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एफिल टॉवर के सामने लड़कियों ने उतारे कपड़े, सेमी-न्यूड फोटोशूट पर आक्रोशित हुए लोग: रोकती रह गई पुलिस, देखने के लिए जमा हुई थी भीड़

ब्राजीलियाई मॉडल्स का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो पेरिस के एफिल टावर के पास बनाया है। इस वीडियो में दो मॉडल एफिल टॉवर के सामने बिकिनी में फोटोशूट कराती हुई दिखाई दे रही हैं। इन मॉडल्स की पहचान 24 वर्षीय गैब्रिएला वर्सियानी और 27 वर्षीय गैबिली के रूप में हुई है। यह घटना 31 अक्‍टूबर की बताई जा रही है। वीडियो में एक महिला पुलिस अधिकारी उनके पास जाकर उन्हें खुद को कवर करने के लिए कह रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेरिस के एफिल टावर के पास दो ब्राजीलियन मॉडल के फोटोशूट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से बवाल मच गया गया है। वे अपनी फोटो और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करने के बाद यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। लोगों ने कहा कि मॉडल्स को अपनी हरकत पर शर्मिंदा होना चाहिए। वहीं, एक यूजर ने कहा कि अगर आप अपने ब्रांड का प्रचार करना चाहती थीं कि तो आपको किसी कैरेबियाई देश जाना चाहिए था या फिर स्विमिंग पूल में जाना चाहिए था। वहीं कुछ यूजर्स ने इन मॉडल का समर्थन भी किया।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक लड़की लंबे काले कोट पहने हुए है, उसे उतार रही है। वहीं एक अन्‍य मॉडल ने ब्‍लेजर पहना हुआ है। इनकी हरकतें देखने के लिए वहाँ भीड़ जमा हो गई। इसके बाद कुछ पुलिस अधिकारी भी वहाँ पहुँच गए। एक महिला पुलिस अधिकारी ने महिलाओं को उनकी बॉडी कवर करने को कहा। इस दौरान मॉडल्स की फोटो क्लिक कर रही वैनेसा लोपेज ने घटना के बारे में सोशल मीडिया पर बताया, “हम लोग गिरफ्तार होते होते बचे हैं, क्योंकि हम बिकिनी का प्रमोशन कर रहे थे और हमें वहाँ ऐसा करने की इजाजत नहीं थी।”

वैनेसा ने आगे बताया कि ये मॉडल अपने बिकिनी बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए आई थीं। पुलिस अधिकारियों ने उन लोगों से कहा कि यहाँ के कानून के मुताबिक कोई भी, किसी टूरिस्ट स्पॉट के सामने सेमी-न्यूड फोटो नहीं ले सकते हैं।

चीतल को ढेर किया, 2 घंटे में खा-पी कर ख़त्म कर दिया… नामीबिया से आए 2 चीतों ने किया अपना पहला शिकार, सामने आई तस्वीरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए चीते छोड़े थे। हालाँकि, चीतों को अभी तक एक बाड़े में रखा गया था। उन्हें बाड़े में ही खाने के लिए मांस दिया जाता था। चीतों ने छोटे बाड़े से छूटने के 24 घंटे के भीतर में अपना पहला शिकार किया है। उन्होंने चीतल (चित्तीदार हिरण) को अपना शिकार बनाया।

जिला वन अधिकारी (डीएफओ) प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा, “श्योपुर के कुनो नेशनल पार्क में एक बड़े बाड़े में छोड़े जाने के 24 घंटे के भीतर दो चीतों ने अपना पहला शिकार किया।” अधिकारी ने कहा कि चीतों ने रविवार की रात या सोमवार की तड़के (6-7 अक्टूबर 2022) एक चीतल (चित्तीदार हिरण) का शिकार किया। अधिकारियों ने बताया कि निगरानी दल को इस शिकार की जानकारी सोमवार सुबह (7 अक्टूबर, 2022) में मिली। चीतल का शिकार करने के बाद चीतों ने उसे दो घंटे के भीतर खा कर खत्म कर दिया।

अधिकारी ने कहा कि सितंबर के मध्य में नामीबिया से भारत में छह चीतों को लाया गया। फ़्रेडी और एल्टन नाम के चीतों को 17 सितंबर से अलग रहने के बाद 5 नवंबर को बड़े बाड़े में छोड़ा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीतों को बड़े बाड़े में छोड़े जाने पर ख़ुशी व्यक्त की थी।

पीएम मोदी ने रविवार (6 अक्टूबर 2022) को ट्वीट कर कहा, “अच्छी खबर! मुझे बताया गया है कि मैंडेटरी क्वारंटाइन के बाद, 2 चीतों को कुनो निवास स्थान के अनुकूलन के लिए एक बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया है। अन्य को जल्द ही छोड़ दिया जाएगा। मैं यह जानकर खुशी हुई कि सभी चीते स्वस्थ, सक्रिय और अच्छी तरह से तालमेल बिठा रहे हैं।”

गत सितंबर माह में नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे। जिनमें से 5 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। इन्हें पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन पर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। लगभग एक महीने तक  इन दोनों चीतों को क्वारंटीन में रखने के बाद 5 नवंबर को बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया। शुरुआती योजना के तहत इन चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन में रखा गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर जंगली जानवरों को स्थानांतरण से पहले और बाद में एक महीने के लिए क्वारंटीन किया जाता है, ताकि वे दूसरे देश से अपने साथ लाए किसी बीमारी को फैला ना पाएँ।

दिल्ली शराब घोटाले में बढ़ीं मनीष सिसोदिया की मुश्किलें, करीबी ही सरकारी गवाह बनने को तैयार: खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, कहा – सब कुछ बताऊँगा

दिल्ली की शराब नीति को लेकर उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सिसोदिया का करीबी और आबकारी घोटाला मामले का आरोपित दिनेश अरोड़ा सरकारी गवाह बनने को तैयार हो गया है। उसने कहा ​है कि वह बिना किसी दबाव के सरकारी गवाह बनना चाहता है। इसके लिए दिनेश ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने कहा कि वह इस मामले में अपनी भूमिका और इससे जुड़े सच से पर्दा उठाएँगे।

कोर्ट इस मामले में 14 नवंबर को सुनवाई करेगा और उसका बयान दर्ज किया जाएगा। राऊज एवेन्यू कोर्ट उसके बाद तय करेगा कि दिनेश अरोड़ा को सरकारी गवाह बनाया जाए या नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिनेश अरोड़ा सोमवार (7 नवंबर, 2022) को अदालत में पेश हुआ और कहा कि वह अपनी मर्जी से सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार हुआ है। अरोड़ा ने कहा, “मैं इस मामले से जुड़े सभी तथ्य अदालत के समक्ष रखूँगा।”

इस पर कोर्ट ने आरोपित से पूछा कि उस पर किसी तरह का कोई दबाव तो नहीं है या सीबीआई की तरफ से कोई धमकी तो नहीं दी गई है, तो आरोपित ने कहा, “मैं इस मामले में मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं और अपनी भूमिका के बारे में सब कुछ सच बताऊँगा। मैं जाँच में भी सहयोग करता रहा हूँ और आगे भी करता रहूँगा। मैं जाँच अधिकारी के सामने कुछ स्टेटमेंट दे चुका हूँ और कोर्ट के सामने अपना कंफेशन स्टेटमेंट भी दे चुका हूँ।”

बता दें ​कि इससे पहले सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में कहा था कि अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगी थे और शराब लाइसेंसधारियों से इकट्ठा किए गए पैसों का प्रबंधन करने में सक्रिय रूप से शामिल थे। सिसोदिया इस मामले में मुख्य आरोपित हैं। जाँच एजेंसी ने यह भी कहा था कि इंडोस्पिरिट्स के निदेशक समीर महेंद्रू ने एक करोड़ रुपए राधा इंडस्ट्रीज के अकाउंट में ट्रांसफर किए। यह इंडस्ट्री अरोड़ा की है।

गौरतलब है कि दारू घोटाले में घिरने के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को सीबीआई (CBI) ने अक्टूबर 2022 में पूछताछ के लिए बुलाया था। सीबीआई ने उनसे करीब 9 घंटे तक पूछताछ की थी, जिसके बाद सिसोदिया ने दावा किया था कि CBI ने उन पर AAP छोड़ने का दबाव डाला। जाँच एजेंसी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि पूछताछ वैधानिक और पेशेवर तरीके से हुई है।

9 लोगों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म में की घर-वापसी, बताया – 150 साल पहले दबाव में पूर्वज बन गए थे मुस्लिम: उत्तराखंड में भी मिले ऐसे आवेदन

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 9 लोगों ने इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म में ‘घर वापसी’ की है। धर्म परिवर्तन करने वाला परिवार मूल रूप से सहारनपुर का रहने वाला है। इनके पूर्वजों ने 150 साल पहले दबाव में आकर इस्लाम अपनाया था। लेकिन, अब स्वेच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। वहीं, उत्तराखंड के देहरादून में मुस्लिम युवक ने हिंदू धर्म अपनाने को लेकर कलेक्टर के पास अर्जी लगाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सहारनपुर के मुस्लिम परिवार ने मुजफ्फरनगर के योग साधना यशवीर आश्रम बघरा में हिंदू धर्म अपनाया है। इस आश्रम में स्वामी यशवीर महाराज की उपस्थिति में यज्ञ-हवन कराकर वैदिक रीति-रिवाज के साथ परिवार के 9 लोगों का धर्म-परिवर्तन कराया गया है। हिंदू धर्म अपनाने वाले वादिल को विवेक सैनी, अलीसा को अनन्या सैनी, राबिया को पल्लवी सैनी, नाजिया को नीतू सैनी, वरीसा को मनीषा सैनी, गुलिस्तां को रविता सैनी, सानिया को निशा सैनी, आकिल को रोहित सैनी और रुखसाना को बबीता सैनी नाम दिया गया है।

योग साधना यशवीर आश्रम बहरा के स्वामी यशवीर महाराज का कहना है कि ये सभी लोग पहले हिंदू सैनी थे। लेकिन, इनके पूर्वज 150 साल पहले दवाब में आकर मुस्लिम बन गए थे। ये लोग लंबे समय से इस्लाम को मानते आ रहे हैं। अब अपनी इच्छा से सनातन धर्म संस्कृति को स्वीकार करते हुए हिंदू धर्म अपना रहे हैं।

इससे पहले, यशवीर महाराज ने आरोप लगाया था कि जनपद के गाँव फुलत स्थित मदरसे में लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि अब तक लाखों हिंदुओं को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जा चुका है। इसलिए, फुलत मदरसे की जाँच कर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, उत्तराखंड के देहरादून में लक्खीबाग निवासी सईद अरशद नामक व्यक्ति मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने के लिए जिला न्यायालय पहुँचा था। जहाँ से उसे कलेक्टर से संपर्क करने के लिए कहा गया था। इसके बाद उसने कलेक्टर के पास अर्जी लगाते हुए स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने की बात कही है।

इस मामले में कलेक्टर सोनिका का कहना है कि जल्द से जल्द धर्म-परिवर्तन की कार्यवाही पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा है मुस्लिम धर्म त्यागकर हिंदू धर्म अपनाने के अन्य आवेदन भी मिले हैं। इन पर भी कार्यवाही की जा रही है।

पत्रकार दीपक चौरसिया के खिलाफ जारी हुआ गिरफ़्तारी वॉरंट, अदालत ने नहीं मानी ‘मेडिकल समस्याओं’ वाली दलील: बॉन्ड भी किया रद्द

हरियाणा में गुरुग्राम की एक विशेष अदालत ने पत्रकार दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasia) के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है। यह वारंट दीपक चौरसिया के खिलाफ 2013 के एक मामले में जारी किया गया है। दरअसल, टीवी पत्रकार पर आरोप पर है कि उन्होंने 10 वर्षीय लड़की और उसके परिवार के ‘मॉर्फेड, एडिट और अश्लील’ वीडियो को प्रसारित किया और उसे स्वघोषित बाबा आसाराम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले से जोड़ कर दिखाया था।

अदालत ने यह आदेश 28 अक्टूबर, 2022 को तब जारी किया जब चौरसिया ने गंभीर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेशी में छूट की माँग करते हुए एक याचिका दायर की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) चौहान ने कहा कि 23 सितंबर को भी इसी तरह की एक याचिका दायर की गई थी। उनके विरोधी पक्ष ने दलील दी कि ऐसा प्रतीत होता है कि चौरसिया जानबूझकर अदालत आने से बच रहे हैं। कोर्ट में उनकी मेडिकल रिपोर्ट दीपक चौरसिया की दलीलों को साबित नहीं कर पाई।

इसके बाद अदालत ने उनकी पेशी से बचने की याचिका को खारिज करते हुए उनका बेल बॉन्ड भी रद्द कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यायाधीश शशि चौहान ने 21 नवंबर, 2022 को गिरफ्तारी का वॉरंट जारी किया। इस मामले में अब तक मीडिया में दीपक चौरसिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मालूम हो कि दीपक चौरसिया उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन पर दस साल की बच्ची और उसके परिवार के एडिट, अश्लील वीडियो प्रसारित करने और वीडियो को यौन उत्पीड़न से जोड़ कर दिखाने के ​मामले में चार्जशीट दायर की गई थी।

बता दें कि यह मामला 2013 में बच्चे के रिश्तेदार की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से संबंधित है। न्यूज चैनल न्यूज 24, इंडिया न्यूज और न्यूज नेशन पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप लगाया गया था। खबरों के मुताबिक, न्यूज 24 के पूर्व मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम, एंकर चित्रा त्रिपाठी और चौरसिया पर आरोप है कि इन समाचार चैनलों पर प्रसारित वीडियो में आंशिक रूप से बच्ची, शिकायतकर्ता की पत्नी और कुछ अन्य महिलाओं के चेहरे दिखाई गए थे।

नारी पूजन को बलात्कार से जोड़ने वाला कॉमेडियन बेंगलुरु में करेगा शो, हिन्दू संगठन ने दर्ज कराई शिकायत: कहा – कानून-व्यवस्था बिगड़ने की है आशंका

अमेरिका में जाकर भारत का अपमान करने वाले और नारी को पूजने की परंपरा को रेप से जोड़ने वाले कॉमेडियन वीर दास एक बार फिर से चर्चा में हैं। कर्नाटक में ‘हिंदू जनजागृति समिति’ ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। समिति ने 10 नवंबर को बेंगलुरु में होने वाले उनके शो को रद्द करने की माँग की है।

समिति की तरफ से व्यालिकावल पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। समिति ने कहा, “यह पता चला है कि कि विवादित कॉमेडियन वीर दास बेंगलुरु के मल्लेश्वरम में चौडिया मेमोरियल हॉल में 10 नवंबर को कॉमेडी शो कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने वॉशिंगटन के जॉन एफ कैनेडी सेंटर में महिलाओं, हमारे प्रधानमंत्री और भारत के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था।”

उक्त कार्यक्रम में उन्होंने भारत की महिलाओं के बारे में भी अभद्र टिप्पणी की थी और देश में पूजने की परंपरा को रेप से जोड़ा था। समिति की शिकायत में भी इसका जिक्र किया गया है। शिकायत के अनुसार, “वीर दास ने कहा था कि भारत में हम दिन में महिलाओं की पूजा करते हैं और रात में गैंगरेप करते हैं। इस संबंध में हमने मुंबई और दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। आईपीसी की धारा के तहत ये गंभीर अपराध है।”

समिति ने कहा कि इन सब चीजों को देखते हुए इस विवादित शख्स को बेंगलुरु जैसे सामुदायिक रूप से संवेदनशील इलाके में कार्यक्रम के लिए मंजूरी देना ठीक नहीं है, वो भी ऐसे समय में जब कर्नाटक पहले से ही सांप्रदायिक घटनाओं के चलते कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं का सामना कर रहा है। आशंका जताई गई है कि ऐसे कार्यक्रम से कानून-व्यवस्था और बिगड़ सकती है। इसी आधार पर माँग की गई है कि वीर दास के कार्यक्रम को मंजूरी ना मिले।

दरअसल, वीर दास ने 16 नवंबर, 2021 को जॉन एफ केनेडी सेंटर में 7 मिनट तक भारत विरोधी प्रोपगेंडा को जमकर हवा दी थी। अपने वन लाइनर्स की मदद से उन्होंने भारत को, भारत की राजनीति को, स्थानीय मुद्दों को, पीएम मोदी को खूब कोसा और भारत में नारी को पूजने की जो परंपरा है, उसे रेप से जोड़ा था।

मंच पर खड़ा होकर वीर दास ने कहा था, “मैं उस भारत से आता हूँ जहाँ महिला को सुबह पूजा जाता है और रात में गैंगरेप होता है।” उन्होंने एक अंग्रेजी कविता ‘आई कम फ्रॉम टू इंडिया’ (मैं दो भारत से आता हूँ) सुनाई थी। तब वकील आशुतोष जे दुबे ने भी मुंबई पुलिस में कॉमेडियन के विरुद्ध शिकायत करवाई थी।

राजस्थान में मिशनरियों के टारगेट पर 3 लाख लोग, घूम-घूमकर मूर्ति पूजा पर हो रहा दुष्प्रचार: मध्य प्रदेश में धर्मांतरण करा रहे 8 गिरफ्तार

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मेरठ से मदद के नाम पर 400 लोगों को धर्मांतरित कर ईसाई बनाने का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में भी हिंदुओं के धर्मांतरण की साजिश बड़े पैमाने पर रची जा रही है। राज्य के करीब तीन लाख लोगों के संपर्क में ईसाई प्रचार मंडलियाँ हैं और मूर्ति पूजा को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। वहीं मध्य प्रदेश में ईसाई धर्मांतरण में लिप्त आठ लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर से महज 22 किमी दूर वाटिका ग्राम पंचायत की ढाणी बैरावालाें में मिशनरी सक्रिय हैं। 400 परिवारों की इस बस्ती के लोगों को लालच देकर धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा है।

ईसाई प्रचारक लोगों से मूर्ति पूजा बंद करने, व्रत न रखने, हिंदू देवी-देवताओं को न मानने का उपदेश बाँटते फिर रहे हैं। साथ ही दावा करते हैं कि ईसा मसीह की पूजा से बीमारी से लेकर अन्य सभी समस्याएँ दूर हो जाएँगी। वहीं, देवी-देवताओं की पूजा से अनर्थ हो जाएगा।

स्थानीय लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि मिशनरी से जुड़े लोग रोजगार का लालच दे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ नदी, तलाब में फेंकने या फिर पीपल पेड़ के पास रखने के लिए कहते हैं। फिर, यीशू की शरण में आने के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है। धर्म जागरण मंच के हवाले से बताया गया है कि राज्य के 12 से 13 जिलाें में ऐसा चल रहा है। इन जिलों के करीब तीन लाख लाेगों के संपर्क में मिशनरी के प्रचारक हैं।

वहीं, मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के डाला में जबरन धर्मांतरण करा रहे 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आरोपित ईसाई मिशनरी से जुड़े हुए थे। पुलिस ने बताया है कि डाला गाँव में सोहनलाल नागेश के घर पर कुछ लोगों का धर्मांतरण कराए जाने की शिकायत मिली थी। धर्म परिवर्तन के बदले आर्थिक मदद प्रलोभन भी दिया जा रहा था।

इस मामले में श्रीराम सेना के प्रांतीय अध्यक्ष शुभम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में धर्मांतरण की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। आदेगाँव में पहले भी धर्मांतरण हुआ है। लेकिन अब इन लोगों ने गिरफ्तारी से धर्मांतरण में कमी आएगी।”

परिवार को मारने पर स्वर्ग या नर्क: गूगल पर किया सर्च… माँ-बाप और 2 बेटों को मार डाला, फिर खुद भी पानी की टंकी में कूद मर गया

राजस्थान के जोधपुर में 3 नवंबर 2022 को एक ही परिवार के 5 लोगों के शव मिले थे। अब यह जानकारी सामने आई है कि इनमें से एक ने अन्य की पहले हत्या की और फिर खुद भी आत्महत्या कर ली। इस जघन्य कांड को अंजाम देने की वह कई दिनों से तैयारी कर रहा था। यहाँ तक कि गूगल से भी पूछा था कि परिवार की हत्या के बाद स्वर्ग मिलेगा या फिर नर्क।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जोधपुर के लोहावट इलाके का है। यहाँ 38 साल का शंकर लाल अपने परिवार के साथ रहता था। वह खेती-बाड़ी का काम करता था। परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और माता-पिता भी थे। शंकर लाल को अफीम की लत लग गई थी, जिसकी वजह से उसका अपनी पत्नी से आए दिन झगड़ा होता रहता था। इसी वजह से वो खुद ही अपने परिवार का दुश्मन बन बैठा। शंकर लाल सितम्बर 2022 से ही अपने परिवार को खत्म करने का प्लान बना रहा था।

आखिरकार 3 नवम्बर 2022 को शंकर लाल ने पत्नी छोड़ कर अपने पूरे परिवार को मार डाला। सबसे पहले शंकर लाल ने अपने 65 साल के पिता सोनाराम की कुल्हाड़ी मार कर हत्या की। इसके बाद वो घर से भाग गया। कुछ लोगों ने सोनाराम को अस्पताल पहँचाया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बाद में घर आ कर उसने पूरे परिवार को नींद की गोलियाँ खिला दीं। गहरी नींद में सो जाने के बाद शंकर लाल ने बारी-बारी अपनी माँ और दोनों बेटों को पानी की टंकी में फेंक दिया।

इसके बाद शंकर लाल ने खुद भी पानी की टंकी में कूद कर आत्मह्त्या कर ली। पुलिस ने इन सभी मौतों के पीछे के कारणों की जाँच शुरू की तो उसमें शंकर लाल के मोबाइल की डिटेल अहम साबित हुई। पुलिस ने शंकर लाल की मोबाइल हिस्ट्री में पाया कि उसने सर्च किया था कि वो मौत के बाद स्वर्ग जाएगा या नर्क। इस बात से अनुमान लगाया जा रहा है कि वो अपने ही परिवार को खत्म करने से पहले अपने मौत के बाद के बारे में जानकारी जुटा रहा था।

शंकर लाल के फोन की हिस्ट्री में दूसरी अहम बात नींद की गोलियों के बारे में जुटाई गई सूचना थी। इसके लिए शंकर लाल ने अच्छी क्वालिटी की नींद की गोलियों के बारे में काफी सर्च किया था। क्वालिटी के साथ शंकर लाल ने किस गोली का कितना और कितनी देर तक असर रहता है, इसकी भी जानकारी ली थी। माना जा रहा है कि शंकर लाल की तैयारियों में अपने परिवार को नींद की गोलियों के साथ जहर भी देना शामिल था। मौत से पहले उसने परिवार के सदस्यों को नींद की 22 गोलियाँ खिलाई थी। ये गोलियाँ उसने सोने से पहले पी गई शिकंजी में डाल कर दी थीं।

इंटरनेट पर इन तमाम खोजबीन के साथ शंकर लाल सावधान इंडिया और क्राइम पेट्रोल शो भी देख रहा था। 14 सितम्बर से उसने कई अन्य क्राइम सीरीज भी देखना शुरू कर दिया था। माना जा रहा था कि हत्या की प्लानिंग उसने इन्हीं शोज को देखकर की होगी। जानकारी के अनुसार 4 शो देखने के बाद उसने घर वालों को मारने की पुख्ता तैयारी कर डाली थी। शंकर लाल अपनी पत्नी को नहीं मरना चाहता था। शंकर लाल के मोबाइल से विधवा पेंशन के बारे में जानकारी खोजी गई थी। उसकी सर्च में ये भी शामिल था कि मौत के बाद किसी परिवार के लिए सरकार क्या करती है।

ईरानी औरतों के समर्थन में आईं केरल की मुस्लिम महिलाएँ, एकजुट होकर हिजाब जलाया: भारत में पहली घटना, पोस्टर लेकर नारेबाजी भी की

केरल के कोझिकोड टाउन हॉल के सामने मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने रविवार (6 नवंबर 2022) को हिजाब जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। भारत में हिजाब जलाने की यह पहली घटना है। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं। ऐसा करके उन्होंने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन का समर्थन करते हुए एकजुटता का संदेश दिया। यह घटना केरल युक्तिवादी संगम द्वारा आयोजित एक सेमिनार के दौरान हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोझिकोड में ‘फैनोस-साइंस एंड फ्री थिंकिंग’ टाइटल का एक सेमिनार आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत मुस्लिम महिलाओं ने ईरान में चल रहे हिजाब विरोधी आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई और संगठन की छह मुस्लिम महिलाओं की अगुवाई में हिजाब जलाया गया। इस दौरान महिलाएँ हाथों में पोस्टर लेकर नारे लगाते हुए भी नजर आईं।

युक्तिवादी संगम एक राष्ट्रीय संगठन है, जिसके द्वारा हर साल इस तरह के सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। इस आयोजन में मुस्लिम महिलाओं सहित विभिन्न धर्मों के लोग भाग लेते हैं, जो संगठन का हिस्सा हैं।

गौरतलब है कि ईरान में इन दिनों हिजाब विरोधी प्रदर्शन तेज हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हिजाब नहीं पहनने के कारण हुई थी। ईरान में 13 सितंबर 2022 को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी (22) को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हिरासत में उसे इतना मारा गया कि वह कोमा में चली गई। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को उसकी मौत हो गई। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए। महसा अमीनी की हत्या के बाद से महिलाएँ सड़कों पर उतर कर विरोध कर रही हैं। वे हिजाब फेंककर, जलाकर और अपने बालों को काटकर हिजाब के लिए इस्लामी सरकार का विरोध कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमेनाई की तस्वीरें भी जलाई थीं। इन प्रदर्शनकारी महिलाओं को देश-दुनिया से भारी समर्थन मिल रहा है।

भारत से भी ईरानी की महिलाओं को लगातार समर्थन मिल रहा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और मंदाना करीमी ने हिजाब (Hijab) का विरोध किया है। वहीं, बॉलीवुड में काम करने वाली ईरानी अभिनेत्री एलनाज नोरौजी (Elnaaz Norouzi) ने हिजाब का विरोध करते हुए अपने कपड़े उतार दिए। इसका एक वीडियो उन्होंने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया था।

मी लॉर्ड! सहमति से सेक्स के साल कई, 16 की उम्र में हमें सुरक्षा और हौसला दो; क्योंकि यह उम्र खुद को शिक्षित और मजबूत बनाने की

सेक्स करने की उम्र लड़कियों के लिए क्या होनी चाहिए… ये बहस कोई नई नहीं है। केवल बुद्धिजीवी ही नहीं बल्कि अदालत भी इस पर विचार-विमर्श करता रहता है। 3 साल पहले मद्रास हाईकोर्ट में लड़कियों के लिए सेक्स की सही उम्र तय करने का मुद्दा उठा था और अब 2022 में इस विषय पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने लॉ कमीशन से कहा है कि वो जरा इस मामले को देखें कि क्या लड़कियों की सेक्स की उम्र 16 नहीं हो सकती।

कोर्ट का तमाम मामलों को मद्देनजर रखते हुए कहना है कि 16 साल की उम्र में लड़कियाँ प्रेम में पड़कर घर से भाग जाती हैं और फिर लड़के के साथ उनके शारीरिक संबंध बनते हैं। ये उनकी इच्छा से होता है लेकिन जब बात सुनवाई की आती है तो ये तय करना पड़ता है कि आईपीसी की धारा और पॉक्सो की धारा के तहत अपराध है या नहीं।

लाइव लॉ की खबर का स्क्रीनशॉट

अदालतों की यह दुविधा सही है… शायद कोर्ट में ऐसे तमाम मामले आते हों जब न्यायधीशों को नाबालिग लड़कियों की नादानी के कारण और कानून के दायरे में रहते हुए सख्त फैसले देने पड़ते हों, आपसी सहमति से बने संबंधों को भी अपराध कहना पड़ता हो… मगर क्या इस दुविधा को सुलझाने का उपाय केवल यह है कि लॉ कमीशन से लड़कियों की सेक्स की उम्र कम करने पर विचार करने को कहा जाए?

क्या ये समाज के लिए दो विरोधाभासी बातें नहीं कि एक ओर देश की सरकार लड़कियों को शिक्षित करने के लिए, उनकी भलाई के लिए शादी की उम्र 18 से 21 करने पर लगातार विचार कर रही है, ताकि उनका सामाजिक, मानसिक विकास हो सके। वहीं दूसरी ओर हम केस की जटिलताओं को देखते हुए लड़कियों की सेक्स करने की उम्र ही कम करने की बात कर रहे हैं।

मैं जानती हूँ कि सेक्स और शादी का आपस में संबंध नहीं होता, न ही लोकतंत्र में कोई इसके लिए बाध्य है कि शादी के बाद ही सेक्स होना चाहिए… पर यहाँ बात उम्र की है। 16 की उम्र में अधिकांश लड़कियाँ 10वीं या 12वीं में पढ़ाई कर रही होती हैं। ये समय उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास के लिए अहम होता है। समाज में चल रही सभी चीजें, सिनेमा में दिखाए जा रहे सभी दृश्य उन्हें भीतर तक प्रभावित करते हैं।  ऐसे में उनके सामने सेक्स को एक अधिकार के तौर पर रखना कितना उचित होगा ये एक बड़ा सवाल होना चाहिए।

संभव है लड़कियाँ इस उम्र में आकर्षण और प्रेम के बीच उलझकर अपनी शिक्षा और भविष्य को ताक पर रखने के लिए तैयार हो जाएँ। पर, क्या ये फर्ज समाज का, अदालत का नहीं है कि वो सामने आ रही जटिलताओं से ऊपर उठकर लड़कियों की मनोवस्था को केंद्रित करने पर विचार करें। ऐसा करने से संभवत: उन मामलों में अपने आप कमी आ जाए जहाँ नाबालिग की सहमति से बनाए रिश्ते के बाद लड़कों पर सवाल उठते हैं।

कोर्ट ने खुद कहा कि लड़कियाँ कम उम्र में घरों को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ रहने चली जाती हैं। आप सोचिए क्या उन लड़कियों से ये अपेक्षा करना ठीक है कि वो अपने सही-गलत का निर्णय इतनी कम उम्र में ले पाएँगी और इन सबका प्रभाव उनके मानसिक विकास पर नहीं पड़ेगा।

सरकार हो, समाज हो या सामान्य जन हों…एक लड़की की 16 की उम्र आते-आते सबका ध्यान इस बात पर ज्यादा होना चाहिए कि वो उसके सामाजिक विकास में कैसे उसका साथ दे सकते हैं। न कि इस बात में अगर उसका मन किसी गलत दिशा की तरफ भाग रहा है तो या उसके लिए उसे आजाद कहकर खुली छूट दे दी जाए। वरना समाज की उलाहना देकर उसके सारे अधिकार छीन कर घरों में बैठा दिया जाए।

आज का दौर इंटरनेट का दौर है। इस समय में तमाम तरह के कंटेंट को सोशल मीडिया पर देखते-देखते  रिलेशनशिप का ज्ञान बड़ों से ज्यादा छोटे बच्चों के पास आ गया है। इसका मतलब ये नहीं कि वो उसे संभालने के भी योग्य हो गए हों। समय चाहे पहले का हो या फिर अब का शिक्षा ग्रहण करने में जितना समय तब लगता था उतना ही अब भी लगता है। 16 तो फिर वो उम्र होती है जिसमें ठान लिया जाना चाहिए कि क्या जीवन को कौन सी दिशा में लेकर जाना है। फिर चाहे वो अकादमिक क्षेत्र में हो या खेल-कूद में।

प्रेम के नाम पर किसी की ओर आकर्षित होना और फिर अपने आपको पूरी तरह उसे समर्पित कर देना केवल एक 16 वर्ष की लड़की को मनोवस्था को कमजोर बनाता है इसके अतिरिक्त कुछ नहीं।

आज सोशल मीडिया पर किसी का पसंद आना और फिर घरवालों को बिन बताए उससे मिलने के लिए निकल जाना…बहुत सामान्य खबरें लगने लगीं हैं, लेकिन इसके बाद लड़की के साथ क्या होता ये कोई नहीं जानता। वो या तो किसी बुरे कारण से खबरों का हिस्सा बन जाती हैं और नहीं तो अपने जीवन को जीवनसाथी के साथ चलाने के लिए संघर्ष करती रहती हैं।

समय चाहे कितना बदल जाएगा… आधुनिकता के नाम पर कितने बदलाव हो जाएँगे, मगर लड़की के विकास के लिए कम उम्र में सेक्स करने का अधिकार मिलना कभी भी शिक्षा के अधिकार से ऊपर नहीं जा सकता। 16 की उम्र शिक्षित होने, खुद को तन-मन दोनों से मजबूत बनाने, भविष्य सुरक्षित करने की होती है। इस गुमान में जीने की नहीं कि पास में सेक्स का अधिकार है…।

कोर्ट के सामने तमाम केस हैं जिसके कारण ऐसे मुद्दों पर विचार करने को कहना उनकी जरूरत है। लेकिन आप अपनी संस्कृति और आसपास की लड़कियों को देखकर सोचिएगा कि क्या 16 साल की उम्र में अगर सहमति से सेक्स करने का अधिकार दे दिया जाता है तो इससे उन लड़कियों का कितना भला होगा जो जीवन में बहुत कुछ करने की चाह रखती हैं, लेकिन कुछ डिस्ट्रैक्शन के कारण वो सब खोती जा रही हैं और ऐसे कदम उठा रही है जिससे न उनका भविष्य बल्कि उनकी जिंदगी भी खतरे में पड़ रही है।