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चंडीगढ़ की नाजिश खान बनी पूजा, दिल्ली में हिंदू युवक संग की शादी: परिवार की सुरक्षा को लेकर अजय कुमार ने जताई चिंता

चंडीगढ़ की एक लड़की ने हिंदू धर्म स्वीकार करते हुए दिल्ली में अजय कुमार संग शादी की है। नाजिश खान नाम की यह लड़की अब पूजा के नाम से जानी जाएगी। दोनों ने 13 फरवरी 2023 को दिल्ली के आर्य समाज मंदिर में शादी की। नाजिश ने हिंदू बनने पर बेहद खुशी जताई है।

जानकारी के मुताबिक नाजिश के अब्बा मुन्ना खान की मौत हो चुकी है। नाजिश की उम्र लगभग 30 साल है। वहीं उसके 32 वर्षीय पति अजय कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले हैं, जो फिलहाल चंडीगढ़ में रहते हैं। दोनों एक दूसरे को लम्बे समय से प्यार करते थे। इस बीच उनके घर वालों को इस रिश्ते की भनक लग गई। परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। आखिरकार दोनों ने अपने-अपने घरों को छोड़ दिया और एक साथ दिल्ली आकर रहने लगे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए नाजिश खान ने बताया कि उनके परिवार में 3 बहनें और 1 भाई है। उन्हें छोड़ कर सभी की शादी हो चुकी है। उनके अब्बा की मौत काफी पहले हो चुकी थी। लगभग 4 साल पहले कोरोना लॉकडाउन में उनकी मुलाकात एक मार्किट में कुछ सामान लेते हुए अजय से हुई थी। तब से दोनों एक-दूसरे को प्यार करने लगे।

वहीं ऑपइंडिया से बात करते हुए नाजिश के पति अजय ने बताया कि वो चंडीगढ़ में बाइक मैकेनिक थे। लेकिन अब दिल्ली में काम जमाने की कोशिश करेंगे। अजय ने बताया कि वो 5 दिनों से वे शादी करने के लिए भटक रहे थे। इस दौरान नाजिश के भाई ने उनके चंडीगढ़ में रहने वाले भाई को फोन कर धमकी दी। फोन पर नाजिश के भाई ने कहा कि अगर अजय उसे लेकर नहीं लौटा तो पूरे परिवार को अपहरण के केस में फँसा दिया जाएगा। अजय ने चंडीगढ़ में मौजूद अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता जताई। अजय का कहना है कि उन्होंने अपने वकील के माध्यम से अपनी शादी का नोटिस स्थानीय थाने में भिजवा दिया है।

शादी करवाने में सहयोग करने वाले दिल्ली के निवासी और सुदर्शन वाहिनी नाम का संगठन चलाने वाले आज़ाद विनोद ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि अजय और नाजिश ने 12 फरवरी को गाजियाबाद के एक मंदिर में शादी कर ली थी। लेकिन वे अपनी शादी को कानूनी मान्यता दिलाना चाह रहे थे। उनका कोई स्थानीय परिचय नहीं था। किसी माध्यम से अजय और नाजिश की मुलाकात हमसे हुई। हमने अजय और नाजिश को वकील उपलब्ध करवाया। कड़कड़डूमा कोर्ट के एक वकील के साथ वहीं के एक आर्य समाज मंदिर में इस शादी को 13 फरवरी को विधिवत तौर पर सम्पन्न करवाया गया।

‘मोदी सरकार के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया राम मंदिर वाला फैसला’: कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी का अजीबोगरीब बयान, अब्दुल नज़ीर के राज्यपाल बनने से भड़के

कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी (Rashid Alvi) ने केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधा है और राम जन्मभूमि (RAM JANAM BHUMI) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के दिए फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग मानते हैं कि राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार के दबाव में दिया गया था। उन्होंने साथ ही कहा है कि जजों को सरकारी जॉब देना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बकौल अल्वी, एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के 50 प्रतिशत रिटायर्ड जजों को सरकार कहीं न कहीं भेज देती है। इससे लोगों का यकीन न्यायपालिका में कम होता जाता है। उन्होंने कहा कि जस्टिस गोगोई को अभी तो राज्यसभा भेजा गया था। अब सरकार ने जस्टिस एस अब्दुल नजीर साहब को गवर्नर बना दिया।

अल्वी ने आगे कहा, “राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर बहुत लोग सवालिया निशान लगाते चले आ रहे हैं कि यह गवर्नमेंट के दबाव में हुआ है। जस्टिस गोगोई के बाद जस्टिस नजीर को गवर्नर बनाना, उन लोगों के शक को और मजबूत करता है। संविधान का आर्टिकल 50 कहता है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका अलग-अलग होना चाहिए। सरकार को काशिश करनी चाहिए की न्यायपालिका बिल्कुल अलग हो और उसका कार्यपालिका से कोई वास्ता न हो।”

वहीं हाल ही में इस्तीफा देने वाले महाराष्ट्र के पूर्व गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी के बारे में उन्होंने कहा कि वह लगातार ऐसे बयान देते रहें हैं जो आरएसएस की विचारधारा से जुड़े हुए हैं। तमिलनाडु के गवर्नर यही काम कर रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट के कई गवर्नर यही काम कर रहे हैं। केरल का गवर्नर यही काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “गवर्नर ने संविधान की रक्षा करने के बजाए आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा की बात करते हैं। उन्हें लगता होगा कि अगर भाजपा व आरएसएस की लीडरशिप खुश होगी तो उन्हें और तरक्की मिलेगी।”

उल्लेखनीय है कि जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस गोगोई राम जन्मभूमि विवाद पर फैसला देने वाले पाँच सदस्यीय संवैधानिक पीठ का हिस्सा थे। जस्टिस नजीर हाल ही में 4 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए हैं। जस्टिस नजीर ‘तीन तलाक’ मामले पर फैसला देने वाले जजों में शामिल थे।

‘सभी बुजुर्ग कर लें सामूहिक आत्महत्या’: Yale यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने दिया बढ़ती जनसंख्या का ‘समाधान’, प्रमोट करने के लिए NYT को लोगों ने लताड़ा

जापान में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने के बाद अमेरिका के कनेक्टिकट स्थित Yale यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने अजीबोगरीब सुझाव दिया है। उसके सुझाव को आगे बढ़ाने के लिए लोग ‘न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT)’ को भी जम कर लताड़ लगा रहे हैं। असल में, प्रोफेसर युसुके नरीता ने कहा है कि बाकियों की समस्या को कम करने के लिए जापान के सभी बुजुर्गों को सामूहिक आत्महत्या कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समस्या का यही एकमात्र समाधान है, और स्पष्ट भी है।

उन्होंने कहा कि उम्रदराज लोगों की जनसंख्या बढ़ने के कारण जापान बड़ी समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने 2021 के अंत में ही ये बात कही थी, जिसे अब NYT आगे बढ़ा रहा है। हालाँकि, बाद में प्रोफेसर ने कहा था कि उनकी बातों को सन्दर्भ से हट कर लिया गया। जापान के योद्धाओं में पूर्व काल में एक ‘Seppuku’ का प्रचलन था, जिसमें कोई विकल्प न होने के बाद व्यक्ति खुद को ही कटार घोंप कर मार डालता था।

उन्होंने कहा था कि न सिर्फ बुजुर्गों को राजनीति, बल्कि कारोबार के क्षेत्र में भी नेतृत्व से बाहर धकेलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए उन्हें जगह खाली करने की ज़रूरत है। अब सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रोफसर और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को लताड़ा है। एक अर्थशास्त्री ने तो यहाँ तक कहा प्रोफसर लोग उस बेकार वर्ग के होते हैं, जो लोगों को दिग्भ्रमित करते हैं। एक ने तो पहले प्रोफेसर को ही आत्महत्या करने की सलाह दे डाली।

कुछ विशेषज्ञों ने ये भी दवा किया कि सस्ती पब्लिसिटी के लिए और अपने करियर को चमकाने के लिए प्रोफेसर ने इस तरह का बयान दिया है। एक अन्य प्रोफेसर ने कहा कि खुद को लोगों के ध्यान में लाने के लिए इस तरह का बयान दिया गया है। हालाँकि, अब प्रोफेसर युसुकु नरितु ने ‘Mass Suicide’ शब्दों का प्रयोग करना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि उनके आईडिया को गलत तरीके से लिया गया। NYT पहले भी प्रोपेगंडा फैलाता रहा है।

त्रिपुरा में फिर से BJP सरकार के आसार, मुस्लिमों का 70% वोट CPM को मिलने का अनुमान: जन की बात का सर्वे, बड़ी ताकत बन उभर सकती है ‘तिपरा’

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान गुरुवार (16 फरवरी, 2023) को होने वाले हैं। मैदान में मौजूद सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। सभी दल अपने प्रमुख नेताओं से चुनाव प्रचार करवा रहे हैं। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) प्रचार कर चुके हैं। वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री माणिक साहा जीत को लेकर अपना दावा ठोक रहे हैं।

दूसरी ओर केरल में एक-दूसरे की दुश्मन सीपीएम (CPM) और काॅन्ग्रेस (Congress) पार्टी त्रिपुरा में एक-दूसरे के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती पेश कर रही है। दूसरी ओर जनजातीय बहुल इलाके में तिपरा गठबंधन की भी अच्छी पकड़ है।

इस बीच ‘त्रिपुरा ओपिनियन पोल’ के नाम से एक मतदान पूर्व सर्वे आया है। सर्वे ‘जन की बात’ की ओर से किया गया है। सर्वे में 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया है। सर्वे में कहा गया है कि इसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों के मतदाताओं से डाटा इकट्ठा किया गया है। ग्रामीण इलाकों के जनजातीय और गैर-जनजातीय क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। सर्वे के अनुसार, यहाँ की कुल 60 सीटों में से भाजपा गठबंधन को 30 से 35 सीटें, सीपीएम गठबंधन को 16 से 13 सीटें, तिपरा गठबंधन को 13 से 11 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

वहीं वोट शेयर की बात करें तो सीपीएम गठबंधन ने इसमें बाजी मारी है। सर्वे के अनुसार, सीपीएम गठबंधन को 41 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर मिला है। वहीं भाजपा गठबंधन को 32 से 39 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, तिपरा गठबंधन को 16 से 21 प्रतिशत और अन्य को 1 से 2 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है।

वहीं डेमोग्राफी के हिसाब से बात करें तो बंगाली हिंदुओं की पहली पसंद भाजपा है और सर्वे के मुताबिक, करीब 60 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं द्वारा भाजपा को वोट देने का अनुमान जताया गया है। इसके बाद 30 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं के सीपीएम गठबंधन और आठ प्रतिशत बंगाली हिंदुओं के तिपरा गठबंधन को वोट देने का अनुमान जताया गया है। वहीं 2 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं ने अन्य पार्टियों को वोट दिया है। दूसरी ओर बंगाली मुस्लिमों की अगर बात करें तो इसमें सीपीएम गठबंधन सबसे आगे है।

क्रेडिट – जन की बात

सर्वे के मुताबिक, 70 प्रतिशत बंगाली मुस्लिम सीपीएम गठबंधन को अपना वोट दे सकते हैं। वहीं महज 8 प्रतिशत बंगाली मुस्लिम की पसंद भाजपा है। जनजातीय लोगाें की बात करें तो तिपरा गठबंधन उनकी पहली पसंद है। सर्वे के मुताबिक 65 प्रतिशत जनजातीय लोग तिपरा गठबंधन को वोट दे सकते हैं। वहीं भाजपा और सीपीएम गठबंधन को जनजातीय लोगों की तरफ से क्रमश 25 और नौ प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान हैं। सर्वे के मुताबिक जनजातीय समुदाय में में भी त्रिपुरी जनजाती में भाजपा को 55 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में भाजपा ने सीपीएम के 25 साल पुराने शासन का अंत कर दिया था। भाजपा गठबंधन ने तब यहां 60 में से 43 सीटों पर कब्जा किया था। भाजपा ने अकेले दम पर यहाँ बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया था। कॉन्ग्रेस को यहाँ एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। सीपीएम गठबंधन को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। 

PM मोदी के कायल हुए ‘कांतारा’ वाले ऋषभ शेट्टी और ‘KGF’ वाले यश: दिवंगत पुनीत राजकुमार की पत्नी से भी मिले प्रधानमंत्री, पूर्व क्रिकेटर कुंबले-वेंकटेश भी थे मौजूद

कर्नाटक दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के स्टार यश और ऋषभ शेट्टी समेत अन्य हस्तियों से मुलाकात की। इस दौरान फिल्म मेकर, प्रोड्यूसर विजय किरागंदूर और अश्विनी पुनीत राजकुमार तथा पूर्व क्रिकेटर अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ समेत कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी उनके साथ नजर आए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मुलाकात रविवार (12 फरवरी, 2023) को बेंगलुरु के राज्यपाल निवास में की। इस मुलाकात को लेकर न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अश्विनी राजकुमार से मिलते हुए उनके दिवंगत पति और एक्टर रहे पुनीत राजकुमार को याद किया।

यही नहीं इस मुलाकात के दौरान सिनेमा और कर्नाटक की संस्कृति जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की हुई। प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और फिल्मों में महिला पात्रों को प्राथमिकता देने के लिए साउथ इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री की सराहना की।

इस मुलाकात को लेकर कर्नाटक भाजपा ने ट्वीट कर कहा है, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में कर्नाटक फिल्म इंडस्ट्री के स्टार्स से मुलाकात की। इसमें संस्कृति, नए भारत और कर्नाटक की प्रगति से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।”

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर श्रद्धा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकात को लेकर ट्वीट किया। अपने फैंस के बीच अय्यो के नाम से मशहूर श्रद्धा ने लिखा, “नमस्कार, मैं अपने देश के माननीय प्रधानमंत्री से मिली। मेरे लिए उनका पहला शब्द था ‘अय्यो’। मैं एकटक देख रही हूँ। हे भगवान, उन्होंने सच में मेरा नाम लिया। धन्यवाद प्रधानमंत्री जी।”

प्रधानमंत्री ने किया एयरो इंडिया शो का शुभारंभ…

पीएम मोदी कर्नाटक के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने सोमवार (13 फरवरी, 2023) को 14वें एयरो इंडिया शो का उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान मोदी ने कहा है, “पहले यह सिर्फ एयर शो था। लेकिन अब ये भारत की ताकत बनकर उभर रहा है। अमृतकाल का भारत एक फाइटर पायलट की तरह आगे बढ़ रहा है, जिसको ऊँचाइयाँ छूने से डर नहीं लगता। यह सबसे ऊँची उड़ान भरने के लिए उत्साहित है। आज का भारत तेज सोचता है, दूर की सोचता है और तुरंत फैसले लेता है। एक बात और, भारत की रफ़्तार चाहे जितनी तेज हो लेकिन वो हमेशा जमीन से भी जुड़ा रहता है।”

‘रामदेव का लश्कर से कनेक्शन, धीरेंद्र शास्त्री बहुरूपिया’: JDU के गुलाम रसूल बलियावी के बहके बोल, कहा- मोदी पाकिस्तान से डरते हैं तो सेना में 30% मुस्लिम भर्ती करें

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी ने फिर से विवादित बयान दिया है। रविवार (12 फरवरी 2023) को उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बहुरूपिया बता डाला। इतना ही नहीं बाबा रामदेव का पाकिस्तान आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध होने का दावा किया। कहा कि यदि मोदी पाकिस्तान से डरते हैं तो सेना में 30 फीसदी मुस्लिमों को भर्ती करें।

बिहार के नवादा में आयोजित मरकजी इदारा-ए-शरिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बलियावी बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव को दी गई जमीन और उनके प्रोडक्ट्स की जाँच होनी चाहिए। उनका जितना माल बिक रहा है और वह कहाँ-कहाँ से बनकर आ रहा है, इसकी भी जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रामदेव भारतीय नहीं हैं। उनकी संपत्ति की जाँच होनी चाहिए। 

बलियावी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान से निपटने में डर लग रहा है तो सिर्फ 30 प्रतिशत मुसलमानों को फौज में जगह देकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब पाकिस्तान मिसाइल बनाकर दिखा रहा था तो नागपुर के कोई बाबा जवाब देने नहीं आए थे। एक मुसलमान का बेटा एपीजे अब्दुल कलाम सामने आया था।”

वहीं बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र शास्त्री को बहरूपिया बताते हुए कहा, “पता नहीं वे कौन हैं। मैं उनके बारे में नहीं जानता। मैं संविधान और अदालत को जानता हूँ। इस तरह के बहरूपिया की हमारे देश में कोई जगह नहींं है। कोई कपड़ा और मेकअप के सहारे हमारे देश को गुमराह नहीं कर सकता।” बलियावी ने कहा कि देश में दलितों की तरह मुसलमानों के लिए भी एक्ट बनना चाहिए। मुसलमानों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए जाने की जरूरत है।

बलियावी वही नेता हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले शहर का शहर को कर्बला बनाने की बात कहते हुए नुपूर शर्मा को पागल औरत करार दिया था। जदयू नेता ने झारखंड के हजारीबाग में 18 जनवरी, 2023 को कहा था, “मेरे आका की इज्जत पर हाथ डालोगे तो अभी तो हम कर्बला मैदान में इकट्ठा हुए हैं, उनकी इज्जत के लिए हम शहरों को भी कर्बला बना देंगे। खुद को सेक्युलर बताने वाली राजनीतिक पार्टियों ने भी नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग नहीं की। कोई रियायत नहीं होगी, क्योंकि मेरी ज़िन्दगी मेरी नहीं है और मेरी साँसें भी मेरी नहीं हैं। जीने की तमन्ना वो करे, जिसके पास रसूल का नूर न हो। हम तो इसी आरजू-तमन्ना से जीते आए हैं कि मरने के बाद एक ऐसा दिन तो आएगा, जब कोई नहीं रहेगा।”

प्रवीण नेट्टारू की हत्या में गिरफ्तार शफी बेल्लारे लड़ सकता है कर्नाटक विधानसभा चुनाव, टिकट देने की तैयारी में SDPI: कुल्हाड़ी से काट दिए गए थे BJYM नेता

कर्नाटक में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों में शफी बेल्लारे भी उम्मीदवार हो सकता है। SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया) उसे टिकट देने की तैयारी में है। SDPI प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) की राजनैतिक शाखा है। शफी भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या में आरोपित है। फिलहाल वह जेल में बंद है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शफी बेल्लारे को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना SDPI के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने जताई है। मजीद के मुताबिक शफी को पार्टी दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तूर विधानसभा से उम्मीदवार बना सकती है। टाइम्स नाउ पर एक डिबेट के दौरान SDPI प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि शफी बेल्लारे बेगुनाह है और उसे राजनैतिक कारणों से फँसाया गया है। इस दौरान SDPI प्रवक्ता ने बताया कि अभी उसे उम्मीदवार बनाने को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन फ़रवरी के अंतिम सप्ताह तक आने वाली लिस्ट में उसका नाम हो सकता है। SDPI प्रवक्ता ने शफी बेल्लारे को अपना राज्य सचिव भी बताया।

SDPI प्रवक्ता ने कहा कि शफी के बारे में अंतिम निर्णय अदालत करेगी। फिलहाल उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। इस दौरान SDPI प्रवक्ता ने शफी को पूरी कानूनी मदद देने का भी एलान किया। वहीं भाजपा ने SDPI की आलोचना की है। भाजपा नेता एस प्रकाश ने SDPI की इस घोषणा को घृणित बताया है। उन्होंने PFI और SDPI को आतंकी संगठन बताते हुए इन्हे जनता द्वारा कड़ा जवाब मिलने की बात कही है। भाजपा नेता के मुताबिक महज घोषणा करने से कोई विधायक नहीं बन जाता।

शफी बेल्लारे का नाम तब चर्चा में आया था, जब 26 जुलाई 2022 को सुल्लिया तालुक में पड़ने वाले गाँव बेल्लारे में भाजपा नेता प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काट डाला गया था। हमलावर बाइक पर सवार हो कर आए थे। इस हत्याकांड की जाँच कुछ ही समय बाद NIA को सौंप दी गई थी। NIA ने शफी सहित 20 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। शफी पर प्रवीण की मुखबिरी करने का आरोप है।

गाड़ी पर लिखा ‘ॐ’, उसे लात मारता जॉनी… 10 साल पुरानी फिल्म को लेकर श्रेयस तलपड़े ने माँगी माफ़ी, कहा – ध्यान रखना चाहिए था, भविष्य में नहीं होगा ऐसा

बॉलीवुड अभिनेता श्रेयस तलपड़े (Shreyas Talpade) की फिल्म का एक सीन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस फिल्म का नाम ‘कमाल धमाल मालामाल’ है। डायरेक्टर प्रियदर्शन के निर्देशन में बनने वाली यह कॉमेडी फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई थी। इसमें श्रेयस तलपड़े ने जॉनी नाम के शख्स का किरदार निभाया था। उनके अलावा इस फिल्म में नाना पाटेकर, ओम पुरी, असरानी ने भी मुख्य भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीन में श्रेयस तलपड़े हिंदुओं के पवित्र धार्मिक प्रतीक ॐ पर पैर रखते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस वीडियो को ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड फैन’ ने 13 फरवरी, 2023 को शेयर किया है। वीडियो में लिखा गया है कि एक क्रिश्चियन व्यक्ति ने ॐ पर पैर रखा हुआ है। उर्दूवुड में किसी अन्य धर्म का इस तरह से अपमान होते हुए देखा है क्या? वीडियो सामने आने के बाद अभिनेता ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर कर इसके लिए माफी माँगी है।

उन्होंने लिखा, “जब कोई शूटिंग कर रहा होता है तो दो फैक्टर होते हैं… जिसमें सीक्वेंस के दौरान विशेष रूप से एक्शन सीन के समय व्यक्ति का माइंडसेट होता है। इसमें निर्देशक की जरूरतों, समय की कमी और बहुत सी अन्य चीजें शामिल है। आप इस वीडियो में जो कुछ देख रहे हैं, उसको एक्सप्लेन करना या फिर खुद को सही ठहराना ठीक नहीं है। मैं बस इतना कह कहना चाहता हूँ कि यह सब अनजाने में किया गया था।”

अभिनेता ने आगे लिखा, “मैं इसके लिए आप सभी से माफी माँगता हूँ। मुझे उसे देखना चाहिए था और निर्देशक के ध्यान में भी लाना चाहिए था। मैं आगे से कभी भी जानबूझकर किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाऊँगा और न ही इस तरह का सीन फिर कभी दोहराऊँगा।”

भले ही अभिनेता ने अपने इस कृत्य के लिए माफी माँग ली है, लेकिन सोशल मीडिया पर अभी भी लोगों का उनका प्रति गुस्सा कम नहीं हुआ है। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “चलो.. गलती तो मानी…हमारे सदी के महानायक ने तो ऐसे सीन्स का रिकॉर्ड बनाया है और गलती भी नहीं मानते…थोड़े दिन पहले Good Bye फिल्म में भी गजब के कारनामे किए थे।”

एक और यूजर लिखते हैं कि गलती स्वीकार करने के लिए धन्यवाद। उम्मीद है कि आप जिस इंडस्ट्री में काम करते हैं, उसमें अपने सहयोगियों को भी शिक्षित करेंगे। उन्हें बताएँगे कि यह घृणित है।

एक अन्य ने लिखा कि कम से कम आपको एहसास हुआ। सावधान रहें और अगली बार शूटिंग से पहले हर चीज को बारीकी से देखें।

‘जिंदा है LTTE वाला प्रभाकरन’: पूर्व कॉन्ग्रेस नेता का दावा- जल्द आएगा सामने, श्रीलंका ने 2009 में मार गिराने का किया था दावा

आतंकवादी संगठन लिट्टे के चीफ प्रभाकरन के जिंदा होने का दावा किया गया है। यह दावा पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और ‘वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ तमिल’ के अध्यक्ष पाझा नेदुमारन ने किया है। नेदुमारन कहा है कि प्रभाकरन उनके संपर्क में है और जल्द ही सामने आएगा। श्रीलंकाई सरकार ने मई 2009 में प्रभाकरन के मारे जाने की घोषणा की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (13 फरवरी 2023) को तमिलनाडू के तंजावुर में मीडिया से बात करते हुए पाझा नेदुमारन ने कहा है कि श्रीलंका की वर्तमान स्थिति और राजपक्षे सरकार के खिलाफ विद्रोह को देखते हुए प्रभाकरन के सामने आने का सही समय आ गया है। प्रभाकरन जल्द ही सबके सामने आएगा।

पाझा नेदुमारन ने यह भी कहा है कि उन्हें दुनिया भर की तमिल आबादी के सामने यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि प्रभाकरन बहुत अच्छा काम कर रहा है और वह जिंदा है। इससे प्रभाकरन को लेकर चल रहीं अफवाहों को विराम मिलेगा। प्रभाकरन जल्द ही तमिलों के बेहतर जीवन के लिए कुछ नया करेगा। इसलिए दुनिया भर के तमिलों को एकजुट हो जाना चाहिए।

नेदुमारन ने आगे कहा है कि प्रभाकरन और लिट्टे ने भारत का विरोध करने वाले किसी भी देश को कभी भी अपनी जमीन पर पैर नहीं रखने दिया। उन्होंने कहा, “न ही ऐसे किसी देश से उसका कोई संबंध रहा जो भारत का विरोधी हो। इसीलिए, भारत सरकार को श्रीलंका में चीन की मजबूत होती स्थिति को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।” उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह प्रभाकरन के परिवार के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि प्रभाकरन फिलहाल अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहा है। उसको लेकर यह जानकारी वह प्रभाकरन के परिवार की स्वीकृति के बाद दे रहे हैं।

कौन है प्रभाकरन

वेलुपिल्लई प्रभाकरन श्रीलंकाई तमिल गुरिल्ला और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे (LTTE) का संस्थापक है। वह श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में एक स्वतंत्र तमिल राज्य बनाने की माँग करता था। लिट्टे के कारण करीब तीन दशक तक श्रीलंका गृह युद्ध की आग में जलता रहा। हालाँकि इसके बाद श्रीलंकाई सेना ने मई 2009 में प्रभाकरन को मौत के घाट उतार दिया।

प्रभाकरन की मौत को लेकर अलग-अलग तरह के दावे होते रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि सेना से घिरने के बाद उसने खुद को गोली मार ली थी। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में सेना द्वारा उसको मौत के घाट उतारने की बात कही गई थी। हालाँकि, बीते 14 साल में प्रभाकरन के जीवित होने को लेकर पहली बार दावा किया गया है।

जामिया हिंसा: शरजील-सफूरा सहित 11 को बरी करने पर हाई कोर्ट का नोटिस, कहा- आगे जाँच होगी, ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों का असर नहीं

दिल्ली पुलिस ने जामिया हिंसा मामले में 11 लोगों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार (13 मार्च 2023) को हाई कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। साथ ही स्पष्ट किया है कि इस मामले की आगे की जाँच या केस पर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों का कोई असर नहीं होगा। ट्रायल कोर्ट ने 2019 के हिंसा मामले में जिन लोगों को बरी कर दिया था उनमें शरजील इमाम, सफूरा जरगर और आसिफ इकबाल तन्हा भी शामिल हैं।

मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने हालाँकि निचली अदालत की टिप्पणियों को हटाने के लिए अंतरिम निर्देश पारित करने के दिल्ली पुलिस के आग्रह को स्वीकार से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “आगे की जाँच की जाएगी, इसलिए जाँच एजेंसी के खिलाफ की गई टिप्पणियों का आगे की जाँच या किसी आरोपित के मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

दरअसल 4 फरवरी 2023 को निचली अदालत ने शरजील इमाम समेत 11 लोगों को बरी किया था। निचली अदालत ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ काफी सख्त टिप्पणी की थी और कहा था कि पुलिस असली आरोपितों तक पहुँचने में विफल रही और इनलोगों को बलि का बकरा बनाया है। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली पुलिस को बगावत और विरोध मे अंतर समझना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इनलोगों के मिलीभगत से यह हिंसा हुई है, इसका कोई प्रमाण नहीं है।

हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (AG) संजय जैन ने तर्क दिया कि ये टिप्पणियाँ आगे की जाँच को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस जाँच जारी रखने और चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति देने के लिए एक अंतरिम आदेश की माँग की।

उन्होंने कहा, “मुझे निचली अदालत की टिप्पणियों से गंभीर समस्या है। क्या ये निष्कर्ष स्वीकार्य हैं? क्या वह एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहे थे? आदेश एक सेल्फ गोल (SELF GOAL) करने जैसा है। और एक सेल्फ गोल करने के बाद, वह कहते हैं कि ‘मैं जीत गया’। वह कहते हैं कि दंगों ने तबाही मचाई। अगर यह तबाही थी, तो क्या पुलिस का यह कर्तव्य नहीं है कि वह उन लोगों को गिरफ्तार करे?”

क्या था मामला

मामला दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया और इसके आसपास हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। यहाँ कुछ छात्रों और स्थानीय लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के विरोध में संसद की ओर मार्च करने का आह्वान किया था। मार्च ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने शांत करने का प्रयास किया तो उन पर पथराव किए गए और कुछ विरोध करने वाले छात्र कथित तौर पर विश्वविद्यालय में प्रवेश कर गए।

दिल्ली पुलिस ने कुल मिलाकर मामले में 12 लोगों को आरोपित बनाया था। इन 12 लोगों में शरजील इमाम, आसिफ इकबाल तन्हा, सफूरा जरगर, मोहम्मद अबुजर, उमैर अहमद, मोहम्मद शोएब, महमूद अनवर, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद बिलाल नदीम, शहजर रजा खान और चंदा यादव और मोहम्मद इलियास शामिल थे। निचली अदालत में 4 फरवरी 2023 को हुई सुनवाई में केवल मोहम्मद इलियास को मामले में आरोपित माना और इमाम समेत अन्य को आरोपमुक्त कर दिया गया।