल में रहने के दौरान सीतारमैय्या ने एक जेल डायरी लिखी थी, जो 1946 में ‘Feathers And Stones के नाम से छपी थी। इसमें सीतारम्मैया ने अपने एक मौलाना मित्र की पांडुलिपि का जिक्र करते हुए विश्वानाथ मंदिर को तोड़ने के आदेश का जिक्र किया था।
तेलुगु नियोगी ब्राह्मण परिवार में जन्मे सीतारम्मैया ने अपनी किताब ‘फीदर एंड स्टोन्स’ में लिखा था, “एक बार औरंगजेब बनारस के पास से गुजर रहे थे। सभी हिंदू दरबारी अपने परिवार के साथ गंगा स्नान और भोलेनाथ के दर्शन के लिए काशी आए। मंदिर में दर्शन कर जब लोगों का समूह लौटा तो पता चला कि कच्छ की रानी गायब हैं। हर जगह तलाश करने के बाद भी उनकी कोई जानकारी नहीं मिली।”
पटाभि सीतारमैय्या की किताब का एक पृष्ठ
सीतारमैय्या आगे लिखते हैं, “सघन तलाशी के बाद वह मंदिर में एक तहखाने का पता चला। दो मंजिला दिखने वाले मंदिर के तहखाने में जाने वाला रास्ता बंद मिला। दरवाजा तोड़ने पर वहाँ बिना आभूषण के रानी दिखाई दीं। पता चला कि यहाँ का महंत अमीर और आभूषण पहने श्रद्धालुओं को मंदिर दिखाने के नाम तहखाने में लाता था और लूटा लेता था।”
सीतारमैय्या ने उस किताब में दावा किया कि जब औरंगजेब को यह कहानी पता चली तो वह गुस्सा हो गया और उसने मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया। इसके बाद वहाँ मस्जिद बना दिया गया। हालाँकि, जिस नामचीन मौलाना की पांडुलिपि के आधार पर उन्होंने यह दावा किया था, उस मौलाना का उन्होंने कभी नाम नहीं उजागर किया और ना ही कभी उस पांडुलिपि को खुद देखा। इस तरह यह फर्जी कहानी प्रचलित हो गई।
बता दें कि सन 1948 से 1949 तक कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे सीतारम्मैया वही व्यक्ति हैं, जिन्हें 1939 में कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के खिलाफ महात्मा गाँधी ने खड़ा किया था। तब महात्मा गाँधी ने कहा था कि ‘पट्टाभि सीतारमैय्या की हार मेरी हार होगी’। फिर भी सीतारमैय्या नेताजी से जीत नहीं पाए थे।
कच्छ की रानी कभी काशी गई ही नहीं
आमतौर पर किसी राजा या रानी या फिर अन्य दरबारी से किसी पुजारी द्वारा इस तरह की दुस्साहस करने की कल्पना नहीं की जा सकती। राघव चेतन जैसे कुछ दरबारी अपवाद हैं, जो अपनी रानी के कारण अलाउद्दीन खिलजी के पास जा पहुँचा था। कुछ अन्य मंत्रियों या दरबारियों द्वारा साजिश रचने का इतिहास में जिक्र है, लेकिन मंदिर में बंधक बनाने की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है।
शास्त्रों के अनुसार, राजा को धरती पर देवताओं का प्रतिनिधि माना गया है। राजा की आज्ञा ही ‘राजाज्ञा’ कहलाया है, जो राज्य के कानून का आधार होता था। इस राजाज्ञा से अछूता ना ही राजपरिवार का कोई सदस्य होता था और ना ही कोई ब्राह्मण या पुजारी। गलती करने पर सबको दंड दिया जाता था। हालाँकि, भारत में यह वर्ग ज्ञान परंपरा को समर्पित रहा है।
कुछ कालखंड में धर्म की आड़ में पुजारी शक्तिशाली जरूर बने, जिसके कारण देवदासी जैसी प्रथाओं ने जन्म लिया। हालाँकि, ये सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। बेबीलोन, साइप्रस, मिस्र आदि सभ्यताओं में पुजारी वर्ग के शक्तिशाली होने पर ऐसी ही प्रथा पनपी। हेरोडोटस ने इसका जिक्र किया है।
सीतारमैय्या की कहानी को लेकर कच्छ के राजपरिवार से जुड़े कृतार्थ सिंह जाडेजा का कहना है कि कच्छ के इतिहास में कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि राज्य की कोई रानी औरंगजेब के समय बनारस की तीर्थयात्रा गई हो। कृतार्थ सिंह के मुताबिक, उस समय कच्छ भौगोलिक तौर पर इतना कटा हुआ था कि काशी तो दूर, नजदीक के द्वारका की धार्मिक यात्रा पर भी जल्दी जाना संभव नहीं था।
इसका यह पहलू यह भी है कि कच्छ के तत्कालीन महाराजा महाराव तमाची ने औरंगजेब के भाई दारा शिकोह को अपने यहाँ शरण दी थी। कच्छ के भुज शहर 1659 ईस्वी में दारा शिकोह को एक बगीचे में ठहराया गया था। इस बगीचे को आज भी दारावाड़ी के कहा जाता है। इस तरह अपने दुश्मन भाई को शरण देने वाले राज्य की रानी के लिए इतना भलमानस शायद ही दिखाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर कर्नाटक स्थित बांदीपुर टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी में हिस्सा लिया। इस दौरान कैमरे के साथ उनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसके बाद लोग उनके स्टाइलिश लुक्स को लेकर बातें कर रहे हैं। ये राष्ट्रीय उद्यान पश्चिमी घाट और मैसूरु-ऊटी हाइवे के बीच में स्थित है। बांदीपुर टाइगर रिजर्व नीलगिरि की जैविक गतिविधियों का एक अहम हिस्सा है। नागरहोले स्थित राजीव गाँधी नेशनल पार्क भी इसी का हिस्सा है।
ये नेशनल पार्क इसके उत्तर-पश्चिम में स्थित है, जबकि इसके दक्षिण में तमिलनाडु का मुदुमलै वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी है। वहीं इसके दक्षिण-पश्चिम में केरल का वायनाड वाइलफ्लाईफ़ सैंक्चुरी है। पीएम मोदी ने रविवार (9 अप्रैल, 2023) को जंगल सफारी का आनंद लिया। मुदुमलै टाइगर रिजर्व चामराजनगर के गूंदलुपेट तालुका और मैसूरु के एचडी कोटे और नंजनगुड तालुका का हिस्सा है। इसका गठन 19 फरवरी, 1941 को बनाए गए वेणुगोपाल वाइल्ड्लाइफ़ पार्क को विस्तारित कर के हुआ था।
1985 में इस पूरे क्षेत्र को विस्तार देकर 874.20 स्क्वायर फ़ीट का कर दिया गया। फिर इसे बांदीपुर नेशनल पार्क नाम दिया गया। आज 912.04 स्क्वायर किलोमीटर का क्षेत्र इस टाइगर रिजर्व के नियंत्रण में आता है। मोदी सरकार बाघों के संरक्षण को लेकर गंभीर है। 1973 में इसे ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत लाया गया था। मुख्य रूप से यहाँ बाघ और हाथी रहते हैं, लेकिन कई अन्य पशु-पक्षियों की भी भरमार है। पाइथन, भालू और गीदड़ भी यहाँ बहुतायत में हैं।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोम्मन और बेल्ली से भी मुलाकात की, जिनके ऊपर ऑस्कर जीतने वाले डॉक्यूमेंट्री ‘The Elephant Whisperers’ बनी है। दोनों हाथियों का पालन-पोषण करते हैं। बांदीपुर टाइगर रिजर्व में पीएम मोदी ने 20 किलोमीटर की जंगल सफारी में हिस्सा लिया। कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी द्वारा किए गए काम का श्रेय पीएम मोदी ले रहे हैं। तिगर रिजर्व के फिल्ड डायरेक्टर्स व अन्य अधिकारियों से भी पीएम मोदी ने मुलाकात की।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आपत्तिजनक वेब सीरीज को बैन करने के लिए सरकार द्वारा जरूरी कदम उठाए जाने की घोषणा की है। यह ऐलान उन्होंने शनिवार (8 अप्रैल 2023) को भोपाल में किया। इस दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी मौजूद थे। शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश को धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व की जमीन बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के एक धार्मिक कार्यक्रम में CM शिवराज सिंह चौहान पांडाल में मौजूद श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि धर्मगुरु देवकीनंदन ठाकुर ने विवादित वेब सीरीज पर रोक लगाने की जरूरत पर बल दिया है क्योंकि इस से युवा अपनी मूल संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। इसी के बाद उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य में आपत्तिजनक वेब सीरीज पर बैन लगाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।
#WATCH | Madhya Pradesh: You have said about web series…so for sure the government will try to save the young generation from being alienated from culture: Chief Minister Shivraj Singh Chouhan on action against ‘objectionable web series’ pic.twitter.com/mpsZmTKAZJ
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देवकीनंदन ठाकुर के इस कार्यक्रम में अपनी मौजूदगी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की हैं। उन्होंने लिखा, “राधे राधे। आज दशहरा मैदान, भोपाल में पूज्य महाराज देवकीनंदन ठाकुर जी के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रभु से यही प्रार्थना है कि मेरे मध्य प्रदेश वासियों के जीवन का हर क्षण सुख, शांति एवं आनंद से भरा रहे।”
।। राधे राधे ।।
आज दशहरा मैदान, भोपाल में पूज्य महाराज श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) April 8, 2023
इस कार्यक्रम के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने आधुनिक शिक्षा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मॉर्डन शिक्षा नौनिहालों के भविष्य को खराब कर रही है। स्कूलों में फ़िल्मी गानों पर बच्चों को डांस कराए जाने के कल्चर पर भी देवकीनंदन ठाकुर ने आपत्ति जताई और इसे बंद करने की माँग की है।
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी OTT प्लेटफार्म पर बढ़ती अश्लीलता और आपत्तिजनक दृश्यों पर नाराजगी जताई थी। तब उन्होंने कहा था कि अश्लीलता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (8 अप्रैल 2023) को चेन्नई दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी भाजपा के एक दिव्यांग कार्यकर्ता के साथ खुद आगे बढ़ कर सेल्फी ली। इस सेल्फी को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर किया है। दिव्यांग कार्यकर्ता का नाम थिरु एस मणिकंदन है। मणिकंदन की कहानी ट्विटर पर शेयर करते हुए मोदी ने खुद को गौरवान्वित बताया है। सेल्फी की यह तस्वीर वायरल हो गई है और सोशल मीडिया के कई यूजर्स इस पर मोदी की तारीफ कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस फोटो को ‘स्पेशल सेल्फी’ और इरोड के रहने वाले मणिकंदन को गौरवशाली कार्यकर्ता करार दिया है। वह भाजपा में बूथ अध्यक्ष के पद पर हैं। मोदी के मुताबिक मणिकंदन दुकान चलते हुए कमाई का एक हिस्सा भारतीय जनता पार्टी को दान भी करते हैं। PM मोदी ने आगे लिखा, “मुझे ऐसी पार्टी में होने पर गर्व महसूस होता है जहां श्री एस मणिकंदन जैसे लोग मौजूद हैं।” अंत में मणिकंदन की विचारधारा को सभी के लिए प्रेरणा देने वाला बताते हुए मोदी ने उन्हें भविष्य की शुभकामना दी है।
I feel very proud of being a Karyakarta in a Party where we have people like Thiru S. Manikandan. His life journey is inspiring and equally inspiring his commitment to our Party and our ideology. My best wishes to him for his future endeavours. pic.twitter.com/4S6FryHqCq
प्रधानमंत्री ने यह ट्वीट अंग्रेजी और तमिल दोनों भाषाओं में किया है। सोशल मीडिया पर यह तस्वीर वायरल होने के बाद तमाम यूजर्स ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है। उन्होंने इसे संवेदना और मानवीयता जैसे शब्दों से सम्बोधित किया है। एडवोकेट आशुतोष दुबे ने खुद को भावुक बताते हुए लिखा, “यह अंदाज़ हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के देख कर हम गर्व से कहते हैं हाँ ये भारत के प्रधानमंत्री हैं।” मोटिवेशनल स्पीकर अमित शर्मा ने लिखा, “यही तो मोदी जी की खासियत है वो लोगों के कितने करीब हैं। नहीं तो इस से पहले जितने भी प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री को छोड़ कर किइस ने देश के बारे में नहीं सोचा।”
सेल्फी पर सोशल मीडिया रिएक्शन
सुनील शर्मा ने लिखा, “आपकी देशभक्ति, त्याग व समर्पण युगों-युगों तक समस्त देशवासियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। आप समाज के हर वर्ग से जुड़े हैं। हम आप पर गर्व करते हैं कि आप हमारे प्रधानमंत्री हैं।” शरण ने इस स्पेशल सेल्फी पर लिखा, “आपके बारे में जितना बोलूँ कम है। भगवान का कृतज्ञ हूँ जो आपके कार्यकाल को देखने का नसीब दिया। नमन है आपको। भगवान आपको स्वस्थ और लम्बी उम्र दे।”