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जिस धर्म में कन्या पूजन होता है, वहाँ करवा चौथ पर उँगली मत उठाओ: यहाँ हलाला और ननों का शोषण नहीं होता, किसी तस्लीमा नसरीन को देश नहीं छोड़ना पड़ता

प्रत्येक वर्ष आश्विन महीने की पूर्णिमा के बाद चतुर्थी तिथि को ‘करवा चौथ’ का त्योहार मनाने की परंपरा भारत में रही है, खासकर पश्चिमी और उत्तर भारतीय महिलाओं में। कार्तिक के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला ये त्योहार फिल्मों और टीवी सीरियलों के माध्यम से देश-विदेश की महिलाओं में और लोकप्रिय हुआ। इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र की सलामती के लिए उपवास रखती हैं और रात को चन्द्रमा के दर्शन के उपरांत पति के हाथों जल ग्रहण कर इसका समापन करती हैं।

भारतीय इतिहास में सामान्यतः ये परंपरा रही है कि पूर्व काल में पुरुष जीविकोपार्जन से लेकर युद्ध तक जैसे कार्यों के लिए दूर जाया करते थे और महीनों बाद लौटते थे। उनमें से कइयों के लौटने पर भी संशय रहता था। वो महिलाओं-बच्चों को सुरक्षित घर पर छोड़ जाते थे। ऐसे में ये महिलाएँ उनकी लंबी उम्र और सलामती के लिए इस तरह के उपवास करती थीं। ये परंपरा आज तक चली आ रही है। अब जैसा कि हिन्दू धर्म के हर त्योहार के साथ होता है, इसे भी बदनाम करने की साजिश चल निकली है।

ऐसा करने वालों में ताज़ा नाम जुड़ा है लेखिका तस्लीमा नसरीन का, जिन्हें इस्लाम के रूढ़िवाद पर पुस्तक लिखने के लिए बांग्लादेश ने निकाल बाहर किया और वो हिन्दुओं के देश भारत में शरण लेकर रहती हैं। लेकिन, इस्लामी कट्टरपंथियों का रोज निशाना बनने वाली तस्लीमा नसरीन खुद को न्यूट्रल दिखाने के लिए हिन्दू त्योहार पर निशाना साध रही हैं, बिना कुछ जाने-समझे। ये अलग बात है कि इसके बावजूद हिन्दू उन्हें देश से बाहर नहीं निकाल रहे और न ही उन्हें हत्या की धमकियाँ दे रहे।

लेकिन हाँ, सही भाषा में तथ्यों के साथ जवाब देने का अधिकार हमें हमारा संविधान और धर्म, दोनों देता है। दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने करवा चौथ का त्योहार मनाते हुए तस्वीर साझा की थी। उसे ट्वीट करते हुए तस्लीमा नसरीन ने ट्विटर पर लिखा, “ये लोकप्रिय और अमीर महिलाएँ भारतीय उपमहाद्वीप के सभी वर्ग और जाति के लाखों महिलाओं एवं लड़कियों पर अपना प्रभाव डालती हैं, उस करवा चौथ त्योहार को मना कर, जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय पितृसत्तात्मक रीति-रीवाज है। “

तस्लीमा नसरीन ने करवा चौथ त्योहार को पितृसत्ता का शीर्ष करार दिया। सबसे पहली बात तो ये कि पितृसत्ता में कोई बुराई नहीं है। पिता की सत्ता होनी चाहिए। पुरुष का शासन होना चाहिए, ठीक उसी तरह मातृसत्ता भी होनी चाहिए। माताओं का शासन भी होना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के पूरक होते हैं, विरोधी नहीं। तभी हमारे यहाँ अर्धनारीश्वर का कॉन्सेप्ट है, जहाँ शिव-पार्वती मिल कर आधे-आधे स्त्री-पुरुष का रूप धारण करते हैं।

हिन्दू धर्म की बात से पहले कुछ सवाल। पितृसत्ता को चुनौती देने का अर्थ क्या है? किसी गर्भवती अभिनेत्री का नंगी होकर तस्वीर क्लिक कराना? या फिर किसी मॉडल का छोटे कपड़ों में मैगजीन के कवर पर आना? किसी महिला द्वारा खुलेआम सड़क पर पुरुषों को चाँटे मारना, या फिर झूठे दहेज़-बलात्कार के मामलों में फँसाना? जिस तरह रणवीर सिंह के न्यूड फोफोज का पितृसत्ता से कुछ लेना-देना नहीं है, उसी तरह महिलाओं का कम कपड़े पहनने का मातृसत्ता से कोई लेना-देना नहीं है। हाँ, ये व्यक्तिगत चॉइस का मामला हो सकता है, लेकिन इसका विरोध करना भी किसी का व्यक्तिगत चॉइस ही है।

फिर मातृसत्ता का उदाहरण क्या है? इसका उदाहरण है कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के परम साहित्य वेदों की कई ऋचाएँ महिलाओं ने लिखीं। किस अन्य मजहब में ऐसा मिलता है? इसका उदाहरण है कि सती सावित्री ने यमराज के द्वार से अपने पति को वापस छीन लिया। इसका उदाहरण है कि सीता और द्रौपदी जैसी महिलाओं के अपमान करने वाले का पूरा वंश नाश हो गया। इसका उदाहरण है कि महारानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं ने मातृभूमि की रक्षा के लिए तलवार उठाया।

अब तस्लीमा नसरीन जवाब दें। नवरात्री के अवसर पर हिन्दू धर्म में कन्या पूजन का विधान है। इसके तहत कुँवारी लड़कियों को घर में आमंत्रित कर भोजन कराया जाता है और उनके पाँव धोए जाते हैं? जैसे कन्याओं के पाँव धोने में कुक भी बुरा नहीं है, वैसे ही पति की लंबी उम्र की कामना के लिए प्यार से उपवास भी बुरा नहीं। कन्याओं के पाँव धोकर उन्हें ये एहसास दिलाया जाता है कि वो मातृशक्ति हैं, उनका दर्जा सबसे ऊपर है और उनके लिए लोगों के मन में सर्वोच्च सम्मान की भावना होनी चाहिए।

इसी तरह हिन्दू धर्म में ‘सुमंगली पूजा’ भी होती है। दक्षिण भारत के ब्राह्मण परिवारों में ये लोकप्रिय है। घर की विवाहित महिलाओं को ‘सुमंगली’ कहा जाता है, अर्थात घर का मंगल करने वाली। इसके तहत 3, 5, 7 या 9 महिलाओं को बुला कर उन्हें सम्मानित किया जाता है, उनकी पूजा की जाती है। इसके तहत घर की दिवंगत महिलाओं की प्रार्थना की जाती है, ताकि उनका आशीर्वाद मिले। इसमें किन्हें भाग लेना है और किन्हें नहीं, इन्हें लेकर नियम-कानून पर भी उँगली उठाने वाले निशाना साध सकते हैं। लेकिन, हिन्दू धर्म में कई पर्व-त्योहारों में पुरुषों के लिए भी तमाम नियम-कानून हैं।

आध्यात्मिक मामलों पर लिखने वाले युवा लेखक अंशुल पांडेय ने भी तस्लीमा नसरीन को अच्छा जवाब दिया है। उन्होंने याद दिलाया है कि भारत में देवी की पूजा सिर्फ नवरात्रि या दीवाली पर ही नहीं होती है, प्रतिदिन की जाती है। माँ सरस्वती को विद्या की देवी कहा गया है और सारे छात्र-छात्राएँ उनकी पूजा करते हैं, क्या ये पितृसत्ता है? घर में लड़की का जन्म होने पर छठे दिन देवी की पूजा की जाती है। ऐसे अनेकों विधि-विधान हैं।

इस्लाम में महिलाओं की क्या इज्जत है, हम जानते हैं। हलाला के नाम पर उन्हें ससुर और देवर के साथ रात गुजारने को मजबूर किया जाता है। ईसाई मजहब में चर्चों में ही पादरियों द्वारा ननों के यौन शोषण की बातें सामने आती रहती हैं। जबकि सनातन में मातृ शक्ति को ही प्रकृति कहा गया है, समस्त शक्तियों का स्रोत बताया गया है। माएँ अपने संतान के लिए छठ करें या पति के लिए करवा चौथ, उनके प्यार के बीच आने वाले हम या तस्लीमा नसरीन कौन होती हैं?

अगर आप दुर्गा सप्तशती पढ़ेंगे तो पाएँगे कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति ही आदिशक्ति से हुई है। जिस धर्म में कन्या पूजन होता है, वहाँ करवा चौथ पर उँगली नहीं उठाई जा सकती। यहाँ लड़कियाँ पूजित भी होती हैं, पूजा भी करती हैं। यहाँ Feminism और Patriarchy के लिए जगह नहीं है, अर्धनारीश्वर के लिए है। महिलाओं की सुरक्षा पुरुषों का कर्तव्य बताया गया है। इसीलिए तरह, महिलाएँ भी पुरुषों की सुरक्षा की कामना करती हैं। तभी रक्षा बंधन जैसे त्योहार अस्तित्व में हैं।

जम्मू कश्मीर में एक और कश्मीरी पंडित की हत्या: बगीचे में बैठे थे, घर में घुस कर आतंकियों ने कर दी गोलियों की बरसात

जम्मू कश्मीर के शोपियाँ जिले में आतंकियों ने शनिवार (15 अक्टूबर, 2022) को एक कश्मीरी पंडित की गोली मार कर हत्या कर दी। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीरी पंडित पूरन कृष्ण पर दक्षिणी कश्मीर के चौधरी गुंड क्षेत्र में हमला हुआ। गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें अस्पताल में लाए जाने तक वो जीवित नहीं रहे।

उक्त क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और आतंकियों की तलाश में सुरक्षा बल अभियान चला रहे हैं। मृतक पूरन कृष्ण भट्ट के पिता का नाम तारक नाथ है। हमलावरों का विवरण उठाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खँगाले जा रहे हैं। इसे ‘टार्गेटेड किलिंग’ भी बताया जा रहा है। कश्मीरी पंडित पर आतंकियों ने तब हमला किया, जब वो अपने मकान में स्थित बगीचे में बैठे हुए थे। अचानक से घुसे आतंकियों ने उन पर गोलियों की बरसात कर दी।

फिर आतंकी वहाँ से फरार हो गए। गोलीबारी की आवाज़ सुन कर जब परिवार के बाकी लोग बाहर निकले तो उन्होंने पाया कि पूरन कृष्ण भट्ट खून से लथपथ बगीचे में गिरे हुए हैं, जिसके बाद उन्हें स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। दक्षिण कश्मीर में इस साल ये इस तरह की तीसरी घटना बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही दोषियों की तलाश कर ली जाएगी और अभियान जारी है।

याद हो कि जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ मेंही आतंकियों ने अगस्त 2022 के मध्य में सेब के एक बागान से आम नागरिकों पर गोलियाँ चलाई थीं। इस गोलीबारी में एक कश्मीरी हिन्दू सुनील कुमार भट्ट की मौत हो गई थी। वहीं उनके भाई पिंटू कुमार भट्ट का अस्पताल में इलाज चला था। आतंकी संगठन KFF (कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। आतंकी संगठन का कहना था कि कश्मीरी पंडित भाई तिरंगा रैली में शामिल हुए, इसीलिए निशाना बनाया।

DU के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा अभी जेल में ही रहेंगे: नक्सली कनेक्शन का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला किया निलंबित

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को अभी जेल में ही रहना होगा। माओवादियों से संबंध के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के फैसले को निलंबित कर दिया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कल यानी 14 अक्टूबर 2022 को पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को आरोप मुक्त कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को 15 अक्टूबर 2022 को निलंबित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा ने हाउस अरेस्‍ट की माँग की थी, इसे भी ठुकरा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तर्क दिया कि हाउस अरेस्‍ट की माँग अपराध की गंभीरता को देखते हुए स्‍वीकार नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट का यह मानना है कि पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है। 8 साल पहले माओवादियों की मदद से देश के खिलाफ माहौल बनाने के आरोप में वह गिरफ्तार किए गए थे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा और माओवादियों से संबंध के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी याचिका को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत का फैसला आया है। इस केस की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2022 को होगी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा और माओवादियों से संबंध के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

नूपुर शर्मा का ‘सिर कलम’ करने का video डालने वाले नदीम अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत, अजमेर दरगाह के खादिम की याचिका खारिज

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) का सिर काटे जाने का वीडियो फेसबुक पर अपलोड करने वाले नदीम अंसारी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है। परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जस्टिस दीपक वर्मा की बेंच ने जमानत दी।

अंसारी को 13 जून 2022 को गिरफ्तार किया गया था। उस पर IPC की धारा 153A, 295A, 505(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 की धारा 67 के तहत आरोप लगाया गया था। अंसारी ने फेसबुक और अपने मोबाइल पर नूपुर शर्मा का सिर कलम करते हुए दिखाने वाला वीडियो पोस्ट करके नस्लीय अशांति फैलाने की कोशिश की थी।

गिरफ्तारी के बाद नदीम अंसारी ने अदालत के सामने तुरंत जमानत याचिका दायर की। अपनी याचिका में उसने दावा किया कि वह निर्दोष है और इस मामले में गलत आरोप लगाया गया है। बाद में हाईकोर्ट ने अंसारी को जमानत दे दी।

इससे पहले 13 अक्टूबर 2022 को राजस्थान उच्च न्यायालय ने अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती को जमानत देने से इनकार कर दिया। चिश्ती ने नूपुर शर्मा का सिर कलम करने की माँग की थी। पुलिस ने 14 जुलाई 2022 को हैदराबाद से चिश्ती को गिरफ्तार किया था।

चिश्ती की जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि हैदराबाद से चिश्ती की सक्रिय गिरफ्तारी और उसके पास से कई मोबाइल फोन की बरामदगी इस बात के सबूत हैं कि अपराध में उसकी सक्रिय भागीदारी थी।

अजमेर दरगाह के बाहर 17 जून 2022 को गौहर चिश्ती ने नूपुर शर्मा का सिर काटने के समर्थन में नारेबाजी की थी। उसका यह वीडियो वायरल हो गया था। कहा जाता है कि उसके उकसाने से प्रेरित होकर ही उदयपुर के हिंदू दर्जी कन्हैया लाल और महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की गला काटकर हत्या कर दी गई थी।

निर्मला सीतारमण को अमेरिका में बैन कराने के लिए विज्ञापन: कॉन्ग्रेसी सरकार की डील और भारत को ₹9900 करोड़ के नुकसान में भगोड़ा कनेक्शन

भारतीय मूल का अमेरिकी नागरिक रामचंद्रन विश्वनाथन भारत सरकार से इतना नाराज़ है कि उसने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अमेरिका में बैन कराने की माँग करते हुए एक पूरे पन्ने का विज्ञापन वहाँ की अख़बार में छपवा दिया। साथ ही उसने 10 अन्य को भी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन प्रशासन से बैन करवाने की सिफारिश की है। ED (प्रवर्तन निदेशालय) रामचंद्रन विश्वनाथन को पहले ही आर्थिक अपराधी और भगोड़ा घोषित कर चुका है।

उसने इस विज्ञापन में जिन लोगों को बैन कराने की माँग की है, उनमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन, सुप्रीम कोर्ट के जज हेमंत गुप्ता व वी रामसुब्रमन्यन के अलावा ED के डायरेक्टर, अस्सिस्टेंट डायरेक्टर और डिप्टी डायरेक्टर भी शामिल हैं। अब इस आर्थिक अपराधी ने2016 के ‘Global Magnitsky Human Rights Accountability’ कानून को आधार बनाते हुए ये माँग की है।

इस कानून के तहत अमेरिका की सरकार को अधिकार है कि वो किसी विदेशी अधिकारी या नेता की संपत्ति को जब्त कर सके, उस पर प्रतिबंध लगा सके और यहाँ तक कि देश में उसके घुसने पर भी रोक लगा सके। मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ऐसा किया जा सकता है। इसी साल अगस्त में ‘Frontiers of Freedom’ नामक संस्था ने रामचंद्रन विश्वनाथन की तरफ से याचिका दायर कर के ऐसी माँग की थी और एक अख़बार में फुल पेज एड भी चलाया।

निर्मला सीतारमण व इन 10 लोगों को संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘Magnitsky 11’ करार दिया था। इसमें दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को हथियार बना कर कानून के राज को बर्बाद किया है और राजनीतिक व औद्योगिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल कर के भारत को निवेशकों के लिए असुरक्षित बनाया है। इसमें डराया गया है कि भारत निवेशकों के लिए खतरनाक हो चुका है और अगर आप अगले निवेशक हैं तो अगला नंबर आपका भी हो सकता है।

अमेरिका के अख़बार में छपवाया गया विज्ञापन

इन सबके बीच में UPA काल के एक करार की चर्चा करनी ज़रूरी है। वो 2004 का समय था, जब रामचंद्रन विश्वनाथन ने सैटेलाइट मल्टीमीडिया सेवाएँ देने के लिए बेंगलुरु में ‘Devas Multimedia Private Limited’ नामक एक कंपनी की स्थापना की। इसके बाप इस कंपनी ने ISRO के कमर्शियल और मार्केटिंग विभाग ‘Antrix Corporation’ के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए। Antrix को इसके तहत 2 सैटेलाइट बनाने थे।

जहाँ Antrix को GSAT 6 and 6A सैटेलाइट्स बनाने थे, वहीं Devas को इन कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स के S-band ट्रांसपोंडर बनवाने थे। इससे भारतीय मोबाइल सब्सक्राइबर्स को मल्टीमीडिया सेवाएँ मिलतीं। इस डील को जर्मनी की ‘Deutsche Telekom’ के अलावा मारीशस की 3 अन्य कंपनियों ने भी समर्थन दिया था। Antrix-Devas की इस डील में भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ सामने आई थीं। Devas पर इनसाइडर सूचनाओं को बेचने के आरोप लगे और 2G घोटाले ने आग में घी का काम किया।

2011 में डॉ मनमोहन सिंह की सरकार ने इस करार को रद्द कर दिया। जुलाई 2010 में ही ये निर्णय लिया जा चुका था, लेकिन अगले साल फरवरी में इसकी घोषणा हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मारीशस और जर्मनी की कंपनियों ने भारत के खिलाफ शिकायत की। ये ‘Bilateral Investment Treaty (BIT)’ के तहत किया गया, जिसके अंतर्गत निवेशकों के हितों को सुरक्षित रखा जाता है। संस्था ने भारत के खिलाफ फैसला दिया।

2020 में भारत को जर्मन निवेशकों को 16 करोड़ डॉलर (1318.69 करोड़ रुपए) और मारीशस के निवेशकों को 13.2 करोड़ डॉलर (1087.92 करोड़ रुपए) देने के आदेश दिए गए। इसके अलावा ‘International Chamber of Commerce (ICC)’ ने Antrix को कहा कि वो Devas के 562.5 मिलियन डॉलर (4636.03 करोड़ रुपए) के नुकसान की भरपाई करे। यानी, भारत को कुल 1.2 बिलियन डॉलर (9890.20 करोड़ रुपए) का घाटा लगा।

इसके बाद भले ही भारत में यूपीए सरकार का दौर ख़त्म हो गया हो, लेकिन रामचंद्रन विश्वनाथन द्वारा सह-स्थापित ‘Devas Multimedia Private Limited’ ने बदला लेने के इरादे से भारत विरोधी रवैया जारी रखा। कनाडा, फ़्रांस और अमेरिका में Antrix और भारत सरकार की संपत्तियों को जब्त कराने के लिए प्रयास किए जाने लगे। कई देशों में संपत्ति जब्त भी की गई। रामचंद्रन की कंपनी को कंगाल घोषित करते हुए भंग कर दिया गया, जिससे वो और बहदाक उठा।

चिकन बेचता था मोइन, 19 साल की हिंदू लड़की को निकाह के लिए बनाया मुस्लिम: कर्नाटक धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहली गिरफ्तारी

कर्नाटक में धर्मांतरण विरोेधी कानून (Karnataka Protection of Right to Freedom of Religion Act) के तहत पहली गिरफ्तारी की गई है। निकाह करने की नीयत से एक हिंदू महिला का धर्मांतरण कर मुस्लिम (Religious Conversion of Hindu Woman) बनाने के आरोप में 24 साल के चिकन विक्रेता सैयद मोइन को कोगिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, 5 अक्टूबर 2022 को एक 19 साल की हिंदू लड़की अपने घर से लापता हो गई थी। इसके बाद लड़की की माँ ने यशवंतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। लड़की की माँ की शिकायत के बाद 6 अक्टूबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी।

इसी बीच लड़की की माँ ने अपनी बेटी को मोइन के घर में बुर्के में देख लिया। इसके बाद उसने पुलिस में फिर शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने आरोपित सैयद मोइन और लड़की को 8 अक्टूबर को थाने में बुलाकर पूछताछ की।

इस दौरान लड़की ने पुलिस को बताया कि मोइन ने उससे कहा कि वह उससे तभी निकाह करेगा, जब धर्मांतरण कर मुस्लिम बन जाएगी। इसके बाद मोइन उसे 6 अक्टूबर को धर्मांतरण करा दिया। हालाँकि, अभी दोनों ने निकाह नहीं किया है।

लड़की की माँ की शिकायत के आधार पर ‘कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संरक्षण अधिनियम’ की धारा 5 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद आरोपित सैयद मोइन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में बेंगलुरु के सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। वहीं, लड़की को उसके माता-पिता के घर भेज दिया गया है।

लड़की को बहला-फुसलाकर मोइन आंध्र प्रदेश के पेनुगोंडा (Penugonda, Andhra Pradesh) लेकर गया और वहाँ के एक मस्जिद में उसका धर्म परिवर्तन कराने के बाद मुस्लिम बना दिया। यशवंतपुर के बीके नगर का रहने वाला मोइन चिकन शॉप पर काम करता था।

पीड़िता का परिवार साल 2007 में उत्तर प्रदेश से बेंगलुरु आया था। उसके पिता पेेंटर का काम करते हैं और माँ ज्ञानती देवी एक निजी कंपनी में हाउस कीपिंग का काम करती है। लड़की के दो और बहने हैं। लड़की ने प्री-यूनिर्सिटी के बाद पढ़ाई छोड़ दी है।

मोइन पीड़ित परिवार के मकान के बाद वाली गली में रहता था। लड़की की माँ को मोइन के साथ रिलेशनशिप की जानकारी छह महीना पहले मिली थी और इसके लिए उसे चेतावनी भी दी थी, लेकिन लड़की पर असर नहीं हुआ। वह मोइन के बहकावे में घर से लापता हो गई।

डीसीपी (नॉर्थ) विनायक पाटिल ने बताया कि लड़की ने अपनी सहमति से इस्लाम धर्म अपनाया है, लेकिन उसने नए कानून के तहत उल्लेखित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। नए कानून के तहत किसी भी महिला को अपनी धार्मिक पहचान बदलने की इच्छा के बारे में जिला मजिस्ट्रेट को 30 दिन पहले फॉर्म-I के माध्यम से बताना होता है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कर्नाटक की भाजपा सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया है, जो 30 सितंबर 2022 से राज्य में लागू हो गया है। इस अधिनियम के तहत कोई भी पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई, बहन या कोई अन्य व्यक्ति, जो उससे खून, शादी या गोद लेने से संबंधित है, प्राथमिकी दर्ज करा सकता है। कर्नाटक के धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा 3 के तहत आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

जेम्स बॉन्ड में जो था ‘गुंडा’, उसी ने ‘हैग्रिड’ बन हैरी पॉटर को कई बार खतरों से बचाया… अब 72 वर्ष की आयु में निधन

हैरी पॉटर सीरीज की फिल्मों में रूबियस हैग्रिड की भूमिका निभाने वाले लोकप्रिय अभिनेता रॉबी कॉल्‍ट्रेन (Robbie Coltrane death) का 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्‍होंने मशहूर रॉबी ब्रिटिश सीरीज ‘क्रैकर’ और जेम्स बॉन्ड की फिल्मों ‘गोल्डनआई’ और ‘द वर्ल्ड इज़ नॉट इनफ’ से भी पहचान बनाई थी।

रॉबी कॉल्‍ट्रेन की एजेंट बेलिंडा राइट ने बताया कि अभिनेता का निधन स्कॉटलैंड में फल्किर्क के पास एक अस्पताल में हुआ। राइट ने कहा कि वह अद्वितीय प्रतिभा के धनी थे और हैग्रिड (Hagrid of Harry Potter Dies) के रूप में उनकी भूमिका का दुनियाभर में समान रूप से बच्‍चों और व्‍यस्‍कों ने आनंद उठाया। उन्‍होंने कहा:

“मैं उन्‍हें एक ईमानदार क्‍लाइंट के साथ-साथ एक बेहतरीन अभिनेता के रूप में भी याद रखूँगी। वह बहुत समझदार और मजाकिया इंसान थे। 40 साल तक उनका एजेंट होने पर मुझे गर्व है। वह अपने पीछे अपनी बहन एनी रे, बेटे स्पेंसर और बेटी एलिस संग बच्चों की माँ रोहना गमेल को छोड़ गए हैं।”

रॉबी कॉल्‍ट्रेन के निधन (Robbie Coltrane death) से दुनियाभर में मौजूद उनके फैंस को झटका लगा है। साथ ही उनके सह-कलाकारों ने भी दुख जताया है। हैरी पॉटर स्टार डेनियल रैडक्लिफ ने एक बयान में कॉल्‍ट्रेन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रॉबी उन सबसे मजेदार लोगों में से एक थे, जिनसे वह मिले थे और सेट पर बच्चों के रूप में वह सबको लगातार हँसाते रहते थे।

हैरी पॉटर की लेखिका जेके राउलिंग ने कोल्ट्रेन को एक “अविश्वसनीय प्रतिभा” बताया।

रॉबी कॉल्‍ट्रेन का जन्म 30 मार्च 1950 को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुआ था। उनका असली नाम एंथोनी रॉबर्ट मैकमिलन था। पढ़ाई पूरी करने के बाद रॉबी ने अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ना चाहा, लेकिन वहाँ उन्‍हें अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाई। इसके बाद उन्‍होंने रॉबी क्लब में स्टैंड-अप कॉमेडी करना शुरू किया।

फिल्मों में आने से पहले उन्होंने फ्लैश गॉर्डन, ब्लैकएडर और कीप इट इन द फैमिली जैसे शोज में भी काम किया। साल 1993 और 2006 के बीच प्रसारित हुई जिमी मैकगवर्न की क्रैकर सीरीज में रॉबी एक असामाजिक आपराधिक मनोवैज्ञानिक के किरदार में नजर आए थे।

रॉबी को सबसे ज्‍यादा लोकप्रियता हैरी पॉटर में रूबियस हैग्रिड के किरदार से मिली। इस किरदार ने उन्‍हें दुनियाभर में लोकप्रिय कर दिया। हैग्रिड ही वो किरदार है, जो हैरी के 11वें जन्मदिन पर उसे पहली बार उसके घर प्रिवेट ड्राइव लेने जाता है। रॉबी ने ही फेमस डायलॉग “तुम एक जादूगर हो हैरी” बोला था। हैरी पॉटर फ्रैंचाइजी की शुरुआत 2001 में हैरी पॉटर एंड द सॉर्सेरर्स स्टोन से हुई थी।

‘हिंदू एक शादी करते हैं, 3 रखैल रखते हैं’: AIMIM यूपी अध्यक्ष के बिगड़े बोल, कहा- मुस्लिम 2 शादी करते हैं और दोनों की इज्जत करते

हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने हिंदुओं की प्रति घृणास्पद बयान दिया है। अली ने कहा कि हिंदू तीन महिलाओं से शादी करते हैं तो वे रखैल बन जाती हैं।

राज्य में एक रैली को संबोधित करते हुए शौकत अली ने कहा, “लोग कहते हैं कि हमने तीन शादियाँ की हैं। दो शादियाँ होने पर भी हम समाज में दोनों पत्नियों को सम्मान देते हैं, लेकिन आप (हिंदू) एक से शादी करते हैं और तीन रखैल रखते हैं।”

औवेसी के करीबियों में शामिल शौकत अली ने आगे कहा, “आप (हिंदू) न तो अपनी पत्नी का सम्मान करते हैं और न ही रखैलों का। अगर हमारी दो शादियाँ होती हैं तो हम उन्हें सम्मान के साथ रखते हैं और हमारे बच्चों के नाम भी राशन कार्ड में होते हैं।”

कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को लेकर भी शौकत अली ने जहर उगला। उन्होंने कहा, “हिंदुत्व यह तय नहीं करेगा कि देश में कौन क्या पहनेगा। यह संविधान तय करेगा।” उन्होंने कहा कि हिजाब के नाम पर भाजपा देश तोड़ने का काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि नेता ने भाजपा के इशारे पर मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। मदरसा, मॉब लिंचिंग, वक्फ और हिजाब जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं, क्योंकि मुस्लिमों को निशाना बनाना आसान है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा कमजोर होती है तो मुस्लिम से जुड़े मुद्दों को उठाती है।

बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी ने गोलकुंदा किला में एक रैली को संबोधित करते हुए शुक्रवार (14 अक्टूबर 2022) को विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनेंगी और जिसे पसंद है वह बिकिनी पहने।

ओवैसी ने कहा था, “वे (भारत के लोग) कहते हैं कि मुस्लिम छोटे बच्चों को हिजाब पहनने के लिए मजबूर कर रहे हैं। क्या हम वाकई अपनी लड़कियों को मजबूर कर रहे हैं? हमारी बेटियों को हिजाब पहनने दो, अगर तुम चाहो तो अपनी बिकनी पहनो।”

केरल में 2 महिलाओं के मर्डर में गोल्ड-कनेक्शन: मोहम्मद शफी ने कई फर्मों में गहने रखे गिरवी, लापता अन्य महिलाओं को तलाश रही पुलिस

केरल के एलंथूर में दो महिलाओं की रेप के बाद के मामले (Elanthoor Women Murder Case, Kerala) का मुख्य आरोपित मोहम्मद शफी उर्फ राशिद के वित्तीय लेनदेन की पुलिस जाँच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि घटना को अंजाम देने से पहले वह केरल के कई इलाकों में गया था और कई लोगों को घटनास्थल पर लेकर आया था। पुलिस को शक है कि घटना में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

मामले की जाँच कर रही SIT ने पता लगाया है कि शफी ने 36 ग्राम सोना गिरवी रखा है। इसकी जानकारी जुटा रही है। पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि कोच्चि के गाँधी नगर स्थित अपने घर के पास के कंपनी में उसने 26 सितंबर को जो आभूषण गिरवी रखे थे मारी गई लॉटरी विक्रेता पद्मम के थे। पद्मम की हत्या शफी ने भगवल और उसकी पत्नी के साथ मिलकर कर थी।

पुलिस का कहना है कि मोहम्मद शफी ने जिस फर्म में सोने को गिरवी रखकर 1.10 लाख रुपए लिया था, वहाँ उसने झूठ बोला था। शफी ने कंपनी के अधिकारियों को बताया था कि तमिलनाडु की एक महिला ने उसकी मदद करने के लिए उसे सोना उधार दिया था।

पुलिस सूत्रों के हवाले से न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि शफी ने कोच्चि के कई फर्मों में गहने गिरवी रखे थे। पुलिस को आशंका है कि ये सभी अन्य मृतक के हो सकते हैं। पुलिस शफी की उस SUV की भी तलाश कर रही है, जिसमें उसने पीड़ितों को कोच्चि से एलंथूर लाया था।

पुलिस राज्य में लापता हुई अन्य महिलाओं की जानकारी जुटा रही है और जाँच कर रही है कि उनके लापता होने में कहीं शफी का हाथ तो नहीं। पुलिस को पता चला है कि हाल के दिनों में वह कोच्चि के अलावा कोटयम, मलयात्तूर और पट्टनमतिट्टा भी गया था।

दोनों महिलाओं की क्रूर तरीके से हत्या से पहले वह राज्य के कई इलाकों में गया था। उसने कई लोगों को घटना में शामिल दंपत्ति भगवल और उसकी पत्नी लैला के घर लाया था। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इन लोगों के बयान की जरूरत है। इसके अलावा, नेचुरल थैरेपिस्ट आरोपित भगवल के घर इलाज कराने आने वाले लोगों का भी बयान पुलिस लेगी।

आरोपित भगवल पेशे से नेचुरल थैरेपिस्ट है और इलाज कराने के लिए उसके घर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। आयुर्वेदिक इलाज कराने आने वाले लोगों में कई लोग फिल्म इंडस्ट्री से भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।

पुलिस को आशंका है कि शफी का कोई मददगार जरूर है, क्योंकि सोशल मीडिया पर जिस तरह उसने एक थैरेपिस्ट को फाँसा, वो कोई सोशल मीडिया एक्सपर्ट ही कर सकता है। वहीं, शफी कक्षा 6 तक पढ़ाई की है। पुलिस की तर्क के आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपितों को 24 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है।

उधर SIT ने शुक्रवार (14 अक्टूबर 2022) को करीब 6 घंटे तक शफी के किराए के मकान की तलाशी ली। उसके घर से वाहनों के कागजात सहित अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस ने गहनों से संबंधित सबूत जुटाने के लिए उसके घर और उसके द्वारा चलाए गए रेस्तरां में के बारे में जानकारी जुटाई।

SIT ने उसकी पत्नी नबीसा का भी बयान लिया। नबीसा ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि शफी ने गहने गिरवी रखने के बाद मिले पैसे में से 40,000 रुपए उसे दिए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शफी के पास एक जीप भी है और कभी उसके पास एक बस भी थी।

तुर्की के सरकारी कोयला खदान में विस्फोट, कम-से-कम 25 की मौत: 110 लोग कर रहे थे काम, दर्जनों लोगों के फँसे होने की आशंका

यूरोपीय मुल्क तुर्की (Turkey) में शुक्रवार (14 अक्टूबर 2022) को एक कोयला खदान में विस्फोट के कारण कम-से-कम 25 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग उसमें फँसे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिस समय यह विस्फोट हुआ, उस समय खदान में 110 से अधिक लोग काम कर रहे थे।

तुर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहार्टिन कोका (Health Minister Fahrettin Koca) ने कहा कि अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि सरकार की स्वामित्व वाली तुर्की हार्ड कोल एंटरप्राइजेज की खदान में विस्फोट के कारण वहाँ कितने लोग फँसे हुए हैं। वहीं, घायल 17 लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इससे पहले गृह मंत्री सुलेमान सोयलू (Suleyman Soylu) ने कहा कि विस्फोट के समय 49 लोग जमीन से 300 मीटर और 350 मीटर (985 से 1,148 फीट) नीचे काम कर रहे थे। उन्होंने इसे जोखिम वाला क्षेत्र बताया था। उन्होंने कहा कि वहाँ फँसे कुछ लोगों को निकाल लिया गया है, जबकि कुछ लोग वहाँ अभी भी फँसे हुए हैं।

उधर तुर्की के ऊर्जा मंत्री फातिह डोनमेज़ ने कहा कि शुरुआती संकेत से ये पता चलता है कि विस्फोट फायरएम्प के कारण हुआ है, जो मीथेन गैस है और खदान में विस्फोट का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि खदान के अंदर आग नहीं लगी है, लेकिन अंदर का वेंटिलेशन ठीक से काम कर रहा है। खदान का अंदरुनी हिस्सा आंशिक रूप से ढह गया है।

अमासरा के मेयर रेकाई काकिर (Recai Cakir) ने कहा कि जो लोग बच गए उनमें से कई को गंभीर चोटें आई हैं। इस घटना में एक खदानकर्मी भागने में सफल रहा। उसने बताया, “वहाँ धूल और धुआँ फैला हुआ था और हमें नहीं पता कि वास्तव में क्या हुआ था।”

राहत एवं बचाव कर्मी रात में ही फँसे हुए लोगों को निकालने के लिए खुदाई कर उन तक पहुँचने की कोशिश की काम शुरू कर दिया है। यह खदान काला सागर के तटवर्ती इलाके अमासरा में स्थित है।

बता दें कि इससे पहले भी तुर्की में इस तरह की घटना हो चुकी है। साल 2014 में तुर्की के पश्चिमी शहर सोमा की कोयला खदान में विस्फोट के बाद 301 लोगों की मौत हो गई थी। यह तुर्की के सबसे बड़ी खदान आपदाओं में से एक थी।