Home Blog Page 1996

मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी पर तुरंत सुनवाई को राजी हुआ सुप्रीम कोर्ट, याचिका डाल कर CBI की कार्रवाई को दी चुनौती: कॉन्ग्रेस नेता को रखा है वकील

शराब घोटाला मामले में 5 दिनों तक रिमांड पर भेजे गए दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मनीष सिसोदिया की तरफ से गिरफ्तारी और सीबीआई की कार्रवाई की चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सीसोदिया की याचिका को स्वीकार कर लिया है और आज (28 फरवरी, 2023) ही शाम 3.50 बजे सुनवाई होगी

रिपोर्टों के मुताबिक मनीष सिसोदिया के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की तरफ से दायर याचिका सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष रखी गई। डीवाई चन्द्रचूड़ इस याचिका पर तुरंत सुनवाई को तैयार हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामले पर आज ही शाम 3:50 बजे सुनवाई होगी। याचिका में शराब घोटाले के मुख्य आरोपित मनीष सिसोदिया ने अपनी गिरफ्तारी और सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

बता दें कि दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई (CBI) ने सोमवार (27 फरवरी, 2023) दोपहर को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था। इस दौरान जाँच एजेंसी ने CBI के स्पेशल जज एमके नागपाल से सिसोदिया की 5 दिन की कस्टडी माँगी थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सिसोदिया को 4 मार्च तक की रिमांड पर भेज दिया था। सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश रचने के आरोप में) तथा 477-A (धोखाधड़ी करने की कोशिश करने के आरोप में) व भ्रष्टाचार अधिनियम निवारण की धारा-7 के तहत गिरफ्तार किया है।

रविवार (26 फरवरी की शाम) मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने उनसे करीब 8 घण्टे तक पूछताछ की थी। इस गिरफ्तारी को लेकर AAP बीजेपी पर हमलावर है। गिरफ्तारी को लेकर सीबीआई ने कहा है कि सिसोदिया जवाब देने में टाल-मटोल कर रहे थे। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

6 नहीं 13 शूटर आए थे उमेश पाल को मारने, 7 बैकअप में थे: माफिया अतीक अहमद के बेटे पर ₹50 हजार का इनाम, मुस्लिम हॉस्टल में रची साजिश

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड में वांटेड अतीक अहमद के बेटे असद अहमद पर UP पुलिस ने इनाम रखा है। इनाम की यह राशि 50 हजार रुपए रखी गई है। असद के साथ इस केस में फरार चल रहे 3 अन्य आरोपितों पर भी इनाम की घोषणा की गई है। पुलिस ने माफिया अतीक के एक अन्य सहयोगी नफीस को भी गिरफ्तार किया है। हमले में प्रयोग हुई क्रेटा गाडी नफीस की ही थी। इसी के साथ उमेश के क़त्ल की साजिश में शामिल एक अन्य आरोपित सदाकत को भी गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DGP मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में माफियाओं या उनके गुर्गों को संरक्षण देने वालों को भी चेतावनी दी गई है। चेतावनी में कहा गया है कि उमेश पाल हत्याकांड में फरार चल रहे किसी भी आरोपित या सहयोगी को पनाह अथवा संरक्षण देने वालों पर भी एक्शन लिया जाएगा। आम लोगों से भी आरोपितों के बारे में कोई भी सूचना मिलने पर पुलिस को बताने की अपील की गई है। बताया यह भी जा रहा है कि फरार चल रहे आरोपितों पर घोषित इनाम की राशि जल्द ही बढ़ाई भी जा सकती है।

वहीं एक अन्य खुलासे के मुताबिक गुजरात की साबरमती जेल में बंद अतीक अहमद व्हाट्सएप से शूटरों के सम्पर्क में था। उमेश पाल पर हमला करने वाले कुल शूटरों की तादाद 13 बताई जा रही है। जब 6 शूटर उमेश और उनके गनर पर हमला कर रहे थे तब 7 अन्य आस-पास खड़े हो कर बैकअप में तैयार थे। STF ने साबिर नाम के एक शूटर की पहचान भी कर ली है। इस हमले की साजिश प्रयागराज यूनिवर्सिटी के मुस्लिम हॉस्टल में रची गई थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि अशरफ भी बरेली जेल से व्हट्सएप चलाता था। शूटरों को डायरेक्शन देने में उसका भी नाम सामने आ रहा है।

यह खुलासा साजिश में शामिल सदाकत खान से हुई पूछताछ के बाद हुआ। सदाकत खान इलाहबाद हाईकोर्ट में वकालत करता है और अवैध तौर पर मुस्लिम हॉस्टल के कमरा नंबर 36 में रहता था। सदाकत खान को समाजवादी पार्टी का करीबी बताया जा रहा है। उसकी एक तस्वीर अखिलेश यादव के साथ हाथ मिलाते हुए वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि सदाकत नेपाल भागने की फिराक में था लेकिन उसे STF ने रास्ते में ही दबोच लिया।

दावा किया जा रहा है कि हमले में आगे रहे 6 शूटरों द्वारा उमेश और उनके गनर संदीप की हत्या कर दिए जाने के बाद बैकअप में मौजूद 7 अन्य हमलावर अलग-अलग वाहनों से मौके से फरार हो गए। पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से बैकअप में मौजूद अन्य शूटरों की शिनाख्त के प्रयास कर रही है।

असम की सबसे बड़ी घर-वापसी! 142 लोगों ने ईसाई मजहब को अलविदा कह अपनाया हिन्दू धर्म, मिशनरियों के लालच में आ गया था जनजातीय समाज

असम में 142 लोगों ने घर वापसी कर ली। इन सभी ने ईसाइयत छोड़ सनातन धर्म को अपनाया है। इसे असम में हुई अब तक सबसे बड़ी घर-वापसी कहा जा रहा है। इसको लेकर राज्य की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार भी चर्चा में है। चर्चा का कारण यह है कि घर-वापसी को भाजपा हिमंता सरकार की नीतियों का प्रभाव बता रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घर-वापसी का यह कार्यक्रम सोमवार (27 फरवरी, 2023) को मोरीगाँव जिले के जागीरोड़ के तिवासोंग गाँव में हुआ। यहाँ सनातन धर्म संस्कृति के अनुसार यज्ञ तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बाद सभी लोगों ने हिंदू धर्म अपना लिया।

इस घर-वापसी को लेकर गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई का कहना है कि इस घर-वापसी कार्यक्रम में जनजाति समुदाय के 142 लोगों ने अपनी इच्छा से घर वापसी की है। स्थानीय तिवा जनजाति के लोगों ने प्रलोभन व अन्य कारणों के चलते ईसाई मजहब अपना लिया था। लेकिन। अब इन लोगों ने गोबा देवराजा राज परिषद संस्था से संपर्क किया था। इसके बाद यह कार्यक्रम आयोजित कर घरवापसी कराई गई।

बोरदलोई ने यह भी कहा कि घर-वापसी करने वाले इन सभी लोगों ने हमेशा हिंदू धर्म में आस्था और विश्वास रखने का वचन दिया है। घर-वापसी करने वाले तिवा जनजाति के ये लोग जन्म से हिंदू थे। लेकिन इनके दादा-दादी ने गरीबी तथा शिक्षा की कमी के चलते भ्रमित होकर ईसाई बन गए थे। बोरदलोई ने यह भी कहा है कि वह और उनका संगठन घरवापसी करने वाले सभी लोगों का हरसंभव सहयोग करेंगे।

गोबा देवराजा राज परिषद के महासचिव जुरसिंह बोरदलोई ने यह भी कहा है कि कहा है कि सभी 142 लोगों के जीवन में किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए वह प्रयास करते रहेंगे। सभी को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बोरदलोई ने दावा किया है कि तिवा जनजाति के करीब 1100 परिवार के लोगों ने सनातन धर्म में घर-वापसी करने का फैसला किया है। घर-वापसी करने वालों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए तिवा परिषद द्वारा स्कूलों की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा इन सभी के नाम मतदाता सूची में जोड़ने तथा राशनकार्ड बनवाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

जनजातियों के हित की बात करने वाले जनजाति सुरक्षा मंच असम और तिवा देवराजा परिषद ने माँग की है कि असम सरकार ईसाई धर्म अपनाने वालों का अनुसूचित जनजाति का दर्जा रद्द कर दे, ताकि उन्हें अल्पसंख्यक और अनुसूचित जनजाति होने का दोहरा लाभ ना मिल सके। वहीं, भाजपा विधायक पीयूष हजारिका ने दावा किया है कि हिमंता सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर इन सभी ने घर-वापसी की है।

तालिबान ने IS के 2 टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतारा: एक को भारत ने कर रखा था आतंकी घोषित, गुरुद्वारे में हुए बम धमाके का भी जिम्मेदार था

अफगानिस्तान की सत्ता में काबिज तालिबान ने दावा किया है कि उसके सुरक्षाबलों ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के दो प्रमुख कमांडरों को मार गिराया है। तालिबान ने यह भी कहा है कि आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के दौरान राजधानी काबुल में दोनों कमांडर मारे गए। तालिबान ने यह बयान सोमवार (27 फरवरी 2023) को जारी किया।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा है कि मारे गए आतंकवादियों की पहचान कारी फतेह और एजाज अहमद अहंगर के रूप में हुई है। कारी फतेह इस्लामिक स्टेट के खुफिया तंत्र का प्रमुख था। वहीं दूसरा आतंकी एजाज अहमद अहंगर इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (ISKP) का बड़ा कमांडर और सेना प्रमुख था। ISKP को इस्लामिक स्टेट का सहयोगी और तालिबान का विरोधी रहा है।

जबीहुल्ला मुजाहिद ने यह भी कहा है कि कारी फतेह कथित तौर पर इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (ISKP) के लिए रणनीति बनाने का काम करता था। राजधानी काबुल में रूसी, पाकिस्तानी और चीनी राजनयिक मिशनों के खिलाफ हुए हमलों के लिए भी कारी फतेह ही जिम्मेदार था।

मुजाहिद ने यह भी कहा है कि 14 फरवरी को इस्लामिक स्टेट हिंद प्रांत (ISHP) का एक सीनियर कमांडर एजाज अहमद अहंगर अपने दो सहयोगियों के साथ मारा गया था। अहंगर को अबू उस्मान अल कश्मीरी के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा मुजाहिद ने खुरासान के कुछ अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी की भी पुष्टि की है। इससे पहले बीते सप्ताह खुरासान ने भी अहंगर की मौत की बात कही थी।

बता दें कि अबू उस्मान अल-कश्मीरी के नाम से मशहूर अहंगर को इसी साल जनवरी में भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया था। श्रीनगर में जन्मा अहंगर आतंकवादी गतिविधियों में लंबे समय से शामिल रहा है। इस कारण ही बीते 2 दशकों से जम्मू कश्मीर में भी वांछित था।

अफगानिस्तान के खुफिया विभाग ने मार्च 2020 में हुए आत्मघाती हमले के लिए अहंगर को जिम्मेदार ठहराया था। खुफिया विभाग का कहना था कि इस बम धमाके का मास्टरमाइंड अहंगर ही है। बता दें कि काबुल के गुरुद्वारा कार्त-ए परवान में हुए बम धमाके में एक सुरक्षा गार्ड समेत 25 लोगों की मौत हो गई थी। अहंगर का अलकायदा समेत कई अन्य आतंकी संगठनों से संबंध रहे हैं।

मदरसे में अरबी पढ़ने जाती थी नाबालिग बच्ची…मौलवी ने झांसा देकर 5 माह तक बंधक बनाया: J&K पुलिस ने बिलाल और रियाज को गिरफ्तार किया

जम्मू कश्मीर के सांबा जिले में पुलिस ने एक नाबालिग लड़की के अपहरण में मदरसे के एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम बिलाल अहमद है। पीड़िता उसी मदरसे में आरोपित मौलवी से अरबी पढ़ती थी। आरोप है कि मौलवी ने नाबालिग को झांसा देकर 5 महीने तक अपने साथ रखा। पुलिस ने नाबालिग को भी बरामद कर लिया है। अपहरण में मौलवी का एक मददगार रियाज़ अहमद को भी गिरफ्तार किया गया है। रविवार (26 फरवरी 2023) को सांबा पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला थानाक्षेत्र रख AMB तल्ली में आने वाले चक दयाला इलाके का है। यह क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। यहाँ 16 साल की एक नाबालिग लड़की दीनी तालीम लेने और अरबी भाषा सीखने के लिए जाया करती थी। इसी मदरसे में मौलवी बिलाल पढ़ाता था। बिलाल मूल रूप से डोडा के गंडोह का रहने वाला है। बिलाल का एक मदरसा डोडा में भी चलता है। फिलहाल वह सांबा जिले के मदरसे में पिछले 5 माह से रह रहा था। पीड़िता के अब्बा द्वारा दी गई शिकायत में बताया गया था कि मौलवी बिलाल ने उनकी बेटी को झाँसा दिया और 5 महीने तक अपने साथ रखा।

सांबा पुलिस ने पीड़ित पिता की शिकायत IPC की धारा 363 के तहत दर्ज की। मौलवी की तलाश शुरू की गई तो उसकी लोकेशन जम्मू-कश्मीर के ही रामसू, जिला रामबन में मिली। पुलिस ने दबिश दे कर मौलवी को गिरफ्तार कर लिया। इसी छापेमारी में नाबालिग पीड़िता भी बरामद हुई। मौलवी के साथ रियाज़ अहमद नाम का एक अन्य आरोपित भी पकड़ा गया है। उस पर मौलवी को नाबालिग के अपहरण के लिए उकसाने का आरोप है। रियाज़ मूल रूप से डोडा जिले का रहने वाला है। सांबा जिले के SSP बेनाम तोश के मुताबिक मामले की गहराई से जाँच करवाई जा रही है।

ओवैसी के समधी मजहरुद्दीन ने अपनी खोपड़ी में मारी गोली, तुरंत मौत: बेटे संग मिलकर बीवी को करता था प्रताड़ित, 2021 में FIR हुई थी

AIMIM पार्टी के चीफ असदुद्दीन ओवैसी के समधी द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर सामने आई है। मृतक का नाम मजहरुद्दीन खान है जो ओवैसी की दूसरी बेटी के ससुर थे। 60 वर्षीय मृतक पेशे से डॉक्टर थे जिन्होंने खुद को गोली मार ली है। पूर्व में मजहरुद्दीन पर घरेलू हिंसा का केस भी दर्ज हो चुका था। शुरुआती जाँच में घटना के पीछे पारिवारिक विवाद को वजह बताया जा रहा है। घटना सोमवार (27 फरवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना हैदराबाद के पश्चिमी ज़ोन की है। यहाँ असदुद्दीन ओवैसी की दूसरी बेटी के ससुर मज़हरुद्दीन उर्फ़ मज़हर अपने परिवार के साथ रहते थे। साल 2020 में ओवैसी की बेटी का निकाह उनके बेटे से हुआ था। पेशे से मज़हर आर्थोपेडिक सर्जन थे। उनका परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के साथ प्रॉपर्टी का झगड़ा चल रहा था। इसी विवाद के चलते उन पर घरेलू हिंसा का केस भी दर्ज हुआ था।

बताया जा रहा है कि इस विवाद से मज़हरुद्दीन काफी परेशान रहा करते थे। घटना के दिन सोमवार को मज़हरुद्दीन ठीक से सोए नहीं थे। सुबह उन्होंने खुद को सोने के लिए कहा और अपने कमरे में खुद को बंद कर लिया। दोपहर तक जब उनका गेट नहीं खुला तब घर की नौकरानी ने परिवार के बाकी सदस्यों को सूचित किया। परिजनों ने उन्हें आवाज दी तो अंदर से कोई जवाब नहीं आया। आखिरकार दरवाजे को तोड़ना पड़ा। अंदर डॉक्टर मज़हर लहूलुहान हालत में पड़े थे। उन्होंने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मार ली थी। गोली बाईं आँख के बगल से होते हुए खोपड़ी को छेद गई थी। मज़हर को अपोलो अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर सुसाइड के कारणों की जाँच शुरू कर दी है।

बाप-बेटे दोनों पर दर्ज था घरेलू हिंसा का केस

मृतक डॉ मज़हर हैदराबाद के पॉश इलाके बंजारा हिल के MLA कॉलोनी में रहते थे। उन पर उनकी 50 वर्षीया पत्नी आफिया खान ने ही 6 अक्टूबर 2021 को BKC पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में प्रताड़ना देने वालों में मजहरुद्दीन के बेटे आबिद अली खान का भी नाम था। लगभग 27 वर्षीय आबिद अली ही ओवैसी के दामाद हैं। अपनी शिकायत में मूल रूप से मुंबई की रहने वाली आफ़िया ने बताया था कि बाप-बेटों की प्रताड़ना से वह 2 बार हैदराबाद से मुंबई भाग गईं थीं।

मज़हर की बीवी द्वारा दर्ज केस

मज़हर और आफिया का निकाह दिसंबर 1993 में हुआ था। इसी शिकायत में ओवैसी की समधन ने आगे बताया गया था कि 27 सितंबर 2021 को डर से एक होटल में रहना पड़ा था। उनका आरोप था कि उनके शौहर और बेटे के भेजे गुंडे उनका लगातार पीछा कर रहे थे। इस दौरान एक संदिग्ध फोटो खींच कर भी भागा था। शिकायत में आफिया ने आरोप लगाया कि उनका डेबिट कार्ड भी कुछ लोगों द्वारा नेट बैंकिंग के माध्यम से हैक कर लिया गया था।

नाम बदला, फोटो बदली, अपनी मर्जी से कर दिए ट्वीट: ममता बनर्जी की TMC का ऑफिशियल अकॉउंट हैक, घंटों से कोई कार्रवाई नहीं

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकाउंट हैक हो गया। हैकर्स ने अकाउंट का नाम युगा लैब्स (Yuga Labs) कर दिया है। साथ ही प्रोफाइल पिक्चर में भी युगा लैब्स का लोगो लगा दिया है। यही नहीं, युगा लैब्स के NFT को लेकर कुछ ट्वीट भी किए गए हैं। इस मामले में, पार्टी नेताओं की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकाउंट हैक करने वाले हैकर्स ने ट्विटर हैंडल और बायो तथा वेबसाइट में कोई बदलाव नहीं किया है। यही नहीं, ट्विटर हैंडल अब भी @AITCofficial ही है। साथ ही, बायो में भी पहले की तरह लिखा हुआ है यह ट्विटर अकाउंट तृणमूल कॉन्ग्रेस का है।

(फोटो साभार: @AITCofficial के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनशॉट)

हैकर्स ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के ट्विटर अकाउंट का नाम जिस युगा लैब्स (Yuga Labs) के नाम पर किया गया है वह एक अमेरिकी कंपनी है। यह कंपनी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का काम करती है जो एनएफटी और डिजिटल कलेक्टिबल्स विकसित करती है। कंपनी क्रिप्टो और डिजिटल मीडिया में भी माहिर है। ट्विटर अकाउंट हैक होने के बाद से युगा लैब्स द्वारा किए गए एनएफटी कलेक्शन को लेकर कुछ ट्वीट किए गए हैं।

(फोटो साभार: @AITCofficial के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनशॉट)

इंडिया टुडे ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के सूत्रों के हवाले से कहा है कि वह ट्विटर अकाउंट वापस पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि अब तक पार्टी नेताओं की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है। खबर लिखने तक (सुबह के 10 बजे तक भी) अकॉउंट का नाम नहीं बदला गया गया है।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनीतिक दल का ट्विटर अकाउंट हैक किया गया हो। इससे पहले, वाईएसआर कॉन्ग्रेस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट भी दिसंबर 2022 में हैक कर लिया गया था। हैकर्स ने ट्विटर बायो में ‘एनएफटी करोड़पति’ लिख दिया था। साथ ही प्रोफ़ाइल पिक्चर में बोरेड एप यॉट क्लब (Bored Ape Yacht Club) की एक फोटो लगा दी थी।

चूँकि, बोरेड एप यॉट क्लब, Yuga Labs द्वारा ही बनाया गया है। साथ ही, TMC के ट्विटर अकाउंट से बोरेड एप यॉट क्लब द्वारा किए गए ट्वीटस पर ही रिप्लाय किया गया है। ऐसे में, इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है वाईएसआर कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस का ट्विटर अकाउंट हैक करने वाले हैकर्स एक ही हैं।

कश्मीरी पंडित की हत्या के एक दिन बाद ही पुलवामा में 1 आतंकी ढेर: सुरक्षाबलों ने घेरकर मारा, मुठभेड़ में 2 जवान घायल हुए

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुई कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद देर रात (27 फरवरी 2023) सुरक्षाबलों ने एक आतंकी का एनंकाउंटर किया। खबर आ रही है कि अवंतीपोरा में हुई मुठभेड़ में यह आतंकी मारा गया। कयास लग रहे हैं कि ये आतंकी भी कश्मीर में हुई टारगेट किलिंग में शामिल था।

एनकाउंटर सोमवार देर रात हुआ। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि उन्हें पुलवामा जिले के पदगामपोरा अवंतीपोरा में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी जिसके बाद इलाके की घेराबंदी की गई और मुठभेड़ शुरू हुई।

अब कश्मीर जोन पुलिस ने ट्वीट करके बताया है कि मुठभेड़ में 1 आतंकी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। लेकिन शव अभी बरामद नहीं हुआ है। बाकी आतंकियों के खिलाफ एक्शन जारी है। सेना को शक है कि अभी और आतंकी इलाके में छिपे हो सकते हैं। मुठभेड़ के दौरान अपने दो जवान घायल भी हुए हैं। उनका इलाज बेस अस्पताल में चल रहा है।

बता दें कि ये एनकाउंटर कश्मीर में हुए एक कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद सामने आया। मुठभेड़ से 1 दिन पहले 26 फरवरी को पुलवामा के अचन में संजय शर्मा नाम के कश्मीरी पंडित को आतंकियों ने मारी थी। वो सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे। 2023 में हुई ये कश्मीरी पंडितों की पहली हत्या है। 2022 में कश्मीर में 18 लोग टारगेट किलिंग का शिकार हुए थे उनमें 3 कश्मीरी पंडित भी थे।

त्रिपुरा और नागालैंड में सत्ता बचा लेगी BJP, मेघालय में कड़ी टक्कर: जानिए क्या कहते हैं ‘जन की बात’ और ‘Times’ सहित सारे एग्जिट पोल्स

मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि किस राज्य में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। ऐसे में बात करते हैं ‘जन की बात’ एग्जिट पोल्स की, जिसमें हर राज्य में सीटों को लेकर सर्वे किया गया है। इस सर्वे की मानें तो मेघालय में भाजपा पिछड़ती हुई दिख रही है। राज्य में उसे मात्र 3-7 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं, वहीं NPP 9-14 सीटें जीत कर बड़ी ताकत बन कर उभर सकती है।

वहीं मेघालय में भी UDP को 10-14 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। प्रदीप भंडारी की ‘जन की बात’ एग्जिट पोल के अनुसार, मेघालय में NPP 11-16 सीटें जीत कर सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरने वाली है। वहीं त्रिपुरा चुनाव की बात करें तो वहाँ भाजपा 29-40 सीटें जीत कर अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है। वामपंथी दल यहाँ 9-16 पर सिमट जाएँगे। नई पार्टी TIPRA भी 10-14 सीटें जीत कर एक बड़ी ताकत के रूप में उभरेगी।

अब आते हैं नागालैंड विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर। यहाँ भी भाजपा अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है। भाजपा को 35-45 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं NPF मात्र 1-16 सीटों पर सिमट जाएगी। यहाँ अन्य दलों को भी 9-16 सीटें मिलने का अनुमान है। ‘टाइम्स’ के एग्जिट पोल की मानें तो नागालैंड में भाजपा को 39-45, ‘Zee News’ के हिसाब से 35-45 और ‘इंडिया टुडे’ की मानें तो 38-48 सीटें मिल सकती हैं।

अन्य एग्जिट पोल्स की बात करें तो मेघालय में ‘टाइम्स’ ने भाजपा को 3-6 सीटें, ‘Zee News’ ने 6-11 सीटें और ‘इंडिया टुडे’ ने 4-8 सीटें दी हैं। ‘टाइम्स नाउ’ ने नागालैंड में राजग को 44 सीटें आने का अनुमान लगाया है। ‘एक्सिस माय इंडिया’ ने राज्य में भाजपा को 43 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। त्रिपुरा में ‘Zee News’ ने भाजपा को 29-36 सीटें दी हैं। इस तरह भाजपा उत्तर-पूर्व के दो राज्यों में अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है, जबकि एक में कड़ी टक्कर है।

क्या है दिल्ली का शराब घोटाला? मनीष सिसोदिया क्यों गए जेल? – 15 पॉइंट्स में सिंपल तरीके से समझें सब कुछ

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार आरोपित मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। जहाँ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड में भेज दिया है। इसका मतलब साफ है कि अब सीबीआई सिसोदिया से और कड़ी पूछताछ करेगी।

दिल्ली के शराब नीति को लेकर केजरीवाल सरकार ने दावा किया था कि इससे राजस्व में 3500 करोड़ रुपए का फायदा होगा। हालाँकि इस पूरे मामले की जाँच करते हुए ईडी ने पाया है कि इस शराब घोटाले से राजस्व में 2873 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

15 पॉइंट्स में समझिए क्या है शराब घोटाला

1.) नवंबर 2021 में लागू की गई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति के तहत राज्य में कुल 849 दुकानें खोली गईं। इस शराब नीति से पहले 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट होती थीं। वहीं, घोटाले के लिए तैयार की गई शराब नीति में सभी दुकानें प्राइवेट कर दी गईं। इससे सरकार को सीधी तरह नुकसान हुआ।

2.) दिल्ली सरकार ने शराब बेचने के लिए मिलने वाले लाइसेंस की फीस कई गुना बढ़ा दी। L-1 लाइसेंस पहले ठेकेदारों को 25 लाख रुपए में मिल जाता था। हालाँकि नई शराब नीति लागू होने के बाद इसके लिए ठेकेदारों को 5 करोड़ रुपए देने पड़े। इसी तरह अन्य लाइसेंस के लिए भी फीस कई गुना तक बढ़ा दी गई। इससे छोटे ठेकेदार लाइसेंस नहीं ले सके। इसका सीधा फायदा बड़े व्यपारियों को मिला।

3.) उप मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया के कहने पर आबकारी विभाग द्वारा L-1 बिडर को 30 करोड़ रुपए वापस कर दिए। दिल्ली एक्साइज पॉलिसी में किसी भी बिडर का पैसा करने का नियम नहीं है। लेकिन सिसोदिया के कहने पर भी यह भी हुआ।

4.) कोरोना काल में शराब कंपनियों को हुए नुकसान की भरपाई करने के नाम पर केजरीवाल सरकार ने लाइसेंस फीस में बड़ी छूट दी। वास्तव में सरकार ने कंपनियों की 144.36 करोड़ रुपए की लाइसेंस फीस माफ कर दी थी।

5.) विदेशी शराब और बियर के पर मनमाने ढंग से 50 रुपए प्रति केस की छूट दी गई। यह छूट कंपनियों को फायदा देने के लिए दी गई थी।

6.) दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति के तहत राज्य को 32 जोन में बाँटा था। इसमें से 2 जोन के ठेके एक ऐसी कंपनी को दिए गए जो ब्लैक लिस्टेड थी।

7.) शराब बेचने वाली कंपनियों के बीच कार्टेल पर प्रतिबंध होने के बाद भी केजरीवाल सरकार ने शराब विक्रेता कंपनियों के कार्टेल को लाइसेंस दिए थे। इसके तहत शराब कंपनियों को शराब पर डिस्काउंट देने और एमआरपी पर बेचने के बजाय खुद कीमत तय करने की छूट मिल गई। इसका फायदा भी शराब बेचने वालों को हुआ।

8.) नई शराब नीति को लेकर कैबिनेट की बैठकों में मनमाने ढंग से फैसले लिए गए। यही नहीं, नियमों को ताक पर रखते हुए कैबिनेट नोट सर्कुलेशन के बिना ही प्रस्ताव पास करा दिए गए।

9.) शराब विक्रेताओं को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से ड्राई डे की संख्या घटा दी गई। यह संख्या पहले 21 थी, वहीं नई शराब नीति के तहत दिल्ली में ड्राई डे महज 3 दिन ही था।

10.) शराब ठेकेदारों को पहले 2.5 प्रतिशत कमीशन मिलता था। वहीं नई शराब नीति के तहत इसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। इससे शराब ठेकेदारों को फायदा हुआ। वहीं सरकारी खजाने को नुकसान झेलना पड़ा।

11.) केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के 2 जोन में शराब निर्माता कंपनी को रिटेल में शराब बेचने की अनुमति दी। वहीं, नियम यह है कि शराब निर्माता और रिटेल विक्रेता अलग-अलग होगा।

12.) उपराज्यपाल से अनुमति लिए बिना ही दो बार आबकारी नीति को आगे बढ़ाया गया। साथ ही मनमाने ढंग से छूट दी गई। इसका शराब कंपनियों ने फायदा उठाया। कैबिनेट की बैठक बुलाकर ही सारे फैसले ले लिए गए।

13.) दिल्ली सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के टेंडर में नई शर्त जोड़ते हुए कहा था कि हर वार्ड में कम से कम दो दुकानें खोलनी पड़ेंगीं। इसके लिए दिल्ली के आबकारी विभाग ने भी केंद्र सरकार से अनुमति लिए बिना ही अतिरिक्त दुकानें खोलने की अनुमति दे दी। इसका शराब निर्माता कंपनियों ने फायदा उठाया।

14.) सोशल मीडिया, बैनर्स और होर्डिंग्स के जरिए शराब को बढ़ावा देने वालों पर दिल्ली सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह दिल्ली एक्साइज नियम 2010 के 26 और 27 नियम का उल्लंघन है।

15.) नई आबकारी नीति लागू करने के लिए केजरीवाल सरकार ने जीएनसीटी एक्ट-1991, ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 का सीधे तौर पर उल्लंघन किया।

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और शराब नीति बनाने वाले आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी हँगामा कर रही है। कहा जा रहा है कि चार्जशीट में नाम न होने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया। दरअसल, सिसोदिया की गिरफ्तारी में दिनेश अरोड़ा का नाम सबसे अहम माना जा रहा है। अरोड़ा सिसोदिया का करीबी था। अब वह सरकारी गवाह बन गया है। अरोड़ा ने ही सिसोदिया समेत कई अन्य आरोपितों के नाम लिए हैं।

इसके अलावा, कहा जा रहा है कि सीबीआई मनीष सिसोदिया से अन्य आरोपितों व डिजिटल सबूतों को लेकर भी पूछताछ कर रही है। दरअसल, शराब घोटाले के आरोपितों ने 170 फोन बदले थे। इसमें से सिसोदिया ने 14 फोन बदले थे। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इन फोन में ही अहम सबूत थे। इसलिए सिसोदिया समेत अन्य आरोपितों ने या इन्हें तो बदल दिया या तोड़ दिया। अब सीबीआई तमाम सबूतों को इकट्ठा करने के बाद सिसोदिया से पूछताछ कर रही है।