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कुमकुम-चूड़ी पहनने पर काट लेते हैं पैसे, हिन्दू लड़कियों को हिजाब पहनने को किया जा रहा मजबूर: कंपनियों की हरकत पर हिन्दुओं में गुस्सा

कर्नाटक के तुमकुर में कुछ इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों में काम करने वाली हिंदू महिलाओं को मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रमों के दौरान हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हिंदू महिलाओं को अधिक दैनिक मजदूरी का लालच देकर मुस्लिमों के कार्यक्रमों में न सिर्फ हिजाब पहनाने की बात सामने आई है, बल्कि दावा है कि उन्हें कुमकुम हटाकर कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कहा गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना तब सामने आई जब एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ने हिजाब पहने हिंदू महिलाओं की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की। ‘संवाद कन्नड़’ नामक एक स्थानीय चैनल ने इस पर रिपोर्ट भी दिखाई थी। साड़ी और हिजाब पहने हिंदू महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को स्थानीय जन प्रतिनिधियों के समक्ष उठाया साथ ही इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों के खिलाफ विरोध भी जताया।

‘बजरंग दल’ कार्यकर्ता मंजू भार्गव ने ‘द ऑर्गनाइजर’ को जानकारी दी कि इस तरह की इवेंट मैनेजमेंट कंपनियाँ गरीब हिंदू महिलाओं को अपना निशाना बनाती हैं, उन पर दबाव बनाया जाता है कि वो हिजाब पहनें। मुस्लिमों के निकाह और अन्य कार्यक्रमों में कंपनियों द्वारा हिजाब पहनने और हिंदुओं की अन्य निशानियाँ जैसे कुमकुम और चूड़ी न पहनने पर महिलाओं को 800-1000 रुपए तक का लालच दिया जाता है। हिजाब न पहनने वाली महिलाओं को सिर्फ 300-400 रुपए तक दिए जाते हैं।

मंजू भार्गव के अनुसार, हिजाब पहनने से इनकार करने वाली लड़कियों को काम भी निम्न स्तर का दिया जाता है। घटना की जानकारी होने के बाद ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ताओं ने उन लड़कियों के परिजनों से संपर्क किया जिनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। परिजनों का कहना था कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। अधिक रुपयों के लिए बच्चियों का कुमकुम हटाना और हिजाब पहनना मंजूर नहीं है।

मामला सामने आने के बाद बजरंग दल समेत हिंदू संगठनों द्वारा कई इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस्लामीकरण को बढ़ावा देने वाली इस तरह की हरकतें बंद होनी चाहिए।

इंटरनेशनल हुआ पटना रेलवे स्टेशन पर अश्लील वीडियो चलने का मामला, अमेरिकी पॉर्न स्टार ने कहा- उम्मीद है मेरी ही फिल्म रही होगी

बिहार की राजधानी पटना में रेलवे स्टेशन पर पॉर्न वीडियो चलने का मामला सुर्खियों में है। अमेरिकी पॉर्न एक्ट्रेस केंड्रा लस्ट की प्रतिक्रिया भी इस पर सामने आई है। उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि पटना रेलवे स्टेशन पर जो वीडियो चली थी वह उनकी ही होगी।

केंड्रा लस्ट ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर कैप्शन में ‘इंडिया’ और हैशटैग ‘बिहार रेलवे स्टेशन’ के साथ शेयर की है।

लस्ट की इस फोटो पर एक नेटिजन ने मजाक में कहा कि पटना रेलवे स्टेशन पर जो वीडियो चली, वह उनकी थी। इसके जवाब में पॉर्न स्टार केंड्रा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह वीडियो उनका ही है।

हालाँकि एक अन्य नेटिजन ने बताया कि पटना स्टेशन पर लगी टीवी स्क्रीन पर गलती से चली पॉर्न वीडियो बेब्स नेटवर्क की अनीसा केट की थी।

पटना में कैसे चली पॉर्न फिल्म

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पटना रेलवे स्टेशन पर विज्ञापन एवं सूचनाओं के प्रसारण की जिम्मेदारी दत्ता कम्युनिकेशन नामक कंपनी को दी गई थी। इस कंपनी को टीवी स्क्रीन पर विज्ञापन दिखाना था। लेकिन उस वक्त कंपनी के कर्मचारी पॉर्न वीडियो देख रहे थे। यही वीडियो रेलवे स्टेशन पर लगे टीवी स्क्रीन पर भी प्ले हो गया। इससे पहले कि कर्मचारी कुछ भी समझ पाते पॉर्न वीडियो चलने की इस घटना से पटना रेलवे स्टेशन और रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद अधिकारियों ने विज्ञापन चलाने वाली कंपनी से संपर्क किया और पॉर्न वीडियो बंद कराया गया।

बता दें कि ऐसी ही एक घटना साल 2017 में दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर सामने आई थी। पटना की ही तरह वहाँ भी विज्ञापन के लिए लगाई गई टीवी स्क्रीन पर एक पॉर्न फिल्म चल गई थी। जानकारी सामने आने के बाद दिल्ली मेट्रो ने वीडियो को तुरंत हटा दिया था।

गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी पॉर्न स्टार ने भारत में सेक्स टेप से जुड़ी खबरों पर नजर रखी हो। इससे पहले साल 2016 में आम आदमी पार्टी नेता संदीप कुमार का कथित सेक्स टेप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पॉर्नहब ने उन्हें ट्रोल किया था। संदीप कुमार को ट्रोल करने के लिए पॉर्नहब ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर कहा था कि वे संदीप कुमार सहित अपने सभी कर्मचारियों से प्यार करते हैं।

पॉर्नहब ने किया था AAP नेता को ट्रोल

बता दें कि केजरीवाल सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे संदीप कुमार पर सेक्स स्कैंडल का आरोप लगा था। आपत्तिजनक स्थिति में उनका एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कथित सेक्स टेप सामने आने के बाद केजरीवाल ने उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया था।

उत्तराखंड में अमृतपाल सिंह को लेकर अलर्ट, सोशल मीडिया पर उसके समर्थकों पर पुलिस की नज़र: 458 साथियों की लिस्ट NIA को सौंपी गई

पंजाब पुलिस द्वारा भगोड़ा घोषित किए गए खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को ले कर उत्तराखंड पुलिस को भी अलर्ट किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि वह उधमसिंह नगर जिले में मौजूद अपने कुछ समर्थकों के पास छिप सकता है। कुछ संवेदनशील जिलों को छोड़ कर कई स्थानों पर इंटरनेट बहाल कर दिया गया है। अमृतपाल द्वारा ISI के सहयोग से जार्जिया से हथियार चलाने की ट्रेनिंग लिए जाने का भी खुलासा हुआ है। वह सिखों का एक अलग देश भी बनाना चाह रहा था।

उत्तराखंड में हाई अलर्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड पुलिस के DGP अशोक कुमार ने उधमसिंह नगर जिले के पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जिले के पुलिस बल को जहाँ लगातार चेकिंग और संदिग्धों पर नजर रखने के आदेश मिले हैं तो वहीं प्रदेश की STF को सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भी निगरानी करने को कहा गया है। पुलिस ने खालिस्तान या उसके समर्थकों के समर्थन में पोस्ट डालने वालों को भी सख्त चेतावनी दी है।

ऐसे कुछ लोगों को पहले भी पकड़ा जा चुका है जिनकी बाद में काउंसलिंग करवाई गई थी। अमृतपाल के 9 राज्यों में समर्थक बताए जा रहे जिन पर गृह मंत्रालय नजर रखे हुए हैं और संबंधित इलाकों के पुलिस बल को अलर्ट भेजा गया है।

जार्जिया से हथियारों की ट्रेनिंग

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि अलग सिख देश की चाह रखने वाला अमृतपाल दरअसल पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के इशारे पर काम कर रहा था। उन्ही के इशारे पर अमृतपाल द्वारा आनदंपुर खालसा फोर्स (AKF) संगठन खड़ा करने की तैयारी थी। उसके लिए इसकी शुरुआती स्तर पर तैयारी के लिए दिल्ली से AKF मार्क लगी 33 बुलेटप्रूफ जैकेट खरीद ली गईं थीं। अमृतपाल के जॉर्जिया से हथियारों की ट्रेनिंग भी लेने की जानकारी सामने आई है।

नशे के तस्कर और ISI थी मददगार

अमृतपाल की पैसों से मदद नशे के बड़े-बड़े माफिया कर रहे थे जबकि उसे गोला-बारूद और हथियार ISI मुहैया करवा रही थी। जाँच एजेंसियों के रडार पर जालंधर, होशियारपुर और नवांशहर की 6 फाइनेंस कंपनियाँ भी हैं, जिनके द्वारा 20 अगस्त, 2022 से अब तक करोड़ों की ट्रांजेक्शन हुई है। इसके अलावा जालंधर में हवाला कारोबार से जुड़े 2 संदिग्धों की भी पहचान की गई है। पुलिस को इन सभी की तलाश है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी अमृतपाल का समर्थन करने वाले देशी-विदेशी हैंडलों को भी खंगाला जा रहा है।

इसी कार्रवाई के चलते पिछले 3 दिनों में संगरूर के सांसद सिमरनजीत सिंह मान सहित 72 कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया से जुड़े लोगों के ट्विटर अकाउंट्स सस्पेंड किए गए हैं। सिमरनजीत ने ऑपरेशन अमृतपाल पर सवाल खड़े किए थे।

NIA को सौंपी गई साथियों की लिस्ट

पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के 458 साथियों की लिस्ट केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को A, B और C कैटेगरी बना कर सौंप दी है। कैटेगरी A में अमृतपाल के 142 बेहद करीबी जबकि B कैटेगरी में उसके आर्थिक मददगार और वारिस दे पंजाब संगठन से जुड़े लोग शामिल हैं। अमृतपाल के 4 बेहद खास साथियों को असम की डिब्रूगढ़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया है जिसमें अमृतपाल का चाचा भी है। कुछ अन्य सहयोगियों को देश के अलग-अलग हिस्सों में बनी जेलों में भेजने की तैयारी है।

NIA की 8 टीमें पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में पहुँच कर जाँच शुरू कर चुकी हैं। तरण तारण, फिरोजपुर, मोगा, संगरूर और अमृतसर के अजनाला छोड़ कर पंजाब के अन्य हिस्सों में इंटरनेट की बहाली कर दी गई है।

‘शहजादा अब नवाब बनना चाहता है’: राहुल गाँधी को BJP ने बताया मीरजाफर, कहा- लंदन में जो किया वह साजिश, माफी माँगनी ही पड़ेगी

बीजेपी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को ‘आज का मीरजाफर’ बताया है। कहा है कि जैसे मीरजाफर ने ईस्ट इंडिया कंपनी से मदद ली थी, उसी तरह से मदद लेकर शहजादे राहुल गाँधी नवाब बनना चाहते हैं। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि कॉन्ग्रेस नेता ने ब्रिटेन में जो कुछ भी कहा वह साजिश है और उन्हें इसके लिए माफी माँगनी ही पड़ेगी।

दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में मंगलवार (21 मार्च 2023) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गाँधी ने लंदन में जाकर जो किया है, वह सिर्फ एक विषय नहीं है बल्कि एक साजिश है। ऐसा पहली बार नहीं है कि राहुल गाँधी ने विदेश जाकर भारत के विरोध में बोला है। इसलिए अब ऐसा नहीं होगा कि वह बिना माफी माँगे निकल जाएँ। उन्हें माफी माँगनी ही पड़ेगी। भाजपा माफी मँगवा कर रहेगी। राफेल केस में भी उन्हें कान पकड़कर माफी माँगनी पड़ी थी। अब उन्हें संसद के पटल पर भी माफी माँगनी पड़ेगी।

संबित पात्रा ने कहा, “मीर जाफर ने नवाब बनने के लिए जो किया था, वहीं राहुल गाँधी ने लंदन में किया है। मीर जाफर नवाब बनना चाहता था, इसलिए उसने ईस्ट इंडिया कंपनी से मदद माँगी थी। इसके बाद देश में अंग्रेजों का शासन शुरू हो गया था। वर्तमान समय में राहुल गाँधी भारतीय राजनीति के मीर जाफर हैं। शहजादा नवाब बनना चाहता है। इसलिए उसने नवाब बनने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी की मदद माँगी है। तुम मुझे नवाब बनाओ और मैं तुम्हें भारत का एक टुकड़ा भेंट करूँगा।”

उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी आज के मीर जाफर हैं और मीर जाफर को माफी माँगनी ही पड़ेगी। इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है। शहजादे ये नहीं चलेगा। शहजादा नवाब बनना चाहता है। इसके लिए विदेशी ताकतों से मदद माँग रहा है। कॉन्ग्रेस में आज लोकतंत्र शेष नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी हिंदुस्तान की जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से शहजादे को नवाब नहीं बना सकती। इसलिए दूसरे देशों में जाकर शहजादे गुजारिश करते हैं कि मुझे नवाब बनना है तुम मेरी मदद करो।”

संसद में माइक बंद करने वाले बयान पर राहुल गाँधी को आड़े हाथों लेते हुए संबित पात्रा ने कहा है, “आपने कहा कि हमारा माइक ऑफ कर दिया जाता है। राहुल गाँधी संसद में 52 फीसदी हाजिरी ही रखते हैं। राष्ट्रीय औसत 80 फीसदी है। दरअसल राहुल गाँधी की अटेंडेंस ही ऑफ है। माइक तो ऑन है। यदि लोकतंत्र में डिबेट नहीं होगी तो फिर क्या अर्थ है। राहुल गाँधी ने अब तक मात्र 6 डिबेट में ही हिस्सा लिया है। यह आँकड़ा 2019 से लेकर अब तक का है। वह विदेश की जमीन में सवाल पूछते हैं। आपके पास सवाल नहीं हैं, इसलिए संसद में नहीं पूछते हैं।”

‘विज्ञापनों पर खर्च दोगुना, जनता को आयुष्मान भारत का लाभ नहीं’: दिल्ली बजट पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लगाई रोक, सवालों के जवाब नहीं दे रही केजरीवाल सरकार

दिल्ली के बजट को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। बजट मंगलवार (21 मार्च, 2023) को पेश होना था। लेकिन, गृह मंत्रालय ने इस पर रोक लगा दी है। एक ओर जहाँ अरविंद केजरीवाल इसे केंद्र सरकार की गुंडागर्दी बता रहे हैं, वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि बजट को लेकर केजरीवाल सरकार से 17 मार्च को जवाब माँगा गया था। बीते 4 दिनों से उनके जवाब का इंतजार है।

दरअसल, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने एक न्यूज चैनल से हुई बातचीत में कहा था कि आपको जानकर हैरानी होगी कि केंद्र ने दिल्ली सरकार के बजट पर रोक लगा दी है। भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है। दिल्ली सरकार का बजट मंगलवार को विधानसभा में पेश होना था, उससे ठीक पहले केंद्र सरकार ने सोमवार शाम को उस पर रोक लगा दी। उन्होंने दावा किया था कि अब दिल्ली का बजट नहीं आएगा। दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को कल से सैलरी नहीं मिलने वाली। यहाँ सीधे-सीधे गुंडागर्दी चल रही है।

केजरीवाल के इस बयान के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में केंद्रीय गृह मंत्रालय सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार के बजट में विकास योजनाओं पर खर्च करने के लिए महज 20% राशि का ही प्रस्ताव दिया गया था। यह राशि देश राजधानी और दिल्ली जैसे महानगर के लिए पर्याप्त नहीं है।

साथ ही, केजरीवाल सरकार बीते दो साल में विज्ञापन पर खर्च दो गुना बढ़ा चुकी है। इस खर्च को लेकर दिल्ली के उप-राज्यपाल ने स्पष्टीकरण माँगा था। मोदी सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं का लाभ दिल्ली की गरीब जनता को न देने पर भी एलजी ने जवाब तलब किया था। इन तमाम मुद्दों को लेकर ही बजट पर रोक लगाने की बात कही जा रही है।

दिल्ली सरकार के जवाब के इंतजार में गृह मंत्रालय

वहीं, इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी एक आधिकारिक बयान जारी किया है। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि उप-राज्यपाल ने दिल्ली के राजकोषीय हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित बजट के कुछ मुद्दों पर चिंता जताई थी। इस पर गृह मंत्रालय ने 17 मार्च, 2023 के एक पत्र के माध्यम से दिल्ली सरकार से अनुरोध किया है कि वह आगे की कार्रवाई के लिए इन मुद्दों को दूर कर फिर से बजट पेश करें। बीते चार दिनों से दिल्ली सरकार के जवाब का इंतजार है। दिल्ली की जनता के फायदे के लिए, केजरीवाल सरकार को तुरंत जवाब देना चाहिए।

इस मुद्दे पर दिल्ली के उप-राज्यपाल कार्यालय द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया है, “78800 करोड़ रुपए के प्रस्तावित बजट में पूँजीगत व्यय 21816 करोड़ रुपए दर्शाया गया है। यह बजट का केवल 27% है। इसके अलावा, इसमें कर्ज चुकाने के लिए 685 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली का पूँजीगत व्यय घटकर 58692 करोड़ रुपए रह जाएगा, जो कि बजट का केवल 16% है। चूँकि दिल्ली देश की राजधानी है और एक बड़ा महानगर भी है, जहाँ निर्माण और विकास कार्य बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में, विकासकारी योजनाओं के लिए दिल्ली सरकार द्वारा बजट में जो प्रस्ताव रखा गया है। वह पर्याप्त नहीं है।”

बीवी की शादीशुदा रिश्तेदार रजिया को भगा ले गया हमीद खान, पहले लाठी-सरियों से पिटाई फिर Video बना काटी नाक: राजस्थान की घटना

राजस्थान के नागौर में एक युवक की नाक काटने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक का नाम हमीद खान है। उसकी बेरहमी से पिटाई भी हुई है। हमीद अपनी बीवी की शादीशुदा रिश्तेदार रजिया को लेकर भाग गया था। उसकी पिटाई और नाक काटने के आरोप में शाहिद, इकबाल, बीरबल, प्रकाश खान और अजीत खान को गिरफ्तार किया गया है।

आरोपितों में से एक शाहिद उसी रजिया का शौहर है जिसे हमीद ले भाग था। वहीं इकबाल, रजिया का भाई बताया जा रहा है। आरोपितों ने नाक काटने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। घटना शनिवार (18 मार्च 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमीद खान मूल रूप से नागौर जिले के परबतसर का रहने वाला है। लगभग डेढ़ साल पहले उसका अपनी ही बीवी की 20 वर्षीया रिश्तेदार रज़िया से अफेयर हो गया। रज़िया भी शादीशुदा है और नागौर के ही मारोठ गाँव की रहने वाली है। हमीद और रज़िया के घर वालों ने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन इसका दोनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इससे पहले भी हमीद खान 2 बार रज़िया को लेकर भाग गया था। परिजनों ने बड़ी मशक्क्त से उन्हें वापस बुलाया था।

23 जनवरी 2023 को हमीद खान तीसरी बार रजिया के साथ घर से फरार हो गया। वह अजमेर के गेगल थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रहने लगा। रज़िया के शौहर शाहिद ने पहले हमीद का ठिकाना खोजा। फिर 18 मार्च को वह अपने 3 भाइयों बीरबल, अजीत खान और इकबाल के साथ एक वाहन से अजमेर गया और हमीद का अपहरण कर लिया। यहीं पर रज़िया भी मिल गई। आरोपितों ने उसे भी गाड़ी में बिठा लिया।

आरोप है कि रज़िया को उसकी ससुराल में उतार दिया गया। आरोपित हमीद को रजिया के मायके मारोठ ले गए। यहाँ रात के अँधेरे में आरोपितों ने पहले तो हमीद खान को बेरहमी से लाठी-डंडों और लोहे की सरिया से पीटा। फिर उसे गाँव के तालाब के पास ले गए। यहाँ रजिया के भाई ने अपने साथियों के साथ मिलकर हमीद की नाक फसल काटने में प्रयोग होने वाली दराँती से काट डाली। आरोपितों ने घायल हमीद को पास के ही चौराहे पर फेंक दिया।

19 मार्च की सुबह जैसे-तैसे पीड़ित अपने गाँव परबतसर पहुँचा। यहाँ परिवार वालों ने हमीद को अस्पताल में भर्ती करवाया। अपहरण का घटना क्षेत्र अजमेर होने की वजह से मामले में FIR अजमेर में ही दर्ज हुई। अजमेर पुलिस ने नागौर पुलिस के साथ मिलकर रज़िया के शौहर शाहिद और रज़िया के भाई इक़बाल सहित कुल 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी से पूछताछ की जा रही है। हमीद खान का इलाज चल रहा है।

‘सेक्स नहीं, अजमेर में दुआ से प्रेग्नेंट हुई सना खान’: जानिए वायरल दावों का सच, इस्लाम के लिए छोड़ दिया था बॉलीवुड

इस्लाम के लिए बॉलीवुड छोड़ने वाली सना खान ने पिछले दिनों बताया था कि वह प्रेग्नेंट हैं। जून 2023 में उनके घर नया मेहमान आने वाला है। इसके बाद सोशल मीडिया में उनकी प्रेग्नेंसी को लेकर एक दावा वायरल हो रहा है। इसके मुताबिक सना खान अपने शौहर अनस सैयद के साथ सेक्स से नहीं, बल्कि अजमेर में दुआ माँगने से गर्भवती हुईं हैं। अक्टूबर 2020 में सना ने बॉलीवुड छोड़ मौलाना अनस सैयद से निकाह किया था।

अब उनकी प्रेग्नेंसी की खबर के बाद सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हो रही है। इसमें सना खान अपने शौहर अनस सैयद के साथ इस्लामी वेशभूषा में दिख रही हैं। इस पर दैनिक जागरण का भी लोगो लगा है। साथ ही दावा किया गया है, “सना खान हुई प्रेग्नेंट जल्द ही बनेगी अम्मी, दो साल से शौहर अजमेर में कर रहे थे दुआ। बिना हमबिस्तरी (सेक्स) सिर्फ दुआ से ही हुई प्रेग्नेंट।”

सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्मों पर वायरल इस तस्वीर का सच पता लगाने के लिए ऑपइंडिया ने पड़ताल की। दैनिक जागरण के लोगों के साथ यह तस्वीर वायरल हो रही है। हमें भी दैनिक जागरण के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर सना खान की प्रेग्नेंसी से जुड़ी खबर मिली।

हमने पाया कि वायरल तस्वीर और दैनिक जागरण द्वारा इस संबंध में प्रकाशित की गई खबर के तथ्यों में कोई मेल नहीं है। दैनिक जागरण ने जो खबर प्रकाशित की है उसमें भी सना और उनके शौहर उसी तरह दिख रहे हैं, जैसे वे वायरल पोस्ट में नजर आ रहे हैं। लेकिन इसमें लिखा है, “सना खान के घर जल्द गूंजेगी किलकारी, इंटरव्यू में किया प्रेग्नेंसी का खुलासा।”

दैनिक जागरण की इंस्टाग्राम पोस्ट

16 मार्च 2023 को दैनिक जागरण ने इस संबंध में ऑनलाइन खबर भी प्रकाशित की है। इसका हेडलाइन है, “Sana Khan Pregnant: सना खान के घर जल्द गूंजेगी किलकारी। इंटरव्यू में किया प्रेग्नेंसी का खुलासा।” जाहिर है कि सना खान की प्रेग्नेंसी को लेकर जो तस्वीर वायरल की जा रही है वह फेक है। वह सिर्फ शौहर के अजमेर में ‘दुआ’ माँगने से गर्भवती नहीं हुई हैं।

‘ईसाई बनने के बाद हिंदू होने का दावा नहीं कर सकते’: केरल हाई कोर्ट ने वामपंथी MLA की सदस्यता रद्द की, SC सीट से जीते थे माकपा के ए राजा

धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले वामपंथी विधायक ए राजा की सदस्यता केरल हाई कोर्ट ने समाप्त कर दी है। वह CPI(M) के टिकट पर अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट से चुने गए थे। हाई कोर्ट ने उनकी विधायकी निरस्त करते हुए कहा कि ईसाई बनने के बाद कोई भी व्यक्ति हिंदू होने का दावा नहीं कर सकता है।

कॉन्ग्रेस नेता डी कुमार ने याचिका दायर कर उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी। आरोप लगाया था कि ईसाई बनने के बाद ए राजा ने फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का उपयोग कर चुनाव लड़ा था। इस याचिका पर सोमवार (20 मार्च 2023) को सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट के जस्टिस पी सोमराजन ने कहा है कि केरल की देवीकुलम सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। चूँकि नामांकन भरने से पहले ए राजा ईसाई बन चुके थे। इसलिए वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव नहीं लड़ सकते थे।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि ईसाई बनने के बाद ए राजा हिंदू धर्म से संबंधित होने का दावा नहीं कर सकते। इस आधार पर निर्वाचन अधिकारी को भी उनका नामांकन खारिज कर देना चाहिए था। अदालत ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 98 की धारा 1951 के तहत ए राजा का निर्वाचन अमान्य घोषित कर दिया।

क्या है मामला?

साल 2021 में केरल में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में देवीकुलम विधानसभा सीट से माकपा ने ए राजा और कॉन्ग्रेस ने डी कुमार को मैदान में उतारा था। नामांकन दाखिल करने के दौरान डी कुमार ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि ए राजा ईसाई हैं, इसलिए वह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव नहीं लड़ सकते। लेकिन तब निर्वाचन अधिकारी ने उनकी दलील खारिज कर दी थी।

इसके बाद डी कुमार ने हाई कोर्ट का रुख किया। वहाँ भी उन्होंने ए राजा के जाति-प्रमाण पत्र पर सवाल उठाए। ए राजा की शादी की तस्वीर, सीएसआई चर्च के पारिवारिक रजिस्टर के रिकॉर्ड, चर्च में हुए बपतिस्मा के रजिस्टर के रिकॉर्ड को कोर्ट में पेश किया। डी कुमार ने बताया कि ए राजा की पत्नी भी ईसाई हैं। उनकी शादी एक चर्च में हुई थी। तमाम सबूतों और दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने ए राजा का निर्वाचन रद्द कर दिया। साल 2021 में हुए केरल विधानसभा चुनाव में देवीकुलम सीट से माकपा प्रत्याशी रहे ए राजा ने कॉन्ग्रेस प्रत्याशी डी कुमार को 7847 वोटों से हराया था।

हिंदू लड़का-मुस्लिम लड़की, प्रेम कहानी से बिहार के एक गाँव में महीनों रहा तनाव; पंचायत ने मंदिर में कराई शादी: छपरा में राजा बाबू की हुई निशा

बिहार के छपरा में पंचायत की पहल के बाद हिंदू लड़का और मुस्लिम लड़की शादी के बंधन में बंध गए हैं। दोनों काफी समय से प्रेम में थे। लेकिन मजहब के नाम पर उनके घर वाले इस रिश्ते के खिलाफ थे। दोनों के परिवार इसको लेकर आपस में उलझ चुके थे। गाँव में तनाव का माहौल हो गया था। आख़िरकार पंचायत ने दोनों परिवारों को साथ बिठा कर शादी करवाने का फैसला सुनाया। दोनों परिवार फैसले से सहमत बताए जा रहे हैं। शादी सोमवार (20 मार्च 2023) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला छपरा के गड़खा बाजार क्षेत्र का है। यहाँ के रहने वाले साबिर अली शाह की बेटी निशा उसी क्षेत्र की चंदा देवी के बेटे राजा बाबू से प्यार करती थी। दोनों काफी दिनों तक छिप कर एक-दूसरे से मिलते रहे। जब इस मामले की जानकारी दोनों परिवारों को हुई तो उन्होंने नाराजगी जताई। मजहब अलग-अलग होने के चलते दोनों ही परिवारों ने इस रिश्ते का विरोध किया। इन बंदिशों से परेशान राजा बाबू और निशा घर से भागने की फिराक में थे।

बताया जा रहा है कि कुछ माह पहले मौक़ा पाकर राजा बाबू और निशा एक साथ घर छोड़ कर कहीं चले गए। इस बात को लेकर लड़की और लड़के के घर वालों में झगड़ा भी हुआ। गाँव में तनाव फ़ैल गया जो महीनों तक बना रहा। कुछ दिनों बाद हालात सामान्य होने पर गाँव के पंचों ने दोनों ही परिवारों से बात शुरू की। गाँव में पंचायत बुलाई गई, जिसमें राजा बाबू और निशा का परिवार मौजूद था। पंचायत ने लड़की और लड़के से उनकी राय जानी। दोनों ने एक साथ रहने की बात कही।

प्रेमी युगल की सहमति को देख पंचायत ने दोनों के एक साथ रहने का फैसला सुनाया। लड़की के अब्बा साबिर अली और लड़के की माँ चंदा देवी ने भी आखिरकार पंचायत में इस रिश्ते पर सहमति जता दी। दोनों पक्षों की हामी के बाद राजा बाबू और निशा को गाँव वालों की ही मौजूदगी में गड़खा बाजार के मंदिर में ले जाया गया। यहाँ हिन्दू विधि-विधान से विवाह कराया गया।

हर्ष मंदर के NGO की CBI करेगी जाँच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिया आदेश: विदेशी फंडिंग को लेकर गड़बड़झाला, सोनिया गाँधी का है करीबी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर (Harsh Mander) के एनजीओ ‘अमन बिरादरी’ के खिलाफ सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि इस एनजीओ ने एफसीआरए कानून का उल्लंघन करते हुए विदेशी चंदा हासिल किया था। हर्ष मंदर पूर्व कॉन्ग्रेस सोनिया गाँधी का करीबी है। यूपीए सरकार के दौरान वह सलाहकार परिषद के सदस्य के तौर पर भी लंबे समय तक काम कर चुका है।

दरअसल, विदेशी फंडिंग लेने के लिए किसी भी एनजीओ को अनिवार्य रूप से एफसीआरए के तहत गृह मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। हालाँकि, हर्ष मंदर के एनजीओ ‘अमन बिरादरी’ के पास एफसीआरए का क्लियरेंस नहीं था। लेकिन इसके बाद भी यह एनजीओ विदेशों से फंडिंग लेता रहा। इसलिए, अब एफसीआरए क्लियरेंस के बिना ही विदेशों से आए फंड की जाँच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया है।

हर्ष मंदर के विवादित एनजीओ अमन बिरादरी की वेबसाइट के अनुसार, यह एनजीओ धर्मनिर्पेक्ष, शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण, और मानवीय दुनिया बनाने का काम कर रहा है। इसका लक्ष्य गाँव और जिला स्तर पर संगठनों की स्थापना करना है। इसमें मुख्य रूप से विभिन्न पृष्ठभूमि और धर्म के युवाओं और महिलाएँ शामिल हैं। वेबसाइट में आगे कहा गया है कि इन संगठनों का उद्देश्य विभिन्न धर्मों, जातियों और भाषाई समूहों के व्यक्तियों के बीच अधिक सहिष्णुता, बंधुत्व, सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना है।

बता दें कि इससे पहले अक्टूबर 2022 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एफसीआरए कानूनों के कथित उल्लंघन के आरोप में कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी की अध्यक्षता वाले दो एनजीओ राजीव गाँधी फाउंडेशन (आरजीएफ) और राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (आरजीसीटी) का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था।

बता दें कि इससे पहले हर्ष मंदर का नाम नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर भी सामने आया था। तब हर्ष मंदर पर आरोप लगा था कि वह अपने एनजीओ में रहने वाले बच्चों का उपयोग CAA विरोधी आंदोलन में कर रहे हैं। इस मामले की जाँच करते हुए नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने दावा किया था कि हर्ष मंदर द्वारा चलाए जा रहे एनजीओ से बच्चों को विरोध प्रदर्शनों में ले जाया जाता था। इसके अलावा उस पर मनी लॉन्ड्रिंग और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का आरोप भी लग चुका है।