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नॉन स्टिक पैन में खाना पकाना खतरनाक, 1 दरार आने से निकलते हैं 9000 ‘जहरीले’ पार्टिकल्स: रिसर्च में खुलासा

नॉन स्टिक पैन में बनाया गया खाना खाने से आपकी सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। ऑस्ट्रेलिया में फ्लिंडर्स और न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में इसका खुलासा किया है। उन्होंने रिसर्च में दावा किया है कि नॉन स्टिक पैन में खाना बनाते समय इसके लाखों प्लास्टिक पार्टिकल निकलकर खाने में मिल जाते हैं, जो हमें नुकसान पहुँचा सकते हैं। उनके मुताबिक, पैन के तले में बनी एक छोटी से दरार से 9000 से अधिक प्लास्टिक पार्टिकल्स निकलते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि नॉन स्टिक बर्तन धीरे-धीरे कोटिंग खो देते हैं। इसके बाद पैन से लाखों का पार्टिकल निकलकर आपके खाने में मिल जाते हैं। पैन पर तेज आँच पर खाना बनाने से उसमें माइक्रोप्लास्टिक के मिलने की ज्यादा आशंका रहती है।

विगत वर्षों में इसके कारण लोगों को कैंसर, ऑटिज्म और प्रजनन क्षमता पर प्रभाव सहित कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसकी नॉन स्टिक कोटिंग में पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन (PFTE) नामक एक रसायन का उपयोग किया जाता है, जो कि पेरफ्लूरूओक्टोनोइक एसिड (PFAS) का एक प्रकार है। ऐसा कोई डेटा नहीं है जो यह बताता हो कि यह अन्य प्रकार के पीएफएएस से कम खतरनाक है या ज्यादा।

बता दें कि शोधकर्ताओं ने रमन इमेजिंग तकनीक से फोटॉन स्कैटरिंग के माध्यम से मॉलिक्यूलर लेवल पर टेफ्लॉन कोटिंग पर माइक्रो-प्लास्टिक्स और नॉन-प्लास्टिक की जाँच की है। उन्होंने टेफ्लॉन पैन (Teflon pans) पर एक चम्मच से 5 सेंटीमीटर तक एक स्क्रैच किया। इसके बाद पैन से 2.3 मिलियन यानी 23 लाख माइक्रोप्लास्टिक निकले। कुल मिलाकर पैन के अंदर से 9,000 से अधिक प्लास्टिक पार्टिकल मिले।

ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और शोधकर्ता यूहोंग टैंग (Youhong Tang) का कहना है कि यह शोध हमें सर्तक करता है कि हम लोगों को अपनी हेल्थ से समझौता नहीं करना चाहिए। खाना बनाने के लिए सही बर्तनों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए।

जिंदा है कोमल शर्मा… समीर अहमद कर रहा था प्रताड़ित, इसलिए लक्ष्मी बन अपनी ही मौत की शिकायत लेकर आई थी शामली

उत्तर प्रदेश के शामली के समीर अहमद से जुड़े केस में नया मोड़ आया है। उसकी प्रताड़नाओं से तंग आकर कोमल शर्मा के सुसाइड करने का दावा गलत निकला है। यह बात सामने आई है कि जो महिला लक्ष्मी बनकर शामली आई थी, असल में वही कोमल शर्मा है। अब उसने खुद को समीर अहमद से आर्थिक रूप से प्रताड़ित बताया है। पुलिस ने इस संबंध में नए सिरे से केस दर्ज किया है।

हरियाणा के यमुनानगर से एक महिला शिकायत लेकर 7 नवंबर 2022 को शामली DM के यहाँ पहुँची थी। उसने अपना नाम लक्ष्मी बताया था। वह खुद को कोमल शर्मा का भाभी बता रही थी। शिकायत में कहा था कि खुद को हिंदू बता समीर फेसबुक के जरिए कोमल के संपर्क में आया। फिर उसे प्रताड़ित करने लगा। इससे तंग आ कोमल ने करीब तीन महीने पहले आत्महत्या कर ली।

वह एक सुसाइड नोट भी लेकर आई थी। बताया था कि कोमल ने मरने से पहले इसे लिखा था। यह भी बताया था कि बच्चे की बीमारी और पति की मौत की वजह से उसे शिकायत करने में देरी हुई। महिला की शिकायत पर शामली की DM ने पुलिस को जाँच कर के आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए थे।

जाँच के बाद शामली के SP अभिषेक ने बताया है कि जिस महिला के आत्महत्या करने का दावा किया गया था, वो जीवित है। कोमल शर्मा ही अपनी भाभी लक्ष्मी बनकर DM के यहाँ शिकायत करने पहुँची थी।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार शामली पुलिस की एक टीम जाँच के लिए हरियाणा गई थी। पुलिस ने वहाँ लक्ष्मी से उसके और कोमल शर्मा के पहचान पत्र माँगे तो वह आनाकानी करने लगी। महिला की हरकतों से पुलिस को शक हुआ तो उसने मामले की गहराई से जाँच की। इसके बाद पता चला कि लक्ष्मी और कोमल एक ही हैं।

महिला की शिकायत के बाद समीर अहमद को IPC की धरा 406, 420, 376 और 506 में गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले में पुलिस आगे की जाँच व कार्रवाई कर रही है।

BSP के पूर्व MLA जुल्फिकार ने सरेंडर किए ₹100 करोड़, 40 देशों में भेजता है मीट: 35 ठिकानों पर पड़ी थी आयकर रेड

बसपा (BSP) के पूर्व विधायक और एचएमए ग्रुप के मालिक जुल्फिकार अहमद भुट्टो के 35 ठिकानों पर करीब 85 घंटे तक छापेमारी की गई। मांस निर्यातक भुट्टो के घर मैराथन छापेमारी शनिवार (5 सितंबर 2022) सुबह से मंगलवार(8 सितंबर 2022) शाम तक चली। इस दौरान कारोबारी ने आयकर विभाग के समक्ष 100 करोड़ रुपए की अघोषित रकम सरेंडर की।

देश के तीसरे नंबर के मीट निर्यातक ग्रुप एचएमए (HMA) का सालाना 2000 करोड़ रुपए का टर्नओवर है और वह 40 देशों में फ्रोज़न मीट का निर्यात करता है। आयकर विभाग ने वित्तीय अनियमितता देखकर कंपनी के दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, कानपुर, उन्नाव, चंडीगढ़, मेरठ, रायपुर, आगरा सहित 12 शहरों के 35 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

आयकर विभाग के 180 अफसरों की टीम ने पैरामिलिट्री फोर्स के साथ इन ठिकानों पर कार्रवाई की। अधिकारियों ने बताया कि आयकर विभाग द्वारा जब्त किए गए कागजात, लैपटॉप, मोबाइल आदि के विवरण की जाँच चलती रहेगी। जाँच टीम को भुट्टो के घर से करोड़ों रुपए की ज्वैलरी और नकदी भी बरामद हुई है। इसके साथ ही गैर-भाजपा शासित राज्यों में रियल एस्टेट में निवेश के कागजात भी मिले हैं।

आयकर विभाग के अधिकारियों को जाँच में कई चौंकाने वाली जानकारियाँ मिली हैं। मीट निर्यात के लिए एचएमए ग्रुप ने ‘मुखौटा’ कंपनियों के जरिए भुगतान किया और गरीब कर्मचारियों के बैंक खाते खुलवाकर उनमें करोड़ों रुपए का लेनदेन किया।

इसका खुलासा तब हुआ, जब आयकर अधिकारी पैरामिलिट्री फोर्स के साथ सोमवार को मंटोला में एचएमए ग्रुप के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी इसरार के घर पर पहुँचे। इसरार के खाते से करोड़ों रुपए का लेनदेन किया गया है, जबकि उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।

आयकर अधिकारी पूछताछ के लिए इसरार को ले जाने पहुँचे तो वहाँ लोगों ने हंगामा कर दिया। इसके बाद आयकर विभाग के अधिकारी इसरार को अपने साथ तो नहीं ले जा सके, लेकिन उसे अपना पक्ष रखने के लिए दो दिन का वक्त दिया। माना जा रहा है कि आयकर जाँच में और भी कई खुलासे हो सकते हैं। 

इतना ही नहीं, आयकर अधिकारियों को एचएमए ग्रुप के इसरार अहमद समेत 14 कर्मचारियों के खातों में बड़ा लेनदेन मिला है। इन कर्मचारियों के हस्ताक्षर से भुगतान किया जा रहा था। माना जा रहा है कि ‘मुखौटा’ कंपनियों में इन कर्मचारियों को डायरेक्टर बनाया गया है। मीट निर्यात के लेनदेन में इन्हीं कंपनियों का उपयोग किया जा रहा था।

बेटी की शादी में किया था बेतहाशा खर्च

जुल्फिकार ने कुछ दिन पहले ही अपनी बेटी की शादी में बेतहाशा खर्च किया था। शादी में 20 हजार लोगों को शाही दावत की गई। लड़के पक्ष को करोड़ रुपए दहेज में दिए गए। यहाँ तक की निकाह पढ़वाने वाले को 11 लाख रुपए नगद और एक कार भी गिफ्ट की गई। इस शादी के बाद एचएमए ग्रुप के संचालक भुट्टो चर्चाओं में आ गए थे।

जेल की ‘दीवारों से बात’ कर बदले संजय राउत: बाहर निकलते ही फडणवीस की तारीफ, PM मोदी-अमित शाह से मिलेंगे

पात्रा चॉल घोटाला मामले (Patra Chawl Scam Case) में जमानत रिहा हुए शिवसेना (Shiv Sena) के राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृहमंत्री अमित शाह (MHA Amit Shah) से मिलने की कही। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (DyCM Devendra Fadnavis) की तारीफ भी की।

मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने कहा, “नई सरकार के कुछ फैसलों का मैं स्वागत करता हूँ। खासतौर से उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अच्छे निर्णय लिए हैं। शिवसेना ने कभी विरोध के लिए विरोध नहीं किया और न ही आगे करेगी।” उन्होंने कहा कि वे जल्दी ही डिप्टी सीएम फडणवीस से उनके विभागों के कामों को लेकर मुलाकात करेंगे।

उन्होंने आगे कहा, राज्य में राजनीतिक कड़वाहट खत्म होनी चाहिए, ऐसा देवेंद्र फडणवीस ने कहा था। मैं उप-मुख्यमंत्री की बातों का स्वागत करता हूँ। राज्य के हित में महत्वपूर्ण निर्णय उप-मुख्यमंत्री ही ले रहे हैं। उनके द्वारा लिए गए कुछ फैसले सराहनीय हैं।” राउत ने कहा कि फडणवीस के साथ-साथ वे पीएम मोदी और अमित शाह से भी मुलाकात करेंगे।

बता दें कि कुछ दिन पहले देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ सालों में राजनीतिक कटुता बढ़ी है। यह महाराष्ट्र की संस्कृति नहीं है। इसलिए इसे दूर करने की जरूरत है। फडणवीस के इस बयान का शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने भी स्वागत किया था।

पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिलकर बताएँगे कि जेल में उनके साथ क्या हुआ। राउत ने कहा कि पिछले कुछ सालों में राजनीति का स्तर गिरा है। वे सांसद हैं और उनके भाई विधायक हैं। ऐसे में उन्हें नेताओं से मिलने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अमित शाह गृह मंत्री पूरे देश के हैं, ना कि किसी पार्टी के।

संजय राउत ने जेल के अनुभवों को लेकर कहा, “जेल में रहना आसान नहीं है। जेल में दीवारों से बात करनी पड़ती है। अकेलापन खा जाता है। यह मेरे परिवार के लिए कठिन समय रहा। मैंने आज तीन महीने बाद अपनी घड़ी पहनी है और ये अब ठीक ढंग से मुझसे नहीं आ रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “राज ठाकरे ने मुझे कहा था कि जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने मुझे खुद से अकेले में बातें करने की सलाह दी थी। आज मैं कहता हूँ कि हाँ मैंने अकेले में बातें कीं, क्योंकि सावरकर भी अकेले थे और तिलक भी अकेले थे। मेरी भी गिरफ्तारी राजनीतिक थी।”

संजय राउत ने आगे कहा, “जिन लोगों ने मेरी गिरफ्तारी का षड़यंत्र रचा और अगर उन्हें इससे खुशी मिली है तो मैं भी उनकी खुशी में शामिल हूँ। मुझे देश की किसी जाँच एजेंसी पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है और ना ही मुझे किसी पर कोई आरोप लगाना है।” राउत ने कहा कि वे शरद पवार और उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे, इन दोनों नेताओं ने उनके बुरे समय में उनका साथ दिया था।

बता दें कि पात्रा चॉल घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तार किए गए संजय राउत 102 दिन बाद मंगलवार (8 नवंबर 2022) को जमानत पर जेल से बाहर आए। इस दौरान उनके समर्थकों ने ‘टाइगर इज बैक’ और ‘शिवसेना का बाघ आया’ जैसे पोस्टर लहराए थे।

कौन है आयशा उमर जिसके कारण टूटी सानिया मिर्जा की निकाह, देखिए शोएब मलिक के साथ की वे तस्वीरें जिससे तलाक तक गई बात

आयशा उमर (Ayesha Omar)। एक पाकिस्तानी मॉडल-एक्ट्रेस। सानिया मिर्जा और शोएब मलिक के तलाक की जिम्मेदार बताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि इनके लिए ही शोएब (Shoaib Malik) ने सानिया (Sania Mirza) को धोखा दिया।

शोएब और आयशा की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में चर्चा में बनी हुई हैं। हालाँकि ये बोल्ड फोटोशूट एक मैगजीन के लिए हुआ था। लेकिन रिर्पोटों की माने तो इसी दौरान दोनों करीब आए थे।

पिछले साल शोएब और आयशा उमर साथ नजर आए थे। दोनों ने एक मैगजीन के लिए फोटोशूट कराया था, जिसमें ये दोनों काफी करीब दिखे। ये फोटोशूट स्विमिंग पूल में हुआ। उस समय भी दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थीं। हैदर नाम के एक यूजर ने लिखा था, “शोएब मलिक ठीक है, लेकिन मुझे आयशा उमर से बहुत उम्मीदें थीं, आप इसके लिए क्यों राजी होंगी?”

शोएब मलिक ने भी इस फोटोशूट को अपने इंस्टाग्राम पर 8 अक्टूबर 2021 को शेयर किया था।

इसके अलावा इन दोनों के कई और फोटोशूट भी वायरल हुए थे। इन फोटो को देखने के बाद पिछले साल से ही सोशल मीडिया पर आयशा उमर और शोएब मलिक के निकाह की चर्चा शुरू हो गई थी। एक यूजर्स ने तो यहाँ तक लिख दिया था, “शोएब मलिक, आयशा उमर के साथ दूसरे निकाह के हकदार हैं।”

आयशा उमर के बाद शोएब ने एक और पाकिस्तानी एक्ट्रेस के साथ बोल्ड फोटोशूट कराया था। इस अभिनेत्री का नाम हनिया आमिर है। हनिया के साथ कराया गया फोटोशूट भी काफी वायरल हुआ था।

सानिया मिर्जा, शोएब मलिक और तलाक

सानिया मिर्जा और शोएब मलिक (Sania Mirza and Shoaib Malik) के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, इसकी भनक मीडिया को किसी सूत्र से नहीं लगी थी बल्कि खुद सानिया मिर्जा की इंस्टाग्राम स्टोरी से इन अटकलों को बल मिला था। इसमें उन्होंने पूछा था टूटे हुए दिल कहाँ जाते हैं? फिर उन्होंने खुद ही जवाब देते हुए लिखा था कि वो अल्लाह को ढूँढने जाते हैं।

सानिया मिर्जा के ‘टूटे दिल’ वाला पोस्ट

इस पोस्ट को बाद में डिलीट कर दिया गया। इसके बाद सानिया मिर्जा ने अपने बेटे के साथ एक फोटो डाली। कैप्शन में लिखा – “ऐसे लम्हे, जो सबसे मुश्किल दिनों में राहत देते हैं, उससे निकल पाने की शक्ति देते हैं।” वहीं, पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक के एक बेहद करीबी शख्स ने इनसाइडस्पोर्ट नाम की वेबसाइट को बताया है कि सानिया मिर्जा और उनके शौहर काफी समय से अलग रह रहे थे। अब औपचारिक रूप से दोनों ने तलाक ले लिया है।

मदरसों पर असम सरकार सख्त: लोकेशन से लेकर मौलवी तक की माँगी रिपोर्ट, 100 छात्र- 3 किमी दूरी जरूरी

असम सरकार ने निजी मदरसों पर सख्त रुख अपनाया है। आतंकी गतिविधियों से संबंध के चलते सरकार ने निजी मदरसों पर पैनी नजर रखने की तयारी कर ली है। राज्य के निजी मदरसों को इस साल 1 दिसंबर तक राज्य सरकार को संस्थान को लोकेशन और शिक्षकों के विवरण सहित संस्थान के बारे में सभी जानकारी प्रदान करने के लिए कहा गया है।

इससे पहले चार सितंबर को, असम के डीजीपी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और मदरसों को चलाने वाले कई संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक हुई और कई फैसले लिए गए थे। इसमें यह सुनिश्चित भी किया गया कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर कोई भी चरमपंथी तत्व मदरसे में शरण न लें।

असम पुलिस के सीपीआरओ राजीव सइकिया ने कहा था, ”एक पोर्टल पर काम चल रहा है, जहाँ सभी निजी मदरसों की जानकारी अपलोड की जाएगी और जल्द ही पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। वहीं राज्य के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने कहा कि दो मदरसों के बीच कम से कम तीन किमी की दूरी होनी चाहिए और प्रत्येक मदरसे में कम से कम 100 छात्रों का नामाँकन होना चाहिए।

मदरसों का आतंकी कनेक्शन

इस साल असम के कई मदरसों का संबंध अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) से पाया गया था, जिसके बाद असम सरकार ने मदरसों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। केवल असम सरकार ही इन जिहादी मदरसों के खिलाफ नहीं है, अब ऐसी रिपोर्ट प्राप्त हुई है कि वहाँ के नागरिक भी इसका विरोध कर रहे हैं।

यहाँ 6 सितंबर 2022 को ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित गोलपारा में एक मदरसे को स्थानीय लोगों ने ही ध्वस्त कर डाला था। गोलपारा, गुवाहाटी से 134 किलोमीटर पश्चिन की तरफ स्थित है। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस मदरसे से जिहादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। पाखिउरा चार क्षेत्र में स्थित दरोगार अलगा में ये मदरसा स्थित था।

साथ ही मदरसे के बगल में स्थित एक घर को भी लोगों ने ध्वस्त कर दिया था। बताया गया था कि उस घर को दो बांग्लादेशी आतंकी इस्तेमाल में ला रहे थे। इसीलिए, स्थानीय लोगों में आक्रोश था। जलालुद्दीन शेख नामक व्यक्ति इस मदरसे का संचालन कर रहा था, जो पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में है।

उसने 2020 में अनिमुल इस्लाम, उस्मान, मेहदी हसन और जहाँगीर आलोम को बतौर शिक्षक इस मदरसे में नियुक्त किया था। इनमें से दो अलकायदा (AQIS) और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के आतंकी निकले। दोनों फ़िलहाल फरार चल रहे हैं। इससे पहले 31 अगस्त, 2022 को बोंगाईगाँव प्रशासन ने मरकजूल मारीफ उ-करियाना मदरसे को ध्वस्त किया था। ये बच्चों के लिए असुरक्षित था और इसके पास दस्तावेज भी नहीं थे। यहाँ से आतंकी गतिविधि चल रही थी सो अलग।

पंजाब पुलिस ने दी थी सुरक्षा, फिर भी डेरा सच्चा सौदा के प्रदीप सिंह को गोलियों से भूना: 2 बाइक पर सवार होकर आए थे 5 हमलावर

हिंदूवादी नेता सुधीर सूरी के बाद अब पंजाब में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी प्रदीप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। फरीदकोट में गुरुवार (11 नवम्बर 2022) को दो बाइक पर सवार होकर आए 5 बदमाशों ने उन पर हमला किया। हमले में सिंह के पड़ोसी और गनमैन घायल भी हुए हैं।

प्रदीप सिंह 2015 के बेअदबी के एक मामले में आरोपित थे। भाजपा ने इस घटना के लिए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को दोषी ठहराया है। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पंजाब में किसी को शांति भंग नहीं करने दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले के समय प्रदीप सिंह अपनी दुकान खोल रहे थे। उन्हें पंजाब पुलिस ने 3 गनर दिए थे। हमले के दौरान एक गनर शौच करने गया था। वहीं घायल गनर हाकम सिंह के मुताबिक उन्होंने गोली चलाते 2 लोगों को देखा था। प्रदीप का एक साथी मोहिंदर पाल बिट्टू पहले ही नाभा जेल में मारा जा चुका है। फ़िलहाल प्रदीप जमानत पर जेल से बाहर थे।

प्रदीप डेयरी और राशन की दुकान चलाते थे। इस हत्याकांड का CCTV फुटेज भी वायरल हो रहा है। फुटेज में 5 हमलावर दिख रहे हैं। हमले के लिए पिस्टल का प्रयोग किया जा रहा है। फुटेज में हमला होने के बाद आसपास अफरातफरी का माहौल दिखाई दे रहा है।

भाजपा ने इस हत्याकांड को बहुत दुखद बताते हुए भगवंत मान सरकार के लॉ एन्ड आर्डर पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा पंजाब प्रदेश अध्यक्ष तरुण चुघ ने कहा कि बेअदबी का केस कोर्ट में चल रहा था। ऐसे में किसी को भी कानून अपने हाथों में लेने की जरूरत नहीं थी। चुघ के मुताबिक पंजाब की निकम्मी सरकार के चलते अब यहाँ सुरक्षा प्राप्त नेताओं की हत्याएँ आए दिन हो रही हैं। भाजपा पंजाब प्रदेश अध्यक्ष ने वर्तमान पंजाब को अपराध का केंद्र बताया।

जानकारी के मुताबिक बेअदबी की यह घटना फरीदकोट में 2015 की है। इस घटना के विरोध में अक्टूबर 2015 में उग्र प्रदर्शन हुए थे। तब कोटकापुरा में पुलिस फायरिंग में 2 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। बेअदबी के आरोप में अब तक पंजाब में कुल 7 लोगों की हत्या हो चुकी है।

सिखों के घाव पर कॉन्ग्रेस ने रगड़ा नमक, 1984 नरसंहार के आरोपित जगदीश टाइटलर को दिल्ली के चुनाव समिति में दी जगह

कॉन्ग्रेस (Congress) की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री बनने के बाद डॉक्टर मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) ने भले ही 1984 के सिख दंगों (1984 Anti Sikh Riots) में कॉन्ग्रेस की भूमिका के लिए माफी माँग ली हो, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी को इस नरसंहार से कोई खास शर्मिंदगी नहीं है। इसकी बानगी है सिख नरसंहार के आरोपित जगदीश टाइटलर (Jagdish Tytler) पर पार्टी का विश्वास।

कॉन्ग्रेस ने टाइटलर को दिल्ली नगर निगम-2022 के चुनावों के लिए प्रदेश चुनाव समिति का सदस्य बनाया है। इतना ही नहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे के पार्टी का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद हुई बैठक में भी टाइटलर शामिल हुए। इसका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी सिख विरोधी दंगों के आरोपितों को संरक्षण देने के लिए गाँधी परिवार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा था, “गाँधी परिवार ने सिखों के हत्यारे टाइटलर को खड़गे जी के शपथ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करके एक फिर से ये साबित कर दिया कि वे टाइटलर, कमलनाथ जैसों को सुरक्षा व सम्मान देते रहेंगे। इन्हीं कातिलों की मदद से गाँधी परिवार ने 1984 सिख हत्याकांड को अंजाम दिया और आज तक इन लोगों को उसका इनाम दिया जा रहा है।”

गुरुनानक जयंती (8 नवंबर 2022) को इंदौर के खालसा कॉलेज में बुलाकर सम्मानित करने पर बवाल हो गया था। कमलनाथ को सम्मानित करने पर कीर्तनकार मनप्रीत सिंह कानपुरी नाराज हो गए। उन्होंने हजारों लोगों की उपस्थिति में समाज के सचिव जसबीर सिंह गाँधी उर्फ राजा गाँधी को लताड़ दिया। कानपुरी ने कहा, “शर्म करो गाँधी। जिसने हजारों सिखों के घर बर्बाद कर दिए, जो 1984 के सिख दंगों का दोषी है, उसके तुम गुणगान कर रहे हो।”

मनप्रीत सिंह ने कहा कि 1984 में जिस व्यक्ति के कहने पर हजारों सिखों का कत्ल कर दिया गया, दुकानें जला दी गईं, माताओं-बहनों की इज्जत पर हाथ डाला गया, उस व्यक्ति का सिखों द्वारा सम्मान किया जा रहा है। सिंह ने कहा, “मैं वाहे गुरु गोविंद सिंह की सौगन्ध खाकर कहता हूँ कि अब कभी इंदौर नहीं आऊँगा।”

बता दें कि साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में सिखों के खिलाफ हिंसा शुरू हो गई थी। इसमें टाइटलर और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी आरोपित हैं। वहीं, एक अन्य कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार भी आरोपितों में शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसदों में से एक जगदीश टाइटलर ने सीएनएन आईबीएन को बताया था कि उन्होंने इंदिरा गाँधी की मृत्यु के बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के साथ दिल्ली का दौरा किया था। उनके अनुसार, तब दिल्ली में चारों ओर शांति का माहौल था। सीएनएन न्यूज के मुताबिक, अकाली दल और बीजेपी ने टाइटलर की आलोचना करते हुए उनसे सवाल किया कि क्या राजीव गाँधी भी अशांति फैलाने में शामिल थे।

नानावती आयोग के मुताबिक, दंगा कराने वालों लोगों में कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद जगदीश टाइटलर भी शामिल थे। आरोपित जगदीश टाइटलर ने लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने से भी इनकार कर दिया था। 1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद भड़के थे। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस दंगे में 2800 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि देशभर में मरने वालों का आँकड़ा करीब 3500 था।

इस केस में कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर पर भारत में 1984 के सिख विरोधी दंगों को भड़काने में सीधी भूमिका का आरोप लगाया गया था। सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा मिली है। वहीं, अन्य आरोपित बलवान खोकर, भागमल और गिरधारी लाल को उम्रकैद की सजा मिली, जबकि महेंद्र यादव और किशन खोकर को 10 साल की सजा दी गई। इन दंगों को लेकर इंदिरा गाँधी के बेटे और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने राजीव गाँधी ने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी की हमेशा से सिख विरोधी दंगों के आरोपितों को संरक्षण देने की नीति रही है। हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने के आरोपित कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता कमलनाथ को 2018 में मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। इससे पहले, वह मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से नौ बार चुने गए और कई विभागों को संभाला। कमलनाथ पर 1 नवंबर 1984 को गुरुद्वारा रकाबगंज पर हिंसक भीड़ के हमले का नेतृत्व करने का आरोप है, जिसमें भीड़ ने दो सिखों, एक पिता और एक बेटे को जिंदा जलाकर मार डाला था।

बंगाल में 3 मुस्लिम युवकों ने ‘लेस्बियन कपल’ पर किया हमला: प्राइवेट पार्ट को गर्म रॉड से जलाया, शरीर पर तेजाब छिड़का, 1 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में 2 समलैंगिक (लेस्बियन) महिलाओं को बुरी तरह प्रताड़ित करने का मामला प्रकाश में आया है।  घटना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर अनुमंडल के सागरदिघी कस्बे की है। आरोपितों की पहचान साहेबुल शेख, कदम मुल्ला और समीर के तौर पर हुई है। मुल्ला और समीर को पीड़िताओं का रिश्तेदार बताया जा रहा है।

पूरी घटना 25 अक्टूबर को रात 11 बजे के आसपास की है। कथिततौर पर तीनों आरोपित पहले घर में घुसे और फिर महिलाओं से पूछने लगे कि वो दोनों एक साथ एक बिस्तर पर क्यों सो रही हैं। इसके बाद तीनों आरोपितों ने दोनों महिलाओं को प्रताड़ित किया और दोनों के प्राइवेट पार्ट को गर्म रॉड से जला डाला।

घटना के वक्त आरोपितों ने महिलाओं को नंगा करके उनसे रेप करने का प्रयास भी किया और उनके शरीर पर तेजाब भी छिड़का। पूरी घटना को अंजाम देने के बाद उन्होंने महिलाओं को धमकी दी कि अगर उन्होंने इन सब चीजों के बारे में किसी को बताया तो फिर वो उनकी लेस्बियन होने की हकीकत दुनिया को बता देंगे।

घटना के बाद दोनों महिलाओं को सागरदिघी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया और एक हफ्ते बाद उन्हें वहाँ से छुट्टी मिली। जानकारी होने पर पीड़िता की दादी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है। वहीं पीड़िता ने कहा, “मैं और मेरी सहेली हर रोज मिलते थे और बीड़ी पीते थे। 25 अक्टूबर को मैंने उसे नहीं देखा।। जब मैंने उसे फोन किया तो उसने मुझसे मिलने को कहा। उसे उस दिन काफी पेट में दर्द हो रहा था।”

पुलिस के सामने दोनों महिलाओं ने अपने समलैंगिक होने की बात को स्वीकारा और बताया कि उस रात वह एक दूसरे के साथ रात बिता रही थीं। उन्होंने कहा, “हम रिलेशनशिप में हैं। हमें किसी ने ऐसा करने से नहीं रोका। अगर रोका होता तो हम ये करते ही नहीं। उस दिन तीनों ने हमारे साथ छेड़छाड़ की। हमें गलत ढंग से छुआ, हमारे साथ बलात्कार करने की कोशिश की।”

बताया जा रहा है कि दोनों पीड़िताएँ 20-24 साल की हैं और किसान परिवार से आती हैं। जाँचकर्ताओं का मानना है कि उनकी समलैंगिक होने की बात जानने के बाद आरोपित उनका शोषण करना चाहते थे।  उनका शायद मकसद रेप करना था। 

पुलिस ने कहा, “हो सकता है उनका मकसद दोनों मासूम लड़कियों का रेप करना ही था। ग्रामीण क्षेत्रों में ये सब आसान है अगर लड़कियों के ऊपर लेस्बियन का ब्रांड चिपका दिया गया हो।”

बता दें कि इस मामले में मालदा पुलिस ने साहेबुल शेख को गिरफ्तार कर लिया है। 7 नवंबर को उसे कोर्ट में पेश किया गया था जिसके बाद उसे 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जांगीपुर के एसपी भोलानाथ पांडे ने कहा, “हमने तीन में से एक को पकड़ लिया है। दो की तलाश जारी है।”

‘जासूसी करने को कहा, मना करने पर धमकी दी’: ISRO के रॉकेट साइंटिस्ट का PM मोदी को पत्र, बताया- केरल पुलिस भी शामिल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में काम कर रहे एक रॉकेट वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य (Rocket Scientist Pravin Maurya) ने आरोप लगाया है कि कुछ जासूस उन्हें भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं और मना करने पर धमकी दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह इसरो और केरल पुलिस (Kerala Police) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है।

वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य ने 9 नवंबर 2022 को ट्विटर पर अपने लिंक्डइन पोस्ट का एक लिंक साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को लिखे गए पत्र की एक कॉपी साझा की। उन्होंने मामले की खुफिया जाँच के लिए अनुरोध किया है।

मौर्य ने 5 अगस्त 2022 को प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र की एक प्रति 9 नवंबर 2022 लिंक्डइन पोस्ट में शामिल की है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्होंने गृह मंत्री और इसरो के अध्यक्ष को शिकायत की कॉपी भेजी है।

मौर्य ने कहा कि फिलहाल वह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान पर काम कर रहे हैं। अजीकुमार सुरेंद्रन नाम का एक व्यक्ति ने उनसे जासूसी करने के लिए संपर्क किया। उसने इसरो की कुछ गोपनीय जानकारी के बदले में उन्हें मोटी रकम देने का वादा किया। मौर्य का कहना है कि सुरेंद्रन दुबई में कुछ लोगों के लिए काम कर रहा है।

प्रवीण मौर्य ने आगे आरोप लगाया कि अजीकुमार सुरेंद्रन ने उन्हें एक स्थायी जासूस बनने की पेशकश की। जब उन्होंने मना कर दिया तो सुरेंद्रन ने अपनी बेटी का इस्तेमाल झूठे पॉक्सो मामले में फँसाने के लिए किया। मौर्य ने आरोप लगाया कि केरल पुलिस की मिलीभगत से ऐसा किया गया। इसरो के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी सुरेंद्रन को उसकी योजना में मदद कर रहे थे। मौर्य के अनुसार, पॉक्सो केस वापस लेने के बदले सुरेंद्रन ने उसकी माँगों को मानने के लिए कहा।

अपने लिंक्डइन पोस्ट में मौर्य ने इसरो के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर उनके पत्रों को केवल हास्यास्पद कारण कि ‘यह एक कर्मचारी की शिकायत है’ से खारिज करने का आरोप लगाया। मौर्य के अनुसार, इसरो के अधिकारी निम्नलिखित कारणों से शिकायत की सीबीआई या खुफिया जाँच नहीं चाहते हैं:

  • इसरो के कुछ वरिष्ठ अधिकारी जासूसों को उनकी योजना को अंजाम देने में मदद कर रहे थे। ऐसे में इसरो में मौजूद इन राष्ट्रविरोधी अधिकारियों का पूरा रैकेट खुफिया ब्यूरो की जाँच के दायरे में आ जाएगा।
  • पुलिस विभाग के अधिकारी भी आईबी के दायरे में रहेंगे।
  • इसरो में वरिष्ठ अधिकारियों में से एक, जो मुख्य खिलाड़ी है, इसरो के एक पूर्व अध्यक्ष का रिश्तेदार है। अगर खुफिया जाँच को मंजूरी मिलती है तो वह निश्चित तौर पर जाँच के दायरे में आएगा।

उन्होंने आगे लिखा, “आईबी जाँच के लिए तैयार है। उसे केवल अंतरिक्ष विभाग से एक आधिकारिक अनुरोध की आवश्यकता है, जो वे ऊपर वर्णित कारणों से नहीं दे रहे हैं।”

इसरो वैज्ञानिक ने केरल पुलिस पर लगाया रैकेट में शामिल होने का आरोप

प्रवीण मौर्य ने केरल पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कैसे अजीकुमार सुरेंद्रन के इशारे पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और धमकाया गया। इस काम को अंजाम केरल पुलिस ने दिया। केरल पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।

इसरो वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य द्वारा भारत के पीएम को संबोधित पत्र की एक प्रति

भारत के प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में प्रवीण मौर्य ने विस्तार से बताया है कि कैसे केरल पुलिस और इसरो के कुछ अधिकारियों ने उन्हें झूठे POCSO और NDPS आरोपों में फँसाया और कैसे उन्हें जासूसी करने से इनकार पर धमकाया और परेशान किया गया।

मौर्य ने दावा किया कि केरल पुलिस पूरे रैकेट में सक्रिय रूप से शामिल थी और लगातार उन पर माँगों को मानने के लिए दबाव डाल रही थी। इसलिए उन्हें केरल छोड़ने और उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक शहर लौटने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री से इस मामले की जाँच शुरू करने का आग्रह किया, ताकि सच्चाई का पता चल सके और देश के दुश्मनों को दंडित किया जा सके।

इसरो के वैज्ञानिक तपन मिश्रा ने जहर देने का लगाया था आरोप

ISRO के शीर्ष वैज्ञानिक तपन मिश्रा (Tapan Misra) ने जनवरी 5 2021 को खुलासा किया था कि उन्हें तीन साल से अधिक समय पहले जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। अपने फेसबुक पोस्ट ‘लॉन्ग केप्ट सीक्रेट’ में उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि 23 मई 2017 को बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में पदोन्नति साक्षात्कार के दौरान उन्हें घातक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी।

मिश्रा ने अंदेशा जताया था कि उन्हें डोसे की चटनी में जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी, जिसके बाद उन्हें तनाव और दर्द से उबरने में 2 साल लग गए। अपने पोस्ट में उन्होंने अपनी हत्या के प्रयासों में अमेरिका की संलिप्तता बताई थी। तपन ने लिखा था कि साल 2019 में अचानक एक भारतीय अमेरिकी प्रोफेसर उनके कार्यालय में दिखाई दिया और उन्हें जहर देने की इस घटना पर चुप रहने को भी कहा गया।

मिश्रा ने कहा था कि इससे पहले उन्हें ईमेल के जरिए भी सैंकड़ों धमकियाँ मिली थीं। उन्होंने यह भी खुलासा किया था कि कई बार सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें आगाह करके बचाया था। जहर दिए जाने के आरोपों पर मिश्रा ने कहा था, “कोई निश्चित रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को कुछ नुकसान पहुँचाना चाहता था। एकमात्र उपाय अपराधी को पकड़ना और उन्हें दंडित करना है।”

अपने फेसबुक पोस्ट में मिश्रा ने उन सहकर्मियों के प्रति भी निराशा व्यक्त की थी, जो उन्हें इस हमले के बाद नकारने लगे थे। वह कहते थे कि लाख प्रयासों के बाद उन्हें आज तक न्याय नहीं मिला। उनके मुताबिक, ISRO के दो अध्यक्षों ने तो उनके विरोध पर आँख मूंद ली थी। इसके कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।

अपने पोस्ट की शुरुआत में उन्होंने कई वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत का उल्लेख किया था। उन्होंने 1971 में प्रोफेसर विक्रम साराभाई, 1999 में डॉ एस श्रीनिवासन की आकस्मिक मौत और 1994 में नम्बी नारायण के साथ हुई साजिश का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने (तपन मिश्रा) कभी सोचा भी नहीं था कि वह इन रहस्यों का एक दिन हिस्सा बनेंगे।

नंबी नारायणन: कॉन्ग्रेस के उत्पीड़न के शिकार

यहाँ बताना आवश्यक है कि वर्ष 1994 में इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन भी कॉन्ग्रेस पार्टी के उत्पीड़न के शिकार हुए थे। केरल कॉन्ग्रेस पार्टी के दो गुटों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण नवंबर 1994 में दो अन्य वैज्ञानिकों- डी शशिकुमारन और के चंद्रशेखर के साथ नारायणन की गिरफ्तारी हुई। केरल पुलिस ने इस वैज्ञानिकों के खिलाफ सरकारी गोपनीयता अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत जासूसी के आरोप लगाए थे।

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नंबी नारायणन (Nambi Narayanan) से संबंधित जासूसी मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय जाँच का आदेश दिया था। इस साल अप्रैल में अदालत ने सीबीआई को जाँच अपने हाथ में लेने और मामले की आगे की जाँच करने का निर्देश दिया था।