रामनवमी पर पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर राजनीति तो जारी है, लेकिन कोर्ट और गृह मंत्रालय सख्त रुख अपनाए हुए हैं। एक तरफ कोर्ट बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को फटकार लगा रही है तो दूसरी तरफ गृहमंत्रालय राज्य सरकार से हिंसा पर डिटेल रिपोर्ट माँग रही है।
पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में मजूमदार ने हिंसा के बारे में विस्तार से लिखा है। उन्होंने लिखा है कि रामनवमी पर किस तरह धार्मिक आयोजनों, रामभक्तों और हिंदुओं को निशाना बनाया गया। बता दें कि कुछ दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस से बात की थी।
गृह मंत्रालय ने बंगाल की ममता बनर्जी सरकार से राज्य में हिंसा को लेकर रिपोर्ट माँगी है। अपने पत्र में सुकांत मजूमदार ने लिखा, “कल शाम को हुगली जिले में रेलवे स्टेशनों पर भारी पथराव हुआ, जिसके कारण ट्रेन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया। इस हिंसा को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी यानी टीएमसी और उसके शीर्ष नेतृत्व के समर्थन के बिना जारी नहीं रखा जा सकता था।”
उन्होंने इसमें आगे लिखा, “सबसे दुर्भाग्यपूर्ण हिस्सा वर्तमान DGP मनोज मालवीय के नेतृत्व में पुलिस की भूमिका को लेकर है, जो अपनी रीढ़ और निष्पक्षता पूरी तरह खो चुकी है। सामान्य लोगों, विशेष रूप से प्रभावित हिंदुओं के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने के बजाय, यह अल्पसंख्यक समुदाय के वास्तविक अपराधियों और अपराधियों को लेकर आँख मूँद रही है।”
अपनी चिट्ठी में मजूमदार ने लिखा, “असली दोषियों को लेकर सीसीटीवी फुटेज और वीडियो पहले से ही प्रसारित हो रहे हैं। उन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। हालाँकि, केवल मुख्यमंत्री को खुश किया जा रहा है, जो अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिए अपराधियों और राष्ट्र-विरोधी ताकतों का खुलेआम तुष्टीकरण कर रही हैं।”
उन्होंने लिखा है कि भाजपा के विधायक और सांसदों को हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाने से राज्य सरकार रोक रही है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के नेता इन क्षेत्रों में खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन उन्हें पाँच किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया।
बता दें कि राज्य में हिंसा को लेकर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस मामले में सोमवार 3 अप्रैल 2023 को सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस हिंसा को लेकर राज्य सरकार को खूब फटकार लगाई। कोर्ट ने ममता की सरकार से 5 अप्रैल 2023 तक मामले की रिपोर्ट माँगी है।
कॉन्ग्रेस से अलग होकर ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ बनाने वाले गुलाम नबी आजाद ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। आजाद ने कहा कि उन्होंने कई मुद्दों पर पीएम का विरोध किया लेकिन उन्होंने कभी बदले की भावना से काम नहीं किया। उन्होंने हमेशा एक राजनेता की तरह व्यवहार किया। बता दें कि बुधवार (05 अप्रैल, 2023) को आजाद की आत्मकथा (Autobiography) आने वाली है। इसमें उन्होंने अपने पुराने साथियों जयराम रमेश और सलमान खुर्शीद जैसे नेताओं पर कई आरोप लगाए हैं।
डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद की आत्मकथा का विमोचन बुधवार को कॉन्ग्रेस नेता कर्ण सिंह करेंगे। इसके पहले आजाद ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए पीएम मोदी की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैंने आर्टिकल 370, सीएए और हिजाब जैसे मसलों पर पीएम को जमकर घेरा परन्तु उन्होंने कभी बदले की भावना से राजनीति नहीं की। मुझे इसके लिए उन्हें श्रेय देना चाहिए। पीएम हमेशा एक उदार राजनेता की तरह पेश आए।
I must give credit to Modi. For what I did to him, he was too generous. As Leader of the Opposition I did not spare him on any issue be it Article 370 or CAA or hijab. I got some Bills totally failed but I must give him the credit that he behaved like a statesman, not taking… pic.twitter.com/0jRFdBC9cy
उन्होंने कहा कि जब इंदिरा और राजीव वापसी नहीं कर पाए, तो अब तो कॉन्ग्रेस के पास कोई जमीनी नेता नहीं है। गुलाम नबी आजाद ने अपनी आत्मकथा में 50 सालों के अपने राजनीतिक अनुभवों और कई घटनाओं का जिक्र किया है। इसमें उन्होंने अपने पुराने साथियों पर भी आरोप लगाने से गुरेज नहीं की है। रिपोर्टों के अनुसार आत्मकथा के पेज नंबर 251 पर आजाद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के दौरान राज्य सभा की एक घटना का जिक्र किया है।
आत्मकथा के अनुसार, जब गृहमंत्री अमित शाह में राज्यसभा में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त करने का ऐलान किया तो गुलाम नबी आजाद ने विपक्ष के नेताओं को सदन में धरना देने की अपील की। उनकी अपील पर सभी धरना देने को तैयार हो गए, लेकिन जयराम रमेश अपनी सीट पर बैठे रहे। बता दें कि उस वक्त गुलाम नबी राज्य सभा में विपक्ष के नेता थे।
आजाद ने जी-23 (कॉन्ग्रेस के बागी नेताओं का समुह) को भाजपा का मुखौटा होने का आरोप लगाने वालों को भी खरी-खरी सुनाई है। आत्मकथा में उन्होंने लिखा है कि अगर जी-23 भाजपा का प्रवक्ता था तो कॉन्ग्रेस ने उनमें से कईं को सांसद, महासचिव और दूसरे पदाधिकारी क्यों बनाए? उन्होंने कहा, “मैं अकेला हूँ जिसने अलग होकर पार्टी बनाई है, बाकी नेता तो कॉन्ग्रेस में ही हैं।” बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने गुलाम नबी आजाद समेत 23 कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा सोनिया गाँधी को लिखे पत्र पर सवाल उठाए थे।
गुलाम नबी आजाद ने अपनी किताब में पत्र लिखे जाने के कारणों पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने लिखा है कि हमने पार्टी के लिए निःस्वार्थ भाव से काम किया है। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि कॉन्ग्रेस पार्टी में चटुकारिया चरम पर है।
जब लोग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव मना रहे थे तब देश के कई हिस्से साम्प्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहे थे। हिंसा की इस आग ने बिहार के नालंदा जिले में भी जमकर तबाई मचाई। ा खबरों में पीड़ितों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि नालंदा के बिहारशरीफ में मज़हबी भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों और उनके गोडाउन में आग लगाकर उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
दरअसल, बिहारशरीफ के सोगरा कॉलेज के ठीक पीछे हुई हिंसक घटनाओं और आगजनी को लेकर टीवी9 ने रिपोर्टिग की है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हिंदुओं की दुकानें जलकर खाक हो गईं हैं। टीवी9 से बात करते हुए उमेश प्रसाद गोस्वामी नामक व्यक्ति ने बताया है कि उसकी 10 दुकानें में नुकसान हुआ है। उसकी दुकानों से सामान लूटकर आग लगाई गई है। नुकसान को लेकर पूछे जाने पर उमेश ने कहा है कि उसकी करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने भी कहा है कि पहले तो दुकान में घुसकर चोरी और लूटपाट की गई। इसके बाद गेट तोड़कर आग लगा दी गई।
उमेश कुमार की दुकान के ठीक सामने स्थित किताब की होल सेल की दुकान का भी लगभग यही हाल है। इस दुकान में भी आगजनी की गई है। पीड़ितों का कहना है कि उनकी दुकानों में आग लगने के 2-3 घण्टे बाद फायर ब्रिगेड यहाँ पर पहुँची थी। फायर ब्रिगेड के पहुँचने से पहले ही बहुत कुछ खाक में मिल चुका था। लोगों ने कहा है कि वे अधिकारियों से फायर ब्रिगेड भेजने के लिए मिन्नतें करते रहे लेकिन फायर ब्रिगेड टाइम से नहीं पहुँची।
एक पीड़ित ने कहा है कि करीब 50-60 लोगों की भीड़ ने इस पूरी घटना को अंजाम दिया है। भीड़ के हाथ में पेट्रोल बम था। इसी पेट्रोल बम को जलाकर दुकानों और गोडाउन में फेंका गया। एक पाइप दुकान के मालिक ने कहा है कि दुकान के एक हिस्से में रखे पाइप तो बच गए हैं। लेकिन बाकी सब कुछ खाक हो गया। आगजनी का शिकार हुए लोगों का कहना है कि बिहारशरीफ में जिस वक्त यह सब हो रहा था उस वक्त पुलिस प्रशासन मौके से नदारद था।
उन्होंने आगे कहा है कि पुलिस के मौके पर मौजूद न होने से आरोपितों को लूटपाट करने के लिए पर्याप्त समय मिला। दुकान में स्टेशनरी का सामान था और वहीं उनका ऑफिस भी था। भीड़ ने सब कुछ आग के हवाले कर दिया। पीड़ितों ने कहा है कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद वे मदद माँगने के लिए थाने गए थे, लेकिन वहाँ उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जब तक पुलिस मौके पर पहुँची तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका था।
इस वीडियो में बड़ी बात यह रही कि जब लोगों ने टीवी9 के संवाददाता से कहा कि मंदिर में भी आग लगाई गई है तो संवाददाता ने हाथ हिलाते हुए कहा, “नहीं-नहीं इसको नहीं दिखाना है।” सवाल यह उठता है कि भीड़ ने मंदिर में आग लगाई तो उसे देश के सामने लाने और दुनिया को दिखाने में दिक्कत क्या है? हम इन दावों की पुष्टि नहीं करते, लेकिन पीड़ितों ने ऐसा कहा है तो ये जाँच का विषय तो है ही।
इस पूरी घटना में नालंदा के डीएम शशांक शुभांकर ने कहा है कि जिन स्थानों पर नुकसान हुआ है वह उसका मुआयना कर रहे हैं। सीसीटीवी और डीवीआर, ड्रोन और वीडियोग्राफी की फुटेज से आरोपितों को चिन्हित किया जा रहा है। अब तक 27 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। लगातार छापेमारी की जा रही है। सभी आरोपितों पर कार्रवाई की जाएगी। हिंसा के दौरान फायरिंग हुई है। लोगों को छर्रे लगे हैं। 20-20 लोग घायल हुए हैं।
‘मिनी महाराष्ट्र’ के नाम से मशहूर नासिक शहर में 18वीं शताब्दी का एक ऐतिहासिक स्मारक है, जो कभी पेशवाओं के प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में काम करता था। पुराने नासिक क्षेत्र के सराफ बाजार में शहर के मध्य में स्थित स्मारक ‘सरकारवाड़ा’ इन दिनों सबका ध्यान अपनी आकर्षित कर रहा है, क्योंकि एक स्थानीय हिंदू समूह से जुड़े कुछ सदस्यों ने परिसर में ‘सैय्यद शाह वल्ली बाबा दरगाह’ होने पर आपत्ति जताई है।
ऋषिकेश दपसे (बापू), एक स्थानीय हिंदू संगठन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका दावा है कि सरकारवाड़ा में मौजूद दरगाह, जो कभी पेशवाओं का घर था, एक ‘अवैध अतिक्रमण’ है। इसे हटा दिया जाएगा, क्योंकि यह पेशवाओं के गलत इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है। बापू ने कहा, “सरकारवाड़ा या पेशवाओं के इतिहास में सैय्यद शाह वल्ली बाबा का कोई संदर्भ नहीं है। उनका पेशवाओं से कोई संबंध नहीं था।
हमारे मराठा नेताओं ने मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्होंने अपने घर के अंदर दरगाह कैसे बनने दी होगी? यह दरगाह कभी भी सरकारवाड़ा का हिस्सा नहीं थी। बाद में इसका निर्माण किया गया था। यह अवैध अतिक्रमण है, क्योंकि सरकार के पास भी दावा किए गए धार्मिक स्थल के बारे में कोई दस्तावेज नहीं है।”
न्यू सिटी सर्वे मैप दरगाह के अलग प्रवेश द्वार को दर्शाता है
ऑपइंडिया की टीम ने इस घटना की पुष्टि करने के लिए नासिक का रुख किया और सरकारवाड़ा के पुराने ब्लूप्रिंट और वर्तमान ब्लूप्रिंट को खोज निकाला। दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि दरगाह उस सरकारवाड़ा का हिस्सा नहीं थी, जिसे 18वीं शताब्दी में बनाया गया था। ‘सैय्यद शाह वल्ली बाबा दरगाह’, जहाँ कुछ हिंदू भी प्रार्थना करने आते हैं, उसको कई वर्षों के बाद बनाया गया था। हाल के वर्षों में इसे एक अलग प्रवेश द्वार दिया गया है। हालाँकि, राज्य पुरातत्व विभाग ने कहा है कि दरगाह पुरानी है और इसे पहले शहर के सर्वेक्षण मानचित्र में नहीं दिखाया गया था, लेकिन इसे अब दिखाया गया है।
सरकारवाड़ा का वर्तमान ब्लूप्रिंट (बाएँ) और पुराना ब्लूप्रिंट (दाएँ), जिसे OpIndia द्वारा एक्सेस किया गया है
दरगाह साफ है और दिन में कुछ निर्धारित घंटों के लिए इबादत के लिए खुली रहती है। दरगाह पर किसी भी मुस्लिम ट्रस्ट या संगठन का नियंत्रण नहीं है। यह सरकारवाड़ा का हिस्सा है और वर्ष 1995 से राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है।
18वीं सदी के सरकारवाड़ा का इतिहास
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, सरकारवाड़ा का निर्माण रंगनाथ ओढेकर नाम के एक पेशवा सरदार द्वारा किया गया था और बाद में राघोबदादा पेशवा ने इसे अपने कब्जे में ले लिया था। यह भी माना जाता है कि मराठा साम्राज्य की पेशवी गोपिकाबाई पेशवे वाडा का दौरा करती थीं और वहाँ से मराठा प्रशासन को नियंत्रित करती थीं। बाद में, 1818 में पेशवाओं की हार के बाद, सरकारवाड़ा को अंग्रेजों ने अपने कब्जे में ले लिया, जिन्होंने वहाँ से ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवसाय को जारी रखने के लिए महल का भी इस्तेमाल किया। यही कारण है कि इसका नाम ‘सरकारवाड़ा’ पड़ा।
आज, सरकारवाड़ा एक क्षेत्रीय प्राचीन संग्रहालय और राज्य पुरातत्व के सहायक निदेशक के कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि, संपत्ति के बाईं ओर आधिकारिक तौर पर ‘सैय्यद शाह वल्ली बाबा दरगाह’ का कब्जा है, जिसकी मौजूदगी एक बड़ा सवाल है।
सरकारवाड़ा संपत्ति के बाएँ हिस्से में स्थित दरगाह
हिंदू कार्यकर्ता बापू कहते हैं, ‘दरगाह अवैध है’
बापू ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि दरगाह पर नमाज अदा करने वाले ज्यादातर नमाजी हिंदू हैं और कोई नहीं जानता कि सैय्यद शाह वल्ली बाबा कौन हैं और वह पेशवाओं से कैसे जुड़े थे। उन्होंने कहा, “हम इस शहर में (सराफ बाज़ार इलाके) में कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। मेरी चौथी पीढ़ी है। यह दरगाह पुरानी मानी जाती है। लेकिन हाल के दिनों में लोगों ने बाबा के नाम पर सैंडल प्रोसेशन (धार्मिक मेले) आयोजित करना शुरू कर दिया है। बाबा या दरगाह के बारे में कोई नहीं जानता, पुरातत्व विभाग भी नहीं। दरगाह की स्थापना कब और क्यों हुई, यह भी कोई नहीं जानता। इस बीच धार्मिक मेलों और जुलूसों का आयोजन और उस स्थान पर नमाज की अनुमति देना क्या पेशवाओं के गलत इतिहास को नहीं दर्शाता है? पेशवाओं का इन सैय्यद शाह वल्ली बाबा से कोई लेना-देना नहीं था। दरअसल, मराठों ने मुस्लिमों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। लेकिन आने वाली पीढ़ियाँ ये सोच सकती हैं कि पेशवा सैय्यद शाह वल्ली बाबा के उपासक थे, जो कि सच नहीं है।”
‘कोई दस्तावेज नहीं’, आरटीआई के जवाब में राज्य पुरातत्व विभाग की पुष्टि
उन्होंने यह भी कहा कि उनके संगठन के कुछ सदस्यों ने राज्य पुरातत्व विभाग से दरगाह के बारे में जानकारी लेने के लिए एक आरटीआई दायर की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक कैलाश देशमुख के नाम पर दायर आरटीआई का जवाब राज्य पुरातत्व निदेशक ने दिया था, जिसमें कहा गया था कि दरगाह के के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं हैं। सरकारवाड़ा की पूरी संपत्ति को वर्ष 1995 में पुरातात्विक स्थल के रूप में घोषित किया गया था। दरगाह भी, 1995 से पहले की संपत्ति का हिस्सा होने के नाते, कानून के तहत संरक्षित है।
ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त की गई आरटीआई की कॉपी
बापू दपसे ने दरगाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार और पुरातत्व व संग्रहालय विभाग के निदेशक तेजस गर्ग सहित कई नेताओं को पत्र भेजा हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि पेशवेकालीन सरकारवाड़ा में अतिक्रमण से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
नेताओं को बापू दापसे द्वारा भेजे गए पत्र की कॉपी
सराफ बाजार के स्थानीय दुकानदारों को दरगाह से कोई दिक्कत नहीं
टीम ऑपइंडिया ने इस बीच कई अन्य दुकानदारों से बात की, जिनकी सराफ बाजार क्षेत्र में दुकान है। इनमें से कई दुकानदार जो हिंदू हैं और अपने माथे पर तिलक लगाते हैं, अपना काम शुरू करने से पहले वे रोजाना दरगाह पर नमाज अदा करते हैं। उनकी दिनचर्या के इस हिस्से को टीम ने देखा और नोट भी किया।
एक सुनार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दरगाह करीब 150 साल पुरानी मानी जाती है और बाजार क्षेत्र में किसी को भी इसके होने से कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, “इस दरगाह में ज्यादातर हिन्दू आते हैं। पहले इस दरगाह में प्रवेश सरकारवाड़ा के भीतर से होता था, लेकिन इसके जीर्णोद्धार के बाद इसे अलग प्रवेश द्वार दिया गया और तब से यह विवादों में है। कई हिंदू संगठन इसे हटाने की माँग कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पेशवाओं का सैय्यद शाह वल्ली बाबा से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने कभी दरगाह नहीं बनाई। उनका दावा है कि गलत इतिहास बताया जा रहा है और इससे उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं, लेकिन बाजार में कोई भी ऐसा महसूस नहीं करता है। वास्तव में, सराफ बाजार में अधिकांश हिंदू रोजाना दरगाह जाते हैं और आशीर्वाद माँगते हैं।”
सरकारवाड़ा में लिखा गया नोटिस
‘दरगाह को हटाया नहीं जा सकता’
टीम ऑपइंडिया ने राज्य पुरातत्व विभाग, नासिक की प्रमुख आरती अले से भी मुलाकात की, जिन्होंने पुष्टि की कि राज्य पुरातत्व विभाग को दरगाह के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “स्थल वर्ष 1995 से पुरातात्विक मानदंडों के तहत संरक्षित है और मानदंडों के अनुसार साइट को संरक्षित किया जाना है जैसा कि यह है। साइट पर कोई निष्कासन, पृथक्करण या विस्तार की अनुमति नहीं दी जा सकती है।”
उन्होंने कहा कि विभाग ने दरगाह के इतिहास की खोज करने की कोशिश की लेकिन नहीं कर सका। अले ने पुष्टि की, “दरगाह इबादत के लिए खुली है। कई लोग, ज्यादातर हिंदू यहाँ आते हैं। हाल के वर्षों में कुछ संगठनों ने दरगाह के इतिहास और पेशवाओं के साथ इसके संबंध का मुद्दा उठाया है, लेकिन हमें भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमारे पास दरगाह के संबंध में कोई दस्तावेज और कोई कागजात नहीं है।”
हिंदू संगठनों द्वारा रखी गई माँगों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि इस दरगाह को हटा दिया जाए। लेकिन यह किसी तरह संभव नहीं है। यह सरकारवाड़ा का हिस्सा है और पूरी संपत्ति पुरातत्व विभाग के अधीन सुरक्षित है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। इसे हटाया नहीं जा सकता है।”
छत्तीसगढ़ के रायपुर में कॉन्ग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता ने अपनी ही पार्टी को सवालों के घेरे में ला कर खड़ा कर दिया है। महिला का आरोप है कि उनकी ही पार्टी का एक सीनियर नेता उन पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। इसके बदले महिला को पद और प्रतिष्ठा का लालच भी दिया गया था। अपने आरोपों के समर्थन में पीड़िता ने नेता के साथ अपनी चैट होने का भी दावा किया है। आरोपित का नाम जयंत साहू है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस से भी की है। वहीं अपनी सफाई में जयंत ने महिला को ब्लैकमेलर बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला रायपुर के तेलीबाँधा थानाक्षेत्र का है। आरोपित कॉन्ग्रेस नेता जयंत इसी क्षेत्र में रहते हैं और धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन पर हमबिस्तरी के दबाव का आरोप लगाने वाली महिला कार्यकर्ता बेमेतरा की रहने वाली है। पीड़िता के मुताबिक, उनका और जयंत का परिचय फेसबुक पर हुआ था। इस परिचय से दोस्ती बढ़ी और महिला रायपुर आने-जाने लगी। धीरे-धीरे दोनों के परिवार भी एक दूसरे से घुल-मिल गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता ने बताया है कि थोड़े समय बाद जयंत उनसे फिजिकल रिलेशन बनाने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने जयंत की शौक के तौर पर उनके द्वारा महिलाओं को पद दिलाना बताया है। दावा इस बात का भी किया गया है कि पद दिलाने के नाम पर अन्य महिलाओं पर भी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया जाता है। अपने साथ जयंत द्वारा अश्लील बातें किए जाने की भी शिकायत पीड़िता ने पुलिस में दी है।
हालाँकि, महिला का यह भी आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है। खुद को डिप्रेशन में बताते हुए पीड़िता ने कहा है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वो थाने में खुद को आग लगा कर जान दे देंगी। महिला का यह भी दावा है कि उलटे जयंती की ही झूठी शिकायत पर उन्हें पुलिस ने काफी प्रताड़ित किया है। पीड़िता द्वारा जयंत के साथ अपनी बातचीत का दावा कर के कुछ चैंट भी वायरल किए गए हैं।
आरोपों पर कॉन्ग्रेस नेता की सफाई
दैनिक भास्कर के मुताबिक अपनी सफाई में कॉन्ग्रेस नेता जयंत ने खुद पर आरोप लगाने वाली महिला को ब्लैकमेलर बताया है। उनका कहना है कि महिला ने 2 लाख रुपए उधार लिए गए पैसे न लौटाने के लिए ये तमाम आरोप लगाए हैं। जयंत ने 14 मार्च को ही अपनी तरफ से महिला के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवा दी थी। जिस चैटिंग को पीड़िता द्वारा वायरल किया जा रहा है जयंत ने उसे फर्जी बताया है। जयंत का कहना है कि महिला ने उनकी फोटो लगा कर उन्हें फँसाने के लिए ये फर्जी चैट वायरल की है।
चीन की सीमा से सटे सिक्किम (Sikkim) की राजधानी गंगटोक के नाथू ला दर्रे में भारी हिमस्खलन (Avalanche) हुआ है। इस हादसे में अब 7 लोगों की मौत हुई है और 11 अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। वहीं, करीब 150 लोगों के बर्फ में दबे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीम ने बर्फ में फँसे 22 पर्यटकों समेत 350 लोगों को सुरक्षित बचाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मंगलवार (4 अप्रैल 2023) की है। यहाँ दोपहर करीब 12:20 बजे गंगटोक को नाथू ला दर्रे से जोड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू मार्ग के 15वें मील के पास हादसा हुआ। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वह पहाड़ी दर्रा है। यह समुद्र तल से करीब 14,140 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।
देखें l भारतीय सेना के त्रिशक्ति कोर के सैनिकों ने सिक्किम में माइलस्टोन 15 के पास गंगटोक-नाटू ला रोड पर एक बचाव अभियान चलाया, जहां हिमस्खलन हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी।@adgpi
— प्रसार भारती न्यूज सर्विसेज एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म (@PBNS_Hindi) April 4, 2023
इस भीषण हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 4 पुरुष, 2 महिला और 1 बच्चा शामिल है। घायल हुए 11 लोगों को इलाज के लिए गंगटोक के एसटीएनएम हॉस्पिटल और सेंट्रल रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस ने 22 पर्यटकों समेत 350 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। घटनास्थल के पास फँसे 80 वाहनों को मौके से बाहर निकाला गया है। हालाँकि, अब भी करीब 150 लोगों के बर्फ में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
Reports of some tourists trapped in Avalanche on road towards Changu
— Weatherman Shubham (@shubhamtorres09) April 4, 2023
इस हादसे को लेकर चेकपोस्ट के महानिरीक्षक सोनम तेनजिंग भूटिया का कहना है कि इस पूरे इलाके में जाने के लिए पास जारी किए जाते हैं। ये पास 13वें मील तक के लिए ही जारी होते हैं। हालाँकि इसके बाद भी पर्यटक 15वें मील की ओर चले गए। इसी दौरान हिमस्खलन की घटना हो गई। फिलहाल सिक्किम पुलिस, ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन, पर्यटन विभाग, वाहन चालक और स्थानीय लोगों द्वारा बचाव कार्य किया जा रहा है।
क्या है हिमस्खलन….
हिमस्खलन (एवलांच) का सीधा मतलब हिम अर्थात बर्फ के खिसकने से है। पहाड़ी इलाकों में जहाँ बहुत अधिक बर्फबारी होती है या फिर जहाँ पहाड़ों पर बर्फ जमी हीते हैं, वहाँ हिमस्खलन की घटनाएँ सामान्य हैं। हालाँकि कई बार हिमस्खलन बड़े स्तर पर होता है, जिससे लोग दुर्घटना का भी शिकार हो जाते हैं।
यूँ तो हिमस्खलन कई कारणों से होता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण तापमान में बदलाव और एक स्थान पर बहुत अधिक बर्फबारी है। दरअसल, तापमान में बढ़ोतरी होने से बर्फ पिघलती है और इससे एक साथ कई क्विंटल बर्फ और पत्थर एक साथ पहाड़ से नीचे की ओर गिरते हैं और हादसे का कारण बन जाते हैं।
तमिलनाडु में बिहारियों के साथ हिंसा की खबरों को फर्जी बताकर गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर मनीष कश्यप के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। यूट्यूबर के खिलाफ बिहार पुलिस का यह चौथा केस है। यह केस मस्जिद में आग लगाने तथा मुस्लिमों को मारने से संबंधित है। उधर, तमिलनाडु की मदुरै कोर्ट ने 3 अप्रैल 2023 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
देशद्रोह और दंगा भड़काने जैसे कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार मनीष कश्यप और उसके दो दोस्तों ने अपने वीडियो में महात्मा गाँधी की मौत पर जश्न मनाने और मुस्लिमों को मारने एवं मस्जिद जलाने की बात कही थी। इस दावे के आधार पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOW) ने मामला दर्ज किया है।
दरअसल, दिल्ली के एक सामाजिक कार्यकर्ता निशांत वर्मा ने पटना पुलिस को मनीष कश्यप और उसके दोस्तों के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। इस शिकायत में वर्मा ने बेतिया के उस वीडियो का जिक्र किया था, जिसमें बेतिया में महात्मा गाँधी को लेकर इन लोगों ने वीडियो वायरल किया था।
इस वीडियो में तीनों कह रहे थे कि ‘महात्मा गाँधी की मौत पर हम लोग जश्न मनाते हैं। अब वो डर खत्म हो गया है’। इस दौरान उसका दूसरा साथी कहता है, “अब कहाँ जाओगे।” तब फिर मनीष कश्यप कहता है, “तुम एक को मारोगे तो हम 10 को मारेंगे।” इसके बाद तीसरा साथी कहता है, “तुम न्यूटन का थर्ड लॉ याद रखना। तुम जितना करोगे न उतना हिन्दू भाई जगेंगे।”
इसके बाद उस वीडियो में यह कहा गया था कि ‘हमने एक मौलवी को मारा, एक मुस्लिम को मारा, हमने मस्जिदों में आग लगाया’। इस पर पहले ही EOU ने मामला दर्ज कर लिया था। इस पर अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया था।
इसको लेकर निशांत वर्मा ने आर्थिक अपराध इकाई को लिखित आवेदन देकर मामला दर्ज करने के लिए गुहार लगाया था। वर्मा के आग्रह के 12 दिन बाद आखिरकार आर्थिक अपराध इकाई ने सोमवार (3 अप्रैल 2023) को इस पर एफआईआर दर्ज कर दिया है।
वर्मा के शिकायत के बाद EOU थाने में IPC की धारा 153A(2) 295, 506, 120 (B) आईटी एक्ट 67 लगाया गया है। जानकारों के अनुसार, इस मामले में जितनी भी धाराएँ लगाई गई हैं, उनमें देशद्रोह, दंगा भड़काने जैसे बेहद गंभीर आरोप हैं। इसमें 7 साल से लेकर 10 साल तक सजा हो सकती है।
उधर, तमिलनाडु पुलिस की गिरफ्त में रखे गए मनीष के लिए तमिलनाडु पुलिस ने कोर्ट से और सात दिनों की रिमांड की माँग की थी। इस माँग पर कोर्ट बुधवार 5 अप्रैल को फैसला सुनाएगी। फिलहाल मनीष कश्यप को न्यायिक हिरासत में मदुरै सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। अगर तमिलनाडु पुलिस को फिर रिमांड मिल जाती है तो उसे फिलहाल बिहार नहीं लाया जा सकेगा।
महाराष्ट्र के पालघर में एक बार फिर से साधुओं की मॉब लिंचिंग होते-होते रह गई। वनगाँव इलाके में भिक्षा माँग रहे साधुओं को भीड़ बच्चा चोर समझकर घेरने लगी थी। इस बात की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने भीड़ को समझा बुझा कर हिंसा की संभावित घटना को रोक लिया और साधुओं की जान बचा ली।
पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, वनगाँव के चंद्रनगर गाँव में 2 साधु भिक्षा माँग रहे थे। इस बीच गाँव में साधुओं के वेश में बच्चा चोरों के आने की अफवाह फैल गई। ग्रामीणों ने दोनों साधुओं को घेर लिया। इस बीच पुलिस को इस बात की जानकारी मिली। ग्रामीण साधुओं के साथ मारपीट कर पाते, इसके पहले ही पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने गाँव वालों को समझाया और साधुओं को भीड़ से निकाल कर पुलिस स्टेशन ले गई।
बता दें कि तीन साल पहले अप्रैल 2020 में पालघर के गढ़चिनचले गाँव में मुंबई से गुजरात जा रहे बुजुर्ग साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ ने घेर कर हत्या कर दी थी। 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने बच्चा चोर होने का शक में साधुओं की बेरहमी से पिटाई की थी। जबकि साधु स्थानीय लोगों से सही रास्ता पूछने की कोशिश कर रहे थे। भीड़ से बचने के लिए बुजुर्ग नागा साधु पुलिस स्टेशन में भी छिपने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पुलिस ने भी उस वक्त साधुओं को भीड़ के हवाले कर दिया था। उस वक्त महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) एनसीपी और कॉन्ग्रेस की महाविकास अघाड़ी सरकार थी। उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे।
पालघर के एसपी बाला साहेब पाटिल ने कहा है कि पालघर में 2020 में हुई घटना से शिक्षा लेते हुए हमने जन सम्मान पहल शुरू की है। इसके तहत पुलिसकर्मी गाँवों का दौरा कर लोगों से बातचीत करते हैं। उनकी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करते हैं। ऐसा होने से ग्रामीण भी खुलकर अपनी बात पुलिस के सामने रखते हैं। इस घटना में भी यही हुआ। जैसे ही भीड़ ने साधुओं को घेरना शुरू किया। स्थानीय लोगों में से ही किसी ने पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इससे एक अप्रिय घटना होते-होते रह गई।
ब्रिटेन में युवा लड़कियों का शोषण करने वाले गैंंग की कई रिपोर्ट सामने आने के बाद होम सेक्रेटरी सुएला ब्रेवरमैन ने बाल यौन शोषण को समाप्त करने से जुड़े नए कानून का खुलासा किया। इसके तहत बाल यौन शोषण की रिपोर्ट करना संबंधित नागरिकों के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। मंत्री ने रविवार (2 अप्रैल, 2023) को ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराधों में ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुष शामिल होते हैं। ये ब्रिटेन की लड़कियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ब्रिटिश पाकिस्तानियों का गैंग है, जो ड्रग्स देता है और ब्रिटेन की लड़कियों का रेप करता है।
ब्रिटिश चैनल ‘स्काई न्यूज’ से बात करते हुए सुएला ब्रेवरमैन ने कहा, “कुछ ब्रिटिश-पाकिस्तानी यूके में बाल शोषण गिरोह चला रहे हैं। हम जो देख रहे हैं, अब वो एक प्रैक्टिस बन चुका है, जिसमें कमजोर, गोरी लड़कियों का ब्रिटिश पाकिस्तानियों के गिरोहों द्वारा पीछा किया जाता है और उनका बलात्कार किया जाता है। बाल शोषण गिरोह या नेटवर्क के लिए काम करने वाले पुरुष बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं।”
ब्रिटेन की गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने कहा कि वह एक कानून लेकर आई हैं, जिसमें कहा गया कि बाल यौन शोषण की रिपोर्ट करना संबंधित नागरिकों के लिए कानूनी रूप से बाध्य होगा। क्योंकि ऐसे अपराधों में शामिल पाकिस्तानी पुरुष गिरोहों को लेकर चुप्पी की संस्कृति बन गई है। वो आधुनिक समय में ब्रिटेन में देखे गए सबसे बड़े अन्यायों में से एक को ठीक करने की कसम खाती हैं।
उन्होंने आगे कहा, “हमने संस्थानों और देश की एजेंसियों को देखा है, चाहे वह सामाजिक कार्यकर्ता हों, शिक्षक हों, पुलिस हो, सब डर के कारण, नस्लवादी कहलाने के डर से, इन अपराधों पर आँखें मूँद लेते हैं। इसकी वजह से हजारों बच्चों का बचपन तबाह हो गया और अपराध करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। बच्चों के लिए काम करने वाली संस्थाओं ने इस कदम का स्वागत किया है और उन्हें उम्मीद है कि नया कानून लोगों को कानूनी रूप से बाल शोषण को रिपोर्ट करने के लिए मजबूर करेगा।”
बता दें कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने ग्रूमिंग गैंग के आतंक को खत्म करने के लिए टास्क फोर्स का ऐलान किया है। सुनक ने कहा है कि वह ग्रूमिंग गैंग का आतंक खत्म करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बच्चों और लड़कियों के साथ हो रहे यौन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में राजनीति को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। दरअसल, मुस्लिमों का यह गिरोह गैर मुस्लिम लड़कियों को टारगेट करता है। डॉ. एला हिल नाम की एक पीड़िता ने 2020 में खुलासा किया था कि यह गैंग 40 साल में कम से कम 5 लाख लड़कियों से रेप कर चुका है।
अपडेट: ताज़ा जानकारी ये है कि बुलंदशहर से जिस शाहरुख़ सैफी को उठाया गया था, उसे पूछताछ के बाद क्लीन-चिट दे दी गई है। वहीं गाजियाबाद से उठाए गए शाहरुख़ सैफी से पूछताछ जारी है।
केरल में चलती ट्रेन में आग लगाकर फरार होने वाले संदिग्ध शाहरुख सैफी को उत्तर प्रदेश से हिरासत में लिया गया है। यूपी एटीएस ने उसे बुलंदशहर से धर-दबोचा है। पुलिस पूछताछ कर घटना में उसकी संलिप्तता की जाँच कर रही है।
दरअसल, पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शियों की निशानदेही पर आरोपित का स्केच जारी किया था। स्केच से उसकी पहचान शाहरुख सैफ़ के रूप में हुई थी। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश एटीएस ने बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र के अकबराबाद से संदिग्ध को हिरासत में लिया है। कहा जा रहा है कि यूपी एटीएस ने सोमवार (3 अप्रैल, 2023) को जाल बिछाते हुए उसे काम के लिए बुलाया था। इसके बाद हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए गए शाहरुख सैफ ने 9वीं तक की पढ़ाई की है और पेशे से कारपेंटर है। वह दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद समेत अन्य जगहों पर काम करता था। शाहरुख के 4 भाई हैं 2 भाई गाजियाबाद और 2 भाई बुलंदशहर में रहते हैं। शाहरुख के परिजनों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि शाहरुख केरल क्यों और कैसे गया था।
इलाज के लिए हॉस्पिटल गया था शाहरुख
रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने जिस शाहरुख का स्केच जारी किया है वह इलाज कराने के लिए कुन्नूर के जिला चिकित्सालय गया था। यहाँ से भी पुलिस उसकी सारी आवश्यक जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई कर रही है।
नोएडा और गाजियाबाद में भी एनआईए कर रही है तलाशी
ट्रेन में आग लगाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए एनआईए भी इस मामले में पुलिस की सहायता कर रही है। दरअसल इस मामले में अब तक आतंकी एंगल होने की बात सामने नहीं आई है। लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया गया है। ऐसे में एनआईए की एक टीम संदिग्धों की तलाशी नोएडा और गाजियाबाद में तलाशी कर रही है। हालाँकि अब तक इन दोनों ही जगह से किसी को हिरासत में लेने या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
लोन वुल्फ अटैक का हो सकता है मामला
‘न्यूज 18’ ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है, “आतंकी एंगल से देखने पर यह मामला कट्टरपंथी हमलावर द्वारा किया गया हमला लगता है। हालाँकि, इस तरह के आतंकी हमले सामने नहीं हैं। ऐसे में यह मामला ‘लोन वुल्फ’ अटैक का भी हो सकता है।” बता दें कि लोन वुल्फ अटैक को आतंक की दुनिया में दहशत फैलाने का सबसे नया तरीका माना जाता है। आमतौर पर ऐसे हमलावर या तो आत्मघाती होते हैं या फिर पुलिस एनकाउंटर में मारे जाते हैं।
इस तरह के हमलों में एक आतंकी ही पूरे ऑपरेशन को अंजाम देता है। इसमें किसी लीडर या सरगना की जरूरत नहीं होती। आतंकी आम दिखने वाली या फिर छोटी चीजों जैसे चाकू, तलवार या ग्रेनेड से हमलाकर आतंक को अंजाम देते हैं। बड़ी बात यह है कि ‘लोन वुल्फ अटैक’ में आतंकी की पहचान करना भी मुश्किल होता है।
क्या है मामला
रविवार (2 अप्रैल, 2023) की रात करीब 9 बजकर 45 मिनट पर अलप्पुझा-कन्नूर एग्जीक्यूटिव एक्सप्रेस ट्रेन कोझिकोड शहर को क्रॉस कर कोरापुझा रेलवे पुल पर पहुँची थी। इसी दौरान दो लोगों के बीच ट्रेन में चढ़ने को लेकर विवाद हो गया। तभी आरोपित ने अन्य यात्रियों पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके चलते यात्रियों ने चेन पुलिंग करते हुए ट्रेन को रोका। ट्रेन के रुकते ही आरोपित मौके से फरार हो गया। बाद में यात्रियों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इस घटना में एक बच्चे समेत 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं 8 लोग घायल हुए थे।