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‘येशु दरबार’ लगाने वाले कुलपति की गिरफ्तारी पर रोक, हाई कोर्ट से बोला वकील – वह प्रतिष्ठित व्यक्ति: एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में विदेशी फंडिंग से चल रहा था ईसाई धर्मांतरण

हिन्दुओं के सामूहिक ईसाई धर्मांतरण के आरोपों से घिरे प्रयागराज नैनी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (SHUATS) के कुलपति को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने पुलिस को आदेश दिया है कि वो आरोपित डॉ. राजेंद्र बिहारी लाल के खिलाफ 15 फरवरी तक कोई कठोर कार्रवाई न करें और न ही गिरफ्तार करें। अदालत ने आरोपित को भी पुलिस जाँच में सहयोग करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश गुरुवार (9 फरवरी, 2023) को दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस केस की सुनवाई जस्टिस मंजू रानी चौहान की कोर्ट में हुई। आरोपित डॉ लाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को विपक्षी बनाया था। लाल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कुमार विक्रांत ने बहस की थी। उन्होंने तर्क दिया कि केस दर्ज होते समय उनके मुवक्किल का नाम FIR में दर्ज नहीं था जिसे बाद में जाँच अधिकारी ने 2 गवाहों के बयान के आधार पर शामिल किया है। डॉ लाल को एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बताते हुए बचाव पक्ष के वकील ने उनके खिलाफ दर्ज केस से छवि धूमिल हो रही है।

आरोपित डॉ लाल के वकील की दलीलों का सरकारी पक्ष के वकील ने विरोध किया और पुलिस कार्रवाई को सही और सबूतों के आधार पर होना बतया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुन कर जस्टिस मंजू रानी चौहान ने आरोपित डॉ लाल को राहत देते हुए पुलिस से 15 फरवरी तक आरोपित को गिरफ्तार न करने और कोई कठोर कार्रवाई न करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने डॉ लाल को भी पुलिस जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया। अदालत के मुताबिक, आरोपित को 13 फरवरी, 2023 तक जाँच अधिकारी के आगे अपने पासपोर्ट व अन्य साक्ष्य जमा करने होंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2023 को तय की गई है।

फतेहपुर पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित डॉ लाल 13 फरवरी को पुलिस के आगे पेश नहीं हुआ। अब उसे 15 फरवरी को एक और अवसर के तौर पर पुलिस के आगे पेश हो कर अपने समर्थन में साक्ष्य जमा करने होंगे।

गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में हिन्दू संगठन से जुड़े हिमांशु दीक्षित ने 90 हिन्दुओं के सामूहिक ईसाई धर्मांतरण का आरोप लगा कर कोतवाली नगर में एक FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR में फतेहपुर में ही मौजूद इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया से जुड़े लोगों को आरोपित किया गया था। मामले में शुरुआती गिरफ्तारी और जाँच के बाद इस घटना के तार विदेशों तक जुड़े पाए गए थे जिसमें अमेरिका, पाकिस्तान के साथ कुछ यूरोपीय देश भी शामिल हैं।

इन देशों ने भारत में ‘यीशु दरबार’ लगाने और हिन्दुओं का धर्म-परिवर्तन करवाने के लिए पैसे भेजे थे। केस में इन पैसों को मँगाने और उसे भारत में बाँटने के लिए नैनी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के डॉ लाल को मुख्य तौर पर आरोपित किया गया है।

त्रिपुरा में 12 बजे से पहले ही बहुमत पा लेगी BJP, सीट और वोट शेयर दोनों बढ़ेंगे: अमित शाह, ‘जन की बात’ के पोल में भी खिल रहा है कमल

60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा (2023 Tripura Legislative Assembly election) के लिए 16 फरवरी 2023 को वोट पड़ेंगे। 2 मार्च को वोटों की गिनती होगी। राज्य की सत्ता में फिर से बीजेपी के लौटने के आसार जताए जा रहे हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि मतगणना के दिन दोपहर 12 बजे से पहले ही राज्य में बीजेपी बहुमत का आँकड़ा पार कर लेगी। उन्होंने पार्टी की सीट और वोट शेयर दोनों बढ़ने की बात कही है। इससे पहले जन की बात की सर्वे में भी त्रिपुरा में बीजेपी के सत्ता बरकरार रखने का अनुमान लगाया गया था।

न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा है, “त्रिपुरा में हमारी सीट भी बढ़ेगीं और वोट शेयर भी बढ़ेगा। कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ने गठबंधन कर लिया है। उन्हें लगता है कि वे अकेले बीजेपी को नहीं हरा सकते। हम त्रिपुरा में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने त्रिपुरा से हिंसा को समाप्त कर दिया है। भाजपा के सत्ता में होने से ड्रग्स का काम करने वालों पर भी कार्रवाई हो रही है। आज पूर्वोत्तर भारत में शांति है। भाजपा सरकार के साथ उग्रवादियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत 8000 से अधिक उग्रवादियों ने सरेंडर किया है। देश के पूर्वोत्तर भाग को पहले बंद के लिए जाना जाता था, लेकिन अब वहाँ तेजी से विकास हो रहा है। 

अमित शाह ने कहा कि बीते 9 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर भारत में 51 दौरे किए हैं। आजादी के बाद कोई भी प्रधानमंत्री इतनी बार इस क्षेत्र में नहीं गया। भाजपा सरकार में इस क्षेत्र की स्थानीय भाषाओं को मजबूती मिली है। यहाँ तक कि प्राथमिक शिक्षा भी क्षेत्रीय भाषाओं में दी जा रही है। भाजपा सरकार ने पूर्वोत्तर की पहचान को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा, “त्रिपुरा में पिछली बार स्थिति बदलने के लिए बीजेपी ने ‘चलो पलटई’ का नारा दिया गया था। हमने ऐसा किया भी है। इससे पहले जब त्रिपुरा में वामपंथी सरकार थी तो सरकारी कर्मचारियों को 5वें वेतन आयोग के तहत वेतन दिया जा रहा था। लेकिन हमने राजकोषीय घाटे को कंट्रोल में रखते हुए 7वें वेतन आयोग को लागू किया है।”

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को लेकर अमित शाह ने कहा है, “कर्नाटक में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। पिछले 2 महीनों में मैंने 5 बार राज्य का दौरा किया है। मैंने राज्य के लोगों की नब्ज भाँप ली है। मैंने वहाँ पीएम मोदी की लोकप्रियता देखी है। भाजपा को कर्नाटक में भी भारी जनादेश मिलेगा।”

बता दें कि त्रिपुरा विधानसभा को लेकर ‘जन की बात’ ने 13 फरवरी 2023 को ओपिनियन पोल जारी किया था। इस ओपिनियन पोल में 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया है। इसके अनुसार कुल 60 सीटों में से भाजपा गठबंधन को 30 से 35 सीटें, सीपीएम गठबंधन को 16 से 13 सीटें, तिपरा गठबंधन को 13 से 11 सीटें मिलने का अनुमान है।

सर्वे के अनुसार, सीपीएम गठबंधन को 41 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर मिल सकता है। वहीं भाजपा गठबंधन को 32 से 39 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, तिपरा गठबंधन को 16 से 21 प्रतिशत और अन्य को 1 से 2 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है।

वहीं डेमोग्राफी के हिसाब से बात करें तो बंगाली हिंदुओं की पहली पसंद भाजपा है और सर्वे के मुताबिक, करीब 60 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं द्वारा भाजपा को वोट देने का अनुमान जताया गया है। 30 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं के सीपीएम गठबंधन और आठ प्रतिशत बंगाली हिंदुओं के तिपरा गठबंधन को वोट देने का अनुमान है। दूसरी ओर बंगाली मुस्लिमों की अगर बात करें तो इसमें सीपीएम गठबंधन सबसे आगे है।

क्रेडिट – जन की बात

सर्वे के मुताबिक, 70 प्रतिशत बंगाली मुस्लिम सीपीएम गठबंधन को अपना वोट दे सकते हैं। वहीं महज 8 प्रतिशत बंगाली मुस्लिम की पसंद भाजपा है। जनजातीय लोगाें की बात करें तो तिपरा गठबंधन उनकी पहली पसंद है। सर्वे के मुताबिक 65 प्रतिशत जनजातीय लोग तिपरा गठबंधन को वोट दे सकते हैं। वहीं भाजपा और सीपीएम गठबंधन को जनजातीय लोगों की तरफ से क्रमश 25 और नौ प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान हैं। सर्वे के मुताबिक जनजातीय समुदाय में में भी त्रिपुरी जनजाती में भाजपा को 55 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में भाजपा ने राज्य में सीपीएम के 25 साल पुराने शासन का अंत कर दिया था। भाजपा गठबंधन ने तब 60 में से 43 सीटों पर कब्जा किया था। भाजपा ने अकेले दम पर बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया था। कॉन्ग्रेस को यहाँ एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। सीपीएम गठबंधन को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

लड़कियों का टेरर गैंग बनाने का था प्लान, कन्हैया लाल अकेले नहीं थे टारगेट: यूट्यूब-फेसबुक पर लाइव ‘सिर तन से जुदा’ करने का था इरादा

कन्हैया लाल हत्याकांड में दायर NIA चार्जशीट से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। इससे पता चलता है कि आतंकियों का इरादा यूट्यूब और फेसबुक पर कन्हैया लाल की हत्या का लाइव करने का इरादा था। वे लड़कियों का भी एक टेरर गैंग बनाना चाहते थे। राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का गला उनकी दुकान में घुसकर रेत दिया गया था।

दैनिक भास्कर के मुताबिक कन्हैया लाल का गला रेतने में शामिल रहा रियाज़ अत्तारी अपनी आतंकी गैंग में लड़कियों को शामिल करना चाहता था। पाकिस्तानियों से भरे ‘लब्बैक या रसूलल्लाह’ व्हाट्सएप ग्रुप में उसने अपनी मंशा जाहिर की थी। उसने एक वीडियो बनाकर कहा था, “अली के लाल उतरे है मैदान में, अब अली की शहजादिया भी उतर गई माशाअल्लाह।” NIA को यह वीडियो रियाज़ के मोबाइल से भी मिला।

NIA की चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि कन्हैया लाल के अलावा कई अन्य लोग भी इनके निशाने पर थे। ये सभी उदयपुर के ही रहने वाले थे। इनमें नितिन जैन, यश पनेरी, लव कुशवाहा, और नवीन प्रजापति के नाम सामने आए हैं। एक ऑडियो मैसेज में रियाज़ ने कहा था कि इंशाअल्लाह आगे भी सिर कलम होते रहेंगे।

कत्ल को सोशल मीडिया पर LIVE करने का प्लान

NIA की चार्जशीट में इस बात का भी जिक्र है कि रियाज़ अत्तारी और उसका गैंग नूपुर शर्मा के समर्थकों का सिर काटने के लिए पूरी तैयारी कर रहा था। इसी तैयारी में रियाज़ द्वारा एक वीडियो मुस्कराते हुए छुरे की धार तेज करते बनाया गया था। दावा इस बात का भी किया गया है कि कन्हैया लाल की हत्या की साजिश में शामिल मोहसिन नाम के एक अन्य व्यक्ति को कत्ल का वीडियो सोशल मीडिया पर LIVE करने को बोला गया था। हत्या को यूट्यूब पर LIVE करने की जिम्मेदारी इदरीश को मिली थी। हालाँकि किसी वजह से ये दोनों ऐसा नहीं कर पाए थे।

गौरतलब है कि कन्हैयालाल की हत्या के लिए बनी आतंकी गैंग में चूड़ी, चश्मे, बुटीक, चिकन आदि से जुड़े व्यापारी शामिल थे। इसमें से कई कन्हैयालाल के घर और दुकान के पड़ोसी थे, जिन्होंने लगातार उनकी रेकी की थी।

कब्जा हटाने आया था प्रशासन, धू-धूकर जल गई माँ-बेटी: कानपुर की घटना, SDM और SHO सहित 60 पर FIR

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में माँ बेटी ने खुद को आग लगा ली। घटना के समय स्थानीय प्रशासन ग्राम समाज की जमीन से अवैध कब्जा हटाने पहुँचा था। इस घटना में एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है। आत्मदाह से नाराज लोगों ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों सहित कुल 60 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। घटना सोमवार (13 जनवरी 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना रूरा थाना क्षेत्र के गाँव मड़ौली की है। यहाँ के रहने वाले कृष्ण गोपाल दीक्षित पर ग्राम समाज की जमीन पर अवैध अतिक्रमण का आरोप था। पीड़ित का कहना है कि उनके किए गए निर्माण के खिलाफ गाँव के ही कुछ लोग आए दिन अधिकारियों से शिकायत करते रहते थे। कृष्ण गोपाल के मुताबिक उन्ही शिकायतकर्ताओं के दबाव में सोमवार को पूरा प्रशासनिक अमला बुलडोजर लेकर उनका घर गिराने पहुँच गया। कृष्ण गोपाल के मुताबिक कुछ लोगों के दबाव में ही प्रशासन पिछले माह 14 जनवरी को भी उनके घर पर अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई करने पहुँचा था।

अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई में न सिर्फ SDM बल्कि तहसीलदार, लेखपाल जैसे राजस्व अधिकारी मौजूद थे, बल्कि स्थानीय थानेदार के नेतृत्व में पुलिस-प्रशासन भी मौजूद था। जैसे ही कृष्ण गोपाल दीक्षित की पत्नी प्रमिला और बेटी नेहा ने बुलडोजर बढ़ते देखा वैसे ही उन्होंने खुद को घर में बंद कर आत्मदाह की चेतावनी दी। इस चेतावनी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

हालाँकि प्रमिला की धमकी का प्रशासनिक अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने अपनी कार्रवाई जारी रखी। कुछ ही समय बाद प्रमिला ने खुद और अपनी बेटी नेहा को झोपडी में बंद कर आग लगा ली। आग की लपटें देख कर प्रशसनिक अधिकारी रुके, लेकिन तब तक जलता छप्पर मृतका के ऊपर गिर गया। इस हादसे में प्रमिला और उनकी बेटी की जलकर मौत हो गई। प्रमिला के पति कृष्ण गोपाल ने अपनी पत्नी और बेटी को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन वे असफल रहे। इस प्रयास में वे खुद भी झुलस गए। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि माँ-बेटी को जलता देख कुछ अधिकारी भाग निकले थे।

हादसे के बाद नाराज ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद अधिकारियों पर पथराव कर दिया। पुलिस ने नाराज लोगों लोगों को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन हंगामा जारी रहा। पथराव में अशोक सिंह नाम के लेखपाल को चोटें भी आईं। हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस मामले में योगी सरकार को निशाने पर लिया है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक मृतका के बेटे शिवम की तहरीर पर कुल 60 लोगों पर FIR दर्ज की गई है। इसमें SDM, SHO, लेखपाल के साथ गाँव के भी 4 अन्य लोगों को नामजद किया गया है। FIR IPC की धारा 302, 307, 436, 429, 323 और 34 के तहत दर्ज हुई है। पुलिस के मुताबिक नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

ग्रामीणों ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई के साथ मृतक के परिजनों को मुआवजे की भी माँग की है। ऑपइंडिया ने इस मामले में रूरा थाने में बात की। हमें बताया गया कि अभी तक मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुराने SHO को हटा दिया गया है।

कोई था घर का एकमात्र कमाऊ पूत, किसी की थी सालगिरह तो कोई जन्मदिन मनाकर लौटा था… कहानी पुलवामा के बलिदानी जवानों की

14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा (Pulwama Attack) में हुए भीषण आतंकी हमले में CRPF के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। पुलवामा हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) ने ली थी।

इस हमले के 12 दिन बाद यानी 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर एयर स्ट्राइक की थी। इस एयर स्ट्राइक में जैश-ए-मोहम्मद के 350 से अधिक आतंकी मारे गए थे। पुलवामा हमले की बरसी पर पूरा देश बलिदान हुए वीर जवानों को याद कर रहा है। ऐसे में ऑपइंडिया आपके लिए लेकर आया है वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की कुछ चुनिंदा कहानियाँ…

जन्मदिन मनाकर लौटे नसीर अहमद

पुलवामा में बलिदान हुए नसीर अहमद फिदायीन हमले से एक दिन पहले ही अपना 46 वाँ जन्मदिन मनाकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे। 22 साल सेना को दे चुके नसीर उस बस के कमांडर थे, जिसे आत्मघाती हमले में निशाना बनाया गया। नसीर का पार्थिव शरीर जब उनके गाँव पहुँचा तो दोदासन देशभक्ति के नारों से गूँज उठा था। वहाँ मौजूद हर शख्स के चेहरे पर आतंकियों को लेकर गुस्सा था। नसीर का बेटा बार-बार बस यही दोहरा रहा था कि पहले वो पापा की मौत का बदला लेगा फिर अपना जन्मदिन मनाएगा।

संजय ने खुद बढ़वाए थे नौकरी के 5 साल

पुलवामा में वीरगति को प्राप्त हुए संजय राजपूत 20 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी देश के लिए अपनी सेवा को पाँच वर्ष के लिए आगे बढ़वाया था। मगर उन्हें क्या मालूम था उनका यह फ़ैसला उन्हें हमेशा के लिए परिवार से दूर कर देगा। संजय के दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 13 और 10 साल है। उनके परिवार में चार भाई और एक बहन हैं। एक भाई को पहले ही परिवार एक्सिडेंट में खो चुका है।

‘बेटे को करूँगी सेना को समर्पित’

अपने घर के इकलौते कमाने वाले नितिन राठौर 14 फरवरी को हुए आत्मघाती हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। महज 23 की उम्र में साल 2006 में सीआरपीएफ में शामिल होने वाले नितिन के घर में उनकी पत्नी वंदना, बेटा जीवन, बेटी जीविका माँ सावित्री बाई, पिता शिवाजी, भाई प्रवीण समेत दो बहनें हैं। नितिन के वीरगति के प्राप्त होने की ख़बर सुनने के बाद गाँव के लोगों ने अपने घरों में खाना नहीं बनाया। वहीं वीर की पत्नी ने हिम्मत दिखाते हुए कहा था कि वो अपने बेटे को भी सेना को समर्पित करेंगी क्योंकि यह उनके पति (नितिन) का सपना था।

वीर कुलविंदर की अंतिम यात्रा में पहुँचीं थी मंगेतर

कुलविंदर सिंह 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकियों के कायरतापूर्ण हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। कुलविंदर अपने माता-पिता के इकलौती संतान थे। कुलदीप की आठ नवंबर को शादी होनी तय थी। इस खबर को सुनकर उनकी मँगेतर अमनदीर कौर ससुराल आई और भारत माता के वीर सपूत की अंतिम यात्रा में शामिल हुई। उन्होंने वीरगति को प्राप्त अपने मंगेतर के पार्थिव शरीर को सैल्यूट ठोक शत्-शत् नमन किया। कुलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि उन्होंने अपने जवान बेटे को सदा के लिए खो दिया है। उन्होंने हमले वाले दिन से ही अपने बेटे की वर्दी पहन रखी थी। उनके इस जोश को देख कर अन्य लोग भी अभिभूत थे।

छिन गया सबसे छोटा बेटा

अश्वनी कुमार काछी भी पुलवामा में हुए हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। अश्वनी कुमार काछी परिवार के सबसे छोटे बेटे थे। चार भाइयों में सबसे छोटे अश्वनी की पहली पोस्टिंग साल 2017 में श्रीनगर में हुई थी। उनके बुज़ुर्ग पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु पर गर्व है, लेकिन यक़ीन नहीं होता कि वो अब इस दुनिया में नहीं है। अश्वनी कुमार घर के एकमात्र कमाऊ पूत थे। अश्वनी की माँ अपने पाँचों बच्चों के भरण-पोषण के लिए बीड़ी बनाने का कार्य किया करती थी। जब अश्विनी की नौकरी लगी, तब उन्होंने अपनी माँ से बीड़ी बनाने वाला कार्य छुड़वा दिया था।

बेटी की शादी के लिए लड़का देखने जाने वाले थे संजय

पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त बिहार के संजय कुमार सिन्हा को अपनी बड़ी बेटी रूबी की शादी की फ़िक्र सता रही थी। वापस ड्यूटी पर जाते वक़्त उन्होंने घरवालों से दोबारा आने का वादा किया था। संजय ने कहा था कि वह घर लौटते ही बेटी के लिए लड़का देखने जाएँगे। घरवाले भी उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन जब उनके वीरगति को प्राप्त होने की सूचना मिली, पूरा परिवार ही स्तब्ध रह गया और गाँव में मातम पसर गया। जब उनकी मृत्यु का समाचार आया, तब उनकी पत्नी बबीता भोजन कर रही थी। यह दुःखद सूचना मिलते ही थाली उनके हाथों से गिर पड़ी और वह दहाड़ मार कर रोने लगी।

सालगिरह के दिन वीरगति को प्राप्त हुए थे तिलक राज

हिमाचल प्रदेश स्थित कांगड़ा के सीआरपीएफ जवान तिलक राज 14 फ़रवरी को पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। जिस दिन उन्होंने मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर किए, उसी दिन उनकी चौथी मैरिज एनिवर्सरी भी थी। जब तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा तिलक के परिजनों से मिलने पहुँचे, तब सावित्री ने उनसे कहा- ‘साहब, मुझे भी सीआरपीएफ की नौकरी दे दो।‘ एक माह से भी कम उम्र के बच्चे को अपनी गोद में लेकर बैठी सावित्री की आवाज़ में गज़ब की दृढ़ता थी।

सबको सिसकियाँ भरने के लिए छोड़ गए विजय

पुलवामा आतंकी हमले में जान गँवा बैठे जवानों में एक नाम देवरिया के सीआरपीएफ जवान विजय कुमार मौर्य का भी है। विजय के इस हमले में शिकार होने के बाद उनके कई रिश्ते ताउम्र सिसकियाँ भरने के लिए पीछे छूट गए। इस हमले में सिर्फ़ देश की सेना का एक जवान ही नहीं बलिदान हुआ बल्कि बुजुर्ग पिता ने विजय के रूप में अपने घर के सबसे होनहार बेटे को गवाँ दिया। उस पत्नी का सुहाग भी उजड़ गया जिसके पास विजय की तीन साल की मासूम बच्ची है, जो अभी अपने पिता को ढंग से जान भी नहीं पाई थी। इसके अलावा दो भतीजियों की आस भी टूट गई, जिनकी जिम्मेदारी उनके पिता की मौत के बाद विजय ने ही उठाई हुई थी।

गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़ गए वीर रतन ठाकुर

14 फरवरी को पुलवामा आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त हुए रतन ठाकुर अपनी गर्भवती पत्नी को अकेला छोड़कर चले गए थे। रतन के पिता निरंजन ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे रतन ने पत्नी राजनंदनी को फोन करके यह बताया था कि वो श्रीनगर जा रहे हैं और शाम तक वहाँ पहुँच जाएँगे। रतन ठाकुर ने अपनी पत्नी से होली पर आने का वादा किया था और इसी इंतज़ार में उनकी पत्नी के दिन कट रहे थे। बता दें कि रतन सिंह का चार साल का बेटा भी है जो कहता है कि उसके पिता ड्यूटी पर हैं। चार साल के इस बच्चे को हर पल अपने पिता का इंतज़ार रहता है।

4 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे वीर अजीत कुमार

14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में अजीत कुमार को उनके घरवालों ने हमेशा के लिए खो दिया। अजीत की उम्र मात्र 38 साल थी। चार दिन पहले ही अजीत अपनी छुट्टियाँ बिताकर ड्यूटी पर वापस लौटे थे। अजीत कुमार सीआरपीएफ की 115वीं बटालियन में तैनात थे। अजीत के वीरगति के प्राप्त होने की सुनने के बाद घर में कोहराम मच गया। अजीत के भाई रंजीत ने बताया कि एक महीने पहले ही उनके बड़े भाई अजीत छुट्टियों में घर आए थे, लेकिन 10 फरवरी को छुट्टी समाप्त होने पर वो जम्मू वापस लौट गए थे। किसे मालूम था कि अजीत के घरवालों की मुलाकात उनसे आखिरी है, इसके बाद वो तिरंगे में लिपट कर ही वापस आएँगे।

सुबह सबेरे शपथ, 72 घंटे में इस्तीफा… शरद पवार से हुई बात, फिर साथ आए थे अजीत: देवेंद्र फडणवीस ने बता दिया 3 दिन की सरकार का सच

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की सहमति के बाद ही महाराष्ट्र में 2019 में तीन दिन की सरकार बनी थी। राज्य के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने यह चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि शरद पवार ने स्थिर सरकार बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। उनकी सहमति के बाद ही उन्होंने और अजित पवार ने शपथ ली थी। हालाँकि शरद पवार ने इस दावे को झूठा करार दिया है।

देवेंद्र फडणवीस ने कहा है, “मैंने और अजित पवार ने शपथ ली थी। आपको बता दूँ कि यह कोई सीक्रेट ऑपरेशन नहीं था। इसमें स्थिर सरकार देने के लिए किसी और की नहीं बल्कि शरद पवार की सहमति थी। भाजपा-एनसीपी सरकार के गठन की पूरी योजना पर शरद पवार के साथ विस्तार से चर्चा हुई थी।”

पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि सरकार बनाने को लेकर उन्हें दो बार धोखा मिला। पहला धोखा उद्धव ठाकरे ने दिया। उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे ने हमारे साथ चुनाव लड़ा। इस दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की थी कि चुनाव के बाद फडणवीस फिर से मुख्यमंत्री होंगे, तो ठाकरे शिवसेना और भाजपा के सभी नेताओं के साथ ताली बजा रहे थे। लेकिन बाद में जब ठाकरे को यह लगने लगा कि वह मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो उन्होंने मेरा फोन उठाना बंद कर दिया। फिर वह मुख्यमंत्री बनने के लिए एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ भाग गए।” फडणवीस ने कहा है कि उन्हें दूसरा धोखा शरद पवार ने दिया। उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ बातचीत में व्यस्त थे। इस दौरान सरकार बनाने को लेकर उनकी बातचीत पूरी हो चुकी थी। तभी एनसीपी से सरकार बनाने को लेकर प्रस्ताव आ गया।

फडणवीस ने कहा है, “हमारे पास एनसीपी की ओर से प्रस्ताव आया था कि उन्हें एक स्थिर सरकार की जरूरत है। इसलिए हमें मिलकर स्थिर सरकार बनानी चाहिए। प्रस्ताव आने के बाद हमने आगे बढ़ते हुए बातचीत करने का फैसला किया। बातचीत शरद पवार से हुई। फिर चीजें बदल गईं। सबने देखा है कि चीजें कैसे बदलीं। मैं पूरी निष्पक्षता के साथ कहना चाहता हूँ कि अजित पवार ने मेरे साथ ईमानदारी से शपथ ली थी। लेकिन बाद में एनसीपी की रणनीति बदल गई।”

फडणवीस के इस बयान को झूठा बताते हुए शरद पवार ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि मुझे लगता था देवेंद्र एक संस्कारी और सज्जन व्यक्ति हैं। मुझे कभी नहीं लगा कि वह झूठ का सहारा लेंगे और इस तरह का बयान देंगे।

क्या है पूरा मामला

साल 2019 में महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटों में जीत मिली थी। वहीं, एनसीपी को 54 और कॉन्ग्रेस को 44 सीटें मिलीं थीं। चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना का गठबंधन था। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के मुद्दे पर यह गठबंधन टूट गया। इसके बाद शिवसेना ने धुर विरोधी कॉन्ग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाते हुए सरकार बनाने की बातचीत शुरू की।

हालाँकि राज्य में सरकार बनने के आसार नहीं देख राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद भी उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की बातचीत में जुटे हुए थे। इसी बीच देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार सरकार बनाने का दावा लेकर राज्यपाल के पास पहुँच गए। उन्होंने 23 नवंबर 2019 को सुबह-सुबह पद और गोपनीयता की शपथ ली। हालाँकि बाद में फडणवीस और अजित पवार सरकार बनाने के लिए आवश्यक विधायक नहीं जुटा पाए और 72 घण्टे के भीतर ही इस सरकार की विदाई हो गई।

चंडीगढ़ की नाजिश खान बनी पूजा, दिल्ली में हिंदू युवक संग की शादी: परिवार की सुरक्षा को लेकर अजय कुमार ने जताई चिंता

चंडीगढ़ की एक लड़की ने हिंदू धर्म स्वीकार करते हुए दिल्ली में अजय कुमार संग शादी की है। नाजिश खान नाम की यह लड़की अब पूजा के नाम से जानी जाएगी। दोनों ने 13 फरवरी 2023 को दिल्ली के आर्य समाज मंदिर में शादी की। नाजिश ने हिंदू बनने पर बेहद खुशी जताई है।

जानकारी के मुताबिक नाजिश के अब्बा मुन्ना खान की मौत हो चुकी है। नाजिश की उम्र लगभग 30 साल है। वहीं उसके 32 वर्षीय पति अजय कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले हैं, जो फिलहाल चंडीगढ़ में रहते हैं। दोनों एक दूसरे को लम्बे समय से प्यार करते थे। इस बीच उनके घर वालों को इस रिश्ते की भनक लग गई। परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। आखिरकार दोनों ने अपने-अपने घरों को छोड़ दिया और एक साथ दिल्ली आकर रहने लगे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए नाजिश खान ने बताया कि उनके परिवार में 3 बहनें और 1 भाई है। उन्हें छोड़ कर सभी की शादी हो चुकी है। उनके अब्बा की मौत काफी पहले हो चुकी थी। लगभग 4 साल पहले कोरोना लॉकडाउन में उनकी मुलाकात एक मार्किट में कुछ सामान लेते हुए अजय से हुई थी। तब से दोनों एक-दूसरे को प्यार करने लगे।

वहीं ऑपइंडिया से बात करते हुए नाजिश के पति अजय ने बताया कि वो चंडीगढ़ में बाइक मैकेनिक थे। लेकिन अब दिल्ली में काम जमाने की कोशिश करेंगे। अजय ने बताया कि वो 5 दिनों से वे शादी करने के लिए भटक रहे थे। इस दौरान नाजिश के भाई ने उनके चंडीगढ़ में रहने वाले भाई को फोन कर धमकी दी। फोन पर नाजिश के भाई ने कहा कि अगर अजय उसे लेकर नहीं लौटा तो पूरे परिवार को अपहरण के केस में फँसा दिया जाएगा। अजय ने चंडीगढ़ में मौजूद अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता जताई। अजय का कहना है कि उन्होंने अपने वकील के माध्यम से अपनी शादी का नोटिस स्थानीय थाने में भिजवा दिया है।

शादी करवाने में सहयोग करने वाले दिल्ली के निवासी और सुदर्शन वाहिनी नाम का संगठन चलाने वाले आज़ाद विनोद ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि अजय और नाजिश ने 12 फरवरी को गाजियाबाद के एक मंदिर में शादी कर ली थी। लेकिन वे अपनी शादी को कानूनी मान्यता दिलाना चाह रहे थे। उनका कोई स्थानीय परिचय नहीं था। किसी माध्यम से अजय और नाजिश की मुलाकात हमसे हुई। हमने अजय और नाजिश को वकील उपलब्ध करवाया। कड़कड़डूमा कोर्ट के एक वकील के साथ वहीं के एक आर्य समाज मंदिर में इस शादी को 13 फरवरी को विधिवत तौर पर सम्पन्न करवाया गया।

‘मोदी सरकार के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया राम मंदिर वाला फैसला’: कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी का अजीबोगरीब बयान, अब्दुल नज़ीर के राज्यपाल बनने से भड़के

कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी (Rashid Alvi) ने केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधा है और राम जन्मभूमि (RAM JANAM BHUMI) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के दिए फैसले पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग मानते हैं कि राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार के दबाव में दिया गया था। उन्होंने साथ ही कहा है कि जजों को सरकारी जॉब देना दुर्भाग्यपूर्ण है।

बकौल अल्वी, एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के 50 प्रतिशत रिटायर्ड जजों को सरकार कहीं न कहीं भेज देती है। इससे लोगों का यकीन न्यायपालिका में कम होता जाता है। उन्होंने कहा कि जस्टिस गोगोई को अभी तो राज्यसभा भेजा गया था। अब सरकार ने जस्टिस एस अब्दुल नजीर साहब को गवर्नर बना दिया।

अल्वी ने आगे कहा, “राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर बहुत लोग सवालिया निशान लगाते चले आ रहे हैं कि यह गवर्नमेंट के दबाव में हुआ है। जस्टिस गोगोई के बाद जस्टिस नजीर को गवर्नर बनाना, उन लोगों के शक को और मजबूत करता है। संविधान का आर्टिकल 50 कहता है कि न्यायपालिका और कार्यपालिका अलग-अलग होना चाहिए। सरकार को काशिश करनी चाहिए की न्यायपालिका बिल्कुल अलग हो और उसका कार्यपालिका से कोई वास्ता न हो।”

वहीं हाल ही में इस्तीफा देने वाले महाराष्ट्र के पूर्व गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी के बारे में उन्होंने कहा कि वह लगातार ऐसे बयान देते रहें हैं जो आरएसएस की विचारधारा से जुड़े हुए हैं। तमिलनाडु के गवर्नर यही काम कर रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट के कई गवर्नर यही काम कर रहे हैं। केरल का गवर्नर यही काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “गवर्नर ने संविधान की रक्षा करने के बजाए आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा की बात करते हैं। उन्हें लगता होगा कि अगर भाजपा व आरएसएस की लीडरशिप खुश होगी तो उन्हें और तरक्की मिलेगी।”

उल्लेखनीय है कि जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस गोगोई राम जन्मभूमि विवाद पर फैसला देने वाले पाँच सदस्यीय संवैधानिक पीठ का हिस्सा थे। जस्टिस नजीर हाल ही में 4 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के जज के पद से रिटायर हुए हैं। जस्टिस नजीर ‘तीन तलाक’ मामले पर फैसला देने वाले जजों में शामिल थे।

‘सभी बुजुर्ग कर लें सामूहिक आत्महत्या’: Yale यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने दिया बढ़ती जनसंख्या का ‘समाधान’, प्रमोट करने के लिए NYT को लोगों ने लताड़ा

जापान में बुजुर्गों की संख्या बढ़ने के बाद अमेरिका के कनेक्टिकट स्थित Yale यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने अजीबोगरीब सुझाव दिया है। उसके सुझाव को आगे बढ़ाने के लिए लोग ‘न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT)’ को भी जम कर लताड़ लगा रहे हैं। असल में, प्रोफेसर युसुके नरीता ने कहा है कि बाकियों की समस्या को कम करने के लिए जापान के सभी बुजुर्गों को सामूहिक आत्महत्या कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस समस्या का यही एकमात्र समाधान है, और स्पष्ट भी है।

उन्होंने कहा कि उम्रदराज लोगों की जनसंख्या बढ़ने के कारण जापान बड़ी समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने 2021 के अंत में ही ये बात कही थी, जिसे अब NYT आगे बढ़ा रहा है। हालाँकि, बाद में प्रोफेसर ने कहा था कि उनकी बातों को सन्दर्भ से हट कर लिया गया। जापान के योद्धाओं में पूर्व काल में एक ‘Seppuku’ का प्रचलन था, जिसमें कोई विकल्प न होने के बाद व्यक्ति खुद को ही कटार घोंप कर मार डालता था।

उन्होंने कहा था कि न सिर्फ बुजुर्गों को राजनीति, बल्कि कारोबार के क्षेत्र में भी नेतृत्व से बाहर धकेलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए उन्हें जगह खाली करने की ज़रूरत है। अब सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रोफसर और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को लताड़ा है। एक अर्थशास्त्री ने तो यहाँ तक कहा प्रोफसर लोग उस बेकार वर्ग के होते हैं, जो लोगों को दिग्भ्रमित करते हैं। एक ने तो पहले प्रोफेसर को ही आत्महत्या करने की सलाह दे डाली।

कुछ विशेषज्ञों ने ये भी दवा किया कि सस्ती पब्लिसिटी के लिए और अपने करियर को चमकाने के लिए प्रोफेसर ने इस तरह का बयान दिया है। एक अन्य प्रोफेसर ने कहा कि खुद को लोगों के ध्यान में लाने के लिए इस तरह का बयान दिया गया है। हालाँकि, अब प्रोफेसर युसुकु नरितु ने ‘Mass Suicide’ शब्दों का प्रयोग करना बंद कर दिया है। उनका कहना है कि उनके आईडिया को गलत तरीके से लिया गया। NYT पहले भी प्रोपेगंडा फैलाता रहा है।

त्रिपुरा में फिर से BJP सरकार के आसार, मुस्लिमों का 70% वोट CPM को मिलने का अनुमान: जन की बात का सर्वे, बड़ी ताकत बन उभर सकती है ‘तिपरा’

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान गुरुवार (16 फरवरी, 2023) को होने वाले हैं। मैदान में मौजूद सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। सभी दल अपने प्रमुख नेताओं से चुनाव प्रचार करवा रहे हैं। भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) प्रचार कर चुके हैं। वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री माणिक साहा जीत को लेकर अपना दावा ठोक रहे हैं।

दूसरी ओर केरल में एक-दूसरे की दुश्मन सीपीएम (CPM) और काॅन्ग्रेस (Congress) पार्टी त्रिपुरा में एक-दूसरे के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती पेश कर रही है। दूसरी ओर जनजातीय बहुल इलाके में तिपरा गठबंधन की भी अच्छी पकड़ है।

इस बीच ‘त्रिपुरा ओपिनियन पोल’ के नाम से एक मतदान पूर्व सर्वे आया है। सर्वे ‘जन की बात’ की ओर से किया गया है। सर्वे में 10 हजार लोगों ने हिस्सा लिया है। सर्वे में कहा गया है कि इसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों के मतदाताओं से डाटा इकट्ठा किया गया है। ग्रामीण इलाकों के जनजातीय और गैर-जनजातीय क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। सर्वे के अनुसार, यहाँ की कुल 60 सीटों में से भाजपा गठबंधन को 30 से 35 सीटें, सीपीएम गठबंधन को 16 से 13 सीटें, तिपरा गठबंधन को 13 से 11 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

वहीं वोट शेयर की बात करें तो सीपीएम गठबंधन ने इसमें बाजी मारी है। सर्वे के अनुसार, सीपीएम गठबंधन को 41 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर मिला है। वहीं भाजपा गठबंधन को 32 से 39 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, तिपरा गठबंधन को 16 से 21 प्रतिशत और अन्य को 1 से 2 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है।

वहीं डेमोग्राफी के हिसाब से बात करें तो बंगाली हिंदुओं की पहली पसंद भाजपा है और सर्वे के मुताबिक, करीब 60 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं द्वारा भाजपा को वोट देने का अनुमान जताया गया है। इसके बाद 30 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं के सीपीएम गठबंधन और आठ प्रतिशत बंगाली हिंदुओं के तिपरा गठबंधन को वोट देने का अनुमान जताया गया है। वहीं 2 प्रतिशत बंगाली हिंदुओं ने अन्य पार्टियों को वोट दिया है। दूसरी ओर बंगाली मुस्लिमों की अगर बात करें तो इसमें सीपीएम गठबंधन सबसे आगे है।

क्रेडिट – जन की बात

सर्वे के मुताबिक, 70 प्रतिशत बंगाली मुस्लिम सीपीएम गठबंधन को अपना वोट दे सकते हैं। वहीं महज 8 प्रतिशत बंगाली मुस्लिम की पसंद भाजपा है। जनजातीय लोगाें की बात करें तो तिपरा गठबंधन उनकी पहली पसंद है। सर्वे के मुताबिक 65 प्रतिशत जनजातीय लोग तिपरा गठबंधन को वोट दे सकते हैं। वहीं भाजपा और सीपीएम गठबंधन को जनजातीय लोगों की तरफ से क्रमश 25 और नौ प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान हैं। सर्वे के मुताबिक जनजातीय समुदाय में में भी त्रिपुरी जनजाती में भाजपा को 55 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान जताया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में भाजपा ने सीपीएम के 25 साल पुराने शासन का अंत कर दिया था। भाजपा गठबंधन ने तब यहां 60 में से 43 सीटों पर कब्जा किया था। भाजपा ने अकेले दम पर यहाँ बहुमत का आँकड़ा पार कर लिया था। कॉन्ग्रेस को यहाँ एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। सीपीएम गठबंधन को 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।