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जो मंत्री रहते भारत को देते थे परमाणु युद्ध की गीदड़भभकी, उनको पाकिस्तान में पुलिस ने उठाया: इमरान खान के करीबी शेख राशिद गिरफ्तार

पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार में मंत्री रहे शेख राशिद अहमद (Sheikh Rashid Ahmed) को इस्लामाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी गुरुवार (2 फरवरी 2023) तड़के हुई। शेख राशिद अवामी मुस्लिम लीग (AML) के मुखिया हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की एएमएल प्रमुख सहयोगी दल है। शेख राशिद से पहले इमरान की कैबिनेट में रहे फवाद चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने बताया है कि पूर्व मंत्री को मूरी मोटरवे (Murree Motorway) से गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि उनके भतीजे शेख राशिद शफीक ने जियो न्यूज को बताया है कि गिरफ्तारी इस्लामाबाद के हाउसिंग सोसायटी के घर से हुई है। PTI ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें शेख राशिद अहमद विपक्षी पार्टी और पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उनके घर के दरवाजों को तोड़ा गया। नौकरों को मारा गया। साथ ही यह पुलिस पर जबरदस्ती गाड़ी में बैठाने का आरोप लगाया है।

राशिद ने कहा, “पुलिस ने मेरे साथ ‘अन्याय’ किया। मुझे मोटरवे से गिरफ्तार नहीं किया है। मुझे मेरे आवास से हिरासत में लिया है। मेरा अपराध यह है कि मैं इमरान खान के साथ खड़ा हूँ। मैं 16 बार मंत्री रह चुका हूँ। एक बार भी मुझ पर इन मंत्रालयों में भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं।” पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि कम से कम 100 से 200 हथियारबंद ने उनके आवास पर छापा मारा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें इस तथ्य के बावजूद गिरफ्तार किया कि एक अदालत ने उन्हें जमानत दी थी और पुलिस महानिरीक्षक को 6 फरवरी 2023 को पेश होने का आदेश दिया था।

इमरान खान ने राशिद की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा है, “हमने पहले कभी ऐसी पक्षपाती, प्रतिशोधी सरकार नहीं देखी। हमें सड़क पर उतर आंदोलन को मजूबर किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब देश दिवालिया हो चुका है क्या वह ऐसा कोई आंदोलन झेल सकता है।”

गौरतलब है कि शेख राशिद मंत्री रहते हुए अक्सर भारत को एटमी युद्ध की गीदड़भभकी दिया करते थे। एक बार उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान के पास आधा पाव से लेकर एक पाव तक के एटम बम हैं। इतना ही नहीं यह भी कहा था कि पाकिस्तानी बम इस्लाम मानने वालों को नुकसान नहीं पहुँचाते हैं।

₹20 हजार करोड़ का FPO वापस लेकर अडानी ग्रुप ने चौंकाया: गौतम अडानी खुद आए सामने, निवेशकों को बताया बही-खाता पूरी तरह दुरुस्त

अडानी समूह ने हाल में जारी किए अपने 20 हजार करोड़ रुपए के एफपीओ (फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर) को कैंसिल कर दिया है। उन्होंने इस संबंध में मीडिया रिलीज जारी करते हुए जानकारी दी। साथ ही बताया कि वो जल्द निवेशकों के पैसे लौटा देंगे।

बता दें कि 27 जनवरी को गौतम अडानी की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने 20 हजार करोड़ जुटाने के लिए एफपीओ जारी किया था। बताया जा रहा है कि ये अब तक का सबसे बड़ा फॉलो ऑन ऑफर था, जिसे न केवल फुल सब्सक्रिप्शन मिला बल्कि बोली के आखिरी दिन तक यानी 31 जनवरी तो इसपर जबरदस्त रिस्पांस देखा गया।

हालाँकि 1 फरवरी को कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अचानक बैठक हुई और उसके बाद ये फॉलो ऑन ऑफर रद्द कर दिया गया। अडानी ने ये फैसला बताते हुए स्पष्ट किया कि उनकी बैलेंस शीट बहुत मजबूत है। ये फैसला केवल इन्वेस्टर्स के लिए लिया गया है।

अपनी रिलीज में अडानी समूह के चेयरमैन की ओर से कहा गया कि बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए बोर्ड ने इस एफपीओ को रद्द करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने शेयर बाजार में चल रही हलचल को देख कर और निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया है। वह जल्द ही एफपीओ से प्राप्त रकम को वापस करेंगे।

उल्लेखनीय है कि अडानी समूह के इस फैसले के पीछे कुछ लोग हिंडनबर्ग रिपोर्ट को वजह मान रहे हैं। लेकिन मालूम हो कि 27 जनवरी को एफपीओ जारी किया गया था जबकि रिपोर्ट 24 फरवरी को आ गई थी। इसके बावजूद एफपीओ ने पूरी रकम जुटाई जिसे 1 फरवरी की बैठक के बाद कैंसिल किया गया।

बता दें कि हिंडेनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में अडानी समूह पर कई आरोप लगाए थे। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, अनऑथोराइज्ड ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी, भारी-भरकम लोन सहित कई गंभीर आरोप थे, जो किसी कंपनी के लिए घातक बताए गए थे। बाद में अडानी समूह ने अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था। कंपनी ने 413 पन्नों के जवाब में हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठ करार दिया था। कंपनी ने कहा था कि ये आरोप भारत और यहाँ की कंपनियों तथा देश के विकास पर सुनियोजित हमला है।

तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाले सबसे युवा, T20I पारी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय: कुछ इस तरह शुभमन गिल के बल्ले ने उगली आग

भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर टी20 सीरीज का निर्णायक मुकाबला जीत लिया है। अहमदाबाद में खेले गए इस मैच में शुभमन गिल ने नाबाद 126 रन बनाए। इसी के साथ उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपना पहला शतक बनाया। 168 रनों से मिली इस जीत के साथ भारत ने सीरीज पर भी कब्जा जमा लिया है।

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 234 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। टीम इंडिया की तरफ से ओपनिंग करने आए भारत के सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल ने 63 गेंद खर्च कर 126 रनों की पारी खेली। इसके पहले 2 मैचों में वे फ्लॉप रहे थे। शुभमन ने इस पारी के साथ कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।

शुभमन गिल के रिकॉर्ड

इस शतक के साथ शुभमन सभी फॉरमेट में शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए हैं। शुभमन अब टी20 मैचों में शतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बल्लेबाज हैं। उनके नाम भारत की तरफ से टी20 मुकाबले में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। इसके अलावा शुभमन एकदिवसीय मैचों में 200 रन बनाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज हैं।

शुभमन गिल भारत के लिए टी20 इंटरनेशनल में शतक लगाने वाले 7वें बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले सुरेश रैना, रोहित शर्मा, केएल राहुल, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव और दीपक हुड्डा भारत के लिए टी20 मैचों में शतक ठोक चुके हैं। शुभमन भारत की ओर से तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाले पाँचवें बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले सुरेश रैना, रोहित शर्मा, केएल राहुल और विराट कोहली ऐसा कर चुके हैं। पिछले 17 दिनों में शुभमन ने चौथा अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा है। इससे पहले तीन शतक शुभमन ने वनडे फॉर्मेट में लगाए हैं। उनमें एक दोहरा शतक भी शामिल है।

235 रनों का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। न्यूजीलैंड के शुरुआती 4 बल्लेबाज तो 5 रनों का आँकड़ा भी पार नहीं कर सके। पूरी टीम 66 के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। न्यूजीलैंड के बल्लेबाज 12.1 ओवर ही खेल सके। न्यूजीलैंड की तरफ से डेरी मिचेल ने संघर्ष जरूर किया लेकिन जीत उनसे दूर जा चुकी थी। मिचेल ने 25 गेंदों में 35 रन बनाए।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेक्टर को मोदी सरकार के कई बड़े तोहफे: नर्सिंग से लेकर वित्तीय साक्षरता तक को बढ़ावा, फार्मा सेक्टर में नवाचार को प्रोत्साहन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) द्वारा पेश बजट (Budget 2023) की तारीफ हर वर्ग कर रहा है। बजट में हर वर्ग को ध्यान रखा गया है। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा क्षेत्र में आवश्यक मूल बदलावों को पहले ही लागू कर दिया है। इसके बाद इस बजट में शिक्षा से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने की कोशिश की है। इसमें युवाओं को स्वावलंबी बनाने से लेकर जनजातीय समूह के छात्रों को विशेष रूप से ध्यान रखा गया है।

वित्त मंत्री ने देश भर 740 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों के लिए अगले तीन वर्षों में 38,000 टीचर्स और कर्मचारियों की भर्ती की बात कही है। इन स्कूलों में 3.5 लाख आदिवासी छात्र-छात्राओं को शिक्षा की व्यवस्था है। वित्त वर्ष 2023-24 में जनजातीय समुदाय के छात्रों के लिए विशेष स्कूलों के लिए 15,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

एकलव्य मॉडल स्कूलों के लिए बजट 2022-23 के 2,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2023-24 के लिए 5943 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं, जिला स्तर पर शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। 

युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 की शुरुआत अगले 3 वर्षों में की जाएगी। इसमें इंडस्ट्री फोकस्ड कोर्सेस लॉन्च किए जाएँगे, जिनमें रोबोटिक्स, कोडिंग आदि प्रमुख रूप से शामिल किए जाएँगे। कौशल विकास में तेजी लाने के लिए यूनिफाईड डिजिटल इंडिया प्लेटफॉर्म की स्थापना भी की जाएगी।

इसके अलावा, लोक सेवकों और सरकारी कर्मचारियों में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। बच्चों और किशोरों के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की भी बात कही गई है। सरकार नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम की शुरुआत करेगी।

सरकार 157 नए नर्सिंग कॉलेज की स्थापना भी करेगी। मेडिकल एजुकेशन में मल्टी-डिसिप्लीनरी स्टडी के लिए सामग्री की व्यवस्था की जाएगी। बजट में फार्मा सेक्टर में रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नई रिसर्च योजना का एलान किया गया है। मेडिकल कॉलेजों को रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी तैयार किया जाएगा।

इसके साथ ही टीचर ट्रेनिंग के लिए अगले साल तक अत्याधुनिक टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर भी खोले जाएँगे। देश के टॉप शिक्षा संस्थानों में 3 ‘एक्सीलेंस फॉर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ सेंटर्स खोले जाएँगे।

अगले तीन साल में 47 लाख युवाओं को राष्ट्रीय प्रशिक्षुता योजना यानी नेशनल अप्रेंटिस स्कीम का डीबीटी स्टाइपेंड का लाभ दिया जाएगा। केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर तक पुस्तकालय खोलने की दिशा में काम करेगी।  

इसके साथ ही बजट में वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) पर जोर दिया गया है। इसके के लिए गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। SEBI और NSE के साथ डिप्लोमा और सर्टिफिकेट जैसे कोर्स तैयार किए जाएँगे। 

बता दें कि सरकार ने शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत खर्च किया जाना है। हालाँकि अभी तक इस आँकड़े तक नहीं पहुँच पाई है। बजट 2022-23 में शिक्षा के लिए 1,04,278 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। उसके पिछले साल यानि वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में उसमें 11,054 करोड़ रुपए की वृद्धि की गई थी।

वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 में शिक्षा बजट पर 93,223 करोड़ रुपये था। शिक्षा पर खर्च वित्त वर्ष 2019-20 में 2.8%, 2020-21 में 3.1% और 2021-22 में 3.1% खर्च किया गया है। 

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रावधान

अगर स्वास्थ्य सेक्टर की बात करें तो बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 88,956 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह राशि पिछले बजट के मुकाबले 2,350 करोड़ रुपए अधिक है। यानी बजट में इस बार हेल्थ सेक्टर के लिए 2.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

साल 2014 से अब तक बने मौजूदा 157 मेडिकल कॉलेजों के साथ कोलोकेशन में 157 नए नर्सिंग कॉलेज खोले जाएँगे। फार्मा सेक्टर में नवाचार के लिए प्रावधान किया गया है। वहीं, चिकित्सा उपकरणों के लिए नए पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है। सरकार देश भर में ICMR की संख्या भी बढ़ाएगी।

सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए निजी निवेश को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, साल 2047 तक सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में 40 साल तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

वित्त वर्ष 2023 में हेल्थ के आवंटित 88,956 करोड़ रुपए में से 86,175 करोड़ रुपए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को मिलेंगे। बाकी 2980 करोड़ रुपए हेल्थ रिसर्च पर खर्च किए जाएँगे। नेशनल टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम पर 133 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे।

सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 7200 करोड़ रुपए, नेशनल हेल्थ मिशन के लिए 36,785 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए 4,200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। 

पिछले बजट में मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर स्वास्थ्य योजना का तोहफा दिया था। इसके साथ ही स्वास्थ्य बजट में 135 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। स्वास्थ्य बजट को 94,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.38 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया था।

इसके अलावा 75,000 ग्रामीण हेल्थ सेंटर खोलने का ऐलान हुआ था। देश के सभी जिलों में जाँच केंद्र और 602 जिलों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल खोले जाने की घोषणा हुई थी। पिछले बजट में मेंटल हेल्थ काउंसलिंग के लिए नेशनल टेली मेंटल हेल्थ प्रोग्राम की भी शुरुआत की गई थी।

परीक्षा सेंटर पर 500 लड़कियों के बीच मात्र एक लड़का, नर्वस होकर बेहोश हो गया मनीष: अस्पताल में चल रहा इलाज

बिहार में बुधवार (1 फरवरी, 2023) से इंटरमीडिएट की परीक्षाएँ शुरू हो चुकी हैं। बिहारशरीफ में एक छात्र परीक्षा केंद्र पर इसलिए बेहोश हो गया क्योंकि सेंटर पर 500 लड़कियों के बीच वह अकेला लड़का था। छात्र को पास के अस्पताल ले जाया गया। छात्र का नाम मनीष शंकर बताया जा रहा है जो अल्लामा इकबाल कॉलेज का विद्यार्थी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नालंदा स्थित अल्लामा इकबाल कॉलेज के छात्रों का सेंटर बिहारशरीफ के ब्रिलियंट कॉन्वेंट स्कूल में पड़ा था। जब मनीष परीक्षा केंद्र पर पहुँचा तो वहाँ भारी संख्या में लड़कियों को देख कर बेहोश हो गया। दरअसल, परीक्षा हॉल में वह अकेला लड़का था बाकी सभी लड़कियाँ थीं। बेहोशी के बाद मनीष को बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उसकी हालत ठीक बताई जा रही है।

मनीष के परिजनों का कहना है कि परीक्षा हॉल में अचानक इतनी लड़कियों के बीच अकेला पाए जाने के कारण मनीष नर्वस हो गया और बेहोश होने लगा। परिजनों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल भी उठाया। उन्होंने पूछा कि सैकड़ों लड़कियों के बीच में सिर्फ एक लड़के का सीट कैसे और क्यों दिया गया?

दूसरी तरफ, परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद इंटरमीडिएट का प्रश्न पत्र लीक होने जैसी खबरें प्रचारित की गईं। हालाँकि, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। पहली शिफ्ट में गणित की परीक्षा थी। एक अन्य प्रश्न पत्र वायरल कर पेपर लीक होने की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई। प्रश्त पत्र से मिलान कराने पर दावा गलत साबित हुआ। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की है। बता दें इंटरमीडिएट की परीक्षा में में 13 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएँ शामिल हो रहे हैं।

‘निर्मला ताई ने ये अच्छा नहीं किया, अब सुनार की दुकान पर मिलेगी सिगरेट’: बजट के बाद सोशल मीडिया पर ‘रो रहे’ लोग, आई मजेदार मीम्स की बाढ़

केंद्र सरकार की तरफ से वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट पेश किया जा चुका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 1 घंटे 25 मिनट का बजट भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कुछ चीजों को सस्ता किया है तो कुछ सामान महँगे करने का ऐलान किया। इस दौरान सिगरेट पर ‘राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (National calamity contingent duty)’ में 16 प्रतिशत का इजाफा कर दिया है। इसका मतलब है कि सिगरेट महँगी हो जाएगी।

सिगरेट महँगी होने की खबर जैसे ही नेटिजन्स को लगी सोशल मीडिया पर मजेदार मीम्स और पोस्ट शेयर किए जाने लगे। देखते ही देखते ट्विटर पर #Cigarettes ट्रेंड करने लगा। ‘फिलासफर’ नाम के अकाउंट से ट्वीट कर लिखा गया कि निर्मला ताई ये अच्छा नहीं किया।

प्रखर शर्मा नाम के यूजर ने बॉलीवुड की फिल्म ‘थ्री ईडियट्स’ का एक दृश्य पोस्ट किया। इस तस्वीर पर लिखा था, “गोल्ड फ्लैक तो बेटा कुछ दिनों में इतनी-इतनी थाली में सोनार की दुकान पर बिकेगी।”

हरीश शेहरावत नाम के एक यूजर ने महाभारत सीरियल के भीष्म पितामह की तस्वीर शेयर की जिसपर लिखा था, कि मैंने तो लगता है घायल होने के लिए ही जन्म लिया है।

शुभम जैन नाम के यूजर ने भी बॉलीवुड की फिल्म वेलकम का एक दृश्य शेयर करते हुए लिखा, “सिगरेट की कीमतों में उछाल सिगरेट पीने वाले इस वक्त”- उन्होंने जो तस्वीर शेयर की थी उसपर लिखा था, “सह लेंगे थोड़ा सा।”

एक यूजर ने तस्वीर शेयर की जिसपर लिखा था, “का करे, साला जिए की नहीं जिए।”

विट्टी डॉक नाम के यूजर ने भी दुखी स्मोकर्स की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “कीमत बढ़ने के बाद स्मोकर्स।”

कुछ नेटिजन्स को सिगरेट का महँगा होना अच्छा भी लगा। नील जैन नाम के यूजर ने फैसले की तारीफ करते हुए लिखा कि मुझे लगता है बजट 2023 के सबसे अच्छे निर्णयों में से एक सिगरेट की कीमतों में उछाल का फैसला है।

‘पाकिस्तान ने आतंकवाद के बीज बोए’: आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान को गलती का एहसास, रक्षा मंत्री ने कहा – भारत में भी नमाज पढ़ने वाले सुरक्षित

इस्लामिक आतंकवाद को प्रश्रय देने वाला पाकिस्तान (Pakistan) अब खुद उसकी आग में जल रहा है। इस बात का अहसास पाकिस्तान के हुक्मरानों को तो काफी लंबे समय से होने लगा था, लेकिन अब वे इसे खुलकर स्वीकार करने लगे हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उनकी सरकारों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया।

पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि जिस आतंकवाद की बीज कभी पाकिस्तान ने बोया था, अब उसका दंश उसे झेलना पड़ रहा है। दो दिन पहले पेशावर की एक मस्जिद में हुए आत्मघाती महले (Peshawar Suicide Blast) में 100 से अधिक लोगों की मौत के बाद पाकिस्तान की ओर से यह बयान आया है।

पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में बोलते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा, “मैं लंबे समय तक नहीं बोलूँगा, लेकिन मैं संक्षेप में कहूँगा कि शुरुआत में हमने आतंकवाद के बीज बोए।… भारत या इजरायल में भी नमाज के दौरान कोई शहीद नहीं हुआ, लेकिन पाकिस्तान में ऐसा हुआ।”

उन्होंने मुल्क के सभी राजनीतिक दलों से आतंक के खिलाफ एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, “आतंकवाद किसी भी धर्म या संप्रदाय के बीच अंतर नहीं करता। धर्म के नाम पर आतंकवाद का इस्तेमाल बहुमूल्य जान लेने के लिए किया जाता है।” 

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पिछले डेढ़ सालों में 4,50,000 अफगान वैध दस्तावेजों पर पाकिस्तान आए और वे वापस नहीं गए। ये आधिकारिक आँकड़े हैं। उन्होंने कहा, “इनमें कौन आतंकवादी है और कौन नहीं, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता।” मंत्री ने कहा कि देश भर के छोटे शहरों में अफगान शरणार्थी मौजूद हैं।

पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्ला ने कहा कि देश में मुल्क में आतंकवाद के खतरे के लिए पिछली सरकारों की नीतियाँ जिम्मेदार हैं। सोवियत संघ के खिलाफ अफगानिस्तान की जंग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हमने मुजाहिदीन तैयार किये थे, लेकिन वे आतंकवादी बन गये हैं।”

बता दें कि सोमवार (30 जनवरी 2023) को पेशावर की एक मस्जिद में 300-400 पुलिसकर्मी नमाज के लिए मौजूद थे। इसी दौरान आतंकियों ने आत्मघाती हमला कर दिया। इसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई। वहीं, इसमें सैकड़ों लोग घायल हैं।

हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की माँग देश में उठ रही है। बुधवार (1 फरवरी 2023) को पुलिसकर्मियों ने रैली निकालकर मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की। इस मामले में अब 17 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। 

मोदी सरकार में 50000 Km राजमार्गों के निर्माण से एक दशक में ऐसे 43% बढ़ गई ‘NLT’, ISRO की तस्वीर से समझें कैसे प्रकाशमान हो रहा है भारत

भारत में तेजी से विकास हो रहा है। इस वजह से बिजली की माँग भी बढ़ी है। बिजली की माँग की आपूर्ति और दूर-दराज के इलाकों में बिजली कनेक्शन पहुँचाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की NDA सरकार ने बेहतरीन काम किया है। ISRO की एक रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है। मोदी सरकार की सौभाग्य योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग के तेजी से निर्माण ने विद्युतीकरण की दिशा में भारत की तस्वीर बदल दी है।

सौभाग्य योजना की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी और तब से अब तक करीब 3 करोड़ घरों में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च, 2021 तक सौभाग्य योजना के लॉन्च के बाद से 2.8 करोड़ घरों का विद्युतीकरण किया गया था। वहीं 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक करीब 50,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हो चुका है और यह स्वाभाविक है कि इस राजमार्गों पर जलाई जा रही स्ट्रीट लाइट से देश में नाइट लाइट टाइम (NLT) में बढ़ोतरी हुई है। भारत में अब कुल 63.73 लाख किलोमीटर का राजमार्ग नेटवर्क है। मोदी सरकार द्वारा तेजी से किए गए विद्युतीकरण के कार्य की झलक इसरो की रिपोर्ट में भी दिखती है।

इसरो (ISRO) की ओर से प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2012 से वर्ष 2021 तक नाइट लाइट टाइम (NLT) में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान NLT में केवल वर्ष 2020 में थोड़ी कमी आई है। इसका कारण संभवतः कोरोना महामारी हो सकता है।

NLT (2012-21) की तुलना करते हुए इसरो की रिपोर्ट (तस्वीर साभार: इसरो)

कई राज्यों ने इस मामले में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बिहार इसमें सबसे आगे है। बिहार में इस एक दशक में NLT में रिकार्ड 474 प्रतिशत की बढोतरी दर्ज की है। वहीं कई राज्यों ने इस मामले में सुस्त प्रगति की है।

NLT के मामले में बिहार में 474 प्रतिशत की बढ़ोतरी (तस्वीर साभार-इसरो)

दरअसल ISRO के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (ISRO National Remote Sensing Centre) ने यह ग्रोथ रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, “विकास के दृष्टिकोण से आर्थिक और पारिस्थितिक तंत्र को देखने के लिए कई संकेतक उपलब्ध हैं। नाइट टाइम लाइट्स (NTL) को इन गतिविधियों की निगरानी के संकेतकों में से एक माना जा सकता है। वर्ष 2012 से 2021 की अवधि में राष्ट्रीय, राज्य और जिलेवार नाइट टाइम लाइट ट्रेंड का विश्लेषण करने के लिए पूरे भारत को कवर किया गया है।”

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “कोविड-19 महामारी के कारण, यह पाया गया कि NLT में लगभग सभी राज्यों में वर्ष 2020 में गिरावट आई है। इसलिए आँकड़ों की गणना तीन स्तरों में की गई है। 2012 से 2019 , 2019 से 2020 और 2020 से 2021 के बीच । ट्रेंड सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों के संबंध में बहुत उपयोगी हो सकते हैं। पूरे भारत में 2012 से 2021 के बीच NLT में लगभग 43% वृद्धि देखी गई है। वहीं वर्ष 2019 और 2020 की तुलना करें तो इस दौरान 5% की कमी देखी गई है, जिसका कारण COVID-19 महामारी हो सकता है। वहीं वर्ष 2020 की तुलना में  2021 में पूरे भारत में NLT में 9% वृद्धि देखी गई।”

राज्यवार बात करें तो बिहार ने NLT में शानदार प्रदर्शन किया है। उसके बाद मणिपुर (441%), लद्दाख (280%) और केरल (119%) का स्थान है। दूसरी ओर गुजरात (58%), उत्तर प्रदेश (61%), अरुणाचल प्रदेश (66%) और मध्य प्रदेश (66%) में एक दशक के दौरान मध्यम वृद्धि देखी गई। वहीं जिन राज्यों में इस दौरान NLT 55 % से कम रहे, उनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना जैसे विकसित राज्य शामिल हैं 

मोदी यूँ ही नहीं हैं अजेय, एकलव्य स्कूलों से लेकर गोवर्धन तक ‘सबका साथ-सबका विकास’ को विस्तार: खेत से लेकर जंगल तक बजट से पहुँचाई खुशहाली

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने अपना 5वाँ और देश का 75वाँ बजट बुधवार (1 फरवरी 2023) को पेश किया। भाजपा (BJP) की सरकार ने अपनी बजट (Budget 2023) में हर वर्ग का ध्यान रखा। खासकर आदिवासियों और पिछड़ों के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार का आम बजट अमृत काल का पहला आम बजट है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें गाँव, गरीब और किसानों का ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही इस बजट में मध्यम वर्ग के लोगों का भी खास ध्यान रखा गया है।

अब सबसे पहले जानने की कोशिश करते हैं कि इस बार की बजट में मोदी सरकार ने जनजातीय समुदाय, गरीबों, पिछड़ों, किसानों के लिए क्या उपाय किए हैं। अगर भाजपा सरकार के साल 2014 से शासन को देखा जाए को सरकार हर स्तर पर जनजातीय समुदाय और गरीबों के कल्याण के लिए प्रयासरत है।

जनजातीय समुदाय

केंद्र सरकार ने वनवासी बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनकी शिक्षा पर विशेष बल दिया है। वनवासी बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार ने एकलव्य मॉडल स्कूल खोलने का लक्ष्य रखा है। अगले तीन वर्षों में सरकार 3.5 लाख आदिवासी छात्रों को समर्पित 740 एकलव्य मॉडल स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इन स्कूलों के लिए 38,800 शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।

जनजातीय लोगों के कल्याण से संबंधित विभिन्न योजनाओं पर मोदी सरकार 8 वर्षों 91,000 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। मोदी सरकार ने सिर्फ जनजातीय समुदाय के छात्रों पर 8,500 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। इनमें इस बार के बजट की घोषणाएँ शामिल नहीं हैं।

मोदी सरकार ने जनजातीय कल्याण को लेकर केंद्रीय योजनाओं पर वित्त वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक ₹91,000 करोड़ का आवंटन किया है। वित्त वर्ष 2014-15 से पहले जनजातीय समुदाय के कल्याण के लिए सिर्फ 19,437 करोड़ रुपए ही प्रावधान किए गए थे। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर पहला ट्राइबल रिसर्च सेंटर की स्थापना की गयी।

भाजपा सरकार की पहल का सीधा लाभ भारत में रहने वाली 700 से अधिक जनजातियों के 13-14 करोड़ लोगों को फायदा होगा, जो देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 700 में शामिल 75 प्रीमिटिव ट्राइब्स को सीधे मुख्यधारा से जुड़ सकेंगी।

किसानों के हित के लिए उपाय

साल 2014 में जब भाजपा केंद्र की सत्ता में आई थी तो उसने किसानों की आमदनी को दुगना करने की बात कही थी। इसके लिए सरकार ने कई तरह की योजनाएँ चलाई और उन पर पड़ने वाले भार को कम करने की भी कोशिश की। इस बार के बजट में भी सरकार ने किसानों पर विशेष बल दिया है। सरकार ने हरित खेती और हरित ऊर्जा पर विशेष ज़ोर दिया है। इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को भी आगे बढ़ाया है।

पीएम-प्रणाम योजना: साल 2023 के बजट में वित्त मंत्री ने कृषि प्रबंधन योजना यानी पीएम-प्रणाम योजना (PM Pranam Scheme) का विशेष तौर पर उल्लेख किया। इस योजना के तहत केंद्र सरकार वैकल्पिक उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों को प्रोत्साहित करती है। इस योजना के जरिए सरकार रसायनों के इस्तेमाल को कम करके वैकल्पिक उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।

अगले 3 वर्षों में एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए मदद मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए देश में 10,000 जैव इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जाएँगे। इससे ना सिर्फ खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बरकरार रहेगी, बल्कि लंबी अवधि के बाद उनमें सुधार की भी गुंजाइश बनती है।

केंद्र सर किसानों के लिए नीम कोटेड यूरिया का प्रबंध पहले ही कर चुकी है, जिसके जरिए कीटनाशकों की जरूरत को खत्म करने का प्रयास किया रहा है। नीम कोटेड यूरिया के इस्तेमाल से पौधों में कीट लगने की आशंका कम गुना कम हो जाती है। वहीं, सरकार ऑर्गेनिक खाद को भी बढ़ावा दे रही है।

सहकारी समितियों की स्थापना: इस योजना के तहत 63,000 एग्री सोसायटी को कंप्यूटराइज्ड किया जाएगा। इसके लिए 2,516 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इनके लिए राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी उपज को स्टोर करने और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

बजट में कहा गया है कि सरकार अगले 5 वर्षों में वंचित गाँवों में बड़ी संख्या में सहकारी समितियों, प्राथमिक मत्स्य समितियों और डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना करेगी। इसके साथ ही ग्रामीण महिलाओं के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप को और बढ़ाया जाएगा। अभी तक ऐसी 81 लाख समितियाँ बनी हैं।

किसान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: किसानों के लिए किसान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर किसानों के लिए उनकी जरूरत से जुड़ी सारी जानकारियाँ उपलब्ध होंगी। इससे किसानों को कई तरह की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

एग्री स्टार्टअप को प्रोत्साहन:  केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े स्टार्ट अप को प्रोत्साहित करने की बात कही है। कृषि स्टार्टअप के लिए डिजिटल एक्सीलेटर फंड बनाया जाएगा। इसे कृषि निधि का नाम दिया गया है। इस फंड के माध्यम से सरकार स्टार्टअप शुरू करने वालों को मदद करेगी। इससे किसानों को खेती को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।

20 लाख किसान क्रेडिट कार्ड: केंद्र सरकार ने किसानों के बीच क्रेडिट कार्ड और बढ़ावा देगी, ताकि उन्हें ऋण जैसी सहूलियत आसानी से मिल सके। इस साल केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए तक ऋण किसानों के बीच बाँटने का लक्ष्य रखा है। ये क्रेडिट कार्ड के जरिए दिया जाएगा।  

मछली पालन एवं बागवानी को प्रोत्साहन: केंद्र सरकार मत्स्य संपदा की नई उपयोजना में 6,000 करोड़ रुपए निवेश करेगी। इसके जरिए मछुआरों को बीमा कवर, वित्तीय सहायता और किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी प्रदान की जाती है। इसके साथ ही बागवानी के लिए 2,200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण संसाधनों का उपयोग करके ग्रामीण विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तेज़ी से बढ़ावा देना है।

मोटे अनाज को बढ़ावा: सीतारामन ने मोटे अनाज के उत्पादन के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स का गठन की घोषणा की है। भारत को मोटे अनाज उत्पादन का ग्लोबल हब बनाने की घोषणा की गई है। मोटे अनाज के लिए कम पानी और उर्वरक की जरूरत पड़ती है। यह स्वास्थ्य के उत्तम होने के साथ-साथ इसका उत्पादन लागत भी कम आता है।

गोवर्धन योजना: (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) योजना के तहत सरकार 500 नए ‘कचरे से संपदा’ निर्माण करने वाले संयंत्रों की स्थापना करेगी। इनमें शहरी क्षेत्रों में 75 संयंत्रों सहित 200 संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्र लगाए जाएँगे। इसके अलावा, इसमें 300 समुदाय या क्लस्टर आधारित संयंत्र भी शामिल हैं। इसके लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

MSP का पैसा सीधे किसानों के खाते में: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP का पैसा अब सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। इससे पहले यह पैसा मंडियों और आढ़तियों के जरिए किसानों तक पहुँचता था। अब सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर करने से भ्रष्टाचार रोकने में मदद मिलेगी।

अन्य योजनाएँ

केंद्र सरकार ने इससे जुड़ी अन्य योजनाओं को भी लागू किया है, जिसका सीधा फायदा किसानों और गरीबों को मिलेगा। इनमें PM आवास योजना एक प्रमुख योजना है। PM आवास योजना के लिए केंद्र सरकार ने 66% बढ़ोतरी की है। इसके लिए सरकार ने अब 79,000 करोड़ रुपए का आवंटन किया है।

सरकार युवाओं के लिए स्किल यूथ सेंटर बनाने पर जोर देगी। इसके साथ ही 30 स्किल इंडिया सेंटर भी बनाए जाएँगे। स्किल इंडिया सेंटर उन छात्रों को लिए होगा, जो विदेशों में नौकरी करने जाने के बारे में सोचते हैं। इन सेंटर से उन्होंने मदद पहुँचाई जाएगी। इसके अलावा, नेशनल अप्रेंटाइशिप प्रमोशन स्कीम बनाकर छात्रों को सीधे मदद पहुँचाई जाएगी।

विपक्षी दल इस बजट को चाहे जो कहें, लेकिन इसमें समाज के सबसे कमजोर तबकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये योजनाएँ सीधे लोगों से जुड़ी हैं। ऐसे में इस तरह की योजनाएँ भी उनकी लोकप्रियता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

 

₹5.94 लाख करोड़ का रक्षा बजट, हथियार और गोला-बारूद के लिए ₹1.62 लाख करोड़: कभी नेहरू सरकार ने की थी कटौती, 3 साल बाद चीन ने कर दिया हमला

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी 2023) को बजट पेश किया। बजट में वर्ष 2023-24 के लिए रक्षा क्षेत्र (Defense sector) के लिए कुल 5.94 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए। यह राशि कुल बजट का करीब आठ फीसदी है। पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 70 हजार करोड़ रुपए रक्षा बजट बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष (5.25 लाख करोड़) के मुकाबले यह करीब 13 प्रतिशत ज्यादा है।

वित्त मंत्री के मुताबिक रक्षा क्षेत्र को आवंटित बजट में से 1.62 लाख करोड़ रुपए हथियार और गोला-बारूद खरीदने पर खर्च किया जाएगा। 2.70 लाख करोड़ रुपए जवानों की सैलरी और उनके लिए जरूरी संशाधन जुटाने पर खर्च होंगे। इसके अलावा 1 लाख 38 हजार करोड़ रुपए की रकम सेवानिवृत्त (Retired) सैनिकों के पेंशन पर खर्च किए जाएँगे।

पिछले 4 रक्षा बजट पर नजर डालें तो वर्ष 2019-20 में 4.31 लाख करोड़ रुपए रक्षा क्षेत्र के लिए दिए गए थे। वहीं 2020-21 में इसे बढ़ाकर 4.71 लाख करोड़ रुपए किया गया। 2021-22 में देश का रक्षा बजट 4.78 करोड़ रुपए था। इसी तरह वर्ष 2022-23 के लिए 5.25 लाख करोड़ रुपए का बजट दिया गया। हर वर्ष रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित बजट में बढ़ोतरी की जा रही है।

लेकिन एक समय ऐसा भी था जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने रक्षा बजट कम कर दिया था। उसके बाद चीन ने जो किया वह भारतीय शौर्य के इतिहास पर सबसे गहरा घाव बना। रक्षा बजट में कटौती नेहरू की ऐसी गलती है, जिस पर चर्चा बहुत कम हुई है। जब चीन और भारत के बीच तनाव के हालात थे तब नेहरू ने 1959 के रक्षा बजट में कटौती की थी। इसके 3 साल बाद भारत-चीन युद्ध हुआ। भारत यह युद्ध बुरी तरह हार गया।

1959 के केन्द्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र में 25 करोड़ रुपए की कटौती हुई थी। इसके अलावा केन्द्रीय बजट में 82 करोड़ रुपए की कटौती की गई थी। यह नेहरू द्वारा लिए गए विकराल निर्णयों की श्रृंखला का पहला फैसला था, जिसकी वजह से भारतीय सेना 1962 के युद्ध में बुरी तरह पराजित हुई। भारत न सिर्फ युद्ध हारा, बल्कि अक्साई चीन स्थित कई हज़ारों स्क्वायर किलोमीटर ज़मीन पर चीन ने कब्ज़ा कर लिया।

नेहरू की अगुवाई वाली तत्कालीन सरकार को चीन के हमलों को लेकर कई चेतावनी मिल चुकी थी, 1962 से लगभग 2.5 साल पहले चीनी सैनिकों ने सीमा पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था। इसके बावजूद जवाहर लाल नेहरू और तत्कालीन रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन को सेना से राय-मशवरे और चर्चा की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। उसका नतीजा यह निकला कि भारत को अपने इतिहास की सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा।

नेहरू ने सेना द्वारा दिए गए तमाम संकेतों को नज़रअंदाज़ किया और सेना को मजबूत बनाने की कोई छोटी कोशिश तक नहीं की। रिपोर्ट्स में यहाँ तक दावा किया जाता है कि नेहरू और तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन ने योजनाबद्ध तरीके से जनरल थिमैया (1957 से 1961 तक आर्मी स्टाफ के सेनाध्यक्ष) को बदनाम करने की साज़िश रची।   

1959 के पहले भी नेहरू सेना को भंग करना चाहते थे। मेजर जनरल डीके ‘मोंटी’ पाटिल (Major General DK “Monty” Palit) द्वारा लिखी गई मेजर जनरल एए ‘जिक’ रुद्रा ऑफ़ इंडियन आर्मी (Major General AA “Jick” Rudra of the Indian Army) की बायोग्राफी के मुताबिक़, “आज़ादी के कुछ साल बाद नेहरू ने कहा आखिर कैसे भारत को एक ‘डिफेंस प्लान’ की ज़रूरत है। अहिंसा हमारी नीति है। हमें सेना के लिहाज़ से कोई ख़तरा नहीं नज़र आता है। सेना को स्क्रैप (scrap) करो। सुरक्षा संबंधी ज़रूरतें पूरी करने के लिए पुलिस है।”