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अलीगढ़ में असलम ने बेच दी मस्जिद, गैर-कानूनी ढंग से चंदा माँगकर बनवाई थी: खुलासा होने पर फरार, इलाके में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक मस्जिद को बेचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 4 साल पहले इस मस्जिद का निर्माण चंदे से हुआ था। यह मस्जिद मोहम्मद असलम के खेतों में बनी हुई थी। मस्जिद के निर्माण में नियमों की अनदेखी और जमीन में स्टाम्प चोरी का भी आरोप है। प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच और करवाई के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला थानाक्षेत्र अकराबाद का है। बताया जा रहा है कि यहाँ के पिलखना नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वाले मोहम्मद असलम ने पहले तो लोगों से मस्जिद के नाम पर चंदा जुटाया फिर अपने सड़क के किनारे पड़े खेत में मस्जिद बनवाई। आरोप है कि कुछ दिनों के बाद असलम मस्जिद बेच कर फरार हो गया। यह मामला तब खुला जब पिलखना नगर पंचायत में हुए एक बैनामे में जाँच के दौरान स्टाम्प चोरी का मामला प्रकाश में आया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मस्जिद की बाकायदा रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्री करवाई गई है। रजिस्ट्री में इसको खरीदने और बेचने में भागीदार गारंटरों के नाम भी दर्ज हैं। आरोप यह भी है कि इस मस्जिद के निर्माण शासन-प्रशासन की अनुमति भी नहीं ली गई थी। मामले के सामने आते ही प्रशासन ने जाँच और मस्जिद बेचने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अलीगढ़ के ADM अमित कुमार भट्ट के मुताबिक इस बेहद गंभीर मामले में SDM को जाँच के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जाँच के उपरान्त जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार एक्शन लिया जाएगा।

बिना हिजाब निकलने वाली महिलाओं को Prostitute बना देता था अकबर, जिस पर नजर पड़ गई उसे तलाक दिला कर ले आता था: हरम में चलती थी दारू-ड्रग्स की पार्टी

मुगलों को अक्सर भारत में बिरयानी और मुरब्बा लाने से लेकर हर चीज के लिए श्रेय देने की वामपंथियों में एक होड़ सी मची रहती है। खासकर अकबर को तो ये वामपंथी गिरोह ‘राष्ट्रपिता’ ही मानता है। अब जब हिजाब को लेकर भारत में कट्टर इस्लामी गिरोह सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क तक उपद्रव कर रहा है, हमें इस संबंध में अकबर का एक कानून याद करने की आवश्यकता है। मुग़ल आक्रांता अकबर ने हिजाब के पक्ष में एक सख्त कानून बना रखा था।

असल में अकबर का कानून कुछ यूँ था कि सड़कों पर या बाजारों में अगर कोई महिला बिना हिजाब के पाई जाती है तो उसे वेश्याओं वाली जगह पर भेज दिया जाता था। अगर कोई महिला सार्वजनिक स्थानों पर अपना हिजाब या बुरका हटाती है तो उसके लिए भी यही कानून था, उसे भी Prostitute का काम करने को मजबूत किया जाता था। किसी महिला का अपने शौहर से लड़ाई-झगड़ा हुआ हो, तो भी यही सज़ा मिलती थी।

महिलाओं को लेकर अकबर ने ये कानून भी बनाया था कि अगर कोई महिला अपने शौहर से 12 साल बड़ी है तो वो उसके साथ नहीं रह सकेगी। मुग़ल बादशाह के इस क्रूर और अजीबोगरीब नियम-कानूनों का जिक्र ‘मुन्तखाब-उत-तवारीख‘ नामक पुस्तक में फ़ारसी मूल के 16वीं शताब्दी के इतिहासकार अब्दुल कादिर बदायूंनी ने किया है। इस पुस्तक में शुरुआती मुग़ल दौर के इतिहास का जिक्र है। इसे 16वीं शताब्दी के अंतिम दशक में लिखा गया था।

एक और कानून के बारे में जान लीजिए, जिसकी तर्ज पर आज भी ‘लव जिहाद’ जैसे कारनामे अंजाम दिए जाते हैं। असल में मुग़ल बादशाह अकबर के समय कानून था कि अगर कोई हिन्दू महिला को किसी मुस्लिम व्यक्ति से ‘प्यार’ हो जाता है तो फिर उसे जबरन उसके पति से छीन कर मुस्लिम व्यक्ति को सौंप दिया जाता था। एक और कहानी जान लीजिए। उस समय शेख बदाब आगरा का सरदार हुआ करता था, जिसे अकबर ने ही नियुक्त किया था।

उसकी एक बहू थी, जो काफी सुंदर थी। एक बार अकबर की नजर उस पर पड़ी। मुगलों के समय नियम था कि अगर किसी भी महिला की तरफ बादशाह की नजर पड़ जाती है और वो बादशाह को पसंद आ जाती है, तो उसके शैहर को अपनी बीवी को तलाक देकर बादशाह को सौंपना होता था। अकबर ने भी उस महिला के ससुर और पति से इस संबंध में बात की। उसके शौहर को अपनी बीवी को तीन तलाक देकर दक्कन जाना पड़ा और उस महिला को मुगलों के हरम में भेज दिया गया।

अकबर इतना सनकी था कि उसने अपने बेटियों के निकाह तक पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि मुग़ल लड़कियों से शादी करने लायक कोई है ही नहीं, इसीलिए उन्हें कुँवारी ही रहना चाहिए। असल में उसे डर रहा कि अगर उसकी बेटियों ने निकाह किया तो दामाद लोग भी गद्दी के लिए दावेदारी करने लगेंगे। वो हर साल अपने हरम पर एक बड़ी रकम खर्च करता था। हरम तो उसके अब्बा हुमायूँ और दादा बाबर के समय भी थे, लेकिन उस हरम में महिलाओं की संख्या अकबर के समय चक्रवृद्धि दर से बढ़ी।

अकबर के इन्हीं नियमों के कारण मुग़ल वंश की लड़कियों और महिलाओं का जीवन नरक बन गया और कइयों को बुढ़ापे तक कुँवारी ही रहना पड़ा। अकबर प्रत्येक दिन 6 घंटे अपने हरम में ही महिलाओं के साथ ही गुजारता था। उसके हरम में 5000 से भी अधिक महिलाएँ थीं। साथ ही हरम की सुरक्षा के लिए नपुंसक लोगों को ही रखा जाता था, ताकि महिलाओं के साथ कोई सम्बन्ध न बना पाए। हर युद्ध के साथ अकबर के हरम में महिलाओं की संख्या बढ़ती ही चली गई।

अकबर के हरम का कुछ ऐसा था हाल

अकबर को बड़ा ही मजहबी बताया जाता है, लेकिन डेविड अब्राम की पुस्तक ‘The Rough Guide to India‘ में इसका जिक्र है कि वो शराब के साथ-साथ गाँजा और अफीम का सेवन भी करता था। वो पर्सियन वाइन का शौक़ीन था। उसके जनानखाने में अक्सर ऐसी पार्टियाँ होती थीं, जिसमें नशे का भरपूर इस्तेमाल किया जाता था। इसमें महिलाओं को सेक्सुअल एक्ट्स करने के लिए कहा जाता था। अकबर के हराम में ड्रग एडिक्शन चरम पर था।

मुगलों के हरम में ‘पर्दा’ करना अनिवार्य था, अर्थात महिलाओं को हिजाब और बुर्के में ही रहना होता था। आज भारत में इसी बुर्के और हिजाब की वकालत की जा रही है, जबकि ईरान जैसे इस्लामी मुल्कों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस्लामी मुल्क की महिलाएँ ही आज हिजाब से आज़ादी चाहती हैं, लेकिन भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की दिशा में इसे औजार बनाया जा रहा है। हिजाब शुरू से महिलाओं को कैद रखे जाने और दोयम दर्जे का समझने का प्रतीक रहा है।

महिला ने क्लब के बाउंसरों पर लगाया कपड़े फाड़ने और मारपीट का आरोप, CCTV में तोड़फोड़ करते नज़र आई: क्लब मालिक ने कहा – वो नशे में थी

एक महिला ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन स्थित ‘द कोड क्लब’ के बाउंसरों ने क्लब में प्रवेश को लेकर उसके साथ बदसलूकी की है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। घटना 18 सितंबर, 2022 (रविवार) की बताई जा रही है।

दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए महिला ने आरोप लगाया कि ‘द कोड क्लब’ में उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उसके कपड़े फाड़े गए। साथ ही महिला ने दो बाउंसरों पर शारीरिक शोषण करने व उसके दोस्त को पीटने का भी आरोप लगाया है।

हालाँकि, इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी अब सामने आ गया है। इस फुटेज में महिला हंगामा करती नजर आ रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह बाउंसरों पर भड़कते हुए फर्नीचर को तोड़ रही है। उसकी चाल से भी ऐसा लग रहा है कि घटना के समय वह नशे में थी। क्लब के मालिक ने भी ऐसे ही दावा किया है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद महिला ने कोई बयान नहीं दिया है।

वहीं, क्लब के मालिक ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए महिला द्वारा किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया है। यही नहीं, क्लब के मालिक ने दिल्ली पुलिस पर ‘जबरन वसूली’ के पैसे न देने के कारण गलत तरीके से फँसाने का आरोप लगाया है।

क्लब के मालिक ने यह भी कहा, “हम पुलिस अधिकारियों से सीसीटीवी कैमरों का उपयोग करके जाँच करने के लिए रिक्वेस्ट करते रहे। चूँकि हमारा क्लब पूरी तरह से कैमरों से ढका हुआ है, इसलिए पूरी घटना रिकॉर्ड की गई है। इसके बाद भी पुलिस ने उनके कर्मचारियों को 22 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा और उनकी बेल्ट-डंडों जूतों से पिटाई की है।”

क्लब के मालिक ने यह भी आरोप लगाया है कि 23-24 सितंबर को, पुलिस उनके क्लब में आई थी, जहाँ रंगदारी देने से मना करने पर पुलिस ने 2,53,000 रुपए के उपकरणों को जब्त किया है। वहीं, पुलिस उपायुक्त चंदन चौधरी ने कहा, “दक्षिण एक्सटेंशन के ‘दा कोड’ क्लब में एक महिला के साथ दुर्व्यवहार और कपड़े फाड़ने की घटना के बारे में केएम पुर पुलिस स्टेशन में एक पीसीआर कॉल आई थी। जिसके बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुँची और शिकायतकर्ता महिला से मिली।”

डीसीपी के मुताबिक, जब पुलिस मौके पर पहुँची तो उन्होंने देखा कि महिला कपड़े खराब हो चुके हैं। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसके कपड़े दो बाउंसरों और क्लब के मैनेजर ने फाड़ दिए हैं। डीसीपी ने कहा, “उसने आगे खुलासा किया कि उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया था, और शारीरिक रूप से मारा गया था। महिला और बाउंसरों के बीच हुई बहस के बाद बाउंसर ने उसे गलत तरीके से छुआ था।”

हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी 20 साल की युवती, ईरान की पुलिस ने दाग दी 6 गोलियाँ: वीडियो में बाल बाँधती दिखी थी, और उग्र हुआ विरोध

बिना हिजाब के ईरान (Iran) में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों (Anti Hijab Protests) की अगुवाई कर रही हदीस नजफी (Hadis Najafi) की सुरक्षाबलों ने गोली मारकर हत्या कर दी। हदीस नजफी सिर्फ 20 साल की थीं और ईरान की राजधानी तेहरान के पास कराज शहर में हिजाब का विरोध कर रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हदीस नजफी को 6 गोलियाँ मारी गईं हैं। ये गोलियाँ सीने, चेहरे और गर्दन में लगी हैं। हदीस ईरान में हिजाब विरोध प्रदर्शन का प्रतीक बनने वाली लड़कियों में से एक थीं। जब उनका पुलिस से सामना हुआ तो वह बिना हिजाब का विरोध कर रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में हदीस नजफी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले अपने बालों को रबर बैंड से बाँधते हुए दिखाई दे रही हैं।

हदीस की मौत से पहले ईरानी पत्रकार मसीह अलीनेजाद (Masih Alinejad) ने ट्वीट किया था, “यह ईरानी महिला सुरक्षाबलों के सामने आमने-सामने खड़े होने को तैयार हो रही है। ईरानी शासन के पास बंदूकें और गोलियाँ हैं, लेकिन वे हमारे बालों से डरते हैं। उन्होंने थोड़े से बालों के लिए महसा अमीनी को मार डाला। आइए बाल क्रांति करें। हमारे बाल इस्लामी तानाशाहों को गिरा देंगे।”

हालाँकि, इसके बाद ईरानी पत्रकार को हदीस नजफी से जुड़ा एक ट्वीट करना पड़ा। यह ट्वीट हदीस की मौत से जुड़ा हुआ था। पत्रकार ने लिखा, “21 साल की हदीस नजफी लड़की महसा अमिनी की तरह एक और प्रतीक बनना चाहिए, क्योंकि वह अत्याचार के सामने चुप नहीं रहीं। महसा की क्रूर मौत का विरोध करने के लिए उन्हें मार दिया गया। मैं दुनिया से हदीस नजफी की आवाज बनने का आह्वान करती हूँ। रियल हीरो।”

बता दें कि 13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हेें पीट-पीट कर कोमा में पहुँचा दिया गया था। गिरफ्तारी के दिन बाद यानी 16 सितंबर को महसा की मौत हो गई थी। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए, जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिंसक होते चले गए।

ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ मोरल पुलिसिंग और हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर गई हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढँकने को तैयार हैं।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरान में अब तक चार महिलाओं समेत करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शनों से घबराई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने कुछ दिन पहले ईरान में इंटरनेट भी बंद कर दिया था। इसके कारण वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।

राजद नेता ने PFI के ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ नारे का किया समर्थन, बताया विरोध का तरीका: कार्रवाई का भी किया विरोध

एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो कॉन्ग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी से मिलकर भाजपा को हटाने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के नेता शिवानंद तिवारी ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे संगठनों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जिंदाबाद कहना विरोध का तरीका है।

राजद के वरिष्ठ नेता तिवारी ने कहा, “पाकिस्तान जिंदाबाद का जो नारा है, वो एक प्रोटेस्ट का इजहार है। ऐसा नहीं है कि वो (नारे लगाने वाले) पाकिस्तानी हो गए हैं। यह प्रोटेस्ट का इजहार है कि हाँ भाई चिढ़ा रहे हैं आपको… विरोध कर रहे हैं कि नहीं भाई साहब, जो आप कर रहे हैं उसका हम समर्थन नहीं कर रहे हैं… हम उसका विरोध कर रहे हैं और विरोध के स्वरूप पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिया। ऐसा नहीं है कि वो पाकिस्तान जाने के लिए तैयार है और कह दीजिए तो वह चला जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “इस बात को भी समझना चाहिए। आप उसका जवाब क्या दे रहे हैं कि चुन-चुन कर मारेंगे। इसका का प्रोटेस्ट है ये। आप चुन-चुन कर मार रहे हैं। क्या हालत हो गई है भाई?”

RJD के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तिवारी ने यह बात पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के प्रदर्शन और नारेबाजी पर कही। उन्होंने कहा कि उनका प्रोटेस्ट करने का अपना तरीका है। उन्होंने कहा कि चुन-चुन मारने जैसी टिप्पणी के कारण ही दूसरे देशों में भारतवंशियों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जिन-जिन देशों में भारत के लोग हैं, उनके खिलाफ नफरत का इजहार होने लगा है।

शिवानंद के इस बयान पर बिहार में उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने ही विरोध किया है। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि तिवारी का यह बयान देश के मान-सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला है। कुशवाहा ने कहा कि आरजेडी का इस तरह का बयान कहीं से सही नहीं है और जब देश की बात आती है तो इसकी एकता-अखंडता के लिए एकजुट हैं।

राजद नेता शिवानंद तिवारी के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी उन्हें लोग खरी-खोटी सुना रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अब शिवानंद तिवारी का भी पाकिस्तान के लिए टिकट कटवा देना चाहिए तो कुछ लोग इसे तुष्टिकरण की चरम सीमा बता रहे हैं।

गोवा में रह कर अवैध कारोबार कर रहे 20 बांग्लादेशी धराए, अब होगा प्रत्यर्पण: इससे पहले असम में पकडे गए थे 17 बांग्लादेशी, इस्लाम का कर रहे थे प्रचार

गोवा के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने अवैध कारोबार कर रहे करीब 20 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इस बात की जानकारी गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने दी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अवैध कारोबार चलाने वाले 20 से अधिक बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के पास भारतीय पते या वोटर आईडी कार्ड नहीं थे।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, “गोवा के अलग-अलग हिस्सों में अवैध कारोबार चलाने वाले 20 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों के पास भारतीय पता या वोटर आईडी कार्ड नहीं थे। ऐसे और लोगों की तलाश कर रहे हैं। इन लोगों को बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया जाएगा। गृह मंत्रालय को इससे अवगत कराया गया है।”

मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से किराएदारों के पुलिस सत्यापन और उनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद ही मकान किराए पर देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से अपने किराएदारों के विवरण सत्यापित करने का आह्वान करता हूँ। सभी लोग किराएदारों से जानकारी लें कि वे कहाँ से आए हैं और उनका उद्देश्य क्या है। ऐसे कई लोग हैं जो राज्य में रह रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं। अगर कमरे किराए पर देने हैं तो पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएँ।”

बता दें, हाल ही में गोवा एटीएस (ATS) ने 22 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की थी। एटीएस की ओर से बीते दो महीनों में किराएदारों और विदेशियों के सत्यापन अभियान के दौरान इन सभी की पहचान हुई थी।

बांग्लादेश के नागरिकों की पहचान को लेकर एटीएस पुलिस अधीक्षक शोभित सक्सेना ने कहा कि ये लोग फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पिछले 4-5 साल से गोवा में अवैध रूप से रह रहे हैं। उनके पास से नकली दस्तावेज मिले, जो अन्य राज्यों और बांग्लादेश कार्डों में बनाए गए थे। उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में पेश किया गया है। इन सभी की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

बता दें, इससे पहले गत 19 सितंबर को असम के बिश्वनाथ जिले के बाघमरी इलाके से 17 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। इन सभी पर भारतीय वीजा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने कहा था कि ये सभी आरोपी पर्यटक वीजा पर भारत आए थे, लेकिन मजहबी प्रचार कर रहे थे। बता दें कि असम से गिरफ्तार हुए 17 बांग्लादेशी नागरिक इस्लाम का प्रचार कर रहे थे। इन लोगों ने इस्लाम का प्रचार करते हुए करीब 500 लोगों को अपना शागिर्द बनाया था।

अरबाज ने दलित युवती को फँसाया, फिर शाहनवाज और फारूक संग मिल कर किया गैंगरेप: तीनों राजस्थान पुलिस की पहुँच से बाहर

राजस्थान के चुरू जिले (Churu, Rajasthan) में एक दलित युवती को प्रेमजाल में फँसाने और फिर अपहरण कर साथियों के साथ मिलकर उसका गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने अरबाज और उसके साथियों सहित तीन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज खोजबीन कर रही है।

चुरू शहर के अग्रसेन नगर निवासी 22 साल की दलित युवती से गैंगरेप के मामले में पुलिस ने अरबाज धोबी, उसके दोस्त शहनवाज खत्री और फारूक खत्री के खिलाफ गैंगरेप में मामला दर्ज किया है। आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने ST-SC एक्ट भी लगाया है। सारे आरोपित फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

चूरू महिला थाना प्रभारी सुखराम चोटिया के अनुसार, मुख्य आरोपित अरबाज ने युवती को शादी का झाँसा देकर अपने प्रेमजाल में फँसा लिया था। 19 सितंबर 2022 को अरबाज ने युवती को बुलाया और जान से मारने की धमकी देकर उसे अपनी कार में अपहरण कर लिया।

आरोपित अरबाज युवती को पहले झुंझुनूं लेकर गया, वहाँ उसने शादी का वास्ता देकर उसका रेप किया। इसके बाद अपने घरवालों से मिलवाने की बात कहकर वह युवती को बस में बैठाकर सीकर लेकर चला गया। सीकर में वह अपने दोस्त शहनवाज और फारूक को बुला लिया और युवती को लेकर एक होटल में गया। वहाँ तीनों ने युवती के साथ गैंगरेप किया।

अगले दिन 20 सितंबर 2022 को युवती किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर अपने घर पहुँची। वहाँ पीड़िता ने अपनी माँ को पूरी घटना बताई। इसके बाद पीड़िता परिजनों के साथ थाने पहुँची और आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ IPC (भारतीय दण्ड संहिता) की धारा 376(2) (एन), 376D, 366 और SC-ST एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। पीड़िता का मेडिकल करवाने के बाद पुलिस आरोपितों की तलाश में जुटी है।

’20 साल में दोगुनी हो गई मुस्लिमों की जनसंख्या, संसद में उठी थी शरिया की माँग’: नेपाल के सांसद ने बताया – यहाँ के वामपंथी भी हिन्दू विरोधी, ISI भी सक्रिय – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल से लगी भारत की सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने भारत से लगे नेपाल के इलाकों का दौरा किया। हमने नेपाल के दांग और कपिलवस्तु जिलों में जो कुछ देखा उस पर हमने नेपाल के कपिलवस्तु से सांसद अभिषेक प्रताप शाह से बात की। प्रस्तुत है इस इस कड़ी की 23वीं रिपोर्ट:

सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने सीमा पर और नेपाल में बढ़ रही इस्लामी गतिविधियों की ख़बरों की पुष्टि की है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार से इन मुद्दे पर विशेष ध्यान देने की अपील की। सांसद के मुताबिक, अंग्रेजों ने 1923 में भारत को नेपाल से अलग किया था और रातों-रात सीमा रेखा खींच दी गई थी। उन्होंने आगे बताया कि सीमा विभाजन के बाद भी जो जहाँ रह रहा था, वहीं अपने-अपने धर्म को मानते हुए रहना जारी रखा।

अभिषेक प्रताप के अनुसार, तब बॉर्डर पर हिन्दू-मुस्लिम आबादी संतुलित थी, लेकिन बाद में कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों ने इसे बदल डाला और अब असंतुलन साफ़ देखा जा सकता है।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

मुस्लिमों में जनसंख्या पर नहीं है कोई रोक, 90% तस्कर इसी समुदाय से

अभिषेक प्रताप शाह ने हमें आगे बताया कि मुस्लिमों में आबादी बढ़ाने पर कोई रोक नहीं है, इस कारण हिन्दू नेपाल में कम होते चले गए। उन्होंने कहा कि पहले किसी को इसका एहसास नहीं हुआ लेकिन अब जब सब कुछ सामने नजर आने लगा तब हम लोग चिंतित हैं।

सांसद शाह के मुताबिक नेपाल में मुस्लिमों के कुछ खुराफाती तत्व अधिक से अधिक पैसा कमाने के लिए अपराधों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर नेपाल और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों का आँकड़ा निकाला जाए तो 90% नशे के अवैध कारोबारी मुस्लिम समाज से निकलेंगे।

नेपाल में 20 साल में डबल हो गई मुस्लिम आबादी

अभिषेक प्रताप ने कहा कि पिछले 20 साल के अंदर नेपाल में मुस्लिम आबादी में दोगुना हो गई है। उन्होंने बताया कि 20 साल पहले 4.5% मुस्लिम आबादी वाले नेपाल में अब 9% से अधिक मुस्लिम आबादी है। इसी के साथ सांसद ने आने वाले 20 वर्षों में मुस्लिम आबादी कई गुना और बढ़ जाने की आशंका जताई।

अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि नेपाल में मुस्लिम जनसंख्या सिर्फ भारत से लगे सीमावर्ती और तराई इलाकों में ही नहीं बल्कि सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में बहुत तेजी से बढ़ रही है। सांसद के मुताबिक, पहाड़ी लोग काफी सीधे और सज्जन होते हैं और वो मुस्लिम समुदाय की मीठी और चिकनी-चुपड़ी बातों में आ जाते हैं। अभिषेक प्रताप ने जानकारी दी कि नेपाल में भी लव जिहाद जैसी घटनाएँ सामने आने लगी हैं।

अभिषेक प्रताप के मुताबिक, नेपाल के उत्तरी इलाकों में रोहिंग्याओं की काफी बड़ी तादाद में घुसपैठ हुई है। उन्होंने कहा कि ये घुसपैठ इसलिए हो गई क्योंकि रोहिंग्याओं की शक्ल-सूरत उत्तरी नेपाल के निवासियों से थोड़ी-बहुत मिलती जुलती है।

कभी 1 मस्जिद थी राजधानी काठमांडू में, आज हैं 12

अभिषेक प्रताप ने कहा कि नेपाल के हालत हमारे लिए सावधानी का अलार्म बजा रहे हैं। उनके मुताबिक, कभी नेपाल की राजधानी काठमांडू में सिर्फ 1 मस्जिद हुआ करती थी आज उसी शहर में 12 मस्जिदें हैं। सांसद के मुताबिक, ये तमाम मस्जिदें कभी सुन्नी तो कभी वहाबी के नाम पर बनाई जा रही हैं।

सांसद अभिषेक प्रताप ने आगे बताया कि भले ही नेपाल गरीब देश कहा जाता हो लेकिन यहाँ के मुस्लिम अपनी जकात का पैसा मस्जिद और मदरसों में लगाते है। इसी के साथ उन्होंने ये भी माना कि इबादतगाहों के लिए विदेश से भी धन आ रहा है। सांसद के माना कि नेपाल की चमकती मस्जिदें और मदरसे इसी पैसे की बदौलत हैं।

नेपाल के मुस्लिम सांसदों ने संसद में माँगा था शरिया क़ानून

अभिषेक प्रताप शाह के मुताबिक, लगभग 7 साल पहले जब उनकी मौजूदगी में नेपाल की संसद में संविधान बनाया जा रहा था तब तब नेपाल के मुस्लिम सांसदों ने सदन में अपने लिए शरिया कानून की माँग उठाई थी। उन्होंने आगे बताया कि इस माँग का नेपाल की हर पार्टी के मुस्लिम सांसद ने सदन में हाथ उठा कर समर्थन भी किया था और हाँ में हाँ मिलाई थी। शाह ने ये भी बताया कि कुल लगभग 260 सदस्यीय नेपाली सदन में फिलहाल लगभग 20 मुस्लिम सांसद हैं, जिसमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

सांसद शाह ने आगे बताया कि अभी नेपाल के कई लोग मुस्लिमों से जुड़ी तमाम बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं लेकिन जब यहाँ भी फ़्रांस जैसे हालात बन जाएँगे तब सबकी समझ में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी लोग मौज मस्ती वाले लोग थे और उन्हें एहसास ही नहीं था कि कभी ये दिन भी आएगा। शाह के मुताबिक, उनके संसदीय क्षेत्र में लगभग हर साल हिन्दू मुस्लिम विवाद होता है जिसमें कई बार तो मुझे भी फँसाने की साजिश रची गई।

मुस्लिम अपराधी चंद पैसो में खरीद लेते हैं नेपाली प्रशासन को, नेपाल का भी वामपंथी हिन्दू विरोधी

सांसद अभिषेक शाह के मुताबिक, कपिलवस्तु में हर साल होने वाले दंगों को भले ही वामपंथी करवाते हैं लेकिन उसको अंजाम मुस्लिम वर्ग के लोग देते हैं। सांसद शाह ने कहा कि तस्करी आदि अपराधों से पैसे जमा रखने वाले मुस्लिम अपराधी अपराध कर के भी छूट जाते हैं क्योंकि वो नेपाली प्रशासन को कुछ पैसों में खरीद लेते हैं। सांसद ने ये भी कहा कि जो व्यक्ति दंगों के बाद आरोपितों पर कार्रवाई की माँग करता है, उसी पर केस दर्ज कर दिया जाता है।

अभिषेक शाह के अनुसार, दुनिया का हर वामपंथी हिन्दू धर्म का विरोधी है जिसमें नेपाल के कम्युनिस्ट भी शामिल हैं। उनका मानना है कि हिन्दू राष्ट्र का दर्जा और नेपाल के राजा को हटाने का एजेंडा नेपाली वामपंथियों का ही था। शाह का दावा है कि नेपाल से होने वाली लगभग हर भारत विरोधी साजिश में यहाँ के वामपंथियों का ही हाथ होता है। सांसद के अनुसार, पाकिस्तान से आया अवैध पैसे धर्मांतरण जैसे कामों में लग रहा है लेकिन भारत के विरोध में चीन और पाकिस्तान दोनों ने पहले से ही हाथ मिला रखा है।

नेपाली राजनीति में मुस्लिमों की अच्छी दखल

अभिषेक ने बताया कि वर्तमान समय में नेपाल की केंद्रीय और प्रादेशिक राजनीति में कई मुस्लिम सक्रिय है। उन्होंने जानकारी दी कि मुस्लिमों के लिए सरकार बजट भी पास करती है और इसी के साथ मदरसों के लिए अनुदान भी जारी होता है।

अभिषेक प्रताप ने बताया, “कालांतर में नेपाल के अंदर सीमा पर भारत में देवरिया जिले से आए मिर्जा दिलशाद बेग जैसे अपराधियों ने अपने ठिकाने बना डाले। शुरू में बाहरी लोगों ने आ कर यहाँ व्यापार आदि के बहाने पैर जमाए और बाद में और लोगों को बसा लिया। आज जो कुछ भी दिख रहा उसके पीछे ये एक बड़ी वजह रही। भारत सरकार को नेपाल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्योकि शायद अब दिल्ली की प्राथमिकता में यूरोपीय और अमेरिका जैसे देश शामिल हो गए हैं।”

अभिषेक प्रताप शाह का कहना है कि भले ही यूरोपीय देश व्यापारिक नजरिए से भारत के लिए लाभप्रद हों पर नेपाल सुरक्षा की दृष्टि से भारत के लिए अहम है। सांसद ने माना कि नेपाल में भारत विरोधी सोची-समझी साजिश के तहत माहौल बनाया जा रहा है।

नेपाली शासकों ने खुद को समझा अंग्रेजों के बराबर और भारतीयों को गुलाम

सांसद शाह की मानें तो नेपाल की फ़ौज अंग्रेजों की तरफ से लड़ी थी, इस वजह से अंग्रेज उन्हें अतिरिक्त इज्जत देते थे। शाह के मुताबिक, इस वजह से नेपाल के पूर्व शासकों ने खुद को अंग्रेजो के बराबर मान लिया और उनके नजरिए में भारतीय उनके गुलाम ही रहे। सांसद का मानना है कि कहीं न कहीं उस सोच को यहाँ नेपाल में हवा दिलाई गई और इसी वजह से कइयों के मन में भारत विरोध भावनाएँ भड़कीं।

लिपुलेख सीमा विवाद का खुलासा करते हुए सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि वो विवाद नेपाली प्रधानमंत्री ओली द्वारा जानबूझ कर खड़ा किया गया था। अभिषेक शाह ने कहा कि विवाद खड़ा करने की टाइमिंग तब रखी गई थी, जब भारत में धारा 370 हटी थी। शाह ने बताया कि के पी ओली को भरोसा दिलाया गया था कि अगर भारत से हालत बिगड़े तो नेपाल की मदद के लिए चीनी फ़ौज भेज दी जाएगी। शाह के मुताबिक, धारा 370 आने से चीन की सीपैक परियोजना को झटका लगा है।

वामपंथ उठाता है गरीबी का फायदा, ISI भी सक्रिय

नेपाल में बढ़ते वामपंथी दखल पर वहाँ के सांसद अभिषेक शाह ने कहा कि नेपाल की गरीबी का फायदा वामपंथ उठा रहा है और यही कम्युनिस्टों की सोच भी होती है। भारत के शाहीन बाग़ के पीछे भी कम्युनिस्ट भी थे क्योकि कम्युनिस्टों को भारत से हमेशा विरोध रहा है। उन्होंने कहा कि जो वामपंथी भारत की छाती पर बैठ कर के भारत का गला दबा सकते है उनके लिए नेपाल कौन सी दूर की बात है।

अभिषेक प्रताप ने माना कि नेपाल में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI एक लम्बे समय से सक्रिय है। उनके मुताबिक, ISI न सिर्फ सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देती है बल्कि वो नकली नोटों जैसे कारोबार को भी चला रही है।

दोनों देशों का बने साझा गश्ती दल

सांसद शाह ने सुरक्षा के लिए दोनों देशों की साझा पेट्रोलिंग टीम बनाने की माँग की और बताया कि इस माँग को वो दिल्ली में भी उठा चुके हैं। शाह के मुताबिक, सीमाएँ खुली होने के चलते कोई भी अपराधी आराम से दोनों देशों में कहीं भी अपराध कर के भाग सकता है और प्रत्यर्पण संधि न होने के चलते बाद में अपराधी को पकड़ने में बहुत दिक्कतें आती हैं। सांसद ने बताया कि ये फ़ोर्स सीमा के 20 किलोमीटर तक अधिकृत की जाएँ और यदि ऐसा हुआ तो सीमावर्ती इलाकों में बहुत कुछ सुधारा जा सकता है।

योगी आदित्यनाथ के CM बनने के बाद बहुत बदलाव

अभिषेक शाह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए उन्हें भारत की नेपाल हितों के प्रति सबसे गंभीर शख्सियत बताया। उन्होंने बताया कि UP में योगी सरकार बनने के बाद नेपाल से बॉर्डर पार करने वाले अपराधियों की UP पुलिस तुरंत धर-पकड़ करती है। शाह का मानना है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद भारत और नेपाल के रिश्तों में काफी सुधार आया है क्योंकि नेपाल की ज्यादातर सीमा UP से ही लगी हुई है। सांसद के मुताबिक नेपाल के भारत समर्थक लोग मोदी के बाद योगी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं और उसके बाद दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।

अभिषेक शाह ने कहा कि नवम्बर 2022 में एक बार फिर से नेपाल में चुनाव होने जा रहे हैं और इस बार नेपाली जनता चुनावों में ओली की वामपंथी पार्टी को शिकस्त देगी। नेपाल के फिर से हिन्दू राष्ट्र बनने की संभावनाओं पर सांसद अभिषेक ने कहा, “आज भी हमारी राष्ट्रीय पशु गाय है और तमाम विरोधों के बाद भी कोई नहीं जानता कि क्या पता हम फिर से इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने में सफल रहें। हम ये भी चाहते हैं कि भारत और नेपाल एक साथ ही हिन्दू राष्ट्र बनें।”

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

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नसीमुद्दीन ने नाबालिग लड़के को छेड़ा, अब्दुल्ला ने छात्रा को पकड़ा: 1 महीने में केरल के अलग-अलग मदरसों से 2 मास्टर गिरफ्तार, यौन शोषण का आरोप

केरल में इस महीने दो जगह से दो मदरसा मास्टरों को गिरफ्तार किया गया है। इनके ऊपर आरोप है कि इन्होंने मदरसे में पढ़ने आए बच्चों का यौन शोषण किया। इनमें से एक को त्रिशूर से पकड़ा गया है और दूसरे को वायनाड से गिरफ्तार किया गया है।

मदरसे में छात्र से करता था नसीमुद्दीन छेड़छाड़

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल के त्रिशूर जिले के कोडुंगल्लूर शहर में नसीमुद्दीन नाम के मदरसा टीचर को गिरफ्तार किया गया। वह मेथला कंदमकुलम स्थित मदरसे में पढ़ाता था और वहाँ आने वाले एक नाबालिग लड़के से छेड़छाड़ करता था।

मास्टर की हरकत का पता जब लड़के के अब्बा को चला तो उन्होंने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दी और पुलिस ने नसीमुद्दीन को पकड़ा। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश करके जेल भेज दिया गया।

वायनाड में मदरसा टीचर अब्दुल्ला गिरफ्तार

इसी तरह वायनाड के मामले में 55 साल के ताइल अब्दुल्ला मुसलयार पर भी एक नाबालिग बच्चे के यौन शोषण का आरोप है। उसकी गिरफ्तारी पुलिस ने इसी महीने 4 सितंबर को हुई थी। उस पर आरोप था कि वह मदरसे में पढ़ने वाली छात्रा का हाथ पकड़कर उसके साथ अश्लील हरकतें करता था।

घटना की बाबत, पीड़िता ने इस संबंध में चाइल्डलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद बथेरी पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत ये केस को दर्ज किया। इसके बाद अब्दुल्लाह की गिरफ्तारी हुई।

इस्लाम सिखाने के बहाने यौन शोषण

उल्लेखनीय है कि केरल के मदरसों में छात्रों के यौन शोषण की ये हालिया घटनाएँ हैं। इससे पहले केरल के कोझीकोड मुखदार तरबियाथुल इस्लामी सेंटर में इस्लाम कबूल करने वाली एक युवती ने मदरसा को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए थे। महिला ने सेंटर के प्रमुख पर महिलाओं और लड़कियों को इस्लाम ‘सिखाने’ के बहाने प्रताड़ित करने और उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया था।

जनम टीवी के साथ अपने इंटरव्यू में, महिला ने कहा था कि इस्लामी मदरसा का प्रमुख बड़ी संख्या में लड़कियों का यौन शोषण कर चुका है। महिला ने केंद्र की तुलना जेल से की थी और कहा था कि महिलाओं और लड़कियों को मजहबी मदरसा छोड़ने पर प्रतिबंध है।

हॉस्टल की दूसरी लड़कियों की न्यूड वीडियोज रिकॉर्ड करती थी छात्रा, अपने दोस्त को भेज देती थी: मोहाली-मुंबई के बाद अब मदुरै के हॉस्टल में घटना

पंजाब के मोहाली स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और महाराष्ट्र के आईआईटी बॉम्बे में लड़कियों के वीडियो बनाने का मामला अब तक शांत नहीं हुआ है। इसी बीच अब तमिलनाडु के मदुरै में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। वहाँ प्राइवेट कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाली छात्रा लड़कियों के वीडियो रिकॉर्ड कर अपने दोस्त को भेजती थी। इस मामले में पुलिस ने छात्रा और उसके दोस्त को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित छात्रा मदुरै के एक प्राइवेट कॉलेज में बीएड की पढ़ाई कर रही है। इस कॉलेज का हॉस्टल यहाँ के अन्नानगर इलाके में है। हॉस्टल में रहने वाली अन्य लड़कियों ने आरोप लगाया है कि आरोपित छात्रा लड़कियों की न्यूड फोटो और वीडियो छिपकर रिकॉर्ड करती थी। इसके बाद वह इन वीडियो और फोटोज को अपने दोस्त को भेज देती थी।

आरोपित छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों पर हॉस्टल में ही रहने वाली एक लड़की को शक हुआ। इसके बाद उसने इस बात की जानकारी हॉस्टल वार्डन को दी। इस शिकायत के आधार पर हॉस्टल वार्डन एक्टिव मोड में आ गई और उसने आरोपित छात्रा का फोन लेकर उसे चेक करना शुरू किया। वार्डन जब आरोपित छात्रा का फोन चेक कर रही थी तब उसे फोन में कई लड़कियों के न्यूड फोटो और वीडियो मिले।

इसके बाद, हॉस्टल वार्डन ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी तत्काल पुलिस को दी। पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आरोपित छात्रा से पूछताछ शुरू की। इस पूछताछ में उसने बताया कि वह लड़कियों के वीडियो और न्यूड फोटो अपने दोस्त अशोक को भेजी थी।

आरोपित छात्रा ने यह भी बताया कि अशोक कामुधी में क्लीनिक चलाता है। अशोक की तीन साल पहले ही शादी हो चुकी है। आरोपित छात्रा ने अशोक पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह उसे हॉस्टल की लड़कियों के नहाते और कपड़े बदलते समय का वीडियो और फोटो शूट कर भेजने का दबाव बनाता था। इसके बाद, पुलिस ने आरोपी छात्रा के साथ ही उसके दोस्त अशोक को भी गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस दोनों ही आरोपितों से पूछताछ कर रही है।

बता दें, इससे पहले ऐसा ही मामला पंजाब की चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से सामने आया था, जहाँ छात्रा पर हॉस्टल के वॉशरूम में नहा रही लड़कियों के वीडियो बनाने का आरोप लगा था। यह भी कहा गया था कि आरोपित छात्रा वीडियो बनाकर अपने बॉयफ्रेंड को भेजती है। इस मामले में पुलिस ने आरोपित छात्रा समेत पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यानी पुलिस ने, आरोपित एमबीए की छात्रा, उसका बॉयफ्रेंड सनी मेहता और उसका दोस्त रंकज वर्मा व सेना के जवान संजीव सिंह को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अभी कुछ और गिरफ्तारी होने की बात कही जा रही है।

इसके अलावा, आईआईटी बॉम्बे में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। यहाँ हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा ने हॉस्टल कैंटीन में काम करने वाले एक कर्मचारी पर वॉशरूम का वीडियो बनाने का आरोप लगाया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।