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PM मोदी के कायल हुए ‘कांतारा’ वाले ऋषभ शेट्टी और ‘KGF’ वाले यश: दिवंगत पुनीत राजकुमार की पत्नी से भी मिले प्रधानमंत्री, पूर्व क्रिकेटर कुंबले-वेंकटेश भी थे मौजूद

कर्नाटक दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के स्टार यश और ऋषभ शेट्टी समेत अन्य हस्तियों से मुलाकात की। इस दौरान फिल्म मेकर, प्रोड्यूसर विजय किरागंदूर और अश्विनी पुनीत राजकुमार तथा पूर्व क्रिकेटर अनिल कुंबले, जवागल श्रीनाथ समेत कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी उनके साथ नजर आए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मुलाकात रविवार (12 फरवरी, 2023) को बेंगलुरु के राज्यपाल निवास में की। इस मुलाकात को लेकर न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अश्विनी राजकुमार से मिलते हुए उनके दिवंगत पति और एक्टर रहे पुनीत राजकुमार को याद किया।

यही नहीं इस मुलाकात के दौरान सिनेमा और कर्नाटक की संस्कृति जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की हुई। प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और फिल्मों में महिला पात्रों को प्राथमिकता देने के लिए साउथ इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री की सराहना की।

इस मुलाकात को लेकर कर्नाटक भाजपा ने ट्वीट कर कहा है, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में कर्नाटक फिल्म इंडस्ट्री के स्टार्स से मुलाकात की। इसमें संस्कृति, नए भारत और कर्नाटक की प्रगति से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।”

सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर श्रद्धा ने भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकात को लेकर ट्वीट किया। अपने फैंस के बीच अय्यो के नाम से मशहूर श्रद्धा ने लिखा, “नमस्कार, मैं अपने देश के माननीय प्रधानमंत्री से मिली। मेरे लिए उनका पहला शब्द था ‘अय्यो’। मैं एकटक देख रही हूँ। हे भगवान, उन्होंने सच में मेरा नाम लिया। धन्यवाद प्रधानमंत्री जी।”

प्रधानमंत्री ने किया एयरो इंडिया शो का शुभारंभ…

पीएम मोदी कर्नाटक के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने सोमवार (13 फरवरी, 2023) को 14वें एयरो इंडिया शो का उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान मोदी ने कहा है, “पहले यह सिर्फ एयर शो था। लेकिन अब ये भारत की ताकत बनकर उभर रहा है। अमृतकाल का भारत एक फाइटर पायलट की तरह आगे बढ़ रहा है, जिसको ऊँचाइयाँ छूने से डर नहीं लगता। यह सबसे ऊँची उड़ान भरने के लिए उत्साहित है। आज का भारत तेज सोचता है, दूर की सोचता है और तुरंत फैसले लेता है। एक बात और, भारत की रफ़्तार चाहे जितनी तेज हो लेकिन वो हमेशा जमीन से भी जुड़ा रहता है।”

‘रामदेव का लश्कर से कनेक्शन, धीरेंद्र शास्त्री बहुरूपिया’: JDU के गुलाम रसूल बलियावी के बहके बोल, कहा- मोदी पाकिस्तान से डरते हैं तो सेना में 30% मुस्लिम भर्ती करें

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी गुलाम रसूल बलियावी ने फिर से विवादित बयान दिया है। रविवार (12 फरवरी 2023) को उन्होंने बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बहुरूपिया बता डाला। इतना ही नहीं बाबा रामदेव का पाकिस्तान आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध होने का दावा किया। कहा कि यदि मोदी पाकिस्तान से डरते हैं तो सेना में 30 फीसदी मुस्लिमों को भर्ती करें।

बिहार के नवादा में आयोजित मरकजी इदारा-ए-शरिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बलियावी बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव को दी गई जमीन और उनके प्रोडक्ट्स की जाँच होनी चाहिए। उनका जितना माल बिक रहा है और वह कहाँ-कहाँ से बनकर आ रहा है, इसकी भी जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रामदेव भारतीय नहीं हैं। उनकी संपत्ति की जाँच होनी चाहिए। 

बलियावी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मादी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्हें पाकिस्तान से निपटने में डर लग रहा है तो सिर्फ 30 प्रतिशत मुसलमानों को फौज में जगह देकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब पाकिस्तान मिसाइल बनाकर दिखा रहा था तो नागपुर के कोई बाबा जवाब देने नहीं आए थे। एक मुसलमान का बेटा एपीजे अब्दुल कलाम सामने आया था।”

वहीं बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र शास्त्री को बहरूपिया बताते हुए कहा, “पता नहीं वे कौन हैं। मैं उनके बारे में नहीं जानता। मैं संविधान और अदालत को जानता हूँ। इस तरह के बहरूपिया की हमारे देश में कोई जगह नहींं है। कोई कपड़ा और मेकअप के सहारे हमारे देश को गुमराह नहीं कर सकता।” बलियावी ने कहा कि देश में दलितों की तरह मुसलमानों के लिए भी एक्ट बनना चाहिए। मुसलमानों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए जाने की जरूरत है।

बलियावी वही नेता हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले शहर का शहर को कर्बला बनाने की बात कहते हुए नुपूर शर्मा को पागल औरत करार दिया था। जदयू नेता ने झारखंड के हजारीबाग में 18 जनवरी, 2023 को कहा था, “मेरे आका की इज्जत पर हाथ डालोगे तो अभी तो हम कर्बला मैदान में इकट्ठा हुए हैं, उनकी इज्जत के लिए हम शहरों को भी कर्बला बना देंगे। खुद को सेक्युलर बताने वाली राजनीतिक पार्टियों ने भी नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग नहीं की। कोई रियायत नहीं होगी, क्योंकि मेरी ज़िन्दगी मेरी नहीं है और मेरी साँसें भी मेरी नहीं हैं। जीने की तमन्ना वो करे, जिसके पास रसूल का नूर न हो। हम तो इसी आरजू-तमन्ना से जीते आए हैं कि मरने के बाद एक ऐसा दिन तो आएगा, जब कोई नहीं रहेगा।”

प्रवीण नेट्टारू की हत्या में गिरफ्तार शफी बेल्लारे लड़ सकता है कर्नाटक विधानसभा चुनाव, टिकट देने की तैयारी में SDPI: कुल्हाड़ी से काट दिए गए थे BJYM नेता

कर्नाटक में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों में शफी बेल्लारे भी उम्मीदवार हो सकता है। SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया) उसे टिकट देने की तैयारी में है। SDPI प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) की राजनैतिक शाखा है। शफी भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या में आरोपित है। फिलहाल वह जेल में बंद है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शफी बेल्लारे को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना SDPI के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने जताई है। मजीद के मुताबिक शफी को पार्टी दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तूर विधानसभा से उम्मीदवार बना सकती है। टाइम्स नाउ पर एक डिबेट के दौरान SDPI प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि शफी बेल्लारे बेगुनाह है और उसे राजनैतिक कारणों से फँसाया गया है। इस दौरान SDPI प्रवक्ता ने बताया कि अभी उसे उम्मीदवार बनाने को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन फ़रवरी के अंतिम सप्ताह तक आने वाली लिस्ट में उसका नाम हो सकता है। SDPI प्रवक्ता ने शफी बेल्लारे को अपना राज्य सचिव भी बताया।

SDPI प्रवक्ता ने कहा कि शफी के बारे में अंतिम निर्णय अदालत करेगी। फिलहाल उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। इस दौरान SDPI प्रवक्ता ने शफी को पूरी कानूनी मदद देने का भी एलान किया। वहीं भाजपा ने SDPI की आलोचना की है। भाजपा नेता एस प्रकाश ने SDPI की इस घोषणा को घृणित बताया है। उन्होंने PFI और SDPI को आतंकी संगठन बताते हुए इन्हे जनता द्वारा कड़ा जवाब मिलने की बात कही है। भाजपा नेता के मुताबिक महज घोषणा करने से कोई विधायक नहीं बन जाता।

शफी बेल्लारे का नाम तब चर्चा में आया था, जब 26 जुलाई 2022 को सुल्लिया तालुक में पड़ने वाले गाँव बेल्लारे में भाजपा नेता प्रवीण नेट्टारू को कुल्हाड़ी से काट डाला गया था। हमलावर बाइक पर सवार हो कर आए थे। इस हत्याकांड की जाँच कुछ ही समय बाद NIA को सौंप दी गई थी। NIA ने शफी सहित 20 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। शफी पर प्रवीण की मुखबिरी करने का आरोप है।

गाड़ी पर लिखा ‘ॐ’, उसे लात मारता जॉनी… 10 साल पुरानी फिल्म को लेकर श्रेयस तलपड़े ने माँगी माफ़ी, कहा – ध्यान रखना चाहिए था, भविष्य में नहीं होगा ऐसा

बॉलीवुड अभिनेता श्रेयस तलपड़े (Shreyas Talpade) की फिल्म का एक सीन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस फिल्म का नाम ‘कमाल धमाल मालामाल’ है। डायरेक्टर प्रियदर्शन के निर्देशन में बनने वाली यह कॉमेडी फिल्म साल 2012 में रिलीज हुई थी। इसमें श्रेयस तलपड़े ने जॉनी नाम के शख्स का किरदार निभाया था। उनके अलावा इस फिल्म में नाना पाटेकर, ओम पुरी, असरानी ने भी मुख्य भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सीन में श्रेयस तलपड़े हिंदुओं के पवित्र धार्मिक प्रतीक ॐ पर पैर रखते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस वीडियो को ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड फैन’ ने 13 फरवरी, 2023 को शेयर किया है। वीडियो में लिखा गया है कि एक क्रिश्चियन व्यक्ति ने ॐ पर पैर रखा हुआ है। उर्दूवुड में किसी अन्य धर्म का इस तरह से अपमान होते हुए देखा है क्या? वीडियो सामने आने के बाद अभिनेता ने ट्विटर पर पोस्ट शेयर कर इसके लिए माफी माँगी है।

उन्होंने लिखा, “जब कोई शूटिंग कर रहा होता है तो दो फैक्टर होते हैं… जिसमें सीक्वेंस के दौरान विशेष रूप से एक्शन सीन के समय व्यक्ति का माइंडसेट होता है। इसमें निर्देशक की जरूरतों, समय की कमी और बहुत सी अन्य चीजें शामिल है। आप इस वीडियो में जो कुछ देख रहे हैं, उसको एक्सप्लेन करना या फिर खुद को सही ठहराना ठीक नहीं है। मैं बस इतना कह कहना चाहता हूँ कि यह सब अनजाने में किया गया था।”

अभिनेता ने आगे लिखा, “मैं इसके लिए आप सभी से माफी माँगता हूँ। मुझे उसे देखना चाहिए था और निर्देशक के ध्यान में भी लाना चाहिए था। मैं आगे से कभी भी जानबूझकर किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाऊँगा और न ही इस तरह का सीन फिर कभी दोहराऊँगा।”

भले ही अभिनेता ने अपने इस कृत्य के लिए माफी माँग ली है, लेकिन सोशल मीडिया पर अभी भी लोगों का उनका प्रति गुस्सा कम नहीं हुआ है। एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “चलो.. गलती तो मानी…हमारे सदी के महानायक ने तो ऐसे सीन्स का रिकॉर्ड बनाया है और गलती भी नहीं मानते…थोड़े दिन पहले Good Bye फिल्म में भी गजब के कारनामे किए थे।”

एक और यूजर लिखते हैं कि गलती स्वीकार करने के लिए धन्यवाद। उम्मीद है कि आप जिस इंडस्ट्री में काम करते हैं, उसमें अपने सहयोगियों को भी शिक्षित करेंगे। उन्हें बताएँगे कि यह घृणित है।

एक अन्य ने लिखा कि कम से कम आपको एहसास हुआ। सावधान रहें और अगली बार शूटिंग से पहले हर चीज को बारीकी से देखें।

‘जिंदा है LTTE वाला प्रभाकरन’: पूर्व कॉन्ग्रेस नेता का दावा- जल्द आएगा सामने, श्रीलंका ने 2009 में मार गिराने का किया था दावा

आतंकवादी संगठन लिट्टे के चीफ प्रभाकरन के जिंदा होने का दावा किया गया है। यह दावा पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और ‘वर्ल्ड कन्फेडरेशन ऑफ तमिल’ के अध्यक्ष पाझा नेदुमारन ने किया है। नेदुमारन कहा है कि प्रभाकरन उनके संपर्क में है और जल्द ही सामने आएगा। श्रीलंकाई सरकार ने मई 2009 में प्रभाकरन के मारे जाने की घोषणा की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (13 फरवरी 2023) को तमिलनाडू के तंजावुर में मीडिया से बात करते हुए पाझा नेदुमारन ने कहा है कि श्रीलंका की वर्तमान स्थिति और राजपक्षे सरकार के खिलाफ विद्रोह को देखते हुए प्रभाकरन के सामने आने का सही समय आ गया है। प्रभाकरन जल्द ही सबके सामने आएगा।

पाझा नेदुमारन ने यह भी कहा है कि उन्हें दुनिया भर की तमिल आबादी के सामने यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि प्रभाकरन बहुत अच्छा काम कर रहा है और वह जिंदा है। इससे प्रभाकरन को लेकर चल रहीं अफवाहों को विराम मिलेगा। प्रभाकरन जल्द ही तमिलों के बेहतर जीवन के लिए कुछ नया करेगा। इसलिए दुनिया भर के तमिलों को एकजुट हो जाना चाहिए।

नेदुमारन ने आगे कहा है कि प्रभाकरन और लिट्टे ने भारत का विरोध करने वाले किसी भी देश को कभी भी अपनी जमीन पर पैर नहीं रखने दिया। उन्होंने कहा, “न ही ऐसे किसी देश से उसका कोई संबंध रहा जो भारत का विरोधी हो। इसीलिए, भारत सरकार को श्रीलंका में चीन की मजबूत होती स्थिति को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।” उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह प्रभाकरन के परिवार के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि प्रभाकरन फिलहाल अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहा है। उसको लेकर यह जानकारी वह प्रभाकरन के परिवार की स्वीकृति के बाद दे रहे हैं।

कौन है प्रभाकरन

वेलुपिल्लई प्रभाकरन श्रीलंकाई तमिल गुरिल्ला और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे (LTTE) का संस्थापक है। वह श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में एक स्वतंत्र तमिल राज्य बनाने की माँग करता था। लिट्टे के कारण करीब तीन दशक तक श्रीलंका गृह युद्ध की आग में जलता रहा। हालाँकि इसके बाद श्रीलंकाई सेना ने मई 2009 में प्रभाकरन को मौत के घाट उतार दिया।

प्रभाकरन की मौत को लेकर अलग-अलग तरह के दावे होते रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि सेना से घिरने के बाद उसने खुद को गोली मार ली थी। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में सेना द्वारा उसको मौत के घाट उतारने की बात कही गई थी। हालाँकि, बीते 14 साल में प्रभाकरन के जीवित होने को लेकर पहली बार दावा किया गया है।

जामिया हिंसा: शरजील-सफूरा सहित 11 को बरी करने पर हाई कोर्ट का नोटिस, कहा- आगे जाँच होगी, ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों का असर नहीं

दिल्ली पुलिस ने जामिया हिंसा मामले में 11 लोगों को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सोमवार (13 मार्च 2023) को हाई कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया। साथ ही स्पष्ट किया है कि इस मामले की आगे की जाँच या केस पर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों का कोई असर नहीं होगा। ट्रायल कोर्ट ने 2019 के हिंसा मामले में जिन लोगों को बरी कर दिया था उनमें शरजील इमाम, सफूरा जरगर और आसिफ इकबाल तन्हा भी शामिल हैं।

मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने हालाँकि निचली अदालत की टिप्पणियों को हटाने के लिए अंतरिम निर्देश पारित करने के दिल्ली पुलिस के आग्रह को स्वीकार से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “आगे की जाँच की जाएगी, इसलिए जाँच एजेंसी के खिलाफ की गई टिप्पणियों का आगे की जाँच या किसी आरोपित के मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

दरअसल 4 फरवरी 2023 को निचली अदालत ने शरजील इमाम समेत 11 लोगों को बरी किया था। निचली अदालत ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ काफी सख्त टिप्पणी की थी और कहा था कि पुलिस असली आरोपितों तक पहुँचने में विफल रही और इनलोगों को बलि का बकरा बनाया है। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली पुलिस को बगावत और विरोध मे अंतर समझना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इनलोगों के मिलीभगत से यह हिंसा हुई है, इसका कोई प्रमाण नहीं है।

हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (AG) संजय जैन ने तर्क दिया कि ये टिप्पणियाँ आगे की जाँच को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकती हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस जाँच जारी रखने और चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति देने के लिए एक अंतरिम आदेश की माँग की।

उन्होंने कहा, “मुझे निचली अदालत की टिप्पणियों से गंभीर समस्या है। क्या ये निष्कर्ष स्वीकार्य हैं? क्या वह एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहे थे? आदेश एक सेल्फ गोल (SELF GOAL) करने जैसा है। और एक सेल्फ गोल करने के बाद, वह कहते हैं कि ‘मैं जीत गया’। वह कहते हैं कि दंगों ने तबाही मचाई। अगर यह तबाही थी, तो क्या पुलिस का यह कर्तव्य नहीं है कि वह उन लोगों को गिरफ्तार करे?”

क्या था मामला

मामला दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया और इसके आसपास हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। यहाँ कुछ छात्रों और स्थानीय लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के विरोध में संसद की ओर मार्च करने का आह्वान किया था। मार्च ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने शांत करने का प्रयास किया तो उन पर पथराव किए गए और कुछ विरोध करने वाले छात्र कथित तौर पर विश्वविद्यालय में प्रवेश कर गए।

दिल्ली पुलिस ने कुल मिलाकर मामले में 12 लोगों को आरोपित बनाया था। इन 12 लोगों में शरजील इमाम, आसिफ इकबाल तन्हा, सफूरा जरगर, मोहम्मद अबुजर, उमैर अहमद, मोहम्मद शोएब, महमूद अनवर, मोहम्मद कासिम, मोहम्मद बिलाल नदीम, शहजर रजा खान और चंदा यादव और मोहम्मद इलियास शामिल थे। निचली अदालत में 4 फरवरी 2023 को हुई सुनवाई में केवल मोहम्मद इलियास को मामले में आरोपित माना और इमाम समेत अन्य को आरोपमुक्त कर दिया गया।

एक कन्हैया लाल, पीछे थे बुटीक वाला वसीम, चिकन वाला मोहसिन, चश्मे वाला आसिफ, चूड़ी वाला जावेद… इनकी रेकी से ही कटा था गला

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून, 2022 को हुए टेलर कन्हैया लाल तेली हत्याकांड की जाँच कर रही NIA ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। 3500 पन्नों की इस चार्जशीट में कई नए खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस निर्मम हत्या में एक पूरी गैंग ने मिल कर काम किया जिसमें कन्हैया लाल के कुछ मुस्लिम पड़ोसियों ने भी रेकी की भूमिका निभाई। दावा यह भी किया गया है कि इस हत्याकांड को पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर अंजाम दिया गया था।

पाकिस्तानियों के इशारे पर हिंदुस्तानी का कत्ल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि कन्हैया लाल की हत्या के लिए बाकायदा एक व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाया गया था। इस ग्रुप में कई पाकिस्तानी भी शामिल थे। गैंग का लीडर पाकिस्तान के कराची में बैठा सलमान अत्तारी बताया जा रहा है, जो कन्हैया लाल की हत्या का मास्टरमाइंड भी है। बताया गया है कि सलमान ने अपने अन्य पाकिस्तानी सहयोगियों के साथ उस व्हाट्सएप्प ग्रुप में जुड़े भारतीय मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया। यहीं पर उसने नबी की शान में गुस्ताखी करने वालों के सिर काटने के लिए भी कहा।

इस व्हाट्सएप्प ग्रुप में तहरीक एक लब्बैक पार्टी (TLP) नाम के संगठन से जुड़े कट्टरपंथी अपनी विचारधारा फैला रहे थे। दावा ये भी किया जा रहा है कि कन्हैया लाल का कातिल मोहम्मद गौस कराची के सलमान अत्तारी से मिल भी चुका था। इस व्हाट्सएप ग्रुप में PFI से ताल्लुक रखने वाले लोग भी जुड़े बताए गए हैं। आखिरकार पाकिस्तानी आकाओं ने कन्हैया लाल की हत्या कर के उसका वीडियो बनाने और दहशत फ़ैलाने के लिए उसे ज्यादा से ज्यादा वायरल करने का फरमान दिया जिस पर उदयपुर में अमल किया गया।

पड़ोसियों ने किया इशारा तो दुकान में घुस कर मारा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NIA की चार्जशीट में कन्हैया लाल की हत्या में जिस रैकेट की सक्रिय भूमिका बताई गई, उस गैंग में कट्टरपंथियों की संख्या 9 है। ये सभी गिरफ्तार आरोपित अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं। चार्जशीट के मुताबिक, आरोपितों ने प्रशिक्षित आतंकियों जैसे अपनी-अपनी साजिश को अंजाम दिया। 32 साल का वसीम अली इसी गैंग का मेंबर है। वसीम की बुटीक की दुकान है जो कन्हैया लाल के घर के पास है। इसी ने कन्हैया लाल के घर आने और जाने की लगातार जानकारी कातिलों तक पहुँचाई थी।

चार्जशीट में बताया गया है कि होलसेल का काम करने वाले 41 साल के कारोबारी मुस्लिम रज़ा उर्फ़ मुस्लिम खान ने पाकिस्तानियों की हाँ में हाँ मिलाई और कन्हैया लाल की हत्या के लिए बाकियों को उकसाया। मुस्लिम रज़ा के उकसावे पर चश्मे की दुकान पर काम करने वाला 23 साल का आसिफ हुसैन और 5 स्टार चिकन नाम से दुकान चलाने वाला 32 साल का मोहम्मद मोहसिन भी इस साजिश में एक्टिव तौर पर शामिल हो गया। कत्ल का जिम्मा मोहम्मद गौस और रियाज़ अंसारी को दिया गया। कत्ल का तरीका ‘सिर तन से जुदा वाला’ रखने के निर्देश दिए गए।

प्लानिंग और कातिलों की टीम तैयार होने के बाद इस गैंग ने रेकी करने वालों को शामिल किया। रेकी का पहला जिम्मा कन्हैया लाल के घर के बगल पाकीजा नाम से बुटीक की दुकान चलाने वाले 32 साल के वसीम अली को मिला। वसीम ने अपना काम भी किया और कन्हैया लाल के घर आने और जाने का समय कातिलों तक अपडेट करता रहा। बताया ये भी जा रहा है कि वसीम की ही मुखबिरी पर एक बार कन्हैया लाल को उनके घर में मारने का प्लान बना लिया गया था, जो बाद में दुकान के लिए रख दिया गया।

जहाँ घर की रेकी की जिम्मेदारी वसीम अली ने संभाली थी तो वहीं कन्हैया लाल की दुकान और उसके आसपास की मुखबिरी का काम 19 साल के मोहम्मद जावेद को सौंपा गया। जावेद कन्हैया लाल की दुकान के पास ही एक चूड़ी की दुकान पर काम करता था। उसने कातिलों को कन्हैया लाल द्वारा दुकान पर की जा रही पूरी दिनचर्या की जानकारी लगातार अपडेट की। कत्ल की पूरी तैयारी होने के बाद हथियार दिलाने का जिम्मा 25 साल के मोहसिन खान को मिला। मोहसिन लेथ मशीन चलाता था। उसी ने इस क़त्ल के लिए खास खंजर बनाए थे।

कत्ल तक खंज़रों किसी की नजर में न आएँ इसकी जिम्मेदारी चिकन शॉप के मालिक फरहाद मोहम्मद ने उठाई। उसने खंजर अपनी दुकान में कत्ल होने तक छिपा कर रखे थे। यहीं से हथियार उठा कर कातिल कन्हैया लाल की दुकान की तरफ बढ़ चले गए। कन्हैयालाल की गर्दन काटने से पहले रियाज़ और गौस ने तुर्की सहित इस्लामी मुल्कों में प्रसिद्ध इर्तुजुल गाजी की वेब सीरीज देखी थी। आखिरकार उन्होने कत्ल के साथ पाकिस्तानी आकाओं में इस हत्याकांड की वीडियो भी बनाई और उसे वायरल करते हुए हत्या की जिम्मेदारी भी ली।

इस चार्जशीट में पाकिस्तान के कराची में बैठे अबू इब्राहिम और सलमान अत्तारी को भी आरोपित किया गया है।

आरोप- मोदी सरकार ने बैंकों को तबाह कर दिया, हकीकत- 65% बढ़ा प्रॉफिट: 9 महीने में सरकारी बैंकों ने की ₹70166 करोड़ की कमाई

2014 में जब नरेंद्र मोदी ने देश का नेतृत्व सँभाला था, तब सरकारी बैंक एनपीए के उस दलदल में फँसे हुए थे जिससे उनका निकल पाना मुश्किल नजर आ रहा था। लेकिन मोदी सरकार के फैसलों ने इन बैंकों के अच्छे दिन लौटा दिए हैं। सरकारी बैंकों (PSB) ने मौजूदा वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में कुल 29,175 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। यह एक साल पहले की तुलना में 65 फीसदी अधिक है। यह दूसरी बात है कि कॉन्ग्रेस नीत विपक्ष अक्सर मोदी सरकार पर सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को तबाह करने का आरोप लगाती रहती है।

लेकिन आँकड़े बताते हैं कि विपक्ष के इन दावों में कोई दम नहीं है। एक भी सरकारी बैंक घाटे में नहीं है। इस समय देश में कुल 12 सरकारी बैंक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2023-23 की तीसरी तिमाही में सभी 12 सरकारी बैंकों ने कुल मिलाकर 29,175 करोड़ रुपए की कमाई की है। एक साल पहले यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में यह आँकड़ा 17,729 करोड़ रुपए था।

वित्तीय वर्ष 2022-23 के पहले नौ महीनों (अप्रैल 2022 से दिसंबर 2022) में सरकारी बैंकों ने 70,166 करोड़ रुपए की कमाई की है। वहीं वित्तीय वर्ष 2021-22 में यह आँकड़ा 48,983 करोड़ रुपए का था।

चालू वित्तीय वर्ष की तीनों तिमाही के आँकड़ों में नजर डालें तो पता चलता है कि तीसरी तिमाही में सरकारी बैंकों की कमाई में शानदार बढ़ोतरी हुई है। पहली तिमाही में कमाई करीब 15306 करोड़ की थी। दूसरी तिमाही में यह कमाई 25685 करोड़ रुपए रही। वहीं, तीसरी तिमाही में आँकड़ा बढ़कर 29175 करोड़ रुपए हो गया।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कमाई में हुई 139% की बढ़ोतरी

सरकारी बैंकों की कमाई के मामले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कमाई में सबसे अधिक 139% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने तीसरी तिमाही में 755 करोड़ रुपए की कमाई की। वहीं, यूको बैंक की कमाई में 110% की वृद्धि देखी गई, इस बैंक ने 653 करोड़ ने की कमाई की है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक की कमाई में भी 100% से अधिक की वृद्धि सामने आई है।

एक ओर जहाँ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 107% की बढ़ोतरी के साथ 2245 करोड़ रुपए कमाए। वहीं इंडियन बैंक ने 102% की बढ़ोतरी के साथ 1396 करोड़ की कमाई की। केनरा बैंक ने अपनी कमाई में 92% का इजाफा करते हुए 1502 करोड़ रुपए की कमाई की। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बात करें तो 68.64% की बढ़ोतरी के साथ 14205 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया है।

32 साल बाद जम्मू कश्मीर में लौटी हिंदी भाषा, 3000 प्राइवेट स्कूलों में 10वीं तक होगी पढ़ाई: भड़के गुपकार गठबंधन ने कहा – यहाँ उर्दू चलता है, ये राष्ट्रीय एकता पर हमला

32 साल बाद कश्मीर के प्राइवेट स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा तक हिंदी भाषा पढ़ाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (JKSCERT) ने इसके लिए आठ सदस्यों की समिति बनाई है। ये समिति 20 फरवरी तक कश्मीर के 3 हजार से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों में हिंदी भाषा को पढ़ाने के लिए सिफारिशें सौंपेगी।

कश्मीर में भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने घाटी के स्कूलों में हिंदी पढ़ाए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी धर्म से जुड़ी नहीं होती है, देश के अन्य राज्यों में भी मुस्लिम बच्चे हिंदी पढ़ते हैं। वहीं, गुपकार गठबंधन के प्रवक्ता मो. यूसुफ तारिगामी ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर कश्मीर के प्राइवेट स्कूलों में हिंदी काे लागू करने की कोशिश की जा रही है। इसका विरोध किया जाएगा।

तारिगामी ने आगे कहा, “जम्मू-कश्मीर स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (JKSCERT) द्वारा सभी स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा तक हिंदी पढ़ाने का निर्देश विभाजन को और गहरा करेगा। ऐसी सिफारिश स्वतंत्रता की विरासत, एकता एवं विविधता को पोषित करने के संवैधानिक वादे को कमतर करता है। हिंदी को अन्य भाषाओं की तरह तरजीह देना राष्ट्रीय एकता पर हमला करने जैसा है। शैक्षणिक प्रणाली और प्रशासनिक संस्थानों ने उर्दू भाषा को स्वीकार किया है, जो आधुनिक भारतीय भाषा है। इसका संबंध महाराजा हरि सिंह द्वारा 1920 में घोषित आधिकारिक भाषा से है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 23,173 सरकारी स्कूल हैं। जम्मू के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाती है, लेकिन कश्मीर में अभी तक हिंदी भाषा को पढ़ाने की व्यवस्था नहीं की गई। इसका एक बड़ा कारण 1990 में घाटी से हिंदुओं का पलायन है। उस दौरान स्कूलों में हिंदी पढ़ाने वाले कश्मीरी पंडितों पर काफी अत्याचार किया गया था, जिसके चलते उन्हें घाटी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। तब से आज तक कश्मीर के स्कूलों में कोई हिंदी शिक्षक नहीं है। जानकारों की मानें तो घाटी में 1990 से पहले तक लगभग 70% से अधिक प्राइवेट स्कूलों में हिंदी भाषा पढ़ाई जाती थी।

बताया जाता है कि घाटी के प्राइवेट स्कूलों में अभी तक केवल अंग्रेजी, उर्दू और कश्मीरी भाषा को ही प्राथमिकता दी जाती है। सिर्फ CBSE बोर्ड से जुड़े स्कूलों में ही हिंदी पढ़ाई जाती है।

‘हिंदुत्व’ को लेकर दुष्प्रचार, PM मोदी पर हिटजॉब, कश्मीर पर प्रोपेगंडा: BBC के खिलाफ सड़क पर हैं NRI हिन्दू, लेस्टर हिंसा में मुस्लिमों का किया था बचाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी (BBC) द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री का व्यापक विरोध हुआ है। डॉक्यूमेंट्री में गुजरात दंगों का सारा दोष पीएम मोदी पर मढ़ने की कोशिश की गई है। हालाँकि, जिस देश में बीबीसी का मुख्यालय है, वहाँ रह रहे भारतीय प्रवासियों ने इस प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ हाल में प्रदर्शन किया है। हमारी कई रिपोर्ट्स में डॉक्यूमेंट्री के कई भ्रामक पहलुओं पर चर्चा की गई है। भारत सरकार ने भ्रम फैलाने वाले कंटेंट की वजह से डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

ब्रिटेन में डॉक्यूमेंट्री के विरोध में कई एनआरआई बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और मीडिया हाउस के मुख्यालय के बाहर और कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया। निश्चित तौर पर यह पहली बार था जब अनिवासी भारतीय, विशेषकर हिंदू इतनी बड़ी संख्या में किसी खास वजह से सड़कों पर उतरे हैं। ऑपइंडिया ने पंडित सतीश के शर्मा के साथ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर एनआरआई के विरोध-प्रदर्शन के बारे में विस्तृत चर्चा की और इस तरह के विरोध का कारण जानने की कोशिश की।

बीबीसी के दो चेहरे

यह समझने की जरूरत है कि जब हिंदुओं की बात आती है तो बीबीसी के दो चेहरे होते हैं। यदि आप बीबीसी पर हिंदू त्योहारों से संबंधित रिपोर्ट्स को देखते हैं, तो वे दिवाली समारोह, होली समारोह आदि को दिखाएँगे। यह बहुसांस्कृतिक ब्रिटिश कहानी में बहुत जरूरी ‘रंग’ जोड़ता है। उनकी मंशा ब्रिटेन के तथाकथित बहुसांस्कृतिक प्रकृति को पॉजिटिव रूप से दिखाने की होती है। ऐसे बहुत से लेख हैं जिनमें बीबीसी खुशी-खुशी हिंदुओं द्वारा ब्रिटेन के समाज को दिए योगदान का जश्न मनाता है।

इस संस्थान के दूसरे चेहरे पर आते हैं, जहाँ उन्हें परंपरागत रूप से भारत और विशेष रूप से हिंदुओं के बारे में कुछ भी अच्छा दिखाने में कठिनाई होती है। यह एक रणनीतिक कदम है। यह लगभग एक सिज़ोफ्रेनिया (schizophrenic) व्यक्ति के साथ बातचीत करने जैसा है। जब भी किसी चीज का हिंदू आयाम होता है, बीबीसी रणनीतिक रूप से और लगातार भारतीय कहानी को नकारात्मक और हानिकारक के रूप में दिखाने की कोशिश करता हो। सिज़ोफ्रेनिया मानसिक विकार का एक प्रकार है।

जब हम हिंदू दर्शन और अन्य सभी चीजों के बारे में बात करते हैं तो एक समान विरोधाभास स्पष्ट होता है। उदाहरण के लिए, बीबीसी की वेबसाइट को देखिए। वे वही पुरानी कहानी दिखाएँगे और वही पुरानी छवि पेश करेंगे कि सनातन धर्म में एक श्रेणी के अनुसार वंशानुगत अंतर्विवाही जाति सँरचना (hereditary hierarchical endogamous caste structure) है और यह धार्मिक है। यह हिंदू परंपरा का हिस्सा है।

दिलचस्प बात यह है कि तथ्यों के साथ साबित हो चुका है कि यह पूरी तरह से गलत है। कई एनआरआई हिंदुओं ने बीबीसी को सही जानकारी प्रदान की है और ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर के साथ काम करने की कोशिश की है, लेकिन वह अपने पक्ष में एक भी वेबपेज नहीं बदलवा सके। इस तरह बीबीसी हिंदू आवाज सुनने के लिए अनिच्छुक रहा है। हिन्दुओं के साथ बीबीसी का इतिहास देखें तो कई बार स्नेह की स्थिति भी बनी थी लेकिन ज्यादातर समय रिश्ते खराब ही रहे।

समय के साथ बढ़ता गया गुस्सा 

लोगों का यह विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ है। समय के साथ बीबीसी के खिलाफ गुस्सा और निराशा बढ़ती चली गई। बीबीसी के खिलाफ पहले भी अभियान चलाए गए हैं लेकिन इसके खिलाफ लोग सड़कों पर नहीं उतरे थे।। अतीत में, बीबीसी के खिलाफ बहुत सारे पत्र-लेखन अभियान और शिकायतें दर्ज की गई हैं। उदाहरण के लिए, जब बीबीसी ने कश्मीर के बिना भारत का नक्शा प्रकाशित किया, तो मीडिया हाउस को एनआरआई हिंदुओं की आलोचना का सामना करना पड़ा था।

एक और उदाहरण है जिसे याद किया जा सकता है। जब नई दिल्ली की सड़कों पर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, बीबीसी इसे हिंदू-सिख मामला बनाने में बहुत सक्रिय रूप से शामिल था। उन्होंने इसके धार्मिक आयाम पर जोर दिया था। एनआरआई हिंदुओं ने नैरेटिव पर आपत्ति जताई, लेकिन ये आपत्तियाँ आम तौर पर लिखित शिकायत तक ही रही। जिस तरह से बीबीसी के काम करने के तरीके में भेदभाव समाहित हैं, इसने 2014 के बाद एनआरआई हिंदुओं को लगातार इसके नैरेटिव को लेकर सोचने पर मजबूर किया है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ब्रिटेन में रहने वाले अधिकांश हिंदू इसे अपनी कर्मभूमि मानते हैं और भारत को अपनी जन्मभूमि के रूप में देखते हैं। वे दोनों के लिए अपने दायित्वों को पूरा करते हैं। लेकिन जब बात उस बिंदु पर आती है जहाँ आपकी पहचान पर हमला किया जा रहा है और आपकी जन्मभूमि पर हमला किया जा रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके जो अधिकार अपनी कर्मभूमि में लिए हैं, वे वास्तविक नहीं हैं।

कैसे बीबीसी की लीसेस्टर रिपोर्टिंग ने एनआरआई हिंदुओं में गुस्सा जगाया

एनआरआई हिंदुओं ने पाया कि बीबीसी की प्रधानमंत्री मोदी के विरोध रिपोर्टिंग खासतौर से गुजरात दंगों के डॉक्यूमेंट्री झूठ से भरे हुए थे। इसी तरह, बीबीसी द्वारा रिपोर्ट की गई लीसेस्टर हिंसा भी उतनी ही झूठी थी। उन्होंने ‘हिंदुत्व’ शब्द को इस तरह पेश करने की कोशिश की जैसे कि यह कुछ नकारात्मक हो। वास्तव में, हिंसा में तथाकथित दक्षिणपंथी अतिवाद या फासीवादी प्रोपेगेंडा का आरएसएस या बीजेपी से कुछ लेना-देना नहीं था। हालाँकि, उन्होंने इसे इस तरह पेश किया। ब्रिटेन में रहने वाले हिंदू अभी इससे उबरे नहीं थे कि पीएम मोदी के खिलाफ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ने उनके गुस्से को बढ़ा दिया।

लीसेस्टर हिंसा की जाँच के बारे में बोलते हुए पंडित सतीश ने कहा कि मामले की जाँच में अधिक समय लग रहा है। गौरतलब है कि अब तक लगभग 120 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं और कुछ हफ्ते पहले पुलिस ने हिंसा के कुछ आरोपितों की पहचान करने के लिए जनता से मदद भी माँगी थी। दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम समुदाय ने इसकी शिकायत की और इसे ‘मुस्लिम मामला’ बनाने और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में पेश किया किया है।

लीसेस्टर ने डॉक्यूमेंट्री को लेकर बीबीसी के विरोध में अनिवासी भारतीयों को सड़कों पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से, फर्जी नैरेटिव फैलाने में बीबीसी सबसे प्रमुख अपराधियों में से एक था। उन्होंने उन लोगों को एक मँच दिया जो स्पष्ट रूप से भारत विरोधी और हिंदू विरोधी थे। यह अपनी लीसेस्टर रिपोर्टिंग में पूरी तरह से पक्षपाती था और फिर प्रधानमंत्री पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री में भी पक्षपाती था।

पंडित सतीश ने कहा, “लीसेस्टर तक, ब्रिटिश हिंदुओं ने बीबीसी के पूर्वाग्रह को वीपीसीसी (Vestigial post-colonial condescension) समझा था, लेकिन लीसेस्टर के साथ बीबीसी के प्रति लोगों का दृष्टिकोण बदल गया है। यहाँ बीबीसी ने घृणा फैलाने वाले अपराधियों के लिए मीडिया सुरक्षा प्रदान की और हिंसा के अपराधियों के रूप में हिंदू पीड़ितों को चित्रित किया। अब इन गतिविधियों के साथ, अधिकांश ब्रिटिश हिंदू स्वीकार करते हैं कि बीबीसी ‘ने भारत को तोड़ने वाली ताकतों को अपनी आत्मा बेच दी है।” वीपीसीसी एक प्रकार का पूर्वाग्रह है जो श्वेत वर्चस्ववादियों द्वारा लाखों भारतीयों को गुलाम बनाने से जुड़ा है।

यह लेख पंडित सतीश के शर्मा से हुई चर्चा पर आधारित है।