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अपने घर के अंदर थीं आलिया भट्ट, बगल की इमारत से खींच ली गुपचुप तस्वीरें और कर दिया वायरल: मुंबई पुलिस ने कहा – शिकायत दर्ज कराएँ

आलिया भट्ट (Alia Bhatt) ने घर में गुपचुप तरीके से खींची गई तस्वीरों को मीडिया पोर्टल पर पब्लिश करने को लेकर नाराजगी जताई है। इस मामले को लेकर मुंबई पुलिस ने उनसे शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है। हालाँकि, आलिया ने अभी तक इस कोई फैसला नहीं लिया है। आलिया की पीआर टीम पोर्टल के संपर्क में है। घटना के बाद आलिया भट्ट को बॉलीवुड के कई अभिनेता-अभिनेत्रियों का सपोर्ट मिल रहा है।

आलिया भट्ट ने उनके घर के ड्राइंग रूम में खींची गई तस्वीरों को लेकर मीडिया ग्रुप को फटकार लगाई। उन्होंने पोर्टल के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, “यह क्या मजाक है? मैं अपने घर के लिविंग रूम में आराम से बैठी हुई थी, तब मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है। मैंने पड़ोस की बिल्डिंग पर कैमरे के साथ दो लोगों को देखा। कौन-सी दुनिया है, जहाँ इस तरह की हरकत को सही ठहराया जा सकता है। क्या इसकी इजाजत है? यह किसी की निजता पर हमला है। एक सीमा होती है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन आपने आज सारी हदें पार कर दी हैं।”

आलिया ने अपने इस पोस्ट को पब्लिश करने से पहले मुंबई पुलिस को भी टैग किया। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, आलिया भट्ट द्वारा स्टोरी शेयर किए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने उनसे संपर्क कर तस्वीरें खींचने वाले फोटोग्राफर और इसे पोस्ट करने वाले मीडिया पोर्टल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा। पुलिस ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जाँच की जाएगी। एक्ट्रेस ने पुलिस को बताया है कि उनकी पीआर टीम संबंधित पोर्टल से संपर्क में है।

आलिया भट्ट के पोस्ट के बाद बॉलीवुड के कई अभिनेत्रियों-अभिनेताओं ने आलिया का समर्थन किया। जाह्नवी कपूर ने पोस्ट करके कहा है कि मना करने के बाद भी कई बार लोग जिम में उनकी तस्वीरें और वीडियो लेने की कोशिश करते हैं। जिम जैसा स्थान जिसे आप प्राइवेट स्थान समझते हैं, वहाँ भी लोग चोरी-छुपे फोटो खींचने की कोशिश करते हैं। जाह्नवी के अलावा अनुष्का शर्मा, अर्जुन कपूर, करण जौहर जैसी कई हस्तियों ने भी अपने सोशल मीडिया पर निजता के हनन के बारे में अपना तजुर्बा शेयर किया।

स्वामी अय्यप्पा के भक्त अब भी 41 दिन की दीक्षा रखते हैं, एक्टिविस्ट्स कहाँ हैं? वामपंथी नैरेटिव को ध्वस्त करती है Malikappuram, कहानी श्रद्धा और आस्था की

दक्षिण भारत में मलयालम इंडस्ट्री की फिल्मों के बारे में बात करने पर आपको मोहनलाल की ‘दृश्यम’ (2013) और ‘पुलिमुरुगन’ याद आएगी। जहाँ पहली फिल्म की कई भाषाओं में रीमेक बने, वहीं दूसरी फिल्म ने 150 करोड़ का आँकड़ा मलयालम इंडस्ट्री में पहली बार छुआ। केरल में मम्मूटी, जयराम, सुरेश गोपी और अब फहाद फासिल व दिलकीर सलमान खासे लोकप्रिय हैं। लेकिन, हाल में आई फिल्म ‘मलिकाप्पुरम (Malikappuram)’ ने वो कमाल किया है जो इनमें से कोई भी नहीं कर पाया।

‘मलिकाप्पुरम’ में उन्नी मुकुंदन मुख्य किरदार में हैं, जिन्हें आपने मोहनलाल-जूनियर NTR की तेलुगु फिल्म ‘जनता गैराज’ (2016) में देखा होगा। हालाँकि, इस फिल्म तक वो उससे काफी आगे निकल आए हैं। लेकिन, इस फिल्म की कहानी एक बच्ची के इर्दगिर्द घूमती है। एक बच्ची और उसका एक दोस्त। उसका एक परिवार। सबरीमाला मंदिर में जाकर भगवान अय्यप्पा की पूजा करने की उसकी जिद और भगवान अय्यप्पा में उसकी आस्था।

फिल्म के बारे में बताने या उसकी समीक्षा के नाम पर इतनी अच्छी फिल्म की कहानी बता देना धोखे के समान होगा, इसीलिए इसकी कहानी पर हम उतनी चर्चा नहीं करेंगे। ‘मलिकाप्पुरम’ बताती है कि केरल के लोगों ने भगवान अय्यप्पा के प्रति कितनी श्रद्धा है। उनकी दीक्षा लेने और फिर सबरीमाला मंदिर तक का सफर तय करना लोगों के लिए क्या मायने रखता है। साथ ही ये फिल्म इसके इर्दगिर्द चल रहे प्रोपेगंडा को भी ध्वस्त करता है।

आपको तृप्ति देसाई याद होगी, जिसे मीडिया ने एक्टिविस्ट बता कर प्रचारित किया था और वो भगवान अय्यप्पा की भक्त न होने के बावजूद कैसे सबरीमाला मंदिर में न सिर्फ घुसने की चेष्टा कर रही थी, बल्कि बिना किसी साक्ष्य के मंदिर के खिलाफ दुष्प्रचार कर वहाँ के नियमों को महिला विरोधी साबित करने में तुली थी। इन नास्तिकों को न तो हिन्दू धर्म में रुचि थी, न ही मंदिर में दर्शन से इन्हें कोई लेना-देना था और न इनका उद्देश्य महिला हित का था।

आखिरकार सबरीमाला मंदिर के मामले को घसीट कर सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया और सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 से फैसला दिया कि यहाँ महिलाओं को अनुमति दी जाए। बात महिला-पुरुष की थी ही नहीं। इसके बाद कुछ एक्टिविस्ट्स को यहाँ वामपंथी राज्य सरकार की पुलिस की मदद से घुसाया भी गया। क्या इन एक्टिविस्ट्स ने 41 दिनों का व्रत रखा, दीक्षा ली और अन्य नियमों का पालन किया? या फिर इसे भी सुप्रीम कोर्ट अवैध घोषित कर देगा?

आजकल तृप्ति देसाई कहाँ हैं? क्या उन्हें भगवान अय्यप्पा याद आते हैं? क्या उनके घर में स्वामी अय्यप्पा की तस्वीर है? असल में ‘मलिकाप्पुरम’ इसी तरह के प्रोपेगंडा को ध्वस्त करती है। इस फिल्म की केंद्रीय किरदार एक छोटी सी बच्ची है। उसे सपने में भी भगवान अय्यप्पा नजर आते हैं, घर में भी सभी उनके भक्त हैं। वो अपनी दादी से अय्यप्पा की कथाएँ सुनती हैं। उसे सबरीमाला मंदिर जाने के सारे रूट और जिन नियमों का पालन करना पड़ता है वो सब पता हैं।

एक बच्ची, भगवान अय्यप्पा की सबसे बड़ी भक्त। एक बच्ची, जो पूरी श्रद्धा के साथ सबरीमाला मंदिर जाती है। फिर इस मंदिर को महिला विरोधी कैसे बता दिया गया? ‘मलिकाप्पुरम’ न सिर्फ केरल के लोगों में भगवान अय्यप्पा के प्रति आस्था को दिखाती है, बल्कि ‘God’s Own Country’ की सुंदरता को भी प्रदर्शित करती है। वहाँ के हिन्दू रीति-रिवाजों को बताती है। ये दिखाती है कि ‘मुस्लिम लीग’ या सत्ता में वामपंथी प्रभुत्व भगवान परशुराम की इस भूमि की पहचान नहीं है।

फिल्म के अभिनेता उन्नी मुकुंदन का ये सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में से एक है। जो बच्ची मुख्य किरदार में है, उसने काफी अच्छा अभिनय किया है। हाल ही में हम सबने ऋषभ शेट्टी की कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ को खासा प्यार दिया था। ‘कांतारा’ ने कर्नाटक की वनवासी हिन्दू संस्कृति को दिखाया था। इसी तरह ये फिल्म केरल की हिन्दू संस्कृति को दिखाती है। जैसे ये नैरेटिव फैलाया जाता है कि जनजातीय समाज हिन्दू नहीं है, कल को वामपंथी ये भी कह सकते हैं कि अय्यप्पा के भक्त हिन्दुओं से अलग हैं।

ये कोशिश तो दशकों से होती आ रही हैं। दलितों को हिन्दुओं से अलग बताया जाता है। तभी तो कॉन्ग्रेस की सरकार ने भगवान शिव की पूजा करने वाले लिंगायत समाज को अलग धर्म का दर्जा देने के नाम पर हिन्दुओं को बाँटने की साजिश रची थी। आपको समुद्र मंथन की कथा याद है? देवताओं-दानवों ने मिल कर समुद्र मथा और अंत में जब अमृत निकला तो असुरों को इस तक पहुँचने से रोकने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया।

अय्यप्पा को इन्हीं मोहिनी और शिव का पुत्र माना जाता है। सबरीमाला के भक्त भगवान गणेश की पूजा करते हैं, फिर विष्णु-शिव की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएँ दिखाती देती हैं। उनकी स्तुति होती है। इस फिल्म में इन चीजों को बारीकी से दिखाया गया है। एक सीधी-सादी कहानी, जिसमें भर के इमोशन हैं। ‘मलिकाप्पुरम’ हर एक भारतीय को देखना चाहिए। असम का कोई व्यक्ति सबरीमाला की दीक्षा ले और केरल से एक जत्था कामाख्या मंदिर आए, यही तो भारत है।

कामाख्या मंदिर से याद आया। नीलांचल पर्वत पर स्थित इस शक्तिपीठ के बारे में कहा जाता है कि यहाँ माँ सती की योनि गिरी थी। माँ के माहवारी के दिनों में जो उत्सव होता है, उस दौरान यहाँ पुरुषों की एंट्री नहीं होती। उस अवधि में मंदिर की मुख्य पुजारी भी एक महिला होती है। इससे क्या ये मंदिर पुरुष विरोधी हो गया? सबरीमाला मंदिर में भी बच्चियाँ और बुजुर्ग महिलाएँ दर्शन करती आई हैं। हर स्थल के एक नियम-कानून होते हैं, उसका पालन किया जाना चाहिए।

जब हम विद्यालयों से लेकर शौचालयों तक में इसका पालन कर सकते हैं और हजारों वर्षों से जो मंदिरों में चला आ रहा है, उसे आधुनिकता के नाम पर भंग कर के करोड़ों लोगों की आस्था से खिलवाड़ क्यों करना होता है? Hotstar पर ‘मलिकाप्पुरम’ हिंदी में भी उपलब्ध है। इसे ज़रूर देखिए, खासकर जंगल में उस दृश्य के लिए जब स्वयं भगवान अय्यप्पा बच्चों की रक्षा करते हुए दिखते हैं। स्थानीय थानाध्यक्ष हनीफ भी भक्त है और उसे भी ‘स्वामी’ कह कर बुलाया जाता है।

बिहार-झारखंड के लोगों को ये अच्छे से पता है कि जब गाँवों से जत्था बैद्यनाथ धाम (बाबा धाम) के दर्शन के लिए देवघर को निकलता है तो एक समान भगवा वस्त्र में काँवर लिए होते हैं और एक-दूसरे को ‘बम’ बुलाते हैं। इस दौरान पशु-पक्षी भी ‘बम’ होते हैं। वैसे ही, फिल्म में सबरीमाला के यात्री एक-दूसरे को ‘स्वामी’ कहते हैं। ये जातिगत या किसी प्रकार के भेदभाव को खत्म करता है। ईश्वर का हर भक्त देवघर में ‘बम’ और सबरीमाला में ‘स्वामी’ होता है।

छोटे और नहीं दिखने वाले गुप्तांग से लेकर लड़कियों तक का खतना… 5 देशों के मुस्लिम एक मंच पर करेंगे 12 घंटों तक चर्चा

मलेशियन इंटरनेशनल सर्कुमसीजन कॉन्फ्रेंस का आयोजन 25 और 26 फरवरी 2023 को आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चों एवं बच्चियों के खतना को लेकर चर्चा की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस में पाँच देशों के लोग हिस्सा लेंगे। इसमें छोटे और नहीं दिखने वाले शिश्न के हिस्से की चर्चा प्रमुखता से की जाएगी।

मलेशिया के पुत्राजय शहर के एक होटल में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में पाँच देश हिस्सा लेंगे। कॉन्फ्रेंस की बेवसाइट के अनुसार, सर्कुमसीजन यानी मुस्लिमों में प्रचलित खतना से संबंधित इस कॉन्फ्रेंस में म्यांमार, मलेशिया, जापान, कनाडा, इंडोनेशिया के लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

बेवसाइट के अनुसार, यह कॉनफ्रेंस खतना को लेकर हुई खोज के बारे में चर्चा करना मुख्य मुद्दा है। इस पर महिला खतना पर चर्चा की जाएगी। इस पर चर्चा के लिए डॉक्टर हफातीन फैरोस बिंती तमादुन मलेशिया में महिला खतना को लेकर चर्चा करेंगी।

बता दें कि पुरूषों की अपेक्षा महिला खतना बेहद क्रूर माना जाता है। इसमें योनि के अगले हिस्से के चमड़े को काटकर निकाल दिया जाता है, ताकि मुस्लिम महिलाओं को यौन आनंद की अनुभूति ना हो। भारत में बोहरा समुदाय सहित इस्लामी देशों में यह प्रथा आज भी जारी है, जिसको लेकर दुनिया भर में इसकी आलोचना होती रहती है।

खतना की शिकार मुस्लिम महिलाओं को जीवन भर भयानक और दर्दनाक यातना से गुजरना पड़ता है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर कहा था, ”यौन अंगों को काटना महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ है।” बता दें कि भारत सहित कई देशों में महिला खतना प्रतिबंधित है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें खतना के महत्व पर चर्चा की जाएगी। छोटे और नहीं दिखने वाले पुरुष गुप्तांगों को खतना के जरिए उभारने पर चर्चा की जाएगी। Buried Penis एक प्रकार का डिस्फंक्शन है, जिसके कारण यौन आकांक्षा में कमी या असमर्थता हो जाती है।

250 लोगों ने की घर वापसी, प्रबल प्रताप जूदेव ने गंगाजल से पखारे चरण: कहा- ईसाई मिशनरियों की करतूतों को अनदेखा कर रही कॉन्ग्रेस सरकार

कई हिन्दुओं को अपने मूल धर्म में ला चुके ‘अखिल भारतीय घर वापसी’ प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने एक बार फिर से धर्मांतरित हुए 250 लोगों की घर वापसी करवाई है। ईसाई बन चुके ये सभी लोग 36 अलग-अलग परिवारों से थे। मंगलवार (21 फरवरी, 2023) को आयोजित घर वापसी का यह कार्यक्रम बुढ़ीमाई धाम, चिकनीपाली के इमलीपारा (बागबहार, जशपुर) छत्तीसगढ़ में हुआ। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ का भी आयोजन किया गया।

जानकारी के मुताबिक, प्रबल प्रताप ने घर वापसी करने वाले सभी लोगों के पैरों को गंगाजल से धुला। इस अवसर पर मौजूद धर्म जागरण समन्वय विभाग एवं आर्य समाज से जुड़े लोग भी मौजूद थे। बाद में वैदिक मंत्रो के साथ हुए हवन में घर वापसी करने वाले सभी सदस्यों ने हिस्सा लिया। बाद में सभी ने एक स्वर में हिन्दू देवी देवताओं में आस्था जताते हुए भविष्य में हिन्दू धर्म में ही रहने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रबल प्रताप ने धर्मांतरण की साजिश को राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि मिशनरी हमारी सनातन संस्कृति को खत्म करना चाह रहे हैं। प्रबल प्रताप ने छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार और वहाँ के प्रशासन पर भी मिशनरियों की करतूतों को अनदेखा करने का आरोप लगाया। मौके पर मौजूद अन्य संगठनों ने भी हिन्दू समाज की एकता पर जोर दिया और आपस में मिल-जुल कर रहने का आह्वान किया।

घर-वापसी का यह आयोजन बस्तर संभाग में संत पदयात्रा के दौरान आयोजित हुआ था। यह यात्रा जशपुर से निकल कर रायपुर तक जा रही है। यात्रा के बीच में मिशनरियों से प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में लोगों से संवाद किया जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रबल प्रताप जूदेव इस से पहले भी घर वापसी के कई कार्यक्रम आयोजित करवा चुके हैं। इसी साल जनवरी 2023 में जूदेव ने छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान करीब 1100 ईसाई बने हिन्दुओं की समूहिक घर वापसी करवाई थी। अक्टूबर 2022 में प्रबल प्रताप जूदेव की मौजूदगी में उड़ीसा सुंदरगढ़ जिले में ईसाई बने 173 परिवारों के लगभग 500 लोगों ने हिन्दू धर्म में घर वापसी की थी। प्रबल प्रताप जूदेव ने मार्च 2022 में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक अन्य घर वापसी का कार्यक्रम करवाया था। तब उन्होंने ईसाई बने 1250 लोगों की घर वापसी करवाई थी।

‘बागपत के चाट युद्ध’ की दूसरी बरसी पर लोगों ने ‘योद्धाओं’ को किया नमन: परेशान ‘आइंस्टीन चाचा’ ने बदला लुक, बोले – लड़के-लड़कियों को सेल्फी दें कि चाट बेचें?

नेटिजन्स उत्तर प्रदेश के बागपत में 2 साल पहले हुए चाट युद्ध की बरसी मना रहे हैं। चाट युद्ध के प्रमुख आकर्षण रहे ‘आइंस्टीन चाचा’ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्हें उनके अनोखे बालों के लिए याद किया जाता है। इस युद्ध का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। जिसने भी वीडियो को देखा खुद को हँसने से रोक नहीं सका। कुल मिलाकर बागपत में चाट वालों के बीच हुआ यह युद्ध आज भी लोगों का जमकर मनोरंजन कर रहा है।

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर बैटल ऑफ बागपत (Battle Of Baghpat) ट्रेंड कर रहा है। नेटिजन्स 2 साल पुराने वीडियो को शेयर कर चाट वालों के बीच हुई लड़ाई को याद कर रहे हैं। इस लड़ाई में शामिल लोगों को हल्की चोटें भी आईं थी लेकिन लड़ाई के दृश्य आज भी लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। पत्रकार आस्था कौशिक ने बागपत चाट युद्ध के हीरो ‘आइंस्टीन चाचा’ को लेकर जानकारी दी है कि उन्होंने अपने बाल छोटे करवा लिए हैं।

आस्था ने लिखा, “प्रसिद्ध बागपत चाट युद्ध की आज दूसरी वर्षगाँठ है। बड़ा अपडेट यह है कि सुप्रसिद्ध चाट वाले चाचा ने अब अपना हेयरकट करवा लिया है। उनका कहना है कि रोजाना घटना सुना-सुना कर वो तंग आ गए थे। वो लड़के-लड़कियों को सेल्फ़ी दें या चाट बेचें। इसीलिए उन्होंने 15 दिन पहले ही हेयरकट करवा लिया।

विवेक शुक्ला नाम के यूजर ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि न भूले हैं न भूलेंगे। 22 फरवरी, 2021 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्वतंत्र भारत का प्रथम चाट विद्रोह हुआ था। इस भीषण युद्ध में शामिल समस्त पराक्रमी योद्धाओं को नमन।

प्रेम मोहंती नाम के यूजर ने लिखा, “बागपत की प्रसिद्ध लड़ाई की दूसरी वर्षगांठ। आइंस्टीन चाचा की कहानी शुरू हुई।

पत्रकार वर्षा सिंह ने लिखा, “22 फरवरी सन् 2021 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में हुए ‘चाट विद्रोह’ को आज 2 साल पूरे हो गए। इस युद्ध के योद्धाओं की तलवार-लट्ठ चलाने की कला आज भी जहन में ताजा है।

दानिश चौधरी नाम के यूजर ने लिखा, “बागपत का प्रसिद्ध चाट युद्ध आज के दिन ही लड़ा गया था। बागपत चाट युद्ध की आज दूसरी बरसी पर योद्धाओं को नमन।”

बता दें 22 फरवरी, 2021 को बागपत में ग्राहक बुलाने को लेकर 2 चाट वालों के बीच जमकर लाठी डंडे चले थे। लड़ाई में 5-6 लोग शामिल थे और कई मिनटों तक दोनों तरफ से एक दूसरे को जमकर मारा-पीटा गया। सड़क पर लोट-लोटकर लाठियाँ भाँजी गईं। इस लड़ाई के मुख्य आकर्षण अपने अनोखे बालों के लिए मशहूर ‘आइंस्टीन चाचा’ थे। उनका वास्तविक नाम हरेंद्र सिंह है। जानकारी मिल रही है कि सेल्फी से परेशान होकर अब उन्होंने अपने बाल कटवा लिए हैं।

‘वामपंथी कुपढ़ हैं और ये वाले अनपढ़ हैं’: रामकथा में कवि कुमार विश्वास ने RSS पर की टिप्पणी, कहा – भाई पढ़ भी लो

मध्य प्रदेश के उज्जैन में विक्रमोत्सव 2023 कार्यक्रम में कवि और लेखक कुमार विश्वास मंगलवार (21 फरवरी, 2023) को रामकथा सुनाने पहुँचे। इस दौरान उन्होंने वामपंथियों को कुपढ़ और आरएसएस से जुड़े लोगों को अनपढ़ कह दिया। इस मौके पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव और सांसद अनिल फिरोजिया भी मौजूद थे।

रामकथा सुनाने के दौरान वह एक वाकया बताते हैं, “4-5 साल पहले एक दिन बजट आने वाला था। मैं अपने घर में स्टूडियो पर खड़ा था। कुछ रिकॉर्डिंग कर रहा था। तभी एक बच्चे ने मोबाइल ऑन कर दिया। वो बच्चा हमारे साथ काम करता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में भी काम करता है। वो मुझसे बोला कि भैया बजट आ रहा है, कैसा आना चाहिए। मैंने कहा- तुमने तो रामराज्य की सरकार बनाई है तो रामराज्य का बजट आना चाहिए। उसने कहा, रामराज्य में कहाँ बजट होता था। मैंने कहा, समस्या तुम्हारी यही है कि वामपंथी तो कुपढ़ हैं और तुम अनपढ़ हो। इस देश में दो ही लोगों का झगड़ा चल रहा है। एक वामपंथी हैं, वो कुपढ़ हैं, उन्होंने पढ़ा सब है, लेकिन सब गलत पढ़ा है। और एक ये वाले हैं, इन्होंने पढ़ा ही नहीं है। ये सिर्फ बोलते हैं- हमारे वेदों में… देखे नहीं हैं कि कैसे हैं। भाई पढ़ भी लो। तो बोले रामराज्य में किस बात का बजट।” कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

सोशल मीडिया पर कुमार विश्वास का विवादित बयान वायरल होने के बाद बवाल हो गया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया ने अपने ट्विटर पर कुमार विश्वास को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उज्जैन में कथा करने आए हो कथा करो प्रमाण पत्र मत बाँटो। उन्होंने लिखा, “तुम्हारा स्वागत करने आना पड़ेगा। उज्जैन में कथा करने आए हो कथा करो। प्रमाण पत्र मत बाँटो श्रीमान। कथा करने के लिए बुलाया गया है, वह छोड़ बाकी सब करेंगे। अधूरे पढ़े-लिखे लोग, आपसे तो हमारे कथित अनपढ़ कई गुना ज्यादा अच्छे हैं।” फिरउ न्होंने कुमार विश्वास को टैग करते हुए आगे लिखा, “अधजल गगरी छलकत जाए। मुहावरे का अर्थ है कम गुणवान व ज्ञानी व्यक्ति का बहुत अधिक गुणवान और ज्ञानी होने का दिखावा करना अर्थात् अल्पज्ञानी महा अज्ञानी।”

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया का ट्वीट

इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए लिखा, “माननीय शिवराज सिंह चौहान जी कुमार विश्वास जैसे लोग जो अपने तय एजेंडे एवं तुच्छ मानसिकता के वशीभूत हो आरएसएस जैसे राष्ट्रवादी संगठन पर टिप्पणी करते हैं। ऐसे लोगों पर प्रदेश के शासकीय कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रतिबंध लगना चाहिए।”

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया का ट्वीट

वहीं, इस मामले को लेकर ‘समग्र हिंदू समाज’ ने मोर्चा खोल दिया है। विक्रमादित्य शोधपीठ संस्थान निदेशक को पत्र लिखकर कुमार विश्वास को माफी माँगने को कहा है। समग्र हिंदू समाज के जसविंदर सिंह का कहना है कि आरएसएस ने राम मंदिर निर्माण में महती भूमिका निभाई है। देशसेवा में आरएसएस सदैव अग्रणी रहा है।

खुद गलत टर्मिनल पर पहुँच गया ‘ऊर्जावान और युवा’ पत्रकार, वीडियो बना कर PM मोदी पर थोपा दोष: हवाई यात्रा के दौरान ऐसे चेक करें अपना टर्मिनल

खद को युवा और ऊर्जावान पत्रकार कहने वाले उज्जवल त्रिवेदी नाम के एक व्यक्ति ने बुधवार (23 फरवरी 2023) को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अनजाने में गलत टर्मिनल पर पहुँच गए। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और भारत की विकास कहानी पर सवाल उठाया।

त्रिवेदी ने कहा कि वह मुंबई से बेंगलुरु के लिए सुबह की फ्लाइट ले रहे थे। और वह ‘मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ पहुँचे, क्योंकि उनके ‘बोर्डिंग पास’ में ऐसा कहा गया था। हालाँकि, वहाँ पहुँचने पर उन्हें CISF द्वारा सूचित किया गया कि वह गलत टर्मिनल पर पहुँच गए हैं। उनकी उड़ान घरेलू टर्मिनल से रवाना होगी।

इतना सुनने के बाद त्रिवेदी चकित हो जाते हैं और बहुत सारी बाधाओं को पार करने के बाद वे डोमेस्टिक टर्मिनल तक पहुँचने में सफल हो जाते हैं, क्योंकि वे ‘युवा और ऊर्जावान’ हैं। हालाँकि, उन्होंने पीएम मोदी और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सलाह भी दे डाली।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को अपने संवाद में साफ होना चाहिए, खासकर जब भारत जी-20 जैसे मंच की आजकल मेजबानी कर रहा हो। त्रिवेदी ने कहा कि उन्होंने कहा कि उनके टिकट पर साफ लिखा था कि उनकी उड़ान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से थी, जबकि वास्तव में वह घरेलू टर्मिनल से उड़ान भरने वाली थी। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसे उन्होंने अपना ‘बोर्डिंग पास’ बताया।

हालाँकि, यदि कोई ठीक से नोटिस करता है तो उपरोक्त एक यात्रा कार्यक्रम है, जो उसके टिकटों का विवरण है। पीएनआर की मदद से अकासा एयर की वेबसाइट से प्राप्त उनके टिकट का पूरा स्क्रीनशॉट यहाँ दिया गया है, जिसे उपरोक्त स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है।

जैसा कि उपरोक्त स्क्रीनशॉट में कोई भी देख सकता है कि उनके टिकट में दिया गया है कि उनकी उड़ान मुंबई के T1 से है, जोकि मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का घरेलू टर्मिनल है। हवाई अड्डे पर टर्मिनल 2 का उपयोग अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए किया जाता है। हालाँकि, कुछ घरेलू उड़ानें वहाँ से भी संचालित होती हैं।

मुंबई में केवल एक हवाई अड्डा है, जो कमर्शियल उड़ानें संचालित करता है और वह है छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा। हालाँकि, इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए टर्मिनल टी1 और टी2 हैं। यह आमतौर पर सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के मामले में है। उदाहरण के लिए, अहमदाबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। वहाँ के परिसर में एक घरेलू टर्मिनल और एक अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनल है। दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के तीन टर्मिनल हैं- T1, T2 और T3।

कई टर्मिनल वाले ऐसे हवाई अड्डों में विभिन्न टर्मिनलों से विभिन्न उड़ानें संचालित होती हैं। जब कोई कई टर्मिनल वाले हवाई अड्डे के लिए टिकट बुक करता है तो बोर्डिंग पास पर टर्मिनल नंबर दिया गया रहता है। वेब चेक-इन करके और उसकी एक प्रति प्राप्त करके या हवाई अड्डे पर चेक-इन काउंटर पर जाकर बोर्डिंग पास प्राप्त किया जा सकता है। प्रस्थान टर्मिनल नंबर विभिन्न उड़ान बुकिंग साइटों और एयरलाइन की वेबसाइट/ऐप पर भी प्रदर्शित होता है।

उज्जवल त्रिवेदी ने गलती से मुंबई हवाई अड्डे पर दो अलग-अलग टर्मिनलों को दो अलग-अलग हवाई अड्डा समझ लिया। वास्तव में वे एक ही हवाई अड्डा छत्रपति शिवाजी महाराज मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा में स्थित अलग-अलग टर्मिनल हैं। जब एक हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें होती हैं तो इसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि यहाँ से सिर्फ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ही जाती हैं।

अलग-अलग टर्मिनल विभिन्न एयरलाइनों और उड़ानों के लिए भले ही अलग-अलग ग्राहक सेवा प्रदान करते हैं, लेकिन उनका ऑपरेशन केंद्रीकृत रहता है। सभी उड़ानें अभी भी एक ही रनवे का उपयोग करती हैं, एक ही एटीसी टावर द्वारा एक ही रडार और अन्य सेवाओं का उपयोग करके नियंत्रित किया जाता है। अधिकांश हवाई अड्डों के अलग-अलग कार्गो टर्मिनल भी होते हैं, लेकिन वे भी उसी हवाई अड्डे के हिस्से होते हैं।

बोर्डिंग पास कुछ ऐसा दिखता है। जैसा कि कोई भी देख सकता है, इसमें उड़ान के डिपारचर का डिटेल है। इसमें टर्मिनल की भी जानकारी है। उपरोक्त मामले में फ्लाइट ने दिल्ली में इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 (T1) से उड़ान भरी और अहमदाबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल 1 (T1) पर पहुँची। हालांकि, ये दोनों टर्मिनल ‘घरेलू’ टर्मिनल हैं, अर्थात् आमतौर पर घरेलू उड़ानें वहाँ से उड़ान भरती हैं। इसके बावजूद वे दोनों एक ही अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का हिस्सा हैं।

टिकट के साथ-साथ बोर्डिंग पास में भी उन टर्मिनलों का स्पष्ट विवरण है, जिनसे यात्री को उड़ान भरनी है और जहाँ पहुँचना है। यह मानक अंतर्राष्ट्रीय अभ्यास और यह सब यात्री को चेक करना है। पीएम मोदी या नागरिक उड्डयन मंत्रालय की यह नौकरी नहीं है कि शिक्षित, युवा और ऊर्जावान पत्रकारों को यह देखने के लिए है कि उनके टिकट पर उनके टर्मिनल का विवरण कहाँ खोजना है।

दिल्ली जैसे हवाई अड्डों पर दो टर्मिनलों को जोड़ने वाली एक शटल सेवा चलती है। दिल्ली हवाई अड्डे का टर्मिनल 2 और टर्मिनल 3 भी इस तरह से जुड़े हुए हैं कि कोई भी वॉक करके पहुँच सकता है। इसी तरह अहमदाबाद हवाई अड्डे पर दो टर्मिनलों के बीच वॉकवे कनेक्टिविटी भी है।

खनन इंस्पेक्टर को टीम सहित ज़िंदा जलाने की कोशिश: बिहार में बेखौफ हैं अपराधी, जब्त किए गए ट्रकों को भी ले गए

बिहार के सारण जिले में खनन इंस्पेक्टर व उनकी टीम को जिंदा जलाने की कोशिश हुई। रेत माफिया खनन इंस्पेक्टर अंजनी कुमार को उनकी गाड़ी समेत जलाने वाले थे। टीम समेतअंजनी कुमार को मौके से भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी। कानून और प्रशासन से बेखौफ तस्कर खनन विभाग द्वारा जब्त किया गया बालू लदा ट्रक लेकर चले गए। घटना सोमवार (20 फरवरी, 2023) की बताई जा रही है।

मामला सारण जिले के सोनपुर थाना इलाके का है। ‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार की शाम सात बजे खनन इंस्पेक्टर अंजनी शिवबचन चौक पर अवैध और क्षमता से अधिक बालू लदे वाहनों की जाँच कर रहे थे। इसी दौरान ओवरलोडेड बालू लदे ट्रक को रोका गया। बिना चालान बालू लदे ट्रक को जब्त कर स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। खनन विभाग के गार्ड और चालक जब्त किए गए ट्रक को रास्ते से यार्ड में ले जाने लगे।

कार्रवाई के दौरान तस्करों ने अपने साथियों को मौके पर बुला लिया। बोलेरो पर सवार पाँच गुंडे मौके पर पहुँचे और उन्होंने खनन विभाग के गार्ड और चालक की पिटाई शुरू कर दी। खनन इंस्पेक्टर अंजनी ने बीच-बचाव की कोशिश की तो उनके साथ भी मारपीट की गई। इतना ही नहीं, हमलावरों ने बोलेरो से गैलन में रखा पेट्रोल निकाला और विभाग की गाड़ी, इंस्पेक्टर, गार्ड और चालक पर उड़ेल दिया। इस बीच मौके पर स्थानीय लोग जुटने लगे।

बेखौफ अपराधी माचिस की तीली जलाकर गाड़ी पर फेंकने वाले थे लेकिन लोगों की मौजूदगी की वजह से वे कामयाब नहीं हो सके। भीड़ का फायदा उठाकर अंजनी कुमार व उनकी टीम ने भागकर अपनी जान बचाई। इधर मौके पर मौजूद अपराधी फिल्मी स्टाइल में जब्त किए गए वाहन को लेकर चले गए। खनन इंस्पेक्टर अंजनी ने सोनपुर थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। पुलिस की टीम ट्रक के नंबर के आधार पर जाँच कर रही है। अपराधी पुलिस गिरफ्त से फरार हैं।

AAP की शैली ओबेरॉय बनीं MCD की मेयर, रही हैं DU की अस्सिस्टेंट प्रोफेसर: 3 बैठकें विफल होने के बाद आखिरकार हुआ मतदान, BJP की रेखा गुप्ता को 116 वोट

दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर पद के चुनाव में आम आदमी पार्टी की शैली ओबेरॉय ने बाजी मार ली है। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा की रेखा गुप्ता को हराया। शैली को कुल 150 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 116 वोट प्राप्त हुए। CBI जाँच का सामना कर रहे दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने इस परिणाम को गुंडों की हार और जनता की जीत बताया है। यह परिणाम बुधवार (22 फरवरी, 2023) को घोषित हुए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस ने इस चुनाव में वोटिंग का बहिष्कार किया था। हालाँकि, उनकी शीतल नाम की एक पार्षद ने मतदान में हिस्सा लिया। 39 वर्षीया शैली ओबेरॉय PHD डिग्री धारक हैं जो पटेल नगर विधानसभा के वार्ड नंबर 86 से पार्षद हैं। यह पीएचडी उन्होंने इंदिरा गाँधी मुक्त विश्वविद्यालय (IGNU) से दर्शनशास्त्र में की है। पार्षद चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा की दीपाली कपूर पर महज 269 वोटों से जीत दर्ज की थी। आम आदमी पार्टी से जुड़ने से पहले शैली दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर भी काम कर चुकीं हैं।

शैली ओबेरॉय की जीत पर आम आदमी पार्टी ने ख़ुशी जाहिर की है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे जनता की जीत और गुंडों की हार बताया है।

गौरतलब है कि साल 2022 में दिल्ली में हुए MCD चुनावों में आम आदमी पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की थीं। तब कुल 250 सीटों में AAP ने अकेले 134 वार्डों में जीत दर्ज की थी। भाजपा को 104 सीटों से संतोष करना पड़ा था जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी 9 वार्डों में जीत दर्ज कर पाई थी।

AAP candidate shaili Oberoy elected as new Mayor of Delhi after victory over BJP Candidate

‘अशोक गहलोत की खाल उतार कर जूते बनाऊँगा, प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा’: ‘भीम सेना’ के अध्यक्ष नवाब ने कहे अपशब्द, खून की नदियाँ बहाने की धमकी

राजस्‍थान के बाड़मेर से भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर (Bhim Sena Chief Nawab Satpal Tanwar) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के खिलाफ अपशब्‍द बोल रहा है। सतपाल तंवर ने कहा, “राजस्थान में अशोक गहलोत की खाल उतारकर उसका जूता बनाऊँगा और प्रियंका गाँधी के सिर में मारूँगा।”

यह वीडियो बाड़मेर में हुए एक कार्यक्रम है। ‘Ambedkarite People’s Voice’ नाम के फेसबुक पेज पर सोमवार (20 फरवरी, 2023) को नवाब सतपाल तंवर का पूरा वीडियो शेयर किया गया है। इसमें वह लोगों को सम्‍बोधित करते हुए कहता है, “राजस्‍थान में अगर एक भी दलित भाई-बहन का पसीना भी गिरा, तो राजस्‍थान में खून की नदियाँ बहा दूँगा। हम पूरा देश हिलाना जानते हैं। कॉन्ग्रेस सरकार किसी वहम में ना रहें, वरना सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी को इटली भेज देंगे।”

तंवर आगे कहता है, “भाजपा वालों को पाकिस्तान से बहुत प्यार है, उन्हें सीधा पाकिस्‍तान भेज देंगे। कहने का मतलब साफ है। ये भारत देश हमारा है। ये राजस्‍थान प्रदेश हमारा है। यहाँ पर इटली वाले क्‍यों राज करेंगे? भाजपा और कॉन्ग्रेस दोनों ही आरएसएस (RSS) की पैदाइश है। एक की जगह इटली में और दूसरे की पाकिस्‍तान में है। राजस्‍थान में सिर्फ दलित राज करेगा। मेघवाल राज करेगा। राजस्थान में चमार राज करेगा, वाल्मीकि राज करेगा। हम राजस्‍थान और देश को बँटने नहीं देंगे। हम यहाँ के मूल निवासी हैं। गुलामी की जिंदगी हमें बर्दाश्‍त नहीं है। कान खोलकर सुन ले अशोक गहलोत, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी। मैं राजस्‍थान में अशोक गहलोत की खाल उतारने आया हूँ। अशोक गहलोत की खाल उतारकर उसका जूता बनाऊँगा और उसे प्रियंका गाँधी के सिर पर मारूँगा।”

भीम सेना चीफ ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, “अब वो दलित नहीं रहा, जो अत्याचार को सहन करेगा। जो दलितों पर अत्याचार करेगा चूर-चूर हो जाएगा। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अब दलित कलम भी चलाएगा, अब दलित गाड़ी भी चलाएगा। अब दलित मूँछ भी रखेगा, कोट-पेंट पहनेगा और साफ कपड़े भी पहनेगा। अब किसी मनुवादी में हिम्मत है तो भिड़ के दिखा दे। दलितों का शोषण करने वाले मनुवादियों का अब शोषण होगा।”

इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अंकित तिवारी नाम के यूजर ने लिखा, “दलित नेता सतपाल तंवर राजस्थान के मुख्यमंत्री को खाल उतारने की धमकी दे रहा है। राजस्थान की पुलिस ऐसे असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई करे, ये अपराध अक्षम्य है।”

‘नूपुर शर्मा को पेश करो, उस नचनिया से मुजरा कराऊँगा’

गौरतलब है कि सतपाल ने 8 जून 2022 को नूपुर शर्मा की जीभ काटकर लाने वाले को एक करोड़ रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी। इससे पहले उसने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता पर ईश​निंदा का आरोप लगाते हुए नूपुर शर्मा से सबके सामने ‘मुजरा करवाने’ का आपत्तिजनक एवं स्त्री-विरोधी बयान दिया था। तंवर ने अपने बयान में कहा था, “नूपुर शर्मा ने नबी की ईशनिंदा की है। उसने देश में रह रहे करोड़ों मुस्लिमों को आहत किया है। वह माफी के लायक नहीं, फाँसी के लायक है। वह उसे उसके सामने मुजरा करवाएगा।”