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दिलदार के मामा के घर से हथियार-खून लगी शर्ट बरामद, यहीं जनजातीय लड़की को काटे जाने की आशंका: आँगनबाड़ी केंद्र के पास मिले थे पैर और सीने के हिस्से

झारखंड के साहेबगंज से श्रद्धा हत्याकांड जैसा मामला सामने आने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो आरोपित दिलदार अंसारी ने रिबिका के शव के 18 टुकड़े कर फेंक दिया था। मामले में अब नई जानकारी निकलकर सामने आ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अंसारी के मामा के घर से खून से सने कपड़े बरामद हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अंसारी ने यहीं पर घटना को अंजाम दिया था।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि आरोपित अंसारी के मामा मोईनुल अंसारी के घर से खून से सने कपड़े बरामद किए गए हैं। पुलिस को शक है कि अंसारी ने यहीं पर रिबिका के शव के टुकड़े किए होंगे। घटना के बाद से मोईनुल फरार है। पुलिस को कत्ल में प्रयोग हुआ हथियार दिलदार के मामा मोईनुल के घर से मिला था। अब मोईनुल के घर से खून से सने कपड़े मिलने से मामले में उसकी मिलीभगत का भी शक जताया जा रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक रिबिका पहाड़िन और दिलदार अंसारी दो साल से रिलेशनशिप में थे और कुछ दिन पहले पहले ही दोनों ने शादी की थी। हालाँकि दोनों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि अब तक रिबिका के शव के 12 टुकड़ों को बरामद किया जा चुका है। संथाल के डीआईजी सुदर्शन प्रसाद मंडल ने बताया, ”रिबिका दिलदार अंसारी की दूसरी पत्नी थी। उसकी पहले से ही एक पत्नी थी। यही उनके विवाद का कारण था। इसके चलते अंसारी ने उसकी हत्या कर दी और उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए। जाँच में उसके पति के शामिल होने की बात सामने आई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना लोगों की जानकारी में तब आई जब बोरियो थानाक्षेत्र के संताली पंचायत के मोमिन टोला में कुछ ग्रामीणों ने इंसानी शव के टुकड़े बिखरे देखे। इन टुकड़ों को कुत्ते नोच कर खा रहे थे। आँगनबाड़ी केंद्र के पास पड़े इन टुकड़ों में पैर और सीने के हिस्से थे। आखिरकार लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लाश के बिखरे हिस्सों को कब्ज़े में लिया और जाँच शुरू कर दी।

जाँच के दौरान पुलिस ने शव की शिनाख्त करवाई। लाश जनजातीय समुदाय की महिला रिबिका पहाड़िन की निकली। इस बीच पुलिस को महिला के पति दिलदार अंसारी पर शक हुआ। पुलिस ने दिलदार को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कुछ ही देर में उसने सच उगल दिया। शादी के बाद दिलदार और रिबिका में आए दिन झगड़े होते थे जिसके बाद उसने ये कदम उठाया।

लाश को टुकड़ों में काटने के लिए दिलदार ने लोहा काटने वाली मशीन (इलेक्ट्रिक कटर) का प्रयोग किया था। पुलिस को कत्ल में प्रयोग हुआ हथियार दिलदार के मामा मोईनुल के घर से मिला था। इसी मामले में दिलदार के परिजन मोहम्मद मुस्तकीम, उनकी बीवी मरियम खातून, दिलदार की पहली पत्नी गुलेरा, दिलदार के भाई अमीर अंसारी, महताब अंसारी और दिलदार की बहन शारेजा खातून को भी हिरासत में लिया गया है। इन सभी से पूछताछ चल रही है। कुछ रिपोर्ट की मानें तो दिलदार की माँ मरियम ने रिबिका को मरवाने के लिए उसकी 20 हजार रुपए की सुपारी दी हुई थी। वह लगातार दिलदार को भड़काती थी कि जिसकी वजह से रिबिका से लड़ाई होती रहती थी।

ST इलाकों में लैंड के लिए लव जिहाद: जनजातीय लड़कियों को दूसरी-तीसरी बीवी बना रहे मुस्लिम, PFI ने इसी ट्रिक से खरीदा था 10000 एकड़ जमीन

देश के जनजातीय समुदाय की लड़कियों के साथ शादी करके उनकी जमीनों को हड़ने का षडयंत्र देश भर में चल रहा है। अभी हाल ही में इस संबंध में मध्य प्रदेश सरकार ने एक कानून बनाया है, लेकिन इससे सबसे त्रस्त झारखंड वोट बैंक की राजनीति के कारण इसे नजरअंदाज कर रहा है।

झारखंड के विभिन्न इलाकों, खासकर साहिबगंज संताल परगना में जनजातीय युवतियों से मुस्लिम लड़के प्रेम के नाम पर दुष्कर्म, हत्या और उनकी जमीनों हो हड़पने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के अनेक युवक शादीशुदा होने के बावजूद जनजातीय युवतियों को प्रेमजाल में फँसाकर शादी कर रहे हैं।

शादी करने के बाद मुस्लिम युवकों द्वारा इन जनजातीय युवतियों को उन क्षेत्रों में चुनाव लड़वाते हैं, जो उनके लिए आरक्षित होते हैं। कई बार आदिवासियों की जमीनों को खरीदने के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। इतना ही नहीं, इस शादी के नाम पर मुस्लिम समुदाय के लोग वनवासियों के बीच अपनी पैठ बढ़ाते हैं और उनकी लड़कियों को नौकरी आदि का लालच देकर मानव तस्करी कर देह व्यापार में धकेल देते हैं।

पहाड़िया आदिवासियों के पास काफी जमीन हैं। ऐसे में अगर कोई मुस्लिम युवक इनकी समुदाय की लड़कियों से शादी करता है तो बाद में उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेता है। बोरियो इलाके में पिछले एक साल में 100 से अधिक मुस्लिम युवकों ने जनजातीय युवतियों से प्रेम विवाह किया है। पहाड़िया समुदाय की बोरियो, बरहेट, तालझारी औऱ पतना प्रखंड में अच्छी-खासी आबादी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत पहाड़िया जनजातीय धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं। अब मुस्लिमों की इन पर नजर लगाए हैं। इस तरह इस जनजाति की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है। संताल परगना की प्रमुख आदिवासी जनजाति संताल से पहाड़िया की प्रतिद्वंद्विता है। ऐसे में मौका तलाशने वालों को मौका भी मिल जाता है।

प्रतिबंधित PFI का जमीनों पर कब्जा

अमित मालवीय ने कहा कि जनजातीय महिला की हत्या को PFI के भारत में इस्लामिक सत्ता कायम करने वाले एजेंडे के साथ देखना चाहिए। जनजातीय महिलाओं को दूसरी बीवी की तरह लेना, फिर उनके माध्यम से चुनाव जीतना, ज़मीन पर क़ब्ज़ा करना, रणनीति का हिस्सा है। जनजातीय महिला के बाद संपत्ति गैर-जनजातीय पति की होती है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी साहिबगंज में दो दिन पहले पहाड़िया समुदाय की एक युवती रबिका पहाड़न को उसके मुस्लिम शौहर दिलदार अंसारी ने 12 टुकड़ों में काटने का मामला उठाया। दिलदार से रबिका से शादी करने के एक सप्ताह बाद ही उसकी हत्या कर इलेक्ट्रिक कटर से शव को टुकड़े-टुकड़े कर फेंक दिया था।

इस काम में मुस्लिम की मदद प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) भी कर रहा है। इसके आधार पर प्रतिबंध के बावजूद वह अपना आधार लगातार झारखंड में बढ़ा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की शादियों के जरिए PFI ने झारखंड के करीब 10,000 एकड़ जमीन खरीद कर कब्जा कर लिया है।

करीब चार पहले झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने पुलिस मुख्यालय को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि PFI प्रतिबंध के बावजूद पीएफआई पाकुड़, जामताड़ा, साहेबगंज और गोड्‌डा में संगठन का विस्तार कर रहा है।

झारखंड में जिन जगहों पर PFI ने सबसे अधिक जमीनें खरीदी हैं उनमें राजमहल, उधवा, तालझारी और बरहेट प्रखंड के अयोध्या, जोगोटोला, वृंदावन, करमटोला, महाराजपुर, बालूग्राम, गंगटिया, जाेंका, तीन पहाड़ बाजार और पाकुड़ के चंद्रापाड़ा, राशिपुर, जोगाडीह व पादरकोला गाँव शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कई गाँवों में PFI ने जमीनों पर कब्जा कर लिया और बाद में उसे औने-पौने दामों में खरीद लिया। PFI इस काम के लिए ना सिर्फ स्थानीय मुस्लिमों का इस्तेमाल कर रहा है, अवैध रूप से इन इलाकों में रहने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी फंडिंग कर रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इन जनजातियों युवतियों से शादियों के जरिए ना सिर्फ चुनाव लड़ा कर सत्ता में दखल बढ़ाई जा रही है और जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, बल्कि इसके जरिए नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजंस (NRC) से बचने का उपाय भी किया जा रहा है। संथाल परगना के चार जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ मिलकर PFI ने वनवासियों की जमीन बड़े पैमाने पर खरीदी है। 

PFI के सदस्य आदिवासी लड़कियों से शादी कर उनके नाम से जमीन खरीद रहे हैं। ऐसा करके बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद को आसानी से झारखंड का निवासी सकते हैं। दरअसल, मुस्लिमों से शादी करने वाली आदिवासी महिला अपने दस्तावेज में पति का नाम न दिखाकर पिता का नाम दर्ज कराती है। इससे उसकी जमीन का मालिक उसका गैर जनजातीय पति बन जाता है।

इस पर रोक के लिए मध्य प्रदेश ने PESA कानून बनाया

इस समस्या को देखते हुए पिछले महीने यानी नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार अधिनियम (PESA Act) लागू किया है। इस कानून के तहत जनजातीय क्षेत्र की ग्राम सभाओं को अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, ताकि जनजातीय लोगों की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से जनजातीय महिलाओं से विवाह एवं धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सकें।

इसे लागू करने की घोषणा करते हुए सीएम मुख्यमंत्री चौहान ने कहा था, “कई बार धोखे से, छल-कपट से, हमारी जनजातीय बहनों-बेटियों को लालच देकर विवाह कर लिया जाता है, उनके नाम पर जमीन दे दी जाती है और वह जनजातीय भूमि कहलाती है। कभी-कभी धर्मांतरण का भी उपयोग किया जाता है। अब हम मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं दिया जाएगा।”

मध्य प्रदेश में इस कानून के तहत राज्य के 89 जनजातीय ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले 5,212 पंचायतों के 2,350 गाँवों की ग्राम सभाओं को स्व-शासन की अनुमति दिया गया है। मध्य प्रदेश PESA Act लागू करने वाला देश का सातवाँ राज्य बन चुका है। इसके पहले 6 राज्य- हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र पेसा कानून बना चुके हैं।

बता दें कि PFI पर पूरे देश में प्रतिबंध लगने से पहले झारखंड देश का पहला राज्य था, जिसने इस कट्टरपंथी संगठन पर प्रतिबंध लगाया था। झारखंड सरकार ने 21 फरवरी 2018 को PFI पर प्रतिबंध लगा दिया था। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने PFI का अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े होने के सबूत मिलने के बाद उस पर और उसके 8 सहयोगी संगठनों पर सितंबर 2022 में पाँच साल के लिए प्रतिबंध लगाया दिया है।

PFI के डॉक्युमेंट में जनजातीय लोगों से नजदीकी का जिक्र

प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने भारत को साल 2047 तक इस्लामी राष्ट्र बनाने के अपने ‘विजन डॉक्युमेंट’ में इस साजिश का उल्लेख किया है। छापेमारी में जब्त किए गए दस्तावेज में कहा गया है,  “पार्टी को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढालने के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए।

PFI ने अपने विजन डॉक्यूमेंट आगे लिखा था, “इस चरण में पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी। हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”

धर्मांतरण के जरिए जनसंख्या बढ़ाने के साथ-साथ जनजातीय इलाकों में जमीनों की क्यों जरूरत है, इसका खुलासा भी PFI के डॉक्युमेंट में किया गया है। इसमें लिखा है, “हमारे पास एडवांस PE पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अभी तक उचित एवं एकांत प्रशिक्षण केंद्र/स्थान नहीं हैं। चुनौती का सामना करने के लिए इकाइयों को मुस्लिम बहुल इलाकों या दूरदराज के स्थानों में भूखंडों का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि हथियारों और विस्फोटकों के भंडार के लिए उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और डिपो स्थापित किए जा सकें।”

‘मुस्लिम चिश्ती रंग की दीपिका ने पहनी बिकिनी, पठान से निकालो गाना’: NHRC से ‘बेशरम रंग’ की कंप्लेन, भगवा पर बहके छत्तीसगढ़ के CM बघेल

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shahrukh Khan) और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म ‘पठान’ (Pathaan) के ‘बेशरम रंग’ गाने पर विवाद जारी है। हिंदू संगठनों, उलेमा बोर्ड के बाद अब आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान ने भी दीपिका के बिकिनी और इसे गाने के दृश्यों पर एतराज जताया है।

उन्होंने इसे इसे मजहब का अपमान बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत की है। फिल्म से बेशरम रंग (Besharam Rang) गाने को हटाने की माँग की है। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गाने का समर्थन करते हुए भगवा को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि बजरंगी गुंडों ने भगवा रंग वसूली करने के लिए पहना है।

दानिश खान ने अपनी शिकायत में कहा है कि हिंदू समाज जिसे भगवा रंग बोल रहा है, दरअसल, वह मुस्लिम समुदाय के लिए भी बहुत मायने रखता है। यह मुस्लिम समुदाय के लिए चिश्ती रंग भी है। इस देश में सभी को इस रंग का सम्मान करना चाहिए। इस्लाम में भगवा रंग होता ही नहीं है, लेकिन इस देश में भगवा रंग की अलग ही इज्जत है। इसलिए इस्लाम मजहब वालों ने भी भगवा रंग अपना लिया है। जिसे चिश्ती रंग कहते हैं। ‘पठान’ फिल्म का गाना हिंदू-मुस्लिम एकता को आहत करने वाला है। है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ​इस गाने को फिल्म से हटाने का आदेश देने की कृपा करे।

उधर बघेल ने कहा है, “भगवा रंग पहनना और धारण करना दोनों अलग हैं। जब साधु संत अपने घर-परिवार का त्याग ​कर देते हैं, तब जाकर वे भगवा वस्त्र धारण करते हैं। ये बजरंगी गुंडे भगवा रंग के गमछे पहन के निकले हैं, बताइए इन्होंने क्या त्याग किया है समाज के लिए। परिवार के लिए क्या त्याग किया है। ये तो बल्कि वसूली करने के लिए ये पहन रहे हैं। इस कलर को तो हर कोई पहन रहा है। कलर की बात है तो भारतीय जनता पार्टी के जो सांसद हैं, विधायक हैं वो हीरो हैं और ये हिरोइनों के साथ जब भगवा रंग के कपड़े पहनकर डांस कर रहे हैं उसके बारे में इनके क्या विचार हैं। रंगों से किसी की जाति, और धर्म को तय नहीं करना चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और अयोध्या के महंत राजू दास भी इस गाने का विरोध कर चुके हैं। महंत ने हाल ही में आरोप लगाया था कि ‘पठान’ फिल्म में सनातन धर्म का मजाक उड़ाया गया है। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के नए-नए तरीके खोजे जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दर्शकों से अपील की थी मैं चाहता हूँ कि आप लोग ऐसी फिल्मों का बहिष्कार करो और जहाँ भी, जिस भी थिएटर में ये लगे उसको फूँक दो। नहीं फूँकोगे, तो ये मानने वाले नहीं हैं। जैसे को तैसा करना पड़ता है। दुष्टों के साथ जब तक दुष्टतापूर्वक व्यवहार नहीं करोगे, तो इसके ऊपर आप कंट्रोल नहीं लगा सकते।”

आनी थी डोली, आ रही अर्थियाँ: बच्चे-बुजुर्ग, औरत-मर्द… अब तक 35 मौत, दिसंबर की एक त्रासदी जिसकी चर्चा कम हुई

जोधपुर के शेरगढ़ का भूंगरा गाँव। इस गाँव के एक परिवार में 8 दिसंबर 2022 को जश्न का माहौल था। नाते-रिश्तेदारों की हँसी से आँगन खिलखिला रहा था। शाम को बारात जानी थी। बहू की डोली आनी थी। लेकिन एक त्रासदी ने चंद सेंकेंड के भीतर सब कुछ बदल डाला। न बारात गई। न डोली आई। न बैंड बाजा बजा। उस त्रासदी के बाद से इस परिवार के 35 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, औरत से लेकर मर्द तक शामिल हैं। कई अभी भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे है। बावजूद इसके राजस्थान का प्रशासन अड़ियल बना रहा तो 18 दिसंबर को मार्च करने के लिए पूरा शहर ही सड़क पर उतर आया।

8 दिसंबर की रात सुरेंद्र की बारात निकलने वाली थी। घर में खुशी का माहौल था। महिलाएँ मंगल गीत गा रही थीं। बच्चे इधर-उधर खेल रहे थे। कुछ ही देर में घर में रखे दो सिलिंडर ब्लास्ट हो गया और एक ही पल में सब कुछ तबाह हो गया। घर में खुशी का माहौल एक ही झटके में गम में तब्दील हो गया। दो बच्चों ने तो मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे में 63 लोग घायल हो गए थे। इनमें से 51 को जोधपुर के सरकारी अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया।

घायलों में से 35 की हालत काफी खराब थी और ये लोग 60 प्रतिशत से ज्यादा जल चुके थे। अन्य लोगो की बर्न इंजरी 40 प्रतिशत के आसपास थी। बीते कई दिनों से घायलों में से किसी न किसी की मौत हो रही है। परिवार के अधिकतर लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में गाँव वाले ही पीड़ित परिवार का सहारा बन रहे हैं और सदस्यों के अंतिम संस्कार में मदद कर रहे हैं।

किसी हादसे में एक ही परिवार के इतने सारे लोगों की मौत का मामले ने राजस्थान को हिला कर रख दिया है। खासकर जोधपुर शहर में घटना को लेकर मातम का माहौल है। लोग बस किसी तरह से मौत के इस दर्दनाक सिलसिले के खत्म हो जाने की दुआ कर रहे हैं। घटना के बाद मुआवजे को लेकर राजस्थान सरकार निशाने पर आ गई है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (15 दिसंबर 2022) को भी घायलों में से चार की मौत हो गई थी। इसके बाद मृतकों के परिजनों ने मुआवजे की माँग को लेकर शव को लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए। वहीं रविवार को पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और जोधपुर कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। आखिरकार देर रात मुआवजे को लेकर सहमति बनी। बकौल दैनिक भास्कर, संभागीय आयुक्त कैलाश चंद्र मीणा ने बताया कि मृतकों के परिजनों को 17 लाख रुपए व आश्रितों को संविदा पर नौकरी पर सहमति बनी है और इसके लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा।

‘असम में हुआ था मेस्सी का जन्म’: जिस जमीन पर इंदिरा ने घुसपैठियों को दी ‘पनाह’, वहीं अर्जेंटीना के कप्तान को कॉन्ग्रेस MP अब्दुल खलीक ने किया ‘पैदा’

असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का आरोप जिस कॉन्ग्रेस पर लगती रहती है, अब उसके एक सांसद ने उसी असम को अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेस्सी का जन्मस्थान बताया है।

फीफा वर्ल्ड कप 2022 में अर्जेंटीना के जीतने के बाद भारत में कुछ नेता अपने-अपने राज्य का कनेक्शन लियोनेल मेस्सी से जोड़ने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में असम के बारपेटा से कॉन्ग्रेस सांसद अब्दुल खलीक ने भी एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने मेस्सी को शुभकामनाएँ दी और साथ में उनका कनेक्शन असम से बता डाला। लोगों ने यह देख उनसे कन्फर्म किया कि सच में उनका असम से कनेक्शन है। इस पर अब्दुल ने फिर हाँ भरी और बाद में अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

अब्दुल खलीक के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अब्दुल खलीक ने अपने ट्वीट में लिखा था, “दिल से बहुत ज्यादा बधाई। हमें आपके असम कनेक्शन की बहुत ज्यादा खुशी है।” अब्दुल खलीक के इस ट्वीट के बाद आदित्य शर्मा नाम के यूजर ने प्रश्न चिह्न लगाते हुए पूछा ‘असम कनेक्शन?’ इस पर अब्दुल खलीक ने जवाब दिया- ‘हाँ इनका जन्म असम में हुआ था।’

इस ट्वीट के बाद लोगों ने असम सांसद को ट्रोल करना शुरू कर दिया। किसी ने कहा कि जैसे मेस्सी असम में पैदा हुए, वैसे ही वो उनके क्लासमेट हैं।

एक यूजर ने एडिटेड फोटो शेयर करते हुए दिखाया, “वर्ल्ड कप जीतने के बाद मेस्सी अपनी पत्नी के साथ असम आए हैं। उस जगह को कभी न भूलें जहाँ आप हुए।”

एक यूजर ने मेस्सी की फोटो शेयर करके कैप्शन में लिखा, “मुझे आज पता चला कि मैं असम में पैदा हुआ था।”

एक यूजर ने कॉन्ग्रेस सांसद की बौद्धिकता पर सवाल खड़े किए और बताया, “मुझे पहले लग रहा था कि ये केवल सोशल मीडिया जोक है। मगर नेता का बायो पढ़ने के बाद…।” यूजर्स द्वारा फजीहत किए जाने के बाद अब्दुल खलीक ने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

बता दें कि इससे पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस ने मेस्सी का बंगाल कनेक्शन बताया था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, “ये जीत अर्जेंटीना की नहीं बल्कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की है…जय बांग्ला।”

रिजू दत्ता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

असम में 1000 बीघा जमीन खाली कराने के लिए अतिक्रमण विरोधी अभियान, अवैध निर्माणों पर CM सरमा का चला बुलडोजर, बड़ी संख्या में पुलिस तैनात

असम सरकार राज्य के एक बड़े हिस्से में अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही है। नागाँव जिले में स्थानीय प्रशासन ने सोमवार (19 दिसंबर 2022) की सुबह करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर कब्जा मुक्त करा रही है। लोगों के विरोध को देखते हुए बताद्राबा में 800 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

इलाके में सरकारी जमीनों पर अवैध मकान बनाकर बड़े पैमाने पर कब्जा जमा लिया गया है। इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए यह अभियान चलाया गया है। इसके लिए 15वीं सदी के वैष्णव संत शंकरदेव की जन्मस्थली बताद्राबा के हिडुबी इलाके में सीआरपीएफ और असम पुलिस के करीब हजार जवानों को तैनात किया गया है।

बताया जा रहा है कि नागाँव जिला प्रशासन द्वारा भुमुरगुरी ग्राजिंग रिजर्व, जमाई बस्ती, रामपुर, कदमोनी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया गया है। अभी भी करीब 400 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाया जाना है।

अधिकारियों के अनुसार, बेदखली अभियान से पहले ‘अवैध अतिक्रमणों’ की पहचान करने के लिए क्षेत्र में एक सर्वेक्षण किया गया था। इस साल अक्टूबर में लगभग 1,000 परिवारों को नोटिस भेजकर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया था।

नागाँव जिले की पुलिस अधीक्षक लीना डोले (Leena Doley) ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से अतिक्रमण करने वालों को पहले ही नोटिस जारी किया गया था, क्योंकि ये सरकारी जमीन पर बने प्लॉट हैं। 13 दिसंबर से यहाँ सुरक्षाकर्मी डेरा डाले हुए हैं और फ्लैग मार्च कर रहे हैं। नोटिस के बाद कई अतिक्रमणकारी पहले ही इस इलाके को छोड़ चुके हैं।

उन्होंने आगे बताया, “हमारी रिपोर्ट के अनुसार सरकारी जमीन पर 302 अवैध मकान बनाए गए थे, जिनमें अब 72 बचे हैं। हमें इस अभियान में स्थानीय लोगों का पूरा सहयोग मिला है। अब बेदखली का अभियान शांतिपूर्वक चल रहा है। उम्मीद है कि हम 1000 बीघा जमीन कब्जा मुक्त कर पाएँगे।”

हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेदखली अभियान के कारण अवैध मकान बनाने वाले सैकड़ों परिवार ये जगह छोड़कर चले गए हैं। उनमें से कई लोग अपने घरों को खुद ही तोड़कर यहाँ से चले गए। इस साल सितंबर में मुख्यमंत्री सरमा ने असम विधानसभा को बताया था कि राज्य भर में कुल 4,449 परिवारों को बेदखल किया गया है, क्योंकि उन्होंने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था।

गौरतलब है कि 23 सितंबर 2022 को दारांग जिले के गोरुखुटी इलाके में भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। जगह खाली कराने गई पुलिस पर गाँव वालों ने हमला कर दिया था। इस हमले में दो लोग मारे गए थे और 20 से अधिक घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में 12 साल का एक किशोर भी शामिल था।

13 साल की लड़की से गैंगरेप, आँखें फोड़ मुँह में लकड़ी ठूँसी: मगरमच्छों के इलाके में गाड़ दिया, ‘सुशासन’ में हैवानियत का नया अध्याय

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में गैंगरेप और हत्या का मामला सामने आया है। आरोपितों ने 6वीं कक्षा में पढ़ने वाली 13 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी। उसकी आँखें फोड़कर शव को नदी किनारे मगरमच्छों के इलाके में गड्ढा खोदकर गाड़ दिया। पुलिस ने आफताब, शाहिद समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की यह घटना पश्चिम चंपारण जिले के पठखौली ओपी थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गाँव की है। आरोपितों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद किशोरी की आँखें फोड़ दीं। इसके बाद हत्या कर शव को 7 फीट लंबे और 4 फिट चौड़े गड्ढे में गाड़ दिया था। मृतक किशोरी गुरुवार (15 दिसंबर 2022) से लापता थी।

मृतका की माँ ने पुलिस को दिए आवेदन में कहा है कि चारा दिलाने के नाम पर पोखरभिंडा निवासी जितेंद्र यादव मृतक किशोरी को अपने घर ले गया था। इसके अलावा, उन्होंने नरवल गाँव निवासी लड्डू आलम, नूर आलम, सदरे आलम और आफताब आलम व मंझरिया गाँव निवासी शाहिद अंसारी पर भी नामजद केस दर्ज कराया है।

किशोरी के परिजनों का कहना है कि नदी किनारे जब उन्हें शव मिला तो उसकी आँखें फूटी हुई थीं और गले में गन्ने का हरा पत्ता लिपटा था। गन्ने के पत्ते से ही उसका गला दबाकर मारा गया है।

गाँव के लोगों का कहना है कि गैंगरेप के बाद किशोरी की हत्या की गई थी। फिर, शव को छिपाने के लिए नदी के किनारे गाड़ दिया था। शव पर किसी का ध्यान न जाए और जानवर भी बाहर न निकालें, इसलिए गड्ढे के ऊपर कटीली झाड़ियाँ लगा दी थीं। नदी किनारे जिस जगह पर शव को गाड़ा गया था, वह मगरमच्छों का एरिया है। नदी किनारे बहुत कम लोग जाते हैं।

दुष्कर्म के बाद फोड़ दी थीं आँखें…

किशोरी का शव अर्धनग्न अवस्था में गड्ढे से निकाला गया है। आरोपितों ने उसकी आँखें फोड़ दी थीं और मुँह में लकड़ी ठूँस दी थीं। साथ ही, शव पर मारपीट करने व चेहरे को पैर से दबाने के भी निशान मिले हैं।

सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के इस मामले में बगहा एसडीपीओ कैलाश प्रसाद का कहना है कि मृतक किशोरी के परिवार वालों के आवेदन पर पठखौली ओपी में अपहरण के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। शव मिलने के बाद अब दुष्कर्म और हत्या की धाराओं में केस दर्ज हुआ है। इसमें कुल छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपितों की गिरफ्तारी के पुलिस टीम काम कर रही है। जल्द ही सभी आरोपित गिरफ्तार होंगे।

पत्थर मारकर मंदिर के शिवलिंग को किया खंडित, श्रद्धालुओं को दी गालियाँ: दमोह में शमशेर खान गिरफ्तार, पहले भी सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कर चुका है कोशिश

मध्य प्रदेश के दमोह (Damoh, Madhya Pradesh) में एक मुस्लिम युवक द्वारा शिवलिंग को खंडित करने का मामला सामने आया है। आरोपित का नाम शमशेर उर्फ़ मोनू खान है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से इलाके में तनाव फैल गया है। हालात काबू करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घटना रविवार (18 दिसंबर 2022) रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बिलवारी मोहल्ले की है। यहाँ का प्राचीन शिव हनुमान मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। इसमें कई हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं। बताया जा रहा है कि घटना के थोड़ी देर पहले शमशेर उर्फ़ मोनू खान हाथ में एक बड़ा-सा पत्थर ले कर मंदिर के बाहर घूम रहा था। थोड़ी देर बाद शमशेर ने वो पत्थर मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर फेंक कर मारा। इस हमले से शिवलिंग क्षतिग्रस्त हो गया।

घटना के दौरान उस राह से कुछ श्रद्धालु एक धर्मस्थल से लौट रहे थे। उन्होंने शमशेर को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वो भाग गया। चश्मदीदों ने घटना की सूचना स्थानीय लोगों को दी। कुछ ही देर में स्थानीय लोगों के साथ हिन्दू संगठन के लोग भी मंदिर के पास जमा होने लगे। हालात को तनावपूर्ण देखते हुए पुलिस मौके पर पहुँची। अधिकारियों ने भारी फोर्स तैनात करके नाराज लोगों को समझाने की कोशिश शुरू की।

इस बीच एक अन्य पुलिस टीम ने छापेमारी कर आरोपित शमशेर उर्फ़ मोनू खान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक शिवकुमार के मुताबिक, पूछताछ के बाद मोनू को कोर्ट में पेश किया जाएगा। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मोनू खान इस घटना के पहले भी इलाके में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश रच चुका है।

बताया जा रहा है कि पत्थर फेंकने से पहले मोनू खान ने मंदिर के आस-पास मौजूद लोगों से गाली-गलौज भी की थी। पुलिस के मुताबिक शमशेर उर्फ़ मोनू खान ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश के इंदौर से ही शिव मंदिर के गर्भगृह में अश्लील हरकत करने के आरोप में वसीम को गिरफ्तार किया गया था। उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत मामला दर्ज कर के जेल भेजा गया है।

महिलाओं का जादू-टोना, इस्लामोफोबिया की हार, अक्षय कुमार बनेंगे मेसी: अर्जेंटीना की जीत में TMC की भी घुसपैठ

क़तर में रविवार (18 दिसंबर, 2022) को फाइनल मैच में फ्रांस पर अर्जेंटीना की जीत के साथ ही FIFA वर्ल्ड कप टूर्नामेंट 2022 का समापन हो गया। अर्जेंटीना की जीत के हीरो महान फुटबॉलर मेसी रहे, वहीं फ्रांस की तरफ से हैट्रिक गोल दागने वाले किलियन एमबापे ने लोगों का दिल जीता। फ्रांस डिफेंडिंग चैंपियन भी था। मैच के बाद लोगों ने कहा कि अब रोलांडो बनाम मेसी वाला विवाद भी सेटल हो गया है और मेसी किसी भी फुटबॉलर से काफी आगे निकल गए हैं।

हालाँकि, इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना साढ़े 7 वर्ष पुराना एक ट्वीट, जिसमें एक व्यक्ति ने भविष्यवाणी कर दी थी कि FIFA वर्ल्ड को के फाइनल मैच में क्या होगा। ‘José Miguel Polanco’ नामक व्यक्ति ने 21 मई, 2015 को ही लिखा था, “15 दिसंबर, 2022: 34 वर्ष के मेसी वर्ल्ड कप जीतेंगे और सर्वकालिक महानतम खिलाड़ी बन जाएँगे। आप साढ़े 7 वर्ष बाद मिलिए।” उक्त व्यक्ति ने अपनी भविष्यवाणी सच होने के बाद ख़ुशी जताई और जश्न मनाते हुए कई ट्वीट्स किए।

वहीं दूसरी तरफ ‘न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT)’ की एक विस्तृत रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि अर्जेंटीना की जीत के पीछे कुछ महिलाओं का जादू-टोना था। इन्हें अंग्रेजी में ‘Witch’ कहा जाता है। ऐसी ही एक विच के हवाले से बताया गया है कि इन लोगों का मानना था कि मेसी पर कोई बुरा साया था। इसके बाद उन्होंने जादू-टोना शुरू किया और मेसी की फॉर्म में वापसी की के लिए प्रेयर किया। इसके बाद उन्होंने अर्जेंटीना की सभी विच महिलाओं से सोशल मीडिया के जरिए मदद माँगी, ताकि मेसी को ‘बुरे साये’ से बचाया जा सके।

कई लोगों ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि अर्जेंटीना की विच महिलाओं को ‘गोल्डन बॉय’ मेसी की सुरक्षा करने के लिए इंतजाम करने चाहिए। अर्जेंटीना में इन महिलाओं को ‘Bruja’ कहा जाता है, जिनकी संख्या हजारों में हैं। अर्जेंटीना अपना पहला मैच सऊदी अरब से हार गया था, जिसके बाद इन विच महिलाओं के समर्थक काफी संख्या में हो गए। उन्होंने व्हाट्सएप्प ग्रुप बना कर जादू-टोना शुरू कर दिया और खिलाड़ियों को ‘नतकात्मक ऊर्जा’ से दूर करना शुरू कर दिया।

इन विच महिलाओं का दावा है कि खिलाडियों में सिरदर्द, मांसपेशियों में तनाव, आलस या फिर उलटी आना – ये सब नकारात्मकता के लक्षण हैं। इधर सोशल मीडिया में ये भी दावा किया जा रहा है कि अर्जेंटीना की फिना वर्ल्ड कप फाइनल में जीत पर एक बायोपिक फिल्म बनेगी, जिसमें मेसी का किरदार अक्षय कुमार निभाएँगे। जिस तरह से अक्षय कुमार ने ‘पृथ्वीराज’, ‘गोल्ड’ और ‘एयरलिफ्ट’ जैसी फिल्मों में वास्तविक किरदारों को निभाया है, उसके बाद से इस तरह के ट्वीट आते रहते हैं।

वहीं लिबरल गिरोह के कुछ लोगों ने तो अर्जेंटीना की जीत को इस्लाम की जीत भी करार दिया। ये अजीब है, क्योंकि अर्जेंटीना की एक तिहाई जनसंख्या रोमन कैथोलिक है और 11% अन्य संप्रदाय के ईसाई हैं। मुस्लिमों की जनसंख्या अर्जेंटीना % ही है। सेहर शिनवारी ने इसके बावजूद अर्जेंटीना की जीत को इस्लामोफोबिया के विरुद्ध इस्लाम की करतूत बता दिया। शायद इसीलिए, क्योंकि फ़्रांस में इस्लामी कट्टरवादी आतंकी घटनाओं के कारण कट्टरपंथियों पर कड़ी कार्रवाई हुई थी।

लेकिन फिर भी, अर्जेंटीना की जीत इस्लाम की जीत कैसे हो गई? लोगों ने लिबरल जमात की बुद्धि पर भी सवाल उठाए। ऐसे ही पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने अर्जेंटीना की जीत को अपनी पार्टी की जीत बता दिया। ये वही नेता है, जिसने स्मृति ईरानी की पुरानी तस्वीर शेयर कर के महिलाओं का अपमान किया था। अब उसके लिए अर्जेंटीना की जीत ‘माँ, माटी और मानुस’ (TMC की टैगलाइन) की जीत हो गई है।

‘श्रद्धा की तरह काट दूँगा’: इंदौर के आफताब ने हिन्दू लड़की को धमकाया, साहिबगंज में रिबिका को काटकर गुमशुदगी रिपोर्ट लिखाने गया था दिलदार

मध्य प्रदेश के इंदौर से लव जिहाद का नया मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक पर हिन्दू पहचान से एक लड़की को अपने जाल में फँसाने का आरोप लगा है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि आफ़ताब नाम के इस आरोपित ने भी उसे श्रद्धा की तरह 35 टुकड़ों में काटने की धमकी दी है। पुलिस ने आफताब के खिलाफ शनिवार को (17 दिसंबर 2022) को केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। बजरंग दल के सदस्यों ने आरोपित की धुनाई कर के उसे पुलिस के हवाले किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला राजा नगर थानाक्षेत्र का है। पीड़िता ने पुलिस स्टेशन में शिकायत देते हुए बताया कि वह बी कॉम फर्स्ट ईयर की छात्र है। लगभग 1 साल पहले इंस्टाग्राम पर उसकी जान-पहचान आफ़ताब से हुई थी। तब आफ़ताब ने अपना नाम राहुल बताया था। बाद में दोनों में बातचीत होने लगी। इस दौरान आफ़ताब ने उसे प्रपोज किया जिसे लड़की ने स्वीकार कर लिया। आफताब ने उसके आपत्तिजनक वीडियो भी बना डाले। कुछ समय बाद लड़की को आफ़ताब के मुस्लिम होने का पता चला तो वह उस से दूरी बनाने लगी।

शिकायत में आगे बताया गया है कि लड़की द्वारा इग्नोर किए जाने से नाराज आफताब उसकी तस्वीरों और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया। वह एक पार्क में लड़की से मिला और उसे धमकी दी कि अगर उसने दूर जाने की कोशिश की तो वह उसे श्रद्धा की तरह टुकड़ों में काटकर जंगल में फेंक देगा। इस धमकी के बाद लड़की डर गई, उसने अपने भाई को सबके बारे में बताया। भाई बजरंग दल कार्यकर्ताओं के साथ रीजनल पार्क पहुँचा। यहाँ पहले उन्होंने आफताब को पकड़ा, उसे पीटा और फिर उसे पुलिस के हवाले किया।

इंस्पेक्टर राजेंद्र नगर अजय मिश्रा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि आरोपित को विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार कर के पूछताछ की जा रही है।

रिबिका की हत्या में 20 हजार की सुपारी

वहीं झारखंड के साहिबगंज में हुई जनजाति की लड़की रिबिका हत्याकांड में 20 हजार रुपए की सुपारी की जानकारी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि आरोपित दिलदार की अम्मी मरियम खातून ने यह सुपारी अपने भाई मोइनुल को दी थी। मोइनुल के घर से पुलिस ने खून से सनी कमीज बरामद की है। जानकारी के मुताबिक रिबिका को मार डालने के बाद खुद दिलदार ने ही उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवाई थी। इस मामले में कुल 9 आरोपितों को नामजद किया गया है। 6 भाई-बहनों में मृतका रिबिका तीसरे नंबर पर थी। उसके परिजनों ने आरोपितों को फाँसी देने की माँग की है। वहीँ राँची से भाजपा सांसद संजय सेठ ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाने की घोषणा की है।