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‘पुलिस ने पकड़ा तो बहुत बेइज्जती होगी’: भगोड़े अमृतपाल के चाचा का ऑडियो वायरल, सरेंडर करने से पहले साथी से की बात

खालिस्तान समर्थक ‘भगोड़े’ अमृतपाल सिंह के चाचा हरजीत सिंह की एक ऑडियो वायरल हो रही है। ये ऑडियो उनकी गिरफ्तारी से पहले की है। इस ऑडियो में वह अपने सरेंडर की बात कह रहे हैं।

वायरल ऑडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है, “चूँकि हम और नहीं भाग सकते, हर जगह कैमरे लगे हैं, अच्छा है कि हम सरेंडर ही कर दें।” ऑडियो में हरजीत सिंह को अपने भतीजे को भी सरेंडर करने की सलाह देते सुना जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, हरजीत सिंह जिससे बात कर रहे थे वो उनका साथी व भगोड़ा पपलप्रीत सिंह था। ऑडियो में उन्हें कहते सुना गया था कि वो एक या दो दिन में सरेंडर कर देंगे। ऑडियो में ये भी कहा गया था- “अगर पुलिस ने हमें कल को पकड़ा तो बहुत बेइज्जती होगी। जांबाजों की तरह पुलिस के आगे सरेंडर करते हैं, मीडियो बुलाओ।”

उन्होंने अमृतपाल को भी सरेंडर की सलाह दी थी। पपलप्रीत से उन्होंने कहा था- “हर जगह कैमरे हैं, हम ज्यादा दिन नहीं बच पाएँगे। इसीलिए मैं आप से कह रहा हूँ। भाई साहब आपके साथ होंगे। आपकी बात सुनेंगे।”

कथिततौर पर अमृतपाल सिंह के एक चाचा सुखचैन सिंह पंजाब पुलिस में इंस्टपेक्टर थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं। उन्हीं से अमृतपाल सिंह को और उसके दूसरे चाचा हरजीत सिंह पुलिस एक्शन की जानकारी मिली। जिसके बाद अमृतपाल फरार हो गया। वहीं हरजीत सिंह ने पुलिस की सक्रियता देखते हुए सरेंडर का मन बनाया।

बता दें कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत कई जगह अमृतपाल सिंह को पकड़ने के लिए पुलिस प्रयास कर रही है। इस बीच उसके दो साथियों के खिलाफ बिलगा थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ है। ये केस ग्रंथी सुखविंदर सिंह की पत्नी गुरमीत कौर ने दर्ज करवाई थी।

उन्होंने कहा था कि इसी साल 18 मार्च को तीन नकाबपोश लोग शेखूपुर गाँव स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में घुसे जिन्होंने कौर के परिवार को बंदूक की नोक पर एक कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद उन्होंने कौर के बेटे परवान सिंह से उसकी शॉल और पगड़ी जबरन छीनी, फिर उसे कहा कि वो चुपचाप उनकी सतलुज नदी पार करने में मदद करे। परवान सिंह का कहना है कि उन तीनों में से एक अमृतपाल सिंह था। पुलिस ने इस मामले को बिलगा पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 386, 342, 506, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27, 54 और 59 के तहत दर्ज किया है।

जिस अध्यादेश को राहुल गाँधी ने फाड़ा, उसी कानून के कारण गई सांसदी: अब उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका

आपराधिक मानहानि मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को सजा होने के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द होने पर देश में राजनीतिक बवाल हो गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8(3) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।

सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में दोष सिद्ध होने के बाद निर्वाचित विधायी निकायों के प्रतिनिधियों की स्वत: अयोग्यता को चुनौती दी गई है। याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता आभा मुरलीधरन ने कहा है कि धारा 8(3) के तहत अयोग्यता को मनमाना और अवैध घोषित किया जाए।

बता दें कि जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8 (3) के तहत अगर किसी सांसद या विधायक को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या उससे अधिक की सजा मिलती है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। इसमें अंतिम निर्णय सदन के स्पीकर पर छोड़ा गया है। हालाँकि, बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसी स्थिति में सदस्यता स्वत: चली जाएगी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि लिली थॉमस का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1951 के इस अधिनियम की धारा 8(4) को रद्द कर दिया है। इसका राजनीतिक दलों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। धारा 8(4) सजायाफ्ता विधायकों को सजा की अपील करने के लिए तीन महीने का समय देती थी। इससे तत्काल अयोग्यता को रोका जा सके।

क्या है लिली थॉमस केस

सन 2005 में केरल के वकील लिली थॉमस और लोक प्रहरी नाम के एनजीओ के महासचिव पूर्व IAS अधिकारी एसएन शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 8(4) को असंवैधानिक घोषित करने की माँग की गई थी।

याचिका में कहा गया था कि यह धारा दोषी सांसद-विधायकों की सदस्यता को बचाती है, क्योंकि अगर ऊपरी अदालतों में मामला लंबित है तो सदस्यता को रद्द नहीं किया जा सकता था। इसके लिए दोनों ने संविधान के अनुच्छेदों का हवाला दिया था।

याचिका में थॉमस और शुक्ला ने अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 102(1) और 191(1) का हवाला दिया गया था। दरअसल, अनुच्छेद 102(1) में सांसद और 191(1) में विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य को अयोग्य ठहराने का प्रावधान है।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए 10 जुलाई 2010 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की बेंच ने फैसला सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि केंद्र के पास धारा 8(4) को लागू करने का अधिकार नहीं है। अगर किसी मौजूदा सांसद-विधायक दोषी ठहराए जाते हैं तो जनप्रतिनिधि कानून की धारा 8(1), 8(2) और 8(3) के तहत वो अयोग्य हो जाएँगे।

राहुल गाँधी ने नहीं फाड़ा होता अध्यादेश तो नहीं जाती सांसदी

अब जबकि राहुल गाँधी की सांसदी जा चुकी है तो इसके लिए जिम्मेदार कानून को चुनौती दी गई है। इस मामले में अगर राहुल गाँधी ने साल 2013 में हस्तक्षेप नहीं किया होता तो आज उनके खुद के अलावा कई सांसदों और विधायकों की सदस्यता छिने जाने से पहले कुछ वक्त मिल जाता।

दरअसल, साल 2013 में कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (4) को रद्द करने के फैसले के खिलाफ यूपीए सरकार से लाए जा रहे अध्यादेश की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान राहुल गाँधी आए और अध्यादेश की कॉपी फाड़ दी। उन्होंने कठोर कानून बनाए जाने की वकालत की थी।

यूपीए सरकार द्वारा लाए जा रहे इस अध्यादेश से दोषी ठहराए गए सांसदों को भी लोकसभा से अयोग्य ठहराने के लिए तीन महीने की राहत दी जा रही थी। इस अध्यादेश को राजद सुप्रीमो लालू यादव को राहत देने के लिए लाया जा रहा था। राहुल गाँधी के इस फैसले के बाद यूपीए सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया और अगले साल 2014 में सरकार बदल गई।

दिल्ली के कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर में चला बुलडोजर, तोड़ी गई अवैध सीढ़ियाँ: अधिकारी बोले- ये कोई बड़ी कार्रवाई नहीं

राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता खत्म होने के बाद अब अरविन्द केजरीवाल सरकार के लोकनिर्माण विभाग ने कॉन्ग्रेस के निर्माणाधीन मुख्यालय पर अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में कॉन्ग्रेस पार्टी के दीनदयाल उपाध्याय रोड स्थित बन रहे हेडक्वार्टर के कुछ अवैध हिस्सों पर बुलडोजर चलाया गया है। शुक्रवार (24 मार्च 2023) को हुई इस कार्रवाई के दौरान बन रही इमारत की कुछ सीढ़ियों को तोड़ा गया है। आरोप है कि सीढ़ियाँ बिना दिल्ली नगर की अनुमति के बनाई गईं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई साल 2023 में होने वाले G- 20 सम्मेलन की तैयारियों के चलते की गई है। इस बाबत पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी को सूचना दे दी गई थी। कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी इस कार्रवाई के लिए हरी झंडी दिखा दी थी। अतिक्रमण विरोधी अभियान में शामिल रहे एक अधिकारी के अनुसार यह कोई बड़ा एक्शन नहीं था। पार्टी कार्यालय में किनारे से लोगों के घुसने के लिए कुछ सीढ़ियों को बनाया गया था। यह निर्माण MCD द्वारा पास नहीं था।

तस्वीरों के मुताबिक तोड़ी गई सीढ़ियाँ बन रही एक बड़ी बिल्डिंग के शुरुआत में मौजूद एक मंजिला कमरे की तरफ ले जाती थीं। यह कमरा सुरक्षा या उस से जुड़े किसी अन्य काम में आना बताया जा रहा है। ये सीढ़ियाँ निर्माणाधीन 6 मंजिला कॉन्ग्रेस मुख्यालय की मुख्य बिल्डिंग से सीधे कनेक्ट नहीं थीं। इन कार्रवाई के बाद अब सामने वाले कमरे में जाने के लिए ढाँचे में थोड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक नए बन रहे कॉन्ग्रेस मुख्यालय के 2 गेट हैं और ये दोनों गेट दीनदयाल उपाध्याय रोड की ही तरफ खुलते हैं।

फिलहाल कॉन्ग्रेस का वर्तमान समय में मुख्यालय दिल्ली के अकबर रोड पर मौजूद है। साल 2019 से ही इसे दीनदयाल उपाध्याय रोड पर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी। हालाँकि शिफ्टिंग में थोड़ा समय लगा। अभी जहाँ कॉन्ग्रेस का हेड क्वार्टर है वो सरकारी भवन है। उसे छोड़ने की कई नोटिस पहले भी पार्टी को दी जा चुकी है। इसी दीनदयाल उपाध्याय रोड पर ही भाजपा और आम आदमी पार्टी का भी मुख्यालय है। भाजपा ने इस रोड पर अपनी पार्टी के हेडक्वार्टर का उद्घाटन साल 2018 में ही कर दिया था।

अमेरिका में ढोल बजाकर लगे ‘वंदे मातरम’ के नारे, तिरंगा ऊँचा उठा दिखा: खालिस्तानी हमले के बाद US में भारतीय एकजुट, देखें Video

पंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ब्रिटेन और अमेरिका में खालिस्तानियों ने हंगामा किया। इसके बाद वहाँ रहने वाले भारतीयों ने तिरंगा यात्रा निकालकर देश के प्रति एकजुटता प्रकट की।

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोगों ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को भारत के वाणिज्य दूतावास के सामने शांति रैली निकाली। इस हफ्ते के शुरू में वाणिज्य दूतावास के बाहर खालिस्तानियों ने तोड़फोड़ की थी और खालिस्तान समर्थक नारे लगाए थे।

खालिस्तान समर्थकों ने पुलिस की ओर से लगाए गए अस्थायी सुरक्षा अवरोधकों को तोड़ दिया था। इतना ही नहीं वाणिज्य दूतावास परिसर में खालिस्तानी झंडे लगा दिए थे। हालाँकि, दूतावास के कर्मियों ने इन झंडों को तुरंत ही हटा दिया था। इस घटना के विरोध में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी लोगों ने सैन फ्रांसिस्को और उसके आसपास तिरंगा झंडा फहराया।

जिस समय तिरंगा यात्रा निकाला गया, उस समय वहाँ कुछ अलगाववादी खालिस्तानी भी मौजूद थे। वहाँ किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिस मौजूद थी। इस। दौरान कुछ अलगाववादी सिखों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए। वहीं, बड़ी संख्या में पहुँचे लोगों ने ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए और अमेरिका के साथ-साथ तिरंगा लहराया। 

बता दें कि वाणिज्य दूतावास में खालिस्तानियों के हमले के बाद भारत ने दिल्ली में अमेरिकी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की सरकार को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर उपाय करने चाहिए। 

माहिम के बाद अब पनवेल वाली दरगाह हटाने की माँग: MNS कार्यकर्ताओं ने जारी किया पोस्टर, 15 साल पहले पहाड़ी इलाके में हुआ था कब्जा

राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अब मुंबई के पनवेल में अवैध दरगाह हटाने की माँग उठाई है। मनसे का दावा है कि अवैध दरगाह के नाम पर लगभग 15 साल पहले पहाड़ी क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया था। राज ठाकरे के संगठन ने इसे देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए नवी मुंबई में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण में भी बाधक कहा है। शनिवार (24 मार्च 2023) को इस बाबत राज ठाकरे की पार्टी ने सरकार को सम्बोधित करते हुए एक बैनर भी जारी किया।

मनसे कार्यकर्ताओं ने पनवेल की मजार हटाने की माँग के साथ एक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में उनके पीछे मजार का एक बड़ा सा पोस्टर भी दिखाई दे रहा है। पोस्टर में बड़े शब्दों में हरे रंग से ‘लैंड जिहाद’ लिखा हुआ है। इसके ऊपर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे से माँग की गई है कि नवी मुंबई के विकास के लिए पनवेल की अवैध दरगाह को हटाया जाए।

अंत में लिखा गया है, “तुम रुकोगे या नहीं।” इस बैनर मनसे पदाधिकारी योगेश जनार्दन चिले की तरफ से जारी किया गया है। हरे रंग के ही बैकग्राउंड में बने इस बैनर के बीच में दरगाह की बड़ी सी फोटो भी लगाई गई है।

इस दरगाह को हटाने की माँग करते हुए कुछ मनसे कार्यकर्ता पहले राज ठाकरे की माँग पर हटी माहिम की दरगाह का जिक्र करते दिखाई दे रहे। बाद में उन्होंने प्रदेश में अब हिंदूवादी सरकार होने की बात कहते हुए लगाए गए बैनर में की गई माँग को पूरी करने की माँग की है।

MNS कार्यकर्ताओं ने कहा कि पनवेल की दरगाह से पूरे हवाई अड्डे पर नजर रखी जा सकती है जो सुरक्षा के नजरिए से खतरनाक है। वीडियो के अंत में कहा गया है कि अगर दरगाह के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पनवेल प्रशासन के खिलाफ महामोर्चा बनाया जाएगा।

गौरतलब है कि इसी सप्ताह राज ठाकरे की माँग पर माहिम में एक अवैध दरगाह को प्रशासन द्वारा गुरुवार (23 मार्च 2023) को  ध्वस्त कर दिया गया था। 24 मार्च (शुक्रवार) को राज ठाकरे ने इस कार्रवाई के लिए मुंबई प्रशासन को धन्यवाद दिया है। अपने ट्वीट में राज ठाकरे ने माहिम दरगाह से पहले और बाद के चित्र को भी शेयर किया है।

कर्नाटक सरकार ने मुस्लिमों का 4% आरक्षण खत्म किया: SC-ST को मिलेगा लाभ, कुल आरक्षण 50 से बढ़कर 56% हुआ

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सरगर्मी बढ़ गई है। चुनाव के तारीखों की घोषणा से पहले ही कॉन्ग्रेस ने अपने 124 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। वहीं, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राज्य की आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करते हुए मुस्लिमों के लिए आवंटित 4 प्रतिशत कोटा को हटा दिया है।

कर्नाटक की भाजपा सरकार ने शुक्रवार (24 मार्च 2023) को हुई एक कैबिनेट बैठक में आरक्षण कोटा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 56 प्रतिशत कर दिया। आरक्षण में बढ़ोतरी के बावजूद राज्य सरकार ने मुस्लिमों के 4 प्रतिशत के आरक्षित कोटे को खत्म कर दिया। OBC मुस्लिमों को यह आरक्षण दिया जा रहा था।

बैठक के बाद सीएम बोम्मई ने कहा कि मुस्लिमों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए दी गई 10 प्रतिशत के आरक्षण श्रेणी में लाया जाएगा। बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए EWS कोटा दिया गया है। इसमें जैन, सिख आदि भी शामिल हैं।

सरकार ने फैसला किया है कि मुस्लिमों को दिया जाने वाला 4 प्रतिशत कोटा अब वोक्कालिगा (2 प्रतिशत) और लिंगायत (2 प्रतिशत) को दिया जाएगा। पिछले साल बेलगावी विधानसभा सत्र के दौरान 2C और 2D नाम की आरक्षण की दो नई श्रेणियाँ बनाई गई थीं।

इसके अलावा, कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में भी बदलाव किया गया है। अनुसूचित जाति को दी जाने वाली आरक्षण को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति आरक्षण को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।

सीएम बोम्मई ने कहा, “चार प्रतिशत (अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण) आरक्षण को 2C और 2D के बीच विभाजित किया जाएगा। वोक्कालिगा और अन्य के लिए दी जाने वाली 4 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया जाएगा। वहीं, वीरशैव पंचमसाली और अन्य (लिंगायत) के 5 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया जाएगा।”

सरकार के इस फैसले से सभी लोगों को फायदा मिलेगा। मुस्लिमों को जहाँ 4 प्रतिशत की जगह अब 10 प्रतिशत का लाभ मिलेगा, वहीं वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के आरक्षणों में भी 2-2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

उधर, कॉन्ग्रेस ने 124 उम्मीदवारों के नाम की पहली सूची जारी की है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया वरुणा सीट से और दिग्गज नेता डीके शिवकुमार कनकपुरा सीट से मैदान में उतरेंगे। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक चितापुर से चुनाव लडेंगे। बता दें कि कर्नाटक की 224 सीटों के लिए जल्दी ही चुनाव की घोषणा हो सकती है।

छिन सकता है सरकारी आवास, सजा न हुई कम तो 8 साल चुनाव भी नहीं लड़ पाएँगे: सांसदी जाने से खत्म नहीं हुई राहुल गाँधी की मुसीबतें

आपराधिक मामले में 2 साल की सजा होने के दो दिन बाद लोकसभा सचिवालय द्वारा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की सदस्यता रद्द करने को लेकर बवाल हो गया है। कॉन्ग्रेस इसे अधिनायकवादी व्यवस्था बता रही है तो भाजपा इस फैसले का स्वागत कर रही है। राहुल की सदस्यता रद्द होने के साथ ही संसद की वेबसाइट से उनका नाम हटा दिया गया है।

भाजपा भले कहे कि इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है, लेकिन लगभग सारे विपक्षी दल कॉन्ग्रेस के साथ एकजुटता दिखाते हुए इसके लिए भाजपा को दोषी ठहरा रही है। कॉन्ग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और उद्योगपति गौतम अडानी के बीच रिश्तों पर सदन में बहस और संयुक्त संसदीय समिति बनाने की माँग के कारण राहुल गाँधी को सजा दी गई है।

कॉन्ग्रेस ने इस एक्शन की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रपति ही चुनाव आयोग के साथ विमर्श कर किसी सांसद को अयोग्य घोषित कर सकते हैं। कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक में राहुल गाँधी के बयान पर गुजरात में FIR पर भी सवाल उठाया है। कॉन्ग्रेस का तर्क है कि अगर कोई मामला संबंधित न्यायालय के न्यायाधिकरण क्षेत्र में नहीं आता है तो उसे इस पर जाँच करानी होती है। सूरत की अदालत ने ऐसा नहीं किया।

आरोप-प्रत्यारोप और कानून

कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि सभी जानते हैं कि राहुल गांधी संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह निडर होकर बोलते रहे हैं. वह इसकी कीमत चुका रहे हैं. सरकार बौखला गई है. यह सरकार उनकी आवाज दबाने के लिए नई तरीके खोज रही है। वहीं, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।

दरअसल, राहुल गाँधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, “सारे चोर मोदी सरनेम वाले ही क्यों होते हैं….नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी।” राहुल गाँधी के इस बयान को लेकर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने उनके खिलाफ गुजरात में धारा 499 और 500 के तहत आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया था।

कॉन्ग्रेस नेताओं का आरोप है कि राहुल गाँधी से सरकार डर गई थी। कॉन्ग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि सूरत की अदालत ने राहुल गाँधी को 2 साल की सजा सुनाई थी और तुरंत जमानत भी दे दी थी। इसके साथ ही उन्हें 30 दिन अवधि ऊपरी अदालतों में अपील के भी दी थी। ऐसे में भाजपा ने कोर्ट के आदेश के विपरीत जाकर दो दिन में ही सदस्यता रद्द करा दी।

वहीं, भाजपा का कहना है कि राहुल गाँधी ऊपरी कोर्ट में अपील करना ही नहीं चाहते थे। वे मोदी सरकार के खिलाफ खुद को शहीद दिखाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने सजा देने के दो दिन बाद भी ऊपरी अदालतों में अपील नहीं की। भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत अगर कोर्ट द्वारा 2 साल या उससे अधिक सजा दे दी जाती है तो सदस्यता तुरंत निलंबित मानी जाती है।

कॉन्ग्रेस के नेताओं ने इस पर तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहली और दूसरी बार इसमें रियायत दी है। इन दोनों स्थितियों में अपील करने की अवधि दी है। लेकिन, अगर कोई ऐसा तीसरी बार करता है तभी सदस्यता तुरंत निलंबित हो सकती है।

इसको लेकर कॉन्ग्रेस के नेताओं ने कहा कि अपने फैसले में सूरत की अदालत ने 30 दिन का समय दिया था। इसके अलावा, उन्हें कोर्ट के फैसले की कॉपी नहीं मिली थी। कॉपी मिलते ही अपील करने की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच भाजपा ने लोकसभा स्पीकर के माध्यम से उनकी सदस्यता रद्द करा दी।

क्या हो सकता है आगे

कानून के जानकारों का कहना है कि राहुल गाँधी के पास अब सेशंस कोर्ट में जाना होगा। वहाँ से मामला खारिज होने के बाद उनके पास गुजरात हाईकोर्ट में अपील का विकल्प है। अगर संबंधित फैसले के स्थान वाले हाईकोर्ट, गुजरात में उनकी अपील खारिज हो जाती है तो उनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प रहेगा। राहुल गाँधी के पास संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का भी अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट का देश के सभी अदालतों एवं ट्रिब्यूनलों पर अपीलीय क्षेत्राधिकार होता है।

अगर सुप्रीम कोर्ट भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखता है तो राहुल गाँधी 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएँगे। इसके साथ ही वे 2 साल तक उन्हें जेल की सजा भी काटनी होगी। इतना ही नहीं, राहुल गाँधी को अपना सरकारी बंगला भी खाली करना पड़ सकता है। हालाँकि, यह गृह मंत्रालय द्वारा उनकी सुरक्षा को लेकर लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगा।

बता दें कि लोकसभा सचिवालय ने राहुल गाँधी की संसदीय सीट केरल के वायनाड को खाली घोषित कर दिया है। लोकसभा की वेबसाइट से उनका नाम भी हटा दिया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग इस सीट पर चुनाव कराने का ऐलान कर सकता है। आयोग यह चुनाव अभी करा सकता है या फिर अगले साल होने वाले देश भर में लोकसभा चुनावों के साथ करा सकता है।

अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट सूरत की अदालत के फैसले पर स्टे लगा देता है या फिर उसके निर्णय को बदल देता है तो राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हो सकती है।

कब जा सकती है सांसद-विधायकों की सदस्यता

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 (1) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत राहुल गाँधी की सदस्यता को रद्द किया गया है। संसद या विधानसभा की सदस्यता की जाने की प्रमुख वजहें निम्नलिखित हैं।

संविधान के अनुच्छेद 102(1) और 191(1) के तहत अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य लाभ का कोई पद लेता है, दिमाग़ी रूप से अस्वस्थ है, दिवालिया है या फिर वैध भारतीय नागरिक नहीं है तो उसकी सदस्यता को रद्द किया जा सकता है।

सांसद और विधायकों की अयोग्यता से संबंधित दूसरा नियम संविधान की 10वीं अनुसूची में दी गई है। इस कानून के तहत अगर किसी सदस्य को दल-बदल के आधार पर दोषी ठहराया जाता है तो उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी।

इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत भी सांसदों या विधायकों की सदस्यता जा सकती है। इस कानून के तहत किसी सदस्य को आपराधिक मामलों कम-से-कम 2 साल की सज़ा होने पर सदस्यता रद्द हो जाएगी।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(1) के के तहत अगर कोई सदन सदस्य दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देता है, रिश्वत लेता या फिर चुनाव में अपने प्रभाव का ग़लत इस्तेमाल करता है तो उसकी सदस्यता जा सकती है।

इसी तरह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 (2) के तहत जमाखोरी, मुनाफ़ाखोरी, खाद्य पदार्थों में मिलावट या फिर दहेज निषेध अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने और कम-से-कम छह महीने की सज़ा मिलने पर सदस्यता रद्द हो सकती है।

इसी अधिनियम की धारा 8 (3) के तहत अगर किसी सांसद या विधायक को दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या उससे अधिक की सज़ा मिलती है तो उसकी सदस्यता जा सकती है। इसमें अंतिम निर्णय सदन के स्पीकर पर छोड़ा गया है। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सदस्यता जाएगी ही।

धक्का-मुक्की, पथराव और नारेबाजी: राहुल गाँधी की सांसदी जाने के बाद रायपुर में बवाल, BJP कार्यकर्ताओं से कॉन्ग्रेसी भिड़े

मानहानि केस में 2 साल की सजा सुनाए जाने के बाद राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता खतरे में थी। शुक्रवार (24 मार्च 2023) को लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी कर उनकी सदस्यता रद्द कर दी। इसको लेकर कॉन्ग्रेस लगातार विरोध दर्ज करा रही है। वहीं, भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जुबानी जंग के साथ ही झड़प भी देखने को मिली।

दरअसल, राहुल गाँधी की संसद सदस्यता खत्म होने के बाद से ही कॉन्ग्रेस भाजपा पर हमलावर है। इसको लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। यही नहीं उन्होंने भाजपा कार्यालय में लगे पोस्टर पर कालिख फेंक दी। इससे भाजपा कार्यकर्ता भड़क गए और पार्टी के झंडे लेकर सड़क पर उतर आए और राहुल गाँधी के खिलाफ नारेबाजी करनी शुरू कर दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बीच भाजपा और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच करीब आधे घण्टे तक धक्का मुक्की चलती रही। कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुँचे। लेकिन बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा था। इसके बाद फोर्स उतारनी पड़ी। तब जाकर कहीं भाजपा कार्यालय के बाहर मामला शांत हुआ। हालाँकि विवाद यहीं नहीं रुका। पार्टी कार्यालय में हुए हंगामे के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह कॉन्ग्रेस की इस हरकत का जवाब देंगे।

भाजपा कार्यकर्ताओं की धमकी के बाद एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस कार्यालय में पार्टी के कार्यकर्ता इकट्ठा होने लगे वहीं पुलिस की भी तैनाती कर दी गई। दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता भी कॉन्ग्रेस कार्यालय पहुँच गए। वहाँ मौजूद पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को रोकने की काफी कोशिश की। लेकिन वह नहीं माने और कॉन्ग्रेस कार्यालय में कालिख फेंक दी। यही नहीं, कॉन्ग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच एक दूसरे पर ईंट और पत्थर से भी हमला किया गया। इस हमले में कुछ कार्यकर्ताओं के घायल होने की भी खबर है।

दोनों पार्टी के नेता और कार्यकर्ता रुकने के नाम नहीं ले रहे थे। हालाँकि पुलिस अधिकारियों द्वारा बीच बचाव किए जाने के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद दोनों पक्ष थाने जा पहुँचे और एक दूसरे के खिलाफ FIR कराने की बात पर अड़े रहे। इस मामले में एएसपी अभिषेक माहेश्वरी का कहना है कि दोनों पार्टी के नेताओं ने पथराव किया है। वीडियो फुटेज की जाँच की जा रही है। दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

इस मामले में छत्तीसगढ़ भाजपा ने ट्वीट कर कहा है, “ये कॉन्ग्रेसी लोकतंत्र और संविधान विरोधी हैं। राहुल गाँधी की संसद सदस्यता रद्द होने के बाद NSUI और कॉन्ग्रेस नेताओं ने शर्मनाक कृत्य करते हुए भाजपा रायपुर जिला कार्यालय ‘एकात्म परिसर’ पर हमला किया। भाजपा नेताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया।”

एक अन्य ट्वीट में भाजपा की ओर से कहा गया है, “लोकतंत्र के इन हत्यारों का भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर मुकाबला किया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा युवा नेता गोविंदा गुप्ता का सर फोड़ा। अन्य भाजपा कार्यकर्ता भी घायल हुए। गलती राहुल गाँधी ने की, सजा न्यायालय ने संविधान और कानून के नियमों के तहत दी। इसमें भाजपा पर हमला क्यों?”

वायनाड में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया सरकार विरोधी प्रदर्शन…

चूँकि राहुल गाँधी केरल के वायनाड से सांसद थे। ऐसे में उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद वायनाड के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भी सड़क पर उतार आए और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

‘100 हरे झंडों की जगह भगवा लगवाओ’: बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के खिलाफ राजस्थान में FIR, धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप

बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर विवादों से घिर गए हैं। दरअसल, उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कुंभलगढ़ किले पर लगे हरे झंडों की जगह भगवा झंडे लगाने की बात कही थी। इस बयान के चलते उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गुरुवार (23 मार्च 2023) को राजस्थान के उदयपुर पहुँचे थे। जहाँ गाँधी मैदान में आयोजित एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान को हिंदू राष्ट्र तो बना ही लेंगे। कुंभलगढ़ में जो 100 हरे झंडे लगे हैं उन्हें भगवामय बनाना है। उन्होंने आगे कहा है, “100 हरे झंडे कुंभलगढ़ के किले में अंदर लहरा रहे हैं, यह हरों का देश नहीं भगवामयों का देश है। वीडियो में उनके इस बयान को 8:30 मिनट के बाद सुना जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा है, “ऐसा तुम नहीं कर पाए तो तुम बुजदिल हो। तुम डूब मरो। तुम्हारे रहते कोई हरा झंडा फहरा दे, महाराणा प्रताप के किले में, बप्पा रावल के किले में, मीराबाई की भूमि में कोई हरा झंडा फहरा दे। यहाँ राम का झंडा फहराना चाहिए। हम तुमसे प्रार्थना करते हैं अगर तुम सनातनी हो और तुम्हारे अंदर थोड़ा सा भी सनातन का खून है तो उठो और जाग जाओ। जो 100 हर झंडे लगे हैं वहाँ भगवा लगवाओ। इतना तुम नहीं कर पाए तो गड़बड़ आदमी हो।”

वन इंडिया ने एसपी विकास शर्मा के हवाले से कहा है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कुंभलगढ़ के किले पर लगे हरे झंडों की जगह भगवा झंडे लगाने की बात कही थी। इसी भड़काऊ बयान को लेकर FIR दर्ज की गई है। एसपी ने यह भी कहा है कि सभा के संबोधन में धीरेन्द्र शास्त्री ने कई ऐसी बातें कहीं हैं जिससे शहर के लोगों की धार्मिक भावनाएँ भड़की हैं। ऐसे में पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस पूरे मामले की गहनता से जाँच की जा रही है।

भड़काऊ भाषण देने के इस मामले में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ IPC की धारा धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A के तहत मामला दर्ज हुआ है। 153A के तहत मामला तब दर्ज किया जाता है जब भाषा या निवास आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भावना बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है। इस मामले में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।

वहीं, एएसपी चन्द्रशील ठाकुर का कहना है कि धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भाषण में दो समुदायों के बीच विवाद बढ़ाने वाले शब्दों का प्रयोग किया था। उनके इस बयान के बाद गुरुवार (23 मार्च 2023) की रात कुछ युवाओं ने कुंभलगढ़ के किले पर उपद्रव करने की कोशिश की थी। इस मामले में 5 लड़कों को गिरफ्तार भी किया गया है।

जगन्नाथ पुरी मंदिर में जबरन घुसा रहमान खान, रोकने पर पुलिस को बकी गाली: धार्मिक भावनाएँ ठेस पहुँचाने पर गिरफ्तार

ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Temple) में जबरन प्रवेश करने के आरोप में पुलिस ने गुरुवार (23 मार्च 2023) को रहमान खान नाम शख्स को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 25 वर्षीय रहमान पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के नियमों का उल्लंघन करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला रहमान जगन्नाथ पुरी मंदिर में जबरन घुस गया, तभी सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। मंदिर के नियमों के अनुसार, मंदिर में गैर-हिंदुओं को प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। यह घटना बुधवार (22 मार्च 2023) रात करीब 8:30 बजे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंदिर में पूजा-अर्चना करने के कुछ घंटे बाद हुई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने उसे मंदिर के नियमों का उल्लंघन करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर इस तरह से मंदिर में जबरन घुसने की कोशिश क्यों की, इसकी जाँच की जा रही है। हमने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।”

पुलिस के अनुसार, रहमान खान ने खुद की जान लेने के लिए मंदिर के गुंबद के ऊपर चढ़ने की कोशिश की। हालाँकि, जब अधिकारियों ने उससे आत्महत्या करने का कारण पूछा तो वह कोई ठोस जवाब नहीं दे सका। ओडिशा पुलिस बंगाल पुलिस की मदद से इस मामले की जाँच कर रही है। रहमान के परिवार को भी इस घटना से अवगत करा दिया गया है।

इस दौरान मंदिर के अधिकारियों ने देवी-देवताओं के दर्शन की सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी थी। बताया जा रहा है कि सुरक्षाकर्मियों को चकमा देते हुए रहमान खान मंदिर के दक्षिण द्वार से अंदर भागा और जैसे ही पुलिस अधिकारी उसके पीछे भागे, वह गुंबद पर चढ़ने लगा। इस दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “जैसे ही हम उसे वहाँ से ले जाने लगे, उसने हमें गालियाँ देनी शुरू कर दी। उसे उस रात सिंहद्वार पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया। हमें नहीं लगता कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उसे मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के बारे में पता था। इसके बावजूद उसने जबरन मंदिर में प्रवेश किया।”