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पंजाब में अब जेल में ही गैंगवार, मारे गए सिद्धू मूसेवाला की हत्या के दो आरोपित: खालिस्तानियों ने भी नए सिरे से शुरू कर दिया है आतंक

पंजाब में कानून व्यवस्था पूरी तरह से लचर हो चुकी है। अब जेल में गैंगवार की घटना सामने आई। इसमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के आरोपित दो गैंगस्टर मारे गए। इनकी पहचान मनदीप तूफान और मनमोहन सिंह के रूप में हुई। वहीं एक अन्य गैंगस्टर केशव गंभीर रूप से घायल हुआ है। ये सभी पंजाब के तरनतारन में गोइंदवाल साहब जेल में बंद थे। घटना रविवार (26 फरवरी 2023) की है।

दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के अनुसार, गैंगस्टर मनदीप सिंह तूफान की जेल में बंद अन्य कैदियों के साथ किसी बात को लेकर बहस हुई थी। कुछ देर बाद यह बहस मारपीट में बदल गई। जहाँ अन्य कैदियों ने मनदीप, मोहन और केशव पर हमला कर दिया। इस दौरान कैदियों ने उन पर धारदार हथियारों से भी हमला किया। इस हमले में मनदीप और मोहन की जान चली गई। वहीं केशव गंभीर रूप से घायल है। उसे इलाज के किए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

जेल में हुए गैंगवार को लेकर पंजाब के डीएसपी जसपाल सिंह ढिल्लों ने कहा है कि गोइंदवाल साहिब जेल में गैंगस्टर्स के बीच मारपीट हुई। इसमें मनदीप सिंह तूफान मारा गया। वहीं, दो अन्य गैंगस्टर केशव और मनमोहन सिंह मोहना को सिविल अस्पताल तरनतारन में भर्ती कराया गया था। इसमें से मनमोहन की मौत हो गई। केशव गंभीर रूप से घायल है।

तरनतारन के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. जगजीत सिंह ने भी मनदीप सिंह तूफान और मनमोहन सिंह मोहना की मौत की पुष्टि की है। वहीं, सीनियर पुलिस अधीक्षक गुरमीत सिंह चौहान ने कहा है कि मारे गए गैंगस्टर्स के खिलाफ कुछ अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज थे। मारे गए गैंगस्टर मनदीप, मनमोहन और घायल गैंगस्टर केशव एक ही गुट के हैं।

बता दें कि पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की 29 मई 2022 को पंजाब के मनसा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में पुलिस ने गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया समेत 34 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। इसमें करीब 1 दर्जन से अधिक शार्प शूटर के नाम शामिल हैं।

गौरतलब है कि पंजाब की कानून व्यवस्था पूरी तरह से बेकाबू चुकी है। खालिस्तानी आतंकी राज्य में एक बार फिर सिर उठा रहे हैं। हाल ही में अजनाला थाने में हुई घटना भी इस बात का सबूत है कि पंजाब पुलिस खालिस्तानियों पर रोक लगाने में असमर्थ है। वहीं, राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है।

गिरफ्तार हुए दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया: शराब घोटाले में CBI की कार्रवाई, BJP नेताओं ने कहा – गली-गली में शोर है, मनीष सिसोदिया चोर है

CBI ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया है। लंबी पूछताछ के बाद जाँच एजेंसी द्वारा ये कार्रवाई की गई। उनकी गिरफ़्तारी को ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ ने ‘लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन’ करार दिया है। बता दें कि सीएम अरविंद केजरीवाल ने पहले ही घोषित कर दिया था कि सिसोदिया गिरफ्तार होने वाले हैं। सिसोदिया ने भी पूछताछ के लिए जाने से पहले ये दावा किया था।

दक्षिणी दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। CBI के मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। विरोध प्रदर्शन के दौरान उग्र हुए कई AAP कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया है। कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से 8 महिला कार्यकर्ता हैं, जिन्हें रिहा कर दिया जाएगा। AAP सांसद सांसद संजय सिंह को भी हिरासत में लिया गया है, जिन्हें राज्यसभा में हंगामा करने के लिए जाना जाता है।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और कपिल मिश्रा ने मनीष सिसोदिया को ‘चोर’ करार दिया। बता दें कि CBI की पूछताछ से पहले समर्थकों के साथ मनीष सिसोदिया ने रोडशो किया था और फिर महात्मा गाँधी के समाधि स्थल राजघाट जर्क प्रार्थना की थी। गिरफ़्तारी से पहले लगभग 8 घंटों तक मनीष सिसोदिया से पूछताछ चली। 19 फरवरी को ही उन्हें पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन तब उन्होंने बजट में व्यस्त होने की बात कही थी।

अक्टूबर 2022 में जब मनीष सिसोदिया को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, तब भी उन्होंने अपनी गिरफ़्तारी का दावा किया था। हालाँकि, ऐसा कुछ हुआ नहीं। इस दौरान लोगों ने ये भी कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपने पास कोई मंत्रालय नहीं रखा हुआ है और अधिकतर काम मनीष सिसोदिया ही करते रहे थे। ऐसे में उन्हें नई परेशानी झेलनी पड़ी है। पूर्व क्रिकेटर एवं सांसद गौतम गंभीर ने भी पूछा कि आखिर गुनाह कर के जाओगे कहाँ?

सेमी-पॉर्न तस्वीरों वाली ‘नीता भाभी’ को फॉलो करते हैं ‘द प्रिंट’ के संस्थापक शेखर गुप्ता: बायो में लिखा है – न्यूड कंटेंट देने वाले…

द प्रिंट के संस्थापक व वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता सोशल मीडिया पर चर्चा में आ रहे हैं। इस बार वजह उनके द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज नहीं या प्रोपेगेंडा नहीं, बल्कि उनकी फॉलोइंग लिस्ट में शामिल ‘नीता भाभी’ का अकॉउंट हैं।

अपने पर्सनल अकॉउंट से ‘नीता भाभी’ को फॉलो करने के कारण उनके स्क्रीनशॉट को शेयर किया जा रहा है। दरअसल ‘नीता भाभी’ कोई सामान्य अकॉउंट नहीं है। इसके बायो में ही कुछ नाम दिए गए हैं जिनके बारे में लिखा है “न्यूड कंटेंट देने वाले ब्लॉक”।

इसके अलावा नीता भाभी (@Misha223311) के अंकाउंट को खोलकर भी अगर देखें तो ऐसी लड़कियों की तस्वीरें जो बिकिनी पहनकर बैठी हैं तो कहीं बिकनी में लेटी हैं। इतना ही नहीं जो अकॉउंट नीता भाभी द्वारा फॉलो किए गए हैं उनके भी सॉफ्ट पोर्न कंटेंट ही परोसा गया है।

शेखर गुप्ता की फॉलोइग लिस्ट में Nita Bhabhi का नाम (ऑपइंडिया द्वारा लिया गया स्क्रीनशॉट)

शेखर गुप्ता की लिस्ट में छिपा ये नाम ट्विटर हैंडर @Befittingfact ने उजागर किया है। इसके अलावा क्रॉस चेक करने पर भी ऑपइंडिया ने पाया कि वाकई ‘द प्रिंट’ वाले वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ‘नीता भाभी’ के फॉलोवर हैं।

शेखर गुप्ता की फॉलोइंग लिस्ट का स्क्रीनशॉट देखने के बाद लोग अलग अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कोई उन्हें ठरकी बुड्ढा कह रहा है। तो कोई इसे प्राकृतिक बता रहा है। एक यूजर कहता है, “कौन कहते हैं कि बूढ़े इश्क नहीं करते, वो इश्क तो करते हैं लेकिन उनपर कोई शक नहीं करता।”

एक यूजर ने शेखर गुप्ता के लिए कि बंदा अगर पूरे-पूरे दिन ट्विटर पर रहेगा तो उसे माहौल बनाने के लिए कुछ तो जरूरत पड़ेगी ही।

जानें कौन हैं बागेश्वर के दिव्यांग पूरन, जिनकी PM मोदी ने की तारीफ़: 98वीं बार देश के साथ ‘मन की बात’, कहा – कोने-कोने तक पहुँचा डिजिटल इंडिया, सिंगापुर में भी UPI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 फरवरी 2023) को मन की बात (Mann Ki Baat) के जरिए देश को संबोधित किया। इसमें पीएम मोदी ने उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के लोक गायक दिव्यांग पूरन सिंह राठौर की प्रशंसा की। इसके अलावा उन्होंने वोकल फॉर लोकल के साथ होली मनाने का आह्वान किया। साथ ही कहा है कि डिजिटल इंडिया की ताकत देश के कोने-कोने में पहुँच रही है।

मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने लोक गायक दिव्यांग पूरन सिंह राठौर का जिक्र करते हुए कहा है, “पूरन सिंह एक दिव्यांग कलाकार हैं। वह राजुला-मलूशाही, न्युली, हुडका बोल, जागर जैसे विभिन्न संगीतों को लोकप्रिय बना रहे हैं। उन्होंने इससे जुड़ी कई ऑडियो रिकॉर्डिंग भी तैयार की हैं। पूरन सिंह जी ने उत्तराखंड के लोक संगीत में अपनी प्रतिभा दिखाकर कई पुरस्कार भी जीते हैं। समय की कमी के कारण, मैं यहाँ सभी पुरस्कार विजेताओं के बारे में बात नहीं कर पाऊँगा। लेकिन, मुझे यकीन है कि आप उनके बारे में जरूर पढ़ेंगे।”

दरअसल, पूरन सिंह राठौर का गत 15 फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद से वह स्थानीय स्तर पर चर्चा में बने हुए थे। लेकिन, अब ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जिक्र किए जाने के बाद से पूरन देश भर में चर्चा का विषय हैं।

1 जनवरी 1984 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के रीमा गाँव में जन्मे पूरन सिंह राठौर नेत्रहीन हैं। स्कूल जाने की उम्र में उन्हें गाय चराने जाना पड़ता था। जंगलों में गाय चराते समय ही वह लोकगीत गाते थे। बड़े हुए तो 11 साल की उम्र से मंच पर गीत गाना शुरू किया। उसी लोकगीत के बल पर आज वह लाखों दिलों के दिल पर राज कर रहे हैं।

पूरन सिंह राठौर पढ़े-लिखे नहीं हैं। वह गीत नहीं लिखते। लेकिन उनके गले से जो स्वर निकलता है वह लोगों को आनंद से भर देता है। पूरन जागर, ऋतु रैण, छपेली, झोड़ा, चांचरी, न्योली और उत्तराखंड फोक गाते हैं। थाली, डांगर, ढोल, दमुआ, हुड़ुका आदि वाद्य यंत्र बजाते हैं। उनकी 15 साल की बेटी रोशन 10वीं में पढ़ती है। वहीं, 13 साल की नेहा कक्षा 7 और 10 साल की गरिमा 5वीं और 6 साल का बेटा मयंक कक्षा 1 में पढ़ते हैं। पूरन अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का पालन पोषण गायन से होने वाली कमाई से ही करते हैं।

चुनावों में प्रचार भी करते हैं पूरन

पूरन सिंह राठौर लोकसभा, विधानसभा और ग्राम पंचायत के चुनाव में प्रचार करते हैं। प्रचार करने के लिए वह गीत गाते हैं। उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की सरकार की वापसी के लिए भी पूरन ने चुनाव प्रचार किया था। 2019 के आम चुनाव में उन्होंने ‘कमल फूल में बटन दबाया, नरेंद्र मोदी को जरूर जिताया…’ समेत कुछ अन्य गीत गाए थे।

मन की बात के 98वें एपिसोड में राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों को होली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा है कि सभी को अपने त्यौहार वोकल फॉर लोकल के संकल्प के साथ मनाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि तेजी से आगे बढ़ते देश में डिजिटल इंडिया की ताकत कोने-कोने में पहुँच रही है। ई-संजीवनी एप से वीडियो क्रॉन्फ्रेंस के माध्यम से डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं। देश के सामान्य लोगों के लिए खासतौर से पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए ई-संजीवनी जीवन रक्षा का केंद्र बन रहा है।

इसके अलावा पीएम मोदी ने UPI ट्रांजेक्शन को लेकर कहा है, “भारत के यूपीआई की ताकत भी आप जानते ही हैं। दुनिया के कितने ही देश, इसकी तरफ आकर्षित हैं। कुछ दिन पहले ही भारत और सिंगापुर के बीच यूपीआई पे नाउ लिंक (UPI-Pay Now Link) लॉन्च किया गया। अब, सिंगापुर और भारत के लोग, अपने मोबाइल फ़ोन से उसी तरह पैसे भेज रहे हैं जैसे वे अपने-अपने देश के अन्दर करते हैं।”

RRR के ‘नाटू-नाटू’ पर झूमा कोरियाई दूतावास: राजदूत से लेकर कर्मचारी सब नाचे, Video ने मोहा PM मोदी का भी मन

भारत में कोरिया की दूतावास ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें राजदूत RRR फिल्म के प्रसिद्ध गाने ‘नाटू… नाटू…’ पर डांस करते नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 फरवरी 2023) को इसे रिट्वीट करके तारीफ की। पीएम ने कहा, ‘ऊर्जा से भरपूर टीम का अद्भुत प्रयास’।

कोरियाई दूतावास द्वारा शेयर किए गए 53 सेकेंड के इस वीडियो को सोशल मीडिया पर लोग काफी पसंद कर रहे हैं। कोरियन एंबेसी ने शनिवार (25 फरवरी 2023) की रात इस वीडियो को ट्वीट किया था। इसके बाद यह वायरल हो गया है।

कोरियाई दूतावास ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “क्या आप नाटू को जानते हैं? हम कोरियाई दूतावास में ‘नाटू… नाटू…’ का डांस करते हुए खुशी महसूस कर रहे हैं। आप भी देखिए भारत में कोरियाई दूतावास चांग जे बोक ने अपनी पूरी टीम के साथ इस गाने पर कैसा डांस किया है।”

सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स इसकी काफी तारीफ तक कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “कोरियन एंबेसी को सलाम, ये काफी शानदार है। आप सभी ने एक-एक स्टेप्स बहुत बारीकी से किया है।” एक यूजर ने लिखा, “एस.एस राजामौली एक ग्लोबल आइकन हैं। हमें उन पर गर्व है। भारतीय लोग अपनी संस्कृति का जश्न मना रहे हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “संगीत के जरिए कई संस्कृतियों को साथ लाते हुए देखना अद्भुत है। मुझे याद है जब एक प्राइवेट कंपनी ने ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया था। वहाँ के लोगों ने गंगनम स्टाइल पर डांस किया था। कोरिया आपने रॉक कर दिया।”

बता दें कि ऑस्कर 2023 के फाइनल नॉमिनेशन में भारतीय फिल्म RRR के गाने नाटू-नाटू को बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग की कैटेगरी में नामांकित किया गया था। एसएस राजामौली की बहुचर्चित फिल्म RRR के इस गाने को एमएम कीरवानी ने कंपोज किया है।

कुछ समय पहले इस गाने ने गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड में बेस्ट सॉन्ग कैटेगरी का अवॉर्ड जीता था। क्रिटिक्स चॉइस अवॉर्ड में RRR ने बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म और नाटू-नाटू गाने ने बेस्ट सॉन्ग का अवॉर्ड जीता था। 24 फरवरी 2023 की रात हॉलीवुड क्रिटिक्स एसोसिएशन फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन किया गया था। इसमें RRR ने कुल 4 कैटेगरी में अवॉर्ड जीते हैं।

राम चरण और जूनियर NTR की इस फिल्म ने बेस्ट एक्शन फिल्म, बेस्ट इंटरनेशनल फीचर, बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग और बेस्ट स्टंट कैटेगरी में ट्रॉफीज अपने नाम की है। इस अवॉर्ड को लेने के लिए राम चरण ने नंगे पैर अमेरिका की यात्रा की थी।

इसके अलावा, RRR को मानद एचसीए स्पॉटलाइट अवार्ड भी मिला है। इस तरह इस फिल्म ने कुल 5 ट्राफी जीती हैं। राजामौली ने सर्वश्रेष्ठ स्टंट के लिए पुरस्कार स्वीकार करते हुए अपने भाषण में कहा, “पूरी फिल्म में असंख्य एक्शन शॉट्स में मुश्किल से 2-3 शॉट ऐसे थे, जहाँ हमने बॉडी डबल्स का इस्तेमाल किया। अभिनेताओं ने हर स्टंट का प्रदर्शन किया। वे अद्भुत लोग हैं। यह पूरी टीम का संयुक्त प्रयास है। मैं अपनी टीम को धन्यवाद देता हूँ।”

राजामौली ने कहा, “इसके लिए पूरी टीम है। हमने इस फिल्म को बनाने के लिए 320 दिनों की कड़ी मेहनत की है, जिनमें से ज्यादातर स्टंट के लिए गए हैं।” उन्होंने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग के लिए भी बहुत मायने रखता है। राजामौली ने कहा, “उम्मीद है, हमारे पास आगे उड़ान भरने के लिए ये पंख हैं। अंत में मेरे देश के लिए, अद्भुत कहानियों की भूमि, भारत। मेरा भारत महान। जय हिंद।”

‘मोदी मर गया… हाय-हाय’ : मनीष सिसोदिया से हो रही CBI पूछताछ से बौखलाए AAP समर्थक, सड़कों पर लगाए PM के खिलाफ नारे

दिल्ली शराब घोटाले के मामले में सीबीआई द्वारा मनीष सिसोदिया से की जा रही पूछताछ के बीच आप कार्यकर्ताओं की उलजुलूल बयानबाजी जारी है। वीडियो सामने आई है जिसमें आप समर्थक ‘मनीष सिसोदिया जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे हैं और साथ में ‘मोदी मर गया, मर गया’ कहकर चिल्ला रहे हैं।

सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि नई दिल्ली के फतेहपुर बेरी के पास बस में भरकर कुछ महिला आप समर्थकों को ले जाया जा रहा है जिनमें से एक महिला दरवाजे से निकल निकलकर पहले- ‘मनीष सिसोदिया जिंदाबाद-जिंदाबाद’ चिल्लाती है और उसके बाद ‘मोदी मर गया हाय-हाय’ के नारे लगाती रहती है।

इसके अलावा एक वीडियो आप के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट की गई है। इस वीडियो में संजय सिंह कई आप समर्थकों के साथ बैठकर ताली पीट रहे हैं और नारा लगाया जा रहा है- अडानी का नौकर कौन है-मोदी है, मोदी है।

आम आदमी पार्टी के कई नेता सुबह से #modifearskejriwal हैशटैग पर ट्वीट करके दावा कर रहे हैं पीएम मोदी दिल्ली के सीएम से डरते हैं इसलिए वह मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार करवाने की कोशिश कर कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि सीबीआई ने उन्हें शराब नीति मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है। इस बीच पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भी अपने ट्विटर पर ट्वीट कर बताया कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

याद दिला दें कि कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की तरह कुछ कॉन्ग्रेसियों की भी वीडियो सामने आई थी जो चिल्लाते दिखे थे- मोदी तेरी कब्र खुदेगी। इस नारेबाजी के बाद पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा को गिरफ्तार किया था। माफी माँगने के बाद उन्हें जमानत दी गई थी।

अब कर्नाटक में ‘वन्दे भारत’ ट्रेन पर पत्थरबाजी, खिड़कियों को पहुँचा नुकसान: अकेले बेंगलुरु डिवीज़न में पिछले 2 महीनों में पत्थरबाजी के 34 मामले

वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की घटनाएँ लगातार सामने आती रहतीं हैं। अब, बेंगलुरु में मैसूर-चेन्नई ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ पर पत्थरबाजी हुई। इससे ट्रेन के एक कोच की दो खिड़कियों को नुकसान हुआ। इस पत्थरबाजी में कोई घायल नहीं हुआ। रेलवे पुलिस ने इसको लेकर मामला दर्ज किया है। घटना शनिवार (25 जनवरी, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैसूर और चेन्नई के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 20608 पर पत्थरबाजी कृष्णराजपुरम-बेंगलुरु छावनी रेलवे स्टेशनों के बीच हुई। इस पत्थरबाजी से कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। लेकिन ट्रेन की दो खिड़कियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं।

बीते कुछ दिनों में ट्रेन में पत्थरबाजी की कई घटनाएँ सामने आई हैं। इसको लेकर दक्षिण पश्चिम रेलवे, बेंगलुरु डिवीजन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु डिवीजन में जनवरी 2023 में पथराव के 21 मामले और फरवरी 2023 में 13 मामले दर्ज किए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 नवंबर 2022 को इस वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह ट्रेन चेन्नई और मैसूर के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है। चेन्नई सेंट्रल से इसका निकलने का समय सुबह 5:50 बजे है। वहीं यह दोपहर 12:30 बजे मैसूर पहुँचती है। इस यात्रा के दौरान यह ट्रेन बेंगलुरु के केएसआर स्टेशन पर रुकती है।

बता दें कि इससे पहले गत 10 फरवरी 2023 को भी तेलंगाना के महबूबाबाद में वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की घटना सामने आई थी। यह घटना तब हुई जब ट्रेन सिकंदराबाद से विशाखापत्तनम की ओर जा रही थी। इस दौरान हुई पत्थरबाजी से भी ट्रेन की खिड़कियाँ टूट गईं थीं।

इसके अलावा 20 जनवरी 2023 को बिहार के कटिहार जिले के बलरामपुर थाना क्षेत्र के डालखोला-तेलता रेलवे स्टेशन की ओर जा रही थी। इसी दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22302 पर पत्थरबाजी हुई थी। इस पत्थरबाजी से बोगी संख्या C-6 की खिड़की का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया था।

भारत में विदेशी वस्तुओं का दहन करने वाले पहले नेता थे वीर सावरकर, तब गाँधी ने भी किया था विरोध: छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के सामने साथियों संग ली थी शपथ

साल 1904 का था, जब सावरकर साहब अलग-अलग केंद्रों पर स्थापित की गई गुप्त सभाओं से संपर्क करते हैं। उनको दिख जाता है कि सुदृढ़ नेतृत्व के बिना गुप्त सभाओं के सभी सदस्य शिथिल हो चुके हैं। आगे आने वाले समय के लिए वो स्वयं इन सभी को संगठित करने का बीड़ा उठा लेते हैं। इस दृष्टिकोण को सामने रखते हुए सावरकर स्वयं एक गुप्त सभा का आयोजन करते हैं। सभी केन्द्रों से कहा जाता है कि वो अपने-अपने प्रतिनिधियों को भविष्य की रणनीतियों और उनके संविधान पर चर्चा हेतु भेजें।

सावरकर की एक पुकार पर दो सौ लोगों का समूह इकठ्ठा हो जाता है। नि:स्वार्थ सेवा सभी को दिख जाती है। हमारी आँखें हमारे हृदय का दर्पण होती हैं। लोगों को सावरकर की आँखों में देश के लिए जूनून दिखता था। उनकी बातों में देश के लिए मर-मिटना सुनाई देता था। सावरकर उस रोज़, नासिक में वी. एम. भट्ट के भागवत बाड़ा वाले घर में हुई सभा में एक अविस्मरणीय भाषण देते हैं। सावरकर अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के गौरवशाली कारण के लिए शिवाजी, बाज़ीराव, माज़िनी और कोसुथ जैसे महान व्यक्तित्वों के दिखाए रास्ते पर चलने की साहसी घोषणा कर डालते हैं।

इसी सभा में सावरकर और साथियों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध हेतु संगठन की भविष्य की नीति तैयार की जाती है। वे सभी साथियों को इस बात के लिए तैयार करते हैं कि अब इस आंदोलन को महाराष्ट्र से बाहर ले जाने का समय आ गया है। अलग-अलग प्रान्तों में फैले स्कूल-कॉलेजों के नवयुवकों तक विद्रोह के स्वर पहुँचाने की रणनीति तैयार करने के लिए संगठन की नींव रख दी जाती है। इस संगठन को नाम दिया जाता है-अभिनव भारत।

उसी रात सावरकर और सभी साथी शिवाजी के चित्र के सामने खड़े होकर कसम खाते हैं। एक ऐसी कसम, जिसके लिए हज़ारों लोगों ने अपनी और अपने परिवार की बलि चढ़ा दी। एक ऐसी कसम जिसने सावरकर को हमेशा के लिए अमर कर डाला। सभी साथी छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र के सामने खड़े होते हैं और एक स्वर में कहते हैं- “वन्दे मातरम्!!” आगे सावरकर और उनके साथी एक स्वर में प्रण लेते हैं:

“आज मैं ईश्वर के नाम पर, भारत माता के नाम पर और उन सभी बलिदानियों के नाम पर जिन्होंने भारत माता के लिए अपना खून बहाया है शपथ लेता हूँ। मैं शपथ लेता हूँ उस धरती के नाम पर, जिसमें मैंने जन्म लिया और जिसमें मेरे महान पूर्वजों की पवित्र राख मिली है। वह पवित्र धरती जो हमारे नन्हे बच्चों का झूला है। मैं उन अद्भुत माताओं के नाम पर शपथ लेता हूँ जिनके मासूम बच्चों को अत्याचारी अंग्रेज़ों ने ग़ुलाम बना कर प्रताड़ित किया है और मार दिया है।”

वो आगे कहते हैं, “मैं इस बात से अब पूरी तरह से सहमत हूँ कि पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता या स्वराज्य के बिना मेरा देश कभी भी विश्व में उस विराट रूप को प्राप्त नहीं कर सकता जिस महानता का वो हक़दार है। मुझे यह भी पूर्णरूप से विश्वास है कि विदेशी शासन से मुक्ति और स्वराज्य हेतु रक्तरंजित और और अथक युद्ध के अलावा कोई उपाय नहीं बचा है। मैं पूरी ईमानदारी से शपथ लेता हूँ कि मैं इस क्षण से अपना पूर्ण जीवन और शक्ति भारत माता की स्वतंत्रता के लिए लड़ने और स्वराज के कमल मुकुट को अपनी भारत माता के सिर पर सजाने में लगा दूँगा।”

उन्होंने कहा, “इस पावन और एकमात्र उद्देश्य के लिए आज मैं अभिनव भारत, हिंदुस्तान के क्रांतिकारी संगठन में शामिल होता हूँ। मैं शपथ लेता हूँ कि मैं इस पवित्र उद्देश्य के प्रति हमेशा सच्चा और वफ़ादार रहूँगा और मैं इस संगठन के आदेशों का सदैव पालन करूँगा।” अगर मैं इस संपूर्ण शपथ या इसमें कही गई किसी भी बात के विरुद्ध जाता हूँ, तो मेरा सर्वनाश हो!! ‘अभिनव भारत’ इटली के क्रांतिकरी माज़िनी के यंग इटली’ और रूस के क्रांतिकारी संगठनों का मिलाजुला रूप था।

थॉमस फ्रॉस्ट की चर्चित किताब ‘सीक्रेट सोसाइटी ऑफ यूरोपियन रिवोल्यूशन’ और रूस के क्रांतिकारी आंदोलन ने अभिनव भारत के सदस्यों पर अपनी छाप छोड़नी शुरू कर दी थी। इन्हीं दिनों भारत में खबर आती है कि लंदन के निवासी पंडित श्यामजी कृष्ण वर्मा यूरोप में अध्ययन करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की पेशकश कर रहे हैं। काफ़ी सोच-विचार के बाद सावरकर इस छात्रवृत्ति के बारे में आवेदन कर देते हैं।

असल में उनके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। तिलक साहब और शिवरामपंत परांजपे की सिफ़ारिशों के साथ जब सावरकर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करते हैं तो पंडित श्यामजी ने उन्हें छात्रवृत्ति देने पर सहमति व्यक्त कर देते हैं। 1905 में ब्रिटिश शासन अपनी पहली बड़ी चाल चल देता है। बंगाल का विभाजन कर दिया जाता है और मुस्लिम पूर्वी क्षेत्रों को हिंदू पश्चिमी क्षेत्रों से अलग कर दिया जाता है। 19 जुलाई, 1905 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन की विभाजन की घोषणा के बाद 16 अक्टूबर, 1905 को इसे लागू कर दिया जाता है।

यह वह समय था जब सावरकर की पूना की राजनीतिक और सामाजिक सभाओं में एक महत्वपूर्ण छवि बन चुकी थी। सावरकर और उनका समूह विभाजन की योजना का कड़ा विरोध करते हैं तो वहीं तिलक बंगाल के विभाजन को अखिल भारतीय मुद्दा बना डालते हैं। सावरकर स्वदेशी आंदोलन के समर्थक तो पहले ही से थे, लेकिन अब आगे बढ़ते हुए सावरकर विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प ले डालते हैं। 1 अक्टूबर, 1905 को एक बैठक में छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए सावरकर पूर्णरूप से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की घोषणा कर देते हैं।

सावरकर बड़े ही जोशीले अंदाज़ में छात्रों को उनके पहने हुए विदेशी कपड़ों को उतार फेंकने का आवाहन करते हैं। साथ ही वो छात्रों को इन विदेशी कपड़ों और वस्तुओं के साथ इन वस्तुओं  के प्रति उनके प्रेम और लालसा को भी जला डालने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। सावरकर इतने पर ही नहीं रुकते है, वो सभी छात्रों को स्वदेशी प्रतिज्ञा लेने की भी आज्ञा देते हैं। एन. सी. केलकर इस सभा के अध्यक्ष और एस. एम. परांजपे सावरकर के इस विचार का समर्थन करते हैं।

लेकिन, बैठक समाप्त होने के बाद केलकर कुछ और सुझाव देते हैं। केलकर कहते हैं कि कपड़े जलाने के बजाय, एकत्र किए गये कपड़ों को गरीबों में वितरित किया जाना चाहिए। उनका मानना था कि कपड़ों को जलाना अनावश्यक है और इसमें हम सभी का आर्थिक नुकसान है।

सावरकर अपनी असहमति जताते हैं और कहते हैं, “केलकर साहब, आप शायद समझ नहीं रहे हैं। आज हम विदेशी वस्तु या कपड़ा जलाने की बात नहीं कर रहे हैं। हम इन विदेशी वस्तुओं  के प्रति जो मोह है, लगाव है, उसको जलाने की बात कर रहे हैं। विदेशियों और विदेशी वस्तुओं के प्रति जो सभी का लगाव है, वह हमारे राष्ट्र के साथ विश्वासघात है। हम आज उसी लगाव को, विश्वासघात को जलाने की बात कर रहे हैं।” केलकर शांत हो जाते हैं।

यह विचार अपने आप में ही इतना चरमपंथी और उत्तेजक था कि गरम दल के सर्वेसर्वा लोकमान्य तिलक भी इस आंदोलन की व्यावहारिकता के रूप पर सवाल उठा देते हैं। ज़िद्दी सावरकर इसे अपने लिए एक चुनौती मान लेते हैं और पूना के नागरिकों में आवश्यक उत्साह पैदा करने के लिए कुछ बैठकों की योजना तैयार करते हैं। आख़िरकार  तिलक साहब भी सावरकर की बात मान जाते हैं लेकिन उनकी एक शर्त थी। तिलक साहब कहते हैं कि कपड़ों और सामान का एक बड़ा सा ढेर लग जाना चाहिए।

ऐसा न हो कि हम इस मामले को इतना तूल दे रहे हैं लेकिन जब विदेशी वस्तुओं को जलाने की बात आये तो सामान ही इकट्ठा न हो। सावरकर चुनौती स्वीकार कर लेते हैं। पूरे शहर में वो अपने भाषणों से जोश और जूनून भर देते हैं। 7 अक्टूबर, 1905 को विदेशी कपड़े और अन्य बहिष्कृत की गई वस्तुओं का एक विशाल ढेर गाड़ियों पर लगाया जाता है। एक जुलूस के रूप में सावरकर की अगुवाई में यह हुजूम बाज़ार की ओर निकल पड़ता है और लकड़ी के पुल के सामने स्थित मैदान पर जाकर ठहर जाता है।

उस रोज़ सावरकर द्वारा भारत के इस पहले विदेशी वस्त्र और वस्तुओं के होली दहन ने देश को चौंका दिया था। देश के राजनीतिक संसार में एक हलचल मचा दी थी। इस अनहोनी घटना ने भारतीय प्रेस में भी विवाद खड़ा कर दिया था। जब इस आग की लपटें दूर बंगाल तक पहुँची और वहाँ की पत्रिकाओं ने भी इस मामले को तूल देना शुरू किया, तब जाकर कॉलेज प्रशासन की नींद टूटी। फर्ग्यूसन कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाध्यापक आर. पी. परांजपे ने सावरकर पर दस रुपए का जुर्माना लगा कर उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया।

लेकिन, दीवाने सावरकर के लिए यह इनाम से बढ़कर कुछ नहीं था। उनकी छाती पर अब विद्रोह के दो तमगे टंगे हुए थे। वह भारत में विदेशी वस्तुओं का दहन करने वाले पहले भारतीय नेता और राजनीतिक कारणों से सरकारी सहायता प्राप्त संस्थान से विस्थापित हुए पहले भारतीय छात्र बन चुके थे।”

यहाँ एक घटना का ज़िक्र करना उचित रहेगा। इस दौरान दक्षिण अफ्रीका में बैठे गाँधी जी ने भी विदेशी वस्तुओं के दहन की आलोचना कर डाली थी। जबकि सत्रह नवंबर, 1921 को गाँधी जी ने ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ के नेता के रूप में बॉम्बे में विदेशी कपड़ों की स्वयं होली जलाई थी। गाँधी जी की यह राय अपने भविष्य के गुरु गोखले से अलग नहीं थी। गोखले 1905 में बनारस कॉन्ग्रेस में अपने अध्यक्षीय भाषण में कह ही चुके थे:

“हमें यह याद रखना चाहिए कि ‘बायकाट’ शब्द कहाँ से आया है। इस शब्द के मूल उद्भव में कुछ असामाजिक और अवांछनीय घटनाएँ सम्मिलित हैं। इस कारण यह शब्द ‘बायकाट’ सर्वप्रथम सामने वाले को चोट पहुँचाने की इच्छा व्यक्त करता है। किन्तु सरकार यह जान ले कि इंग्लैंड के प्रति हमारी ऐसी किसी भी इच्छा का होने का प्रश्न ही नहीं उठता है।”

(भारत के स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसे ही कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएँ आप क्रांतिदूत शृंखला में पढ़ सकते हैं जो डॉ. मनीष श्रीवास्तव द्वारा गई हैं।)

‘मोदी तेरी जुबान खींच लूँगा, इंशाअल्लाह साँसें रोक दूँगा’: कंगाल पाकिस्तान के आतंकी हाफिज सईद का वीडियो, ‘दरिया में खून बहाने’ की धमकी

पाकिस्तान के सरगना हाफिज सईद ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गीदड़-भभकी दी है। उसका एक वीडियो सामने आया है, जिसके बारे में ये नहीं पता चल रहा है कि ये कब का है। लेकिन, इसमें वो भड़काऊ बातें करता हुए दिख रहा है। हाफिज सईद ने इस वीडियो में पीएम मोदी को धमकी देता हुआ दिख रहा है कि अगर पाकिस्तान का पानी रोका गया, तो वो उनकी साँसें रोक देगा। हाफिज सईद 26/11 मुंबई हमले का साजिशकर्ता है।

हाफिज सईद लश्कर-ए-तैइय्याबा का मुख्य सरगना है। हाफिज सईद ने कहा कि तुम ढाका (बांग्लादेश की राजधानी) की यूनिवर्सिटी में खड़े होकर कह रहे हो कि तुमने पाकिस्तान को तोड़ा है और एक नया मुल्क बनाया है। हाफिज सईद ने पीएम मोदी को धमकाते हुए कहा कि हम चुप नहीं रहेंगे और तुम्हारी जुबान खींच कर ही रहेंगे। फ़िलहाल ये पुष्ट नहीं हुआ है कि ये वीडियो पाकिस्तान में कहाँ का है, लेकिन इससे इतना ज़रूर साफ़ होता है कि आतंकी वहाँ बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।

हाफिज सईद ने इस वीडियो में किया कि पीएम मोदी ने ढाका यूनिवर्सिटी में बकवास किया। उसने दावा किया कि इस्लामाबाद पर दबाव बनाया जाता है कि हाफिज सईद क्यों बोल रहा है, लेकिन वो बोलता रहेगा। उसने दावा किया कि पानी रोक कर पाकिस्तान को तबाह करने के मंसूबे हैं। उसने कहा कि अगर तू चाहेगा कि तू चुप रहे, तो ऐसा नहीं हो सकता। उसने ‘दरियाओं में खून बहाने’ की भी धमकी दे डाली। हाफिज सईद के इस वीडियो पर लोग उसे खरी-खोटी सुना रहे हैं और पाकिस्तान को आईना दिखा रहे हैं।

बता दें कि पाकिस्तान कंगाली की स्थिति में पहुँच गया है, ऊपर से तालिबान ने एक के बाद एक हमले कर के उसकी नाक में दम कर रखा है। खाने वाली वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और नौकरियाँ जा रही हैं। पेट्रोलियम उत्पाद की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। टैक्स का बोझ भी बढ़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने कम सैलरी में काम करने की शर्त रख कर अपनी नौकरी बचाई। महँगाई 35% से भी अधिक जा सकती है।

‘एक दिन सारे बदबूदार सिखों को मुस्लिम बनाएँगे, तैयार है प्लान’: पाकिस्तान के मौलाना ने गुरु नानक को भी कहे अपशब्द, वीडियो वायरल

भारत मे एक तरफ खालिस्तान की माँग को लेकर अमृतपाल सिंह जैसे लोग उत्पात मचा रहे हैं तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के मौलानाओं द्वारा सिखों को लेकर कई तरह के आपत्तिजनक बयान सामने आ रहे हैं। पाकिस्तान के एक सूफी संत मौलाना डॉक्‍टर मोहम्‍मद सुलेमान का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह गुरुनानक देव के बारे में कई आपत्तिजनक बातें कह रहा है। वह उन्हें धर्मांतरित करने की बात कह रहा है।

डॉक्टर सुलेमान सिखों को गंदा और बदबूदार बता रहा है। उसका कहना है कि एक दिन सभी सिखों को इस्‍लाम कबूल करवाकर ही वह दम लेगा। इससे पहले भी एक मौलवी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह गुरुनानक देव पर कई तरह की विवादित टिप्‍पणियाँ कर रहा है।

वीडियो में सुलेमान कहता है, “मुझे सिखों के काफी फोन आते हैं। अब जो है सो है, लेकिन मैं बहुत हैरान हूँ। हमारे पैगंबर ने तो हमसे बगल के बाल भी साफ करने को कहा है। मैं लाहौर में पढ़ता था, इसलिए मैंने इन्‍हें देखा है। अल्‍लाह मुझे माफ करे, ये सिख इतने गंदे हैं। इनके दाढ़ी होती है। हम इन सिखों को एक दिन मुसलमान बनाएँगे।”

नवभरात टाइम्स के अनुसार, सुलेमान आगे कह रहा है, “हमारे पास पूरा एक प्‍लान है और अभी इसे आगे न लेकर जाएँ।” सुलेमान यहीं नहीं रुकता है।। उसने यहाँ तक कह दिया कि सिखों के जो गुरु थे, पता नहीं वो क्‍या थे। सुलेमान कहना है कि पैगंबर उनसे अधिक महान थे। सुलेमान कहता है कि सिख अपने गुरु के पीछे भाग रहे हैं और फिर भी गंदे-गंदे काम करते हैं।

सुलेमान से पहले पाकिस्‍तान के एक मौलवी की क्लिप शेयर किया गया था। इस क्लिप में मौलवी ने सिखों के गुरु, गुरुनानक के बारे में कई बातें कही थीं। मौलवी का कहना था कि गुरुनानक ने कलमा नहीं पढ़ा था और इस्‍लाम कबूल नहीं किया था। इसलिए वह अच्‍छे इंसान नहीं हो सकते थे। उनका कहना था कि भले ही गुरुनानक, बाबा फरीद को पसंद करते थे मगर ऐसा करने से तो वह मुसलमान नहीं हो जाते। सच्‍चा मुसलमान वही है जो कलमा पढ़े।