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सपा सांसद शफीकुर्रहमान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज, 3000 दंगाई हिरासत में: योगी सरकार की सख़्त कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ हिंसक प्रदर्शन और सोशल मीडिया के माध्यम से अफ़वाह फैलाने वाले अराजक तत्वों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का मन बना लिया है। किसी भी तरह की अफ़वाह को रोकने के लिए राज्य के 20 ज़िलों में मोबाइल इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गई है। वहीं, संभल क्षेत्र के समाजवादी पार्टी के सासंद शफीकुर्रहमान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है।

गुरुवार (19 दिसंबर) को उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने उग्र होते हुए 2 सरकारी बसों को आग के हवाले कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शन हिंसक होने के बाद संभल ज़िला कलेक्टर ने अगले आदेश तक ज़िले की मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क, एसपी जिलाध्यक्ष फ़िरोज़ ख़ान, स्थानीय पार्षद के पति हाजी मोहम्मद शकील और मुशील ख़ान समेत 17 को नामज़द करते हुए सैकड़ों लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। यहाँ रोडवेज की तरफ़ से भी भीड़ के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया।

बता दें कि राजधानी लखनऊ में गुरुवार (19 दिसंबर) को हुई हिंसा में एक शख़्स की मौत हो गई थी, साथ ही 16 पुलिसकर्मी समेत 30 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने सात FIR भी दर्ज की है और कार्रवाई करते हुए 31 लोगों को गिरफ़्तार भी कर लिया गया। इसके अलावा, 112 लोगों को हिरासत में लेने के साथ-साथ कानपुर में सुरक्षा के मद्देनज़र 100 लोग हिरासत में लिए गए हैं।

इसके अलावा, 3000 अराजक तत्वों को हिरासत में ले लिया गया है। इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाने वालों को सख़्त संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि सार्वजानिक सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाने वालों की सम्पत्ति बेच कर इसकी भरपाई की जाएगी। उपद्रवियों की सम्पत्ति को नीलाम करके जो पैसे आएँगे, उससे उनके द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को पहुँचाई गई क्षति की भरपाई होगी।

यूपी के मेरठ में भी हिंसा भड़काने वाले दंगाईयो के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की गई। मेरठ में खैरनगर के पार्षद समेत नौ लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा, तीन लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया। शांतिभंग मामले में शामली में नौ दंगाईयों को हिरासत में लिया गया और नौ दंगाईयों को गिरफ़्तार किया गया।

ख़बर के अनुसार, गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के क़रीब 34 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया। इस बीच पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के मध्य आपसी झड़प भी हुई, जिसके चलते पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन पर अड़े सपा ज़िलाध्यक्ष महेन्द्रनाथ यादव समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया। देवरिया में क़रीब 400 उद्रवियों को हिरासत में लिए जाने की ख़बर है। 

उधर, मुज़्फ़्फरनगर में विरोध-प्रदर्शनों के चलते इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई। एसपी सिटी ने लगभग 150 सपाइयों को गिरफ़्तार कर डीएवी डिग्री कॉलेज में बंद किया। वाराणसी में भी तीखी नोंकझोंक की ख़बरें सामने आईं। पुलिस ने लाठीचार्ज करने के साथ 69 लोगों को गिरफ़्तार कर उन्हें जेल भेज दिया।

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असम में मोबाइल इंटरनेट सेवा फिर से चालू, ब्रॉडबैंड पहले से ही था बहाल

असम में शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को 10 दिन के बाद इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई। नागरिकता संशोधन कानून के कारण असम में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद सुरक्षा कारणों से इसे निलंबित किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरटेल के वरिष्ठ अधिकारी ने इंटरनेट बहाली के बारे में सूचना देते हुए बताया कि शुक्रवार सुबह नौ बजे इंटरनेट पर लगा प्रतिबंध हटाया गया। उन्होंने कहा, चूँकि उन्हें हाल में प्रतिबंध जारी रखने के कोई निर्देश नहीं मिले, इसलिए उन्होंने मोबाइल इंटरनेट सेवा फिर से बहाल कर दी है।

गौरतलब है कि असम में ब्रॉडबैंड सेवा पहले से ही बहाल हो चुकी है। लेकिन मोबाइल इंटरनेट सेवा शुक्रवार से चालू की गई है। इससे पहले गुवाहटी उच्च न्यायालय ने गुरुवार को शाम 5 बजे ही इंटरनेट सेवा बहाल करने के आदेश दे दिए थे।

इधर, राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी अपनी ओर से जनता को समझाने की पूरी कोशिश रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने असम के हालातों को इंगित करते हुए कहा कि कुछ लोग गलत सूचना और फर्जी खबरें फैला रहे हैं। ये लोग समाज के दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि असमिया भाषा को हमेशा के लिए राज्य भाषा के रूप में संरक्षित किया जाएगा और सरकार इसे करेगी।

सीएम ने लोगों को आश्वस्त किया है कि कोई भी असम की धरती के बेटों के अधिकारों को नहीं चुरा सकता, उनकी भाषा या उनकी पहचान को कोई खतरा नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि किसी भी तरह से असम का सम्मान प्रभावित नहीं होगा। वे लोगों के समर्थन में हमेशा रहेंगे और राज्य में शांति के साथ आगे बढ़ेंगे।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के बाद असम में कुछ गलतफहमियों के चलते बीते दिनों काफी आक्रोश देखा जा रहा था। जिसके कारण राज्य के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुआ और स्थिति को नियंत्रिण में रखने के लिए इंटरनेट बंद किया गया। लेकिन अब स्थिति सुधरता देख, दोबारा इन्हें बहाल कर दिया गया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है।

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मुस्लिम महिलाओं को रकम दोगुना करने का लालच, ठगे ₹1.2 करोड़: सिराज-उर-रहमान और बुशरा बेगम गिरफ्तार

हैदराबाद में पुलिस ने गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को 1.2 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में एक दंपती को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सिराज-उर-रहमान और उसकी बीबी बुशरा बेगम लोगों से पैसे दोगुने करने के नाम पर रकम ऐंठा करते थे। इस तरह सिराज-उर-रहमान और बुशरा बेगम ने लोगों के 1.2 करोड़ रुपए ठग लिए थे।

पुलिस द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि बुशरा यूनिवर्सल इस्लामिक रिसर्च सेंटर (UIRC) की इंचार्ज थी, वहीं उसका पति सिराज UIRC का संस्थापक और महासचिव है। पुलिस ने बताया कि बुशरा और सिराज ने उनके द्वारा चलाए जा रहे तीनों स्कीम में मुस्लिम महिलाओं को पैसा लगाने का लालच दिया। 

इसके साथ ही उन्होंने एक इस्लामिक पब्लिक स्कूल को उनके पैसे को दोगुना वापस करने का वादा करके उनसे 1.2 करोड़ रुपये ठग लिए। डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक, सिराज-उर-रहमान और उसकी बीबी बुशरा बेगम ने कथित तौर पर हीरा ग्रुप कंपनियों के हीरा गोल्ड, हीरा फुडेक्स, हीरा रिटेल और आईपीएस जैसी कंपनियों में अपने पैसे का निवेश करने के लिए लोगों को यकीन दिलाया।

हालाँकि वो लोगों को किसी भी तरह का रिटर्न देने में असफल रहे। उन्होंने लोगों को उनके द्वारा जमा की गई राशि भी नहीं लौटाई। जिसके बाद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और वित्तीय प्रतिष्ठान अधिनियम के जमाकर्ताओं के तेलंगाना संरक्षण के संबंधित धाराओं के तहत दो मामले दर्ज किए गए। निवेशक अर्शिया सुल्ताना और उनके रिश्तेदारों ने पुलिस को शिकायत की कि उन्होंने 1.2 करोड़ रुपए का निवेश किया था, लेकिन उनके निवेश पर न तो उन्हें रिटर्न मिला और न ही उनके द्वारा जमा किए गए पैसे। 

इसके अलावा सुल्ताना और उनके रिश्तेदारों ने भी सैदाबाद पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जाँच की। जाँच में बुशरा और सिराज के दोषी पाए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406, धारा 420, धारा 506 और वित्तीय प्रतिष्ठान अधिनियम के जमाकर्ताओं के संरक्षण के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था

गौरतलब है कि इससे पहले भी हैदराबाद में धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए थे, जिसमें हीरा गोल्ड हलाल पोंजी योजना भी शामिल है। इसने न केवल हैदराबाद के निवासियों, बल्कि पूरे भारत और विश्व के हजारों लोगों को ठगा है। 

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। इन दौरान हिंसक प्रदर्शन की कई तस्वीरें गुजरात के अहमदाबाद से आईं। अहमदाबाद के शाह आलम इलाके में उपद्रवियों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उन पर पथराव शुरू कर दिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी भागकर छिपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भीड़ के सिर पर खून सवार हो जाता है। इसमें लगभग 19 पुलिस वाले चोटिल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने कुल 32 लोगों को हिरासत में लिया है।

एक अन्य विडियो में दिखता है कि उपद्रवियों की भीड़ पुलिस के वाहन के पीछे दौड़ती है। पुलिस की गाड़ियाँ तेजी से जाने लगती हैं। आस-पास खड़े पुलिसकर्मी गाड़ी में घुसने की कोशिश करते हैं, लेकिन एक पुलिसकर्मी बस में चढ़ नहीं पाता और फिसल कर गिर पड़ता है। इतने में ही उपद्रवियों की भीड़ उसे घेर लेती है और पीटने लगती है।

इस घटना को लेकर मणिनगर पुलिस स्टेशन के एक कर्मचारी ने बताया कि बड़ी संख्या में भीड़ दरगाह में इकट्ठी हुई और फिर बाद में भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर भारी मात्रा में पथराव करना शुरू कर दिया। इशानपुर पुलिस स्टेशन के इंसपेक्टर जेएम सोलंकी ने बताया कि दरगाह में नमाज के बाद दो से तीन हजार उपद्रवियों की भीड़ सड़क पर आई और पथराव करना शुरू कर दिया। बता दें कि इसमें जेएम सोलंकी भी घायल हो गए हैं।

शाह आलम इलाके में हिंसक प्रदर्शन पर अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर आशीष भाटिया ने कहा, “32 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हम FIR दर्ज कर रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य उपद्रवियों की भी शिनाख्त की जा रही है। इस हिंसक घटना में 19 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।”

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गुजरात के गृह राज्य मंत्री प्रदीप जड़ेजा ने कहा था, “आज अहमदाबाद में हिंसा की दो घटनाएँ सामने आईं हैं। इसके अलावा पूरे राज्य में शांति पूर्ण वातावरण है। करीब 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है। विडियो फुटेज के जरिए हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि गुरुवार को गुजरात बंद का ऐलान किया गया था। इस दौरान प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। हजारों की तादाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर गए और सड़क जाम कर दिया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद स्थिति और बेकाबू हो गई और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ी को धक्का दे दिया। पुलिस की गाड़ी पलटाने की भी कोशिश की गई। बाद में एहतियात बरतते हुए अहमदाबाद-पालनपुर हाइवे को बंद कर दिया गया।

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रामचंद्र गुहा को मुक्का किसने मारा? पुलिस ने धमकी दी या मार दिया? – शशि थरूर के Viral वीडियो का सच

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ 19 दिसंबर को देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन हुए। देश भर में लोग सड़कों पर उतरे, जबकि अधिकांश राज्यों में पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया और धारा-144 लगा दी। बेंगलुरु के प्रदर्शनकारियों में कर्नाटक के इतिहासकार रामचंद्र गुहा भी शामिल थे, जिन्हे कई अन्य लोगों के साथ पुलिस ने हिरासत में लिया था। गुहा को हिरासत में लेने वाली पुलिस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेज़ी के साथ घूम रहा है। इस वीडियो को फैलाते हुए कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि पुलिस ने हिरासत में लेते हुए उन्हें मुक्का मारने की धमकी दी थी, जबकि सच्चाई से इसका कोई लेना-देना नहीं है।

वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट

इस भ्रामक वीडियो को ट्वीट करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, “क्या यह पुलिसवाला अपने मुक्के से रामचंद्र गुहा को मारने की धमकी दे रहा है?” लेकिन, उन्होंने इस वीडियो की सच्चाई जानने की कोई ज़ेहमत नहीं उठाई। वो अब तक यही मानते हैं कि कर्नाटक पुलिस ने रामचंद्र गुहा को मुक्का दिखाया। इससे साफ़ पता चलता है कि वो शशि थरूर फर्ज़ी ख़बर के प्रचार-प्रसार के काम को कितनी मुस्तैदी के साथ करते हैं।

इसी तरह का भ्रम फैलाने की कोशिश पत्रकार रितुपर्णा चटर्जी ने भी की। उन्होंने अपने ट्वीट में मुंबई पुलिस, यूपी पुलिस और दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए लिखा कि हर जगह पुलिस प्रदर्शनकारियों को परेशान कर रही है। उन्होंने लिखा कि दिल्ली पुलिस के पुलिसकर्मी ने रामचंद्र गुहा को एक तरफ़ खींचने से पहले मुक्का बनाकर उन्हें धमकाया (एकदम बकलोल पत्रकार हैं यह साबित हो गया क्योंकि गुहा को बेंगलुरु में हिरासत में लिया गया है और वहाँ दिल्ली पुलिस क्या कर रही है, इसकी जानकारी इनके सिवा शायद किसी को नहीं।)। लेकिन, जब उन्हें इस वीडियो की सच्चाई पता चली तो उन्होंने माफ़ी माँग ली।

वहीं, रूपा सुब्रमण्या ने कर्नाटक सरकार पर तंज कसते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने बैंगलुरु में CAA और NRC के विरोध में धरना दिया। इस वीडियो में आप एक पुलिसकर्मी को उनके मुँह पर मुक्के मारने की मुद्रा में देख सकते हैं।

पत्रकार सैकत दत्ता ने ट्वीट कर लिखा कि एक पुलिसकर्मी रामचंद्र गुहा को मुक्का मारना चाहता है। लेकिन, बाद में जब इस वीडियो की सच्चाई उन्हें पता चली तो उन्होंने माफ़ी माँग ली।

इसी कड़ी में अनमोल रंजन ने भी रामचंद्र गुहा को दिल्ली पुलिस के पुलिसकर्मी द्वारा मुक्का मारे जाने का दावा किया। 

DMK के IT-विंग के डिप्टी सेक्रेटरी जो अपने ट्विटर हैंडल Isai से भ्रम फैलाते हैं, ने भी ट्वीट के ज़रिए भाजपा सरकार और पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की।

आइए अब आपको भ्रामकता फैलाने वाले इस वीडियो की असलियत से अवगत कराते हैं। यह बात सच है कि इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने CAA और NRC का विरोध किया था और उन्हें पुलिस हिरासत में ले लिया गया था। लेकिन, इसके आगे का सच वो नहीं है जिसका दावा कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर और वामपंथी पत्रकार कर रहे हैं। दरअसल, जिस मूवमेंट (पुलिसकर्मी के मुक्के की पोजिशन) में इस वीडियो का स्क्रीनशॉट लिया गया, उस दौरान वो पुलिसकर्मी अपनी पॉकेट में हाथ डाल रहे थे। इसमें रामचंद्र गुहा को मुक्का बनाकर धमकी देने जैसी कोई बात नहीं थी। 

ऊपर दिखाए गए पूरे वीडियो में आप देख सकते हैं कि पुलिसकर्मियों का रामचंद्र गुहा को हिरासत में लेने का जब वीडियो बनाया जा रहा था, तो ठीक उसी समय एक पुलिसकर्मी अपनी जेब में हाथ डालने जा रहा था और इसी मुद्रा का स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर यह भ्रम भैलाने की कोशिश की जाने लगी कि इतिहासकार रामचंद्र गुहा को विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी ने मुक्का मारने की धमकी दी, जबकि इसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।

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मुस्लिम होंगे देश से बाहर, सिर्फ धर्म के आधार पर लागू होगा NRC? द वायर फैला रहा झूठ: Fact Check

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहा है। कल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कर्नाटक के मंगलुरू, गुजरात के अहमदाबाद, मुंबई और राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। मैंगलोर में स्कूल-कॉलेजो में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

इस कथित विरोध प्रदर्शन के पीछे की मुख्य वजह ये है कि उन लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में सही से पता नहीं है और इसके पीछे कुछ मीडिया संस्थानों का भी हाथ है, जो कि इनके बीच भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं और झूठ फैलाते हैं। इसमें मीडिया संस्थान ‘द वायर’ भी शामिल है। ये लोग बस मुस्लिमों को भड़का रहे हैं और इनमें डर पैदा कर रहे हैं कि सभी मुस्लिमों को देश से बाहर कर दिया जाएगा।

The wire द्वारा पेश किया चार्ट

चार्ट में बताया गया है कि CAA लागू होने के बाद जब पूरे देश में NRC लागू होगा तो खुद को भारत का नागरिक साबित करने के लिए धर्म का प्रमाण पत्र दिखाना होगा। इसमें जो हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी पाए जाएँगे, उनके लिए देखा जाएगा कि वो किस देश से हैं? अगर वो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या फिर भारत से होंगे तो उन्हें वैध नागरिक माना जाएगा और नागरिकता दी जाएगी। वहीं इस चार्ट के अनुसार जो मुस्लिम होंगे, वो अवैध नागरिक होंगे। उन्हें वोट करने का अधिकार नहीं होगा, उन्हें डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा, उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। इसमें बताया गया है ये सारी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बनाई है।

द वायर ने इसमें दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह CAA और NRC के जरिए मुस्लिमों को नागरिकता से वंचित करना चाहती है। हालाँकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि ये चार्ट उन्होंने कहाँ से लिया है। उन्होंने जो चार्ट पेश किया है, वो किसी भी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है, क्योंकि सरकार ने तो इस तरह का कोई चार्ट जारी नहीं किया है।

द वायर ने ये भी नहीं बताया कि उसने किस आधार पर यह तय किया कि पूरे देश में NRC लागू होने का यही तरीका होगा। क्या इसके लिए सिर्फ धर्म ही एकमात्र आधार होगा। क्या इसके लिए आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र वगैरह जैसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी? पूरे देश में NRC लागू होने का क्या प्रोसेस होगा, इसके बारे में फिलहाल कोई नहीं जानता। खुद सरकार ने ऐसा कोई आधिकारिक डॉक्यूमेंट भी नहीं जारी किया है। लेकिन द वायर के बकलोल पत्रकार AC कमरे में बैठकर मनगढ़ंत रिपोर्ट लिखकर देश में बवाल करवाने पर उतारू है। असम में भी जिस प्रोसेस से NRC लागू हुआ है, वो प्रोसेस भी सुप्रीम कोर्ट का था। सुप्रीम कोर्ट ने जैसा कहा, वैसा ही वहाँ किया गया। ये पीएम मोदी और अमित शाह का तरीका नहीं था और अमित शाह ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा भी है कि NRC लागू करने में धर्म का कोई आधार नहीं होगा। जो घुसपैठिए हैं, उन्हें देश से बाहर निकाला जाएगा। इसे आप यहाँ पर सुन सकते हैं

नागरिकता कानून को NRC से जोड़कर देखने और फिर इसके नतीजे के बारे में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि NRC में धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और जो कोई भी एनआरसी के तहत इस देश का नागरिक नहीं पाया जाएगा, सबको निकालकर देश से बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ मुस्लिमों के लिए NRC नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कानून से देश के अल्पसंख्यकों को रत्ती भर भी नुकसान नहीं होने वाला है। उनकी सुविधा का खास ख्याल रखा जाएगा।

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नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ देश भर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में आतंकियों के स्लीपर मॉड्यूल सक्रिय हो चुके हैं। इनकी सक्रियता राजधानी दिल्ली में भी है। तोड़फोड़, आगजनी, पत्थरबाज़ी और दंगा भड़काने के मक़सद से इंडियन मुजाहिदीन और सिमी से जुड़े कट्टरपंथी आतंकी अपनी पूरी तैयारी के साथ नागरिकता क़ानून के खिलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों में शामिल हो चुके हैं। यह जानकारी ख़ुफ़िया एजेंसियों के माध्यम से मिली है, जिसकी पुष्टि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने की है।

अधिकारी के अनुसार, गुरुवार (19 दिसंबर) को हुए विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मेवात, नूंह और उसके आसपास क्षेत्रों से क़रीब 25 हज़ार लोग गाड़ियों के ज़रिए दिल्ली में दाखिल होकर प्रदर्शन में शामिल हुए। इसी के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस ने रात को ही गुड़गाँव बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर पुख़्ताा इंतज़ाम कर दिए थे। इसके अलावा, अतिरिक्त फ़ोर्स के साथ ही सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को राउंड पर लगाया गया था। यही वजह थी कि गुरुवार को कड़ी निगरानी के बीच गाड़ियों की आवाजाही होने दी गई।

अधिकारी ने बताया कि क़रीब 60 व्हाट्सएप ग्रुप, ट्विटर, फ़ेसबुक अकाउंट को सस्पेंड करने के लिए स्पेशल सेल ने प्रोवाइडर कंपनियों को लेटर लिखा है। विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनज़र गुरुवार को दिल्ली के कई इलाक़ों में इंटरनेट सेवा बंद कराई गई थी। इसके लिए स्पेशल सेल ने इंटरनेट और मोबाइल कंपनियों को एक दिन पहले ही सीक्रेट लेटर भेजा था, जिसका ख़ुलासा गुरुवार को हुआ।

ख़बर के अनुसार, सीक्रेट लेटर में चुछ चुनिंदा संवेदनशील इलाक़ों में इंटरनेट सेवाएँ बंद करने की बात कही गई थी। इस तरह का सीक्रेट लेटर, एयरटेल वोडाफोन, आइडिया, जियो, महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड, भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को भेजा गया था। इसमें नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से फैली अराजकता के मद्देनज़र क़ानून-व्यवस्था का हवाला दिया गया था।

एजेंसियों से कहा गया था कि 19 दिसंबर को सुबह 9 बजे से 1 बजे तक सभी सेवाएँ बंद रखी जाएँ। बंद की जाने वाली इन सेवाओं में कॉलिंग, SMS, वॉइस मैसेज और इंटरनेट सेवाएँ शामिल थीं। साथ ही उत्तर पूर्वी दिल्ली के जाफ़राबाद, सीलमपुर, मुस्तफ़ाबाद, साउथ ईस्ट दिल्ली के जामिया नगर, शाहीन बाग और हरियाणा की सीमा पर बवाना इलाक़े में भी संचार सेवाएँ बंद रखने को कहा गया था। पुलिस ने बताया कि यह क़दम ख़ुफ़िया जानकारी मिलने के बाद उठाया गया।

बता दें कि नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के विरोध में लगातार हो रहे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को कॉन्ग्रेस और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों द्वारा भड़काए जाने की बात भी सामने आई थी। इनमें कुछ व्हाट्सअप ग्रुप भी शामिल हैं, जो इन दंगों को हवा देने का काम कर रहे हैं।

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थाने में आग लगा लगा रहे थे, पुलिस की गोली से मारे गए 2 उपद्रवी, लखनऊ में भी 1 की मौत

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन में मंगलुरु और लखनऊ से प्रदर्शनकारियों के मरने की भी ख़बर आ रही है। जहाँ मंगलुरु में 2 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, लखनऊ में एक प्रदर्शनकारी की मौत हुई। सूचना के अनुसार, लखनऊ ट्रामा सेंटर में 24 वर्षीय मोहम्मद वकील की चोट की वजह से मौत हो गई। सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के कारण कई अन्य लोग भी घायल हुए हैं। यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि मोहम्मद वकील की मौत पुलिस फायरिंग से नहीं हुई है

डीजीपी ने बताया कि अभी स्पष्ट नहीं है कि उक्त प्रदर्शनकारी की मौत विरोध प्रदर्शन में हिंसा लेने के कारण हुई या फिर किसी और वजह से। उधर गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) की शाम मेंगलुरु हॉस्पिटल में भी दो लोगों के मरने की ख़बर आई है। ये दोनों मंगलुरु नार्थ पुलिस स्टेशन को आग के हवाले करने जा रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शन को हिंसक होते देख गोली चलाई और ये दोनों ही मारे गए। शुक्रवार को भी मंगलुरु के सभी स्कूलों व कॉलेजों को बंद रखा गया है।

इधर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में सीएए और एनआरसी को लेकर भड़काऊ पर्चे बाँट रहे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया। मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में बॉलीवुड के कई लोग सड़कों पर उतरे। उनके साथ हज़ारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। ये वही मैदान है, जहाँ महात्मा गाँधी ने ‘अंग्रेजों, भारत छोड़ो’ का ऐलान किया था। फरहान अख़्तर ने भी उपद्रवियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। गुजरात में उपद्रवियों का नेतृत्व कर रहे निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी को पुलिस ने हिरासत में लिया।

अहमदाबाद में भी प्रदर्शन हिंसक हो उठा और दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए। दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। एक पुलिसकर्मी को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। दिल्ली में विमान बोस और सूर्यकांत मिश्रा जैसे वामपंथी नेताओं ने रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। बंगलुरु में कई सिटी बसों का रूट बदल दिया गया तो कई बसों ने अन्य दिनों के मुकाबले कम ही ट्रिप लगाई। कई जगह भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिला।

मैं तनवीर अहमद, कर्नाटक पुलिस, भागो और छात्रों के भविष्य से मत खेलो: अधिकारी ने वामपंथी को खदेड़ा

“मेरा नाम तनवीर अहमद है। मैं कर्नाटक पुलिस का अधिकारी हूँ। आप अपने विरोध प्रदर्शन के लिए छात्रों का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। आपलोग यहाँ से जाओ। क़ानून का पालन करो। आप यहाँ लोगों को भड़का रहे हैं और उन छात्रों को बाद में इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। जाइए यहाँ से।”

ये शब्द हैं कर्नाटक पुलिस के इंस्पेक्टर तनवीर अहमद के, जिन्होंने मजहब के नाम पर नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर अपना उल्लू सीधा करने वाले वामपंथी नेताओं को आड़े हाथों लिया। दरअसल, कर्नाटक में एक महिला छात्रों को भड़का रही थीं, जिसपर अहमद ने उन्हें समझाया कि वो तो बच कर निकल जाएँगी, ये बेचारे छात्र बाद में फँस जाएँगे। अधिकारी ने अपना नाम इसीलिए बताया ताकि वहाँ उपद्रव की ताक में बैठे वामपंथियों को बता सकें कि मजहब के नाम पर लोगों को लड़ाना सही नहीं है।

पुलिस अधिकारी तनवीर अहमद ने उपद्रवियों के नेतृत्वकर्ता को सपाट शब्दों में कहा कि वो भड़का कर लोगों के भविष्य से न खेलें, ख़ासकर छात्रों के। पुलिस अधिकारी तनवीर ने उपद्रवी महिला वामपंथी को फटकारते हुए कहा- “छात्रों के करियर से मत खेलो। जाओ यहाँ से।” नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उक्त पुलिस ऑफिसर को वामपंथियों को फटकारते हुए देख सकते हैं:

मंगलुरु में उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। शहर में पहले ही 3 दिनों के लिए धारा-144 लागू कर दिया गया था। ये उपद्रवी सीएए को संविधान के विरुद्ध बता रहे थे। उपद्रवियों के बारे में ख़ास बात ये थी कि वो पहले से ही हेलमेट पहन कर पत्थरबाजी कर रहे थे, जिससे पता चल रहा था कि वो पूरी तैयारी के साथ आए हैं। आईआईएम के छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था लेकिन धारा-144 लागू होने के कारण उन्होंने इसे टाल दिया। राज्य में कई संगठनों ने सीएए के विरोध में प्रदर्शन किया।

‘मुस्लिम टोपी’ पहन भाजपा कार्यकर्ता तोड़फोड़ कर समुदाय विशेष को बदनाम कर रहे: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्षा ममता बनर्जी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के लिए मुस्लिम टोपियाँ ख़रीद रही है और वह कार्यकर्ता तोड़फोड़ करके सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचा रहे हैं, जिससे एक समुदाय विशेष को बदनाम किया जा सके। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को कोलकाता में एक रैली के दौरान यह बयान दिया है। देशभर के कई शहरों में नागरिकता क़ानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहा है और कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो रहे हैं।

इसके अलावा, ममता बनर्जी ने रैली में संबोधन के दौरान कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद हमें नागरिकता साबित करने की क्या ज़रूरत है। उन्होंने माँग की कि नागरिकता क़ानून और NRC पर जनमत संग्रह कराया जाए और इसे संयुक्त राष्ट्र मॉनिटर करे। ममता का कहना है कि जनमत संग्रह के बाद यह पता चल जाएगा कि किसकी जीत होगी और किसकी हार। इसके आगे ममता ने कहा, “मैं तुमको चुनौती देती हूँ देश को फेसबुक और सांप्रदायिक दंगों का इस्तेमाल कर विभाजित करने की कोशिश मत करो।”

यह कहना ग़लत नहीं होगा कि मोदी सरकार को अपने हर क़दम पर मिलने वाली कामयाबी ममता को एक आँख नहीं भाती। उन्होंने इतिहासकार रामचंद्र गुहा की गिरफ़्तारी पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह सरकार छात्रों और एक इतिहासकार से डर गई है, इसलिए ऐसे दमनकारी क़दम उठा रही है।

हाल ही में ममता बनर्जी ने कहा था, “मैं पश्चिम बंगाल में संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को कभी अनुमति नहीं दूँगी। यदि आप मेरी सरकार को बर्खास्त करना चाहते हैं, तो आप कर सकते हैं।” इस दौरान ममता बनर्जी ने सभी राज्यों के सीएम को एनआरसी और सीएए को लेकर संदेश दिया था। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार के सबका साथ सबका विकास नारे पर निशाना साधते हुए कहा था, “केवल बीजेपी यहाँ बचे और बाकी सब चले जाएँ, यही बीजेपी की राजनीति है। यह कभी नहीं हो पाएगा। भारत सभी का है। अगर सबका साथ नहीं रहेगा तो सबका विकास कैसे होगा? नागरिकता क़ानून किसके लिए है?”

ग़ौरतलब है कि रविवार (15 दिसंबर) को बंगाल के मुर्शिदाबाद, बीरभूम और उत्तर 24 परगना में हिंसक प्रदर्शन हुए। इन विरोध-प्रदर्शनों के चलते यातायात प्रभावित रहा और लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। हावड़ा 24 परगना और मुर्शिदाबाद के विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेनों को रोक दिया गया। इस बीच, मालदा और आसपास के ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद रही।

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