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बुर्के की आड़ में ड्रग्स का धंधा, शौहर के जेल जाने के बाद सँभाला कारोबार: हिना शेख के पास से पुलिस को मिले ₹50 लाख के ड्रग्स

गुजरात की सूरत पुलिस ने ड्रग्स की स्मगलिंग करने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान हिना शेख के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 507 ग्राम प्रतिबंधित मेफेड्रोन ड्रग्स बरामद किया है। इस ड्रग्स की कीमत 50 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है। गिरफ्तार आरोपित हिना शेख पति के जेल जाने के बाद से ड्रग्स का कारोबार संभाल रही रही।

मीडियाॉ रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक खूबसूरत महिला बुर्के की आड़ में ड्रग्स का धंधा कर रही है। इसके बाद पुलिस ने आरोपित महिला पर नजर रखनी शुरू कर दी। साथ ही छापेमारी करते हुए उसके घर से 507 ग्राम मेफोड्रोन समेत 10 हजार रुपए और मोबाइल फोन बरामद किया है। जब्त ड्रग्स की कीमत 50 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि हिना शेख को ड्रग्स की सप्लाई साहिल अरविंद भाई गोसाईं नामक व्यक्ति करता था। वह मुंबई से ड्रग्स लाकर यहाँ सप्लाई करता था। इसके अलावा पुलिस वसीम मुस्ताक मिर्जा शेख नामक व्यक्ति की भी तलाश में जुटी है। आरोप है कि वसीम भी ड्रग्स के इस काले धंधे में शामिल था।

पति के जेल जाने के बाद हिना ने संभाला था ड्रग्स का धंधा

हिना शेख का शौहर इस्माइल मुबारक शेख गुजरात के सूरत जेल में बंद है। आरोप है कि वह भी ड्रग्स का कारोबार करता था। पुलिस ने उसके पास से कोकीन बरामद की थी। इसके अलावा इस्माइल के ऊपर हत्या की कोशिश और हत्या का भी आरोप है। कहा जा रहा है कि इस्माइल के जेल जाने के बाद से हिना ड्रग्स के धंधे में उतर गई थी।

इस मामले में सूरत पुलिस कमिश्नर अजय कुमार तोमर का कहना है कि पुलिस सितंबर 2020 से ‘नो ड्रग्स इन सूरत सिटी’ नामक एक अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत ड्रग्स के धंधे को पूरी तरह से खात्मे के लिए काम किया जा रहा है। पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर ड्रग्स के नेटवर्क का पर्दाफाश कर रही है। अब तक करीब 15 करोड़ रुपए की ड्रग्स के साथ 257 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

‘ये वो भारत नहीं है जो चुप रह जाता था’: तिरंगे के अपमान पर विदेश मंत्री ने खालिस्तानियों को लताड़ा, बोले – पश्चिमी देशों को लगता है कि दूसरों पर कमेंट करना उनका अधिकार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने वाले पश्चिमी देशों की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिमी देशों को लगता है कि दूसरे देशों पर कमेंट करना उनका अधिकार है। यही नहीं, उन्होंने ब्रिटेन में खालिस्तानियों द्वारा किए गए तिरंगे के अपमान को लेकर कहा है कि यह वो भारत नहीं है जो इस तरह की घटनाओं पर चुप रह जाता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या और पीसी मोहन ने कर्नाटक के हुबली में स्थित कब्बन पार्क में ‘मीट एंड ग्रीट’ नामक कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता रद्द होने के बाद अमेरिका और जर्मनी द्वारा की गई टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया था।

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है, “मैं आपको इस का सच बता रहा हूँ। वास्तव में इसके पीछे दो वजह हैं। पहला यह है कि पश्चिमी देशों को दूसरों पर टिप्पणी करने की बुरी आदत है। उन्हें लगता है कि भगवान ने उनको दूसरों पर टिप्पणी करने का अधिकार दिया है। पश्चिमी देशों को पुरानी चीजों से सीखने की जरूरत है। यदि वे ऐसा करते रहेंगे तो दूसरे लोग भी कमेंट करने लगेंगे और ऐसा होने पर उन्हें अच्छा नहीं लगेगा। मैं देख रहा हूँ कि ऐसा हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा है, “दूसरा कारण यह है कि हमारे देश के लोग ही उन्हें टिप्पणी करने के आमंत्रित करते हैं। ऐसे में अधिक से अधिक लोग कमेंट करते हैं। हमें दुनिया के सामने यह कहना बंद करना होगा कि यहाँ समस्याएँ हैं। साथ ही अमेरिका और अन्य देशों के सामने यह कहने की जरूरत नहीं है कि वे भारत के मुद्दों पर क्यों नहीं बोलते। यदि यहाँ से कोई जाता है और कहता है कि आप हमारी समस्याओं पर क्यों नहीं बोल रहे हैं, ऐसे में वे कमेंट करेंगे ही। इस मामले में समस्या दोनों तरफ है। मुझे लगता है कि दोनों को ठीक करने की जरूरत है।”

ब्रिटेन में स्थित भारतीय उच्चायोग में खालिस्तानियों द्वारा किए गए तिरंगे के अपमान को लेकर बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमने बीते कुछ दिनों में लंदन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सैन फ्रांसिस्को में तिरंगे के अपमान की कुछ घटनाएँ देखी हैं। भारत जब तिरंगे के अपमान को हल्के में लेता था वह दिन अब जा चुके हैं। यह वो भारत नहीं है जो किसी के द्वारा उसके राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को स्वीकार करेगा। तिरंगे के अपमान के बाद भारतीय उच्चायोग ने और भी बड़ा तिरंगा फहरा दिया था। यह केवल वहाँ के तथाकथित खालिस्तानियों के लिए संदेश नहीं था बल्कि अंग्रेजों के लिए भी एक तरह का मैसेज था। यह मेरा झंडा है, अगर कोई इसका अपमान करने की कोशिश करेगा तो मैं इस झंडे को और भी बड़ा कर दूँगा।”

‘Gays पैदा करने की इंडस्ट्री बन गए हैं पाकिस्तान के मस्जिद-मदरसे’: मौलाना का वीडियो हुआ वायरल, कहा – बच्चा भले न पढ़े, मदरसे में न भेजें

पाकिस्तान के एक मौलाना का वीडियो खासा वायरल हो रहा है। मौलाना इस वीडियो में पाकिस्तान के मस्जिदों-मदरसों पर टिप्पणी करते हुए कह रहा है कि हमने एक ऐसी इंडस्ट्री लगा रखी है, जो Gays को पैदा करती है। मौलाना ने कहा कि ये इंडस्ट्री न सिर्फ समलैंगिकों को पैदा करती है, बल्कि उसने ऐसी व्यवस्था बना रखी है कि हर गाँव, हर शहर और हर गली-गली में 200 गज पर मस्जिद बनी हुई है और वहाँ ये सब होता है।

उसने कहा कि जो मोहल्ले में पहुँच गया वो वहाँ करता है, जो शहर में पहुँच गया वो वहाँ करता है। उसने कहा कि ये बात सबको पता है, लेकिन ये मसला इतना आसान भी नहीं है कि चुटकुले बना कर इसे खत्म किया जा सके। मौलाना ने कहा कि इस व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि दीन इन चीजों से नहीं चलता है। साथ ही उसने अभिभावकों को सलाह भी दी है कि वो अपने बच्चों को मस्जिदों-मदरसों में पढ़ने के लिए न भेजें।

मौलाना ने अभिभावकों को मैट्रिक (दसवीं) के बाद ही बाहर भेजने की सलाह देते हुए कहा कि उससे पहले बच्चों को घर में ही पढ़ाया जाना चाहिए। उसने कहा कि अगर बच्चा नहीं भी पढ़ता है तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उसे मदरसों के हवाले नहीं किया जाना चाहिए। बता दें कि पाकिस्तान में हाल के दिनों में मदरसों के कई शिक्षकों/मौलवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो यौन शोषण के आरोपित रहे हैं। पंजाब प्रांत में पिछले साल एक मौलाना धराया था, जिसने 10 नाबालिगों का यौन शोषण किया था।

पाकिस्तान से मौलानाओं के वीडियो सामने आते रहते हैं। अल्पसंख्यकों के लिए जहन्नुम कहे जाने वाले पाकिस्तान में कट्टरपंथियों द्वारा होली न मनाने देने के एलान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। वायरल वीडियो में एक मौलाना सिंध की जमीन को सूफियों की जमीन बताते हुए वहाँ सिर्फ मोहम्मद के दिन ही जश्न मनाए जाने की नसीहत दी थी। एक भीड़ को संबोधित करते हुए दिए इस बयान का वहाँ मंच और सामने मौजूद लोगों द्वारा समर्थन किया गया था। 

पश्चिम बंगाल में फिर शोभा यात्रा पर हमला, पत्थरबाजी: महिलाओं-बच्चों को भी बनाया निशाना, दावा – मुस्लिम बहुल इलाके में हुई हिंसा

पश्चिम बंगाल में हिंसा एक बार फिर भड़क उठी है। यहाँ के हुगली में भाजपा की रामनवमी शोभायात्रा में आगजनी और पथराव की घटना सामने आई है। शोभायात्रा में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष समेत कई नेता शामिल हुए थे। इससे पहले रामनवमी पर भी पश्चिम बंगाल में हिंसक झड़पें हुई थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (2 अप्रैल, 2023) को हुगली में रामनवमी को लेकर बीजेपी शोभायात्रा निकाल रही थी। यह यात्रा जब मुस्लिम बाहुल्य इलाके रिशरा पहुँची तब वहाँ अचानक से पत्थरबाजी होने लगी। इससे मौके पर भगदड़ जैसे हालात बन गए। पत्थरबाजों द्वारा कई वाहनों में आग लगाने की भी खबर है।

घटना को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, “शोभा यात्रा के दौरान पथराव हुआ है। इस यात्रा में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। अचानक हुए हमले में कई लोग घायल हुए हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि बंगाल पुलिस कर क्या कर रही है। ममता बनर्जी सिर्फ राजनीति कर रहीं हैं। बंगाल में ऐसे मामले रोज सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा है कि हावड़ा हिंसा के बाद भी राज्य सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। पथराव किया जा रहा है और वाहनों में तोड़फोड़ की जा रही है। अगर ऐसी घटनाओं का जवाब दिया गया तो क्या होगा? यात्रा में शामिल हुए लोगों पर पत्थर मारे जा रहे हैं। गाड़ियाँ तोड़ीं जा रही हैं। अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। बमों की भी आवाज आ रही है। फिलहाल पुलिस को तैनात किया गया है। लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

हिंसा की आग में जल रहा है बंगाल

पश्चिम बंगाल में रामनवमी के जुलूस में लगातार हमले की घटनाएँ सामने आ रहीं हैं। उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर शहर के दालखोला इलाके में रामनवमी के जुलूस के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। मुस्लिम बहुल इलाके में हुई झड़प में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 5-6 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। बंगाल पुलिस युवक के मौत की वजह हार्ट अटैक बता रही है।

हावड़ा में असामाजिक तत्वों ने रामनवमी के जुलूस पर पत्थरबाजी की और हिंसा भड़कने पर फिर कई वाहनों में आग लगा दी। घटना हावड़ा के शिबपुर की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग छतों से जुलूस पर पथराव करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद जुम्मे यानि शुक्रवार (31 मार्च 2023) को भी हावड़ा में हिंसा भड़क उठी थी। भाजपा इन तमाम हिंसक घटनाओं को लेकर ममता बनर्जी सरकार को दोषी ठहरा रही है।

गरीब हिन्दुओं पर 6.5% टैक्स, मुस्लिम कलक्टर के सामने लाइन में खड़े होकर देना पड़ता था जज़िया: औरंगजेब ने बनाया था कानून, दोहरानी होती थी कुरान की आयतें

भारत में इस्लामी शासनकाल में हिन्दुओं पर अत्याचार किसी से छिपी बात नहीं है, भले ही वामपंथी इतिहासकारों ने इस पर कितना ही पर्दा डालने की कोशिश की हो। इसी तरह अंतिम शक्तिशाली मुग़ल बादशाह औरंगजेब के काल में न सिर्फ हिन्दुओं को मारा-काटा गया और मंदिर तोड़े गए, बल्कि उन पर जज़िया टैक्स भी लगाया गया। अमीर से लेकर गरीब हिन्दुओं तक को जज़िया कर देना होता था। इससे हिन्दू और ज्यादा गरीब होते चले गए।

इतिहासकारों की मानें तो मुग़ल काल में हिन्दुओं को जानवरों से लेकर पेड़ तक पर टैक्स देना होता था। मुग़ल बादशाह अकबर के समय शादियों पर भी टैक्स लगते थे। पेड़-पौधों पर भी टैक्स लगाए जाते थे, जो अकबर और जहाँगीर के समय हटा दिया गया लेकिन उसके बाद फिर जारी रहा। कहा जाता है कि अकबर ने जज़िया कर हटा दिया था। हालाँकि, औरंगजेब के समय इसे फिर से हिन्दुओं पर लगा दिया। मुस्लिमों को जज़िया नहीं देना होता था।

जज़िया कर लेने के लिए हिन्दुओं को 3 हिस्सों में बाँटा गया था। सबसे ऊपर अमीरों को रखा गया था, जिनकी आय साल में 2500 रुपए से ज्यादा थी। उन्हें 48 दिरहम कर के रूप में देने होते थे। रुपए में देखें तो ये कुल 13 रुपया बनता था। इसी तरह, दूसरे वर्ग में माध्यम वर्ग को रखा गया था। इस समूह में उन लोगों को रखा गया था, जिनकी वार्षिक आय 250 रुपए थी। उन्हें 24 दिरहम टैक्स के रूप में देने पड़ते थे। रुपए में ये 6.5 रुपया बैठता है।

अब आते हैं गरीब वर्ग पर, जिस पर जज़िया कर की सबसे ज्यादा मार पड़ी थी। गरीबों में ऐसे लोगों को रखा गया था, जिनकी वार्षिक आय 52 रुपए या इससे कम हो। उन्हें 12 दिरहम, अर्थात 3.25 रुपए टैक्स के रूप में देने पड़ते थे। इस तरह इन आँकड़ों के आधार पर गणना करें तो अमीरों को 0.52%, माध्यम वर्ग के हिन्दुओं को 2.6% और गरीब हिन्दुओं को 6.25% मुग़ल शासन को टैक्स के रूप में देने पड़ते थे। नहीं देने पर उन्हें अंजाम भुगतना पड़ता था।

सोचिए, गरीब हिन्दुओं से 6.25% टैक्स लेकर औरंगजेब इन पैसों का इस्तेमाल हिन्दू राज्यों के खिलाफ ही युद्ध लड़ने के लिए करता था। इन पैसों को उस फ़ौज पर खर्च किया जाता रहा होगा, जो हिन्दुओं के मंदिरों को तोड़ती थी। एक तो संसाधनहीन गरीब इतनी मेहनत कर के कमाते थे, ऊपर से मुगलों का अत्याचार सहन करने के अलावा उन्हें टैक्स भी देते थे। यानी, हिन्दुओं को अपने ऊपर अत्याचार को फंड करने के लिए आपसी देने होते थे।

यही कारण था कि कई गरीब हिन्दुओं ने मजबूरी में धर्मांतरण कर लिया, ताकि वो अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें। उन्होंने इस्लाम मजहब अपना लिया, ताकि उन्हें जज़िया कर न देना पड़े। हिन्दू और गरीब होते चले गए, जिनके कारण कभी ये देश ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था और जो इस देश को बनाने वाले थे। इतिहासकार बताते हैं कि इन सबके बावजूद औरंगजेब का समय खत्म होते-होते मुगलों के खजाने में नकदी बची ही नहीं थी।

जज़िया कर का उद्देश्य सिर्फ हिन्दुओं को परेशान करना ही नहीं था, बल्कि मुल्ले-मौलवियों को खुश करना भी था। औरंगजेब राजपूत और मराठों से परेशान था, ऐसे में उसने मुस्लिम जनसंख्या को अपने पीछे लामबंद करने के लिए ये तरीका अपनाया। जज़िया का बहाना बना कर मुल्ले-मौलवी गरीब हिन्दुओं को सताते थे। गाँवों से जज़िया वसूली में फ़ौज की मदद तक ली जाती थी। जिन्हें ये कार्य सौंपा गया था, वो हिन्दुओं पर काफी अत्याचार करते थे।

मुल्ला-मौलवी वर्ग को रोजगार का एक अतिरिक्त साधन मिल गया। हालाँकि, औरंगजेब को सन् 1704 (अपनी मौत से 3 साल पहले) में अराजकता को रोकने के लिए परेशान होकर दक्षिण भारत से जज़िया कर हटाना पड़ा। ऐसा कर के उसे लगता था कि मराठे उससे समझौता कर लेंगे। जिसने अपने ही पिता को कैद कर के सत्ता पाई हो और अपने भाई को मार कर उसे प्लेट में रख कर पिता के सामने पेश किया हो, वो व्यक्ति भला एक अच्छा शासक कैसे हो सकता था।

असल में मुगलों द्वारा जज़िया लगाने का उद्देश्य ही या धरना कायम करनी थी कि मुस्लिम ही सबसे श्रेष्ठ हैं और बाकी सब उसके नीचे आते हैं। बाद में वामपंथी इतिहासकारों ने शरीयत का रोल नकारते हुए जज़िया के ‘राजनीतिक कारण’ गिनाने शुरू कर दिए। औरंगजेब ने मराठों के खिलाफ लड़ाई को भी ‘गाजा’ दिखाया था, अर्थात इस्लाम के लिए जिहाद। असल में जज़िया का सीधा अर्थ था हिन्दुओं को नीचा दिखाना, उन्हें अपमानित महसूस कराना।

इसीलिए, एक नया नियम लागू किया गया। इसके बारे में मार्क जैसन गिल्बर्ट ने ‘South Asia in World History‘ में बताया है। इसके तहत, घर के मुखिया को व्यक्तिगत रूप से कलक्टर के सामने पेश होकर जज़िया कर अदा करना पड़ता था। इस दौरान मुस्लिम कलेक्टर बैठा रहता था और सामने हिन्दुओं को खड़े होकर लाइन लगानी पड़ती थी। इस दौरान उन्हें कुरान की वो आयत दोहरानी होती थी, जिसमें गैर-मुस्लिमों को मुस्लिमों से नीचे बताया गया है।

साथ ही औरंगजेब ये भी योजना बना रहा था कि भविष्य में हिन्दुओं को मुग़ल शासन में बड़े पदों पर न बिठाया जाए। ऐसे पदों को मुस्लिमों के लिए आरक्षित करने की तैयारी थी। वो अप्रैल 1779 का ही समय था, जब औरंगजेब ने अकबर द्वारा हटाए गए जज़िया कर को पुनः लागू किया। सन् 1564 में इसे हटा दिया गया था। औरंगजेब को न सिर्फ मराठा और मरवाद, बल्कि बुंदेलखंड में छत्रसाल से भी चुनौती मिल रही थी जिन्होंने अपना अलग साम्राज्य स्थापित किया।

इन सबके अलावा सिख भी थे, जो तमाम अत्याचारों के बावजूद मुगलों के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं थे। जाट विद्रोह से औरंगजेब परेशान था ही। औरंगजेब ने जज़िया की वसूली के लिए राजस्व विभाग में कई मुस्लिमों की नियुक्तियाँ की। सन् 1687 में उसने एक इंस्पेक्टर जनरल की नियुक्ति की, ताकि नियमों को और कड़ा बनाया जा सके। औरंगज़ेब के समय में काजियों का बोलबाला था और इसीलिए संगीत तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

औरंगजेब ने ये नियम भी बनाया कि महिलाओं को ‘चुस्त कपड़े’ पहनने का कोई अधिकार नहीं है और उनके शरीर पर कपड़े फैले हुए होने चाहिए। साथ ही उसने दाढ़ी की लंबाई भी तय कर रखी थी और मुस्लिमों को चार उँगली से ज्यादा लंबी दाढ़ी न रखने को कहा था। साथ ही मूँछ छिलने का भी कानून बनाया गया, क्योंकि उसे लगता था कि मूँछें होठों को ढँक कर रखेंगी तो इससे अल्लाह का नाम बोलने पर आवाज़ जन्नत तक नहीं पहुँचेगी।

राहुल गाँधी ने खाली किया लुटियंस दिल्ली वाला सरकारी बँगला, कॉन्ग्रेसी चला रहे ‘मेरा घर, आपका घर’ अभियान

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने दिल्ली स्थित अपना आधिकारिक बँगला खाली कर दिया है। लोकसभा की हाउसिंग कमेटी ने इस बंगले को खाली कराने का नोटिस दिया था। सदन के सचिवालय ने इस बाबत राहुल गाँधी को पहले ही नोटिस दे दिया था। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस बंगले में साल 2004 से थे। यह बंगला 12 तुगलक लेन पर स्थित है जिसे राहुल गाँधी ने रविवार (2 अप्रैल, 2023) को खाली किया है। दरअसल गुजरात की एक अदालत द्वारा राहुल गाँधी को 2 साल की सजा सुनाई है जिसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म हो गई है।

TOI ने राहुल गाँधी द्वारा बँगला खाली कर के जाते हुए वीडियो शेयर किया है। 1 मिनट 25 सेकेण्ड के इस वीडियो में सुरक्षाकर्मी बंगले के गेट पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। कुछ ही देर बाद सफेद रंग की गाड़ियों से राहुल गाँधी का काफिला सड़क से गुजरता है। थोड़ा आगे जाने के बाद यह काफिला वीडियो में एक चौराहे पर भी कुछ देर के लिए रुकता है। सुरक्षा में दिल्ली पुलिस के साथ पैरामिलिट्री के भी जवान साथ दिख रहे हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी को बंगला खाली करने के लिए 22 अप्रैल 2023 तक की मोहलत दी गई थी।

महिला ने राहुल गाँधी के नाम किया बंगला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की एक महिला ने अपना खुद का बंगला राहुल गाँधी के नाम कर दिया है। दरअसल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता राहुल गाँधी के लिए ‘मेरा घर, आपका घर’ नाम का अभियान चला रहे। हैं इस अभियान से प्रभावित हो कर दिल्ली की रहने वाली राजकुमारी गुप्ता नाम की महिला ने अपना मकान राहुल गाँधी के नाम कर दिया है। यह मकान मंगोलपुर क्षेत्र में है। राजकुमारी गुप्ता ने इस बावत जमा किए गए स्टाम्प का फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। कई अन्य कॉन्ग्रेसी भी अपने घर की फोटो सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी के लिए शेयर कर रहे हैं।

राजकुमारी का यह घर 4 मंजिला बना हुआ है। राजकुमारी का कहना है कि उन्हें बंगला इंदिरा गाँधी के समय मिला था। इस दौरान राजकुमारी ने कहा कि राहुल गाँधी को भले ही बंगले से बाहर किया गया है लेकिन उन्हें कोई भी लोगों के दिलों से नहीं निकाल सकता है।

पाकिस्तान में फिर हिंदू डॉक्टर की हत्या, हमलावरों ने कार पर ताबड़तोड़ बरसाईं गोलियाँ: 1 महीने में दूसरी घटना, पुलिस ने कहा- टारगेट किलिंग

पाकिस्तान के कराची में एक और हिंदू डॉक्टर की हत्या कर दी गई। बीते एक महीने में हिंदू डॉक्टर की हत्या का दूसरा मामला है। मृतक डॉक्टर की पहचान बीरबल गेनानी के रूप में हुई। घटना में उनकी सहयोगी डॉक्टर क़ुरत-उल-ऐन भी घायल हुई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डाक्टर बीरबल गेनानी कराची के मशहूर नेत्र रोग विशेषज्ञ थे। वह कराची नगर निगम में निदेशक के पद पर भी कार्य चुके हैं। गुरुवार (30 मार्च 2023) की शाम डाक्टर बीरबल गेनानी कराची के गार्डन इलाके में स्थित अपने निजी क्लीनिक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसा दीं। इस घटना के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हत्या को टारगेट किलिंग होने का संदेह जताया जा रहा है। वहीं, डॉक्टर क़ुरत-उल-ऐन के कंधे में गोली लगी थी। हालाँकि वह खतरे से बाहर हैं।

पाकिस्तानी पुलिस के डीआईजी इरफान अली ने कहा है कि हत्या का मामला टारगेट किलिंग की तरह प्रतीत होता है। हालाँकि अभी हत्या के मकसद का पता नहीं चल पाया है। घायल डॉक्टर से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कहा है कि अचानक से गोलीबारी शुरू हुई। इससे पहले कि महिला डॉक्टर को कुछ समझ आता हत्या हो चुकी थी। डॉक्टर बीरबल गेनानी के सिर में दो गोलियाँ लगी थी।

एक महीने के भीतर दूसरे हिंदू डॉक्टर की हत्या…

बता दें कि इससे पहले 7 मार्च 2023 को पाकिस्तान के ही सिंध प्रांत में मशहूर डॉक्टर धर्म देव राठी की उनके ड्राइवर ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। वह अपने घर में मृत पाए गए। घटना उस वक्त हुई थी, जब डॉ. धर्म देव राठी अपने क्लीनिक से घर लौट रहे थे। इस दौरान किसी बात को लेकर उनके ड्राइवर हनीफ और डॉ. राठी के बीच बहस हो गई। इस बहस के बाद घर पहुँचते ही हनीफ ने चाकू से हमलाकर राठी की हत्या कर दी और फिर फरार हो गया। इस घटना में रसोईया दिलीप ठाकुर भी घायल हुआ था। बाद में पुलिस ने आरोपित हनीफ को गिरफ्तार कर लिया था।

‘सुनो CM सरमा… तुम्हें अंजाम भुगतना होगा’: खालिस्तानी संगठन SFJ ने असम मुख्यमंत्री को दी धमकी, अमृतपाल के साथियों पर कार्रवाई से भड़का

खालिस्तानियों ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भी धमकी दी है। खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने धमकी देते हुए कहा कि उसकी लड़ाई भारत सरकार से है। इसलिए सीएम सरमा बीच में ना पड़ें।

पत्रकारों को फोन करके दी धमकी में पन्नू ने यह भी कहा कि भगोड़े अमृतपाल के साथियों को जेलों में प्रताड़ित किया जा रहा है। उसने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर असम सरकार जेल में बंद अमृतपाल के 6 साथियों को प्रताड़ित करती है तो इसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

पन्नू ने सरमा को सलाह दी है कि खालिस्तानी समर्थकों की लड़ाई केंद्र सरकार के साथ है। इसलिए वह बीच में पड़कर हिंसा का शिकार ना बनें। उसने कहा कि खालिस्तानी समर्थक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पंजाब को भारत से मुक्त कराना चाहते हैं।

बता दें कि अमृतपाल के कुछ साथियों को असम की जेल में रखा गया है। वहीं, अमृतपाल की तलाश में पुलिस और NIA लगातार दबिश दे रही हैं। हालाँकि, उसका सही लोकेशन एजेंसियों को नहीं मिल रहा है और वह अभी तक बचने में सफल रहा है।

हाल ही में खबर आई थी कि अमृतपाल पंजाब में ही कहीं छिपा हुआ है। ऐसे में पुलिस ने मानसा में नाकाबंदी बढ़ा दी है। इसके अलावा, राज्य भर में जगह-जगह अमृतपाल और उसके साथी पप्पलप्रीत का पोस्टर लगा दिया है। ये पोस्टर पुलिस बैरिकेडिंग्स पर भी लगाए गए हैं।

‘वारिस पंजाब दे’ के मुखिया अमृतपाल के खिलाफ 18 मार्च 2023 को पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। उसके पहले गिरफ्तार किए गए अपने कुछ समर्थकों ने छुड़ाने के लिए अमृतसर के पास अजनाला पुलिस स्टेशन पर अपने साथियों के साथ सशस्त्र धावा बोल दिया था।

उस वक्त पुलिस ने दबाव में उसके साथियों को जेल से रिहा कर दिया था। उसके कुछ सप्ताह बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसका पीछा करना शुरू किया, लेकिन वह चकमा देकर भाग निकला। तब वह अपना वेश बदलकर और अलग-अलग गाड़ियों में भाग रहा है।

भैंस धोना, झाड़ू लगाना… तय हुआ जेल में अतीक अहमद का काम, दिहाड़ी ₹25 मिलेगी: कैदी साथ रहेंगे, खाने में दाल-चावल मिलेगा

उमेश पाल अपहरण केस में प्रयागराज कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा पाए माफिया अतीक अहमद के लिए जेल में काम तय कर दिए गए हैं। जेल में काम के तौर पर अतीक को भैंस धोने और झाड़ू लगाने का काम दिया गया है। इन कामों के बदले अतीक को दिहाड़ी के तौर पर प्रतिदिन 25 रुपए मिलेंगें। अतीक का बिल्ला भी तय कर दिया गया है। खाने के तौर पर माफिया को जेल का ही भोजन दिया जा रहा है। सजा पाने के बाद माफिया की बैरक को भी बदल दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक अहमद का बिल्‍ला नंबर 17052 तय किया गया है। खाने में उसे रोटी, दाल और चावल दिया जा रहा है। दिहाड़ी पाने के लिए जेल में अतीक अहमद का खाता भी खोल दिया गया है। भैंस धोने के अलावा अतीक अहमद को खेती और बढ़ई का भी काम करना होगा। कैदी के तौर पर को अतीक को 2 जोड़ी कपड़े मिले हैं। इन कपड़ों में सफेद कुर्ता, पायजामा, गमछा और टोपी शामिल हैं। अतीक अहमद की बैरक को बदल कर अब उसे सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार अतीक को खाना भी लाइन में खड़े हो कर लेना पड़ेगा। काम के घंटों के लिए अतीक की उम्र को ध्यान में रखा जाएगा। फिलहाल अतीक को नॉन ट्रेंड कारीगर के तौर पर रखा गया है। कुशल कारीगर बन जाने के बाद अतीक की दिहाड़ी 40 रुपए प्रतिदिन होगी। अतीक अहमद को जेल में खाने के तौर पर सादा भोजन मिलेगा। यहाँ उसे दाल, चावल और रोटी मिलेगी। साबरमती जेल में अतीक को मैनुअल की भी लिस्ट सौंप दी गई है। अब अतीक को पक्का कैदी माना जाएगा।

गौरतलब है कि उमेश पाल अपहरण केस में प्रयागराज की एक कोर्ट ने अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई है। आजीवन कारावास की यह सजा बमशक़्क़त है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अतीक अहमद और अन्य दोषी अपनी सजा को हाईकोर्ट में चैलेन्ज दे सकते हैं। इस बावत अगले हफ्ते याचिका दाखिल की जा सकती है। याचिका दाखिल करने के लिए कुछ नामी वकीलों की भी तलाश की जा रही है। सजा पाए अन्य 2 लोगों में शौलत हनीफ और दिनेश पासी शामिल हैं।

मिट गया भोपाल के नवाब का नाम: मध्य प्रदेश का नसरुल्लागंज अब कहलाएगा भैरूंदा, शिवराज सरकार ने जारी किया आदेश

मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने एक और शहर का नाम बदल दिया है। शिवराज सिंह चौहान सरकार ने सीहोर जिले के नसरुल्लागंज का नाम बदल दिया है। अब इसे भैरूंदा के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश सरकार ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन भी जारी किया है।

बता दें कि शिवराज सरकार ने नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद राज्य सरकार ने शहर का नाम बदलने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2021 में अपने एक कार्यक्रम में नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा करने की घोषणा की थी। यह इलाका मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। यहाँ के लोग लंबे समय से नाम बदलने की माँग करते आ रहे थे।

इससे पहले राज्य सरकार ने भोपाल के इस्लाम नगर का नाम बदलकर जगदीशपुर और होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम कर दिया था। इतना ही नहीं, इसी साल हबीबगंज रेलवे स्टेशन का भी नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन कर दिया गया था।

भोपाल के मिंटो हॉल का भी नाम बदलकर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर किया गया है। अब कहा जा रहा है कि जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट का नाम बदलकर रानी दुर्गावती एयरपोर्ट नाम रखने का प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा है।

नसरुल्लागंज के इतिहास को देखें तो इसका संबंध भोपाल के नवाब परिवार से है। नवाब सुल्तानजहाँ बेगम ने अपने तीनों पुत्रों को भोपाल के पास जागीर दी थी। सबसे बड़े बेटे नसरुल्ला खाँ को दी गई जागीर के नाम पर उसका नाम नसरुल्लागंज पड़ा। इसी प्रकार अब्दुल्लागंज, अब्दुल्ला खाँ की जागीर थी।

सुल्तानजहाँ बेगम ने अपने सबसे छोटे बेटे हमीदउल्ला को चिकलोद की जागीर दी थी। बाद में नसरुल्लाह भोपाल रियासत का नवाब बना। नई दुनिया के अनुसार, भोपाल के 1908 के राजपत्र घोषणा में नसरुल्लागंज का नाम भैरुंदा ही बताया गया था।

उस राजपत्र में कहा गया है कि कि भैरुंदा भोपाल रियासत के दक्षिणी संभाग के आठ परगना में से एक परगना था। उस समय भैरुंदा और आसपास के इलाकों में दरी बुनने का काम होता था। इसकी वजह से काफी संख्या में यहाँ बुनकर रहते थे।

दरअसल, यहाँ निवास करने वाले कलोता समाज के लोगों के अराध्य देव भैरव महाराज हैं। भैरव नाथ में आस्था होने के कारण इस गाँव का भैरुंदा रखा था। भोपाल और आसपास के क्षेत्र में मुगलों का राज कायम हुआ तो उन्होंने भैरुंदा का नाम बदलकर नसरुल्लागंज कर दिया गया था।