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‘हिंदुत्व’ को लेकर दुष्प्रचार, PM मोदी पर हिटजॉब, कश्मीर पर प्रोपेगंडा: BBC के खिलाफ सड़क पर हैं NRI हिन्दू, लेस्टर हिंसा में मुस्लिमों का किया था बचाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर बीबीसी (BBC) द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंट्री का व्यापक विरोध हुआ है। डॉक्यूमेंट्री में गुजरात दंगों का सारा दोष पीएम मोदी पर मढ़ने की कोशिश की गई है। हालाँकि, जिस देश में बीबीसी का मुख्यालय है, वहाँ रह रहे भारतीय प्रवासियों ने इस प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री के खिलाफ हाल में प्रदर्शन किया है। हमारी कई रिपोर्ट्स में डॉक्यूमेंट्री के कई भ्रामक पहलुओं पर चर्चा की गई है। भारत सरकार ने भ्रम फैलाने वाले कंटेंट की वजह से डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

ब्रिटेन में डॉक्यूमेंट्री के विरोध में कई एनआरआई बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और मीडिया हाउस के मुख्यालय के बाहर और कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया। निश्चित तौर पर यह पहली बार था जब अनिवासी भारतीय, विशेषकर हिंदू इतनी बड़ी संख्या में किसी खास वजह से सड़कों पर उतरे हैं। ऑपइंडिया ने पंडित सतीश के शर्मा के साथ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर एनआरआई के विरोध-प्रदर्शन के बारे में विस्तृत चर्चा की और इस तरह के विरोध का कारण जानने की कोशिश की।

बीबीसी के दो चेहरे

यह समझने की जरूरत है कि जब हिंदुओं की बात आती है तो बीबीसी के दो चेहरे होते हैं। यदि आप बीबीसी पर हिंदू त्योहारों से संबंधित रिपोर्ट्स को देखते हैं, तो वे दिवाली समारोह, होली समारोह आदि को दिखाएँगे। यह बहुसांस्कृतिक ब्रिटिश कहानी में बहुत जरूरी ‘रंग’ जोड़ता है। उनकी मंशा ब्रिटेन के तथाकथित बहुसांस्कृतिक प्रकृति को पॉजिटिव रूप से दिखाने की होती है। ऐसे बहुत से लेख हैं जिनमें बीबीसी खुशी-खुशी हिंदुओं द्वारा ब्रिटेन के समाज को दिए योगदान का जश्न मनाता है।

इस संस्थान के दूसरे चेहरे पर आते हैं, जहाँ उन्हें परंपरागत रूप से भारत और विशेष रूप से हिंदुओं के बारे में कुछ भी अच्छा दिखाने में कठिनाई होती है। यह एक रणनीतिक कदम है। यह लगभग एक सिज़ोफ्रेनिया (schizophrenic) व्यक्ति के साथ बातचीत करने जैसा है। जब भी किसी चीज का हिंदू आयाम होता है, बीबीसी रणनीतिक रूप से और लगातार भारतीय कहानी को नकारात्मक और हानिकारक के रूप में दिखाने की कोशिश करता हो। सिज़ोफ्रेनिया मानसिक विकार का एक प्रकार है।

जब हम हिंदू दर्शन और अन्य सभी चीजों के बारे में बात करते हैं तो एक समान विरोधाभास स्पष्ट होता है। उदाहरण के लिए, बीबीसी की वेबसाइट को देखिए। वे वही पुरानी कहानी दिखाएँगे और वही पुरानी छवि पेश करेंगे कि सनातन धर्म में एक श्रेणी के अनुसार वंशानुगत अंतर्विवाही जाति सँरचना (hereditary hierarchical endogamous caste structure) है और यह धार्मिक है। यह हिंदू परंपरा का हिस्सा है।

दिलचस्प बात यह है कि तथ्यों के साथ साबित हो चुका है कि यह पूरी तरह से गलत है। कई एनआरआई हिंदुओं ने बीबीसी को सही जानकारी प्रदान की है और ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर के साथ काम करने की कोशिश की है, लेकिन वह अपने पक्ष में एक भी वेबपेज नहीं बदलवा सके। इस तरह बीबीसी हिंदू आवाज सुनने के लिए अनिच्छुक रहा है। हिन्दुओं के साथ बीबीसी का इतिहास देखें तो कई बार स्नेह की स्थिति भी बनी थी लेकिन ज्यादातर समय रिश्ते खराब ही रहे।

समय के साथ बढ़ता गया गुस्सा 

लोगों का यह विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं हुआ है। समय के साथ बीबीसी के खिलाफ गुस्सा और निराशा बढ़ती चली गई। बीबीसी के खिलाफ पहले भी अभियान चलाए गए हैं लेकिन इसके खिलाफ लोग सड़कों पर नहीं उतरे थे।। अतीत में, बीबीसी के खिलाफ बहुत सारे पत्र-लेखन अभियान और शिकायतें दर्ज की गई हैं। उदाहरण के लिए, जब बीबीसी ने कश्मीर के बिना भारत का नक्शा प्रकाशित किया, तो मीडिया हाउस को एनआरआई हिंदुओं की आलोचना का सामना करना पड़ा था।

एक और उदाहरण है जिसे याद किया जा सकता है। जब नई दिल्ली की सड़कों पर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, बीबीसी इसे हिंदू-सिख मामला बनाने में बहुत सक्रिय रूप से शामिल था। उन्होंने इसके धार्मिक आयाम पर जोर दिया था। एनआरआई हिंदुओं ने नैरेटिव पर आपत्ति जताई, लेकिन ये आपत्तियाँ आम तौर पर लिखित शिकायत तक ही रही। जिस तरह से बीबीसी के काम करने के तरीके में भेदभाव समाहित हैं, इसने 2014 के बाद एनआरआई हिंदुओं को लगातार इसके नैरेटिव को लेकर सोचने पर मजबूर किया है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ब्रिटेन में रहने वाले अधिकांश हिंदू इसे अपनी कर्मभूमि मानते हैं और भारत को अपनी जन्मभूमि के रूप में देखते हैं। वे दोनों के लिए अपने दायित्वों को पूरा करते हैं। लेकिन जब बात उस बिंदु पर आती है जहाँ आपकी पहचान पर हमला किया जा रहा है और आपकी जन्मभूमि पर हमला किया जा रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके जो अधिकार अपनी कर्मभूमि में लिए हैं, वे वास्तविक नहीं हैं।

कैसे बीबीसी की लीसेस्टर रिपोर्टिंग ने एनआरआई हिंदुओं में गुस्सा जगाया

एनआरआई हिंदुओं ने पाया कि बीबीसी की प्रधानमंत्री मोदी के विरोध रिपोर्टिंग खासतौर से गुजरात दंगों के डॉक्यूमेंट्री झूठ से भरे हुए थे। इसी तरह, बीबीसी द्वारा रिपोर्ट की गई लीसेस्टर हिंसा भी उतनी ही झूठी थी। उन्होंने ‘हिंदुत्व’ शब्द को इस तरह पेश करने की कोशिश की जैसे कि यह कुछ नकारात्मक हो। वास्तव में, हिंसा में तथाकथित दक्षिणपंथी अतिवाद या फासीवादी प्रोपेगेंडा का आरएसएस या बीजेपी से कुछ लेना-देना नहीं था। हालाँकि, उन्होंने इसे इस तरह पेश किया। ब्रिटेन में रहने वाले हिंदू अभी इससे उबरे नहीं थे कि पीएम मोदी के खिलाफ बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ने उनके गुस्से को बढ़ा दिया।

लीसेस्टर हिंसा की जाँच के बारे में बोलते हुए पंडित सतीश ने कहा कि मामले की जाँच में अधिक समय लग रहा है। गौरतलब है कि अब तक लगभग 120 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं और कुछ हफ्ते पहले पुलिस ने हिंसा के कुछ आरोपितों की पहचान करने के लिए जनता से मदद भी माँगी थी। दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम समुदाय ने इसकी शिकायत की और इसे ‘मुस्लिम मामला’ बनाने और मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में पेश किया किया है।

लीसेस्टर ने डॉक्यूमेंट्री को लेकर बीबीसी के विरोध में अनिवासी भारतीयों को सड़कों पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से, फर्जी नैरेटिव फैलाने में बीबीसी सबसे प्रमुख अपराधियों में से एक था। उन्होंने उन लोगों को एक मँच दिया जो स्पष्ट रूप से भारत विरोधी और हिंदू विरोधी थे। यह अपनी लीसेस्टर रिपोर्टिंग में पूरी तरह से पक्षपाती था और फिर प्रधानमंत्री पर बनाई गई डॉक्यूमेंट्री में भी पक्षपाती था।

पंडित सतीश ने कहा, “लीसेस्टर तक, ब्रिटिश हिंदुओं ने बीबीसी के पूर्वाग्रह को वीपीसीसी (Vestigial post-colonial condescension) समझा था, लेकिन लीसेस्टर के साथ बीबीसी के प्रति लोगों का दृष्टिकोण बदल गया है। यहाँ बीबीसी ने घृणा फैलाने वाले अपराधियों के लिए मीडिया सुरक्षा प्रदान की और हिंसा के अपराधियों के रूप में हिंदू पीड़ितों को चित्रित किया। अब इन गतिविधियों के साथ, अधिकांश ब्रिटिश हिंदू स्वीकार करते हैं कि बीबीसी ‘ने भारत को तोड़ने वाली ताकतों को अपनी आत्मा बेच दी है।” वीपीसीसी एक प्रकार का पूर्वाग्रह है जो श्वेत वर्चस्ववादियों द्वारा लाखों भारतीयों को गुलाम बनाने से जुड़ा है।

यह लेख पंडित सतीश के शर्मा से हुई चर्चा पर आधारित है।

भगवान अयप्पा को रिकॉर्ड चढ़ावा: सबरीमाला मंदिर में सिक्कों का लगा पहाड़, 600 कर्मचारियों का गिनते-गिनते दम फूला

केरल के सबरीमाला (Sabarimala Temple) स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में इस बार रिकॉर्ड चढ़ावा आया है। मंदिर को करीब 351 करोड़ रुपए का चढ़ावा मिला है। सिक्कों की गिनती के लिए मंदिर प्रबंधन ने 600 कर्मचारियों को काम पर लगा रखा है। लेकिन गिनती पूरी नहीं हो पाई है। सिक्के गिनते-गिनते जब कर्मचारियों को थकान होने लगी तो इसे रोककर उन्‍हें कुछ समय के लिए आराम दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 60 दिवसीय मंडलम-मकरविलक्कू महोत्‍सव (Mandalam Makaravilakku Festival) नवंबर 2022 से शुरू हुआ। इसमें लाखों की संख्‍या में भक्‍त भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुँचे। बताया जा रहा है कि इस बार भक्‍तों ने दिल खोलकर दान दिया है, जिससे दान के पिछले रिकॉर्ड टूट गए हैं। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के. अनंत गोपाल का कहना है कि नोट गिनने वाली मशीन से सिक्‍कों की गिनती संभव नहीं है। अय्यप्पा मंदिर को सिक्‍कों के रूप में भी करोड़ों रुपए का दान मिलता है।

कहा जा रहा है कि मं​दिर में चढ़ने वाले सिक्कों को एक बड़े स्टोर रूम में रखा गया है। ये सिक्कों के बड़े पहाड़ के रूप में नजर आ रहे हैं। इसके अलावा मंदिर को प्रसाद की बिक्री से भी काफी आय होती है। उत्सव के समय मंदिर से अरावना और अप्पम प्रसादम के रूप में दिए जाते हैं। अप्पम की हुंडी 100 रुपए में मिलती है। मंदिर में पहुँचने वाले लाखों श्रद्धालु इस प्रसादम को खरीदते हैं, जिससे खूब पैसा एकत्रित होता है।

बता दें कि भगवान अय्यप्‍पा को चढ़ावा अर्पित करने की अलग प्रथा है। यहाँ पैसे सीधे हुंडी या दानपात्र में नहीं डाले जाते। नोट और सिक्‍के को एक थैली में पान के पत्ते के साथ रखा जाता है। यही थैली फिर कनिका के रूप में भेंट की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में भक्त जो दान अर्पित करते हैं, उसे कनिका कहा जाता है। अगर इस थैली को ज्‍यादा देर तक न खोला जाए, तो पान के पत्‍ते के गलने से नोट खराब भी हो सकते हैं।

गौरतलब है कि 2020 और 2021 में कोरोना के चलते मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए ​थे। प्रतिबंध हटने के बाद इस बार यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचे हैं। यही कारण है कि इस बार तीन गुना चढ़ावा चढ़ा है।

अब कनाडा बॉर्डर के पास आसमान में उड़ रहा था फ्लाइंग ऑब्जेक्ट, अमेरिकी वायुसेना ने मार गिराया: इससे पहले चीनी गुब्बारों को किया था नष्ट

अमेरिका के आसमान में फ्लाइंग ऑब्जेक्ट के दिखने का सिलसिला जारी है। अमेरिका वायुसेना ने एक ऐसे ही फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को रविवार (12 फरवरी 2023) को मार गिराया। यह कनाडा की सीमा के पास हूरोन झील के ऊपर उड़ रहा था।

यह दिखने में गुब्बारे की तरह था। एक हफ्ते में अमेरिकी मिसाइल ने उत्तरी अमेरिका के ऊपर उड़ने वाली चौथी वस्तु को नष्ट किया है। हाल ही में चीन के जासूसी गुब्बारों को नष्ट करने के बाद से उत्तरी अमेरिकी के सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की तरह कनाडा सीमा के पास आसमान में उड़ती हुई वस्तु के दिखाई देने के बाद पीएम जस्टिन ट्रूडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन से बात की, जिसके बाद इसे अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने मार गिराया।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल पैट राइडर ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति जो बाइडन के आदेश के बाद एक F-16 लड़ाकू विमान ने रविवार दोपहर 2:42 बजे (स्थानीय समय) हूरोन झील के ऊपर अमेरिकी हवाई क्षेत्र में लगभग 20,000 फीट (6,100 मीटर) की ऊँचाई पर उड़ रही वस्तु को ‘एआईएम9एक्स’ से नष्ट कर दिया।

पेंटागन के मुताबिक, इससे ​किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं था। लेकिन इससे देश की हवाई यात्रा प्रभावित हो सकती थी। यह सिर्फ 20,000 फीट ऊपर था। ऐसे में इसके जरिए हम पर निगरानी की आशंका थी। नाम न छापने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह वस्तु अष्टकोणीय प्रतीत होती है, जिसमें तार लटके हुए थे, लेकिन यह कोई पेलोड नहीं था।

गौरतलब है कि बीते दिनों चीन ने भारत और जापान सहित कई देशों को निशाना बनाते हुए जासूसी गुब्बारों को हवा में छोड़ा था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 4 फरवरी 2023 को अमेरिका की सेना ने अटलांटिक महासागर के ऊपर दक्षिण कैरोलिना के तट के ऊपर उड़ रहे इन गुब्बारों को मिसाइल के जरिए नष्ट कर दिया था।

अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने 6 फरवरी 2023 को करीब 40 दूतावासों के अधिकारियों को इस जानकारी से अवगत कराया। इसमें भारत समेत अन्य सभी सहयोगी और मित्र देश शामिल थे। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने 7 फरवरी 2023 को दावा करते हुए कहा था कि चीन ने गुब्बारे के जरिए निगरानी अभियान के तहत जापान, भारत, वियतनाम, ताइवान और फिलीपीन समेत कई देशों की सैन्य संपत्तियों संबंधी जानकारी एकत्रित की है।

बिहार में जावेद के घर मिले 3 टाइम बम, YouTube देख कर बनाया था: फोन में पाकिस्तानी मोबाइल नंबर, कश्मीर से लौटा था

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 3 टाइम बम मिलने के बाद से जाँच और सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। इस मामले में गिरफ्तार किए गए 3 आरोपितों में से एक का पाकिस्तान और कश्मीर कनेक्शन सामने आया है। आरोपितों ने यूट्यूब वीडियो देखकर बम बनाया था। बम शनिवार (11 फरवरी, 2023) को मोहम्मद जावेद नामक व्यक्ति के घर पर मिले थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बम की बरामदगी मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा थाना क्षेत्र के तीन कोठिया इलाके में हुई। इस मामले में पुलिस ने मुजफ्फरपुर निवासी मोहम्मद जावेद तथा बुलंदशहर निवासी मोहम्मद शमी व अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जावेद और उसके साथियों ने टाइम बम बनाने के लिए झारखंड से बैटरी तथा पश्चिम बंगाल से तार खरीदे थे। वहीं, बम में लगी घड़ी को मुजफ्फरनगर से ही खरीदा गया। यह भी कहा जा रहा है कि आरोपितों ने यूट्यूब देखकर टाइम बम बनाया था।

गिरफ्तार आरोपितों में से एक के मोबाइल में पाकिस्तान के मोबाइल नंबर मिले हैं। साथ ही यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपित मोहम्मद जावेद कश्मीर जा चुका है। यही नहीं, मोहम्मद शमी के मोबाइल में झुलसे हुए युवक की फोटो मिली है। इस फोटो को लेकर इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि बम बनाने या ट्रायल के दौरान हुए विस्फोट से युवक झुलसा होगा।

इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों से एटीएस, सीआईडी और आईबी अन्य जाँच एजेंसियों ने पूछताछ की है। वहीं पूछताछ के बाद मोहम्मद जावेद को कोर्ट में पेश करते हुए रविवार (12 फरवरी, 2023) को जेल भेजा गया। फिलहाल, गिरफ्तार आरोपितों की निशानदेही पर पुलिस व जाँच एजेंसियाँ छापेमारी कर अन्य लोगों की गिरफ्तारी में जुटी हुई हैं।

यही नहीं, जाँच एजेंसियाँ आरोपितों के बैंक खातों व ट्रेवल हिस्ट्री खँगालने में भी जुटी हुई हैं। साथ ही, पाकिस्तान और कश्मीर कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस को आतंकी कनेक्शन होने का भी शक है। हालाँकि, अब तक पुलिस को यह पता नहीं चल पाया है कि बम बनाने के पीछे आरोपितों का मकसद क्या था।

पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपित मोहम्मद जावेद और उसके भाई फरार आरोपित मोहम्मद जैकी के खिलाफ विस्फोटक रखने, आर्म्स और एनडीपीएस सहित विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई। इस मामले में तथ्य सामने आने के बाद धाराएँ बढ़ाने की बात कही जा रही है।

हिंदू से बने ईसाई, गुड़ में जहर मिला मार डाले 45 गाय: कॉन्ग्रेस नेता के पति के पास मृत गायों को उठाने का ठेका, कम मौतों से धंधा हो गया था मंदा

हरियाणा के करनाल में 45 गायों की जहर देकर हत्या के मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम विशाल, रजत, सूरज और सोनू हैं। एक अन्य मास्टरमाइंड अमर फरार चल रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपित हिन्दू धर्म त्याग ईसाई बन चुके हैं। ये मृत गायों को उठाने वाले ठेकेदार के कारिंदे हैं। कम गायों की मौत की वजह से इनका धंधा मंदा चल रहा था। हड्डी, खाल और चर्बी वगैरह से होने वाली कमाई कम हो गई थी। इसलिए इन्होंने घटना को अंजाम दिया। मामला 26 जनवरी 2023 को सामने आया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला करनाल के फसमंडी इलाके में पड़ने वाली नगर निगम गोशाला नंदी ग्राम का है। इसी साल 26 जनवरी की रात एक-एक कर गायों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ। कुछ ही समय के अंतराल पर 45 गोवंशों ने दम तोड़ दिया। मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया कि गुड़ और चारे में सल्फास की गोलियाँ मिलाकर गायों को खिलाई गई थी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उच्चस्तरीय जाँच टीम का गठन किया था। जाँच टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है।

मामले की जाँच कर रही पुलिस टीम ने घटना के दिन गोशाला के आसपास एक्टिव रहे मोबाइल नंबर की डिटेल निकलवाई। इस दौरान 5 ऐसे नंबर सामने आए जिनका कोई वास्ता गोशाला से नहीं था। पुलिस ने इन नम्बरों को ट्रेस किया। ये नंबर कुरुक्षेत्र के शाहबाद की डेरा बस्ती के रहने वाले विशाल और अमर, करनाल की मंगल कॉलोनी निवासी रजत, डेरा बस्ती अम्बाला के रहने वाले सोनू और जम्मू-कश्मीर की एक झुग्गी में रहने वाले सूरज के निकले। इसके अलावा गोशाला आने-जाने वाले रास्तों की तमाम CCTV फुटेज निकाली गई। इन फुटेज में भी पाँचों आरोपित घटना की रात आते-जाते दिखाई दिए। पुलिस ने दबिश देकर अमर को छोड़ कर बाकी सभी को गिरफ्तार कर लिया है।

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे पाँचों कई साल पहले हिन्दू धर्म छोड़ ईसाई बन चुके हैं। हड्डी, चर्बी और खाल आदि की तस्करी के लिए इस घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की। हर मृत गाय के उन्होंने 8 से 10 हजार रुपए मिलने की जानकारी दी। पकड़े गए आरोपितों में विशाल और रजत पहले से ही गोशाला में मरने वाली गायों को उठाने का काम करते थे। उनका कहना था कि गायों के कम मरने से उनका धंधा मंदा चल रहा था। इसलिए उन सभी ने एक साथ कई गायों को मार डालने का फैसला किया।

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपितों ने कबूल किया कि घटना के दिन उन सभी ने शराब पी और 2 बाइकों पर सवार होकर गोशाला पहुँचे। यहाँ उन्होंने गायों को सल्फास खिलाया जिससे रात 2 बजे से उनकी मौतों का सिलसिला शुरू हो गया। 10 पुड़िया जहर विशाल अपने साथ लाया था। 3 बजे सभी आरोपित वापस लौट आए थे। बाद में जब बजरंग दल वालों ने मृत गायों को अधिकारियों से बात कर जमीन में दफनाना शुरू किया तब इन सभी ने ऐसा न करने के लिए कहा। आरोपितों ने खुद को मृत गोवंश न सौंपने पर गोशाला से दुबारा मृत गायें न उठाने की भी धमकी दी थी।

आरोपितों ने पूछताछ में यह भी कबूल किया है कि वे पहले भी इस गोशाला में जहर देकर 4-5 गायों को एक साथ मारते रहे हैं। 15 जनवरी 2023 के बाद वो ऐसी हरकत 3-4 बार कर चुके थे।

इस गोशाला से मृत गायों को उठाने का टेंडर कॉन्ग्रेस नेत्री रानी कम्बोज के पति दीपक मेहरा को मिला था। उन्हें इसकी एवज में 4 लाख 23 हजार रुपए हर माह मिल रहे थे। दीपक मेहरा ने यह ठेका अमित नाम के एक व्यक्ति को आगे फ्री में बढ़ा दिया। पाँचों आरोपित अमित के यहाँ काम करने वाले बताए जा रहे हैं। ख़ास बात ये रही कि 45 गायों की मौत के बाद खुद कॉन्ग्रेस नेत्री रानी कम्बोज भी गोशाला के आगे हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल थीं।

जिस शिव मंदिर को अलाउद्दीन गंगू और पुर्तगालियों ने तोड़ा, मोदी सरकार ने कराया उसका पुनर्निर्माण: छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी कराया था जीर्णोद्धार

गोवा के उत्तरी गोवा जिले में स्थित सप्तकोटेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। शनिवार (11 फरवरी, 2023) को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद यह मंदिर भक्तों के लिए एक बार फिर खुल गया। इससे पहले इस मंदिर का जीर्णोद्धार छत्रपति शिवाजी महाराज ने कराया था।

सप्तकोटेश्वर मंदिर का इतिहास…

गोवा की राजधानी पणजी से 25 किलोमीटर दूर स्थित नरवे गाँव में बने भगवान शिव के इस सप्तकोटेश्वर मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में कदंब वंश के राजा ने अपनी पत्नी के लिए कराया था। वह भगवान शिव की बड़ी भक्त थीं। यह मंदिर अब तक कई हमले झेल चुका है।

मंदिर पर पहला हमला साल 1352 में इस्लामिक आक्रांता अलाउद्दीन हसन गंगू ने किया था। दरअसल, हसन गंगू ने कदंब साम्राज्य पर आक्रमण कर यहाँ कब्जा कर लिया था। इसके बाद करीब 14 वर्ष तक यह क्षेत्र अलाउद्दीन हसन गंगू के ही कब्जे में रहा। इस दौरान सप्तकोटेश्वर मंदिर सहित कई हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई थी।

हालाँकि इसके बाद साल 1367 में विजयनगर के राजा हरिहर राय ने गोवा में हसन गंगू को हरा दिया। हरिहर के शासन काल में सप्तकोटेश्वर मंदिर सहित कई अन्य मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार 14वीं शताब्दी के अंत में माधव मंत्री ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। साल 1560 में इस मंदिर पर एक और हमला हुआ। यह हमला पुर्तगालियों ने किया था। हमले में मंदिर को बुरी तरह से तोड़ते हुए शिवलिंग को कुएँ में फेंक दिया गया।

यही नहीं, पुर्तगालियों ने इस मंदिर के स्थान पर एक चैपल (ईसाइयों का प्रार्थना स्थल जो चर्च से छोटा होता है) बना दिया था। हालाँकि इसके बाद हिंदू शिवलिंग को बचाते हुए बिचोलिम ले गए। जहाँ इसे एक नए मंदिर में स्थापित किया गया। फिर साल 1668 में हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसका जीर्णोद्धार कराया था।

भाजपा की पहल से हुआ जीर्णोद्धार

इस मंदिर के जीर्णोद्धार की पहल साल 2019 में भाजपा सरकार ने की थी। इसके बाद तत्कालीन पुरातत्व मंत्री विजय सरदेसाई ने आगे आते हुए पुरातत्व विभाग को इसके जीर्णोद्धार का काम सौंपा था। इसके बाद यह जीर्णोद्धार पूरा हो सका है। मंदिर के उद्घाटन के समय छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और महाराष्ट्र के सतारा से विधायक शिवेंद्र राजे भोसले भी उपस्थित रहे।

तूफ़ान आ रहा है… एशिया के सबसे बड़े एयर शो में लड़ाकू विमानों पर बजरंग बली: 29 देशों के वायुसेना अध्यक्ष मौजूद, PM मोदी ने किया उद्घाटन

कर्नाटक की राजधानी में आज सोमवार (13 फरवरी, 2023) से एशिया का सबसे बड़ा एयर शो शुरू हुआ है। Aero India (एयरो इंडिया) 2023 नाम के इस शो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। भारत की बढ़ रही आत्मनिर्भरता और स्वदेशी ताकत को दिखाने वाले इस शो में 29 देशों के वायुसेना अध्यक्ष सहित दुनिया भर के लगभग 5 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसका समापन इसी माह 17 फरवरी को होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 दिनों तक चलने वाले इस शो में शुरुआत के 3 दिन बिजनेस डील और अंतिम 2 दिन जनता दर्शन के लिए रखे गए हैं। शो में 29 देशों के वायुसेना अध्यक्षो के साथ 73 बड़ी कंपनियों के CEO भी शामिल हो रहे हैं। डेमो के तौर पर विमानों का फ्लाई पास्ट भी करवाया जाएगा। इसमें जहाजों को उड़ा कर दिखाया जाता है। इस एयरो इंडिया के 14 वें भाग में भारत स्वदेशी लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर, मिसाइलों, ड्रोन और अन्य हथियारों का प्रदर्शन करेगा। यह शो हर 2 साल में एक बार आयोजित होता है।

लड़ाकू विमान पर बजरंग बली

स्वदेशी संस्थान HAL का नया फाइटर प्लेन HLFT-42 इस शो का मुख्य आकर्षण है। इसे 5वीं पीढ़ी का एडवांस युद्धक विमान माना जाता है। इसकी टेल (पूँछ) पर हवा में उड़ते बजरंग बली का चित्र छपा हुआ है। जिस स्थान पर इस विमान को खड़ा किया गया है वहाँ संदेश के तौर पर लिखा है, “तूफ़ान आ रहा है।” यह विमान लड़ाकू पायलटों को ट्रेनिंग देने के काम आएगा।

उड़ने वाली टैक्सी भी

IIT मद्रास द्वारा साल 2017 में बनी उड़ने वाली टैक्सी भी इस शो में रखी गई है। 2 सीटों वाली इस टैक्सी का वजह 2 क्विंटल है, जो एक बार फुल चार्जिंग के बाद 200 किलोमीटर उड़ सकती है। 2 सीटों वाली इस टैक्सी को उड़ाने में बहुत जगह की भी जरूरत नहीं। इन सभी के अलावा LCA मार्क 2 और नेवल ट्विन इंजन डेस्क बेस लड़ाकू विमान भी इस शो में प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

PM मोदी ने गिनाईं उपलब्धियाँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शो का उद्घाटन सुबह लगभग 10:30 पर इस शो का उद्घाटन किया। इस अवर पर उन्होंने इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि कभी भारत में या तो सिर्फ शो होते थे या इसे सिर्फ सेल टू इंडिया की विंडो माना जाता था।

पीएम मोदी ने कहा कि अपनी रक्षा के लिए सामान बनाने की सोच रखने वाले देश अब भारत को एक मजबूत साझीदार के दौर पर देख भी रखे हैं। भारत के स्वदेशी सामानों को मोदी ने कम खर्चीला होने के साथ टिकाऊ और भरोसेमंद भी बताया। अपने सम्बोधन में मोदी ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण के उदाहरण में तेजस और नौसेना के युद्धपोत INS विक्रांत का नाम लिया। आँकड़ों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सामानों का खरीदार भारत अब 75 देशों को रक्षा उपकरण बेच रहा है।

भगवान गणेश को विष्ठा बताने वाले तन्मय भट्ट को ‘कोटक महिंद्रा बैंक’ ने विज्ञापन से निकाला, लोगों ने शुरू कर दिया था अकाउंट बंद कराना

हाल ही में यूट्यूबर और कॉमेडियन तन्मय भट्ट कोटक महिंद्रा बैंक के एक एडवर्टाइजमेंट में दिखाई दे रहे थे। लेकिन अब वह इस विज्ञापन में दिखाई नहीं देंगे। दरअसल, सोशल मीडिया पर कोटक महिंद्रा बैंक को टैग करते हुए तन्मय भट्ट के पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट पोस्ट किए गए थे। इन ट्वीट्स में तन्मय हिंदू धर्म का अपमान करने के साथ ही चाइल्ड पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देते हुए देखे जा सकते हैं। इसके बाद बैंक ने एड वापस लेने का फैसला किया।

‘MeeToo’ कैंपेन के दौरान यौन शोषण के गंभीर आरोप झेल चुके तन्मय भट्ट का हिंदू विरोधी चेहरा कई मामलों में सामने आता रहा है। यह उनकी कॉमेडी में भी झलकता है। इसको लेकर मोनिका वर्मा नामक ट्विटर यूजर ने कोटक महिंद्रा बैंक और बैंक के सीईओ उदय कोटक को टैग करते हुए एक ट्वीट किया था।

मोनिका वर्मा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “मैं आपके बैंक की ग्राहक हूँ। लेकिन आपने अपने एक ऐड लिए हिंदूफोबिक, महिला और बच्चों का शोषण करने वाले तन्मय भट को साइन किया है। इसलिए मैं अपना अकाउंट बंद करने का विचार कर रही हूँ। उसके साथ संबंध खत्म करते हुए माफी माँगें।”

तन्मय भट्ट के ट्वीट

तन्मय भट्ट ने मई 2012 में @BigBhangTheory नामक यूजर को टैग करते हुए कहा था, आप कैसे जानते हैं कि बच्चे बलात्कार से प्यार नहीं करते?

वहीं एक अन्य ट्वीट में तन्मय ने लिखा है, “जब मैं छोटी लड़कियों की नग्न तस्वीरें देखता हूँ तो मुझे बेहद अजीब लगता है। मेरे दिमाग में आता है “हा हा! मैंने तुम्हारे बूब्स देखे। हा हा!”

कुछ अन्य ट्वीट्स में उसने हिंदू धर्म का अपमान करने की कोशिश की है। तन्मय ने लिखा है, “हर साल अफ्रीका के तट पर, हाथी जंगल से निकलते हैं। गणपति की मूर्तियों को देखते हैं और जाते हैं “क्या मैडम तुसाद हमें यह मल भेज रहे हैं?”

तन्मय ने एक अन्य ट्वीट में @rohan5513 नामक यूजर को टैग करते हुए लिखा, “मुझे खेद है कि मैंने गणेश की मूर्तियों की तुलना मल से की। मैं ईमानदारी से कहना चाहता हूँ वास्तव में मल पर्यावरण के लिए उससे बेहतर है।” तन्मय ने अपने ट्वीट्स में लगातार हिंदुओं के आराध्य भगवान गणेश का अपमान किया है। एक ट्वीट में उसने लिखा है, “गणेश यदि समस्याओं को दूर कर सकते हैं तो निश्चित रूप से वह ट्रैफिक में अच्छा काम कर सकते हैं।”

तन्मय भट्ट एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “जब मैंने मूर्तियों को ‘मल’ कहा तो वो (हिंदू) नाराज हो गए। मुझे इसका खेद है। वास्तव में मल पर्यावरण के लिए बेहतर है। इसकी तुलना नहीं करनी चाहिए।”

तन्मय भट्ट के इन ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद नेटिजेन्स ने सक्रियता दिखाते हुए कोटक महिंद्रा बैंक को टैग करते हुए ट्वीट करना शुरू कर दिया। लोग बैंक से अपना अकाउंट बंद कराने की बात कह रहे थे।

एक यूजर ने लिखा, “बहुत ही घटिया हरकत की है उदय कोटक ने। अपने धंधे के लिए भारतीय सनातन संस्कृति को ताक पर रख दिया। भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की पूजा जहाँ होनी चाहिए, वहाँ भगवान गणेश का अपमान करने वाले निर्लज्ज और घटिया आदमी को चुना गया है। ऐसे धंधेबाज समाज का कोढ़ हैं । बहुत ही शर्मनाक।”

एक अन्य यूजर ने ट्वीट कर कहा, “बचपन से ही हम 10 दोस्तों का एक ग्रुप है। सभी के अकाउंट इस बैंक में हैं। हम सबका खाता बंद होने जा रहा है। व्यापार में घाटा सबसे बेहतरीन शिक्षक होता है। जय हिंद।”

हालाँकि विरोध झेलने के बाद अब कोटक महिंद्रा बैंक ने अपने ऐड को वापस लेने का फैसला किया है। इसको लेकर बैंक की ओर से ट्वीट किया गया। ट्वीट में बैंक ने कहा है, “हम, कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड में उन एक्टर्स के विचारों का समर्थन नहीं करते हैं जो किसी व्यक्ति या समूह को नुकसान पहुँचाते हैं या फिर अपमानित करते हैं। हमने ऐड वापस ले लिया है।”

‘बलिदान स्वीकार, धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं’: लोकेश मुनि ने बताया जमीयत के मंच से मदनी को क्यों ललकारा, मुस्लिम भीड़ के सामने जैन मुनि ने दी थी चुनौती

लोकेश मुनि ने कहा है वे बलिदान स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन अपने सामने अपनी धर्म और संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। जैन मुनि ने बताया है कि यही कारण है कि उन्होंने मौलाना अरशद महमूद मदनी के बयान का विरोध किया था। उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी।

जैन मुनि ने इस घटना का एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “मुझे अपनी शहादत मंजूर थी। मैं अपनी आँखों के सामने अपने धर्म, संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता। इसलिए विरोध किया, शास्त्रार्थ की चुनौती दी।”

जैन मुनि ने रविवार (12 फरवरी 2023) को मदनी को जमीयत के मंच से ही चुनौती दी थी। जब वे मदनी का विरोध कर रहे थे, तब सामने मुस्लिम भीड़ मौजूद थी और मंच पर विभिन्न धर्मों के गुरु मौजूद थे। दिल्ली के रामलीला मैदान में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के अधिवेशन का रविवार को आखिरी दिन था। लोकेश मुनि के विरोध के बाद जैन और हिंदू धर्मगुरुओं ने जमीयत का मंच छोड़ दिया था।

इस्लामी संगठन जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद महमूद मदनी ने मनु, आदम तथा ॐ और अल्लाह को एक बताया था। इसको लेकर जैनाचार्य लोकेश मुनि ने मौलाना को लताड़ लगाते हुए मंच छोड़ दिया था।

मौलाना मदनी को लोकेश मुनि ने लगाई थी लताड़

मौलाना मदनी के बेतुके बयानों पर फटकार लगाते हुए जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा था, “मदनी ने जो कहा है उससे कोई भी सहमत नहीं है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ यदि हमें जोड़ने की बात आपको करनी है तो प्यार-मोहब्बत की बात कीजिए। आपने जितनी कहानी सुनाई है ओम, अल्लाह, मनु, ये वो उससे कहीं अधिक 4 गुना कहानी मैं सुना सकता हूँ। मदनी साहब को मैं शास्त्रार्थ के लिए बुला रहा हूँ। आप दिल्ली आइए या मुझे सहारनुपर बुलाइए।”

उन्होंने मदनी की बातों का खण्डन करते हुए कहा है, “आपने जो बात कही मैं उससे सहमत नहीं हूँ। चारों धर्म के संत या कोई भी अन्य इससे सहमत नहीं हैं। हम केवल आपस मे मिल-जुलकर रहने को लेकर सहमत हैं। ये जो कहानी है ओम, मनु, अल्लाह, उसकी औलाद ये अब फालतू की बातें हैं। आपने सारा पलीता लगा दिया एकता के सद्भावना के सम्मेलन में।”

मनु, आदम तथा ओम और अल्लाह को बताया था एक

दरअसल, मौलाना अरशद मदनी ने जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के कार्यक्रम में कहा था, “मैंने धर्म गुरुओं से पूछा कि जब कोई नहीं था न श्रीराम थे, न ब्रह्मा थे और न शिव थे, जब कोई नहीं था तो मनु पूजते किसको थे। कोई कहता है कि शिव को पूजते थे। बहुत कम लोग ये बताते हैं कि मनु ओम को पूजते थे। ओम कौन है? बहुत से लोगों ने कहा कि उनका कोई रूप-रंग नहीं है। वो दुनिया में हर जगह हैं। अरे बाबा इन्हीं को तो हम अल्लाह कहते हैं। इन्हें ही आप ईश्वर कहते हैं।”

मौलाना ने आगे कहा है, “इन्हें ही तो हम अल्लाह, आप ईश्वर, फारसी बोलने वाले खुदा और अंग्रेजी बोलने वाले गॉड कहते हैं। इसका मतलब यह है कि मनु ही आदम थे। वह ओम यानी अल्लाह को पूजते थे। हजरत आदम जो नबी थे, सबसे पहले उन्हें भारत की धरती के भीतर उतारा। अगर चाहता तो आदम को अफ्रीका, अरब, रूस में उतार देता। वो भी जानते हैं, हम भी जानते हैं कि आदम को दुनिया में उतारने के लिए भारत की धरती को चुना गया।”

यही नहीं मौलाना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत की घर वापसी वाले बयान मदनी ने कहा है कि इस्लाम भारत के लिए कोई नया मज़हब नहीं है। बल्कि अल्लाह ने पैगंबर आदम यानी मनु को यहीं उतारा, उनकी पत्नी हव्वा को उतारा, जिन्हें वे (हिंदू) हमवती कहते हैं और वे सारे नबियों, मुसलमानों, हिंदुओं, ईसाइयों के पूर्वज हैं।

राजस्थान में जिस मुस्लिम युवक के नाम से बाबा रामदेव पर FIR, उसे मामले की जानकारी तक नहीं: कहा- जमीन विवाद को लेकर वकील से मिला था

योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ राजस्थान में जिस मुस्लिम युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी, उसे इस मामले की खबर तक नहीं है। इस मुस्लिम युवक का नाम पठाई खान है। वह बाड़मेर का रहने वाला है। उसने अपने नाम के गलत इस्तेमाल और वकील पर धोखा देने का आरोप लगाया है। पठाई खान ने रविवार (12 फरवरी 2023) को खुद को फँसाए जाने का दावा किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पठाई खान ने बताया है कि उसने बाबा रामदेव पर कोई FIR नहीं दर्ज करवाई है। उसने बताया कि वह जमीन के एक विवाद के सिलसिले में एक वकील से मिला था। पठाई ने बताया कि वकील ने एक कागज पर उसके दस्तखत ले लिए थे। वकील पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए पठाई खान ने बताया कि इसी साइन का उपयोग बाबा रामदेव के खिलाफ FIR दर्ज करवाने में किया गया। वकील द्वारा खुद को फँसाने की आशंका जाहिर करते हुए पठाई ने बताया कि वह इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं चाहता है।

दरअसल यह FIR बाड़मेर जिले के चौहटन थाने में 5 फरवरी 2023 (रविवार) को दर्ज हुई थी। SHO भुताराम ने बताया था कि योगगुरु रामदेव के विरुद्ध IPC की धारा 153-A, 295- A और 298 के तहत केस दर्ज हुआ था। तब थाना प्रभारी ने भी शिकायतकर्ता के तौर पर पिठाई खान के होने की पुष्टि की थी।

क्या था पूरा मामला

इसी माह 3 फरवरी को बाबा रामदेव ने बाड़मेर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि मुस्लिम समुदाय का आतंकी और अपराधी भी नमाज जरूर पढ़ता है। रामदेव ने इसकी वजह नमाज़ को ही इस्लाम समझने की भूल बताया था। उन्होंने हिन्दुओं की विचारधारा को इस से अलग बताया था। इस बयान को मुस्लिम विरोधी बताते हुए राजस्थान सरकार से बाबा रामदेव पर कार्रवाई की माँग की गई थी। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी तब जिले के DM ऑफिस पर बाबा रामदेव के खिलाफ नारेबाजी की थी।