हिजाब विवाद के ऊपर सुप्रीम कोर्ट में दो अलग फैसले आए हैं। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने जहाँ कहा कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य नहीं इसलिए कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला सही है। वहीं जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा किया। जस्टिस धुलिया ने कहा कि आखिर लड़कियाँ लोकतंत्र में कहाँ कुछ ज्यादा माँग रही हैं, उन्हें सिर्फ हिजाब ही तो पहनना है, क्या ये अधिकार उन्हें नहीं दिया जा सकता।
फैसला सुनाते हुए जस्टिस धुलिया ने कहा कि स्कूल गेट पर हिजाब उतरवाना छात्राओं की निजता और सम्मान का हनन है। ऐसा करवाना मतलब अनुच्छेद 19(1) और 21 का उल्लंघन करना है। उन्हें अधिकार है कि वो अपने सम्मान और निजता को साथ रखें, चाहे फिर वो स्कूल के बाहर हों या फिर क्लासरूम के अंदर।
जस्टिस धुलिया हिजाब के पक्ष में बोलते हुए स्कूल प्रशासन और राज्य से पूछते हैं कि आखिर उन लोगों के लिए लड़कियों की शिक्षा जरूरी है या फिर ड्रेस कोड को लागू करवाना जरूरी है। जस्टिस धुलिया कहते हैं कि हर याचिकाकर्ता चाहता है कि मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनें क्या उन्होंने आपसे लोकतंत्र में कुछ ज्यादा माँग लिया है। ये सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के विरुद्ध कैसे हो गया? या ये शालीनता और संविधान के भाग 3 के किसी प्रावधान के विरुद्ध कैसे है।
जस्टिस धुलिया ने कहा कि लड़की का अधिकार है कि वो घर-बाहर कहीं भी हिजाब पहनें और ये अधिकार स्कूल गेट के बाहर खत्म नहीं हो जाए। लड़की की इज्जत और निजता स्कूल के गेट के बाहर भी उसके साथ होती है और क्लासरूम में भी। ये उसके मौलिक अधिकार हैं। ये कहना कि ये अधिकार क्लासरूम में आकर बदल जाते हैं बिलकुल गलत है।
सुनवाई के दौरान वह बोले कि लड़कियों से स्कूल के बाहर ही हिजाब उतरवा लेना पहले उनकी निजता पर आक्रमण है, फिर उनके सम्मान पर हमला है और फिर उनको धर्मनिरपेक्ष शिक्षा से वंचित रखने जैसा है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में हिजाब मुद्दे पर जहाँ जस्टिस सुधांशु धुलिया की यह राय रही। वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने ने माना कि हिजाब पहनना इस्लाम मजहब का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और राज्य सरकार का आदेश शिक्षा तक पहुँच की भावना के लिहाज से सही है। उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें स्कूल-कॉलेज के प्रबंधनों को यूनिफॉर्म के रूप में हिजाब को बैन करने का अधिकार मिल गया था।
मुस्लिम लड़कियाँ इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं। कोर्ट ने इस मामले में 10 दिन सुनवाई करने के बाद 22 सितंबर को ऑर्डर रिजर्व रख लिया था और आज इस पर बँटा हुआ फैसला दिया। अब इस केस में अंतिम निर्णय सीजेआई करेंगे।
पाकिस्तान के सिंध स्थित जकोबाबाद में एक 13 साल के सिख लड़के से 3 मुस्लिमों ने बलात्कार किया। पुलिस ने दो आरोपितों को पकड़ा, लेकिन वो सिविल लाइन्स थाने से भाग निकले। आरोपितों ने लड़के को मोटरसाइकिल दिलाने का लालच दिया था। इसी बहाने वो उसे लेकर स्थानीय PTCL (पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड) के टेलीफोन एक्सचेंज ऑफिस लेकर गए, जहाँ उसके साथ सामूहिक अप्राकृतिक बलात्कार किया गया।
पाकिस्तान का सिंध वो प्रान्त है, जहाँ हिन्दुओं और सिखों के जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यक लड़कियों के अपहरण की घटनाएँ आम हो गई हैं। थार, उमेरकोट, मीरपुर खास, घोटकी और खैरपुर जैसे क्षेत्रों में हिन्दुओं की ठीक-ठाक जनसंख्या है, लेकिन वो पीड़ित हैं। जुलाई 2019 में सिंध की विधानसभा में हिन्दू लड़कियों के धर्मांतरण को लेकर प्रस्ताव भी आया था। जबरन धर्मांतरण को अपराध बताने वाला बिल विधानसभा से कई बार नकारा जा चुका है।
ताज़ा मामले में आरोपितों की पहचान मोहसिन जमैल और सिद्दीर के रूप में हुई है। एक अन्य अज्ञात है। इन तीनों ने मिल कर बंदूक की नोंक पर सिख लड़के का गैंगरेप किया। इस मामले की FIR तो दर्ज कर ली गई है, लेकिन तीनों ही आरोपित पुलिस की पहुँच से दूर हैं। आरोपितों ने गैंगरेप का वीडियो बना कर पीड़ित के पिता को ब्लैकमेल भी किया। अस्पताल में लड़के का इलाज चल रहा है। पुलिस मामले की जाँच करने की बात कह रही है।
#BreakingNews | 13-year-old Sikh boy gangraped in Pakistan's Jacobabad
पाकिस्तान में इस तरह का ये पहला मामला नहीं है। नवंबर 2021 में सिंध में ही 11 साल के हिन्दू लड़के का उत्पीड़न किया गया था और फिर उसकी हत्या कर दी गई थी। जब 5वीं के उक्त छात्र परिवार गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व में व्यस्त था, तब उसका अपहरण कर लिया गया था। घर से कुछ दूरी पर कुछ घंटे बाद उसका शव बरामद हुआ। गला दबा कर उसकी हत्या की गई थी। सिंध में बाढ़ के बावजूद भी हिन्दू लड़कियों पर अत्याचार नहीं रुक रहा है।
आगामी कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) से गुजरने वाले हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के ऊना और चंबा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लोगों को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, बल्क ड्रग पार्क, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आदि की सौगात दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊना के इंदिरा स्टेडियम में आयोजित रैली में दिल्ली की पूर्व की सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्व की इन्हीं सरकारों के कारण हिमाचल प्रदेश विकास के मामले में अब तक पीछे रहा।
In Una, launching projects related to pharma, education & railways. These will have positive impact on the region's progress. https://t.co/NafVwqSLJt
उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने पहाड़ के लोगों की पीड़ा नहीं समझी। देश में कुछ सरकारें ऐसी रहीं, जिन्होंने आम लोगों के लिए सब सुविधाओं को मुश्किल बना दिया। हिमाचल की माताओं और बहनों को इसे बहुत करीब से देखा है। सड़क के अभाव में अस्पताल जाना मुश्किल होता था। बुजुर्ग अस्पताल नहीं पहुँच पाते थे।
पीएम मोदी ने कहा, “पहले हिमाचल की संसद में कितनी सीटें हैं, इसको देखकर यहाँ के विकास को आँका जाता था। राजनीतिक लाभ देखकर सुविधाएँ दी जाती थीं। अब यह धारणा पूरी तरह से बदल दी गई है। हम आदिवासी क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों के विकास पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।”
कॉन्ग्रेस (Congress) पार्टी के हाईकमान कल्चर पर वार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मेरा हाईकमान जनता है। जनता के आशीर्वाद से ही मैं यहाँ पर हूँ और उनके लिए काम कर रहा हूँ। इस बार हिमाचल में रिवाज बदलेगा और इतिहास बनेगा।”
Delighted to be in Chamba. Numerous initiatives are being launched here which will further Himachal Pradesh's growth. https://t.co/PLixerpOtU
चंबा में बोलते हुए उन्होंने भाजपा की सरकार को अन्य सरकारों से अलग बताया। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा की सरकार डबल इंजन की सरकार है। यह एक ऐसी सरकार है, जो अपनी संस्कृति, विरासत और आस्था का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि चंबा सहित पूरा हिमाचल आस्था और विरासत की भूमि है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन शुरू होने से शक्तिपीठों और अन्य धार्मिक स्थलों के साथ देश के साथ कनेक्टिविटी सुगम हो जाएगी। चिंतापूर्णी माता, नयना देवी, ज्वालाजी देवी, कांगड़ा देवी और आनंदपुर साहिब आना-जाना आसान हो जाएगा।
प्रधानमंत्री ने चंबा में दो हाइड्रोपावर परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इसमें एक 48 मेगावाट की चंजू-III हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और 30 मेगावाट की देवथल चंजू हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों परियोजनाओं से सालाना 27 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। हिमाचल प्रदेश को इन परियोजनाओं से सालाना करीब 110 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की संभावना है।
विश्व के नौंवें सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी गुरुवार (13 अक्टूबर, 2022) को उत्तराखंड के केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुँचे। इस दौरान उन्होंने दोनों मंदिरों को ढाई-ढाई करोड़ रुपए का दान भी दिया। सबसे पहले उन्होंने केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना की, उसके बाद बद्रीनाथ धाम में दर्शन के लिए पहुँचे। दोनों मंदिर की समितियों को 5 करोड़ रुपए दान दिए। मुकेश अंबानी ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड’ के चेयरमैन हैं। 2015 से वो हर साल केदारनाथ-बद्रीनाथ के दौरे पर आते रहे हैं।
मुकेश अंबानी भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। भारत में पहले स्थान पर 10.43 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ गौतम अडानी है, जो दुनिया के चौथे अमीर शख्स भी हैं। वहीं मुकेश अंबानी की संपत्ति फ़िलहाल 7.54 लाख करोड़ रुपए है। कुछ दिनों पहले एक मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हुआ करते थे, लेकिन गौतम अडानी ने उन्हें पीछे छोड़ दिया। अब मुकेश अंबानी अपने बेटे-बेटियों अनंत, आकाश और ईशा में कंपनी की जिम्मेदारियाँ बाँट रहे हैं।
हाल ही में उन्होंने केरल के गुरुवायुर मंदिर जाकर दर्शन किया था, जो भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है। उनके साथ उनके छोटे बेटे आकाश अंबानी की मंगेतर राधिका मर्चेंट भी थीं। वहाँ उन्होंने अन्नदानम (भोजन और प्रसाद के लिए दान) के रूप में 1.51 करोड़ रुपए की कन्निका (दान के रुपए) भी भेंट की। उन्होंने ‘सोपानम (गर्भगृह)’ में जाकर घी भी अर्पित किया था। वहीं सितंबर में वो प्राचीन वेंकटेश्वर मंदिर भी पहुँचे थे, जो तिरुमला के नजदीक है।
#WATCH | Reliance Industries Chairman Mukesh Ambani visited Badrinath Dham and Kedarnath Dham today. He performed puja at both temples. The industrialist donated Rs 5 crores to The Badri-Kedar Temple Committee (BKTC) pic.twitter.com/DTrX4eCPvv
बता दें कि राधिका मर्चेंट ‘Encore Healthcare’ के CEO वीरेन मर्चेंट की बेटी हैं। अंबानी के साथ मंदिरों के दर्शन के लिए RIL के कई अधिकारी भी गए थे। उन्होंने वहाँ भी TTD (तिरुमला तिरुपति देवस्थानम) को 1.5 करोड़ रुपए का चेक दिया था। हालिया उत्तराखंड दौरे में बद्रीनाथ मंदिर समित्ति के उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने उनका स्वागत किया। अंबानी गीता पाठ पूजा का भी हिस्सा बने। उन्होंने केदारनाथ-बद्रीनाथ दौरे में 5G सुविधा के साथ-साथ डॉक्टरों की तैनाती और ICU बनवाने का भी वादा किया है।
प्रोपेगेंडा पत्रकार राना अयूब के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गाजियाबाद की विशेष अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी है। डोनेशन के नाम पर पैसे इकट्ठा करके उनकी हेर-फेर करने के इल्जाम में अयूब के विरुद्ध सितंबर 2021 में इंदिरापुरम थाने में एफआईआर हुई थी। इसके अलावा ईडी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए फरवरी में 1.77 करोड़ रुपए जब्त किए थे।
बहन और पिता के अकॉउंट में डलवाए लाखों रुपए
राना के विरुद्ध हुई एफआईर में कहा गया था कि राना अयूब ने ऑनलाइन क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म केटो (Ketto) पर कुल 2,69,44,680 रुपए का फंड जुटाया था। ये धनराशि उसकी बहन और पिता के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इस राशि में से 72,01,786 रुपए उसके अपने बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके अलावा उसकी बहन इफ्फत शेख के अकाउंट में 37,15,072 और उसके पिता मोहम्मद अयूब वक्फ के बैंक अकाउंट में 1,60,27,822 रुपए थे। बाद में उसकी बहन और पिता के अकाउंट से ये सभी धनराशि उसके खुद के अकाउउंट में ट्रांसफर कर दी गईं।
प्लानिंग के साथ लिया डोनेशन
अयूब ने ED के पास सिर्फ 31,16,770 रुपए के खर्च का ब्यौरा दिया था। दस्तावेजों की पड़ताल के बाद सामने आया कि फंड में से सिर्फ 17,66,970 रुपए ही खर्च किए गए हैं। एजेंसी ने जाँच के बाद यह भी बताया था कि राना अयूब ने राहत कार्यों में पैसा खर्च होने के सबूत देने के लिए फर्जी बिल बनवाए थे। निजी सफर के लिए किए गए खर्च को राहत कार्य के लिए बताया गया था।
एजेंसी ने कहा था कि जाँच में साफ होता है कि राना अयूब ने पूरी प्लानिंग और व्यवस्थित तरीके से चैरिटी के नाम पर फंड जुटाया, और फंड का इस्तेमाल पूरी तरह चैरिटी के लिए नहीं किया। एजेंसी ने कहा कि राना अयूब ने फंड्स में से 50 लाख रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा कराए और उन्हें राहत कार्य में इस्तेमाल नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने PM CARES और CM Relief फंड में कुल 74.50 लाख रुपए जमा किए।
केटो ने दानदाताओं को बताई राना अयूब की धोखाधड़ी
इन आरोपों के बाद खुद केटो प्लेटफॉर्म ने भी राना अयूब के कैंपेन में फंड देने वालों को मेल भेजकर बताया था कि कैसे राना ने उनके साथ धोखाधड़ी की और उनका पैसा उस उद्देश्य के लिए नहीं प्रयोग किया जिसके नाम पर उसे लिया गया था। जानकारी के मुताबिक राना अयूब ने तीन कैंपेन चलाए। एक झुग्गीवासियों और किसानों के लिए; दूसरा असम, बिहार और महाराष्ट्र में राहत कार्य के लिए और तीसरा भारत में कोविड -19 प्रभावित लोगों की मदद के लिए। इन्हीं तीनों अभियानों के नाम पर पैसा उठाया गया और फिर उनकी हेरफेर हुई।
आम आदमी पार्टी (Aam Aadami Party) के गुजरात प्रमुख गोपाल इटालिया (Gopal Italia) को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इटालिया राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की नोटिस के बाद दिल्ली पहुँचे थे। NCW के ऑफिस के बाहर से ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें सरिता विहार थाने ले गई है।
गोपाल इटालिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के गुजरात दौरे को नौटंकी बताया था। इसके साथ ही उन्होंने पीएम के लिए ‘नीच’ जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। यह वीडियो वायरल हो गया। एक अन्य वीडियो में उन्होंने मंदिरों को शोषण का घर बताया था। राष्ट्रीय महिला आयोग ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए इटालिया को नोटिस भेजकर दिल्ली बुलाया था।
इन वीडियो के वायरल होते ही भाजपा ने आम आदमी पार्टी और इसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को निशाना साधना शुरू कर दिया था। इटालिया को हिरासत में लेने के बाद AAP सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने भाजपा पर निशाना साधा है।
संजय सिंह ने ट्वीट कर कहा, “भाजपा को पटेल समाज के लोगों से इतनी नफ़रत क्यों है? गुजरात में गोपाल इटालिया की लोकप्रियता बढ़ने लगी, चुनाव में हार का डर सताने लगा तो दिल्ली में BJP की पुलिस ने गोपाल इटालिया को गिरफ़्तार कर लिया। पटेल समाज इस अपमान का बदला ज़रूर लेगा।”
.@BJP4India को पटेल समाज के लोगों से इतनी नफ़रत क्यों है? गुजरात में @Gopal_Italia की लोकप्रियता बढ़ने लगी, चुनाव में हार का डर सताने लगा तो दिल्ली में BJP की पुलिस ने गोपाल इटालिया को गिरफ़्तार कर लिया। पटेल समाज इस अपमान का बदला ज़रूर लेगा।#isupportGopalItaliyapic.twitter.com/raFckRkv2b
दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से पहले गोपाल इटालिया ने ट्वीट कर NCW पर धमकाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय महिला आयोग की चीफ़ मुझे जेल में डालने की धमकी दे रही है। मोदी सरकार पटेल समाज को जेल के सिवा दे ही क्या सकती है। बीजेपी पाटीदार समाज से नफ़रत करती है। मैं सरदार पटेल का वंशज हूँ। तुम्हारी जेलों से नहीं डरता। डाल दो मुझे जेल में। इन्होंने पुलिस को भी बुला लिया है। मुझे धमका रहे है।”
. @NCWIndia चीफ़ मुझे जेल में डालने की धमकी दे रही है। मोदी सरकार पटेल समाज को जेल के सिवा दे ही क्या सकती है। बीजेपी पाटीदार समाज से नफ़रत करती है। मैं सरदार पटेल का वंशज हूँ। तुम्हारी जेलों से नहीं डरता। डाल दो मुझे जेल में। इन्होंने पुलिस को भी बुला लिया है। मुजे धमका रहे है।
उधर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने उल्टा गोपाल इटालिया पर ही आरोप लगाया है। रेखा शर्मा ने कहा कि उनकी ऑफिस के बार आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता जुट कर उन्हें धमका रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोपाल इटालिया के समर्थक जबरदस्ती ऑफिस में घुसने की कोशिश की।
इटालिया पर कार्रवाई को लेकर रेखा शर्मा ने कहा, “उनका (गोपाल इटालिया का) बयान और उनका लिखित बयान मेल नहीं खाता है। उन्होंने उचित जवाब नहीं दिया है। मैंने पुलिस से भी कहा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि वह कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित करने के लिए माहौल बना रहा था।”
रेखा शर्मा ने आगे कहा, उन्होंने (इटालिया ने) समन मिलने से इनकार किया, लेकिन उनका जवाब तैयार था। उन्होंने वीडियो में भी अपनी उपस्थिति से इनकार किया, लेकिन अपने जवाब में उन्होंने ट्वीट कर दिया। उन्होंने दावा किया था कि इस वीडियो में दिख रहा शख्स वे नहीं हैं।”
His statement & written statement don’t match. He hasn’t given a proper reply. I’ve told Police too that action should be taken against him because he was creating an atmosphere to impact the law&order situation. His supporters attempted to enter(NCW office) forcefully: NCW chief
बता दें कि कुछ दिन पहले भाजपा के सोशल मीडिया इंचार्ज अमित मालवीय ने इटालिया का वीडियो ट्वीट किया था। यह वीडियो साल 2019 का बताया जा रहा है। 40 सेकेंड के इस वीडियो में इटालिया पीएम मोदी के लिए 8 बार अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजकर 13 अक्टूबर 2022 को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया था।
वहीं, भाजपा ने गोपाल इटालिया का एक और वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह कह रहे हैं, “मैं माताओं और बहनों से अपील करता हूँ कि कथाओं और मंदिरों में आपको कुछ नहीं मिलेगा। ये शोषण के घर हैं। अगर आपको आपका अधिकार चाहिए, इस देश पर आपको शासन करना हो, समान हक चाहिए तो कथाओं में नाचने की बजाय मेरी माताओं-बहनों ये (हाथ में एक किताब की तरफ इशारा करते हुए) पढ़ो।”
‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)’ के अध्यक्ष पद पर अब सौरव गांगुली की जगह रोजर बिन्नी लेंगे। सौरव गांगुली अक्टूबर 2019 में BCCI के अध्यक्ष बने थे और 3 साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने साफ़ कर दिया है वो अगले चुनाव का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई हमेशा-हमेशा के लिए नहीं खेल सकता और न ही प्रशासक रह सकता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट प्रशासक के रूप में उन्होंने इस जिम्मेदारी का लुत्फ़ उठाया।
सौरव गांगुली ने ‘बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन’ के अध्यक्ष के रूप में अपने 5 वर्ष के कार्यकाल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे पदों पर रहने के बाद आपको फिर उन्हें छोड़ना होता है और जाना होता है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासक के रूप में आपको ज्यादा से ज्यादा योगदान देना होता है और टीम की बेहतरी के लिए कार्य करना होता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खिलाड़ी रहने के कारण उन्हें इन चीजों का अनुभव था।
पूर्व ऑलराउंडर रोजर बिन्नी अब BCCI का अध्यक्ष पद सँभालेंगे, जो 1983 की विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं। वहीं अरुण धूमल की जगह भाजपा विधायक आशीष शेलार को संस्था का कोषाध्यक्ष बनाया जा सकता है। जय शाह BCCI के सेक्रेटरी के पद पर बने रहेंगे। मुंबई के ट्राइडेंट होटल में मंगलवार (12 अक्टूबर, 2022) को संस्था के देश भर के अधिकारी जुटे और नॉमिनेशंस फाइल किए गए। 18 अक्टूबर को चुनाव होना है।
कॉन्ग्रेस नेता राजीव शुक्ला BCCI के उपाध्यक्ष के पद पर बरक़रार रहेंगे। 67 वर्षीय रोजर बिन्नी फ़िलहाल ‘कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन’ के अध्यक्ष हैं। सौरव गांगुली ने भविष्य में ‘बड़ा करने’ की बात की है। माना जा रहा है कि ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) में उन्हें अध्यक्ष का पद मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सौरव गांगुली दोबारा अध्यक्ष न बनाए जाने के कारण नाराज़ हैं और BCCI से उनकी तकरार चल रही है।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा है, “कुछ बड़ा करने के लिए आपको बहुत कुछ देना पड़ता है। इतिहास में मेरा विश्वास नहीं रहा है, लेकिन मेरी नज़र इस बात पर रही है कि पूरब में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले प्रतिभाओं की कमी रही है। कोई भी एक दिन में अंबानी या नरेंद्र मोदी नहीं बन जाता है। आपको ऐसा बनने के लिए सालों तक मेहनत करनी पड़ती है। मैं 15 साल तक देश के लिए खेलता रहा, जो मेरे जीवन का सबसे अच्छा समय था।”
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक हिन्दू मंदिर में दावत के बाद बची हड्डियाँ और जूठा माँस फेंकने का मामला सामने आया है। इसका आरोप मंदिर के बगल मैरिज हॉल चलाने वाले साहिल नाम के व्यक्ति पर लगा है। घटना की पुलिस में शिकायत बजरंग दल ने दर्ज करवाई है। आरोपित साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामला बुधवार (12 अक्टूबर, 2022) का है।
बजरंग दल के शिवम दुबे द्वारा इस घटना की शिकायत थाना जगदीशपुरा में की गई है। शिकायत के अनुसार, भगत की झोली नगला गूलर इलाके में सार्वजनिक दुर्गा माता का मंदिर है। बताया गया है कि इसी मंदिर से सटा हुआ ‘साहिल मैरिज होम’ है, जिसका मालिक साहिल है। आगे आरोप लगाया गया है कि इस मैरिज हाल में आए दिन माँस और मदिरा बनाई जाती है। शिकायत में वासिद का भी नाम लिखा हुआ है। ये सभी आगरा के ही सुभाष पुरम इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
घटना के दिन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि 12 अक्टूबर को जब पुजारी ने मंदिर खोला तो अंदर माँस के टुकड़े और हड्डियाँ फेंकी हुई थीं। बताया जा रहा है कि पुजारी ने इसकी जानकारी आस-पास रहने वाले श्रद्धालुओं को दी। सभी एकजुट हो कर शिकायत करने जब साहिल के पास गए तब उसने लोगों को गंदी-गंदी गालियाँ दीं और लोगों से लड़ाई झगड़े पर आमादा हो गया। आरोप है कि पहले भी कई बार शिकायत किए जाने के बाद भी साहिल ने उसे अनसुना कर दिया।
ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। बजरंग दल ने अपनी शिकायत में मैरिज होम के मालिक साहिल के इस काम को अपनी आस्था पर चोट बताया है। शिकायत में प्रशासन से माँग की गई है कि दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए मैरिज होम को बंद करवाया जाए। इस घटना पर हिन्दू संगठनों के साथ आस-पास के श्रद्धालुओं ने भी नाराजगी जताई है।
आक्रोशित श्रद्धालुओं को समझाता पुलिस बल
ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता शिवम ने बताया कि आरोपित साहिल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि घटना से पहले वाली रात में उसी मैरिज होम में किसी मुस्लिम द्वारा दी गई दावत थी। हालाँकि, शिवम ने कहा कि मैरिज होम से मंदिर में हड्डियाँ साहिल की ही गलती से आईं, इसलिए शिकायत में उसके खिलाफ ही कार्रवाई की माँग की गई है।
भविष्य में कार्यक्रम से पहले लेनी होगी अनुमति
ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO जगदीशपुरा ने बताया कि आरोपित साहिल का शांतिभंग की धारा 151 में चालान किया गया था। उन्होंने कहा कि साहिल ने लिखित तौर पर दिया है कि आगे से मैरिज होम में किसी भी आयोजन के लिए वो प्रशासन से पहले अनुमति लेगा।
केरल के पतनमतिट्टा स्थित एलान्थूर में दो महिलाओं की हत्या कर के ‘कुर्बानी’ देने के मामले में अब नरमांस-भक्षण (Cannbalism) का मामला सामने आया है। पुलिस जाँच कर रही है। कोच्चि के शहर पुलिस कमिश्नर सीएच नागराजू ने बताया कि पता चला है कि आरोपित ने एक मृतक का मांस खाया था, जिसके बाद पुलिस सबूत जुटाने में लगी है। आरोपित ने मृतक के शरीर के कई टुकड़े खाए थे। DNA विश्लेषण के अलावा अन्य वैज्ञानिक जाँच कराए जा रहे हैं।
इस मामले में अब तक एलान्थूर के रहने वाले 68 वर्षीय भगवाल सिंह, उसकी 59 वर्षीय पत्नी लैला और पेरुम्बावूर के रहने वाले फकीर मोहम्मद शफी उर्फ़ रशीद को गिरफ्तार किया गया है। इन तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन्होंने तमिलनाडु के के धरमपुरी की रहने वाली 52 वर्षीय पद्मा और थ्रिसुर की 50 वर्षीय रोज़लिन वर्गीज का क़त्ल ‘कुर्बानी’ देने के लिए किया था। आगे की जाँच और सबूत जुटाने के लिए पुलिस इन तीनों की 12 दिन की कस्टडी की माँग रखेगी।
केरल में पिछले कुछ दिनों में लोगों के गायब होने वाली शिकायतों की फाइलें अब फिर से खोली जाएँगी, क्योंकि हो सकता है कि उनका ताल्लुक इस केस से निकल आए। वहीं राज्य की सत्ताधारी पार्टी CPM ने सरकार से माँग की है कि अन्धविश्वास और काला जादू से निपटने के लिए नया कानून बनाया जाए। इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड शफी है। उसने ही आर्थिक समस्याओं से जूझते दंपति को धन के लिए महिलाओं की ‘कुर्बानी’ देने को कहा था। मीडिया शफी को तांत्रिक बता रहा है और हत्याओं को ‘बलि’ कह कर पेश कर रहा है।
लैला ने बताया है कि शफी ने दंपति से कहा था कि अगर अमीर बनना है तो ‘कुर्बानी’ देने के बाद मृत महिला की लाश के कुछ हिस्से खाने भी पड़ेंगे, ताकि इस प्रक्रिया का पूरा परिणाम मिले। लॉटरी बेच कर गुजर-बसर करने वाली पद्मा कोच्चि के एलमकुलम में एक किराए के कमरे में रहती थी। 26 सितंबर को शफी ने उसे 15,000 रुपए देने का लालच दिया और दंपति के घर ले गया। सीसीटीवी फुटेज में पद्मा को शफी के कार में बैठते हुए देखा जा सकता है।
इसी तरह एक अन्य मृतक रोज़लिन वर्गीज को शफी कोट्टायम से कार में बिठा कर ले गया था। उक्त महिला को उसने एक एडल्ट फिल्म में काम करने के बदले 10 लाख रुपए देने का लालच दिया था। उसे दंपति के घर ले जाया गया और बिस्तर से बाँध कर गला घोंट दिया गया। शफी ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए और गला भी रेत डाला। फिर महिला के शव को टुकड़े-टुकड़े कर के एक गड्ढे में डाल दिया गया।
इसी तरह का कुछ पद्मा के साथ भी किया गया। अदालत को दी गई पुलिस की रिपोर्ट में धनवान बनने के लिए जादू-टोने का जिक्र है, लेकिन नरमांस भक्षण का नहीं। शफी ने महिलाओं को सेक्स के बदले पैसे दिलाने का लालच दिया था। पद्मा की हत्या से पहले उसके शरीर पर कई वार किए गए थे। फिर एक बाल्टी में उसके शरीर के टुकड़े डाल दिए गए थे। पुलिस ने शफी को विकृत और सनकी बताया है, जो एक हार्डकोर अपराधी है।
इससे पहले 2020 में शफी एक 75 वर्ष की बजुर्ग महिला का बलात्कार कर चुका है। उसने महिला के शरीर पर कई बार वार किया था, जिससे जगह-जगह जख्म हो गए थे। पुलिस ने उसे यौन विकृति वाला अपराधी करार दिया है। दंपति और शफी के बीच हुए रुपए के लेनदेन को भी पुलिस ट्रेस कर रही है। किसी चौथी पार्टी के इस मामले में शामिल होने को लेकर भी जाँच चल रही है। शफी को दंपति से 3 लाख रुपए मिले थे।
दोनों ही महिलाओं को शाम के 5 बजे मारा गया था और देर रात उनकी लाशों को ठिकाने लगाया गया था। भगवाल सिंह और लैला के घर से विभिन्न गड्ढों से पुलिस को शव के टुकड़ों के 61 पैकेट्स मिले हैं। पद्मा को प्रताड़ित कर के उसके गुप्तांगों में चाकू मारा गया था। शफी मानव तस्करी भी करता था। 52 वर्षीय शफी स्कूल ड्रॉपआउट है। 2019 में काला जादू के खिलाफ केरल में बिल आया था, लेकिन विधानसभा में पेश नहीं हो सका।
शफी ने ‘श्रीदेवी’ नाम से फेक फेसबुक अकाउंट बता कर भगवाल सिंह को जाल में फाँसा था। उसने सिंह के सामने ही उसकी बीवी के साथ सेक्स भी किया। इस दौरान वो हाथ जोड़ कर देखता रहा। शफी इन सबको धनवान बनने की प्रक्रिया का हिस्सा बताता था। रोजलिन के स्तन को काट कर निकाल लिया गया था। शफी पहले के रेप केस में गिरफ्तार हुआ था, लेकिन फरवरी 2021 में उसे जमानत मिल गई थी। 6ठी पास शफी की एक पोती भी है।
बीते कुछ सालों में एक पैटर्न बहुत नॉर्मल हुआ है- हिंदू त्योहारों के आते ही हिंदू मान्यतों पर प्रहार करने का। पहले ये काम बॉलीवुड वाले अपनी फिल्मों के जरिए करते थे, फिर ये सब सोशल मीडिया पर होना शुरू हुआ और अब हाल ये है कि कुछ सेकेंडों वाले विज्ञापनों में भी हिंदूफोबिक कंटेंट क्रिएटिविटी के नाम पर परोस दिया जाता है।
हिंदू परंपराओं में आमिर खान चाहते हैं बदलाव
हाल में ये कारनामा लाल सिंह चड्ढा वाले आमिर खान ने किया। फिल्म के पर्दे पर बुरी तरह पिटने के बाद आमिर खान ने एयूबैंक (AU Bank) का एड किया। अब बैंक का एड है तो उस क्षेत्र में ग्राहकों को आने वाली समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए, विज्ञापन में ये बताया जाना चाहिए कि कैसे एयू बैंक अन्य बैंकों से अलग सुविधा देगा…।
लेकिन नहीं! एड में दिखाया क्या गया? एक विवाह का सीन, जिसमें बिदाई लड़के की होती है और गृह प्रवेश में पहला कदम लड़की की उससे रखवाया जाता है। ये सब ड्रामा केवल इसलिए क्योंकि बैंक की टैगलाइन थी कि ‘बदलाव हमसे हैं।‘
इसी टैगलाइन को चरितार्थ करने के लिए आमिर खान और कियारा आडवाणी ने हिंदू रीति-रिवाजों में बदलाव दिखा दिया जैसे एक लड़के का घर जमाई होना क्रांति है जबकि हकीकत यह है कि जरूरत पड़ने पर पति का पत्नी के घर पर रहना हमेशा से एक सामान्य बात रही है। फिर भी विज्ञापन में इस बिदाई के कॉन्सेप्ट को ऐसे दर्शाया कि सालों से एक गलत प्रथा चलती आई है और अब इसमें बदलाव के लिए मुहिम उन्होंने छेड़ी है।
I just fail to understand since when AU Bank have become responsible for changing social & religious traditions⁉️
दिलचस्प चीज ये है कि बॉलीवुड के लिए ‘मिस्टर पर्फेक्ट’ आमिर खान अपनी फिल्मों में हिंदू देवी-देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठा देते हैं, विज्ञापन में रीति-रिवाजों को कटघरे में खड़ा कर देते हैं, मगर जब उनसे सवाल मजहब को लेकर पूछा जाता है तो वो इसे ‘पर्सनल मैटर’ कहकर किनारा कर लेते हैं। उनकी फिल्मों या एड में भी कभी तीन तलाक पर या हलाला पर सवाल नहीं उठता जबकि ये मुद्दे वो हैं जिनसे वाकई मुस्लिम समाज की महिलाएँ त्रस्त हैं और सालों से इसके कारण पीड़ित होती रही हैं।
पटाखे सड़क पर जलाने के लिए नहीं होते
ये पहला एड नहीं है जहाँ वो हिंदू रिवाज पर ज्ञान देते नजर आए। कुछ साल पहले भी आमिर खान ने ‘सीट टायर्स’ का एड दिया था जिसमें दिखाया था कैसे रोड गाड़ी चलाने के लिए होती है, वहाँ पटाखे नहीं जलाए जाते। अब कोई उनसे अगर जाकर पूछे कि जब रोड पटाखे जलाने के लिए सही नहीं होती तो क्या नमाज पढ़ना वहाँ उचित हो सकता है? वो इस बारे में आखिर क्यों कुछ नहीं बोलते या उन्हें ऐसा लगता ही नहीं कि सड़क किनारे नमाज पढ़ने से यातायात बाधित हो सकते हैं?
कन्यादान पर सवाल उठाने वाली आलिया भट्ट
याद रहे कि ये दोमुँहा रवैया सिर्फ केवल आमिर खान का नहीं हैं। वो अकेले इस दौर में हिंदू परंपराओं में बदलाव के पक्षकार नहीं बने बैठे। पिछले साल याद है आपको जब आलिया भट्ट एक ए़ड में कन्यादान के कॉन्सेप्ट को बदलने की अपील करती आई थीं। अपने एड में आलिया भट्ट ने दिखाया था कि हिंदू किस तरह सालों से लड़कियों को दान करने की चीज बताकर दान करते आए हैं जबकि असल में लड़कियाँ मान करने की चीज हैं।
उनका यह एड एक पूरे धड़े को उत्कृष्ट सोच का उदाहरण लगा था। वहीं हिंदुओं ने इस पर सवाल उठाकर आलिया को समझाया था कि हिंदू धर्म में कन्या दान के मायने क्या होते हैं और जिन्हें देश का राष्ट्रपति का नाम तक एक समय में नहीं पता था वो हिंदू धर्म पर ज्ञान न ही दें।
तनिष्क का प्रोपेगेंडा
आलिया भट्ट हों या आमिर खान… बॉलीवुड वालों ने हमेशा से ज्ञान देने के नाम पर हिंदू रिवाजों पर प्रश्न लगाया है और एक विशेष समुदाय को शांत, शालीन और सभ्य दिखाया है।
याद करिए तनिष्क के उस उदाहरण को जिसमें एक हिंदू दुल्हन के लिए गोदभराई का पूरा प्रोग्राम मुस्लिम परिवार द्वारा आयोजित किया जाता है और ऐसे दर्शाया जाता है कि हिंदू औरतें अगर मुस्लिम परिवार में जाती हैं तो उन्हें ऐसा ही सम्मान मिलता है।
हास्यास्पद बात ये है कि तनिष्क का यह एड उस समय में आता है जब हिंदू समाज लव जिहाद जैसी घटनाओं पर लगातार जानकारी दे रहा होता है और इस बात पर चर्चा तेज होती है कि आखिर कैसे हिंदू महिलाओं को फँसाकर, उनका धर्मांतरण कराया जाता है, उनसे निकाह होता है और फिर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।
मालूम रहे कि स्क्रीन पर हिंदूघृणा परोसने का काम पहले फिल्मों के जरिए धड़ल्लले से हो पाता था। मगर पिछले कुछ समय से हिंदू जागरूक हुए और उन्होंने सवाल उठाकर फिल्मों का बॉयकॉट शुरू किया तो ऐसे लोगों में चिंता बढ़ गई कि अब कैसे प्रोपेगेंडा फैलाया जाए। ऐसे में इन्होंने ये नया तरीका खोजा- विज्ञापनों का।
विज्ञापन का काम वैसे अपने दर्शकों को अपना उपभोक्ता बनाना है, लेकिन उसमें भी प्रोपेगेंडा का तड़का मिले तो इनके लिए वही सबसे बेस्ट एड हो जाता है। आजकर विज्ञापन बनाते हुए ध्यान रखा जाता है कि कैसे भी मुस्लिम समुदाय नेगेटिव शेड में न दिखा दिया जाए और गलती से भी हिंदू सरल, शांत न नजर आए।
रेड लेबल की हिंदू घृणा
नहीं यकीन तो याद करिए रेड लेबल के कुछ पुराने विज्ञापनों को। चायपत्ती की इतनी बड़ी कंपनी ने एक नहीं दो बार अपने विज्ञापनों में हिंदू विरोधी कंटेंट दिखाया था।
एक एड से बताया गया कैसे हिंदू गणेश मूर्ति लेने आता है लेकिन उससे ज्यादा ज्ञान मुस्लिम को होता है। मुस्लिम जैसे ही अपनी टोपी सिर पर पहनता हिंदू उससे भागने लगता है। फिर मुस्लिम व्यक्ति इतना अच्छा होता है कि उसे बुलाकर चाय पिलाता और हिंदू की बुद्धि बदलती है, वो उन्हीं से मूर्ति खरीदता है।
ऐसे ही दूसरे एड में हिंदू दंपती हैं जो अपने घर की चाबी भूल गए हैं। उनके घर के बगल में मुस्लिम औरत उन्हें चाय के लिए बुला रही है। पर हिंदू अपनी सोच के कारण उनके पास जाने से मना करते हैं। फिर चाय की खुशबू आती है, उन्हें एहसास कराती है कि हिंदू-मुस्लिम कुछ नहीं होता..।
बच्चों का इस्तेमाल
विज्ञापनों के जरिए हिंदुओं रीति-रिवाजों पर हमला, मान्यताओं को ठेस पहुँचाने का काम, त्योहारों पर सवाल उठाना….बेहद आम होता जा रहा है। अपने प्रोपेगेंडे को फैलाने के लिए ये लोग बच्चों को भी प्रयोग में लाते हैं। सर्फ एक्सेल के एड में दिखता है कि हिंदू लड़की मुस्लिम लड़के को रंगों से बचाते हुए मस्जिद ले जाती है। वहीं दूसरे एड में संदेश दिया जाता है कि शरादों के समय खाना ब्रह्माण को खिलाओ या फिर मौलवी को बात एक ही है।
ऐसे तमाम विज्ञापनों के उदाहरण आज इंटरनेट पर मौजूद हैं जिनका उद्देश्य केवल और केवल हिंदू घृणा का प्रचार-प्रसार करना है। बच्चों से बुजुर्गों का प्रयोग करते दिखाया जा रहा है कि हिंदू हमेशा गलत ही रहे। ऐसा लगता है कि आज के समय में विज्ञापन बनाने का मानक ही यह रह गया हो कि या तो हिंदू परंपराओं पर सवाल उठाकर उन्हें बदलने का संदेश दो, वरना ये दिखाओ की कैसे देश के हिंदुओं की सोच मुस्लिमों के प्रति बदली जानी चाहिए।