Home Blog Page 1995

और इस तरह एक बार फिर काल के गाल को प्राप्त हुआ अश्वस्थामा… चंद्रशेखर आज़ाद की मूँछ वाली तस्वीर के पीछे की कहानी, अज्ञातवास में ‘मास्टर जी’ के यहाँ रुके थे

काकोरी कांड में फ़रार मुजरिम होने के कारण पुलिस चंद्रशेखर आज़ाद की जान के पीछे हाथ धो कर पड़ी थी। क्रांतिकारियों की दुनिया के अब वे एक जांबाज सिपाही थे, जिनकी दिलेरी के किस्से अब हर शहर में गूँज रहे थे। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान क्रांतिकारियों के साथ अब उनका नाम लिया जाने लगा था। आज़ाद साहब अब महज एक चंचल युवक ‘क्विक सिल्वर’ नहीं रह गए थे और भगत सिंह, सुखदेव, राज गरु, अशफाकुल्लाह, बिस्मिल आदि के साथ हर एक एक गंभीर बैठक में शामिल हुआ करते थे।

अंग्रेज़ों के विरुद्ध किए जाने वाले हर एक्शन से पहले संगठन की बैठक में उनकी मौजूदगी ज़रूरी होती थी। संगठन के भेद को बनाए रखने के लिए हर शख्स को हिदायत थी कि अपने घर का पता दूसरे सदस्य को ना बताएँ और तस्वीर तो खिंचवाने का मतलब ही नहीं था। यही एक कारण है कि उन महान क्रांतिकारियों की बहुत ज़्यादा तस्वीरें आज भी हमारे पास नहीं हैं। आज 27 फ़रवरी जो कि आज़ाद साहब का बलिदान दिवस है, पर बात करते हैं एक ऐसी तस्वीर की, जिसके बारे में इंटरनेट पर तरह-तरह की भ्रामक सूचनाएँ हैं।

यह बात उन दिनों की है जब आज़ाद साहब अपने अज्ञातवास में अपने मित्र और गुरु मास्टर रुद्रनारायण के घर पर रह रहे थे। आज़ाद साहब उस दिन आँगन में व्यायाम पश्चात स्नान आदि कर चुके थे। श्वेत धोती कमर पर लुंगी की तरह लपेटे हुए थे और कंधे पर जनेऊ था ही। आज़ाद जब अच्छे मूड में होते थे तो बाल काढ़ते हुए कुछ भी गुनगुना रहे होते थे। उस रोज़ भी गुनगुना ही रहे थे। मास्टर जी दूर बैठे उनको देख रहे थे। मास्टर जी को अचानक जाने क्या सूझा, उन्होंने अपना कैमरा उठाया और बोले, “पंडितजी, आज आप कुछ अलग ही रहे हैं, एक तस्वीर खींच लूँ?”

“अरे नहीं मास्टर जी, आपको तो पता ही है कि संगठन में इसकी मनाही है।” आज़ाद की किसी तरह की कोई भी तस्वीर उस रोज़ तक किसी के पास नहीं थी। वे नहीं चाहते थे कि किसी तरह कोई तस्वीर ब्रिटिश पुलिस तक पहुँच ,जाए और उनकी पहचान हो सके। आज़ाद को भी यह पता था कि अंग्रेज़ों ने उनके पीछे गुप्तचर लगाये हुए हैं, इसलिए वो नहीं चाहते थे कि उनकी तस्वीर खींची जाए। “वो तो नये सदस्यों के साथ है पंडित जी। तुम और मैं नये हैं क्या?” – मास्टर जी ने पूछा।

“फिर भी..” आज़ाद उलझन में थे। मास्टर जी आज़ाद के नजदीक आए और कंधे पर हाथ रख कर बोले, “आज़ाद, तुम्हारी तस्वीर की इसीलिए और भी ज़रूरत है कि आने वाली पीढ़ी यह देख और समझ सके कि आज़ाद उन्हीं की तरह आम शक्ल सूरत का एक नौजवान था मगर स्वतंत्रता, क्रांति की भावना और साहस ने उसे भारत का एक महान क्रांतिकारी बना दिया।” आज़ाद चुप थे। “मैं वादा करता हूँ कि इस तस्वीर के बारे में किसी को पता नहीं चलेगा और पूर्ण रूप से सुरक्षित रहेगी। मैं अपने लिए ही ले रहा हूँ। घबराओ मत, भरोसा है ना मुझपर?” – मास्टर जी खड़े हो गए।

“क्या बात कर दी मास्टर जी आपने, जान से ज़्यादा भरोसा है आप पर।” – आज़ाद ने कहा। आखिरकार मास्टर जी ने आज़ाद को मना ही लिया तस्वीर के लिए। लेकिन आज़ाद ने हलके से एक बार और टालने की कोशिश की, “लेकिन ऐसे उघारे बदन, अच्छा नहीं लगेगा, मैं अंदर से कुर्ता पहनकर आता हूँ?” मास्टर जी मौके को गँवाना नहीं चाहते थे। आज़ाद के मूड का पता नहीं, कहीं बदल गया तो फिर वो राजी नहीं होने वाले थे। मास्टर जी बोले, “दाऊ, कुर्ता रेन दो।”

“अरे मूँछ तो ठीक कर लूँ, नहाने से बिगड़ गयी हैं।” कहते हुए आज़ाद ने अपनी मूँछ उमेठना शुरू की।
“क्लिक!”
“अरे मास्टर जी आप भी ना..” आज़ाद कहते ही रह गए।
तस्वीर ली जा चुकी थी।

किन्तु इस तस्वीर के लेने के कुछ दिन बाद ही आज़ाद को महसूस होने लगा कि यह काम ठीक नहीं हुआ है। उस रोज़ वो विश्वनाथ वैशम्पायन के पास थे, जब अचानक से उनके मन में पता नहीं क्या सूझा और विश्वनाथ से बोले, “एक काम करोगे मेरा?”
“कैसी बात कर रहे आप दाऊ? पूछने की क्या बात है? आप आदेश कीजिए।”
“तुम ज़रा मास्टर जी के पास जाओ और उनसे कहो कि वो जो तस्वीर उन्होंने मेरी ली है, उस तस्वीर को तुरंत नष्ट कर दिया जाना चाहिए।”
“कौन सी तस्वीर दाऊ? वैशम्पायन चौंक गए।
“अरे वो मास्टर जी ने बहला-फुसला कर मेरी एक तस्वीर उतार ली है जबकि तुमको पता है कि यह संगठन के क़ानून के खिलाफ़ है।”
“अब ले ली है तो जान दो दाऊ।”
“नहीं विश्वनाथ! जो गलत है वो गलत है। कोई भी उसका दुरुपयोग कर सकता है।”
विश्वनाथ तुरंत मास्टर जी के पास पहुँचे और मास्टर जी को आज़ाद का संदेसा सुनाया।
“हम्म्म्म!”
“क्या हुआ मास्टर जी?” विश्वनाथ अब चिंतित थे।
“मुझे आज़ाद के डर के बारे में पता है और यह भी पता है कि भारत की स्वंत्रतता में अभी आज़ाद की कितनी ज़रूरत है।”
“जी मास्टर जी।”
“देखो बच्चन, आज नहीं तो कल देश को आज़ाद होना ही है। तुम यह बताओ कि भारत के आज़ाद हो जाने पर लोग इस महान क्रांतिकारी को किस तरह याद रखेंगे? मास्टर जी ने वैशम्पायन को समझाया।
“मैं मानता हूँ इस बात को।”
“तुम निश्चिंत रहो विश्वनाथ, आज़ाद के जीते जी यह तस्वीर कभी आम जनता के सामने नहीं आएगी। तुमको यह भी पता है कि जिस रास्ते पर आज़ाद चल रहे हैं उसका अंजाम क्या है। यह जान लो कि यह एक अकेली तस्वीर है जिससे उनकी स्मृति सुरक्षित रहेगी और लोग इस जाँबाज़ आज़ाद को कभी भूल नहीं पायेंगे।” मास्टर जी वैशम्पायन को यह समझाने में सफल होगए थे।
“मैं ऐसा करता हूँ कि इसके निगेटिव की प्लेट को दीवार में चुनवा देता हूँ और इसके प्रिंट को नष्ट कर देता हूँ। तुम लौट कर आज़ाद को यह बता देना कि उनकी तस्वीर नष्ट कर दी गई है।”
“हम दाऊ से झूठ ना बोल पाएँगे मास्टर जी।” वैशम्पायन के लिए आज़ाद साहब से झूठ बोलना बेहद मुश्किल था।
मास्टर जी मुस्कुराए और बोले, “अश्वथामा मारा गया!” याद है ना?
वैशम्पायन ने मास्टर जी की ओर देखा, “तुम आज़ाद साहब से वही कहोगे जो तुम देखने वाले हो।”
मास्टर जी ने वैशम्पायन के सामने आज़ाद साहब की वो तस्वीर और कुछ दूसरे नेगेटिव नष्ट कर दिये।
“अब तुम आज़ाद को बोलना कि आपकी तस्वीर और नेगेटिव नष्ट कर दिए हैं मास्टर जी ने। ठीक है ना विश्वनाथ?” मास्टर जी विश्वनाथ के कंधे पर हाथ रखा।
विश्वनाथ लौटे और आज़ाद के पास पहुँचे।
“कहाँ हैं तस्वीर?” आज़ाद चिंतित थे।
“आपकी तस्वीर और नेगेटिव नष्ट कर दिए हैं मास्टर जी ने।” विश्वनाथ धीमे से बोले।
“खाओ हमाई सौं विश्वनाथ।”
“आपकी सौं दाऊ।”

अश्वथामा एक बार फिर काल के गाल को प्राप्त हुआ था। जब आज़ाद बलिदान हो गए तब यह तस्वीर मास्टर जी ने दीवार से निगेटिव निकलवा कर बनवाई और इस तरह देश के सामने आई उस महान क्रांतिकारी की एकमात्र जीवंत छवि, जो आज तक देश के तमाम वासियों के मन में बसी है। अब आते हैं उस तस्वीर पर जिसमें आज़ाद एक महिला और दो बच्चों के साथ बैठे हुए हैं। यह वही तस्वीर है जिसके सहारे भारत सरकार ने आज़ाद साहब के ऊपर डाक टिकट जारी किया था, जो आज भी उनकी अमिट पहचान है।

27 फ़रवरी 1988 में भारत सरकार द्वारा आज़ाद साहब के ऊपर जो साथ पैसे का टिकट जारी किया गया था, उस पर भी इसी तस्वीर का हिस्सा है।

बहुत दिनों तक इंटरनेट पर यह खबर उड़ती रही कि यह आज़ाद साहब की धर्मपत्नी और उनके बच्चों की हैं। आपको बताता चलूँ कि इस तस्वीर में आज़ाद साहब मास्टर जी के घर में, यानी मेरे नाना श्री मास्टर रुद्रनारायण जी की धर्मपत्नी श्रीमती मुन्नीदेवी (मेरी नानी) और उनकी दो बिटियों सावित्री जी और लक्ष्मी जी के साथ बैठे हैं। इस तस्वीर लेने का कारण यह था कि लोगों को यह लगे कि आज़ाद मास्टर जी के परिवार के ही सदस्य हैं। मैं आभारी हूँ मास्टर रुद्रनारायण जी की पौत्री श्रीमती गीता राय और प्रपौत्र श्री अभिनव श्रीवास्तव जी का, जो समय-समय पर मेरी जानकारियों में बढ़ोतरी करते रहते हैं।

27 फ़रवरी, 1988 को भारत सरकार द्वारा आज़ाद साहब के ऊपर जो साथ पैसे का टिकट जारी किया गया था, उस पर भी इसी तस्वीर का हिस्सा है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम एक ऐसे ही कुछ गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएँ आप क्रांतिदूत शृंखला में पढ़ सकते हैं जो डॉ. मनीष श्रीवास्तव द्वारा लिखी गई हैं।

‘अब फट गई न…?’ : दिल्ली पुलिस ने अखबार में दिया विज्ञापन – ‘फट गई या फट गया’ को क्लियर करने फिर से छापना पड़ गया

टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में हाल में दिल्ली पुलिस ने एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया। इस विज्ञापन में ‘लावारिस वस्तुओं को न छूने और उसकी जानकारी पुलिस को देने’ के लिए अलर्ट था। कार्टून 24 जनवरी को प्रकाशित किया गया था। इस कार्टून में उन्होंने दिखाया कि कैसे दिल्ली पुलिस हमेशा समझाती है कि सार्वजनिक स्थलों पर पड़ी अंजान चीजों को कभी न छुएँ, लेकिन फिर भी लोग छूते हैं और दुर्घटना का शिकार होते हैं। इसी विज्ञापन में शब्द का प्रयोग हुआ ‘फट गई न’… जिस पर अब स्पष्टीकरण आया है।

इस कार्टून में साफ दिख रहा है कि दिल्ली पुलिस ‘सतर्क दिल्ली सेफ दिल्ली’ वाला संदेश दे रही है। एक व्यक्ति है जिसने सड़क पर पड़ी चीज को छुआ है और फिर उसमें विस्फोट के कारण घायल पड़ा है। लोग आकर उसे बता रहे हैं- दिल्ली पुलिस चिल्ला चिल्ला कर बोलती है, लावारिस चीजों को न छुएँ। अब फट गई न??

“इस संदेश के बाद दिल्ली पुलिस के लोगो के साथ फिर कहा जाता है कि किसी भी लावारिज वस्तु की जानकारी पुलिस को दें। ये जीवन और मौत का मामला हो सकता है। हमारे आँख, कान बनें और अपराध व आतंकवाद से लड़ने में हमारी मदद करें। कोई भी संदिग्ध वस्तु मिलने पर फौरन 1090 पर कॉल करें या मदद के लिए 112 नंबर मिलाएँ।

अब समस्या पूरे संदेश में कहीं नहीं है। बस माफी जो माँगी गई है वो एक मात्रा की गलती की वजह से है। जहाँ ‘फट गया’ प्रयोग होना था वहाँ ‘फट गई’ लिख गया। इस पर शुद्धिपत्र जारी करते हुए माफी माँगी गई। शुद्धिपत्र में कहा गया कि 24 जनवरी को प्रकाशित किए गए दिल्ली पुलिस के विज्ञापन में ‘फट गई’ शब्द लिख गया था। वो उसके लिए माफी माँगते हैं।

बता दें कि छोटी सी गलती के लिए माफी माँगे जाने के बाद नेटीजन्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कोई हँसते हुए कह रहा है कि माफी माँगने की क्या जरूरत तो कोई कह रहा है कि विज्ञापन का पैसा कम होगा तभी ऐसी गलती हुई।

उल्टी, बदन दर्द, तेज बुखार…: ईरान में लड़कियाँ न जा पाएँ स्कूल इसलिए उन्हें दिया गया जहर, 4 महीने में 50+ छात्राएँ बीमार

ईरान में स्कूल जाने वाली कई लड़कियों को जहर देकर मार डालने की साजिश का खुलासा हुआ है। यह करतूत किसकी है इस बात का पता फ़िलहाल नहीं चल पाया है। इस मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि भी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि इस हरकत के पीछे कुछ कट्टरपंथी हैं जो ईरान के स्कूलों को बंद करवाना चाह रहे हैं। अभी तक सभी बीमार छात्र सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कोम शहर में इस बात का खुलासा तब हुआ जब स्कूल जाने वाली लड़कियाँ एक के बाद एक बीमार होने लगीं। कुछ ही समय बाद इन लड़कियों की सँख्या 50 पहुँच गई। पहली घटना नवम्बर 2022 की बताई जा रही। तब कोम शहर के ही एक स्कूल में एक साथ लगभग 18 लड़कियों के बीमार होने की घटना सामने आई। तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। यहाँ उन सभी लड़कियों को उलटी, पेट दर्द, हाथों-पैरों में तेज दर्ज के साथ साँस लेने में दिक्कत महसूस हुई थी।

अंतिम घटना 22 फरवरी 2023 (बुधवार) को कोम शहर के एक स्कूल में दर्ज की गई थी। यहाँ एक ही स्कूल की 15 लड़कियों की तबियत अचानक बिगड़ गई थी। सभी में एक जैसी बीमारी के लक्षण पाए गए थे। पहली और अंतिम घटना के बीच कई अन्य स्कूलों में इसी प्रकार की वारदात हुई। लगभग हर वारदात में पीड़ित छात्रों ने एक जैसी परेशानी महसूस की। हालाँकि बीमार होने वाले छात्रों में कुछ लड़के भी थे लेकिन लड़कियों की तादाद अधिक थी।

इन घटनाओं के बाद कुछ अभिभावकों ने लड़कियों को जहर दिए जाने की आशंका जताई। इस शक पर अधिकारियों ने जाँच शुरू की। शुरुआती जाँच में स्थानीय अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार का जहर न मिलने की जानकारी दी गई। लड़कियों के माता-पिता इस जाँच से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया। हालाँकि गनीमत से अभी तक इस हरकत से किसी छात्रा की मौत नहीं हुई लेकिन लोगों में काफी नाराजगी फ़ैल गई। लोगों की नाराजगी देखते हुए ईरान सरकार ने इस मामले की बड़े स्तर पर जाँच करवाई।

इस जाँच के बाद ईरान के उप शिक्षा मंत्री युनेस पनाही ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ लोगों द्वारा छात्रों को केमिकल के माध्यम से जहर दिया जा रहा था। उन्होने आगे बताया कि छात्रों को परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योकि घटना में प्रयोग हुआ केमिकल बहुत हानिकारक नहीं है। अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोक रहे थे 2 BSF जवान, 100 बांग्लादेशियों ने कर दिया हमला: हथियार लूटकर भागे, FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल से सटी भारत बांग्लादेश सीमा में भारतीय जवानों पर हमले की खबर सामने आई। आरोप है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए अपने मवेशियों को चराने के लिए भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रहे थे। इसे देखते हुए पेट्रोलिंग कर रहे 2 जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस पर 100 से अधिक लोगों ने उन पर हमला कर दिया और उनके हथियार छीन कर भाग गए। हमले में जवानों को गंभीर चोटें आईं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना मुर्शिदाबाद जिले के रानीताला थाना क्षेत्र अंतर्गत निर्मलचर सीमा चौकी की है। यहाँ सीमा पर, 35वीं बटालियन के 2 जवान पेट्रोलिंग कर रहे थे। जवानों ने देखा कि बांग्लादेशी घुसपैठिए अपने जानवरों को भारतीय किसानों के खेतों में चराने के लिए घुसपैठ कर रहे हैं। इस पर जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान 100 से अधिक बांगलादेशी घुसपैठियों ने जवानों पर डंडों और घातक हथियारों से हमला कर दिया।

इस हमले में दोनों जवान बुरी तरह से जख्मी हो गए। फिर बांगलादेशी घुसपैठिए जवानों के हथियार छीनकर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलने पर बीएसएफ के अधिकारी मौके पर पहुँचे। दोनों घायलों को नजदीकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

इस हमले को लेकर बीएसएफ ने बयान जारी कर कहा है कि घटना के बारे में बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) को सूचित किया गया। साथ ही जवानों के हथियार बरामद करने व भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक फ्लैग मीटिंग की माँग की गई है। बयान में यह भी कहा गया है कि भारतीय किसान बांग्लादेशियों द्वारा उनकी फसल चोरी किए जाने की शिकायत करते रहे हैं।

कहा जा रहा है कि भारतीय किसानों की फसल नष्ट करने के लिए बांग्लादेशी घुसपैठिए पहले भी जानवर चराने तथा फसल चोरी करने जैसी हरकतों को अंजाम देते रहे हैं। इन घटनाओं के बारे में बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) को सूचित किया गया था। हालाँकि इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए बीजीबी की ओर से अब तक कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पूरे मामले में बीएसएफ ने अज्ञात बांगलादेशी घुसपैठियों के खिलाफ हमला करने और हथियार चुराने के आरोप में रानीताला थाने में FIR दर्ज कराई है।

सीनियर डॉक्टर सैफ करता था तंग… जूनियर प्रीति ने एनिस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर कर ली आत्महत्या: आरोपित बोला- ‘मैं उसे सुधार रहा था’

तेलंगना के वारंगल जिले में आत्महत्या का प्रयास करने वालीं काकतीय मेडिकल कॉलेज की दलित छात्रा डॉ प्रीति की इलाज के दौरान मौत हो गई है। प्रीति के सीनियर डॉ सैफ पर उन्हें रैंगिंग के नाम पर प्रताड़ित करने का आरोप है। डॉ प्रीति की मृत्यु की पुष्टि रविवार (26 फरवरी 2023) को निज़ाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस द्वारा की गई है। बुधवार (22 फरवरी 2023) को पीड़िता ने एनेस्थीसिया की दवा का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या की कोशिश की थी। तब से उनका इलाज चल रहा था।

इस मामले में आरोपित डॉ सैफ को पुलिस ने शुक्रवार (24 फरवरी 2023) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सैफ के खिलाफ सबूत जुटा रही है। पुलिस ने प्रीति का फोन चेक करने के बाद पाया कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। सैफ पर SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं निज़ाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस के सुपरिंटेंडेंट ने प्रीति की मौत की खबर की पुष्टि अपने आधिकारिक लेटर हेड पर की है। उन्होंने बताया कि तमाम कोशिशों के बाद भी हम डॉ प्रीति को नहीं बचा पाए। पीड़िता ने रात 9 बज कर 10 मिनट पर अंतिम सांस ली।

जानकारी के मुताबिक डॉ प्रीति के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। घटना के बाद से मृतका की हालत लगातर गंभीर बनी हुई थी। इस दौरान कई डॉक्टरों ने प्रीति के लिए चिंता जरूर प्रकट की लेकिन उन्होंने सैफ के साथ अपना समर्थन खुल कर दिखाया था। खुद आरोपित सैफ का मानना था कि वो प्रीति के कामों में सुधार कर रहे थे जिसे प्रीति खुद के लिए परेशानी मानती थी। तेलंगाना जूनियर्स डॉक्टर एसोशिएशन ने भी सैफ के समर्थन में आवाज उठाते हुए उनके खिलाफ दर्ज केस बंद करने की माँग की।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का मानना है कि जिसे पुलिस रैंगिंग बता रही है वह सीनियर और जूनियर के बीच सामान्य बातचीत है। इसी मामले ट्राइबल यूनियन ने गुरुवार (23 फरवरी 2023) को प्रीति के समर्थन और सैफ के विरोध में अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकरियों ने पुलिस पर सैफ के खिलाफ कार्रवाई में हीलाहवाली का आरोप लगाया था।

नमाज की तैयारी के वक्त मदरसे में हुआ धमाका, करंट लगने से 4 बच्चे झुलसे: राजस्थान की घटना, पुलिस जाँच में जुटी

राजस्थान के कोटा में स्थित एक मदरसे में बिजली की हाईटेंशन तार से हुए धमाके और करंट लगने से 4 बच्चे घायल गए। इसमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा उस वक्त हुआ जब लोग नमाज की तैयारी कर रहे थे। फिलहाल हादसे का कारण स्पष्ट नहीं है। हादसा रविवार (26 फरवरी 2023) शाम हुआ।

यह हादसा कोटा के दादाबाड़ी क्षेत्र के वक्फ नगर में स्थित मदीना फैजान मदरसे में हुआ। हादसे के वक्त मदरसे में मौजूद अरशद अंसारी का कहना है कि घटना शाम करीब 6:30 की है। मदरसे में नमाज की तैयारी हो रही थी। वहाँ करीब 50-60 लोग मौजूद थे। वहीं, मदरसे में पढ़ने वाले 4 बच्चे अली अंसारी, जरयान, अरमान और गाजी मदरसे के छज्जे में खड़े हुए थे।

इस दौरान मदरसे से करीब 4 फीट दूर से निकली हुई 33KV हाईटेंशन लाइन ने बच्चों को खींच लिया। साथ ही अचानक धमका जैसा हुआ। इस पूरी घटना की चपेट में आए चारों बच्चे झुलस गए। हादसे के बाद आनन में बच्चों को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। हालाँकि बाद में बच्चों को एक प्राइवेट में भर्ती किया गया। यहाँ हुए प्राथमिक उपचार के बाद एक बच्चे गाजी को छुट्टी मिल गई। वहीं 3 अन्य अब भी हॉस्पिटल में भर्ती हैं।

इस हादसे में एक बच्चे अली को काफी चोट आई है। करंट की चपेट में आने से उसके सीने और पैर बुरी तरह से झुलस गए हैं। वहीं 2 अन्य बच्चों की हालत स्थिर बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन से लेकर कई संबंधित अधिकारी मदरसे में पहुँच गए। वहीं कुछ अधिकारी हालात का जायजा लेने हॉस्पिटल भी पहुँचे।

हादसे के कारण

अब तक इस हादसे को लेकर कई कारण बताए जा रहे हैं। एक ओर जहाँ यह कहा जा रहा है कि हाई टेंशन लाइन ने बच्चों को खींच लिया। इससे हादसा हुआ। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि घायल हुए बच्चे वाइपर से काम कर रहे थे। इस दौरान ही वाइपर हाईटेंशन लाइन से टच हुआ। इससे हादसा हुआ। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बच्चों के मोबाइल चार्ज में लगे हुए थे। इस दौरान हुए शार्ट सर्किट से यह हादसा हुआ।

पुलिस का कहना है कि इस हादसे के स्पष्ट कारण का पता अब तक नहीं चल सका है। घटना को लेकर कई कारण सामने आए हैं। जाँच में ही घटना के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। बिजली कंपनी के सीओओ शांतनु भट्टाचार्य ने भी ऐसी ही बात दोहराई है। भट्टाचार्य का कहना है कि घटना की जानकारी सामने आने के बाद से अब तक कई तरह के कारण बताए जा रहे हैं। इसके बारे में टेक्निकल जाँच के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

सवालों पर कर रहे थे टालमटोल, जाँच में पहले भी नहीं किया सहयोग: मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी का कारण जानिए, आपराधिक साजिश-धोखाधड़ी का भी मामला

दिल्ली की शराब नीति को लेकर हुए घोटाला मामले में सीबीआई (CBI) ने मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने करीब 8 घण्टे तक उनसे पूछताछ की। इस गिरफ्तारी को लेकर AAP बीजेपी पर हमलावर है। हालाँकि, सीबीआई ने कहा है कि सिसोदिया जवाब देने में टाल-मटोल कर रहे थे। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश रचने के आरोप में) तथा 477-A (धोखाधड़ी करने की कोशिश करने के आरोप में) व भ्रष्टाचार अधिनियम निवारण की धारा-7 के तहत गिरफ्तार किया है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर सीबीआई ने बयान जारी कहा है कि जाँच के दौरान घोटाले को लेकर जुटाए सबूतों को लेकर उनसे पूछताछ की गई। लेकिन, सिसोदिया ने पहले की ही तरह एक बार फिर जवाब देने में टाल-मटोल कर रहे थे।

बयान में सीबीआई ने यह भी कहा है कि नई आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं को लेकर सिसोदिया व अन्य 14 लोगों के FIR दर्ज की गई थी। इसमें मुंबई की एक निजी कंपनी के तत्कालीन सीईओ समेत 7 लोगों के खिलाफ 25 दिसंबर, 2022 को चार्जशीट दाखिल की गई।

जाँच में सहयोग करने के लिए सिसोदिया को 19 फरवरी को नोटिस जारी किया। लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए एक सप्ताह का समय माँगा। उनके अनुरोध पर फिर नोटिस जारी किया गया। हालाँकि इसके बाद भी वह जवाब देने में टालमटोल करते रहे। इसलिए उनकी गिरफ्तारी हुई। ‘हिंदुस्तान’ ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि मनीष सिसोदिया के जवाब जाँच एजेंसी को संतोषजनक नहीं लग रहे थे। जाँच अधिकारी उनसे दिनेश अरोड़ा समेत अन्य आरोपितों से संबंध को लेकर पूछताछ कर रहे थे। लेकिन, सिसोदिया ज्यादातर जवाबों को टालने की कोशिश कर रहे थे।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि जाँच अधिकारी यह जानना चाहते थे कि आबकारी नीति लागू होने से पहले ही इसकी प्रतियाँ शराब कारोबारियों तक कैसे पहुँची? लेकिन, सिसोदिया इन तमाम सवालों के जवाब नहीं दे सके। यही नहीं, सिसोदिया की गिरफ्तारी में दिनेश अरोड़ा के बयानों को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दरअसल, अरोड़ा सिसोदिया का सबसे खास आदमियों में से एक था। हालाँकि गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद दिनेश आरोड़ा इस पूरे मामले में सरकारी गवाह बन गया। ऐसे में मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपितों को लेकर उसके द्वारा किए गए खुलासे इस गिरफ्तारी में अहम माने जा रहे हैं।

सिर्फ वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह ही नहीं, 18 मंत्रालय चला रहे थे मनीष सिसोदिया: CM केजरीवाल के पास नहीं है कोई विभाग, कैसे चलेगी अब AAP सरकार?

दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI ने शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया है, ऐसे में अब सवाल ये उठ रहे हैं कि प्रदेश की AAP सरकार में उनके द्वारा सँभाले जाने वाले मंत्रालयों का क्या होगा? ये सवाल इसीलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि मनीष सिसोदिया दिल्ली सरकार के साथ-साथ AAP में भी नंबर-2 हैं। अरविंद केजरीवाल भले ही मुख्यमंत्री हों, लेकिन लगभग सारे महत्वपूर्ण छोटे-बड़े मंत्रालय मनीष सिसोदिया के पास ही हैं।

दिल्ली सरकारी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मनीष सिसोदिया जिन मंत्रालयों को सँभाल रहे हैं, वो ये हैं – शिक्षा, वित्त, योजना, भूमि एवं इमारत, ख़ुफ़िया, सेवाएँ, कला-संस्कृति एवं भाषाएँ, श्रम, रोजगार, सार्वजनिक कार्य विभाग, स्वास्थ्य, उद्योग, बिजली, गृह, शहरी विकास, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, पानी। इसके अलावा अन्य सभी वो विभाग, जो किसी अन्य मंत्री को नहीं मिले हैं, उन्हें मनीष सिसोदिया ही देख रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले सत्येंद्र जैन के पास 6 विभाग हुआ करते थे, लेकिन उनकी गिरफ़्तारी के बाद उनके हिस्से के भी सारे विभाग मनीष सिसोदिया को ही दे दिए गए। उनकी गिरफ़्तारी के बाद अब AAP सरकार के कामकाज पर भी असर पड़ना तय है। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री होने के बावजूद अपने पास कोई विभाग नहीं रखते हैं। ऐसे में उनके लिए अब प्रदेश की सरकार चलाना किसी चुनौती से कम नहीं होने वाली है।

मनीष सिसोदिया के अलावा दिल्ली और पंजाब में AAP के कई मंत्री जेल की हवा समय-समय पर खा चुके हैं। कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े अवैध लेन देन के मामले में सत्येंद्र जैन लंबे समय से जेल में हैं। सोमनाथ भारती को अपनी पत्नी के हत्या के प्रयास और घरेलू हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जितेंद्र तोमर को फर्जी डिग्री मामले में जेल जाना पड़ा था। संदीप कुमार राशन कार्ड बनवाने के बहाने महिला से रेप के आरोप में जेल जा चुके हैं। विजय सिंगला पर अधिकारियों से प्रत्येक ठेके पर एक पर्सेंट कमीशन माँगने का आरोप लगा था।

बलात्कार, फर्जी डिग्री, पत्नी की पिटाई, अवैध संपत्ति, ठेके में कमीशन… केवल मनीष सिसोदिया ही नहीं, आप के 6 मंत्री खा चुके हैं जेल की हवा

ईमानदारी का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी की पंजाब और दिल्ली में सरकार है। हालाँकि दोनों ही राज्यों में AAP के मंत्री जेल की हवा खाते नजर आते हैं। शराब घोटाले में फँसे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी रविवार (26 फरवरी 2023) को गिरफ्तार कर लिया गया। अब तक आम आदमी पार्टी के कई मंत्री जेल जा चुके हैं।

आइये एक नजर डालते हैं आम आदमी पार्टी के उन मंत्रियों पर जो जेल जा चुके हैं:

1.) मनीष सिसोदिया :

खुद को दिल्ली का मालिक बताने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खासदार और दिल्ली सरकार में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम इस सूची में टॉप पर है। दिल्ली की नई शराब नीति को लेकर हुए घोटाले के आरोप में सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था। इसके बाद अब गिरफ्तारी हुई है। इस मामले में सीबीआई और ईडी ने उनके घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। देखना होगा सिसोदिया को कितने दिनों तक जेल की रोटियाँ खानी पड़ेंगीं।

2.) सत्येंद्र जैन :

दिल्ली सरकार में जेल मंत्री रहे सत्येंद्र जैन लंबे समय से सीबीआई और ईडी के निशाने पर रहे हैं। ईडी अब तक उनकी 4.81 करोड़ रुपए की संपत्ति भी जब्त कर चुकी है। कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े अवैध लेन देन के मामले में वह लंबे समय से जेल में हैं। इसके अलावा उन पर अवैध लेन देन के कुछ अन्य आरोप भी हैं।

3.) सोमनाथ भारती :

जेल जाने वाले आप नेताओं की बात हो और उसमें सोमनाथ भारती का नाम न हो, ऐसा हो ही नहीं हो सकता। केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री रहे सोमनाथ भारती को अपनी पत्नी के हत्या के प्रयास और घरेलू हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, एम्स हॉस्पिटल की दीवार तोड़ने की कोशिश करने वाली भीड़ का नेतृत्व करने और हॉस्पिटल के सुरक्षाकर्मियों पर पथराव करने के आरोप में भी वह जेल की सजा काट चुके हैं। कोर्ट ने उन्हें मार्च 2021 में दो साल की जेल की सजा सुनाई थी।

4.) जितेंद्र तोमर :

केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री रहे जितेंद्र तोमर को फर्जी डिग्री मामले में जेल जाना पड़ा था। एक RTI में खुलासा हुआ था कि उनकी वकालत की डिग्री फर्जी है। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने जितेंद्र सिंह तोमर के चुनाव को रद्द कर दिया था।

5.) संदीप कुमार :

आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार राशन कार्ड बनवाने के बहाने महिला से रेप के आरोप में जेल जा चुके हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि वह AAP नेता संदीप कुमार के पास राशन कार्ड बनवाने के लिए गई थी। जहाँ उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। इसके बाद उसके साथ बलात्कार किया। इस घटना की एक सीडी भी सामने आई थी। इसको लेकर दिल्ली की सियासत में जमकर बवाल हुआ था।

6.) विजय सिंगला :

पंजाब की भगवंत मान सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे विजय सिंगला पर अधिकारियों से प्रत्येक ठेके पर एक पर्सेंट कमीशन माँगने का आरोप लगा था। आरोप लगने के बाद उन्हें मंत्री पद गँवाना पड़ा और फिर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

इन मंत्रियों के अलावा, दिल्ली, पंजाब और गुजरात में आम आदमी पार्टी के ऐसे कई नेता और विधायक हैं जो जेल जा चुके हैं। इसमें दिल्ली के विधायक अमानतुल्लाह खान और ताहिर खान से लेकर पंजाब विधायक अमित रतन और गुजरात आप के प्रदेशाध्यक्ष गोपाल इटालिया का नाम शामिल है।

अगर हैंडसम होना अपराध है तो गिरफ्तार करो मुझे… मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी के बाद सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे मीम्स, ‘मैगजीन’ में भी तस्वीर

शराब घोटाले में 8 घंटे की पूछताछ के बाद CBI ने दिल्ली के डिप्टी CM व AAP नेता मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘हैंडसम’ शब्द ट्रेंड होने लगा। बता दें कि एक पर्चे के वायरल होने के बाद से मनीष सिसोदिया के साथ ये शब्द जुड़ गया है। दावा किया जाता है कि खुद AAP ने इसे वायरल करवाया था। लोग एक से बढ़ कर एक मीम्स शेयर कर रहे हैं और AAP नेता की गिरफ़्तारी के मजे ले रहे हैं।

‘बीइंग ह्यूमर’ ने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें एक व्यक्ति को दो पुलिस वाले टाँग कर ले जा रहे हैं। उस व्यक्ति के चेहरा को एडिट कर मनीष सिसोदिया का बना दिया गया। फोटो के कैप्शन में लिखा गया, “सिसोदिया: अगर हैंडसम होना अपराध है तो मुझे गिरफ्तार करो, पुलिस:…”।

आशीष ने ‘वेलकम’ फिल्म में जश्न मनाए जाने का एक वीडियो शेयर कर लिखा कि मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी के बाद उनके और उनके दोस्तों की स्थिति ऐसी ही है।

मनपिंदर सिंह ने लिखा, “मुझे पता था कि नरेंद्र मोदी जैसा एक ईर्ष्यालु फासीवादी मनीष सिसोदिया जैसा हैंडसम हंक, जो सबके दिलों पर राज करता हो, उसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।”

एक ने तो ‘लुटेरा’ फिल्म के पोस्टर में रणवीर सिंह की जगह बाइक पर मनीष सिसोदिया को बिठा दिया और उस एडिटेड तस्वीर को शेयर किया।

उन्हें ‘हैंडसम’ बताते हुए एक मैगजीन के पोस्टर तक पर उनकी तस्वीर एडजस्ट कर दी लोगों ने।

इसी तरह कई अन्य लोगों ने भी अलग-अलग मीम्स शेयर किए:

दक्षिणी दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। CBI के मुख्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। विरोध प्रदर्शन के दौरान उग्र हुए कई AAP कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया है। कम से कम 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से 8 महिला कार्यकर्ता हैं, जिन्हें रिहा कर दिया जाएगा। AAP सांसद सांसद संजय सिंह को भी हिरासत में लिया गया है, जिन्हें राज्यसभा में हंगामा करने के लिए जाना जाता है।