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‘अखिलेश यादव की शह पर आजम खान ने किए अपराध, उसका परिवार चोर-डकैतों का’: CM योगी के मुरीद हुए कॉन्ग्रेस नेता, कहा – वो दिला रहे इंसाफ

एक ओर जहाँ कानूनी रूप से समाजवादी पार्टी नेता और रामपुर विधायक आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता नवाब सैय्यद मोहम्मद काजिम अली खान उर्फ नावेद मियाँ ने आजम खान पर निशाना साधा है। नावेद मियाँ ने कहा है समाजवादी पार्टी की सरकार में अखिलेश यादव की शह पर आजम खान ने अपराध किए हैं।

नावेद मियाँ ने आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि समाजवादी सरकार में आजम खान को अपराध करने का लाइसेंस नहीं दिया गया होता तो आज उन्हें बचाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राजभवन में गुहार नहीं लगानी पड़ती। उन्होंने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में हुई खुदाई को लेकर कहा कि अभी तो बहुत सी चीजें बरामद होंगी। उन्होंने कहा कि ये शिकायतें 2017 से हो रही हैं और उन्हें लगता है कि प्रशासन के पास सारे सबूत थे, तभी आजम खान के खिलाफ जाँच शुरू हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ़ करते हुए कहा कि राज्य सरकार का बहुत अच्छा रोल रहा है और सबसे अच्छा काम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रहा, जिन्हें वो उन्हें खासतौर से बधाई देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने आखिरकार हमें इंसाफ दे ही दिया। नावेद मियाँ यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि आजम खान के साथ जो रहा है, वह इंसाफ है और हमें इस इंसाफ की कई सालों से जरूरत थी। बकौल नावेद मियाँ, लोगों की आँखों मे जो पट्टी बंधी हुई थी वह अब उतर गई होगी। उन्होंने कहा कि आजम खान और इसका परिवार सबसे बड़ा चोर और डकैत है, ये अब सबके सामने आ गया है।

उन्होंने आजम खान की करतूतों के लिए तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सपा शासन में रामपुर में लोकतंत्र नहीं, तानाशाही का दौर था और यहाँ जुल्म ढाए जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों से रोजगार छीना जा रहा था और सरकारी जमीन पर कब्जा करने के अलावा झूठे मुकदमों में चरस के साथ लोगों को जेल भेजा जा रहा था। उन्होंने कहा कि तब यहाँ की जनता की चीखें अखिलेश यादव नहीं सुन रहे थे और उन्हें लोगों की आँखों के आँसू नहीं दिख रहे थे।

पूर्व मंत्री नावेद मियाँ ने आगे कहा कि अब आजम खान और उनके परिवार को गुनाहों की सजा मिल रही है तो अखिलेश यादव उनके बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने इसका कारण बताया कि जुर्म अखिलेश यादव ने कराए हैं, इसलिए वो भी बराबर के जिम्मेदार हैं और उन्हें आजम खान और उनके परिवार का बचाव नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रेशमा अफरोज द्वारा रामपुर की तिजोरी बरामद करने को लेकर मुरादाबाद कमिश्नर को पत्र लिखे जाने के मामले में नावेद मियाँ ने कहा, “रेशमा अफरोज ने कमिश्नर को सही पत्र लिखा है। तिजोरी चोरी होने के मामले में साल 2005 में मुकदमा दर्ज हुआ था। लेकिन, आजम खान ने अपनी सत्ता के उपयोग से मामला रफा-दफा कर दिया। जो तिजोरी चोरी हुई थी उसमें रखे साढ़े ग्यारह लाख रुपए और कारतूस आजम लेकर गया है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर आजम खान के घर की कुर्की होती है तो उन्हें लगता है कि यूनिवर्सिटी से भी ज्यादा चोरी का सामान उसके घर में मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि नगर पालिका का बहुत सारा चोरी हुआ सामान आजम खान के घर में ही मिलेगा। बता दें कि बीते दिनों आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी में हुई खुदाई के दौरान नगरपालिका की चोरी हुई करोड़ों रुपए की मशीन और राजकीय ओरिएंटल कॉलेज की लाइब्रेरी से चोरी हुई कई ऐतिहासिक किताबें मिली थीं। इसके बाद से आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चोरी के कई मामलों में मुकदमा दर्ज कर जाँच की जा रही है।

‘दुपट्टा तक सिर पर नहीं है, पाकिस्तान को लूटकर खा गई’ : लंदन में PAK मंत्री मरियम के पीछे पड़ी भीड़, लगे- ‘चोरनी-चोरनी’ के नारे; Video

पाकिस्तान की सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब (Marriyum Aurangzeb) का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो लंदन का है, जिसमें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के समर्थक मरियम के खिलाफ नारा लगा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरियम लंदन के एक कॉफी शॉप में गईं थीं कि तभी पाकिस्तानियों ने उन्हें वहाँ घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। देख सकते हैं कि चारों ओर से घिरीं मरियम को लोग चोरनी तक बोल रहे हैं, लेकिन पाक मंत्री नारेबाजी का कोई जवाब नहीं देतीं। वह अपना फोन चलाती रहती हैं और वीडियो भी बनाती हैं।

इस घटना के बारे में पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन‘ ने रिपोर्ट को प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने मरियम की तारीफ करते हुए लिखा कि मंत्री ने बहुत ही शांति व संयम से इस स्थिति को संभाला। इसके अलावा घटना की वीडियो पाकिस्तानी पत्रकार सैयद तलत हुसैन ने भी शेयर की है।

एक अन्य वीडियो में मरियम को बीच सड़क पर ‘चोरनी, चोरनी’ कहते हुए सुना जा सकता है। ये वीडियो मरियम के कॉफी हाउस में घुसने से पहले की है। इसमें दिख रहा है कि मरियम के आगे-पीछे उग्र भीड़ उनका पीछा कर रही है। वहीं एक महिला उनको कह रही है,

“देखो ये मरियम औरंगजेब है, जो टेलीविजन पर बैठ कर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन इसके सिर पर दुपट्टा नहीं है। ये चोरों की सरदारनी है। चोरनी, चोरनी। पाकिस्तान को लूटकर खा गए। पाकिस्तानियों का पैसा खाकर सेंट्रल लंदन में घूम रही है। पाकिस्तानियों का खून चूसकर, यहाँ फिर रहे हैं ये। लानत है इस पर।”

इसके बाद मरियम के पीछे आ रही भीड़ ने उनके खिलाफ चोर-चोर के नारे लगाए।

वहीं, इस घटना को लेकर मरियम ने कहा, “इमरान खान की नफरत और विभाजनकारी राजनीति का हमारे भाइयों और बहनों पर जहरीला प्रभाव पड़ा है, यह देखकर काफी दुख हुआ।” हम इमरान खान की जहरीली राजनीति का मुकाबला करने और लोगों को एक साथ लाने के लिए अपना काम जारी रखेंगे।”

बताया जा रहा है कि लंदन में मरियम के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोग पाकिस्तान में बाढ़ के कारण मची तबाही से बेहद दुखी थे। इसी कारण उन्होंने पाकिस्तान की आलोचना की और वहाँ कि सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।

जैकलीन फर्नांडिस को अदालत से मिली अंतरिम जमानत, ₹200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का है मामला: अब कोर्ट ने ED से माँगा जवाब

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) को महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अंतरिम जमानत मिल गई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार (26 सितंबर, 2022) को 50,000 रुपए के निजी बॉन्ड पर यह मंजूर की। जैकलीन 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में आरोपित के तौर पर अदालत में पेश हुई थीं। एक्ट्रेस को 26 सितंबर, 2022 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने जैकलीन की जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब माँगा है। जब तक ईडी अपना जवाब दाखिल नहीं करती, तब तक उनकी नियमित जमानत के लिए याचिका अदालत में लंबित रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर, 2022 को होगी।

इससे पहले 200 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 14 सितंबर, 2022 को जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) से लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की थी। एजेंसी को एक्ट्रेस के बयान में कई तरह की खामियाँ मिली थीं। दिल्ली पुलिस ने जैकलीन और पिंकी ईरानी के जवाबों में कई तरह की खामियाँ पाई थीं। पिंकी ईरानी वही है, जिसने जैकलीन को सुकेश से मिलवाया था। इसके लिए उसे करोड़ों रुपए दिए गए थे।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने 17 अगस्त, 2022 को सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैकलीन फर्नांडिस को आरोपित बनाया था। ED ने कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी। इससे पहले जैकलीन ने कहा था कि महाठग सुकेश ने खुद को सन टीवी के मालिक और चेन्नई के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का सदस्य बताया था। जैकलीन ने ईडी को यह भी बताया था कि उसे हर हफ्ते सुकेश से लिमिटेड एडिशन के परफ्यूम, हर दूसरे दिन फूल, डिजाइनर बैग, डायमंड इयररिंग्स आदि मिलते थे। वहीं, ईडी ने अपनी चार्टशीट में इस बात का जिक्र किया था कि सुकेश चंद्रशेखर ने अभिनेत्री को महँगे तोहफे देना कबूल किया है।

गहलोत कैंप को स्वीकार नहीं सचिन पायलट, राजस्थान में कॉन्ग्रेस पर छाया ‘मुख्यमंत्री’ का संकट: टूटेगी पार्टी या बचे हैं ये विकल्प?

कॉन्ग्रेस (Congress) एक समस्या से निकलने की कोशिश करती है तो दूसरे में फँस जाती है। राजस्थान में भी यही देखने को मिल रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर एक समस्या का समाधान खोजा जा रहा था तो प्रदेश में सीएम पद को लेकर दूसरी समस्या शुरू हो गई है।

राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) को प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री बनाए की सुगबुगाहट के बीच अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने इसका विरोध किया है। विधायकों की माँग है कि कॉन्ग्रेस विधायक दल द्वारा नया मुख्यमंत्री चुना जाए।

सचिन पायलट को अशोक गहलोत का उत्तराधिकारी बनाए जाने के विरोध में गहलोत समर्थक माने जाने वाले 92 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विरोध में अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है। हालाँकि, पायलट समर्थकों का मानना है कि केंद्रीय प्रवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन की रिपोर्ट के बाद पार्टी आलाकमान सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कोई ना कोई रास्ता निकालेगी।

राज्य की वर्तमान हालात को देखते हुए पार्टी हाईकमान के पास वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पार्टी अध्यक्ष के साथ-साथ राज्य का मुख्यमंत्री पद भी दे सकती है। जब राज्य के राजनीतिक हालात में सुधार देखने को मिलेगा तो उस पर किसी तरह की बदलाव का विचार कर सकती है। कहा जा रहा है कि अशोक गहलोत भी पार्टी अध्यक्ष बनने के बजाय मुख्यमंत्री बने रहना पसंद कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस के पास दूसरा रास्ता है कि पार्टी हाईकमान अशोक गहलोत के बजाय पार्टी अध्यक्ष के लिए किसी अन्य उम्मीदवार को चुने। इससे राजस्थान की कमान अशोक गहलोत के पास ही रहेगी और पार्टी में किसी तरह की टूट या विरोध को टाला जा सकेगा। हालाँकि, पार्टी के पास इसके लिए नए सिरे से विचार करना होगा।

हाईकमान के पास तीसरा विकल्प है कि सचिन पायलट को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए और अशोक गहलोत को अपने खेमे के विधायकों को पायलट का समर्थन करने के लिए मनाए। हालाँकि, इसकी संभावना कम है, क्योंकि बीते समय में दोनों को बीच तल्ख रिश्ते अलग आयाम ले चुके हैं।

वहीं, हाईकमान किसी तीसरे ऐसे व्यक्ति को प्रदेश का मुख्यमंत्री चुन सकता है, जो अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों को स्वीकार हों। कहा जा रहा है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने इसको लेकर पार्टी के विधायकों के समक्ष कुछ नामों पर चर्चा की थी, लेकिन पायलट गुट इसके लिए तैयार नहीं दिखा। वहीं, बैठक में गहलोत गुट के विधायक भी नहीं पहुँचे।

दरअसल, अशोक गहलोत समर्थक विधायकों का कहना है कि जो व्यक्ति एक बार पार्टी तोड़ने की कोशिश कर चुका है, उसे मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता और यदि पार्टी हाईकमान ऐसा करता है तो उन्हें यह स्वीकार नहीं होगा। माना जा रहा है कि इस पूरे गेम के पीछे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ही हाथ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद भी सीएम पद की कुर्सी अपने पास रखना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि वे खुद बने रहें या फिर अगला सीएम बनने का अधिकार उनके पास हो और वे अपनी पसंद के विधायक को इस कुर्सी पर बैठा सकें।

बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम पार्टी अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ चुका है। वे 28 या 29 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल भी कर सकते हैं। ऐसे में पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के सामने दुविधा खड़ी हो गई है।

राहुल गाँधी भी ‘भारत जोड़ो’ अपनी यात्रा के दौरान कह चुके हैं कि पार्टी में एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला रहेगा। ऐसे में अशोक गहलोत के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। अगर गहलोत कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी होगी।

ऐसे में अशोक गहलोत के धुर विरोधी और लंबे समय से सीएम पद की कुर्सी पर टकटकी लगाए बैठा सचिन पायलट का खेमा इस मौके पर चुकना नहीं चाहता है। पायलट गुट चाहता है कि अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी सचिन पायलट को मिले। अशोक गहलोत समर्थक सचिन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। अगला निर्णय अब पार्टी पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर निर्भर करता है।

PFI का अब्दुल माजिद लखनऊ से धराया, ISIS से जुड़े दस्तावेज बरामद: यूपी के 86 व्हाट्सएप्प ग्रुप रडार पर, 2 साल में बदल गई कट्टरपंथियों की लाइफस्टाइल

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI)’ के खिलाफ चल रही राष्ट्रव्यापी कार्रवाई के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) ने PFI से जुड़े मोहम्मद अब्दुल माजिद को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी लखनऊ से रविवार (25 सितम्बर, 2022) को हुई है। अब्दुल माज़िद PFI के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद का करीबी बताया जा रहा है। माज़िद NIA की छापेमारी के दौरान भाग निकला था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल माज़िद लखनऊ के ही काकोरी क्षेत्र का रहने वाला है। NIA की छापेमारी से बच कर वो लखनऊ के ही गोमती नगर इलाके में छिपा हुआ था। STF ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास से 3 मोबाइल फोन और PFI से जुड़े कागज़ात मिले हैं। माजिद डेढ़ साल पहले असामाजिक हरकतों के चलते उत्तर प्रदेश ATS द्वारा गिरफ्तार किया गया था, जो फिलहाल जमानत पर चल रहा था। माजिद के पास ISIS से जुड़ा साहित्य भी बरामद हुआ है। पुलिस ने उस पर UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई की है।

मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस को अभी लखनऊ के मदयगंज से गिरफ्तार मोहम्मद अहमद बेग के फरार चल रहे 3 साथियों की तलाश है। आरोपित मोहम्मद अहमद बेग विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। उस पर PFI के लिए यूपी में फंडिग जुटाने का भी आरोप है। बेग के 3 फरार साथियों पर उसका पासपोर्ट बनवाने में मदद का आरोप है। बेग पर कई युवाओं का ब्रेनवाश करने और उन्हें देश विरोधी हरकतों में शामिल करने का आरोप है। फिलहाल STF अहमद बेग को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।

इस पूरे नेटवर्क को खंगालते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सोशल मीडिया पर एक्टिव 250 ऐसे एकाउंट मिले हैं, जिन्हें संदिग्ध माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन ग्रुपों में चरमपंथ को ले कर बातें की गईं हैं और आपत्तिजनक मज़हबी सामग्री डाली गई है। अकेले पश्चिम UP के 86 व्हाट्सएप ग्रुप सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं। लखनऊ में PFI द्वारा फंडिंग जुटा कर आतंक की पाठशाला चलाने की बात भी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि CAA के नाम पर हुई हिंसा के बाद इस पूरे रैकेट पर नजर रखी जा रही थी। कुल 108 लोगों को चिह्नित कर के उनके सम्पर्क के लगभग 500 संदिग्धों की हरकतें जाँची जा रही थीं। इसी दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी मज़हबी तकरीरें और बहस करने वालों पर भी नजर रखी गई थी। जाँच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे कई मामले दिखे जिसमें गाँव में रहने वाले कइयों की जीवन शैली बस 2 साल में ही बदल गई थी।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेरर फंडिंग और आतंकी गतिविधियों के खिलाफ गुरुवार (22 सितंबर 2022) को 11 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के टॉप लोगों के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान PFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम और इसी संगठन के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया गया था।

2 नाबालिग लड़कियों का धर्मांतरण, 3 बच्चों की माँ से निकाह: पाकिस्तान में पुलिस नहीं कर रही हिंदुओं की सुनवाई, मामले को दबाने में जुटी

पाकिस्तान में एक बार फिर से हिंदू लड़कियों के जबरन धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। इस बार धर्म परिवर्तन की शिकार 1 महिला और 2 नाबालिग लड़कियाँ हुई हैं। आरोप है कि दोनों नाबालिग लड़कियों का जबरदस्ती मुस्लिमों से निकाह भी करवाया गया। वहीं एक अन्य हिंदू महिला के पति ने पड़ोसी अहमद पर आरोप लगाया कि अहमद ने उसकी बीवी को इस्लाम कबूल करवाकर निकाह कर लिया है। इन सभी मामलों में पुलिस द्वारा ढिलाई दिखाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सिंध प्रान्त का है। अपहरण हुई पहली नाबालिग लड़की का नाम मैना मेघवाल (बदला नाम) है जिसकी उम्र 14 साल है। दलित समुदाय की लड़की नसरपुर इलाके में रहती थी। वहीं दूसरी हिंदू लड़की मीरपुर खास इलाके में रहती है जिसका अपहरण बाजार से घर लौटते समय कर लिया गया। इनके परिजनों का आरोप है कि पीड़िताओं का जबरन धर्मान्तरण और मुस्लिमों से निकाह करवाया जा रहा है।

तीसरा मामला भी मीरपुर ख़ास का है। यहाँ पर रवि कुर्मी नाम के एक हिंदू युवक ने अपने पड़ोसी अहमद के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी। पीड़ित के मुताबिक अहमद ने उसकी पत्नी जो 3 बच्चों की माँ भी है, को इस्लाम कबूल करवा के जबरदस्ती अपने साथ अपहरण कर के ले गया है। पीड़ित पति का आरोप है कि पुलिस उसकी सुनवाई नहीं कर रही है और मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पुलिस के अधिकारी ने रवि कुर्मी की बात का खंडन किया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक रवि की पत्नी राखी ने अपनी मर्जी से अहमद के साथ रहने का बयान दिया है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण के बाद उनके साथ दुष्कर्म और जबरन धर्मान्तरण करवा कर निकाह की इस से पहले कई घटनाएँ घट चुकी हैं। 28 अगस्त 2022 को सिंध के ही शाहदादपुर इलाके की एक 8 साल की लड़की को खालिद और दिलशेख नाम के आरोपितों ने बाढ़ राहत चीजें दिलाने के नाम पर अपहरण किया था और उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके अलावा जून 2022 में सिंध की ही रहने वाली करीना नाम की हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया गया था। बाद में करीना ने कोर्ट में खलील नाम के व्यक्ति से जबरन निकाह का बयान देते हुए अपने परिवार के साथ रहने की इच्छा जताई थी।

‘तालिबान ने हमें जेल में ठूँस दिया, काट डाले बाल’: अफगानिस्तान से भारत लौटा 55 सिखों का जत्था, मदद के लिए PM मोदी का जताया आभार

अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं-सिखों) पर तालिबान का कहर अब भी जारी है। यही कारण है कि तालिबान की सत्ता आने के एक साल बाद भी अफगानिस्तान से अल्पसंख्यकों का पलायन जारी है। खबर है कि अफगानिस्तान (Afghanistan) से एक बार फिर 55 सिखों को दिल्ली (Delhi) लाया गया है। इन्हें ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGMC)’ एक विशेष विमान (Special Flight) से दिल्ली लेकर आया गया है। सिखों से भरा ये विमान रविवार (25 सितंबर, 2022) को ‘इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA)’ पर पहुँचा।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, जो 55 अफगान सिख भारत लौटे हैं, उनमें से एक ने अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति के बारे में बताया। बलजीत सिंह ने सिखों पर तालिबान के अत्याचारों का खुलासा करते हुए एएनआई को बताया, “अफगानिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं। मुझे चार महीने की कैद हुई थी। तालिबान ने हमें धोखा दिया है, उन्होंने जेल में हमारे बाल तक काट दिए।” बलजीत सिंह ने आगे कहा, “मैं भारत और अपने धर्म में वापस लौटने के बाद बहुत खुश हूँ। 11-12 लोग जो नहीं आ पाएँ हैं, मुझे उम्मीद है वह भी जल्द ही लौट आएँगे।”

अफगानिस्तान से भारत लौटने वाले सिख मनसा सिंह वहाँ के काबुल गुरुद्वारे में एक सेवादार थे। उन्होंने भारत लौटने में मदद करने के लिए पीएम मोदी (PM Modi) का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार और पीएम मोदी को ई-वीजा की सुविधा के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ, जिन्होंने भारत लौटने में हमारी मदद की।”

एक अन्य सिख सुखबीर सिंह खालसा ने कहा, “हम भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने हमें तत्काल वीजा दिया और हमें यहाँ पहुँचने में हमारी मदद की। हम में से कई लोगों के परिवार अभी भी वहाँ छूट गए हैं। अफगानिस्तान में अभी भी उनके लगभग 30-35 लोग फँसे हुए हैं।”

वहीं, पंजाब से राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ट्वीट कर भारत सरकार को धन्यवाद दिया है। उन्होंने लिखा, “काबुल, जलालाबाद में फँसे 55 परिवार आज सुरक्षित दिल्ली पहुँच गए हैं। मैं ई-वीजा की सुविधा के लिए भारत सरकार का आभारी हूँ। एसजीपीसी को भी धन्यवाद। हम ‘मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी’ कार्यक्रम के तहत उनका पुनर्वास करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनका संगठन ‘मेरा परिवार मेरी जिम्मेदारी’ कार्यक्रम चला रहा है, जिसके तहत 543 अफगान सिखों और हिंदू परिवारों को सभी सुविधाएँ प्रदान करके पश्चिमी दिल्ली में उनका पुनर्वास किया गया है।

बता दें कि इससे पहले 3 अगस्त, 2022 को 28 सिखों को भारत लाया गया था। यहाँ आकर उन्होंने अफगानिस्तान में गैर मुस्लिमों के भयावह हालातों के बारे में बताया था। अफगानिस्तान से आए तरण सिंह ने बताया था कि तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद उनके बच्चे डर से स्कूल नहीं जा रहे थे। उनके परिवार वाले जिस प्रकार से दिल्ली में स्वतंत्र हो कर घूम रहे हैं, ऐसा अफगानिस्तान में संभव ही नहीं था।

बिहार में जिस आदित्य की दिनदहाड़े चाकू घोंपकर हुई हत्या, उसके परिजनों को पकड़ने में लगी पुलिस: भाई का आरोप, JDU नेता ने कहा- दहशत रहना जरूरी

बिहार के छपरा में 21 सितम्बर 2022 को आदित्य तिवारी नाम के एक नाबालिग लड़के की चाकू मार कर हत्या कर दी गई थी। परिजनों का आरोप है कि हत्या में कुल 7 लोग शामिल थे। FIR के मुताबिक इन 7 आरोपितों में 6 मुस्लिम समुदाय से हैं। अब तक 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना है।

इस बीच मृतक के परिजनों ने बिहार पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है। आदित्य के भाई ने दावा किया है कि जाँच में जुटी पुलिस आरोपितों के बजाए उनके शुभचिंतकों और रिश्तेदारों को प्रताड़ित करने और कस्टडी में लेने में लगी है। वहीं मृतक के घर पहुँचे JDU नेता ने पुलिस की इस कार्रवाई का समर्थन किया है।

एक स्थानीय समाचार चैनल को दिए गए इंटरव्यू में मृतक आदित्य तिवारी के भाई ने कहा कि वह भारतीय सेना में हैं और वर्तमान में राजस्थान बॉर्डर पर तैनात हैं। उन्होंने बिहार सरकार से सवाल किया कि जब उनका ही घर और परिवार देश के अंदर सुरक्षित हैं है तो वो बॉर्डर पर किसके भरोसे जाएँ?

मृतक के सैनिक भाई ने बताया कि हत्या के बाद उनके कई रिश्तेदार और शुभ चिंतक न्याय की आवाज उठाने के लिए उनके घर आ रहे थे जिन्हें पुलिस ने कस्टडी में लेना शुरू कर दिया, जिससे अब लोग उनके घर आने से भी कतराने लगे हैं।

मृतक आदित्य के फौजी भाई का ये बयान जनता जागृति न्यूज़ द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई वीडियो में 7:00 मिनट से 12:20 मिनट के बीच सुना जा सकता है। इसी वीडियो में उन्होंने कहा है कि अब यहाँ लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अब वही घटना किसी और के साथ न हो जाए।

प्रशासन की दहशत जरूरी

आदित्य के भाई द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर इल्जामों के बीच इस मामले पर जेडीयू नेता का चौंकाने वाला बयान आया है। दरअसल, मृतक के परिजनों से मिलने पहुँचे JDU नेता गौतम सिंह ने पीड़ित के शुभचिंतकों पर प्रशासनिक कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना काम कर रहा है और अगर वो सख्ती नहीं करेगा तो मामला बहुत आगे बढ़ जाएगा। गौतम सिंह के मुताबिक प्रशासन लोगों के बीच में दहशत कर रहा है जिस से चिंतित नहीं होना है।

JDU नेता ने ‘फ्री इंडिया-फ्री माइंड’ नाम के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बातें 1:15 मिनट से 1:34 मिनट के बीच कही है। इस इंटरव्यू में आगे आदित्य की हत्या के दौरान टीचरों के मूकदर्शक बने रहने को भी गौतम सिंह ने समर्थन दिया और बोले कि उस समय कोई भी होता तो डर से मदद न कर पाता। हालाँकि उन्होंने आगे माना कि मौके पर मौजूद लोगों द्वारा घायल बच्चे को अस्पताल पहुँचाने में देरी की गई है।

जाँच के लिए SIT का गठन

बिहार पुलिस ने आदित्य हत्याकांड में अब तक कुल 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की जानकारी देते हुए SIT का गठन किया है। इस जाँच टीम में 1 एडिशनल SP, 3 DSP सहित कुल 20 पुलिसकर्मी शामिल किए गए हैं। पुलिस ने आमजनों के लिए एक मोबाईल नंबर जारी करते हुए घटना से संबंधित किसी भी जानकारी को खुद तक पहुँचाने की अपील की है।

पुलिस प्रेसनोट

‘मलद्वार में घुसाई रॉड, ईंट से मारा’: दिल्ली के सीलमपुर में 12 साल के लड़के का गैंगरेप, आरोपितों में ‘भाई’ भी शामिल, 2 हिरासत में

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाके सीलमपुर से एक 12 साल के लड़के के गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया है। घटना 18 सितंबर 2022 की है। पीड़ित लड़के की माँ ने इस संबंध में शिकायत देते हुए बताया कि 4 लड़कों ने उनके 12 साल के बेटे के मलद्वार में रॉड घुसाई और उसे ईंट-डंडों से भी मारा। आरोपितों में तीन उसके दोस्त और एक उसका कजन भाई है।

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर पूर्वी दिल्ली के डीसीपी संजय कुमार सेन ने कहा कि इस घटना की जानकारी होने पर पुलिस टीम फौरन अस्पताल गई थी, लेकिन परिजनों ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें काउंसर मुहैया करवाया। माँ की काउंसलिंग करते हुए उनसे पूरी घटना के बारे में जानकारी ली गई।

पुलिस ने इस केस को आईपीसी की धारा 377 और 34 में दर्ज किया है। लड़का दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत गंभीर है। लड़के का यौन शोषण करने वाले उसके पड़ोस के दोस्त और उसका एक भाई है। सब एक ही समुदाय के हैं।

महिला आयोग ने लिया संज्ञान

बताया जा रहा है कि दिल्ली के सीलमपुर में हुई इस घटना को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल द्वारा सामने लाया गया। माँ ने दिल्ली महिला आयोग में शिकायत देते हुए बताया था कि उनके बेटे के साथ 18 सितंबर को यह सब हुआ जिसका पता उन्हें अपने बेटे से 22 सितंबर को चला।

अब महिला आयोग ने इस संबंध में आरोपितों की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस से लेटेस्ट एफआईआर माँगी है और ये भी पूछा कि अब तक इस केस में कितने गिरफ्तार हुए हैं।

इस बीच इस पूरे पर नॉर्थ ईस्ट के डीसीपी संजय सेन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि यौन शोषण मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है और अब तक 2 नाबालिग गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस तीसरे को तलाश कर रही है।

दंगों से लेकर काँवड़ियों पर फेंकने के लिए चर्चा में आया सीलमपुर

बता दें कि दिल्ली का सीलमपुर इलाका उन्हीं इलाकों में से एक है जहाँ साल 2020 में दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी वहीं 400 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

दिल्ली दंगों के बाद ये इलाका कुछ दिन पहले फिर चर्चा में आया था जब सावन महीने की शुरुआत हुई थी। उस समय एक काँवड़िया काँवड़ लेकर सीलमपुर इलाके से गुजर रहा था लेकिन तभी उसकी काँवड़ के ऊपर मांस फेंक दिया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया था। हिंदुओं का कहना था कि ये हरकत जान बूझकर हुई है। हर राज्य में उनका फूलों से स्वागत हुआ लेकिन दिल्ली में इस हरकत के बाद उनकी काँवड़ खंडित हो गई।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के लिए मंदिर जा रहे 24 हिंदू श्रद्धालुओं की मौत, कई लापता: नाव बीच रास्ते में पलटी, सवार थे 70+ लोग

बांग्लादेश में रविवार (25 सितंबर 2022) को हिंदू श्रद्धालुओं को बोदेश्वरी मंदिर (Bodeshwari Temple) ले जा रही एक नाव के पलट जाने से महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है। वहीं एक दर्जन से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कम से कम 10 लोगों को बचा लिया गया है और उन्हें अस्पताल भेजा गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बांग्लादेश के पंचगढ़ जिले के बोडा की है। श्रद्धालु महालया (दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत) के मौके पर नाव में सवार हो कर सदियों पुराने बोदेश्वरी मंदिर की तरफ जा रहे थे, लेकिन यह नाव कोरोटा नदी में पलट गई।

स्थानीय पुलिस अधिकारी शफीकुल इस्लाम (Shafiqul Islam) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) को बताया कि दमकलकर्मी और गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

पुलिस ने कहा कि मृतकों में 8 नाबालिग बच्चे और 12 महिलाएँ शामिल हैं। पंचगढ़ के बोडा उप-जिले के प्रशासनिक प्रमुख सोलेमान अली ने बताया कि नाव में 70 से 80 यात्रियों के सवार होने का अनुमान है। पंचगढ़ के उपायुक्त जहूरुल हक ने कहा कि नाव यात्रियों को अपनी क्षमता से अधिक ले जा रही थी।

बांग्लादेश में हर साल हजारों हिंदू बोदेश्वरी मंदिर जाते हैं। दुर्गा पूजा में ये भीड़ बढ़ जाती है। राष्ट्रपति अब्दुल हामिद और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के दौरान रविवार को हुई घटना पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने बयान जारी कर स्थानीय अधिकारियों को जीवित बचे लोगों के इलाज और मृतकों के मुआवजे के लिए कदम उठाने को कहा गया।

बता दें कि दुर्गा पूजा बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा हिंदू त्योहार है। बांग्लादेश कई नदियों से घिरा हुआ है। यही कारण है कि यहाँ हर साल सैकड़ों लोग नाव दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। इस साल मई में भी एक नाव के पद्मा नदी में पलट जाने से 26 लोगों की मौत हो गई थी।