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पसमांदा मुस्लिमों की इतनी बातें, अब जान लीजिए बजट में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय को मिला कितना पैसा: वामपंथी रोना के बीच PMJYK से विकास

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी, 2023)  को अपना 5वाँ बजट और 2019 में दोबारा सत्ता में आई ‘मोदी सरकार 2.0’ का आखिरी पूर्ण बजट पेश किया। वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत आयकर की सीमा को 5 लाख रुपए से बढ़ा कर 7 लाख रुपए करने की घोषणा की। इसके साथ ही पूंजी निवेश परिव्यय (Capital Investment Outlay) में 33 प्रतिशत की भारी वृद्धि से लेकर 10 लाख करोड़ रुपए (1000000 करोड़) तक की कई घोषणाएँ की गईं।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Minority Affairs Ministry) को बुधवार को 2023-24 के केंद्रीय बजट में 3097.60 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के संशोधित आँकड़ों से 484.94 करोड़ रुपए अधिक है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 2023-24 के लिए पेश किए गए बजट में केंद्र ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए 3097.60 करोड़ रुपए आवंटित करने का प्रस्ताव रखा था। 

वित्त वर्ष 2022-23 में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए बजट अनुमान 5020.50 करोड़ रुपए था और बाद में संशोधित कर इसका आवंटन 2612.66 करोड़ रुपए कर दिया गया था। मंत्रालय को प्रस्तावित आवंटन में से 433 करोड़ रुपए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लिए और 1065 करोड़ रुपए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए है।

प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास) के लिए कुल 540 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो देश भर में अल्पसंख्यक और कारीगर समुदायों के कौशल, उद्यमिता और नेतृत्व प्रशिक्षण आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए एमओएमए (MoMA) की एक कौशल पहल (Skilling Initiative) है। बता दें कि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा पसमांदा मुस्लिमों के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ा रही है।

इसके अलावा, बजट में  प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJYK) के लिए 600 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह एक विशेष क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MCA) है जिसका उद्देश्य चयनित अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में विकास करना और कमियों को दूर करना है। प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के लिए बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (MSDP) को पुनर्गठित किया गया है और इसे नया रूप दिया गया है।

मदरसों में आधुनिक विषयों को शामिल करने, शिक्षक प्रशिक्षण और अल्पसंख्यक संस्थानों में स्कूल के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में बजट में 10 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वित्त वर्ष 2022-2023 में ‘मदरसों और अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा योजना’ के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि उससे एक साल पहले केंद्र ने इस पर 161.53 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा लगातार अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को फंड देने के बावजूद वामपंथी मीडिया अल्पसंख्यकों के लिए फंड में कटौती का रोना रोता रहता है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र ने पिछले साल अल्पसंख्यक मामलों के लिए 5000 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा (2300 करोड़ रुपए) अप्रयुक्त रह गया था। इस वर्ष, केंद्र ने अपने पिछले कार्यों से सबक लिया और 3097 रुपए आवंटित किए, जो चालू वित्त वर्ष के 2612.66 करोड़ रुपए (संशोधित अनुमान) की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक है।

‘बिकाऊ है BBC, PM मोदी पर प्रोपेगंडा डॉक्यूमेंट्री के लिए चीन से फंडिंग’: UK की मैगजीन का खुलासा – अमेरिका में प्रतिबंधित कंपनी से आ रहा पैसा

बीबीसी की विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री को लेकर बीजेपी सांसद और सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी (Mahesh Jethmalani) ने बड़ा दावा किया है। राज्यसभा सांसद जेठमलानी ने बीबीसी पर चीनी कंपनी से पैसा लेकर भारत विरोधी डॉक्यूमेंट्री बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मंगलवार (31 जनवरी, 2023) को ‘spectator.co.uk‘ की एक रिपोर्ट को ट्वीट करते हुए कहा, “बीबीसी इतना भारत विरोधी क्यों है? क्योंकि इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चीन की कंपनी हुआवेई (Huawei) से पैसों की सख्त जरूरत है (बीबीसी एक फेलो ट्रैवलर, कॉमरेड जयराम?)।”

जेठमलानी ने इस विवाद को ‘कैश-फॉर-प्रोपेगेंडा डील’ करार दिया है और बीबीसी को बिकाऊ बताया है। दिवंगत एडवोकेट राम जेठमलानी के बेटे महेश जेठमलानी ने अपने ट्वीट में चीन की जिस टेक्नोलॉजी कंपनी Huawei का नाम लिया है, वह पहले ही सुरक्षा चुनौतियों को लेकर संदेह के घेरे में रहा है।

महेश जेठमलानी द्वारा पोस्ट की गई ‘द स्पेक्टेटर रिपोर्ट’ का शीर्षक है- ‘बीबीसी अभी भी प्रतिबंधित हुआवै से पैसा ले रहा है।’ यह रिपोर्ट बीबीसी की संदिग्ध नई कॉर्पोरेट साझेदारी के बारे में बात करती है, उनमें से एक हुआवै के साथ है। यह चीन की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी है। इसे वर्ष 2019 में अमेरिका और 2020 में यूके ने 5जी नेटवर्क के लिए सुरक्षा चिंताओं को लेकर प्रतिबंधित कर दिया गया था।

अपने दूसरे ट्वीट में एडवोकेट ने कहा कि बीबीसी का भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है। 2021 में बीबीसी ने बिना जम्मू-कश्मीर के भारत का नक्शा जारी किया था। बाद में उसने भारत सरकार से इसके लिए माफी माँगी थी और नक्शे को सही किया था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के खिलाफ बनाई गई यह विवादित डॉक्यूमेंट्री भी उनके दुष्प्रचार का हिस्सा है।

उल्लेखनीय है बीबीसी ने ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई विवादित डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया है। इसको लेकर बीते दिनों केंद्र सरकार ने ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाने का आदेश जारी किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया था। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था।

इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे। यही नहीं, BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और जेएनयू (JNU) में काफी बवाल भी हुआ था।

कितना कमाते हैं आप, कितना देना होगा टैक्स, कितनी होगी बचत: सिंपल तरीके से समझिए, क्योंकि ₹7 लाख में ही नहीं सिमटा है गणित

मोदी सरकार ने मध्यमवर्ग को खुश करने वाला बजट पेश किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स में छूट की सीमा (Tax Exemption Limit को बढ़ाने की घोषणा की है। पहले यह सीमा 2.50 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ा कर 3 लाख रुपए कर दिया गया है। मतलब अब सालाना 3 लाख रुपए कमाने वाले को किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं देना होगा। दूसरी ओर सरकार ने टैक्स रीबेट सीमा (Tax Rebate Limit) को 5 लाख से बढ़ा कर 7 लाख कर दिया है।

इसका मतलब है कि सालाना 7 लाख रुपए तक कमाने वालों पर जो टैक्स बनेगा, उसे सरकार माफ़ कर देगी। आसान भाषा में कहें तो अगर आप सालाना 7 लाख रुपए तक कमाते हैं तो आपको सरकार को कोई टैक्स नहीं देना होगा। मध्यमवर्गीय लोग काफी दिनों से टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाने की माँग कर रहे थे। पहले सालाना 5 लाख रुपए तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना होता था।

वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री ने टैक्स स्लैब्स की संख्या को भी घटाने की घोषणा की है। अब छह टैक्स स्लैब को घटाकर पाँच कर दिया गया है। हालाँकि, यहाँ समझने वाली बात यह है कि मध्यमवर्गीय परिवार को यह राहत केवल नई टैक्स प्रणाली के तहत ही मिलेगा। पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने इसके साथ ही पुरानी टैक्स व्यवस्था के स्थान पर नई टैक्स व्यवस्था को डिफॉल्ट करने का ऐलान किया है।

नया टैक्स स्लैब (क्रेडिट-PIB)

वहीं इसे आसान भाषा में समझें तो सालाना 8 लाख रुपए तक कमाने वाले को पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत 65 हजार टैक्स देना पड़ता था, वहीं अब 35 हजार रुपए टैक्स के रूप में देना होगा। पुरानी व्यवस्था के तहत 9 लाख रुपए तक कमाने वालों को पहले 85,800 रुपए टैक्स के रुप में देने पड़ते थे, वहीं अब मात्र 40,800 रुपए देने होंगे। इस स्लैब के लोगों को सीधे-सीधे सालाना 45,000 रुपए तक का फायदा होगा। इसी तरह सालाना 20 लाख रुपए तक कमाने वालों को इस नई टैक्स व्यवस्था से लाभ होगा।

बजट भाषण दे रहीं थी निर्मला सीतारमण, ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूँजा सदन: 50 नए एयरपोर्ट, हेलीपोर्ट, एयरोड्रम बनाने का ऐलान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने आज संसद में अपना 5वाँ और देश का 75वाँ बजट पेश किया। जब वह बजट भाषण दे रही थीं, तब सदन मोदी-मोदी के नारों से गूँज उठा। मोदी-मोदी के नारों की गूँज के बीच भी वित्त मंत्री सीतारमण ने अपना भाषण जारी रखा।

उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार देश भर में रीजनल एयर कनेक्टिविटी (Regional Air Connectivity) पर विशेष फोकस करेगी। इस सेक्टर के इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में सरकार कई एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट्स का निर्माण करेगी।

उन्होंने कहा कि देश भर में 50 और नए एयरपोर्ट्स, हेलीपोर्ट्स, वाटर एयरोड्रम और एडवांस लैंडिंग ग्राउंट का पुनरुद्धार किया जाएगा। बजट में रेलवे के लिए 2.4 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वहीं अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हर वर्ष 10 हजार करोड़ रुपए की रकम जारी की जाएगी।

संसद में बजट (Budget2023) पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्तमान वर्ष के लिए देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान है। यह विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रही है।

निर्मला सीतारमण ने बजट की प्राथमिकताएँ बताते हुए कहा, “बजट 2023-24 में मेरी सरकार की प्राथमिकताएँ समावेशी विकास, बुनियादी ढाँचा और निवेश, क्षमता को उजागर करना, हरित विकास, युवा और वित्तीय क्षेत्र होगा। इसके अलावा बजट में किसानों के लिए श्री अन्न योजना शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके तहत बाजरा, ज्वार, रागी जैसे मोटे अनाज के उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।”

इस दौरान सीतारमण ने यह भी कहा कि 2014 से मोदी सरकार के प्रयासों ने सभी नागरिकों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया है। प्रति व्यक्ति आय दोगुनी से अधिक बढ़कर 1.97 लाख रुपए हो गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार दुनिया में 10वीं से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में बढ़ा है।

इसके अलावा बजट 2023 में महिलाओं, किसानों और शहरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों को भी मोदी सरकार ने बड़ी सौगात दी है। इस बजट में कहा गया है कि सालाना 7 लाख रुपए कमाई वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना होगा।

वहीं, महिलाओं के लिए नई बचत योजना की घोषणा की गई है, जिसमें उनको 2 लाख रुपए की बचत पर 7.5% का ब्याज मिलेगा। इसके साथ ही 3 वर्षों में 47 लाख युवाओं को सहायता प्रदान करने के लिए एक अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षुता योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण शुरू करने की घोषणा की गई है।

इनकम टैक्स, रेल, डिफेंस, महिला… मोदी 2.0 का आखिरी पूर्ण बजट, जानिए 10 बड़ी बातें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2023-24 के लिए आम बजट बुधवार (1 फरवरी 2023) को पेश किया। 2024 में आम चुनाव होने हैं। लिहाजा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह आखिरी पूर्ण बजट है। बजट में समाज के हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि बजट सप्तऋषि मंत्र पर आधारित है। इन सप्तऋषियों में समावेशी विकास, वंचितों को वरीयता, बुनियादी ढाँचे और निवेश, क्षमता विस्तार, हरित विकास, युवा शक्ति और वित्तीय क्षेत्र शामिल हैं।

जानते हैं बजट 2023-24 की 10 प्रमुख बातें

1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में बदलाव का ऐलान किया है। 7 लाख रुपए तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। इसके पहले यह सीमा पाँच लाख रुपए थी।

2. रक्षा क्षेत्र के लिए इस साल वित्त मंत्री ने 5.93 लाख करोड़ रुपए के आवंटन का ऐलान किया है। पिछले वर्ष (5.25 लाख करोड़) के मुकाबले इसमें करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। बजट में नए हथियारों की खरीद, सशस्त्र बलों (Armed forces) के आधुनिकीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलॉपमेंट और स्वदेसी हथियार निर्माण पर ध्यान दिया गया है।

3. बजट में भारतीय रेलवे के लिए 2.40 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। यह अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। वित्त मंत्री ने रेलवे में निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने की भी घोषणा की है।

4. निर्मला सीतारमण ने तीन करोड़ रुपए के टर्नओवर वाले माइक्रो उद्योग को टैक्स में छूट दिए जाने का ऐलान किया है।

5. इस बजट में जनजातीय समुदाय के लिए नई योजनाएँ शुरू करने का ऐलान किया गया। इसके लिए 15 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।

6. सरकार कौशल विकास 4.0 की शुरुआत करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 30 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर खोले जाएँगे।

7. निर्मला सीतारमण ने महिला सम्मान बचत पत्र के शुरुआत का ऐलान किया है। इसमें महिलाएँ दो साल तक दो लाख रुपए जमा कर सकेंगी, जिस पर सरकार की तरफ से 7.5 प्रतिशत का ब्याज दिए जाने की घोषणा की गई है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना की अधिकतम सीमा 15 लाख रुपए से बढ़ाकर 30 लाख कर दी गई है।

8. केंद्र सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले ऋण का दायरा बढ़ा दिया है। इस साल 20 लाख करोड़ तक का ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार ने कृषि के क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा स्टार्टअप शुरू करवाने पर फोकस किया है। स्टार्टअप शुरू करने वालों को सरकार की तरफ से मदद दी जाएगी।

9. लिथियम आयन (Lithium-iOn) बैटरी पर सीमा शुल्क (Custom Duty) को कम करने की घोषणा की है। जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम कम होंगे। पेश किए गए बजट 2023-24 में मोबाइल और टीवी के दाम कम करने का ऐलान भी किया गया है।

10. सिगरेट पर आकस्मिकता शुल्क (contingency fee) को 16 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि सिगरेट महँगी हो जाएगी। सिगरेट के अलावा शराब भी महँगी होने वाली है।

ऑस्ट्रेलिया में TikTok पर खालिस्तानी वीडियोज की भरमार, रेफरेंडम पर चल रहा है प्रोपेगंडा: SFJ एजेंडा को बढ़ाने में पाकिस्तानी पत्रकार भी आगे

प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रविवार (29 जनवरी, 2017) को तथाकथित रेफरेंडम 2020 मतदान का आयोजन किया। मतदान केंद्र पर एक भारत समर्थक समूह मतदान का शांतिपूर्ण विरोध करने पहुँचा था। हालाँकि, घटनास्थल पर मौजूद खालिस्तानी सिखों ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक खालिस्तानी सिखों के वीडियो से भर गया, जो मतदान की सफलता के बारे में लंबे-चौड़े दावे कर रहे थे। टिकटॉक भारत में प्रतिबंधित है।

ऑपइंडिया को कुछ ऐसे वीडियो मिले, जिन्हें टिकटॉक पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है। मुर्तजा अली शाह नाम का पाकिस्तान का एक लंदन स्थित रिपोर्टर सोशल मीडिया पर मतदान के वीडियो साझा करने वाले सबसे सक्रिय टिकटॉक उपयोगकर्ताओं में से एक था।

टिकटॉक पर तथाकथित जनमत संग्रह के सैकड़ों वीडियो सामने आए हैं (फोटो क्रेडिट: टिकटॉक)

उसके ट्विटर अकाउंट ‘मुर्तजा व्यूज (MurtazaViews)’ को ‘लीगल डिमांड’ की वजह से भारत में बंद कर दिया गया है। यह सर्वविदित तथ्य है कि पाकिस्तान खालिस्तानी तत्वों का समर्थन करता है और ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने कई मौकों पर पाकिस्तान से संपर्क किया और उसका समर्थन हासिल किया है।

मुर्तजा के ट्विटर अकाउंट को भारत में बंद किया गया है (सोर्स: ट्विटर)

मुर्तजा ने न केवल टिकटॉक, बल्कि इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर भी वीडियो पोस्ट किए हैं। सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो में से एक ऑस्ट्रेलिया में एक सिख महिला का है जिसने दावा किया कि 60,000 से अधिक सिख मेलबर्न में मतदान के लिए गए थे। वीडियो में उसने कहा, “हम खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए वोट देने आए थे। पुरुषों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित लगभग 60,000 सिखों ने जनमत संग्रह के लिए मतदान किया।”

वीडियो में वो आगे कहती है, “लगभग 15,000-20,000 लोग मतदान नहीं कर सके। उनका दिल टूट गया है। हम दूसरा मतदान दौर आयोजित करेंगे। सुबह छह बजे से शाम पाँच बजे तक सभी उत्साहित रहे। बहुत अच्छा अनुभव था।”

‘द ऑस टुडे (The Aus Today)’ के सह-संस्थापक डॉ अमित सरवाल ने इन दावों को खारिज करते हुए एक पोस्ट में कहा, “कहा जा रहा है कि 60 हजार खालिस्तानी मेलबर्न में फेडरेशन स्क्वायर में मतदान करने आए, जहाँ सुरक्षा के कारण अधिकतम क्षमता 10 हजार लोगों की ही है। पाकिस्तानी मीडिया द्वारा समर्थित फर्जी जनमत संग्रह, फर्जी विचारधारा।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, “केवल 28,800 सेकंड में 80,000 खालिस्तानियों ने मेलबर्न में मतदान किया। इस हिसाब से देखा जाए तो 2.77 खालिस्तानियों ने प्रति सेकंड एक ऐसे स्थान पर मतदान किया जहाँ आधिकारिक तौर पर केवल 10 हज़ार लोगों की अनुमति है।”

एक अन्य वीडियो में पगड़ी पहने एक महिला ने दावा किया कि भारत में सिखों के साथ भेदभाव होता है। उसने कहा, “बात यह है कि भारतीय सिखों के साथ अन्याय कर रहे हैं क्योंकि हमारे पास अधिकार नहीं हैं। जैसे मेट्रो में हमें 9 इंच से ज्यादा की कृपाण पहनने का अधिकार नहीं है, यही मुख्य बात है। पगड़ी जैसी और भी चीजें हैं… भारत में हमें पगड़ी की वजह से तंग किया जाता है। पंजाब में यह ठीक है, लेकिन पूरे भारत में हमें पगड़ी के कारण तंग किया जाता है।” महिला द्वारा किए गए दावे बेहद आपत्तिजनक हैं। भारत भर में, सिखों को राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाता रहा है।

मजेदार बात यह थी कि ऑस्ट्रेलिया और अन्य समुदाय के लोगों को ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ ने काम पर रखा गया था ताकि यह संकेत दिया जा सके कि ये समुदाय तथाकथित ‘जनमत संग्रह’ के पक्ष में हैं।

टिकटॉक पर शेयर किए गए एक वीडियो में एक बुजुर्ग महिला ने दावा किया, “जब विभाजन हुआ और अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए, तो भारतीय नेताओं ने सिखों से वादा किया था कि उन्हें एक स्वायत्त राज्य मिलेगा, लेकिन बाद में नेहरू ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने आगे दावा किया कि सिख भारत में अत्याचार और भेदभाव का सामना कर रहे हैं और यही कारण है कि वह खालिस्तान की माँग कर रहे हैं।”

खालिस्तान की माँग करने वाली बुजुर्ग महिला (साभार-TIKTOK)

उल्लेखनीय है कि खालिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया में भारत विरोधी गतिविधि बढ़ाई है और इसी क्रम में इस रेफरेंडम का आयोजन किया गया था। हाल ही में खालिस्तानियों ने वहाँ कई मंदिरों को भी निशाना बनाया है।

जिसकी बेटी PFI की जासूस, उसके परिवार पर ‘सेकुलरिज्म का पर्दा’ डाल रहा मीडिया: बार-बार बदल रही है बयान, वकील नूरजहाँ अब भी फरार

प्रतिबंधित इस्लामिक चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के लिए जासूसी के आरोप में मध्य प्रदेश की इंदौर कोर्ट से गिरफ्तार सोनू मंसूरी नाम की महिला को लेकर नए खुलासे हुए हैं। मंसूरी के मोबाइल में पुलिस को कई कॉल रिकॉर्डिंग मिली है, जिसमें उसके आकाओं की तरफ से निर्देश दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने वकील नूरजहाँ फरार है और उसके फ़्लैट को सील कर दिया गया है। उनके फोन नंबर की डिटेल निकाली जा रही है। उधर, पुलिस का कहना है कि पूछताछ में सोनू मंसूरी बार-बार अपना बयान बदल रही है। मंसूरी के घर वालों ने खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए सोनू को फँसाने की आशंका जताई है।

सोनू मंसूरी ने अपने पास से बरामद हुए 1.16 लाख रुपए के बारे में भी अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। कभी वह इन पैसों को नूरजहाँ के किसी क्लाइंट का बता रही है तो कभी वह किसी के द्वारा चेक बाउंस के केस के लिए दिए हुए बता रही है। पुलिस का कहना है कि वह बार-बार अपना बयान बदल रही है।

जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि सोनू मंसूरी को किसी रियाज़ नाम के व्यक्ति ने फ़्लैट दिलाया था। इस फ़्लैट में मंसूरी की पाटर्नर वर्षा नाम की एक लड़की थी। पुलिस ने रियाज़ और वर्षा को भी बुलाकर पूछताछ की है। वहीं, तरुण और मुकुंद नाम के व्यक्तियों से भी पूछताछ होने की जानकारी सामने आई है। सोनू मंसूरी की फ़्लैट पार्टनर वर्षा ने सोनू की PFI से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी होने से इंकार किया है।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, सोनू मंसूरी के मोबाइल से पुलिस को कई कॉल रिकार्डिंग मिली हैं। कुछ कॉल रिकॉर्डिंग मंसूरी ने डिलीट भी कर दी हैं। मोबाइल में मौजूद रिकॉर्डिंग में ज्यादातर ऐसी हैं जिसमें उसे ऊपर से निर्देश दिए गए हैं। इसमें से कुछ निर्देश फरार एडवोकेट नूरजहाँ के भी हैं।

बरामद रिकॉर्डिंग की संख्या 6 बताई जा रही है, जिसे पुलिस ने सबूतों के तौर पर पेन ड्राइव में सेव कर लिया है। पुलिस सोनू मंसूरी को नूरजहाँ के फ़्लैट पर भी ले गई थी। पुलिस का कहना है कि सोनू की रिमांड अवधि 1 फरवरी 2023 (बुधवार) को खत्म होने के बाद पुलिस कोर्ट से उनकी रिमांड अवधि बढ़ाने की माँग करेगी।

सोनू मंसूरी के भाई इक़बाल मंसूरी ने अपनी बहन को बेगुनाह बताते हुए उसकी गिरफ्तारी को साजिश बताया है। इकबाल का कहना है कि नूरजहाँ से पूछताछ के बाद असल सच सामने आएगा। वहीं, सोनू मंसूरी के परिवार वालों ने खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए हिन्दू त्योहार मनाने की भी बात कही।

उधर, इंदौर में हिन्दू संगठन से जुड़े पदाधिकारी सोहन विश्वकर्मा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि सोनू मंसूरी के परिवार द्वारा दिखाई जा रही धर्मनिरपेक्षता सिर्फ एक छलावा है। उन्होंने कहा कि सोनू मंसूरी PFI के इशारे पर देश विरोधी कार्यों में शामिल थी।

सोहन विश्वकर्मा ने फरार चल रही एडवोकेट नूरजहाँ के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि नूरजहाँ की हरकत से इंदौर में कई लोग वाकिफ हैं। अपनी छवि के चलते ही नूरजहाँ बार एसोसिएशन के चुनाव में बुरी तरह से हारी थी।

‘सुपर फ़ूड ‘श्री अन्न’ से छोटे किसानों-जनजातीय समाज को फायदा, ₹10 लाख करोड़ का निवेश’: PM मोदी ने ‘अमृत काल’ के बजट को बताया ऐतिहासिक

केंद्रीय वित्त मंत्री िर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी, 2023) को अगले वित्त वर्ष के लिए देश का आम बजट पेश किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह बजट विकसित भारत के विराट संकल्प को पूरा करने के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण करेगा, यह बजट वंचितों को वरीयता देता है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक बजट बताते हुए निर्मला सीतारमण और उनकी टीम को बधाई दी। मोदी सरकार इसे ‘अमृत काल का बजट’ बता रही है।

पीएम मोदी ने कहा PM-Vikas से हमारे करोड़ों ‘विश्वकर्माओं’ के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।उन्होंने ध्यान दिलाया कि गाँव से लेकर शहर तक में रहने वाली हमारी महिलाओं के जीवन स्तर में बदलाव लाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं, उन्हें अब और ताकत के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए एक विशेष बचत योजना भी इस बजट में शुरू की जा रही है। यह बजट सहकारिता को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बनाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “नए प्राइमरी कॉपरेटिव्स बनाने के लिए एक महत्वकांक्षी योजना का भी ऐलान इस बजट में किया गया है। आज जब मिलेट्स पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रहा है तो उसका सर्वाधिक लाभ भारत के छोटे किसानों के नसीब में है। अब इस ‘सुपर फूड’ को ‘श्री अन्न’ के नाम से एक नई पहचान दी गई है। ‘श्री अन्न’ से हमारे छोटे किसानों और किसानी करने वाले जनजातीय समाज के भाई-बहनों को आर्थिक सबल मिलेगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि वर्ष 2014 की तुलना में इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश पर 400% से ज्यादा की वृद्धि की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि इस बार इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 लाख करोड़ रुपए का अभूतपूर्व निवेश होगा। साथ ही बताया कि यह निवेश युवाओं के लिए रोजगार और एक बड़ी आबादी को आय के नए अवसर पैदा करेगा। बकौल पीएम मोदी, जीवन के हर क्षेत्र में भारत का मध्यम वर्ग एक प्रमुख धारा बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि समृद्ध और विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए मध्यम वर्ग एक बहुत बड़ी ताकत है और इस वर्ग को सशक्त बनाने के लिए हमने टैक्स रेट को कम किया है। पीएम मोदी ने अपील करते हुए कहा आइए, नए बजट के नए संकल्पों को लेकर चलें और वर्ष 2047 में समृद्ध भारत, समर्थ भारत और हर प्रकार से संपन्न भारत की यात्रा को आगे बढ़ाएँ। पीएम ने कहा कि हमें डिजिटल पेमेंट्स की सफलता को एग्रीकल्चर सेक्टर में दोहराना है।

‘रामचरितमानस धार्मिक ग्रंथ नहीं, इसे जलाया जाना चाहिए’: अब सपा के लालजी पटेल ने OBC-दलितों को उकसाया, स्वामी प्रसाद मौर्य का किया समर्थन

समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं द्वारा रामचरितमानस को अपमानित करने का सिलसिला जारी है। लालजी पटेल ने स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन करते हुए मंगलवार (31 जनवरी 2023) को श्रीरामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के लिए दलितों को उकसाया। उन्होंने कहा, “रामचरितमानस कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है। यह एक ऐसी किताब है, जिससे समाज में भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। यह पिछड़ी जाति और दलितों का अपमान करती है। इसे जलाया जाना चाहिए।”

उन्होंने पिछड़े वर्ग के लोगों को भी हिंदू त्योहार होली पर श्रीरामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के लिए उकसाया। पटेल ने कहा, “यह किताब धार्मिक ग्रंथ नहीं है। तुलसीदास जी ने अपना विचार व्यक्त किया था। हिंदू धर्म के प्रचार के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारा धर्म हिंदू सनातन धर्म है। सनातन धर्म हजारों, लाखों वर्ष पुराना धर्म है और तुलसीदास जी की यह किताब 500 साल पुरानी है। यह कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि समाज को बाँटने वाली एक पुस्तक है। यह पिछड़े वर्ग के लोगों और दलितों को अपमानित करती है। होलिका दहन पर रामचरितमानस की प्रतियों को जलाया जाना चाहिए। तभी पिछड़े वर्ग के लोगों और दलितों को उनका अधिकार मिलेगा।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पीजीआई कोतवाली क्षेत्र के वृंदावन योजना में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाने के मामले में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य और नौ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भाजपा नेता सतनाम सिंह लवी ने मौर्य और नौ अन्य के खिलाफ 142 (गैरकानूनी सभा), 295 (धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को अपवित्र करना), 153-ए (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295-ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया दुर्भावनापूर्ण कार्य) और 506 (आपराधिक धमकी) समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

इस मामले के नौ अन्य आरोपितों की पहचान देवेंद्र प्रताप यादव, यशपाल सिंह लोधी, सत्येंद्र कुशवाहा, महेंद्र प्रताप यादव, सुजीत यादव, नरेश सिंह, एसएस यादव, संतोष वर्मा और सलीम के रूप में हुई है। पुलिस ने सोमवार (31 जनवरी 2023) को इस मामले के 10 आरोपितों में से पाँच को गिरफ्तार कर लिया।

बता दें 29 जनवरी 2023 को लखनऊ के वृंदावन योजना में अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में रामचरितमानस की प्रतियाँ जलाई थीं। ओबीसी महासभा के एक सदस्य ने कहा था, “इसमें नारी शक्ति, शूद्रों, दलित समाज और ओबीसी समाज के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी हैं। हम इन टिप्पणियों को रामचरितमानस से निकलवाना चाहते हैं। जब निकाला जाएगा तभी ये विरोध प्रदर्शन शांत होगा। नहीं तो जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होगा।”

बैग पैक कीजिए और निकल जाइए, बजट में मोदी सरकार ने कर दी है व्यवस्था… आप देखेंगे अपना देश तो ऐसे बढ़ेगा रोजगार और अर्थव्यवस्था, केवडिया-काशी है गवाह

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (1 फरवरी, 2023) को अगले वित्त वर्ष के लिए देश का आम बजट पेश किया, जिसमें घरेलू पर्यटन को बढ़ाना देने के लिए भी एक योजना की चर्चा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ‘देखो अपना देश’ के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में क्रांति लाने जा रही है। इसके तहत जिन क्षेत्रों को पर्यटन स्थल को विकसित किया जाना है, वहाँ रोजगार और कमाई के अवसरों में वृद्धि का प्रयास किया जाएगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने संसद में अपने बजट अभिभाषण में स्पष्ट किया कि इसके तहत क्षेत्र विशेष में कौशल विकास और उद्यमिता का समन्वय स्थापित किया जाएगा। अर्थात, वहाँ के लोगों को इस लायक बनाया जाएगा कि वो बढ़ते पर्यटन का फायदा उठा सकें और साथ ही कुछ ऐसा नया शुरू कर सकें (अथवा पहले से जो कारोबार/व्यापार कर रहे हैं – उसे आगे बढ़ा सकें और समय के हिसाब से ढाल सकें), जिससे उनकी कमाई बढ़े, पर्यटकों की वृद्धि के साथ ही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर देश की जनता से कहते रहे हैं कि वो अपने देश में घूमे, इसे देखें। किसी से छिपा नहीं है कि भारत में पर्यटन की असीम संभावनाएँ हैं। जलीय क्षेत्र हैं, बड़े जंगल हैं, दुनिया की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला है, मैदान हैं, मंदिर हैं, किले हैं (मंदिर और किले यहाँ की उच्च आर्किटेक्चर वाली क्षमता को दिखाते हैं) और एक बड़े तटीय क्षेत्र में समुद्री बीच भी कई हैं। इस योजना का मुख्य केंद्र मध्यम वर्ग है, जिसे ‘देखो अपना देश’ के तहत अपने देश के अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीमावर्ती गाँवों के विकास पर भी जोर दे चुके हैं, क्योंकि उनके हिसाब से वो देश की आँख और कान होते हैं। सीमावर्ती गाँवों में पर्यटन बढ़ने के साथ ही वहाँ लोगों की जनसंख्या बढ़ेगी (वो वीरान नहीं होंगे, पलायन रुकेगा) और साथ ही नए कारोबारों के फलने-फूलने से विकास भी होगा। इससे पड़ोसी देशों के साथ भारत के रिश्ते भी सुधरेंगे और उस पार से होने वाली गड़बड़ियाँ स्वतः ही कम होंगी। इसी के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ विकसित किया गया था।

सीमावर्ती गाँवों में इसी के तहत बुनियादी विकास को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसी तरह पहले ‘स्वदेश दर्शन योजना’ भी शुरू की गई थी। ‘थीम आधारित पर्यटन’ भी इसी का एक हिस्सा है, अर्थात जो अलग-अलग पर्यटन सर्किट हैं वहाँ का एक अलग थीम हो। वो थीम, जो बाक़ी देश-दुनिया को इस तरफ लुभाए। पर्यटन को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 50 ऐसे गंतव्य स्थलों को तेज़ी से विकसित किया जाएगा, जहाँ पर्यटन आगे बढ़ सके।

अब बात करते हैं कि पर्यटकों के अनुभवों को अच्छा बनाने के लिए क्या किया जाएगा। स्पष्ट है, एक घरेलू पर्यटन अकेले या अपने परिवार-दोस्तों के साथ सी जगह जाएगा जो उसे लुभाएगा और जो सके बजट में हो। कोई अपना काम छोड़ कर छुट्टियाँ बिताने जाना चाहता है, ताकि उसे एक नया अनुभव मिले, आजकल अच्छे बैकग्राउंड के साथ तस्वीरों का भी ट्रेंड है। अतः, पर्यटकों के अनुभव को अच्छा बनाने के लिए भी इस बजट में प्रावधान हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि उस क्षेत्र तक पहुँचने के लिए प्रत्यक्ष कनेक्टिविटी (जैसे कि अच्छी सड़कें, राजमार्गों से जुड़ाव), वर्चुअल कनेक्टिविटी, टूरिस्ट गाइड और स्ट्रीट फ़ूड के अलावा पर्यटकों की सुरक्षा के उच्च मानकों को भी ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक क्षेत्र विशेष को इसके तहत एक ‘संपूर्ण पैकेज’ में विकसित किया जाना है। घरेलू ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी इसके तहत केंद्र में रहेंगे। सुरक्षा – ये मानक खासकर महिला पर्यटकों के लिए आवश्यक हैं।

भारत में कई ऐसे लोग भी हैं जो अच्छा कमाते हैं और विदेश घूमने जाते हैं, जो इस योजना के तहत बाहर न जाकर देश के भीतर ही घूमेंगे। होटल में रहने के दाम कम किए जाएँगे और साथ ही ट्रेवल के लिए जो ज़रूरी दाम हैं वो भी काम किए जाएँगे – क्योंकि तभी मध्यम वर्ग लुभेगा और अपना देश घूमेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को भी रफ़्तार मिलेगी। पर्यटन क्षेत्रों में जाने के लिए, खासकर एंट्री के लिए वो पैसे लगते हैं – उसे भी कम किया जाएगा।

इसका एक और बड़ा उद्देश्य है कि विविधताओं वाले एक विशाल देश में, जहाँ हर जगह की परंपराएँ और संस्कृतियाँ अलग-अलग हैं, उनसे लोगों को परिचित कराया जाए। पर्यटन क्षेत्र विशेष में जाकर वहाँ की परंपरा-संस्कृति को समझेंगे, वहाँ के उत्पाद खरीदेंगे और वहाँ से जुड़ी यादें अपने साथ लेकर जाएँगे। ऐसा इसीलिए, क्योंकि वहाँ के एडवेंचर और संस्कृति वाले गतिविधियों एवं क्रियाकलापों का वो हिस्सा बनेंगे।इस योजना की मार्केटिंग की भी व्यवस्था है।

पहले भी बताया गया था कि ‘देखो अपना देश’ के तहत अपने राज्य के बाहर के 15 स्थलों को 1 वर्ष के भीतर घूमने, ‘अतुल्य भारत’ की थीम का पालन करने और शपथ-पत्र भर कर इसे केंद्र सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करने पर इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार देगी। सभी राज्यों को भी पर्यटन के क्षेत्र में भागीदार बनाया जाएगा और ‘मिशन मोड’ में इसे आगे बढ़ाया जाएगा। वैसे भी पीएम मोदी खुद पात्यतन को लेकर गंभीर हैं।

याद कीजिए, पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के सरे कार्यक्रम नई दिल्ली में ही हुआ करते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्रेंड को बदला। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो बार भारत आए तो एक बार वो तमिलनाडु के महामल्ल्पुरम तो एक बार गुजरात के अहमदाबाद ले जाया गया। इसी तरह जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो अबे जब भारत आए थे तो उन्हें वाराणसी भ्रमण कराया गया। हाल ही में G20 शेरपाओं की बैठक उदयपुर में हुई। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सन्देश जाता है कि भारत में सिर्फ दिल्ली-मुंबई ही नहीं है, और भी बहुत सरे स्थल हैं।

वाराणसी और उज्जैन का कॉरिडोर बन गया है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। मथुरा कॉरिडोर विकसित होने की योजना जल्द शुरू होगी। केवडिया जैसे गुजरात के छोटे से गाँव में सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण से पूरे नर्मदा जिले की तस्वीर बदल गई। वाराणसी में पिछले 5 वर्षों में पर्यटकों की संख्या में 10 गुना इजाफा हुआ है। केवडिया में पहले एक साल में ही 29 लाख से अधिक पर्यटक पहुँचे थे।