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‘इसकी रीढ़ की हड्डी अब तक सीधी नहीं हुई’: ‘झुके हुए पवन खेड़ा’ की पुरानी तस्वीर वायरल, PM मोदी के दिवंगत पिता का किया था अपमान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करने वाले कॉन्ग्रेस पवन खेड़ा की एक पुरानी तस्वीर सामने आई है, जिसके बाद उनकी रीढ़ की हड्डी पर सवाल उठ रहे हैं। पवन खेड़ा ‘भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC)’ के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र ‘गौतम दास’ मोदी नाम का प्रयोग किया। बता दें कि पीएम अपने नाम में अपने पिता दामोदर मोदी का नाम लगाते हैं, इसीलिए उनका नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी भी है।

हालाँकि, इसी बीच पवन खेरा की एक पुरानी तस्वीर सामने आ गई। उस तस्वीर में वो काफी झुके हुए हैं और उनके हाथ में कुछ दस्तावेज हैं। उनके सामने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सोफे पर बैठी हुई हैं और वो उसी तरफ झुक कर खड़े हैं। इसके बाद लोग कह रहे हैं कि जिसकी रीढ़ की हड्डी आज तक सीधी नहीं हो पाई, वो व्यक्ति आज पीएम मोदी के पिता पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रहा है। बता दें कि उस समय पवन खेड़ा दिल्ली की सीएम के राजनीतिक सचिव हुआ करते थे।

पवन खेड़ा ने अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी के साथ नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान किया। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने पत्रकारों के सामने ही ऐसा किया। इस दौरान उनके साथी नेता पवन बंसल भी हँसते रहे। फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने ये बयान देने वाले पवन खेड़ा की तुलना राहुल गाँधी के कुत्ते ‘पीदी’ से की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बयान के लिए सीधे राहुल गाँधी को निशाने पर लिया।

अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है, ये सिर्फ उनकी बात नहीं है बल्कि राहुल गाँधी के स्वभाव के अनुकूल भी है। अमित शाह ने कहा कि वो राहुल गाँधी को याद दिलाना चाहते हैं कि 2019 में पीएम मोदी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करने का नतीजा उन्होंने देखा, अब 2024 के भी नतीजे वो समझ जाएँ। बता दें कि पवन खेड़ा अक्सर टीवी डिबेट्स में अपनी पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं।

शैतान की सींगे बाहर निकल आएँगी… सऊदी अरब के नए मेगा प्रोजेक्ट पर भड़के मुस्लिम, कहा – मनोरंजन के लिए नया काबा बना रहे

इस्लामी मुल्क सऊदी अरब, जहाँ इस्लाम में सबसे पवित्र माने जाने वाले हज स्थल मक्का और मदीना स्थित हैं, वहाँ के एक नए मेगा प्रोजेक्ट को मुस्लिम ही सोशल मीडिया पर निशाना बना रहे हैं। ये वहाँ के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के ड्रीम प्रोजेक्ट है। ये एक प्रस्तावित शहर है, जिसका मुख्य आकर्षण ‘The Mukaab’ नाम की एक संरचना होगी। मुस्लिम इसे काबा जैसा बता रहे हैं और सऊदी अरब की सरकार से खासे गुस्सा हैं।

मुस्लिमों का कहना है कि सऊदी अरब इस नए मेगा प्रोजेक्ट के तहत ‘नया काबा’ बनाने में लगा हुआ है। लोगों को काबा और मुकाब की आकृति समान लग रही है। वैसे भी अरबी भाषा में दोनों शब्दों का अर्थ एक ही होता है – घनाकार आकृति। सोशल मीडिया पर मुस्लिम कह रहे हैं कि मनोरंजन के लिए ‘नया काबा’ बनाया जा रहा है। दुनिया का सबसे आधुनिक बताया जाने वाला ये शहर रियाद में विकसित किया जा रहा है।

‘न्यू मुरब्बा’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक संग्रहालय, तकनीकी और डिजाइन यूनिवर्सिटी, एक विशालकाय थिएटर और अन्य मनोरंजन व संस्कृति के स्थल होंगे। इस शहर में वातावरण के लिए हरियाली का भी खास ध्यान रखा जाएगा। पैदल यात्रियों के लिए अलग रास्ते बनाए जाएँगे। सऊदी अरब की ‘पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड’ ने इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा बताते हुए नया वीडियो जारी किया है। ‘द मुकाब’ नामक इमारत की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई 400 मीटर की होगी।

प्रोफेसर डॉ मुहम्मद अल-हचिमी अल-हमीदी ने दावा किया कि नज्द क्षेत्र में एक भविष्यवाणी की गई है कि एक दिन शैतान की सींगे बाहर निकल आएँगी। एक अन्य प्रोफेसर ने भी इसे नया काबा करार दिया। एक अन्य मुस्लिम ने कहा कि ये एक ऐसा काबा है, जो पूंजीवाद को समर्पित है। कुछ मुस्लिमों ने ये भी दावा किया कि मक्का-मदीना से अपनी पहचान बदल कर सऊदी अरब रियाद को अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

जिस नवजात को डब्बे में पैक कर के माँ-बाप को दे दिया, घर पहुँचने पर निकली ज़िंदा: BJP ने ‘केजरीवाल के हेल्थ मॉडल’ पर उठाए सवाल, LNJP ने नकारे आरोप

दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) में एक ज़िंदा नवजात शिशु को मृत बता कर उसे डब्बे में पैक कर के माँ को थमा दिया गया। इसके बाद विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और AAP (आम आदमी पार्टी) की सरकार को निशाना बनाया है। बच्ची के माता-पिता ने बताया कि जन्म के बाद अस्पताल ने उसे मृत घोषित कर दिया था, लेकिन परिजनों ने जब घर पहुँच कर डब्बा खोला तो वो ज़िंदा मिली।

इतना ही नहीं, जब बच्ची के परिजन शिशु को लेकर वापस अस्पताल पहुँचे तो डॉक्टरों ने उसे देखने से भी मना कर दिया। अब सेन्ट्रल दिल्ली की डीसीपी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने मामला संज्ञान में आने के बाद अस्पताल के शीर्ष चिकित्सकों से संपर्क साधा, जिसके बाद किसी तरह बच्ची की जान बच गई। पुलिस की मदद से उसका इलाज चल रहा है। उसे ICU में भर्ती कराया गया है। बच्ची की प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई थी।

BJYM के नेशनल सेक्रेटरी तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसे ‘अरविंद केजरीवाल का हेल्थ मॉडल’ बताते हुए कहा कि एक जीवित बच्चे को मरा हुआ बता कर डब्बे में पैक करके माँ को दे देना शर्मनाक है। LNJP के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुरेश कुमार ने अपने डॉक्टरों का बचाव किया है, साथ ही मामले की जाँच प्रगति में होने की बात कही है। बच्ची का वजन मात्र 525 ग्राम है। वो मात्र 6 महीने, यानी 24 हफ़्तों में ही पैदा हो गई है।

MS सुरेश कुमार ने फ़िलहाल लापरवाही की किसी बात से भी इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि सभी वरिष्ठ डॉक्टर इसे बचाने में लगे हुए हैं, दिन-रात एक किए हुए हैं। उन्होंने यहाँ तक दावा कर डाला कि बच्ची को कभी घर भेजा ही नहीं गया था। उन्होंने कहा कि शिशु के जन्म के बाद ऐसा लगा कि वो मृत है, लेकिन शरीर में हरकत देखे जाने के बाद ICU में भर्ती कराया गया। हालाँकि, रुखसार नामक महिला का कहना है कि उसकी बच्ची को वेंटिलेटर तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

‘उर्फी जावेद की हरकतें मुस्लिमों की बेइज्जती, कब्रिस्तान में न मिले जगह’: वायरल वीडियो में फतवा की डिमांड, कहा- बदल ले धर्म

उर्फी जावेद (Urfi Javed) अपने कपड़ों और बेबाकी को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं। इसके कारण वह इस्लामी कट्टरंपथियों के निशाने पर भी आती रहती हैं। सोशल मीडिया में ऐसा ही एक वीडियो वायरल है। इसमें उर्फी जावेद के खिलाफ कथित सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर फैजान अंसारी फतवा जारी करने के डिमांड करता नजर आ रहा है।

यह वीडियो 14 फरवरी 2023 का बताया जा रहा है। वीडियो में फैजान अंसारी ने उर्फी के पहनावे पर कड़ा एतराज जताते हुए उसे इस्लाम से खारिज करने वाले फतवे की माँग की है। उसने उर्फी के कपड़ों को कौम की इज्जत से जोड़ते हुए कहा है कि उसे मौत के बाद दफनाने के लिए कब्रिस्तान में जगह नहीं मिलनी चाहिए।

फैजान अंसारी का यह वीडियो करीब 6 मिनट का है। वीडियो में फैजान जुहू कब्रिस्तान के बाहर दिख रहा है। उसने कहा कि एक फतवा आने वाला है जिसमें उर्फी जावेद को मुस्लिम समाज किसी भी सूरत में कब्रिस्तान में दफन नहीं होने देगा। एक लेटर दिखाते हुए उसने इसे मौलाना साद और मुंबई के शहर काजी को भी भेजने की बात कही है। फैजान के मुताबिक अपनी माँगों के समर्थन में वह कानूनी कार्रवाई भी करेगा। उसने उर्फी जावेद से अपना धर्म बदल लेने को भी कहा है।

उर्फी की हरकतों को दुनिया भर के मुस्लिमों की बेइज्जती बताते हुए फैजान ने वीडियो में कहा है कि वह किसी भी हाल में उसे नहीं छोड़ेगा। उसने कहा है, “बहुत शर्म आती है जब लोग कहते हैं कि एक मुस्लिम लड़की नंगी घूम रही है।” फैज़ान ने इसी वीडियो में मौलाना साद को अपने समाज का सबसे बड़ा धर्मगुरु बताया है। उसने मुंबई पुलिस से भी उर्फी को माहौल गंदा करने के अपराध में गिरफ्तार करने की माँग की है। फैजान ने कहा कि उर्फी खुद को मुस्लिम मानती ही नहीं इसलिए वो अपना नाम फौरन बदले। ऐसा नहीं करने पर उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। फैजान ने कहा है, “जावेद, उर्फी, खान और मोहम्मद सिर्फ मुस्लिमों के नाम हैं। अपना धर्म बदल कर उर्फी भले ही वो भी न पहनें जो अभी पहनती हैं।”

गौरतलब है कि उर्फी जावेद के पहनावे और चाल-ढाल पर पहले भी मुस्लिम शिकायतें दर्ज करवा चुका है। दिसंबर 2022 में मुंबई के एक वकील अली काशिफ खान ने अँधेरी पुलिस स्टेशन में उर्फी पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

राजस्थान के बाद अब हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार ने अडानी से की डील: CM सुक्खू की मौजूदगी में बैठक, बंद पड़े सीमेंट प्लांट्स होंगे चालू

जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी गौतम अडानी को भला-बुरा कहते रहते हैं, राजस्थान के बाद अब हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने गौतम अडानी के साथ डील की है। बंद पड़े सीमेंट प्लांट्स भी अब खुल जाएँगे। इससे पहले राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार के निवेदन पर हजारों करोड़ रुपयों के निवेश का फैसला लिया था। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में अडानी समूह की दोनों सीमेंट कंपनियों और ट्रक ऑपरेटर्स के बीच मालभाड़े के रेट को लेकर विवाद चल रहा था। 65 दिनों बाद ये विवाद सुलझ पाया है।

सोमवार (20 फरवरी, 2023) को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की मौजूदगी में दोनों पक्षों में समझौता हुआ। समझौते के अनुसार, मालभाड़े के नए रेट 9.30 रुपए प्रति किलोमीटर प्रति टन और 10.30 रुपए प्रति किलोमीटर प्रति टन तय किए गए। ट्रक ऑपरेटर्स ने इस दौरान कहा कि राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वो नए रेट को स्वीकार कर रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने दावा किया कि इसके कारण उन्हें सालाना 5-7 लाख रुपए का नुकसान होगा।

फिर उन्होंने ये भी कहा कि जनहित के लिए वो इस नुकसान को झेलने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही मंगलवार से ही अडानी समूह की दोनों सीमेंट कंपनियाँ अम्बुजा और ACC अपने-अपने प्लांट्स में प्रोडक्शन शुरू कर देंगी। ट्रक यूनियन वाले भी कल से काम पर लौट जाएँगे। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में आपस में और चर्चा अभी बाकी है। 15 दिसंबर से 2 प्लांट्स बंद होने के कारण 35,000 लोग बेरोजगार हो गए थे।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद इस मामले पर निगरानी रख रहे थे और उन्होंने ये तीसरे दौर की वार्ता की। ट्रक ऑपरेटर्स के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनके बाकी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत चलती रहेगी। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने के लिए सरकार के साथ अब तक 16 दौर की वार्ताएँ हो चुकी हैं। सीएम ने CEO लेवल के अधिकारियों को भी बुलाया था। इस विवाद से दोनों पक्षों को नुकसान हुआ। सीएम सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार आने के 5 दिनों बाद ही ये मामला सामने आया था।

नूँह में पत्थरबाजी-फायरिंग: बाइक की रफ्तार का विवाद सांपद्रायिक हिंसा में बदला, नत्थूराम के घर पर भीड़ का हमला; छावनी में बदला इलाका

हरियाणा के नूँह में बाइक की रफ्तार को लेकर हुआ विवाद सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया। पत्थरबाजी और फायरिंग की खबर है। नत्थूराम के घर पर मुस्लिम भीड़ के हमले के बाद दोनों तरफ से लाठी-डंडे और गोलियाँ चली हैं। करीब दर्जन भर लोग घायल हुए हैं। भारी पुलिस बल की तैनाती है। घटना सोमवार (20 फरवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला गाँव खेड़ा खलीलपुर का है। विवाद की शुरुआत रविवार को हुई थी। एक नाबालिग लड़का तेज रफ्तार बाइक चला रहा था। आरोप है कि उसकी चपेट में आने से गाँव के ही नत्थूराम के घर की एक 8 वर्षीया बच्ची बाल-बाल बच गई। इसको ले कर नत्थूराम के घर वालों की नाबालिग लड़के से बहस करने लगा। कहा जा रहा है कि इस दौरान नत्थूराम ने पक्ष के लोगों ने नाबालिग लड़के की पिटाई कर दी।

हालाँकि थोड़ी देर बाद मामला शांत हो गया और लोग अपने-अपने घरों को चले गए। सोमवार को इसी बात को लेकर नाबालिग लड़के और नत्थूराम के घर वाले आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पत्थर फेंके और लाठी-डंडों से हमला किया। आरोप है कि इस दौरान गोलियाँ भी चलीं। झगड़े में नत्थूराम पक्ष के करीब 12 लोग घायल हैं। इनका इलाज स्थानीय सोहना अस्पताल में चल रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में कई लोगों को छतों से पथराव करते देखा जा सकता है। हमले में कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलने पर भारी संख्या में पुलिस बल गाँव पहुँचा। हालात काबू में हैं। लेकिन गाँव में अभी भी तनाव होने की बात कही जा रही है। इसे देखते हुए पूरे इलाका छावनी में बदल दिया गया है। कुछ पत्थरबाजों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन खबर लिखे जाने तक आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।

महाशिवरात्रि पर मुकेश अंबानी ने बेटे आकाश के साथ सोमनाथ के किए दर्शन, मंदिर ट्रस्ट को दिए ₹1.51 करोड़

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और उनके बेटे आकाश अंबानी महाशिवरात्रि के मौके पर गुजरात के सोमनाथ मंदिर (Somnath Mandir) पहुँचे। इस दौरान मुकेश अंबानी ने सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट (Somnath Mandir Trust) को 1.51 करोड़ रुपए दान भी दिए। सोशल मीडिया पर मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी की भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हुए तस्वीरें वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में दोनों भगवान शिव का जलाभिषेक और प्रार्थना करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों का स्वागत मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पीके लाहिड़ी और सचिव योगेंद्रभाई देसाई ने किया। मंदिर के पुजारी ने सम्मान के तौर पर उन्हें चंदन का लेप लगाया और दुशाला ओढ़ाया। मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी की सोमनाथ मंदिर में पूजा करने की तस्वीरें वायरल होने के बाद सभी उनकी तारीफ कर रहे हैं। काव्या पटेल लिखती हैं, “यही कारण है कि मेरे मन में इन लोगों के लिए इतना सम्मान है।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी परंपराओं का सम्मान करते हैं और हिंदू त्योहारों को उत्साह के साथ मनाते रहे हैं। उन्हें धार्मिक कार्य एवं धर्मार्थ दान करते हुए देखना बहुत अच्छा लगता है। जैसे कि सोमनाथ ट्रस्ट को उन्होंने बहुत बड़ा दान किया है।”

एक और यूजर ने लिखा कि हम उनके इस तरह से परोपकार करने की सराहना करते हैं।

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह अरब सागर तट पर वेरावल के प्राचीन बंदरगाह के निकट स्थित है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि स्वयं चंद्रदेव ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। इसका नाम सोमनाथ होने का कारण यह बताया जाता है कि चंद्रमा का एक नाम सोम भी है। इसलिए इसका नाम सोमनाथ रखा गया। इसका उल्लेख स्कंदपुराण, श्रीमद्भागवत गीता, शिवपुराणम आदि प्राचीन ग्रंथों में भी किया गया है। यह मंदिर तीन भागों में विभाजित है। इसका शिखर 150 फुट ऊँचा है।

कई महिलाओं का बलात्कार, यौन शोषण, जंगली बंदरों से हमला… ईसाई दंपती चला रहे थे ‘आश्रम’, 142 पीड़ितों को बचाया गया

तमिलनाडु के विलुप्पुरम स्थित कुंडलापुलियूर का ‘अंबू जोती आश्रम’ चर्चा में है। ये पिछले 17 वर्षों से चल रहा था, बिना किसी आधिकारिक अनुमति के और बिना सरकारी दिशानिर्देशों के। वहाँ से 142 लोगों को बचाया गया है, जिसके बाद ये ‘आश्रम’ चर्चा में है। इनमें 109 पुरुष हैं और 33 महिलाएँ। असल में 17 दिसंबर, 2022 को अमेरिकी नागरिक सलीम खान ने मद्रास उच्च न्यायालय में केस दर्ज कराया था, जिसके बाद ये ‘आश्रम’ चर्चा में आया।

सलीम खान ने बताया था कि उसके ससुर जवाहिरुल्लाह इस ‘आश्रम’ से गायब हैं। इसके बाद यहाँ बलात्कार और टॉर्चर के कई मामले सामने आए। कई डरावनी कहानियाँ बाहर आईं। आश्रम के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन के मामले भी सामने आए। यौन शोषण, हिंसा और मानव तस्करी की कई घटनाओं का खुलासा हुआ। ये आश्रम दिन में तीन बार खाना देने और सुरक्षित रूप से रुकने की व्यवस्था का दावा करता था।

इससे वैसे लोग इसकी तरफ आकर्षित हुए, जो बेघर थे। इनमें से कइयों को बेहोश कर दिया गया तो कइयों के बाल मूँड़ दिए गए। ये सब इसीलिए किया जाता था, ताकि ऐसा लगे कि ये दिमागी समस्याओं से जूझ रहे हैं। 4 दिसंबर, 2021 को जवाहिरुल्लाह को इस आश्रम में भर्ती कराया गया था। जब सलीम ने अपने ससुर के बारे में पूछा तो उसे जवाब दिया गया कि उन्हें बेंगलुरु में ‘अंबु जोती आश्रम‘ के ही एक अन्य फैसिलिटी में भेजा गया है।

जब तमिलनाडु पुलिस इसकी जाँच करने बेंगलुरु पहुँची तो वहाँ के आश्रम की देखभाल करने वाले राजू उर्फ़ ‘ऑटो राजा’ ने दावा किया कि एक बुजुर्ग व्यक्ति और कुछ लोग बाथरूम की खिड़की तोड़ कर यहाँ से भाग गए। इसके बाद हाईकोर्ट ने आश्रम की तलाशी की अनुमति पुलिस को दी, जिसके बाद आश्रम में सैकड़ों पीड़ित मिले। इसी दौरान सामने आया कि कुछ कैदियों का कर्मचारियों ने यौन शोषण किया था। कइयों को बाँध कर रखा गया था।

कैद बंदरों से भी लोगों पर हमले करवाए गए थे। अब इस आश्रम को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। 130 लोगों के रहने की व्यवस्था सरकार ने कर दी है, वहीं 12 अपने-अपने परिवारों के पास वापस चले गए हैं। यहाँ से 50 किलोमीटर दूर कोट्टाकुप्पम नामक एक जगह पर भी 50 लोगों को बंदी बना कर रखा गया था। उन्हें अस्पतालों में भरी कराना पड़ा। उनके साथ भी ऐसे ही हादसे हुए थे। 8 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है NCW (महिला आयोग) भी इस मामले को देख रही है।

आश्रम के मालिक जुबिन और मारिया ने भागने की कोशिश भी की थी, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। केरल के कुछ ईसाई भी इस मामले में गिरफ्तार हुए थे। जुबिन और मारिया ने दो जंगली बंदरों को अधिकारियों के पीछे छोड़ दिया और भागने की कोशिश की। केरल के जुबिन का एक नाम ‘अंबु जुबिन’ भी है। वो 2005 में तमिलनाडु आया था और बीवी के साथ रेंट लेकर एक घर की स्थापना की। एक महिला ने बताया कि पिछले 5 सालों में आश्रम में उसे मारा-पीटा गया, बलात्कार किया गया। कई महिलाओं को ड्रग्स दिए गए।

पति-सास की हत्या, टुकड़े कर फ्रिज में रखे, फिर पॉलीथिन में डाल लगाए ठिकाने: असम में मर्डर, मेघालय में मिले शव के टुकड़े

असम के गुवाहाटी से दोहरे हत्याकांड का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बंदना कलिता नाम की एक महिला ने 7 महीने पहले अपने प्रेमी और एक दोस्त के साथ मिलकर ​पति व सास की निर्मम हत्या कर दी। फिर उनके शवों के टुकड़े कर फ्रिज में रख दिया। इसके बाद उसने सबूत मिटाने के लिए पॉलिथिन में शवों के टुकड़े डालकर उन्हें मेघालय की पहाड़ियों से नीचे फेंक दिया। पुलिस को गुवाहाटी डबल मर्डर केस का पता रविवार (19 फरवरी 2023) को चला। आरोपित बंदना कलिता को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि उसने पिछले साल 17 अगस्त को अपने आशिक और एक दोस्त की मदद से पति अमरज्योति डे व सास शंकरी डे की हत्या की थी। उसने पुलिस को यह भी बताया कि अपने पति और उसकी माँ को मारने और काटने के बाद उसने अपने साथियों के साथ मेघालय की पहाड़ियों में उनके शवों के टुकड़े फेंक दिए थे। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जाँच जारी है। अपराध का मकसद महिला का अवैध संबंध और संपत्ति का लालच था।

अमरज्योति डे और बंदना कलिता गुवाहाटी शहर के पूर्वी हिस्से नरेंगी में रह रहे थे। कुछ सालों तक दोनों की शादी काफी अच्छी चली। लेकिन जब अमरज्योति को पता चला कि बंदना का धनजीत डेका नाम के एक युवक के साथ संबंध है, तो इस बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़े होने लगे। दूसरी ओर, अमरज्योति की माँ शंकरी डे का शहर के बीचों बीच चाँदमारी इलाके में पाँच मंजिला मकान था। एक मंजिल पर वह अकेली रहती थी, जबकि चार मंजिल किराए पर दे रखा था। किराया शंकरी डे का भाई इकट्ठा करता था। यह बात बंदना को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी।

बताया जाता है कि अमरज्योति और बंदना तलाक लेने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन सात महीने पहले बंदना ने नूनमती थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उसका पति और सास गायब हैं। पुलिस ने जाँच शुरू की, लेकिन उनके बारे में कोई सुराग नहीं मिला। कुछ समय बाद, बंदना ने पुलिस में एक और शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने आरोप लगाया कि शंकरी डे का भाई उसके पाँच बैंक खातों में रखे पैसों का दुरुपयोग कर रहा है।

यह उसके लिए एक बड़ी गलती साबित हुई। जब पुलिस ने बैंक खातों की जाँच की,तो पाया कि बंदना कलिता ने खुद एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर अपनी सास के बैंक खाते से पाँच लाख रुपए निकाले थे। इससे पुलिस को उस पर शक हुआ। आगे की जाँच में उसके खिलाफ और सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उसे 19 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की टीम ने मेघालय से शवों के कुछ हिस्से भी बरामद किए हैं। शंकरी डे का सिर कटा शव बरामद किया गया है, साथ ही एक पॉलीथिन बैग में कुछ कंबल और कपड़े भी मिले हैं। शव का हाथ और सिर गायब है। अमरज्योति डे का शव अभी तक नहीं मिला है।

JDU से निकले उपेंद्र कुशवाहा, नई पार्टी बनाई: जाते-जाते महागठबंधन सरकार में नीतीश कुमार की ‘औकात’ बताई, बोले- तेजस्वी असली CM

जदयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी से अलग होकर नए दल के गठन का ऐलान कर दिया है। कभी मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रहे उपेंद्र कुशवाहा द्वारा 8वीं बार पाला बदलने से बिहार की राजनीति में भी एक प्रकार की गर्माहट आ गई है। जदयू छोड़ते हुए कुशवाहा ने स्पष्ट कहा कि सीएम नीतीश कुमार की नीयत ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार का साथ दिया, लेकिन बदले में उन्हें धोखा मिला।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि 2005 की जीत ने नीतीश कुमार को कर्पूरी ठाकुर के विरासत की जिम्मेदारी दी, उन्होंने उस विरासत को आगे बढ़ाने का काम अपने शासनकाल के दौरान काफी अच्छे तरीके से किया – बिहार को खौफनाक मंजर से बाहर निकाला और लोगों के बीच शांति कायम हुई, विकास हुआ। उन्होंने इस कार्य के लिए नीतीश की तारीफ़ की, लेकिन ‘अंत भला तो सब भला’ कहवत का जिक्र करते हुए कहा कि अंत ही बुरा हो गया।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार आज जिस ओर चल पड़े हैं, वो न सिर्फ उनके बल्कि उनकी पार्टी और बिहार की जनता के लिए भी बहुत बुरा है। कुशवाहा ने 2020 विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया, जब वो नीतीश के साथ आ गए थे। उन्होंने कहा कि जनता का आदेश था कि अगर हम बँटे रहे तो बिहार में पुरानी स्थिति लौट आएगी। बकौल कुशवाहा, नीतीश ने उन्हें आवाज़ दी और उन्होंने सब कुछ न्योछावर कर के उनके साथ दिया।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि मैंने अपनी पार्टी RLSP (जिसका जदयू में विलय कर दिया गया था) को ज़िंदा रखने का काम किया, लेकिन ये सरासर झूठ है। मेरे मन में कुछ नहीं था। मेरी राजनीति में जो कुछ भी था, सब मैंने नीतीश कुमार के कहने पर उन्हें दे दिया। लेकिन, बाद में भाजपा गठबंधन से हट कर नया गठबंधन बनाने की बात हुई तो उसे भी हमने पार्टी की मजबूरी समझ कर स्वीकार किया।”

लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया कि गठबंधन बनने के समय उन्होंने ये सुझाव दिया था कि इसका नेतृत्व नीतीश कुमार अपने हाथ में रखें और इसका आश्वासन भी मिले, लेकिन सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद राजद नेताओं द्वारा गठबंधन पर टिप्पणियों की चर्चाएँ होने लगीं और नीतीश कुमार भी कहने लगे कि वो बिहार का भविष्य तेजस्वी यादव को सौंपना चाहते हैं, उन्हें सीएम बनाना चाहते हैं। कुशवाहा ने कहा कि पार्टी के साथी और आम जनता की सलाह पर उन्होंने कर्पूरी ठाकुर की विरासत को बुरे हाथों में मूकदर्शन बन कर देखने की बजाए नया रास्ता निकाला।

जदयू की सदस्यता और MLC पद से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने ‘राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD)’ नाम से नई पार्टी बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ही फ़िलहाल बिहार के असली सीएम हैं और नीतीश बस डिप्टी सीएम बन कर रह गए हैं। इस दौरान ‘नीतीश कुमार चोर है’ के नारे भी लगे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने डाँट कर लोगों को चुप कराया। इस तरह बिहार का ‘जनता परिवार’ फिर बिखर गया।