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‘कुंभलगढ़ किले में अजान, मेवाड़ के शौर्य का अपमान’: बागेश्वर वाले धीरेंद्र शास्त्री को कुंभलगढ़ के MLA ने ही दिया समर्थन, राजस्थान पुलिस ने FIR की थी

राजस्थान के ऐतिहासिक कुंभलगढ़ दुर्ग में मुस्लिमों को अजान देने की इजाजत देकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने राजस्थान के शौर्य का अपमान किया है। इस बात राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ से विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा है। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पाँच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

अपने एक वीडियो संदेश में भाजपा विधायक राठौड़ ने कहा, “कुंभलगढ़ एक अजेय ऐतिहासिक किला है। यह महाराणा कुंभा की कर्मस्थली है और महाराणा प्रताप की जन्मस्थली है। दुर्भाग्यवश आजादी के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने किले में अजान की इजाजत देकर मेवाड़ शौर्य, सम्मान और सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया है, जो शर्मनाक है।”

धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई पर उन्होंने कहा, “हिंदुओं के सूर्य कहलाने वाले मेवाड़ के महाराणाओं की कर्मभूमि पर आदरणीय बागेश्वर बाबा ने भगवा फहराने का आह्नान किया। इसमें उन्होंने क्या गलत कहा?” भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि अगर धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई की गई तो पूरा मेवाड़ इसका विरोध करेगा।

विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने साफ शब्दों में कहा कि ऐतिहासिक किले में अजान नहीं होना चाहिए। बता दें कि दो दिन पहले कुंभलगढ़ में धीरेंद्र शास्त्री और देवकीनंदन ठाकुर ने कार्यक्रम किया था। इस दौरान दोनों ने भाषण दिया था। इस भाषण को धार्मिक भावनाएँ भड़काने वाला और सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाला बताकर उनके खिलाफ उदयपुर पुलिस ने FIR दर्ज की है।

दरअसल, गुरुवार (23 मार्च 2023) को धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था, “डरते तो हम किसी के बाप से नहीं हैं। डरते तो वो हैं, जो बुजदिल होते हैं। हम तो वो हैं, जो कुंभलगढ़ किले में भी भगवा झंडा गड़वाकर मानेंगे।” इसके बाद उन्होंने जनता से पूछा, “तुम चाहते हो कि वहाँ भगवा झंडा गड़े? कौन-कौन ये चाहता है? कुंभलगढ़ किले में 100 हरे झंडे लगे हैं, उन्हें भगवामय बनाना है।”

वहीं, देवकी नंदन ठाकुर ने इस सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “जो हिंदू राष्ट बनाएगा, वो ही गद्दी पर लौट के आएगा।” उदयपुर के एसपी ने कहा कि हाथीपोल थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 153A के तहत केस दर्ज किया गया है। बता दें कि देवकीनन्दन ठाकुर और उनके भाई विजय शर्मा पर साल 2020 में मथुरा के थाना हाइवे में एक दलित के घर में घुसकर मारपीट करने, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने और महिलाओं से छेड़छाड़ करने का मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद 5 युवक भगवा झंडा लेकर दुर्ग में पहुँच गए। पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, 24 मार्च को तड़के 3.30 बजे कुंभलगढ़ दुर्ग में 5 युवक झंडा उतारने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने उदयपुर निवासी गौरव सिंह, प्रिंस, देवेंद्र, अभिषेक नाथ, राजेंद्र सिंह को पकड़ा है। उन्होंने बताया कि वे भगवा लहराने कुंभलगढ़ आए थे।

‘F**K इंडियन गवर्नमेंट एंड मोदी’: US में खालिस्तानियों ने की पत्रकार से बदतमीजी, भारतीयों को गाली दी, कान पर डंडा मारा; Video

अमेरिका के वाशिंगटन शहर में भारत विरोधी प्रदर्शन कर रहे खालिस्तानियों ने एक भारतीय पत्रकार के साथ बदसलूकी की है। यह प्रदर्शन भारतीय दूतावास के आगे चल रहा था। पीड़ित पत्रकार का नाम ललित कुमार झा है। इस बदसलूकी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में 2 खालिस्तानियों को मोदी, भारत और खुद पत्रकार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते सुना जा सकता है। जाते-जाते एक खालिस्तानी के हाथ में लिए खालिस्तान के झंडे का डंडा पत्रकार के कैमरे पर भी लगा। आरोप है कि ललित के कान पर भी डंडे मारे गए। यह मामला शनिवार (25 मार्च 2023) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रदर्शन पंजाब में चल रही खालिस्तान समर्थक भगोड़े अमृतपाल सिंह के समर्थन में किया जा रहा था। अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में वहाँ जमा हुए खालिस्तानियों ने भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू को धमकाया। अमृतपाल समर्थक भीड़ ने दूतवास में तोड़फोड़ की भी धमकी दी। प्रदर्शनकारी अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से जमा हुए थे। इस दौरान अंग्रेजी और पंजाबी में भाषण दिए गए जिसमें पंजाब पुलिस पर मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। जमा हुए खालिस्तानियों में युवा और बुजुर्ग दोनों शामिल थे।

वायरल वीडियो में पहले एक खालिस्तानी हाथ में पीले रंग के झंडा (जिस पर काले रंग में खालिस्तान लिखा हुआ था) को लेकर पत्रकार से उलझता दिखाई दे रहा है। वह अपनी फोटो और वीडियो लिए जाने से नाराज था। खालिस्तानी ललित को भारत सरकार का रिपोर्टर बताता है। उसी समय पहले खालिस्तानी के बगल खड़ा दूसरा खालिस्तानी बीच में आता है। वह कैमरे के आगे न सिर्फ पत्रकार और मोदी बल्कि भारत को भी गंदी-गंदी गालियाँ देता है। वह खालिस्तानी भारतीयों को ‘कुत्ता’ कहता है। यह पूरा घटनाक्रम ललित झा के कैमरे में कैद हो जाता है। जाते हुए गाली देने वाले खालिस्तानी ने झड़े का डंडा घुमाया जो पत्रकार को लगा।

इसी वीडियो में लगभग 1 दर्जन अन्य खालिस्तान समर्थक मौजूद थे। वो अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के आगे झंडे लेकर नारा लगा रहे थे। कुछ के हाथों में नीले रंग के भी झंडे थे जिसमें खालसा चिन्ह बना हुआ था। पत्रकार ललित कुमार झा ने हालत को देखते हुए अमेरिका के इमरजेंसी नंबर 911 पर कॉल कर के पुलिस भी बुला ली थी। उनका आरोप है कि उनके कान के पास 2 डंडे मारे गए थे। हालाँकि ललित ने अपने साथ हुई अभद्रता की कोई लिखित शिकायत नहीं दी। उनका कहना है कि वो इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते।

अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने इस घटना की निंदा की है। एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए दूतावास ने बताया कि तथाकथित खालिस्तानियों द्वारा की गई यह हरकत असमाजिक थी और इस पर अमेरिका की एजेंसियों द्वारा लिया गया त्वरित एक्शन सराहनीय है।

जिस पत्रकार को जलील कर लहालोट हुए राहुल गाँधी, वो 15 साल से ‘कॉन्ग्रेस’ बीट पर कर रहा है काम: पुराने ट्वीट देखें

पिछड़ा वर्ग के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के कारण अपनी सांसदी गँवाए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) झल्लाए हुए हैं। इसका नजारा शनिवार (25 मार्च 2023) को उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ दिखा, जब कॉन्ग्रेस बीट कवर करने वाले पत्रकार को उन्होंने ‘हवा निकल गई’ और भाजपाई जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

राहुल गाँधी जब अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए तो उनके चेहरे पर तनाव साफ नजर आ रहा था। जब वे बोलना शुरू किए तो उसमें चिड़चिड़ाहट भी दिखी। अपनी गलती के लिए उनके हाव-भाव और अभिव्यक्ति में किसी तरह अफसोस नहीं दिखा। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वे कहना चाह रहे हों कि ‘मेरी सदस्यता रद्द करने की हिम्मत कैसे हुई’। उनमें एक राजनेता में जो संयम और कूटनीति होनी चाहिए, वह नहीं दिखी।

उन्होंने अपनी हताशा का सारा गुबार एक पत्रकार पर निकाल दिया। इस पत्रकार का नाम रवि सिसोदिया है। वह पिछले 15 सालों से कॉन्ग्रेस बीट कवर करते आ रहे हैं। वे मौकों पर वे राहुल गाँधी के साथ भी दिख चुके हैं। राहुल गाँधी के साथ होली खेलते हुए और सोनिया गाँधी के साथ बात करते हुए उनकी तस्वीरें भी सामने आई हैं।

दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रवि ने राहुल गाँधी से पूछ लिया, “अदालत का जो फैसला आया है, उस पर बीजेपी पूरे देश में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है और कह रही है कि आपने आपने ओबीसी समाज का अपमान किया है। इस पर आप क्या कहेेंगे?” इतना सुनते ही राहुल गाँधी भड़क गए।

पत्रकार को हड़काते हुए राहुल गाँधी ने कहा, ”भैया देखिए, पहला आपका अटेंप्ट वहाँ से (एक पत्रकार की ओर इशारा करके) आया, दूसरा आपका अटेंप्ट यहाँ से (एक अन्य पत्रकार की इशारा करके) आया, तीसरा आपका अटेंप्ट यहाँ से (रवि सिसोदिया की ओर इशारा करके) आया। आप इतने डायरेक्टकली बीजेपी के लिए क्यों काम कर रहे हो? थोड़ा बुद्धिमानी से पूछो। थोड़ा घूम-घाम के पूछो। आपको ऑर्डर दिया है क्या? देखो मुस्करा रहे हैं।”

राहुल गाँधी ने आगे कहा, “मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। आप थोड़ा घूम-घाम के निकालो। देखो, ऐसे बोलो पहले- राहुल जी.. (इसी बीच संभवत: उनके बीच बैठा व्यक्ति कुछ कहता है और राहुल गाँधी ‘आंय’ कहकर बात बीच में छोड़ देते हैं और आगे कहते हैं…) तो प्लीज.. प्लीज.. अगर आप बीजेपी के लिए काम करना चाहते हैं तो बीजेपी का सिंबल सीने पर लगा लीजिए, तब मैं आपको उसी के अनुसार जवाब दूँगा। प्रेसमैन का ढोंग मत कीजिए।” इसके थोड़ी देर बाद राहुल गाँधी पत्रकार रवि सिसोदिया को देखकर कहते हैं, “हवा निकल गई?”

रवि सिसोदिया संभवत: अपने सवाल से भाजपा के ‘OBC समाज के अपमान’ वाले दावे पर राहुल गाँधी का जवाब लेकर भाजपा को ही घेरना चाहते थे, लेकिन राहुल गाँधी संभवत: उसे समझ नहीं पाए और पत्रकार को ही डपट दिया। जिस तरह दिग्विजय सिंह ने इस सवाल का जवाब आजतक के पत्रकार मौसमी सिंह को दिया था, यह बात राहुल गाँधी नहीं समझ पाए।

दिग्विजय सिंह ने कहा था, “भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने OBC का अपमान किया। नड्डा ब्राह्मण हैं। क्या उन्होंने और उनकी पार्टी ने दिया था OBC को आरक्षण? आरक्षण जनता दल की सरकार ने दिया था। ये लोग OBC की बात तो ना ही करें। कुछ जगहों पर मोदी सरनेम सवर्ण समाज के लोग भी लगाते हैं।”

हालाँकि, राहुल गाँधी में यह डिप्लोमैसी नहीं दिखी। राहुल गाँधी द्वारा अपने ही बीट के पत्रकार को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने पर कुछ भाजपा विरोधी लोग और प्रोपेगेंडा पोर्टल राहुल गाँधी को शाबासी दे रहे हैं और उसी पार्टी के बीट के पत्रकार को भाजपा समर्थक बता रहे हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी के इस व्यवहार की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो रही है।

पत्रकार आदेश रावल ने कहा, “जिस रिपोर्टर को ऐसा कहा गया, वह 15 साल से कॉन्ग्रेस बीट कवर कर रहे हैं। नेता जी, कॉन्ग्रेस का मीडिया विभाग और मीडिया के बीच की संवादहीनता का यह जीता जागता उदाहरण है।”

पत्रकार सौरव शर्मा ने कहा, “राहुल गाँधी ने जिस रिपोर्टर को बीजेपी का बिल्ला लगाकर आने को कहा, वो कई सालों से कॉन्ग्रेस ही कवर कर रहे हैं। मतलब राहुल गाँधी अपनी पार्टी के बीट रिपोर्टर को ही नहीं पहचानते। सवाल बिल्कुल ठीक था, लेकिन रिपोर्टर का चुपचाप अपमान सह लेना और बाकी पत्रकारों का हंसी उड़ाना और शर्मनाक है।”

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी ने इसको लेकर कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर तंज कसा है। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए राहुल गाँधी का सम्मान इसी तरह का है। वह पिछड़े वर्गों से इतनी घृणा क्यों करते हैं। पत्रकारों द्वारा उनसे ओबीसी के अपमान पर सवाल पूछे जाने से ही वे इतने बौखला गए।”

बता दें कि ‘मोदी’ नाम पर आपत्तिजनक बयान देने के बाद सूरत की अदालत ने उन्हें दो वर्ष की सजा सुनाई है। इसके बाद नियमानुसार, लोकसभा सचिवालय ने राहुल गाँधी की संसद सदस्यता रद्द होने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसी मामले को लेकर राहुल गाँधी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आए थे।  

अभी लोकसभा चुनाव हुए तो यूपी में BJP को 67-73 सीटें, सपा से 3 गुना से भी ज़्यादा वोट प्रतिशत: बरकरार है मोदी-योगी का जलवा, सर्वे में खुलासा

साल 2024 में देश भर में लोकसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सर्वे किया गया है। इस सर्वे के हिसाब से यूपी में एक बार फिर मोदी लहर चलती दिख रही है। वहीं, बीते 6 साल से उत्तर प्रदेश की सत्ता चला रहे योगी आदित्यनाथ अब भी सूबे की जनता के लिए पहली पसंद बने हुए हैं।

दरअसल, आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए एबीपी न्यूज- Matrize ने सर्वे किया है। इस सर्वे में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 80 हजार 600 लोगों से सवाल पूछे गए हैं। यूपी में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं। इस सर्वे के अनुसार, लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को 67-73 सीटें, सपा गठबंधन को 3-6 सीटें, बीएसपी को 0-4 सीटें और कॉन्ग्रेस 1-2 सीटों में सिमटती दिख रही है।

वोट प्रतिशत की बात करें तो इसमें भी भाजपा बाजी मारती दिख रही है। भाजपा गठबंधन को 63% वोट, सपा गठबंधन को 19% वोट, बीएसपी को 11% वोट और कॉन्ग्रेस के खाते में 4% वोट जाता दिख रहा है। वहीं, अन्य के को 3% वोट मिलने की बात कही जा रही है।

इस सर्वे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 27 लोकसभा सीटों की सर्वे रिपोर्ट भी विपक्ष को परेशान करने वाली है। सर्वे में पश्चिमी यूपी में भाजपा गठबंधन को 18-23 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, समाजवादी पार्टी को 2-5 सीट, बसपा 0-1 सीट तथा कॉन्ग्रेस और अन्य का खाता खुलता नहीं दिख रहा है।

मोदी-योगी का जलवा बरकरार

इसके अलावा एबीपी न्यूज-Matrize के सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को लेकर सवाल किया गया है। इस सर्वे में 52% लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का काम बहुत बेहतर है। वहीं, 32% लोगों को पीएम मोदी का काम संतोषजनक लगता है। जबकि 16% लोगों ने प्रधानमंत्री के काम को बेहद खराब कहा है।

योगी आदित्यनाथ बीते 6 सालों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। लगातार सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। सर्वे में जब लोगों से मुख्यमंत्री के लिए पहली पसंद को लेकर सवाल किया गया तो 61% ने योगी आदित्यनाथ को सीएम पद के लिए पहली पसंद बताया है। वहीं, 24% लोगों अखिलेश यादव को, 11% ने मायावती और 4% लोगों ने अन्य को मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद कहा है।

यही नहीं, इस सर्वे में 52% लोगों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ का काम बहुत बेहतर है। वहीं, 27% लोगों को उनका काम संतोषजनक लगता है। जबकि 21% लोगों ने सीएम योगी के काम को बेहद खराब कहा है। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ सरकार की पहचान बन चुकी बुलडोजर कार्रवाई को 54% लोगों ने माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई बताया है। इस सर्वे में 10 हजार लोगों की राय ली गई।

‘सिर्फ हिन्दू त्योहारों पर ही पाबंदी क्यों? अजान-ताजिया के लिए भी है 75 डेसीबल वाला नियम?’: बिहार पुलिस के दिशानिर्देश, VHP ने दागे सवाल

बिहार के दरभंगा में हिंदू त्योहारों को लेकर गाइडलाइन्स जारी की गई हैं। इसे लेकर शहर के अंबेडकर सभागार में जिला प्रशासन की तरफ से एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के बाद जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए। जिसे लेकर विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने सवाल उठाए हैं।

दरभंगा पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार रामनवमी और छठ के अवसर पर धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई। रामनवमी और छठ के अवसर पर 75 DB (डेसीबेल) से अधिक आवाज पर डीजे बजाने पर रोक लगा दी गई है। रामनवमी पर नए जुलूस वालों को अनुमति नहीं दी गई है। निर्देश के अनुसार धार्मिक उन्माद फैलाने वाले के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी। आदेश में कई और निर्देश दिए गए हैं।

दरभंगा पुलिस की तरफ से जारी गाइडलाइन्स पर विश्व हिंदू परिषद ने सवाल उठाया है। परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्विटर पर आदेश की कॉपी पोस्ट करते हुए लिखा, “बिहार सरकार के ये प्रतिबंध सिर्फ राम नवमी व छ्ठ पूजा के लिए ही क्यों? क्या 75 डेसीबेल से ऊपर का ध्वनि प्रदूषण अज़ान व ताज़ियों पर भी है?”

वीएचपी नेता ने दरभंगा पुलिस द्वारा हिंदू राष्ट्र का बैनर लगाए जाने के मामले में की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। विनोद बंसल ने बिहार पुलिस को टैग करते हुए पूछा कि इस तरह के प्रतिबंध सिर्फ हिंदू त्यौहारों पर ही क्यों? त्यौहार के दिन हिंदू राष्ट्र की बंदना करने वाले की गिरफ़्तारी क्यों?

बता दें कि दरभंगा में गिरफ्तार VHP नेता को पुलिस ने छोड़ दिया है। दरअसल, हिंदू नववर्ष पर दरभंगा में हिंदू राष्ट्र लिखा बैनर लगाने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई की थी। पुलिस ने विश्व हिंदू परिषद के नेता राजीव प्रकाश मधुकर को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में 4 नामजद और 100 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बैनर लगाए जाने का मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया था।

‘प्रगति मैदान पर कब्जा कर लहराएँगे खालिस्तानी झंडा’: यहीं होने वाला है G20 का भव्य सम्मेलन, PM मोदी और अमित शाह के लिए भी कहा आपत्तिजनक शब्द

दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट पर एक यात्री को खालिस्तानी समर्थक ने फोन कर के धमकी दी। अनजान खालिस्तानी समर्थक ने दिल्ली के प्रगति मैदान पर कब्जा कर खालिस्तान का झंडा लहराने की बात कही। इस मामले में एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है।

दिल्ली पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, खालिस्तानी समर्थक ने प्रगति मैदान पर कब्जा कर तिरंगा उतारने और खालिस्तानी झंडा लहराने की धमकी दी। फोन पर अमृतपाल का समर्थन करते हुए पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

इस संबंध में गुरुवार (23 मार्च, 2023) को आईजीआई एयरपोर्ट थाने में धारा 153,153 ए, और 505 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कॉलर का पता लगाने की कोशिश कर रही है। बता दें कि इसी साल सितंबर में प्रगति मैदान में जी-20 का बड़ा आयोजन होना है। इसे लेकर तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।

बता दें कि ‘वारिस पंजाब दे’ के भगोड़ा मुखिया अमृतपाल की तलाश जारी है। इस बीच दावा किया जा रहा है कि वह यूपी के लखीमपुर खीरी में देखा गया था। इससे संबंधित एक वीडियो भी सामने आया है। जिसमें वह चश्मा, टी-शर्ट और जिंस के साथ जैकेट पहने नजर आ रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह मोबाइल पर बात करते हुए जा रहा है। लखीमपुर नेपाल बॉर्डर से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

इधर अमृतपाल से जुड़े और मदद करने वालों को भी पुलिस गिरफ्तार कर रही है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 19 मार्च की रात अमृतपाल सिंह को पनाह देने वाली महिला बलजीत कौर को गिरफ्तार किया गया था। अब पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के आरएसपुरा निवासी अमरीक सिंह और उनकी पत्नी सरबजीत कौर को गिरफ्तार किया है। उनपर आरोप है कि उनके अमृतपाल के साथी पपलप्रीत सिंह के साथ संबंध हैं। कहा जा रहा है कि पपलप्रीत ही अमृतपाल को गिरफ्तारी से बचा रहा है और उसे जगह-जगह छिपने में मदद कर रहा है।

कर्नाटक में PM मोदी की सुरक्षा में फिर हुई चूक: भागता हुआ कार के करीब आया शख्स, हिरासत में लेकर हो रही पूछताछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi Security Breach) की सुरक्षा में एक बार फिर चूक हुई है। पीएम मोदी कर्नाटक के दौरे पर हैं। जहाँ वह दावणगेरे में रोड शो कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक दौड़ता हुआ उनके काफिले के पास आ गया। हालाँकि पीएम तक पहुँचने से पहले ही सुरक्षा बलों ने उसे पकड़ लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

‘रिपब्लिक’ ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सुरक्षा में सेंध लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुँचने की कोशिश करने वाला युवक कोप्पल का रहने वाला है। पहले वह गमित कॉलेज परिसर में छिपा हुआ था। प्रधानमंत्री के रोड शो को देखने के बाद वह दौड़ता हुआ उनकी गाड़ी के पास जाने की कोशिश कर रहा था।

हालाँकि इससे पहले ही प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के जवानों ने उसे पकड़ लिया। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के काफिले में हुई इस घटना को बड़ी चूक माना जा रहा है। दरअसल, प्रधानमंत्री के रोड शो को लेकर 3-4 लेयर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सड़क के दोनों ओर बैरिकेड भी लगाए थे। यही नहीं, लोगों को बेरिकेड लाँघकर न आने की बात भी कही गई थी। इसके बाद भी युवक काफिले में घुसने की कोशिश कर रहा था।

बता दें कि इससे पहले इसी साल जनवरी में कर्नाटक के हुगली में भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया था। तब एक 6वीं क्लास का बच्चा हाथ में माला लेकर प्रधानमंत्री की ओर बढ़ रहा था। हालाँकि सुरक्षा में मुस्तैद एसपीजी के जवानों ने बच्चे को देख लिया और उससे माला लेते हुए वापस भेज दिया था। बच्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माला पहनाना चाहता था। इस घटना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक बताया गया था। लेकिन कर्नाटक पुलिस ने इसे सुरक्षा में चूक मानने से इनकार कर दिया था।

संस्कृति यूनिवर्सिटी में कश्मीरी छात्रों ने पढ़ी नमाज: वीडियो हुआ वायरल: मथुरा में हिन्दू संगठनों का विरोध प्रदर्शन, पूछा – विद्या के मंदिर में ये सब क्यों?

उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित संस्कृति यूनिवर्सिटी में मुस्लिम छात्रों द्वारा नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद हिंदू संगठन इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। हिंदू महासभा ने कहा है कि नमाज पढ़ने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई है तो वे यूनिवर्सिटी में हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मथुरा की प्रतिष्ठित संस्कृति यूनिवर्सिटी परिसर में नमाज पढ़ने वाले छात्र कश्मीर के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी के गार्डन में छात्रों को नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। कहा जा रहा है कि यह वीडियो यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले किसी छात्र ने ही बनाया है और फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़ने का विरोध करते हुए ‘अखिल भारतीय हिंदू महासभा’ ने कलेक्ट्रेट में जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही, कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा है। हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष छाया गौतम का कहना है कि यूनिवर्सिटी में बहुत पहले से नमाज पढ़ी जा रही है। इसकी सूचना उनको मिलती थी। लेकिन सबूत नहीं था। अब वीडियो सामने आने के बाद इसका सबूत भी मिल गया है। यदि आरोपित छात्रों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।

छाया गौतम ने यह भी कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि यूनिवर्सिटी में सरकारी छात्रवृत्ति प्राप्त 82 मुस्लिम छात्र पढ़ते हैं। इनमें से अधिकांश छात्र जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। यूनिवर्सिटी में बीते 6 दिनों में लगातार नमाज पढ़ी जा रही है। इसका वीडियो भी उनके पास है।

वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़ने को गंभीर मामला बताया है। उन्होंने कहा है कि विद्या के मंदिर में इस तरह से नमाज पढ़ने को अखिल भारतीय हिंदू महासभा कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि इस मामले में जल्द ही कार्रवाई नहीं होती है तो हिंदू महासभा यूनिवर्सिटी में हनुमान चालीसा का पाठ करेगा। लगातार विरोध और कार्रवाई के बाद भी समुदाय विशेष के लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जल्द ही हिन्दू महासभा के पदाधिकारी कैंपस को गंगा जल से धुलवाकर शुद्धिकरण करेंगे।

हालाँकि यूनिवर्सिटी के PRO किशन चतुर्वेदी ने मामले को पुराना बताया है। उन्होंने क्या है कि 25-30 दिन पहले नमाज पढ़ी गई थी। मामला संज्ञान में आने के बाद छात्रों को समझाइश दी गई है। छात्र अपने हॉस्टल के कमरों में ही धार्मिक कार्य करते हैं। बिना वजह ही मामले को तूल दिया जा रहा है।

‘मुस्लिमों को 4 शादियों की इजाजत, समाज में बढ़ रहे यौन अपराध’: ‘शरीयत एक्ट’ के खिलाफ HC में याचिका, केंद्र से माँगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम 1937 को चुनौती देने वाली याचिका पर भारत के अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया है। याचिका में आईपीसी की धारा 494 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। ‘हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड’ द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसपर जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने यह आदेश जारी किया।

‘पिछले दिनों कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ‘हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड’ के वकील अशोक पाँडे ने कहा कि धारा 494 हिंदू, बौद्ध, सिख और ईसाई धर्म के मानने वालों पर लागू होती है।’ इसके तहत यदि व्यक्ति अपने पत्नी के रहते दूसरा विवाह करता है तो उसे मान्य नहीं माना जाएगा। साथ ही व्यक्ति को सात साल की कैद की सजा और जुर्माना लगा दिया जाएगा लेकिन देश के मुस्लिमों पर यह धारा लागू नहीं होती।

अदालत को जानकारी दी गई कि आईपीसी की धारा 494 मुस्लिमों पर इसलिए लागू नहीं होताी क्योंकि उन्हें मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम 1937 के तहत सुरक्षा प्राप्त है। शरीयत अप्लीकेशन एक्ट मुस्लिम पुरुष को चार शादियाँ करने की इजाजत देता है। यह सीधे तौर पर धर्म के आधार पर भेदभाव का मामला है। जो कि संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है। इसलिए आईपीसी की धारा 494 को असंवैधानिक करार दे कर निरस्त कर देना चाहिए।

याचिका कर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि मुस्लिमों को प्राप्त इस विशेषाधिकार की वजह से समाज में बलात्कार जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। दौलतमंद और ताकतवर मुस्लिम कई शादियाँ कर रहे हैं जबकि गरीब मुस्लिमों को एक शादी भी नसीब नहीं हो रही, जिससे समाज में यौन अपराधों में वृद्धि हुई है। याचिका में कहा गया है कि अधिनियम 1937 महिलाओं को प्राप्त मौलिक और बुनियादी मानवाधिकारों का लिंग के आधार पर हनन करती है।

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने केंद्र सरकार को छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। आईपीसी की धारा 494 की वैधता पर सवाल उठाए जाने पर कोर्ट ने अटार्नी जनरल को भी नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की तरफ से जवाब दाखिल होने के बाद याचिका कर्ता को भी प्रत्युत्तर देने के लिए 2 हफ्ते का समय दिया जाएगा। अगली सुनवाई मई 2023 में होने की उम्मीद है।

‘इतिहास का प्रचार-प्रसार भारत के उत्थान का सबसे बड़ा उपाय’: गलत से समझौते के खिलाफ थे गणेश शंकर विद्यार्थी, भाले-लाठी से पीट-पीट कर भीड़ ने मार डाला

दिन था देवोत्थान एकादशी का और तारीख़ थी 9 नवम्बर 1913, जब गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ को जन्म दिया था। ना तो कोई सहायक, ना छापाखाना, रुपए-पैसे से ना कोई मदद करने वाला -कुछ भी नहीं था उनके पास उन दिनों। किन्तु, अपनी जनसेवा की इच्छा, अटूट लगन, दृढ़ निश्चय, अनोखे आत्मविश्वास के साथ मात्र भगवान के भरोसे उन्होंने अपनी बरसों की इच्छा को ज़मीन पर ला खड़ा किया था।
उनके लेखन के शुरुआत तो मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान ही हो गई थी ,जब मिस चार्लोट एम यंग द्वारा लिखित पाठ्यपुस्तक ‘बुक ऑफ गोल्डन डीड्स’ से प्रभावित होकर उन्होंने ‘हमारी आत्मोत्सगर्ता’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखना शुरू कर दिया था।

इसमें उन्होंने उन भारतीय नायकों की कहानियाँ लिखी थी, जिन्होंने दूसरों के लिए अपना बलिदान दिया था। भारतवासियों के आत्मत्याग की ऐतिहासिक कथाओं का संग्रह था यह। छात्र जीवन में ही विद्यार्थी जी लालित्य पढ़ने के लिए इतना समर्पित थे कि उन्होंने उस समय के सांस्कृतिक और राजनीतिक वातावरण को पूर्ण रूप से आत्मसात कर लिया था। 19 वर्ष की अपनी उम्र में इस पुस्तक की अप्रकाशित प्रस्तावना, में उन्होंने लिखा था कि अपनी मातृभूमि की सेवा प्रत्येक मनुष्य का प्रमुख कर्तव्य है तथा इतिहास का प्रचार-प्रसार भारत के उत्थान का सबसे बड़ा उपाय है। यह हमारा कर्तव्य है कि आस्था और विश्वास के अनुसार मातृभूमि की सेवा के लिए हमें अपना जीवन समर्पित करना चाहिए।

उन्होंने यह भी लिखा था, कि महान हिंदूवीरों की पुरानी दंतकथाओं को सुनकर ही महाराणा प्रताप स्वतंत्रता के उपासक बने थे। महाभारत और रामायण की कथाओं ने ही एक पराधीन पिता के एक पराधीन पुत्र को महाराष्ट्र के छत्रपति में बदल दिया था। उन्होंने गाँवों में जोश और वीरता से ओतप्रोत गए जाने वाले आल्हा का भी जिक्र अपनी इस प्रस्तावना में किया था। उनके कहने का अर्थ यह था कि इतिहास लोगों को नींद से जगा सकता है, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने की ताकत दे सकता है।

उनका कहना था कि मृत आत्माओं में जीवन डालना और सूखे फूल को हरा-भरा बनाना या तो अमृत से (यदि अमृत जैसा कुछ है) या इतिहास से ही प्राप्त किया जा सकता है। शेली, स्टुअर्ट मिल, स्पेंसर, मॉपासाँ, टॉलस्टॉय, शेक्सपियर, एच.जी. वेल्स से लेकर दादाभाई नैरोजी, फिरोज़ शाह मेहता, गोखले, तिलक, गान्धी आदि राजनैतिक लेखक और रवीन्द्रनाथ, सूर, तुलसी, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रताप नारायण मिश्र, बालमुकुन्द तथा महावीर प्रसाद द्विवेदी जैसे साहित्यिक लेखक उनके विशेष प्रेम-पात्र हुआ करते थे।

आप उनकी लेखनी को देखेंगे तो पाएँगे कि गीता के निष्काम कर्म के सिद्धान्त ने उन पर बड़ा असर डाला है। विद्यार्थी जी वैसे तो देश-विदेश के सभी प्रमुख राजनैतिक और साहित्यिक लेखकों को पढ़ते थे लेकिन विक्टर ह्यूगो पर उनका विशेष प्रेम दिखता है। उनको जहाँ मौका मिलता है वो विक्टर की तारीफ़ करने से चूकते नहीं हैं। विक्टर ह्यूगो का “ला मिज़राब्ल्स” उनकी सर्वप्रिय कृति है। यह उपन्यास विश्व के चुनिंदा उपन्यासों में से एक है। जिस सजीवता से असहनीय व्याकुलता, विद्रोही विचार, करुणामय दृश्य को इस उपन्यास में वर्णित किया गया है वह अकल्पनीय है?

इस कृति को समझना हर किसी के बस की बात नहीं है, विद्यार्थी जी पर इन भावनाओं का बहुत असर पड़ा था। गणेश शंकर विद्यार्थी जी की विचारधारा और शैली में विक्टर ह्यूगो साफ़ दिखाई देते हैं। उनकी बड़ी इच्छा थी कि ह्यूगो की सभी कृतियों का हिन्दी अनुवाद कर के हिंदी पाठकों के सामने लाया जाए। जब ‘प्रताप’ का पहला अंक निकला था तो विधार्थी जी के गुरु आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने आशीर्वाद स्वरूप दो पंक्तियाँ विद्यार्थी जी को भेजी थी,-

“जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है
वह नर नहीं, नर पशु निरा है, और मृतक समान है”

वो ही मात्र एक ऐसे पत्रकार थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के साथ-साथ देसी सामंतों को भी नहीं बक्शा था। पत्रकारिता के पेशे को ही अपने जीवन का एकमात्र ध्येय माना हुआ था उन्होंने। अंत तक उन्होंने अपनी पत्रकारिता को किसी दल से जोड़ना मंजूर नहीं किया। विद्यार्थी जी अपनी लेखनी के माध्यम से जनजागरण करते आए, जिसके फलस्वरूप उनका एक पैर जेल में और एक घर में रहता करता था। भारत के उन सभी प्रदेशों में जहाँ-जहाँ हिन्दी भाषा बोली जाती है, अनेक भाषाप्रेमी उनको अपना गुरु माना करते थे।

बिहार, संयुक्त प्रान्त, मध्य भारत, राजस्थान और पंजाब के सैकड़ों नवयुवक उन्हें उनकी निडरता, निर्भीकता के लिए अपना नेता मानते थे। उनका अपने सभी शिष्यों से हमेशा यही कहना होता था कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाने की आदत डाल लेनी चाहिए। विद्यार्थी जी में यह मनोवृत्ति बचपन से ही थी। छोटी-से-छोटी बात में भी मानव चरित्र की महानता की परख होती है ओर उसी से पता चल जाता है कि आगे चलकर वह दुनिया में क्या कर सकेगा। अगर किसी मनुष्य के भविष्य को जानना हो तो उसकी बचपन की मनोवृत्ति और आचार-विचार को ध्यान से देखिए। आप यह अनुमान लगा सकते हैं कि इस व्यक्ति की रुचि किस प्रकार की है और इसका भावी जीवन किस प्रकार का होने वाला है।

यह बात उन दिनों की है जब पोस्टकार्ड का टिकट काट कर किसी कागज़ या सादे कार्ड पर लगा कर भेजना कानूनी था। लेकिन एक बार इसी प्रकार के एक पोस्टकार्ड को पोस्ट आफिस वालों ने बैरंग कर दिया। श्री गणेश शंकर जी को यह बात गलत लगी। उन्होंने इसका विरोध करने के लिये एक पोस्टकार्ड का स्टाम्प काट कर एक दूसरे कागज पर चिपका कर उसे अपने नाम पर पोस्ट कर दिया। जब पोस्टकार्ड बैरंग हो कर उनके पास वापस आया तो पैसा दे कर उन्होंने उसे छुड़ा लिया।

इसके बाद वो पोस्ट मास्टर के पास गए और इसकी शिकायत कर डाली। शुरुआत में तो पोस्ट मास्टर साहब आनाकानी करते रहे लेकिन विद्यार्थी जी ने इतनी लिखा-पढ़ी कर डाली कि अन्त में डाक-विभाग के अधिकारियों को अपनी गलती माननी ही पड़ी। विद्यार्थी जी जब तक इस मसले में लगे रहे जब तक उनके वो पैसे वापस नहीं हुए। जब उनके एक मित्र ने उनसे यह सवाल पूछा कि मात्र चौथाई आने के लिए आपने इतनी माथा-पच्ची की तो उनका जवाब था कि बात चौथाई आने की नहीं थी। बात सिद्धांतों की थी।

उनका कहना था कि अगर आप छोटी-मोटी गलत बातों पर समझौता करने लगेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब आपको सभी गलत बातें सही लगने लगेंगी। उनका मानना था कि गलत बात से समझौता नहीं करना है, चाहे वो कितनी ही छोटी हो या बड़ी। आपको यह भी हैरत होगी कि यह घटना उस समय की है, जब विद्यार्थी जी निरे विद्यार्थी थे यानी मिडिल में पढ़ते थे। वैसे तो उनके पिताजी तो फतेहगढ़ के रहने वाले थे लेकिन विद्यार्थी जी का जन्म उनके ननिहाल इलाहाबाद के अतरसुइया मोहल्ले में 26 अक्टूबर, 1890 को हुआ था।

एक बार विद्यार्थी जी ने किसी चर्चा में हँसते-हँसते बताया था कि गंगा देवी ने स्वप्न में गणेशजी की एक मूर्ति उनकी माता के हाथ में दी थी। उनकी माँ उस समय गर्भवती थीं और इस स्वप्न के अनुसार उन्होंने निश्चय कर लिया कि अगर पुत्र का जन्म हुआ तो उसका नाम गणेश और यदि वह पुत्री हुई तो उसका नाम गणेशी रखा जाएगा। संयोगवश पुत्र ही पैदा हुआ और पूर्व निश्चयानुसार उसका नाम गणेश ही रखा गया, जो आगे चल कर गणेश शंकर हो गया था।

जब उन्होंने लिखना शुरू किया तब उन्होंने अपना उपनाम ‘विद्यार्थी’ रख लिया था। विद्यार्थी का अर्थ है ‘ज्ञान का साधक”। वो कहते थे कि प्रत्येक मनुष्य जीवन भर विद्या का साधक ही बना रहता है। ताउम्र वह कुछ ना कुछ सीखता ही रहता है किन्तु उसके ज्ञान का भण्डार भरता ही नहीं। जीवन भर शिक्षा लाभ करते रहने पर भी मनुष्य का ज्ञान भण्डार परिपूर्ण नहीं होता तथा वो आचार्य नहीं हो पाता है। विद्यार्थी ही रहता है। संसार को एक पाठशाला मानते हुए वो अपने को एक तुच्छ शिक्षार्थी समझते थे।

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फाँसी के बाद कानपुर में भड़के सांप्रदायिक दंगों के सामने ‘प्रताप’ समाचार पत्र के संपादक गणेश शंकर विद्यार्थी ने अनुकरणीय साहस और करुणा का परिचय दिया था। उन्होंने हिंसा में फंसे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के सैकड़ों निर्दोष लोगों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी थी। पत्रकार होते हुए भी विद्यार्थी ने मानवता के प्रति अपने कर्तव्य की भावना से कार्य करने में संकोच नहीं किया और वह दिन भर दंगा प्रभावित इलाकों में घूमते रहे।

जब भी उन्हें हिंसा में लोगों के फँसे होने की सूचना मिली उन्होंने त्वरित कार्रवाई की और लगभग 200 मुस्लिमों को बंगाली इलाके से बचाया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की थी। हालाँकि, 25 मार्च, 1931 के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन, चौबे गोला इलाके में फँसे 200 हिंदुओं को बचाने की कोशिश करते समय, हिंसक भीड़ द्वारा विद्यार्थी पर हमला किया गया था। कुछ लोगों द्वारा पहचाने जाने के बावजूद, उन्हें भाले से वार किया गया और लाठियों से तब तक पीटा गया जब तक कि उनकी मौत नहीं हो गई। गणेश शंकर विद्यार्थी का त्याग और वीरता आज भी लोगों को प्रेरित करती है। उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव के नायक और पत्रकारिता के उच्चतम आदर्शों के अवतार के रूप में याद किया जाता है।

(मनीष श्रीवास्तव की पुस्तक श्रृंखला ‘क्रांतिदूत‘ का संपादित अंश)