Home Blog Page 2328

‘बेटी का ख्याल रखना’: केदारनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश से पहले पायलट ने कहा था, एक बर्थडे गर्ल के थे अंतिम शब्द – पापा, आपसे कभी बात नहीं करूँगी…

उत्तराखंड के केदारनाथ में मंगलवार (18 अक्टूबर, 2022) को एक हेलीकॉप्टर क्रैश (Kedarnath Helicopter Crash) होने से पायलट समेत 7 लोगों की मौत हो गई। खराब मौसम के कारण हुए इस हादसे में हेलीकॉप्टर के पायलट अनिल कुमार (57), उर्वी बराड़ (25), कृति बराड़ (30), पूर्वा रामानुज (26), प्रेम कुमार वी (63), सुजाता (56) और कला (60) ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पायलट अनिल कुमार मुंबई के अंधेरी इलाके में रहते थे। उनकी एक बेटी है, जिससे वह बहुत प्यार करते थे।

उन्होंने इस हादसे से एक दिन पहले ही अपनी पत्नी शिरीन आनंदिता को फोन करके कहा था, “मेरी बेटी का ख्याल रखना। उसकी तबीयत ठीक नहीं है।” वहीं, इस हादसे में जान गँवाने वाली गुजरात की कृति बराड़ का मंगलवार को 30वाँ जन्मदिन था। वह नहीं जानती थीं कि उनके जन्मदिन पर ही उनकी मौत हो जाएगी। उन्होंने केदारनाथ से अपने पिता कमलेश को भावनगर में फोन किया था और लंबी बातचीत की थी।

कृति ने अपने पिता से मजाक करते हुए कहा था कि उन्होंने सबसे उसे विश क्यों नहीं किया? वह उनसे नाराज है और अब कभी भी बात नहीं करेगी। लेकिन, उन्हें क्या पता था कि वह सच में अपने पिता से दोबारा कभी भी बात नहीं कर पाएँगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पायलट की पत्नी आनंदिता पेशे से लेखिका हैं। उन्होंने बताया, “आखिरी बार उनके पति ने सोमवार (17 अक्टूबर 2022) को बेटी का हालचाल जानने के लिए फोन किया था। उनकी बेटी फिरोजा की तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए उन्होंने मुझे उसकी देखभाल करने के लिए कहा था।” आनंदिता को किसी से कोई शिकायत नहीं है। उनके मुताबिक, यह एक दुर्घटना है और पर्वतीय राज्यों में अक्सर खराब मौसम का सामना करना पड़ता है।

पायलट मूल रूप से पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके के रहने वाले हैं। वह पिछले 15 सालों से मुंबई में रह रहे थे। बताया जा रहा है कि कृति एक स्कूल टीचर थीं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। हेलिकॉप्टर दुर्घटना में तमिलनाडु के तीन अन्य तीर्थयात्रियों और पायलट के साथ जान गँवाने वाली 25 वर्षीय उर्वी बराड़ कृति की चचेरी बहन और 26 वर्षीय पूर्वा रामानुज उनकी दोस्त थी।

बंगाल में हिन्दुओं के घरों में फेंके गए थे पेट्रोल बम, अब गृह मंत्रालय ने NIA को सौंपी जाँच: पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन पर लगे थे इस्लामी नारे

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मोमिनपुर (Mominpura, West Bengal) में हुई हिंसा की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। राज्य की मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस हिंसा की जाँच केंद्रीय एजेंसी से कराने की लगातार माँग कर रही थी।

बंगाल भाजपा के नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि दंगाईयों का मजहब देख उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने ने राज्यपाल ला गणेशन (Governor La Ganeshan) और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) से मोमिनपुर में सेंट्रल फोर्स की तत्काल तैनाती करने और NIA जाँच की माँग की थी।

दरअसल, पश्चिम बंगाल के खिर्दीपुर मोमिनपुर इलाके में में नवरात्र के दौरान लक्ष्मी पूजा की शाम हिंदुओं की दुकानों और घरों पर दंगाइयों ने हमला कर दिया था। इस दौरान हिंदुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए, उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई और उनके सामान तोड़ दिए गए। इसके बाद कट्टरपंथी भीड़ ने घरों और दुकानों में इस्लामी झंडे लगा दिए।

दरअसल, इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन के मौके पर अल्पसंख्यक समुदाय (मुस्लिमों) ने हिंदुओं के घर और दुकानों पर इस्लामी झंडे लगा दिए थे, जिन्हें हिंदुओं ने खोल दिया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा हो गई और हिंदुओं के घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। बार-बार पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।

ऑपइंडिया ने घटना के बाद वहाँ जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी और आप वीडियो देखकर खुद समझ जाएँगे कि घटना के समय कट्टरपंथियों ने कैसा उत्पात मचाया था।

मोमिनपुर हिंसा की जाँच के लिए NIA की टीम जल्द ही मौके पर पहुँचकर वहाँ का जायजा लेगी। NIA ने इस हिंसा को लेकर केस दायर कर लिया है। बता दें कि पहले इस हिंसा की जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस कर रही थी।

इस मामले में से कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) ने 12 अक्टूबर 2022 को बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता के पुलिस आयुक्त (CP) को मोमिनपुर इलाके में हुई हिंसा की जाँच के लिये एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया था।

हिंसा को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने DGP और पुलिस आयुक्त को सबूतों और वीडियो फुटेज के संरक्षण करने और घटना में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि घटना की जाँच NIA से करानी है या नहीं, इसका फैसला केंद्र सरकार करेगी।

₹33 करोड़ के 307 पुरावशेष अमेरिका ने भारत को लौटाए: एक ही चोर ने चुराई थी 235 मूर्तियाँ, मंदिरों से गायब देवी-देवताओं की 10 प्रतिमाएँ भी मिलीं

अमेरिका ने भारत को 307 पुरावशेष वापस लौटा दिए हैं। इसकी कीमत 4 मिलियन डॉलर यानी 33 करोड़ रुपए के करीब बताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा सोमवार (17 अक्टूबर 2022) को लौटाए गए पुरावशेष में से अधिकांश मूर्ति तस्कर सुभाष कपूर द्वारा चोरी की गई मूर्तियाँ हैं और बाकी निजी संग्राहकों की हैं। जया मेनन की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कम से कम 10 भगवान की मूर्तियों को तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मंदिरों से चुराया गया था।

कपूर को इंटरपोल ने 2011 में जर्मनी में गिरफ्तार किया था। वह 2012 से तमिलनाडु के त्रिची की एक जेल में बंद है। मैनहट्टन के अभियोजकों ने उस पर करोड़ों रुपए की मूतियाँ चुराने और उसकी तस्करी करने का आरोप लगाया था। बताया जाता है कि मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी साइरस वांसे के कार्यालय ने कपूर और कई अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कपूर पर चोरी की मूर्तियों को रखने, इनकी चोरी करने से लेकर धोखाधड़ी आदि का आरोप लगाया था। जाँच में 307 पुरावशेषों में से 235 सुभाष कपूर द्वारा चोरी की गई मूर्तियाँ पाई गई, जिसे जब्त कर लिया गया।

इस संबंध में मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी साइरस वांसे के कार्यालय ने एक विज्ञप्ति जारी की। इसमें उन्होंने कहा, “एक शातिर लुटेरा, जिसने अफगानिस्तान, कंबोडिया, भारत, इंडोनेशिया, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड और अन्य देशों से मूर्तियों की तस्करी के लिए मदद ली।”

उन्होंने आगे कहा, “पाँच पुरावशेषों को नैन्सी वीनर (Nancy Wiener) और एक को नायेफ होम्सी (Nayef Homsi) की जाँच के बाद जब्त कर लिया गया। शेष 66 पुरावशेष कई छोटे तस्करी नेटवर्कों द्वारा भारत से चुराए गए थे।”

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सभी 307 पुरावशेष न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास में एक प्रत्यावर्तन समारोह के दौरान लौटा दिए गए हैं, जिसमें भारत के महावाणिज्य दूत रणधीर जायसवाल और यूएस होमलैंड सिक्योरिटी इंवेस्टिगेशन (एचएसआई) के कार्यवाहक डिप्टी स्पेशल एजेंट-इन-चार्ज टॉम लाउ शामिल थे। डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन एल ब्रैग जूनियर ने कहा, “हमें सैकड़ों कलाकृतियाँ भारत को वापस लौटाने पर गर्व है।”

‘हाथों में लोहे की रॉड और हथौड़े, सिर पर किए गए ताबड़तोड़ वार’: नितेश की हत्या के वक्त मौजूद दोस्त ने बताया – झूठे मुकदमे में फँसाने की मिल रही धमकी

देश की राजधानी दिल्ली के शादीपुर में बुधवार (12 अक्टूबर, 2022) को अदनान, अबदास और उफीजा ने नितेश चौधरी नाम के युवक को बेरहमी से पीट दिया था। बाद में इलाज के दौरान नितेश की मौत हो गई। इस हत्या से नाराज हिन्दू संगठनों ने 16 अक्टूबर को पटेल नगर में सड़क को जाम कर के फाँसी की माँग की थी। अब तक मीडिया रिपोर्ट्स में आरोपितों के तौर पर महज 3 नाम लिए जा रहे हैं, जबकि पुलिस को दी गई शिकायत में ये संख्या 5 है। घटना में नामज़द हुए 2 अन्य आरोपित हमजा और अफ़ज़ल हैं।

बाईक सवारों ने दी गालियाँ तो शुरू हुआ झगड़ा

इस घटना की पुलिस में शिकायत आलोक कुमार दुबे ने दर्ज करवाई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। रंजीत नगर थाने में दी गई शिकायत के मुताबिक, 12-13 अक्टूबर की रात लगभग 12:15 बजे अलोक अपने 2 दोस्तों के साथ मंदिर वाली गली में टहल रहे थे। बताया गया कि इस दौरान कुछ लड़के बहुत खराब ढंग से बाइक चलाते आए और तीनों दोस्तों को गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दी। शिकायत में झगड़े की शुरुआत की वजह यही बताई गई है।

अपनी शिकायत में अलोक ने मस्जिद का जिक्र करते हुए लिखा कि झगड़े के दौरान दूसरे पक्ष का एक लड़का मस्जिद की तरफ भाग कर भीड़ बुलाने गया। शिकायत में बताया गया है कि तुरंत ही दूसरे पक्ष से 20-25 हमलावर आ गए, जो किसी पहले से रची गई हमले की साजिश जैसा प्रतीत होता है। आरोप लगाया गया है कि हमलावरों के हाथों में हॉकी, लोहे की रॉड, बेस बॉल के डंडे और हथौड़े थे। अलोक के मुताबिक, हमलावरों ने अलोक और उसके दोनों साथियों को बुरी तरह से मारा जिसमें नितेश की मौत हो गई।

नितेश के सिर पर किए गए वार

शिकायत में कहा गया कि हमलावरों ने निशाने पर खास तौर पर नितेश थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, नितेश को अलग खींच कर ले जाया गया और उसके सिर पर ताबड़तोड़ वार किए गए। अलोक ने बताया है कि हमलावरों ने नितेश को मरा जान कर छोड़ दिया। पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में लिखा गया है कि नितेश के साथियों को धमकी दी गई कि अगर वो बच गया वो सुबह सबको देखा जाएगा। अलोक ने दावा किया है कि नामजदों के अलावा लगभग आधे दर्जन हमलावरों को वो देख कर पहचान लेगा।

शिकायत में अलोक ने बताया है कि हमले में सबसे ज्यादा चोटें नितेश को आई थीं। साथ ही आलोक भी इस हमले में घायल हो गए थे। पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि बाद में पुलिस की PCR आई और उन्होंने अलोक व नितेश को अस्पताल में भर्ती करवाया।

किसी अस्पताल ने माँगे ढेर सारे पैसे तो किसी ने बताया फुल

अपनी शिकायत में अलोक दुबे ने खास तौर पर राम मनोहर लोहिया (RML) और गंगाराम अस्पताल का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि नितेश का परिवार उन्हें पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गया जहाँ पर बेड ही मौजूद नहीं था। बताया गया है कि बाद में नितेश के घर वालों ने उसे दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाने का प्रयास किया, जहाँ इतने पैसे माँग लिए गए कि वो नितेश के परिजनों की पहुँच से बाहर थे।

अलोक ने कहा कि बाद में हालात को देखते हुए नितेश को एम्स में भर्ती करवाने की कोशिश भी हुई, पर वहाँ भी बेड न होने की जानकारी दी गई।

शिकायतकर्ता को ही झूठे मुकदमे में फँसाने की धमकी

शिकायतकर्ता अलोक ने अपनी शिकायत में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अलोक के अनुसार, उनके और नितेश के पूरे इलाज और इस दौरान हुई मौत के बीच किसी पुलिस वाले की मौजूदगी अस्पताल में नहीं थी। शिकायतकर्ता की मानें तो अगर इलाज के दौरान पुलिस मौजूद होती तो शायद नितेश की जान बच जाती। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि पुलिस पीड़ित का बयान ही लेनेको लेकर गंभीर नहीं थी। अलोक ने आरोप लगाया है कि शिकायतकर्ता होने के बाद भी उनको ही फर्जी मुकदमे में फँसाने की धमकी दी जा रही है।

ऑपइंडिया के पास इस घटना की FIR कॉपी मौजूद है। FIR कॉपी में पुलिस ने बताया है कि किसी दीपक जैन नाम के व्यक्ति ने पुलिस को झगड़े की सूचना फोन पर दी थी। पुलिस मौके पर पहुँची तो उन्हें जो जानकारी मिली थी कि लड़कों के 2 गुटों के बीच झगड़ा हुआ है। पुलिस को घटनास्थल पर ईंटें और खून के छींटे बिखरे हुए मिले। शुरुआत में पुलिस ने यह केस IPC की धारा 308 के तहत दर्ज किया था। तब शिकायतकर्ता रंजीत नगर थाने के ही असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) सुखबीर सिंह थे।

FIR कॉपी में राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर के हवाले से पुलिस ने शिकायतकर्ता अलोक को अस्पताल में आने के दौरान नशे में होना बताया है। पुलिस ने अलोक द्वारा मेडिकल न करवाने की ये वजह बताई है। पुलिस का कहना है कि अलोक खुद ही दूसरे अस्पताल में चला गया था, जिस से उसके बयान नहीं नोट हो पाए।

ISIS के आतंकी स्ट्रक्चर को ‘लाफार्ज सीमेंट’ ने दी थी डॉलर की मजबूती: कोर्ट को बताया- प्लांट बंद न हो इसलिए दिए पैसे

फ्रांसीसी सीमेंट कंपनी लाफार्ज ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) को पैसा देने की बात कबूल ली है। सीरिया में कंपनी का प्लांट चालू रखने के लिए 777.8 मिलियन डॉलर (64057663500 रुपए) आतंकी संगठन को देने की बात उसने अमेरिकी अदालत में मानी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट ने मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) को पहली बार किसी कंपनी को आतंकवादियों की सहायता करने के लिए दोषी ठहराया। लाफार्ज, जिसे 2015 में स्विस लिस्टेट होल्सिम (HOLN.S) ने खरीद लिया था, अपना जुर्म कबूलते हुए जुर्माने के रूप में 778 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है।

अमेरिकी प्रोसेक्यूटर के अनुसार, लाफार्ज ने इस्लामिक स्टेट और अल-नुसरा फ्रंट को बिचौलियों के जरिए 2013 और 2014 के बीच लगभग 5.92 मिलियन डॉलर (485928130 रुपए) के बराबर भुगतान किया। अभियोजकों ने बताया कि लाफार्ज ने इस्लामिक स्टेट के हमले बढ़ने पर सितंबर 2014 में सीरिया में अपने सीमेंट प्लांट को खाली कर दिया था। उस समय, इस्लामिक स्टेट ने शेष सीमेंट प्लांट पर कब्जा कर लिया था और इसे 3.21 मिलियन डॉलर (263508480 रुपए) में बेच दिया था।

लाफार्ज के अध्यक्ष मगाली एंडरसन ने मंगलवार को अमेरिकी अदालत में कहा कि अगस्त 2013 से नवंबर 2014 तक कंपनी के पूर्व अधिकारियों ने जानबूझकर सीरिया में विभिन्न आतंकी संगठनों को पैसे दिए। उन्होंने बताया कि इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को 2017 में ही कंपनी से अलग कर दिया गया था।

अमेरिका की डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा ओ मोनाको ने कहा आतंकवादियों का साथ देने के लिए लाफार्ज और उसकी सहायक कंपनी को दोषी ठहराया गया है। उन्होंने इस्लामिक स्टेट के साथ बिजनेस को बढ़ाने और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए दोस्ती की, जो दुनिया के अब तक के सबसे क्रूर आतंकवादी संगठनों में से एक है। मोनाको ने कहा कि फ्रांसीसी अधिकारियों ने इसमें शामिल कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन नाम नहीं बताया है। अमेरिकी अदालत के रिकॉर्ड में छह अज्ञात लाफार्ज अधिकारियों का भी उल्लेख किया गया है।

एक बयान में लाफार्ज कंपनी के नए मालिक ने कहा है कि किसी भी तरह से होल्सिम इस अपराध में शामिल नहीं है। लाफार्ज के पूर्व अधिकारियों ने होल्सिम से इस अपराध में शामिल होने की बात छिपाई। होल्सिम का नाम लिए बिना, अमेरिकी डिप्टी अटॉर्नी जनरल लिसा मोनाको ने संवाददाताओं से कहा कि जिस कंपनी ने लाफार्ज को खरीदा है, उसने इसके बारे में पता लगाने में बिल्कुल भी मेहनत नहीं की है। 2015 और 2017 के बीच सीईओ रहे एरिक ऑलसेन (Eric Olsen) ने सीरिया में आतंकियों की मदद करने के लिए लाफार्ज के जाँच के दायरे में आने के बाद अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि वह किसी भी गलत काम में शामिल नहीं हैं।

META पर ‘द वायर’ ने थूक कर चाटा: पहले लिखा- अमित मालवीय के पास स्पेशल पावर, अब कहा- हटा रहे स्टोरी, जाँच करेंगे

भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को मेटा से ताकतवर बताने वाली रिपोर्ट्स को द वायर ने अपनी साइट से हटाने का निर्णय लिया है। भारी फजीहत करवाने के बाद द वायर ने कहा कि वो अब मेटा के खिलाफ रिपोर्ट बनाने के लिए इस्तेमाल हुए हर दस्तावेज और हर सूत्र पर आंतरिक समीक्षा करने वाले हैं।

द वायर ने बयान जारी कर बताया कि उनकी मेटा कवरेज को लेकर जो सवाल उठे, उसके लिए वह एक आंतरिक समीक्षा करेंगे। इसमें दस्तावेजों, सूचनाओं, स्रोत सामग्री और स्रोतों की जाँच की जाएगी।

बता दें कि वामपंथी वेबसाइट ने अपनी ही स्टोरीज पर ऐसा एक्शन तब लिया जब डोमेन एक्सपर्ट्स और इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स ने उनकी स्टोरी खारिज की। साथ ही बताया कि शायद इस स्टोरी को गढ़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग हुआ।

एक्सपर्ट्स के ऐसे दावे के बाद ही मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म से स्टोरी हटाई और आंतरिक समीक्षा की बात कहकर अप्रत्यक्ष रूप से मान लिया कि मेटा पर की गई उनकी स्टोरी कितनी गलत थी।

साइट से आर्टिकल सस्पेंड (साभार: द वायर)

उल्लेखनीय है कि द वायर की स्टोरीज जिन शोधकर्ताओं द्वारा खारिज की गई उन्हें वायर ने एक्सपर्ट्स की लिस्ट में शामिल किया था। इन्हीं विशेषज्ञों ने बताया कि उन्होंने द वायर के लिए DMIK वेरिफिकेशन नहीं किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पब्लिक सेफ्टी देखने वाले पॉलिसी मैनेजर कनिष्क करण ने तो ट्विटर पर ही द वायर के दावों को झूठा कह दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने द वायर की स्टोरी FB ‘XCheck’ पर नहीं वेरीफाई की थी।

इसी तरह एक अन्य विशेषज्ञ जिनका नाम उज्जवल कुमार है और जो माइक्रोसॉफ्ट एशिया में काम करते हैं, उन्होंने भी द वायर के दावे को झुठलाया। उज्जवल को लेकर द वायर ने कहा था कि उन्होंने ही उन मेल्स की पुष्टि की है जिसके आधार पर उनकी रिपोर्ट थी। हालाँकि उज्जवल ने ऐसा कोई वेरिफिकेशन करने से मना कर दिया।

टेक एक्सपर्ट प्रणेश प्रकाश ने बताया कि उन्होंने दोनों एक्सपर्ट्स से बात की थी। दोनों ने ही ऐसे किसी भी सत्यापन को करने से मना किया है। ऑपइंडिया ने भी इस संबंध में माइक्रोसॉफ्ट एशिया से संपर्क का प्रयास किया था लेकिन उनका अभी कोई जवाब नहीं आया है। इस बीच खबर है कि द वायर पर मेटा की स्टोरी करने वाले पत्रकार ने अपने अकॉउंट को डिएक्टिवेट कर दिया था। हालाँकि कुछ देर बाद वह लौट आया।

OpIndia ने कन्हैया लाल का कटा सिर याद दिलाया तो Youtube ने डिलीट किया वीडियो: वे मजहबी आतंक पर पर्दा भी डालेंगे, आपकी आवाज भी कुचलेंगे

भारत की मीडिया को हमेशा से इकोसिस्टम हाँकती रही है। ऑपइंडिया ने उसे चुनौती दी। उसकी चमड़ी छीलनी शुरू की। उसके रोम-रोम में भरा हिंदूफोबिया रिस-रिस कर पाठकों के सामने आने लगा। बौखलाए इकोसिस्टम ने ऑपइंडिया की छवि मलिन करने का प्रोपेगेंडा शुरू किया। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से लेकर वैश्विक संस्थाओं और चेहरों तक को हथियार बनाया गया। संस्थान के लिए काम करने वाले लोगों के निजी जीवन में ताँक-झाँक की गई। हमारे आर्थिक तंत्र पर हमला किया गया। अब उसी इकोसिस्टम के दबाव में यूट्यूब ने हमारा एक वीडियो डिलीट कर दिया है।

यह वीडियो भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया के उस चरित्र को बेपर्दा कर रही थी, जिसके तहत वह इस्लामी बर्बरता पर पर्दे डालती है। मजहबी आतंकियों के लिए पाठकों/दर्शकों के मन में सहानुभूति पैदा करने की कोशिश करती है।

दरअसल दैनिक भास्कर ने एक लंबी-चौड़ी रिपोर्ट प्रकाशित कर पाठकों को यह बताने की कोशिश की थी कि उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का गला रेतने वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद अब बदल गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया था कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपित अजमेर की जेल में बंद हैं। अपने किए पर पछता रहे हैं। रिहाई की दुआ माँग रहे हैं। उनसे मिलने उनके परिवार वाले भी नहीं आते हैं। वे जेल में महापुरुषों की जीवनी पढ़ रहे हैं। इनके अध्ययन से उनका जीवन बदल गया है। यह भी बताया गया था कि अजमेर दरगाह का खादिम गौहर चिश्ती जिसने नुपूर शर्मा का सिर कलम करने की धमकी दी थी, वह भी इसी जेल में बंद है और अब वह भी बदल गया है।

अपने वीडियो में हमने इस रिपोर्ट की मंशा को लेकर सवाल उठाए थे। पूछा था कि जो लोग हिंदुओं को काफिर मानते हैं, वे कैसे काफिरों की जीवनी पढ़कर बदल जाते होंगे? पूछा था कि ​जो कौम सर तन से जुदा के नारों, मजहब के नाम पर हिंसा का विरोध तक नहीं करती, जो किसी का गला काटने के बाद वीडियो बनाकर हिंदुओं को यह संदेश देते हैं कि तुम काफिर हो, कहीं भी रहो सुरक्षित नहीं हो, हम जब चाहें तुम्हारा गला काट जाएँगे, उन्हें अपने किए पर क्यों और कैसे पाश्चाताप होता होगा?

दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट

अपने वीडियो में हमने बताया था कि भारत की मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए यह नया भी नहीं है। कभी मजहब के नाम पर हिंदू देवी देवताओं को खंडित करने वालों को ‘मानसिक रोगी‘ बताकर बचाव किया जाता है तो कभी आतंकी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ बताकर उसकी हिंदू घृणा पर पर्दा डाला जाता है। बताया था कि कैसे फिर इन्हीं रिपोर्टों का इस्तेमाल इन मजहबी आतंकियों के महिमामंडन, न्यायिक व्यवस्था से उनके लिए राहत पाने के लिए किया जाता है। हमने मजहबी आतंक पर मीडिया की इस लीपापोती को लेकर दर्शकों को सचेत करते हुए उनसे इसका विरोध करने का आह्वान किया था।

हमने यूट्यूब की आपत्तियों पर जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया है

यूट्यूब का कहना है कि हमने उसके गाइडलाइन का उल्लंघन किया है। यह गाइडलाइन बताती है कि आप ऐसे फुटेज का इस्तेमाल नहीं कर सकते जो हिंसा के वक्त फिल्माया गया हो। हमने अपने वीडियो में कन्हैया लाल का गला काटने वाले मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद की कुछ सेकेंड के लिए जो तस्वीर लगाई है, वह घटना के समय का नहीं है। उस वीडियो का हिस्सा है जिसे मजहबी आतंकियों ने हिंसा के बाद शूट किया था। यह तस्वीर मीडिया में धड़ल्ले से इस्तेमाल भी होती रही है।

आप ही बताइए ​क्या ऐसा करके हमने पत्रकारिता के किसी नैतिक मूल्यों का उल्लंघन किया है? क्या मीडिया की नंगई को उजागर करना अपराध है? फिर भी यूट्यूब ने हमारे वीडियो को हटा दिया।

हम जानते हैं कि ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि हम इकोसिस्टम को सरेआम नंगा कर देते हैं। क्योंकि हम हिंदुओं की आवाज बनते हैं। हम मजहबी आतंक के खिलाफ बोलते हैं। भले यूट्यूब ने हमारा वीडियो हटा दिया हो, भले इससे हमारे आर्थिक हितों को चोट पहुँचता हो, बावजूद इसके हम न तो इकोसिस्टम को चुनौती देना बंद करेंगे, न ही मजहबी आतंकी के खिलाफ बोलना। क्योंकि हम यहाँ आपके लिए और यह जानते हैं कि आप भी हमारे लिए ही यहाँ हैं। हम जानते हैं कि हर मुश्किल समय की तरह इस बार भी आप हमारा संबल बनेंगे। हमारे लिए खड़े होंगे।

PFI का टारगेट था अयोध्या का राम मंदिर, गिराकर बाबरी मस्जिद बनाने की थी प्लानिंग: महाराष्ट्र ATS की कार्रवाई के बाद खुलासा

हाल ही में देश में प्रतिबंधित हुए आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI/ पीएफआई) को लेकर नया खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र सरकार ने नासिक कोर्ट में बताया कि पीएफआई वाले अयोध्या के राम मंदिर को तोड़कर वहाँ बाबरी मस्जिद बनाने की प्लानिंग कर रहे थे।

महाराष्ट्र एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 5 संदिग्धों से पूछताछ और उनकी पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। साथ ही यह भी पता चला कि कैसे इनका मकसद देश को 2047 तक किसी भी हाल में इस्लामी राष्ट्र में तब्दील करना था। इसके अलावा देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ये विदेशों से ट्रेनिंग पा रहे थे। संदिग्धों के अकॉउंट की जाँच में विदेशी पैसा भी मिला है।

गौर देने वाली बात है कि पीएफआई कार्यकर्ताओं का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी सामने आया है। जानकारी मिली है कि भारत में चल रहे संगठन के इस ग्रुप का एडमिन कोई भारतीय नहीं बल्कि पाकिस्तान से है।

बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के ये 5 संदिग्ध आतंकी गतिविधियों के इल्जाम में सितंबर माह में पकड़े गए थे। पड़ताल के दौरान जाँच टीम को विदेश से संचालित होते व्हॉट्सएप ग्रुप के बारे में पता चला। छानबीन हुई तो ये सामने आया कि ग्रुप में न केवल पाकिस्तान बल्कि अफगानिस्तान और अमीरात के लोग भी थे।

पीएफआई के संदिग्ध सामाजिक कार्यों के नाम पर देश-विदेश से पैसा इकट्ठा कर रहे थे। इनका मकसद इन पैसों के जरिए, (खासकर खाड़ी देशों से आए पैसों का प्रयोग करके) देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना था। इस बात की जानकारी होने के बाद अब एनआईए के साथ ईडी भी इस मामले में अपनी जाँच कर रही है। छानबीन में संदिग्धों के पास से मोबाइल और हार्ड डिस्क समेत अन्य सामग्रियाँ बरामद की गईं।

महाराष्ट्र ATS की PFI पर कार्रवाई

गौरतलब है कि पीएफआई के कट्टरपंथी लगातार देश के माहौल को बिगाड़ने के लिए साजिशें रच रहे थे। ऐसे में कुछ वक्त पहले भारत सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगाया। वहीं एनआईए ने देश भर में ताबड़तोड़ रेड मारते हुए सैंकड़ों पीएफआई से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया। इसी क्रम में महाराष्ट्र एटीएस ने भी एक्शन लिया।

एटीएस ने हाल में मालेगाँव में पीएफआई के अध्यक्ष मौलाना सईद अहमद अंसारी, पुणे में संगठन के उपाध्यक्ष अब्दुल कय्यूम शेखांद और 3 अन्य को गिरफ्तार किया था। इनके ऊपर इल्जाम था कि ये विदेशों से मिले पैसों के जरिए देश में अशांति फैलाने का काम कर रहे थे। हालाँकि महाराष्ट्र एटीएस ने इन्हें गिरफ्तार करके इनके मनसूबों पर पानी फेर दिया।

‘कभी हुआ करता था जाटों का गाँव, अब 80% मुस्लिम’: जहाँ हुई नितेश चौधरी की हत्या, बोले वहाँ के लोग – कॉन्ग्रेस ने बसाई थी मुस्लिम बस्ती, पूछने तक न आया कोई AAP नेता

देश की राजधानी दिल्ली के बलजीत नगर में उफीजा ने अपने दोस्त अदनान और अब्बास के साथ मिलकर नितेश को सरेआम पीट-पीट कर हत्या कर दी। घटना के लगभग 1 सप्ताह बीत जाने के बाद हिन्दू संगठनों ने पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ 16 अक्टूबर, 2022 को प्रदर्शन किया। ऑपइंडिया की टीम ने अपनी पूर्व की 3 ग्राउंड रिपोर्टों में बताया कि कैसे मृतक के परिजनों ने आरोपितों को फाँसी की माँग की है।

वहीं स्थानीय वार्ड पार्षद ने इलाके हिन्दुओं को धर्मनिरपेक्ष बताते हुए इस घटना को सोच से परे बताया। जब ऑपइंडिया ने मृतक नितेश के पड़ोसियों से बातचीत की तब उन्होंने शादीपुर इलाके का इतिहास बताते हुए कहा कि कभी वो क्षेत्र जाटों का गाँव हुआ करता था, जहाँ अब मुस्लिमों का दबदबा हो चुका है।

कभी शादीपुर था जाटों का गाँव

ऑपइंडिया से बात करते हुए नितेश के पड़ोसी अनूप सिंह ने बताया कि आज़ादी से पहले और उसके बाद भी शादीपुर जाटों का गाँव हुआ करता था। उन्होंने कहा कि सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यहाँ के लोगों ने अन्य जातियों को जमीनें दे कर बसाया। अनूप सिंह के मुताबिक, हिन्दू समाज की बाकी जातियों के लोग तब से अपनी अलग-अलग कालोनियों में शांति और सौहार्द से रह रहे हैं।

स्थानीय वार्ड पार्षद तेजराम ने भी अनूप सिंह की बातों से मिलता जुलता बयान दिया। पार्षद के मुताबिक, जाटों के गाँव शादीपुर का इतिहास 700 साल से भी पुराना सबूतों के साथ मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले शादीपुर क्षेत्र की जमीन अंग्रेजों ने ली। बाद में यहाँ कॉन्ग्रेस सरकार में संजय गाँधी ने मुस्लिमों को बसाया। 30 साल पहले के शादीपुर का जिक्र करते हुए वार्ड पार्षद ने कहा कि गाँवों में भैंसे हुआ करती थीं और माताएँ बहनें यहीं पर खेतों से चारा ले कर आती थीं। हालाँकि, तेजराम के मुताबिक अब सब कुछ बदल चुका है।

शादीपुर में कॉन्ग्रेस ने बसाए मुस्लिम

अनूप सिंह ने हमें बताया कि 70 के दशक में कॉन्ग्रेस के संजय गाँधी ने इस क्षेत्र में मुस्लिमों को बसाया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के तुर्कमान गेट से विस्थापित मुस्लिमों को यहाँ बाकायदा 500 से अधिक घर बना कर दिए गए थे। अनूप सिंह के मुताबिक तब से मुस्लिमों ने न सिर्फ अपनी आबादी काफी बढ़ा ली है बल्कि कई जमीनों पर कब्ज़ा भी कर लिया है। अवैध कब्ज़ा हुई जमीनों को जाटों की पुश्तैनी और सरकार की बताई गई।

कभी यहाँ जाट थे 80% जो अब 20% होने वाले हैं

रिश्ते में मृतक नितेश के भाई लगने वाले प्रशांत सिंह ने भी हमसे बात की। उन्होंने कहा कि कभी शादीपुर इलाके में जाट 80% हुआ करते थे और मुस्लिम मात्र 20% लेकिन अब इसका ठीक उल्टा हो रहा है। प्रशांत के मुताबिक, अपने ही गाँव में जाट 20% होने की कगार पर आ चुका है और अगर यही हाल रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में शादीपुर जाटों से विहीन हो जाएगा। पीड़ित के चचेरे भाई दीपक ने बताया कि उस इलाके में मुस्लिमों की प्रजनन दर भी हिन्दुओं से बहुत ज्यादा है। इसी के साथ पीड़ित परिजनों ने क्षेत्र में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को भी अपराध में शामिल बताया।

योगी आदित्यनाथ से डर कर UP के अपराधी यहाँ ले रहे शरण

हमसे बात करते हुए अनूप सिंह ने कहा कि शादीपुर और रंजीत नगर में मुस्लिमों की आबादी उत्तर प्रदेश में अपराध कम होने के बाद बढ़ी है। उन्होंने कहा कि UP में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद वहाँ से डर कर कई अपराधी दिल्ली के इस इलाके में आ रहे हैं। अनूप ने दिल्ली प्रशासन पर अपराधियों को समर्थन देने का भी आरोप लगाया है।

मौत में दोतरफा नीति न बनाएँ अरविन्द केजरीवाल

स्थानीय AAP विधायक पर नितेश की हत्या को अनदेखा करने का आरोप लगाते हुए मृतक के चचेरे भाई ने कहा कि उन्हें तो मालूम ही नहीं था कि ऐसी घटना हुई है। घटना के बाद आम आदमी पार्टी की तरफ से किसी भी सक्षम कार्यकर्ता के मोहल्ले में तक न आने का आरोप लगाते हुए पड़ोसी अनूप सिंह ने कहा कि केजरीवाल को दोतरफा नीति नहीं बनानी चाहिए क्योंकि वो पूरी दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं।

जातिवादियों ने हमें कमजोर कर दिया

इस पूरी बातचीत के दौरान वहाँ से गुजर रहे नितेश चौधरी के चचेरे भाई दीपक चौधरी ने ऑपइंडिया से कहा कि जातिवादियों ने हमारे समाज को बहुत कमजोर कर दिया। उन्होंने बताया कि वोटबैंक के लिए हिन्दू समाज को जिस प्रकार से तोड़ा जा रहा है, अगर वो न रुका तो आने वाला समय और कठिन होगा। दीपक ने हिन्दुओं से एकजुट रहने की अपील की।

‘एशिया कप खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी टीम इंडिया’: जय शाह के ऐलान से भड़का Pak, सईद अनवर ने कहा – ICC से बात करे PCB, हम भी भारत नहीं जाएँगे

मंगलवार (18 अक्टूबर 2022) को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव जय शाह ने कहा था कि साल 2023 में होने वाले एशिया कप के लिए भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी। इसके बाद अब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सईद अनवर ने कहा है कि पाकिस्तान को भी विश्व कप के लिए भारत नहीं जाना चाहिए।

दरअसल, जय शाह बीसीसीआई (BCCI) सचिव होने के अलावा एशिया क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष भी हैं। एसीसी सचिव होने के नाते उन्होंने ऐलान किया था कि एशिया कप के लिए भारतीय टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी। उन्होंने कहा था, “एशिया कप 2023 एक न्यूट्रल वेन्यू पर खेला जाएगा। यह बात मैं बतौर ACC प्रेसिडेंट कह रहा हूँ। हम वहाँ (पाकिस्तान) नहीं जा सकते, और वो यहाँ (भारत) नहीं आ सकते। पहले भी ऐसा हो चुका है और एशिया कप को न्यूट्रल वेन्यू पर खेला गया है।”

जय शाह के इस बयान के बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सईद अनवर (Saeed Anwar) ने कहा है कि बीसीसीआई अगर अगले साल होने वाले एशिया कप 2023 को किसी न्यूट्रल वेन्यू पर शिफ्ट करता है तो फिर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को भी साल 2023 में भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को लेकर आईसीसी से बात करनी चाहिए और टूर्नामेंट को भारत से बाहर किसी दूसरे स्थान पर आयोजित कराना चाहिए।

सईद अनवर ने ट्वीट कर कहा है, “जब सभी अंतरराष्ट्रीय टीमें और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में खेलने के लिए पाकिस्तान आते हैं, तो फिर बीसीसीआई को क्या समस्या है? अगर बीसीसीआई एशिया कप 2023 को किसी न्यूट्रल वेन्यू पर ले जाने के लिए तैयार है, तो फिर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को भी अगले साल भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को किसी न्यूट्रल वेन्यू पर ले जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट टीम साल 2008 के बाद से अब तक पाकिस्तान नहीं गई है। साल 2008 में टीम इंडिया एशिया कप खेलने के लिए ही पाकिस्तान गई थी। इसके बाद, पाकिस्तान की नापाक हरकतों के कारण दोनों देशों के संबंध खराब हो गए और कोई भी द्विपक्षीय सीरीज नहीं हो सकी है। अब, टीम इंडिया और पाकिस्तान आईसीसी टूर्नामेंट (एशिया कप और विश्व कप) में ही आमने-सामने होते हैं।