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कुत्ते के साथ नंगी लेटने वाली अमेरिकी मॉडल ने अब बेटे के साथ शेयर की न्यूड तस्वीरें, बाथटब में दोनों दिखे बिना कपड़ों के: लोगों ने जताई नाराज़गी

अमेरिकी मॉडल एमिली रतजकोव्स्की एक फोटोशूट के कारण लोगों के निशाने पर आ गई हैं, जिसमें उन्होंने अपने बेटे के साथ बाथटब में न्यूड पोज दिया है। इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि एमिली रतजकोव्स्की बाथटब में पानी में न्यूड लेटी हुई हैं और उनका एक साल का बेटा भी उनके बगल में बिलकुल नंगा खड़ा है। वो अपने बेटे की तरफ देख रही होती हैं और बेटे ने उनके कंधे पर हाथ रखा होता है। लोग इस तस्वीर की आलोचना कर रहे हैं।

उनके बेटे सिल्वेस्टर के शरीर के पीछे के हिस्से को ढकने के लिए मॉडल ने फोटो को एडिट कर के वहाँ दिल का निशान बना दिया। इंस्टाग्राम पर उनके 3 करोड़ फॉलोवर्स हैं। हाल ही में उनके पति सेबेस्टियन बेयर मैक्लर्ड के साथ उनका तलाक हुआ है। बच्चे की नंगी तस्वीर शेयर करने को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि एमिली रतजकोव्स्की को फ़िलहाल माँ की जिम्मेमदारी निभानी चाहिए, भले ही उनका बेटा बड़ा होकर स्वेच्छा ये सब कर सकता है। एमिली ने कुछ दिनों पहले अपने कुत्ते के साथ भी न्यूड लेटी हुई तस्वीर शेयर की थी।

एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि मॉडल ने अटेंशन पाने के लिए ऐसा किया है। एक ने लिखा कि आप भले ही कितनी ही सुंदर हों, आपको ये शोभा नहीं देता है। लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया में लाइक्स और कमेंट्स के लिए वो अपने बच्चे का इस्तेमाल कर रही हैं। एक यूजर ने पूछा कि तुम्हारा बेटा बड़ा होकर जब ये तस्वीरें देखेगा तो उसे कैसा लगेगा? एक यूजर ने लिखा कि जो डार्कनेट पर होता था, अब खुलेआम हो रहा।

हालाँकि, अमेरिकी मॉडल के कुछ फैंस ने उनका समर्थन भी किया और कहा कि जो लोग इस तस्वीर को गंदी नजर से देख रहे हैं, वो ‘Pedophile (बच्चों के साथ यौन हरकतें करने वाले)’ हैं। एक ने लिखा कि इसमें न्यूडिटी नहीं है, बल्कि ये तो पानी में मस्ती है। एमिली रतजकोव्स्की ने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए ‘Love Of My Life’ भी लिखा। हाल ही में तलाक के बाद मॉडल ने एक TikTok वीडियो शेयर करते हुए कहा था कि पितृसत्ता के लिए प्यार में कोई जगह नहीं है।

कर्नाटक के बाद केरल में हिजाब को लेकर हिंसा: मुस्लिम छात्र संगठनों ने स्कूल के बाहर किया उपद्रव, 3 पुलिसकर्मी घायल

कर्नाटक में पीएफआई की शह पर शुरू हुआ हिजाब विवाद अब केरल जा पहुँचा है। केरल के कोझिकोड में हिजाब पहनने के कारण स्कूल में प्रवेश पर कथिततौर पर रोक लगाने के बाद प्रदर्शन किया गया है। इस प्रदर्शन में स्थानीय मुस्लिम संगठनों के शामिल होने के कारण प्रदर्शन उग्र हो गया जिसमें 3 पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोझिकोड के प्रोविडेंस गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में 11वीं की एक छात्रा को हिजाब पहनने के कारण कथिततौर पर स्कूल आने से मना किया गया था। जिसके बाद मुस्लिम यूथ लीग (MYL), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) और स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन (SIO) समेत कुछ मुस्लिम संगठनों ने कार्रवाई की माँग करते हुए स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 11वीं कक्षा की मुस्लिम छात्रा को स्कूल के अधिकारियों ने सूचित किया था कि वह हिजाब नहीं पहन सकती क्योंकि हिजाब स्कूल की यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है। इसके बाद, अभिभावकों ने शिक्षा विभाग में शिकायत की थी लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। आखिर में छात्रा ने ही स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) ले लिया।

छात्रा द्वारा ट्रांसफर सर्टिफिकेट लिए जाने के बाद मुस्लिम संगठन मुस्लिम यूथ लीग ने एक बयान जारी कर कहा था, “अब, छात्रा ने उस स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) ले ली है। यह उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। राज्य सरकार की ओर से निष्क्रियता और ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई न होना स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

मुस्लिम संगठनों ने इस मामले में आंदोलन करने की चेतावनी दी थी। और, जब सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की गई तो इन सगठनों ने भीड़ एकत्रित कर स्कूल के सामने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान, जब पुलिस कर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी हमला किया। इस हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। जिसके बाद, कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

समाजिक कार्यकर्ता दीपा ईश्वर ने इस संबंध में कहा है कि छात्र जिस संस्थान का हिस्सा हैं, उन्हें उस संस्थान के नियमों का पालन करना चाहिए। शैक्षणिक संस्थान अपने धर्म को प्रदर्शित करने का स्थान नहीं होता। सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार होता है। इसलिए, स्कूल के नियमों और नीतियों का पालन करना चाहिए।

गौरतलब है, इससे पहले कर्नाटक का हिजाब विवाद भी इसी तरह शुरू हुआ था। दरअसल, यहाँ के उडुपी जिले के एक सरकारी कॉलेज ने हिजाब पहनने पर रोक लगा दी थी। इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी फैसला सुनाते हुए माना था कि हिजाब आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है। हालाँकि, इसके बाद, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। इस मामले में, कर्नाटक सरकार की ओर से भी यही कहा गया है कि हिजाब यूनिफॉर्म का हिस्सा नहीं है इसलिए इसे पहनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

‘रामसेतु को बचाने के लिए हमारे पास सिर्फ 3 दिन हैं’: अक्षय कुमार की नई फिल्म का टीजर, राम-राम का बैकग्राउंड म्यूजिक, गोली-बारूद सब चलेंगे

बॉलीवुड के सुपर स्टार अक्षय कुमार (Bollywood Super Star Akshay Kumar) की आगामी फिल्म रामसेतु (Ram Setu) का टीजर सोमवार (26 सितंबर 2022) को जारी किया गया। फिल्म की कहानी सामने नहीं आई है, लेकिन कहा जा रहा है कि अक्षय कुमार एक ऐसे शख्स का किरदार निभा रहे हैं, जो रामसेतु को बचाने के लिए जान लड़ाता दिख रहा है।

अक्षय कुमार ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर खुद इसका टीचर जारी किया। इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “राम सेतु की पहली झलक, सिर्फ आपके लिए। इसे बहुत प्यार के साथ बनाया गया है। मुझे उम्मीद है कि आपको पसंद आएगी।”

रामसेतु काफी चर्चा में है। फिल्म को लेकर कहा जा रहा है कि यह काफी दमदार होगी और अक्षय कुमार के किरदार को याद रखा जाएगा। जारी हुए फिल्म के टीजर को देखकर लगता है कि फिल्म को बहुत मेहनत से बनाया गया है। फिल्म में जबरदस्त एक्शन और थ्रिलर देखने को मिलेगा। फिल्म में अक्षय ने पानी के अंदर एक्शन सीन को शूट किया है।

टीजर शंखनाद से शुरू होकर जय श्रीराम पर खत्म हो रहा है। इसमें अक्षय कुमार लंबे बालों और गोल चश्मे में दिख रहे हैं। रामसेतु को बचाने के लिए तीन का समय है और अक्षय कुमार इसे बचाने के लिए प्रयास करते दिख रहे हैं। चारों तरफ धड़ाधड़़ गोलियाँ चल रही हैं और बमबारी हो रही है। इन सबके बीच अक्षय कुमार एक्शन में दिख रहे हैं। बैकग्राउंड में राम-राम-राम भी सुनाई दे रहा है।

रामसेतु को किन लोगों से खतरा है, क्यों खतरे में है और अक्षय कुमार अपने मिशन में कामयाब होंगे या नहीं, यह तो फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा। हालाँकि, टीजर देखने के बाद दर्शकों में एक रोमांच और उत्सुकता जरूर भर गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की कहानी एक Archaeologist (पुरातत्व विज्ञानी) के आसपास घूमती है, जो रामसेतु की सच्चाई का पता लगाने निकला है। फिल्म में अक्षय कुमार Archaeologist बने हैं।

इस फिल्म में फिल्म में जैकलीन फर्नांडीज और नुसरत भरूचा भी लीड रोल में होंगी। अक्षय कुमार इसमें एक नए अंदाज में दिखेंगे। फिल्म इस साल दिवाली के मौके पर 25 अक्टूबर को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। 

बता दें कि रामसेतु फिल्म को लेकर हाल ही में विवाद भी हुआ था। अक्षय कुमार कानूनी पचड़े में फँसते नजर आए थे। कहा गया था कि फिल्म में गलत तरीके से जानकारी को परोसने के कारण भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उन पर केस दर्ज करने की बात कही थी। 

साल 2022 में अक्षय की बच्चन पांडे, सम्राट पृथ्वीराज, रक्षाबंधन और कठपुतली फिल्में रिलीज हुईं और चारों ही फ्लॉप साबित हुईं। अब इस फिल्म से अक्षय कुमार को काफी उम्मीदें हैं। इसके टीजर को उन्होेंने अपनी बेटी के बर्थडे पर आज 26 सितंबर को रिलीज किया।

‘कहीं हाथ जोड़ने की जगह मोड़कर प्रार्थना, कहीं जुमे को छुट्टी’ : झारखंड में दिखने लगा फिर सरकारी स्कूलों पर ‘उर्दू’ नाम, स्थानीय बनाते हैं दबाव

झारखंड के पलामू में बने कुछ सरकारी स्कूलों को लेकर पता चला है कि उन्हें धीरे-धीरे उर्दू स्कूल जैसा बनाया जा रहा है। कथिततौर पर इस स्कूल में हो रहे बदलावों के पीछे कुछ स्थानीय लोगों का हाथ है। इन्हीं लोगों के दबाव के चलते अब सरकारी स्कूल में प्रार्थना हाथ जोड़कर नहीं, मोड़कर होती है। वहीं कई लोग अपने बच्चों को शुक्रवार को स्कूल नहीं भेज रहे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक मामला छतरपुर प्रखंड के डाली पंचायत का है। यहाँ पर क्लास 1 से 8 तक की पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूल उतक्रमित मध्य विद्यालय ठेंकहीटांड है। आरोप है कि इसी स्कूल में सरकार के नियमों की अनदेखी कर के बच्चों के हाथो मोड़ कर प्रार्थना करवाई जा रही है।

इसी के साथ विश्रामपुर के डेहरिया स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में कई अभिभावक शुक्रवार को अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। वहीं बाना के सरकारी स्कूल के नाम के आगे उर्दू अभी तक नहीं हटाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ समय के लिए उर्दू शब्द को कूड़े से ढक दिया गया था जहाँ फिर से कूड़ा हटा लिया गया है।

जागरण से बात करते हुए उत्क्रमित मध्य विद्यालय, ठेंकहीटांड के प्रिंसिपल नागेंद्र राम से हाथ मोड़ कर हो रही प्रार्थना को पहले से आ रही परम्परा बताया है। वहीं डाली पंचायत की मुखिया पूनम जायसवाल ने हाथ मोड़ कर प्रार्थना को सरकारी नियमों के विरुद्ध बताते हुए इसमें तत्काल सुधार की माँग की।

इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पलामू के डीईओ सह डीएसई अनिल कुमार ने कहा कि सोमवार को स्कूल बंद है अतः मंगलवार को स्कूल खुलने पर इसकी जाँच की जाएगी। उन्होंने बताया कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि झारखंड के स्कूलों में इस्लामी तौर-तरीकों को अपनाए जाने का ये पहला मामला नहीं है। जुलाई 2022 में सिंहभूम जिले के गोइलकेरा प्रखंड में शिक्षक रामेन्द्र दुबे ने अकबर नाम के आरोपित पर शुक्रवार के बजाए रविवार को छुट्टी देने के चलते अपनी पिटाई का आरोप लगाया था। अकबर को CM सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़ा बताया गया था। जुलाई 2022 में ही झारखंड के 5 जिलों के 70 ऐसे स्कूलों के नाम सामने आए थे जहाँ रविवार के बजाए शुक्रवार को छुट्टी हो रही थी। इसी के साथ उन स्कूलों की प्रार्थना पद्धति भी बदली हुई थी।

जुलाई में ही झारखंड के लोहरदगा में सरकारी स्कूल को उर्दू हाईस्कूल बनाने की शिकायत भाजपा नेता ने की थी जिस पर झारखंड के शिक्षा विभाग ने जाँच के आदेश दिए थे। इसी माह झारखंड हाईकोर्ट में पंकज यादव नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जनहित याचिका डालते हुए बताया था कि झारखंड के स्कूलों का इस्लामीकरण हो रहा है। याचिका में पंकज यादव ने स्कूलों में बच्चों पर शरिया थोपे जाने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय से इसे रोकने की माँग की थी। इसके अलावा सितम्बर 2022 में राँची के एक सरकारी स्कूल में कुछ मुस्लिमों ने घुस कर दोस्ती न करने पर छात्रा क उठा ले जाने की धमकी दी थी।

काले कपड़ों में स्कूल में घुसा हमलावर, बच्चों पर अंधाधुंध फायरिंग: रूस के स्कूल में 7 छात्र समेत 13 की मौत

रूस के इझेवस्क शहर में स्थित एक स्कूल में फायरिंग की घटना घटी है। गोलीबारी में 7 बच्चों समेत 13 लोगों की मौत हो गई। पहले खबर आई थी कि हमले में 5 छात्र समेत 6 लोगों की मौत हुई है जबकि 20 घायल हैं। हालाँकि अब ये संख्या बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि हमलावर काले रंग की टीशर्ट और मुँह पर मास्क लगाकर आया था। उसकी टीशर्ट पर नाजी का चिह्न था। बच्चों पर हमले के बाद उसने खुद को भी गोली मार ली।

रूसी सांसद एलेक्जेंडर खिनशेटिन ने बताया कि हमलावर दो नॉन-लीथल पिस्तौलों से लैस था। उसने जिन लोगों पर गोली चलाई उसमें एक स्कूल का सिक्योरिटी गार्ड भी है। घटना के बाद स्कूल को खाली करवा दिया गया है।

सामने आई वीडियो में छात्र और शिक्षक इधर-उधर भागते दिखाई दे रहे हैं। वहीं घायलों को एंबुलेंस में डालते देखा जा सकता है। क्लासरूम के भीतर की भी एक वीडियो सामने आई है जब गोलीबारी हो रही थी और बच्चों ने खुद को क्लास में बंद कर लिया था।

बता दें कि रूस के इझेवस्क में 6,40,000 लोग रहते हैं। यह मॉस्को के करीब 960 किलोमीटर पूर्व में, मध्य रूस के उराल पर्वतीय क्षेत्र के पश्चिम में स्थित है। यहाँ के स्कूल में हमला करने के पीछे हमलावर की क्या मंशा थी इसका पता अभी नहीं चला है। स्कूल के चारों ओर घेराबंदी कर दी गई है। घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है और बच्चों को बाहर निकाल कर स्कूल खाली कर दिया गया है।

सम्राट अशोक के 2300 साल पुराने शिलालेख को बना दिया मजार, अवैध निर्माण कर सालाना उर्स का भी आयोजन: बिहार के सासाराम में ‘लैंड जिहाद’

देश में ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) के बाद जिहाद के कई तरीकों के बारे में खबरें आती रहती हैं। इनमें से एक लैंड जिहाद (Land Jihad) भी है। लैंड जिहाद में अवैध ढाँचों के जरिए सरकारी अथवा निजी जगहों पर अतिक्रमण कर उसे इस्लामी संपत्ति के रूप में परिवर्तित करने की कोशिश की जाती है।

लैंड जिहाद का एक ऐसा ही मामला बिहार के सासाराम से सामने आया है, जहाँ कट्टरपंथियों ने मौर्य वंश के सम्राट अशोक के लगभग 2300 साल पुराने शिलालेख पर ही कब्जा कर वहाँ मजार बना दिया है। वहीं, सरकार की लापरवाही भी साफ दिख रही है कि हजारों साल पुराने ब्राह्मी लिपि में लिखे गए इन शिलालेखों को सहेजने में लापरवाही दिखाई।

बिहार के रोहतास जिला के मुख्‍यालय सासाराम में कैमूर पहाड़ी श्रृंखला की चंदन पहाड़ी की प्राकृतिक कंदरा में अशोक महान द्वारा 2300 साल पहले लघु शिलालेख उत्कीर्ण कराए गए थे। यह शिलालेख ब्राह्मी लिपि में है, जो देश में भर में मात्र ऐसे 8 शिलालेख हैं। इनमें यह शिलालेख भी शामिल है और यह बिहार का अकेला शिलालेख है।

इस शिलालेख के चारों तरफ अवैध निर्माण करने के बाद इसकी घेराबंदी कर दी गई है। वहीं, शिलालेख को सफेद चूने से पुतवा कर उस पत्थर पर हरे रंग का चादर ओढ़ाकर मजार घोषित कर दिया गया है। इसे सूफी संत की मजार घोषित कर सालाना उर्स का भी आयोजन हो रहा है। शिलालेख का घेराबंदी करने के बाद उसके गेट में ताला लगाकर रखा जा रहा है।

स्वतंत्रता के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इस शिलालेख को वर्ष 2008 में संरक्षित स्मारक घोषित किया था। सासाराम शहर की पुरानी ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) और नए बाइपास के बीच कैमूर पहाड़ी श्रृंखला में आशिकपुर पहाड़ी की चोटी से लगभग 20 फीट नीचे स्थित कंदरा में स्थापित शिलालेख के पास ASI ने संरक्षण संबंधी बोर्ड भी लगाया था, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने इसे साल 2010 में उखाड़कर फेंक दिया।

साल 2008, 2012 और 2018 में ASI ने अशोक शिलालेख के पास अतिक्रमण हटाने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) से कहा था। इसके बाद जिलाधिकारी ने सासाराम के एसडीएम को कार्रवाई का आदेश दिया था। एसडीएम ने शिलालेख पर अवैध कब्जा करने वाले मरकजी मोहर्रम कमेटी से मजार की चाबी तत्काल प्रशासन को सौंपने के कहा था, लेकिन कमिटी ने आदेश को अनसुना कर दिया। धीरे-धीरे यहाँ एक बड़ी इमारत अवैध रूप से बना दी गई। 

इस शिलालेख को ब्रिटिश राज में खोजा गया था और साल 1917 में इसे संरक्षित किया था। हालाँकि, इस संरक्षित स्थल की 2300 साल पुरानी पहचान को मात्र 23 साल में मिटा दिया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने जिला प्रशासन को लगभग 20 पत्र लिखकर इस पहाड़ी पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा, लेकिन गैर-कानूनी निर्माण के जरिए इस धरोहर का निशान मिटाने की कोशिश की जा रही है।

यह शिलालेख ईसा पूर्व 256 ईस्वी में देश भर में आठ स्थानों पर सम्राट अशोक ने लघु शिलालेख लगवाए थे। इनमें से एक सासाराम की चंदन पहाड़ी पर है। कलिंग युद्ध में हुए रक्तपात से विचलित होकर सम्राट अशोक भगवान गौतम बुद्ध की शरण में आ गए थे और बौद्ध धर्म के संदेशों के प्रसार के लिए जगह-जगह शिलालेख खुदवाए थे। उस समय लोगों की भाषा ब्राह्मी थी। इसलिए ये संदेश उसी भाषा में खुदवाए गए थे।

ऐसी ही एक घटना महाराष्ट्र में भी सामने आई थी, जहाँ शिवाजी महाराज के ‘लोहागढ़’ किले में अवैध मजार बनाकर इसे एक कथित सूफी संत ‘उमर शहावली बाबा’ का मजार घोषित कर दिया गया। इसके बाद वहाँ सालाना उर्स (मेला) का भी आयोजन किया जाने लगा। इतिहासकारों ने बताया कि छत्रपति साहूजी महाराज के शासनकाल में भी वहाँ किसी तरह का मजार या मस्जिद नहीं थी। ये बाद में अवैध कब्जा कर बनाया गया है।

हालाँकि, ये सासाराम और लोहागढ़ किले तक ही बात सीमित नहीं है। अजमेर किले से लेकर देश के तमाम किलों और पुराने हिंदू विरासतों पर ऐसे मजार देखने को मिलने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाद में अवैध कब्जा कर ऐसे ढाँचे को खड़ा कर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

नवरात्रि में व्रत करने वालों के लिए स्पेशल मेनू लेकर आया भारतीय रेलवे, वैष्णो देवी के दर्शन के लिए भी विशेष ट्रेन: टिकट के साथ भोजन और ठहरने की सुविधा भी

सोमवार (26 सितंबर) से माँ दुर्गा के पावन पर्व नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने माता रानी के भक्तों को बड़ी सौगात दी है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईआरसीटीसी (IRCTC) ने माँ वैष्णो के दर्शन हेतु जाने वाले भक्तों की सुविधा के लिए नवरात्रि स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। यही नहीं, रेलवे ने नवरात्रि में व्रत रहने वाले भक्तों के भोजन के लिए भी विशेष मेनू जारी किया है।

दरअसल, हर वर्ष नवरात्रि में लाखों भक्त माँ वैष्णो के दर्शन करने के लिए जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आईआरसीटीसी (IRCTC) की तरफ से नवरात्रि पर दो स्पेशल एसी ट्रेन का संचालन किया जाएगा। ये दोनों ही ट्रेनें भारत गौरव यात्रा (Bharat Gaurav Yatra) के तहत चलाई जाएँगीं। ट्रेन की पहली ट्रिप 25 से 29 सितंबर के बीच और दूसरी 29 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच रहेगी।

IRCTC की ओर से कहा गया है कि 4 रात और 5 दिन (4 Day-5 Night) की यह स्पेशल ट्रेन दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से शुरू होगी। इस ट्रेन में एसी 3 टीयर के 11 कोच लगाए गए हैं। यात्री इस ट्रेन में ट्रेन दिल्ली के सफदरजंग के अलावा, दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अंबाला, सिरहिंद और लुधियाना से चढ़ या उतर सकते हैं।

इस ट्रेन में टिकट के साथ एक रात कटरा में एसी होटल में ठहरने की सुविधा, दो ब्रेकफास्‍ट, एक लंच, एक डिनर तथा नॉन एसी रोड व्हीकल, इंश्योरेंस और जीएसटी की सुविधाएँ मिलेंगी। बता दें, इस यात्रा के दौरान दो रातें ट्रेनें में ही गुजरेंगीं, इसलिए यात्रियों के भोजन की व्यवस्था ट्रेन में ही रहेगी।

इसके अलावा, भारतीय रेलवे ने नवरात्र में व्रत रहने वाले लोगों के लिए भी खास इंतजाम किया है। नवरात्र के पावन अवसर पर हर कोई खान-पान पर विशेष ध्यान देता है। नवरात्र में व्रत रहने वाले लोग व्यंजन और फलाहार को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। चूँकि नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं, इसलिए रेल मंत्रालय ने ट्रेन से यात्रा करने वाले भक्तों के लिए एक विशेष मेनू की घोषणा की है।

रेल मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है, “नवरात्रि के शुभ अवसर पर भारतीय रेल आपके लिए 26 सितंबर 2022 से 5 अक्टूबर 2022 तक आपकी व्रत सम्बन्धी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष मेनू लेकर आया है। ‘फूड ऑन ट्रैक’ ऐप से अपनी ट्रेन यात्रा के लिए नवरात्रि के व्यंजनों का ऑर्डर दें। इसके लिए, http://ecatering.irctc.co.in पर 1323 पर भी कॉल कर सकते हैं।”

केरल में नाबालिग से गैंगरेप, मजदूरी करने यूपी से आए थे इकरार, एजाज, शकील और इरशाद: लॉज में ले जाकर किया सामूहिक बलात्कार

केरल के कोझीकोड (Kozhikode) जिले से शनिवार (24 सितंबर 2022) को एक नाबालिग से बलात्कार करने के आरोप में चार मजदूरों को गिरफ्तार किया गया। 16 वर्षीय पीड़िता उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। वहीं, चारों आरोपित इकरार आलम (18), अजाज (25), शकील शाह (42) और इरशाद भी उत्तर प्रदेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ट्रेन में सफर के दौरान पीड़िता की मुलाकात इन आरोपितों से हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता अपनी बहन से मिलने के लिए वाराणसी से चेन्नई जा रही थी, तभी उन चारों से उसकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने उसे बहकाया और अपने साथ उतरने के लिए कहा। इसके बाद लड़की उनके साथ पलक्कड़ स्टेशन पर उतर गई और वहाँ से सड़क के रास्ते कोझीकोड चली गई। बताया जा रहा है कि आरोपितों में से एक ने पहले लड़की को प्रेमजाल में फाँसा था। इसके बाद आरोपित उसे पलयम के एक लॉज में ले गया, जहाँ चारों ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

अगले दिन चारों इस उम्मीद से उसे रेलवे स्टेशन पर वापस छोड़ने गए कि वह उनका विरोध किए बिना चेन्नई अपनी बहन के पास चली जाएगी, लेकिन लड़की ने उनका विरोध किया। इस दौरान उनके बीच काफी बहस हुई। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों उन्हें झगड़ते हुए देखा तो सभी को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान वारदात की जानकारी सामने आई। इसके बाद रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force) ने चारों को कसाबा पुलिस के हवाले कर दिया।

लड़की ने आरोप लगाया है कि शादी का झाँसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस को जल्द ही उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों से सूचना मिली कि वाराणसी के पास गाजीपुर जिले के बिरनो पुलिस स्टेशन में किसी शख्स के गुमशुदा होने का मामला दर्ज कराया गया है। वह गुमशुदा शख्स कोई और नहीं, बल्कि यह लड़की थी। इस मामले में बलात्कार के अलावा यौन अपराधों से ‘बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO)’ के तहत भी मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस लड़की के परिजनों से बात करने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

हाई प्रोफाइल स्कूल में पढ़ता था हिन्दू छात्र, मुस्लिम बच्चों की संगत में इस्लाम कबूला: किताबों में लिखी मिली मुगलों की तारीफ, अजमेर जाते पुलिस ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश के कानपुर में धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। यहाँ पर एक हाई प्रोफ़ाइल स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 11 के हिन्दू छात्र के धर्म परिवर्तन कर लेने की खबर है। आरोप है कि उसी के साथ पढ़ने वाले 3 अन्य छात्रों ने इस धर्मान्तरण में बड़ी भूमिका निभाई है। छात्र की कॉपी में इस्लामी बातें लिखी पाई गईं हैं। परिजनों के मुताबिक छात्र ने नमाज़ भी पढ़ना शुरू कर दिया था। गुरुवार (22 सितम्बर 2022) को छात्र ट्रेन से अजमेर के लिए निकल गया था जिसे जयपुर में पुलिस ने बरामद कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला कानपुर के संजय गाँधी नगर का है। यहाँ रहने वाले राकेश कुमार गुप्ता ने अपने बेटे का एडमिशन शहर के एक बड़े स्कूल में करवाया था। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस बीच छात्र की दोस्ती अपने ही क्लास के कुछ मुस्लिम बच्चों से हुई। बताया जा रहा है कि इसके बाद उस छात्र पर संगति का ऐसा असर पड़ा कि वो धीरे-धीरे इस्लामी तौर-तरीके अपनाने लगा। आरोप है कि वो अपने दोस्तों के साथ मुस्लिम इबादतगाहों में भी जाने लगा था। छात्र की उम्र 18 साल बताई जा रही है।

मिल रही जानकारी के अनुसार, लापता छात्र ने अपनी कॉपियों में अकबर और जहाँगीर जैसे कई मुगल बादशाहों की तारीफें लिख डालीं थीं। उसकी कॉपियों में इसके अलावा हजरत अली और अल्लाह-हू-अकबर भी लिखा पाया गया। घर वालों की मानें तो वो उन्हें एक बार नमाज़ भी पढ़ता मिला था जिस पर उसे डाँट पड़ी थी। घर वालों के अनुसार गुरुवार (22 सितम्बर) को वो अपने घर से निकलने के बाद शाम तक लौट कर नहीं आया तो परेशान घर वालों ने खोजबीन शुरू की।

जब परिजनों को उनके व्यक्तिगत प्रयासों से लापता छात्र नहीं मिला तो मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस की पड़ताल में पता चला कि लड़का अजमेर के लिए निकला है। इसके बाद वो तुरंत उसकी तलाश में निकल गए। इधर मामले की जानकारी हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों को जैसे ही हुई वैसे ही उन्होंने पुलिस से लापता छात्र के मुस्लिम सहपाठियों पर कार्रवाई करने की माँग की। बजरंग दल के पदाधिकारी ने आरोप लगाया है कि छात्र के साथ पढ़ने वाले उसके साथियों ने ही उसका ब्रेनवाश किया।

पुलिस ने छात्र की लोकेशन के हिसाब से मथुरा रेलवे पुलिस से बात कर के उसे बरामद कर लिया। छात्र को वापस उसके घर लाया गया है। पुलिस का कहना है कि छात्र सोशल मीडिया पर इस्लाम से जुडी चीजें अक्सर देखा करता था जिस से उसका झुकाव उस तरफ हुआ। छात्र के परिजनों ने एक मौलाना को भी मामले में आरोपित किया था लेकिन पुलिस को अभी तक मौलाना के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। पुलिस का कहना है कि छात्र परिजनों की डांट से नाराज हो कर घर से निकला था।

‘भारत माता की जय’ नारे के साथ गुलाम नबी ने बनाई नई पार्टी, ‘डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी’ रखा नाम: कहा- वापस नहीं आ सकता अनुच्छेद-370

कॉन्ग्रेस (Congress) से अलग होकर अपना रास्ता तय वाले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद (J&K Ex-CM Ghulam Nabi Azad) ने सोमवार (26 सितंबर 2022) को अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम और झंडे का ऐलान कर दिया। गुलाम नबी के नए राजनीतिक दल का नाम ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ (DAP) है।

जम्मू में ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ नई पार्टी की घोषणा करते हुए आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी की विचारधारा उनके नाम की तरह होगी और इसमें सभी धर्मनिरपेक्ष लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि नई पार्टी के एजेंडे में जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा और भूमि व नौकरियों के अधिकार स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित करने का संघर्ष शामिल है।

पार्टी के नाम को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी के नाम के लिए उन्हें जम्मू-कश्मीर से 1500 से अधिक सुझाव भेजे गए थे। इनमें उर्दू से लेकर संस्कृत तक के नाम शामिल थे। उन्होंने कहा कि सब यही चाहते थे कि पार्टी का नाम लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और स्वतंत्र हो। इसीलिए इसका नाम ‘डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी’ रखा गया।

पार्टी में आजाद शब्द के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके नाम से नहीं जुड़ा है। इसका मतलब स्वतंत्रता से है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी स्वतंत्र लोकतांत्रिक पार्टी होगी, जो आम लोगों से जुड़ी होगी। उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता, बल्कि नीतियों पर मतभेद होते हैं।

बता दें कि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 पर अपनी राय पहले ही दे चुके हैं। वे कह चुके हैं कि यह अनुच्छेद फिर से वापस नहीं आ सकता, क्योंकि इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए। वे कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास की बात भी कह चुके हैं।

गौरतलब है कि इसी साल 26 अगस्त को वे पार्टी के साथ अपने पाँच दशक पुराने रिश्ते को तोड़ लिया था। पार्टी से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस की दुर्दशा के लिए राहुल गाँधी को जिम्मेदार बताया था। गुलाम नबी आजाद को इसी साल मार्च में पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।

साल 1973 में डोडा जिले के भलेसा ब्लॉक कॉन्ग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में राजनीति की शुरुआत करने वाले गुलाम नबी आजाद आगे चलकर युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बने और साल 1980 में पहली बार संसदीय चुनाव महाराष्ट्र से लड़कर जीते। साल 1982 में वे केंद्रीय मंत्री बने और फिर 2005 में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी बने।