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भगवान गणेश को विष्ठा बताने वाले तन्मय भट्ट को ‘कोटक महिंद्रा बैंक’ ने विज्ञापन से निकाला, लोगों ने शुरू कर दिया था अकाउंट बंद कराना

हाल ही में यूट्यूबर और कॉमेडियन तन्मय भट्ट कोटक महिंद्रा बैंक के एक एडवर्टाइजमेंट में दिखाई दे रहे थे। लेकिन अब वह इस विज्ञापन में दिखाई नहीं देंगे। दरअसल, सोशल मीडिया पर कोटक महिंद्रा बैंक को टैग करते हुए तन्मय भट्ट के पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट पोस्ट किए गए थे। इन ट्वीट्स में तन्मय हिंदू धर्म का अपमान करने के साथ ही चाइल्ड पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देते हुए देखे जा सकते हैं। इसके बाद बैंक ने एड वापस लेने का फैसला किया।

‘MeeToo’ कैंपेन के दौरान यौन शोषण के गंभीर आरोप झेल चुके तन्मय भट्ट का हिंदू विरोधी चेहरा कई मामलों में सामने आता रहा है। यह उनकी कॉमेडी में भी झलकता है। इसको लेकर मोनिका वर्मा नामक ट्विटर यूजर ने कोटक महिंद्रा बैंक और बैंक के सीईओ उदय कोटक को टैग करते हुए एक ट्वीट किया था।

मोनिका वर्मा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “मैं आपके बैंक की ग्राहक हूँ। लेकिन आपने अपने एक ऐड लिए हिंदूफोबिक, महिला और बच्चों का शोषण करने वाले तन्मय भट को साइन किया है। इसलिए मैं अपना अकाउंट बंद करने का विचार कर रही हूँ। उसके साथ संबंध खत्म करते हुए माफी माँगें।”

तन्मय भट्ट के ट्वीट

तन्मय भट्ट ने मई 2012 में @BigBhangTheory नामक यूजर को टैग करते हुए कहा था, आप कैसे जानते हैं कि बच्चे बलात्कार से प्यार नहीं करते?

वहीं एक अन्य ट्वीट में तन्मय ने लिखा है, “जब मैं छोटी लड़कियों की नग्न तस्वीरें देखता हूँ तो मुझे बेहद अजीब लगता है। मेरे दिमाग में आता है “हा हा! मैंने तुम्हारे बूब्स देखे। हा हा!”

कुछ अन्य ट्वीट्स में उसने हिंदू धर्म का अपमान करने की कोशिश की है। तन्मय ने लिखा है, “हर साल अफ्रीका के तट पर, हाथी जंगल से निकलते हैं। गणपति की मूर्तियों को देखते हैं और जाते हैं “क्या मैडम तुसाद हमें यह मल भेज रहे हैं?”

तन्मय ने एक अन्य ट्वीट में @rohan5513 नामक यूजर को टैग करते हुए लिखा, “मुझे खेद है कि मैंने गणेश की मूर्तियों की तुलना मल से की। मैं ईमानदारी से कहना चाहता हूँ वास्तव में मल पर्यावरण के लिए उससे बेहतर है।” तन्मय ने अपने ट्वीट्स में लगातार हिंदुओं के आराध्य भगवान गणेश का अपमान किया है। एक ट्वीट में उसने लिखा है, “गणेश यदि समस्याओं को दूर कर सकते हैं तो निश्चित रूप से वह ट्रैफिक में अच्छा काम कर सकते हैं।”

तन्मय भट्ट एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “जब मैंने मूर्तियों को ‘मल’ कहा तो वो (हिंदू) नाराज हो गए। मुझे इसका खेद है। वास्तव में मल पर्यावरण के लिए बेहतर है। इसकी तुलना नहीं करनी चाहिए।”

तन्मय भट्ट के इन ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद नेटिजेन्स ने सक्रियता दिखाते हुए कोटक महिंद्रा बैंक को टैग करते हुए ट्वीट करना शुरू कर दिया। लोग बैंक से अपना अकाउंट बंद कराने की बात कह रहे थे।

एक यूजर ने लिखा, “बहुत ही घटिया हरकत की है उदय कोटक ने। अपने धंधे के लिए भारतीय सनातन संस्कृति को ताक पर रख दिया। भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की पूजा जहाँ होनी चाहिए, वहाँ भगवान गणेश का अपमान करने वाले निर्लज्ज और घटिया आदमी को चुना गया है। ऐसे धंधेबाज समाज का कोढ़ हैं । बहुत ही शर्मनाक।”

एक अन्य यूजर ने ट्वीट कर कहा, “बचपन से ही हम 10 दोस्तों का एक ग्रुप है। सभी के अकाउंट इस बैंक में हैं। हम सबका खाता बंद होने जा रहा है। व्यापार में घाटा सबसे बेहतरीन शिक्षक होता है। जय हिंद।”

हालाँकि विरोध झेलने के बाद अब कोटक महिंद्रा बैंक ने अपने ऐड को वापस लेने का फैसला किया है। इसको लेकर बैंक की ओर से ट्वीट किया गया। ट्वीट में बैंक ने कहा है, “हम, कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड में उन एक्टर्स के विचारों का समर्थन नहीं करते हैं जो किसी व्यक्ति या समूह को नुकसान पहुँचाते हैं या फिर अपमानित करते हैं। हमने ऐड वापस ले लिया है।”

‘बलिदान स्वीकार, धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं’: लोकेश मुनि ने बताया जमीयत के मंच से मदनी को क्यों ललकारा, मुस्लिम भीड़ के सामने जैन मुनि ने दी थी चुनौती

लोकेश मुनि ने कहा है वे बलिदान स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन अपने सामने अपनी धर्म और संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। जैन मुनि ने बताया है कि यही कारण है कि उन्होंने मौलाना अरशद महमूद मदनी के बयान का विरोध किया था। उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी।

जैन मुनि ने इस घटना का एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “मुझे अपनी शहादत मंजूर थी। मैं अपनी आँखों के सामने अपने धर्म, संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। इसलिए विरोध किया, शास्त्रार्थ की चुनौती दी।”

जैन मुनि ने रविवार (12 फरवरी 2023) को मदनी को जमीयत के मंच से ही चुनौती दी थी। जब वे मदनी का विरोध कर रहे थे, तब सामने मुस्लिम भीड़ मौजूद थी और मंच पर विभिन्न धर्मों के गुरु मौजूद थे। दिल्ली के रामलीला मैदान में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन का रविवार को आखिरी दिन था। लोकेश मुनि के विरोध के बाद जैन और हिंदू धर्मगुरुओं ने जमीयत का मंच छोड़ दिया था।

इस्लामी संगठन जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद महमूद मदनी ने मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को एक बताया था। इसको लेकर जैनाचार्य लोकेश मुनि ने मौलाना को लताड़ लगाते हुए मंच छोड़ दिया था।

मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने लगाई थी लताड़

मौलाना मदनी के बेतुके बयानों पर फटकार लगाते हुए जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा था, “मदनी ने जो कहा है उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ यदि हमें जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ओम, अल्लाह, मनु, ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइए या मुझे सहारनुपर बुलाइए।”

उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा है, “आपने जो बात कही मैं उससे सहमत नहीं हूँ। चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं हैं। हम केवल आपस मे मिल-जुलकर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ओम, मनु, अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता के सद्भावना के सम्मेलन में।”

मनु, आदम तथा ओम और अल्लाह को बताया था एक

दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के कार्यक्रम में कहा था, “मैंने धर्म गुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ओम को पूजते थे। ओम कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”

मौलाना ने आगे कहा है, “इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे। वह ओम यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”

यही नहीं मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। बल्कि अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं और वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं।

राजस्थान में जिस मुस्लिम युवक के नाम से बाबा रामदेव पर FIR, उसे मामले की जानकारी तक नहीं: कहा- जमीन विवाद को लेकर वकील से मिला था

योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ राजस्थान में जिस मुस्लिम युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी, उसे इस मामले की खबर तक नहीं है। इस मुस्लिम युवक का नाम पठाई खान है। वह बाड़मेर का रहने वाला है। उसने अपने नाम के गलत इस्तेमाल और वकील पर धोखा देने का आरोप लगाया है। पठाई खान ने रविवार (12 फरवरी 2023) को खुद को फँसाए जाने का दावा किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पठाई खान ने बताया है कि उसने बाबा रामदेव पर कोई FIR नहीं दर्ज करवाई है। उसने बताया कि वह जमीन के एक विवाद के सिलसिले में एक वकील से मिला था। पठाई ने बताया कि वकील ने एक कागज पर उसके दस्तखत ले लिए थे। वकील पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए पठाई खान ने बताया कि इसी साइन का उपयोग बाबा रामदेव के खिलाफ FIR दर्ज करवाने में किया गया। वकील द्वारा खुद को फँसाने की आशंका जाहिर करते हुए पठाई ने बताया कि वह इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं चाहता है।

दरअसल यह FIR बाड़मेर जिले के चौहटन थाने में 5 फरवरी 2023 (रविवार) को दर्ज हुई थी। SHO भुताराम ने बताया था कि योगगुरु रामदेव के विरुद्ध IPC की धारा 153-A, 295- A और 298 के तहत केस दर्ज हुआ था। तब थाना प्रभारी ने भी शिकायतकर्ता के तौर पर पिठाई खान के होने की पुष्टि की थी।

क्या था पूरा मामला

इसी माह 3 फरवरी को बाबा रामदेव ने बाड़मेर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि मुस्लिम समुदाय का आतंकी और अपराधी भी नमाज जरूर पढ़ता है। रामदेव ने इसकी वजह नमाज़ को ही इस्लाम समझने की भूल बताया था। उन्होंने हिन्दुओं की विचारधारा को इस से अलग बताया था। इस बयान को मुस्लिम विरोधी बताते हुए राजस्थान सरकार से बाबा रामदेव पर कार्रवाई की माँग की गई थी। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी तब जिले के DM ऑफिस पर बाबा रामदेव के खिलाफ नारेबाजी की थी।

‘गवाहों को धमकाओ, न माने तो रास्ते से हटाओ’: मुख्तार अंसारी की बहू भी कम शातिर नहीं, जेल के कमरे में मिली थी; रोज शौहर से मिलने जाती थी

10 फरवरी 2023 को चित्रकूट की रगौली जेल पर छापे के बाद एक कमरे से माफिया मुख्तार अंसारी की बहू निखत पकड़ी गई थी। वह जेल में बंद अपने शौहर अब्बास अंसारी से रोज मिलने जाती थी और तीन से चार घंटे साथ बिताती थी। इस संबंध में दर्ज एफआईआर से यह जानकारी सामने आई है कि अब्बास को जेल से भगाने की साजिश थी। निखत के मोबाइल से अब्बास जेल में बैठकर अपने गुर्गों को आदेश देता था।

यह एफआईआर रगौली चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर श्याम देव सिंह की शिकायत पर 11 फरवरी को दर्ज की गई है। इसमें बताया गया है कि निकहत अंसारी जेल के कुछ स्टाफ के साथ मिलकर अब्बास को फरार करवाने की साजिश रच रही थी। साथ ही अब्बास अंसारी अपने केस से जुड़े पुलिसकर्मियों, गवाहों और अभियोजन पक्ष के लोगों की हत्या करवाने की तैयारी कर रहा था।

निखत ने बताया है कि अब्बास उसे उन लोगों के नाम बताता था जिन्हें धमकी देनी होती थी। अब्बास के कुछ गुर्गों के नाम भी बताए हैं, जिन्हें वह जेल से आदेश देता था। इन गुर्गों से अब्बास ने कहा था कि पहले गवाहों को मुकरने के लिए धमकी दो और जो न माने उसे रास्ते से हटा दो।

खाड़ी देश की मुद्रा भी बरामद

FIR में बताया गया है कि निखत अंसारी के पास से 2 मोबाइल फोन, 21 हज़ार रुपए कैश के साथ 12 रियाल बरामद हुए हैं। रियाल खाड़ी देशों की मुद्रा है। इसके अलावा कुछ सोने के आभूषण भी मिले हैं, जिन्हे सील कर दिया गया है। FIR के मुताबिक जब निखत से उनका फोन माँगा गया तो उसने पुलिसकर्मियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। पुलिस द्वारा मोबाइल का पासवर्ड पूछे जाने पर उसने गलत पासवर्ड बताए। पुलिस के मुताबिक निखत ने फोन से कुछ डाटा डिलीट करने की भी कोशिश की।

जेल में नहीं होती थी निखत की एंट्री

FIR में बताया गया है कि मुख़्तार अंसारी की बहू निखत की जेल में एंट्री रजिस्टर पर दर्ज नहीं होती थी। वह लगभग हर दिन 11 बजे सुबह जेल में अपने शौहर के पास आती थी। 3 से 4 घंटे समय बिताने के बाद वापस लौट जाती थी। निखत को जेल उसका ड्राइवर नियाज लाता और ले जाता था। मुलाकात के दौरान निखत अब्बास को पैसे देती थी जिसका इस्तेमाल जेल में सुविधा पाने के लिए वह करता था। निखत के फोन से ही वह अपने गुर्गों से सम्पर्क करता था।

सादी वर्दी में प्राइवेट कार से पहुँची थीं SP और DM

FIR में बताया गया है कि जेल में अनियमितता की लगातार शिकायतें मिलने के बाद 10 जनवरी 2023 को चित्रकूट जिले की SP वृंदा शुक्ला और DM अभिषेक आनंद वहाँ बिना किसी को बताए पहुँचे थे। SP ने वर्दी नहीं पहनी थी और DM भी अपनी सरकारी गाड़ी छोड़ कर प्राइवेट वाहन से गए थे। कुछ समय बाद पुलिस की स्वाट टीम के इंस्पेक्टर श्याम प्रताप पटेल भी वहीं बुला लिए गए। इसके बाद जेल में तलाशी शुरू कर दी गई। तलाशी के दौरान अब्बास अपनी बैरक में नहीं मिला। पता चला कि वो जेल अधीक्षक के ऑफिस के बगल वाले कमरे में अपनी बीवी के साथ है।

जब प्रशासनिक अमला वहाँ पहुँचा तब तक जेल के कर्मचारी अब्बास को निकाल कर चुपके से ले जा चुके थे। कमरे में निखत अंसारी मिली। उसकी तलाशी ली गई तो उसने पुलिस को धमकाया भी। हालाँकि बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। ड्राइवर नियाज भी गिरफ्तार हुआ है। FIR में जेल अधीक्षक सहित ड्यूटी पर तैनात अन्य स्टाफ भी नामजद किए गए हैं। ऑपइंडिया को स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक निखत ने चित्रकूट के कर्वी मार्किट में एक घर किराए पर ले रखा था। बताया जा रहा है कि वह अब्बास के लिए नॉनवेज लेकर जेल जाती थी। जेल मैनुअल के खाने में नॉनवेज प्रतिबंधित है।

पाकिस्तान पर जीत के साथ वर्ल्ड कप का शानदार आगाज: भारत की बेटियों ने पड़ोसी मुल्क को 7 विकेट से चटाई धूल, जेमिमा-राधा का कमाल

ICC महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने कमाल कर दिया है। भारत की बेटियों ने पाकिस्तान को 7 विकेट से धूल चटाते हुए टूर्नामेंट का शानदार आगाज किया है। पाकिस्तान की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 149 रनों का स्कोर खड़ा किया था। इसमें सबसे ज्यादा योगदान कप्तान बिस्माह मारूफ का था, जिन्होंने 55 गेंदों पर 7 चौकों की मदद से 68 रनों की नाबाद पारी खेली। उनके अलावा छठे नंबर पर उतरीं आयेशा नशीम ने अच्छी पारी खेली।

उन्होंने अंत में 25 गेंदों पर 43 रनों की धुआँधार पारी खेल कर टीम को एक ठीक स्कोर तक पहुँचाया। इसके अलावा पाकिस्तान की कोई भी बल्लेबाज अच्छा नहीं खेल सकी। भारत की तरफ से राधा यादव ने किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में मात्र 21 रन देकर 2 विकेट लिए। उनके अलावा पूजा वस्त्रकार और दीप्ति शर्मा को एक-एक विकेट मिले। पूजा को जहाँ 39 रन पड़े, वहीँ दीप्ति को 4 ओवरों में 30 रन पड़े।

जवाब में रन चीज करने उत्तरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी रही। दोनों ओपनर बल्लेबाजों ने मिल कर 38 रन की पार्टनरशिप की, लेकिन 5.3 ओवर में यास्तिका भाटिया 20 गेंदों पर 17 रन बना कर चलती बनी। उधर, शेफाली वर्मा ने 25 गेंदों पर 33 रनों की पारी खेली। लेकिन, असली काम किया तीसरे नंबर पर उतरीं जेमिमा रोड्रिगेज ने। उन्होंने 38 गेंदों पर 53 रनों की ठोस अर्धशतकीय पारी खेली। अंत में ऋचा घोष ने 20 गेंदों पर 31 रन मारे।

जेमिमा रोड्रिगेज को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ के ख़िताब से भी नवाजा गया। वो अंत तक नाबाद रहीं। बीच में हरमनप्रीत कौर ने भी 12 गेंदों पर 16 रनों की एक अच्छी कैमियो पारी खेली। पाकिस्तानी बल्लेबाज फातिमा सना की जबरदस्त पिटाई हुई, जिन्हें 4 ओवर में 42 रन पड़े लेक्रिन विकेट एक भी नहीं मिला। नशरा संधू सबसे सफल पाकिस्तानी गेंदबाज रहीं, जिन्होंने 4 ओवर में मात्र 15 रन देकर दो विकेट झटके। सादिया इक़बाल को एक विकेट मिला।

‘मुझे नहीं मालूम लोकेश मुनि के मन में क्या था’: ‘परमार्थ निकेतन’ वाले चिदानंद सरस्वती को मदनी के बयान से दिक्कत नहीं, जमीयत के मंच पर उसके साथ बैठे रहे

इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद और उसके चीफ मौलाना अरशद महमूद मदनी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पहले भारत को मुस्लिमों की मातृभूमि बताने के बाद अब मौलाना मदनी ने मनु, आदम तथा और अल्लाह को एक बता दिया है। इसको लेकर जैन आचार्य मुनि लोकेश ने मदनी को लताड़ लेते हुए मंच छोड़ दिया था। हालाँकि अब आचार्य चिदानंद ने मदनी के बयान का समर्थन किया है। वहीं चक्रपाणि महाराज ने मदनी को सनातनी बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद ने कहा है, “मदनी के बयान में सहमति और असहमति की बात नहीं है। मैंने अपने विचार अपने ढंग से प्रकट किए। उन्होंने अपने विचार अपने ढंग से प्रकट किए हैं। जिसको सुनना होगा वो सुनेगा। मुझे नहीं मालूम लोकेश मुनि जी के मन में क्या था और उन्होंने क्या समझा है। किस रूप में इसे लिया है।”

आचार्य चिदानंद ने यह भी कहा है, “मैंने मदनी की बात को इस रूप से लिया है कि मैं सब का सम्मान करता हूँ। मेरे लिए सब समान है और मैं सब का सम्मान करता हूँ। यही हमारे देश का संविधान भी है। हालाँकि यदि कोई इस्लाम धर्म को मानता है और उसकी विशेषता बताता है, तो उसको बताना ही चाहिए। यह स्वाभाविक है। वह उसकी विशेषता बताएँगे ही।”

उन्होंने आगे कहा है कि हिंदू धर्म मानने वाला भी हिंदू धर्म की विशेषता बताएगा। लेकिन अपने अपने धर्म की विशेषता को बताते हुए अपने मूल से, अपने मूल्यों से और अपनी जड़ों से अपनी संस्कृति तथा संस्कारों से जुड़े रहना चाहिए। यही आज का संदेश है।

वहीं मदनी के बयान को लेकर अब इस पर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चक्रपाणि महाराज ने भी पलटवार किया है। चक्रपाणि महाराज ने कहा है कि मौलाना मदनी ने कहा है वह मनु को मानते हैं तो मनु तो सनातन धर्मी थे। उन्हें भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर बचाया था। इसलिए मौलाना मदनी भी सनातनी हिंदू हुए। अब उन्हें राष्ट्रभक्ति दिखाने, वंदे मातरम बोलने और भारत माता की जय बोलने की आवश्यकता है। क्योंकि हिंदू सनातन धर्मी राष्ट्रभक्त होते हैं।

मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को बताया था एक

दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मैंने धर्म गुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था। न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ॐ को पूजते थे। ॐ कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”

मौलाना ने आगे कहा है, “इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे। वह ॐ यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”

यही नहीं मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। बल्कि अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं और वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं।

मौलाना मदनी को जैनाचार्य लोकेश मुनि ने लगाई लताड़

जैन आचार्य लोकेश मुनि ने मौलाना मदनी को फटकार लगाते हुए कहा है, “मदनी जो कहा है उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ यदि हमें जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ॐ, अल्लाह, मनु, ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइये या मुझे सहारनुपर बुलाइये।”

उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा है, “आपने जो बात कही मैं उससे सहमत नहीं हूँ। चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं है। आप केवल आपस मे मिलजुलकर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ॐ, मनु अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता के सद्भावना के सम्मेलन में।”

3 दिन में जवाब दो… राहुल गाँधी को नोटिस, लोकसभा में PM मोदी पर की थी असंसदीय टिप्पणी

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को लोकसभा सचिवालय ने नोटिस भेजा है। उन्हें यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई ‘असंसदीय टिप्पणी’ को लेकर भेजा गया है। दरअसल, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गाँधी पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया था। साथ ही, सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई थी। नोटिस का जवाब देने के लिए राहुल को बुधवार (15 फरवरी, 2023) तक का समय दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गत 7 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। इस दौरान राहुल गाँधी ने पीएम मोदी को टिप्पणी की थी। इसको लेकर उन पर गलत, अवमानना, असंसदीय टिप्पणी करने व भ्रामक तथ्य रखने का आरोप लगा था।

इसके बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गाँधी पर विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। यही नहीं, निशिकांत दुबे और प्रह्लाद जोशी ने राहुल गाँधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया था।

साथ ही दोनों नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा था। एक पत्र में प्रह्लाद जोशी माँग की थी कि नियम 380 के तहत राहुल की असंसदीय टिप्पणी और तथ्यों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाए। अब इस मामले पर कार्रवाई करते हुए लोकसभा सचिवालय के विशेषाधिकार और आचरण शाखा के उप-सचिव ने राहुल गाँधी को मेल करते हुए नोटिस जारी किया है। इस नोटिस का जवाब देने के लिए राहुल गाँधी को बुधवार (15 फरवरी, 2023) तक का समय दिया गया है।

दरअसल, राहुल गाँधी ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि अडानी के लिए मोदी सरकार ने नियमों में बदलाव किए। साल 2014 में दुनिया के अमीर लोगों की लिस्ट में अडानी 609 नंबर पर थे। लेकिन फिर इसके बाद पता नहीं ऐसा कौन सा जादू हुआ कि अडानी दूसरे नंबर पर आ गए। राहुल गाँधी के इन आरोपों को लेकर भाजपा नेताओं ने पलटवार किया था। भाजपा का कहना था कि राहुल गाँधी ने बिना किसी सबूत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाए हैं। इसलिए उन्हें देश से माफी माँगनी चाहिए।

चाहे जितनी पुलिस लगा लो, हमने चूड़ियाँ नहीं पहन रखी हैं… अल्ताफ बुखारी का ऐलान – J&K में एक भी ‘बाहरी’ को नहीं बसने देंगे, जमीनों पर हक़ हमारा

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती अक्सर भड़काऊ बयान देते रहते हैं। इस फेहरिस्त में एक नाम अल्ताफ बुखारी का भी है। ‘जम्मू एंड कश्मीर अपनी पार्टी’ के संस्थापक एवं अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने कहा है कि वो ‘बाहरियों’ को यहाँ बसने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में यहाँ के लोगों की अपनी सरकार होनी चाहिए, जहाँ कम से कम ये भेदभाव न हो कि ये जम्मू का है और ये कश्मीर का।

उन्होंने कहा कि हम सभी जम्मू कश्मीर के हैं और हमारे न सिर्फ मुद्दे साझे हैं, बल्कि उनके समाधान भी साझे होंगे। 2014 में श्रीनगर के अमीर कदल से विधायक चुने जा चुके अल्ताफ बुखारी ने कहा कि उनकी सरकार आएगी तो लोगों के खिलाफ’ किए गए निर्णय वापस लेने पड़ेंगे। उन्होंने कॉलनियों को नियमित करने की माँग करते हुए कहा कि देश के हर राज्य में ऐसे निर्णय होते हैं, दिल्ली में 6-6 महीने बाद कॉलनियाँ रेगुलराइज होती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर को केवल डंडे ही दिखाना चाहती है। उन्होंने कहा, “जो जम्मू कश्मीर का वासी नहीं है, ऐसे एक भी व्यक्ति को यहाँ बसने नहीं देंगे। चाहे उनकी सुरक्षा के लिए कितनी भी पुलिस या फ़ोर्स लगा दो। यहाँ कोई भी गैर-रियासती बाशिंदा नहीं रह सकता है। किसी को भी नहीं बसने देंगे। ये जमीनें हमारी हैं और इन पर हक़ जम्मू कश्मीर के वासियों का है। इनको अगर ये लगता है कि ये बाहर से किसी को लाके बिठाएँगे, तो हमने चूड़ियाँ नहीं पहनी हैं।”

उन्होंने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके दर्द का मखौल उड़ाते हुए कहा कि हम वो जमात भी नहीं हैं कि कहीं और जाकर ड्रामा करें। उन्होंने कहा कि हम वो जमात है जो लड़ेंगे और किसी भी गैर-वासी को यहाँ बसने नहीं देंगे। अल्ताफ बुखारी ने कहा कि फैसला हमलोग करेंगे, जम्मू कश्मीर के लोग करेंगे, यहाँ की चुनी हुई सरकार करेगी कि इन कॉलनियों-जमीनों के साथ क्या करना है। उन्होंने कहा कि लोगों को सांप्रदायिक और क्षेत्रीय आधार पर बाँटा जा रहा है, उन्हें होशियार रहना चाहिए।

घूमते आवारा कुत्ते, मूर्ति पर कालिख और जूते-चप्पल पहने लोग: बदतर स्थिति में बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद का अंत्येष्टि स्थल, लोग बोले – न नेता आते हैं न अधिकारी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj, Uttar Pradesh) शहर के मध्य मौजूद क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान स्थल के पास हमने अपनी पहली रिपोर्ट में एक दरगाह की जानकारी दी थी। तब हमने बताया था कि कैसे चंद्रशेखर आज़ाद पार्क के मुख्य गेट पर मौजूद वक्फ बोर्ड की एक दरगाह में मर्दों को टोपी पहन कर आने का फरमान लिखा गया है। इस पार्क की पड़ताल के बाद हम स्थान की तरफ आगे बढ़े, जहाँ चंद्रशेखर आज़ाद का अंतिम संस्कार हुआ था। यहाँ पर जो कुछ दिखा वो काफी हैरान कर देने के साथ सोच से भी परे था। पढ़िए इस सीरीज का दूसरा हिस्सा।

27 फरवरी, 1931 को स्वतंत्रता संग्राम लड़ने वाले बलिदानी ने जब अंतिम गोली खुद को मारी तब काफी देर बाद आज़ाद नाम से ही डरे अंग्रेज उनके पार्थिव शरीर तक जाने का साहस कर पाए थे। आख़िरकार कुछ देर बाद आज़ाद के वीरगति की खबर पूरे शहर में फ़ैल गई। भाव विह्वल हजारों लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। वो लोग अपने लिए बलिदान हुए उस आज़ाद को देखना चाहते थे, जिनका उन्होंने नाम भर सुना था।

आख़िरकार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के भीड़ जन सैलाब गगनचुम्बी नारों के साथ चंद्रशेखर आज़ाद के पार्थिव शव को ले कर रसूलाबाद श्मशान घाट की तरफ बढ़ा।

कहाँ है रसूलाबाद घाट

रसूलाबाद श्मशान घाट प्रयागराज से लखनऊ मार्ग पर ‘चंद्रशेखर आज़ाद पार्क’ यानी उनके बलिदान स्थल से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। यह स्थान मुख्य सड़क से लगभग 1 किलोमीटर अंदर है जहाँ तेलियरगंज नाम की प्रसिद्ध बाजार के अंदर से जाया जाता है। बेहद प्राचीन बताया जाने वाला यह शमशन घाट गंगा नदी के किनारे बना हुआ है। इसी घाट के पास रहने वाले प्रयागराज के मनोज शुक्ला ने हमें बताया कि उनके पूर्वज बताते थे कि चंद्रशेखर आज़ाद को जब रास्ते से लाया जा रहा था तब उनके पार्थिव शव पर रास्ते में लोग फूल बरसा रहे थे।

रसूलाबाद श्मशान घाट पर आज़ाद के शव का विधि-विधान से अंतिम संसार किया गया था। मनोज के मुताबिक, दाह संस्कार के बाद प्रयागराज वासी श्रद्धा भाव से सहेज कर रखने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद की चिता से एक एक चुटकी राख तक उठा ले गए थे।

बलिदान स्थल से दाह स्थल की दूरी (चित्र साभार- गूगल मैप)

आज़ाद के किसी अनुयायी ने बनवाया था स्मारक

जब हम रसूलाबाद श्मशान घाट के उस स्थान पर पहुँचे जहाँ कभी चंद्रशेखर आज़ाद का अंतिम संस्कार हुआ था, तब वहाँ के हालात दयनीय दिखे। जिस स्थान पर क्रांतिकारी आज़ाद का दाह संस्कार हुआ था, वहाँ स्वतंत्र भारत में काफी समय पहले उनके ही किसी अनुयायी ने एक स्मारक बनवा दिया था। मीनारनुमा यह स्मारक लगभग 20 फ़ीट ऊँचा है और 4 से 5 फ़ीट चौड़ा। स्मारक के आस-पास लगभग 10 मीटर वर्ग क्षेत्र में लोहे की आधी-अधूरी ग्रिल से स्मारक को सहेजने का भी प्रयास किया गया है।

उसी स्थान पर कुछ सीमेंट की बेंच बनाई गईं हैं और मार्बल आदि से जगह को सुंदर बनाने का प्रयास किया गया है। स्मारक के बगल चंद्रशेखर आज़ाद की एक अन्य मूर्ति लगाई गई है।

यहीं हुआ था चंद्रशेखर आज़ाद का अंतिम संस्कार

बद से बदतर हैं आज़ाद का अंत्येष्टि स्थल

गुरुवार (9 फरवरी 2023) को ऑपइंडिया की टीम चंद्रशेखर आज़ाद की अंत्येष्टि स्थल पर थी। हमें वहाँ के हालत बेहद दयनीय दिखे। क्रांतिकारी की दाह स्थली पर आवारा कुत्ते घूम रहे थे और लोग जूते पहन कर उनके स्मारक के पास खड़े थे। दाह स्थली के आस-पास धूल और कंकड़ पड़े थे जैसे कई वर्षों से वहाँ सफाई नहीं हुई हो। कुछ आम लोगों द्वारा काफी पहले आज़ाद की अंत्येष्टि स्थल का रंग-रोगन करवाया गया था। स्मारक के पास बनी सीमेंट बेंच भी जर्जर हालत में थीं। वहाँ कुछ लोगों ने बीड़ी और सिगरेट पी कर उसके अवशेष छोड़ रखे थे।

हमने इस जगह की दुर्दशा अपने फेसबुक पर LIVE आ कर भी दिखाने का प्रयास किया।

बरसात में नदी में डूब जाती है दाह स्थली

इस स्मारक से सट कर बनी चंद्रशेखर आज़ाद की मूर्ति की हालत और दयनीय थी। मूर्ति पर आस-पास कभी जले दीयों की वजह से कालिख जम गई है। ये कालिख आज़ाद की मूर्ति के हाथों, पेट और चेहरे तक फैली हुई है। मूर्ति का निर्माण भी अधर में छोड़ दिया गया है, जिसमें ठीक से न तो प्लास्टर है और न ही रंगाई-पुताई। आस-पास लगे लोहे के छोटे-छोटे अवरोधक भी सिर्फ लोगों के बैठने के काम आते हैं। स्थानीय लोगों ने हमें यह भी बताया कि बरसात में अक्सर जब नदी बढ़ती है तब क्रांतिकारी आज़ाद के स्मारक का बड़ा हिस्सा नदी में डूब जाता है।

दाह स्थली पर घूम रहा कुत्ता और जूते पहन कर खड़े लोग

कभी नहीं आता कोई नेता या अधिकारी

चंद्रशेखर आज़ाद की दाह स्थली से सटी चाय और बिस्किट की छोटी-छोटी दुकानें हैं। जब हमने उन दुकानदारों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। हालाँकि, ऑफ़ कैमरा दुकानदारों ने हमें बताया कि उन्होंने कभी किसी प्रशासनिक अधिकारी या नेता-मंत्री आदि को उस दाह स्थली पर आते नहीं देखा। दबी जुबान से दुकानदारों ने स्मारक को भव्य बनवाने की इच्छा जताई। उनका कहना था कि ऐसा करने से लोगों का आवागमन बढ़ेगा जो उनके व्यापार के लिए भी सही रहेगा।

स्मारक पर कालिख लगी मूर्ति

दुखद ये भी रहा कि आज़ाद की दाह स्थली पर जूता उतारने की निजी तौर पर दी गई सलाह को भी कइयों ने अनसुना कर दिया। इस पूरे मामले में हमने चंद्रशेखर आज़ाद के परिजन अमित शेखर आज़ाद से बात की। उनसे हुई चर्चा को हम इस सीरीज के भाग 3 में प्रकाशित करेंगे।

स्वागत को खड़े थे लोग, गाड़ी रुकते ही फेंकी स्याही और काले झंडे: रामचरितमानस का अपमान करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध, गूँजा ‘जय श्री राम’

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर वाराणसी में स्याही फेंकी गई है। रामचरितमानस का अपमान करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य की गाड़ी को काले झंडे भी दिखाए गए। उनका जम कर विरोध प्रदर्शन हुआ। उन्हें युवाओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उस समय वो वाराणसी से सोनभद्र जा रहे थे। रास्ते में कुछ लोग उनका स्वागत करने के बहाने खड़े थे, जो हाथों में फूल और मालाएँ लिए हुए थे। उन्हें देख कर सपा नेता का काफिला भी रुका।

इसी दौरान युवकों ने उन पर काली स्याही फेंकी और साथ ही काले झंडे दिखाए। सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य नगवा ब्लॉक के मऊ महोत्सव में में शामिल होने के लिए जा रहे थे, उसी दौरान ये घटना हुई। हालाँकि, इस दौरान कोई हिंसा नहीं हुई और न ही किसी को कोई चोट आई है। स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस का विरोध करने और तुलसीदास को जातिवादी ठहराने के कारण चर्चा में हैं। इसके बाद से ही हिन्दू उनसे नाराज़ हैं।

बताया जा रहा है कि टेंगरा मोड़ पर हुई इस घटना में भाजपा के कई कार्यकर्ता शामिल थे। हालाँकि, स्याही स्वामी प्रसाद मौर्य पर नहीं पड़ी और उनकी गाड़ी पर ही लगी। उनके काफिले पर काले कपड़े भी फेंके गए। इस दौरान ‘जय श्री राम’ का नारा गूँजता रहा। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल भाजपा नेता दीपक सिंह राजवीर ने कहा कि स्वामी प्रसद मौर्य बार-बार सनातन धर्म पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज कभी रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी माफ़ नहीं करेगा।

उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य पर कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि उन्हें माफ़ी माँगनी ही होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेता का मकसद सिर्फ और सिर्फ देश को बाँटने की है, उनका न कोई सिद्धांत है और न ही कोई विचार। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य को मौकापरस्त बताते हुए याद दिलाया कि कैसे उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती के पाँव छुए थे। उन्होंने याद दिलाया कि अब यही मौर्य मायावती को गाली देते हैं। बता दें कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी स्वामी के बयान का समर्थन किया था।