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बाइक को साइड न देने पर अमीन जंगूशेख ने दोस्तों संग श्रीराम सेना के सदस्यों पर चाकू-रॉड से किया हमला, अस्पताल में चल रहा इलाज: ईद की नमाज़ के बाद हुई घटना

कर्नाटक के बेलगावी में ईद की नमाज़ के बाद हिंसा होने की खबर है। यहाँ दो पहिया वाहन से घूम रहे रहे मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों का हिन्दूवादी संगठनों ने विवाद होने के बाद माहौल हिंसक हो गया। इस विवाद में श्रीराम सेना के 3 कार्यकर्ताओं पर 5 हमलवारों ने हमला किया है। हमले के लिए चाकुओं और लोहे की रॉड का प्रयोग किया गया है। पुलिस ने इसे आपस की व्यक्तिगत दुश्मनी बताते हुए लोगों से शाँति की अपील की है। घटना रविवार (9 अक्टूबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना रामदुर्ग बाजार की है। यहाँ घटना के दिन ईद की नमाज़ के बाद दोपहर में अमीन जंगूशेख अपने 4 साथियों के साथ बाइक से घूम रहा था। आरोप है कि इस दौरान श्रीराम सेना के सदस्यों ने उनकी बाइक को साइड नहीं दिया। इसी बात पर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि इस विवाद ने धीरे-धीरे बढ़ कर हिंसक रूप ले लिया।

आरोप है कि इस दौरान अमीन जंगूशेख और उसके 4 साथियों ने लोहे की रॉड और चाकुओं से श्रीराम सेना के 2 सदस्यों पर चाकुओं से हमला बोल दिया। इन पीड़ितों के नाम गोपाल और रवि हैं। इस दौरान बीच बचाव करने गए नंजुंडी बांदीवद्दर को भी लोहे की रॉड से घायल कर दिया गया। हमले में घायल तीनों पीड़ितों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि इस विवाद में अमीन जंगूशेख को भी चोटें आई हैं।

इस घटना के बाद बेलगावी जिले के SP संजीव पाटिल ने इसे व्यक्तिगत शत्रुता बताया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो शाँति और व्यवस्था बनाए रखें। क्षेत्र में कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घायल व्यक्ति की तहरीर पर जंगूशेख और 4 अन्य आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मौत के बाद महान बनाने की परिपाटी कब तक, जिनका आज इंतकाल हुआ उन्होंने सबरी के राम को ठुकरा ‘मौलाना मुलायम’ होना खुद चुना

मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का आज (10 अक्टूबर 2022) इंतकाल हो गया। इसकी पुष्टि उनके उस बेटे (अखिलेश यादव) ने भी की है, जिन पर राजनीतिक विरासत को हड़पने के लिए पिता को मुगलों वाले तरीके से बेदखल करने के आरोप लगते हैं। हमारे यहाँ सामाजिक परिपाटी है कि किसी की मौत हो जाए तो गाँधी जी का बंदर बन जाना है। न उसके बारे में बुरा कहना है। न उसके बारे में बुरा सुनना है। उसके बुरे कर्म आँखों में तैरने लगे तो आँख ही बंद कर लेनी है। सो, मुलायम सिंह के इंतकाल के बाद भी शोक संदेशों का आना स्वभाविक है। साइकिल सवार सपाई तो आँसुओं से बाढ़ भी ला सकते हैं। आखिर उनके कुल के धृतराष्ट्र जो चले गए, जो भरे मंच से कहते थे- लड़के हैं, गलती हो जाती है।

मुलायम सिंह यादव ने यह बात उस देश में बलात्कार के अपराध को हल्का दिखाने के लिए कही, जिसकी परंपरा स्त्री सम्मान के लिए लंका दहन और महाभारत की रही है। यह सत्य है कि मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में पिछड़ों की राजनीति को उभार दिया। हिंदुत्व को समर्पित पिछड़ों के लिए राजनीति में मजबूत जगह बनाई। लेकिन, जिनकी भावनाओं के ज्वार ने उन्हें देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया, देश का रक्षा मंत्री बनाया, आगे चलकर ‘वोट बैंक’ के लिए उन्होंने उनके ही अराध्य राम के भक्तों के रक्त से अयोध्या को लाल कर दिया। पिछड़ों की पीठ पर सवार हो मुलायम ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ में ऐसे डूबे कि उनके बगलगीर आजम खान अभिनेत्री से नेत्री बने जयाप्रदा की चड्डी का रंग बताने लगे।

खुद मुलायम सिंह पर ‘मुल्ला मुलायम’, ‘मौलाना मुलायम’ की सनक सवार हो गई। इसी सनक में उनके रहते 2 नवंबर को अयोध्या में रामधुन में रमे भक्तों पर फायरिंग हुई। अयोध्या की गलियों में रामभक्तों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया गया। 3 नवंबर 1990 को जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट में लिखा गया, “राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक कारसेवक, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है, गोली लगते ही गिर पड़ा और उसने अपने खून से सड़क पर लिखा सीताराम। पता नहीं यह उसका नाम था या भगवान का स्मरण। मगर सड़क पर गिरने के बाद भी सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उसकी खोपड़ी पर सात गोलियाँ मारी।”

2 नवंबर 1990 को ही कोठारी बंधुओं की हत्या हुई थी। 20 साल के शरद कोठारी को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया गया और उनके सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख 22 साल के रामकुमार कोठारी भी कूद पड़े। एक गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। उस दिन अयोध्या में किसी भी रामभक्त के पैर में गोली नहीं मारी गई थी। सबके सिर और सीने में गोली लगी थी। तुलसी चौराहा खून से रंग गया था। राम अचल गुप्ता का अखंड रामधुन बंद नहीं हो रहा था तो उन्हें पीछे से गोली मारी गई।

रामनंदी दिगंबर अखाड़े में घुसकर साधुओं पर फायरिंग की गई। कोतवाली के सामने वाले मंदिर के पुजारी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। रामबाग के ऊपर से एक साधु आँसू गैस से परेशान लोगों के लिए बाल्टी से पानी फेंक रहे थे। उन्हें गोली मारी गई और वह छत से नीचे आ गिरे। फायरिंग के बाद सड़कों और गलियों में पड़े रामभक्तों के शव बोरियों में भरकर ले जाए गए।

इस सबकी शुरुआत से पहले तत्कालीन आईजी एसएमपी सिन्हा ने अपने मातहतों से कहा था, “लखनऊ से साफ निर्देश है कि भीड़ किसी भी कीमत पर सड़कों पर नहीं बैठेगी।” अब सवाल है कि उस समय लखनऊ की कुर्सी पर कौन बैठा था। जवाब है- मुलायम सिंह यादव।

उस दिन मरने वाले कारसेवकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आँकड़े दिए जाते हैं। कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी और उनके नामों की सूची भी प्रकाशित की गई थी। मुलायम ने बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे 56 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी क़िताब ‘युद्ध में अयोध्या‘ में लिखा है कि उन्होंने 25 लाशें देखी थी। केंद्र सरकार ने 15 कारसेवकों के मारे जाने का आँकड़ा दिया था, जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी।

राम भक्तों के इस नरसंहार के बाद मुलायम को ‘मौलाना मुलायम’ का तमगा हासिल हुआ। वे जीवनपर्यंत अपने इस कृत्य को जायज ठहराते रहे। ऐसा ही मौका नवंबर 2017 में मुलायम सिंह के 79वें जन्मदिन पर आया था। तब मुलायम ने कहा था कि अगर और भी लोगों को मारना पड़ता तो जरूर मारते। मुलायम ने तब गर्व के साथ आँकड़े गिनाते हुए कहा था कि उस गोलीकांड में 28 कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

उत्तर प्रदेश में मुलायम ने कांशीराम से हाथ मिलाया तो नारे लगे- मिले मुलायम कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम। क्या हिंदुत्व को समर्पित, राम के लिए अपना जीवन खपाने वाले दलित-पिछड़े ऐसे मुलायम को उनके इंतकाल के बाद भी माफ कर पाएँगे?

अपनी गति को पा चुके मुलायम के लिए तो बाबा तुलसीदास का लिखा यह भी नहीं कहा जा सकता कि ‘सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ। हानि लाभु जीवन मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ।’ क्योंकि बिधि ने मुलायम को ‘राम भक्त’ बनने का मौका दिया था, उन्होंने राजनीति के लिए ‘मौलाना मुलायम’ होना खुद लिखा।

‘गर्भवती अहमदिया औरतों का कर दो कत्ल, बच्चा पैदा हो जाए तो उसे भी मारो’: पाकिस्तानी मौलवी की Video

पाकिस्तान के एक मौलवी ने अहमदिया समुदाय की गर्भवती महिलाओं पर हमला करने का फतवा जारी किया है। मौलवी का नाम मुहम्मद नईम चट्ठा कादरी है। मौलवी का तर्क है कि ऐसा करना इसलिए जरूरी है जिस से कोई नया अहमदिया पैदा न होने पाए। इसी के साथ मौलवी के मुताबिक इस्लाम की बुराई करने वालों के लिए ‘सिर तन से जुदा’ की ही सज़ा होनी चाहिए। मुहम्मद नईम का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहे वीडियो में मौलवी पंजाबी भाषा में बोलता दिखाई दे रहा है। उसने महमूद गज़नवी का नाम लिया और अहमदिया समुदाय की गर्भवती औरतों पर हमले का फतवा दिया। अपने बयान में मौलवी ने पाकिस्तान के पुलिस प्रशासन को भी चेतावनी दी। उसने कहा, “अगर कोई पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी मेरी बात को सुन रहे हों तो ये जान लें कि हम रुकने वाले नहीं हैं।” मौलवी के बयान पर मंच के नीचे भीड़ में से विरोध के बजाए समर्थन में नारेबाजी होती रही।

मौलवी ने साफ तौर पर कहा कि इस्लाम की निंदा करने वालों के लिए सिर तन से जुदा की सज़ा मुकर्रर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौलवी ने आगे कहा, “अगर हम गर्भवती अहमदिया महिलाओं को मारने में सफल नहीं हो पाएँ तो उन बच्चों को पैदा होने के बाद कत्ल कर दो।” मौलवी मुहम्मद नईम चट्ठा कादरी पाकिस्तान के प्रतिबंधित और कट्टरपंथी कहे जाने वाली जमात तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) का सदस्य है।

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। एक पत्र जारी करते हुए कमेटी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और अहमदियों की रक्षा करने की माँग की। इसी पत्र में बताया गया है कि तहरीक-ए-लब्बैक का पाकिस्तान में अहमदियों के खिलाफ हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। पत्र में अगस्त 2022 में पाकिस्तान में हुई नसीर अहमद की हत्या का जिक्र किया गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक हत्या के दौरान नसीर अहमद 62 साल के थे। वो 3 साल की बच्ची के पिता थे जब उन्हें रबवाह शहर में चाकुओं से गोद दिया गया था। माना जा रहा है कि इस फतवे के बाद अहमदियों पर हमलों की तादाद बढ़ सकती है।

‘नहीं रहे मेरे पिता और सबके नेताजी’… 82 साल की उम्र में मुलायम सिंह यादव का निधन, अखिलेश ने दी जानकारी

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का 82 साल की उम्र में सोमवार (10 अक्टूबर) को निधन हो गया। समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अखिलेश यादव का बयान ट्वीट करके कहा गया- “मेरे आदरणीय पिता जी और सबके नेता जी नहीं रहे।”

इससे पहले सपा के अकॉउंट से मुलायम सिंह यादव की तबीयत के बारे में अपडेट दिया गया था कि मुलायम सिंह यादव की स्थिति बहुत गंभीर है। वह दवाइयों पर जीवित हैं। उनका इलाज आईसीयू में हो रहा है और विशेषज्ञों की खास टीम उनका इलाज कर रही है।

2020 से बीमार थे मुलायम सिंह यादव, 2022 में तबीयत बिगड़ी

बता दें कि मुलायम सिंह की तबीयत अगस्त 2020 से बिगड़नी शुरू हुई थी। पहले उन्हें पेट दर्द हुआ था, जिसकी जाँच में उन्हें यूरिन इन्फेक्शन आया था और बाद में वह कोरोना पॉजिटिव हो गए थे। इसके बाद 2021 में भी एक बार भर्ती हुए थे। वहीं 2022 में वह पहले जून में भर्ती हुए, फिर अगस्त में और फिर सितंबर में। 26 सितंबर को मुलायम सिंह यादव को जब मेदांता में भर्ती किया गया तब से वह वहीं थे।

बाद में खबर आई कि उन्हें साँस लेने में तकलीफ होनी शुरू हुई थी, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया। उनकी देखरेख खुद मेदांता ग्रुप के निदेशक डॉ नरेश कर रहे थे। हालाँकि थोड़ी देर पहले खबर आई कि उन्होंने आज सुबह 8: 16 पर अपनी अंतिम साँस ली।

मुलायम सिंह यादव का सफर

गौरतलब है कि यूपी में 3 बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक थे। उनका जन्म 22 नवंबर 1939 को सैफई में हुआ था। कुछ दिन पहले जैन इंटर कॉलेज के प्राध्यापक भी थे। लेकिन फिर वह राजनीति में सक्रिय हो गए और जीवन के 6 दशक उन्होंने राजनीति को दिए। इस दौरान वह 8 बार वह विधानसभा के सदस्य बने, 7 बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और 3 बार मुख्यमंत्री। इसके अलावा 1996 में एचडी देवगौड़ा की संयुक्त गठबंधन वाली सरकार में उन्होंने रक्षामंत्री के तौर पर भी काम किया। मुलायम सिंह यादव की 2 शादियाँ हुई थीं। उनकी दूसरी पत्नी देहांत अभी कुछ समय पहले ही हुआ था।

आदिपुरुष के सवालों पर सनातनी पर्दा: शुक्ला का मुंतशिर होना नहीं है सनातन, इसलिए धंधे के लिए धर्म का इस्तेमाल बंद करो

एक फिल्म अगले बरस यानी 2023 के जनवरी में रिलीज होनी है। नाम है- आदिपुरुष (Adipurush)। पिछले दिनों इस फिल्म का टीजर जारी किया गया। उसके बाद से इस फिल्म को लेकर विवाद चल रहा है।

सवाल इस फिल्म के किरदारों के लुक को लेकर है। फिल्म पर हिंदू धर्म का मजाक बनाने के आरोप लग रहे हैं। फिल्मों में मेरी दिलचस्पी न के बराबर है। भारत का फिल्म उद्योग, खासकर हिंदी फिल्म उद्योग (Hindi cinema) जिस तरह हिंदू घृणा से सना है, यह गंभीरता से लेने की चीज भी नहीं है। लेकिन जिस तरह इस फिल्म को लेकर उठ रहे सवालों को दबाने के लिए फिल्म से जुड़े लोग सनातन, राष्ट्र धर्म, हिंदुत्व की दुहाई दे रहे हैं, हर हिंदू के लिए बोलना जरूरी हो जाता है। ऐसा नहीं होने पर यह परिपाटी चलती ही रहेगी। यह एक तरह से आपके घर में घुस कर, खुद को आपकी तरह का बताकर, आप की पहचान धर कर, आपकी ही मूल्यों पर हमले जैसा है। इस अभियान के अगुवा बने हुए हैं, मनोज मुंतशिर (Manoj Muntashir)। वे इस फिल्म से बतौर डायलॉग राइटर जुड़े हुए हैं। आगे बढ़ने से पहले जरा मनोज के इस बयान को सुनिए, उन्होंने खुद ट्विटर पर इसे साझा किया है।

दरअसल, मनोज चाहते हैं कि इस फिल्म को लेकर कोई सवाल इसलिए नहीं पूछे जाने चाहिए क्योंकि उनके अनुसार इससे जुड़े सभी लोग ‘सनातनी’ हैं। अब आगे आप एक दो साल पुराना क्लिप देखिए;

जी हाँ, आपने सही सुना। खुद को बचनदेव शर्मा बताने वाले इस व्यक्ति ने कहा है कि उसने रामायण में पढ़ा है कि प्रभु ईशु आएँगे। अयोध्या कांड में ऐसा लिखे होने की बात कह रहा है। यह व्यक्ति हमें 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव की रिपोर्टिंग के दौरान मिला था। मधुबनी जिले के कुछ गाँवों में हमें ईसाई धर्मांतरण की जानकारी मिली थी। ये वे इलाके थे, जहाँ चर्च के पहुँचने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। हमने खोजबीन की तो धर्मांतरण करवाने में इस व्यक्ति की भूमिका सामने आई थी। खुद को पत्रकार बताने वाला यह व्यक्ति वेद, पुराण और हिंदू धर्मग्रंथों का अध्ययन करने का दावा करता था। कहता था कि इसमें हिंदू और सनातन टाइप का कुछ नहीं है। लेकिन ईसामसीह का जिक्र होने का दावा करता था। इसके फर्जीवाड़े पर आप पूरी रिपोर्ट ऑपइंडिया के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं।

क्या हिंदुओं का मजाक बनाने वाली फिल्म आदिपुरुष से जुड़े मनोज मुंतशिर और हिंदुओं को ईसाई बनाने वाले बचनदेव शर्मा, एक ही तरह की बात नहीं कर रहे? एक सनातन का हवाला देकर तो दूसरा हिंदू धर्म ग्रंथों का हवाला देकर, सवालों को खारिज करने की कोशिश नहीं कर रहा? जबकि हम जानते हैं कि न तो आदिपुरुष का सनातन से सरोकार है, न रामायण में ईसामसीह का कोई जिक्र है।

आदिपुरुष में रावण का किरदार सैफ अली खान ने निभाया है। टीजर रिलीज होने के बाद लोगों ने पाया कि सैफ कहीं से भी रावण की तरह नहीं दिखते। लुक, हावभाव से वे बर्बर इस्लामी अक्रांताओं जैसे दिखते हैं। इसको लेकर पूछे सवाल के जवाब में मनोज मुंतशिर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि फिल्म में रावण को जानबूझकर खिलजी की तरह नहीं दिखाया गया है। लेकिन फिर भी ऐसा है तो इस पर ऐतराज नहीं होना चाहिए, क्योंकि हर दौर में बुराई का अपना प्रतीक होता है। कल रावण था, आज खिलजी है।

यदि मनोज के इस तर्क को मान लिया जाए तो यह कहने की क्या आवश्यकता है कि आदिपुरुष की कहानी प्रभु राम के कालखंड की है। जब आप किसी खास कालखंड की बात करते हैं तो चरित्र और उनके आचरण उस कालखंड के अनुसार ही होने चाहिए। क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर आप रावण को राफेल उड़ाते नहीं दिखा सकते। उसे चमगादड़ और ड्रैगन के बीच के किसी जीव पर भी सवार नहीं दिखा सकते। मनोज के इस तर्क को मान्यता दे दी जाए तो कल को कोई लिबरल फिल्मकार राम के हावभाव राहुल गाँधी की तरह भी दिखा सकता है। फिर वह कहेगा कि हर दौर के अपने नायक होते हैं। उसके लिए आज के दौर का नायक राहुल गाँधी हैं। इस स्थिति में जो कुछ पर्दे पर दिखेगा, वह पप्पू ही होगा। लिबरई की इंतहा हुई तो इसी तर्क की आड़ में कोई राम के हावभाव और कर्म प्रतीक सिन्हा या मोहम्मद जुबैर की तरह भी दिखा सकता है। ऐसी स्थिति में तो रावण के बचाव के लिए राम फैक्टचेक करते और फर्जी तथ्य गढ़ते दिखेंगे, जैसा ये इस्लामी कट्टरपंथियों के बचाव में करते हैं। आदिपुरुष में चरित्रों के लुक को लेकर यह समस्या राम से लेकर हनुमान तक के पात्रों में दिखती है।

यह सच है कि हमने इन पौराणिक पात्रों को अपनी नग्न नेत्रों से नहीं देखा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ये पौराणिक पात्र कैसे दिखते रहे होंगे या इनके आचरण को लेकर उल्लेख हमारे पौराणिक ग्रंथों में नहीं हैं। इन्हीं के आधार पर इन पात्रों की लोकछवि बनी हुई है। जब भी आप पौराणिक किरदारों को पर्दे पर उतारने का निर्णय लेते हैं तो संदर्भ इन्हीं जगहों से प्राप्त करते हैं। कई लोगों ने इस पर विस्तार से लिखा है, इसलिए मैं उसकी गहराई में नहीं जाना चाहता। लेकिन उदाहरण के तौर पर आप तुलसीदास की लिखी इन पंक्तियों से समझ सकते हैं कि प्रभु श्रीराम कैसे दिखते रहे होंगे;

नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं
कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं
पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुशनम
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित-खर दूषणं

वैसे भी पौराणिक चरित्रों को गढ़ते वक्त उनकी पौराणिक और लोक छवि का ध्यान रखा जाना चाहिए। जाहिर है आदिपुरुष में ऐसा नहीं किया गया है। यह कहना कि कौन सा खिलजी त्रिपुंड लगाता है, इसलिए उसे रावण ही मान लिया जाए तो और भी बचकाना है। मैं जो कुछ कह रहा हूँ वह अतिशयोक्ति नहीं है। या मेरी कल्पनाओं की उड़ान नहीं है। क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं की नग्न तस्वीर बनाने वाले को हमने इस देश में देखा है। माँ काली को सिगरेट पीते देखा है। भगवान शिव को हिंदी फिल्म में शौचालय से भागते देखा है…

इसलिए आदिपुरुष पर उठते सवालों को सनातनी चादर दिखाकर छिपाने की कोशिश कर रहे मनोज को समझना चाहिए कि ये करियर के लिए शुक्ला का मुंतशिर होना और फिर हिंदू जागरण की आहट देख मुंतशिर के आगे शुक्ला के जुड़ जाने जितना आसान नहीं है। ये सवाल फिल्म के धंधे से भी बंद नहीं होते। हिंदी की तमाम सफल फिल्मों में हिंदुओं का, उनके प्रतीक चिह्नों का, उनकी आस्थाओं का, उनके अराध्यों को नीचा दिखाने का काम किया गया है। बावजूद वे फिल्में सफल रहीं, क्योंकि हिंदुओं में सेकुलर बीमारी गहरी है। 2014 के बाद इसका उपचार शुरू हुआ है। जहर धीरे-धीरे जाना है। इसलिए कुछ फिल्में अब पिटती भी हैं। लेकिन कुछ चल भी जाती हैं। इसलिए संभव है बॉक्स आफिस पर आदिपुरुष भी कमाई कर ले, लेकिन उससे जुड़े सवाल उस कमाई से नहीं दबेंगे।

यह भी कहा जा रहा है कि ये टीजर है पूरी फिल्म नहीं। लेकिन धंधेबाजों से पूछना चाहिए कि वह कौन सी व्यवसायिक नीति है, जिसके तहत टीजर में मुल्ले की तरह दिखने वाले हनुमान, असल फिल्म में पौराणिक और लोक छवि वाले हनुमान की तरह दिखेंगे। मनोज मुंतशिर हो या ओम राउत वे स्वतंत्र हैं, अपने प्रोडक्ट का प्रचार करने को। चैनल-चैनल घुमने को। लेकिन उन्हें यह याद रखना चाहिए कि सनातन उनकी क्रिएटिविटी फ्रीडम से उपजा हुआ नहीं है कि वे अपने निकृष्ट कर्मों को छिपाने के लिए ढाल की तरह उसका इस्तेमाल करें।

ये आज का भारत। हम आज के सनातनी हैं। हमें अपनी पौराणिकता पर गर्व है। हम न तो किसी को उसका मान-मर्दन करने की अनुमति दे सकते हैं और न कोई कालनेमि हमें अपनी माया में उलझा हमारे प्रभु के चरित्र को कलंकित कर सकता है। मुंतशिर बना शुक्ला भी नहीं। जिनको लगता है कि आदिपुरुष पर सवाल बेवजह हैं, किसी प्रोपेगेंडा से जुड़े हैं, उन बुद्धिजीवियों को समझना चाहिए कि आदिपुरुष पर सवाल हमारा दृष्टि दोष नहीं, आपकी बुद्धि भ्रष्ट होना है।

बंगाल के मोमिनपुर में फिर कट्टरपंथियों का हमला, हिंदुओं के घरों में फेंके पेट्रोल बम: BJP ने केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए अमित शाह को लिखा पत्र

पश्चिम बंगाल में रविवार (अक्टूबर 9, 2022) को एक बार फिर हिंदुओं पर हमला हुआ है। इस बार घटना खिर्दीपोर मोमिनपुर इलाके की है। यहाँ लक्ष्मी पूजा की शाम हिंदुओं की दुकानों और घरों पर दंगाइयों ने हमला किया। इस दौरान हिंदुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए, उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई, उनके सामान तोड़ दिए गए। इसके बाद ये कट्टरपंथी भीड़ इकबालपुर थाने के भीतर इस्लामी झंडा लेकर घुसी और वहाँ भी काफी उत्पात मचाया गया।

दंगाइयों का मजहब देख नहीं हो रही कार्रवाई

हिंसा के मद्देनजर प्रदेश के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के गवर्नर व गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिख अपील की कि वह मोमिनपुर में सेंट्रोल फोर्स (CAPF) तैनात करें क्योंकि राज्य सरकार दंगाइयों का मजहब देख उन्हें कुछ भी कहने से बच रही है।

उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले जून में हुई पंचला हिंसा के दौरान भी इसी तरह से हिंदुओं को निशाना बनाया गया था। वहीं नादिया और मुर्शिदाबाद जिलों की घटनाओं के समय भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। पत्र में अधिकारी ने लिखा कि राज्य सरकार कट्टरपंथियों के आगे सरेंडर कर चुकी है।

हिंसा के पीछे की वजह

उल्लेखनीय है कि बंगाल में यह हिंसा रविवार (9 अक्टूबर 2022) को भड़की। बताया जा रहा है कि वहाँ पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के मौके पर इस्लामियों ने हिंदुओं के घर व दुकानों पर इस्लामी झंडे लगा दिए थे, जिन्हें कथिततौर पर हिंदुओं ने खोल दिया। इसी के बाद 700 से अधिक की भीड़ में कट्टरपंथी इकट्ठा हुए और हिंदुओं के घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। बार-बार पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। बाद में पता चला कि उपद्रवियों ने इकबालपुर थाने में भी हल्ला मचा रखा था। वह वहाँ इस्लामी झंडों के साथ घुस गए थे और पुलिस उन्हें देख एकदम चुप थी।

हिंदू घर से भागने को मजबूर, पुलिस मौन खड़ी

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने मोमिनपुर इलाके में भड़की हिंसा के बाद एक वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने दावा किया कि हालात देखने के बाद मयूरभंज से हिंदू भाग रहे हैं, उनके घरों पर हमला हो रहा है। पुलिस बिलकुल चुप है। कानून व्यवस्था का कोई नामों निशान नहीं है।

ट्वीट के साथ साझा की गई वीडियो में व्यक्ति बता रहा है कि कैसे हिंसा वाले इलाके में आकर भी पुलिस दूर खड़ी तमाशा देख रही है। कोई इतनी हिम्मत नहीं दिखा रहा कि मामला सुलझा सके। प्रशासन को कह दिया गया है कि स्थिति कंट्रोल में है। लेकिन हकीकत में हालत अब भी वैसे हैं घरों में पत्थरबाजी हो रही है, बम फेंके जा रहे हैं।

हिंसा भड़कने के बाद की कई वीडियोज सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इनमें दिख रहा है कि कैसे कट्टरपंथी यहाँ-वहाँ देखे बिना हर चीज को तोड़ रहे हैं। साथ ही हिंदुओं के घरों के आस पास जो बड़ी बिल्डिंग हैं उनपर चढ़कर वह पत्थर व पेट्रोल बम फेंक रहे हैं।

वीडियो में गेट को पीटने की आवाज और शोर साफ सुना जा सकता है। इसके अलावा हिंदुओं के खाली घरों की वीडियो भी इंटरनेट पर आ गई है। इन सबके बावजूद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर आरोप है कि वो हालातों को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे बल्कि दंगाइयों का मजहब देख चुप बैठे हैं।

हिन्दू वकील को नंगा कर सिर कलम कर दिया, दरगाह के खादिम को प्लेट में रख पेश किया: दोनों बेटियों को मुस्लिमों को सौंप दिया, नोआखली में अहिंसा का भाषण देते रह गए गाँधी

देश को सन् 1947 में आज़ादी तो मिली, लेकिन कॉन्ग्रेस की नीतियों के कारण इस आज़ादी के साथ-साथ देश को कई घाव भी मिले। सबसे बड़ी बात तो ये कि भारत ने विभाजन का दंश भी झेला। देश खंडित हो गया और इसकी वजह बनी इस्लामी कट्टरता। चटगाँव तब बंगाल का हिस्सा हुआ करता था, जो उसके बाद पूर्वी पाकिस्तान और फिर बांग्लादेश का हिस्सा बना। वहीं स्थित है नोआखली, जहाँ की हिन्दू जनसंख्या ने अक्टूबर-नवंबर 1946 में बड़े नरसंहार का सामना किया।

ये सब अचानक नहीं हुआ था, बल्कि संगठित रूप से अंजाम दिया गया था। इन दंगों के बीच 27 अक्टूबर को महात्मा गाँधी भी कोलकाता पहुँचे, जहाँ उन्हें एक सप्ताह तक हिरासत में रखा गया। 6 नवंबर को वो नोआखली के लिए रवाना हुआ। आज़ादी के समय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे जेबी कृपलानी ने गाँधी जी के इस दौरे का जिक्र ‘गाँधी जीवन और दर्शन’ नामक पुस्तक में किया है। वो भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री (यूपी की) सुचेता कृपलानी के पति थे।

जबी कृपलानी ने अपनी पुस्तक ‘गाँधी जीवन और दर्शन’ में लिखा है कि कैसे गाँधी जी के रास्ते में विष्ठा डाल दी जाती थी और उन्हें परेशान किया जाता था। स्थानीय मुस्लिम नेता आकर अफ़सोस जता कर चले जाते थे, लेकिन लौट कर वही लोग गड़बड़ियाँ करवाते थे। मुस्लिमों पर गाँधी जी की प्रार्थना सभा का असर नहीं होता था, क्योंकि वो मौलवियों के प्रभाव में थे। किसी भी कॉन्ग्रेस नेता ने वहाँ का दौरा नहीं किया। गाँधी जी भी ‘पीड़ित मुस्लिमों’ का दुःख जानने बिहार चले गए। न हिंदुओं में वो आत्मविश्वास भर पाए, न मुस्लिमों को समझा पाए।

लेकिन, पलायन का भारी दंश वहाँ हिन्दुओं ने ही झेला था। 1946 में 250 सदस्यीय बंगाल विधानसभा में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ‘हिन्दू महासभा’ के एकमात्र सदस्य थे। उन्होंने हिन्दुओं की पीड़ा के लिए आवाज़ उठाने में जान लगा दी। नोआखली में उस वक्त 82% मुस्लिम थे और हिन्दुओं की जनसंख्या मात्र 18% थी। हिन्दुओं की हत्याओं के अलावा जम कर लूटपाट और आगजनी की गई, जैसे मुस्लिम भीड़ की हिंसा में आमतौर पर किया जाता है।

हिन्दुओं को जबरन मुस्लिम बनाया जा रहा था। हिन्दुओं की घरों एवं संपत्तियों को योजनाबद्ध तरीके से तबाह किया गया। वो पलायन करने और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। अपनी पुस्तक ‘भारत और पाकिस्तान का उदय’ में यास्मीन खान ने लिखा है कि कलमा पढ़ने के साथ धर्मांतरण शुरू किया जाता था और फिर जबरन गोमांस खिलाया जाता था। फिर महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता था। मुस्लिमों में ये बात बैठ गई थी कि सभी गैर-मुस्लिमों का धर्मांतरण करा देना है।

‘राष्‍ट्रवादी साहित्यकार संघ’ के अध्यक्ष आचार्य मायाराम पतंग ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर लिखी एक पुस्तक में गाँधी जी के नोआखली दौरे को लेकर एक वाकये के जिक्र किया है। एक बार महात्मा गाँधी किसी मुस्लिम के आँगन में बैठ कर अहिंसा का प्रवचन दे रहे थे और उनके बगल में एक ऐसा व्यक्ति बैठा था, जिसने कई हिन्दुओं की हत्याएँ की थीं। जब सुचेता कृपलानी ने एक कागज़ पर लिख कर उन्हें ये बात बताई, तो वो मुस्कुरा दिए और उस मुस्लिम व्यक्ति से कुछ नहीं कहा।

एक सप्ताह से भी अधिक समय तक चले नोआखली के दंगों में 5000 हिन्दुओं के मारे जाने की बात कही जाती है, लेकिन आँकड़ा इससे कहीं बहुत ज्यादा है। सैकड़ों हिन्दू महिलाओं का बलात्कार किया गया। हिन्दुओं से ‘जजिया’ नामक कर वसूला जाने लगा था, जो ‘काफिरों’ के लिए इस्लामी आक्रांताओं के काल में अनिवार्य हुआ करता था। बंगाल में उस समय मुस्लिमों की सरकार थी और उसे पढ़े-लिखे और समृद्ध हिन्दुओं का आगे बढ़ना रास नहीं आ रहा था।

फेनी नदी में अपने जीवन-यापन के लिए मछली पकड़ रहे मछुआरों पर मुस्लिम भीड़ ने ईद-अल-फितर के दिन ही हमला बोल दिया। इसी तरह चरुईयाह में मछुआरों के एक समूह पर हमला किया गया। बाबूपुर नामक गाँव में एक कॉन्ग्रेस नेता के ही बेटे की हत्या कर दी गई। कॉन्ग्रेस दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया और परिवार के अन्य लोगों और नौकरों पर हमले किए गए। मुस्लिम भीड़ ने हथियार लेकर लूटपाट शुरू कर दिया।

इससे पहले कोलकाता में ‘डायरेक्ट एक्शन डे‘ के ऐलान के बाद मुस्लिम भीड़ ने कहर बरपाया था। बंगाल के एक नेता गुलाम सरवर हुसैनी का इन दंगों में बड़ा हाथ था, जिसने जमींदारों पर हमले के बहाने मुस्लिम किसानों को भड़काया और उन्हें अपने साथ लेकर एक ‘मियार फ़ौज’ नामक एक इस्लामी फ़ौज बनाई। वो श्यामपुर (अब लक्ष्मीपुर स्थित रामगंज) के दरया शरीफ दरगाह का खादिम था और सूफी परिवार से था। नोआखली के ‘बार एसोसिएशन’ और जिले में ‘हिन्दू महासभा’ के अध्यक्ष राजेंद्र रॉय चौधरी का कटा हुआ सिर सरवर को एक प्लेट में रख कर पेश किया गया था।

उनकी दो बेटियों को इस्लामी फ़ौज के दो सरदारों को सौंप दिया गया। उस समय ‘भारत सेवाश्रम संघ’ के स्वामी त्रयम्बकानंद उनके घर ही ठहरे हुए थे, लेकिन एक दिन पहले किसी तरह उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। कहा जाता है तो चौधरी रॉय को नंगा कर के उनका सिर काटा गया था। उनके घर को आग के हवाले कर दिया गया था। उनके घर की महिलाओं को आपत्तिजनक रूप से खुले में घुमाया गया, ताकि लोग तमाशा देखें।

चौधरी के घर महात्मा गाँधी भी पहुँचे थे। वहाँ कई शव ऐसे थे, जिन्हें जल जाने के कारण पहचानना तक मुश्किल था और उनका अंतिम संस्कार भी नहीं हो पाया था। वहाँ महिलाओं की लाशें भी थीं। सुजाता चौधरी ने अपने एक उपन्यास में इस घटना को जगह दी है। इन दंगों के बाद भी हिन्दुओं को सताया जाना कम नहीं हुआ। महिलाओं को मंगलसूत्र-सिंदूर हटाने को मजबूर किया गया और उन्हें कलमा पढ़वाने के लिए मौलवियों को उनके घर भेजा जाने लगा।

साथ ही पुरुषों को इस्लामी धर्मांतरण के बाद मुस्लिमों की तरह दाढ़ी रखने और स्कल कैप पहनने को मजबूर किया गया। हालाँकि, इस्लामी पत्र-पत्रिकाओं ने जबरन धर्मांतरण की घटनाओं को नकार दिया। त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में पीड़ित हिन्दुओं को शरण लेनी पड़ी। हिन्दुओं को राहत शिविर की तरफ ले जा रहे पुलिस वालों पर भी मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। अंत में हार कर महात्मा गाँधी को कहना पड़ा कि हिन्दू या तो नोआखली छोड़ दें, या फिर अपनी दुर्दशा को तैयार रहें।

‘वो नीच किस्म का आदमी पूरे देश को C बना रहा है’: AAP के प्रदेश अध्यक्ष ने PM मोदी को कहे अपशब्द, माने जाते हैं अरविंद केजरीवाल के ‘राइट हैंड’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गुजरात में AAP के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले गोपाल इटालिया को एक वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच’ कहते हुए सुना गया। उन्होंने कहा, “आप नीच किस्म के आदमी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मैं इसकी पुष्टि नहीं कर सकता, लेकिन क्या कभी पहले किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह की नौटंकी की है?”

उन्होंने गुजरात में आगामी विधानसभा चुनावों की बात करते हुए कहा कि ‘ये नीच किस्म का आदमी’ यहाँ पर रोडशो कर रहा है और लोगों को ‘C’ बना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘C’ का अर्थ लोग समझ ही रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी पर पूरे भारत को ‘C’ बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो डिजिटल इंडिया की बातें करते हैं, लेकिन खुद दौड़े-दौड़े दिल्ली से गुजरात वोट देने आते हैं। उन्होंने पीएम मोदी के लिए 50 सेकेंड के अंदर कई बार ‘नीच’ शब्द का प्रयोग किया।

गोपाल इटालिया पहले से ही विवादों में रहे हैं और द्वारका में उन पर भगवान श्रीकृष्ण पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में FIR भी दर्ज की जा चुकी है। उमराला तालुका पुलिस थाने में अहीर समाज के अमितभाई डांगर ने मामला दर्ज कराते हुए कहा था कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के लिए ‘राक्षस’ शब्द का प्रयोग किया। इससे पहले गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी को ‘ड्रग्स संघवी’ बताने और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल को ‘शराब तस्कर’ बताने को लेकर उन पर केस दर्ज हो चुके हैं।

भाजपा की आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने गोपाल इटालिया के ताज़ा वीडियो पर निशाना साधते हुए कहा कि वो भी अब अरविंद केजरीवाल के स्तर पर ही गिर गए हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात की मिट्टी के लाल, जिन पर राज्य को गर्व है, उनके लिए इस तरह के शब्द का इस्तेमाल करना हर एक गुजराती का अपमान है, जिसने पिछले 27 वर्षों से अपना बहुमूल्य वोट पीएम मोदी को दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी फ़िलहाल गुजरात के दौरे पर हैं।

CM गहलोत के गृह जिले में ‘सर तन से जुदा’ के नारे, पुलिस के सामने बेखौफ इस्लामी भीड़ ने की हरकत: कन्हैया लाल की हत्या का समर्थन का भी, वीडियो आया सामने

राजस्थान के जोधपुर में इस्लामी भीड़ ने खुलेआम ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए हैं। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। साथ ही हरे रंग के इस्लामी झंडे ली हुई भीड़ को ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए भी देखा गया। ये वीडियो वहाँ आयोजित एक मजहबी जुलूस का है। पुलिस का कहना है कि वो वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई में जुट गई है। हालाँकि, मात्र एक को ही अभी तक गिरफ्तार करने की बात सामने आई है।

ये मामला रविवार (9 अक्टूबर, 2022) का है। घटना जोधपुर के पीपाड़ शहर में हुई। डीएसपी भूपेंद्र सिंह शेखावत ने जानकारी दी कि बारावफात (मिला-उल-नबी) के दौरान शहर में जुलूस निकाला जा रहा था, उसी दौरान ये घटना हुई। इस दिन दुनिया भर में मुस्लिम पैगंबर मुहम्मद की जयंती मनाते हैं। खास बात तो ये है कि ये नारेबाजी राजस्थान पुलिस के सामने हुई है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए ऐसा किया गया। जोधपुर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला भी है।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई है। पुलिस ने मुख्य आरोपित रोशन अली सिंधी (47) को गिरफ्तार किया है। राजस्थान पुलिस का कहना है कि वो बाकी आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि लगातार छापेमारी चल रही है और पुलिस की इस मामले पर पैनी नजर बनी हुई है। ‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ के सत्यनारायण ने मामला दर्ज करवाते हुए आरोप लगाया कि कन्हैया लाल की हत्या के समर्थन में ये नारेबाजी की गई।

याद दिला दें कि पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के आरोप के बाद भाजपा ने अपनी प्रवक्ता नूपुर शर्मा को निलंबित कर दिया था। उनके समर्थन में पोस्ट करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने कन्हैया लाल तेली नामक दर्जी की राजस्थान के उदयपुर में सिर कलम कर हत्या कर दी थी, साथ ही वीडियो भी बनाया था। ताज़ा मामले में आरोपित राशन अली सिंधी पहले भी दंगा आरोपित रहा है। वो शहर में एक कपड़ों की दुकान चलाता है। पूर्व पालिका अध्यक्ष महेंद्र सिंह कच्छावाह ने कहा कि पीपाड़ पहले भी दंगा पीड़ित रहा है, अब फिर माहौल बिगाड़ने की साजिश चल रही है।

‘जिस अमजद के लिए सबको छोड़ बन गई मुस्लिम, अब वही कर रहा मारपीट’: अभिनेत्री दिव्या ने दर्ज कराई शिकायत – शौहर की दूसरी लड़की से संबंध

चैनल ‘विजय टीवी’ के शो ‘चेलम्मा’ के कारण लोकप्रियता बटोरने वाली अभिनेत्री दिव्या श्रीधर ने अपने शौहर अर्णव अमजद खान के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उनके पति ने उनके साथ मारपीट की। साथ ही उन्होंने अपने पति पर किसी और महिला के साथ विवाहेतर संबंध होने का भी दावा किया। दिव्या का आरोप है कि अर्णव अमजद खान अपनी एक को-स्टार के साथ ही रिलेशनशिप में हैं।

अभिनेत्री दिव्या श्रीधर का कहना है कि उनके पति ने न सिर्फ उनके साथ मारपीट की और उन्हें प्रताड़ित किया, बल्कि उनके साथ हिंसा भी की। दिव्या श्रीधर का कहना है कि उन्होंने अर्णव अमजद खान से निकाह के लिए सब को छोड़ कर इस्लाम में धर्मांतरित होने का निर्णय लिया था, लेकिन अब वही ये सब कर रहा है। उन्होंने बताया कि एक दिन वो घर नहीं आए, खोजने पर वो अपनी को-स्टार के साथ मिले। दिव्या के अनुसार, उस अपार्टमेंट के गार्ड ने बताया कि वो दोनों शादीशुदा हैं।

दिव्या ने ये भी बताया कि अर्णव ने उन्हें सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ब्लॉक कर के रखा हुआ है। उन्होंने बताया कि अर्णव का असली नाम मुहम्मद है और उस लड़की के साथ उसकी बातचीत के रिकॉर्डिंग्स उनके पास सबूत के रूप में उपलब्ध हैं। उधर अर्णव ने दिव्या के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि अभिनेत्री ने अपने 3 महीने के गर्भ को गिरा दिया। उन्होंने आवादी पुलिस थाने में दर्ज काउंटर-शिकायत में कहा है कि उन्होंने अपनी पत्नी को नहीं मारा-पीटा।

उन्होंने सबूत के रूप में सीसीटीवी फुटेज पेश करते हुए दावा किया कि उस समय वो घर में ही नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बलि का बकरा बनाने के लिए दिव्या ये सब कर रही है, ताकि एबॉर्शन के मामले में उन्हें फँसाया जा सके। दिव्या श्रीधर ने गुरुवार (6 अक्टूबर, 2022) को चेन्नई के पुलिस कमिश्नर के समक्ष दर्ज शिकायत में दिव्या ने बताया कि अर्णव की गर्लफ्रेंड ने फिल्म शूटिंग के लोकेशन पर उन्हें गालियाँ बकीं और पानी के बोतल से मारा। साथ ही अपनी पहचान छिपा कर शादी का भी आरोप उन्होंने अमजद पर लगाया।