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‘हमारी दोस्ती गहरी और ऐतिहासिक’: चीन के कर्ज में फँसे मालदीव ने हिंदी में की भारत की प्रशंसा, ₹816 करोड़ की मदद पाकर कहा ‘थैंक यू’

भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित मालदीव (Maldives) को 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 816 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद दी है। इस पर मालदीव ने कहा कि भारत के साथ उसकी ‘दोस्ती गहरी और ऐतिहासिक है’। बता दें कि हिंद महासागर क्षेत्र में वर्चस्व को बढ़ाने के लिए चीन ने एक फोरम का आयोजन किया था, जिसका मालदीव को भी बुलाया गया था, लेकिन मालदीव ने शामिल होने से इनकार कर दिया था।

मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने हिंदी में बोलते हुए कहा, “दोस्ती हमारी अच्छी है इसलिए रंग लाई है, दोस्ती हमारी गहरी है इसलिए सबको भाती है। दोस्ती समय की तरह चलती भी जाती है। अगर दोस्ती अपने जैसों से है तो इतिहास बनाती है।”

भारत द्वारा मालदीव को दिए गए आर्थिक सहायता पर अब्दुल्ला ने कहा, “समय पर 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की उदार वित्तीय सहायता के लिए भारत का धन्यवाद। यह वास्तव में हमारे संबंधों की ताकत है, जो मालदीव-भारत की साझेदारी और विकास को और मजबूत बनाती है।”

समारोह में भारत के उच्चायुक्त मुनु महावर ने अब्दुल्ला शाहिद को एक प्रतीकात्मक चेक सौंपा। इस आयोजन में अब्दुल्ला के भारतीय समकक्ष और विदेश मंत्री एस जयशंकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “एक-दूसरे के कल्याण और हितों की वास्तविक चिंता से चिह्नित हमारी विशेष साझेदारी हर बार और विशेष रूप से जरूरत के समय काम आती है।”

बता दें कि मालदीव के विदेश मंत्रालय ने ‘चीन-हिंद महासागर फोरम ऑन डेवलपमेंट कोऑपरेशन’ में भाग लेने से इनकार किया है। इस फोरम का आयोजन चीन (China) की ओर से 21 नवंबर को चीन के युन्नान प्रांत के कुनमिंग में किया गया था। इसमें भारत को छोड़कर हिंद महासागर के सभी देशों को आमंत्रित किया गया था।

इस बैठक में मालदीव के अलावा ऑस्ट्रेलिया भी शामिल नहीं हुआ था। हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित छोटा देश मालदीव चीन का कर्जदार देश है। हालाँकि, श्रीलंका की तरह वह चीन के झाँसे में नहीं आया। वहीं, पड़ोसी होने के नाते भारत ने भी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए उसे आर्थिक सहायता मुहैया कराई है।

इस समय चीन के तीन सबसे बड़े कर्जदार देशों में श्रीलंका, पाकिस्तान और मालदीव शामिल हैं। बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स के मुताबिक, चीन का पाकिस्तान पर 77.3 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज बकाया है। वहीं, मालदीव का कुल कर्ज उसकी राष्ट्रीय आय (GNI) का 31 प्रतिशत है।  

‘भारत की कश्मीर नीति फासीवादी’: भद्द पिटने के बाद भी नहीं सुधर रहे नादव लैपिड, अनुपम खेर ने कहा – जिन्हें सच पच नहीं रहा, आँखें बंद कर लें और मुँह सिल लें

गोवा में आयोजित ‘इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI)’ के जूरी ​हेड और ​इजरायल के फिल्म निर्माता नादव लैपिड (Nadav Lapid) के ‘द कश्मीर फाइल्स’ को अश्लील और प्रोपेगेंडा फिल्म बताने से विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर भारत और इजरायल के कई अधिकारियों ने नादव की कड़ी निंदा की। उन्हें माफी माँगने के लिए कहा। यहाँ तक कि उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई। मामला तूल पकड़ने के बाद लैपिड ने अपनी सफाई देते हुए बताया कि आखिर उन्होंने क्यों ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म को अश्लील और प्रोपेगंडा फिल्म कहा।

वहीं, बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) ने कहा कि ‘कश्मीर फाइल्स’ का सच कुछ लोगों को पच नहीं रहा है।

‘द कश्मीर फाइल्स’ के अभिनेता ने कहा, “लोगों को सच जैसा है उसे वैसा देखने और दिखाने की आदत नहीं होती। वो उस पर अपनी मनपसंद खुशबू, अपना मनपसंद जायका, अपने मनपसंद रंग लेप कर, सजा कर देखने के आदी होते हैं। उन्हें कश्मीर का सच पच नहीं रहा है। वे चाहते हैं कि उसे किसी रंगीन और खुशनुमा चश्मे से देखा और दिखाया जाए। पिछले 25-30 साल से वे यही करते आए हैं। आज जब ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने सच को जैसा है वैसा दिखाकर पेश किया, तो उन्हें तकलीफ हो रही है।

उन्होंने कहा, “इन लोगों के पेट में मरोड़ उठ रहे हैं। वे गाहे-बगाहे अपने मुँह से इस तकलीफ को बयाँ करते रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “अगर आप इस भयावह सच को नहीं देख पाते हैं, तो अपना मुँह सिल लीजिए और आँखें बंद कर लीजिए। लेकिन, उसका मजाक उड़ाना बंद करिए। हम इस सच के भुक्तभोगी हैं। भारत और इजरायल अच्छे दोस्त है। दोनों ही आतंकवाद का शिकार रहे हैं। एक आम इजरायली कश्मीरी हिंदुओं का दर्द समझता है। बाकी हर देश में देश के दुश्मन अपने ही कुछ होते हैं। ये भी एक सच है।”

वहीं, नादव लैपिड ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने इसके बारे में बोलना सर्वोपरि समझा। उन्होंने कहा कि वह कश्मीर में भारतीय नीति को सही ठहराने वाली फिल्म से हैरान थे। साथ ही आरोप लगाया कि इसमें फासीवादी विशेषताएँ हैं और यह फिल्म 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के पलायन पर आधारित है। नादव ने कहा कि अगर इस तरह की फिल्म आने वाले वर्षों में इजरायल में भी बनती है, तो उन्हें आश्चर्य होगा।

उन्होंने स्थानीय मीडिया Ynet से बात करते हुए कहा, “इस तरह से बोलना और राजनीतिक बयान देना आसान नहीं था। मुझे पता था कि यह एक ऐसी घटना है, जो देश से जुड़ी हुई है। हर कोई यहाँ सरकार की प्रशंसा करता है। यह कोई आसान स्थिति नहीं है, क्योंकि आप एक अतिथि के तौर पर यहाँ पर हैं।”

उन्होंने कहा, “मुझे यहाँ बतौर जूरी हेड आमंत्रित किया गया था। यहाँ आपके साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया जाता है। इस समारोह में ऐसी प्रतिक्रिया देना एक आशंका थी। एक बेचैनी थी। मुझे नहीं पता था कि इसके क्या परिणाम होंगे। इसलिए मैंने इसे कुछ आशंका के साथ व्यक्त किया। हाँ, मैंने आशंकित दिन बिताया। आइए इसे इस तरह से याद रखें कि मैं अब हवाई अड्डे के लिए अपने रास्ते पर खुश हूँ।”

लैपिड ने आगे कहा, “मैं यहाँ हजारों लोगों के साथ एक हॉल में मौजूद था। हर कोई स्थानीय सितारों को देखने और सरकार की जय-जयकार करने के लिए उत्साहित था। उन देशों में जो तेजी से अपने मन की बात कहने या सच बोलने की क्षमता खो रहे हैं, किसी को बोलने की जरूरत है। जब मैंने यह फिल्म देखी, तो मैं इसके साथ इजरायली परिस्थिति की कल्पना किए बिना नहीं रह सका, जो यहाँ मौजूद नहीं थे। लेकिन, वे निश्चित रूप से मौजूद हो सकते थे। इसलिए मुझे ऐसा लगा कि मुझे यह करना ही पड़ेगा, क्योंकि मैं एक ऐसी जगह से आया हूँ, जहाँ खुद में सुधार नहीं हुआ है। वह खुद भी इसी रास्ते पर है।”

बता दें कि IFFI का 53वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया 20 नवंबर से 28 नवंबर के बीच गोवा में आयोजित किया गया था। फेस्टिवल के आयोजकों ने नादव लैपिड को प्रमुख जूरी के तौर पर इजरायल से बुलाया था। फिल्म देखने के बाद नादव ने कहा था कि वह ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखकर न सिर्फ हैरान हुए, बल्कि परेशान भी हुए हैं। नादव लैपिड ने आगे कहा कि उन्हें यह फिल्म दुष्प्रचार करने वाली लगी, जो ऐसे महोत्स्व में दिखाने लायक नहीं थी।

‘PM मोदी ने मेरी तुलना शूर्पणका से की थी’: कॉन्ग्रेस की महिला सांसद ने प्रधानमंत्री को ‘रावण’ कहना किया जस्टिफाई, जानें आरोपों में कितनी सच्चाई

कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की तुलना रावण से करने के बाद भाजपा उन पर हमलावर है। भाजपा ने इस विवादित बयान के बाद कॉन्ग्रेस और मल्लिकार्जुन खड़गे की मानसिकता पर सवाल उठाए। इस बीच कॉन्ग्रेस सांसद रेणुका चौधरी (Renuka Chaudhary) ने ट्वीट कर अपनी पार्टी और अध्यक्ष का बचाव करने का प्रयास किया।

रेणुका ने मंगलवार (29 नवंबर 2022) को ट्वीट किया, “मोदी ने संसद में मेरी तुलना शूर्पणखा से की थी। उस वक्त मीडिया कहाँ थी?”

रेणुका चौधरी के इस दावे के बाद 2018 का वह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुद की तुलना शूर्पणखा से करने की बात कर रही हैं। हमने भी इस वीडियो का फैक्ट चैक है। राज्य सभा के 5:50 मिनट के इस वीडियो में आप 2:32 से लेकर 3:11 के बीच सुनकर सकते हैं कि पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस सांसद को शूर्णणखा नहीं कहा है।

वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य सभा में बोलना शुरू करते हैं, तभी रेणुका चौधरी पीछे से जोर-जोर से चिल्लाती हैं। वह पीएम को बार-बार अपनी बात पूरी नहीं करने देती हैं। इसके बावजूद पीएम उन्हें कुछ ना कहकर अपनी बात को जारी रखते हैं। लेकिन उस वक्त उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने इस कृत्य के लिए रेणुका को फटकारा। उन्होंने कहा, “क्या कर रही हैं आप। आपको कोई प्रॉब्लम है क्या। बैठ जाइए रेणुका। ये कोई तरीका नहीं है।” इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभापति को रोकते हैं। वह कहते हैं, “सभापति जी मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप रेणुका जी को कुछ मत कहिए। रामायण सीरियल के बाद ऐसी हँसी सुनने का सौभाग्य आज मिला है।”

पीएम के इतना कहते ही राज्यसभा में बैठे सभी लोग हँसने लगते हैं। रेणुका चौधरी तुरंत चुप हो गईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने यह अंदाजा लगाना शुरू कर दिया कि रामायण का जिक्र करते हुए पीएम ने किस किरदार का जिक्र किया है। ट्विटर पर कई यूजर्स ने न केवल पीएम के सेंस ऑफ ह्यूमर की सराहना की, बल्कि उन्होंने संसद के अंदर रेणुका चौधरी के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। एक वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने कहा था कि अगर रेणुका चौधरी इस तरह का व्यवहार कर सकती हैं, तो अन्य को भी मजाक करने का अधिकार है।

बता दें कि गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए खड़गे ने 28 नवंबर 2022 को कहा था कि पीएम मोदी हर वक्त अपनी बात करते हैं और हर मुद्दे पर कहते हैं कि मोदी की सूरत को देखकर वोट दें। खड़गे ने प्रधानमंत्री का अपमान करते हुए कहा था, “तुम्हारी सूरत कितनी बार देखें। पार्षद चुनाव में तुम्हारी सूरत देखें। एमएलए चुनाव (विधानसभा) में भी तुम्हारी सूरत देखें। हर जगह आपका ही चेहरा देखें। कितने चेहरे हैं आपके। क्या आपके रावण की तरह 100 मुख हैं?” मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा था कि पीएम मोदी काम के बारे में कुछ नहीं बोलते हैं। वह सिर्फ झूठ बोलते हैं।

महिला सवारी को कमरे पर ले गया Rapido ड्राइवर शहाबुद्दीन, दोस्त अराफात संग किया गैंगरेप: कर्नाटक पुलिस ने पकड़ा, कंपनी ने दुख जताया

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक रैपिडो चालक द्वारा महिला सवारी के साथ गैंगरेप की खबर है। आरोप है कि इस घटना में आरोपित का एक साथी भी शामिल है। पीड़िता मूल रूप से केरल की रहने वाली है। मुख्य आरोपित का नाम शहाबुद्दीन बताया जा रहा है वो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। दूसरा आरोपित अराफात शरीफ है। पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (26 नवम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना नीलाद्रि नगर की है। केरल निवासी 22 वर्षीया पीड़िता BBA की छात्रा है और बेंगलुरु में एक डिजिटल प्लेटफार्म पर काम करती है। पुलिस को दी गई शिकायत में लड़की ने बताया है कि 25 नवम्बर 2022 को वो अपने एक दोस्त के घर पर थी। आधी रात के बाद उसने अपने एक और दोस्त के घर जाने के लिए रैपिडो एप से बाईक बुक की। आरोप है कि इस दौरान रैपडो चला रहा शहाबुद्दीन लड़की को अपने साथ अपने घर पर ले गया। यहाँ उसने अपने एक अन्य दोस्त अराफात के साथ पीड़िता से गैंगरेप किया। अराफात की मोबाईल रिपेयरिंग की दुकान बताई जा रही है।

इस घटना की जाँच कर रही पुलिस टीम ने बताया कि जब पीड़िता ने रैपिडो बुक की थी तब उसकी हालत ठीक नहीं थी। आरोपित उसे ले कर गंतव्य तक पहुँच गया था लेकिन वो उतर पाने की हालात में नहीं थी। आरोपित का कहना है कि लड़की ने उस से सिगेरट की माँग की थी। बाद में शहाबुद्दीन लड़की को सिगरेट दिलाने की बात कह कर अपने कमरे पर ले गया। वहाँ उसने अपने दोस्त को सिगरेट ले कर बुलाया। बाद में दोनों ने पीड़िता से रेप किया। आरोपित शहाबुद्दीन बिहार से लगभग 5 साल पहले बेंगलुरु आया था। बताया ये भी जा रहा है कि इस शहाबुद्दीन की एक महिला दोस्त मौके पर मौजूद थी जिसने बीच बचाव की कोई कोशिश नहीं की। पुलिस ने उस महिला को भी गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक घटना के अगले दिन लड़की को अपने साथ गलत होने का आभास हुआ। लड़की ने सेंत जोन्स अस्पताल में अपना इलाज करवाया और रविवार (27 नवम्बर) को इसकी शिकायत पुलिस में की। शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपितों का पुराना रिकॉर्ड भी खँगाल रही है। रैपिडो ने इस घटना पर दुःख जताते हुए पीड़िता के साथ अपनी सहानभूति जताई है। रैपिडो कम्पनी ने पुलिस जाँच में भी पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया है।

NDTV की होल्डिंग कंपनी RRPR के बोर्ड से प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने दिया इस्तीफा: गौतम अडानी ने कहा था- चैनल पर सरकार के ‘सही काम’ बताने की भी होनी चाहिए हिम्मत

एनडीटीवी (NDTV) के मालिक और संस्थापक प्रणय रॉय (Prannoy Roy) और उनकी पत्नी राधिका रॉय (Radhika Roy) ने मंगलवार (29 नवंबर 2022) को आरआरपीआर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड (आरआरपीआरएच) के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया। बीएसई के साथ किए गए एक नियामक फाइलिंग में इसकी जानकारी दी गई।

प्रणय रॉय और राधिका रॉय का RRPR से इस्तीफा

प्रणय रॉय और राधिका रॉय के इस्तीफा देने के तुरंत बाद कंपनी के बोर्ड में तीन नए निदेशक नियुक्त किए गए हैं। इनमें अडानी समूह के सीईओ सुदीप्त भट्टाचार्य, संजय पुगलिया और सेंथिल सिन्नैया चेंगलवारायण शामिल हैं। NDTV के प्रमोटर ग्रुप व्हीकल RRPL होल्डिंग की NDTV में 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे अडानी ग्रुप (Adani group) द्वारा खरीदा गया है।

बीएसई की वेबसाइट के मुताबिक, प्रणय रॉय एनडीटीवी के चेयरपर्सन हैं और राधिका रॉय एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर। उनके पास न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड के एक चौथाई से अधिक शेयर हैं। उन्होंने अपना यह फैसला आरआरपीआर होल्डिंग की 99.5% इक्विटी को अडानी समूह के स्वामित्व वाली विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) को हस्तांतरित करने के बाद लिया है।

इस साल अगस्त में, अडानी ग्रुप ने NDTV में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18% शेयर्स खरीदे थे। ये सौदा ‘विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL)’ और ‘RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए हुआ था। जहाँ VCPL पूरी तरह से AMNL की 100% सब्सिडियरी कंपनी है, वहीं RRPR एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी में। इस कंपनी में AMGNL ने 99.5% इक्विटी ख़रीदने का निर्णय लिया है। एनडीटीवी में रॉय परिवार की 32.26 फीसदी हिस्सेदारी है।

कैसे NDTV की होल्डिंग कंपनी कैसे गौतम अडानी की हुई

गौरतलब है कि इस लेन-देन की शुरुआत 2008 से शुरू हुई, जब रॉय परिवार ने इंडियाबुल्स से 540 करोड़ रुपए का ऋण लिया था, ताकि बाजार से एनडीटीवी के शेयरों को खरीदने के लिए एक खुली पेशकश की जा सके। उन्होंने सिक्योरिटी के तौर पर एनडीटीवी में अपने शेयर गिरवी रखकर कर्ज लिया था। उसके बाद, उन्होंने इंडियाबुल्स का कर्ज उतराने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से ऋण लिया। इस बार उन्होंने आरआरपीआर के तहत अपने एनडीटीवी के शेयरों को भी गिरवी रखा।

उसके बाद, उन्होंने NDTV में अपने शेयरों के बदले ICICI ऋण का भुगतान करने के लिए विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) से ऋण लिया। वीसीपीएल ने आरआरपीआर को जो पैसा दिया, वह मुकेश अंबानी के रिलायंस समूह के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी से आया था। बाद में, वीसीपीएल को अडानी समूह की कंपनी एएमजी मीडिया नेटवर्क लिमिटेड (एएमएनएल) द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया।

बता दें कि प्रणय रॉय ने एनडीटीवी बोर्ड से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने आरआरपीआर बोर्ड से अपना इस्तीफा दिया है। इससे पहले खबर आई थी गौतम अडानी ने NDTV के मालिक-संस्थापक प्रणय रॉय को अध्यक्ष बने रहने के लिए कहा था। साथ ही उन्होंने यह बात भी कही थी कि सरकार के गलत काम दिखाने के साथ-साथ सही काम दिखाने की भी हिम्मत होनी चाहिए।

डरपोक है पाकिस्तान, कश्मीर में आतंकी तक नहीं घुसा पाता: अलकायदा ने निकाली भड़ास, बोला- अनुच्छेद 370 हटाकर भारत जीता, आंतकवाद के लिए मुस्लिम एकजुट हो जाएँ

अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अलकायदा (Al Qeada) ने एक बयान जारी करते हुए बताया है कि अनुच्छेद 370 हटा कर भारत कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बनाने में सफल रहा है। आतंकी समूह ने पाकिस्तान की सेना को कायर बताते हुए कहा है कि वो भारत पर जवाबी कार्रवाई करने से डर गई। अलकायदा ने ये भी कबूल किया है कि घाटी में आतंकियों की संख्या में काफी कमी आ गई है। आतंकी दल ने कश्मीर में आतंकवाद को तेज करने के लिए मुस्लिमों से एकजुट होने की भी अपील की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक आतंकी समूह ने यह तमाम बातें अपनी आधिकारिक पत्रिका AQIS में प्रकाशित की हैं। इस मैगजीन में अलकायदा ने अंसार गजवात उल हिन्द की तारीफ की है। अलकायदा ने इसे कश्मीर में सक्रिय और भारत के खिलाफ लड़ रहा सच्चा आतंकी समूह बताया है। इसी क्रम में अलकायदा ने साल 1999 में कारगिल में मिली करारी हार को ले कर पाकिस्तानी सेना का मजाक भी उड़ाया है।

अपनी मैगजीन में अलकायदा ने कहा है कि पाकिस्तानी फ़ौज केवल उन आतंकियों को मार रही है जो कश्मीर के लिए लड़ रहे थे। पाकिस्तान आर्मी को डरपोक बताते हए अलकायदा ने कहा कि वो कश्मीर में आतंकियों की इंट्री करवाने में भी नाकाम साबित हो रही है। अलकायदा ने कश्मीर में कम होते जा रहे आतंकी हमलों पर नाराजगी जताई है। उसने मुस्लिमों से एकजुट हो कर कश्मीर के लिए लड़ने का आह्वान भी किया।

गौरतलब है कि देश के अंदर ही कॉन्ग्रेस पार्टी जैसे राजनैतिक दलों के विरोध के बाद भी भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को हटा दिया था। इस बीच सेना ने भी कश्मीर में ऑपेरेशन आल ऑउट चला कर तमाम शीर्ष आतंकियों को मार गिराया है। ताजा आँकड़ों के मुताबिक घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में भी तेजी से कमी आई है।

रोता हुआ आम का पेड़, आरती के समय मंदिर में देवता को प्रणाम करने वाला ताड़ का वृक्ष… वेदों से प्रेरित था जगदीश चंद्र बोस का शोध, नहीं मिला योगदान लायक सम्मान

भारतीय वैज्ञानिकों में जगदीश चंद्र बोस का एक खास स्थान है। खासकर जीवविज्ञान के मामले में तो वो दुनिया भर में जाने जाते हैं। उन्होंने ही पहली बार साबित किया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है। सन्न 1906 में ही उन्होंने अपने एक रिसर्च पेपर के जरिए साबित किया था कि कैसे पेड़-पौधे अपने साथ होने वाले बर्तावों पर प्रतिक्रिया देते हैं। ऐसे समय में जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मानवीय सुख-सुविधाओं पर केंद्रित था, जगदीश चंद्र बोस उन वैज्ञानिकों में थे जिन्होंने प्रकृति को समझा।

हालाँकि, भारत में वामपंथियों और इतिहासकारों ने जगदीश चंद्र बोस को भाव नहीं दिया या यूँ कहें कि उनके योगदानों की उतनी चर्चा ही नहीं की गई। शायद इसीलिए, क्योंकि जगदीश चंद्र बोस वेदों में विश्वास रखते थे और सनातन धर्म के सिद्धांतों को समझ कर ही उन्होंने आधुनिक विज्ञान के जरिए दुनिया भर में भारत का डंका बजाया। उन्होंने दिखाया था कि कैसे कोलकाता में एक आम का पेड़ तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण ‘रो रहा था।’

इससे भी ज्यादा रोचक है ‘Praying Palm Tree’ वाला रिसर्च, जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे शाम को जब पास के मंदिर में आरती होती थी जब खजूर का वृक्ष भी झुक गया था – इसका कारण क्या था। ये ऐसा ही था, जैसे ताड़ का पेड़ भी मंदिर में भगवान की प्रार्थना कर रहा हो। ये कोरी कल्पना नहीं थी। असल में तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण ऐसा हो रहा था। इसके पीछे विज्ञान था, जो उन्होंने साबित किया – कोई अंधविश्वास नहीं। असल में रात में तापमान घटते ही ये पेड़ झुक जाता था – ऐसा साबित कर के उन्होंने आसपास के लोगों को इसका सही कारण बताया।

बावजूद इसके लिबरल गिरोह उन्हें एक सफल वैज्ञानिक के रूप में स्वीकार नहीं करता। उन्होंने प्रयोगों के द्वारा सिद्ध किया कि कैसे पेड़-पौधों की जड़ें ही नहीं, बल्कि उसके पत्ते और तना भी पानी खींचते हैं। जैसे मानव हृदय रक्त खींचने के लिए फैलता-सिकुड़ता है, पेड़-पौधों की कोशिकाओं में भी ऐसे ही लक्षण उन्होंने साबित किए। जगदीश चंद्र बोस का स्वभाव ऐसा था कि उनके बनाए उपकरणों के बदले में जब भारी धनराशि के ऑफर्स आए तो उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

उनका कहना था कि ज्ञान किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हो सकती है। उन्होंने कुछ पौधों में बिजली का प्रवाह डाल कर ये साबित किया कि उसकी प्रतिक्रिया कैसी होती है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत के ऋषि-मुनि काफी पहले से ये सब जानते थे। छुईमुई का पौधा मनुष्य के छूते ही प्रतिक्रिया देता है। उन्होंने दिखाया कि अन्य पेड़-पौधों में भी ऐसा होता है, लेकिन नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने प्रदर्शित किया कि विष देने से पेड़-पौधों की भी मृत्यु हो सकती है।

जिस ‘रॉयल सोसाइटी’ में उन्होंने कई चीजें साबित की थीं, उसने उनके शोध को प्रकाशित करने में विलंब किया। उन्होंने कई पुस्तकें लिख कर खुद प्रकाशित की और हमेशा विश्वास जताया था कि उनका उद्देश्य सत्य की खोज करना है। उन्होंने वेदों के सिद्धांत की प्रशंसा करते हुए कहा कि हजारों वर्ष पूर्व ही गंगा किनारे तपस्या करने वाले हमारे ऋषि-मुनियों ने विश्व के सभी सजीव-निर्जीव वस्तुओं में एक ही ईश्वर को देखा। उन्होंने एक तत्व ही सब में देखा।

आज के युग में उस डार्विन की थ्योरी बिना किसी सबूत के पढ़ा-पढ़ा कर बताया जाता है कि आदमी पहले बंदर थे (जबकि Creation और Evolution) के कई अन्य सिद्धांत भी हैं, उस समय में कई वैज्ञानिक भी ये मानते हैं कि जगदीश चंद्र बोस के योगदानों को भुला दिया गया। जबकि बोस अपने समय से काफी आगे थे। कहा जाता है कि उनके प्रयोग गलत साबित हो चुके हैं। बोस के कार्यों को गलत साबित करने के चक्कर में कई वर्षों तक ‘प्लांट इलेक्ट्रिक सिग्नलिंग’ का कार्य रुका रहा।

जगदीश चंद्र बोस के वैज्ञानिक करियर को सामान्यतः 3 चरणों में बाँटा जा सकता है। पहला चरण, जब उन्होंने 1894 से लेकर 1899 तक माइक्रोवेव रेडिएशन पर शोध किया। इसी शोध के आधार पर इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रेडिएशन को अच्छे से समझने का कार्य क्लर्क मैक्सवेल के नेतृत्व में शुरू हुआ। इसके बाद अगले 3 वर्ष उन्होंने सजीव-निर्जीव वस्तुओं पर एलेक्ट्रोग्राफ़िक प्रतिक्रिया के अध्ययन में बिताए। इसके बाद अपने निधन तक उन्होंने पेड़-पौधों पर रिसर्च किया।

अंग्रेजों के गुलाम भारत में जगदीश चंद्र बोस ने दुनिया को दिखाया कि वैदिक विज्ञान को आधार बना कर हमारा देश भी वैज्ञानिक शोधों में सक्षम है। उन्होंने एक संबोधन में कहा था कि प्राचीन चिंतकों को ये पता था कि जीवन और सोचने की क्षमता हर जगह मौजूद है, बस ऊर्जा और क्रियाकलाप के मामले में वो अलग-अलग हैं। वेदों में ‘ब्राह्मण’, अर्थात एक सत्ता का चिंतन है, जिस पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा था कि नए खोज हमारे उन पूर्वजों की बातों पर मुहर लगा रहे हैं।

जगदीश चंद्र बोस के पिता ‘ब्रह्मो’ परंपरा के अनुयायी थे। इस समाज की तरह उनका भी हिन्दू धर्म में हो रहे तमाम सुधारों को लेकर सहमति थी। तकनीक और वैज्ञानिक वैज्ञानिक रचनात्मकता के देवता भगवान विश्वकर्मा में उनकी आस्था थी। सबसे बड़े शिल्पकार के रूप में कलाकारों द्वारा विश्वकर्मा की पूजा से बोस भी प्रेरित थे। ब्रह्मो समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय को लेकर भी वो प्रेरित थे, जिन्होंने वो पूर्व-पश्चिम में संपर्क बढ़ाने के लिए योगदान देने वाला मानते थे।

जहाँ जगदीश चंद्र बोस के पिता अद्वैत वेदांत के अनुयायी थे, उनकी माँ की महाकाली में गहरी आस्था थी। विवेकानंद भी जगदीश चंद्र बोस का काफी सम्मान करते थे। पेरिस में दोनों की मुलाकात भी हुई थी। पूरे विश्व में एकत्व को लेकर उनकी धरना का विवेकानंद ने भी समर्थन किया था। तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय कैसे दुनिया भर में शिक्षा और शोध के सबसे बड़े केंद्र थे, इस संबंध में उन्होंने दुनिया को परिचित कराया और BHU के छात्रों से एक बार कहा कि बुद्धिजीवी राष्ट्रों के बीच स्थान सुनिश्चित करने के बाद हमें अपनी प्राचीन संस्कृति की बात करनी चाहिए।

30 नवंबर, 1858 को जन्मे जगदीश चंद्र बोस ने बताया था कि बचपन में चिड़िया, पशुओं और जलीय जीवों की कहानियाँ सुन कर प्रकृति के प्रति उनकी रुचि जाएगी। उनकी माँ के व्यवहार के बाद बचपन में ही उनके मन से छूत-अछूत की भावना हट गई थी और सभी जीवों को एक समान देखने की धारणा बलवती हो गई थी। 1879 में कलकत्ता से स्नातक करने वाले जगदीश चंद्र बोस का ये भी कहना था कि नैतिक मूल्यों के बिना शिक्षा का कोई महत्व ही नहीं है।

शराब के नशे में निकिता, साथ में फैजान, बैरिकेड तोड़ कर भागी गाड़ी… पुलिस से कहा – दोस्त है, घर वाले जानते हैं: लोगों को याद आए ’35 टुकड़े’

उत्तराखंड के देहरादून में पुलिस ने सोमवार (27 नवंबर, 2022) को शराब पीकर गाड़ी चलाने और बैरिकेड तोड़कर भागने के आरोप में निकिता नामक एक युवती और उसके दोस्त फैजान से पूछताछ करने के बाद ड्रिंक एंड ड्राइव के आरोप में चालान किया है। पुलिस की इस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दरअसल, बैरिकेड तोड़कर भागने के बाद जब देहरादून पुलिस निकिता और फैजान से पूछताछ कर रही थी, उस वक्त ‘इंडिया क्राइम’ नामक फेसबुक पेज ने इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो को लाइव किया था। वीडियो बना रहे व्यक्ति को पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए सुना जा सकता है।

इस दौरान, देहरादून एसएसपी दलीप सिंह एक पुलिसकर्मी से लड़की (निकिता) के घर वालों को फोन कर इस पूरी घटना की जानकारी देने के लिए कहते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा, “बाद में ये लोग तमाशा करेंगे कि हमारी लड़की को भगा ले गया।” एसएसपी के कहने पर पुलिसकर्मी निकिता से उसके घरवालों को नंबर लेकर, शराब पीकर बैरिकेड तोड़ने के बारे में बताते हुए दिखता है। इस पर लड़की कहती है, मेरे घरवाले फैजान को जानते हैं।

हालाँकि, इसके बाद फोन पर बात कर रही युवती की माँ ने कहा कि वह फैजान को नहीं जानती हैं। इस पर निकिता ने पुलिसकर्मी के हाथ से फोन लेकर पूछा कि मम्मी आप फैजान को नहीं जानतीं? इसके तुरंत बाद निकिता फिर बोलती है दोस्त है। इसके बाद, पुलिसकर्मी निकिता की माँ से पूछता है कि यहाँ कोई भी उसका गार्जियन है, इस पर नहीं का जवाब मिलने के बाद पुलिस द्वारा कार्रवाई करने की बात कही जाती है। साथ ही, दोनों ही आरोपित फैजान और निकिता का मेडिकल कराने के लिए कहा जाता है।

वीडियो में ही, इस पूरे घटनाक्रम पर एसएसपी देहरादून दलीप सिंह कहते हैं कि लड़की हिंदू है और लड़का मुस्लिम (दूसरी कम्युनिटी का) है। लड़की की माँ से हुई बातचीत देखकर ऐसा लगता है कि फैजान के संबंध लड़की के परिवार से नहीं हैं। दोनों का मेडिकल कराकर कार्रवाई की जाएगी।

ऑपइंडिया से हुई बातचीत में इंडिया क्राइम पेज चलाने वाले कपिल भाटिया ने बताया है कि निकिता और फैजान को देहरादून पुलिस ने पकड़ा है। इसमें फैजान शराब के नशे में झूम रहा था। पुलिस ने ड्रिंक एंड ड्राइव के आरोप में चालान किया है।

शराब पीकर गाड़ी चलाने तथा लड़की के हिंदू और लड़के के मुस्लिम होने पर इंडिया क्राइम के फेसबुक पर कई तरह के कमेंट्स सामने आए हैं। कन्नू जोशी लाइव नामक फेसबुक यूजर ने अपने कमेंट में कहा “35 टुकड़े याद दिलाओ इनको।”

एक अन्य यूजर मनजीत साजवान ने लिखा, “इसके घरवालों को जल्द से जल्द एक फ्रिज की व्यवस्था करनी चाहिए।”

रघुवर राणा ने कमेंट कर कहा, “इन लड़कियों को अभी भी सबक नहीं मिला है। गुड वर्क सर।”

वहीं, नीरज थापियाल ने लिखा, “इसके भी टुकड़े होने वाले हैं।”

राम भक्त ठाकुर ने लिखा, “लड़की के माता पिता से हाथ जोड़ कर निवेदन करता हूँ कि इसको संभाल लो। वरना 35 में ही मिलेगी। क्योंकि ये शांति दूत किसी के नहीं।”

ऊषा चौहान ने कमेंट करते हुए कहा, “ऐसी कार्यवाही होती रहे तो दुबारा कोई ऐसी हरकत नहीं करेगा, सोचने पर मजबूर होगा।”

‘मौलाना साद को सौंपी जाए निजामुद्दीन मरकज की चाबियाँ’: दिल्ली HC के आदेश पर पुलिस को आपत्ति नहीं, तबलीगी जमात ने फैलाया था कोरोना

दिल्ली निजामुद्दीन मरकज को पूरी तरह से खोलने की माँग वाली अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह मरकज यानी तब्लीगी जमात के मुख्यालय की चाभी मौलाना साद को सौंपेगी। ‘दिल्ली वक्फ बोर्ड’ की अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मरकज की चाबी उस व्यक्ति को सौंपने की हिदायत दी, जिससे ली गई थीं।

दिल्ली पुलिस के वकील रजत नायर ने दलील दी कि उसे इसको लेकर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं कि निजामुद्दीन बंगलेवाली मस्जिद का वास्तविक मालिक कौन है और वह सिर्फ उसी व्यक्ति को चाबियाँ सौंप सकती है जिससे उन्होंने कब्जा लिया था, जो मौलाना मुहम्मद साद है। पुलिस ने अदालत के सामने दावा किया कि साद फरार है, इसपर मरकज की प्रबंध समिति के एक सदस्य ने दावा किया कि साद फरार नहीं है वह परिसर में ही मौजूद है और चाबी लेने के लिए एजेंसी के सामने पेश हो सकता है।

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि पुलिस ने जिस व्यक्ति से कब्जा लिया है, उस व्यक्ति को कब्जा वापस करें। जज ने कहा, “मैं यहाँ संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर फैसला नहीं कर रहा हूँ। आप पता लगाएँ कि आपको क्या करना है, लेकिन चाबी दे दीजिए। आप इसे अपने पास नहीं रख सकते।” दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या आप अभी वहाँ कब्जे में हैं? आपने किस क्षमता से कब्जा लिया है? महामारी रोग अधिनियम के तहत प्राथमिकी पंजीकृत की गई थी, वह अब समाप्त हो गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पुलिस से सवाल किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस के वकील नायर ने कहा कि उन्हें क्षतिपूर्ति मुचलके पर संपत्ति सौंपने में कोई आपत्ति नहीं होगी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने नायर का बयान दर्ज किया कि साद द्वारा क्षतिपूर्ति मुचलका भरने के बाद चाभियाँ सौंप दी जाएँगी।

निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद, मदरसा काशिफ-उल-उलूम और एक छात्रावास है। निजामुद्दीन मरकज को मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के बीच तबलीगी जमात द्वारा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बंद कर दिया गया था। आपको बता दें मौलाना साद को दिल्ली पुलिस ने मार्च 2020 में दर्ज एफआईआर में मुख्य आरोपित बनाया है। उन पर जमात के सदस्यों के साथ कोरोना संबंधी मानदंडों के उल्लंघन का आरोप है।

कोरोना महामारी के समय निजामुद्दीन मरकज में बड़ी संख्या में तबलीगी जमात के लोग ठहरे हुए थे। मरकज में ठहरे लोगों में जब कोरोना के मामले पाए गए, तब मामला खुला। दिल्ली पुलिस ने इसके बाद मरकज को सील कर दिया था। इतना ही नहीं जब मरकज के लोगों को अस्पतालों में ले जाया जा रहा था तो उनमें से कइयों ने अस्पताल परिसर में थूकना शुरू कर दिया था कुछ तो अस्पताल स्टाफ पर भी थूक रहे थे।

AIIMS हैक के पीछे चीन-उत्तर कोरिया? 5000 कम्प्यूटरों पर ₹200 करोड़ माँग रहे हैकर्स का कब्ज़ा, 7 दिन से ठप्प डिजिटल सेवाएँ: आतंक एंगल से जाँच कर रही NIA

दिल्ली के ‘अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान (AIIMS)’ में हुए साइबर अटैक मामले में 2 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। दोनों कर्मचारी सिस्टम एनालिस्ट हैं। दोनों कर्मचारियों को पहले कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर एम्स प्रशासन ने दोनों को सस्पेंड कर दिया है।

इधर मामले की जाँच तेज हो गई है। जाँचकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यह साइबर हमला चीन या नॉर्थ कोरियायी हैकर्स के द्वारा किया गया हो सकता है। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस यूनिट ने 25 नवंबर, 2022 को जबरन वसूली (फिरौती) और साइबर आतंकवाद का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच एनआईए (NIA) भी कर रही है। जानकारी के मुताबिक एनआईए इस हैकिंग की जाँच टेरर एंगल से करेगी।

क्रिप्टोकरेंसी में माँगी गई फिरौती?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एम्स के कंप्यूटर्स पर रैनसमवेयर (Ransomware) नाम का साइबर हमला हुआ है। यह हमले मोटी रकम वसूली के लिए ही किए जाते हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो हैकर्स ने अस्पताल से फिरौती के तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में 200 करोड़ रुपए की माँग की है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि एम्स के अधिकारियों को अब तक फिरौती माँगे जाने से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली है।

इस बीच दिल्ली एम्स की तरफ से जानकारी दी गई है कि सर्वरों की स्कैनिंग का काम जारी है। अब तक 50 में से 30 सर्वर में एंटी वायरस डालकर स्कैन किया जा चुका है। एम्स में लगभग 5000 कंप्यूटर हैं। फिलहाल 2000 कंप्यूटरों की स्कैनिंग का काम हो चुका है। सर्वर पूरी तरह से ठीक होने में 5 दिन का समय लग सकता है।

अभी कैसे चल रहा है काम?

23 नवंबर, 2022 से ही एम्स दिल्ली में ऑनलाइन सेवाएँ बाधित हैं। फिलहाल जरूरी सेवाएँ ऑफलाइन (मैनुअल) मोड में चल रही हैं। ऐसे में मैनुअल मोड में काम के लिए कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई गई है, ताकि इलाज के लिए दूर-दूर से आ रहे मरीजों को दिक्कत न हो। मरीजों का ओपीडी कार्ड हाथ से बनाया जा रहा है। एडमिशन प्रोसेस भी हाथ से लिखकर किए जा रहे हैं। यहाँ तक कि सैंपल जाँच भी मैन्युअली ही हो रही है।

इलाज पर इसका बहुत ज्यादा असर तो नहीं हो रहा है, लेकिन काम में समय अधिक लग रहा है। एम्स की तरफ से नोटिस जानकारी दी गई है कि इस हफ्ते एम्स नेटवर्क को फॉर्मेट किया जाएगा। ताकि आगे के लिए सिस्टम को और भी सुरक्षित किया जा सके।

बता दें कि 23 नवंबर, 2022 को एम्स के सर्वर में रैनसमवेयर अटैक हुआ था। जिसके बाद पूरी डिजिटल सेवाएँ ठप हो गईं हैं। एनआइसी (नेशनल इन्फार्मेटिक सेंटर), इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-आइएन) और सीडैक (सेंटर फार डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) की टीम इस समस्या का हल निकालने में जुटी हैं।