प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (12 फरवरी, 2023) को राजस्थान के दौसा में देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे के पहले हिस्से का उद्घाटन किया। इसके पीएम ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस बॉर्डर पर सड़क बनाने से डरती थी। उनको लगता था कि सड़क से दुश्मन देश में घुस आएगा। कॉन्ग्रेस हमारे सैनिकों की बहादुरी को कम आँकती है।
दौसा में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, “आज राजस्थान के, देश के विकास का उत्सव है। आज देश में बन रहे सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण हुआ है। इस एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण से दौसा के अलावा अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, बुंदी और कोटा जिले को लाभ होगा।”
आज राजस्थान के, देश के विकास का उत्सव है।
आज देश में बन रहे सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण हुआ है।
इस एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण से दौसा के अलावा अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, बुंदी और कोटा जिले को लाभ होगा
उन्होंने यह भी कहा है कि दशकों तक राजस्थान को कुछ लोगों ने बीमारू राज्य कहकर के चिढ़ाया है। लेकिन भाजपा राजस्थान को विकसित भारत का सबसे मजबूत आधार बना रही है। राजस्थान की धरती शूरवीरों की धरती है। यहाँ बच्चे-बच्चे का सपना रहा है कि भारत दुनिया में किसी से भी कम न हो। इसी सपने को पूरा करने के लिए अब भारत ने विकसित बनने का संकल्प लिया है।
दशकों तक राजस्थान को कुछ लोगों ने बीमारू राज्य कहकर के चिढ़ाया है।
लेकिन भाजपा राजस्थान को विकसित भारत का सबसे मजबूत आधार बना रही है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा है कि कॉन्ग्रेस की सरकार भारत के सीमावर्ती इलाकों में सड़क बनाने से डरती थी। उन्हें लगता था कि दुश्मन हमारी बनाई सड़कों से चलकर देश के भीतर आ जाएगा। यह समझ नहीं आता कि आखिर ऐसा क्या था कि कॉन्ग्रेस देश सैनिकों के शौर्य और बहादुरी को कम आँकती रही है। सीमा पर दुश्मनों को रोक देना, उन्हें मुँह तोड़ जवाब देना, हमारी सेनाओं को बखूबी आता है।
कांग्रेस की सरकारें सीमा से जुड़े गांवों और शहरों का इसीलिए विकास नहीं करती थीं क्योकि वो डरती थीं कि कहीं दुश्मन हमारी ही बनाई सड़कों से चलकर देश के भीतर आ जाएगा।
राजस्थान सरकार के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पुराना बजट पढ़ दिया था। इसको लेकर पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा है, “अभी जो बजट सत्र हुआ उसकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। मैं मानता हूँ कि गलती किसी से हो सकती है। लेकिन कॉन्ग्रेस के पास न विजन है और न वजन। बजट और घोषणाओं को लागू करने का कॉन्ग्रेस का कोई ईरादा नहीं है। सवाल ये नहीं है कि कौन सा बजट पढ़ा। सवाल ये है कि पिछला बजट भी साल भर से डिब्बे में बंद पड़ा था।”
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा है कि अब राजस्थान को अस्थिर सरकार से मुक्ति चाहिए, अनिश्चिताओं से मुक्ति चाहिए। अब राजस्थान को स्थिर और विकास वाली सरकार चाहिए, तभी राजस्थान में कानून का राज स्थापित हो पाएगा। तभी राजस्थान तेज विकास के रास्ते पर चल पाएगा। बीते 9 वर्षों से केंद्र सरकार रोड, रेल, गरीबों के लिए घर, हर घर में जल, बिजली ऐसे हर इंफ्रास्ट्रक्चर पर पैसा खर्च कर रही है। इस बार के बजट में भी गाँव, गरीब की सुविधाएँ बढ़ाने के लिए सबसे अधिक बल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया गया है।
इस्लामिक संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद महमूद मदनी द्वारा ‘अल्लाह और ॐ’ को एक बताने पर विवाद खड़ा हो गया है। इसको लेकर जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने मंच पर अरशद महमूद मदनी को जमकर लताड़ लगाई। इसके बाद जैन मुनि समेत अन्य धर्म के गुरुओं ने मंच छोड़ दिया।
जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने मौलाना मदनी को फटकार लगाते हुए कहा, “मदनी ने जो कहा है, उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि यदि लोगों को जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ॐ, अल्लाह, मनु ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइए या मुझे सहारनपुर बुलाइए।”
— SATYAPRAKASH RAI(भूमिहार)-(VHP) नई दिल्ली? (@RAISP86Gkp) February 12, 2023
लोकेश मुनि ने कहा, “जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर हुए। अरिष्टनेमि 14वें योगीराज कृष्ण के भाई थे। किंतु याद रखिए, उससे पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव थे, जिनके पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम पड़ा है। आप इसे नहीं मिटा सकते।”
उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा, “चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं है। आप केवल आपस में मिलजुल कर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ओम, मनु अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता और सद्भावना के सम्मेलन में।”
दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने कहा, “मैंने धर्मगुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था… न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ॐ को पूजते थे। ॐ कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा… इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”
मौलाना ने आगे कहा, “इन्हें ही फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे और वे ॐ यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”
यही नहीं, मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान पर मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं। वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बहुसंख्यक समाज के पूर्वज हिंदू नहीं, बल्कि आदम थे, अल्लाह की इबादत करने वाले थे।
ओम को अल्लाह और मनु को आदम बताने वाले महमूद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ किसी भी तरह की कोई भी बयानबाजी मुस्लिमों को मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम अपने पैगंबर के विरूद्ध कुछ भी गलत नहीं सुन सकता।
कौन हैं आचार्य लोकेश मुनि…
जैन धर्म के प्रसिद्ध संत आचार्य डॉक्टर लोकेश मुनि एक धर्मगुरु, विचारक, लेखक, कवि और समाज सुधारक हैं। वे बीते 33 वर्षों से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों के विकास और भारतीय समाज में अहिंसा, शांति और आपसी सहयोग स्थापित करने के लिए अनवरत प्रयास कर रहे हैं।
आचार्य लोकेश मुनि ने सामाजिक बुराइयों को दूर करने और समाज सुधारने के लिए पूरे भारत में लगभग 20,000 किलोमीटर की पैदल यात्रा की है। यही नहीं, उन्होंने समाज को जागरूक करने और शांति व्यवस्था बनाने के लिए ‘अहिंसा विश्वभारती’ नामक संस्था की स्थापना की है। बालिकाओं भ्रूण हत्या, नशाखोरी, पर्यावरण प्रदूषण जैसी कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने सशक्त आंदोलन शुरू किया है।
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रेलवे विभाग द्वारा बजरंग बली को नोटिस भेजे जाने का मामला सामने आया है। नोटिस में भगवान हनुमान पर अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए सप्ताह भर में अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है। इसी नोटिस में भगवान हनुमान को आदेश न मानने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस नोटिस को बुधवार (8 फरवरी 2023) को जारी किया गया बताया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज लाइन का है। यहाँ पर रेलवे का काम चल रहा है। बताया जा रहा है कि इस काम के बीच में बजरंग बली का एक मंदिर आ रहा है। मंदिर की दूरी रेल लाइन से 25 से 30 फ़ीट है।
नोटिस जारी करने वाले अधिकारी ने मंदिर के पुजारी के बजाए सीधे बजरंग बली को ही नोटिस भेज दिया। इस नोटिस में साफ़ तौर पर बजरंग बली से हफ्ते भर में खुद ही मंदिर हटाने को कहा गया है। ऐसा न करने पर रेलवे द्वारा चेतावनी दी गई है।
रेलवे द्वारा बजरंग बली को जारी नोटिस में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि वे खुद अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो रेलवे कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाए। ऐसी स्थिति में जेसीबी आदि का जो भी खर्च होगा, उसकी वसूली बजरंग बली से की जाएगी।
हे भगवान..! अब बजरंग बली को नोटिस, रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किया है, जल्द खाली कर दो
बजरंग बली को भेजे पत्र में लिखा है, “आपके द्वारा सबलगढ़ के मध्य किलोमीटर में मकान बनाकर रेलवे भूमि पर अतिक्रमण कर लिया गया है। अत: आप इस नोटिस के सात दिन के अंदर रेलवे भूमि पर किया गया अतिक्रमण हटाकर रेलवे भूमि को खाली करें, अन्यथा आपके द्वारा किए गए अतिक्रमण को प्रशासन द्वारा हटाने की कार्रवाई की जाएगी, जिसका हर्ज एवं खर्च की जिम्मेदारी स्वयं आपकी (भगवान बजरंग बली की) होगी।”
बजरंग बली को भेजी गई नोटिस की प्रतियाँ ग्वालियर के सहायक मंडल अभियंता और ग्वालियर के जीआरपी थाना प्रभारी को भी भेजी गई हैं। यह नोटिस मंदिर पर भी चिपका दिया गया था। यह नोटिस सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग रेलवे के खिलाफ तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं।
ये नोटिस बजरंग बली, सबलगढ़ को प्रेषित है। इस पत्र को लेकर मीडिया को जानकारी देते हुए झाँसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज माथुर कहा कि यह रेलवे की सामान्य प्रक्रिया बताया। हालाँकि, उन्होंने पत्र को सही बताया है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के पुजारी की जगह नोटिस में भगवान बजरंग बली का नाम लिखा गया है।
कहा जा रहा है कि बदलाव के बाद नया पत्र जो जारी किया वह इस मंदिर के पुजारी हरिशंकर शर्मा को सम्बोधित कर जारी किया गया है। यह भी बताया जा रहा है कि यह मंदिर रेलवे की जमीन पर बना है। वहीं, कुछ स्थानीय लोग रेलवे की कार्रवाई से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं।
ड्रामा क्वीन के नाम से मशहूर एक्ट्रेस राखी सावंत (Rakhi Sawant) ने इस्लाम अपनाकर आदिल खान दुर्रानी (Adil Khan Durrani) से निकाह किया था। हालाँकि, कुछ दिन बाद से ही वह आदिल पर तरह-तरह के आरोप लगाने लगीं। इसी बीच आदिल खान पर एक छात्रा ने बलात्कार (RApe) का केस दर्ज कराया है। इससे आदिल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
आदिल खान के खिलाफ भारत में पढ़ाई कर रही ईरान की एक छात्रा ने मैसूर में बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया है। वीवीपुरम थाने में दी गई शिकायत में ईरानी छात्रा ने कहा कि वह मैसूर में डॉक्टर ऑफ फॉर्मेसी की पढ़ाई कर रही है। इस दौरान उसकी मुलाकात आदिल से डेजर्ट लैब फूड अड्डा में हुई।
बता दें कि यह फुड आउटलेट आदिल का ही है। यहाँ पर दोनों की जान-पहचान के बाद दोस्ती हो गई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ गईं। छात्रा आरोप है कि आदिल ने निकाह का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। छात्रा ने आदिल पर मैसूर के एक अपार्टमेंट में उसके साथ रेप करने का भी आरोप लगाया।
छात्रा का कहना है कि जब उसने आदिल से निकाह की बात कही तो उसने मान कर दिया और कहा कि उसके कई लड़कियों से इसी तरह के संबंध हैं। जब छात्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही तो आदिल उसकी अश्लील तस्वीरें लीक करने की धमकी दी। आदिल ने उसे कुछ इंटीमेट तस्वीरें भी भेजीं।
ईरानी छात्रा ने अपनी शिकायत में उस मोबाइल नंबर का भी जिक्र किया है, जिससे उसे अश्लील तस्वीरें भेजी गई थीं। इतना ही नहीं, छात्रा ने कहा कि आदिल ने ये तस्वीरें उसकी अम्मी-अब्बू को भी भेजने की धमकी दी और कहा कि वह उसे जान से भी मार डालेगा। उसने आरोप लगाया कि आदिल उसे ब्लैकमेल कर रहा है।
ईरानी छात्रा का कहना है कि आदिल की इन धमकियों से वह काफी डर गई थी। इसके बाद उसने आदिल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सोची और आखिरकार उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आदिल के खिलाफ पुलिस ने IPC की धारा 417, 420, 376, 504 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है।
बता दें कि इससे पहले राखी सावंत ने भी आदिल खान के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया था। इसके बाद मुंबई की ओशिवारा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आदिल इस समय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में है। इसके बाद उसके खिलाफ रेप का यह दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया है।
समाजवादी पार्टी नेता और राज्यसभा सांसद जया बच्चन का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वीडियो में जया बच्चन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को उँगली दिखाते हुए दिख रहीं हैं। इस वीडियो को लेकर भाजपा ने जया बच्चन की निंदा की है। साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स भी उनकी आलोचना कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वीडियो गुरुवार (9 फरवरी, 2023) का है। राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कॉन्ग्रेस की राज्यसभा सांसद रजनी पाटिल ने सभापति के निर्देशों का पालन नहीं किया। इसको लेकर उन्हें बजट सत्र के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद जया बच्चन कॉन्ग्रेस सांसद के समर्थन में बात कर रहीं थीं। इसी दौरान उन्होंने सभापति को उँगली दिखाते हुए टिप्पणी की।
जया बच्चन की इस हरकत को लेकर भारतीय जनता पार्टी जमकर आलोचना कर रही है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद अरुण साव ने लिखा है, “जया बच्चन जी रंगमंच और लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच का अंतर रखिए। युवा पीढ़ी आपका अनुसरण करती है।”
जया बच्चन जी रंगमंच और लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच का अंतर रखिए!
राजस्थान बीजेपी के नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने लिखा, “अहंकार में चूर जया बच्चन राज्यसभा में उप-राष्ट्रपति को उँगली दिखा रही हैं। लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे लोग कैसे आ जाते हैं?”
अहंकार में चूर जया बच्चन राज्यसभा में उप-राष्ट्रपति को अंगुली दिखा रही है …लोकतंत्र के मंदिर में ऐसे लोग कैसे आ जाते हैं ? pic.twitter.com/Nfs21OtVoT
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता ने ट्वीट कर कहा है, “उस मौके की याद आ गई जब जया बच्चन ने नेहरू खानदान पर तल्ख टिप्पणी की थी। यूपीए सत्ता में थी। अमिताभ बच्चन माफी माँगने के लिए दौड़ पड़े और हाथ से लिखा हुआ एक बयान जारी किया, जिसमें ‘वो राजा हैं, हम रंक हैं’ लिखा हुआ था।”
Reminded of the occasion when Jaya Bachchan commented harshly on Nehru clan. UPA was in power. Amitabh Bachchan rushed to apologise and issued a hand-wringing statement that ended with “वो राजा हैं, हम रंक हैं।” (They are rulers, we are commoners.) pic.twitter.com/4PTgffVC5I
वहीं ट्विटर यूजर ने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जी इस महिला को जीवन के 50 से अधिक वर्ष झेलने के लिए श्री अमिताभ बच्चन जी को भारत रत्न दे दीजिए। बड़े बुजुर्ग कह गए हैं आधुनिक और ज्ञानी होना एक सामान्य बात है। लेकिन संस्कारी और मर्यादित होना श्रेष्ठ मनुष्यता का पर्याय है।”
@narendramodi आदरणीय प्रधानमंत्री जी इस महिला को जीवन के 50 से अधिक वर्ष झेलने के लिए श्री अमिताभ बच्चन @SrBachchan जी को भारत रत्न दे दीजिए बड़े बुजुर्ग कह गए है आधुनिक और ज्ञानी होना एक सामान्य बात है लेकिन संस्कारी और मर्यादित होना श्रेष्ठ मनुष्यता का पर्याय है pic.twitter.com/MNXngTSeYC
महाराष्ट्र एटीएस ने सितंबर 2022 में छापेमारी करते हुए प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से जुड़े 20 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 5 आतंकी मुंबई से गिरफ्तार हुए थे। एटीएस ने गत 2 फरवरी को इनमें से 5 आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। एटीएस ने खुलासा करते हुए कहा है कि ये सभी आतंकी भारत को इस्लामिक मुल्क बनाने की साजिश के तहत काम कर रहे थे।
गिरफ्तार 5 आरोपितों की पहचान मजहर खान, सादिक शेख, मोहम्मद इकबाल खान, मोमिन मिस्त्री और आसिफ हुसैन खान के रूप में हुई। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधियों और देश के खिलाफ साजिश में शामिल होने का आरोप है। इन कट्टरपंथियों में से एक इकबाल खान का ट्विटर पर @khaniqbal129 नामक अकाउंट है। इस अकाउंट से वह हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की धमकी देने के अलावा प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के समर्थन में ट्वीट करता था।
महाराष्ट्र एटीएस द्वारा दायर चार्जशीट का स्क्रीनशॉट
इकबाल खान ने हिंदुओं के खिलाफ अपनी नफरत को दिखाते हुए ट्वीट किया था, “आरएसएस/बीजेपी भारत में ब्राह्मणवादी प्रभुत्व के लिए काम कर रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। भारत के हर आम नागरिक के लिए खतरा है। इसका विरोध किया जाएगा।”
RSS/BJP is just working for the Brahmanical dominance in India which is a threat to democracy and a threat to every common citizen of India, it will be objected. #PFIJhukegaNahi
एक अन्य ट्वीट में, उसने दावा करते हुए कहा कि हाशिए में पड़े समुदायों के साथ ‘हिरासत में हिंसा’ की जाती है। वहीं, सवर्णों (कथित तौर पर उच्च जाति के हिंदू) के लिए यह एक अपवाद है।
पीएफआई के चरमपंथी इकबाल ने हिंदुओं को ‘भगवा आतंकवादी’ बताते हुए लिखा, “इस खूनी खेल का गढ़ नागपुर (आरएसएस प्रशिक्षण केंद्र) है जहाँ हर दिन एक नया भगवा आतंकवादी पैदा होता है।”
उसने हिंदुओं के खिलाफ के खुले तौर पर हिंसा की धमकी देते हुए लिखा, “आज भारत के लोगों को यह कहने की जरूरत है कि जो मुल्लों को काटने आएँगे उन्हें भी काट दिया जाएगा। हमें ऐसा विश्वास पैदा करने की जरूरत है, नहीं तो अत्याचारियों का मनोबल बढ़ता ही जाएगा।”
इकबाल खान के ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट
यही नहीं उसने हिंदुओं को डराते हुए लिखा है, “मुसलमानों का खून बहाकर भारत में राज करने की राजनीति चल रही है। अपना नंबर आने से पहले संभल जाना।”
इकबाल खान राम जन्मभूमि फैसले का बदला लेने के लिए मुस्लिम समुदाय को भड़काने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता था। जुलाई 2022 में किए गए एक ट्वीट में, उसने राम मंदिर को लेकर किए गए ऐतिहासिक फैसले को ‘मुस्लिमों के खिलाफ किया गया अन्याय’ करार दिया था।
पीएफआई के कट्टरपंथी इकबाल ने हिंदुओं को अपराधी के रूप में दिखाने के लिए करौली में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा को हिंदुओं द्वारा की गई हिंसा बता दिया था। जबकि सच्चाई यह है कि 2 अप्रैल 2022 को करौली के हटवारा बाजार क्षेत्र में हिंदुओं द्वारा आयोजित की गई बाइक रैली पर इस्लामवादियों ने पथराव किया था।
हिंदुओं द्वारा ‘नव संवत्सर’ मनाने के लिए जब मुस्लिम बाहुल्य इलाके से रैली निकाली गई तब इस्लामवादी हिंसक हो गए थे। इस दौरान एक दर्जन से अधिक दुकानों और तीन बाइकों में आग लगा दी गई थी। कथित तौर पर, भीड़ के हमले में पुलिसकर्मियों सहित 43 लोग घायल हुए थे।
इकबाल खान सोशल मीडिया पर लगातार एक्टिव रहता था। इस दौरान वह भाजपा द्वारा तथाकथित रूप से ‘लोकतंत्र की हत्या’ करने को लेकर लोगों के बीच आतंक पैदा करने और बड़े पैमाने में जनआक्रोश फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था। उसने एक ट्वीट में कहा था, “भारतीय संविधान ने सरकार की किसी भी जनविरोधी नीति पर आपत्ति जताने का अधिकार दिया है। लेकिन RSS/BJP इसे आम लोगों से छीनना चाहती है।” इस ट्वीट में हैशटैग लगाते हुए लिखा था, ‘पीएफआई झुकेगी नहीं।’
Indian constitution has given the right to object to any anti-people government policies but RSS/BJP wants to snatch it from the common people. #PFIJhukegaNahi
एक अन्य ट्वीट में उसने दावा करते हुए कहा, “यदि आप एक मुस्लिम हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप पत्रकार हैं या राजनेता। किसी भी समय कोई भी झूठा मामला आपको निशाना बनाने के लिए काफी है। कहाँ है न्याय और कानून का राज?”
If you are a Muslim, it does matter whether you are a journalist or political leader, any time any false case is enough to target you. Where is justice and rule of law? #BiharPoliceKaJhoot#IndiaWithPFI
इकबाल खान ने अपने कट्टरपंथी सह-धर्मवादियों, अर्थात् मोहम्मद रियाज़ और मोहम्मद गौस को संघ परिवार और भाजपा के सदस्यों के रूप में बताते हुए बचाने की भी कोशिश की। उसने लिखा, “भारतीय मुस्लिमों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध व्यक्त किया। उदयपुर हत्याकांड को अंजाम देने वाले दो लोग संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।”
Indian Muslims expressed their protest democratically. Two people who committed Udaipur murder are linked to Sangh Parivar. Investigate the MRM plan to create communal conflicts #UdaipurMRMconspiracy
पीएफआई के कट्टरपंथी इकबाल खान ने भारत में सरकार द्वारा संचालित कॉलेजों में ‘हिजाब’ की अनुमति देने का मुद्दा भी उठाया। “यह हिंदुत्व का चेहरा है कि मुस्लिमों के साथ फिर से भेदभाव किया जा रहा है। वे सिर्फ अपने मौलिक अधिकार की माँग कर रहे हैं।’
This is the face of Hindutva that Muslims are being discriminated again,
They are only asking for their fundamental right”, Muslim female students barred by Udupi government college from entering classroom for wearing Hijab.#HijabIsOurRight
व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात करें तो भारत में इसकी बहुत अधिक रक्षा की जाती है। लेकिन कर्नाटक हिजाब विवाद का मुद्दा सिर्फ यूनिफॉर्म ड्रेस कोड का था। धर्मनिरपेक्ष संस्थानों में, स्कूल मैनेजमेंट को यह निर्धारित करने का अधिकार है कि उसके परिसर में कैसे कपड़े पहनने की अनुमति देनी चाहिए और कैसे नहीं। साथ ही धार्मिक कपड़ों को लेकर भी यही बात लागू होती है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी कहा था कि इस्लाम में हिजाब आवश्यक प्रथा नहीं है और सभी धर्मों की स्वतंत्रता के अधिकार पर एक उचित प्रतिबंध है। वास्तव में जो लड़कियाँ जो हिजाब पहनना चाहती हैं वह खुले तौर पर कहीं भी हिजाब पहन सकतीं हैं। सार्वजनिक स्थानों पर उनके हिजाब पहनने को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है। हिजाब पर प्रतिबंध सिर्फ शैक्षिक संस्थानों में ही है, जहाँ पर ड्रेस कोड लागू होता है। यह अन्य धर्मों के छात्रों पर भी पूरी तरह लागू होता है, यदि उनके धर्म में कोई चीज अनिवार्य रूप से आवश्यक नहीं है।
गौरतलब है कि जब लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल ने द्वीपों को मालदीव की तरह पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव पेश किए थे तब इस्लामवादियों ने उनका कड़ा विरोध किया था। इकबाल खान भी ऐसे लोगों में शामिल था जो लक्षद्वीप को इस्लामिक कट्टरवाद के जबड़े में धकेलना चाहते थे।
लोगों का शांति से रहना उन्हें पसंद नहीं है। ये वो लोग हैं जो अवाम के बीच सांप्रदायिकता फैलाकर उन्हें विभाजित कर रहे हैं। पहले इन्होंने कश्मीर को निशाना बनाया, अब वे लक्षद्वीप को निशाना बना रहे हैं, अगली बारी हमारी होगी। #WeWithLakshadweep
इकबाल ने हाथरस पीड़िता के ‘बलात्कार’ (हालाँकि फोरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट दोनों ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज कर दिया था) के झूठे आरोपों को बार-बार उछालने की कोशिश की। साथ ही उसने सिद्दीक कप्पन को लेकर सहानुभूति भी दिखाई थी। बता दें सिद्दीक कप्पन 5 अक्टूबर 2022 को फर्जी आईडी के साथ हाथरस में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।
A peace-loving, justice-oriented, passionate journalist of India is in Jail for more than 669 days. His Crime? He tried reporting a rape incident in Hathras, in Yogi’s UP. #ReleaseSiddiqueKappan
सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि सिद्दीक कप्पन पत्रकारिता की आड़ में उत्तर प्रदेश में जाति विभाजन और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था। यही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 नवंबर 2011 को कप्पन द्वारा तेजस में लिखी गई एक स्टोरी की प्रति पेश की थी। इसमें कप्पन ने दावा किया था कि अल-कायदा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन एक ‘शहीद’ था।
साथ ही उसके फोन के इंटरनल स्टोरेज में चार आपत्तिजनक वीडियो भी मिले थे। इसमें से एक वीडियो में ‘बोतल बम’ बनाने के तरीके के बारे में बताया गया था। वीडियो में दिखाया गया था कि एक काँच की बोतल में पेट्रोल भरकर उसे एक बेकार कपड़े से बंद करके और फिर कपड़े को जलाकर बम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक अन्य वीडियो में दिखाया गया था कि कैसे मुस्लिम महिलाओं को कराटे और लाठी डंडे जैसी युद्ध तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाता है। तीसरे वीडियो में एक मौलाना भड़काऊ भाषण देते हुए नजर आ रहा था।
चौथे वीडियो में मौलाना अहमद नदवी ऐसा भाषण देते दिख रहे थे जो दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने और उन्हें उकसाने के लिए काफी था। अपने भाषण में, वह उसे सुनने वाले लोगों को आपत्तिजनक वीडियो क्लिप भी दिखा रहा था। साथ ही उन्हें हिंदुओं और भारत सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए पीएफआई में शामिल होने के लिए भी उकसा रहा था।
इकबाल खान ने द वायर के सिद्धार्थ वरदराजन और MeToo के आरोपित विनोद दुआ के लिए भी अपने समर्थन का प्रदर्शन किया था। साथ ही उसका प्रेम मृत अर्बन नक्सल पादरी स्टैन स्वामी के लिए भी था। वह ट्विटर पर आरफा खानम शेरवानी, अभिसार शर्मा, राणा अय्यूब, एसडीपीआई, असदुद्दीन ओवैसी, राहुल गाँधी, कुणाल कामरा और प्रशांत भूषण को भी फॉलो करता था।
समाजवादी पार्टी के महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस के लगातार किए जा रहे अपमान के बाद अब उनकी ही पार्टी में घमासान मच गया है। अमेठी के गौरीगंज से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) विधायक राकेश प्रताप सिंह (Rakesh Pratap Singh) ने मोर्चा खोलते हुए स्वामी प्रसाद को विक्षिप्त प्राणी तक कह डाला।
भगवान राम और श्रीकृष्ण से स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए सदबुद्धि की माँग करते हुए राकेश प्रताप सिंह ने शनिवार (11 फरवरी 2023) को उन्हें मंच से ही खूब खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि वो विधायक रहें या ना रहें, पर धर्म की बात आई तो वे चुप नहीं बैठने वाले हैं।
वायरल हो रहे वीडियो में राकेश प्रताप सिंह ने कहा, “जब उस नेता के मुँह से निकली बात मेरे हृदय को कचोटने लगी, मुझे पीड़ा देने लगी तो सबसे पहले उत्तर प्रदेश में खड़े होकर मैंने मीडिया के माध्यम से ये कहने का साहस जुटाया कि राजनीति रहे या न रहे, विधायक रहूँ या न रहूँ, आगे टिकट रहे या न रहे, लेकिन धर्म को बचाने के लिए आपका भाई, आपका बेटा, आपका सेवक खड़ा रहेगा।”
सपा एमएलए राकेश प्रताप सिंह का सपा एमएलसी @SwamiPMaurya पर तीखा हमला, कहा राजनीति रहे न रहे, विधायक रहूं न रहूं, आगे टिकेट रहे न रहे। लेकिन धर्म को बचाने के लिए खड़ा रहूंगा।
सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इसी बयान में आगे कहा, “मैंने पहले कहा है कि इस प्रकार का बयान देने वाले न तो सनातनी हो सकते हैं, न वो समाजवादी हो सकते हैं। हो सकता है तो सिर्फ एक विक्षिप्त प्राणी हो सकता है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राकेश प्रताप सिंह ने एलान किया कि वो हर उस व्यक्ति का विरोध करेंगे, जो भगवान राम या कृष्ण के खिलाफ टिप्पणी करेगा। अंत में उन्होंने देवताओं से स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए सदबुद्धि की भी प्रार्थना की।
गौरतलब है कि रामचरितमानस के खिलाफ स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें समाजवादी पार्टी का महासचिव बना दिया था। इस बीच मौर्य के समर्थकों द्वारा लखनऊ में रामचरितमानस जलाए जाने के आरोप में FIR भी दर्ज हुई थी, जिसमें सलीम सहित एक अन्य आरोपित पर NSA के तहत कार्रवाई की गई है।
स्वामी प्रसाद के इस बयान के बाद सपा में विरोध के स्वर लगातार उठ रहे हैं। जहाँ नोएडा में सपा नेता नवीन दुबे ने पार्टी छोड़ने का एलान किया था। वहीं, एक अन्य महिला नेत्री रोली तिवारी ने खुलेआम स्वामी प्रसाद की आलोचना की है।
इस्लामी संगठन ‘जमीयत उलेमा-ए-हिन्द’ के मुखिया मौलाना अरशद महमूद मदनी ने एक बार फिर से हिन्दुओं को लेकर ज़हर उगला है। दिल्ली में संगठन के अधिवेशन में उन्होंने इस बार कुछ ऐसा बोल दिया, कि जैन और हिन्दू धर्मगुरु मंच से नीचे उतर गए। उन्होंने मनु को ‘आदम’ कह दिया और पूछा कि हमारे मजहब में इतना दखल क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने कह दिया, “तुम्हारा पूर्वज हिन्दू नहीं था। तुम्हारा पूर्वज मनु, यानी आदम था।”
मौलाना मदनी ने कहा, “मैंने धर्मगुरुओं से पूछा जब कोई नहीं था, न श्री राम, न ब्रह्म, तब मनु किसे पूजते थे? कुछ लोग बताते हैं कि वे ॐ को पूजते थे। तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं।” इस पर जैन धर्मगुरु लोकेश मुनि ने आपत्ति जताई। ये जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के 34वें अधिवेशन का मौका था, जिसमें मौलाना मदनी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की भी आलोचना की।
लोकेश मुनि ने इस दौरान पूछा कि जब कार्यक्रम जोड़ने के नाम पर किया जा रहा है तो इसमें आपत्तिजनक बातें क्यों की जा रही हैं? उन्होंने मोहन भगवत के बयान को ‘जाहिल’ वाला भी करार दिया। उन्होंने ये भी कहा कि पैगंबर मुहम्मद का अपमान मुस्लिमों को मंजूर नहीं है। मौलाना मदनी ने न्यायपालिका पर भी केंद्र सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि मनु की पत्नी हव्वा है, जिसे हिन्दू हेमवती कहते हैं।
#WATCH मैंने धर्म गुरु से पूछा जब कोई नहीं था,न श्री राम,न ब्रह्म,तब मनु किसे पूजते थे?कुछ लोग बताते हैं कि वे ओम को पूजते थे तब मैंने कहा कि इन्हें ही तो हम अल्लाह,आप ईश्वर,फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं: जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना सैयद अरशद मदनी pic.twitter.com/TxiKNjVhMk
उन्होंने कहा कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई – इन सभी के पूर्वक आदम और हव्वा ही थे। इससे पहले भी वो इस सम्मेलन में विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था, “भारत हमारा देश है। यह देश जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है, उतना ही यह देश महमूद का भी है। न तो महमूद उनसे एक इंच आगे है और न ही वे महमूद से एक इंच आगे हैं। भारत खुदा के सबसे पहले पैगंबर अब्दुल बशर सईदाला आलम की जमीन है। भारत मुस्लिमों की पहली मातृभूमि है।”
केंद्र की मोदी सरकार ने देश के 13 प्रदेशों और केंद्रशासित प्रदेशों के राज्यपालों एवं उपराज्यपालों को बदल दिया है। यह फेरबदल लद्दाख, महाराष्ट्र, सिक्किम, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और बिहार में की गई है। बता दें कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और लद्दाख के उप-राज्यपाल ने कृष्ण माथुर ने इस्तीफा दे दिया है। कोश्यारी ने कुछ दिन पहले ही पत्र लिख कर इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
किसे कहाँ मिली नियुक्ति
अरुणाचल प्रदेश के नए राज्यपाल के तौर पर रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक को नियुक्त किया गया है। लक्ष्मण आचार्य सिक्किम और सीपी राधाकृष्णन झारखंड के राज्यपाल बनाए गए हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को हिमाचल प्रदेश और गुलाबचंद कटारिया को असम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एस अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। जस्टिस नजीर अयोध्या मामले में फैसला सुनाने वाले जजों में शामिल थे। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन को छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसूइया उइके को मणिपुर भेजा गया है। वहीं, मणिपुर के राज्यपाल ला गणेशन को नागालैंड भेजा गया है।
मणिपुर के राज्यपाल ला गणेशन को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। बिहार के राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय का राज्यपाल नियुक्त किया गया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के वर्तमान राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय भेजा गया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। रमेश बैस अब महाराष्ट्र राज्यपाल होंगे, जबकि सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा लद्दाख के उपराज्यपाल होंगे।
भगत सिंह कोश्यारी और कृष्ण माथुर ने इस्तीफा दिया
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के इस्तीफे की वजह उनके द्वारा खुद ही माँगा गया रिटायरमेंट बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने खुद ही पत्र लिख कर आगे का जीवन पढ़ने-लिखने और अन्य गतिविधियों में बिताने की इच्छा जताई थी। कोश्यारी ने लगभग 3 साल महाराष्ट्र की जिम्मेदारी संभाली थी।
वहीं 1977 बैच के रिटयर्ड IAS अधिकारी कृष्ण माथुर का भी लद्दाख के उपराज्यपाल पद से इस्तीफ़ा मंजूर कर लिया गया है। उनके बदले अब वहाँ रिटायर्ड ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा कार्यभार सँभालेंगे।
मराठा साम्राज्य के उद्भव के साथ ही मुगलों का पतन शुरू हो गया था यही कारण था कि औरंगजेब के समय अपने चरम को छूने वाली मुगलिया सत्ता उसके मरने के बाद ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी। छत्रपति शिवाजी महारज, संभाजी और साहूजी के बाद मराठा साम्राज्य में छत्रपति की जगह पेशवा का दबदबा रहने लगा, जो सेनापति होते थे। नानाजी फडणवीस एक ऐसा नाम है, जो छत्रपति या पेशवा नहीं थे, लेकिन उन्होंने इन दोनों को मजबूत करने में अपनी बुद्धिमत्ता और बहादुरी से कोई कसर नहीं छोड़ी।
नाना फडणवीस का जन्म सन् 1742 में 12 फरवरी को हुआ था, जबकि उनका निधन 13 मार्च, 1800 को हुआ। उनसे पहले हम इटली के निकोलो मैकियावेली के बारे में जानते हैं, जिन्हें आधुनिक राजनीतिक विज्ञान का जनक कहा जाता है। 15वीं-16वीं शताब्दी में जब यूरोप मध्यकाल से आधुनिक युग में घुस रहा था, तब मैकियावेली उस दौर के सबसे बड़े कूटनीतिज्ञ बन कर उभरे। फ्लोरेंस में जन्मे निकोलो से ही नाना फडणवीस की तुलना विदेशियों ने की।
बालाजी जनार्दन भानु, जिन्हें आगे चल कर नाना फडणवीस कहा गया – वो एक चितपावन ब्राह्मण थे। महात्मा गाँधी की हत्या के बाद महाराष्ट्र में उनके समर्थकों ने बड़ी संख्या में चितपावन ब्राह्मणों का नरसंहार किया था। भीड़ ने वीर विनायक दामोदर के भाई नारायण सावरकर की भी हत्या कर दी थी। वो भी एक स्वतंत्रता सेनानी थे। बालाजी का जन्म सतारा में हुआ था। पेशवा बालाजी विश्वनाथ भट्ट और भानु के परिवार का अच्छा रिश्ता था।
बालाजी महादजी, जो कि फडणवीस के नाना थे, उन्होंने मुगलों की एक साजिश से पेशवा की जान बचाई थी। पेशवा जब मराठा साम्राज्य के सर्वेसर्वा बन गए, तब फडणवीस उनके खासमखास हो गए और सरकार में धमक रखने लगे। पेशवा ने नाना फडणवीस के लिए भी शिक्षा-दीक्षा की वही व्यवस्था की थी, जो उन्होंने अपने बेटों विश्वास राव, माधव राव और नारायण राव के लिए की थी। नाना फडणवीस पानीपत के तीसरे युद्ध में बच कर निकल गए थे।
उस युद्ध में दुर्रानी ने मुगलों व अन्य इस्लामी ताकतों के बल पर मराठा साम्राज्य को बड़ा नुकसान पहुँचाया था, जिससे कुछ वर्षों के लिए उनका विजय रथ रुक गया था। नाना फडणवीस ने इसके बाद मराठाओं को आगे बढ़ने में मदद की और ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी कूटनीति से साम्राज्य को मजबूत किया। उन्होंने अंग्रेजों, मैसूर के टीपू सुल्तान और हैदराबाद के निजाम के खिलाफ युद्ध में रणनीति बनाई और उन्हें परास्त किया।
भीमाशंकर मंदिर के शिखर के निर्माण का श्रेय नाना फडणवीस को ही दिया जाता है। अहिल्याबाई, तुकोजी और माधोजी के चल बसने के बावजूद अंग्रेजों के खतरों के बीच नाना फडणवीस ने मराठों को एकता के सूत्र में बाँधे रखा था। लेकिन, सन् 1800 में उनके निधन के बाद मराठे बँट गए और सिंधिया-होल्कर आपस में लड़ने लगे। पेशवा ने सिंधिया का साथ दिया। पेशवा को अंग्रेजों के साथ ‘बेसिन की संधि’ करने को मजबूर होना पड़ा।
नाना फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि वो असाधारण बुद्धि के स्वामी थे और एक योद्धा न होने के बावजूद युद्धकला की समझ रखते थे। उनकी सूझबूझ के कारण ही मैसूर, हैदराबाद और अंग्रेजों से मराठे बचे रहे। सन् 1789 में उन्होंने महादजी सिंधिया को पत्र लिख कर कहा था कि काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करना हिन्दू धर्म के लिए एक योग्य कार्य होगा। उनका मानना था कि इस कार्य से न सिर्फ उस समय की मराठा सरकार के लोगों के नाम हिन्दुओं के दिमाग में छप जाएँगे, बल्कि इससे राज्य की भलाई भी होगी और प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।
यही वो समय भी था, जब मुग़ल बादशाह शाह आलम को मराठों ने निर्देश दिया कि वो गौहत्या को प्रतिबंधित करने का आदेश जारी करे। नाना फडणवीस को मात्र 16 वर्ष की उम्र में सदाशिव राव का सचिव नियुक्त किया गया था। उन्होंने अहमदशाह अब्दाली के विरुद्ध पानीपत की लड़ाई में हिस्सा लिया। इस युद्ध के बाद मराठा सेनाओं को भागना पड़ा। इस पूरे प्रकरण में नाना फडणवीस की माँ और पत्नी कहीं गम हो गईं। उन पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा और वो दुनिया से अलग-थलग रहने लगे।
लेकिन, इस दौरान समर्थ गुरु रामदास की एक पुस्तक ‘दास बोध’ का उन्होंने अध्ययन किया और उनका दिमाग बदला। उन्होंने तब महाराष्ट्र के लिए कुछ करने का निर्णय लिया। उनके मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्री बनने के बाद अंग्रेजों को दो बार मुँह की खानी पड़ी। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक मराठा कूटनीति के शीर्ष पर खुद को बनाए रखा। महाराष्ट्र के कई जमींदार उस दौरान गद्दार हो गए थे, लेकिन अपने जीवित रहते नाना फडणवीस ने गद्दारों को रोके रखा।
पेशवा नाना साहब (बालाजी) तो पानीपत की हार की व्यथा में ही चल बसे, जिसके बाद उनके 16-17 साल के बेटे माधव राव को पेशवा बनाया गया। उन्होंने नाना फडणवीस के मार्गदर्शन में फिर से मराठा प्रभुत्व स्थापित किया और खोई गरिमा को वापस हासिल किया। माधव राव की युवावस्था में ही मौत के बाद उनके बेटे नारायण राव ने बागडोर सँभाली। लेकिन, वो उतने योग्य साबित नहीं हुए। उधर पेशवा नाना का भाई भी लॉबिंग में लगा था।
Wai is a small town located in the Satara district of Maharashtra, on the banks of the Krishna river. Surrounded by the Sahayadris, the town is famous for it’s numerous ghats on the Krishna river, and the old temples here.
राघोबा ने नारायण राव को मरवा दिया, लेकिन नाना फडणवीस ने एक हत्यारे को पेशवा नहीं बनाया। उन्होंने ‘अष्ट प्रधान’ सदस्यों की मदद से नारायण राव के बेटे सवाई माधो राव को पेशवा बना दिया। नाना फडणवीस को मराठा ख़ुफ़िया विभाग को मजबूत करने के लिए भी जाना जाता है। उनका ख़ुफ़िया विभाग इतना मजबूत था कि देश में कहीं कोई महत्वपूर्ण घटना होती थी तो नाना फडणवीस के पास उसकी सूचना अलग-अलग सूत्रों से पूरे विवरण के साथ पहुँचती थी।
फिर वो अपने अध्ययन कक्ष में बैठ कर मनन करते थे कि आगे क्या करना है और क्या नहीं। उन्होंने महादजी सिंधिया से कई बार कहा था कि अगर अंग्रेजों को छूट दे दी गई तो वो पूरे देश को गुलाम बना देंगे। अंग्रेजों ने नाना फडणवीस को रास्ते से हटाने की कई बार कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। उलटे, निजाम और भोंसले को नाना फडणवीस ने अंग्रेजों के खिलाफ कर दिया। वो एक दूरदृष्टि वाले नेता थे, जिन्हें बखूबी पता था कि राज्य के असली दुश्मन कौन हैं और कौन नहीं। नाना फडणवीस के वक्त मराठों ने जो संधियाँ की, उनकी बात कभी और।