क्रिकेट का सबसे बड़ा मेला मतलब ODI वर्ल्ड कप (World Cup 2023) इस साल लगने वाला है। भारत में ही खेला जाएगा, यह तो पहले से पक्का था। किस दिन से किस दिन तक चलेगा, कहाँ होगा फाइनल – अब सब बातें मीडिया रिपोर्ट में आ गई हैं। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में फाइनल हो सकता है। 5 अक्टूबर से शुरू होकर 19 नवम्बर तक खेला जाएगा ODI वर्ल्ड कप।
46 दिन चलने वाले ODI वर्ल्ड कप (World Cup 2023) में कुल 48 मैच खेले जाएँगे। इसमें 3 राउंड नॉकआउट के होंगे। ODI वर्ल्ड कप का बुखार कुछ ऐसा है कि 7 महीने पहले से इंडियन क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड़ अपनी टीम तक सोच चुके हैं, वहीं पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भारत से 2011 का बदला लेने की बात कह कर अपनी मंशा जाहिर कर दी है।
The World Cup final is likely to be held in Ahmedabad
Ahmedabad aside, the shortlist for venues comprises Bengaluru, Chennai, Delhi, Dharamsala, Guwahati, Hyderabad, Kolkata, Lucknow, Indore, Rajkot and Mumbai
ESPN के अनुसार ODI वर्ल्ड कप मैचों के लिए मेजबान भारत के 11 शहरों की पहचान की गई है, जहाँ के स्टेडियम इस आयोजन के लिए उपयुक्त पाए गए हैं। इन शहरों के नाम अहमदाबाद, दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, राजकोट, कोलकाता, लखनऊ, चेन्नई, धर्मशाला, हैदराबाद और गुवाहाटी हैं। हालाँकि कौन सा मैच कहाँ होगा, इसे BCCI ने अभी अंतिम रूप नहीं दिया है। इस निर्णय से पहले तय स्टेडियम वाले शहरों में मॉनसून आदि का ध्यान रखा जाएगा।
भारतीय क्रिकेट टीम के कोच राहुल द्रविड़ के मुताबिक उन्होंने ODI वर्ल्ड कप 2023 के लिए टीम को लगभग तैयार कर लिया है। इसके लिए 17-18 खिलाड़ियों को अभी से चिन्हित कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड और श्रीलंका के साथ हुए पिछले मैचों से खिलाड़ियों के चयन में काफी मदद मिली।
राहुल द्रविड़ का कहना है कि अब खिलाड़ी आईपीएल भी खेलेंगे, इससे भी घरेलू मैदान पर एक तरह की प्रैक्टिस ही होगी। भारतीय कोच ने कुछ खिलाडियों के चोटिल होने पर चिंता जरूर जताई लेकिन साथ में टीम के अच्छी स्थिति में होने की बात कही।
Rahul Dravid discussed India’s plans for the upcoming ICC Men’s @cricketworldcup 2023 ahead of the third and final #INDvAUS ODI ?
ODI वर्ल्ड कप 2023 के लिए पाकिस्तान भी अभी से ताल ठोंक रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने कहा कि पाकिस्तानी टीम को साल 2011 का बदला लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। अख्तर ने उम्मीद जताई कि विश्वकप का फाइनल मैच भारत और पाकिस्तान के बीच मुंबई या अहमदाबाद में होना चाहिए और उसमें पाकिस्तान को जीत मिले। गौरतलब है कि साल 2011 विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 29 रनों से हराया था।
दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर मंगलवार (21 फरवरी, 2023) को सुनवाई हुई। राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई ने सिसोदिया की जमानत का विरोध किया। मनीष सिसोदिया ने अपने जमानत अर्जी में पत्नी की बीमारी का हवाला दिया है। वहीं मनीष सिसोदिया के वकील दयाल कृष्णन ने सीबीआई की जाँच पर सवाल उठाया।
मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि सिसोदिया को जमानत मिलने के बाद सबूतों को नष्ट किया जा सकता है, जिससे जाँच प्रभावित हो सकती है। सीबीआई के तरफ से कहा गया कि सिसोदिया ने लगातार सबूत नष्ट करने का काम किया है। सीबीआई के वकील डीपी सिंह ने अदालत को जानकारी दी कि सिसोदिया ने पूछताछ के दौरान फोन अपडेट करने के लिए नष्ट करने की बात कही थी जबकि उन्होंने चैट (सबूतों) को नष्ट करने के लिए फोन नष्ट किए।
दूसरी तरफ मनीष सिसोदिया के वकील दयाल कृष्णन ने जमानत माँगते हुए कहा कि उनकी पत्नी बीमार हैं। सिसोदिया की बीमार पत्नी की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। बेटा विदेश में पढ़ाई कर रहा है इसलिए पूर्व डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी है कि वे अपनी पत्नी की देखभाल करें। मनीष सिसोदिया की तरफ से कहा गया कि उन्होंने सीबीआई की जाँच और पूछ ताछ में पूरा सहयोग किया है। इसलिए मनीष सिसोदिया को हिरासत में रखकर पूछताछ की जरूरत नहीं है।
सीबीआई की तरफ से एलजी द्वारा एजेंसी को जाँच सौंपे जाने वाले दिन ही फोन बदले जाने को लेकर सवाल उठाया गया। इस पर कृष्णन ने कहाकि एलजी द्वारा मामले को सीबीआई को सौंपे जाने वाले दिन ही फोन बदला जाना सिर्फ एक संयोग है। कोर्ट में अब मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को दोपहर 2 बजे होगी। बता दें कि आबकारी घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया को पहले सीबीआई ने गिरफ्तार किया। इसके बाद ईडी ने भी उन्हें हिरासत में ले लिया है।
उत्तर प्रदेश के चंदौली में उमेश पाल हत्याकांड की जाँच कर रही यूपी पुलिस की टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। चंदौली के चकिया इलाके में माफिया अतीक अहमद के ऑफिस में सर्च ऑपरेशन चलाकर 5 गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है। तलाशी के दौरान ऑफिस से भारी मात्रा में कैश और हथियार भी बरामद किए गए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुखबिर की सूचना के आधार पर यूपी पुलिस की टीम ने चकिया के करबला में अतीक के पुराने ऑफिस पर छापेमारी की गई। काली कमाई से बनाए गए ऑफिस को 2 साल पहले बुलडोजर चला कर गिरा दिया गया था। बुलडोजर कार्रवाई के बाद 2 कमरे बच गए थे। कहा जा रहा है कि अतीक के गुर्गे इन दो कमरों में आया जाया करते थे। अचानक हुई पुलिस की छापेमारी में अतीक के 5 गुर्गों को पकड़ा गया कहा जा रहा है कि इनमें से 2 को उमेश पाल हत्याकांड की जानकारी थी और दोनों शूटर्स के संपर्क में थे।
अतीक के गुर्गों की निशानदेही पर 9 पिस्टल, 2 तमंचे समेत गोलियाँ और लगभग 70 लाख रुपए कैश बरामद हुए। बताया जा रहा है कि असलहे और कैश दीवारों और फर्श के साथ चुनवा कर रखे गए थे। जिन्हें तोड़ कर रुपए और असलहे बरामद किए गए। पुलिस इस ठीकाने को उमेश पाल हत्याकांड से जोड़कर देख रही है। पुलिस को शक है कि हत्याकांड में इस स्थान की भूमिका है। हालाँकि, फिलहाल इस बारे में अधिक विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है।
24 फरवरी 2023 को हुई थी उमेश पाल की हत्या
बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 24 फरवरी को उमेश पाल का मर्डर दिनदहाड़े हुआ था। कोर्ट से गवाही देकर लौट रहे उमेश के कार से उतरते ही बदमाशों ने उनपर ताबड़तोड़गोली चलाई थी। उनके साथ उनके दो गनर भी थे जिनमें से एक की वहीं मौत हुई जबकि दूसरे की इलाज के वक्त मौत हो गई थी। घटना के बाद सीएन योगी ने विधानसभा में साफ कहा था कि उनकी सरकार माफियाओं के खिलाफ है और उन्हें मिट्टी में मिला देगी।
अतीक के गुर्गों का एनकाउंटर
उमेश पाल हत्याकांड के बाद यूपी पुलिस की कार्रवाई में 27 फरवरी को बदमाश अरबाज का एनकाउंटर हुआ। उसके बाद 6 मार्च को शूटर उस्मान को ढेर कर दिया गया था। 16 मार्च 2023 को यूपी पुलिस ने 50 हजार रुपए के इनामी अपराधी को एनकाउंटर के बाद पकड़ लिया। वहीं बमबाज गुड्डू मुस्लिम, अतीक के बेटे असद और बाकी आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है।
जहाँ लंदन में खालिस्तानियों के खिलाफ भारतीय प्रवासी सड़क पर उतर आए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में भी सिख नेताओं ने भारतीय दूतावासों पर हमले की निंदा की है। लंदन और सैन फ्रांसिस्को में खालिस्तानियों ने भारतीय दूतावास पर हमला करते हुए तिरंगे झंडे का अपमान किया था और जम कर तोड़फोड़ मचाई थी। पंजाब में अलगववादी अमृतपाल सिंह के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर ये असामाजिक तत्व भड़के हुए हैं।
लंदन में भारतीय हाई कमीशन के सामने बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय समाज का जुटान हुआ। इन्होने माँग की कि लंदन के गवर्नर सादिक खान और स्थानीय प्रशासन दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे। भारत की एकता और भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सम्मान में पूरे ब्रिटेन से भारतीय मूल के लोग जुटे। उन्होंने कहा कि उन्हें बयान नहीं, कार्रवाई चाहिए। साथ ही ‘जय हो’ गाने पर उन्होंने डांस भी किया। इस दौरान ब्रिटिश सुरक्षाकर्मी भी भारतीयों के साथ नाचते दिखे।
भारतीय प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रविवार (19 मार्च, 2023) को जिस तरह खालिस्तानियों ने भारतीय दूतावास पर हमला किया, उसके बाद उनका कर्तव्य था कि वो सड़क पर उतरें। उन्होंने कहा कि भारतीय ध्वज के अपमान के प्रति आपत्ति जताना और अपने गुस्से का इजहार करना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि तिरंगे के लिए हम सब एक हैं। भारत ने भी ब्रिटेन के राजदूत को तलब कर इस घटना पर आपत्ति जताई थी।
इसी तरह सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमले की निंदा वहाँ के सिख नेताओं ने भी की है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन तोड़फोड़ का नहीं। सिख नेता जसदीप सिंह ने कहा कि किसी भी रूप में हिंसा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने लंदन की घटना की भी निंदा की। हालाँकि, उन्होंने कहा कि 10 लाख में से मुट्ठी भर सिखों ने ही ये सब किया और अमेरिका-कनाडा में खालिस्तानियों के प्रभाव वाली बात मीडिया बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है।
Whatever happened in Punjab is very unfortunate. I also condemn the violence incident that happened in United Kingdom & at Indian consulate in San Francisco. As we are democratic country, we have full rights to protest but it should be peaceful: Balgendra Singh Shami, Sikh leader pic.twitter.com/r0d7FcEXHo
उधर, सिख नेता बालगेन्द्र सिंह शमी ने भी कहा कि अमेरिका-इंग्लैंड में भारतीय दूतावास पर हमले की वो निंदा करते हैं। हालाँकि, उन्होंने ये भी जोड़ा कि पंजाब में जो भी हो रहा है वो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार का प्रयोग किया जाना चाहिए, लेकिन एकदम शांतिपूर्ण ढंग से। भारतीय समाज पहले ही FBI और अन्य उच्च-स्तरीय एजेंसियों से मामले की जाँच की माँग की है। उधर भारत में अमृतपाल सिंह अभी भी फरार है।
कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक को ओमान से पकड़ कर भारत लाया जा सकता है। खुफिया सूत्रों के हवाले से ‘नेटवर्क 18’ ने जानकारी दी है कि 23 मार्च को जाकिर नाइक ओमान पहुँचने वाला है। उसी दौरान उसे हिरासत में लेने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए भारतीय खुफिया एजेंसियाँ ओमान के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जाकिर नाइक को ओमान में 2 कार्यक्रमों को संबोधित करने के लिए बुलाया गया है। पहला कार्यक्रम 23 मार्च, 2023 को ओमान के अवकाफ और मजहबी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Awqaf and Religious Affair) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में इस्लामी मुबल्लिग़ “कुरान एक वैश्विक जरूरत (The Quran a Global Necessity)” पर अपना व्याख्यान देगा। ओमान में जाकिर नाइक का दूसरा कार्यक्रम 25 मार्च को सुल्तान कबूस यूनिवर्सिटी (Qaboos University) में आयोजित होगा।
इस कार्यक्रम में उसे “पैगम्बर मुहम्मद इंसानों के लिए एर रहमत (Prophet Muhammad A Mercy to Humankind)” पर लेक्चर देना है।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी स्थानीय कानूनों के अनुसार जाकिर नाइक को हिरासत में लेने की कोशिश में हैं। इसके लिए स्थानीय एजेंसियों से बातचीत की जा रही है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि भारतीय अधिकारियों के अनुरोध पर स्थानीय अधिकारी नाइक को हिरासत में ले लेंगे।
हिरासत में लिए जाने के बाद भारतीय एजेंसियों द्वारा आगे की कार्रवाई के लिए एक टीम ओमान भेजी जा सकती है। बता दें कि पिछले दिनों विदेश मंत्रालय द्वारा ओमानी राजदूत के समक्ष इस मुद्दे को उठाया गया था। ओमान में भी भारतीय राजदूतों (Indian ambassadors) ने नाइक के मुद्दे को वहाँ के विदेश मंत्रालय के समक्ष रखा था।
इस बीच भारतीय मीडिया द्वारा संभावित गिरफ्तारी की खबरें दिखाए जाने के बाद जाकिर नाइक ओमान का दौरा करेगा या नहीं फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है। भारत में भगोड़ा घोषित होने के बाद से उसने मलेशिया में शरण ली हुई है। जुलाई 2016 में बांग्लादेश के ढाका में बम धमाके के बाद जाकिर नाइक भारत से भाग गया था। इस धमाके में 29 लोगों की मौत हुई थी। हमले में शामिल आतंकियों ने कहा था कि वो नाइक के भाषणों से प्रभावित थे।
जाकिर नाइक पर भारत में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को बढ़ावा देने, धर्मांतरण से जुड़ाव, समाज में नफरत फैलाने, हेट स्पीच सहित कई गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से मामले दर्ज किए गए हैं। वर्ष 2019 में जाकिर को हिंदुओं और चीनी मलेशियाई लोगों के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणी करने के बाद मलेशिया में भाषण देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस सिलसिले में उनसे घंटों पूछताछ भी की गई थी।
पिछले साल ऑपइंडिया ने अपने एक रिपोर्ट में बताया कि कैसे उसने पहले इंग्लैंड के मिडलैंड्स क्षेत्र में लीसेस्टर में हिंसा भड़काने वालों के साथ हाथ मिलाया था। फीफा वर्ल्ड कप 2022 के दौरान कतर ने जाकिर नाइक को निमंत्रण भेजा था। भारत द्वारा इस पर कड़ी आपत्ति जताने के बाद कतर ने सफाई दी थी। कतर ने कहा था कि जाकिर नाइक को दोहा में आयोजित फीफा विश्व कप के कार्यक्रम में आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया था।
तथाकथित फैक्ट चेकर और ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने हिंदू राजाओं को अंग्रेजों द्वारा फाँसी जाने की घटना का मजाक उड़ाया है। मंगलवार (21 मार्च, 2023) को एक ट्वीट में, जुबैर ने कहा है कि शिवगंगा साम्राज्य के राजाओं मारुथु भाइयों (मारुथु पांडियार) ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें 1801 में तिरुपुथुर किले मे सरेआम फाँसी पर लटका दिया। इस ट्वीट के अंत में जुबैर ने मजाक उड़ाने के लिए ‘लाफिंग’ इमोजी का इस्तेमाल किया।
दरअसल, जुबैर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्नाटक दौरे पर उनके स्वागत के लिए लगाए गए एक पोस्टर को ‘गलत’ बताते हुए ट्वीट किया था। इस ट्वीट के जरिए उसने कर्नाटक में भाजपा पर निशाना साधा था। ट्वीट में जुबैर ने कहा था कि बीजेपी मारुथु भाइयों की तस्वीरों को उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा की तस्वीरें बता रही है। ये वही गौड़ा हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि इन्होंने इस्लामी आक्रांता और मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान को मार डाला था।
मोहम्मद जुबैरके ट्वीट का स्क्रीनशॉट
यही नहीं, जुबैर ने उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा को काल्पनिक पात्र करार दिया। साथ ही कहा कि बीजेपी उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा और मारुथु ब्रदर्स के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है। मोहम्मद जुबैर ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई का एक पुराना ट्वीट भी शेयर किया। इसमें अन्नामलाई को मारुथु पांडियार भाइयों की तस्वीर के सामने सिर झुकाते देखा जा सकता है। इस ट्वीट में उसने कर्नाटक भाजपा के नेता सीटी रवि का मजाक उड़ाते हुए कहा कि के अन्नामलाई, सीटी रवि को इतिहास की सही जानकारी नहीं दे सके।
Karnataka Minister & film producer Munirathna @MunirathnaMLA later made a U-turn & said he decided against making the film titled Uri Gowda-Nanje Gowda. Not sure if he still know that images used are of Maruthu Pandiyar brothers. ? pic.twitter.com/z0QsRPa4sm
बता दें कि कर्नाटक के मांड्या में बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन कार्यक्रम से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए ‘आर्क गेट’ बनाया था। लेकिन बाद में इस गेट को लेकर विवाद हो गया। कर्नाटक भाजपा के कार्यकर्ताओं ने वोक्कालिगा समाज के प्रमुख उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा की जमकर तारीफ की गई थी। लेकिन इसको लेकर विरोध बढ़ने के बाद वोक्कालिगा समुदाय के दिवंगत संत श्री बालगंगाधरनाथ स्वामीजी की फोटो लगाई गई।
यह विवाद यहीं नहीं रुका। दरअसल, कर्नाटक के बागवानी मंत्री मुनिरत्ना के फिल्म प्रोडक्शन स्टूडियो ने इस्लामिक आक्रांता टीपू सुल्तान की हत्या करने वाले वोक्कालिगा सरदारों उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा पर एक बायोपिक बनाने की योजना बनाई थी। यह फिल्म मैसूर की उन किंवदंतियों पर आधारित थी, जिनमें कहा जाता था कि टीपू सुल्तान को दो वोक्कालिगा सरदारों, उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा ने मार डाला था।
हालाँकि, कई इतिहासकार ऐसे दावे को खारिज करते हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि टीपू सुल्तान की हत्या वोक्कालिगा सरदारों ने नहीं, अंग्रेजों ने की थी। कॉन्ग्रेस और जेडीएस का भी यह भी दावा है कि उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा कभी थे ही नहीं और वे महज एक काल्पनिक पात्र हैं। हालाँकि, भाजपा का कहना है कि वोक्कालिगा सरदारों ने ही टीपू को मारा और इसके ऐतिहासिक सबूत हैं।
ಕಲ್ಪಿತಕಥೆ, ಸುಳ್ಳುಗಳಿಂದಲೇ ಜನರ ಮನಸ್ಸಿನಲ್ಲಿ ವಿಷಬೀಜ ಬಿತ್ತಿ ಕರ್ನಾಟಕವನ್ನು ಅಲ್ಲೋಲಕಲ್ಲೋಲ ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಬಿಜೆಪಿ ವಕ್ರದೃಷ್ಟಿ ಸದ್ಯಕ್ಕೆ ಒಕ್ಕಲಿಗರ ಮೇಲೆ ಬಿದ್ದಿದೆ.ಸ್ವಾಭಿಮಾನಿ ಒಕ್ಕಲಿಗರನ್ನು ಹೇಗಾದರೂ ಹಳ್ಳ ಹಿಡಿಸಲೆಬೇಕೆಂಬ ಹಿಡೆನ್ ಅಜೆಂಡಾ @BJP4Karnataka ಗೆ ಇರುವುದಂತೂ ಸತ್ಯ.1/11#ಒಕ್ಕಲಿಗರ_ಮೇಲೆ_ಬಿಜೆಪಿ_ವಕ್ರದೃಷ್ಟಿpic.twitter.com/dnJZgHRqub
— ಹೆಚ್.ಡಿ.ಕುಮಾರಸ್ವಾಮಿ | H.D.Kumaraswamy (@hd_kumaraswamy) March 17, 2023
जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी करार दिया। साथ ही आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए भाजपा वोक्कालिगा समुदाय को स्वतंत्रता सेनानी के हत्यारों के रूप में पेश कर रही है। उन्होंने भाजपा पर वोक्कालिगा समुदाय को बदनाम करने का भी आरोप लगाया। हालाँकि, जेडीएस और कॉन्ग्रेस के दावों को खारिज करते हुए, वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री (MOS) शोभा करंदलाजे ने कहा कि उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा वास्तविक थे, उनके बारे में ऐतिहासिक सबूत भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों गौड़ा ने मैसूर महाराजा के परिवार और राज्य की रक्षा के लिए टीपू सुल्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
वहीं, इस विवाद के बीच कर्नाटक के बागवानी मंत्री और फिल्म निर्माता मुनिरत्ना ने सोमवार (20 मार्च, 2023) को कहा है कि वह उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा पर फिल्म नहीं बनाएँगे। दरअसल, इस फिल्म के निर्माण का वोक्कालिगा संघ ने कड़ा विरोध किया था। वोक्कालिगा संघ की ओर से कहा गया था यदि फिल्म बनाने का विचार नहीं छोड़ा गया तो उनके समुदाय के दो संतों के नेतृत्व में आंदोलन होगा।
इससे पहले मुनिरत्ना ने वोक्कालिगा समुदाय के धार्मिक नेता आदिचुनचनगिरी के संत निर्मलानंद स्वामी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि वोक्कालिगा समुदाय और विपक्षी दलों की धमकियों और विरोध के बाद फिल्म नहीं बनाने का फैसला किया है। मुनिरत्ना ने कहा है कि कोई भी फिल्म बनाना मुश्किल काम नहीं है। लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि इससे किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुँचे। उन्होंने यह भी कहा कि उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा विवादित व्यक्ति हैं।
वहीं, निर्मलानंद स्वामी ने कहा है, “कोई भी इतिहास जो उस समय के इतिहासकारों द्वारा दर्ज नहीं किया गया है, विवाद का विषय होगा। इसलिए इस मुद्दे पर अकेले ध्यान केंद्रित करना सही नहीं है।”
I want to thank Shri Nirmalananda Swamiji of Adichunchanagiri Mahasamsthana Mutt for speaking the truth and exposing the communal agenda of the @BJP4Karnataka.
His statement shows clearly that the BJP will drop to any extent to polarise the people of Karnataka. pic.twitter.com/ZpFjCsebus
इस मुद्दे पर तथाकथित फैक्ट चेकर और हिंदू घृणा से भरे हुए मोहम्मद जुबैर के ट्वीट को देखें तो उसने दावा किया कि मुनिरत्ना ने मारुथु भाइयों के फोटो का भी इस्तेमाल किया था और उन्हें ‘काल्पनिक’ पात्रों गौड़ा भाइयों के रूप में दिखाकर लोगों को भ्रमित किया था। साथ ही वह इस बात पर हँस रहा था कि हिंदू शासकों को अंग्रेजों ने फाँसी दे दी।
मोहम्मद जुबैर वही व्यक्ति है जिसने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा का पैगंबर मोहम्मद को लेकर आधा वीडियो शेयर किया था। उसके वीडियो शेयर करने के बाद नुपूर शर्मा को बलात्कार से लेकर जान से मारने तक की धमकियों का सामना करना पड़ा। नुपूर आज भी अपने घर की चारदीवारी में कैद रहने को मजबूर हैं। यही नहीं, जुबैर के कारण ही उमेश कोल्हे से लेकर कन्हैयालाल तक की हत्या हो गई और न जाने कितने लोगों को डर और धमकियों का सामना करना पड़ा।
मोहम्मद जुबैर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने के आरोप में जेल भी जा चुका है। उस पर दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर धर्म का अपमान करने के लिए IPC की धारा 153, 295 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
उल्लेखनीय है कि कई मुस्लिम और तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी तथा खुद को बुद्दिजीवी बताने वाले लोग इस्लामिक आक्रांता टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि टीपू सुल्तान फ्रांसीसियों के साथ था और उसने अपने राज्य को बचाने के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। वास्तव में वह एक इस्लामिक अत्याचारी था जिसने अगणित हिंदुओं का नरसंहार किया और हजारों हिंदुओं को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में चूक को लेकर पंजाब सरकार ने एक्शन लिया है। सरकार ने तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, फिरोजपुर के तत्कालीन डीआईजी इन्द्रबीर सिंह, तत्कालीन एसएसपी हरमनदीप हंस के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए। इस मामले में जल्द ही कई अन्य छोटे-बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिरने की आशंका जताई जा रही है।
दरअसल, प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में केंद्र ने गत सप्ताह पंजाब सरकार से कार्रवाई में हुई देरी को लेकर जवाब तलब किया था। इसके बाद से पंजाब सरकार एक्शन में है। सरकार ने पूर्व डीजीपी, पूर्व डीआईजी और एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देने के अलावा कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
PM’s security breach in Punjab in Jan 2022 | Punjab CM Bhagwant Mann has decided to initiate disciplinary proceedings for major penalty against Sidharth Chattopadhya, the then DGP Punjab, Inderbir Singh, the then DIG, Ferozepur Range and Harmandeep Singh Hans, the then SSP… https://t.co/zVpUges5Pspic.twitter.com/uh12DdSHfy
इसमें, तत्कालीन एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर नरेश अरोड़ा, तत्कालीन एडीजीपी साइबर क्राइम जी नागेश्वर राव, तत्कालीन आईजीपी पटियाला रेंज मुखविंदर सिंह, तत्कालीन आईजी काउंटर इंटेलिजेंस राकेश अग्रवाल, तत्कालीन डीआईजी फरीदकोट सुरजीत सिंह और मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह का नाम शामिल है। इन सभी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर पूछा गया है कि जाँच समिति की सिफारिश के अनुसार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए?
गौरतलब है कि पीएम की सुरक्षा में चूक एक गंभीर मामला है। इस मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अगुवाई में 5 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। इस समिति ने 6 महीने पहले ही अपनी जाँच रिपोर्ट पेश कर चुकी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी, डीजीपी सिद्धार्थस चट्टोपाध्याय समेत अन्य अधिकारियों को पीएम की सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। हालाँकि 6 महीने बीत जाने के बाद भी पंजाब की भगवंत मान सरकार प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक के आरोपितों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी।
इसके बाद गत सप्ताह पंजाब केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने पंजाब के मुख्य सचिव विजय कुमार जंजुआ से इस मामले में हुई अब तक पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट जमा करने के किए कहा था। साथ ही, इस कार्रवाई में राज्य सरकार की ओर से हुई देरी को लेकर जवाब माँगा था।
क्या है मामला
यह मामला 5 जनवरी 2022 का है। तब, पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के दौरे पर थे। इसी दौरान ‘आंदोलनकारियों’ की भीड़ ने फिरोजपुर में एक फ्लाई ओवर पर प्रधानमंत्री के काफिले को रोक दिया। यह काफिला करीब 30 मिनट तक रुका रहा। इसके बाद पीएम मोदी को अपना पूरा कार्यक्रम रद्द कर दिल्ली वापस लौटना पड़ा था। इस घटना के बाद तत्कालीन पंजाब सरकार की जमकर थू-थू हुई थी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। जहाँ से जाँच के लिए समिति बनाई गई।
टेरर फंडिंग मामले की जाँच कर रही NIA ने श्रीनगर में एक कश्मीरी पत्रकार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार पत्रकार का नाम इरफ़ान मेहराज है जो कथित तौर पर फ्रीलांसिंग पत्रकारिता करता है। इरफ़ान का संबंध NGO के माध्यम से पैसे जुटाने और उस पैसे को आतंकी घटनाओं के प्रयोग करने वाले नेटवर्क से बताया जा रहा है। ‘खुर्रम परवेज’ से जुड़े इस आरोपित की गिरफ्तारी सोमवार (20 मार्च, 2023) को हुई है। इरफ़ान से पूछताछ की जा रही है। उस पर UPPA के तहत कार्रवाई की गई है। टेरर फंडिग की जाँच के दौरान यह NIA द्वारा पहली गिरफ्तारी बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इरफ़ान श्रीनगर के मजजूर नगर में रहता है। वह टेरर फंडिंग के उस नेटवर्क से जुड़ा हुआ था जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य आदि अच्छे कामों के लिए NGO बना कर लोगों से पैसे जुटाए जाते थे। बाद में इन्ही पैसों को कश्मीर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में ख़र्च किया जाता था। जाँच के दौरान इन पैसों को दिल्ली में भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। NGO के माध्यम से टेरर फंडिंग करने वाली गैंग के लश्कर ए तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी समूहों से भी कनेक्शन बताए जा रहे हैं।
21 मार्च को NIA ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि जिस संगठन से इरफ़ान जुड़ा था उसका नाम जम्मू एंड कश्मीर कोअलिशन ऑफ़ सिविल सोसाइटीज था। इसे शार्ट में JKCCS नाम से जाना जाता है। इस NGO से जुड़े लोग खुद को मानवाधिकार का काम करने वाले कार्यकर्ता बताया करते थे। NIA का कहना है कि उनके पास इन आरोपों के पर्याप्त सबूत हैं कि JKCCS घाटी में आतंकी गतिविधियों के लिए पैसे जुटा रहा था। NIA ने यह भी बताया है कि सभी प्रकार के रजिस्टर्ड और नॉन रजिस्टर्ड NGO की जाँच करवाई जा रही है।
NIA ने बताया कि कई NGO और ट्रस्ट भारत के खिलाफ न सिर्फ नफरत का माहौल बनाते हैं बल्कि राष्ट्र विरोधी चीजें भी प्रकशित किया करते हैं। ऐसे NGO और ट्रस्टों को NIA ने देश की एकता और अखंडता के साथ सम्प्रभुता के लिए खतरा बताया है। गिरफ्तार किया गया इरफ़ान मेहराज जिस खुर्रम परवेज का करीबी बताया जा रहा है उसे NIA ने नवम्बर 2021 में गिरफ्तार किया था। खुर्रम परवेज और उसके 6 अन्य साथियों पर कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों की ख़ुफ़िया जानकारी जुटा कर लश्कर ए तैयबा आतंकियों को देने का आरोप है।
मई 2022 में NIA ने खुर्रम परवेज और उसके 6 साथियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
भगोड़े खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह की कई तस्वीरें पंजाब पुलिस ने जारी की है। इन तस्वीरों में वह अलग-अलग लुक में दिख रहा है। एक तस्वीर में वह बिना दाढ़ी और पगड़ी के भी दिख रहा है। पंजाब पुलिस ने तस्वीर जारी करते हुए उसे पकड़ने में लोगों से मदद की अपील की है। पुलिस को शक है कि वह हुलिया बदलकर भागा है।
पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने कहा, “अमृतपाल सिंह की अलग-अलग हुलिए में कई तस्वीरें हैं। हम इन तस्वीरों को जारी कर रहे हैं। मीडिया से आग्रह है कि वह इन तस्वीरों को प्रदर्शित करें ताकि लोग अमृतपाल को गिरफ्तार करने में पुलिस की मदद कर सकें।” उन्होंने बताया कि उसे पकड़ने के लिए हरसंभव प्रयास जारी है। पंजाब पुलिस को अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों से भी पूरी मदद मिल रही है।
Punjab Police releases a few pictures of ‘Waris Punjab De’ chief Amritpal Singh, requesting people to help them in his arrest. pic.twitter.com/cXbQayGsdm
उन्होंने बताया कि अमृतपाल सिंह पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) लगाया गया है। उसके खिलाफ 18 मार्च को वारंट जारी किया गया था। अब तक 154 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हथियारों की बरामदगी भी हुई है। आईजी सिंह ने बताया कि इस मामले में चार और गिरफ्तारी हुई है। इनकी पहचान मनप्रीत, गुरदीप, हरप्रीत और गुरपेज के तौर पर बताई गई है। इन पर अमृतपाल सिंह को भगाने में मदद का आरोप है।
पंजाब पुलिस के आईजी ने बताया कि शुरुआती जाँच से पता चला है कि इनलोगों की मदद से अमृतपाल नांगल अम्बियां के गुरुद्वारा साहिब में गया। वहाँ उसने कपड़े बदले और दो मोटरसाइकिल से फरार हो गए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस वैधानिक तरीके से आगे बढ़ रही। कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। लेकिन मुख्य आरोपित अमृतपाल सिंह अभी गिरफ्त से दूर है।
National Security Act (NSA) has been invoked against Amritpal Singh…A non-bailable warrant has been issued against him on 18th March: Punjab IGP Sukhchain Singh Gill pic.twitter.com/5MKEm5NMSZ
गौरतलब है कि इससे पहले हाई कोर्ट ने ‘वारिस पंजाब दे’ के भगोड़े प्रमुख अमृतपाल सिंह को अभी तक पकड़ नहीं पाने को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई थी। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा, “उसे पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। इसके बावजूद वह भागने में कामयाब रहा। पंजाब सरकार का खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल रहा।” साथ ही पूछा कि राज्य के 80 हजार पुलिस वाले क्या कर रहे थे?
भारत सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम 1967 (UAPA) के तहत 23 आतंकवादियों को सूचीबद्ध किया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (MoS Home Nityanand Rai) ने मंगलवार (21 मार्च, 2023) को लोकसभा में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 और 2023 में अब तक 23 व्यक्तियों के नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची में जोड़े गए हैं। इसको लेकर सरकार ने एक सूची भी जारी की है।
इसमें पहले नंबर पर लश्कर-ए-तयैबा का मुखिया हाफिज सईद है। इसके बाद जैश-ए-मोहम्मद का मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर और मक्ताब आमिर है। इसके साथ ही इस लिस्ट में हिज्बुल-मुजाहिदीन के इम्तियाज अहमद का भी नाम है।
23 individuals have been designated as terrorists under the Unlawful Activities (Prevention) Act; 1967 during 2022 and till date, and their names have been added in the Fourth Schedule of the Act: MoS Home Nityanand Rai to Lok Sabha during Budget session of Parliament pic.twitter.com/KdQpreOucv
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा जारी की गई सूची में कई इस्लामिक आतंकवादी और 2 खालिस्तानी आतंकवादी शामिल हैं। आतंकवादियों में नामों में हाफिज सईद, शेख सज्जाद, हबीबुल्ला मलिक, मोहम्मद अमीन खुबैब और पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के अरबाज अहमद मीर, मोहिउद्दीन औरंगजेब आलमगीर, अली काशिफ जान और जैश-ए-मोहम्मद के आशिक अहमद नेंगरू शामिल हैं। जेकेएलएफ से मुश्ताक अहमद जरगर, अल बद्र से अर्जुमंद गुलजार डार, इम्तियाज अहमद कंडू, शौकत अहमद शेख, बशीत अहमद रेशी, बशीर अहमद पीर, इरशाद अहमद और हिज्बुल मुजाहिदीन से आसिफ मकबूल डार है।
इनके अलावा तहरीक-उल-मुजाहिदीन से रफीक नाई और शेख जमील उर रहमान, HUJI से जफर इकबाल, जेकेआईएफ से बिलाल अहमद बेग और अल कायदा से एजाज अहमद अहंगर उर्फ अबू उस्मान अल कश्मीरी है।
यूएपीए के तहत 2022 में सूचीबद्ध किए गए 2 खालिस्तानी आतंकवादियों में से एक केटीएफ से अर्शदीप सिंह गिल और बब्बर खालसा इंटरनेशनल से हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा है। पिछले हफ्ते गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा को बताया कि 2023 में अब तक 4 आतंकवादी संगठनों को यूएपीए की पहली अनुसूची के तहत सूचीबद्ध किया गया है। इन 4 आतंकवादी संगठनों के नाम द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF), पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (PAFF), जम्मू एंड कश्मीर गजनवी फोर्स (JKGF) और खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) हैं।
TRF, LeT का हालिया प्रॉक्सी है। PAFF, JeM के लिए एक प्रॉक्सी है। 2020 में JKGF सामने आया। इसमें LeT, JeM, HUJI और TUM के आतंकवादी शामिल हैं। राय ने यह भी बताया कि केटीएफ, जो 2011 में सामने आया, वह बब्बर खालसा की एक शाखा है।
गृह राज्य मंत्री ने संसद को आगे बताया कि कुल मिलाकर 54 आतंकवादियों और 44 संगठनों को यूएपीए की चौथी और पहली अनुसूची के तहत सूचीबद्ध किया गया है।