Home Blog Page 2052

‘Huawei ही नहीं, चीन की 18 अन्य कंपनी से भी BBC को फंड’: महेश जेठमलानी ने भारत और PM मोदी विरोधी दुष्प्रचार पर फिर लताड़ा

बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री (BBC Documentary) पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी का कहना है कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने के लिए बीबीसी ने प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री बनाई है। उन्होंने BBC को भारत विरोधी और बिकाऊ बताया।

वरिष्ठ अधिवक्ता जेठमलानी ने इस मामले में गुरुवार (2 फरवरी 2023) को ‘deadline.com‘ की एक रिपोर्ट ट्वीट की। इसके जरिए उन्होंने बीबीसी (BBC) और हुआवै (Huawei) के बीच लेनदेन के सबूत माँगने वाले उसके भारतीय समर्थकों को जमकर लताड़ा। जेठमलानी ने आरोप लगाया कि हुआवै के अलावा, बीबीसी के 18 अन्य चीनी क्लाइंट ने भी भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए उसे भुगतान किया था।

उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा, “भारत में बीबीसी के समर्थक इस बात का सबूत माँगते हैं कि हुआवै का बीबीसी को फंडिंग करने का डॉक्यूमेंट्री से क्या लिंक है? सिर्फ हुआवै ही नहीं, बल्कि कम-से-कम 18 अन्य चीनी क्लाइंट भी भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए बीबीसी को भुगतान करते हैं! बीबीसी की आलोचना करते हुए लॉर्ड एल्टन एमपी कहते हैं, मैं उसकी दी हुई रोटी खाता हूँ, उसके गीत गाता हूँ।”

‘deadline.com‘ की रिपोर्ट के अनुसार, लॉर्ड डेविड एल्टन ने बीबीसी के महानिदेशक टिम डेवी को पत्र लिखकर माँग की है कि डेडलाइन के चीन से संबंध उजागर होने के बाद अपने ​कमर्शियल यूनिट बीबीसी स्टोरीवर्क्स की गतिविधियों की समीक्षा करे।

उन्होंने ​कहा कि बुधवार (1 फरवरी 2023) को प्रकाशित एक इन्वेस्टिगेशन में खुलासा किया गया कि बीबीसी के पत्रकारों के विरोध के बावजूद स्टोरीवर्क्स ने नौ सरकारी निकायों सहित कम-से-कम 18 चीनी ग्राहकों के साथ भागीदारी की है।

BBC स्टोरीवर्क्स ने चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क के यूके में प्रसारण पर प्रतिबंध लगने के बाद उसके लिए एक जबरदस्त विज्ञापन तैयार किया। इसके अलावा, स्टोरीवर्क्स अन्य ग्राहकों में चीन की सरकारी मीडिया समाचार एजेंसी सिन्हुआ और विवादास्पद दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी हुआवै शामिल थे।

गौरतलब है कि इससे पहले राज्यसभा सांसद जेठमलानी ने बीबीसी पर चीनी कंपनी से पैसा लेकर भारत विरोधी डॉक्यूमेंट्री बनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने मंगलवार (31 जनवरी, 2023) को ‘spectator.co.uk‘ की एक रिपोर्ट को ट्वीट किया था।

रिपोर्ट को ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा था, “बीबीसी इतना भारत विरोधी क्यों है? क्योंकि इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए चीन की कंपनी हुआवै (Huawei) से पैसों की सख्त जरूरत है (बीबीसी एक फेलो ट्रैवलर, कॉमरेड जयराम?)।”

जेठमलानी ने इस विवाद को ‘कैश-फॉर-प्रोपेगेंडा डील’ करार दिया था और बीबीसी को बिकाऊ बताया था। यही नहीं, एडवोकेट ने अपने दूसरे ट्वीट में बताया था कि बीबीसी का भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा कि साल 2021 में बीबीसी ने बिना जम्मू-कश्मीर के भारत का नक्शा जारी किया था। बाद में उसने भारत सरकार से इसके लिए माफी माँगी थी और नक्शे को सही किया था। पीएम मोदी के खिलाफ बनाई गई यह विवादित डॉक्यूमेंट्री भी उनके दुष्प्रचार का हिस्सा है।

उल्लेखनीय है बीबीसी ने ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई विवादित डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया है। इसको लेकर बीते दिनों केंद्र सरकार ने ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाने का आदेश जारी किया था।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया था। विदेश मंत्रालय ने इस डॉक्यूमेंट्री को भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था।

मुस्लिमों कैदियों की जमानत के लिए बजट में मोदी सरकार ने नहीं किया है कोई विशेष प्रावधान, मीडिया की भ्रामक रिपोर्टों का जानिए सच

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Fm Nirmala Sitharaman) ने बुधवार (1 फरवरी 2023) को केंद्रीय बजट पेश किया। बाद में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस बार पेश किए गए केंद्रीय बजट में मुस्लिम कैदियों की रिहाई और जमानत राशि में मदद देने का प्रावधान है। रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

ज़ी न्यूज़ (ZEE NEWS) में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि गरीब कैदियों के लिए केंद्र की नई योजनाओं से मुस्लिम कैदियों को मदद मिल सकती है। खबर की हेडिंग से लोग कन्फ्यूज हो गए।

इमेज क्रेडिट-जी न्यूज

जल्द ही, कई सोशल मीडिया यूजर्स मुस्लिम दोषियों को रिहा करने और उन्हें जमानत राशि प्रदान करने की रिपोर्ट को लेकर मोदी सरकार को घेरने लगे और सरकार पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का आरोप लगाया।

क्या केंद्रीय बजट 2023 मुस्लिम कैदियों को रिहा करने की बात करता है?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित केंद्रीय बजट 2023 में मुस्लिम कैदियों की जल्द रिहाई या उन्हें जमानत प्रदान करने के उद्देश्य से किसी विशेष योजना का प्रावधान नहीं है। वित्त मंत्री ने उन लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात कही है जो जेल का जुर्माना (Prison Penalties) और जमानत राशि देने में असमर्थ हैं। मंत्री ने कहा था, ”उन गरीब व्यक्तियों को सहायता पहुँचाई जाएगी जो जेलों में हैं और जुर्माना या जमानत राशि देने में असमर्थ हैं। उन्हें आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।”

यह घोषणा पिछले साल पीएम मोदी द्वारा की गई अपील के अनुरूप है। इस अपील में उन्होंने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के दौरान जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों से संबंधित मामलों को प्राथमिकता देने और मानवीय संवेदनाओं के आधार पर उन्हें कानून के अनुसार रिहा करने को कहा था। प्रधानमंत्री ने तब कहा था कि जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में  प्रत्येक जिले में मौजूद एक समिति मामलों की समीक्षा करेगा और जब भी संभव होगा जमानत के आधार पर पात्र कैदियों को रिहा किया जाएगा।

ब्रैम्पटन के गौरी शंकर मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को कनाडाई सांसद ने सदन में उठाया, कहा- देश में बढ़ रही हिंदूफोबिया और उससे जुड़े हमले

कनाडा के ब्रैम्पटन शहर (Brampton, Canada) में स्थित गौरी-शंकर मंदिर (Gauri Shankar Temple) की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने की घटना का वहाँ के सांसद ने हेट क्राइम बताया है। कनाडा में भारतीय मूल के सांसद चंद्र आर्य ने इस मामले को बुधवार (1 फरवरी 2023) को कनाडा की संसद में उठाया।

सांसद आर्य ने कनाडा की संसद में कहा, “कनाडा में बढ़ते हिंदूफोबिया से हिंदू कनाडाई बहुत दुखी हैं।” इसे एक ‘खतरनाक प्रवृत्ति’ बताते हुए उन्होंने कनाडा की सरकार से हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते हेट क्राइम को रोकने की अपील की। सांसद ने कहा कि हिंदूफोबिया हमले में बदल जाता है। उन्होंने इसके लिए एक अध्ययन का भी हवाला दिया।

इससे पहले मंगलवार (31 जनवरी 2023) को सासंद चंद्र आर्य ने कहा था, “ब्रैम्पटन में गौरी शंकर मंदिर पर हमला कनाडा में हिंदू और भारत विरोधी समूहों द्वारा हिंदू मंदिरों पर किए गए हमलों में सबसे नवीनतम घटना है।” उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर नफरत फैलाते-फैलाते अब बात मंदिरों पर हमले तक पहुँच गई।

टोरंटो में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने भी गौरी शंकर मंदिर पर हमले की घटना की निंदा की। दूतावास ने कहा कि मंदिर को तोड़-फोड़ से कनाडा में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों की ‘भावनाओं को ठेस पहुँची है’।

दूतावास ने ट्वीट में लिखा, “हम ब्रैम्पटन में भारतीय विरासत के प्रतीक गौरी शंकर मंदिर को भारत विरोधी चित्रों से विकृत करने की कड़ी निंदा करते हैं। बर्बरता वाले इस घृणित कृत्य से कनाडा में भारतीय समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। हमने कनाडा के अधिकारियों के साथ इस मामले पर अपनी चिंता जताई है।”

बता दें कि सोमवार (29 जनवरी 2023) को गौरी-शंकर मंदिर की दीवारों पर खालिस्तान समर्थकों ने ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिख दिए थे। इसके पीछे खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का हाथ होने का शक जताया जा रहा है। SFJ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इससे संबंधित एक वीडियो डाला था। 

पिछले साल भी कनाडा के एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। जुलाई 2022 में रिचमंड हिल में स्थित भगवान विष्णु मंदिर में लगी महात्मा गाँधी की मूर्ति को तोड़ दिया गया था। वही, सितंबर 2022 में कनाडा के स्वामीनारायण मंदिर को खालिस्तानी हमलावरों ने भारत विरोधी चित्र मंदिर की दीवारों पर बना दी थी। 

इतना ही नहीं, जनवरी 2022 में कनाडा में 10 दिनों के अंतराल में कई मंदिरों पर हमले किए गए थे। उपद्रवी दान पेटियों से नकदी, भगवान की मूर्तियाँ और उन्हें चढ़ाए गए आभूषण भी चोरी करके ले भागे थे। इन घटनाओं के बाद से ग्रेटर टोरंटो एरिया (जीटीए) में स्थित मंदिरों और वहाँ के हिंदुओं में भय का माहौल व्याप्त हो गया था।

मंदिरों को निशाना बनाने वाली ये घटनाएँ 15 जनवरी 2022 को ब्रैम्पटन में श्री हनुमान मंदिर में तोड़-फोड़ के साथ शुरू हुई थी। उसके बाद 25 जनवरी 2022 को ब्रैम्पटन में माँ चिंतपूर्णी के मंदिर को भी तोड़ दिया गया था। इसके बाद बाद गौरी शंकर मंदिर और जगन्नाथ मंदिर (दोनों ब्रैम्पटन में) पर हमला किया गया। मिसिसॉगा में हिंदू हेरिटेज सेंटर और हैमिल्टन समाज मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई।

बता दें कि हाल में सामने आए एक पॉपुलेशन स्टैटिस्टिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो दशकों में कनाडा की कुल आबादी में हिंदुओं की संख्या 1 प्रतिशत से बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है। लगभग 100 पहले कनाडा जाने से शुरू हुआ सफर आज भी जारी है। वहाँ हिंदुओं कि कुल आबादी 8.30 लाख है।

फतेहपुर में हिंदुओं को ईसाई बनाने का पैसा कहाँ से आया, किसको मिला, सब कुछ गवाह आईजेक फ्रेंक ने बताया: धर्मांतरण की साजिश के 38 और नाम उजागर किए

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से ईसाई धर्मांतरण की अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश हुआ था। इसके तार सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर टेक्नालॉजी एंड साइंस (शुआट्स) से भी जुड़े मिले हैं। अब शुआट्स के पूर्व बोर्ड मेंबर और सामूहिक धर्मांतरण के मामले के स्वतंत्र गवाह डॉ.आईजेक फ्रेंक ने शुआट्स के वाइस संचालर आरबी लाल समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कुछ और नाम उजागर किए हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए डॉ.आईजेक फ्रेंक ने कहा कि हजारों करोड़ की विदेशी फंडिंग के जरिए धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा था। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण के लिए पूरा गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। मामले को लेकर उन्होंने 38 अन्य लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने का निवेदन दिया है। फ्रेंक का दावा है कि उनके पास विदेशों से प्राप्त धन, भष्टाचार और धर्मांतरण को लेकर ठोस प्रमाण हैं। अपने आवेदन में उन्होंने आरोपितों के नाम और उनकी भूमिका के बारे में संक्षेप में बताया है। नीचे आप वह कॉपी देख सकते हैं।

डॉ.आईजेक फ्रेंक द्वारा दिया गया आवेदन

आवेदन के मुताबिक डॉ. आरिफ ए. ब्रडवे जो शुआट्स के बोर्ड सदस्य भी हैं उन्होंने लंदन और अमेरिकन चर्च ट्रस्ट से करोड़ों की धन उगाही की है। डेविड फिलिप को कनाडा से फंड मिलता था। डेविड रूरल एजुकेशन काउंसिल शुआट्स के संचालक हैं। विशाल मंगलवादी शुआट्स के पादरी हैं। उन पर विदेशों से धन प्राप्त करने और धर्मांतरण के लिए काम करने का आरोप लगाया गया है। इसी तरह के आरोप आवेदन में उल्लेखित अन्य नामों पर भी हैं।

डॉ.आईजेक फ्रेंक द्वारा दिया गया आवेदन

एफआईआर के लिए दिए गए निवेदन में प्रयागराज के पूर्व जिलाधिकारी भानुचन्द्र गोस्वामी और करछना के तहसीलदार सुशील कुमार चौबे जैसे नाम भी शामिल हैं। फ्रेंक ने इनपर रिश्वत लेकर मामले को दबाने का आरोप लगाया है। दावा है कि पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी का प्रयास नहीं कर रही है।

फ्रेंक ने पिछले दिनों सूचना अधिकार अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय में 77 पदों पर अनियमित तरीके से की गई भर्ती, धर्मांतरण, विदेशों से फंडिंग, एक्सिस बैंक से 24 करोड़ का घोटाला और शुआट्स के पदों पर गलत तैनाती के दौरान सरकार से ली गई तनख्वाह की रिकीवरी के साक्ष्य भेजकर कार्रवाई की जानकारी माँगी थी। डॉ.आईजेक फ्रेंक ने बताया कि मामले में गृह मंत्रालय ने प्रमुख सचिव को जाँच और कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

आपको बता दें शुआट्स में यीशु दरबार संचालित कर वाइस चांसलर आरबी लाल खुद चंगाई सभा करता था। इसके कई वीडियो सामने आए थे। प्रतिष्ठित संस्थान का वाइस चांसलर पादरी बन लोगों को झाड़-फूँक कर धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता था। इतना ही नहीं ईसाई धर्मांतरण के लिए के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और पाकिस्तान तक से करोड़ों की फंडिंग की बात भी सामने आई है।

मामले में 20 जनवरी, 2023 को सुल्तानपुर जिले के गोसाईंगज के रहने वाले सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने शुआट्स के वाइस चांसलर आरबी लाल समेत 10 नामजद और 50 अज्ञात के खिलाफ धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज कराया था। सर्वेंद्र ने आरोप लगाया था कि ईसाई बनने के बदले संस्था की तरफ से उन्हें 15 हजार रुपए देने और साथ ही सुंदर लड़की से शादी करवाने का प्रलोभन दिया गया था।

सिंगापुर पर हमला करने वाला था 18 साल का मोहम्मद इरफान: काफिरों को छुरा घोंपने और आत्मघाती हमले का था प्लान, ISIS से है जुड़ा

सिंगापुर (Singapore) में सुरक्षाबलों ने क्रूर आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट (ISIS) का समर्थन करने और हमलों को अंजाम देने की योजना बनाने का आरोप में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। हिरासत में लिए गए संदिग्ध की उम्र 18 साल है।

गिरफ्तार किए गए युवक का नाम मोहम्मद इरफ़ान दानयाल बिन मोहम्मद नोर है। मोहम्मद इरफ़ान दानयाल बिन मोहम्मद नोर देश में इस्लामिक खिलाफत स्थापित करना चाहता था। वह इसके लिए ISIS के समर्थन में सशस्त्र हिंसा की योजना बना रहा था।

गृह मंत्रालय ने बुधवार (1 फरवरी 2023) को कहा कि मोहम्मद इरफान छात्र है और वह ISIS के ऑनलाइन प्रोपगेंडा का लगातार इस्तेमाल करता था। इसके बाद वह कट्टरपंथी बन गया। अधिकारियों को जब विश्वास हो गया कि वह आतंकी समूह से जुड़ा हुआ है तो सुरक्षा खतरे को देखते हुए उसे दिसंबर 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया था।

मंत्रालय ने कहा कि मोहम्मद इरफान अंधेरी गलियों में ‘काफिरों’ को छुरा घोंपकर मारने की योजना बनाई थी। इसके साथ ही उसने सैन्य अड्डे पर हमला करने और देश में बम ब्लास्ट करने के लिए वह आतंकियों की ऑनलाइन भर्ती का प्रयास कर रहा था। उसने एक कब्रिस्तान को उड़ाने के लिए बम भी बनाया था। कब्रिस्तान को वह गैर-इस्लामिक मानता था।

इतना ही नहीं, मोहम्मद इरफान ने पिछले साल अगस्त में राष्ट्रीय दिवस पर सिंगापुर के कोनी द्वीप पर अल-कायदा से प्रेरित होकर खुद के द्वारा बनाया गया एक झंडा लहराया था। वह उसे ISIS शासित प्रांत घोषित करना चाहता था। वह पर्याप्त धन जमा करने के बाद हिंसा करने के लिए विदेश यात्रा की भी योजना बना रहा था।

सिंगापुर के कानून और गृह मामलों के मंत्री के. शनमुगम (K. Shanmugam) ने कहा, “गिरफ्तारी के समय वह हिंसा करने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहा था।” इरफान साल 2020 से इस्लामी चरमपंथियों का Youtube पर तकरीर सुना करता था।

बता दें कि पिछले दो वर्षों में सिंगापुर में हमलों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया यह तीसरा कट्टरपंथी है। इसके पहले साल 2020 और साल 2021 में एक-एक आतंकियों को सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार किया था। दोनों आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

साल 2020 में सिंगापुर के सुरक्षाबलों ने 16 साल के एक लड़के को गिरफ्तार किया था। वह न्यूजीलैंड (New Zealand) में मुस्लिम धर्म के मानने वाले लोगों के नरसंहार से प्रभावित होकर सिंगापुर में हमला करने की योजना बनाई थी। इसके बाद साल 2021 में 20 साल के एक मुस्लिम लड़के को गिरफ्तार किया गया था। वह यहूदियों को छुरा घोंपकर मारने की योजना बना रहा था।

भारत घूमने आई थी 64 साल की अमेरिकी महिला, 34 साल के मेहराज ने किया रेप: पुदुच्चेरी की घटना

भारत घूमने आई एक अमेरिकी महिला से पुदुच्चेरी में रेप का मामला सामने आया है। आरोपित मेहराज-उल-अशकीन भट को गिरफ्तार कर लिया गया है। वह 34 साल का है और एक बुटीक चलाता है। यहीं उसकी 64 साल की पीड़िता से दोस्ती हुई थी।

ओडियानसलाई पुलिस ने बुधवार (1 फरवरी 2023) को बताया, मेहराज पिछले आठ महीनों से बुसी गली में बुटीक चला रहा था। वह जनवरी के पहले सप्ताह में पीड़िता से मिला था। मेहराज और महिला ने एक-दूसरे के संपर्क में रहने के लिए फोन नंबर भी शेयर किया था। इस बीच महिला तमिलनाडु भी गई। जब वह वापस पुदुच्चेरी लौटी तो दोनों एक रात डिनर पर मिले।

पुलिस के मुताबिक 30 जनवरी को वो महिला के साथ उसके कमरे पर गया। यहाँ पहले दोनों ने सहमति से शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद महिला ने उसे संबंध बनाने से मना किया। पुलिस के अनुसार मेहराज ने महिला की एक नहीं सुनी और बलात्कार कर वहाँ से चला गया। अगली सुबह महिला के प्राइवेट पार्ट में दर्द हुआ। उसने उससे अस्पताल जाने के लिए मदद माँगी। आरोपित ने उसकी मदद करने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला खुद अस्पताल गई। डॉक्टरों ने उसके प्राइवेट पार्ट पर चोट के निशान पाए और पुलिस को सूचित किया। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (बलात्कार के लिए सजा) के त​हत एफआईआर दर्ज कर मेहराज को गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2022 में गोवा घूमने आई एक रूसी महिला के साथ होटल के कमरे में रूम बॉय शकील और सैनुद्दीन को बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपित नेपाल के बर्दिया के रहने वाले थे। गोवा पहुँचने के पहले ही दिन उन्होंने महिला के साथ हैवानियत की थी। महिला अपने 2 दोस्तों के साथ होटल में ठहरी हुई थी। गोवा में कई पर्यटक स्थलों की सैर के बाद जब वह शाम के समय अपने होटल में पहुँची, तभी दोनों ने मौका पाकर उसके साथ रेप किया।

इसी तरह साल फरवरी 2020 में अपने बच्चे से मिलने केरल आई विदेशी महिला के साथ इंसाफ और अंसारुद्दीन ने बलात्कार किया था। 46 वर्षीय विदेशी महिला एमजी रोड पर स्थित एक होटल में ठहरी थी, जहाँ मोहम्मद इंसाफ और अंसारुद्दीन भी रुके थे। यहीं इन दोनों ने पूरी घटना को अंजाम दिया था।

मोहम्मद खान ने हिंदू राजा को रात्रिभोज पर बुलाया, हत्या कर बना दिया इस्लाम नगर: 308 साल बाद फिर से कहलाएगा जगदीशपुर

मध्यप्रदेश के भोपाल से 14 किलोमीटर दूर एक गाँव ‘इस्लाम नगर‘ अब ‘जगदीशपुर’ नाम से जाना गया जाएगा। केंद्र सरकार ने गाँव का नाम बदलने की अनुमति दे दी है। पिछले 30 सालों से इसे आधिकारिक रूप से जगदीशपुर बनाने की कोशिश की जा रही थी, जिसके लिए समय-समय पर कोशिशें होती रहीं। लोगों का ऐसा मानना रहा कि जो जगदीशपुर कभी मुगल आक्रांताओं के धोखे से खून में लाल होकर इस्लाम नगर हुआ उसका नाम जगदीशपुर हो जाए तो वही बेहतर है।

30 सालों से हो रही थी इस्लाम नगर का नाम जगदीशपुर रखने की माँग

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि इस्लाम नगर का नाम वापस जगदीशपुर करने के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव पारित कर चुकी है जिसके बारे में 1993 में एक प्रतिवेदन में बता दिया गया था। पत्र में साफ था कि सभी ग्रामवासी गाँव का नाम बदलना चाहते हैं ताकि वहाँ तनाव की स्थिति न हो। ग्रामवासियों में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल है। इसके बाद साल 2008 में भी इस संबंध में एक प्रस्ताव को राज्य सरकार ने सहमति दी थी लेकिन तब कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार से इसके लिए एनओसी नहीं मिल पाई।

2014 में फिर केंद्र से एनओसी माँगी गई और 2021 में जाकर गृह मंत्रालय की ओर से सितंबर में एनओसी जारी कर दी गई। इसी क्रम में अब इस्लाम नगर का नाम जगदीशपुर किया गया। इस संबंध में मध्यप्रदेश के राजस्व विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई। लोगों ने इस फैसले के बाद यही कहा कि इस गाँव की पहचान हमेशा जगदीशपुर ही थी। गाँव के सभी लोग ये नाम चाहते थे।

खून से नदी लाल करके बदला गया था जगदीशपुर का नाम

मालूम हो कि जिस जगदीशपुर को दोबारा जगदीशपुर बनाए जाने की जद्दोजहद 30 सालों से चल रही थी, उसका इतिहास जितना सुनहरा है उतना ही रौंगते खड़े करने वाला भी। आज भी इस जगह पर 11वीं सदी के परमार कालीन मंदिर के पत्थर मिलते हैं। इसके अलावा यहाँ एक गोंड महल भी है। गोंड शासन के बाद इस जगह पर राजपूतों का राज रहा। मगर 1715 में औरंगजेब के सैनिक दोस्त मोहम्मद खान ने धोखे से उनपर प्रहार कर दिया और जगदीशपुर को इस्लाम नगर बना कर रख दिया।

बताते हैं कि जब दोस्त मोहम्मद खान ने राजपूतों पर वार किया तो उनके खून से एक नदी लाल हो गई थी और उसके बाद से उसका नाम हलाली नदी (Halali Damn) पड़ गया। आज कई हिंदूवादी नेता इस नदी का नाम बदलने की कोशिशों में लगे हुए हैं क्योंकि ये नाम याद दिलाता है कि कैसे मित्रता का हाथ बढ़ाकर राजाओं का गला रेता गया।

दोस्त मोहम्मद खान ने भोज पर बुलाकर रेता राजपूतों का गला

बात सन् 1715 की है। जगदीशपुर के राजा देवरा चौहान का नाम पूरे भोपाल में होने लगा था। धीरे-धीरे दोस्त खान तक बात पहुँची और उसने दोस्ती का षड्यंत्र रचा। इसके बाद जगदीशपुर के राजा के आगे मित्रता का हाथ बढ़ाया गया, फिर उन्हें बेस नदी के किनारे भोज पर निमंत्रण दिया गया।

जब राजा ने ये निमंत्रण स्वीकारा तो दोनों तरफ के 16-16 लोग बेस नदी के किनारे भोज पर मिले। खाना आरंभ हुआ तभी दोस्त मोहम्मद खान पान खाने के बहाने वहाँ से निकला और टेंट काटकर उन सभी लोगों का गला रेत डाला जो वहाँ बैठकर भोज कर रहे थे। इस तरह दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर कब्जा किया और उसका नाम इस्लामनगर कर दिया गया।

दोस्त मोहम्मद खान को बताया जाता है- भोपाल का निर्माता

कुछ लोग ऐसे क्रूर दोस्त मोहम्मद खान को भोपाल का निर्माता बताते हैं। वहाँ के ऐतिहासिक धरोहरों का श्रेय उसको देते हैं, मगर हकीकत क्या है ये मात्र हलाली नदी और इस्लाम नगर जैसे नामों के इतिहास के पता किया जा सकता है। समय के साथ इसी इस्लाम नगर को जगदीशपुर बनाने की माँगे हमेशा उठीं क्योंकि लोगों ने कभी भुलाया ही नहीं कि किस प्रकार हिंदुओं के कत्लेआम के बाद गाँव का नया नामकरण हुआ। लोगों को जितना जगदीशपुर के इस्लामनगर बनने की कहानी के बारे में पता चलता था उतना ही वह इस बात को कहते थे कि जल्द से जल्द ग्राम का नाम बदला जाना चाहिए। तमाम प्रयासों के बाद 308 साल बाद ये संभव हो पाया कि जगदीशपुर दोबारा जगदीशपुर बना।

दंगे की साजिश, मनी लॉन्ड्रिंग और PFI से संबंध: कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन को जमानत, 28 महीने बाद जेल से आया बाहर

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हिंसा भड़काने के आरोप में पिछले लगभग 28 महीनों से जेल में बंद केरल निवासी सिद्दीक कप्पन गुरुवार (2 फरवरी 2023) को जेल से रिहा गया। कप्पन को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) और आईटी एक्ट समेत अन्य सभी मामलों में पहले ही जमानत मिल गई थी। अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जमानत मिल गई है।

कप्पन पर प्रतिबंधित इस्लामी चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के साथ संबंध के आरोप हैं। केरल के मलप्पुरम निवासी सिद्दीक कप्पन को मथुरा पुलिस ने 5 अक्तूबर 2020 को गिरफ्तार किया था। कप्पन पर हाथरस मामले में हिंसा भड़काने की साजिश रचने के आरोप है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2022 को सिद्दीक कप्पन को सशर्त जमानत दी थी। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद PMLA कोर्ट के विशेष न्यायाधीश संजय शंकर पांडे ने कप्पन को एक-एक लाख रुपए की दो मुचलके पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। 

कप्पन की ओर से गत 9 जनवरी को जमानतनामा कोर्ट में दाखिल किए गए थे। इस पर कोर्ट ने जमानतदारों का सत्यापन कराने का आदेश दिया था। बुधवार (1 फरवरी 2023) को जमानतदारों और दस्तावेजों का सत्यापन हो गया। इसके बाद कोर्ट ने आरोपित को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

जिला जेल के जेलर राजेन्द्र सिंह ने बताया कि बुधवार (1 फरवरी 2023) की रात लगभग 8 बजे कप्पन की रिहाई का आदेश जेल पहुँचा था। इसके बाद कानूनी औपचारिकताएँ पूरी कर उसे सुबह रिहा कर दिया गया। कप्पन ने इसे अपनी जीत बताया है।

सिद्दीक कप्पन को शांति भंग करने के आरोप में तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सांप्रदायिक हिंसा की साजिश रचने के आरोप में उस पर UAPA लगाया गया था। पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उसे लंबित मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले को छोड़कर सभी मामलों में जमानत दे दी थी।

अक्टूबर 2022 में लखनऊ की सेशन कोर्ट ने PMLA कोर्ट में उसकी जमानत की याचिका को खारिज कर दी। हालाँकि, दिसंबर 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उसे जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि सह-अभियुक्त अतिकुर रहमान के खाते में 5000 रुपए हस्तांतरण करने के अलावा और कोई लेनदेन उसके खाते में नहीं हुई।

गौरतलब है कि साल 2020 में हाथरस में एक दलित लड़की की हत्या हो गई थी। इसको लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बवाल हुआ था। उस दौरान कप्पन भी अपने साथियों के साथ हाथरस जा रहा था, लेकिन रास्ते में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। कप्पन के साथ अतीकुर्रहमान, आलम और मसूद को गिरफ्तार किया गया था।

पूछताछ के बाद यह खुलासा हुआ था कि उनकी हाथरस में दंगा फैलाने की साजिश थी। इसके बाद यूपी पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ 5000 पन्नों की चार्टशीट अदालत में पेश की थी। चार्जशीट में यूपी एसटीएफ ने हाथरस में दंगों की साजिश का खुलासा किया था। चार्जशीट के मुताबिक, कप्पन दंगों का थिंक टैंक और पीएफआई के स्टूडेंट विंग का सदस्य रउफ शरीफ दंगों की साजिश और फंडिंग में शामिल था।

‘भारत में पूरी तरह बैन हो BBC, डॉक्यूमेंट्री की हो NIA जाँच’: सुप्रीम कोर्ट में PIL, कहा- विकास हजम नहीं हो रहा, चला रहे अपना एजेंडा

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें बीबीसी को भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित करने की माँग की गई है। साथी ही ब्रिटिश मीडिया कंपनी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री और इसमें शामिल पत्रकारों की NIA जाँच की माँग की गई है।

याचिका हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और बीरेंद्र कुमार सिंह ने अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से दायर की है। कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का समग्र विकास हो रहा। यह भारत विरोधी लॉबी खासकर बीबीसी को हजम नहीं हो रहा। देश की शांति और अखंडता को प्रभावित करने के इरादे से वह अपना एजेंडा चला रही है।

याचिका में बीबीसी के कई भारत विराधी लेखों का भी उल्लेख किया गया है। इनके जरिए बीबीसी पर भारत और भारत सरकार विरोधी दुष्प्रचार का आरोप लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया-द मोदी क्वेश्चन’ पर बैन को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर 6 फरवरी 2023 को सुनवाई करने के लिए शीर्ष अदालत राजी भी हो चुका है।

दरअसल, इस प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री में BBC ने गुजरात दंगों का दोष वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर डालने की कोशिश की है। यही नहीं, उनकी छवि इस्लाम विरोधी भी दिखाने की कोशिश की है। दो पार्ट में बनाई गई BBC की इस सीरीज में प्रधानमंत्री मोदी और भारत के मुस्लिमों के बीच तनाव की बात कही गई है। बीबीसी ने मोदी सरकार के देश के मुस्लिमों के प्रति रवैए, कथित विवादित नीतियाँ, कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने और नागरिकता कानून को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

इस डॉक्यूमेंट्री की कई जगहों पर वामपंथी, कॉन्ग्रेसी और इस्लामी संगठन जबरन स्क्रीनिंग भी कर चुके हैं। इसके कारण पिछले दिनों देश के कई यूनिवर्सिटी से विवाद की खबरें भी आईं थी। इनमें जेएनयू, जामिया, हैदराबाद यूनिवर्सिटी, पुदुच्चेरी यूनिवर्सिटी जैसे शिक्षण संस्थान शामिल हैं।

अनुराग कश्यप को घर से भगा चुकी है बीवी: बॉलीवुड डायरेक्टर ने याद किए ‘दारूबाजी’ वाले दिन, कहा- मैं हताश था, सिस्टम के लिए गुस्सा था

फिल्म मेकर अनुराग कश्यप ने हाल में खुलासा किया है कि कैसे उनकी शराब पीने की आदत के कारण एक दफा उनकी पत्नी आरती बजाज ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था। उस समय उनकी बेटी आलिया सिर्फ 4 साल की थी। अनुराग बताते हैं कि करियर में उतार-चढ़ाव के कारण वह शराब पर आश्रित हो गए थे।

उन्होंने मैशेबल इंडिया से बात करते हुए उस दौर को याद किया जब उनके जीवन का सबसे बुरा वक्त चल रहा था। उन्होंने खुद को उभारने के लिए शराब को सहारा बनाया। वह बताते हैं, “मैंने खुद को कमरे में बंद किया और उसी के बाद से शराब पीने की शुरुआत हुई…मैं डेढ़ साल तक बहुत ज्यादा पीता था। आरती ने मुझे घर से बाहर कर दिया था। मेरी बेटी तब 4 साल की थी। ये बहुत कठिन समय था। मैं हताश था।”

अनुराग कश्यप ने कहा, “पाँच और ब्लैक फ्राइडे नहीं चल पाईं, ऑल्विन कालीचरण भी ठप हो गईं। एक और फिल्म जिसके बारे में कोई नहीं जानता था वो भी नहीं चली थीय़ मुझे तेरे नाम (2003) और कांटे (2002) से बाहर कर दिया गया था। मैं पीता था और ये सारी लड़ाइयाँ लड़ता था। मैंने जिन प्रोजेक्ट्स को लिखा था और जिनका मैं हिस्सा था, उन परियोजनाओं से मुझे अनायास ही निकाल दिया गया था। वह एक बहुत बुरा दौर था, जिसकी वजह से इंडस्ट्री और सिस्टम के लिए गुस्सा बढ़ गया था।”

इस इंटरव्यू में उन्होंने उस बॉम्बे में आने के बाद अपने शुरुआती दिनों का भी जिक्र किया जब उन्हें फुटपाथ पर 6 रुपए देकर सोना पड़ता था और एक थिएटर में अपना सूटकेस रखकर सर्वाइव करना पड़ता था।

उल्लेखनीय है कि अनुराग कश्यप ने अपने करियर की शुरुआत पाँच फिल्म से की थी। फिल्म सेंसरशिप के चलते कभी भी चल नहीं पाई । बाद में ब्लैक फ्राइडे (2004) बनाई तो वो भी नहीं चली। 2007 में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने उसे रोक दिया। इसी तरह नो स्मोकिंग को भी बहुत फजीहत मिली। अनुराग कश्यप के करियर में उछाल देव-डी के बाद आया

बता दें कि बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप पिछले कुछ सालों से मीडिया सुर्खियों में रहे। पहले उनके ऊपर पायल घोष ने यौन शोषण का इल्जाम लगाया और उसके बाद उनकी फिल्म बॉयकॉट का ट्रेंड चलता रहा। उनके ऊपर पुलिस मुकदमा भी हुआ जिसके कारण अनुराग को कई बार पुलिस थाने के चक्कर काटने पड़े। इसके बाद उनका नाम टैक्स चोरी में भी उछला। बाद में दोबारा के प्रमोशन के वक्त वह भी चर्चा में आए।