बिहार हिंसा की आग में जल रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इफ्तार पार्टी करने में वयस्त हैं। वहीं, हिंसा के बीच सासाराम में हुए बम धमाके को लेकर राजद विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन ने कहा है कि मुस्लिम लड़के अपनी सुरक्षा के लिए बम बना रहे थे।
दरअसल, राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में इस्लामिया ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन ने इफ्तार पार्टी आयोजित की थी। इस पार्टी में नीतीश कुमार भी पहुँचे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि बिहार के बिहारशरीफ और सासाराम में हुई हिंसा की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। लेकिन नीतीश कुमार इफ्तार पार्टी का लुफ्त ले रहे हैं।
वहीं, रोहतास जिले के सासाराम में हुए बम धमाके को लेकर राजद विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन ने विवादित बयान दिया है। ‘इंडिया टीवी’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेहालुद्दीन ने बम बनाने वाले मुस्लिम युवकों का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि मरता क्या न करता। अपनी जान बचाने के लिए मुस्लिमों के बच्चों को ये करना पड़ता है। वे अपनी सुरक्षा में बम बना रहे थे।
बता दें कि सासाराम में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद शनिवार (1 अप्रैल, 2023) को बम धमाके की खबर सामने आई थी। पुलिस ने बताया था कि मकान के अहाते में बम बनाते समय धमका हुआ था। इस बम विस्फोट में 6 लोग घायल हुए थे। सभी को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में पुलिस ने 2 लोगों की गिरफ्तारी की भी बात कही थी।
बम धामके की एक खबर सोमवार (3 अप्रैल 2023) को भी सामने आई। हालाँकि बिहार पुलिस ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा था कि यह एक पटाखे की आवाज है। पुलिस ने कहा है कि सुबह करीब 5 बजे सासाराम थाना से करीब 3 किमी की दूरी पर मोची टोला में मन्नौवर राईन के घर की बाहरी दीवार पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने पटाखा फोड़ा दिया। इससे वहाँ मौजूद लोगों में बम विस्फोट की अफवाह फैल गई।
सूचना पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य पदाधिकारी द्वारा पहुँचकर मामले की छानबीन की गई। घटनास्थल से सटे बस्ती मोड़ पर स्टैटिक बल एवं पदाधिकारी तैनात हैं। विधि-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है। पटाखा फोड़ने वाले शरारती तत्व की पहचान करने की दिशा में अग्रतर कारवाई की जा रही है।
बता दें कि रामनवमी शोभायात्रा के दौरान बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ और रोहतास जिले के सासाराम में हिंसा शुरू हो गई थी। कई जगहों पर आगजनी से लेकर फायरिंग और बम धमाके तक की खबर सामने आई थी। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार बिहारशरीफ और नालंदा में अब भी शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम नहीं हो पाई है। बिहार पुलिस ने हिंसा में लिप्त 109 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों ही हिंसा ग्रस्त जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।
नवजोत सिंह सिद्धू के जेल से निकलने के बाद पंजाब की सियासत गर्म हो गई है, खासकर कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर हलचल तेज है। सोमवार (3 अप्रैल, 2023) को पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने गायक सिद्धू मूसेवाला के परिजनों से मुलाकात की। सिद्धू मूसेवाला की हत्या को लगभग एक साल हो चुके हैं। नवजोत मनसा जिले में उनके माता-पिता से मिले। उनके साथ गाड़ियों का एक लंबा काफिला साथ था।
नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला स्थित अपने आवास से वहाँ पहुँचे थे। जब वो दोपहर के सवा 2 बजे मूसा गाँव में पहुँचे, तब उनके साथ कॉन्ग्रेस के कई नेता भी थे। 1988 में एक हत्या के मामले में वो दो दिन पहले ही 1 साल जेल की सज़ा काट कर निकले हैं। सिद्धू मूसेवाला ने जब कॉन्ग्रेस जॉइन की थी, तब नवजोत सिंह सिद्धू ही प्रदेश अध्यक्ष थे। जेल से निकलते ही नवजोत सिंह सिद्धू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि लोकतंत्र जंजीरों में कैद है और देश की संस्थाएँ गुलाम बन चुकी हैं।
साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए एक साजिश चल रही है। हालाँकि, पंजाब कॉन्ग्रेस सिद्धू को लेकर काफी सतर्क है। पार्टी आलाकमान की योजना है कि कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में रैलियों के लिए उनका इस्तेमाल किया जाए। नवजोत सिंह सिद्धू क्रिकेटर, क्रिकेट कमेंटेटर और कॉमेडी शो का हिस्सा भी रहे हैं। पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने कहा है कि सिद्धू का सार्वजनिक जीवन में फिर से स्वागत है।
Punjab | Congress leader Navjot Singh Sidhu meets late singer Sidhu Moosewala's family in Mansa
"Are governments supposed to protect or perpetrate crime?" he says as he questions the law & order situation in the state. pic.twitter.com/NH95ip4iJh
उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति का हिस्सा बनाया जाएगा। अब जब सूरत की अदालत ने राहुल गाँधी को जमानत दे दी है, पार्टी में सिद्धू का क्या रोल है इस पर जल्द ही मंथन होना है। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी नवजोत कौर राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का हिस्सा बनी थीं। जालंधर में उपचुनाव होने हैं, उससे पहले पार्टी सिद्धू और अन्य पंजाब कॉन्ग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाना चाहती है।
एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने बॉलीवुड छोड़कर हॉलीवुड जाने के अपने फैसले को लेकर खुलासा किया था। उनके इस फैसले के बाद फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने दावा किया है कि साल 2012 में प्रियंका चोपड़ा ने लगातार दो हिट फिल्में की थीं। इसके बाद बॉलीवुड में उन्हें किनारे लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था।
हिंदुस्तान टाइम्स के साथ हुए इंटरव्यू में फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने कहा है कि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ परिवारों का एकाधिकार है। उनकी कई पीढ़ियाँ इस इंडस्ट्री में रह चुकीं हैं और वे दर्शकों की नब्ज जानते हैं। असरानी ने आगे कहा है, “यह बात तो स्पष्ट है कि हर किसी के अपने पसंदीदा लोग होते हैं। उन्हें अपने पसंद वाले लोगों के साथ काम करने का पूरा अधिकार है। लेकिन समस्या तब होती है जब वे किसी एक्टर या टेक्नीशियन को न केवल अपनी फिल्म से, बल्कि पूरी इंडस्ट्री से ही बाहर करने की कोशिश करने लगते हैं।”
अपूर्व असरानी ने आगे कहा कि यदि कोई एक्टर किसी की फिल्म करने से इनकार कर देता है या फिर किसी कारण से वह फिल्म नहीं करना चाहता, ऐसी स्थिति में लोगों का ईगो हर्ट हो जाता है। इसके बाद वे अन्य लोगों को उस एक्टर के साथ फिल्म न करने के लिए कहते हैं। यही नहीं उस एक्टर को बदनाम करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। इसके लिए मीडिया और नामचीन पत्रकारों का उपयोग किया जाता है। बड़े और भ्रष्ट लेखक उसके खिलाफ लेख लिखते हैं। इन लेखों के जरिए उस व्यक्ति के खिलाफ कई प्रकार के झूठे आरोप लगाए जाते हैं।
असरानी ने आगे कहा है कि यदि यह एक्टर विनम्र है और लगातार अच्छा काम करता है तो उसके काम को खराब बताते हुए ऐसी समीक्षा की जाती है जिससे उसकी छवि पर गलत प्रभाव पड़े। कई बार तो इससे भी बुरी स्थिति होती है। अच्छे काम के बावजूद बिल्कुल भी समीक्षा नहीं की जाती। हालाँकि इन सबके बाद भी यदि एक्टर की फिल्म हिट हो जाती है तो मीडिया इसे खबर नहीं बनाता। ऐसा होना एक प्रतिभाशाली और मेहनती व्यक्ति के लिए सबसे अधिक हानिकारक होता है। खासकर ऐसे लोगों के लिए जिनके पिता या परिवार का कोई अन्य व्यक्ति फिल्म इंडस्ट्री में नहीं है।
फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने आगे कहा है कि कार्तिक आर्यन जैसे लोगों के खिलाफ भी भरपूर कैंपेन (अभियान) चलाया गया था। लेकिन इसके बाद भी वह आगे बढ़ गए। उन्होंने आगे कहा है कि साल 2012 में प्रियंका चोपड़ा के खिलाफ भी इसी तरह का अभियान चलाया गया था और उन्हें किनारे करने की कोशिश की गई।
असरानी ने कहा है, “प्रियंका ने एक साल में ही दो बड़ी हिट फिल्में ‘बर्फी’ और ‘अग्निपथ’ की थी। लेकिन एक अखबार के पहले पन्ने पर यह कहा गया था कि कोई भी हीरो उनके साथ काम नहीं करना चाहता था। वास्तव में प्रियंका को वह सम्मान नहीं मिल रहा था जिसकी वह हकदार थीं। यही कारण है कि वह एक एक्ट्रेस और एक स्टार के रूप में आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।”
प्रियंका ने बताई थी बॉलीवुड छोडने की वजह
प्रियंका चोपड़ा ने कहा था कि बॉलीवुड में मिल रहे काम से वह खुश नहीं थीं। उन्हें किनारे लगाने की कोशिश की जा रही थी। वे अकेली पड़ गईं थी। प्रियंका ने कहा, लोग मुझे कास्ट नहीं कर रहे थे। लोगों को मुझसे शिकायत थी। मैं इस तरह के गेम में माहिर नहीं हूँ। इसलिए मैं पॉलिटिक्स से थक गई थी और मुझे लगा कि अब ब्रेक की जरूरत है। मैं उन फिल्मों के लिए तरसना नहीं चाहती थी, जिन्हें मुझे करना ही नहीं था। लेकिन मुझे यह पता था कि इसके लिए क्लबों और ग्रुपों को छोड़ना पड़ेगा।
उन्होंने कहा था, “मुझे यह भी पता था कि इसके लिए बहुत अधिक मेहनत करनी होगी। मैंने बॉलीवुड में लंबे समय तक काम किया है। लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि अब आगे काम नहीं करना चाहिए। इसलिए जब म्यूजिक का ऑफर आया तो मैंने कहा कि भाड़ में जाओ, मैं तो चली अमेरिका।”
अधिकारी हो या नेता, वे किसी से सवाल करने से नहीं डरते। वे कैमरा और माइक लेकर ग्राउंड जीरो पर उतरने से नहीं हिचकते। वे कभी सड़क और पुल निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाते। कभी थाने में घुस पुलिसिया तौर-तरीकों पर। वे कभी छात्रों की आवाज बन जाते, कभी आम आदमी की। भले उनके तौर-तरीकों को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो, लेकिन उन्हें देखने-सुनने वाले भी हजारों-लाखों हैं। यही कारण है कि हाल के समय में बिहार की वे समस्याएँ भी नग्न होकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पा गईं, जिससे मुख्यधारा की मीडिया मुँह मोड़ती रहती है।
लेकिन आज जब बिहार के कई शहरों में रामनवमी शोभा यात्राओं को निशाना बनाया गया है, उनकी आवाज कहीं न तो सुनाई पड़ रही है और न दिखाई। आखिर ये बेधड़क आवाजें बिहारशरीफ और सासाराम की ग्राउंड जीरो से क्यों नहीं सुनाई पड़ रहीं? हम बात कर रहे हैं उन यूट्यूबर्स की जो हाल के समय में बिहार से जुड़े हर मुद्दे पर ग्राउंड जीरो की आवाज बनकर उभरे थे। इसमें मनीष कश्यप, रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे नाम शामिल हैं।
लेकिन इनमें से कोई भी बिहार में हालिया हिंसा की रिपोर्ट करता नहीं दिख रहा। ‘सच तक न्यूज’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले मनीष कश्यप तमिलनाडु पुलिस की कस्टडी में हैं। रवि भट्ट के चैनल का नाम भले ‘टाइम ऑफ अयोध्या’ हो, लेकिन वे भी खबरें बिहार पर ही केंद्रित करते रहे हैं। भट्ट की इस समय बिहार की आर्थिक अपराध शाखा (EOU) तलाश कर रही है। इन दोनों की हालत देख जो बचे यूट्यूबर हैं, उन्होंने बिहारशरीफ और सासाराम से दूरी बना रखी है।
बिहार के ऐसे ही एक यूट्यूबर ने नाम न छापने की शर्त पर ऑपइंडिया को बताया, “हम सब जानते हैं कि मनीष कश्यप के खिलाफ मामलों में दम नहीं हैं। देर-सबेर उनको अदालत से राहत मिलनी ही है। लेकिन उनके साथ जो सुलूक किया गया, उसका मकसद ही हम जैसों लोगों को डराना था। मेनस्ट्रीम मीडिया को नियंत्रित करना सरकार के लिए आसान था। लेकिन हमलोग उन खबरों को भी सामने ला देते थे जो सरकार नहीं सामने आने देना चाहती थी। जिसको मेनस्ट्रीम मीडिया जगह नहीं देती थी। लोकल यूट्यूब चैनल चलाने वाले लोगों को दबाने के लिए ही मनीष कश्यप पर कार्रवाई की गई।”
वे कहते हैं, “हम सब डरे हुए हैं। इस माहौल में यदि बिहारशरीफ और सासाराम से चीजों को दिखाने लगे तो कोई नहीं जानता कब पुलिस किस मामले में फँसा दे। हम तो फिर भी पूरे राज्य में रिपोर्टिंग करते रहे हैं। लेकिन ‘बिहार दर्शन न्यूज’ जैसे चैनल जो सासाराम की लोकल खबरों को कवर करते रहे हैं और जिनके सब्सक्राइबर भी बहुत ज्यादा नहीं हैं, वे भी मनीष कश्यप की हालत देख झमेले में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने भी रामनवमी पर हुई हिंसा और बाद में जो कुछ हुआ उस पर कोई रिपोर्ट नहीं की है।”
इस दावे की पड़ताल के लिए हमने ‘बिहार दर्शन न्यूज’ के यूट्यूब चैनल को भी खंगाला। जो आखिरी वीडियो इस चैनल पर अपलोड किया गया था वह डेहरी नगर परिषद मतदान से जुड़ी थी। उससे पहले मोटरसाइकिल पर भव्य शोभा यात्रा निकालने की खबर थी। लेकिन रामनवमी शोभायात्रा पर हुए हमले से जुड़ी कोई खबर हमें इस चैनल पर नहीं मिली।
‘बिहार दर्शन न्यूज’ पर हिंसा की कोई रिपोर्टिंग नहीं
इसी तरह मनीष कश्यप के ‘सच तक न्यूज’ चैनल जिसके 66 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं पर आखिरी वीडियो दो सप्ताह पहले अपलोड हुआ था। यह वीडियो भी सरेंडर से पहले उनकी ओर से जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों के साथ कथित हिंसा से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करने के बाद मनीष कश्यप पर शिकंजा कसा गया था। ध्यान रहे कि मेनस्ट्रीम मीडिया में भी कथित हिंसा को लेकर रिपोर्टें प्रकाशित हुईं थी। यह भी जानने योग्य बात है कि तमिलनाडु विवाद से ठीक पहले मनीष कश्यप ने सेना के एक जवान की पिटाई को लेकर बिहार पुलिस को घेरा था।
मनीष कश्यप का ‘सच तक न्यूज’
2.23 लाख सब्सक्राइबर वाले चैनल ‘द अभिषेक तिवारी शो’ पर भी हालिया हिंसा को लेकर हमें कोई रिपोर्ट नहीं दिखी। रिपोर्टर निभा के नाम से मशहूर निभा सिंह के चैनल ‘आरएन न्यूज’, जिसके 10 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं पर भी हमें इससे जुड़ी कोई रिपोर्ट खबर लिखे जाने तक नहीं दिखी। हालिया हिंसा की रिपोर्टिंग से ऐसी ही दूरी हमें हमें समर्थ राठौर, प्रिंसिपल ऑफ न्यूज, सच बिहार, काबिल न्यूज जैसे अन्य चैनलों पर भी देखने को मिला।
अभिषेक तिवारी के यूट्यूब चैनल ‘द अभिषेक तिवारी शो’
इनके ग्राउंड जीरो से गायब होने से भी ज्यादा दुखद, उनके भीतर का वह डर है, जिसके कारण इनमें से कई ने ऑपइंडिया के संपर्क करने पर भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इनके गायब होने की वजह से बिहारशरीफ और सासाराम जैसी जगहों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी पूरी तरह से तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही।
मसलन बिहार पुलिस ने दावा किया कि बिहारशरीफ और सासाराम में स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। लेकिन उसके कुछ घंटों बाद ही मेनस्ट्रीम मीडिया में सासाराम के मोची टोला में बम फेंके जाने की खबर सोमवार (3 अप्रैल 2023) की सुबह आई। इन रिपोर्टों में स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया गया था कि मोटरसाइकिल सवार चार लोग आए और बम फेंक कर चले गए। पुलिस ने कुछ घंटों बाद कहा कि घर की दीवार पर पटाखे मारे गए थे। लेकिन पुलिस के इस दावे पर उस मोहल्ले के लोगों का क्या कहना है, यह बात अब तक मीडिया में नहीं आई है।
इसी तरह हिंसा प्रभावित क्षेत्र से पलायन करते लोगों की वीडियो सामने आए जिसे पुलिस ने अफवाह बता दिया। कई मीडिया हाउस ने बाद में इससे जुड़ा अपना ट्वीट ही डिलीट कर लिया। 1 अप्रैल 2023 को भी सासाराम में मस्जिद के पास ब्लास्ट की खबर आई थी। पुलिस ने इसे एक मकान के अहाते में बम तैयार करते हुए हुआ विस्फोट बताया। लेकिन यह जानकारी नहीं दी कि वह मकान किसका था, जिसके अहाते में बम बनाया जा रहा था। वे दो लोग कौन हैं जिनको इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।
हिंसा से जुड़े ऐसे बहुतेरे दावे सोशल मीडिया में वायरल हैं, जिनका जवाब बिहार पुलिस टैग किए जाने के बावजूद नहीं दे रही। आधी-अधूरी जानकारी वाले ट्वीटों को लेकर सोशल मीडिया में बिहार पुलिस ट्रोल भी की जा रही है। बावजूद तस्वीर स्पष्ट करने के प्रयास नहीं हो रहे। दरअसल ऐसी तमाम जानकारी जो पुलिस सार्वजनिक नहीं कर रही है, ग्राउंड जीरो पर यूट्यूबर्स की मौजूदगी से बिहार में अतीत में बाहर आ जाती थी। ये यूट्यूबर्स यदि आज सासाराम में होते तो वे आपको बता चुके होते कि जिस मकान के अहाते में बम बन रहा था, वह किसका है। यह मकान मस्जिद से कितनी दूरी पर है। यह मकान जिस मोहल्ले में है, कभी वहीं पुलिस पर भी हमला हुआ था। वगैरह, वगैरह…
जिस राज्य में सत्ता संरक्षित बाहुबलियों के बारे में खबर प्रकाशित करने पर पत्रकार की हत्या कर दी जाती हो। जिस राज्य का पूर्व मुख्यमंत्री और चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव सवाल पूछने पर पत्रकार को सार्वजनिक तौर पर कहें- दे देंगे दो मुक्का नाच के गिर जाओगे, उस राज्य में इन बेधड़क आवाजों के उभार ने व्यवस्था के हर नट-बोल्ट को आम लोगों के सामने नंगा कर दिया था। शायद यही कारण है कि सोशल मीडिया में पूछा जा रहा है कि जिस नीयत से मनीष कश्यप पर कार्रवाई की गई, क्या बिहार सरकार उसमें सफल हो गई है?
कोलकाता हाईकोर्ट ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को पश्चिम बंगाल सरकार से हावड़ा में रामनवमी की रैली के दौरान पथराव के बाद हिंसा और आगजनी जैसी घटनाओं को लेकर रिपोर्ट तलब की। कोर्ट ने हिंसा की घटनाओं को लेकर बंगाल पुलिस को भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि वह क्यों इसे नियंत्रित नहीं कर पाई, जबकि उसकी अनुमति पर ही जुलूस निकला था। अदालत ने पाँच अप्रैल तक राज्य सरकार से सभी सीसीटीवी फुटेज और वीडियो जमा करने का निर्देश दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंगाल में हिंसा की घटनाओं को लेकर विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने हाईकोर्ट में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से जाँच कराने की माँग वाली एक जनहित याचिका दायर की थी। आज इस पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज जमा करने का निर्देश दिया।
वहीं, एडवोकेट जनरल एसएन मुखर्जी राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए अदालत में पेश हुए। मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम ने मुखर्जी से पूछा “पुलिस ऐसी घटनाओं की पूर्व सूचना देने में विफल क्यों रही, जबकि पहले भी इस तरह के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं? पुलिस का इतना लापरवाह रवैया कैसे हो सकता है? अब तक क्या कार्रवाई की गई है? क्या उन क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई है?” इस पर मुखर्जी ने तर्क दिया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण जुलूस की अनुमति दी थी। शिवपुर में स्थिति नियंत्रण में है।
मालूम हो कि भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ट्विटर पर शुक्रवार (31 मार्च 2023) को लिखा था, “मैंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में (calcutta high court) में हावड़ा और नॉर्थ दिनाजपुर के डालखोला में रामनवमी के जुलूसों पर हिंसा और हमले की घटनाओं के संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। मैंने कोर्ट से हालात पर काबू पाने और निर्दोष लोगों के प्राणों की रक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती और हिंसा के मामलों की एनआईए जाँच कराने की माँग की है।”
बता दें कि रामनवमी के दिन इस्लामपुर शहर के डालखोला इलाके में दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई झड़प में एक शख्स की मौत हो थी गई जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए थे।
‘मोदी सरनेम’ मामले में 2 साल की सजा पाने वाले राहुल गाँधी को 13 अप्रैल 2023 तक बेल मिल गई है। उन्होंने सूरत मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। हालाँकि अदालत ने उनकी सजा पर रोक नहीं लगाई। कोर्ट ने कहा है कि मामले पर हर पक्ष सुने बिना वो ऐसा नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में राहुल गाँधी का मौजूद रहना जरूरी नहीं है।
बता दें कि केस की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी जबकि 10 अप्रैल तक मानहानि मामले में सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा गया है। राहुल गाँधी आज मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ अपील करने के लिए आज सूरत भी पहुँचे थे। इस दौरान उनके राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी साथ देने आए। प्रियंका गाँधी भी भाई के समर्थन में आईं। इसके अलावा अदालत के बाहर भी काफी भीड़ का जमावड़ा लगा रहा।
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा उन लोगों को कोर्ट के निर्णय पर बहस नहीं करनी। वह बस अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।
इस बीच कॉन्ग्रेसियों ने राहुल गाँधी को समर्थन दिया। वहीं राहुल गाँधी ने एक ट्वीट करके कहा- “ये मित्रकाल के विरुद्ध लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। इस संघर्ष में, सत्य मेरा अस्त्र है, और सत्य ही मेरा आसरा।”
ये ‘मित्रकाल’ के विरुद्ध, लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।
बता दें कि मोदी सरनेम पर आपत्तिजनक बयानबाजी करने के मामले में 23 मार्च 2023 को सूरत की जिला अदालत ने काॅन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें जमानत भी दे दी गई। उन्हें ऊपरी अदालत में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया था।
इसके बाद उनसे उनका सरकार बंगला खाली करने को कहा गया था। 2004 से राहुल गाँधी 12, तुगलक लेन बँगला पर रहे थे। कोर्ट में दोषी करार होने के बाद लोकसभा की ‘हाउसिंग कमिटी’ ने राहुल गाँधी को सरकारी बँगला छोड़ने का नोटिस जारी किया था। सामान्यतः ऐसे मामलों में एक तय समयसीमा दी जाती है, राहुल गाँधी के मामले में उन्हें 30 दिनों (अदालत के फैसले से), अर्थात एक महीने का समय दिया गया था।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में बकरे-बकरियों की तादाद में करीब 36 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के भूगोल विभाग के प्रो. निजामुद्दीन खान को जिले में बकरे-बकरियों की संख्या कम होने के कारणों का पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस शोध के लिए भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली से उन्हें 10 लाख रुपए मिले हैं। इस बीच बीजेपी सांसद मेनका गाँधी (Maneka Gandhi) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें वह किसानों और ग्रामीण लोगों को गधी और बकरियों के दूध से साबुन बनाने की सलाह देते हुए नजर आ रही हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सुल्तानपुर के बल्दीराय में 2 अप्रैल 2023 को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “लद्दाख में लोगों का एक समूह है। उन्होंने देखा कि गधों की संख्या कम हो रही है।” इसके बाद उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों से पूछा कि बताओ कितने दिन हो गए आप लोगों को गधे देखे हुए? फिर वह बोलीं, “उनकी संख्या कम हो गई है। धोबी ने भी गधों का उपयोग करना बंद कर दिया है। लेकिन लद्दाख में इन लोगों ने गधी से दूध निकालना शुरू किया और उसके दूध से साबुन बनाया।”
मेनका गाँधी ने आगे कहा, “ऐसा माना जाता है कि गधी के दूध का साबुन औरत के शरीर को हमेशा सुंदर रखता है। एक बहुत मशहूर विदेशी रानी होती थी, ‘क्लियोपैट्रा’ वो गधी के दूध से नहाती थी। इसलिए गधी के दूध से बने साबुन दिल्ली में 500 रुपए (एक साबुन) में एक बिक रहे हैं। क्यों न हम लोग बकरी और गधी के दूध का साबुन बनाए।”
“गधे के दूध का साबुन औरत के शरीर को खूबसूरत रखता है”
इसके आलवा मेनका गाँधी ने लोगों को उपले बनाने और बेचने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा, “पेड़ गायब हो रहे हैं। लकड़ी इतनी महँगी हो गई है कि आदमी मरते वक्त भी अपने पूरे परिवार को कंगाल करता है। दाह संस्कार में 15-20 हजार रुपए की लकड़ी लगती है। इससे अच्छा है कि हम गोबर के लंबे कंडे बनाए। उसमें खुशबूदार सामग्री लगा दें। एक ऑर्डर बना दें कि जो भी मरता है, उसको गोबर के कंडों से हम लोग जला दें। इसमें 1500 से 2000 रुपए में सारे रस्म रिवाज पूरे हो जाएँगे। आप लोग कंडे बेचोगे तो एक महीने में लाखों रुपए के कंडे बिक जाएँगे।”
सांसद ने अंत में कहा, “मैं नहीं चाहती कि आप जानवरों से पैसे कमाएँ। आज तक कोई भी बकरी-गाय पालकर अमीर नहीं हुआ है। हमारे पास इतने डॉक्टर नहीं हैं। पूरे सुल्तानपुर में 25 लाख लोगों में मुश्किल से 3 डॉक्टर होंगे। या कभी-कभी वह भी नहीं। गाय बीमार होगी, भैंस बीमार होगी, बकरा बीमार हो गया तो वहीं आपके लाखों रुपए लग जाते हैं। इसलिए मैं बकरी पालने या गाय पालने वाले किसी भी व्यक्ति के सख्त खिलाफ हूँ। पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने में कई साल लग जाते हैं। आप 10 साल कमाओगे और एक रात में मर जाएगा जानवर। फिर खत्म हो गई बात।”
बता दें कि अलीगढ़ में अभी 136507 में बकरे-बकरियाँ हैं। 19वीं पशुगणना के आधार पर एक लाख 73 हजार 119 बकरे-बकरियाँ थीं, जबकि 20वीं पशुगणना के आधार पर एक लाख 36 हजार 507 बकरे-बकरियाँ हैं। यानी यहाँ बकरे-बकरियों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने कहा है कि वह जानते हैं कि सीबीआई जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वह बहुत ताकतवर लोग हैं। लेकिन, सीबीआई (CBI) को कहीं पर भी घबराने या रुकने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सीबीआई से यह भी कहा है कि किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
दरअसल, केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) की स्थापना के 60 साल पूरे होने पर सोमवार (3 अप्रैल, 2023) को डायमंड जुबली कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने में राजनीतिक इच्छा शक्ति में कोई कमी नहीं है। सीबीआई को कहीं पर भी हिचकने या रुकने की जरूरत नहीं है। मैं जानता हूँ आप जिनके खिलाफ एक्शन ले रहे हैं वे बेहद ताकतवर लोग हैं।”
पीएम मोदी ने आगे कहा है, “सालों तक ये लोग सरकार और सिस्टम का हिस्सा रहे हैं। आज भी वे कई जगह किसी राज्य में सत्ता का हिस्सा हैं। सालों तक इन लोगों ने भी एक इकोसिस्टम बनाया है। यह इकोसिस्टम अक्सर उनके काले कारनामों को छिपाने के लिए सरकारी संस्थाओं की छवि बिगाड़ने के लिए सक्रिय हो जाता है। जाँच एजेंसियों पर ही बोल हमला बोल देता है। ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे। लेकिन आपको अपने काम पर फोकस रखना है कोई भी भ्रष्टाचारी बचना नहीं चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है, “सीबीआई ने अपने काम और कौशल से आम जनता के मन में एक विश्वास पैदा किया है। आज जब किसी को लगता है कि कोई केस हल नहीं हो पा रहा है, तब आवाज उठती है कि मामला सीबीआई को दे देना चाहिए। यहाँ तक कि पंचायत स्तर पर भी लोग सीबीआई जाँच कराने की बात करते हैं। न्याय के इंसाफ के एक ब्रांड के रूप में सीबीआई का नाम हर जुबान पर है।”
लोग आंदोलन करते हैं कि केस उनसे लेकर CBI को दे दो। यहां तक कि पंचातय स्तर पर भी कोई मामला आता है तो लोग कहते हैं कि इसे CBI को दे देना चाहिए।
न्याय के, इंसाफ के एक ब्रांड के रूप में CBI हर जुबान पर है।
सीबीआई अधिकारियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा कि करोड़ों भारतीयों ने आने वाले 25 सालों में भारत को विकसित बनाने का संकल्प लिया है। विकसित भारत का निर्माण प्रोफेशनल और प्रभावी संस्थानों के बिना संभव नहीं है। इसलिए CBI पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। बीते 6 दशकों में सीबीआई ने मल्टी डायमेंशनल और मल्टी डिसप्लिनरी जाँच एजेंसी के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। आज सीबीआई का दायरा बहुत बड़ा हो चुका है। महानगर से लेकर जंगल तक सीबीआई को दौड़ना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा है कि सीबीआई की मुख्य जिम्मेदारी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना है। भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं है। यह गरीब से उसका हक छीनता है। इससे कई अपराधों का जन्म होता है। यह लोकतंत्र और न्याय के रास्ते में सबसे बड़ी समस्या है। खासतौर से जब सरकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार हावी तब वह लोकतंत्र को फलने फूलने नहीं देता। जहाँ भ्रष्टाचार हावी होता है वहाँ युवाओं के सपने बलि चढ़ जाते हैं। युवाओं को कोई अवसर नहीं मिलता। भ्रष्टाचार प्रतिभा का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। यहीं से भाई-भतीजावाद परिवारवाद को बल मिलता है।
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक पति द्वारा अपनी बीवी की हत्या किए जाने की खबर है। मृतका का नाम ईशा है जो इस्लाम मज़हब से थी। वहीं आरोपित का नाम आशू है जो हिन्दू है। दोनों ने 8 माह पहले लव मैरिज की थी। हत्या की वजह बीवी द्वारा नवरात्रि में अपने पति से माँस खाने की इच्छा जताना बताया जा रहा है। मृतका का शव शुक्रवार (31 मार्च 2023) को एक कुएँ से बरामद हुआ था। पुलिस ने आरोपित पति को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला शामली के बावरी थानाक्षेत्र का है। यहाँ के गाँव बंतीखेड़ा के निवासी आशु और थोड़ी दूर फतेहपुर की ईशा कॉलेज टाइम के दोस्त थे। दोनों पहले अच्छे दोस्त बने और बाद में एक दूसरे को पसंद करने लगे। अलग-अलग धर्मों के होने के चलते दोनों के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। हालाँकि, अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाते हुए आशु और ईशा ने 8 माह पूर्व कोर्ट मैरिज कर ली थी। शादी के बाद ईशा अपने मायके भी गई थी। बाद में वह वापस आशु के साथ रहने लगी।
आशु का आरोप है कि शादी बाद ईशा बेवजह उस से अक्सर लड़ाई किया करती थी। पुलिस का कहना है कि आशु के साथ रहते हुए ईशा ने नवरात्रि में माँस खाने की इच्छा जताई। आशु ने इस से साफ मना कर दिया। इसी बात को ले कर 29 मार्च 2023 को दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया। यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि गुस्से में आशु ने ईशा के सिर पर डंडे से जोर से वार कर दिया। इस वार से ईशा की जान चली गई। ईशा की मौत के बाद आशु उसके शव को ठिकाने लगाने की जुगत में लग गया।
थाना बाबरी पुलिस द्वारा थाना क्षेत्रान्तर्गत ग्राम बन्तीखेड़ा के जंगल में कुएं में मिले महिला के शव की घटना का सफल अनावरण कर हत्या में शामिल 01 हत्याभियुक्त की गिरफ्तारी एवं बरामदगी के सम्बन्ध अपर पुलिस अधीक्षक शामली की बाइट@Uppolicepic.twitter.com/Q4cwsfD7Ab
बताया जा रहा है कि 29 मार्च को ही आशु ने किसी तरह जंगल के एक कुएँ तक ईशा की लाश पहुँचाई और उसमें धकेल दिया। शव से बदबू आदि न आए और वह जल्दी गल जाए इसलिए आशु ने उसमें नमक आदि डाल दिया। बाद में आशु वहाँ से फरार हो गया। 2 दिनों बाद 31 मार्च को स्थानीय लोगों ने कुएँ में लाश देखी तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव की पहचान ईशा के तौर पर की और मामले की जाँच में जुट गई। आख़िरकार पुलिस ने केस का खुलासा करते हुए आशु को गिरफ्तार कर लिया। आशु से पुलिस ने गद्दा और वारदात में प्रयोग हुआ डंडा भी बरामद कर लिया है।
दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के सरगना यासीन भटकल और मोहम्मद दानिश समेत उसके 11 गुर्गों के खिलाफ देशद्रोह के मामले में आरोप तय किए। इन सभी पर साल 2012 में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने का आरोप है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने शुक्रवार (31 मार्च 2023) को फैसला सुनाते हुए कहा है कि आरोपितों के खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इन आरोपितों ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए साजिश रची थी।
Bhatkal has been charged with Section 18, 18A, 18B, 21, 38(2), 39(2), 40(2) of the UAPA Act.
Charges have also been framed against him under Section 121 and 122 of the IPC. These Sections deal with the offence of waging war against India.
कोर्ट ने कहा है कि यासीन भटकल न केवल आतंकी गतिविधियों में संलिप्त था बल्कि हथियार इकट्ठा करने तथा आईईडी और अन्य विस्फोटक बनाने का काम कर रहा था। इसके लिए वह नेपाल में बैठे माओवादियों से भी सहायता ले रहा था। कोर्ट ने यह भी कहा है कि पेश किए गए सबूतों में यासीन भटकल की एक चैट भी थी। इस चैट से सूरत में परमाणु बम ब्लास्ट करने की साजिश का खुलासा हुआ है। इस बम ब्लास्ट से पहले इलाके से मुस्लिमों को हटाने की योजना बनाई गई थी।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के तहत आरोपित आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर नए लोगों की भर्ती कर रहे थे। इसमें पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के साथ ही भारत में सक्रिय स्लीपर सेल भी सहयोग कर रहा था। इन लोगों का उद्देश्य भारत के विभिन्न हिस्सों खासतौर से राजधानी दिल्ली में बम विस्फोट कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना था।
इस पूरे मामले की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट से कहा है कि इंडियन मुजाहिदीन के गुर्गों और उसके सहयोगी संगठनों को आतंकी गतिविधियों को आगे बढाने के लिए हवाला के जरिए विदेशों से बड़े पैमाने पर पैसा मिल रहा था। ये आतंकी बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगों समेत अन्य घटनाओं को मुस्लिमों के ऊपर हो रहे अत्याचार के रूप में बताकर मुस्लिम युवकों का माइंडवॉश कर उन्हें कट्टरपंथी बना रहे थे।
In an order delivered on Friday, the court framed charges agaisnt 11 people (including Bhatkal) and discharged three. The three accused discharged are Manzar Imam, Ariz Khan and Abdul Wahid Siddibappa.
पटियाला हाउस कोर्ट ने यासीन भटकल, मोहम्मद दानिश अंसारी, मोहम्मद आफताब आलम, इमरान खान, सैयद, ओबैद योर रहमान, असदुल्ला अख्तर, उजैर अहमद, मोहम्मद तहसीन अख्तर, हैदर अली और जिया योर रहमान के खिलाफ आरोप तय किए हैं। हालाँकि कोर्ट ने सबूतों के आभाव में मंजर इमाम, आरिज खान और अब्दुल वाहिद सिद्दिबप्पा को बरी कर दिया।