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25 साल पहले अब्बा ने किया था हिन्दू पीड़ित की बहन का रेप, बहलीम ने बेटी के साथ दोहराई वही हरकत: एक मानसिक विक्षिप्त हो गई, एक करने वाली थी आत्महत्या

उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे श्रावस्ती जिले में एक मुस्लिम युवक द्वारा हिन्दू लड़की को भगाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शादीशुदा और बाल-बच्चेदार बहलीम द्वारा पीड़िता को न सिर्फ 2 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया, बल्कि उस से 93,000 रुपए भी ऐंठ लिए। बहलीम पहले पीड़िता के साथ रेप कर चुका है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू की है। घटना सोमवार (6 फरवरी 2023) की है।

मामला श्रावस्ती के मल्हीपुर थाना क्षेत्र के गाँव जैता जानकी नगर का है। मामले में शिकायकर्ता लड़की के पिता हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी 18 साल की बेटी है और उसे 6 फरवरी 2023 को शाम 5 बजे शहजाद का बेटा बहलीम बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया। इस दौरान आरोपित की नीयत पीड़िता से शादी करने की बताई गई। आरोप है कि बहलीम ने लड़की को 2 दिनों तक अपने घर में रखा और फिर भगा दिया।

शिकायत में लड़की के पिता ने आगे लिखा है कि बहलीम द्वारा भगाए जाने के बाद पीड़िता अपने घर लौटकर नहीं गई। वहाँ से वो फकीरा मंदिर चली गई और एक दिन मंदिर में रही रही। इस दौरान लड़की के घर वालों ने पीड़िता की तलाश जारी रखी। आखिरकार 8 फरवरी को मंदिर के पुजारी ने एक व्यक्ति के साथ पीड़िता को उसके घर भेजवा दिया।

घर आकर पीड़िता ने अपने साथ की गई बहलीम की करतूत को परिजनों से बताया। आखिरकार लड़की के घर वालों ने 10 फरवरी (शुक्रवार) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता के पिता का कहना है कि घर से निकलते वक्त उसकी बेटी घर में रखा 93,000 रुपए भी अपने साथ लेकर गई थी। यह पैसा बहलीम ने हड़प लिया है।

शिकायतकर्ता ने बताया कि वह इस घटना से वह काफी डर गया था, इसलिए उसने 6 फरवरी को हुई घटना का FIR 10 तारीख को कराई। पुलिस ने यह केस IPC की धारा 366 के तहत दर्ज किया है। FIR दर्ज होते ही आरोपित बहलीम फरार हो गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

लड़की करने जा रही थी आत्महत्या

लड़की का पिता मजदूरी करके घर चलाता है। ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी लड़की के पिता से ली। उन्होंने बताया कि आरोपित बहलीम के अब्बा शहजाद मुंबई से फोन और दूसरे माध्यम से केस वापस लेने का दबाव बना रहा है।

पीड़िता के पिता ने कहा कि उसके गाँव में हिन्दू-मुस्लिम के हिसाब से मिश्रित आबादी है, जिसमें दबदबा मुस्लिमों का रहता है। पीड़ित पिता ने बताया कि घटना के बाद उसकी बेटी दुःखी होकर आत्महत्या करने जा रही थी। पीड़िता कक्षा 7 तक पढ़ी बताई जा रही है।

बहलीम पहले कर चुका है रेप

पीड़िता के पिता का कहना है कि आरोपित बहलीम पहले लड़की से घर में घुसकर रेप कर चुका है। रेप के लिए पीड़ित पिता ने ग्रामीण शब्द (घटिहई) का प्रयोग किया। हमें बताया गया कि घर के आगे बहलीम के परिवार वाले रात में तेज-तेज म्यूजिक सिस्टम बजा दिया करते थे, जिससे पीड़ित के घर वालों को सोने में भी दिक्क्त होती है। लड़की के पिता का कहना है कि पड़ोसी बहलीम को वो बेटे जैसा मानते थे पर उन्हें बदले में धोखा मिला।

बहन के साथ बहलीम का अब्बा कर चुका है रेप

ऑपइंडिया को पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि आज बहलीम ने उनकी बेटी की जिंदगी खराब की, लेकिन लगभग 25 साल पहले बहलीम के अब्बा शहजाद ने यही हरकत उनकी बहन के साथ किया था। पीड़िता के पिता ने शहजाद और बहलीम को एक जैसा बताया।

25 साल पहले की घटना की जानकारी देते हुए लड़की के पिता ने बताया कि तब उनकी शादीशुदा बहन के साथ बहलीम के अब्बा ने घर में घुसकर रेप किया था। इस रेप के चलते पीड़ित की बहन को उसके पति ने छोड़ दिया था। बताया गया कि इसी घटना से दुःखी होकर उनकी बहन मानसिक तौर पर विक्षिप्त हो चुकी है।

नवभारत टाइम्स के पंचायत के दावे का खंडन

नवभारत टाइम्स में प्रकशित खबर में बताया गया है कि घटना के बाद गाँव में 2 दिनों तक पंचायत चली। लड़की के पिता ने किसी भी तरह की पंचायत से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि जो भी अख़बार ऐसी खबर छाप रहा है, तो वो गलत है। उन्होंने कहा कि आरोपितों द्वारा कुछ पत्रकारों को बुलाकर उलटी-सीधी खबर छापने की साजिश भी रची जा रही है।

मुंबई और दुबई के पैसे का जोर

पीड़िता के पिता का कहना है कि उसके घर के ठीक आगे आरोपित बहलीम की परचून की दुकान है। हमें बताया गया कि उनके गाँव के अधिकतर मुस्लिम सऊदी और मुंबई में मोटी कमाई करते हैं। उस पैसे के दम पर वो पीड़ित के घर वालों से आर्थिक तौर पर कई गुना मजबूत हैं।

पीड़ित ने डर के तमाम कारणों में ये वजह अपनी आर्थिक तंगी भी बताया। इन्हीं डर की वजह से पीड़ित के पिता ने घटना के चार दिन बाद FIR कराई। फिलहाल इस मामले में पुलिस कानूनी कार्रवाई कर रही है।

कथित ईशनिंदा के आरोप में बांग्लादेश में हिंदू युवक को जेल: फेसबुक पोस्ट को लेकर पूरे हिंदू गाँव को जलाने वाले इस्लामी उन्मादी आजाद घूम रहे हैं

बांग्लादेश में एक हिंदू युवक को कथित ईशनिंदा के आरोप में एक अदालत ने 5 साल की जेल की सजा सुनाई है। रंगपुर साइबर ट्रिब्यूनल ने फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपित पारितोष सरकार पर 30,000 टका (बांग्लादेशी मुद्रा) का जुर्माना भी लगाया गया है। ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश अब्दुल मजीद रॉय ने पारितोष को डिजिटल सुरक्षा अधिनियम के तहत दोषी ठहराया।

परितोष सरकार को कुल 11 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। उसे कुल चार सजा सुनाई गई है, जिसमें एक साल, दो साल, तीन साल और पाँच साल की सजा शामिल है। हालाँकि, ये सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी, इसलिए उन्हें 5 साल ही जेल में रहना होगा। अभियोजन पक्ष के वकील रूहुल अमीन तालुकदार ने कहा कि पारितोष को धार्मिक भावनाओं को आहत करने का दोषी ठहराया गया है।

पारितोष को डिजिटल सुरक्षा अधिनियम की धारा 31 (1) के तहत सजा सुनाई गई थी। यह अधिनियम ‘समाज के विभिन्न वर्गों या समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा पैदा करने वाली या सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाली’ किसी भी चीज़ के प्रकाशन को अपराध बनाती है।

परितोष सरकार ने कथित तौर पर अक्टूबर 2021 में फेसबुक पर एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसे मुस्लिमों ने ईशनिंदा माना था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई छवि के बाद इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ ने उनके गाँव पर हमला कर दिया था।

17 अक्टूबर 2021 को पारितोष के गाँव को जला दिया गया था। यह घटना रामनाथपुर संघ के बारा करीमपुर हिंदू गाँव में हुई थी। यह गाँव रंगपुर जिले के पीरगंज उपजिला में स्थित है। कथित ईशनिंदा को लेकर मस्जिद के लाउडस्पीकर से भीड़ को जुटाया गया था।

जब भीड़ पहुँची थी, तब पुलिस ने समय पर पहुँचकर भीड़ को नियंत्रित किया थी। कुछ देर बाद उन्मादी भीड़ ने अपना गुस्सा पूरे गाँव पर निकाला। हालाँकि, उन्हें रोकने में पुलिस सक्षम थी, लेकिन वह रोक नहीं पाई।

हिंदुओं के मछली पकड़ने के वाले पूरे गाँव को इस्लामवादियों ने जला दिया था, क्योंकि हमले में हिंदुओं के 60 से अधिक घरों में आग लगा दी गई थी। घरों में आग लगाने से पहले उन्मादी भीड़ ने गाँव में तोड़फोड़ की थी और कीमती सामान और पशुधन आदि लूटकर ले गए थे।

इतना ही नहीं, इस दौरान गाँव के हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। बाद में पारितोष के घर में भी तोड़फोड़ की गई और भीड़ द्वारा पुलिस पर काबू पाने के बाद गौशाला में आग लगा दी गई। जब गाँव को जलाया जा रहा था, तब ग्रामीण भागकर धान के खेतों में चले गए थे।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवा में गोलियाँ चलानी पड़ी थी। पुलिस ने भीड़ पर रबड़ की गोलियाँ चलाई और हवा में फायरिंग की। साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल के आने के बाद स्थिति पर काबू पाया गया। परितोष और उसका परिवार भी गाँव से भाग गया था।

घटना के बाद न केवल गाँव पर हमले के मामले दर्ज किए गए, बल्कि पारितोष सरकार के खिलाफ कथित तौर पर दंगा भड़काने का भी मामला दर्ज किया गया। वह उस समय वह 10वीं कक्षा का छात्र था और उसकी उम्र 15-16 साल थी। पुलिस ने उसे कुछ दिनों बाद जॉयपुरहाट से उसे गिरफ्तार किया था।

पारितोष को कई बार जमानत से वंचित किया गया था और मुकदमे के दौरान उन्हें कई महीनों तक एकांत कारावास में रखा गया था। हालाँकि, जेल अधिकारियों ने उनके वकील और परिवार को बताया था कि उन्हें उनकी सुरक्षा के लिए अलग रखा गया है। आखिरकार उन्हें 9 मई 2022 को जमानत मिल गई, लेकिन इस महीने की शुरुआत में उन्हें फैसला सुनाते ही अदालत ने उन्हें फिर जेल भेज दिया।

पुलिस ने दावा किया है कि गिरफ्तारी के बाद परितोष सरकार ने ईशनिंदा करने की बात कबूल की और उस समय उसकी उम्र 19 साल थी। हालाँकि, परितोष और उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने तस्वीर पोस्ट नहीं की थी और उनका फोन उस समय टूट गया था, जिसकी मरम्मत नहीं की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उन्होंने तस्वीर पोस्ट की थी।

हालाँकि, अदालत ने इन तर्कों को खारिज कर दिया और उन्हें “धार्मिक भावनाओं को आहत करने” का दोषी ठहराया। उनके वकील ने कहा कि वे फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएँगे। पारितोष को फेसबुक पोस्ट के लिए दोषी ठहराकर सजा सुना दी गई, लेकिन हिंदू गाँव पर हमला करने वाले किसी भी अपराधी को अभी दोषी नहीं ठहराया गया है। मामले में लगभग 150 लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

इस मामले में 72 लोग फरार हैं। वहीं, गाँव पर हमले के मामले में 74 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और वे आजाद घूम रहे हैं। जिन लोगों को ज़मानत मिली है, उनमें गाँव की मस्जिद का इमाम रबीउल इस्लाम भी है। इसी ने लाउडस्पीकर से लोगों को इकट्ठा किया था। इसके अलावा, इसमें हिंसा का मास्टरमाइंड सैकत मंडलृ और उज्जल हसन है, जिसने ‘ईशनिंदा’ फ़ेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट लिया और फैलाया था।

‘क्रूर, बर्बर और अमानवीय’: बच्चों की खतना को अपराध घोषित करने की माँग, केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

केरल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें बच्चों के गैर-चिकित्सीय खतने की प्रथा पर रोक लगाने की माँग की गई है। याचिका में इस प्रथा को बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन, अवैध और संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध घोषित करने की माँग की गई है।

यह जनहित याचिका नन-रिलीजियस सिटीजन (NRC) और पाँच अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर की गई है। याचिका में दूसरे प्रतिवादी यानी कानून और न्याय मंत्रालय को खतने पर रोक लगाने वाले पर्याप्त कानून पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए एक उपयुक्त रिट जारी करने की भी माँग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि खतना बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि बच्चे इस प्रथा के शिकार हैं। इसका अभ्यास क्रूर, अमानवीय और बर्बर होने के साथ-साथ संविधान प्रदत्त अधिकारों के भी खिलाफ है।

याचिका में कहा गया है, “यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के मूल्यवान मौलिक अधिकार, “जीवन के अधिकार” का उल्लंघन करता है। यदि राज्य तंत्र संविधान के संरक्षक के रूप में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहता है तो संवैधानिक अदालतें इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य हैं।”

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया, “खतना का अर्थ उस चमड़ी को हटाने है, जो ऊतक है और जो लिंग के सिर (ग्रंथियों) को ढँकता है। यह एक प्राचीन प्रथा है, जिसकी उत्पत्ति धार्मिक संस्कारों में हुई है। आज कई माता-पिता अपने बेटों का खतना धार्मिक या अन्य कारणों से करवाते हैं। खतना आमतौर पर जन्म के बाद पहले या दूसरे दिन किया जाता है। बच्चों के मामले में प्रक्रिया अधिक जटिल और जोखिम भरी हो जाती है। पुरुषों को प्रक्रिया के दौरान सोने के लिए दवा दी जा सकती है, लेकिन बच्चों के मामले में नहीं।”

याचिका में आगे कहा गया है कि खतने से कई स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं और उनमें से एक आघात है। आघात की वजह से डर, असहायता, गंभीर चोट या मृत्यु के खतरे की भावना का अहसास होता है। इसमें यौन शोषण, शारीरिक शोषण, घरेलू हिंसा, सामुदायिक और स्कूल हिंसा, चिकित्सा आघात, मोटर वाहन दुर्घटनाएँ आदि शामिल हैं।

इस माँग की दलील दी गई है कि खतने से जुड़े अन्य जोखिम या जटिलताएँ हैं, इस प्रकार हैं: 1) रक्तस्राव। 2) शिश्न में संक्रमण। 3) शिश्न के खुले सिरे में जलन। 4) मूत्रमार्ग का क्षतिग्रस्त होना। 5) शिश्न पर निशान। 6) शिश्न की बाहरी त्वचा की परत हटना। 7) गंभीर एवं जानलेवा जीवाणु संक्रमण।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बच्चे को किसी विशेष धर्म को मानने या न मानने और किसी विशेष प्रथा या अनुष्ठान का पालन करने या न करने का अधिकार होना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि खतना की प्रथा बच्चों को मजबूर करने के लिए किया जाता है कि उनकी पसंद जैसी चीज नहीं है। उनके माता-पिता द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णय का ही उन्हें पालन करना।

याचिका में आगे कहा गया है, “एक बच्चे को अपने माता-पिता की सनक का शिकार नहीं होना चाहिए। बच्चों को किसी विशेष प्रथा, विश्वास या धर्म को चुनने का अवसर मिलना चाहिए। हालाँकि, समाज बच्चों की अक्षमता और लाचारी का फायदा उठा रहा है। माता-पिता की धार्मिक कट्टरता के कारण बच्चों के अधिकारों और स्वतंत्रता का समर्पण नहीं किया जा सकता है। बालिग होने के बाद ही बच्चे को कोई धार्मिक अनुष्ठान चुनने की अनुमति दी जानी चाहिए।”

‘ASP साहब करवाते हैं मालिश और धुलवाते हैं कपड़े’: फुलवारी शरीफ के पुलिस अधिकारी का वीडियो वायरल, SSP बोले- जाँच रिपोर्ट भेजी जा चुकी है

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति जमीन पर दरी बिछा कर लेटा हुआ है और कुछ लोग उसकी मलिश कर रहे हैं। मालिश कर रहे लोगों में एक व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी पहन रखी है। कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मालिश करवा रहे व्यक्ति बिहार के फुलवारी शरीफ में पोस्टेड एडिशनल एसपी मनीष सिन्हा हैं। यह वीडियो शनिवार (11 जनवरी 2023) को सामने आया है।

लगभग 20 सेकेण्ड के इस वीडियो में जहाँ सिपाही बताए जा रहे कुछ लोग ASP मनीष सिन्हा बताए जा रहे व्यक्ति की मालिश कर रहे हैं, वहीं कोई एक व्यक्ति इसका वीडियो बना रहा है। पीठ के बल जमीन में लेटे व्यक्ति ने सफेद बनियान और नीला नेकर पहन रखा है। @live_patna नाम के एक मीडिया संस्थान ने इसे 11 फरवरी को रात 9:50 पर शेयर किया है।

लाइव पटना के साथ कई अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में मालिश करवा रहे व्यक्ति का नाम मनीष सिन्हा बताया गया है। मनीष फिलहाल पटना में फुलवारी शरीफ के एडिशनल एसपी हैं। यह वही फुलवारी शरीफ है, जहाँ से कुछ समय पहले प्रतिबंधित संगठन PFI की मिशन 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की तैयारी कर रही गैंग पकड़ी गई थी।

दावा यह भी किया जा रहा है की सिपाहियों ने अपने एसएसपी को पत्र लिख कर ASP की शिकायत भी की है। इस पत्र में मनीष सिन्हा द्वारा अधीनस्थों से दबाव बनाकर मालिश करवाने का जिक्र है। एडिशनल SP मनीष पर सिपाहियों से अपने कपड़े भी धुलवाने का आरोप है। वीडियो सामने आने के बाद ASP सिन्हा ने कहा कि दौड़ने के दौरान पैरों में ऐंठन आ गई थी। उसी दौरान मिथिलेश स्टेडियम में ये वीडियो बनाया गया है। 

कहा जा रहा है कि सिपाहियों ने सबूत के तौर पर ये वीडियो बनाया है, जिसे उन्होंने पटना के एसएसपी को भी भेजा है। सिपाहियों का कहना था कि इस काम से उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है। ये सभी कॉन्स्टेबल दंगा निरोधक वाहन वज्र गाड़ी में तैनात थे। शिकायत करने वालों में 6 पुरुष और 4 महिला सिपाही हैं। हालाँकि, शिकायत पत्र पर 7 सिपाहियों ने हस्ताक्षर किए थे।

वहीं, पटना के SSP मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि ये मामला पिछले महीने ही उनके सामने आया था, जिसकी जाँच करवा कर कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। एसएसपी ने रिपोर्ट को मीडिया से साझा कर पाने में असमर्थता जताई है। उनका कहना है कि शासन के निर्देशों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि पिछले सप्ताह खगड़िया का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक डॉक्टर अपने सहयोगी महिला डॉक्टर से फेस मसाज करवा रहा था। सदर पीएचसी (PHC) के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कृष्णा कुमार का फेस मसाज चंद्रपुरा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की सीएचओ की Community Health Officer दीपिका सहनी कर रही थी।

डॉक्टर और महिला हेल्थ ऑफिसर की कुछ तस्वीरें भी वायरल हुई थीं। फोटो में दोनों एक बिस्तर पर लेटे हुए थे। दोनों अधिकारी शादीशुदा हैं। इसके बाद भी दोनों की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। वीडियो वायरल होने के बाद खगड़िया के सिविल सर्जन ने दोनों को शोकॉज नोटिस जारी किया था।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने थाने पर हमला कर ईशनिंदा के आरोपित को पीटा, फिर आग के हवाले कर दिया: भीड़ में बच्चे भी शामिल, पाकिस्तानी पुलिस देखती रही

पाकिस्तान में लोग महंगाई और आर्थिक संकट के कारण भूखे मर रहे हैं, लेकिन इस्लामी कट्टरता है कि जाने का नाम नहीं ले रही है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार भी लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ईशनिंदा कानून को और कठोर करने जा रही है। इसका परिणाम ये हो रहा है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून से सस्ती लोगों की जिंदगी बन गई है।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ननकाना साहिब में शनिवार (11 फरवरी 2023) को इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ ने दिनदहाड़े एक शख्स की पीट-पीट कर हत्या कर दी। इतना नहीं, उसे सार्वजनिक रूप से आग के हवाले कर दिया। इस घटना को लेकर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार समूहों ने शहबाज सरकार पर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप में 20 साल के मोहम्मद वारिस नाम के व्यक्ति को पुलिस हिरासत में रखा गया था। इसकी खबर जैसे ही चरमपंथियों को लगी, वे एक बड़े समूह में आकर वारबर्टन पुलिस स्टेशन की घेराबंदी कर दी।

पुलिस स्टेशन पहुँच कर उन्मादी भीड़ ने थाने और आसपास जमकर तोड़फोड़ की। मोहम्मद वारिस को पकड़कर भीड़ ने बुरी तरह पीटा शुरू कर दिया। इस मारपीट के बाद भीड़ ने जिंदा ही उसके शरीर को आग में आग लगा दी। इस दौरान पुलिस चुपचाप देखती रही और भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की।

इस घटना का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस घटना के जाँच के आदेश दिए हैं। शहबाज शरीफ ने कहा कि जब उन्मादियों ने मृतक को पकड़ने की कोशिश की, तब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?

वीडियो में चरमपंथी भीड़ थाने की दीवार फांदती नजर आ रही है। इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) फिरोज भट्ट और ननकाना साहिब सर्किल के डिप्टी एसपी नवाज वारक को निलंबित कर दिया है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से मामले की रिपोर्ट भी माँगी थी।

पत्रकार मुबशिर जैदी द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में यह देखा जा सकता है कि बैकपैक पहने हुए छोटे बच्चे भी कथित आरोपित को पीट-पीटकर मार डालने वाली भीड़ का हिस्सा थे। इसके अलावा, विजुअल्स से इस्लामवादियों द्वारा पुलिस स्टेशन को हुए नुकसान का भी पता चला।

पंजाब पुलिस के आधिकारिक हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया है, “नानकाना में कुरान का अपमान करने के आरोप में एक नागरिक की लोगों द्वारा हत्या करने की जानाकारी आईजी पंजाब को मिली है। वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुँचकर जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया जाता है। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों और लापरवाही एवं अक्षमता के अपराधियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है। फरवरी 2022 में खानेवाल जिले के एक दूरदराज के गाँव में कुरान के कथित अपमान को लेकर भीड़ ने एक अधेड़ व्यक्ति को मारा डाला था। उस अधेड़ व्यक्ति पर तब तक पत्थर मारे गए, जब तक वह मर नहीं गया।

दिसंबर 2021 में प्रियंता कुमारा नाम की एक श्रीलंकाई प्रबंधक को पाकिस्तान के सियालकोट में इस्लामी भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था। एक वायरल वीडियो में इस जघन्य अपराध में शामिल दो आरोपितों ने कहा था, “कागज पर हुसैन का नाम लिखा हुआ था। उसने कागज फाड़कर फेंक दिया। मैंने अपने सहयोगी को सूचित किया कि यह गलत था। मैंने प्रबंधन से बात भी की थी और हम कारण इकट्ठे हुए थे।”

उसने आगे कहा था, “हमने उस पर तेल डाला और उसे आग लगा दी। जो कोई भी ईशनिंदा करेगा, उसके साथ भी वैसा ही सलूक किया जाएगा। हम पैगंबर मुहम्मद के लिए अपनी जान कुर्बान करने के लिए तैयार हैं। हमारी हदीस में यह उल्लेख है कि हमें उन लोगों का सिर कलम करना चाहिए, जो हमारे नबियों का अपमान करते हैं।”

पाकिस्तान की सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (CRSS) की एक रिपोर्ट में कहा कि आजादी के बाद से देश में ईशनिंदा के 1,415 आरोपों में 89 नागरिक मारे गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1947 से 2021 तक ईशनिंदा के आरोप में 18 महिलाओं और 71 पुरुषों की हत्या कर दी गई। 107 महिलाओं और 1,308 पुरुषों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।

16 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में मुख़्तार अंसारी के बेटे की बेगम: शौहर को जेल से भगाने की रच रही थी साजिश, पुलिस को धमकाया – अच्छा नहीं होगा…

अब्बास अंसारी को जेल से भगाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार उनकी पत्नी निकहत अंसारी को 16 फरवरी तक रिमांड पर भेज दिया गया है। आज ही चित्रकूट के रगौली जिला जेल से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद निकहत को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।

मुख्तार अंसारी की बहू निकहत की गिरफ्तारी के बाद से ही कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि जेल के अंदर अब्बास अंसारी को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। पता चला है कि निकहत चोरी छुपे हर रोज जेल जाती थी। जेल में निकहत और शौहर अब्बास जेलर के कमरे में घंटो मुलाकात किया करते थे। इसी बीच शनिवार (11 फरवरी, 2023) को अचानक पड़े छापे में निकहत पकड़ी गई।

मामले में जेलर समेत कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले में कुल 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले में गिरफ्तार जेल अधिकारियों ने शुरुआती पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। जानकारी है कि अब्बास मोबाइल फोन से मुकदमे से जुड़े गवाहों और अधिकारियों को धमकाता था। अब्बास की बात न मानने वालों की हत्या करवाने की साजिश रची जा रही थी। मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक निकहत अंसारी अपने ड्राइवर नियाज के साथ मिलकर अब्बास को भगाने की साजिश रच रही थी। पुलिस ने ड्राइवर नियाज को भी गिरफ्तार किया है।

रिपोर्टों के मुताबिक छापे के दौरान जब महिला पुलिसकर्मियों ने निकहत को पकड़ा तो उन्होंने पुलिसकर्मियों का हाथ झटक दिया। निकहत ने हाथ पकड़ने वाली महिला पुलिसकर्मी को धमकाते हुए कहा कि मैं खुद चल रही हूँ, घसीटने की कोशिश की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। अधिकारियों को मुखबिर ने सूचना दी थी कि अब्बास की पत्नी निकहत हर रोज ड्राइवर नियाज के साथ जेल आती है। कई दिनों से हर रोज सुबह 11 बजे जेल आने के बाद वह 3-4 घंटे अब्बास के साथ बिताती है। दर्ज किए गए एफआईआर के मुताबिक निकहत को अब्बास से मिलने के लिए न किसी पर्ची की जरूरत होती थी न कोई रोकता टोकता था।

हो सकता है बड़ा खुलासा

डिप्टी जेलर के कमरे में पकड़ी गई निकहत के पास 2 मोबाइल फोन मिले हैं। निकहत के पास सऊदी अरब की मुदाएँ भी बरामद हुई हैं। निकहत की फोन की जाँच से पता चल सकता है कि जेल में बैठा अब्बास किन लोगों के संपर्क में था। इस बात का भी पता चल सकता है कि क्या अब्बास को मोबाइल के माध्यम से कहीं से रुपए भेजे जा रहे थे। बता दें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बी अब्बास और उसके पिता मुख्तार अंसारी जेल में बंद हैं। अब निखत के पास भी विदेशी करेंसी मिलने के बाद किसी बड़े खुलासे की आशंका जताई जा रही है।

डीआईजी जेल शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने मीडिया को जानकारी दी है कि जेल परिसर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा है कि एक हफ्ते का रिकॉर्ड देखा जाएगा जिससे मामले कई जानकारी मिलने की उम्मीद है। उधर मुख्तार अंसारी के दूसरे बेटे और अब्बास के भाई उमर अंसारी ने साजिश की बात कही है। उमर अंसारी ने कहा कि पहले उनके भाई को और अब उनकी भाभी को फँसाया जा रहा है।

कार्यक्रम का नाम – महाराष्ट्र उत्सव, हुआ क्या – महिला के जैकेट फाड़े, लाठी से पीटा, छेड़खानी की: उद्धव वाली शिवसेना का नेता गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में शिवसेना उद्धव गुट के नेता और पूर्व डिप्टी मेयर नरेश मनेरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नरेश मनेरा पर एक पूर्व महिला पत्रकार ने मारपीट और छेड़खानी का आरोप लगाया है। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 354 के साथ-साथ कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो घोड़बंदर के आनंद नगर में पूर्व महिला पत्रकार ने नरेश मनेरा और उनके 10-12 साथियों पर मारपीट और छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। दी गई शिकायत के अनुसार गुरुवार, (09 फरवरी, 2023) की रात एक कार्यक्रम की लाउडस्पीकर की आवाज से वह परेशान हो गई थी। दरअसल नरेश मनेरा ने इलाके में ‘महाराष्ट्र उत्सव’ नाम से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया है।

लाउडस्पीकर की आवाज से परेशान महिला पत्रकार ने पहले तो स्थानीय पुलिस को फोन कर शिकायत दी। मौके पर पहुँची पुलिस को आयोजकों ने तवज्जोह दी। इसके बाद महिला खुद आयोजन स्थल पर पहुँची और आयोजक नरेश मनेरा को कार्यक्रम समाप्त करने के लिए कहा। आरोपों के मुताबिक, इस पर मौजूद लोगों ने उस पर हमला कर दिया जिसमें महिलाएँ व पुरुष शामिल थे। आरोप है कि भीड़ का फायदा उठाकर उनके साथ छेड़खानी की गई। उनके गले से सोने की चेन भी चोरी हो गई।

आरोप है कि नरेश और उनके लोगों ने भीड़ के सामने महिला का जैकेट पकड़ कर घसीटा। इतना ही नहीं एक शख्स ने उनकी लाठी से पिटाई की। पीड़िता ने कसारवदवली थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के पति का आरोप है कि स्थानीय पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार करने से बच रही थी। जिसके बाद उन्होंने पुलिस के बड़े अधिकारियों से मदद माँगी। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने शनिवार (11 फरवरी, 2023) को नरेश मनेरा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।

ईसाई मजहब नहीं अपनाया तो दर्ज करा दिया छेड़खानी का मुकदमा, घर में फेंक देते थे मांस: दिव्यांग युवती की मौत, धर्मांतरण कर ईसाई बने पड़ोसियों का अत्याचार

मध्य प्रदेश के इंदौर में काजल नाम की एक दिव्यांग युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मामला गुरुवार (09 फरवरी, 2023) की रात और शुक्रवार (10 फरवरी, 2023) की सुबह का है। काजल की बड़ी बहन खुशबू और पिता गोपाल यादव ने पड़ोसी दशरथ अहिरवार पर धर्म-परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पड़ोसी की वजह से काजल डिप्रेशन में थी।

रिपोर्टों के अनुसार इंदौर के विजय नगर थाना क्षेत्र के सोलंकी नगर में गोपाल यादव अपने परिवार के साथ रहते हैं। गोपाल इलेक्ट्रीशियन का काम करते हैं। उनकी तीन बेटियाँ और एक 4 साल का बेटा है। गोपाल की दूसरी बेटी काजल (24 साल) की मौत हुई है। गोपाल और उनकी बड़ी बेटी खुशबू का आरोप है कि घर के सामने रहने वाला ईसाई परिवार पहले अहिरवार सरनेम लगाता था। पूरा परिवार धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन गया। इसके बाद गोपाल पर भी धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया जाने लगा। ईसाई धर्म अपनाने के लिए कई प्रलोभन भी दिए गए।

गोपाल ने जब अपना धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया तो धर्मांतरित ईसाई परिवार गोपाल के परिवार को परेशान करने लगे। आरोप है कि उन्हें पूजा पाठ करते देख घर के पास अंडे व मांस के टुकड़े फेक दिए जाते। आरती के समय तेज आवाज में ईसाई उपदेश बजाया जाता। बड़ी बेटी घर से बाहर निकलती तो उसका रास्ता रोक लिया जाता। इन सब से भी जब मन नहीं भरा तो उनलोगों ने गोपाल पर छेड़खानी का झूठा मुकदमा करवा दिया।

मुकदमा दर्ज होने के बाद गोपाल अपने घर पर कम ही वक्त गुजारने लगे। केस दर्ज होने के बाद गोपाल का काम भी प्रभावित हुआ और परिवार में परेशानी ने घर कर लिया। ऐसे में दिव्यांग काजल अवसाद का शिकार हो गई। बड़ी बहन के मुताबिक घर की परेशानी की वजह से वह रोती रहती थी। यहाँ तक की कई दिनों से काजल ने खाना-पीना छोड़ दिया था। इसी बीच गुरुवार रात को जब वह सोई तो सुबह उठी ही नहीं।

गोपाल ने काजल की लाश के साथ विजय नगर थाने में प्रदर्शन किया और पुलिस से ईसाई परिवार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने कहा है कि शिकायत के आधार पर मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिस रिसर्चर ने की तुर्की में भूकंप की सटीक भविष्यवाणी, उसने अब भारत को लेकर कही ये बात…

सोमवार (6 फरवरी, 2023) को आए भूकंप ने तुर्की और सीरिया में भारी तबाही मचाई। भूकंप से अब तक 24000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालाँकि, इस भूकंप को लेकर 2 दिन पहले ही भविष्यवाणी कर दी गई थी। निश्चित तौर पर भविष्यवाणी की बात अजीबोगरीब लग सकती है लेकिन यह सच है। यही नहीं भविष्यवाणी करने वाले व्यक्ति ने अब भारत में भूकंप को लेकर भी भविष्यवाणी की है।

दरअसल यह भविष्यवाणी भूकंपीय गतिविधि का अध्ययन करने वाले सोलर सिस्टम जियोमेट्री सर्वे के (SSGEOS) एक रिसर्चर फ्रेंक होगरबीट्स ने की थी। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “आज नहीं तो कल, जल्द ही दक्षिण-मध्य तुर्की, जॉर्डन, सीरिया और लेबनान में 7.5 तीव्रता का भूकंप आएगा।”

फ्रेंक होगरबीट्स के इस ट्वीट के बाद यूजर्स ने भला-बुरा कहते हुए प्रतिक्रिया दी थी। कुछ यूजर्स ने तो उन्हें ‘झूठा भविष्यवक्ता’ तक करार दिया था। हालाँकि, इसके बाद 6 फरवरी की सुबह 4 बजे तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया।

भूकंप आने के बाद फ्रेंक होगरबीट्स की भविष्यवाणी सच हो गई थी। लेकिन इसके बाद सोमवार (6 फरवरी 2023) को ही के बाद होगरबीट्स ने अपनी रिसर्च एजेंसी SSGEOS के एक ट्वीट को रीट्वीट किया। इस ट्वीट में एक और तेज भूकंप आने की बात कही गई थी। इस ट्वीट के कुछ घण्टों बाद तुर्की में एक और भूकंप आया। रिएक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 7.6 मापी गई। यानी होगरबीट्स को एक और भविष्यवाणी सच हुई।

भारत को लेकर भविष्यवाणी…

तुर्की में भूकंप आने की 2 सटीक भविष्यवाणी कर चुके होगरबीट्स ने अब भारत में भूकंप को लेकर भी ऐसा ही दावा किया है। उनके इस दावे वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जॉस क्विंटन द्वारा शेयर किए गए वीडियो में फ्रेंक को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि आने वाले कुछ दिनों में एशिया के अलग-अलग भागों में जमीन के भीतर हलचल होने संभावना है।

उन्होंने आगे कहा है कि हलचल पाकिस्तान और अफगानिस्तान से होते हुए हिंद महासागर के पश्चिम की तरफ हो सकती है। भारत इसके बीच में होगा। वहीं चीन में भी आने वाले कुछ दिनों में भूकंप आ सकता है। हालाँकि होगरबीट्स ने इस बार भी भूकंप की तीव्रता और समय के बारे में कुछ भी नहीं कहा है।

जैसा कि हमने पहले भी बताया है फ्रैंक होगरबीट्स SSGEOS नामक संस्था में काम करते हैं। इस संस्था ने अपनी वेबसाइट में लिखा है, “SSGEOS सोलर सिस्टम के ज्यामितीय सर्वे के लिए बहुत छोटा संस्थान है। हम भूकंपीय गतिविधि से संबंधित खगोलीय पिंडों के बीच ज्यामिति की निगरानी कर शोध करते हैं।” इसके अलावा, इस वेबसाइट में ग्रहों की स्थिति को लेकर कुछ फोटोज भी अपलोड किए गए हैं। इन फोटोज के साथ भूकंप आने की घटनाओं का जिक्र है।

(फोटो साभार : SSGEOS)

साथ ही वेबसाइट में कहा गया है, “हमारा ध्यान लगभग 6 और इससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों पर है। इस श्रेणी में भूकंप तब अधिक आते हैं जब ग्रह और चंद्रमा सौर मंडल में विशिष्ट स्थिति में पहुँच जाते हैं। ऐसे समय में बड़े भूकंप देखने को मिलते हैं। इसका एक अच्छा उदाहरण दिसंबर 2016 का है। इस पूरे महीने अधिक महत्वपूर्ण ग्रहों की स्थिति के कारण अधिक भूकंप आए थे। इसको लेकर हमने पहले ही 3 चेतावनी जारी की थी।”

(फोटो साभार : SSGEOS)

हालाँकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप को लेकर ऐसी भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। वास्तव में अब तक ऐसे किसी भी शोध को लेकर स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फ्रैंक होगरबीट्स की भविष्यवाणी पर अब भी संदेह जताए जा रहे हैं। लेकिन यदि उनकी भविष्यवाणी इसी तरह सही होती रहीं तो निश्चित रूप से इसे विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।

जामिया हिंसा की सुनवाई कर रहे जज ने इस मामले से खुद को अलग किया: आरोपित शरजील इमाम और सफूरा सहित 11 को किया था बरी

साल 2019 के दिसम्बर माह में दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा की सुनवाई करने वाले जज ने खुद को केस से अलग कर लिया है। जज के मुताबिक, उन्होंने ये फैसला अपने निजी कारणों के चलते लिया है। जज का नाम अरुल वर्मा है, जो साकेत कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हैं। न्यायाधीश ने इस फैसले की जानकारी शुक्रवार (10 फरवरी 2023) को कोर्ट रूम से साझा की है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, शुक्रवार को इस केस की सुनवाई कोर्ट में शुरू होने जा रही थी। इस दौरान एक आरोपित की तरफ से वकील दीक्षा द्विवेदी मौजूद थीं। वकील दीक्षा ने बताया कि सुनवाई शुरू होने से पहले ही न्यायाधीश अरुल वर्मा ने खुद को इस केस से अलग करने की कोर्ट में ही जानकारी दी।

दीक्षा के मुताबिक, जब उन्होंने जज के इस फैसले को दुखद बताया तब न्यायाधीश ने उन्हें तंत्र और न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखने की सलाह दी। बताया जा रहा है कि इस केस से खुद को हटाने का निर्णय न्यायाधीश अरुल वर्मा ने अपना निजी फैसला बताया।

बताया जा रहा है कि न्यायाधीश अरुल वर्मा द्वारा केस से खुद हटने के बाद किसी और जज से सुनवाई कराए जाने की प्रार्थना साकेत कोर्ट के जिला जज के पास भेजी गई है। इस प्रार्थना पत्र पर अगली सुनवाई की तारीख सोमवार (13 फरवरी 2023) को तय हुई है। अरुल वर्मा की कोर्ट में जामिया से जुड़े 2 केसों की सुनवाई हो रही है। ये हिंसा क्रमशः 13 और 15 दिसंबर को हुई थी।

गौरतलब है कि 4 फरवरी 2023 को न्यायाधीश अरुल वर्मा की कोर्ट ने ही शरजील इमाम, सफूरा जरगर, आसिफ इक़बाल तनहा के साथ 8 अन्य आरोपितों को हिंसा के एक केस में बरी कर दिया था। यह फैसला देते हुए न्यायाधीश ने दिल्ली पुलिस द्वारा आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न दे पाने को वजह बताई थी।

अपनी टिप्पणी में न्यायाधीश अरुल वर्मा ने यह भी कहा था कि बरी किए गए आरोपितों को फँसाकर हिंसा के मुख्य सूत्रधार को बचाने का रास्ता बना दिया गया है। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने साकेत कोर्ट के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर हाईकोर्ट सुनवाई के लिए तैयार भी हो गया है।