Home Blog Page 2013

दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को जब्त करेगी केंद्र सरकार, भड़के AAP विधायक अमानतुल्लाह ने कहा – नहीं होने देंगे कब्ज़ा: विहिप पहुँची थी HC

केंद्र सरकार ने दिल्ली वक्फ बोर्ड (Delhi Waqf Board) से जुड़ी 123 संपत्तियों को अपने अधिकार में लेने का ऐलान किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड की इन संपत्तियों में मस्जिद, कब्रिस्तान और दरगाह शामिल हैं। केंद्र के इस फैसले पर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने कहा है कि वह सरकार को इन संपत्तियों पर कब्जा नहीं करने देंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वक्फ बोर्ड की यह संपत्तियाँ केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के कब्जे में रहेंगी। इस मामले में, उप भूमि और विकास अधिकारी ने 8 फरवरी, 2023 को वक्फ बोर्ड को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को सभी मामलों से ‘मुक्त’ करने के बारे में कहा गया है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति में इस कब्जे को लेकर आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय ने कहा है कि रिटायर्ड जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में गैर-अधिसूचित वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर कहा गया है कि उसे दिल्ली वक्फ बोर्ड से कोई प्रतिनिधित्व या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। भूमि एवं विकास कार्यालय के पत्र के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने इस समिति का गठन किया था।

अमानतुल्लाह खान ने किया विरोध…

दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को जब्त करने को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक और बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) ने कहा है कि वह संपत्तियों पर कब्जा नहीं होने देंगे। अमानतुल्लाह ने ट्वीट कर कहा है, “अदालत में हमने 123 वक्फ संपत्ति पर पहले ही आवाज उठाई है। उच्च न्यायालय में हमारी रिट याचिका संख्या 1961/2022 लंबित है। कुछ लोगों द्वारा इस बारे में झूठ फैलाया जा रहा है। इसका सबूत आप सबके सामने है। हम वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होने देंगे।”

अमानतुल्लाह खान ने शुक्रवार (18 फरवरी 2023) को केंद्रीय मंत्रालय के उप भूमि और विकास अधिकारी को दिए जवाब में कहा है कि दो सदस्यीय समिति के गठन के खिलाफ दिल्ली वक्फ बोर्ड ने जनवरी 2022 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मुस्लिम इन 123 संपत्तियों का उपयोग कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड की तरफ से नियुक्त प्रबंध समिति या मुतवल्ली इन सभी संपत्तियों की देखरेख करते हैं।

बता दें कि ये सभी संपत्तियाँ कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान दिल्ली वक्फ बोर्ड को दे दी गईं थीं। इन संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को देने को लेकर ‘विश्व हिंदू परिषद’ ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अगस्त 2014 में हाई कोर्ट ने आदेश का पालन करते हुए मंत्रालय ने हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस एसपी गर्ग की अध्यक्षता में दो सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने ही दिल्ली वक्फ बोर्ड के सभी हित धारकों और प्रभावितों के पक्ष को सुनते हुए रिपोर्ट जारी की है।

‘3 दरवाजे तोड़ घर में घुस गई झारखंड पुलिस, पीट-पीट कर सिर फोड़ डाला’: पलामू के पत्रकार कमलेश सिंह ने बयाँ किया दर्द, महाशिवरात्रि से पहले हुई थी हिंसा

जहाँ एक तरफ पलामू में महाशिवरात्रि से पहले मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया, जिसके बाद वहाँ की पुलिस पर हिन्दू समाज के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ अब झारखंड पुलिस पर एक पत्रकार के साथ बर्बरता करने का आरोप लगा है। आरोप है कि झारखंड पुलिस ने ‘पलामू TV’ और ‘जोहार झारखंड’ नामक मीडिया संस्थानों के लिए काम करने वाले पत्रकार कमलेश कुमार सिंह को घसीट-घसीट कर मारा।

बताया जा रहा है कि झारखंड पुलिस की पिटाई से कमलेश कुमार सिंह का सिर फूट गया है। जब उनके घर की महिलाएँ पुलिस के सामने दहाड़ मार कर रोने लगीं और मिन्नतें करने लगीं, तो उन्हें लहूलुहान अवस्था में छोड़ कर पुलिस वाले वहाँ से चले गए। पीड़ित पत्रकार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए आपबीती सुनाई है। जहाँ ‘जोहार झारखंड’ एक अख़बार (प्रिंट मीडिया संस्थान) है, वहीँ ‘पलामू टीवी’ एक यूट्यूब चैनल है। कमलेश पिछले 6-7 महीने से पत्रकारिता कर रहे हैं, यानी इस क्षेत्र में उनकी शुरुआत ही है और उनके साथ ये हादसा हो गया।

उन्होंने जानकारी दी कि पलामू में संघर्ष के बाद धारा-144 लगाई गई और लोग इधर-उधर छिपने लगे, तो इस दौरान वो भी अपने घर चले गए। बकौल कमलेश कुमार सिंह, उन्होंने अपनी आईडी वगैरह घर में रख दी और बाहर निकले तो पुलिस वाले उन्हें खदेड़ना लगे। उनका कहना है कि अब वो घर में छिपे हुए थे, उस समय पुलिस-प्रशासन उनके घर में घुस गया और उनकी पिटाई की गई। साथ ही उनके साथ दो-तीन लोग थे, उनकी भी पिटाई की गई।

पांकी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंद्रपुर के रहने वाले कमलेश कुमार सिंह ने ऑपइंडिया से बताया, “पुलिस ने मुझे इतना पीटा कि मैं उन्हें बता ही नहीं सका कि मैं पत्रकार हूँ। उस समय माइक या आईडी कार्ड मेरे पास नहीं थे। जब महिलाएँ रोने लगीं तो मुझे छोड़ दिया गया। पुलिस लोगों को खदेड़ते हुए 2 किलोमीटर से भी आगे बढ़ गई। पुलिस वाले आवेश में थे और जो बीच में आए उसे पीट रहे थे। इतने डंडे मुझे पड़े हैं कि मैं बता नहीं सकता।”

उन्होंने बताया कि इस पिटाई में उनका सिर भी फूट गया था, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए उन्हें डाल्टनगंज तक जाना पड़ा। कमलेश सिंह ने बताया कि दोनों तरफ से पत्थर चल रहे थे, उस दौरान भी उन्हें चोटें आईं। उसके बाद पुलिस ने उन्हें पीटा। उन्होंने बताया कि उनके साथ गाँव के ही पड़ोसी थे। उन्होंने कहा कि अगर उनका सिर नहीं फटता तो पुलिस उन्हें नहीं छोड़ती और साथ ले जाती। उन्होंने ‘जोहार झारखंड’ के संपादक को इसकी सूचना दी, लेकिन कॉल कट गया।

क्या एक पत्रकार के साथ इस तरह की व्यवहार के संबंध में वो शिकायत करेंगे? इस सवाल के जवाब में पत्रकार ने कहा कि यहाँ अभी इंटरनेट नहीं चल रहा है, ऐसे में वो एक ट्वीट तक नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन्हें पीटने के लिए 3 दरवाजे तोड़ डाले, छतों पर चढ़-चढ़ कर लोगों को निकाला गया और पीटा गया। कमलेश ने बताया कि उस समय ऐसा डर बैठ गया था कि उन्होंने मौके पर घायल अवस्था में अपनी कोई तस्वीर नहीं ली, लेकिन इंटरनेट बंद होने के कारण वो अपलोड नहीं कर सके।

पलामू में महाशिवरात्रि से पहले हुई थी हिंसा, मुस्लिम भीड़ को ‘तोरण द्वार’ से दिक्कत

झारखंड के पलामू में इसी माह 14 फरवरी को हुई हिंसा में पुलिस को महबूब खान नाम के आरोपित की तलाश है। बताया जा रहा है कि हमले की शुरुआत में तोरण लगा रहे हिन्दुओं पर हमले की शुरुआत उसी ने की थी। वहीं पलामू में जिस महाशिवरात्रि को हिन्दू समुदाय धूमधाम से मनाना चाहता था, वो अब बंदूकों के साये में धारा-144 के अंतर्गत चल रही है। हालात तनावपूर्ण, लेकिन सूनसान और प्रशासन के नियंत्रण में हैं। अब तक 13 गिरफ्तारियों की आधिकारिक पुष्टि हुई है।

एक दिन पहले ऑपइंडिया से बात करते हुए घटना के चश्मदीद होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने पहला हमला तोरण द्वार का विरोध कर रहे मुस्लिमों की तरफ से होने की जानकारी दी थी। तब नाम न उजागर करने की शर्त पर उन्होंने कहा था कि तोरण द्वारा का विरोध करने वाले मोबाइल दुकानदार कलीम अपने साथी महबूब के साथ 50-60 लोगों को बुला कर अचानक ही हमला कर दिया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच पथराव हुआ था। अब पुलिस उसी महबूब खान की तलाश में है।

‘दिवालिया हो गया है पाकिस्तान’: इस्लामी मुल्क के रक्षा मंत्री का ऐलान, कहा – 1500 एकड़ का गोल्फ क्लब बेच कर चुका सकते हैं 25% कर्ज

पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट से जुझ रहा है। उस पर कंगाल होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कह दिया कि उनका मुल्क दिवालिया हो चुका है, वह एक दिवालिया देश के रहने वाले हैं। उन्होंने यह बयान शनिवार (18 फरवरी, 2023) को दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के सियालकोट में एक प्राइवेट कॉलेज के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा, “आपने सुना होगा कि पाकिस्तान डिफ़ॉल्ट या दिवालिया होने वाला है। एक मेल्टडाउन होगा, लेकिन यह पहले ही दिवालिया हो चुका है। हम सब दिवालिया देश में रह रहे हैं।”

ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान की समस्याओं का हल देश में ही है। लेकिन पाकिस्तान आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की ओर देख रहा है। वह इसमें कोई मदद नहीं कर सकता। उन्होंने कहा है कि देश 1500 एकड़ सरकारी जमीन पर गोल्फ क्लब बनाए गए। अब अगर पाकिस्तान अपने दो गोल्फ क्लब को भी बेच देता है तो एक चौथाई कर्ज उतर जाएगा।

इमरान खान सरकार पर आरोप मढ़ते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान के संविधान को बार-बार नज़रअन्दाज़ किया गया है। डेढ़ साल पहले आतंकवादियों को देश में बसने दिया गया और खतरनाक खेल खेले गए। वहीं, आलोचकों को देश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। 

बता दें कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की स्थिति में है। लगातार गिरावट के बाद पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 300 करोड़ डॉलर ही बचा हुआ है। माना जा रहा है कि यदि स्थितियाँ ऐसी ही रहीं तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार आगामी 3 हफ़्तों में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान की आखिरी उम्मीद IMF (विश्व मुद्रा कोष) पर टिकी हुई है। यदि समय रहते IMF ने पाकिस्तान को सहायता नहीं दी तो पाकिस्तान दिवालिया हो सकता है।

3 बार दिवालिया हो चुका है पाकिस्तान

गौरतलब है कि पाकिस्तान अब तक कुल 3 बार दिवालिया हो चुका है। पाकिस्तान पहली बार दिवालिया साल 1971 में हुआ था। तब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी। इसके बाद पाकिस्तान को मजबूरन खुद को दिवालिया घोषित करना पड़ा था। यही नहीं, साल 1998 में, परमाणु परीक्षण करने के बाद पाकिस्तान फिर से दिवालिया हो गया था। उस समय पाकिस्तान पर कई तरह के प्रतिबंध लगे थे। इससे उसे विदेशी सहायता मिलना बंद हो गई थी।

वहीं, साल 2002 में एक बार फिर पाकिस्तान अपने नेताओं की गलतियों यानी राजनीतिक और आर्थिक हालतों के चलते दिवालिया हुआ था।

‘महमूद ने नापाक कमीनों को मार डाला’… 50000+ हिन्दुओं का नरसंहार, स्त्रियों का जौहर: महाशिवरात्रि पर याद कीजिए सोमनाथ विध्वंस, हमें पढ़ाया – गजनी धन लूटने आया था

शिवरात्रि पर प्रत्येक हिन्दू सोमनाथ-विध्वंस को याद करे। सोमनाथ हिन्दुओं के लिए देवालय ही नहीं, अपितु स्वयंबोध एवं शत्रुबोध का प्रमुख स्थल भी है। गज़नी का महमूद, हिन्दुओं से नहीं बल्कि हिन्दुओं के देव, महादेव से युद्ध करने निकला था। उसने सोमनाथ को खंडित किया और मंदिर के शिवलिंग को गजनी की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिया, ताकि प्रत्येक मुसलमान शिवलिंग पर पैर रखकर मस्जिद में प्रवेश करे।

आश्चर्य है कि महमूद की मजहबी मानसिकता को जानते हुए भी हमारे देश के मक्कार इतिहासकारों ने हमें पढ़ाया कि वह तो केवल धन लूटने आया था। सोमनाथ की रक्षा में पचास हजार से अधिक हिन्दू पुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति दी और जगह-जगह हिन्दू स्त्रियों ने जौहर किए। हिन्दू समाज अपने प्राणों का मूल्य जानता था। वह धन के लिए कभी इतना लालची नहीं रहा कि अपने प्राण त्याग दे। इसलिए, धन के लिए स्त्रियाँ अपने बच्चों सहित स्वयं को अग्नि में समर्पित कर रही थी – ऐसा विचार हास्यास्पद ही नहीं अपितु मूर्खतापूर्ण भी है।

महमूद के इतिहासकार अल-उतबी ने सोमनाथ विध्वंस पर लिखा है, “महमूद ने मंदिरों में मूर्तियों को तोड़कर इस्लाम की स्थापना की। नापाक कमीनो (हिन्दुओं) को मार डाला, मूर्ति-पूजकों को तबाह किया और मुस्लिमों को गौरवान्वित किया।”2  महमूद की फ़ौज का एक मात्र मकसद हिन्दू धर्म को समाप्त करना था। इसके लिए देवालयों का विध्वंस, पुरुषों की हत्या, स्त्रियों का बलात्कार एवं कमजोर हिन्दुओं का जबरन धर्मांतरण – ये उसके प्रमुख हथियार थे।

गज़नी के पहले कासिम ने जिस प्रकार से राजा दाहिर की हत्या के बाद सिंध की हिन्दू महिलाओं को निर्वस्त्र कर भोजन एवं मदिरा परोसने के लिए बाध्य किया और दाहिर की पुत्रियों को ख़लीफ़ा हज्जाज की भोग-दासी बनाने के लिए मजबूर किया, वह हिन्दू समाज के लिए इस्लामी मानसिकता का पहला परिचय था। हिन्दू समाज ने उस घटना को हल्के में लिया, नतीजतन हिन्दुओं को अपनी आँखों के सामने सोमनाथ को खंडित होते देखना पड़ा।

लेकिन, सोमनाथ-विध्वंस का एक सकारात्मक असर यह हुआ कि भारतीय समझ गए कि शत्रु कौन है और हिन्दू कौन है। सभी हिन्दू रजवाड़े, जैन, ब्राम्हण, व्यापारी, आदिवासी-भील, एक हो गए और चालुक्य राजा भीमदेव के साथ आ गए। भृगुकच्छ के दादा चालुक्य, जूनागढ़ के रत्नादित्य, कच्छ के कमा लखाणी, आबू के परमार, सिंध के जाट सभी ने महमूद के संहार को अपना परम मनोरथ समझ लिया। हिन्दुओं की इतनी बड़ी सेना के भय से महमूद मार्ग बदलकर मनशूरा से मुल्तान लौटा।

उस मार्ग में पानी व भोजन के अभाव में उसकी आधी सेना ने दम तोड़ दिया और शेष सैनिकों का सिंध के जाटों ने नरसंहार किया। भीमदेव ने पाटण पहुँचते ही मंदिर को पुनः बनवाकर भगवान सोमनाथ की स्थापना करने की आज्ञा दी। और कुछ महीनों में जिस प्रकार सतयुग में सोम ने, त्रेता में रावण ने और द्वापर में श्रीकृष्ण ने इस मंदिर का स्थापन किया था, उसी प्रकार चालुक्य-श्रेष्ठ ने वह कलयुग में कर दिखाया।सोमनाथ के इतिहास से शत्रुबोध होता है कि इस्लामियों का लक्ष्य सरकार बदलना नहीं, अपितु हिन्दू धर्म को समाप्त करना है।

उनके शत्रु हम नहीं हमारे महादेव हैं। इसी इतिहास से हमें स्वयंबोध भी होता है कि हम तब तक ही सुरक्षित हैं जबतक एक हैं। हम एक रहेंगे तो ना हमारी भूमि खंडित होगी, ना हमारे मंदिर, ना हमारे महादेव। 

मोहम्मद जुनैद ने साथियों संग मिल कर 2 दलित युवकों को पीटा, जातिसूचक शब्द कह कर दी गाली: बचाने आई माँ को भी कर दिया घायल

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक दलित व्यक्ति की मोहम्मद जुनैद और उसके साथियों पर अपनी पिटाई का आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि उसके बेटे को जाति-सूचक शब्द बोले गए और धमकी दी गई है। यह विवाद आरोपित की कार में पीड़ित की बाइक से छू जाने से शुरू हुआ है। गुरुवार (16 फरवरी, 2023) को पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (9 फरवरी 2023) की है।

यह मामला प्रयागराज के नवाबगंज थानाक्षेत्र का है। यहाँ शिवमूरत अपने परिवार के साथ मंसूराबाद इलाके में रहता है। पीड़ित का आरोप है कि 9 फरवरी को उनका बेटा दिलीप अपने पडोसी अरविन्द सरोज के साथ बाइक से कहीं जा रहा था। इसी दौरान गाँव खनसाह पूरा के रजीउल्लाह का बेटा जुनैद अपनी कार से उसी रास्ते में पड़ने वाली गली से गुजरा। जुनैद की गाड़ी दिलीप की बाइक से टकरा गई। इस पर दिलीप के पीछे बैठे अरविन्द ने जुनैद को देख कर कार चलाने की नसीहत दी।

पीड़ित का आरोप है कि इस पर जुनैद ने गाली देते हुए कहा, “पासी सा@, इसी तरह गाडी चलाऊँगा।” इसके बाद जुनैद अपनी कार से बाहर निकल आया और अरविन्द को पीटने लगा। कुछ ही देर बाद जुनैद के 3 साथी वहाँ और आ गए। ये चारों अरविन्द को गली के अंदर खींच ले गए, जहाँ आरोपों के मुताबिक सबने मिल कर उसे बुरी तरह से लात-घूँसों से मारा। थोड़ी देर बाद इन सभी ने एक डंडे से अरविंद के सिर पर भी वार किया। इस वार से अरविंद बेहोश हो गया। ऑपइंडिया के पास इस घटना का एक्सक्लूसिव वीडियो मौजूद है।

शिकायत में आगे बताया गया है कि शोरगुल सुन कर दिलीप की माँ उर्मिला अपने बेटे के साथ अरविंद को बचाने दौड़ी। इस पर जुनैद और उसके साथियों ने इन दोनों माँ-बेटों को भी मारपीट कर घायल कर दिया। कुछ देर की पिटाई के बाद जब आस-पास के लोग जमा होने लगे तब जुनैद और उसेक साथी वहाँ से चले गए। पीड़ित का शिकायत में आरोप है कि जाते-जाते आरोपितों ने उन्हें धमकी भी दी है। घटना के बाद पीड़ितों ने अपना मेडिकल परीक्षण करवाया तो अरविंद के शरीर में फैक्चर पाया गया।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में पुलिस पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। शिवमूरत का कहना है कि पुलिस से मिली छूट से ही आरोपितों का मन बढ़ा हुआ है। पीड़ित दलित परिवार ने खुद को बेहद डरा बताते हुए आरोपितों द्वारा अपनी जान का खतरा जताया है। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर IPC की धारा 308, 323, 504 और 506 के साथ SC/ST एक्ट में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने पीड़ित शिवमूरत से बात की। शिवमूरत ने हमें बताया कि आरोपित जुनैद जिम करता है और वो उठा-उठा कर फेंक रहा था हमारे घर वालों को। शिवमूरत के मुताबिक स्थानीय थाना पुलिस ने भी उनका केस दर्ज कर के कार्रवाई में काफी हीलाहवाली की। पीड़ित ने कहा कि वो चाहते हैं कि सभी आरोपितों को जेल भेजा जाए।

‘…तो 100 सीटों से भी नीचे चली जाएगी BJP’: ‘इलू-इलू’ वाली सियासत से मोदी को हटाने का ख्वाब देख रही जदयू-कॉन्ग्रेस, खुर्शीद के सामने गिड़गिड़ाए CM नीतीश

लोकसभा चुनाव में मोदी लहर को रोकने के लिए विपक्ष को एकजुट करने की कवायद फिर से शुरू हो गई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉन्ग्रेस से अपील करते हुए कहा है कि यदि सब एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे तो भाजपा 100 सीटों में सिमट जाएगी। नीतीश कुमार के इस बयान का कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने समर्थन किया है। वहीं, भाजपा ने कहा है कि जो बिहार में अकेले सरकार नहीं बना सकते वो लोकसभा में भाजपा को हराने की बात कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (18 फरवरी, 2023) को बिहार की राजधानी पटना में भाकपा माले के अधिवेशन में बोलते हुए नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता की वकालत की है। उन्होंने मंच पर मौजूद कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से कहा है, “हम तो चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग (पार्टियाँ) एकजुट हो जाएँ। आज आप (सलमान खुर्शीद) आए हुए हैं तो आप के माध्यम से आपकी पार्टी के नेतृत्व को हम अनुरोध करेंगे कि जल्दी से जल्दी फैसला करें और हम लोगों को बुलाकर के बात करें।”

उन्होंने आगे कहा है, “कॉन्ग्रेस नेतृत्व को फैसला करना चाहिए कि कहाँ-कहाँ और किसके-किसके साथ एकजुट होकर अगला चुनाव लड़ना है। ये फैसला जिस दिन हो जाएगा, उसी दिन हम सब लोग एकजुट हो जाएँगे और मिल के लड़ेंगे। हम इंतजार कर रहे हैं। अगर मेरे सुझाव को मानेगें तो भाजपा 100 सीट के नीचे आ जाएगी। मेरी बात नहीं मानेंगे तो आप जानिए क्या होगा। इसलिए हम कह रहे हैं कि जल्दी से जल्दी फैसला कीजिए। अगर आप लोग इस बार ये सोच लेंगे तो पूरे देश के हित में अच्छा होगा और आपको भी फायदा होगा।”

नीतीश कुमार के इस बयान का कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा है, “नीतीश कुमार ने इशारों में और स्पष्ट रूप से जो बातें कहीं हैं इस पर मैं इतना ही कहूँगा कि जो आप चाह रहे हैं वह कॉन्ग्रेस भी चाह रही है। लेकिन प्यार में एक समस्या होती है कि पहले आई लव यू कौन बोलेगा।”

नीतीश कुमार के इस बयान के बाद भाजपा की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ट्वीट कर कहा है, “जो बिहार में उधार के तेल से ख़ुद के दीये को रोशन कर रहे है, वो क्या भारत को नया दिन दिखाएँगे। 17 साल बिहार का विकास नहीं हुआ और नीतीश जी एक महीने से समाधान ढूँढ रहे हैं। इनके शासन से राज्य उबर नहीं पाया है और प्रधानमंत्री के लिए एकजुटता की तलाश कर रहे है।”

बिहार की भाजपा की प्रदेश मंत्री डॉ. अमृता राठौड़ ने ट्वीट कर कहा है, “जिसके पास बिहार में अकेले सरकार बनाने की ताकत नहीं है। वो नीतीश कुमार कह रहे हैं हम लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हरा देंगे।”

पैड से पहले बैट से लग चुकी थी गेंद? ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध विराट कोहली को आउट दिए जाने पर विवाद, नियमों की अनदेखी का भी आरोप

दिल्ली (Delhi) में खेले जा रहे बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (Boarder-Gavaskar Trophy) दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) को आउट करार दिए जाने को लेकर विवाद हो गया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में विराट कोहली को अंपायर ने एलबीडब्ल्यू करार दिया था। विराट कोहली और भारतीय टीम के खिलाड़ी अंपायर के निर्णय से खुश नहीं हैं। कहा जा रहा है कि बॉल पैड से पहले बैट से लगी थी।

टेस्ट मैच के दूसरे दिन 44 के निजी स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहे विराट कोहली को ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर मैथ्यू कुहनमैन की एक गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया गया। कोहली ने तुरंत रिव्यू ले लिया। रिप्ले में यह साफ नहीं हो पाया कि गेंद पहले बैट से लगी थी या पैड पर। ऐसा लग रहा था कि गेंद एक साथ बैट और पैड पर लगी है। ऐसे में विराट कोहली को आउट नहीं दिया जाना चाहिए था, लेकिन थर्ड अंपायर ने फिल्ड अंपायर के निर्णय को जारी रखा।

फैसले से टीम इंडिया के खिलाड़ी खुश नहीं हैं। विराट कोहली मैदान में ही निराश लग रहे थे। कोहली के अलावा टीम के बैटिंग कोच विक्रम राठौर और हेड कोच राहुल द्रविड़ भी अंपायर के फैसले से आश्चर्यचकित थे। क्रिकेट के नियम के अनुसार, एक साथ बैट और पैड पर बॉल का लगना बैट पर बॉल का लगना माना जाता है।

हालाँकि, कोहली के मामले में ऐसा नहीं हुआ। दूसरी तरफ नियम यह भी कहता है कि यदि बल्लेबाज के विकेट को लेकर संशय की स्थिति में संदेह का लाभ (Benefit of doubt) बल्लेबाज के पक्ष में जाता है। कोहली को संदेह का लाभ भी प्राप्त नहीं हो सका।

मैच की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी में 263 रन बनाए, जिसके जवाब में भारतीय टीम 262 रन ही बना सकी। भारत की तरफ से अक्षर पटेल ने 74 और विराट कोहली ने 44 रनों की पारी खेली। कप्तान रोहित शर्मा 32 के निजी स्कोर पर आउट हो गए। आज के दिन का खेल खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी में एक विकेट खोकर 61 रन जोड़ लिए हैं।

नाराज ईरानी महिला ने मंच पर हिजाब निकाल घूमाकर फेंका, समर्थन में बजने लगी तालियाँ: वीडियो वायरल, हिम्मत की लोग दे रहे हैं दाद

ईरान में हिजाब पर जारी विवाद (Iran Hijab Controversy) के बीच एक महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। महिला एक कार्यक्रम के दौरान गले से हिजाब उतारकर फेंकती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि गलत तरीके से हिजाब पहनने के कारण उस महिला को तेहरान नेशनल काउंसिल फॉर कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग (Tehran National Council For Construction Engineering) की वार्षिक सभा से निकाल दिया गया था। घटना शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) की है।

बताया जा रहा है कि ज़ेनब काज़ेमपुर (Zeynab Kazempour) नाम की महिला को तेहरान कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशन की वार्षिक सभा के दौरान इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि निदेशक मंडल को उसके हिजाब पहनने का तरीका पसंद नहीं आया। निदेशक मंडल ने ज़ेनब को बोर्ड के सदस्य के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर ज़ेनब ने बीच सभा में हिजाब उतार कर फेंक दिया।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हिजाब उतारने से पहले नाराज ज़ेनब लोगों के सामने छोटा-सा स्पीच दे रही हैं। ज़ेनब ने कहा, “मैं उस असेंबली को मान्यता नहीं देती, जहाँ उम्मीदवारों को हिजाब न पहनने के कारण बर्खास्त कर दिया जाता है।” उनकी बात खत्म होने से पहले ही उनका माइक बंद कर दिया गया।

मंच छोड़ने से पहले जिस तरह ज़ेनब ने हिजाब निकाल फेंका, उससे उपस्थित लोग ज़ेनब के समर्थन में तालियाँ बजा रहे थे। बता दें कि ईरान में लंबे समय से महिलाएँ हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब को लेकर गिरफ्तार की गई 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद हुई थी।

देशभर में जारी विरोध के बाद ईरान की इस्लामी सरकार ने क्रूरता के लिए कुख्यात मोरालिटी पुलिस (Morality Police) को खत्म करने का फैसला लिया है। वहीं, हिजाब पहनने की अनिवार्यता को खत्म करने पर वहाँ की सरकार विचार कर रही है।

‘जमीन कब्ज़ा की साजिश’: काली मंदिर के सामने शिहाबुद्दीन ने लगा दिया ट्यूबवेल, विरोध करने पर पुजारी और श्रद्धालुओं पर डंडे से हमला और तोड़फोड़

असम के करीमगंज जिले के नीलमबाजार इलाके में मुस्लिमों द्वारा हिंदू मंदिर पर हमला करने की घटना सामने आई। आरोप है कि शिहाबुद्दीन नामक व्यक्ति ने मंदिर के सामने की जमीन पर कब्जा करते हुए उस पर ट्यूबवेल लगा रखा है। जब स्थानीय लोगों ने उसका विरोध किया तो उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर मंदिर के पुजारी व भक्तों पर हमला कर दिया। आरोपितों ने यज्ञ स्थल में भी तोड़फोड़ की है। घटना शुक्रवार (17 फरवरी 2023) की बताई जा रही है।

इस मामले में करीमगंज भाजपा के जिलाध्यक्ष बिस्वरूप भट्टाचार्य ने कहा है, “आज का दिन करीमगंज के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। दक्षिण करीमगंज विधानसभा क्षेत्र के नीलम बाजार में स्थित काली मंदिर को एक मुस्लिम ने अपवित्र कर दिया। उसने यह सब जमीन में कब्जा करने के लिए किया।”

उन्होंने आगे कहा, “शिहाबुद्दीन ने मंदिर के अंदर जाने वाले रास्ते में ट्यूबवेल लगवाया है। मंदिर समिति ने उससे ट्यूबवेल हटाने का आग्रह किया था। लेकिन, ट्यूबवेल हटाने के बजाय वह हिंसक हो गया। फिर उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर मंदिर आने वाले भक्तों और पुजारी समेत मंदिर समिति के सदस्यों पर हमला कर दिया। अच्छी बात यह रही कि करीमगंज पुलिस समय रहते मौके पर पहुँच गई और हथियार छीन लिए। आरोपितों द्वारा मंदिर पर हमला कर यज्ञ स्थल में तोड़फोड़ करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

बिस्वरूप भट्टाचार्य ने यह भी कहा है, “लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि असम में हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सत्ता में है। इसलिए, इन लोगों आग से खेलना बंद कर देना चाहिए। नहीं तो, परिणाम विनाशकारी होंगे। यहाँ सभी धर्म के लोगों को मिलजुलकर रहना चाहिए। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मंदिर में हुई इस घटना को लेकर पहले ही 1-2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मंदिर में प्रवेश करने वाले और भक्तों को पीटने वाले बदमाशों के वीडियो फुटेज बरामद कर लिए हैं।”

इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में मुस्लिम युवक डंडा लेकर हिंदुओं पर हमला करते हुए देखे जा सकते हैं।

इस मामले में करीमगंज के पुलिस अधीक्षक पद्मनाभ बरुआ ने कहा है, “ट्यूबवेल लगाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। हालाँकि पुलिस ने समय रहते इसमें काबू पा लिया। ट्यूबवेल लगाने में शामिल व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। हालाँकि अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। फिलहाल स्थितियाँ नियंत्रण में हैं।”

कई देशों-संस्थानों में तबाही के लिए फंडिंग, बुश को हटाने को बना लिया था ज़िंदगी-मौत का सवाल: माँ को आत्महत्या करवाने वाले जॉर्ज सोरोस अवैध तरीकों से कमाई अकूत संपत्ति

अमेरिका के विवादास्पद अरबपति जॉर्ज सोरोस (George Soros) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को लेकर आपत्तिजनक बयान दे चुके हैं। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे को प्रभावित करने की कई बार कोशिश की है। उन्होंने पीएम को हालिया अडानी-हिंडेनबर्ग विवाद से जबरदस्ती जोड़ने की कोशिश की थी। उनके बयान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री जयशंकर ने कहा कि सोरोस ने पिछले दिनों पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वे भारत जैसे लोकतंत्रिक देश के नेता हैं, लेकिन वे खुद लोकतांत्रिक नहीं हैं। वो मुस्लिमों साथ हिंसा और अन्याय कर तेजी से बड़े नेता बने हैं। उन्होंने कहा सोरोस के पसंद के व्यक्ति जीते तो लोकतंत्र बढ़िया है, वर्ना खराब है।

जयशंकर ने कहा कि सोरोस पुराने विचारों वाले व्यक्ति हैं और न्यूयॉर्क में बैठकर वे अभी भी सोचते हैं कि उनके विचारों के अनुसार ही दुनिया चले। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने नैरेटिव के लिए अपने संसाधनों का निवेश करते हैं। ऐसे लोग खतरनाक होते हैं। उन्होंने सोरोस को बुजुर्ग, अमीर, मतलबी और कहानियाँ बनाने में माहिर बताया।

सोरोस ने 16 फरवरी 2023) को जर्मनी में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर क्रोनी कैपटलिज्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उद्योगपति गौतम अडानी और प्रधानमंत्री के बीच मधुर संबंध हैं। सोरोस ने अडानी समूह के कथित हेरफेर में प्रधानमंत्री के भी शामिल होने का आरोप लगाया था। इसको लेकर स्मृति ईरानी ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई थी।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस?

जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।

जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।

साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।

सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।

इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।

सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और पीएम मोदी को तानाशाह कहा था। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।

यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।

साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।

इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।

अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।

भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।

CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।

कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।

दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नरफत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।