दिल्ली के सुन्दर नगरी में 1 अक्तूबर, 2022 को हुई दलित युवक मनीष की हत्या के बाद अब विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने उप-राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि के साथ 1 सदस्य को नौकरी की माँग की गई है। इसी ज्ञापन में हिन्दुओं की सुरक्षा की माँग सुंदर नगरी और आस-पास सक्रिय धर्मांतरण करवाने वाले लोगों पर नकेल कसने के लिए भी कहा गया है।
यह ज्ञापन रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को दिया गया है। VHP की विराट हिन्दू सभा में एक संत ने अब पानी सिर से ऊपर चले जाने की बात करते हुए ‘जैसे को तैसा’ वाली भाषा में जवाब देने का बयान दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को आयोजित इस विराट हिन्दू सभा में न सिर्फ VHP के कई बड़े पदाधिकारी मौजूद थे, बल्कि संत समाज के कई लोगों के साथ भाजपा व कुछ ने हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
इस बैठक में महामंडलेश्वर नवल किशोर दास ने हिन्दुओं की एकता पर बल देते हुए कहा कि अगर हिन्दू एक हो जाएँ तो दिल्ली का कमिश्नर भी उन्हें चाय पिलाएगा। इसी सभा को सम्बोधित करते हुए भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने मनीष की हत्या के लिए जिहादियों को जिम्मेदार बताया है। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) पदाधिकारी सुरेंद्र जैन ने कहा कि यदि पुलिस मनीष के कतिलों को रिहा कर दे तो इसका स्वागत किया जाएगा, भले ही इसके बाद कानून हाथ में क्यों न लेना पड़े।
इसी सभा को सम्बोधित करते हुए योगेश्वर आचार्य ने कहा कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और जिहादियों को चुन-चुन कर मारा जाना चाहिए। इस सभा में आर्थिक बहिष्कार की माँग की उठी, जिसमें जिहादी तत्वों से कुछ भी खरीदने से परहेज की वकालत की गई।
VHP ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति
विराट हिन्दू सभा के बाद विश्व हिन्दू परिषद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि कभी सुंदर नगरी में 90% हिन्दू रहते थे, जो अब महज 30% बचे हैं। इसी प्रेसनोट में आगे कहा गया कि वहाँ पर जिहादी न केवल हिन्दुओं के घरों का दरवाजा खटखटा कर उन्हें परेशान करते हैं बल्कि महिलाओं को भी रेप की धमकियाँ दी जाती हैं। विहिप के अनुसार सुंदर नगरी में न तो हिन्दू समुदाय का कोई वर्ग सुरक्षित है और न ही उनके मंदिर।
दिल्ली में हिंदू युवक मनीष की नृशंस हत्या के विरूद्ध हुई आक्रोश सभा की प्रेस विज्ञप्ति व इस सम्बंध में उपराज्यपाल को दिया गया ज्ञापन.. pic.twitter.com/9pajM3eBhy
इस प्रेसनोट में विश्व हिन्दू परिषद ने पुलिस को भी सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए लोगों की सुनवाई न करने की शिकायतों से उन्हें रूबरू करवाया। विहिप ने इस बाबत केरल पुलिस का हवाला दिया, जहाँ कई पुलिसकर्मियों पर अंदर ही अंदर PFI की मदद का आरोप लगा था। प्रेसनोट में दिल्ली की केजरीवाल सरकार को हिन्दू विरोधी बताने के साथ जिहादी तत्वों को बढ़ावा देने वाली भी बताया गया है।
प्राचीन सूर्य मंदिर के लिए विश्व प्रसिद्ध मेहसाणा जिले के मोढेरा गाँव ने आज एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली। पीएम मोदी ने रविवार (9 अक्टूबर 2022) को मोढेरा को देश का पहला ‘सोलर विलेज’ घोषित किया। यहाँ के सूर्य मंदिर से लेकर प्रत्येक घर में बिजली की आपूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से होगी।
दरअसल, मेहसाणा जिले के मोढेरा गाँव के प्रत्येक घर की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। जिससे इस गाँव को 24 घंटे सौर पैनल से बिजली मिलेगी। इस गाँव को सोलर विलेज बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने दो चरणों में सौर पैनल लगाए हैं। इस गाँव को आधुनिक पहचान दिलाने के लिए करीब 80.66 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने 12 हेक्टेयर जमीन आवंटित की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस गाँव को सोलर गाँव घोषित करते हुए कहा, ” जिस मोढेरा को सदियों पहले मिट्टी में मिलाने के लिए आक्रांताओं ने क्या कुछ नहीं किया, जिस मोढेरा पर भाँति-भाँति के अत्याचार हुए। वो मोढेरा अब अपनी पौराणिकता के साथ-साथ आधुनिकता के लिए भी दुनिया में मिसाल बन रहा है।”
विश्व प्रसिद्ध मोढेरा को सोलर विलेज बनाने के लिए मेहसाणा के सुजानपुरा में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के साथ एकीकृत सौर ऊर्जा परियोजना को अमल में लाया गया है। ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर प्लांट लगाया गया है। ये सभी सोलर सिस्टम बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) से जुड़े हुए हैं।
इस सिस्टम को सूर्य मंदिर से सिर्फ 6 किलोमीटर की दूरी पर लगाया गया है। इससे मोढेरा को 24×7 यानी 24 घंटे और सातों दिन सौर ऊर्जा आधारित बिजली मिलेगी। इस परियोजना को ‘सोलराइजेशन ऑफ मोढेरा सन टेम्पल एंड टाउन’ नाम दिया गया है।
बता दें कि पीएम मोदी ने मोढेरा को सौलर विलेज घोषित करने के साथ गाँव को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती के साथ पेश करने के लिए 3,900 करोड़ रुपए की अन्य कई योजनाओं की भी आधारशिला रखी।
मोढेरा गाँव की इस उपलब्धि पर सरपंच जतनबेन डी ठाकोर ने कहा है कि केंद्र सरकार व राज्य की इस परियोजना से सभी ग्रामीण बेहद खुश हैं। पहले यहाँ बिजली का बिल लगभग 1 हजार रुपये के आसपास आता था लेकिन अब यह लगभग शून्य हो गया है।
मोढेरा गाँव को सौर्य ऊर्जा आधारित बनाने पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा है कि गुजरात ने एक बार फिर से स्वच्छ व हरित ऊर्जा पैदा करने के प्रधानमंत्री के विजन को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 2030 तक अक्षय ऊर्जा के माध्यम से भारत की 50 फीसदी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के प्रधानमंत्री जी के संकल्प को पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
आम आदमी पार्टी नेता व केजरीवाल सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हिंदुओं के धर्मांतरण वाले कार्यक्रम में जाने के बाद से लगातार राजेंद्र पाल गौतम पर सवाल उठ रहे थे। उनके इस कार्यक्रम में हिंदूविरोधी शपथ लेने की वजह से केजरीवाल को गुजरात में काले होर्डिंग्स के जरिए लोगों का विरोध झेलना पड़ा था।
टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, 10000 हिंदुओं के धर्मांतरण में शामिल होकर हिंदूविरोधी शपथ लेने वाले आप नेता राजेंद्र पाल गौतम ने रविवार को इस्तीफा दिया। सफाई में गौतम ने कहा है कि वो जिस कार्यक्रम का हिस्सा बने वो उनका व्यक्तिगत मामला था इससे पार्टी का या उनके मंत्री होने का कोई लेना देना नहीं है।
बता दें कि आप नेता झंडेवालान में आयोजित जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे उसमें 10 हजार हिंदुओं का धर्मांतणरण हुआ था। शपथ में कहते सुना गया था- “मैं इस बात को नहीं मानता और न ही मानूँगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे। मैं इसे केवल पागलपन और झूठा प्रचार मानता हूँ। मैं श्राद्ध नहीं करूँगा और न ही पिंडदान करूँगा।”
भगवा वस्त्र पहने हुए व्यक्ति ने इस शपथ को दिलाते हुए कहा था, “मैं ब्राह्मणों द्वारा किसी भी समारोह को करने की अनुमति नहीं दूँगा। मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ, जो मानवता के लिए हानिकारक और उनके विकास में बाधक है, क्योंकि यह असमानता पर आधारित है। मैं बौद्ध धर्म को अपना धर्म स्वीकार करता हूँ।”
कार्यक्रम के दौरान, ‘आप’ के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम इन विवादास्पद लाइनों को दोहराते हुए और उस व्यक्ति के साथ मंच साझा करते हुए दिखाई दिए थे। इस कार्यक्रम की वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद बीजेपी ने आप प्रमुख और आप मंत्री के खिलाफ शिकायत दी थी। वहीं गुजरात में ब्लैक होर्डिंग्स के साथ केजरीवाल का भी विरोध हुआ था.
उत्तर प्रदेश वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) के एक गेस्ट हाउस में CCTV कैमरा लगाकर लड़कियों की अश्लील वीडियो रिकॉर्ड करने पर हंगामा मच गया है। लड़कियों की नजर कैमरे पर पड़ी, इसके बाद इसका खुलासा हुआ। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने होटल संचालक और मैनेजर एवं अन्य कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर हिरासत में ले लिया गया है।
सिगरा थाने की पुलिस ने परेड कोठी स्थित जेपी गेस्ट हाउस के CCTV की DVR कब्जे में लेकर उसकी जाँच की तो उसमें कई वीडियो रिकॉर्ड मिले। इसके बाद पुलिस ने होटल के संचालक प्रदीप यादव और मैनेजर राजकुमार को हिरासत में ले लिया है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल की एक स्वयंसेवी संस्था (NGO) की करीब 20 छात्राएँ वाराणसी घूमने के लिए आई हुई थीं। शनिवार (8 अक्टूबर 2022) को संस्था की सभी छात्राएँ और उसके अधिकारी कैंट स्टेशन के पास स्थित जेपी गेस्ट हाउस में ठहरे थे। छात्राएँ जिस हॉल में ठहरी थीं, वहाँ एक CCTV कैमरा लगा हुआ था। कपड़े बदलते समय लड़कियों की नजर कैमरे पर पड़ी तो हंगामा करते हुए संस्था के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
एनजीओ के अधिकारियों ने इसकी शिकायत गेस्ट हाउस के मैनेजर से की तो उसने कहा कि कैमरे बंद हैं। इस पर संस्था के लोगों ने रिकॉर्डिंग चेक कराने की माँग की, लेकिन वे इसके बहाने बनाने लगे। सूचना मिलने पर ACP और सिगरा थाना की पुलिस मौके पर पहुँचे।
कानपुर के गर्ल्स हॉस्टल में वीडियो
इससे पहले कानपुर के रावतपुर स्थित तुलसी नगर के एक निजी गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा का अश्लील वीडियो बनाए जाने का मामला सामने आया था। इस मामले में सफाई कर्मचारी ऋषि को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा वॉर्डन और हॉस्टल संचालक को भी गिरफ्तार किया गया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रावतपुर थाना प्रभारी संजय शुक्ला पर आरोप लगा कि उन्होंने वार्डन सीमा पाल और गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनोज पांडेय के खिलाफ केस को कमजोर किया, जिसकी वजह से दोनों को कोर्ट से जमानत मिल गई। यह बात सामने आई थी कि यह हॉस्टल IPS अधिकारी सुरेंद्र तिवारी का है।
मदुरै में डॉक्टर आशिक बनवाता था वीडियो
तमिलनाडु के मदुरै शहर में एक डॉक्टर की प्रेमिका उसे अपने साथ हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की अश्लील वीडियो व फोटो भेजा करती थी। ये फोटो व वीडियो आरोपित अपने ही मोबाइल से बनाती थी।
आरोपित महिला का नाम जननी है जबकि डॉक्टर का नाम आशिक है। पुलिस ने डॉक्टर और उसकी प्रेमिका को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला 22 सितम्बर 2022 को दर्ज हुआ था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला अन्नानगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ एक हॉस्टल में रहने वाली BED की छात्रा जननी पर आरोप है कि उसने अपनी सहेलियों की आपत्तिजनक तस्वीरें अपने प्रेमी डॉक्टर आशिक को व्हाट्स एप पर भेजी हैं।
बताया जा रहा है कि तस्वीरें तब खींची गईं हैं जब लड़कियाँ या तो कपड़े बदल रहीं थीं या वो नहा रही थीं। एक दिन नहा रही एक लड़की को शक हुआ तो उसने युवती का मोबाइल चेक किया।
IIT बॉम्बे में लड़कियों का वीडियो बनाने का मामला
आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) की हॉस्टल के वॉशरूम में लड़कियों का वीडियो बनाने का मामला सामने आया था। इस मामले में हॉस्टल के ही कैंटीन के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया था।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि रात में आईआईटी बॉम्बे के एक कर्मचारी ने हॉस्टल H10 के वॉशरूम में उसका वीडियो रिकॉर्ड किया। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 354 C के तहत मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्रा बनाती थी अन्य छात्राओं का वीडियो
पिछले महीने पंजाब के चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (Chandigarh University) के हॉस्टल में रहनी वाली छात्राओं के नहाने के वीडियोज वायरल होने की खबर के बाद बवाल मचा गया था। छात्रा हॉस्टल की लड़कियों के नहाने का वीडियो रिकॉर्ड कर अपने फ्रेंड को भेजा करती थी।
मामला सामने आने के बाद कुछ लड़कियों ने हॉस्टल वार्डन राजविंदर कौर से शिकायत करते हुए कहा कि एक लड़की वॉशरूम में 6 लड़कियों का वीडियो बना रही थी। इसके बाद वार्डन राजविंदर कौर ने लड़की से पूछताछ की और फिर गर्ल्स हॉस्टल मैनेजर रीतू को इसकी जानकारी दी गई।
इस दौरान, हॉस्टल मैनेजर के सामने आरोपित छात्रा ने फोटो या वीडियो बनाने से इनकार कर दिया। हालाँकि, हॉस्टल मैनेजर का कहना है कि जब उसने आरोपित छात्रा के मोबाइल की जाँच की थी तो उसमें से कई फोटो और वीडियो डिलीट किए हुए मिले।
दिल्ली में हो रही ‘राष्ट्रीय जनता दल (RJD)’ की कार्यकारिणी बैठक में बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव ने श्याम रजक पर खुद और अपने PA को गंदी-गंदी गालियाँ देने का आरोप लगाया है। तेज प्रताप ने अपनी ही पार्टी के नेता श्याम रजक को संघी और भाजपाई कहा है। फिलहाल वो बैठक छोड़ कर चले गए हैं। यह घटनाक्रम आज रविवार (9 अक्टूबर 2022) का है। तेज प्रताप के आरोपों के बाद श्याम रजक अचानक ही बेहोश हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, उन्हें अस्पताल ले जाया गया है।
वायरल हो रहे एक वीडियो में तेज प्रताप यादव बैठक से बाहर निकल कर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वो कह रहे हैं कि उन्हें दी गई गालियों की ऑडियो उनके पास मौजूद है। तेज प्रताप के मुताबिक, वो उस ऑडियो को अपने पेज पर डाल कर पूरे बिहार की जनता को सुनवाएँगे। उनके मुताबिक, श्याम रजक ने कार्यक्रम की जानकारी लेने पर उनके PA को साला कहा और खुद उनको बहन की गाली दी है। बैठक छोड़ कर जाते हुए तेज प्रताप ने कहा कि यहाँ कोई गाली सुनने नहीं आया है।
बैठक से बाहर जाने के बाद भी तेज प्रताप यादव के तेवर गर्म रहे। ‘न्यूज़ 18’ से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने ही श्याम रजक को वहाँ पहुँचाया है, जहाँ आज वो हैं। तेज प्रताप का आरोप है कि न सिर्फ उन्हें बल्कि उनकी माँ, बहन और पिता तक को गाली दी गई है। खुद को अपने दिए गए विभाग में बहुत व्यस्त बताते हुए तेज प्रताप यादव ने कह कि वो कभी गलत बात सहन नहीं करते।
तेज प्रताप ने श्याम रजक के गुस्से के पीछे उनके मंत्री न बनने की नाराजगी होने की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि मैं और तेजस्वी मंत्री बन गए पर वो नहीं बन पाए, शायद ये वजह हो उनके द्वारा दी जा रही गालियों की। उन्होंने श्याम रजक को ऑफर दिया कि अगर उनका मन हो तो आ कर पर्यावरण मंत्रालय चलाएँ। इसी के साथ उन्होंने कहा कि अगर मंत्री ही बनना है तो श्याम रजक तेजस्वी से बात करें। तेज प्रताप ने श्याम रजक पर दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से FIR दर्ज करवाने का भी एलान किया है।
RJD कार्यकारिणी में बड़ा बवाल। बैठक से बाहर निकले तेजप्रताप। श्याम रजक पर गाली देने का लगाया आरोप। pic.twitter.com/PyNbOfVOxB
गालियों को श्याम रजक के संस्कार बाते हुए तेज प्रताप ने कहा कि जब उन्हें पार्टी में जलील कर के स्टेज से उतार दिया गया था तब उन्हें मंच पर मैंने ही बिठाया था। उन्होंने कहा कि मैंने तेजस्वी को भी श्याम रजक की गालियों का ऑडियो सुनाया है और इस सबूत को वो कोर्ट तक ले जाएँगे। श्याम रजक के हालात पर कोई भी टिप्पणी न करते हुए उन्होंने कहा कि हालात कैसे भी रहे हों पर उन्होंने गाली कैसे दे दी?
#WATCH मैं एक बात कहना चाहता हूं कि ‘समरथ के होत ना कोई दोष गोसाई’ जो सामर्थ्यवान व्यक्ति होता है उसको कुछ भी कहने का अधिकार है। मैं दलित समाज से हूं। दलित बंधुआ मजदूर होता है, मैं बंधुआ मजदूर हूं। वे जो भी कह रहे हैं सामर्थ्य के आधार पर कह रहे हैं: RJD नेता श्याम रजक, दिल्ली https://t.co/sOsnLz5JZPpic.twitter.com/xkOWgOXIo3
श्याम रजक पर संघी होने का आरोप लगाते हुए तेज प्रताप ने कहा कि एक तरफ वो लालू को सामाजिक न्याय का पुरोधा बता रहे तो दूसरी तरफ उनके ही बेटे को गाली दे रहे। तेज प्रताप के मुताबिक, दोतरफा राजनीति करने वाले श्याम रजक ने संगठन को तोड़ने का शुरू से ही काम किया है। बैठक के अंदर हुए हंगामे का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में RJD कार्यकर्ता दो भागों में लामबंद होते दिख रहे हैं जिसमें तेज प्रताप को बाहर जाते देखा जा सकता है।
भरे मंच से @TejYadav14 ने श्याम रजक पर लगाया गंभीर आरोप, श्याम रजक ने मुझे गंदी गंदी गालियां दी। मेरे पास रिकार्डिंग है। मैं मीडिया से भी शेयर करुंगा। बैठक छोड़कर गए @TejYadav14pic.twitter.com/GUkoj93lSe
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस विवाद की वजह बताया जा रहा एक ऑडियो भी सामने आया है। इस ऑडियो में श्याम रजक की आवाज होने का दावा किया जा रहा। ऑडियो में कहा गया, “मंत्री हो गया है तो मंत्री का पीए फोन कर रहा है। हम लोग भी मंत्री थे हम डायरेक्ट बात करते थे। पीए से बात नहीं करवाते थे।” इसी ऑडियों में एक जगह आपत्तिजनक शब्द भी बोला गया है। हालाँकि ऑपइंडिया इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता।
श्याम रजक की सफाई में रामचरित मानस की चौपाई
तेज प्रताप यादव के इन आरोपों पर राजद नेता श्याम रजक ने सफाई दी है। सफाई देने के लिए उन्होंने ‘समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाईं’ कहते हुए कहा कि तेज प्रताप सामर्थ्यवान हैं और वो पार्टी के बँधुआ मजदूर। खुद को दलित बताते हुए श्याम रजक ने कहा कि तेज प्रताप जो भी कह रहे हैं, वो अपने सामर्थ्य से कह रहे।
भारत देश की सिनेमा इंडस्ट्री अर्थात बॉलीवुड के दोगलेपन से हम सब काफी समय से वाकिफ हैं। कला के नाम पे ये अनगिनत अपमानजनक सामग्री बना कर बेच चुके हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी ने अपनी मर्यादा बेच दी हो। दूर से चमचमाता हुआ ये कालसर्पी गटर बड़ा ही आकर्षक लगता है। बहुत ही गिने चुने व्यक्ति हैं जो सामाजिक दृश्य की सही प्रस्तुति करते हैं अपनी सिनेमा में। बॉलीवुड के दूषित गर्भ से एक और अपमानजनक फ़िल्म का जन्म हुआ है जिसका नाम आदिपुरूष है।
जी हाँँ, हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के शौर्य और शिक्षा को अमर्यादित रूप से प्रस्तुत करने की कोशिश। माता सीता की झलक ऐसी दिखाई गई है जैसे पुराने फिल्मों की मधुबाला। राम भक्त श्री हनुमान जी की भक्ति और तप का उपहास और शिव भक्त प्रकांड पंडित रावण की भी भर्त्सना की गई है। हनुमान चालीसा में ही अंजनीपुत्र के स्वरूप का वर्णन श्री तुलसीदास जी ने किया है। वो पंक्तियाँ हैं:
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥ अर्थ- आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।
हाथबज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेऊ साजै॥5॥ अर्थ- आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।
इस फ़िल्म में दर्शाए गए हनुमान जी के चरित्र का इससे दूर-दूर तक कोई सामंजस्य नहीं दिखता। विपरीत रूप में उन्हें चमड़े के वस्त्र और बिना गदा के दिखाया गया है।
ये फ़िल्म अभी सिनेमाघरों में रिलीज नही हुई है पर इसके दो मिनिट के टीजर ने सनातनी भावनाओं को आघात किया है। कला का सही मूल्य तभी है जब वो जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सच प्रदर्शित करे। इस फ़िल्म में ना ही श्रीराम की स्वर्णिम व्यक्तित्व की झलक मिलती है ना हनुमान जी की प्रेमपूर्ण भक्ति। सात्विक स्वभाव के हमारे देवगणों को चमड़े के वस्त्रों में दिखाया गया है। हनुमान चालीसा तक बहुत ही सुंदर व्याखान करती है।
वहीं पंडित रावण की वेशभूषा ऐसी प्रतीत होती है जैसे कोई मध्यकालीन क्रूर शासक हो जो भारत पे आक्रमण करने आया हो। रावण की स्वर्णरूपी नगरी लंका को भी एक काले खंडहर के रूप में दिखाया गया है। पुष्कप विमान की जगह किसी काले चमगादड़ को रावण की सवारी बना दी गई है। जैसा हमें ज्ञात है की शिव भक्त रावण को चारो वेद कंठस्त्य थे। शिवतांडव स्त्रोत की रचना रावण ने ही की थी। रावण अहंकारी जरूरी था, पर उतना ही ज्ञानी भी। रावण का वध तय था श्रीराम के हाथों, पर श्रीराम ने भी उसकी विद्वत्ता की सराहना की थी। रावण को तो फिल्म निर्माताओं ने छपरी हेयरकट और औरंगजेबी वेशभूषा दे दी है।
इतना बुरा वर्णन बस दो मिनट के टीजर में था तो पूरी फिल्म में की गई पात्रों की दुर्गति की कल्पना भी कठिन है।
ये पहली बार नहीं है कि बॉलीवुड ने हिंदू विरोधी फिल्म कला या यह कहूँ की कलंक के नाम पर पेश की है। पिछले वर्ष ही तांडव नाम की कुप्रस्तुति की गई थी। इस फिल्म में सैफ अली खान थे और इसपे पर बहुत बहस हुई थी। आज से कुछ वर्षो पहले आमिर खान की फिल्म पीके ने भी हिंदू समाज के गुरु की नकारात्मक छवि दिखाई थी। इसी पीके फिल्म में शिवजी के रूप का उपहास किया गया था, कहीं उन्हें मोबाइल फ़ोन पर बात करते भी दिखाया गया, सिर्फ हिंदू रीति रिवाजों का मजाक उड़ाया गया। अन्य कई फिल्में हैं जो की लव जिहाद और हिंदू फोबिया को नॉर्मलाइज करती हैं।
बॉलीवुड के गटर से निकले कुछ निर्देशक अब वेब सीरीज़ भी बनाते हैं। अलग-अलग ऑनलाइक प्लेटफार्म पे गंदी वेब सीरीज़ का अंबार लगा है। ठीक वैसे ही जैसे कूड़े का पहाड़। ऐसी ही वेब सिरीज़ जो भारतीय संस्कृति के वार पे इस सुसंस्कृति को वासना से भर रही है। कला के नाम पे बस अश्लीतला बेची जा रही ही जाती है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई सुटेबल ब्वॉय में अगर एक मंदिर की मर्यादा को चोट पहुँचाने की कोशिश की गई तो वहीं नेटफ्लिक्स पर ही रिलीज़ हुई एक और फिल्म लुडो को लेकर भी सवाल उठे।
इस फिल्म में चार कहानियों को एक में पिरोया गया लेकिन अनुराग बासु अपनी एंटी हिंदू सोच का गटर यहाँ भी खोल गए। एक रिसर्च के मुताबिक-
बॉलीवुड की फिल्मों में 58% भ्रष्ट नेताओं को ब्राह्मण दिखाया गया है।
62% फिल्मों में बेइमान कारोबारी को वैश्य सरनेम वाला दिखाया गया है।
फिल्मों में 74% फीसदी सिख किरदार मज़ाक का पात्र बनाया गया।
जब किसी महिला को बदचलन दिखाने की बात आती है तो 78 फीसदी बार उनके नाम ईसाई वाले होते हैं।
84 प्रतिशत फिल्मों में मुस्लिम किरदारों को मजहब में पक्का यकीन रखने वाला, बेहद ईमानदार दिखाया गया है, यहाँ तक कि अगर कोई मुसलमान खलनायक हो तो वो भी उसूलों का पक्का होता है।
कट्टरपंथियों के कब्जे में फिल्म इंडस्ट्री
कुल मिलाकर बॉलीवुड में एक खास धड़ा इसी पर काम कर रहा है, उन्हें पक्का यकीन है कि वो अगर हिंदू संस्कृति पर सवाल उठाएँगे तो ज़ाहिर है लिबरल सनातन समाज उन्हें कठघरे में नहीं खड़ा करेगा, जबकि मुस्लिम समुदाय कार्टून/कैरिकेचर बनने पर ही बवाल खड़े कर देता है। यही वजह है कि कुछ फिल्मों में हिंदू धर्म के प्रति पक्षपाती रवैया देखा गया।
एक फिल्म निर्देशक का काम है सही रिसर्च करना अगर वो एक महाकाव्य पर फ़िल्म बनाने की इच्छा रखते हैं। और सवाल यह है कि बॉलीवुड में सिर्फ हिंदू भावनाओं के साथ क्यों खिलवाड़ किया जाता आ रहा है। ख़ैर हमारी उम्मीद ही शायद गलत है। जिन लोगों की ख़ुद की ज़मीर ही नहीं न खुद की इज़्ज़त, वो दूसरो के धार्मिक भावनाओं का क्या ध्यान रखेंगे। समय आ गया है खुद के लिए आवाज़ उठाने का। अपनी आवाज़ बुलंद करे और पूर्ण रूप से इस अपमानजनक फिल्म का बहिष्कार करें। जब बॉलीवुड हमारे इतिहास और भावनाओं का सम्मान नही कर सकता तो उसे भी सम्मान नही मिलेगा।
भारत में जितनी भी लोक परंपराएँ प्रचलित रही हैं, उन सभी परंपराओं में आस्था और ज्ञान सबसे महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। पिछले दिनों मुझे आस्था और ज्ञान के संगम ‘लोकमंथन 2022’ के आयोजन में माँ कामाख्या के पावन स्थल गुवाहाटी जाने का अवसर प्राप्त हुआ, जहाँ संपन्न हुए 4 दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन के द्वारा समाज में व्याप्त विष को अमृत में बदलने का बौद्धिक प्रयास देखने को मिला। यह कार्यक्रम भारतीय विरासत के जड़ों को जानने, समझने और भविष्य के लिए संरक्षित करने का सफल प्रयास कहा जाना चाहिए।
इसे अकादमिक जगत के लिए आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के इस अमृत काल में भारत के अगले 25 वर्षों की शिक्षा, शोध, ज्ञान एवं संवाद की परंपरा के रूपरेखा के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। ‘प्रज्ञा प्रवाह’ और असम सरकार के संयुक्त तत्वाधान में 21 से 24 सितम्बर को गुवाहाटी में हुए लोकमंथन कार्यक्रम, ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से परिपूर्ण विचारकों एवं कर्मशील व्यक्तियों के लिए लोकमंच के रूप में उभर कर आया, जिसके द्वारा ‘भारत की लोक परंपराएँ’ और राष्ट्र की सामूहिक प्रज्ञा को एकीकृत कर उत्सव के रूप में मनाया गया।
भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए देश की गौरवशाली परंपराओं और विशिष्ट राष्ट्रीय चरित्रों को प्रदर्शित किया गया। वास्तव में कहे तो इस राष्ट्रीय विमर्श के द्वारा भारतीय अपेक्षाओं, सामाजिक व्यवस्था की परंपरा तथा समता के आधार पर समकालीन मुद्दों को साझा किया गया। इस बौद्धिक विमर्श में नए भारत की नींव के लिए लोक के समस्त आयामों को अंतर्निहित करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के विभिन्न व्याख्यान सत्रों में लोक आस्था और विज्ञान की परंपरा, शक्ति की अवधारणा, पाक परंपरा, वंशावली लेखन का महत्व, शिक्षा में कहानी कहने की परंपरा, संगीत वाद्ययंत्र, धार्मिक यात्राएँ एवं अन्नदान की परंपरा, संस्कार और कर्तव्य, भारत की औद्योगिक जातियाँ, पर्यावरण और जैव-विविधता, जल संरक्षण आदि विषयों पर वैचारिक मंथन हुआ।
वहीं आयोजन के दूसरे हिस्से में कई लोक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया, जिनमें असम के माँ कामख्या मंदिर की झाँकी विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों के प्रचलित वैवाहिक लोक परंपराओं, नृत्य-संगीत का प्रदर्शन, पारंपरिक जादू, मंत्र, टोटके, उत्तर-पूर्व के जनजातीय समुदाय के पारंपरिक खान-पान, परिधान और आर्थिक उपार्जन के प्राकृतिक स्रोतों को करीब से देखने एवं अनुभव करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत 21 सितम्बर को प्रदर्शनी उद्घाटन से हुआ, लेकिन वैचारिक सत्र की वास्तविक शुरुआत भारत के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के वक्तव्य से, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे नंदकुमार की उपस्थिति में हुआ। आम जनमानस के बीच जहाँ एक ओर राजनीतिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति एवं उनके भाषण सुनने को मिले, वही दूसरी ओर पद्मश्री डॉ कपिल तिवारी, सोनल मानसिंह, गिरीश प्रभुणे जैसे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे कई पद्म विभूषण, पद्मश्री जैसे राजकीय सम्मानों से सम्मानित विद्वानों के साथ-साथ प्रतिष्ठित कर्मशील व्यक्तियों को मंच पर बराबर का स्थान प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले एवं केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के वक्तव्य से हुआ, जो पूरे कार्यक्रम के संक्षिप्त निष्कर्ष के रूप में प्रतिनिधियों के सामने आया, जिसे उन्होंने भारत बोध के कई आयामों के रूप में व्याख्यायित किया। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में 3700 से अधिक प्रतिनिधियों का एक स्थान पर एकत्र हो पाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने असम और पूर्वोत्तर की संस्कृति के विभिन्न पहलुओं के लिए जिज्ञासा को प्रेरित किया है।
कार्यक्रम की सफलता संख्या बल की भागीदारी के साथ-साथ आम जनमानस पर उसके प्रभाव से भी आँका जाता हैं। ऐसे में एक बड़ी जिम्मेदारी है कि आयोजक इन एकत्र हुए प्रतिनिधियों से निष्कर्ष प्राप्त कर इसे देश हित के विकास कार्यों में सम्मिलित कर सकें। इस कार्यक्रम के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नीति-निर्माताओं और अनुभवी विद्वानों के साथ बौद्धिक विमर्शों में भाग लेने वाले कर्मशीलों की उपस्थिति ने, अकादमिक जगत के लिए नए मापदंड तय कर दिए हैं।
ऐसे में उम्मीद हैं कि अभिजात्य वर्ग के तथाकथित पाश्चात्य बुद्धिजीवियों की बजाए जमीनी वास्तविकताओं से परिचित लोगों को राष्ट्रीय मंच देने की माँग तेज होगी। भारत की लोक परंपरा सदैव ही ज्ञान आकांक्षी, प्रयोग आधारित और अनुभवजनित रही हैं। यहाँ सूक्ष्म से स्थूल और स्थूल से गूढ़ तक के लिए देश, काल और परिस्थिति के अनुरूप वैज्ञानिक तर्क मौजूद रहे हैं। ऐसे में जितने भी परंपराओं में परिवर्तन आवश्यक हुआ उनमें एक व्यापक संवाद परंपरा के बाद ही बदलाव संभव हो सके।
आज जिस पॉपुलर कल्चर के चश्मे से फोकलोर के दायरे में हम भारतीय लोक परंपराओं को देख रहे हैं निश्चय ही उसके संकीर्ण परिभाषाओं को बदलने की जरूरत हैं। जरूरत यह भी हैं कि भारतीय जनमानस अपने लोक परंपराओं को अपने यहाँ के लोक प्रयोगधर्मियों के द्वारा नजदीक से अनुभव करें न कि म्यूजियम या वार्षिक दिवसों में बदल कर एक दिन इकट्ठे हो ताली बजाएँ। भारतीय लोक के अनेक पहलुओं पर सांस्कृतिक और वैचारिक मंथन से यह भी उम्मीद बढ़ती हैं कि लोकमंथन जैसे सफल आयोजन देश भर के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर रहे शोधार्थियों, सांस्कृतिक कलाकारों एवं राष्ट्र प्रज्ञा के लिए तैयार हो रहे युवाओं के लिए नए लक्ष्य स्थापित करेगी।
साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन को विस्तार देगी। किसी भी राष्ट्र की समृद्ध लोक परंपराओं को अनुभव करके ही वास्तविक रूप से समझा जा सकता हैं और लोकमंथन 2022 के गुवाहाटी संस्करण का आयोजन इसी समृद्ध परंपरा को जीवंत कर राष्ट्रीय मंच पर लाने का एक सफल अनुभवजनित प्रयास रहा है।
(लेखिका संगीता केशरी दिल्ली विश्वविद्यालय की शोधार्थी और ‘होप फाउंडेशन’ की मिडिया कंसल्टेंट् हैं।)
भारत के पूर्व दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव (Ex-Cricketer Kapil Dev) ने कहा कि आजकल के खिलाड़ी कहते हैं कि वे IPL खेल रहे हैं, इसलिए बहुत प्रेशर है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी अगर दबाव महसूस करते हैं तो उन्हें IPL नहीं खेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पैशन वाले खिलाड़ी को प्रेशर नहीं होता।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान 63 वर्षीय कपिल देव ने यह बात एक टीवी शो के दौरान कही। कपिल देव ने कहा, “आजकल मैं टीवी पर बहुत सुनता हूँ कि IPL खेलते हैं… बहुत प्रेशर है। मैं एक ही चीज कहना चाहता हूँ कि मत खेलो। प्रेशर क्या होता है? खिलाड़ी को अगर पैशन है तो प्रेशर नहीं होना चाहिए। हम एंजॉय करने के लिए खेलते हैं और एंजॉयमेंट में प्रेशर हो ही नहीं सकता है।”
कप्तान के रूप में साल 1983 में विश्वकप जीतने वाले कपिल देव ने आगे कहा, “ये अमेरिकन वर्ड आ जाते हैं ना… कि मेरे को प्रेशर है… डिप्रेशन है… ये मेरे समझ में नहीं आता। मैं तो एक किसान हूँ और हम तो एंजॉय करने के लिए खेलते हैं और एंजॉयमेंट में प्रेशर हो ही नहीं सकता। हम तो कहते थे कि भगवान आज बारिश मत करना, हमें खेलना है। तो ये प्लेजर है, प्रेशर नहीं है।”
उन्होंने छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा, “हम पढ़ाई करने वाले बच्चों को भी बोलते हैं। मैं एक स्कूल में गया तो 10वीं-11वीं के बच्चे बोले कि बहुत प्रेशर है। मैंने कहा कि अच्छा! आपको भी प्रेशर है? AC स्कूल में पढ़ते हो, माँ-बाप फीस देते हैं, टीचर आपको हाथ नहीं लगा सकता और आपको प्रेशर है! हमारे टाइम में पूछो प्रेशर क्या है। टीचर पहले थप्पड़ मारता था, फिर पूछता था कि कहाँ हो। मैं उन्हें बोलता हूँ कि इसको प्लेजर में चेंज कर लो, फन में चेंज कर लो। प्रेशर नहीं होना चाहिए।”
कपिल देव का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने कहा कि इस कठिन समय के बीच क्रिकेट के ऑल फॉरमेट में खेलना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पिछले महीने शार्लोट डीन के रन आउट होने के बाद भारत मैच जीत गया था, लेकिन इस रन आउट से विवाद खड़ा हो गया था। तब कपिल ने कहा था, “ऐसी स्थिति में मुझे लगता है कि हर बार तीखी बहस के बजाय एक सामान्य नियम होना चाहिए। बल्लेबाजों को उनके रन से वंचित करना। इसे शॉर्ट रन माना जाना चाहिए।”
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की शौर्य गाथा पर आधारित फिल्म ‘आदिपुरुष’ को लेकर फैंस को काफी उम्मीदें थीं। हालाँकि, फिल्म का टीजर आने के बाद से ‘आदिपुरुष’ विवादों से घिरी रही है। कई हिन्दू संगठनों से लेकर राजनेताओं व आम जनता तक ने इस फिल्म के किरदारों को लेकर सवाल उठाए हैं। साथ ही, सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लगातार ट्रोल किया जा रहा है। इन तमाम विवादों के बीच, आदिपुरुष के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर ओम राउत ने बयान देकर विवाद को रोकने की कोशिश की है।
ओम राउत ने कहा है कि उन्हें फिल्म को लेकर कई तरह की सलाह मिल रही हैं। वह इन सभी को नोट कर रहे हैं। जब फिल्म आएगी तब सब कुछ अच्छा रहेगा। हम किसी को निराश नहीं होने देंगे। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया है कि वह फिल्म में बदलाव करने जा रहे हैं या नहीं।
‘आदिपुरुष’ के डायरेक्टर ओम राउत ने कहा, “हम पर विश्वास रखें। हमारे लिए, हमारी ऑडियंस सबसे पहले है। हमें जिस तरह का फीडबैक मिल रहा है, उसे हम नोट कर रहे हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जब यह फिल्म 12 जनवरी, 2023 को रिलीज होगी तो हम किसी को निराश नहीं करेंगे। हम पर विश्वास करें, हम इसे पूरा करेंगे।”
सोशल मीडिया पर हो रही फिल्म की ट्रोलिंग को देखते हुए जब ओम राउत से पूछा गया कि क्या वह फिल्म में बदलाव करेंगे। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “अभी लोगों ने सिर्फ 95 सेकेंड्स का टीजर ही देखा है। मैं दोबारा कह रहा हूँ कि हम सभी चीजों को नोट कर रहे हैं। मैं यकीन दिलाता हूँ कि कोई निराश नहीं होगा।”
उन्होंने यह भी कहा, “मैं भगवान राम को बहुत मानता हूँ। फिल्म में मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। हमने इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं की। मैं इस इतिहास को अपनी प्राउड हिस्ट्री मानता हूँ। जब मैंने रामानंद सागर की रामायण दूरदर्शन पर देखी तो इसका मुझ पर काफी असर हुआ। रामायण के उस वर्जन में भी मॉडर्न टेक्नॉलजी थी, जिससे दर्शक इम्प्रेस हुए। एक तीर चलता था उससे 10 तीर निकलते थे, फिर 100 तीर निकलते थे। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था।”
रावण के विवादित लुक को लेकर ओम राउत ने कहा कि रावण एक राक्षस है, वह निर्दयी था तो उसको मूँछ वाला लुक दिया गया था। उन्होंने कहा कि उसे उस वक्त के राक्षस के रूप में दिखाया गया था, यह उसे चित्रित करने का तरीका था। बकौल ओम राउत, ‘आदिपुरुष’ का रावण आज के वक्त का राक्षस है और उनके नजरिए में एक राक्षस ऐसा भी दिख सकता है।
ओम राउत से जब यह पूछा गया कि लोग टीजर की इतनी आलोचना कर रहे हैं तो क्या वह फिल्म में कुछ बदलाव करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें सबका आशीर्वाद चाहिए। क्योंकि यह एक फिल्म नहीं है, वह इसे फिल्म की तरह से ट्रीट नहीं कर रहे, यह उनके लिए मिशन है। यह भक्ति का प्रतीक है।
चुनव आयोग द्वारा शिवसेना के चुनाव चिह्न धनुष-बाण को फ्रीज करने के बाद उद्धव ठाकरे गुट ने दूसरे विकल्प खोजने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए उन्होंने त्रिशूल, सूर्य और मशाल जैसे विकल्प चुनाव आयोग को दिए हैं। बताया जा रहा है कि यह गुट आने वाले अँधेरी उपचुनाव में ठाकरे गुट या असली शिवसेना नाम से मैदान में उतारा जा सकता है। अगली रणनीति बनाने के लिए ठाकरे गुट ने आज रविवार (9 अक्टूबर 2022) को एक मीटिंग बुलाई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ठाकरे गुट अब ‘शिवसेना बालासाहेब ठाकरे’ दूसरे विकल्प के तौर पर ‘शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे’ और तीसरे विकल्प के तौर पर ‘शिवसेना प्रबोधन ठाकरे’ नाम से चुनावी मैदान में उतर सकता है। चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट से भी अपने समूह के 3 नाम और 3 ही चुनाव चिह्न देने के लिए कहा है। चुनाव आयोग अब दोनों गुटों के अलग-अलग नाम देते हुए उन्हें अलग-अलग चुनाव चिह्न बाँटेगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने दोनों को मौजूद विकल्पों की लिस्ट भी सौंपी है।
शिवसेना का आधिकारिक ट्विटर हैंडल अभी भी उद्धव गुट के पास
गौरतलब है कि शिवसेना का आधिकारिक ट्विटर हैंडल फिलहाल उद्धव गुट ही प्रयोग कर रहा है। ‘@ShivSena’ नाम का ये हैंडल वेरिफाइड है, और इस पर लगभग 8.14 लाख फॉलोवर्स हैं। इस हैंडल की प्रोफ़ाइल फोटो में अभी भी तीर कमान का चित्र बना हुआ है और कवर पर उद्धव ठाकरे की फोटो लगी हुई है। 6 अक्टूबर 2022 को इस हैंडल से बाकायदा ट्वीट भी किया गया है जिसमें, किसी पर इशारा करते हुए आज के 50 हाथों वाला रावण बताया गया है।
परंपरेनुसार दसरा मेळाव्यानंतर रावण दहन झाले..पण यावेळचा रावण वेगळा होता. जसा काळ बदलतो तसा रावण ही बदललेला आहे. दहा डोक्याचा नाही तर 50 खोक्यांचा खोकासूर आहे, धोकासूर आहे. pic.twitter.com/LZVh9fIuGs
गौरतलब है कि शिवसेना को तीर-कमान का सिंबल अक्टूबर 1989 में मिला था। इस स पहले शिवसेना रेल इंजन, नारियल पेड़, कप-प्लेट, ढाल-तलवार और मशाल जैसे निशानों पर चुनाव लड़ चुकी है।