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जनजातीय समाज के युवक की पीट-पीट कर हत्या, शमशुद्दीन-सिद्दीकी समेत 14 दोषी करार: मृतक की माँ ने न्याय के लिए लड़ी लड़ाई

केरल की मन्नारक्कड़ जिले की SC/ST कोर्ट ने जनजातीय युवक मधु की मौत मामले में 14 आरोपितों को दोषी करार दिया है। इन सभी को बुधवार (5 अप्रैल, 2023) को सज़ा का एलान होगा। इसी मामले में सबूतों के अभाव में 2 आरोपित बरी कर दिए गए हैं। इन सभी पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप साबित हुआ है। दोषियों के नाम सैन, मराइकर, शमशुद्दीन, राधाकृष्णन, अबुबकर, सिद्दीकी, उबैद, नजीब, जैजुमोन, मुनीर सजीव, सतीश, हरीश और बीजू हैं। यह घटना 22 फरवरी, 2018 की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी केस में सबूतों के अभाव में कोर्ट ने अनीश और अब्दुल करीम को बरी कर दिया है। अनीश पर आरोप था कि उसने मधु पर दोषियों के हमले को प्रचारित किया था। कोर्ट ने लगभग 5 साल तक चले इस मामले में 14 आरोपितों को IPC 304 (2) के तहत दोषी पाया है। सजा सुनाए जाए के बाद पुलिस ने सभी 14 दोषियों को कस्टडी में ले लिया है।

क्या था पूरा मामला

दरअसल, यह मामला 22 फरवरी, 2018 का है। तब पलक्कड़ के रहने वाले मधु नाम के एक जनजातीय व्यक्ति को एक भीड़ ने दुकान में चोरी का आरोप लगाते हुए पकड़ लिया था। चोरी का आरोप सबसे पहले मराइकर ने लगाया था। थोड़ी ही देर में वहाँ भीड़ जमा हो गई और कई लोगों ने मिल कर मधु को बुरी तरह से पीट दिया। कुछ देर में पहुँची पुलिस ने मधु को कस्टडी में लिया लेकिन तब तक पीड़ित की हालत काफी खराब हो चुकी थी। पुलिस वाले मधु को अस्पताल ले कर निकले पर रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।

मधु का पोस्टमार्टम करवाया गया तो उसके पूरे शरीर पर पिटाई के निशान मिले। खास तौर पर सिर और पसलियों पर वार किया गया था। मौत की वजह आंतरिक रक्तस्राव बनी थी। जनजातीय युवक की मौत ने हंगामे का रूप ले लिया था तब प्रशासन ने जाँच के लिए SIT का गठन किया। SIT ने केस में कुल 16 लोगों को आरोपित किया। जाँच रिपोर्ट के निष्कर्ष के तौर पर 3000 पन्नों की चार्जशीट दायर हुई। गिरफ्तार आरोपितों पर SC/ST एक्ट के तहत भी कार्रवाई हुई थी। इन सभी की जमानत निचली कोर्ट से ख़ारिज हुई थी पर मई 2018 में इन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। हालांकि इस जमानत के लिए कोर्ट ने कड़ी शर्तें रखी थीं।

हालाँकि महज 3 माह भी भी 12 आरोपितों की जमानत एक विशेष कोर्ट ने रद्द कर दी थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाह मुकर गए थे। मृतक मधु की माँ ने इस केस की पैरवी की थी। केस की सुनवाई 28 अप्रैल 2022 को शुरू हुई। 10 मार्च 2023 को यह सुनवाई पूरी हो गई। पुलिस की तरफ से 127 गवाहों की लिस्ट दी गई थी। आखिरकार अदालत ने मधु की मौत मामले में 14 आरोपितों को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया।

7 राज्य, 12 शहर… रामनवमी शोभयात्रा में शामिल हिंदुओं को बनाया निशाना, आखिर मस्जिदों के पास ही क्यों बरसते पत्थर

साल 2023 की रामनवमी में देश के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई। इस हिंसा से खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश प्रभावित हुए हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की मौत भी हुई हैं और कहीं-कहीं पर तो पुलिस को भी निशाना बनाया गया है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस केस दर्ज कर आरोपितों की धर-पकड़ कर रही है। कुछ स्थानों पर पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के भी आरोप लगे हैं।

नालंदा (बिहार)

बिहार के नालंदा जिले का बिहार शरीफ। 31 मार्च को रामनवमी की शोभा यात्रा निकाली गई। जब यात्रा बिहारशरीफ के दीवानगंज इलाके की एक मस्जिद के पास पहुँची, तब इस पर पथराव कर दिया गया। आसपास के घरों और दुकानों में आगजनी और जमकर फायरिंग भी की गई। इस फायरिंग में चार लोगों को गोली लगी है। हमले में शोभायात्रा में शामिल छह युवक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है। यहाँ 4 अप्रैल 2023 तक स्कूल और इंटरनेट सेवा बंद कर दिए गए हैं।

रोहतास (बिहार)

बिहार के रोहतास जिले का सासाराम। 31 मार्च 2023 को यहाँ रामनवमी शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा खत्म होने के बाद सहजलाल, बस्ती मोर, चौखंडी, आदमखानी और सोना पट्टी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई। यहाँ पथराव के साथ लाठी-डंडे भी चले। हालात काबू करने के लिए दूसरे जिलों से फ़ोर्स मँगाई गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लागू कर दी गई। जिले के मदरसों को 4 अप्रैल 2023 तक बंद रखने के आदेश हुए हैं।

संभाजी नगर (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र का संभाजी नगर। यहाँ 29-30 मार्च 2023 को किराड़पुरा के एक मंदिर के आगे हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की शुरुआत 2 लोगों के कहासुनी से हुई थी। दंगाइयों ने पथराव किया और बम फेंके थे। पुलिस के वाहनों में भी आग लगा दी गई थी।

इस मामले में दर्ज FIR में शौकत, अरबा, रिज़वान, शेख मुनीरुद्दीन, अल्ताफ और हाशमी इतरवाले को नामजद करते हुए 400 से 500 अज्ञात की भीड़ पर FIR दर्ज हुई है। FIR में भीड़ द्वारा नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाने का जिक्र है। पुलिस ने हिंसा में लगभग चार दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकियों की तलाश की जा रही है।

जलगाँव (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र के जलगाँव में साम्प्रदायिक हिंसा की 2 अलग-अलग घटनाएँ हुईं हैं। पहली घटना मंगलवार (28 मार्च 2023) को पालधी गाँव की है। यहाँ रामनवमी का जुलूस लेकर एक मस्जिद के आगे जुटी भीड़ ने बज रहे DJ पर आपत्ति जताई तो विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने जुलूस में शामिल लोगों पर पत्थरबाजी की जिसमें लगभग 4 लोग घायल हो गए।

पुलिस ने इस मामले में हिन्दू और मुस्लिम पक्ष की तहरीरों पर 2 अलग-अलग FIR दर्ज की है। एक केस में हिन्दू पक्ष के 9 लोगों को आरोपित किया गया है। वहीं दूसरी FIR में मुस्लिम पक्ष के 63 लोग नामजद हुए हैं। अब तक कुल 45 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

जलगाँव की ही एक अन्य घटना शनिवार (1 अप्रैल 2023) की है। यहाँ के अतरवाल गाँव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने गाँव में लगी एक मूर्ति को तोड़ दिया। इस बात से गाँव के 2 पक्ष आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में हालात तनावपूर्व हो गए और दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमला कर दिया। मामले में कुल 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

मलाड (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मलाड में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया था। यहाँ रामनवमी की शोभायात्रा निकाल रहे हिंदुओं पर जामा मस्जिद और अली हजरत मस्जिद इलाके में पत्थरों और चप्पलों से हमला किया गया। हमले के दौरान दंगाइयों ने अल्लाह-हु-अकबर के नारे लगाए। पुलिस ने कुल 400 आरोपितों पर केस दर्ज करते हुए 21 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है।

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल का हावड़ा के शिबपुर में भी रामनवमी के दिन 31 मार्च 2023 साम्प्रदायिक हिंसा हुई। इस दौरान कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़कों पर उतर कर पत्थरबाजी की थी। हिंसा रामनवमी का जुलूस खत्म होने के बाद भी जारी रही।

ममता बनर्जी ने इसका ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ा था और हिन्दू संगठनों पर ही जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से ले जाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने मामले की जाँच NIA से करवाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इस हिंसा में अब तक पुलिस ने 36 लोगों को गिरफ्तार किया है।

डालखोला (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में 31 मार्च को रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई इस झड़प में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। हालाँकि, बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है। बंगाल भाजपा का आरोप है कि इस मामले में पुलिस बेकसूर लोगों को गिरफ्तार करके उन पर अत्याचार कर रही है।

हुगली (पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के हुगली में भी 31 मार्च को रामनवमी पर हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान यहाँ के रिसड़ा क्षेत्र में एक भीड़ पर रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले का आरोप है। रविवार (2 अप्रैल) को एक बार फिर से यहाँ हिंसा भड़क उठी थी। इस घटना के बाद हुगली के कई हिस्सों में इंटरनेट बंद कर के धारा 144 लागू कर दी गई थी। पुलिस ने अब तक कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है।

साहिबगंज (झारखंड)

झारखंड का जिला साहिबगंज में शनिवार (1 अप्रैल 2023) की शाम मूर्ति विसर्जन के जुलूस पर कृष्णानगर में कुलीपाड़ा रेलवे लाइन के पास पथराव हुआ। पत्थरबाजी छतों से की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस दौरान भड़की हिंसा में 1 बाइक को आग लगा दी गई थी।

जुलूस में शामिल 6 श्रद्धालुओं के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है। वहीं 3 अप्रैल 2023 को एक बार फिर से साहिबगंज में हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने पर हिन्दू संगठन विरोध प्रदर्शन करने लगे जिसके बाद पुलिस ने हिन्दू संगठनों पर ही लाठीचार्ज कर दिया।

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमला हुआ था। यहाँ के जानकीपुरम विस्तार इलाके में जब रामनवमी का जुलूस शाही मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उस पर छतों से पत्थर फेंके जाने लगे थे। इस पथराव में कुछ श्रद्धालुओं को चोटें आईं और शोभायात्रा में शामिल वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे। पुलिस कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठनों ने घटना के विरोध में थाने पर धरना दिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।

वडोदरा (गुजरात)

गुजरात के वडोदरा जिले में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। जुलूस के फतेहपुरा गराना पुलिस चौकी क्षेत्र में एक मस्जिद के सामने से गुजरने के बाद उस पर पत्थर बरसाए गए थे। पुलिस ने हालत को को फ़ौरन संभाला और हमलावरों को तितर-बितर किया था।

पुलिस ने इस मामले में SIT गठित करते हुए 500 उपद्रवियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में कुल 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 6 महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस को इन सभी आरोपितों की 5 दिनों की कस्टडी रिमांड मिली है।

हासन (कर्नाटक)

कर्नाटक के हासन में गुरुवार (30 मार्च 2023) को रामनवमी के जुलूस पर कट्टरपंथियों ने हमला किया था। जब यह जुलूस चन्नारायणपटना इलाके की एक मस्जिद के सामने से गुजरा, तब उसके विरोध में भीड़ ने हंगामा किया। पत्थरबाजी के साथ हमलावरों ने चाकूबाजी भी की। इस चाकूबाजी में मुरली और हर्ष नाम के 2 लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

‘नाम बदलने से नहीं बदलेगी सच्चाई’: अरुणाचल प्रदेश पर चीन की हरकत का विदेश मंत्रालय ने दिया करारा जवाब, 6 साल में तीसरी बार ड्रैगन की कुटिल कोशिश

चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। चीन के एक मंत्रालय की तरफ से रविवार (02 अप्रैल, 2023) को नक्शा जारी किया गया था। इस नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नाम बदले हुए दिखाए गए थे। जिसपर भारत की तरफ से कड़ा ऐतराज जताया गया है। भारत की तरफ से कहा गया है कि नाम बदल देने से सच्चाई नहीं बदल जाएगी।

मंगलवार (4 अप्रैल, 2023) को चीन की हरकत का भारत की तरफ से जवाब दिया गया। केंद्रीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने जोर देकर कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। सवालों का जवाब देते हुए बागची ने कहा कि हमने इस तरह की रिपोर्ट देखी है। चीन पहले भी इस तरह की कोशिश कर चुका है। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। इस तरह की कोशिशों से सच्चाई नहीं बदल जाएगी।

इसके पहले रविवार को चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने नया नक्शा जारी कर अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नए नाम जारी किए। इन इलाकों में 2 मैदानी इलाके, 2 रिहायशी इलाके, 5 पर्वत शिखर और 2 नदियों के नाम शामिल हैं। इसके पहले वर्ष 2017 में बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा के अरुणाचल दौरे से चीन बौखला गया था। इसके बाद ही उसने अरुणाचल प्रदेश के 6 स्थानों के नाम बदल दिए थे।

उसके बाद साल 2021 में चीन ने अरुणाचल के 15 स्थानों के नाम जारी किए थे। भारत ने उस वक्त भी चीन की तरफ से की गई गुस्ताखी का करारा जवाब दिया था। 6 सालों में यह तीसरा मौका है जब चीन की तरफ से अपनी भाषा में अरुणाचल के हिस्सों का नाम बदला गया है। अरुणाचल प्रदेश के इस हिस्से को चीन अपना जंगनान प्रान्त (तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा) बताता है।

बुरी तरह पीटा, गला दबा कर मार डाला, कचरे में फेंक दिया शव: 14 साल की बेटी ने बॉयफ्रेंड के साथ मिल कर करवाई माँ की हत्या

रूस में एक 14 साल की नाबालिग लड़की को अपनी माँ की हत्या की सुपारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 38 वर्षीय अनास्तासिया मिलोस्काया (Anastasia Milosskaya) की पीट-पीटकर और गला दबाकर हत्या करने के बाद उसे मास्को के बालाशिखा शहर में कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था। पुलिस ने उसका शव प्लास्टिक में लिपटा हुआ पाया था।

छात्रा पर आरोप है कि उसने अपने 15 वर्षीय ब्वॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपनी सिंगल मदर अनास्तासिया मिलोस्काया की हत्या की साजिश रची और इसके लिए दो हत्यारों को सुपारी दी। बताया जा रहा है कि उसका ब्वॉयफ्रेंड उसके ही फ्लैट में रह रहा था।

‘द सन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब दो दिन बाद मिलोस्काया का शव प्लास्टिक और गद्दे में लिपटा हुआ पाया गया। उसे मास्को के बालाशिखा शहर में कचरे के ढेर में फेंक दिया गया था। जब एक स्थानीय चौकीदार ने कूड़ेदान में शव को पड़ा देखा, तो उसने पुलिस को इसकी सूचना दी। एक चश्मदीद ने बताया, “मृत महिला की बेरहमी से हत्या करने से पहले उसको बुरी तरह से पीटा गया था और फिर उसका गला दबाया गया था, क्योंकि उसका पूरा चेहरा लाल और सूजा हुआ था।”

रूसी पुलिस के मुताबिक, माँ ने अपनी बेटी की बुरी संगत को लेकर सवाल उठाया था और उसके ब्वॉयफ्रेंड को घर से निकलने के लिए कहा था। साथ ही अपनी बेटी को उससे दूर रहने के लिए कहा था। इस बात से गुस्सा होकर लड़की ने अपनी माँ की हत्या करवाने के लिए दोनों हत्यारों को 3650 पाउंड (करीब 3 लाख 74 हजार रुपए) की सुपारी दी। इसके बाद 24 मार्च, 2023 को जब वह (मिलोस्काया) घर पहुँची, तो उन हत्यारों ने उसकी बेरहमी से हत्या कर दी।

जाँच समिति का दावा है कि लड़की और उसके ब्वायफ्रेंड की नजर माँ की 30,000 पाउंड (करीब 30 लाख 80 हजार रुपए) की सेविंग पर थी। लड़की की एक सहेली ने पुलिस को बताया कि “उसने कई बार अपनी माँ से नफरत करने की बात कही थी, लेकिन उसकी माँ एक बहुत अच्छी इंसान थी और उसको प्यार करती थीं।” वहीं, आरोपित लड़की की दादी ने कहा कि उसकी पोती उस लड़के के बहकावे में आ गई थी, जो एक अच्छे परिवार से नहीं था। फिलहाल, आरोपित लड़कों को अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

बता दें कि हत्या में शामिल सभी आरोपितों की उम्र 14 से 17 के बीच है। इन पर हत्या व हत्या की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, वे एक महीने तक किशोर सुविधा (Adolescent Facility) में रहेंगे।

‘कोयले की दलाली से UPA सरकार पर पुती कालिख’: ‘कॉन्ग्रेस फाइल्स’ के तीसरे एपिसोड में ‘₹1.86 लाख करोड़ के कोयला घोटाले’ की पोल-खोल

कॉन्ग्रेस राज में हुए घोटालों को लेकर भाजपा ने ‘कॉन्ग्रेस फाइल्स’ (Congress Files) का तीसरा एपिसोड जारी किया है। इस एपिसोड में मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए कोयला घोटाले को लेकर बात की गई। इस वीडियो में भाजपा ने कहा है कि कोयले की दलाली से यूपीए सरकार पर कालिख पुत गई थी।

दरअसल, कॉन्ग्रेस राज में एक के बाद कई घोटाले हुए हैं। इन घोटालों को लेकर भाजपा ‘कॉन्ग्रेस फाइल्स’ नामक एक सीरीज जारी कर रही है। इस सीरीज के जरिए भाजपा यह बताने की कोशिश कर रही है कि ‘कॉन्ग्रेस मतलब करप्शन’ होता है। इसी कड़ी में तीसरे एपिसोड में कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर हुए घोटाले पर कॉन्ग्रेस और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है।

वीडियो में भाजपा ने ‘कोयले की दलाली में हाथ काला’ का जिक्र करते हुए कहा है कि यह कहावत ही नहीं सच्चाई भी है। साल 2012 में कोयले की दलाली में कॉन्ग्रेस का हाथ ही काला नहीं हुआ था बल्कि कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार पर कालिख पुत गई थी। अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला प्राकृतिक संसाधन जब कोयला ही कॉन्ग्रेस सरकार में घोटाले का शिकार बन गया तो सोचिए कॉन्ग्रेस ने कहाँ-कहाँ और कैसे-कैसे घोटाले नहीं किए होंगे?”

भाजपा ने आगे कहा है, “कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार के मुखिया मनमोहन सिंह थे। मनमोहन सिंह जब दूसरी बार प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने जनता से कई वादे किए थे। हालाँकि, उनके कार्यकाल में उनके वादों की कम और घोटालों की ज्यादा चर्चा हुई। साल 2004 से 2009 तक हुए घोटाले में करीब 100 कंपनियों को नियमों के विरुद्ध जाकर कोयला खदानों का आवंटन किया गया था। बेहद सस्ती कीमतों पर और बिना किसी नीलामी के खदानों से कोयला निकालने के ठेके निजी कंपनियों को दे दिए गए। इस घोटाले से देश को करीब 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।”

वीडियो में आगे कहा गया है, “इस घोटाले में CAG ने तत्कालीन सरकार पर मनमाने ढंग से सार्वजनिक और प्राइवेट कंपनियों को कोयला भंडार के गलत आवंटन की बात कही थी। कॉन्ग्रेस ने कोयला कंपनियों के साथ मिलकर जो खेल खेला था, उससे न सिर्फ देश को आर्थिक नुकसान हुआ था, बल्कि देश की छवि भी खराब हुई थी। इस घोटाले का रोचक पहलू यह है कि 2004 से 2009 के दौरान कोयला मंत्रालय शिबू सोरेन और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास था। वही प्रधानमंत्री जो रिमोट से चलते थे। मनमोहन सिंह के कोयला मंत्रालय सँभालने के दौरान 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हो गया।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस फाइल्स के पहले एपिसोड में कॉन्ग्रेस सरकार के 70 सालों में हुए 48 खरब 20 अरब 69 करोड़ रुपए के घोटालों के बारे में बताया गया था। पहले एपिसोड में ही मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए 2जी स्पेक्ट्रम से लेकर मनरेगा, कॉमनवेल्थ और हेलीकॉप्टर सौदे में हुए घोटाले के बारे में बताया गया था। वहीं, दूसरे एपिसोड में राजीव गाँधी की सामान्य सी पेंटिंग को 2 करोड़ रुपए में खरीदने के लिए धमकी देने के बारे में बताया गया था।

रस्सी जल गई, ऐंठन नहीं गईः सूरत कोर्ट में राहुल गाँधी की ‘अपुन ही लोकतंत्र’ टाइप दलीलें, कानून को अपना ‘कद’ समझाया

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को गुजरात स्थित सूरत को कोर्ट में अपनी सजा को लेकर अपील की। इस दौरान उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को अपने शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बना लिया। राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस का पूरा तामझाम लेकर सूरत पहुँचे।

राहुल गाँधी के साथ उनकी बहन प्रियंका गाँधी, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कॉन्ग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री- अशोक गहलोत, सुखविंदर सिंह सुक्खु और भूपेश बघेल के अलावा, कई सांसद मौजूद थे। सबसे बड़ी बात है कि राहुल गाँधी इस दौरान कमर्शियल फ्लाइट में उड़ान भरे। चार्टर्ड विमानों के अभ्यस्त नेता के लिए असामान्य बात है, जो इसमें राजनीति भी दिखाती है।

बस में बैठकर कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ राहुल गाँधी कोर्ट पहुँचे। सूरत के अतिरिक्त सत्र अदालत के न्यायाधीश ने राहुल गाँधी को उनकी सजा के खिलाफ उनकी अपील का निस्तारण होने तक जमानत दे दी। इसके साथ ही न्यायाधीश रॉबिन मोगेरा ने 13 अप्रैल 2023 को सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित की और कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से भी छूट दी।

बार एंड बेंच के अनुसार, अपनी सब्मिशन में राहुल गाँधी के सबसे प्रमुख तर्कों में से एक में कहा गया कि न्यायाधीश को कैसे उनके कद को उचित श्रेय देना चाहिए था। राहुल गाँधी अपने सब्मिशन में कहते हैं, “उम्मीद की जाती है कि ट्रायल जज दो साल की सजा देने के परिणामों से अवगत होंगे, अर्थात् अनिवार्य अयोग्यता को लेकर। इस तरह की अयोग्यता एक ओर मतदाताओं के जनादेश की अस्वीकृति और दूसरी ओर राजकोष पर भारी बोझ डालती है। इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि जज सजा के आदेश में इस प्रकृति के परिणाम का उल्लेख करेंगे।”

दरअसल, राहुल गाँधी का कहना है कि न्यायाधीश ने उन्हें जो सजा सुनाई वह लोकतंत्र के खिलाफ था, क्योंकि इससे राहुल गाँधी को लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिए। न्यायाधीश को इस परिणाम के बारे में ‘जानना’ चाहिए था। राहुल गाँधी का तर्क यह कहने जैसा है कि एक उद्योगपति को उचित सजा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि उसके व्यवसाय को नुकसान होगा।

दरअसल, राहुल गाँधी वही बात कह रहे हैं, जो उनके पार्टी के नेता उनके परिवार को लेकर कहते रहते हैं। कॉन्ग्रेस के बाहुबली नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने राहुल गाँधी को दो साल की सजा होने पर कहा था कि गाँधी परिवार के अलग कानून होने चाहिए। तिवारी ने कहा था कि अगर कोर्ट ने राहुल गाँधी के परिवार और उनकी पृष्ठभूमि पर विचार कर फैसला सुनाया होता उनकी सदस्यता नहीं जाती। इसलिए राहुल गाँधी के परिवार के लिए अलग कानून होना चाहिए। राहुल का कुछ-कुछ यही मानना है।

राहुल गाँधी और उनके परिवार के साथ-साथ कॉन्ग्रेसियों का भी मानना है कि गाँधी परिवार कानून से ऊपर है और न्यायपालिका को ही उनके समक्ष झुकना चाहिए। अपील में आगे कहा गया है कि उचित सजा को लेकर संक्षिप्त जाँच की गई। इसमें निचली अदालत ने पक्षकारों को पर्याप्त अवसर दिए बिना अधिकतम सजा देने का काम किया।

राहुल गाँधी इस बात से बेहद नाराज़ नज़र आ रहे हैं कि अदालत ने उन्हें मौका नहीं दिया और तुरंत कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा। जाहिर राहुल गाँधी अपने कद के बारे में न्यायालय को बताना चाह रहे थे। अपील में उनके द्वारा दिए गए इन दो तर्कों से साबित होता है कि उनके अभिजात वर्ग से ताल्लुक रखने को लेकर न्यायपालिका को हमेशा अवगत रहना चाहिए।

प्रदूषण जस का तस, लेकिन यमुना की सफाई के नाम पर फूँक डाले ₹6857 करोड़: दिल्ली के पर्यावरण विभाग ने खोली अपनी ही सरकार की पोल

दिल्ली में यमुना की सफाई के नाम पर केजरीवाल सरकार ने हजारों करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह जानकारी दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा विधानसभा में दी गई। दूसरी तरफ दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अनुसार यमुना का पानी अब भी जहरीला बना हुआ है।

दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यमुना की सफाई के लिए साल 2017 से 2021 तक 6856.91 करोड़ रुपए खर्च किए गए। हर साल नदी की सफाई पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने के बावजूद डीपीसीसी की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में यमुना नदी पूरे साल प्रदूषित रहती है। फरवरी 2023 में जारी डीपीसीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिस स्थान पर नदी शहर से बाहर निकलती है उस स्थान पर नदी के जल में फीकल कोलीफॉर्म (Faecal coliform) सामान्य से 500 गुना अधिक पाया गया था।

यमुना की सफाई को लेकर सीएम केजरीवाल के वादे

दिल्ली सरकार खास तौर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कई बार यमुना की सफाई को लेकर बड़े-बड़े वादे कर चुके हैं। हाल ही में साल 2023-24 के लिए पेश किए गए बजट में केजरीवाल सरकार ने यमुना की सफाई के लिए 1028 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इस दौरान सीएम केजरीवाल ने वादा किया था कि अगले चुनावों तक यमुना इतनी साफ हो चुकी होगी कि वे इसमें डुबकी लगाएँगे।

दिल्ली सरकार द्वारा यमुना की सफाई के लिए तारीख दर तारीख जारी करने का सिलसिला साल 2015 से चल रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2015 में पाँच साल के भीतर (2020 तक) यमुना नदी को साफ करने का वादा किया था। उसी साल उन्होंने कहा था कि पाँच साल बाद हम दिल्ली के हर निवासी को यमुना किनारे लाएँगे ताकि वे स्वच्छ नदी पर गर्व महसूस कर सकें।

नवंबर 2019 में दिल्ली के सीएम ने कहा था कि उनकी सरकार ने अगले चार से पाँच वर्षों में यमुना को साफ करने की योजना बनाई है। उसी साल दिसंबर में उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि अगले विधानसभा चुनाव (2025) तक पूरे गाँव को यमुना में डुबकी लगाने के लिए ले जाएँगे। जनवरी 2020 में दिल्ली असेंबली चुनावों के ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि 5 साल में यमुना पूरी तरह साफ हो चुकी होगी। 5 साल बाद लोग नदी में डुबकी लगा सकेंगे।

यमुना के प्रदूषण स्तर में बदलाव नहीं हुआ

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के वजीराबाद से लेकर ओखला के बीच का हिस्सा ही यमुना को 76% तक प्रदूषित कर देता है। यमुना नदी की लंबाई लगभग 1400 किलोमीटर है। जबकि वजीराबाद से ओखला के बीच नदी 22 किलोमीटर क्षेत्र में ही बहती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की वर्ष 2022 की नई रिपोर्ट के अनुसार यमुना के प्रदूषण स्तर में 4 सालों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

सीपीसीबी ने 2018-19 में राजधानी में यमुना के अलग-अलग स्थानों से लिए सेंपल की जाँच की थी। इसमें बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड (BOD) की सबसे ज्यादा मात्रा 83.0 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। CPCB ने 2021-22 में दोबोरा नमूने लिए और जाँच की। इस जाँच में बीओडी की मात्रा 83.0 मिलीग्राम प्रति लीटर ही मिली।

‘मेरे दादा जी 72 हूरों के साथ बिजी होंगे’: पाकिस्तान की महिला पत्रकार ने अब कट्टरपंथियों की वाट लगा दी, पूर्वजों के प्रयागराज छोड़ने के फैसले पर जताया था पछतावा

पाकिस्तान (Pakistan) की मशहूर पत्रकार आरजू काजमी (Arzoo Kazmi) का एक ट्वीट ‘वाट लगा दी दादा जी’ सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने अपने दादा जी के फैसले पर अफसोस जताते हुए बताया था कि वह असल में हिंदुस्तान की रहने वाली हैं, लेकिन उनके दादाजी पलायन कर दिल्ली और प्रयागराज से पाकिस्तान आ गए थे। अब उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर उनके ट्वीट को पसंद करने वालों और नापसंद करने वालों का शुक्रिया अदा किया है। साथ ही 0:18 से 2:15 मिनट के बीच आरजू काजमी ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें फोन और मैसेज करके उनकी जमकर क्लास लगाई।

उन लोगों ने महिला पत्रकार से कहा, “तुम्हें शर्म आनी चाहिए, इस तरह का ट्वीट लगाने के लिए। तुम्हारे दादा जी की रूह इससे कितनी परेशान होगी।” इस पर आरजू ने उन कट्टरपंथी लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, “जहाँ तक हमें इस्लाम में बताया गया है कि 72 हूरें मिलती हैं, मेरे दादाजी तो उन 72 हूरों के साथ बिजी होंगे। उनके पास तो बिल्कुल भी टाइम नहीं होगा कि वह नीचे देख सकें कि मैं यहाँ क्या कर रही हूँ।”

उन्होंने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा, “यह मेरा व्यक्तिगत विचार है, जिसे साझा करना मैंने उचित समझा, क्योंकि मेरे एक के बाद एक भाई बाहर जाकर यूरोप में सेटल हो रहे हैं। एक भाई तो बल्कि सेटल हो भी चुका है। ऐसे में ये सोचना कि पाकिस्तान में उनका कोई भविष्य नहीं है। इसी कारण वो और उनका परिवार बाहर जा रहे हैं और अगर मैंने इस बात को ट्विटर पर लिख दिया, तो इतना बवाल क्यों हो गया? लोग इतना ज्यादा डिस्टर्ब क्यों हो गए? ये बात मुझे समझ नहीं आई। कोई बात नहीं आहिस्ता-आहिस्ता आदत पड़ जाएगी। हम तो इसी तरह से बात किया करते हैं। अब किसी को नहीं अच्छी लगती है, तो क्या किया जा सकता है।”

अपनी बात पूरी करने के बाद वह पाकिस्तान की न्यूज बताने लगती है। पत्रकार के मुताबिक, उनके देश (पाकिस्तान) में आटे की किल्लत अभी भी पहले जैसे ही है। रमजान में लोगों के घरों में रसोई गैस तक नहीं आ रही है, जिससे वे काफी परेशान हैं।

बता दें कि इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में रहने वाली पत्रकार आरजू काजमी ने अपने पूर्वजों के 1947 में भारत से पाकिस्तान चले जाने के फैसले पर अफसोस जताते हुए 1 अप्रैल, 2023 को ट्वीट किया, “मेरे भाइयों और परिवार के अन्य सदस्यों को लगता है कि उनका पाकिस्तान में कोई भविष्य नहीं है। मेरे दादाजी और उनका परिवार बेहतर भविष्य के लिए प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान चला आया था। वाट लगा दी दादा जी।” आरजू का ट्वीट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उन्हें अपने परिवार के साथ भारत आने को कहा था।

‘डिग्री तो बहाना है, भ्रष्टाचार से ध्यान हटाना है’: BJP ने पोस्टरों के जरिए अरविंद केजरीवाल की खोली पोल, कोर्ट ने भी फटकारते हुए लगाया था ₹25000 का जुर्माना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर बीजेपी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच जंग रुकने का नाम ले रही है। भाजपा ने एक बार फिर केजरीवाल को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए हैं। इस पोस्टर में कहा गया है कि केजरीवाल भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए पीएम की डिग्री को मुद्दा बना रहे हैं।

दरअसल, पीएम मोदी की डिग्री माँगने को लेकर हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके बाद भी केजरीवाल लगातार डिग्री का मुद्दा उठाते जा रहे हैं। इसको लेकर बीजेपी ने अपने दिल्ली स्थित कार्यालय के बाहर पोस्टर लगाए हैं। इस पोस्टर में लिखा है, “डिग्री तो बहाना है केजरीवाल को भ्रष्टाचार से ध्यान हटाना है।” ये पोस्टर भाजपा नेता आशीष सूद ने लगवाए हैं।

बता दें कि इससे पहले बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली में पोस्टर लगवाए थे। इस पोस्टर में अरविंद केजरीवाल को बेईमान बताते हुए दिल्ली की सत्ता से हटाने की अपील की की गई थी। इस पोस्टर में लिखा था, “बेईमान, रिश्वतखोर, तानाशाह अरविंद केजरीवाल को हटाओ, दिल्ली बचाओ।”

क्या है मामला


दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने RTI के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री की माँग की थी। इसको लेकर केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय, गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया था कि वह प्रधानमंत्री की डिग्री के बारे में जानकारी दें। केंद्रीय सूचना आयोग के इस निर्देश को गुजरात विश्विद्यालय ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल को फटकार लगाते हुए उन पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

बता दें कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों में घिरी हुई। केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया अब भी जेल में बंद हैं। दोनों पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप हैं। इन आरोपों के चलते ही दोनों नेताओं को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा है।

प्राचीन हिंदू मंदिर में तोड़फोड़, गणेश जी की मूर्ति के किए कई टुकड़े: आंध्र की घटना पर हमलावर हुई भाजपा, कहा – ऐसी घटनाओं में गिरफ़्तारी तक नहीं हो रही

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक हिन्दू मंदिर और उसमें मौजूद देवी-देवताओं की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किए जाने की खबर है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अभी तक आरोपितों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। जिस मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति को तोड़ा गया है, उस गाँव का नाम हाउस गणेश है। इस घटना के बाद भाजपा ने आंध्र प्रदेश की YSR सरकार पर हिन्दू विरोधी होने का आरोप लगाया है। घटना सोमवार (3 मार्च, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला गुंटूर जिले के फिरंगीपुरम क्षेत्र का है। यहाँ हाउस गणेश नाम के गाँव में एक हिन्दू मंदिर है जो वहाँ के स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर में तमाम हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ है। आरोप है कि 3 मार्च को किसी अज्ञात व्यक्ति ने मंदिर में घुस कर तोड़फोड़ की है। इसी के इस तोड़फोड़ में मंदिर को नुकसान हुआ है। हमलावर ने मंदिर में मौजूद भगवान गणेश की मूर्ति को भी तोड़ डाला। जब इस मामले की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो वो नाराज हो गए।

बताया गया है कि भगवान गणेश की मूर्ति के कई टुकड़े कर दिए गए थे। इस मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो मौके पर पहुँची। अज्ञात आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है। क्षतिग्रस्त मंदिर की तोड़फोड़ सही करवाई जा रही है और मूर्तियों को फिर से स्थापित करवाया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि असामाजिक तत्वों की पहचान जल्द कर के आरोपित को गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस ने लोगो से संयम बरतने की भी अपील की है।

इस मामले पर नाराजगी जताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने आंध्र प्रदेश की YSR सरकार पर हिन्दू विरोधी होने का आरोप लगाया है। भाजपा नेता सुनील देवधर के मुताबिक, YS जगन मोहन रेड्डी सरकार में हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस से पहले भी आंध्र प्रदेश में कई मंदिरों को निशाना बनाया गया है लेकिन उन मामलों में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। आंध्र के मुख्यमंत्री को भाजपा ने हिन्दू विरोधी करार दिया है।

फिलहाल इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गई है।