भगोड़े खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को लेकर लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के साथ तैयार किए गए एक डोजियर में खुलासा हुआ है कि अमृतपाल सिंह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के इशारे पर दुबई से भारत आया था। इसके लिए उसने जॉर्जिया में ट्रेनिंग ली थी। यही नहीं, वह ड्रग रिहैब सेंटर के नाम पर गुरुद्वारे का उपयोग हथियार रखने के लिए कर रहा था। साथ ही युवाओं को भड़काकर उन्हें ‘मानव बम’ बनाने की तैयारी में था।
दरअसल, देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने अमृतपाल सिंह को लेकर अपने-अपने इनपुट दिए हैं। इस इनपुट के सहारे एक खुफिया डोजियर तैयार किया गया है। इस डोजियर में दावा किया गया है कि अमृतपाल सिंह विदेशों में रह रहे खालिस्तानी आतंकियों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर दुबई से भारत आया था। इससे पहले उसे भारत में खालिस्तान की जड़ों को मजबूत करने और पंजाब में उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए ISI ने दुबई में पैसों का ऑफर दिया था। इस ऑफर के चलते ही अमृतपाल सिंह साल 2022 में भारत आया था।
Amritpal Singh used drug rehab centres and gurdwara to store weapons and brainwashed youth to execute suicide attacks: Reportshttps://t.co/ug9jfKAcY7
हालाँकि भारत आने से पहले वह पूर्वी यूरोपीय देश जॉर्जिया गया था। वहाँ ISI के इशारे पर उसे भारत में आतंक फैलाने के लिए वकायदा ट्रेनिंग दी गई थी। इस ट्रेनिंग में उसे हथियार चलाने से लेकर भारत का माहौल खराब करने के लिए पूरी तरह से तैयार किया गया था। यही कारण है कि अमृतपाल सिंह के भारत आने के बाद से पंजाब में खालिस्तानी गतिविधियाँ जोर पकड़ रहीं थीं। भारत में खालिस्तानी गतिविधियों के बढ़ने से कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हिंदुओं और उनके मंदिरों पर हमलों की संख्या में अचानक से बढ़ोतरी हो गई थी।
इसके अलावा, अमृतपाल सिंह के खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू तथा उसके संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से भी संबंध हैं। वह एसएफजे के सोशल मीडिया कैंपेन का भी हिस्सा रह चुका है। बता दें कि पन्नू को भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है।
मानव बम बनाने के लिए कर रहा था ब्रेनवॉश
यह भी सामने आया है कि वह आईएसआई के इशारे पर ‘खड़कु’ या मानव बम बनने के लिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर कर रहा था। यही नहीं, अमृतपाल सिंह अपने संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्र या ड्रग रिहैब सेंटर के सहारे युवाओं को ‘बंदूक संस्कृति’ की ओर धकेलने की कोशिश में लगा हुआ था। वह नशा मुक्ति केंद्रों तथा गुरुद्वारों का उपयोग हथियारों का जखीरा इकट्ठा करने के लिए भी करता था।
साथ ही वह ISI की सहायता से भारत में ड्रग तस्करी के काम में भी लगा हुआ था। वास्तव में, सितंबर 2022 में अमृतपाल के भारत आने के बाद से सीमा पार से ड्रोन के सहारे ड्रग्स और हथियार गिराने की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में सामने आया है कि अमृतपाल सिंह की मंशा युवाओं को भड़काकर खालिस्तानी आतंकी दिलावर सिंह की तरह आत्मघाती हमलों के लिए तैयार करना था। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर के म्यूजियम में भी आतंकी दिलावर सिंह की फोटो लगाई गई थी। यह फोटो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने लगाई थी। दिलावर सिंह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा है।
उसने मानव बम बनकर 31 अगस्त, 1995 को बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी। पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमृतपाल सिंह मारे गए आतंकवादियों को याद करने के लिए आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों ‘शहीदी समागम’ में शामिल होता था। जहाँ वह लोगों को हथियार इस्तेमाल करने की बात कहता था।
खुद की फौज बना रहा था अमृतपाल सिंह…
खुफिया एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया है कि अमृतपाल सिंह ‘आनंदपुर खालसा फौज’ के नाम से अपनी ‘प्राइवेट आर्मी’ बनाने में जुटा हुआ था। पुलिस ने अब तक जो बुलेटप्रूफ जैकेट और राइफल बरामद की गई हैं उनमें और अमृतपाल सिंह के घर के दरवाजे पर एकेएफ (AKF) लिखा हुआ था। इसका मतलब भी ‘आनंदपुर खालसा फौज’ ही है। इस फौज के सहारे अमृतपाल और आईएसआई के इशारे पर नाच रहे उसके खालिस्तानी समर्थक दिल्ली में हमले की साजिश रच रहे थे। जाँच एजंसियों से इनपुट मिलने के बाद ही पुलिस ने आतंक फैलाने की तैयारी कर रहे अमृतपाल और उसके खालिस्तानी साथियों पर शिकंजा कसा है।
ब्रिटेन के लंदन स्थित भारतीय दूतावास के बाद बाद अब खालिस्तानियों ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिया दूतावास पर हमला कर दिया है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया के संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। बता दें कि पंजाब में अलगाववादी अमृतपाल सिंह पर पुलिस की कार्रवाई के कारण दुनिया भर में सिख कट्टरपंथी नाराज़ हैं। भारत सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंजाब सरकार ये कार्रवाई कर रही है।
सैन फ्रांसिस्को स्थित इंडियन कॉन्सुलेट पर हमले की कई भारतीय-अमेरिकियों ने निंदा की है। ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS)’ ने अपने बयान में कहा है कि लंदन और SFO में कानून व्यवस्था के पूर्ण रूप से विफल होने के कारण वे हैरान हैं। संगठन ने कट्टरपंथियों द्वारा भारतीय मिशन को निशाना बनाए जाने की निंदा की। सैन फ्रांसिस्को में खालिस्तानी नारों के साथ भीड़ ने सिक्योरिटी बैरियर को भी तोड़ डाला।
ये बैरियर सिटी पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगाए थे। इतना ही नहीं, भारतीय वाणिज्य दूतावास के परिसर के भीतर खालिस्तानी झंडे भी लगा दिए गए। हालाँकि, कर्मचारियों ने तुरंत ही इन झंडों को हटा दिया। इसके कुछ देर बाद ही कट्टरपंथियों की भीड़ लौटी और खिड़की-दरवाजे पर लोहे की रॉड से हमला किया जाने लगा। भारतीय समाज के नेता अजय भूतोड़िया ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ये न सिर्फ भारत-अमेरिका के संबंधों पर खतरा है, बल्कि समाज की शांति और समरसता के लिए भी ठीक नहीं है।
Whether vandalizing consulates in the UK & San Francisco or Gandhi statues & Hindu temples, Khalistan flags are a ubiquitous presence & seen as a symbol of hate & terror.
— Hindu American Foundation (@HinduAmerican) March 20, 2023
उन्होंने स्थानीय प्रशासन से त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की। FIIDS ने इन घटनाओं को ‘वियना कन्वेंशन’ के अंतर्गत दूतावासों और अन्य कूटनीतिक दफ्तरों की सुरक्षा सम्बंधित करार का उल्लंघन बताया। संस्था ने भारतीय समाज, खासकर सिखों से इसके खिलाफ खड़े होने की अपील की है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में भी खालिस्तानी समर्थक जुटे और संसद के बाहर अमृतपाल सिंह पर कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।
भारत में आजकल गालियों और सेक्स को ही वेब सीरीज मान लिया गया है। इसमें अगर हिन्दू घृणा का छौंक लग जाए तो फिर कहना ही क्या। चाहे ‘पाताल लोक’ में पंडित के मुँह से माँ की गाली बुलवाने वाला दृश्य हो या फिर ‘मिर्जापुर’ में ब्राह्मण को लालची बता कर उसे उठा कर भगाने का, OTT पर धड़ाधड़ रिलीज हो रहे ये वेब सीरीज इन मामलों में निराश नहीं करते। ऐसी ही एक नई वेब सीरीज Netflix पर आई है, ‘राणा नायडू’ नाम की।
आजकल दक्षिण भारत की फ़िल्में भारत में खूब चल रही हैं। तेलुगु फ़िल्म ‘RRR’ के गाने को ऑस्कर मिला है। कन्नड़ फिल्म ‘KGF 2′ ने 1100 करोड़ रुपए से भी अधिक की कमाई की। मलयालम फिल्म दृश्यम’ की कई भाषाओं में रीमेक बने हैं। तमिल के सुपरस्टार रजनीकांत का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में अब साउथ से अभिनेताओं को लाकर वेब सीरीज में डाला जा रहा है, क्योंकि साउथ के एक्टर्स का लोग सम्मान करते हैं।
‘राणा नायडू’ में भी दक्षिण भारत के दो बड़े अभिनेता हैं। पहले, साढ़े 3 दशक से तेलुगु फिल्मों में काम कर रहे वरिष्ठ अभिनेता दग्गुबती वेंकटेश। दूसरे, ‘बाहुबली’ फिल्म सीरीज में ‘भल्लाल देव’ के नेगेटिव कैरेक्टर से सुर्खियाँ बटोरने वाले राणा दग्गुबती। दोनों ही अभिनेताओं को दर्शक पसंद करते हैं। ऐसे में इस वेब सीरीज में कुछ ऐसी बातें ठूँस दी गईं, जिससे कहानी में हिन्दू घृणा का छौंक लगाया जा सके। गालियाँ और सेक्स तो जम कर है ही।
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि इस शो का कॉन्सेप्ट करण अंशुमान का है, जिन्होंने ‘मिर्जापुर’ वेब सीरीज बनाई थी। उसके लेखक और निर्देशक वही थे। उनके साथ कई फ़िल्में और वेब सीरीज डायरेक्ट कर चुके सुपर्ण वर्मा भी इस शो के निर्देशक हैं। ‘राणा नायडू’ में सुशांत सिंह भी एक अहम किरदार में हैं, जो सोशल मीडिया के जरिए वामपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। ये वेब सीरीज 10 मार्च, 2023 को Netflix पर कई भाषाओं में रिलीज की गई।
फिल्म की कहानी तीन भाइयों और उनके पिता के इर्दगिर्द घूमती है। राणा दग्गुबती, सुशांत सिंह और अभिषेक बनर्जी (‘पाताल लोक’ वाले ‘हथौड़ा त्यागी’) ने इन तीनों भाइयों के किरदार निभाए हैं। जबकि वेंटकेश इनके पिता के किरदार में हैं। राणा दग्गुबती का भी परिवार (पत्नी, बेटा-बेटी) होता है। उन्होंने एक ‘फ़िक्सर’ का किरदार निभाया है, जो पैसे लेकर सेलेब्रिटीज की समस्याएँ सुलझाता है। ये एक क्राइम ड्रामा है।
यहाँ तक तो कोई खास दिक्कत नहीं थी, लेकिन इसमें एक ऐसा किरदार है जिसके इर्दगिर्द फिल्म में अभिषेक बनर्जी का किरदार घूमता है। वो किरदार है एक हिन्दू साधु का। उसका तकिया कलाम ‘अनंत आनंदम्’ बनाया गया है। इस नकारात्मक किरदार को निभाया है मिलिंद पाठक ने। ‘विजयवाड़ा महाराज’ नाम का ये किरदार बच्चों का यौन शोषण करने वाला होता है। ये और इसके शिष्य बार-बार ‘अनंत आनंदम्’ बोलते हैं।
संस्कृत या शुद्ध हिंदी से शब्द उठा कर इस तरह का तकिया कलाम बना देना कोई नई बात नहीं है। प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ में ऐसे ही बॉबी देवल के बाबा वाले किरदार और उसकी संस्था के लिए ‘जप नाम’ का चुनाव किया गया था। कल को इसी तरह ‘जय श्री राम’ को भी किसी वेब सीरीज में विलेन की फेवरिट लाइन बता कर हिन्दू धर्म को बदनाम किया जाएगा। बॉलीवुड फिल्मों में हमने ‘काली के पुजारी’ गुंडे तो देखे ही हैं।
इसी तरह, ‘राणा नायडू’ वेब सीरीज में ‘विजयवाड़ा’ महाराज ने राणा दग्गुबती के किरदार का भी यौन शोषण किया होता है, जो राज़ अंत में खुलता है। ये शुरू में ही बता दिया जाता है कि उसने राणा दग्गुबती के भाई के किरदार में दिखे अभिषेक बनर्जी (फिल्म में ‘जफ़ा’) का बचपन में यौन शोषण किया है। जफ़ा की इस कारण मानसिक स्थिति खराब हो जाती है। वो जीवन भर इसी गम में रहता है, उसके दिमाग पर इस घटना का गहरा असर पड़ता है।
एक दृश्य में तो ‘विजयवाड़ा महाराज’ को जफ़ा का गुप्तांग भी मुँह में लेकर अश्लील हरकतें करते हुए दिखाया गया है। एक और गौर करने वाली बात है। आपने अक्सर सोशल मीडिया पर ऐसे वायरल वीडियोज देखे होंगे, जिनमें ईसाई पादरी चमत्कार और बीमारी ठीक करने के लिए कुछ-कुछ बुदबुदाता है और पूरी सभा में लोग पागलों जैसी हरकतें करने लगते हैं, जिनमें महिलाएँ भी होती हैं। इस दौरान ‘मेरा येशु-येशु’ या ‘हल्लिलूय्याह’ जैसा कुछ सब बोलते रहते हैं।
इस वेब सीरीज में उस ईसाई पादरी की जगह हिन्दू बाबा को डाल दिया गया है। अब पादरी को डालते तो माफ़ी माँगनी पड़ जाती। फिल्म निर्देशक फराह खान, कॉमेडियन भारती और अभिनेत्री रवीना टंडन को सदेह उपस्थित होकर लिखित में वेटिकन के एजेंट पादरी से माफ़ी माँगनी पड़ी थी, सिर्फ बाइबिल के एक शब्द का मजाक बनाने पर। अगर इस किरदार को मौलवी दिखाया जाता तो ऐसे मामलों में कट्टरपंथी सीधा ‘सर तन से जुदा’ ही करते हैं।
इसीलिए, सारी समस्याओं का समाधान है कि गुंडे के किरदार में, यौन शोषक के किरदार में – एक हिन्दू बाबा को डाल दो। ‘राणा नायडू’ में भी वही किया गया है। बाद में बाबा इस बात को छिपाने के लिए 3 करोड़ रुपए भी देता है। अंत में पीड़ित उसे मार भी डालता है, क्योंकि वो उसके बचपन की याद दिलाने लगता है। एक सौम्य सा दिखने वाला एक बाबा, जो Pedophile है, जो बच्चों को अपना शिकार बनाता है। गुंडे के लिए इससे बेहतर और सुरक्षित किरदार और क्या हो सकता था?
ये सब तब हो रहा है, जब हाल ही में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने स्पष्ट कहा है कि रचनात्मकता के नाम पर अश्लीलता और गालियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म्स पर आजकल आ रहे कंटेंट्स को लेकर ही ऐसा कहा था। साथ ही चेतावनी भी दी है कि हद पार करने पर केंद्र सरकार कार्रवाई भी करेगी। उन्होंने इसे रोकने के लिए नियमों के बदलाव के भी संकेत दिए हैं। लेकिन, फ़िलहाल ऐसी किसी स्क्रूटनी की व्यवस्था न होने का पूरा फायदा उठाया जा रहा है।
‘राणा नायडू’ में अप्राकृतिक सेक्स भी जम कर है। साथ ही एक अहम किरदार को समलैंगिक भी दिखाया गया है। ठीक इसी तरह, ‘सेक्रेड गेम्स’ में पंकज त्रिपाठी का किरदार बना गया था, जो समलैंगिक भी होता है और मुंबई को बर्बाद करने की साजिश भी रचता है। उन्हें भी एक हिन्दू बाबा के रूप में दिखाया गया था, जो अश्लील हरकतों में लगा हुआ है। बॉलीवुड अब भी सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। साउथ के नाम पर यह सब खेला जा रहा है।
कर्नाटक के हावेरी जिले में मंगलवार (14 मार्च, 2023) को हिन्दू संगठनों द्वारा निकाली गई एक रैली में विवाद हुआ था। इस दौरान पत्थरबाजी की गई थी। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों का आरोप है कि उनकी मस्जिद और घरों को निशाना बनाया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हालात को काबू किया था। इस मामले में हिन्दू संगठन से जुड़े 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई। हावेरी मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का गृह जिला है।
वामपंथी मीडिया की एकतरफा रिपोर्टिंग
इस पूरे मामले में वामपंथी मीडिया संस्थानों ने एकतरफा रिपोर्टिंग की। तमाम खबरों में हिन्दुओं को हमलावर बताया गया। ‘द वायर’ जैसे संस्थानों ने आरोपित हिन्दू पक्ष को ‘बदमाश’ जैसे शब्द से सम्बोधित किया। बदमाशों शब्द के ठीक नीचे प्रोफ़ाइल फोटो में भगवा रंग के झड़े दिखाए गए।
‘द वायर’ की खबर का स्क्रीनशॉट
खुद को पत्रकार बताने वाले मोहम्मद तनवीर ने हिंसा करने वालों को ‘हिन्दू भीड़’ बताया।
मोहम्मद तनवीर का ट्वीट
ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले में आरोपित किए गए पक्ष से सम्पर्क साधा। उन्होंने हमें बताया कि 14 मार्च को हुए विवाद की वजह पिछले लम्बे समय से की गई एकपक्षीय कार्रवाई और प्रताड़ना थी। कर्नाटक के हिन्दू संगठनों ने भी मीडिया में दिख रही खबरों को एकतरफा रिपोर्टिंग बताया। सुरक्षा कारणों से हम जानकारी देने वाले व्यक्तियों के नाम को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं।
मुस्लिम बहुल इलाके में हिन्दू संगठनों की नो इंट्री
14 मार्च के जुलूस में शामिल रहे हिन्दू संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि झगड़े की मुख्य वजह उनके द्वारा निकाले गए जुलूस को मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा अपने प्रभाव वाले इलाके में जाने से रोकना बना। हमें बताया गया कि जहाँ हिंसा हुई थी, वो इलाका रेट्टीहेल्ली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहाँ मुस्लिम आबादी लगभग 40% बताई गई। रेट्टीहेल्ली में एक टीपूनगर बसा है, जो टीपू सुल्तान के नाम पर है।
हमें बताया गया कि इसी क्षेत्र में आने वाले कोटेओने इलाके में जहाँ लगभग 70% मुस्लिम आबादी है, वहाँ हिन्दू संगठनों को जुलूस ले जाने से लगातार रोका गया।
पहले धार्मिक यात्रा रोकते थे, अब देशभक्ति से भी दिक्क्त
ऑपइंडिया से बात करते हुए जुलूस में शामिल एक व्यक्ति ने बताया कि वो कोई धार्मिक जुलूस नहीं निकाल रहे थे। 14 तारीख को निकाला गया जुलूस कर्नाटक के प्रसिद्ध बलिदानी क्रांतिकारी सांगोली रायन्ना का था, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता का युद्ध लड़ा था। स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि रायन्ना को भारतीय गद्दारों की ही मुखबिरी के चलते ही अंग्रेजों ने फाँसी दे दी थी। जुलूस में शामिल व्यक्ति ने बताया कि रेट्टीहेल्ली के अंदर एक चौराहे पर 9 मार्च को क्रांतिकारी रायन्ना की मूर्ति लगाने का कार्यक्रम था, लेकिन उस दिन मुस्लिम समूह द्वारा यात्रा कोटेओनी में जाने से रोक दिए जाने के कारण ये संभव नहीं हो सका।
रायन्ना हिन्दू क्रांतिकरी, प्यार सिर्फ टीपू सुल्तान से
ऑपइंडिया से बात करते हुए जुलूस में शामिल व्यक्ति ने बताया, “हमसे मुस्लिमों ने कहा कि ये क्रांतिकारी रायन्ना हिन्दू है इसलिए हम विरोध करेंगे।” हमसे बातचीत के दौरान दावा किया गया कि रायन्ना की मूर्ति के आगे मुस्लिम पक्ष टीपू-टीपू का नारा लगा रहा था। दावा किया गया कि जब 9 मार्च, 2023 को हिंदू पक्ष कोटेओनी इलाके से गुजरा तब मुस्लिम पक्ष ने उन्हें रोकने के लिए हाथों में पत्थर और लोहे की रॉड ले रखी थी। हालाँकि, पुलिस ने बीच-बचाव किया और विवाद नहीं बढ़ पाया। जुलूस रोकने वालों के पीछे औरतें के भी खड़े होने का दावा किया गया है।
एक वीडियो भेज कर हमें बताया गया कि जिस इलाके में क्रांतिकारी रायन्ना की यात्रा रोकी गई थी, वहाँ मुस्लिम समाज के लोग अपने मज़हबी कार्यक्रम सड़कों पर मनाते हैं। वीडियो में पूरी सड़क पर भीड़ दिखाई दे रही है और कई सारे बड़े-बड़े म्यूजिक सिस्टम लगा कर कुछ एनाउंसमेंट किया जा रहा है। इस वीडियो में भड़काऊ बयानबाजी की भी जा रही है, जिस पर भीड़ शोर मचा कर समर्थन करती दिख रही है। यह वीडियो दिसंबर 2022 का बताया गया।
रट्टाहेल्ली का दृश्य
पहले मामले में पुलिस ने नहीं की सुनवाई
क्रांतिकारी रायन्ना की प्रतिमा ले कर निकल रहे जुलूस में शामिल व्यक्ति ने हमें बताया कि 9 मार्च को जब मुस्लिम पक्ष के लगभग 100 लोगों ने उनका रास्ता रोका, तब पुलिस में शिकायत दी गई थी। हालाँकि, पुलिस पर इस मामले में कोई भी एक्शन न लेने और शिकायत को भी गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया गया है। हमें 9 मार्च की घटना का वीडियो प्राप्त हुआ। इस वीडियो में एक उन्मादी भीड़ पुलिस के आगे ही बैरिकेड तोड़ती दिखाई दे रही है।
9 मार्च के ही एक अन्य वीडियो में एक भीड़ पुलिस के आगे नारेबाजी करती दिखाई दे रही है।
9 मार्च को पुलिस बैरिकेड तोड़ती भीड़
क्रांतिकारी की मूर्ति दोबारा ले कर निकले हिंदू संगठन के लोग
9 मार्च को कासिम और मुम्मु द्वारा क्रांतिकारी रायन्ना की मूर्ति लगाने से रोके जाने और पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न होने पर 5 दिनों बाद 14 मार्च, 2023 को फिर से हिन्दू संगठन वही मूर्ति ले कर निकले। दावा है कि इस जुलूस की भी 9 मार्च की तरह बाकायदा पुलिस से अनुमति ली गई थी। जुलूस में शामिल एक व्यक्ति का दावा है कि 14 मार्च के जुलूस में भारी पुलिस बल तैनात था लेकिन उस दिन मुस्लिम पक्ष के लोग ‘आओ-आओ’ कह कर चिल्ला रहे थे और दूर से ही हाथ का इशारा कर के उकसा रहे थे।
हमें बताया गया कि इसी बात से जुलूस में शामिल लोग भड़क गए और हिंसा हो गई। हालाँकि, मौके पर तैनात पुलिस फ़ोर्स ने फ़ौरन मामले को काबू कर लिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मुस्लिम पक्ष का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का नाम कासिम क़ाज़ी और मम्मू काज़ी है, जो रिश्ते में भाई लगते है। कासिम वेल्डिंग का काम करता है।
कासिम क़ाज़ी
अब तक हिन्दू संगठन के 31 लोग गिरफ्तार
हावेरी जिले के स्थानीय निवासियों और हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों ने हमें बताया कि पुलिस ने अभी तक हिन्दू संगठन से जुड़े कुल 31 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन 31 लोगों में से कुछ लोगों की जमानत हो गई है। हिन्दू संगठन के लोगों ने हमें बताया कि इस हिंसा में कार्रवाई एकतरफा हुई है और मुस्लिम संगठन से जुड़े किसी भी व्यक्ति को 9 व 14 मार्च की घटना में नहीं पकड़ा गया।
दिसंबर 2022 में RSS के कार्यकर्ताओं की हुई थी पिटाई
स्थानीय हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों ने हमें बताया कि जिस जगह पर क्रांतिकारी संगोळी रायन्ना का जुलूस रोका गया था, उसी जगह पर दिसम्बर 2022 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के 3 कार्यकर्ताओं की बुरी तरह से पिटाई की गई थी। जानकारी के मुताबिक, RSS के ये कार्यकर्ता पथ संचालन से पहले इलाके का रूट मैप देखने गए थे। दावा है कि कार्यकर्ताओं की पिटाई के चलते एक पीड़ित अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाया है।
RSS कार्यकर्ताओं की पिटाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में भी हमलावरों पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया था। हमें इस घटना का वीडियो भी भेजा गया। वीडियो में संघ कार्यकर्ताओं को पुलिस के आगे ही एक भीड़ बेरहमी से पीटती दिख रही है। वीडियो में RSS कार्यकर्ताओं को चीखते-चिल्लाते सुना जा सकता है।
धार्मिक यात्राओं में पहले भी डाले गए व्यवधान
हावेरी के एक स्थानीय व्यक्ति ने ऑपइंडिया को बताया कि दिसम्बर 2022 में RSS सदस्यों पर हमले, 9 मार्च 2023 में जुलूस में व्यवधान आदि घटनाओं से पहले भी कई बार हिन्दुओं के कार्यक्रमों में बाधा डाली गई है। हमें बताया गया कि पहले भी कई बार गणपति विसर्जन में श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी की गई है जिसकी वजह से सांप्रदायिक तनाव फैला था। खुद को दोहरी मार से पीड़ित व्यक्ति ने हमें बताया कि इन हिंसा की घटनाओं के बाद पुलिस भी हिन्दू संगठन के ही लोगों पर अपना गुस्सा उतारती है।
तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में जिस मस्जिद का जिक्र बार-बार आया, वह रेट्टीहेल्ली की जामिया मस्जिद के नाम से जानी जाती है। जुलूस में शामिल रहे एक व्यक्ति ने ऑपइंडिया को बताया कि जामिया मस्जिद के आस-पास अक्सर दर्जनों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जमा होते है और आने-जाने वाली लड़कियों से छेड़छाड़ करते हैं। उनका ये भी दावा है कि जामिया मस्जिद की जगह बहुत समय पहले हिन्दुओं का मंदिर हुआ करता था।
इस दावे की जाँच की भी माँग की गई। हमसे बातचीत के दौरान हावेरी को ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ से भी बुरी तरह से प्रभावित बताया गया। हमें यह भी जानकारी दी गई कि इलाके में मुस्लिमों की आबादी पहले इतनी नहीं थी। हालाँकि, आबादी बढ़ी कैसे इसका जवाब उनके पास नहीं था।
हमें फँसा कर जेल भिजवाना चाहते है कॉन्ग्रेसी
जुलूस में शामिल लोगो ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि घटना के दिन हावेरी से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर कॉन्ग्रेस पार्टी से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 मार्च की घटना में हिन्दुओं पर एकतरफा कार्रवाई के पीछे सिद्धारमैया और अन्य कॉन्ग्रेसी नेता है। हमें बताया गया कि इसी दबाव के चलते FIR में ऐसे लोगों का भी नाम डाल दिया गया है, जो घटना के दौरान वहाँ मौजूद ही नहीं थे।
एक महिला का भी वीडियो ऑपइंडिया को भेजा गया, जो अपने बेटे को बेगुनाह बता कर रहम की माँग कर रही है।
अपने बेटे को बेगुनाह बताती एक हिन्दू महिला
हिन्दू कब तक सहे एकतरफा अत्याचार – VHP
‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ कर्नाटक प्रदेश के कई पदाधिकारियों ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए मुस्लिमों द्वारा क्रांतिकारी के सम्मान में निकले जुलूस को रोकना ही विवाद की वजह बताया। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी ऑपइंडिया से बात करते हुए हावेरी में हुए झगड़े को हिन्दुओं को लम्बे समय से चरमपंथी ताकतों द्वारा प्रताड़ित किए जाने का प्रतिफल बताया।
पुलिस कर रही कानूनी कार्रवाई
इस मामले पर बोलते हुए हावेरी जिले के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि रैली में शामिल लगभग 100 लोगों ने तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की है। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों की पहचान कर के उन पर कार्रवाई की जा रही है।
Stone pelted a mosque, few homes & vehicles in Haveri’s Rattihalli. Cops have confirmed that a group of about 100 people took a detour from the rally they were part of & indulged in the stone pelting, about 15 arrested and investigation is on. Dr Shivakumar, SP Haveri ?? pic.twitter.com/2FUdwctbkV
खालिस्तान समर्थक भगोड़े अमृतपाल सिंह को लेकर पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा है कि अमृतपाल अब भी फरार है। उसे गिरफ्तार करने के लिए टीमें लगी हुईं हैं। इस मामले में अब तक कुल 114 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें से 5 लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत केस दर्ज किया गया है। अमृतपाल के ISI से संबंध और उसे विदेशी फंडिंग मिली है इसको लेकर मजबूत संदेह है।
पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने कहा है, “शांति और सद्भाव भंग करने के आरोप में अब तक 114 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 78 को पहले दिन गिरफ्तार किया गया। वहीं, दूसरे दिन 24 लोगों को तथा कल रात 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के पास से अब तक 10 हथियार भी बरामद हुए हैं। इसमें 9 राइफल और 1 रिवॉल्वर है।”
So far, 114 elements attempted to disturb peace and harmony. They have been rounded up and arrested. 78 of them were arrested on the first day, 34 on day 2 and two others were arrested last night. 10 weapons recovered: IGP Punjab, Sukhchain Singh Gill pic.twitter.com/cyhu7MHqEP
उन्होंने आगे कहा है, “गिरफ्तार किए गए चार लोगों को असम के डिब्रूगढ़ भेज दिया गया है। इनमें दलजीत कलसी, बसंत सिंह, गुरमीत सिंह भूखनवाला और भगवंत सिंह शामिल हैं। एक और आरोपित अमृतपाल सिंह का चाचा हरजीत सिंह को भी डिब्रूगढ़ भेजा जा रहा है।”
NSA (National Security Act) has been invoked against the five people (being sent to Dibrugarh) who were arrested: IGP Punjab, Sukhchain Singh Gill pic.twitter.com/TPXXq9rSri
सुखचैन सिंह गिल ने यह भी कहा है कि अमृतपाल सिंह के संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के कुछ लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 6 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें से हत्या का प्रयास, पुलिस पर हमला और पुलिस के काम में रुकावट की धाराएँ मुख्य रूप से लगाई गई हैं। जो बुलेटप्रूफ जैकेट और राइफल बरामद की गई हैं और अमृतपाल सिंह के घर के दरवाजे पर एकेएफ (AKF) लिखा हुआ था। इसका मतलब ‘आनंदपुर खालसा फौज’ है। वह इस नाम से जत्थेबंदी बनाने का प्रयास कर रहा था।”
ISI से संबंध
पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने अमृतपाल सिंह के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध और विदेशी फंडिंग की भी बात कही है। उन्होंने कहा है, “अब तक सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर हमें आईएसआई के एंगल का बहुत मजबूत संदेह है। हमें विदेशी फंडिंग का भी मजबूत संदेह है। परिस्थितियों को देखते हुए, ऐसा लगता है कि इसमें आईएसआई शामिल है और विदेशी उसे फंडिंग भी मिली है। यह भी सामने आया है कि इसके पूरे ग्रुप को हवाला और विदेशी फंडिंग के जरिए पैसा मिलता था। यह फंडिंग छोटी-छोटी रकम में इनके खातों पर भेजी जाती थी। आगे की जाँच की जा रही है।”
ब्रिटेन के लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर खालिस्तान समर्थकों द्वारा किए गए तिरंगे के अपमान के विरोध में दिल्ली में सिखों ने आज (20 मार्च 2023) ब्रिटिश हाई कमीशन के सामने प्रदर्शन किया। सोमवार को दिल्ली के चाणक्यपुरी में कई लोग ब्रिटिश हाई कमीशन के आगे इकट्ठा हुए और लंदन की घटना के खिलाफ रोष प्रकट किया। इस दौरान सिखों के हाथ में भारी मात्रा में तिरंगे, प्लेकार्ड देखे गए जिनपर लिखा था- ‘भारत हमारा स्वाभिमान है।’
मनसिंदर सिंह सिरसा ने इस प्रोटेस्ट की फोटो शेयर करते हुए कहा, “भारत के सिखों ने ब्रिटिश हाई कमीशन के आगे प्रदर्शन करके बाहर बैठे भारत विरोधी तत्वों को एक बहुत स्पष्ट संदेश दिया है। हम चंद लोगों को हमारे देश के साथ हमारे संबंध को कमजोर नहीं होने देंगे।”
“?? ???? ?????”
Sikhs of India have given a loud and clear message to all the Anti-India elements sitting abroad through this protest at British High Commission. We won’t let a few defame or weaken the bond of entire community with our nation.@ANI@republic… https://t.co/RsCxdc3qYypic.twitter.com/zLPzROejMG
इम्प्रीत सिंह बख्शी ने लिखा- “सिख का संबंध भारत से है, भारत का संबंध सिखों से। लंदन में भारतीय हाई कमीशन में हुई तोड़फोड़ के विरोध में दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग के बाहर सिख प्रदर्शन कर रहे हैं।”
“Sikhs Belongs to India ?? & India Belongs to Sikhs ?” Sikhs doing protest infront of British High commission Delhi. Protest in the aftermath of vandalization of Indian High commission in London. pic.twitter.com/LQKZvXrfqD
बता दें कि रविवार (19 मार्च 2023) को खालिस्तानियों ने भारतीय उच्चायोग के सामने इकट्ठा होकर खालिस्तानी झंडे लहराते हुए भारत का तिरंगा निकाल दिया था। यही नहीं, वहाँ खालिस्तानी झंडा लगाने की भी कोशिश की थी जिसके बाद भारत ने इस घटना का मुँह तोड़ जवाब देते हुए पहले से भी बड़ा तिरंगा इमारत पर फहरा दिया है और मामले में 1 व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई।
दरअसल, घटना सामने आने के बाद भारत सरकार ने भारत में ब्रिटेन के राजदूत को तलब किया था। इसके बाद ब्रिटिश राजदूत एलेक्स एलिस ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की थी। उन्होंने कहा था, “मैं लंदन में भारतीय उच्चायुक्त में हुए शर्मनाक कृत्य पर निंदा करता हूँ। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।”
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएस ईश्वरप्पा (KS Eshwarappa) द्वारा जान को लेकर दिए गए एक बयान को लेकर विवादों में हैं। कर्नाटक में मुस्लिम समुदाय के लोग उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। शिवमोग्गा जिले का यह वीडियो 17 मार्च, 2023 का बताया जा रहा है। यहाँ जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने मुस्लिम प्रदर्शन करते और एक शख्स अजान पढ़ते हुए दिखाई दे रहा है।
आरोपित की पहचान मौसीन अहमद के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उसने जिला कलेक्टर कार्यालय की बिल्डिंग के सामने जुमे की नमाज भी अदा की थी। अन्य प्रदर्शनकारियों ने मौसीन अहमद का समर्थन किया और विधानसभा के सामने भी अजान पढ़ने की धमकी दी। डीसी कार्यालय के बाहर खड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “अगर वह (ईश्वरप्पा) हमारे अम्मी-अब्बू के खिलाफ बोलते, तो हम उन्हें छोड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने हमारे अल्लाह और अजान के बारे में टिप्पणी की। अगर जरूरत पड़ी तो हम विधानसभा के सामने भी अजान पढ़ेंगे। हम कायर नहीं हैं। सभी मुस्लिम समुदाय को एकजुट हो जाना चाहिए।”
कुछ देर बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाया। शिवमोग्गा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) जी.के. मिथुन कुमार ने बताया कि अजान पढ़ने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उससे इस संबंध में पूछताछ भी की गई है। एसपी ने कहा कि हालाँकि, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है। केवल आगे ऐसा न करने की चेतावनी दी गई है। वहीं, विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के बारे में पूछताछ जारी है। अगर पुलिस को उनके बारे में कुछ भी संदिग्ध लगता है, तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने बीजेपी नेता ईश्वरप्पा पर निशाना साधते हुए कहा, “ये संवेदनशील मामले हैं। ऐसी घटनाओं के होने का कारण बीजेपी है। ईश्वरप्पा हों या कोई अन्य भाजपा नेता, उसे अपनी हद में रहना चाहिए। हमारा देश शांतिपूर्ण होना चाहिए। हमारे सद्भाव को बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”
बता दें कि मंगलुरु में 13 मार्च 2023 को एक जनसभा को संबोधित करते हुए बीजेपी नेता ईश्वरप्पा ने पूछा था कि क्या अजान के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने पर ही अल्लाह नमाज सुनेगा? उन्होंने कहा था, “मंदिरों में भजन होता है। हम भी धार्मिक हैं, लेकिन लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करते हैं। यदि आपको लाउडस्पीकर से नमाज अदा करना है तो इसका मतलब है कि अल्लाह बहरा है।”
खालिस्तानी भगोड़े अमृतपाल सिंह के खिलाफ हो रही कार्रवाई के विरोध में खालिस्तानियों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में उपद्रव कर तिरंगा निकाल दिया था। भारत ने अब इस घटना का मुँह तोड़ जवाब देते हुए पहले से भी बड़ा तिरंगा फहराया है। भारतीय उच्चायोग में खालिस्तानियों द्वारा की गई हरकत की ब्रिटेन ने निंदा की है। साथ ही इस मामले में 1 व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार (19 मार्च 2023) को खालिस्तानियों ने भारतीय उच्चायोग के सामने इकट्ठा होकर खालिस्तानी झंडे लहराते हुए भारत का तिरंगा निकाल दिया था। यही नहीं, वहाँ खालिस्तानी झंडा लगाने की भी कोशिश की थी। इस घटना का भारत ने कड़ा विरोध जताया था। भारत के विरोध के बाद ब्रिटेन ने भी इसकी कड़ी निंदा की है।
#WATCH | United Kingdom: Khalistani elements attempt to pull down the Indian flag but the flag was rescued by Indian security personnel at the High Commission of India, London.
दरअसल, घटना सामने आने के बाद भारत सरकार ने भारत में ब्रिटेन के राजदूत को तलब किया था। इसके बाद ब्रिटिश राजदूत एलेक्स एलिस ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा है, “मैं लंदन में भारतीय उच्चायुक्त में हुए शर्मनाक कृत्य पर निंदा करता हूँ। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।”
I condemn the disgraceful acts today against the people and premises of the @HCI_London – totally unacceptable.
वहीं, इस घटना को लेकर लंदन के मेयर सादिक खान ने खान है, “भारतीय उच्चायोग में आज हुई हिंसक घटनाओं और तोड़फोड़ की निंदा करता हूँ इस तरह के व्यवहार के लिए हमारे शहर में कोई जगह नहीं है। मेट्रोपोलिटन पुलिस इस पूरे मामले की जाँच कर रही है।”
I condemn the violent disorder and vandalism that took place at the Indian High Commission today. There is no place in our city for this kind of behaviour.
An investigation has been launched by the Met into today’s events.
— Mayor of London, Sadiq Khan (@MayorofLondon) March 19, 2023
वहीं, विदेश राज्य मंत्री विंबलडन के लॉर्ड अहमद ने भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है,” लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हुए हमले से मैं स्तब्ध हूँ। उच्चायोग और उसके कर्मचारियों के खिलाफ ऐसी घटनाओं को किसी भी प्रकार से स्वीकार नहीं किया जाएगा। ब्रिटेन सरकार भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को हमेशा गंभीरता से लेगी।”
Am appalled by today’s attack on the Indian High Commission in London. This is a completely unacceptable action against the integrity of the Mission and its staff. The UK Government will always take the security of the Indian High Commission seriously.
— Lord (Tariq)Ahmad of Wimbledon (@tariqahmadbt) March 19, 2023
भारतीय उच्चायोग में हुई इस घटना पर लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने कहा है, “हिंसक घटना में भारतीय उच्चायोग की इमारत में लगी खिड़कियां टूट गईं हैं। सुरक्षा व्यवस्था में लगे दो सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस के वहाँ पहुँचने से पहले ही लोग वहाँ से जा चुके थे। मामले की जाँच कर उच्चायोग के पास से एक संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।”
बता दें कि इस पूरे मामले में भारत सरकार ने सख्ती दिखाई है। इस घटना पर विदेश मंत्रालय ने ब्रिटिश उप उच्चायुक्त क्रिस्टीना स्कॉट को समन भेजकर उन्हें वियना कन्वेंशन के तहत यूके सरकार के बुनियादी दायित्वों की भी याद दिलाई। भारत सरकार ने कहा, ब्रिटेन में भारतीय राजनयिक परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के प्रति ब्रिटेन सरकार की उदासीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह उम्मीद की जाती है कि ब्रिटेन सरकार इस घटना में शामिल हर व्यक्ति की पहचान कर उसे गिरफ्तार करेगी और ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों। इसको लेकर सख्त कदम उठाएगी।
बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने फहाद अहमद से शादी के बाद आज अपना दूसरा रिसेप्शन बरेली में किया। इस दौरान वह पाकिस्तानी फैशन डिजाइनर का बेज लहंगा पहने नजर आईं। उनकी तस्वीरें देखने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें बधाई देना तो कुछ सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया।
तस्वीर साभार: स्वरा भास्कर का इंस्टाग्राम
शेयर ने अपने इंस्टा पर फोटो शेयर करते हुए लिखा, ” @alixeeshantheatrestudio के बेहद खूबसूरत लहंगे की एक झलक @alixeeshanempire जिन्होंने इसे बताया और सरहद पार से मुझे भेजा। @natrani को खास धन्यवाद जिन्होंने इसे मुमकिन किया।
तस्वीर साभार: bollywoodshaadis
उनकी यह तस्वीरों को देखने के बाद कई लोगों की इस पर प्रतिक्रिया आई। एक यूजर ने उनकी फोटो देख उन्हें पाकिस्तानी बताया। वहीं दूसरे ने कहा – तुम यहाँ क्यों रह रही हो, पाकिस्तान ही चली जाओ।
Swara Bhasker wears lehenga by Pakistani designer at wedding reception with Fahad Ahmad, gets trolled -‘Pakistan se prem kuch zyada hi hai’ pic.twitter.com/vClIJx7uN9
इसी तरह एक यूजर ने उनका लहंगा देख पूछा कि क्या पाकिस्तानी प्रेम कुछ ज्यादा नहीं हो गया।
वुमन्स एरा में नजर आ रहे स्क्रीनशॉट्स में उन्हें घाघरा-ए-मुमताज कहा गया। किसी ने उन्हें नेशनल शेम बताया और किसी ने उन्हें यहाँ भी टुकड़े-टुकड़े गैंग का ताना दिया।
तस्वीर साभार: womensera
बता दें कि स्वरा भास्कर और फवाद अहमद ने कुछ ही दिन पहले स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई अपनी शादी का ऐलान किया था। दोनों ने जानकारी दी थी कि उनकी शादी 6 जनवरी 2023 को हुई। हालाँकि पारंपरिक ढंग से शादी के रिवाज 11 मार्च को हुई हल्दी से शुरू हुए। इस दौरान मेहंदी, संगीत जैसे प्रोग्राम हुए। 16 मार्च को दोनों ने पहला रिसेप्शन दिया जिसमें ज्यादातर राजनेता आए थे। केजरीवाल से लेकर राहुल गाँधी ने उनके रिसेप्शन को अटेंड किया था। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव भी स्वरा के साथ तस्वीरों में नजर आए थे।
शराब घोटाले के मामले में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। सोमवार (20 मार्च, 2023) को मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 14 दिन (3 अप्रैल 2023) तक के लिए बढ़ा दी। फिलहाल AAP नेता शराब घोटाले के मामले में 22 मार्च तक ईडी की रिमांड पर हैं। ऐसे में अगर ईडी (ED) को सिसोदिया की रिमांड नहीं भी मिलती है, तो उन्हें दोबारा तिहाड़ भेजा जाएगा।
Delhi Excise Policy case | Delhi’s Rouse Avenue Court extends judicial custody of AAP leader and former Delhi Deputy CM Manish Sisodia by 14 days, in the CBI case
इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 10 मार्च 2023 को प्रवर्तन निदेशालय को सिसोदिया की 7 दिन की रिमांड दी थी। हालाँकि, एजेंसी ने 10 दिन की रिमांड माँगी थी, जिसका AAP नेता के वकीलों ने पुरजोर विरोध किया था। ईडी ने अदालत को बताया था कि शराब घोटाले की जाँच में सिसोदिया सहयोग नहीं कर रहे हैं। लिहाजा उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ जरूरी है।
ईडी ने सिसोदिया पर सबूत नष्ट करने का भी आरोप लगाया था। जाँच एजेंसी ने कहा था कि वे दूसरे लोगों के नाम से सिम कार्ड खरीद कर इस्तेमाल करते थे, ताकि मामला खुलने पर खुद का बचाव कर सकें। ईडी ने अदालत से यह भी कहा था कि शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया की सीधी भूमिका है। लाभ का मार्जिन 12 प्रतिशत तक रखा गया, जो पूरी तरह से नीति के खिलाफ था। जाँच एजेंसी के मुताबिक, कुछ लोगों को फायदा देने के लिए मनीष सिसोदिया ने ये सब किया। शराब की बिक्री के लिए जो नीति तय की गई थी उसका उल्लंघन किया गया।
बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग के केस में 9 मार्च 2023 को करीब 8 घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ऊपर ये कार्रवाई उनकी जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई से ठीक एक दिन पहले की थी। इससे पहले शराब घोटाला मामले में पूछताछ के बाद सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद सिसोदिया ने सीबीआई की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।