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बंगाल में 3 मुस्लिम युवकों ने ‘लेस्बियन कपल’ पर किया हमला: प्राइवेट पार्ट को गर्म रॉड से जलाया, शरीर पर तेजाब छिड़का, 1 गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में 2 समलैंगिक (लेस्बियन) महिलाओं को बुरी तरह प्रताड़ित करने का मामला प्रकाश में आया है।  घटना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर अनुमंडल के सागरदिघी कस्बे की है। आरोपितों की पहचान साहेबुल शेख, कदम मुल्ला और समीर के तौर पर हुई है। मुल्ला और समीर को पीड़िताओं का रिश्तेदार बताया जा रहा है।

पूरी घटना 25 अक्टूबर को रात 11 बजे के आसपास की है। कथिततौर पर तीनों आरोपित पहले घर में घुसे और फिर महिलाओं से पूछने लगे कि वो दोनों एक साथ एक बिस्तर पर क्यों सो रही हैं। इसके बाद तीनों आरोपितों ने दोनों महिलाओं को प्रताड़ित किया और दोनों के प्राइवेट पार्ट को गर्म रॉड से जला डाला।

घटना के वक्त आरोपितों ने महिलाओं को नंगा करके उनसे रेप करने का प्रयास भी किया और उनके शरीर पर तेजाब भी छिड़का। पूरी घटना को अंजाम देने के बाद उन्होंने महिलाओं को धमकी दी कि अगर उन्होंने इन सब चीजों के बारे में किसी को बताया तो फिर वो उनकी लेस्बियन होने की हकीकत दुनिया को बता देंगे।

घटना के बाद दोनों महिलाओं को सागरदिघी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया और एक हफ्ते बाद उन्हें वहाँ से छुट्टी मिली। जानकारी होने पर पीड़िता की दादी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई है। वहीं पीड़िता ने कहा, “मैं और मेरी सहेली हर रोज मिलते थे और बीड़ी पीते थे। 25 अक्टूबर को मैंने उसे नहीं देखा।। जब मैंने उसे फोन किया तो उसने मुझसे मिलने को कहा। उसे उस दिन काफी पेट में दर्द हो रहा था।”

पुलिस के सामने दोनों महिलाओं ने अपने समलैंगिक होने की बात को स्वीकारा और बताया कि उस रात वह एक दूसरे के साथ रात बिता रही थीं। उन्होंने कहा, “हम रिलेशनशिप में हैं। हमें किसी ने ऐसा करने से नहीं रोका। अगर रोका होता तो हम ये करते ही नहीं। उस दिन तीनों ने हमारे साथ छेड़छाड़ की। हमें गलत ढंग से छुआ, हमारे साथ बलात्कार करने की कोशिश की।”

बताया जा रहा है कि दोनों पीड़िताएँ 20-24 साल की हैं और किसान परिवार से आती हैं। जाँचकर्ताओं का मानना है कि उनकी समलैंगिक होने की बात जानने के बाद आरोपित उनका शोषण करना चाहते थे।  उनका शायद मकसद रेप करना था। 

पुलिस ने कहा, “हो सकता है उनका मकसद दोनों मासूम लड़कियों का रेप करना ही था। ग्रामीण क्षेत्रों में ये सब आसान है अगर लड़कियों के ऊपर लेस्बियन का ब्रांड चिपका दिया गया हो।”

बता दें कि इस मामले में मालदा पुलिस ने साहेबुल शेख को गिरफ्तार कर लिया है। 7 नवंबर को उसे कोर्ट में पेश किया गया था जिसके बाद उसे 7 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जांगीपुर के एसपी भोलानाथ पांडे ने कहा, “हमने तीन में से एक को पकड़ लिया है। दो की तलाश जारी है।”

‘जासूसी करने को कहा, मना करने पर धमकी दी’: ISRO के रॉकेट साइंटिस्ट का PM मोदी को पत्र, बताया- केरल पुलिस भी शामिल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में काम कर रहे एक रॉकेट वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य (Rocket Scientist Pravin Maurya) ने आरोप लगाया है कि कुछ जासूस उन्हें भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं और मना करने पर धमकी दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह इसरो और केरल पुलिस (Kerala Police) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से किया जा रहा है।

वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य ने 9 नवंबर 2022 को ट्विटर पर अपने लिंक्डइन पोस्ट का एक लिंक साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को लिखे गए पत्र की एक कॉपी साझा की। उन्होंने मामले की खुफिया जाँच के लिए अनुरोध किया है।

मौर्य ने 5 अगस्त 2022 को प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र की एक प्रति 9 नवंबर 2022 लिंक्डइन पोस्ट में शामिल की है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उन्होंने गृह मंत्री और इसरो के अध्यक्ष को शिकायत की कॉपी भेजी है।

मौर्य ने कहा कि फिलहाल वह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान पर काम कर रहे हैं। अजीकुमार सुरेंद्रन नाम का एक व्यक्ति ने उनसे जासूसी करने के लिए संपर्क किया। उसने इसरो की कुछ गोपनीय जानकारी के बदले में उन्हें मोटी रकम देने का वादा किया। मौर्य का कहना है कि सुरेंद्रन दुबई में कुछ लोगों के लिए काम कर रहा है।

प्रवीण मौर्य ने आगे आरोप लगाया कि अजीकुमार सुरेंद्रन ने उन्हें एक स्थायी जासूस बनने की पेशकश की। जब उन्होंने मना कर दिया तो सुरेंद्रन ने अपनी बेटी का इस्तेमाल झूठे पॉक्सो मामले में फँसाने के लिए किया। मौर्य ने आरोप लगाया कि केरल पुलिस की मिलीभगत से ऐसा किया गया। इसरो के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी सुरेंद्रन को उसकी योजना में मदद कर रहे थे। मौर्य के अनुसार, पॉक्सो केस वापस लेने के बदले सुरेंद्रन ने उसकी माँगों को मानने के लिए कहा।

अपने लिंक्डइन पोस्ट में मौर्य ने इसरो के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर उनके पत्रों को केवल हास्यास्पद कारण कि ‘यह एक कर्मचारी की शिकायत है’ से खारिज करने का आरोप लगाया। मौर्य के अनुसार, इसरो के अधिकारी निम्नलिखित कारणों से शिकायत की सीबीआई या खुफिया जाँच नहीं चाहते हैं:

  • इसरो के कुछ वरिष्ठ अधिकारी जासूसों को उनकी योजना को अंजाम देने में मदद कर रहे थे। ऐसे में इसरो में मौजूद इन राष्ट्रविरोधी अधिकारियों का पूरा रैकेट खुफिया ब्यूरो की जाँच के दायरे में आ जाएगा।
  • पुलिस विभाग के अधिकारी भी आईबी के दायरे में रहेंगे।
  • इसरो में वरिष्ठ अधिकारियों में से एक, जो मुख्य खिलाड़ी है, इसरो के एक पूर्व अध्यक्ष का रिश्तेदार है। अगर खुफिया जाँच को मंजूरी मिलती है तो वह निश्चित तौर पर जाँच के दायरे में आएगा।

उन्होंने आगे लिखा, “आईबी जाँच के लिए तैयार है। उसे केवल अंतरिक्ष विभाग से एक आधिकारिक अनुरोध की आवश्यकता है, जो वे ऊपर वर्णित कारणों से नहीं दे रहे हैं।”

इसरो वैज्ञानिक ने केरल पुलिस पर लगाया रैकेट में शामिल होने का आरोप

प्रवीण मौर्य ने केरल पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कैसे अजीकुमार सुरेंद्रन के इशारे पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और धमकाया गया। इस काम को अंजाम केरल पुलिस ने दिया। केरल पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।

इसरो वैज्ञानिक प्रवीण मौर्य द्वारा भारत के पीएम को संबोधित पत्र की एक प्रति

भारत के प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में प्रवीण मौर्य ने विस्तार से बताया है कि कैसे केरल पुलिस और इसरो के कुछ अधिकारियों ने उन्हें झूठे POCSO और NDPS आरोपों में फँसाया और कैसे उन्हें जासूसी करने से इनकार पर धमकाया और परेशान किया गया।

मौर्य ने दावा किया कि केरल पुलिस पूरे रैकेट में सक्रिय रूप से शामिल थी और लगातार उन पर माँगों को मानने के लिए दबाव डाल रही थी। इसलिए उन्हें केरल छोड़ने और उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक शहर लौटने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री से इस मामले की जाँच शुरू करने का आग्रह किया, ताकि सच्चाई का पता चल सके और देश के दुश्मनों को दंडित किया जा सके।

इसरो के वैज्ञानिक तपन मिश्रा ने जहर देने का लगाया था आरोप

ISRO के शीर्ष वैज्ञानिक तपन मिश्रा (Tapan Misra) ने जनवरी 5 2021 को खुलासा किया था कि उन्हें तीन साल से अधिक समय पहले जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। अपने फेसबुक पोस्ट ‘लॉन्ग केप्ट सीक्रेट’ में उन्होंने इस बात का खुलासा किया था कि 23 मई 2017 को बेंगलुरु में इसरो मुख्यालय में पदोन्नति साक्षात्कार के दौरान उन्हें घातक आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड जहर देकर मारने की कोशिश की गई थी।

मिश्रा ने अंदेशा जताया था कि उन्हें डोसे की चटनी में जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी, जिसके बाद उन्हें तनाव और दर्द से उबरने में 2 साल लग गए। अपने पोस्ट में उन्होंने अपनी हत्या के प्रयासों में अमेरिका की संलिप्तता बताई थी। तपन ने लिखा था कि साल 2019 में अचानक एक भारतीय अमेरिकी प्रोफेसर उनके कार्यालय में दिखाई दिया और उन्हें जहर देने की इस घटना पर चुप रहने को भी कहा गया।

मिश्रा ने कहा था कि इससे पहले उन्हें ईमेल के जरिए भी सैंकड़ों धमकियाँ मिली थीं। उन्होंने यह भी खुलासा किया था कि कई बार सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें आगाह करके बचाया था। जहर दिए जाने के आरोपों पर मिश्रा ने कहा था, “कोई निश्चित रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को कुछ नुकसान पहुँचाना चाहता था। एकमात्र उपाय अपराधी को पकड़ना और उन्हें दंडित करना है।”

अपने फेसबुक पोस्ट में मिश्रा ने उन सहकर्मियों के प्रति भी निराशा व्यक्त की थी, जो उन्हें इस हमले के बाद नकारने लगे थे। वह कहते थे कि लाख प्रयासों के बाद उन्हें आज तक न्याय नहीं मिला। उनके मुताबिक, ISRO के दो अध्यक्षों ने तो उनके विरोध पर आँख मूंद ली थी। इसके कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा।

अपने पोस्ट की शुरुआत में उन्होंने कई वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत का उल्लेख किया था। उन्होंने 1971 में प्रोफेसर विक्रम साराभाई, 1999 में डॉ एस श्रीनिवासन की आकस्मिक मौत और 1994 में नम्बी नारायण के साथ हुई साजिश का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने (तपन मिश्रा) कभी सोचा भी नहीं था कि वह इन रहस्यों का एक दिन हिस्सा बनेंगे।

नंबी नारायणन: कॉन्ग्रेस के उत्पीड़न के शिकार

यहाँ बताना आवश्यक है कि वर्ष 1994 में इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन भी कॉन्ग्रेस पार्टी के उत्पीड़न के शिकार हुए थे। केरल कॉन्ग्रेस पार्टी के दो गुटों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण नवंबर 1994 में दो अन्य वैज्ञानिकों- डी शशिकुमारन और के चंद्रशेखर के साथ नारायणन की गिरफ्तारी हुई। केरल पुलिस ने इस वैज्ञानिकों के खिलाफ सरकारी गोपनीयता अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत जासूसी के आरोप लगाए थे।

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नंबी नारायणन (Nambi Narayanan) से संबंधित जासूसी मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय जाँच का आदेश दिया था। इस साल अप्रैल में अदालत ने सीबीआई को जाँच अपने हाथ में लेने और मामले की आगे की जाँच करने का निर्देश दिया था।

‘ऊँचाई’ की मंच से ‘क्षुद्रता’ का स्क्रीनिंग: कंगना रनौत के नमस्ते का भी जया बच्चन ने नहीं दिया जवाब, नेटिजन्स बोले- इससे अच्छी तो रेखा

बॉलीवुड फिल्ममेकर सूरज बड़जात्या की अपकमिंग फिल्म ‘ऊँचाई’ (Uunchai) की स्पेशल स्क्रीनिंग में फिल्म इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियों ने शिकरत की। इस दौरान कंगना रनौत और जया बच्चन का भी आमना-सामना हुआ। कंगना ने हँसते हुए जया का अभिवादन किया लेकिन जया बच्चन ने उन्हें इग्नोर कर दिया। घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

इस वीडियो में जया बच्चन के एंट्री करते ही अनुपम खेर उनका स्वागत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। तभी वहीं पास में खड़ी अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) जया से ‘हेलो जया जी’ बोलती हैं, लेकिन जया ने उन्हें सबके सामने इग्नोर करके कहीं और देखने लगती हैं।

इस क्लिप को देखकर सोशल मीडिया पर नेटिजन्स जया बच्चन (Jaya Bachchan) पर निशाना साध रहे हैं। वे कह रहे हैं कि जया ने घमंड दिखाया और कंगना को इग्नोर किया।

एक यूजर ने लिखा, “हम सभी आपका सम्मान करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों के साथ गलत व्यवहार करेंगी। वास्तव में कोई Professionalism नहीं है। उम्र के साथ एक व्यक्ति अधिक समझदार, विनम्र और उसके सोचने का दायरा विकसित हो जाता है। माफ करें। जीवन का मंत्र: सम्मान दो सम्मान लो।”

एक यूजर ने लिखा है, “जो लोग जया की तरह प्रिविलेज्ड नहीं हैं वह उनके लिए नफरत से भरी है। वह और लोगों से इतने प्यार से मिल रही हैं। लोग कंगना के बारे में बुरा बोलते हैं, लेकिन पैपराजी और फैन्स के लिए उनका व्यवहार देखो।” एक ने लिखा है, कंगना को देखकर डर गई चिड़चिड़ी जया।

फोटो साभार: विरल भयानी का इंस्टा

एक और ने कमेंट किया, “जया ने देखा भी नहीं कंगना की तरफ।” चंदरीमा नाम के यूजर ने कमेंट किया कि कंगना को इग्नोर कर दिया, इस औरत में बहुत घमंड है, रेखा कितनी अच्छी है। ये हड्डी बन गई।

फोटो साभार: विरल भयानी का इंस्टा

हालाँकि, इसके बाद अभिषेक बच्चन ने कंगना रनौत को विनम्रता से गले लगाया और थोड़ी बहुत बातचीत भी की। इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।

बता दें कि ऊँचाई फिल्म में अमिताभ बच्चन, अनुपम खेर, बोमन ईरानी, परिणीति चोपड़ा, डैनी डेन्जोंगपा और सारिका लीड रोल में हैं। यह फिल्म शुक्रवार (11 नवंबर 2022) को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

गौरतलब है कि साल 2020 में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद जया और कंगना के बीच काफी बहस देखने को मिली थी। जया ने कहा था, “जिन लोगों ने इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया है, वे इसे गटर कह रहे हैं। जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद करते हैं। गलत बात है।” इस पर कंगना ने पलटवार करते हुए कहा था, “कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी जिसमें दो मिनट के रोल आइटम नम्बर्ज़ और एक रोमांटिक सीन मिलता था वो भी हीरो के साथ सोने के बाद। मैंने इस इंडस्ट्री को फ़ेमिनिज़्म सिखाया, थाली देश भक्ति नारी प्रधान फ़िल्मों से सजाई, यह मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं।”

Covid-19 से भी घातक वायरस बनाने में जुटा चीन, पाकिस्तान के साथ रावलपिंडी के लैब में गुपचुप कर रहा तैयारी: रिपोर्ट

कोरोना वायरस की उत्त्पत्ति को लेकर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। खबर है कि इस बार वो पाकिस्तान के साथ मिलकर रावलपिंडी के पास किसी गुप्त जगह जैव हथियारों पर परीक्षण कर रहा है। उसका उद्देश्य पैथोजन्स को जैव हथियारों में तब्दील करना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और पाकिस्तान सेना द्वारा संचालित, रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन (डीएसटीओ) ने पाकिस्तान में घातक रोगजनकों पर अनुसंधान करने के लिए अत्यधिक उन्नत वैज्ञानिक बुनियादी ढाँचा स्थापित किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिष्ठान के सटीक स्थान का खुलासा नहीं किया गया है, क्योंकि इसे बड़े ही गुप्त तरीके से किया जा रहा है। शोध का शीर्षक ‘उभरते संक्रामक रोगों के लिए सहयोग और वेक्टर संचारण रोगों के जैविक नियंत्रण पर अध्ययन’ रखा गया है।

DNA की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने हालाँकि ऐसे सभी दावे खारिज कर दिए हैं। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा कि रिपोर्ट में जिस लेबोरेटरी को लेकर दावा किया गया है, वहाँ बायो-सेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) को लेकर कुछ भी गोपनीय नहीं है। कार्यालय ने कहा कि यह लेबोरेटरी रावलपिंडी में चकलाला कैंटोन्मेंट (Chaklala cantt) एरिया में मौजूद है। यह एक बेहद सुरक्षित इलाका है और इस लेबोरेटरी का हेड 2 स्टार मिलिट्री जनरल को बनाया जाता है।

जैव हथियार विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के अधीन प्रयोगशाला और चीनी प्रयोगशाला के बीच यह गठजोड़ महज कोई वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पैथोजन्स को जैव हथियारों में तब्दील करना है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस आने के बाद भी कई मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि कोरोना (कोविड-19) की उत्त्पति चीन में वुहान के ऐसे ही किसी लैब से हुई थी। धीरे-धीरे इस वायरस का प्रभाव पूरी दुनिया में खत्म हुआ लेकिन चीन अब भी इससे जूझ रहा है। वहाँ कई इलाकों से अमानवीय लॉकडाउन की खबरें आते रहती हैं।

प्रतापगढ़ किले में अफजल खान की जिस अवैध कब्र को बचाने में लगी थी उद्धव सरकार, अब उसे ध्वस्त करने का काम शुरू: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया था आदेश

महाराष्ट्र पुलिस (Maharashtra Police) ने गुरुवार (10 नवंबर 2022) को सतारा स्थित फोर्ट प्रतापगढ़ (महाबलेश्वर) (Fort Pratapgarh, Mahabaleshwar) में अफजल खान की कब्र के पास अवैध निर्माण को हटाने के लिए अभियान शुरू किया। पुलिस ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) द्वारा जारी आदेशों के तहत कार्रवाई की गई है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सतारा, पुणे, सोलापुर, कोल्हापुर और सांगली ग्रामीण जिलों के लगभग 1,800 पुलिसकर्मियों के वाई पुलिस उप-मंडल कार्यालय पहुँचने के बाद सुबह लगभग 6 बजे अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू हुआ। अधिकारी बुधवार (9 नवंबर 2022) की शाम को कार्यालय पहुँचे और इन्हें सुबह तड़के फोर्ट प्रतापगढ़ में तैनात कर दिया गया।

इसके लिए प्रतापगढ़, महाबलेश्वर, वाई, कराड और सतारा जिलों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और इलाके में धारा 144 लागू की गई है। सतारा के कलेक्टर रुचिश जयवंशी, पुलिस अधीक्षक समीर शेख, वाई के प्रांतीय अधिकारी राजेंद्र जाधव, पुलिस उपाधीक्षक डॉ शीतल जानेवे खराडे, महाबलेश्वर की तहसीलदार सुषमा पाटिल चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। मीडिया को भी परिसर में घुसने से रोक दिया गया है।

छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) के कट्टर दुश्मन और बीजापुर के अत्याचारी अफजल खान की कब्र के आसपास कई अवैध संरचनाओं का निर्माण किया गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) सहित कई हिंदू संगठनों ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2017 में महाराष्ट्र सरकार को अफजल खान की कब्र के आसपास अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।

शिवाजी महाराज ने अफजल को बाघनख से मार डाला था

बीजापुर सल्तनत का जनरल अफजल खान 10 नवंबर 1659 को महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के पास स्थित किला प्रतापगढ़ में आया था। इसके आधार से कुछ मीटर ऊपर छत्रपति शिवाजी महाराज से मिलने आए अफजल के स्वागत के लिए एक शामियाना बनाया गया था। इस दौरान उसने शिवाजी महाराज को गले लगाने का नाटक करते हुए उन्होंने उन्हें मारने की कोशिश की।

उसके इरादों से वाकिफ 19 वर्षीय छत्रपति ने बाघ के पंजा रूपी हथियार से अफजल खान की पेट को फाड़ दिया। अफजल मौके पर ही गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। अफजल खान की उचित अंत्येष्टि के अधिकार का सम्मान करते हुए उसे उसी स्थान पर दफना दिया गया और उसके ऊपर एक पत्थर रख दिया गया।

दो दशक पहले तक किला परिसर में अफजल खान की कब्र पर किसी का ध्यान नहीं गया था। वर्ष 2000 के आसपास कुछ मुस्लिमों द्वारा कब्र पर दावा करने और उस पर मजार बनाने के फैसले के बाद इसे प्रमुखता मिली। धीरे-धीरे एक दशक में कब्र पर चारों तरफ से एक आर्केड के साथ एक स्थायी संरचना खड़ी कर दी गई। कहा जाता है कि एस्बेस्टस शीट्स की छत से ढके इंटीरियर में कमरे बने हैं और यहाँ घुमंतू मुस्लिम मौलाना को शरण दिया जाता है।

यह अवैध निर्माण ‘हजरत मोहम्मद अफजल खान मेमोरियल ट्रस्ट’ के नाम से किया गया था और इसके तहत किले के लगभग 5,500 वर्ग फुट जगह पर कब्जा कर लिया था। इसके अलावा, वर्ष 2004 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने ASI नियंत्रित इस जगह की भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ आपत्ति उठाई। VHP ने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद महाबलेश्वर पुलिस ने किले और मकबरे के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी थी।

बाद में समस्त हिंदू अघाड़ी के संस्थापक-अध्यक्ष और प्रतापगढ़ उत्सव समिति के मुख्य कार्यकारी मिलिंद एकबोटे द्वारा अफजल खान की कब्र के आसपास वन भूमि पर अवैध निर्माण के खिलाफ ​​याचिका दायर की गई थी। जनहित याचिका में कहा गया है कि किले की तलहटी में मूल मकबरा 5 वर्ग फुट आकार का था, लेकिन अब इसे 1,000 वर्ग फुट के अवैध विकास से घेर लिया गया है। इसके साथ ही वन विभाग के स्वामित्व वाले इस क्षेत्र में कई अन्य संरचनाओं द्वारा किले पर कब्जा कर लिया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तब राज्य सरकार को अफजल खान की कब्र के आसपास अवैध निर्माण को हटाने का निर्देश दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एससी धर्माधिकारी ने कहा था, “अफजल खान की कब्र के आसपास के अतिक्रमण को हटा दें या वन अधिकारियों को स्थायी रूप से जंगल में भेज दें, अगर वे अपना कर्तव्य नहीं निभा सकते हैं।” सतारा जिले के किला प्रतापगढ़ की तलहटी में अफजल खान की कब्र में हाल के वर्षों में वास्तव में तेजी से बदलाव हो रहे थे। इस्लामवादियों ने इस स्थान पर मेलों का आयोजन भी शुरू कर दिया था।

व्रत वाला जूस, बर्फ में मांस की थैली: पकड़े जाने पर राहुल नाम बताने लगा फैजल, मुस्कुरा कर बोला- गलती हो गई

उत्तर प्रदेश के बरेली में जूस की एक दुकान से मांस मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जूस में मिलाए जाने वाली बर्फ के बीच एक पॉलीथिन में छिपा कर मांस रखा गया था। एक स्थानीय व्यक्ति ने इसकी जानकारी हिन्दू संगठनों को दी। हिन्दू संगठनों ने फैजल नाम के आरोपित को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।

आरोप है कि पकड़ने जाने पर फैजल ने अपना नाम राहुल बताया था। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। घटना बुधवार (9 नवम्बर 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना प्रेमनगर थानाक्षेत्र के डीडी पुरम इलाके का है। यहाँ पेट्रोल पम्प के बगल में फैजल की जूस की दुकान है। जूस के बोर्ड पर सच्चाई, सफाई और पवित्रता लिखा हुआ है। सुदर्शन न्यूज के पत्रकार रजत मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “बरेली में फैजल हिन्दुओं को व्रत वाला जूस बताकर ‘माँस’ मिला जूस पिला रहा था। सावधान रहिए, ऐसे फैजल हर शहर के चौराहों पर हैं।”

इसी मामले में सामने आए एक अन्य वीडियो में दुकान पर जमा लोगों के विरोध के बाद भी फैजल दुकान चलाता दिख रहा है। जब मौके पर मौजूद पुलिस ने फैजल से उसकी हरकत पर सवाल किया तब वह मुस्कुराता हुआ दिखा। बाद में उसने कहा, “गलती हो गई।” फैजल ने अपने किसी परिचित से पुलिस वाले की फोन पर बात भी करवानी चाही, जिससे पुलिसकर्मी ने इनकार कर दिया।

बिजनौर जिले के नहटौर विधानसभा से भाजपा विधायक ओम कुमार ने इस घटना पर बरेली पुलिस से संज्ञान लेकर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। विधायक के ट्वीट पर बरेली पुलिस ने थाना प्रेम नगर पर FIR दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई होने की जानकारी दी है।

‘The Vaccine War…एक युद्ध की सच्ची कहानी’ : विवेक अग्निहोत्री ने जारी किया नई फिल्म का पोस्टर, पहली बार 11 भाषाओं में एक साथ रिलीज होगी कोई मूवी

क​श्मीरी हिंदुओं के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की अपार सफलता के बाद डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) के सितारे बुलंदी पर हैं। उन्होंने अपने जन्मदिन के खास मौके पर अपनी नई फिल्म की घोषणा की है। फिल्म का नाम ‘द वैक्सिन वॉर’ (The Vaccine War) है। फिल्ममेकर ने आज (10 नवंबर 2022) अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर ‘द वैक्सिन वॉर’ का फर्स्ट लुक पोस्टर शेयर किया।

इसके साथ ही विवेक अग्निहोत्री ने लिखा, “पेश है ‘द वैक्सीन वॉर’- एक ऐसे युद्ध की अविश्वसनीय सच्ची कहानी जिसे आप नहीं जानते थे कि भारत कैसे लड़ा है और अपने विज्ञान, साहस और महान भारतीय मूल्यों से जीता है। यह फिल्म अगले साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 11 भाषाओं में रिलीज होगी। कृपया करके हमें अपना आशीर्वाद दें।”

एक दूसरी पोस्ट में डायरेक्टर ने बताया कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार कोई फिल्म एक साथ 11 भाषाओं में रिलीज हो रही है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को एक के साथ लाने के लिए ये उनकी नई पहल है।

आपको बता दें कि ‘द वैक्सीन वॉर’ फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म के पोस्टर पर एक वैक्सीन की बॉटल दिखाई दे रही है। इस पर लिखा है, “आई एम बुद्धा प्रेजेंट्स द वैक्सीन वॉर… ए फिल्म बाय विवेक अग्निहोत्री एंड प्रोड्यूस बाई पल्लवी जोशी। इसके नीचे भारत का राष्ट्रीय ध्वज भी बना हुआ है।” पोस्टर में लिखा है, “ट्रू स्टोरी।” यानी ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तरह इसे भी सच्ची घटना पर बनाया गया है।

‘द वैक्सिन वॉर’ फिल्म को विवेक की पत्नी पल्लवी जोशी प्रोड्यूस कर रही हैं। यह हिंदी, इंग्लिश, गुजराती, बांग्ला, मराठी, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम, पंजाबी और भोजपुरी में 2023 में सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।

फिल्ममेकर ने इससे पहले भी एक और ट्वीट किया था। 10 नवंबर 1973 में जन्मे विवेक अग्निहोत्री ने लिखा, “गुड मॉर्निंग, हर सुबह जब सूरज उगता है और जैसे ही हम जागते हैं, पुराना सब खत्म हो जाता है और एक नया जीवन शुरू होता है। हर साँस के साथ पुरानी चीजें खत्म होती जाती हैं और एक नया जीवन शुरू होता है। हर नए विचार के साथ एक नए जीवन की शुरुआत होती है। जीवन हर पल है, हर पल एक नया जन्म है।”

गुजरात में चाहिए 182 प्लेयर, BJP ने 160 किए डिक्लेयर: 91 आउट, मोरबी में छलांग लगाने वाले को मौका, जडेजा की पत्नी और हार्दिक को भी टिकट

गुजरात में विधानसभा चुनावों (Gujarat Assembly Election 2022) के लिए भाजपा (BJP) ने 160 उम्मीदवारों वाली अपनी पहली सूची जारी कर दी है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (CM Bhupendra Patel) को घाटलोढिया सीट से लड़ेंगे, जबकि क्रिकेटर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की पत्नी रिवाबा जडेजा (Rivaba Jadeja) को जामनगर उत्तर से उम्मीदवार बनाया।

वहीं, कॉन्ग्रेस छोड़कर आए पाटीदार नेता हार्दिक पटेल (Hardik Patel) को भाजपा ने विरमगाम सीट से टिकट दी है। हाल में गुजरात के मोरबी में हुए पुल दुर्घटना के दौरान नदी में कूदकर कई लोगों को जान बचाने वाले पूर्व विधायक कांतिलाल अमृतिया (Kantilal Amritiya) को पार्टी ने मोरबी से उम्मीदवार बनाया है। मोरबी के मौजूदा विधायक बृजेश मेरजा का टिकट काट दिया गया है। पिछले चुनाव के दौरान मेरजा कॉन्ग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

भाजपा ने 91 विधायकों के टिकट काट दिए हैं। जिन उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है, उनमें 84 उन सीटों के लिए हैं, जहाँ पहले चरण का 1 दिसंबर को मतदान होना है। वहीं, पार्टी के 8 दिग्गज नेताओं ने एक दिन पहले ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया था।

मांडवी सीट से अनिरुद्ध भाई को टिकट दिया गया है तो अंजार से त्रिकम भाई और गाँधीधाम से मालती बेन को प्रत्याशी बनाया गया है। जामनगर ग्रामीण से पार्टी ने राघव जी को उतारा है। राजकोट से उदयभाई को, पोरबंदर से बाबूभाई पोखरिया को टिकट दिया गया है। वहीं, भरुच से रमेशभाई मिस्त्री को प्रत्याशी चुना गया है, जबकि जैतपुर से जयेश भाई को टिकट दिया गया है।

क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा पहली बार चुनावी मैदान में उतरेंगी। 5 सितंबर 1990 को जन्मीं रिवाबा जडेजा गुजरात के राजकोट में आत्मीय प्रौद्योगिकी और विज्ञान संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की हैं। वह 2019 में भाजपा में शामिल हुई थीं। रीवाबा और रवींद्र जडेजा ने 17 अप्रैल 2016 को शादी की थी।

बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनावों में दो चरणों में मतदान होंगे। 1 और 5 दिसंबर को राज्य के लगभग 5 करोड़ मतदाता प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी। लगभग 27 सालों से सत्ता में बैठी भाजपा को हटाने के लिए कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। वहीं, सामने आए कई सर्वे में भाजपा की फिर जीत की भविष्यवाणी की गई है।

हाथों पर ‘ॐ’ गुदा-टूटी गर्दन, प्राइवेट पार्ट में वाइपर की पाइप… फरीदाबाद में मिली महिला की अर्धनग्न लाश, निर्भया जैसी दरिंदगी की हुई शिकार

हरियाणा के फरीदाबाद में एक महिला दिल्ली की निर्भया जैसी दरिंदगी का शिकार हुई है। पुलिस ने महिला का अर्धनग्न शव बरामद किया है। उसके प्राइवेट पार्ट में वाइपर की पाइप डाल दी गई थी। गर्दन टूटी हुई थी। उसके दोनों हाथ पर ॐ लिखा हुआ था। मृतका की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। शव 2 से 3 दिन पुराना बताया जा रहा है। पुलिस को मंगलवार (8 नवम्बर 2022) को मिला।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस को बल्लभगढ़ के सेक्टर 7- A में एक महिला की लाश पड़ी होने की सूचना मिली। लाश गुरूद्वारे के पीछे एक बंद पड़ी गली से बरामद हुई। महिला की उम्र लगभग 34 वर्ष बताई जा रही है। शुरूआती जाँच में पता चल रहा है कि पीड़िता के साथ पहले रेप हुआ है। बाद में महिला के प्राइवेट पार्ट में वाइपर की पाइप डाल गर्दन को तोड़ दिया गया। लाश का पोस्टमार्टम करवाकर पहचान के लिए उसे मोर्चरी में रखवा दिया गया है।

पार्क के बगल में कपड़े प्रेस करने वाली एक महिला के बेटे ने सबसे पहले शव को देखा और पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि मृतका की दोनों हथेलियों पर ॐ के साथ दाएँ हाथ पर आरएम स्टार लिखा हुआ है। बताया जा रहा है कि लाश को घसीटा गया था। सेक्टर 7 थाना पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज निकाल कर जाँच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिस जगह ये शव मिला है, वहाँ एक ऐसा पार्क है जिसमें लोगों का आना-जाना कम होता है।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार महिला ने सूट पहन रखा था। नीचे के कपड़े गायब थे। मृतका के शरीर पर चोटों के निशान भी थे। मौत की वजह सिर पर चोट आना बताया जा रहा है। घटनास्थल पर काफी खून बहा था जो शव बरामदगी के समय सूख चुका था। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि मृतका को कहीं और मार कर वहाँ फेंका गया था। पुलिस ने IPC की धारा 376 (रेप) और 302 (हत्या) के तहत FIR दर्ज कर ली है।

नाखून उखाड़े, उंगली मरोड़ी, पसलियाँ तोड़ीं: PAK के हिंदूफोबिक पत्रकार की हत्या में नया खुलासा, मारने से पहले 3 घंटे किया गया प्रताड़ित

हिंदूघृणा फैलाने के लिए कुख्यात पाकिस्तान के पत्रकार अरशद शरीफ की केन्या की राजधानी नैरोबी में 23 अक्टूबर 2022 को हुई हत्या के बाद इस मामले में कुछ नए खुलासे हुए हैं। पहले उनकी पत्नी ने जहाँ दावा किया था कि अरशद को गोली मारी गई। वहीं अब पता चला है कि उन्हें गोली मारने से भी पहले 3 घंटे प्रताड़ित किया गया था।

बोल न्यूज के मुताबिक यह दावा पाकिस्तान के एक निजी टीवी एंकर ने अपने कार्यक्रम में किया। रिपोर्ट में बताया गया कि अरशद को मारने से पहले उनके नाखून उखाड़ दिए गए थे और उनकी पसलियाँ और उंगलियाँ तोड़ दी गई थीं। इसके बाद उन्हें वाहन से बाहर निकाल कर बहुत करीब से गोली मारी गई थी। कथिततौर पर हत्या की योजना पहले से ही बनाई गई थी।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक अपराध स्थल पर शरीफ का मोबाइल फोन और आई-पैड मौजूद नहीं था। हत्या की जाँच करने केन्या गई पाकिस्तान की टीम ने भी घटनास्थल पर मोबाइल फोन नहीं मिलने पर सवाल उठाए थे। टीम का मानना था कि शरीफ की हत्या के बाद संभवतः इसकी चोरी की गई होगी।

दूसरी ओर, पाकिस्तानी जाँचकर्ताओं ने केन्याई अधिकारियों से एक शूटिंग रेंज में मौजूद प्रशिक्षकों के नाम और संपर्क विवरण प्रदान करने के लिए कहा है, जहाँ पत्रकार अरशद शरीफ को हत्या से पहले आखिरी बार देखा गया था।

बताया जा रहा है कि शरीफ 23 अक्टूबर को रात करीब 8 बजे अपने मेजबान वकार अहमद के भाई खुर्रम के साथ नैरोबी के लिए रवाना हुए थे। एक घंटे बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। जाँच के दौरान अम्मोडम्प शूटिंग रेंज में लगभग 10 अमेरिकी प्रशिक्षकों की उपस्थिति का पता चलने के बाद हत्या पर विवाद और गहरा गया है।

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह ने संवाददाताओं से कहा कि पाकिस्तानी सरकार की ओर से केन्या की यात्रा करने वाले दो सदस्यीय का प्रारंभिक आँकलन यह था कि अरशद शरीफ टार्गेट किलिंग का शिकार हुआ है।

अरशद शरीफ पूर्व में एआरवाई न्यूज से जुड़े हुए थे और बाद में वह दुबई चले गए थे। पाकिस्तान में उनके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा भी था। इसके अलावा भारत में वह अपने हिंदूविरोधी और मोदी विरोधी रुख के लिए भी जाने जाते थे। नीचे देख सकते हैं कि कैसे अरशद दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों के समय हिंदूघृणा फैलाने में लगे हुए थे।

वह एक अन्य ट्वीट में वह किसी टीवी कार्यक्रम का वीडियो शेयर करते हैं,जहाँ एक प्रोफेसर पीएम मोदी के खिलाफ जहर उगल रहा है । वह कहता है कि मोदी अपनी हिंदुत्व की नीतियों के साथ दक्षिण एशिया के एक नए हिटलर के तौर पर उभर रहा है। ईसाइयों, पारसियों, यहूदियों, सिखों और मुस्लिमों के लिए भाजपा में कोई जगह नहीं है।