Home Blog Page 1945

बिहार का रेलवे जंक्शन, दर्जनों टीवी स्क्रीन्स, अचानक चलने लगा पॉर्न वीडियो: प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के लिए इंतजार कर रहे थे यात्री, FIR दर्ज

बिहार की राजधानी पटना में रेलवे स्टेशन पर लगे टीवी स्क्रीन्स पर पॉर्न फिल्म चलने का मामला सामने आया है। घटना के समय प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। वीडियो करीब 3 मिनट तक चलता रहा। लोगों की शिकायत के बाद रेलवे प्रशासन होश में आया और इसे बंद किया गया। फिलहाल इस मामले में FIR दर्ज कर जाँच शुरू की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना पटना रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 10 की है। जहाँ, लगे दर्जनों टीवी स्क्रीन पर अचानक ही पॉर्न फिल्म चल गई। वीडियो चलने के बाद यात्रियों ने रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को मामले की जानकारी दी। इसके बाद सुरक्षा बलों और रेलवे प्रशासन ने टीवी पर वीडियो चलाने वाली एजेंसी ‘दत्ता कम्युनिकेशन’ से संपर्क कर वीडियो को बंद करने के लिए कहा। तब कहीं जाकर यह वीडियो हटाया गया।

कैसे चली पॉर्न फिल्म

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पटना रेलवे स्टेशन पर विज्ञापन एवं सूचनाओं के प्रसारण की जिम्मेदारी दत्ता कम्युनिकेशन नामक कंपनी को दी गई थी। इस कंपनी को टीवी स्क्रीन पर विज्ञापन दिखाना था। लेकिन, उस वक्त कंपनी के कर्मचारी पॉर्न वीडियो देख रहे थे। यही वीडियो रेलवे स्टेशन पर लगे टीवी स्क्रीन पर भी प्ले हो गया। इससे पहले कि कर्मचारी कुछ भी समझ पाते, पॉर्न वीडियो चलने की इस घटना से पटना रेलवे स्टेशन और रेलवे विभाग में हड़कंप मच चुका था।

मामला संज्ञान में आने के बाद रेलवे के आला अधिकारी एक्शन में आ गए। रेलवे ने पॉर्न चलाने वाली कंपनी दत्ता कम्युनिकेशन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यही नहीं, रेलवे ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्ट करते हुए जुर्माना भी लगाया है। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि रेलवे स्टेशन की टीवी स्क्रीन पर विज्ञापन चलाने के लिए दत्ता कम्युनिकेशन के साथ किया करार भी तोड़ दिया है।

इस मामले में FIR होने के बाद जहाँ एक ओर पुलिस इसकी जाँच करेगी। वहीं, रेलवे विभाग भी अपनी ओर से जाँच कराने की बात कह रहा है। वहीं, अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा है कि पॉर्न वीडियो सिर्फ प्लेटफॉर्म नंबर 10 पर ही कैसे चला?

80 महिलाएँ, 200 आपत्तिजनक वीडियो… तमिलनाडु का पादरी गिरफ्तार, नाबालिग छात्राओं को भी नहीं बख़्शा

तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में एक पादरी को सोमवार (20 मार्च 2023) सुबह उसके नागरकोइल फार्महाउस से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पादरी का नाम बेनेडिक्ट एंटो (Benedict Anto) है। नर्सिंग कॉलेज की छात्रा की शिकायत के आधार पर कन्याकुमारी पुलिस ने बेनेडिक्ट एंटो के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वह पिछले कुछ दिनों से फरार चल रहा था। एंटो सोशल मीडिया पर अपनी अश्लील फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद से चर्चा में है।

सिरो मलंकारा कैथोलिक चर्च के पादरी पर कई महिलाओं के साथ अवैध संबंध का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि एंटो के 16 से 50 उम्र की 80 महिलाओं के साथ करीब 200 आपत्तिजनक वीडियो सामने आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कन्याकुमारी जिले की साइबर पुलिस ने एक नर्सिंग कॉलेज की छात्रा द्वारा पादरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। लगभग एक हफ्ते पहले से पादरी की अश्लील वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। छात्रा ने अपनी शिकायत में बताया था कि पादरी बेनेडिक्ट एंटो उसे ऑनलाइन परेशान कर रहा था। जब भी वह चर्च में जाती थी, एंटो उसे गलत तरीके से छूता था।

कुछ दिन बाद एंटो ने उसकी माँ से उसका मोबाइल नंबर ले लिया। फिर वह उस पर वीडियो कॉल और व्हाट्सएप चैट करने का दबाव बनाने लगा। इसके बाद उसने उसे ऑनलाइन परेशान करना शुरू कर दिया।

जब छात्रा को पता चला कि एंटो उसकी तरह दूसरी लड़कियों को भी परेशान कर रहा है, तो उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। हालाँकि, एंटो के अलावा कुछ और लोगों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। उसने अपनी शिकायत में तीन और लोगों का नाम भी लिया है। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने एंटो और अन्य लोगों पर आईटी एक्ट, महिला उत्पीड़न और धमकी देने संबंधी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और उसकी तलाश में जुट गए।

30 वर्षीय पादरी कन्याकुमारी जिले में नागरकोइल के पास मार्तंडम का रहने वाला है। वह विभिन्न राजनीतिक समूहों से जुड़ा हुआ है, जिसमें से एक नाम तमिलर काची सीमान (NTK) है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में से एक में वह एनटीके नेता सीमन उर्फ सेबेस्टियन, जो श्रीलंका के आतंकी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) का समर्थक है उसके साथ नजर आ रहा है।

बेनेडिक्ट एंटो के फेसबुक प्रोफाइल से पता चलता है कि वह सीमन का समर्थक है। उसने अपने घर में सीमन के साथ फोटो भी लगाई हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि वह मेक्कामंडपम पिलंकलाई में आरसी चर्च में पादरी है।

13 मार्च 2023 को सोशल मीडिया पर बेनेडिक्ट एंटो की एक वीडियो खूब वायरल हुआ, जिसमें वह एक लड़की को किस करते हुए नजर आ रहा है। वहीं, पादरी ने कुछ दिन पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उस पर हमला किया और उसका लैपटॉप व मोबाइल छीन लिया।

‘श्रद्धा हत्याकांड जैसी घटनाएँ रोकने के लिए लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन हो’: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को बताया मूर्खतापूर्ण, पूछा – लिव-इन वालों को रोकना चाह रहे?

सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) के लिए रजिस्ट्रेशन की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा है कि ऐसी याचिका से सुरक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है या फिर लिव-इन को रोकने की? दिल्ली में हुई श्रद्धा वॉकर की हत्या के बाद यह याचिका दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश पीएस नरसिम्हा और न्यायधीश जेबी पादरीवाला की बेंच ने सोमवार (20 मार्च 2023) को मामले की सुनवाई की। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दायर की गई इस याचिका पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता ममता रानी से पूछा, “यह क्या है? लोग यहाँ कुछ भी लेकर आते हैं। हम ऐसे मामलों पर जुर्माना लगाना शुरू करेंगे। किसके साथ रजिस्ट्रेशन? केंद्र सरकार के साथ? केंद्र सरकार का लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों से क्या लेना-देना है?”

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर आश्चर्य जताते हुए याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि लिव-इन-रिलेशनशिप को लेकर रजिस्ट्रेशन जरूरी करने की माँग वाली याचिका का उद्देश्य सुरक्षा को बढ़ावा देना है या फिर इसकी आड़ में लिव-इन में रहने वालों को रोकने की कोशिश की जा रही है?

दरअसल, याचिकाकर्ता ममता रानी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की माँग की थी। इस याचिका में कहा गया था, “माननीय न्यायालय ने कई बार लिव-इन में रहने वाले लोगों की रक्षा की है। कोर्ट ने ऐसे कई फैसले सुनाए हैं जो लिव-इन पार्टनरशिप में रहने वालों की सुरक्षा कर रहे हैं। चाहे वह महिला हो, पुरुष हो या यहाँ तक कि लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को भी कोर्ट ने सुरक्षा दी है।”

याचिका में यह भी कहा गया था कि लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कोई खास नियम और दिशानिर्देश नहीं हैं। इसलिए इस रिलेशनशिप में हो रहे अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। इसमें बलात्कार और हत्या जैसे प्रमुख अपराध शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में लिव-इन पार्टनर द्वारकिए हाल के दिनों में किए गए अपराध का जिक्र भी किया था। इसमें दिल्ली के महरौली में हुई श्रद्धा वॉकर की हत्या की बात भी कही गई थी।

ममता रानी नामक महिला ने इस जनहित याचिका में न केवल लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कानून बनाने की माँग की थी। बल्कि सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया था कि वह केंद्र सरकार को लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे लोगों की सही संख्या का पता करने का आदेश जारी करे। याचिका में यह तर्क दिया गया था कि लिव-इन में रहने वाले लोगों का सही आँकड़ा इसके लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के बाद ही हासिल किया जा सकता है।

याचिका में यह भी कहा था कि लिव-इन रिलेशनशिप में केंद्र सरकार द्वारा रजिस्ट्रेशन न कर पाना संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने तमाम दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए याचिका खारिज कर दी।

स्कूल में लड़कियाँ न करें पीरियड्स की बात, छठी के बाद मिले AIDS आदि का ज्ञान: फ्लोरिडा में कानून बनाने की हो रही तैयारी, ड्राफ्ट तैयार

फ्लोरिडा में एक ऐसा कानून बनाए जाने का प्रस्ताव सामने आया है जिसमें छठी क्लास तक की लड़कियों से मासिक धर्म पर कोई बातचीत न किए जाने का प्रावधान है। इस ड्राफ्ट को फ्लोरिडा विधानसभा में प्रस्तुत किया गया है जिसे रिपब्लिक पार्टी के गवर्नर रॉन डीसांटिस का समर्थन प्राप्त है। डीसांटिस लगातार जेंडर, सेक्सुएलिटी से जुड़े विधेयक लाने के लिए चर्चा में रहते हैं। उन्हें एंटी-वोक एजेंडे पर काम करने के लिए भी जाना जाता है।

इस जीओपी बिल में उल्लेख है कि एड्स, एसआईटी (यौन संबंधी बीमारी) और स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा सिर्फ छठी से ऊपर वाली क्लास के बच्चों को दी जाए। इस बिल का ड्राफ्ट आने के बाद से इसका विरोध जारी है। डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि एशले गैंट ने जहाँ पूछा है कि आजकल लड़कियों के पीरियड्स छठी क्लास से पहले ही शुरू हो जाते हैं। ऐसे में क्या लड़कियों को अपने बारे में बात करने से रोक दिया जाएगा? वहीं सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध हो रहा है।

लोग इसे घटिया फैसला बता रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे फैसले लोकतंत्र का विरोध करने वाले हैं। एक यूजर इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहती है कि ये निर्णय लड़कियों को उनके शरीर पर शर्मिंदा करेगा। 

एक यूजर ने कहा है कि अगर लड़कियों को सही समय पर सेक्स एजुकेशन नहीं दी जाएगी तो वो कम समझ के कारण कैसे कोई फैमिली प्लॉनिंग कर पाएँगी। यूजर्स का ये भी कहना है कि ऐसी चर्चा घरवालों पर छोड़ी जानी चाहिए कि उनके बच्चों को कब इसकी जरूरत है। सरकार या स्कूलों को इसका निर्णय नहीं लेना चाहिए।

न्यूयॉर्क की असेंबली सदस्य युह-लाइन-नियु ने इस खबर को सुनने के बाद कहा कि आखिर मर्द क्यों लड़कियों के लिए कोई निर्णय लेते हैं। फ्लोरिडा में तो लड़की होना ही सुरक्षित नहीं है।

बता दें कि इस बिल को हाउस एजुकेशन क्वालिटी सबकमेटी में बुधवार को 13-5 वोट मिले। इस ड्राफ्ट में अभिभावकों को भी अधिकार दिया गया है कि वो अपने बच्चों को पढ़ाए जाने वाली उन किताबों व सामग्रियों पर आपत्ति जता सकें जो उन्हें अपने बच्चों के लिए सही नहीं लगतीं।

उमेश पाल पर गोलीबारी करने वाले अतीक के गुर्गे गुलाम का घर ध्वस्त, चला बुलडोजर: भाई बोला – अगर उसका एनकाउंटर हुआ तो…

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड (Umesh Pal Murder) के बाद से योगी सरकार एक्शन में है। इस कड़ी में सोमवार (20 मार्च 2023) को माफिया अतीक अहमद के एक और करीबी और 25 दिन से फरार पाँच लाख के इनामी शूटर मोहम्मद गुलाम के घर और मकान पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई। दरअसल, मोहम्मद गुलाम वही है, जो इलेक्ट्रिक दुकान के अंदर खड़े होकर उमेश पाल के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही उमेश पाल गाड़ी से उतरा, उसने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद वह अतीक अहमद के बेटे असद के साथ फरार हो गया।

‘आज तक’ के मुताबिक, उमेश पाल हत्याकांड के करीब एक महीने बाद मोहम्मद गुलाम के भाई राहिल ने कबूला है कि शूटआउट की तस्वीरों में दिखाई दे रहा शख्स उसका भाई मोहम्मद गुलाम ही है। शूटर की अम्मी और भाई राहिल हसन का कहना है, “गुलाम ने बहुत गलत किया है। उसने पूरे परिवार को कलंकित किया है। उसकी और हमारी ​विचारधारा कभी नहीं मिली। हम योगी सरकार की कार्रवाई का समर्थन करते हैं।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर एनकाउंटर में गुलाम मारा जाता है, तो वो न तो उसका चेहरा देखेंगे और न ही उसका शव लेंगे।

वहीं, सोशल मीडिया पर शूटर मोहम्मद गुलाम के घर पर बुलडोजर चलाने और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ उसकी एक फोटो खूब वायरल हो रही है।

अखिलेश यादव के साथ शूटर की फोटो देखने के बाद ट्विटर पर ज्ञानेष लोहानी लिखते हैं कि चौंकाने वाली बात तब होती, जब किसी गुंडे माफिया की फोटो अखिलेश के साथ न होती। समाजवादी पार्टी ने हमेशा से ही अपराधियों को संरक्षण देने का काम किया है। अखिलेश यादव इसी परिपाटी को आगे बढ़ा रहे हैं।

बता दें कि 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी। इस शूटआउट में उमेश पाल के साथ ही उनके दो सरकारी गनर संदीप निषाद और राघवेंद्र भी बलिदानी हो गए थे। पुलिस ने उमेश की पत्नी जया पाल की शिकायत पर अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, उसकी बीवी शाइस्ता, असद समेत दो बेटे व अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। उमेश पाल, राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह थे। शूटरों को पकड़ने के लिए प्रयागराज पुलिस और यूपी एसटीएफ की कुल 22 टीमें लगातार छापेमारी कर रही है।

‘2024 लोकसभा चुनाव में 80 सीटें जीतेंगे’: 5 सीटों वाली पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का दावा, 11 साल बाद सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने दावा किया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों में भारतीय जनता पार्टी चुनाव हार जाएगी। 2019 के आम चुनाव में बीजेपी ने जहाँ 62 सीटें जीतीं थीं, वहीं सपा के खाते में महज 5 सीटें गईं थीं।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा ने चुनाव से पहले किए वादे पूरे नहीं किए। अखिलेश ने कहा है, “हम उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर भाजपा को हराएँगे। जब उन्हें वोट की जरूरत होती है तो वे वादे करते हैं। महँगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है। भाजपा ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे पूरे नहीं किए।”

इससे पहले उन्होंने कॉन्ग्रेस को सलाह देते हुए कहा था, “भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनावों में हराना होगा। कॉन्ग्रेस और कई अन्य सभी दलों को अपनी भूमिका को समझना होगा। कॉन्ग्रेस को चुनाव के संबंध में अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। कई राज्यों के मुख्यमंत्री एक ऐसे गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं, जो मिलकर काम करे। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव कोशिश कर रहे हैं। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन कोशिश कर रहे हैं, बिहार के सीएम नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी हैं। गठबंधन के लिए नाम पर बाद में चर्चा की जाएगी।”

साल 2017 में हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सपा ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया था। हालाँकि, दोनों पार्टियों ने इतना खराब प्रदर्शन किया कि कुल मिलाकर 47 सीटें ही हासिल कर पाए थे। मोदी और योगी लहर के चलते सूफड़ा साफ होने के बाद अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़ दिया था।

इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने मायावती का हाथ थामते हुए बसपा से गठबंधन किया था। उस चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 76 सीटों पर चुनाव लड़ा था। दोनों पार्टियों ने गाँधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी और रायबरेली को गाँधी परिवार के सदस्यों सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के लिए छोड़ दिया था। हालाँकि, राहुल गाँधी को अपने गढ़ अमेठी में स्मृति ईरानी के हाथों हार का मुँह देखना पड़ा था। वहीं, सपा के खाते में 5 सीटें और बसपा के खाते में 10 सीटें आईं थीं।

बता दें कि समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए अखिलेश यादव कोलकाता गए हुए थे। यह बैठक 11 साल के लंबे अंतराल के बाद हुई। इस बैठक में समाजवादी पार्टी ने इस साल के अंत में तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा चुनाव के लिए नीतियों और रणनीतियों पर चर्चा की। बैठक में अखिलेश यादव के अलावा शिवपाल यादव, राज्यसभा सांसद जया बच्चन, 20 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और कई अन्य नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

पटना के 1 दर्जन कोचिंग संस्थान निशाने पर: ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट में दावा – खान सर से होगी पूछताछ, मनीष कश्यप के रिमांड की तैयारी

तमिलनाडु विवाद में गिरफ्तार बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यप को अब पुलिस द्वारा रिमांड पर लेने की तैयारी है। राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) मनीष से फिर से पूछताछ करना चाह रही है। रविवार (19 मार्च, 2023) को मनीष को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं दावा किया जा रहा है कि मनीष के आर्थिक मददगारों की भी जाँच करवाई जा रही है। इस लिस्ट में छात्रों को कम्पटीशन की तैयारी करवाने वाले लगभग 1 दर्जन कोचिंग संस्थान शामिल हैं। इन संस्थानों में खान सर और IAS एकेडमी का भी नाम लिया जा रहा है।

मनीष कश्यप को रिमांड पर लेने की कोशिश की घोषणा खुद बिहार पुलिस ने 18 मार्च, 2023 (शनिवार) को उनकी गिरफ्तारी के बाद ही हर दी थी। तब पुलिस ने कहा था कि मनीष कश्यप के खिलाफ दर्ज अन्य सभी मामलों की जाँच समय से पूरी करवाई जाएगी। तब बिहार पुलिस ने मनीष पर पहले से 10 केस दर्ज होने की बात कही थी। इसमें पुलिस पर अटैक, सांप्रदायिक पोस्ट और अन्य असामाजिक हरकतों में शामिल रहने के आरोप शामिल हैं।

दैनिक भास्कर के मुताबिक बिहार पुलिस की जाँच के दायरे में IAS एकेडमी और खान सर भी हैं। IAS एकेडमी के खाते से मनीष कश्यप को 1 लाख रुपए ट्रांसफर होने की भी जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि पुलिस ने पहले भी आईएएस एकेडमी के डायरेक्टर से सवाल-जवाब कर लिया है, लेकिन उन्हें फिर से बुलाया जा सकता है। रिपोर्ट में मनीष सर के आर्थिक मददगारों में खान सर का भी जिक्र किया गया है।

दावे के मुताबिक, जल्द ही खान सर से भी पूछताछ की जा सकती है। दैनिक भास्कर के अलावा कुछ स्थानीय पोर्टलों ने भी इसी तरह के दावे किए हैं। डेली बिहार डॉट कॉम के अनुसार मनीष कश्यप को ही खान सर का इंटरवियु कर के उनको चर्चित करने का दावा किया गया है। बताया गया है कि खान सर सबसे अधिक इंटरव्यू भी मनीष कश्यप को देते हैं।

बिहार सरकार के गृह विभाग द्वारा बताया गया है कि कुछ ऐसे कोचिंग संस्थान भी हैं जिन्होंने मनीष कश्यप की होर्डिंग राजधानी पटना में लगवाई थी। कोचिंग संस्थानों द्वारा इस होर्डिंग की इजाजत न लिए जाने का आरोप है। आर्थिक अपराध शाखा ने पटना नगर निगम और स्थानीय पुलिस से इस पूरे मामले की जाँच करने के लिए पत्र लिखा है।

बिहार के जमुई में पकड़ा गया ‘चुम्मा गैंग’, मोहम्मद अकरम है सरगना: आज तक का दावा, अस्पताल में महिला को किस कर भागने का वीडियो हुआ था वायरल

पिछले दिनों बिहार के जमुई जिले का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक बदमाश सदर अस्पताल के कैंपस में एक महिला को जबरन किस (Kiss) कर भाग गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने एक सीरियल किसर गैंग को पकड़ा है। मोहम्मद अकरम इस गैंग का सरगना है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। हालाँकि खबर लिखे जाने तक बिहार पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की थी।

रिपोर्ट के अनुसार जमुई में एक गैंग सक्रिय है जो दिन में महिलाओं से छेड़खानी और रात को घरों में चोरी करता है। पुलिस ने मोहम्मद अकरम और उसके 4 साथियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनकी रविवार (19 मार्च 2023) को गिरफ्तारी होने की बात कही जा रही है।

आज तक की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिहार पुलिस को जमुई के महिसौढी बाबू टोला में कुछ संदिग्धों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इस जानकारी पर पुलिस ने दबिश दी थी। सूचना सही पाई गई और मोहम्मद अकरम पुलिस के हत्थे चढ़ गया। अकरम इसी मोहल्ले का रहने वाला है। उसके साथ गैंग के 4 अन्य लोग भी मौजूद थे। पुलिस ने उन सभी को दबोच लिया। तलाशी के दौरान इस गिरोह से चोरी की गई तमाम चीजें बरामद हुईं हैं। स्थानीय थाने में अकरम और उसके साथियों के खिलाफ पहले से ही केस दर्ज था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस पकड़े गए पाँचों आरोपितों से पूछताछ कर रही है। दावा किया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान इन सभी ने दिन में महिलाओं से छेड़खानी करने और रात में लोगों के घरों में चोरी करने का गुनाह कबूल किया है। पुलिस द्वारा इन सभी को सीरियल किसर बताया जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि अकरम के नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।

ऑपइंडिया ने इस खबर की पुष्टि के लिए जमुई के SP को फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल नहीं उठाई। अगली कॉल हमने DSP हेडक्वार्टर जमुई को की तो उन्होंने खबर का स्रोत पूछा और बाद में मामले की जानकारी न होने की बात कही। स्थानीय टाउन थाने पर जब हमने सम्पर्क किया तो फोन थाना प्रभारी की जगह ऑन ड्यूटी एक सब इंस्पेक्टर ने उठाई। उन्होंने बताया कि अक्सर गिरफ्तारियाँ होती रहती हैं, लेकिन महिला से अभद्रता से जुड़े जिस मामले की जानकारी माँगी जा रही है उसे वो अपने सीनियर से पूछ कर ही बता पाएँगे। पुलिस का वर्जन मिलने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा।

गौरतलब है कि 13 मार्च 2023 को जमुई का वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक बदमाश स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी की एक महिला कर्मचारी को जबरन किस (Kiss) कर के भाग गया था। ड़िता जमुई के सदर अस्पताल में साल 2015 से कार्यरत है। घटना के दिन वह अस्पताल के खुले कैम्पस में फोन पर किसी से बात कर रही थी। इस दौरान एक अज्ञात आरोपित दीवार कूद कर अस्पताल के अंदर घुस गया। यहाँ पहुँच कर उसने पीड़िता को जबरन किस करना शुरू कर दिया।

खालिस्तानियों के खिलाफ एक्शन में ऑस्ट्रेलिया की पुलिस, 2 महीने तक थी चुप: प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियन पीएम के सामने उठाया था मुद्दा

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में खालिस्तान रेफरेंडम के नाम पर हुई हिंसा मामले में अब विक्टोरिया पुलिस ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। 2 महीने पुराने मामले में विक्टोरिया पुलिस ने अचानक उपद्रवियों की तस्वीरें जारी करके उनकी पहचान के लिए लोगों से मदद माँगी। ये एक्शन पीएम मोदी द्वारा ऑस्ट्रलियाई पीएम के सामने भारत विरोधी हिंसा का मामला उठाने के बाद लिया गया।

विक्टोरिया पुलिस ने अपने ट्वीट में लिखा कि 29 जनवरी को खालिस्तान रेफरेंडम के दौरान जो उपद्रव हुआ उसमें शामिल 6 लोगों को पकड़ने में हमारी सहायता करें। 20 मार्च को जारी रिलीज में पुलिस ने बताया कि कैसे 29 जनवरी को जनमत संग्रह के लिए इकट्ठा हुई भीड़ हिंसक हुई। उन्होंने झंडों के डंडों का प्रयोग हथियार की तरह किया जिसमें कई घायल हुए। इसके अलावा उस दिन भारतीय ध्वज को जलाने की घटना भी सामने आई थी।

पुलिस के मुताबिक उन्होने इस मामले में कार्रवाई करके उपद्रवियों को शांत करवा दिया था और दो लोग गिरफ्तार हुए थे। अब बाकी 6 को ढूँढने के लिए तलाश जारी है। पुलिस ने कहा कि अगर किसी को भी इनके बारे में पता हो तो वो 1800 333 000 पर सूचना दें।

खालिस्तानियों के खिलाफ लोग कर रहे ऑस्ट्रेलिया पुलिस की मदद)

विक्टोरिया पुलिस की इस अपील के बाद लोग आगे आकर सोशल मीडिया के जरिए पुलिस की मदद करने की कोशि कर रहे हैं। कोई हिंसक तत्वों की फोटो जारी कर रहा है। तो कोई ये कह रहा है कि अगर इनपर 50 डॉलर जितना छोटा इनाम भी रख दिया जाए तो ये लोग पकड़ में आ जाएँगे।

कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या ऑस्ट्रेलिया सरकार पर फेशियल आईडी रिकॉर्ड नहीं हैं कि चेहरे से उनकी पहचान पता चल जाए। अगर ये पकड़ में नहीं आ रहे तो इनके रिश्तेदारों को पकड़ा जाना चाहिए।

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया पीएम के आगे उठाया मुद्दा

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों भारत आए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तानी तत्वों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले का मुद्दे को उठाया था। उन्होंने इस संबंध में बताया था, “मैंने ऑस्ट्रेलिया में मंदिरों पर हमले की खबरें देखी हैं। मैंने पीएम अल्बनीज को इस बात से अवगत करा दिया है और उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई उनके लिए प्राथमिकता है।”

‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, भगोड़े अमृतपाल का समर्थन: बरसी पर बोली सिद्धू मूसेवाला की माँ- हम आजाद नहीं, गुलाम हैं

पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 1 साल पहले हुई हत्या के बाद मनाई गई पहली बरसी में खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी की खबर है। यह नारेबाजी मौके पर जमा हुई भीड़ द्वारा की गई। मूसेवाला की माँ ने भी स्टेज से देश की गुलामी या आज़ादी जैसे सवाल किए। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस आयोजन में पंजाब पुलिस के भगोड़े अमृतपाल की भी तरफदारी की गई। रविवार (19 मार्च 2023) को यह बरसी मानसा स्थित किसान मंडी में आयोजित हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मूसेवाला की बरसी में लगभग 10 हजार लोगों की भीड़ थी। हालाँकि कार्यक्रम से पहले सिद्दू के पापा बलकौर सिंह ने 1 लाख लोगों की भीड़ जुटने का दावा किया था। अमृतपाल सिंह के खिलाफ हो रही कार्रवाई के चलते पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मंच पर धार्मिक शबद कीर्तन चल रहा था जहाँ मूसेवाला की तस्वीर लगी हुई थी। थोड़ी देर बाद सिद्धू मूसेवाला की माँ चरण कौर स्टेज पर आईं। उन्हें देखते ही भीड़ खालिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने लगी।

मूसेवाला की माँ ने इस नारेबाजी का विरोध नहीं किया बल्कि उन्होंने उल्टे भीड़ से ही देश की आज़ादी और गुलामी जैसा सवाल कर डाला। उन्होंने पंजाबी भाषा में पूछा कि देश आज़ाद है या गुलाम। इसके जवाब में खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करती भीड़ ने जवाब दिया कि देश गुलाम है। इसके बाद चरण कौर ने आगे कहा कि ये गलतफहमी है कि हम आज़ाद हो गए हैं। उन्होंने कहा, “हम तो अब भी गुलाम हैं।” मूसेवाला की माँ ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को सरकार का आदमी बताते हुए उसके जेल से वायरल इंटरवियु का जिक्र किया।

चरण कौर का बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। अपने बयान में उन्होंने पंजाब पुलिस द्वारा भगोड़ा घोषित किए गए अमृतपाल सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वो अमृताल को नहीं जानती हैं लेकिन उसे बेवजह गलत साबित करने की कोशिश की जा रही है। चरण कौर ने आगे कहा कि सिद्धू मूसेवाला के बाद सलमान खान को भी मारने का चैलेंज खुद को राष्ट्रवादी बता कर देने वाले लॉरेंस पर अभी तक सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। इसके भाग भीड़ ने पंजाब सरकार के भी विरोध में नारेबाजी की।

गौरतलब है कि 29 मई 2022 को सिद्धू मूसेवाला की पंजाब में हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उनकी थार जीप को घेरकर एके-47 से गोलियाँ बरसाई थीं। इस हत्याकाँड के मुख्य आरोपित के तौर पर लॉरेन्स बिश्नोई का नाम सामने आया था जो इस समय पंजाब की बठिंडा जेल में बंद है।