Home Blog Page 1912

‘नहीं रही ट्विटर की चिड़िया, एलन मस्क ने उसे बना डाला कुत्ता’: बदला-बदला दिख रहा Twitter का लोगो, 20% उछल गए DogeCoin के शेयर्स

ट्विटर खरीदने के बाद से अब तक एलन मस्क ने इसमें कई बड़े बदलाव किए हैं। अब ट्विटर का लोगो भी बदल गया है। ट्विटर के लोगो पर दिखने वाली चिड़िया की जगह अब एक कुत्ता नजर आ रहा है। इसको लेकर यूजर्स सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

दरअसल, सोमवार (3 फरवरी 2023) को ट्विटर यूजर्स को लोगो पर नीली चिड़िया की जगह कुत्ता नजर आ रहा है। इसको देखकर कई यूजर्स हैरान रह गए। ट्विटर पर यूजर्स एक-दूसरे से पूछ रहे थे कि क्या उन्हें भी लोगो बदला हुआ नजर आ रहा है। शुरुआत में यूजर्स का ऐसा लगा कि ट्विटर हैक हो गया है। लेकिन थोड़ी ही देर बाद ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने एक ट्वीट किया। उनके इस ट्वीट से यह क्लियर हो गया कि ट्विटर ने अपना लोगो बदल लिया है।

ट्विटर का लोगो बदलने को लेकर एलन मस्क ने एक फोटो ट्वीट की थी। इस फोटो में कुत्ता कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा हुआ है। वहीं पुलिसकर्मी एक डॉक्यूमेंट को देखते हुए नजर आ रहा है। इस डॉक्यूमेंट में ट्विटर का पुराना लोगो, यानी कि नीली चिड़िया की फोटो है। साथ ही फोटो में कुत्ते को पुलिस से यह कहते हुए दिखाया गया है कि ‘यह पुरानी फोटो है’।

वहीं एक अन्य ट्वीट में एलन मस्क ने 26 मार्च का एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है, “वादे के अनुसार”। यह स्क्रीनशॉट एक ट्वीट का है। इसमें मस्क ने यूजर्स ने पूछा था, “क्या एक नए प्लैटफॉर्म की जरूरत है?” इस पर चेयरमैन नाम के यूजर ने रिप्लाय करते हुए लिखा कि ट्विटर खरीदो और उसके नीली चिड़िया के लोगो को डॉज में बदल दो।

ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है #doge और #TwitterLogo

बता दें कि ट्विटर के लोगो पर अब तक दिखने वाली नीली चिड़िया का नाम लैरी टी बर्ड है। वहीं अब जो कुत्ता दिख रहा है वह एक जापानी कुत्ता है जिसका नाम काबोसु है। यह कुत्ता डॉजी कॉइन (DogeCoin) का भी लोगो है। ट्विटर का लोगो बदलने के बाद से अब तक इसको लेकर हजारों ट्वीट किए जा चुके हैं। ट्विटर पर #Doge और #TwitterLogo ट्रेंड कर रहा है। बड़ी बात यह है कि ट्विटर का लोगो बदलने के बाद डॉज कॉइन के शेयर में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी देखने को मिली।

ट्विटर के लोगो में कुत्ता नजर आने के बाद नेटिजेन्स ने दी अलग-अलग प्रतिक्रिया::

एक यूजर ने लिखा, “क्या किसी और को डॉजी (कुत्ता) ट्विटर के लोगो में नजर आ रहा है?”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “ट्विटर के लोगो को चुपचाप डॉजी कुत्ते में बदल दिया गया है।”

एक यूजर ने एलन मस्क से सवाल करते हुए कहा, “ट्विटर लॉग इन करने पर डॉज का लोग नजर आ रहा है। एलन मस्क हमें क्या बताने की कोशिश कर रहे हैं? याद लोगो कब तक रहेगा।”

एक यूजर ने मीम शेयर करते हुए लिखा, “नहीं रही ट्विटर की चिड़िया, एलन मस्क ने बना डाला उसको कुतिया”

आइए देखते हैं कुछ अन्य मीम

हिंसा में झुलसे बिहारशरीफ की महिलाओं का सुनिए दर्द: दावा- 500 हिंदू गायब, पुलिस बोली- किसी के लापता होने की शिकायत नहीं मिली

बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में 31 मार्च 2023 को रामनवमी शोभा यात्रा को निशाना बनाया गया था। बिहार पुलिस का दावा है कि स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है। लेकिन आज तक की एक रिपोर्ट पुलिसिया दावों पर सवाल खड़ी कर रही है। इसमें दिख रही महिलाओं का दावा है कि उनके घर के पुरुष गायब हैं। एक महिला 500 हिंदुओं के गायब होने का दावा कर रही है। वैसे नालंदा के डीएम शशांक शुभंकर ने एक वीडियो संदेश में कहा है कि किसी भी व्यक्ति के गायब होने की अब तक शिकायत नहीं मिली है।

इन महिलाओं से बात आज तक की पत्रकार श्वेता सिंह ने की है। वीडियो को देखकर लगता है कि श्वेता सिंह बिहारशरीफ की उस गली में हैं, जहाँ के एक 15 साल के लड़के की गोली लगने से मौत की बात कही जा रही है। श्वेता सिंह से बातचीत में महिलाएँ अपनी सुरक्षा को लेकर सशंकित दिखाई पड़ रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े कर रहीं हैं।

वीडियो में 500 हिंदुओं के गायब होने का दावा करने वाली महिला जो कुछ कह रही हैं, उससे प्रतीत होता है कि दंगाइयों ने पहले खुद मस्जिद में आग लगाई और फिर हिंदुओं को निशाना बनाया। वह कहती हैं, “मस्जिदया जला देलकै और कुल के गोलियो मार देलकै। जे उठाबे जाई ओकरे मारई। कुल भाग गेलैन हिंदुअन। 500 हिंदू गायब हई।” महिला ने ये भी बताया कि उनके घर के पुरुष कहाँ हैं, ये उन्हें नहीं पता।

एक अन्य महिला ने बताया है कि सीढ़ी लगाकर पुलिस घरों में घुसी और पुरुषों को ले गई। उन्होंने बताया कि घर में पुरुषों के नहीं होने के कारण महिलाएँ डरी हुईं हैं। एक साथ घरों के आगे बैठ उनका इंतज़ार कर रहीं हैं। महिला के मुताबिक पुलिस उनके घर के पुरुषों को दौड़ा-दौड़ा कर पकड़ रही है। मोहल्ले की एक अन्य महिला ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि उन्हें थाने से भगा दिया गया। एक अन्य महिला ने कहा कि अब दुबारा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए।

श्वेता सिंह से बातचीत में एक महिला पूछती हैं, “क्या मियाँ पुलिस का दामाद लगता है?” महिलाओं का कहना है कि पुलिस उनका साथ नहीं दे रहा है। मोहल्ले में मृतक बच्चे के शव भी कई जगहों पर घुमाने का आरोप लगाया। एक अन्य महिला ने पुलिस पर सिर्फ हिन्दुओं को ही प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। महिला के मुताबिक जिसके नाम केस है, बस उसे ही पकड़ा जाए। लेकिन बिहार पुलिस घर में घुस कर गंदी-गंदी गालियाँ दे रही है। महिलाओं का यह भी आरोप है कि बिहार पुलिस मुस्लिमों की बस्ती की तरफ गई ही नहीं। एक अन्य महिला ने कहा, “मियाँ घर में चढ़ जाएगा तो कौन काम देगा हमको। अपना मर्दाना होता तो जरूर काम देता हमको।”

ऑपइंडिया महिलाओं के इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता। नालंदा जिला प्रशासन हालात नियंत्रण में होने के बात कर रहा है। DM शशांक शुभंकर ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। साथ ही अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की बात कही है।

इस बीच बिहार पुलिस ने एक ट्वीट में भी बिहारशरीफ से लोगों के लापता होने के दावे को नकार दिया है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी महिला, पुरुष और बच्चे के लापता होने की शिकायत नहीं मिली है। साथ ही महिला पुलिसकर्मियों से छेड़छाड़, लोगों के पलायन करने सहित कई अन्य दावों को भी अफवाह बताया है।

ग्रूमिंग गैंग के आतंक पर टूटी ब्रिटेन की नींद, PM ऋषि सुनक ने बनाई टास्क फोर्स: पीड़िता ने किया था 5 लाख काफिर लड़कियों के साथ रेप का खुलासा

ग्रूमिंग गैंग के आतंक को खत्म करने के लिए ब्रिटेन ने टास्क फोर्स का ऐलान किया है। मुस्लिमों का यह गिरोह गैर मुस्लिम लड़कियों को टारगेट करता है। डॉ. एला हिल नाम की एक पीड़िता ने 2020 में खुलासा किया था कि यह गैंग 40 साल में कम से कम 5 लाख लड़कियों से रेप कर चुका है।

टास्क फोर्स का ऐलान करते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak) ने कहा है कि ग्रूमिंग गैंग का आतंक खत्म करने के लिए वे कुछ भी करने को तैयार हैं। बच्चों और लड़कियों के साथ हो रहे यौन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई में राजनीति को आड़े नहीं आने दिया जाएगा।

सुनक ने कहा है, “पिछले साल मैंने कहा था कि अगर मैं प्रधानमंत्री बनूँगा तो ग्रूमिंग गैंग को समाप्त करने के लिए कड़े फैसले लूँगा। मैं इसके लिए स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का ऐलान करता हूँ इसमें विशेषज्ञ पुलिस वाले होंगे जो बच्चों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर रिपोर्ट करेंगे और आरोपितों को कड़ी सजा दिलाएँगे।”

उन्होंने कहा, “मैं तब तक चैन से नहीं बैठूँगा जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता है कि हमारे बच्चे ऐसे माहौल में बड़े हो रहे हैं जो पूरी तरह सुरक्षित हो। यही कारण है कि मैं ग्रूमिंग गैंग पर नकेल कसने के लिए सरकार द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू करने जा रहा हूँ। इसको हमेशा के लिए खत्म करने के लिए जो कुछ भी करना होगा, हम करेंगे।”

बता दें कि इससे पहले ब्रिटेन की गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा था कि इस गैंग से जुड़े अधिकांश लोग ब्रिटिश पाकिस्तानी हैं। डॉ. एला हिल को भी पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने ही निशाना बनाया था। हिल ने बताया था कि यह गैंग पूरे ब्रिटेन में फैला हुआ है। बहुत कम ऐसे शहर हैं, जहाँ पर इस गैंग के स्कैंडल नहीं हैं। उन्होंने बताया था कि 40 वर्षों में अकेले ब्रिटेन में जिन करीब 5 लाख लड़कियों का बलात्कार किया गया, उनमें से अधिकतर गोरे हैं और उन्हें शिकार बनाने वाले मुख्य रूप से एशियाई मुस्लिम।

2021 में स्काई न्यूज से बात करते हुए एक अन्य पीड़िता ने बताया था, “मुझे लगता है कि 3 साल के समय में मेरा 150 लोगों ने रेप किया होगा। कई बार 1 दिन में 10 और 11 लोग भी मेरा रेप करते थे।” पीड़िता के अनुसार जब उसे निशाना बनाया गया तब वह 13 साल की थी।

पश्चिम बंगाल में अब दंगाइयों ने रेलवे स्टेशन को बनाया निशाना, पत्थरबाजी के बाद ट्रेनों का परिचालन करना पड़ा बंद: RAF की तैनाती

पश्चिम बंगाल से हिंसा की नई घटना सामने आई है। हुगली जिले के रिसड़ा रेलवे स्टेशन को 3 अप्रैल 2023 को निशाना बनाया गया। पत्थरबाजी की घटना के बाद ट्रेनों का परिचालन बंद करना पड़ा। कई घंटे तक लोकल और मेल एक्सप्रेस की सेवा बाधित रही। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

एक बयान में पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कौशिक मिरोन ने बताया है, “रिसड़ा रेलवे स्टेशन पर पथराव की घटना हुई। आम लोगों की सुरक्षा के लिए हावड़ा-बर्धमान मेन लाइन पर सभी लोकल और मेल एक्सप्रेस ट्रेन की सेवाओं को निलंबित कर दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात किया गया है।”

रिपोर्टों के अनुसार दंगाइयों ने चार ट्रेनों पर हमला किया। हमले के दौरान रेलवे स्टेशन के गेट नंबर चार को निशाना बनाया गया। इसके कारण तीन घंटे से अधिक समय तक सेवाएँ ठप रहीं।

स्थिति पर काबू पाने की कोशिश के दौरान आरएएफ और पुलिस के जवानों पर भी दंगाइयों ने हमला किया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन्हें आँसू गैस के गोले दागने पड़े। रेलवे क्रासिंग के पास खड़ा पुलिस का एक वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने ताजा हिंसा के वीडियो ट्वीट किए हैं। उनका आरोप है कि इस दौरान बमबाजी भी हुई है। सुवेंदु के मुताबिक रेलवे सुरक्षा बल के हस्तक्षेप के बाद ट्रेन चलाई जा सकी है। अधिकारी का आरोप है कि एक तरफ रिसड़ा जल रहा है और दूसरी तरफ पूरे पश्चिम बंगाल का प्रशासन दीघा में छुट्टियाँ मना रहा है।

अधिकारी ने पूछा है कि जब राज्य सरकार सब कुछ सही बता रही है तो बमबाजी की नई घटना कैसे हुई। उन्होंने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त बताते हुए राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती को अंतिम विकल्प बताया है।

गौरतलब है कि रामनवमी पर पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में हिंसा भड़क गई थी। खास तौर पर हुगली और हावड़ा काफी प्रभावित हुए थे। पश्चिम बंगाल भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि उनके आदेश पर हिंसा से पीड़ित हिन्दुओं का ही पुलिस दमन कर रही है।

हुगली से भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने ममता बनर्जी सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी को वोट हिन्दुओं ने भी दिया था, लेकिन वो सिर्फ मुस्लिमों की चिंता कर रहीं हैं।

‘भारत कभी हिन्दू राष्ट्र नहीं हो सकता’: NCERT ने हटाए मुगलों के चैप्टर तो भड़के सपा MLA इकबाल महमूद, कहा – ताजमहल, लाल किला और क़ुतुब मीनार मुगलों की ही देन

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 12वीं के पाठ्यक्रम में बदलाव कर मुगलों से जुड़ी जानकारी हटाने का फैसला किया है। इसको लेकर समाजवादी पार्टी विधायक इकबाल महमूद ने कहा है कि मुगलों का इतिहास पूरी दुनिया में है। सरकार के मिटाने से मुगल नहीं मिटेंगे।

सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा है कि मुगलों ने लंबे समय तक हिंदुस्तान में राज किया है। मुगलों का इतिहास पूरी दुनिया में पढ़ाया जाता है। देश की किताबों से मुगलों की जानकारी हटाने से कुछ नहीं होगा। अब तक जितनी भी किताबें अब छप चुकी हैं उन्हें जब्त किया जाना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी को मुगलों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकेगी।

इकबाल महमूद ने आगे कहा है कि मुगलों ने भारत को ताजमहल, लाल किला, और कुतुब मीनार जैसी इमारतें दी हैं। मुगलों ने भारत का पैसा भारत में ही लगाया। लेकिन यहाँ ऐसे लोग हुए हैं, जिन्होंने भारत को लूटा है। मुगलों ने हिंदुस्तान को तरक्की का रास्ता दिखाया। लाल किला और कुतुब मीनार का नाम बदलने से इतिहास को नहीं बदला जा सकता। सरकार सिर्फ अपने लिए और अपने वोटों के लिए ही काम कर रही है। भारत कभी हिंदू राष्ट्र नहीं हो सकता।

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी का मुगल प्रेम किसी से छिपा नहीं है। दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव से लेकर वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव तक मुगलों के प्रति अपना प्रेम दिखाते रहे हैं। अब एनसीईआरटी द्वारा सिलेबस में बदलाव होने के बाद सपा नेताओं का भड़कना स्वाभाविक है।

क्या है मामला

दरअसल, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 12वीं के पाठ्यक्रम में कई बड़े बदलाव किए हैं। ये बदलाव इतिहास, नागरिक शास्त्र और हिन्दी की किताबों में हुआ है। इतिहास की किताब से मुगल इतिहास से जुड़ी जानकारी हटाई गई है। वहीं हिंदी के पाठ्यक्रम से कविताएँ और पैराग्राफ हटाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा 10वीं और 11वीं के पाठ्यक्रम से भी मुगल इतिहास से जुड़ी जानकारी हटाई गई है।

ट्रेन में आग लगाने वाला निकला शाहरुख़ सैफ, केरल में मजदूरी करता था: बैग से मिले कई जगहों के बारे में नोट्स, मृतकों में 2 साल की बच्ची भी

केरल में ट्रेन में आग लगाने वाले की पहचान शाहरुख़ सैफ के रूप में हुई है, जो नोएडा का रहने वाला है। वो बतौर मजदूर केरल में काम करता था। पुलिस ने उसका स्केच भी जारी किया है। उसने मामूली कहासुनी के बाद ट्रेन में पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी, जिससे 3 लोगों की मौत हो गई और 8 घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस मामले में एक गवाह रजाक है, जिसकी निशानदेही पर एलथूर पुलिस थाने में उसका स्केच तैयार करवाया गया।

रेलवे ट्रैक के पास से पुलिस को एक मोबाइल फोन भी मिला था, जिसे खँगालने के बाद कई सूचनाएँ मिलीं। लेकिन, इस फोन में कोई सिम कार्ड नहीं मिला। इसे पहले ही निकाल लिया गया था। इसे अंतिम बार गुरुवार (30 मार्च, 2023) को प्रयोग में लाया गया था। अब पुलिस शाहरुख़ सैफ के संपर्कों को तलाश रही है, ताकि उसे जल्द से लड़ दबोचा जा सके। पुलिस पहले ही कह चुकी है कि इस मामले का पर्दाफाश जल्द किया जाएगा।

इस मामले की आतंकी एंगल से भी जाँच की जा रही है। NIA ने भी इस मामले में शुरुआती जाँच शुरू कर दी है। ये घटना अलपुझा-कन्नूर एक्सप्रेस की है। मरने वालों में एक 2 साल का बच्चा और एक महिला भी शामिल है। 9 घायलों में से 3 की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। लोगों ने बताया कि आरोपित लाल कपड़ों में था और उसके पास दाढ़ी थी। वो इस अपराध को अंजाम देने के लिए D2 कपार्टमेन्ट से D1 कम्पार्टमेंट में आया था।

इस घटना के तुरंत बाद लोगों ने ट्रेन की चेन खींच कर ट्रेन को रोक दिया। उस समय अँधेरा था, जिसका फायदा उठा कर शाहरुख़ सैफ भाग खड़ा हुआ। घटनास्थल से एक बैग और फोन मिले थे। बैग में एक कागज पर तिरुवनंतपुरम और कन्याकुमारी के कुछ जगहों के नाम थे। कपड़े, चश्मा और पेट्रोल की एक बोतल भी मिली थी। मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने इस घटना की निंदा की है। केरल की भाजपा यूनिट ने इसे देशद्रोहियों की करतूत बताया है।

‘आत्मरक्षा के लिए बम बना रहे थे मुस्लिम लड़के’: मीडिया में RJD विधायक का बयान, उधर इफ्तार पार्टी में व्यस्त हैं हिंसा पीड़ित बिहार के CM नीतीश

बिहार हिंसा की आग में जल रहा है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इफ्तार पार्टी करने में वयस्त हैं। वहीं, हिंसा के बीच सासाराम में हुए बम धमाके को लेकर राजद विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन ने कहा है कि मुस्लिम लड़के अपनी सुरक्षा के लिए बम बना रहे थे।

दरअसल, राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में इस्लामिया ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन ने इफ्तार पार्टी आयोजित की थी। इस पार्टी में नीतीश कुमार भी पहुँचे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि बिहार के बिहारशरीफ और सासाराम में हुई हिंसा की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। लेकिन नीतीश कुमार इफ्तार पार्टी का लुफ्त ले रहे हैं।

वहीं, रोहतास जिले के सासाराम में हुए बम धमाके को लेकर राजद विधायक मोहम्मद नेहालुद्दीन ने विवादित बयान दिया है। ‘इंडिया टीवी’ की रिपोर्ट के अनुसार, नेहालुद्दीन ने बम बनाने वाले मुस्लिम युवकों का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि मरता क्या न करता। अपनी जान बचाने के लिए मुस्लिमों के बच्चों को ये करना पड़ता है। वे अपनी सुरक्षा में बम बना रहे थे।

बता दें कि सासाराम में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद शनिवार (1 अप्रैल, 2023) को बम धमाके की खबर सामने आई थी। पुलिस ने बताया था कि मकान के अहाते में बम बनाते समय धमका हुआ था। इस बम विस्फोट में 6 लोग घायल हुए थे। सभी को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में पुलिस ने 2 लोगों की गिरफ्तारी की भी बात कही थी।

बम धामके की एक खबर सोमवार (3 अप्रैल 2023) को भी सामने आई। हालाँकि बिहार पुलिस ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा था कि यह एक पटाखे की आवाज है। पुलिस ने कहा है कि सुबह करीब 5 बजे सासाराम थाना से करीब 3 किमी की दूरी पर मोची टोला में मन्नौवर राईन के घर की बाहरी दीवार पर किसी अज्ञात व्यक्ति ने पटाखा फोड़ा दिया। इससे वहाँ मौजूद लोगों में बम विस्फोट की अफवाह फैल गई।

बता दें कि रामनवमी शोभायात्रा के दौरान बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ और रोहतास जिले के सासाराम में हिंसा शुरू हो गई थी। कई जगहों पर आगजनी से लेकर फायरिंग और बम धमाके तक की खबर सामने आई थी। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार बिहारशरीफ और नालंदा में अब भी शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम नहीं हो पाई है। बिहार पुलिस ने हिंसा में लिप्त 109 लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों ही हिंसा ग्रस्त जिलों में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

सिद्धू मूसेवाला के परिजनों से मिले नवजोत सिंह सिद्धू, गाड़ियों का दिखा लंबा काफिला: जेल से निकलते ही एक्टिव, कर्नाटक भेज सकती है पार्टी

नवजोत सिंह सिद्धू के जेल से निकलने के बाद पंजाब की सियासत गर्म हो गई है, खासकर कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर हलचल तेज है। सोमवार (3 अप्रैल, 2023) को पंजाब कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने गायक सिद्धू मूसेवाला के परिजनों से मुलाकात की। सिद्धू मूसेवाला की हत्या को लगभग एक साल हो चुके हैं। नवजोत मनसा जिले में उनके माता-पिता से मिले। उनके साथ गाड़ियों का एक लंबा काफिला साथ था।

नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला स्थित अपने आवास से वहाँ पहुँचे थे। जब वो दोपहर के सवा 2 बजे मूसा गाँव में पहुँचे, तब उनके साथ कॉन्ग्रेस के कई नेता भी थे। 1988 में एक हत्या के मामले में वो दो दिन पहले ही 1 साल जेल की सज़ा काट कर निकले हैं। सिद्धू मूसेवाला ने जब कॉन्ग्रेस जॉइन की थी, तब नवजोत सिंह सिद्धू ही प्रदेश अध्यक्ष थे। जेल से निकलते ही नवजोत सिंह सिद्धू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि लोकतंत्र जंजीरों में कैद है और देश की संस्थाएँ गुलाम बन चुकी हैं।

साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए एक साजिश चल रही है। हालाँकि, पंजाब कॉन्ग्रेस सिद्धू को लेकर काफी सतर्क है। पार्टी आलाकमान की योजना है कि कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में रैलियों के लिए उनका इस्तेमाल किया जाए। नवजोत सिंह सिद्धू क्रिकेटर, क्रिकेट कमेंटेटर और कॉमेडी शो का हिस्सा भी रहे हैं। पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने कहा है कि सिद्धू का सार्वजनिक जीवन में फिर से स्वागत है।

उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति का हिस्सा बनाया जाएगा। अब जब सूरत की अदालत ने राहुल गाँधी को जमानत दे दी है, पार्टी में सिद्धू का क्या रोल है इस पर जल्द ही मंथन होना है। बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी नवजोत कौर राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ का हिस्सा बनी थीं। जालंधर में उपचुनाव होने हैं, उससे पहले पार्टी सिद्धू और अन्य पंजाब कॉन्ग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाना चाहती है।

‘लगातार हिट फ़िल्में, फिर भी किनारे करने के लिए लॉबिंग’: प्रियंका चोपड़ा को लेकर फिल्म निर्माता का खुलासा, कहा – फिल्मों को ना कहने पर बॉलीवुड के लोगों का ईगो होता है हर्ट

एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने बॉलीवुड छोड़कर हॉलीवुड जाने के अपने फैसले को लेकर खुलासा किया था। उनके इस फैसले के बाद फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने दावा किया है कि साल 2012 में प्रियंका चोपड़ा ने लगातार दो हिट फिल्में की थीं। इसके बाद बॉलीवुड में उन्हें किनारे लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था।

हिंदुस्तान टाइम्स के साथ हुए इंटरव्यू में फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने कहा है कि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ परिवारों का एकाधिकार है। उनकी कई पीढ़ियाँ इस इंडस्ट्री में रह चुकीं हैं और वे दर्शकों की नब्ज जानते हैं। असरानी ने आगे कहा है, “यह बात तो स्पष्ट है कि हर किसी के अपने पसंदीदा लोग होते हैं। उन्हें अपने पसंद वाले लोगों के साथ काम करने का पूरा अधिकार है। लेकिन समस्या तब होती है जब वे किसी एक्टर या टेक्नीशियन को न केवल अपनी फिल्म से, बल्कि पूरी इंडस्ट्री से ही बाहर करने की कोशिश करने लगते हैं।”

अपूर्व असरानी ने आगे कहा कि यदि कोई एक्टर किसी की फिल्म करने से इनकार कर देता है या फिर किसी कारण से वह फिल्म नहीं करना चाहता, ऐसी स्थिति में लोगों का ईगो हर्ट हो जाता है। इसके बाद वे अन्य लोगों को उस एक्टर के साथ फिल्म न करने के लिए कहते हैं। यही नहीं उस एक्टर को बदनाम करने के लिए अभियान चलाए जाते हैं। इसके लिए मीडिया और नामचीन पत्रकारों का उपयोग किया जाता है। बड़े और भ्रष्ट लेखक उसके खिलाफ लेख लिखते हैं। इन लेखों के जरिए उस व्यक्ति के खिलाफ कई प्रकार के झूठे आरोप लगाए जाते हैं।

असरानी ने आगे कहा है कि यदि यह एक्टर विनम्र है और लगातार अच्छा काम करता है तो उसके काम को खराब बताते हुए ऐसी समीक्षा की जाती है जिससे उसकी छवि पर गलत प्रभाव पड़े। कई बार तो इससे भी बुरी स्थिति होती है। अच्छे काम के बावजूद बिल्कुल भी समीक्षा नहीं की जाती। हालाँकि इन सबके बाद भी यदि एक्टर की फिल्म हिट हो जाती है तो मीडिया इसे खबर नहीं बनाता। ऐसा होना एक प्रतिभाशाली और मेहनती व्यक्ति के लिए सबसे अधिक हानिकारक होता है। खासकर ऐसे लोगों के लिए जिनके पिता या परिवार का कोई अन्य व्यक्ति फिल्म इंडस्ट्री में नहीं है।

फिल्म निर्माता अपूर्व असरानी ने आगे कहा है कि कार्तिक आर्यन जैसे लोगों के खिलाफ भी भरपूर कैंपेन (अभियान) चलाया गया था। लेकिन इसके बाद भी वह आगे बढ़ गए। उन्होंने आगे कहा है कि साल 2012 में प्रियंका चोपड़ा के खिलाफ भी इसी तरह का अभियान चलाया गया था और उन्हें किनारे करने की कोशिश की गई।

असरानी ने कहा है, “प्रियंका ने एक साल में ही दो बड़ी हिट फिल्में ‘बर्फी’ और ‘अग्निपथ’ की थी। लेकिन एक अखबार के पहले पन्ने पर यह कहा गया था कि कोई भी हीरो उनके साथ काम नहीं करना चाहता था। वास्तव में प्रियंका को वह सम्मान नहीं मिल रहा था जिसकी वह हकदार थीं। यही कारण है कि वह एक एक्ट्रेस और एक स्टार के रूप में आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।”

प्रियंका ने बताई थी बॉलीवुड छोडने की वजह

प्रियंका चोपड़ा ने कहा था कि बॉलीवुड में मिल रहे काम से वह खुश नहीं थीं। उन्हें किनारे लगाने की कोशिश की जा रही थी। वे अकेली पड़ गईं थी। प्रियंका ने कहा, लोग मुझे कास्ट नहीं कर रहे थे। लोगों को मुझसे शिकायत थी। मैं इस तरह के गेम में माहिर नहीं हूँ। इसलिए मैं पॉलिटिक्स से थक गई थी और मुझे लगा कि अब ब्रेक की जरूरत है। मैं उन फिल्मों के लिए तरसना नहीं चाहती थी, जिन्हें मुझे करना ही नहीं था। लेकिन मुझे यह पता था कि इसके लिए क्लबों और ग्रुपों को छोड़ना पड़ेगा।

उन्होंने कहा था, “मुझे यह भी पता था कि इसके लिए बहुत अधिक मेहनत करनी होगी। मैंने बॉलीवुड में लंबे समय तक काम किया है। लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था कि अब आगे काम नहीं करना चाहिए। इसलिए जब म्यूजिक का ऑफर आया तो मैंने कहा कि भाड़ में जाओ, मैं तो चली अमेरिका।”

जिन ‘बेधड़क आवाजों’ ने बिहार की ढुलमुल व्यवस्था को कर रखा था नंगा, बिहारशरीफ-सासाराम की जमीन से वे गायब क्यों

अधिकारी हो या नेता, वे किसी से सवाल करने से नहीं डरते। वे कैमरा और माइक लेकर ग्राउंड जीरो पर उतरने से नहीं हिचकते। वे कभी सड़क और पुल निर्माण की क्वालिटी पर सवाल उठाते। कभी थाने में घुस पुलिसिया तौर-तरीकों पर। वे कभी छात्रों की आवाज बन जाते, कभी आम आदमी की। भले उनके तौर-तरीकों को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो, लेकिन उन्हें देखने-सुनने वाले भी हजारों-लाखों हैं। यही कारण है कि हाल के समय में बिहार की वे समस्याएँ भी नग्न होकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पा गईं, जिससे मुख्यधारा की मीडिया मुँह मोड़ती रहती है।

लेकिन आज जब बिहार के कई शहरों में रामनवमी शोभा यात्राओं को निशाना बनाया गया है, उनकी आवाज कहीं न तो सुनाई पड़ रही है और न दिखाई। आखिर ये बेधड़क आवाजें बिहारशरीफ और सासाराम की ग्राउंड जीरो से क्यों नहीं सुनाई पड़ रहीं? हम बात कर रहे हैं उन यूट्यूबर्स की जो हाल के समय में बिहार से जुड़े हर मुद्दे पर ग्राउंड जीरो की आवाज बनकर उभरे थे। इसमें मनीष कश्यप, रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे नाम शामिल हैं।

लेकिन इनमें से कोई भी बिहार में हालिया हिंसा की रिपोर्ट करता नहीं दिख रहा। ‘सच तक न्यूज’ नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले मनीष कश्यप तमिलनाडु पुलिस की कस्टडी में हैं। रवि भट्ट के चैनल का नाम भले ‘टाइम ऑफ अयोध्या’ हो, लेकिन वे भी खबरें बिहार पर ही केंद्रित करते रहे हैं। भट्ट की इस समय बिहार की आर्थिक अपराध शाखा (EOU) तलाश कर रही है। इन दोनों की हालत देख जो बचे यूट्यूबर हैं, उन्होंने बिहारशरीफ और सासाराम से दूरी बना रखी है।

बिहार के ऐसे ही एक यूट्यूबर ने नाम न छापने की शर्त पर ऑपइंडिया को बताया, “हम सब जानते हैं कि मनीष कश्यप के खिलाफ मामलों में दम नहीं हैं। देर-सबेर उनको अदालत से राहत मिलनी ही है। लेकिन उनके साथ जो सुलूक किया गया, उसका मकसद ही हम जैसों लोगों को डराना था। मेनस्ट्रीम मीडिया को नियंत्रित करना सरकार के लिए आसान था। लेकिन हमलोग उन खबरों को भी सामने ला देते थे जो सरकार नहीं सामने आने देना चाहती थी। जिसको मेनस्ट्रीम मीडिया जगह नहीं देती थी। लोकल यूट्यूब चैनल चलाने वाले लोगों को दबाने के लिए ही मनीष कश्यप पर कार्रवाई की गई।”

वे कहते हैं, “हम सब डरे हुए हैं। इस माहौल में यदि बिहारशरीफ और सासाराम से चीजों को दिखाने लगे तो कोई नहीं जानता कब पुलिस किस मामले में फँसा दे। हम तो फिर भी पूरे राज्य में रिपोर्टिंग करते रहे हैं। लेकिन ‘बिहार दर्शन न्यूज’ जैसे चैनल जो सासाराम की लोकल खबरों को कवर करते रहे हैं और जिनके सब्सक्राइबर भी बहुत ज्यादा नहीं हैं, वे भी मनीष कश्यप की हालत देख झमेले में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने भी रामनवमी पर हुई हिंसा और बाद में जो कुछ हुआ उस पर कोई रिपोर्ट नहीं की है।”

इस दावे की पड़ताल के लिए हमने ‘बिहार दर्शन न्यूज’ के यूट्यूब चैनल को भी खंगाला। जो आखिरी वीडियो इस चैनल पर अपलोड किया गया था वह डेहरी नगर परिषद मतदान से जुड़ी थी। उससे पहले मोटरसाइकिल पर भव्य शोभा यात्रा निकालने की खबर थी। लेकिन रामनवमी शोभायात्रा पर हुए हमले से जुड़ी कोई खबर हमें इस चैनल पर नहीं मिली।

‘बिहार दर्शन न्यूज’ पर हिंसा की कोई रिपोर्टिंग नहीं

इसी तरह मनीष कश्यप के ‘सच तक न्यूज’ चैनल जिसके 66 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं पर आखिरी वीडियो दो सप्ताह पहले अपलोड हुआ था। यह वीडियो भी सरेंडर से पहले उनकी ओर से जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में बिहार के श्रमिकों के साथ कथित हिंसा से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करने के बाद मनीष कश्यप पर शिकंजा कसा गया था। ध्यान रहे कि मेनस्ट्रीम मीडिया में भी कथित हिंसा को लेकर रिपोर्टें प्रकाशित हुईं थी। यह भी जानने योग्य बात है कि तमिलनाडु विवाद से ठीक पहले मनीष कश्यप ने सेना के एक जवान की पिटाई को लेकर बिहार पुलिस को घेरा था।

मनीष कश्यप का ‘सच तक न्यूज’

2.23 लाख सब्सक्राइबर वाले चैनल ‘द अभिषेक तिवारी शो’ पर भी हालिया हिंसा को लेकर हमें कोई रिपोर्ट नहीं दिखी। रिपोर्टर निभा के नाम से मशहूर निभा सिंह के चैनल ‘आरएन न्यूज’, जिसके 10 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं पर भी हमें इससे जुड़ी कोई रिपोर्ट खबर लिखे जाने तक नहीं दिखी। हालिया हिंसा की रिपोर्टिंग से ऐसी ही दूरी हमें हमें समर्थ राठौर, प्रिंसिपल ऑफ न्यूज, सच बिहार, काबिल न्यूज जैसे अन्य चैनलों पर भी देखने को मिला।

अभिषेक तिवारी के यूट्यूब चैनल ‘द अभिषेक तिवारी शो’

इनके ग्राउंड जीरो से गायब होने से भी ज्यादा दुखद, उनके भीतर का वह डर है, जिसके कारण इनमें से कई ने ऑपइंडिया के संपर्क करने पर भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। इनके गायब होने की वजह से बिहारशरीफ और सासाराम जैसी जगहों की वास्तविक स्थिति को लेकर भी पूरी तरह से तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही।

मसलन बिहार पुलिस ने दावा किया कि बिहारशरीफ और सासाराम में स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। लेकिन उसके कुछ घंटों बाद ही मेनस्ट्रीम मीडिया में सासाराम के मोची टोला में बम फेंके जाने की खबर सोमवार (3 अप्रैल 2023) की सुबह आई। इन रिपोर्टों में स्थानीय लोगों के हवाले से दावा किया गया था कि मोटरसाइकिल सवार चार लोग आए और बम फेंक कर चले गए। पुलिस ने कुछ घंटों बाद कहा कि घर की दीवार पर पटाखे मारे गए थे। लेकिन पुलिस के इस दावे पर उस मोहल्ले के लोगों का क्या कहना है, यह बात अब तक मीडिया में नहीं आई है।

इसी तरह हिंसा प्रभावित क्षेत्र से पलायन करते लोगों की वीडियो सामने आए जिसे पुलिस ने अफवाह बता दिया। कई मीडिया हाउस ने बाद में इससे जुड़ा अपना ट्वीट ही डिलीट कर लिया। 1 अप्रैल 2023 को भी सासाराम में मस्जिद के पास ब्लास्ट की खबर आई थी। पुलिस ने इसे एक मकान के अहाते में बम तैयार करते हुए हुआ विस्फोट बताया। लेकिन यह जानकारी नहीं दी कि वह मकान किसका था, जिसके अहाते में बम बनाया जा रहा था। वे दो लोग कौन हैं जिनको इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

हिंसा से जुड़े ऐसे बहुतेरे दावे सोशल मीडिया में वायरल हैं, जिनका जवाब बिहार पुलिस टैग किए जाने के बावजूद नहीं दे रही। आधी-अधूरी जानकारी वाले ट्वीटों को लेकर सोशल मीडिया में बिहार पुलिस ट्रोल भी की जा रही है। बावजूद तस्वीर स्पष्ट करने के प्रयास नहीं हो रहे। दरअसल ऐसी तमाम जानकारी जो पुलिस सार्वजनिक नहीं कर रही है, ग्राउंड जीरो पर यूट्यूबर्स की मौजूदगी से बिहार में अतीत में बाहर आ जाती थी। ये यूट्यूबर्स यदि आज सासाराम में होते तो वे आपको बता चुके होते कि जिस मकान के अहाते में बम बन रहा था, वह किसका है। यह मकान मस्जिद से कितनी दूरी पर है। यह मकान जिस मोहल्ले में है, कभी वहीं पुलिस पर भी हमला हुआ था। वगैरह, वगैरह…

जिस राज्य में सत्ता संरक्षित बाहुबलियों के बारे में खबर प्रकाशित करने पर पत्रकार की हत्या कर दी जाती हो। जिस राज्य का पूर्व मुख्यमंत्री और चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव सवाल पूछने पर पत्रकार को सार्वजनिक तौर पर कहें- दे देंगे दो मुक्का नाच के गिर जाओगे, उस राज्य में इन बेधड़क आवाजों के उभार ने व्यवस्था के हर नट-बोल्ट को आम लोगों के सामने नंगा कर दिया था। शायद यही कारण है कि सोशल मीडिया में पूछा जा रहा है कि जिस नीयत से मनीष कश्यप पर कार्रवाई की गई, क्या बिहार सरकार उसमें सफल हो गई है?