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‘या अल्लाह… काफिरों का कर दो सफाया’ : कनाडा के इमाम शेख यूनुस ने दिया भड़काऊ बयान, बोला- बच्चे गैर-मुस्लिमों को समझें अपना दुश्मन

कनाडा के इमाम शेख यूनुस कथराडा ने गैर-मुस्लिमों के लिए आग उगला है। इससे जुड़ा उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में इमाम यूनुस मुस्लिमों को गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़का रहा है। शेख यूनुस कह रहा है, “हमारे बच्चों को यह समझना चाहिए कि गैर-मुस्लिम अल्लाह के दुश्मन हैं इसलिए वे हमारे दुश्मन हैं।”

अमेरिका स्थित मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के ट्विटर हैंडल MEMRI से एक वीडियो पोस्ट किया गया। सबटाइटल में वीडियो में कही गई बातों का अंग्रेजी अनुवाद भी था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कनाडाई इमाम शेख यूनुस कनाडा के विक्टोरिया में मुस्लिमों के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में खिताब कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गैर-मुस्लिमों को लेकर काफी भड़काने वाली बातें कहीं। उनके निशाने पर सबसे ज्यादा ईसाई थे। अपने खिताब में इमाम ने कहा कि अल्लाह की तौहीन करने वाले अल्लाह के दुश्मन हैं। अल्लाह ने कुरान में कहा है कि उन्हें किसी ने पैदा नहीं किया, न वो किसी के बच्चे हैं न उनकी कोई औलाद है। लेकिन ईसाई कहते हैं कि अल्लाह का एक बेटा है। क्या यह अल्लाह का अपमान नहीं है?

2 मिनट 12 सेकेंड के इस वीडियो में इमाम ने कहा, “गैर मुस्लिम, जिनमें ईसाई, यहूदी और दूसरे नास्तिक शामिल हैं वो अल्लाह के दुश्मन हैं। क्या आपको लगता है कि वे आपके दोस्त हैं? नहीं, अगर वे अल्लाह के दुश्मन हैं तो आपके दोस्त कैसे हो सकते हैं? मैं चाहता हूँ कि हमारे बच्चे इस बात को अच्छी तरह समझ लें। वे अल्लाह के दुश्मन हैं इसलिए आपके भी दुश्मन हैं। उनमें से कुछ लोग तो अल्लाह के अस्तित्व पर ही विश्वास नहीं करते। क्या आप ऐसे किसी शख्स को अपना दोस्त बनाना चाहते हैं?”

वीडियो के अंत में शेख यूनुस ने अरबी में दुआ पढ़ते हुए कहा, “या अल्लाह, इस्लाम और मुस्लिमों को ताकत दो, काफिरों और अनेक देवी देवताओं की पूजा करने वाले को अपमानित करो, इस्लाम के दुश्मनों और काफिरों का सफाया करो!”

इमाम शेख यूनुस के सोशल मीडिया अकाउंट्स इस तरह के नफरती वीडियो से भरे पड़े हैं। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर है कि कनाडा में रहने वाला शेख यूनुस लगातार जहरीले बयान देता रहता है। लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है जबकि कनाडा एक ईसाई बहुल देश है।

‘पार्टी छोड़ो वरना परिवार सहित मार देंगे’: UP से लेकर मुंबई में BJP नेताओं को लश्कर-ए-खालसा की धमकी, लिखा- RSS और सेना को भी निशाना बनाएँगे

भाजपा (BJP) नेता को लश्कर-ए-खालसा (LeK) नामक आतंकी संगठन द्वारा पार्टी छोड़ने के लिए कहा जा रहा है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें तथा उनके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई भाजपा नेताओं को ऐसी धमकी दी गई है।

यूपी के रामपुर से भाजपा सांसद घनश्याम लोधी को व्हाट्सएप नंबर पर गुरुवार (05 जनवरी 2023) को लश्कर-ए-खालसा के संदीप सिंह खालिस्तानी ने जान से मारने की धमकी दी। सांसद के मुताबिक, उनके नंबर पर भेजे गए मैसेज में कहा गया है कि ‘बीजेपी छोड़ दो, वरना तुम्हें और तुम्हारे परिवार को मार दिया जाएगा।’

इतना ही नहीं, मैसेज में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं के साथ-साथ भारतीय सेना को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस सतर्क हो गई है और मैसेज करने वाले की पहचान कर रही है।

मुंबई भाजपा युवा मोर्चा के प्रमुख तजिंदर सिंह तिवाना को गुरुवार (5 जनवरी 2023) को यह धमकी मोबाइल के जरिए दी गई है। धमकी देने वाले ने खुद को ‘लश्कर-ए-खालसा’ का संदीप सिंह बताया और कहा कि वह संगठन का प्रवक्ता है। उसने तजिंदर सिंह को भाजपा नहीं छोड़ने पर उन्हें और उनके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी है।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भी एक भाजपा कार्यकर्ता को जान से मारने की धमकी दी गई है। बुधवार (4 जनवरी 2023) को दोपहर करीब 11:30 बजे छजलैट निवासी वीर सिंह सैनी के ह्वाट्सएप पर एक मैसेज मिला। इसमें उन्हें भाजपा छोड़ने के लिए कहा गया है। सैनी भाजपा की इकाई किसान मोर्चा में पदाधिकारी हैं।

ऐसे नहीं करने पर वीर सिंह जान से मारने की धमकी दी गई है। मैसेज में लिखा है कि ‘जल्दी भाजपा छोड़ दो, वरना पूरे तुम्हें और तुम्हारे परिवार को बुरी मौत मारेंगे। भाजपा, आरएसएस और इंडियन आर्मी को निशाना बनाएँगे’। इसके बाद भारत के खिलाफ अभद्र नारेबाजी लिखने के साथ ही खालिस्तान जिंदाबाद लिखा गया है।

मैसेज मिलने के बाद उन्होंने थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506B (आपराधिक धमकी) सहित अन्य आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही जिस नंबर से मैसेज मिला है, उसे ट्रैस करने के लिए भेज दिया गया है।

कहा जा रहा है कि लश्कर-ए-खालिस्तान नाम के इस संगठन ने पिछले कुछ दिनों महाराष्ट्र, यूपी, पंजाब, हरियाणा आदि के कई भाजपा नेताओं को पार्टी छोड़ने के लिए कहा है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवारों की हत्या करने की धमकी दी गई है।

पंजाब भाजपा से जुड़े कई नेताओं को भी खालिस्तानियों द्वारा धमकी दी गई है। पंजाबी भाषा में लिखा गया है, ‘सुना है सीएम के घर से बम निकला है। अभी तो एक और बम रखा है मिलिट्री बाड़े के नजदीक।’ इस तरह की धमकी मिलने के बाद पंजाब के आर्मी बेस पर भी सुरक्षा इंतजाम को कड़ा कर दिया गया है।

इसी तरह 29 दिसंबर 2022 को पंजाब में जालंधर भाजपा के जिला उपाध्यक्ष विवेक खन्ना और पार्षद शैली खन्ना के बेटे अभिलक्ष्य खन्ना को भी जान से मारने की धमकी दी गई थी। धमकी देने वाले ने खुद को लश्कर-ए-खालसा का प्रवक्ता बताया था।

उसने फोन और मैसेज करके भाजपा नेता और पार्षद के पुत्र अभिलक्ष्य खन्ना को कहा कि ‘भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हो जाओ और कॉन्ग्रेस पार्टी को ही वोट दो’। ऐसा नहीं करने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मार देने की धमकी दी गई थी।

पाकिस्तान की कुख्यात ISI ने बनाया है संगठन

पिछले साल इंटेलिजेंस ब्यूरो (Intelligence Bureau) ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने एक नया आंतकी गुट बनाया है और उसका नाम लश्कर-ए-खालसा (Lashkar-e-Khalsa) रखा। IB की रिपोर्ट में बताया गया था कि लश्कर-ए-खलसा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव है और युवाओं को बरगलाकर भर्ती कर रहा है।

लश्कर-ए-खालसा भारत में अशांति पैदा करना चाहता है। इसके लिए युवाओं को लगातार भर्ती कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह संगठन आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए नई-नई फेसबुक आईडी के माध्यम से लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान खुफिया अधिकारी अमर खालिस्तानी ‘आजाद खालिस्तान’ नाम से कई फेसबुक पेज मैनेज कर रहा है।

अफगान आतंकी दे रहे हैं ट्रेनिंग

लश्कर-ए-खालसा नामक आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भारी संख्या में अफगान नागरिकों की भर्ती की है। यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी संगठन में हाल ही में भर्ती किए गए लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

जो अफगान आतंकी ट्रेनिंग दे रहे हैं उन्हें रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) समेत सभी आधुनिक हथियार चलाने का अनुभव होता है। यह भी कहा जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा के स्थानीय गैंगस्टरों को इसमें शामिल करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए उन्हें ड्रग्स के जरिए कमाई का लालच दिया जा रहा है।

धँसती जमीन, दरकती दीवार…शंकराचार्य की तपोभूमि जोशीमठ का हुआ ये क्या हाल: 22 हजार लोगों की जान खतरे में, 1976 में मिल गई थी चेतावनी

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित शहर जोशीमठ इन दिनों काफी चर्चा में हैं। समुद्रतल से 6000 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह धार्मिक शहर आज दरकते जमीन, भूस्खलन और घरों में हो रहे दरारों की वजह से चर्चा में है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह गौरवशाली शहर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। क्या शंकराचार्य की तपोभूमि रहा यह ऐतिहासिक शहर अपने समाप्त होने की बाट जोह रहा है? इस रिपोर्ट में हम ऐसे सभी सवालों का जवाब लेकर आए हैं।

जोशीमठ न सिर्फ अपने धार्मिक महत्व के लिए बल्कि प्राकृतिक सुन्दरता के लिए भी प्रसिद्ध है। पहले हम इस शहर के धार्मिक महत्व के बारे में बात करते हैं। जोशीमठ की भूमि आदि शंकराचार्य के तप से पवित्र है। मान्यता है कि शंकराचार्य को यहीं शहतूत के पेड़ के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। माना जाता है कि देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की, इसलिए पहले इसका नाम ज्योतिर्मठ पड़ा था। फिर लोग आम बोलचाल की भाषा में इसे जोशीमठ के नाम से पुकारने लगे। जोशीमठ नरसिंह मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। जोशीमठ कर्णप्रयाग बद्रीनाथ मार्ग पर बद्रीनाथ से 30 किमी पहले और कर्णप्रयाग से 72 किमी की दूरी पर मौजूद है।

ज्योतिर्मठ की फोटो (क्रेडिट-अमृत विचार)

यह शहर चर्चा में क्यों आ गया 

जोशीमठ में लोग इन दिनों डर के साए में जी रहे हैं। करीबन 22 हजार लोगों की जान खतरे में। वजह है यहाँ हो रहा भूस्खलन और घरों में पड़ने वाले दरार। सोशल मीडिया पर ऐसे कई फोटोज देखे जा सकते हैं जहाँ साफ़ दिख रहा है कि कई घरों में दरार आ गई है। वहीं सड़क बीच में से फट गई है। इन घटनाओं को लेकर लोग काफी डर गए हैं और उन्हें अपना भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है। ऐसा नहीं है कि यहाँ भूस्खलन और जमीन धँसने की घटना पहली बार हुई है लेकिन 500 से ज्यादा घरों में दरार आने के बाद स्थिति चिंताजनक हो गई है। लोग इस कड़ाके की ठंड में अपना घर छोड़ कहीं और पनाह लेने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने भी लोगों के लिए अस्थायी आवासों का इंतजाम किया है।

जोशीमठ में दरकती जमीन की वजह से सडकों व् अन्य जगहों पर दरार (फोटो क्रेडिट-aajtak)

आखिर क्यों हो रही हैं इस तरह की घटनाएँ

ऐसा नहीं है कि जोशीमठ में इस तरह के खतरों के बारे में पहले आगाह नहीं किया गया था। वर्ष 1976 में गढ़वाल के तत्कालीन कमिश्नर एससी मिश्रा की अध्यक्षता में मिश्रा समिति ने जोशीमठ की स्तिथि को लेकर रिपोर्ट सौंपी थी। उन्होंने उस समय यहाँ की भौगोलिक स्थिति के चलते इस तरह के खतरों के बारे में बताया था। रिपोर्ट में सलाह दी गई थी कि कि यहाँ अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएँ, पत्थरों को ब्लास्ट करके न हटाया जाए इत्यादि। इसके साथ आज जिस पक्के ड्रेनेज सिस्टम की माँग की जा रही है, उसकी भी सलाह मिश्रा समिति दे चुका था। इन हालातों के बाद तो अब यही समझ आता है कि सरकारों ने इसपर कभी ध्यान ही नहीं दिया।

हालाँकि सिर्फ एक कारण को ही आज जोशीमठ की स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कई चीजें स्वभाविक भी होतीं हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रोफेसर एसपी सती ने कहा कि जोशीमठ का पूरा इलाका मोरेन के ऊपर बसा है। मोरेन वो जगह होता है जो ग्लेशियर और ऊपर हजारों टन मिट्टी से मिलकर बना होता है। इस भौगोलिक घटना में कालांतर में मिट्टी पत्थर बन जाता है लेकिन नीचे का ग्लेशियर एक खास समय बाद पिघलने लगता है। क्योंकि जोशीमठ मोरेन पर स्थित है तो ग्लेशियर धीरे-धीरे पिघलेगा ही। हालाँकि उन्होंने कहा कि यहाँ होने वाले विकास कार्यों ने इन घटनाओं की रफ्तार और बढ़ा दी है।

वहीं कई वैज्ञानिक इस तरह की घटनाओं के लिए अलकनंदा और धौलीगंगा नदी को भी जिम्मेदार ठहराया है। इस थ्योरी में विश्वास रखने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि जोशीमठ पहले से ही हिमालय के बेहद कमजोर क्षेत्र में बसा है और ऐसे में अलकनंदा और धौलीगंगा का पानी यहाँ की मिट्टी को काट रहा है। दूसरी और छोटे-छोटे भूकंप भी यहाँ की स्थिति और भयावह कर रहे हैं। वहीं कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘तपोवन जलविद्युत परियोजना’ से भी काफी नुकसान हो रहा है। 2021 में आई बाढ़ से इस परियोजना को खासा नुकसान पहुँचा और जोशीमठ में जमीन के नीचे इसके 16 किलोमीटर सुरंग में भरा पानी अब ऊपर की ओर आ रहा है। इससे जमीन कमजोर हो रही है और इस तरह की घटनाएँ हो रही हैं।

तो क्या समाप्त हो जाएगा जोशीमठ का अस्तित्व

ऐसा नहीं है कि जोशीमठ एकदम से समाप्त हो जाएगा। लेकिन इस बात में पूरी सच्चाई है कि यह पवित्र शहर खतरे के मुहाने पर खड़ा है। जोशीमठ की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि यह जगह अब लंबे समय तक स्थिर नहीं रह सकता। लेकिन जैसा कि वैज्ञानिकों का मानना है कि भगौलिक स्थिति के अलावा यहाँ के विकास कार्यों की वजह से भी इस क्षेत्र की स्थिति ऐसी हो गई है कि लोगों को अपना घर-बार छोड़कर जाना पड़ रहा है। जरूरत है सरकार, भूगर्व वैज्ञानिक और एक्सपर्ट इस क्षेत्र की समस्या को गंभीरता से लें, हो सकता है सबके सामूहिक प्रयास से कुछ सकारात्मक रिजल्ट मिले और यहाँ के निवासी राहत की साँस लें सकें।

केरल का बीड़ी मजदूर, अमेरिका में जज बना: पत्नी के आने से बदली सुरेंद्रन के पटेल की किस्मत, हाउसकीपिंग से लेकर किराने की दुकान पर कर चुके हैं काम

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक सुरेंद्रन के पटेल अमेरिका के टेक्सास प्रांत में जिला न्यायाधीश बन गए हैं। एक गरीब मजदूर परिवार में जन्मे सुरेंद्रन की सक्सेस स्टोरी किसी फिल्म की तरह लगती है। सुरेंद्रन ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और बीड़ी मजदूर बन गए थे। इसके बाद, किस्मत पलटी और वह अमेरिका चले गए।

द वीक की रिपोर्ट के अनुसार, सुरेंद्रन के पटेल का जन्म केरल के कासरगोड में एक दिहाड़ी मजदूर के घर हुआ था। सुरेंद्रन का बचपन बेहद गरीबी से गुजरा। वह अपनी बहन के साथ बीड़ी बनाने का काम करते थे। घर की हालत खराब होने के कारण उन्होंने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और फुल टाइम बीड़ी मजदूर बन गए।

हालाँकि, पढ़ाई में एक साल का ब्रेक होने के बाद उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की। उनका एडमिशन इके नायनार मेमोरियल गवर्नमेंट कॉलेज में हुआ। चूँकि, वह अब भी बीड़ी बनाने का काम करते थे इसलिए कॉलेज में उनकी अटेंडेंस पूरी नहीं हुई। इस कारण उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। लेकिन, इसके बाद उन्होंने कॉलेज के टीचर्स से परीक्षा में बैठने की अनुमति माँगी।

पटेल कहते हैं, “यदि मैं टीचर्स को बताता कि वह बीड़ी बनाने वाले मजदूर हैं। तो, टीचर्स के मन में उनके लिए सहानुभूति होती। लेकिन, मैंने इस बारे में बात न करते हुए टीचर्स से कहा कि यदि परीक्षा में मेरे अच्छे नंबर नहीं आए तो मैं पढ़ाई छोड़ दूँगा।” हालाँकि, जब रिजल्ट आया तो वह टॉपर थे। इसके बाद, टीचर्स ने उनका बहुत सपोर्ट किया। इस कारण उन्होंने ग्रेजुएशन में भी टॉप किया।

चूँकि, वह वकील बनने का सपना देख रहे थे। इसलिए, कालीकट गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी करना चाहते थे। लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें यहाँ भी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कॉलेज के पहले साल तो उन्हें कुछ दोस्तों से मदद मिल गई। लेकिन, इसके अगले साल उन्होंने एक होटल में हाउस-कीपिंग का काम करना शुरू कर दिया।

साल 1995 में कानून की डिग्री लेने के बाद उन्होंने केरल के होसडर्ग में प्रैक्टिस शुरू की और लगातार सफलता प्राप्त करते चले गए। इसके बाद, साल 2004 में उन्होंने सुधा नामक एक जूनियर वकील से शादी कर ली। बाद में, सुधा की नौकरी स्टाफ नर्स के रूप में लग गई और वह दिल्ली शिफ्ट हो गए। दिल्ली में ही वह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। इसके बाद उनकी पत्नी सुधा की नौकरी अमेरिका के ह्यूस्टन में लग गई।

पत्नी की नौकरी ह्यूस्टन में लगने के कारण दोनों अमेरिका चले गए। जहाँ, सुधा अपनी नौकरी करतीं लेकिन सुरेंद्रन पटेल एक किराना दुकान में काम करते थे। इसके बाद, उन्होंने अमेरिका में भी बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की। जहाँ उन्हें सफलता मिलने लगी। तब उन्हें ऐसा लगा कि वह जज बन सकते हैं। चूँकि, उनकी पत्नी वहाँ नौकरी में थीं, इसलिए उन्होंने अमेरिका की नागरिकता के लिए प्रयास किया। सौभाग्य से साल 2017 में उन्हें नागरिकता मिल गई।

साल 2020 में उन्होंने जज बनने के लिए पहली बार प्रयास किया। हालाँकि, तब उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन, सुरेंद्रन पटेल ने हार नहीं मानी। साल 2022 में उन्होंने एक बार फिर दावेदारी पेश की। हालाँकि, कई लोगों ने उन्हें जज बनने का सपना छोड़ने के लिए कहा। लेकिन, वह नहीं माने। तमाम प्रयासों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। जहाँ चुनाव में उन्होंने विपक्षी रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराते हुए जीत दर्ज की।

कुल मिलाकर देखें तो, एक गरीब मजदूर परिवार में जन्म लेने और समस्याओं से घिरे होने के बाद भी सुरेंद्रन ने हार नहीं मानी। वह लगातार कठिन परिश्रम करते हुए सफलता के नए आयाम स्थापित करते जा रहे थे। समय ने भी उनका साथ दिया और अब वह अमेरिकी राज्य टेक्सास के 240वें जिला न्यायाधीश बन गए।

गाड़ी का नहीं था लाइसेंस, इसलिए चचेरे भाई को फँसाया: कंझावला केस में पुलिस ने कार मालिक को किया गिरफ्तार, 7वें आरोपित ने भी सरेंडर किया

दिल्ली कंझावला एक्सीडेंट केस दिन ब दिन उलझता जा रहा है। पुलिस ने आज केस के 7वें आरोपित अंकुश को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस मामले में एक नया खुलासा हुआ है। इसके अनुसार अंजलि को ठोकर मारने के बाद घसीटने वाले कार में कुल 4 ही लोग थे। दरअसल, कार चलाने के आरोप में जिस दीपक खन्ना को गिरफ्तार किया गया था, वह कार में था ही नहीं बल्कि अपने घर पर था।

कंझावला केस की जाँच कर रही पुलिस ने मामले में एक नई थ्योरी दी है। पुलिस ने बताया है कि हादसे के वक्त आरोपित दीपक के फोन का लोकेशन बाकी के 4 आरोपितों के लोकेशन से मेल नहीं खा रहा है। दीपक के कॉल रिकॉर्ड और फोन लोकेशन से पता चला है कि हादसे वाले दिन वह घर पर ही था। दीपक को 5 आरोपितों के साथ 01 जनवरी को ही गिरफ्तार किया गया था।

मामले में दीपक का नाम कैसे आया ?

पुलिस के अनुसार कार आरोपितों में से एक अमित खन्ना चला रहा था। हादसे के बाद अमित ने अपने भाई अंकुश खन्ना को इस बात की जानकारी दी। अमित और अंकुश के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। दोनों ने अपने चचेरे भाई दीपक खन्ना से संपर्क किया और कार चलाने का आरोप स्वीकारने के लिए मनाया। पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि कार का मालिक आशुतोष नाम का व्यक्ति है।

दिल्ली पुलिस ने आशुतोष को गिरफ्तार किया

पुलिस ने मामले में अमित के भाई अंकुश और कार के मालिक आशुतोष को भी आरोपित बनाया। अब मामले में 7 आरोपित हैं। पुलिस ने कार के मालिक आशुतोष को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के वक्त आशुतोष भी कार में नहीं था लेकिन उसपर सच छिपाने और आरोपितों को बचाने के लिए साजिश में शामिल होने का इल्ज़ाम लगा है। इससे संबंधित एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है जिसमें आशुतोष हादसे के बाद बाकी के आरोपितों से मिलता नज़र आ रहा है। पुलिस अब अंकुश की गिरफ्तारी की कोशिश कर रही है।

सहेली निधि की गिरफ्तारी की ख़बर गलत

उधर ऐसी खबरें सामने आई कि अंजलि की दोस्त निधि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने इस पर कहा है कि निधि को गिरफ्तार नहीं किया गया है बल्कि उसे पूछ-ताछ के लिए बुलाया गया है। बता दें कि हादसे के बाद निधि अपनी दोस्त को छोड़कर फरार हो गई थी। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने निधि को भी आरोपित बनाने की माँग की थी। उन्होंने केस की जाँच सीबीआई से कराए जाने की भी माँग की है।

बता दें कि 1 जनवरी, 2023 को अंजलि की भयानक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी स्कूटी को टक्कर मारते हुए एक कार उसे 12 किलोमीटर तक घसीटती रही। पुलिस ने कार सवार आरोपितों पर गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से गाड़ी चलाने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

नशे में धुत हो महिला यात्री पर पेशाब, फिर बाल-बच्चों की दुहाई दे गिड़गिड़ाया, अब कहा- मुआवजा दे मामला सुलझाया: एयर इंडिया पर भी सवाल

एयर इंडिया फ्लाइट में महिला सहयात्री पर पेशाब करने वाले शख्स ने मुआवजा देकर मामला सुलझाने का दावा किया है। पीड़ित महिला भी सामने आई हैं और अपने साथ हुई घटना के बारे में विस्तार से बताया है। दिल्ली पुलिस आरोपित शंकर मिश्रा की तलाश कर रही है। वहीं नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयर इंडिया को फटकार लगाते हुए नोटिस जारी किया है।

आरोपित शंकर मिश्रा ने शुक्रवार (6 जनवरी 2022) को अपने वकीलों के जरिए एक बयान जारी कर कहा कि मामला सुलझा लिया गया है। बुजुर्ग महिला को मुआवजा दे दिया गया है। उस पर न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में शराब के नशे में धुत होकर महिला सहयात्री के सामने अपनी जिप खोलने और उनके ऊपर पेशाब करने का आरोप है।

बयान में कहा गया है, “आरोपित और महिला के बीच व्हाट्सएप मैसेज स्पष्ट रूप से दिखाता है कि आरोपित ने 28 नवंबर 2022 को कपड़े और बैग साफ करवाए थे। 30 नवंबर को उन्हें डिलीवर किया गया था। वहीं, महिला ने अपने मैसेज में इस घिनौनी करतूत की निंदा की है। साथ ही शिकायत दर्ज करने में कोई रूचि नहीं दिखाई है।”

बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला की शिकायत केवल एयर इंडिया द्वारा भुगतान किए जा रहे मुआवजे के संबंध में थी, जिसके लिएउन्होंने 20 दिसंबर को शिकायत की थी। मिश्रा ने 28 नवंबर को पेटीएम पर दोनों पक्षों के बीच समझौते के अनुसार मुआवजे का भुगतान किया था। लेकिन लगभग एक महीने बाद 19 दिसंबर को महिला की बेटी ने पैसे वापस कर दिए। इसमें यह भी कहा गया है, “इस घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था और केबिन क्रू के बयानों से दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते की पुष्टि हुई है। आरोपित को देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और वह जाँच प्रक्रिया में सहयोग करेगा।”

वहीं डीजीसीए ने कहा है कि इस मामले मे एयर इंडिया का रवैया गैर पेशेवर प्रतीत होता है। उड़ान के चालक दल के सदस्यों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। डीजीसीए ने बयान में कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि विमान में सवार यात्री के असभ्य व्यवहार से निपटने के लिए जरूरी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

गिड़गिड़ाते हुए माफी माँगी

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, महिला की इच्छा के विरुद्ध फ्लाइट के क्रू मेंबर्स ने आरोपित से बात कर इस मामले को सुलझाने को कहा था। वे आरोपित को उनके सामने ले आए। उन्हें देखते ही वह रोने लगा और गिड़गिड़ाते हुए उनसे माफी माँगी। आरोपित ने महिला से शिकायत न करने का आग्रह करते हुए कहा था कि वह नहीं चाहता कि उसकी हरकत की वजह से उसकी पत्नी और बच्चे परेशान हो। पीड़िता द्वारा एअर इंडिया को की गई शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामले में एक एफआईआर दर्ज की थी।

उन्होंने बताया कि उनके दामाद ने 27 नवंबर को एयर इंडिया को शिकायत भेजी और एयरलाइन टिकट के पैसे वापस देने को राजी हो गई। लेकिन राशि का आंशिक हिस्सा ही लौटाया गया। महिला ने कहा कि उन्होंने जो दर्दनाक अनुभव किया उसके लिए यह बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।

गौरतलब है कि अमेरिका के ‘जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट’ से दिल्ली आ रही उड़ान संख्या एआई-102 में 26 नवंबर, 2022 को यह घटना घटी थी। इस घटना को लेकर ‘एयर इंडिया’ ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया था कि भोजन परोसे जाने के और फ्लाइट के अंदर की रोशनी कम किए जाने के बाद यह घटना हुई।

प्रिंस हैरी ने अफगानिस्तान में मारे 25 तालिबानी: लीक हुई आत्मकथा ‘स्पेयर’, ओल्ड लेडी के साथ सेक्स से लेकर कोकीन तक आया बाहर

ब्रिटेन के प्रिंस हैरी (Prince Harry) अपनी आत्मकथा ‘स्पेयर’ (Spare) के लिए सुर्खियों में हैं। उनकी यह किताब 10 जनवरी 2023 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही इसका स्पेनिश भाषा का संस्करण गलती से मार्केट में आ गया। हालाँकि, इस गलती का पता चलने के तुरंत बाद किताबों को वापस ले लिया गया। इस दौरान पुस्तक से जुड़ी कई बातें सामने आ चुकी हैं।

अफगानिस्तान में मार दिए 25 तालिबानी

प्रिंस हैरी ने अपनी आत्मकथा ‘स्पेयर’ में दावा किया है कि जब वे ब्रिटिश सेना में बतौर पायलट काम कर रहे थे, तब सेना ने उन्हें सिखाया था कि तालिबानियों को इंसानों की तरह नहीं बल्कि शतरंज की मोहरों की तरह देखना है।

उन्होंने लिखा है कि ब्रिटिश सेना में काम करने के दौरान वह कुल मिलाकर 6 मिशनों का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने तालिबान के 25 लड़ाकों को मौत के घाट उतार दिया था। प्रिंस हैरी ने यह भी लिखा है कि उन्होंने अफगानिस्तान में जो भी किया, उसके लिए उन्हें किसी प्रकार की शर्मिंदगी या पछतावा नहीं है।

प्रिंस विलियम के साथ जंग

प्रिंस हैरी ने ‘स्पेयर’ में कहा किया है कि जब उन्होंने शाही परिवार में अपनी और मेगन मर्कल को शादी की बात बताई थी तो वहाँ आपस में बहस होने लगी थी। इस दौरान तीखी बहस के बीच प्रिंस विलियम ने उन पर हमला कर दिया था।

उन्होंने लिखा है, “सबसे पहले तो विलियम गुस्से में चिल्लाए, फिर मेरे पास आए। यह सब बहुत तेज़ी से हुआ। उन्होंने मेरा कॉलर पकड़ लिया, फिर मेरा हार तोड़ दिया और मुझे फर्श पर पटक दिया। मैं कुत्ते के कटोरे के पास जा गिरा, जो मेरी पीठ के नीचे आकर फट गया और उसके टुकड़े मेरे शरीर में घुस गए। मैं एक पल के लिए वहीं पड़ा रहा। मैं हैरान था फिर वो मेरे पैरों पर चढ़ गए और मैंने उन्हें वहाँ से बाहर चले जाने के लिए कहा।”

17 साल की उम्र में कोकीन

हैरी ने अपनी आत्मकथा में ड्रग्स को लेकर भी खुलासा किया है। उन्होंने लिखा है, “एक वीकेंड के दौरान मैं किसी और के घर पर कोकीन ले रहा था। मुझे एक लाइन (कोकीन) ऑफर की गई थी। हालाँकि, यह बेहद मजेदार नहीं थी, यानी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ जैसा कि दूसरों के साथ होता है। मैंने दूसरों की तरह खुशी महसूस नहीं की। हालाँकि, कोकीन लेने के बाद मैं खुद को अलग महसूस कर रहा था। मेरा यही उद्देश्य था खुद को अलग महसूस करना।”

उन्होंने आगे लिखा है, “मैं उस समय एक सत्रह साल का बच्चा था, जो शायद कुछ भी करने को तैयार था। मुझे लगता है कि यही वो सब था जो मैं खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था।”

17 साल की उम्र में ही किया पहली बार सेक्स

प्रिंस हैरी ने दावा किया है कि जब वह महज 17 साल के थे, तब उन्होंने एक पब के पास खुले पार्क में अपने से बडी उम्र की एक महिला के साथ सेक्स किया था। उन्होंने दावा किया है कि वह महिला घोड़ों को बहुत प्यार करती थी और उसने उनके साथ भी घोड़ों जैसा ही व्यवहार किया। प्रिंस हैरी ने दावा है कि जब वह यह सब खुले पार्क में कर रहे थे तब उन्हें कई लोगों ने देखा होगा।

प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी ने पहनाया नाजी कॉस्ट्यूम

प्रिंस हैरी ने अपने बड़े भाई प्रिंस विलियम और भाभी केट मिडल्टन पर नाजी कॉस्ट्यूम पहनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जब वह वह महज 20 साल के थे, तब एक पार्टी में जाने के लिए वह पायलट और नाजी कॉस्ट्यूम को लेकर कन्फ्यूज थे। इसलिए उन्होंने प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी केट मिडल्टन से इस बारे में पूछा था। तब दोनों ने उन्हें नाजी कॉस्ट्यूम पहनने के लिए कहा और फिर उनका मजाक उड़ाया।

साल 2005 में हुई इस घटना की फोटो भी सामने आई थी। इसमें वह हुक्ड क्रॉस वाले कपड़ों के साथ नाजी सैनिक के रूप में दिखाई दे रहे थे। नाजी सैनिक के रूप में उनकी फोटो सामने आने के बाद दुनिया भर में प्रिंस हैरी की आलोचना हुई थी। इससे पहले दिसंबर 2022 में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘हैरी एंड मेगन’ में भी उन्होंने नाजी कॉस्ट्यूम पहनने को लेकर दुःख जताया था।

घरवालों ने नहीं दी महारानी एलिजाबेथ की मौत की खबर

प्रिंस हैरी ने दावा किया है कि महारानी एलिजाबेथ की मौत के बारे में उन्हें घरवालों से नहीं, बल्कि एक न्यूज रिपोर्ट से पता चला था। उन्होंने लिखा, “जब मैं फ्लाइट से उतर रहा था तो मैंने अपने मोबाइल पर मेगन का मैसेज था, ‘मैसेज देखते ही मुझे कॉल कीजिए’।”

उन्होंने आगे लिखा है, “इसके बाद मैंने बीबीसी की न्यूज देखी। मेरी दादी की मृत्यु हो गई थी और अब मेरे पिता राजा थे। मैंने एक काली टाई लगाई, भारी बारिश में विमान से उतर गया।” उन्होंने यह भी दावा किया है कि महारानी की मौत के बाद उनके पिता ने उनसे कहा था कि मेगन को बाल्मोरल मत लाना।

प्रिंस हैरी ने लिखा है, “मेरे पिता ने मुझे फोन किया। उन्होंने मुझे बताया कि मेरा बाल्मोरल में स्वागत है, लेकिन… उसके (मेगन) बिना।” उन्होंने आगे लिखा है कि उनकी पत्नी के बारे में पिता का बर्ताव उन्हें बेहद अपमानजनक लगा।

कुणाल कामरा पर अवमानना की कार्रवाई शुरू, CJI ने खुद को अलग किया: बताया था फ्लाइट अटेंडेंट, कहा था- कल की बातें भूल जा…पकड़ के झूल जा

विवादित कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) के खिलाफ मानहानि केस की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) ने खुद को अलग कर लिया है। दरअसल, कामरा ने न्यायपालिका और जजों के खिलाफ कई अपमानजनक ट्वीट किए थे।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कामरा द्वारा न्यायालय की अवमानना से जुड़ी याचिकाओं के संबंध में कहा, “हम इस मामले को बेंच के समक्ष रखेंगे। जो ट्वीट किए गए हैं, वे मेरी ओर से सुनाए गए फैसले को लेकर किए गए हैं। इसलिए मैं इस सुनवाई का हिस्सा नहीं रहूँगा।”

कुणाल कामरा ने कई मौके पर सुप्रीम कोर्ट और न्यायाधीशों को अपमानजक बातें कही हैं। सबसे पहले उन्होंने साल 2020 में पत्रकार अर्णब गोस्वामी को दी गई जमानत पर किया था। यह मामला उद्धव ठाकरे सरकार और रिपब्लिक टीवी से जुड़ा था।

उस दौरान कामरा ने कहा था, “डीवाई चंद्रचूड़ एक फ्लाइट अटेंडेंट हैं, जो प्रथम श्रेणी के यात्रियों को तेजी से शैंपेन परोसते हैं, जबकि आम लोगों को पता ही नहीं कि वे कभी उस पर सवार होंगे भी या नहीं, सेवा करना तो दूर की बात है। *न्याय*।”

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बोबड़े को लेकर भी आपत्तिजनक ट्वीट किया था। अपने ट्वीट में मिडिल फिंगर को दिखाते हुए कामरा ने ट्वीट किया था, “इन 2 अंगुलियों में से एक सीजेआई अरविंद बोबडे के लिए है … ठीक है, मैं आपको भ्रमित नहीं करता हूँ। यह बीच वाली अंगुली है।”

इसी तरह एक अन्य ट्वीट में कुणाल कामरा ने कहा था, जिन वकीलों के पास रीढ़ की हड्डी हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट या उसके जजों का जिक्र करते समय ‘माननीय’ शब्द का प्रयोग बंद कर देना चाहिए। ‘ऑनर’ इस इमारत को बहुत पहले ही छोड़ चुका है…।”

कामरा ने आगे कहा था, “देश का सर्वोच्च न्यायालय, जिसे मैं भी नहीं मानता… मैं एक शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट का अधिक सम्मान करता हूँ… कम से कम यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करता है। देश का सर्वोच्च न्यायालय ‘ब्राह्मण-बनिया’ का मामला है। मैं इसका सम्मान नहीं करता।”

सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही चल रहे अपने अवमानना केस को लेकर कामरा ने इसी साल मार्च महीने में कहा, “प्रिय सुप्रीम कोर्ट! कल की बातें भूल जा, ल*ड़ा पकड़ के झूल जा।” कामरा यहीं नहीं रुके। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और जजों के खिलाफ लगातार ट्वीट किए।

कुणाल कामरा के इन ट्विट्स को लेकर तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को कुल 10 पत्र मिले थे। इनमें स्टैंडअप कॉमेडियन के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मुकदमा शुरू करने की इजाजत माँगी गई थी। इसके बाद वेणुगोपाल ने कुणाल कामरा के खिलाफ कोर्ट की अवमानना के मामले में सुनवाई शुरू करने की इजाजत दे दी थी।

बता दें कि न्यायालयों की अवमानना अधिनियम, 1971 के अनुसार किसी व्यक्ति पर अवमानना का केस चलाने के लिए अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की इजाजत जरूरी है। यदि मामला किसी राज्य के हाईकोर्ट से जुड़ा है तो अवमानना का केस चलाने से पहले राज्य के महाधिवक्ता से इजाजत लेनी पड़ती है।

चुस्त कपड़े पहन बाइक रेस देखने पहुँची लड़की पर टूटे इस्लामी कट्टरपंथी, घेरकर लात-घूँसों से मारा: इराक की घटना, 16 गिरफ्तार

इराक में हुए बाइक रेस इवेंट की एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। दावा है कि यहाँ छोटे कपड़े पहनकर पहुँची एक लड़की को देख कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उस पर हमला किया। लड़की की उम्र सिर्फ 17 साल है। भीड़ ने उसे लात-घूँसों से मारा है। यह घटना 30 दिसंबर 2022 की है। इस मामले में पुलिस ने 16 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, लड़की पर यह हमला इराक के कुर्दिस्तान (Iraqi Kurdistan) में सुलेमानियाह (Sulaymaniyah) शहर में हुआ। बताया जा रहा है कि लड़की बाइक रेस देखने गई थी, जहाँ महिलाओं के न आने की माँग गई थी। वीडियो देखने के बाद लोगों में काफी आक्रोश है। वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि लड़की ने ब्राउन कलर का एक टॉप, कार्डिगन और एक स्कर्ट पहनी हुई है। वह तेज कदमों से भीड़ से दूर भागती नजर आ रही है। लेकिन बाइक रेस इवेंट में सैकड़ों कट्टरपंथी मुस्लिम इराकी लड़की को देखकर जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं। उसका पीछा कर रहे हैं। इस दौरान लड़की काफी डरी हुई लग रही है। वह वहाँ से भागने की कोशिश कर रही है, लेकिन उन लोगों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। एक शख्स उसे पीछे से लात मारते हुए भी दिख रहा है। इस बीच उसे बचाने के लिए बाइक से एक लड़का आता है और अपनी जान पर खेलकर उसे उन दरिंदों से बचा कर ले जाता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन लोगों ने लड़की का अपमान किया, उसको पीटा, जिससे उसे थोड़ी बहुत चोटें भी आईं। वहीं, उसकी ओर से बीच-बचाव करने वाले एक व्यक्ति को चाकू मार दिया गया।

सुलेमानियाह के पुलिस प्रमुख सरकावत अहमद ने कहा कि हमले में शामिल 16 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार ने एक बयान जारी कर इस हमले की निंदा की और इसे घृणित बताया। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह सुलेमानियाह प्रांत में एक और हमला हुआ। वहीं, प्रवक्ता जोतियार आदिल ने कहा, “ये घटनाएँ अस्वीकार्य हैं।”

कुर्दिस्तान के ड्रॉ मीडिया के अनुसार, पुरुषों ने माँग की थी कि बाइक रेस कार्यक्रम से महिलाओं को बाहर रखा जाए। लड़की पर हमला करने वालों का कहना है कि उसके कपड़ों की वजह से उनका और बाइकर्स का ध्यान भटक रहा था। लड़कियों को इस तरह के शो में नहीं आना चाहिए, क्योंकि उनके होने से लोगों का ध्यान शो की बजाए उन पर होता है।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स द्वारा शेयर की गई इस वीडियो पर देश के वरिष्ठ नेताओं ने भी कमेंट किया है। कुर्दिस्तान संसद की स्पीकर रेवाज फाक ने इसे मूर्खतापूर्ण हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह हमला हमारे देश की महिलाओं के खिलाफ हो रहे बर्बर हमलों की कहानी बयाँ कर रहा है।

रेवाज ने ट्वीट किया, “किसी सामान्य व्यक्ति की तरह केवल एक रेस देखने की इच्छा रखने वाली लड़की पर इन पुरुष दरिंदों द्वारा किया गया बेहूदा हमला हमारी महिलाओं के खिलाफ व्यवस्थित रूप से इस्तेमाल किए गए एक बर्बर नरैटिव का परिणाम है। इस बर्बरता से जो समाज या सत्ता नहीं जागी, उसे शीघ्र मृत्यु की प्रतीक्षा करनी होगी।”

इमामों की सैलरी 50% बढ़ी, 5% का सालाना इंक्रीमेंट: वक्फ बोर्ड ने हरियाणा के CM का किया सम्मान, कहा- भारत में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ

हरियाणा वक्फ बोर्ड ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का सम्मान किया है। ऐसा राज्य के इमामों का मानदेय बढ़ाने को लेकर किया गया है। यह समारोह गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में गुरुवार (5 जनवरी 2023) को हुआ था। बीते साल ​हरियाणा में इमामों के वेतन में 50 फीसदी की वृद्धि की गई थी। साथ ही हर साल 5 फीसदी इंक्रीमेंट देने की बात भी कही गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को आयोजित सम्मान समारोह पहला मौका था जब हरियाणा के मुख्यमंत्री वक्फ बोर्ड के इमामों से मुखातिब थे। इमामों के एक संगठन ‘तंजीम आइमा-ए-औकाफ’ ने कहा है कि वेतन वृद्धि शानदार है और हरियाणा में विभिन्न मस्जिदों में काम करने वाले कम से कम 800 इमामों को इससे लाभ होगा। इमामों को हरियाणा वक्फ बोर्ड द्वारा वेतन दिया जाता है। वक्फ बोर्ड राज्य सरकार से अनुदान प्राप्त करता है। साथ ही खुद की संपत्तियों से भी उसकी आय होती है।

हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक जाकिर हुसैन ने कहा कि इमामों को अब 14,000 रुपए से लेकर 16,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय के रूप में दिए जाएँगे। उन्होंने कहा, “इमामों के वेतन में 5% वार्षिक वृद्धि का प्रावधान भारत में इससे पहले कहीं नहीं हुआ है।” इस अवसर पर सीएम खट्टर ने कहा, “हरियाणा में भाईचारा बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। इमाम संगठनों की माँगों को देखते हुए हमने मौलानाओं और इमामों के मानदेय में बढ़ोतरी की है। पिछले कई वर्षों से माँगों पर विचार नहीं किया गया था।”

कार्यक्रम के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए खट्टर ने कहा, “मेवात जैसे क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए इमाम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हम इस क्षेत्र में अधिक बुनियादी ढाँचे और विकास के निर्माण पर भी काम कर रहे हैं। इमामों ने मेवात में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के साथ-साथ ‘स्वच्छ भारत’ अभियान की सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।”

खट्टर ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि मंदिर के पुजारियों को भी उन संगठनों द्वारा न्यूनतम वेतन दिया जाए जो उन्हें नियुक्त करते हैं। उन्होंने कहा, “इसकी निगरानी के लिए और इस वर्ग के कल्याण के लिए सरकार द्वारा एक बोर्ड का गठन किया गया है।” गौरतलब है कि खट्टर ने दिसंबर 2022 में करनाल में एक कार्यक्रम के दौरान ‘पुजारी पुरोहित कल्याण बोर्ड’ का गठन करने की बात कही थी।