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मुस्लिमों को दोष दे दिया… कट्टरपंथी तो मोदी और हिंदू थे: गुजरात दंगों पर BBC की ‘प्रोपेगेंडा’ डॉक्यूमेंट्री, गोधरा कांड का सच छिपाया

बीबीसी ने एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज की है। इसमें गुजरात दंगों को लेकर पीएम मोदी के कार्यकाल पर हमला किया गया है। दंगों के दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जारी इस विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया।

इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में इस्लामवादियों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे।

इस डॉक्यूमेंट्री में 9:12 मिनट पर, यह दावा किया गया है कि इसमें आग का कारण विवादित था। लेकिन इसके बाद भी इस घटना के लिए मुस्लिमों को दोषी ठहराया गया था।

बीबीसी की पूर्व रिपोर्टर जिल मैकगिवरिंग ने इस डॉक्यूमेंट्री में कहा है, “गोधरा कांड एक ऐसे राज्य में हुआ था जहाँ हिंदू बहुसंख्यकों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बीच तनाव का लंबा इतिहास रहा है। यहाँ सांप्रदायिक हिंसा और घृणित हिंसा का भी इतिहास रहा है।’

मैकगिवरिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंगों का बदला लेने वाले कट्टरपंथी हिंदू के रूप में दिखाने की कोशिश है। जिसने कथित तौर पर चीजों को ऐसे पेश किया जिससे लगे गोधरा कांड के कारण हिंदुओं के बीच में गुस्सा था। इस गुस्से के कारण ही यह सब हुआ।

इस तरह से बीबीसी ने साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने वाले कट्टरपंथियों की भूमिका पर पर्दा डालने का असफल प्रयास किया है।

2002 के गोधरा ट्रेन कांड का सच

दरअसल, 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस को गोधरा स्टेशन पर लगभग सुबह 3:30 बजे पहुँचना था। उस दिन ट्रेन चार घंटे देरी से चल रही थी। इसलिए ट्रेन सुबह 7:40 बजे मिनट पर गोधरा पहुँची।

करीब 8 मिनट बाद, 2000 इस्लामवादियों की भीड़ ने गोधरा के मुस्लिम बहुल क्षेत्र – सिग्नल फलिया में ट्रेन के कोच एस 6 में आग लगा दी। इस कोच में 25 महिलाओं और 15 बच्चों सहित 59 हिंदू बैठे थे। इस्लामवादियों द्वारा लगाई गई आग में झुलस कर ये सभी मौत के मुँह में समा गए।

22 फरवरी, 2011 को निचली अदालत ने 31 इस्लामवादियों को गोधरा नरसंहार का दोषी करार दिया था। इसके बाद कोर्ट ने 11 लोगों को मृत्युदंड और 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालाँकि, अक्टूबर 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने सभी को आजीवन कारावास की सजा दे दी थी। इस केस में गोधरा कांड के प्रत्यक्षदर्शियों और जीवित बचे गवाहों के बयानों के आधार पर, कोर्ट में यह सिद्ध हो गया था कि इस्लामवादियों ने ही ट्रेन में आग लगाई थी।

एक आरोपित ने फरवरी 2003 में, कोर्ट में इस बात को स्वीकार किया था कि गोधरा कांड प्लानिंग के तहत किया गया हमला था। उसने यह भी कहा था कि वह इस हमले में शामिल था। इस तरह के बयान सबसे बड़े सबूत होते हैं। इनसे यह साबित होता है कि गोधरा कांड निर्दोष कारसेवकों पर सुनियोजित हमला था।

मार्च 2006 में आउटलुक में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट में गोधरा कांड को लेकर दो पैराग्राफ में महत्वपूर्ण बातें कहीं गईं थीं;

अहमदाबाद की रहने वाली गायत्री पाँचाल, 27 फरवरी, 2002 को हुई इस घटना में बच गईं थी। लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया था। गायत्री ने कहा है, “बनर्जी आयोग की रिपोर्ट बिल्कुल गलत है। मैंने सब कुछ अपनी आँखों से देखा है और मुश्किल से खुद से बचा पाई। लेकिन, अपने माता-पिता दोनों को खो दिया।”

गायत्री पाँचाल ने यह भी कहा कि बनर्जी आयोग की रिपोर्ट सही नहीं है क्योंकि आग दुर्घटनावश नहीं लगी, एस-6 कोच में कोई खाना नहीं बना रहा था और यह यात्रियों से भरा हुआ था। उन्होंने कहा है, “भीड़ ने काफी देर तक कोच पर पथराव किया और फिर जलते हुए चीथड़े फेंके और कुछ ज्वलनशील पदार्थ भी डाला ताकि कोच में आग लग जाए। मुझे इस बारे में जहाँ भी बयान देने के लिए बुलाया जाएगा, मैं वहाँ जाऊँगी।”

ये स्पष्ट है कि चश्मदीदों के मुताबिक, कोच एस -6 में आग तब लगी जब मुस्लिमों ने गैसोलीन डालकर आग लगाई। साथ ही, कार सेवक भाग न पाएँ इसलिए ट्रेन को चारों ओर से घेर लिया।

यहाँ यह जानना जरूरी है कि ट्रेन में आग लगने के कारणों लेकर मुस्लिमों और लिबरलों ने जितने भी दावे किए थे, उन सभी को नानावती-मेहता आयोग ने खारिज कर दिया था। इन दावों को खारिज करने के लिए आयोग ने फोरेंसिक साईंस लेबोरेट्री की रिपोर्ट का हवाला दिया था।

यही नहीं, आयोग ने कारसेवकों और स्थानीय मुस्लिमों के बीच हुई किसी प्रकार की हिंसा और हिंदुओं द्वारा मुस्लिम लड़की के साथ छेड़छाड़ जैसी किसी भी घटना की बात को झूठ करार दिया गया था।

आयोग ने कहा था, सभी गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों से यह स्पष्ट है कि ट्रेन में क्षमता से अधिक भीड़ थी। ट्रेन के अंदर तथा बीच के स्टेशनों के प्लेटफार्मों पर कभी-कभार नारेबाजी करने के अलावा रामसेवकों ने कुछ भी नहीं किया था। साथ ही, पहले ऐसी कोई घटना भी नहीं हुई थी जो गोधरा में हुई घटना का कारण बन सकती थी। रास्ते में किसी भी तरह की घटना होने का सबूत नहीं मिला है।

ऐसे में, आयोग बिना किसी हिचकिचाहट के इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा यह कहा जाना कि उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रामसेवकों और दुकानदारों के बीच झगड़ा हुआ था, पूरी तरह से आधारहीन है। अयोध्या से गोधरा तक की उसकी यात्रा में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई थी।

आग लगने के बारे में डीवी तलाटी ने नानावटी-मेहता आयोग को बताया था;

डीवी तलाटी ने कहा था, “उस कोच को जलाने में करीब 60 लीटर ज्वलनशी पदार्थ का इस्तेमाल किया गया होगा। कुछ जगहों पर कोच का फर्श पूरी तरह से जल गया था। खुली जगह में आग और सीमित स्थान पर आग लगने के बीच अंतर को समझाने के बाद, उन्होंने कहा कि आग फैलने की घटना एक ऐसी जगह पर हो सकती है जो छोटी और पूरी तरह से बंद है।”

उन्होंने कहा था, “साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच का आकार काफी बड़ा था। इसका कुल क्षेत्रफल 5000 स्क्वेयर फिट था। इसलिए, उस कोच में आग फैलने की कोई संभावना नहीं थी। आग कोच के नीचे से शुरू नहीं हुई थी। कोच को जलाने के लिए जितने ज्वलनशील पदार्थ की आवश्यकता थी, उसे बाहर से नहीं फेंका जा सकता था। ना ही बाहर से फेंके गए जलते हुए कपड़ों के टुकडों के आग लग सकती थी। चूँकि कोच के पूर्वी हिस्से में अधिक नुकसान हुआ था, इसलिए यह कहा गया था कि आग उस कोच के पूर्वी हिस्से में लगाई गई थी।”

निष्कर्ष

गोधरा नरसंहार इस्लामवादियों की निर्ममता और क्रूरता का सबसे बड़ा उदाहरण है। हालाँकि, इसके बाद भी इस्लामवादी क्रूर अपराधियों को लेकर अपनी सहानुभूति पेश करते हैं।

बीबीसी की यह डॉक्यूमेंट्री गुजरात दंगों को लेकर झूठ फैलाने की कोशिश है। इससे वह देश में बने शांति के माहौल को सांप्रदायिक हिंसा के माहौल में बदलना चाहता है। वास्तव में, बीबीसी ने पहले भी ऐसे प्रयास किए हैं। हालाँकि, देश साम्प्रदायिक हिंसा का माहौल बनाने वालों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

WFI अध्यक्ष बृजभूषण सिंह 4 हफ्ते नहीं करेंगे संस्था के कामकाज, आरोपों की जाँच के लिए कमेटी गठित: घोषणा के बाद कुश्ती पहलवानों ने खत्म किया धरना

खेल मंत्रालय ने यौन शोषण का आरोप झेल रहे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) को जाँच पूरा होने तक महासंघ के दैनिक कार्यों से दूर रहने के लिए कहा है। खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) के आश्वासन के बाद कुश्ती पहलवानों ने जंतर-मंतर पर अपना धरना खत्म कर दिया है।

खेल मंत्री ने पहलवानों के आरोपों की जाँच के लिए भी एक ओवरसाइट कमिटी बनाने का भी ऐलान किया गया है। यह कमिटी जाँच की अवधि तक संस्था के दैनिक मुद्दों पर फैसला लेगी। जाँच चार सप्ताह यानी 1 महीने में पूरी हो जाएगी। कमिटी के सदस्यों के नामों की घोषणा शनिवार (21 जनवरी 2023) को की जाएगी। 

खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के घर पर शुक्रवार की देर रात तक करीब 5:30 घंटे चली बैठक के बाद निर्णय लिया गया। इस बैठक में आरोप लगाने वाली खिलाड़ी विनेश फोगाट, बबीता फोगाट, बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक के साथ-साथ कुछ और खिलाड़ी भी शामिल थे। बैठक खत्म होने के बाद अनुराग ठाकुर ने मीडिया से बात की।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि कमिटी 4 हफ्ते में जाँच पूरी करेगी। जब तक जाँच चलेगी, तब तक बृजभूषण शरण सिंह संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। खिलाड़ियों ने कुछ दूसरे मुद्दे भी उठाए थे। उन पर भी काम करने का आश्वासन दिया गया है।

खेल मंत्री की घोषणा के बाद पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि खिलाड़ियों की बात सुनी गई है और उन्हें निष्पक्ष जाँच की उम्मीद है। पुनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरने को वापस लेने की भी घोषणा की। बता दें कि यह धरना तीन दिनों से चल रहा था और खिलाड़ी बृजभूषण शरण सिंह को हटाने और महासंघ को भंग करने की माँग पर अड़े थे।

उधर, पहलवानों के आरोपों पर भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) ने मामले की जाँच के लिए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। मशहूर खिलाड़ी एमसी मैरीकॉम को इस कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है। मैरीकॉम के अलावा कमिटी में तीरंदाज डोला बनर्जी, अलकनंदा अशोक, योगेश्वर दत्त, सहदेव यादव और दो वकीलों को शामिल किया गया है।

   

‘ईसाई बनने पर ₹15 हजार, दूसरे हिंदू को लाने पर ₹20 हजार’ : फतेहपुर में धर्मांतरण के लिए ‘सुंदर लड़की’ से शादी का लालच भी

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में सर्वेंद्र विक्रम सिंह नाम के शख्स ने कुछ लोगों पर धर्मांतरण का आरोप लगाया है। उन्होंने फतेहपुर थाने में शिकायत देते हुए बताया कि वह सुल्तानपुर के रहने वाले हैं और 2021 में काम के सिलसिले में फतेहपुर आए थे। यहाँ उनकी मुलाकात एक रामचंंद्र नाम के शख्स से हुई। इस व्यक्ति ने उन्हें धर्मांतरण करने के लिए तरह-तरह के लालच दिए। उन्हें कहा गया कि अगर वो ईसाई बनते हैं तो उसकी संस्था उन्हें 15 हजार रुपए देगी और साथ ही सुंदर लड़की से उनकी शादी भी करवाई जाएगी।

शिकायतकर्ता के मुताबिक रामचंद्र ने उन्हें कहा, “आप अपना हिंदू दर्म छोड़कर ईसाई धर्म स्वीकार कर लो, इससे आपको कोई काम नहीं करना पड़ेगा और हम लोग तथा हमारी संस्था आपको नगद रुपए देगी व परिवार का भी फ्री में इलाज किया जाएगा।” सर्वेंद्र ने बताया कि रामचंद्र ने उन्हें बताया था कि उसकी संस्था का नाम सुआट्स विश्वविद्यालय नैनी है। उसने ये भी कहा था- “तुम्हारी शादी सुंदर लड़की से करवा दी जाएगी।”

पीड़ित ने बताया कि प्रलोभनों के बाद वो लालच में आ गया और इसके बाद उसे इंडियन प्रेस बाईटेरियन चर्च लाया गया। यहाँ उनकी मुलाकात पादरी से हुई। यहाँ भी वादा किया गया कि धर्मांतरण के बाद उन्हें न केवल नगदी मिलेगी बल्कि कई तोहफे भी दिए जाएँगे।

पीड़ित के अनुसार, चर्च के बाद उन्हें प्रयागराज ले जाया गया। यहाँ उनकी मुलाकात करीबन 40-50 लोगों से हुई, जिन्होंने उन्हें हिंदू धर्म छोड़ने के लिए उकसाया और कहा कि उनको सुआट्स में नौकरी दी जाएगी, 15 हजार रुपए मिलेगा और सुंदर लड़की से शादी भी होगी। इन लोगों ने सर्वेंद्र को ये भी कहा कि उनकी संस्था पर बहुत पैसा है जरूरत पड़ने पर उन्हें वो पैसा भी दिया जाएगा।

तमाम तरह के लालच के बाद सर्वेंद्र का धर्म-परिवर्तन देवीगंज के चर्च में कराया गया। इसके बाद उन्हें कहा गया कि- “तुम ईसाई बन गए हो। अब अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और गाँव वालों का भी धर्मांतरण कराओ, इसके लिए तुम्हें 20 हजार रुपए मिलेगा।”

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन लोगों की संस्था को विदेशों से पैसा आता है। इसलिए उन्हें कहा गया, “तुम्हारे जीवन में पैसे की कोई कमी नहीं होगी।” हालाँकि कुछ समय बाद सर्वेंद्र को अपने किए का एहसासा हुआ और वह हिंदू धर्म में लौट आए। अब उन्होंने इस मामले में शिकायत दी है। उन्होंने कहा है कि वह काफी डरे हुए था। मगर जब उन्हें पता चला कि फतेहपुर में धर्मांतरण मामले पर पुलिस निष्पक्ष जाँच कर रही है तो वह भी आगे आए और शिकायत दी।

बता दें कि पुलिस ने इस केस को आईपीसी की धारा 120 बी, उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और धारा 5 (1) के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले में आरबी लाल (वाइस चांसलर), विनोद बी लाल, अजय लॉरेंस, रमाकांत, जोनाथन लाल, एसबीलाल, स्टीफन पास, डेरिक डेनिस, रामचंद्र, अज्ञात पादरी और 40-5- अन्य लोगों पर केस दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में फतेहपुर कोतवाली सिटी के इंस्पेक्टर अमित मिश्रा से बात की। उन्होंने इस संबंध में बताया, पुराने केसों की जाँच के दौरान नए सुराग मिल रहे हैं और उन्हीं आधार पर ये नई FIR दर्ज हुई है। आरोपितों की नामजदगी कर के उन्हें और उनसे जुड़े लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और गिरफ्तारी के प्रयास चल रहे हैं । पहले दर्ज केस और वर्तमान में नामजद लोग कहीं न कहीं से आपस में कनेक्टेड हैं ।

हरिद्वार में 7 मस्जिदों पर लगा 35000 रुपए का जुर्माना, 2 को हिदायत: चेतावनी के बाद भी तेज वॉल्यूम में दी जा रही थी अजान

ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को लागू कराने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार जिला प्रशासन ने धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला प्रशासन की अनुमति के बिना मंदिर या मस्जिदों पर लाउडस्पीकर लगाने पर जुर्माना देना होगा। इसके तहत जिला प्रशासन ने 7 मस्जिदों पर जुर्माना लगाया है।

जिला प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या मस्जिद पर लाउडस्पीकर लगाने के लिए अनुमति लेनी होगी। जिला प्रशासन का कहना है कि अनुमति लेने के बाद ही तय मानकों के अनुसार ही लाउडस्पीकर बजाए जाने चाहिए। इकट्ठा किए गए जुर्माने के 35,000 रुपए को जिला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अकाउंट में जमा करा दिया जाएगा।

जिला प्रशासन का आदेशों का पालन नहीं करने पर जिले के सात मस्जिदों पर 5-5 हजार रुपए के जुर्माने लगाए गए हैं। एसडीएम पूरन सिंह राणा ने कटारपुर, पथरी, धनपुरा, पदार्था, नसीरपुर कलां आदि क्षेत्रों के सात मस्जिदों पर प्रति मस्जिद 5000 रुपए का जुर्माना लगाया है। वहीं, दो मस्जिदों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।

इन मस्जिदों पर दिन में पाँच बार दिए जाने वाले अजान का वॉल्यूम तय मानकों से अधिक था। इन्हें चेतावनी दी गई थी। हालाँकि, चेतावनी के बाद भी मस्जिद इंतजामिया कमिटी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद जिला प्रशासन ने इन मस्जिदों पर जुर्माना लगाया है।

पिछले दिनों क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुशंसा पर एसडीएम ने नोटिस जारी किए थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में ध्वनि मापने वाले यंत्र को स्थापित ना होने और धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों के वॉल्यूम ज्यादा होने की बातों का उल्लेख किया था।

उप-जिलाधकारी पूरण सिंह राणा ने कहा था कि था कि मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा में लाउडस्पीकर लगाने से पहले जिला प्रशासन की अनुमति आवश्यक है। अगर इस आदेश की कोई अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ 5,000 से 25,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

एसडीएम राणा ने यह भी कहा था कि अगर कोई बार-बार चेतावनी की अवहेलना करता है तो लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति कैंसिल करके उसके खिलाफ FIR भी दर्ज की जाएगी। आदेश में कहा गया है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का उपयोग करने की मनाही है। इसकी अनुमति सिर्फ नवरात्रि या अन्य त्योहारों पर दी जा सकती है।

बुजुर्ग अली मोहम्मद ने 13 साल की दलित किशोरी से किया रेप: पोर्न वीडियो देखने और अश्लील किताबें पढ़ने का निकला शौकीन, शाहजहाँपुर में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में एक मुस्लिम बुजुर्ग द्वारा पोर्न वीडियो देखकर किशोरी के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। इस घटना की जानकारी हिंदू संगठनों को मिली तो इलाके में बवाल हो गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित अली मोहम्मद उर्फ पहाड़ी को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना जिले के पुवायां क्षेत्र के एक गाँव का है। यहाँ अनुसूचित जाति की एक किशोरी अपने खेत में चारा काटने के लिए गई थी। वहाँ अली मोहम्मद पहले से ही मौजूद था। उसने 13 साल की किशोरी को अकेला पकड़ लिया और गन्ने के खेत में ले जाकर रेप किया।

घटना के बाद में लड़की घर पहुँची और इसके बारे में अपने परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद परिजनों ने 18 जनवरी 2023 को थाने में जाकर अली मोहम्मद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद पुलिस उसकी तलाश करने लगी। इसके बाद शुक्रवार (20 जनवरी 2023) को पुलिस ने उसे मोहम्मदी मार्ग से गिरफ्तार कर लिया।

अली मोहम्मद ने पुलिस को बताया कि वह काफी समय से अश्लील वीडियो देख रहा था। इतना ही नहीं, उसे अश्लील किताबें पढ़ने की भी आदत थी। उसने जब किशोरी को देखा तो उसकी नीयत खराब हो गई और मौके की तलाश में रहने लगा। उसने बताया कि जब किशोरी अकेली चारा लेने गई तो उसने मौके का फायदा उठा लिया।

आरोपित के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(3) और पॉक्स एक्ट की धारा 3/4 (2) तथा SC-ST ऐक्ट की धारा 3(2)5 के तहत दर्ज किया गया है। अली मोहम्मद के अब्बू का नाम कुदरतुल्लाह है और वह गाँव खिरिया पाठक का रहने वाला है।

ऊँगली तोड़ी-धक्का मारा… ब्रेकअप हुआ, फिर भेजे 1000 मैसेज- करती रही कॉल: कोर्ट ने कहा- 18 महीने लड़के से रहो दूर

इंगलैंड में एक महिला को कोर्ट ने इसलिए सजा सुनाई क्योंकि उसने अपने ब्वॉयफ्रेंड को मैसेज भेजकर तंग कर डाला। महिला का नाम मिशैल फेल्टन (28) है। उस पर आरोप है कि वो एक दिन में करीबन 150 मैसेज करके अपने ब्वॉयफ्रेंड रियान हार्ले को तंग करती थी। ऐसा कर-करके उसने रियान को 1000 मैसेज भेज दिए थे। लड़का मिशैल की हरकत से इतना तंग आ गया था कि उसने कोर्ट का रुख किया और कोर्ट ने केस की गंभीरता को देखते हुए उसे सजा सुनाई।

मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, रियान से वह पूछती थी – “तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे, मैं तुमसे प्यार करती हूँ, क्या हम आज मिलने वाले हैं, क्या हम बाहर जाएँगे…आदि-आदि।” इन्हीं संदेशों से तंग आकर रियान ने कोर्ट में कहा कि मिशैल उसे इतना परेशान करती है कि अब उसे आत्महत्या के ख्याल आने लगे हैं।

रियान ने बताया कि फेल्टन उसे कंट्रोल करती थी और हमेशा लड़ती थी। रिपोर्ट बताती हैं कि एक बार लड़ाई इतनी बढ़ गई थी कि रियान ने मिशैल की उंगलियाँ तक तोड़ दी थीं। वहीं मिशैल ने भी रियान को धक्का मारा था।

रियान के अनुसार, इन्हीं हरकतों के कारण दोनों एक दूसरे से अलग हुए। मगर कुछ ही दिन में मिशैल ने उसे 1000 के करीब मैसेज और कॉल कर दिए। इसके अलावा वह उसके घर तोहफे पहुँचाने लगी। उसकी इन्हीं हरकतों ने रियान को परेशान कर दिया।

वह जब मामला लेकर कोर्ट पहुँचा तो मिशैल ने अपना जुर्म कबूला। उसने कहा कि वह रियान को प्यार करती है और ब्रेकअप नहीं चाहती इसलिए उसने रियान के दूर होने के बाद लगातार मैसेज किए। वहीं रियान ने कहा कि मिशैल की हरकतों से वो बहुत असहज है। वह अब उसके कॉन्टैक्ट में नहीं रहना चाहता।

हालातों को देखते हुए कोर्ट ने मिशैल को रियान से 18 महीने एकदम दूर रहने को कहा। इसके अलावा उसके ऊपर करीबन 5000 रुपए का फाइन और 39000 रुपए विक्टिम सरचार्ज के रूप में देने के लिए भी कहा गया। कोर्ट ने मिशैल को 1 हफ्ते के लिए रिहैब में भेजने का भी आदेश दिया।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऐसा मामला चीन से आया था जहाँ महिला ने ब्रेकअप के बाद 1000 किलो प्याज BF को भिजवाया था। लड़की का कहना था ब्रेकअप के बाद वो रोई है इसलिए उसके ब्वॉयफ्रेंड को भी रोना चाहिए।

नूपुर शर्मा ने किताब का दिया हवाला, लीना ने माँ काली को सिगरेट पीते दिखाया: एक को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा, दूसरे की गिरफ्तारी से रोका

हिंदुओं की आराध्य माता काली (Kaali) को आपत्तिजनक स्थिति में दिखाने वाली फिल्ममेकर लीना मणिमेकलाई (Leena Manimekalai) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत मिल गई है। देश के मुख्य न्यायाधीश डीवी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने लीला के खिलाफ दर्ज सभी मामलों में गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है।

लीला ने अपनी डॉक्यूमेंट्री में माँ काली को LGBTQ वाला झंडा लिए और सिगरेट पीते हुए दिखाया था। इसको लेकर देश भर में हंगामा मच गया था। उसके बाद लीला के खिलाफ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली में कई मामले दर्ज किए गए थे।

इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस चंद्रचूड ने इन सभी राज्यों को नोटिस भी जारी किया है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि फिल्म निर्माता के खिलाफ पहले से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर या किसी भी प्राथमिकी के आधार पर कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा।

लीना की ओर से कोर्ट में पेश वकील कामिनी जायसवाल ने कहा कि उनके मुवक्किल का इरादा किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह देवी की एक समावेशी छवि दिखाना चाहती थीं। वकील ने दावा किया कि उनकी फिल्म देवी के व्यापक विचारों को दर्शाती है।

इस पर CJI ने आदेश में कहा, “सुश्री जायसवाल ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता कनाडा में यॉर्क विश्वविद्यालय में स्नातक की छात्रा है। उन्होंने देवी को चित्रित करते हुए एक लघु फिल्म काली का निर्माण किया है। इसमें किसी की धार्मिक भावनाएँ आहत करने का कोई इरादा नहीं है। फिल्म का उद्देश्य देवी को एक समावेशी अर्थ में चित्रित करना था।”

कामिनी जायसवाल ने कहा कि लीना एक प्रसिद्ध फिल्ममेकर और उनके खिलाफ 6 मुकदमे दर्ज हैं। इसके साथ ही लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है। लीना के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि कहना था कि इस फिल्म के पोस्टर को ट्वीट करने के बाद उन्हें जाने से मारने की धमकी दी गई थी।

वकील ने कोर्ट से आग्रह किया कि उनके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को रद्द कर दिया जाए या उन्हें एक कर दिया जाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस माँग राज्यों से जवाब माँगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 फरवरी 2023 को होगी।

नूपुर शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने की थी तीखी टिप्पणी

याद रहे, लीना पर भी लगभग वही आरोप है, जो भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) पर था। हालाँकि, नूपुर ने जो कहा था कि वह इस्लाम के दीनी किताब हदीस में उसका वर्णन किया गया था, लेकिन लीना के मामले में ऐसा नहीं है। मोहम्मद जुोबैर के मामले में भी कोर्ट उदार रहा।

दोनों महिलाओं पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगा और कई राज्यों में FIR दर्ज की गई। दोनों ही सुप्रीम कोर्ट भी पहुँचीं लेकिन दोनों मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय का नजरिया अलग-अलग दिखा।

जहाँ लीना के मामले में सुप्रीम कोर्ट बेहद उदार नजर आया, वहीं नूपुर के मामले में सु्प्रीम कोर्ट ने उन्हें देश भर में बवाल के लिए जिम्मेदार ठहराया। नूपुर शर्मा के खिलाफ सभी मामलों को क्लब करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन पर बेहद तीखी टिप्पणी की थी।

उस समय सु्प्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह सारे देश में आग लगाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए आ रही हैं। कोर्ट ने देश में उस वक्त जो हुआ, उसके लिए नूपुर शर्मा को अकेला जिम्मेदार थीं। यहाँ तक कि कोर्ट ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक बता दिया।

कोर्ट ने नूपुर शर्मा को बदजुबान, अड़ियल और अहंकारी बताते हुए उन्हें अपनी टिप्पणी के लिए पूरे देश से माफी माँगने के लिए कहा था। हालाँकि, लीना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी टिप्पणी के उन्हें राहत दे दी।

जुबैर के मामले में भी कोर्ट था उदार

लीना ही नहीं, मोहम्मद जुबैर क मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने उदार रूख अपनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर के मामले कहा था कि उन्हें टिप्पणी करने की जरूरत क्या थी। वहीं, जुबैर के मामले में उसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जुबैर को ट्वीट करने से रोका नहीं जा सकता। यहाँ जानना जरूरी है कि नूपुर शर्मा ने जो हदीस में बातें लिखी गई हैं, उसे टीवी में बहस के दौरान बताया था, जिसे ईशनिंदा करार दिया गया था। वहीं, जुबैर पर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाएँ आहत करने का आरोप है।

नूपुर शर्मा के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उनका बयान लोगों (मुस्लिमों) को भड़काने के लिए दिया गया था। वहीं, जुबैर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अप्रत्याशित रूप से रोक नहीं लगाई जा सकती।

उसी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नूपुर शर्मा की याचिका में अहंकार की बू आ रही है, जबकि जुबैर मामले में यह पुलिस द्वारा उचित एवं निष्पक्ष जाँच का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया था कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं। वहीं, जुबैर मामले में उसी कोर्ट ने कहा कि उसे लगातार हिरासत में रखना उचित नहीं है।

शिव अरूर ने अपने शो में आगे बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल की गला काटकर हत्या के लिए नूपुर शर्मा को जिम्मेदार बताया था, जबकि जुबैर के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे स्वतंत्रता से वंचित रहने का कोई कारण नहीं है।

‘भटक गए थे, इसलिए हिंदू धर्म छोड़ दिया था’: छत्तीसगढ़ में 1100 ईसाइयों ने की घर वापसी, प्रबल प्रताप जूदेव ने गंगाजल से पखारे चरण

छत्तीसगढ़ में करीब 1100 ईसाइयों ने एक साथ घर वापसी की है। महासमुंद जिले के बसना में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार (19 जनवरी 2023) को ये लोग मूल धर्म में लौटे। बीजेपी नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने गंगाजल से चरण पखारकर सबकी हिंदू धर्म में वापसी करवाई।

रिपोर्ट के अनुसार घर वापसी करने वाले लोगों ने बताया कि वे भटक कर धर्मांतरण का शिकार हो गए और अपना धर्म छोड़ दिया था। अपनी भूल का एहसास होने के बाद वे हिंदू धर्म में लौट आए हैं। कथावाचक पंडित हिमांशु कृष्ण महाराज ने इनलोगों को शपथ दिलाई। जूदेव ने बताया कि करीब 325 परिवारों के 1100 लोग सनातन धर्म में फिर से लौटे हैं।

गौरतलब है कि महासमुंद के कटांगपाली गाँव में मार्च 2022 में भी इसी तरह का एक आयोजन हुआ था। उस समय विश्व कल्याण महायज्ञ के दौरान करीब 1250 लोगों ने घर वापसी की थी। बीजेपी के छत्तीसगढ़ प्रदेश मंत्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव धर्मांतरित लोगों की घर वापसी के लिए अभियान चलाते रहते हैं। इससे पहले क्रिसमस पर पत्थलगाँव के किलकिला में 50 ईसाई परिवारों को वे मूल धर्म में लौटाकर लाए थे।

वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे दिलीप सिंह जूदेव भी इसी तरह चरण पखारकर जनजातीय समाज के उन लोगों की मूल धर्म में वापसी करवाते थे जो ईसाई मिशनरियों के झाँसे में आ धर्म परिवर्तन कर चुके थे। दिलीप सिंह जूदेव का अगस्त 2013 में निधन हो गया था। उसके बाद से इस सिलसिले को उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढ़ा रहे हैं।

ऑपइंडिया से बातचीत में एक बार प्रबल प्रताप जूदेव ने बताया था, “पिता जी के दिवंगत होने के बाद से मैं इस कार्य को आगे बढ़ा रहा हूँ। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हमलोग 10 हजार से अधिक लोगों की इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए घर वापसी करवा चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण बीच में करीब दो साल हमारा यह अभियान रुक गया था। अब फिर से हम इसे गति दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया था कि छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद से धर्मांतरण की साजिशें लगातार बढ़ी हैं।

कुश्ती का विवाद भारतीय ओलंपिक संघ तक पहुँचा, पीटी उषा को पत्र लिख रखे 4 डिमांड: बृजभूषण शरण सिंह का इस्तीफे से इनकार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक समेत लगभग 30 पहलवानों के धरने का आज तीसरा दिन है। पहलवानों और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के बीच एक बार फिर से बैठक होगी। इसके पहले गुरुवार (20 जनवरी, 2023) रात पहलवानों ने उनके साथ डिनर किया था और मामले को लेकर चर्चा की थी। पहलवानों ने आज भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा को पत्र लिखा है। पत्र में कुश्ती संघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर कई आरोप लगाए गए हैं। बृजभूषण सिंह ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।

धरने के तीसरे दिन पहलवान बजरंग पुनिया ने मीडिया से कहा कि उन्होंने सरकार के सामने अपनी माँगे रख दी हैं और उम्मीद जताई की मामले का निपटारा जल्द ही कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने हमेशा खिलाड़ियों का सम्मान किया है। हम प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और खेल मंत्री से निवेदन करेंगे कि इस मामले में जल्द से जल्द हमारी माँगों को सुना जाए।”

जानकारी के मुताबिक खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और धरना दे रहे पहलवानों के बीच दोबारा बातचीत होगी। इसके पहले गुरुवार देर रात खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और पहलवानों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रही थी। धरना दे रहे पहलवानों ने भारतीय ओलंपिक संघ को पत्र लिखा है। संघ की अध्यक्ष पीटी उषा के नाम इस पत्र में ब्रज भूषण शरण को हटाने समेत चार मुख्य माँगें रखी गई हैं। जो इस प्रकार हैं-

1- यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जाँच के लिए कमेटी गठित की जाए।
2- WFI के अध्यक्ष से इस्तीफा लिया जाए।
3- WFI को भंग किया जाए।
4- कुश्ती महासंघ को चलाने के लिए पहलवानों की देख-रेख में एक नई कमेटी बनाई जाए।

खबरों के मुताबिक मामले को लेकर ओलंपिक संघ की बैठक होगी जिसमें पहलवानों की शिकायत पर चर्चा की जाएगी।

इसके पहले पहलवान विनेश फोगाट ने भाजपा नेता और पहलवान योगेश्वर दत्त पर फेडरेशन की गोद में बैठने का इल्ज़ाम लगाया था। योगेश्वर दत्त ने इस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कहने को तो कोई भी कुछ भी बोल सकता है। 2017 में रेसलिंग छोड़ने के बाद आज तक सिर्फ एक बार फेडरेशन में गया हूँ। फेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण से भी 1 या 2 बार ही मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी बहन के साथ गलत हुआ है तो जाँच और कार्रवाई होनी चाहिए। कौन गोद में बैठता है और कौन नहीं, यह सभी जानते हैं।

यौन शोषण समेत कई गंभीर आरोप झेल रहे कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने साफ कर दिया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा, “मैं किसी की कृपा से अध्यक्ष नहीं बना हूँ। यदि मैंने मुँह खोला तो सुनामी आ जाएगी।” रिपोर्टों के मुताबिक पहलवानों के आरोपों पर आज कुश्ती महासंघ भी जवाब दाखिल कर सकता है।

अंबानी के बेटे को बधाई देने पहुँचे सितारे, पर महफिल लूट ले गया कुत्ता: अनंत-राधिका मर्चेंट की सगाई का ये Video देखा आपने

मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के छोटे बेटे अनंत अंबानी (Anant Ambani) और राधिका मर्चेंट (Radhika Merchant) की गुजराती रस्मों-रिवाजों के साथ गुरुवार (19 जनवरी 2023) को सगाई सम्पन्न हुई। सगाई का कार्यक्रम मुंबई में मुकेश अंबानी के निवास एंटीलिया पर हुआ। राधिका बिजनेसमैन वीरेन मर्चेंट की बेटी हैं। सगाई समारोह में अंबानी परिवार, उनके दोस्तों के अलावा कई बॉलीवुड सितारे भी पहुँचे। इनके अतिरिक्त अंबानी परिवार का डॉग भी इस कार्यक्रम के बाद काफी चर्चा में है।

गुजराती में सगाई की रस्म को गोल धना की रस्म भी कहते हैं। गोल धना समारोह गुजरातियों में शादी से पहले की रस्म होती है। गोल का मतलब गुड़ होता है और धना का मतलब होता है धनिया के बीज। रस्म के दौरान दुल्हन का परिवार दूल्हे के घर गुड़, धनिया, उपहार और मिठाई लेकर आता है, जिसके बाद दुल्हे और दुल्हन की अँगूठी का आदान-प्रदान किया जाता है। फिर सभी के सामने वर वधु एक-दूसरे को अँगूठी पहनाते हैं और वहाँ उपस्थित दोनों पक्ष की पाँच सुहागन स्त्रियों का आशीर्वाद लेते हैं।

सोशल मीडिया पर अनंत और राधिका की सगाई की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हो रही हैं। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि वधू पक्ष के लोग जब अंबानी आवास पर पहुँचे, तो नीता अंबानी और उनके परिवार ने आरती-मंत्रोच्चारण के साथ राधिका मर्चेंट व उनके परिजनों का स्वागत किया। फिर सभी लोग भगवान कृष्ण का आशीर्वाद लेने मंदिर गए। इसके बाद समारोह स्थल पर भगवान गणेश की पूजा हुई और पारंपरिक रूप से लगन पत्रिका का पाठ किया गया। बाद में गोल धना और चुनरी विधि की शुरुआत हुई, जिसमें दोनों परिवारों ने एक दूसरे को उपहार दिए। गुजराती रस्में निभाने के बाद घर की बेटी ईशा अंबानी ने रिंग सेरेमनी शुरू करने की घोषणा की, जिसके बाद अनंत और राधिका ने एक-दूसरे को अँगूठी पहनाई और परिवार के लोगों का आशीर्वाद लिया।

अंबानी परिवार ने नए जोड़े के लिए स्पेशल डांस भी किया। इस दौरान अनंत और राधिका के पालतू कुत्ते ने भी सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। उनके डॉगी के आने के बाद ही दोनों ने एक दूसरे को सगाई की अँगूठी पहनाई। अनंत और राधिका की सगाई में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन, सलमान खान, रणवीर सिंह, अक्षय कुमार, वरुण धवन और दीपिका पादुकोण के अलावा कई बॉलीवुड सेलेब्स ने शिरकत की।

बता दें कि अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट का ‘रोका’ समारोह राजस्थान के श्रीनाथजी मंदिर में 29 दिसंबर 2022 को हुआ था। इस मौके पर श्रीनाथजी मंदिर को शानदार तरीके से सजाया गया था। रोका समारोह में मुकेश अंबानी, कोकिला बेन अंबानी, नीता अंबानी, आकाश अंबानी, आनंद पीरामल सहित परिवार के अन्य लोग शामिल थे।