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‘मौलवी नहीं चाहते महिलाओं को अधिकार मिले’ : ईरान में उग्र हुआ हिजाब विरोधी प्रदर्शन, पुलिस ने 8 को गोली मारी, हजारों गिरफ्तार

इस्लामी मुल्क ईरान में हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन ने गुरुवार (21 सितम्बर 2022) तक देशव्यापी रूप ले लिया। उग्र हो चला ये प्रदर्शन अब 15 अलग-अलग शहरों में फैल चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और जनता के बीच भिड़ंत भी हो रही है। बताया जा रहा है कि अब तक कुल 8 प्रदर्शनकारी पुलिस की गोली का शिकार हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों की गिरफ्तारी की भी खबर है। प्रदर्शनकारी ईरान सरकार से हिजाब को अनिवार्य के बजाए वैकल्पिक बनाने की माँग कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 1 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हैं। प्रदर्शनकारी मौलवियों के खिलाफ नारे बुलंद करते हुए उन पर आँख मूँद कर बैठने का आरोप लगा रहे हैं। सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे लोगों ने चेतावनी दी है कि सरकार मौलवियों के भरोसे ज्यादा दिन नहीं टिकने वाली। इसी प्रदर्शन में ये भी कहा जा रहा है कि मौलवी नहीं चाहते कि ईरान की महिलाओं को उनका अधिकार मिले।

पुलिस के विरोध में ईरान में गरशाद ऐप लॉन्च

हिजाब विरोधी प्रदर्शन में महिलाओं की भारी तादाद है। उनका कहना है कि हिजाब के कारण उन्हें जान क्यों गँवानी पड़े ? प्रदर्शनकारी महिलाओं के समर्थन में ईरान के युवाओं ने गरशाद नाम का एक ऐप भी शुरू किया है। इस ऐप में मोरल पुलिसिंग का विरोध किया गया है। मात्र 5 दिनों में ये ऐप 10 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुका है।

बताया जा रहा है कि इसी ऐप के तहत प्रदर्शनकारी सीक्रेट मैसेज भेज रहे हैं। ईरान सरकार ने राजधानी तेहरान में इंटरनेट बंद करवा दिया है और इसी के साथ वहाँ इन्स्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब को भी ब्लॉक कर दिया गया है। फिलहाल इस पूरे हंगामे पर ध्यान न देते हुए ईरान के सबसे बड़े मजहबी नेता अयातुल्लाह अयातुल्ला खामेनेई ने बुधवार (21 सितम्बर 2022) को अपनी सभा में हिजाब का जिक्र तक नहीं किया।

ईरान में महसा अमिनी की हत्या

गौरतलब है कि ईरान में हिजाब न पहनने के कारण पुलिस हिरासत में ली गई एक महिला महसा अमिनी की मौत हो गई थी, जिसके बाद हजारों की संख्या में महिलाएँ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। इन महिलाओं ने इस्लामी मुल्क के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को तानाशाह बताते हुए उसकी मौत की भी दुआ की और इससे संबंधित पोस्टर लहराए।

बिहार के बेगूसराय में फिर से चली गोलियाँ: अपराधी थाने के आगे फायरिंग कर फरार, पुलिस कह रही – तलाशी में छापेमारी कर रहे

बिहार के बेगूसराय जिले में एक बार फिर से गोलीबारी की घटना होने की सूचना है। इस बार पुलिस स्टेशन के आगे गोली चलाई गई है। बताया जा रहा है कि गोली चला कर आरोपित हथियार लहराते हुए मौके से निकल गए।

मिली जानकारी के मुताबिक इस बार कुल 3 अलग-अलग जगहों पर गोलियाँ चली हैं। बेगूसराय जिले की पुलिस हालाँकि बस एक जगह फायरिंग होने की जानकारी दे रही है। घटना बुधवार (21 सितम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना के दिन दोपहर लगभग 2:30 पर 4 आरोपितों ने फायरिंग की घटना को अंजाम दिया। गोलियाँ शाम्हो-बेगूसराय मार्ग पर चलाई गई थीं। ये सभी बदमाश स्कूटी और बाइक पर सवार थे।

बताया जा रहा है कि गोलियाँ चलाने वाले बदमाश नशे में थे। इसी के साथ दावा ये भी किया जा रहा है कि बदमाशों ने मटिहानी पुराना थाना चौक से 100 मीटर उत्तर से हवाई फायरिंग की। कहा जा रहा है कि उस दौरान उनके हाथों में हथियार दिख रहे थे। आरोप है कि बदमाशों ने किसी अंडा बेचने वाले को निशाना बनाया था।

मिली जानकारी के अनुसार बेगूसराय के ही मटिहानी प्रखंड के सामने स्थित केएल उच्च विद्यालय के मुख्य द्वार पर गोली चला कर आरोपित बेगूसराय की तरफ भाग निकले। कहा ये भी जा रहा है कि पुलिस ने आरोपितों का पीछा किया लेकिन उन्हें पकड़ने में नाकाम रही।

थाना प्रभारी मटियानी के अनुसार गोली चलाने वाले स्थानीय निवासी हैं, जिनकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। गोलीबारी के चश्मदीदों के अनुसार आरोपितों ने लगभग छह राउंड गोलियाँ चलाई हैं। वहीं जिले के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने एक स्थान पर गोली चलने की बात कह कर आरोपितों को चिन्हित करने और कार्रवाई जारी होने की जानकारी दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले बेगूसराय में 13 सितंबर 2022 को बाइक सवार दो बदमाशों ने 40 किलोमीटर के दायरे में 11 लोगों को गोली मारी थी। इनमें से चंदन कुमार नाम के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि अन्य कई लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इन दोनों बदमाशों को साइको बताया था। पुलिस के मुताबिक आरोपित अपना दबदबा बनाने के लिए भय फैलाना चाहते थे।

हाजीपुर में भी हुई थी फायरिंग

बेगूसराय की तरह बिहार के ही हाजीपुर जिले में 18 सितंबर 2022 की रात बाइक सवार दो बदमाशों ने कई राउंड फायरिंग करके फरार हो गए थे। इस घटना के बाद लोग दहशत में आ गए थे और वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे थे।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI का राष्ट्रीय और दिल्ली अध्यक्ष गिरफ्तार: 11 राज्यों में छापेमारी, दबोचे गए 100 से ज्यादा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने टेरर फंडिंग और आतंकी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जाँच एजेंसियों ने गुरुवार (22 सितंबर 2022) सुबह 11 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के टॉप लोगों के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राष्ट्रीय अध्यक्ष ओएमएस सलाम और इसी संगठन के दिल्ली अध्यक्ष परवेज अहमद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया है। पीएफआई के लोग छापेमारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन करने उतर गए हैं। इसको देखते हुए दिल्ली में एनआईए ऑफिस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, जाँच एजेंसियों ने राज्यों में प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर 100 से ज्यादा PFI कैडर्स को गिरफ्तार किया है।

एजेंसियों ने केरल के मलप्पुरम जिले से पीएफआई के चेयरमैन ओएमएस सलाम को उठाया। पार्टी के लोग सलाम के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस कार्रवाई के बाद कर्नाटक, केरल में पार्टी के लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्नाटक पुलिस ने मंगलुरु में एनआईए की छापेमारी का विरोध कर रहे पीएफआई और एसडीपीआई के लोगों को हिरासत में ले लिया है।

वहीं, असम पुलिस ने राज्य भर में पीएफआई से जुड़े 9 लोगों को हिरासत में लिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एएनआई को बताया कि कल (21 सितंबर 2022) रात असम पुलिस और एनआईए ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए गुवाहाटी के हाटीगाँव इलाके में पीएफआई से जुड़े राज्य भर में 9 लोगों को हिरासत में लिया।

इसके अलावा NIA ने तमिलनाडु में कोयंबटूर, कुड्डलोर, रामनाद, दिंडुगल, थेनी और थेनकाशी समेत कई जगहों पर PFI से जुड़े बड़े लोगों के आवास पर रेड की है। छापेमारी के खिलाफ पीएफआई के 50 से ज्यादा लोग पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे।

बता दें कि इससे पहले 18 सितंबर 2022 को एनआईए (NIA) ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 23 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जाँच एजेंसी ने ये छापेमारी कराटे प्रशिक्षण केंद्र के नाम पर संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा ट्रेनिंग कैंप चलाए जाने के मामले में की थी।

एनआईए ने तब आंध्र प्रदेश के कुरनूल, नेल्लोर, कडपा, गुंटूर और तेलंगाना के निजामाबाद में संदिग्धों के घर व बिजनेस परिसरों की तलाशी भी ली थी। जाँच एजेंसी को इन तमाम जगहों पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर ही छापेमारी की गई थी।

पीएफआई और आतंक का इतिहास

पीएफआई का हिंसा फैलाने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में दंगे की जाँच के दौरान पीएफआई की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। साथ ही, पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था।

इसके अलावा, नवंबर 2020 में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे और हिंसा उकसाने के आरोपित किसानों के सरकार विरोधी प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया था। उसने प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

‘गाय काटना मजहबी अधिकार’ पर सुप्रीम कोर्ट में हारा था मुस्लिम पक्ष, अब स्कूल में बुर्का/हिजाब पर कर्नाटक AG ने कहा – आर्टिकल 25 के तहत यह अधिकार नहीं

कर्नाटक बुर्का विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि यूनिफॉर्म की अनिवार्यता किसी भी छात्र या छात्रा के धार्मिक/मजहबी अधिकारों का हनन नहीं है। कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता (AG: Advocate General) ने कोर्ट को यह भी बताया कि ऐसे कदम से शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार के मज़हबी कपड़े पहन कर आने से रोक लगेगी, जिसमें हिजाब भी शामिल है। उच्चतम न्यायालय में यह सुनवाई बुधवार (21 सितम्बर 2022) को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच कर रही है। इसी सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रभुलिंग नवदगी ने दलील देते हुए कहा कि हिजाब समर्थक तमाम छात्राएँ इसे स्कूल के बाहर पहन सकती हैं। समान यूनिफॉर्म को कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने एकता और अनुशासन के लिए बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि इससे पढ़ाई का अच्छा माहौल तैयार होता है।

वहीं हिजाब के समर्थन में बहस कर रहे वकीलों ने आर्टिकल 25 का उल्लेख करते हुए कोर्ट को बताया कि इसे पहनना मुस्लिम छात्राओं का ‘मज़हबी अधिकार’ है। इन्हीं वकीलों ने हिजाब की माँग को भी आर्टिकल 19 के तहत ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ करार दिया।

‘मज़हबी अधिकार’ या ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ वाली दलील के जवाब में कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने साल 1958 में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए बताया कि कैसे तब बकरीद में गाय की कुर्बानी को जायज ठहराने की माँग उठाते हुए उसे मजहबी अधिकार बताया गया था, जिसे मुख्य न्यायाधीश सहित 5 जजों की बेंच ने ख़ारिज कर दिया था।

कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने अपनी दलील में आगे बताया कि साल 1958 के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मौकों पर धार्मिक/मजहबी अधिकारों के स्वतंत्रता की व्याख्या की है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ये बता चुका है कि हर मज़हबी गतिविधि को धार्मिक/मजहबी अधिकारों की स्वतंत्रता के नाम पर लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

महाधिवक्ता ने कहा कि शिक्षा में समानता स्थापित करने के लिए क्लास 10 तक के सभी बच्चों को मुफ्त में यूनिफॉर्म देने का फैसला किया है। इसी मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने दलील देते हुए कहा कि क्या इसी को धार्मिक/मजहबी अधिकारों की स्वतंत्रता कहा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट में ही मुस्लिम नमाज़ और हिन्दू हवन करना शुरू कर दें? उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक/मजहबी अधिकारों को मिलाने का विरोध भी किया।

उडुप्पी के जिस संस्थान से बुर्का विवाद की शुरुआत हुई थी, वहाँ के शिक्षकों ने इसी सुनवाई के दौरान अपने वकील आर वेंकटरमानी के माध्यम से कहा कि स्कूल में धार्मिक/मजहबी प्रतीकों की लड़ाई से वहाँ पढ़ाई का माहौल खराब होता है। अध्यापकों का पक्ष रखते हुए एक अन्य वकील डी शेषाद्रि नायडू ने कहा कि धर्म/मजहब बच्चों के दिल में होना चाहिए और उन्हें धार्मिक/मजहबी विवादों से दूर रह कर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में 8 दिनों से चल रही यह सुनवाई अब अपने अंतिम दौर में है। इन 8 दिनों में 6 दिनों तक हिजाब समर्थक वकीलों ने अपना पक्ष कोर्ट में रखा था। बाकी 2 दिनों में कर्नाटक सरकार ने अपने पक्ष से सुप्रीम कोर्ट को अवगत करवाया है।

नक्सल मुक्त हुआ बिहार, हमलों में आई 77% कमी: CRPF का बड़ा ऐलान! 30 साल से जिस पहाड़ी पर था कब्ज़ा, वहाँ पुलिस ने स्थापित किया कैंप

सीआरपीएफ के डीजी ने बुधवार (21 सितंबर, 2022) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा ऐलान है कि बिहार अब नक्सल मुक्त हो चुका है। इस दौरान उन्होंने बताया कि झारखंड के नक्सल बहुल इलाके बुरहा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त करा दिया गया है। वहीं उनकी इस सफलता के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी भारत की केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को बधाई दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार CRPF के महानिदेशक (Director General) कुलदीप सिंह (Kuldeep Singh) ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिहार अब वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि माओवादियों की जबरन वसूली गिरोह के रूप में कुछ उपस्थिति हो सकती है, लेकिन देश के पूर्वी इलाके में ऐसी कोई जगह नहीं है जहाँ प्रतिबंधित संगठन हावी हो।

इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि बिहार और झारखंड (Bihar and Jharkhand) में ऐसी कोई भी जगह या ठिकाना नहीं है, जो सुरक्षा बलों के लिए अभेद्य हो। उन्होंने कहा, “वर्तमान दिनों में नक्सली हमले तेजी से कम हुए हैं। इसमें कम से कम 77 फीसदी की कमी देखी गई है। 2009 में सर्वाधिक नक्सली हमले दर्ज किए गए थे। नक्सली हमलों में होने वाली मौतों में 85% की कमी भी पाई गई है।”

तीन ऑपरेशन अभियानों से मिली कामयाबी

बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीआरपीएफ डीजी ने बताया कि अप्रैल 2022 से तीन विशेष अभियानों को शुरू किया गया। इसमें ऑपरेशन ऑक्टोपस (Operation Octopus), ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म (Operation Thunderstorm) और ऑपरेशन बुलबुल (Operation Bulbul) भी शामिल हैं। इन्हीं अभियानों के तहत सुरक्षा बल के जवानों ने झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा पर बुरहा पहाड़ को विद्रोहियों के चंगुल से आजाद करवाया है। 30 सालों बाद यहाँ पुलिस कैंप स्थापित हुआ है।

गृह मंत्री ने भी दी बधाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने ट्वीट कर नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को मिली जीत की बधाई दी है। उन्होंने लिखा, “देश की आंतरिक सुरक्षा में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार हुआ है। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश भर में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे निर्णायक युद्ध में सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व विजय प्राप्त की है। इसके लिए सीआरपीएफ, सुरक्षा एजेंसियों व राज्य पुलिसबलों को बधाई देता हूँ।”

उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, “पहली बार बुरहा पहाड़, चक्रबंधा व भीमबांध के दुर्गम क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकाल कर सुरक्षा बलों के स्थायी कैंप स्थापित कर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में आतंकवाद व LWE के विरुद्ध गृह मंत्रालय की जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी और ये जंग आगे ओर तेज होगी।”

इसी क्रम में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक ओर ट्वीट किया और लिखा, “माओवादियों के इलाके में महीनों तक चले इन अभियानों में सुरक्षा बलों को अकाल्पनिक सफलता प्राप्त हुई, जिसमें 14 माओवादी मारे गए और 590 से अधिक की गिरफ्तारी/आत्मसमर्पण हुआ। इसमें लाखों-करोड़ों के ईनामी माओवादी पकड़े गए हैं, जिसमें ₹1करोड़ का इनाम वाले मिथिलेश महतो भी शामिल हैं।”

‘तानाशाह को मौत दो’: हिजाब विरोधी प्रदर्शन में फूटा ईरान की महिलाओं का गुस्सा, पुलिस की कार्रवाई में 7 की मौत और 450 घायल, इंस्टाग्राम पर रोक

ईरान में हिजाब न पहनने के कारण पुलिस हिरासत में ली गई एक महिला की मौत हो गई, जिसके बाद हजारों की संख्या में महिलाएँ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। इस महिलाओं ने इस्लामी मुल्क के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई को तानाशाह बताते हुए उसकी मौत की भी दुआ की और इससे संबंधित पोस्टर लहराए। बौखलाई ईरान सरकार ने भारी प्रदर्शनों को देखते हुए इंस्टाग्राम का एक्सेस रोक दिया है। अब तक इन प्रदर्शनों में 7 लोग मारे जा चुके हैं। महिलाओं के साथ कुछ पुरुष भी सड़कों पर हैं।

ईरान ने इंस्टाग्राम को अपने देश में ब्लॉक कर दिया है। 22 वर्षीय माशा अमिनी की मौत के बाद ये प्रदर्शन भड़के हैं। ईरान की मोरालिटी पुलिस ने महिला को ‘अनुचित वस्त्र’ पहनने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। वैश्विक प्रतिबंधों से जूझते इस मुल्क में मानवाधिकार के लिए अब माँग जोर पकड़ रही है। ईरान के एक मंत्री ने ‘सुरक्षा कारणों’ का हवाला देते हुए इंटरनेट तक बंद करने की धमकी दे डाली। बाद में कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था।

वहीं इस्लामी मुल्क के सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई ने 1980-88 के बीच चले ईरान-ईराक युद्ध की बरसी बनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में भाषण देते समय इन प्रदर्शनों का कोई जिक्र नहीं किया। इससे पहले ईरान में इस तरह के विरोध प्रदर्शन 2019 में देखने को मिले थे, जब सरकार ने गैस का दाम बढ़ा दिया था। सुरक्षा बल लगातार दमनकारी तरीके आजमा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान 23 साल की उर्मिया और16 साल की पीरंसहर को पुलिस ने गोली मार दी।

ईरान का प्रशासन इन मौतों की पुष्टि नहीं कर रहा है। ईरान के प्रदर्शनकारी अब एक जगह पर जुट रहे हैं और पुलिस के आने से पहले वहाँ से निकल जाते हैं, ताकि क्रूरता का उन्हें सामना न करना पड़े। तेहरान यूनिवर्सिटी के पश्चिमी इलाके में कई युवाओं को पुलिस ने पीटा। 450 लोग इन प्रदर्शनों में पुलिसिया कार्रवाई से घायल हुए हैं। ईरान सरकार ‘स्वच्छ जाँच’ की बात कह रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की माँग इतनी सी नहीं है। उधर इजरायल की महिलाओं ने ईरान की प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया है।

सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियोज सामने आई हैं जिसमें औरतें खुले बाल लेकर अपने हिजाब को जला रही हैं और कुछ अपने बालों को काट कर घटना का विरोध कर रही हैं। ईरानी महिला अपने बाल काट कर और हिजाब जलाकर महसा अमिनी की हत्या पर अपना गुस्सा दिखा रही हैं। पत्रकार अलीनेजाद बताती हैं कि 7 की उम्र से अगर ईरान में लड़कियाँ अपने बाल को न ढकें तो उन्हें स्कूल नहीं जाने दिया जाता और कोई जॉब नहीं मिलती। ईरान में औरतें इस लैंगिक भेदभाव की व्यवस्था से तंग आ गई हैं।

इंग्लैंड में 4 बच्चों की माँ ने सबके सामने खुलेआम किया सेक्स, फिर खुद ही वायरल कर दिए सारे वीडियो क्लिप्स: जज ने कहा – ये चिंता का विषय

इंग्लैंड के लिवरपूल में चार बच्चों की माँ ने खुलेआम सभी लोगों के सामने सड़क पर सेक्स किया, जिसके बाद इस मामले में कोर्ट की कार्रवाई चल रही है। केली कजिन्स नामक महिला को अदालत ने तलब किया, जहाँ उसने माना कि सोशल मीडिया पर उसने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से सेक्स का ये वीडियो शेयर किया था। 35 वर्षीय महिला पर सार्वजनिक स्थल पर अश्लीलता फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पिछले महीने शहर के कंसर्ट स्क्वायर पर उक्त महिला का एक पुरुष के साथ सेक्स करते हुए कई वीडियो वायरल हुए थे। उस व्यक्ति की पहचान जो फिरबी के रूप में हुई है, जो कोर्ट में पेश नहीं हुआ। उसने कहा कि उसकी नौकरी चली गई है और वो अदालत में पेश होने में सक्षम नहीं है। केली कजिन्स ने सोशल मीडिया पर ‘रूबी रोज’ नाम से एक छद्म हैंडल बना रखा है। स्थानीय पुलिस और मेयर ने भी इस घटना की निंदा की है।

मूल रूप से ब्रैडफोर्ड की रहने वाले केली कजिन्स फ़िलहाल बूटले में रहती है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इन वीडियोज को लेकर उससे पूछताछ की। 2 अगस्त, 2022 को रातोंरात ये वीडियोज वायरल हो गए थे। कजिन्स ने वीडियो पोस्ट करते हुए लोगों से पूछा था, “अब अगला कहाँ?” स्थानीय लोगों ने लोगों से इन वीडियोज को शेयर करने से लोगों को मना किया है और इस घटना को नुकसान पहुँचाने वाला और आपराधिक बताया है।

इस घटना के कुछ दिनों बाद ही केली कजिन्स को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने बताया कि जब उक्त महिला के सेक्स वाले फुटेज को उसके सामने चलाया गया, तब वो मुस्कुरा रही थी। जिला जज ने भी इसे एक गंभीर मामला बताया है और आशंका जताई है कि शराब के नशे में ऐसा किया गया। महिला को अगली सुनवाई तक जमानत दे दी गई है। साथ ही उन्होंने सेक्स करने के लिए जो लोकेशन चुना गया, उसे लेकर भी चिंता जताई।

झारखंड में अवैध खनन से लूटी गई ₹1000 करोड़ की संपत्ति की पहचान, CM सोरेन के प्रतिनिधि का नियंत्रण: ED ने बताया – उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा बुधवार (21 सितंबर, 2022) को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ कई गंभीर दावे किए गए हैं। ये दावे सीएम के विधानसभा क्षेत्र में संचालित अवैध खनन गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। ईडी ने दावा किया है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपी पंकज मिश्रा को ‘राजनीतिक संरक्षण’ प्राप्त है और वो विधानसभा क्षेत्र में सीएम सोरेन का राजनीतिक प्रतिनिधि भी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किए गए पंकज मिश्रा (Pankaj Mishra) ने अपने सहयोगियों के माध्यम से सोरेन के विधानसभा क्षेत्र (साहिबगंज जिले की बरहैट सीट) में अवैध खनन व्यवसाय को नियंत्रित किया, इसलिए वहाँ उसका राजनीतिक प्रभाव भी है।

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राँची की विशेष PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम) अदालत में मिश्रा और उसके दो सहयोगियों (बच्चू यादव व प्रेम प्रकाश) के खिलाफ 16 सितंबर को एक आरोप पत्र दाखिल किया गया था। जाँच एजेंसी ने बताया कि विशेष अदालत ने मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को आरोप पत्र और अभियोजन पक्ष की शिकायत का संज्ञान ले लिया था।

जाँच एजेंसी द्वारा यह भी कहा गया, “PMLA जाँच से खुलासा हुआ है कि पंकज मिश्रा को मुख्यमंत्री और बरहैट के विधायक का प्रतिनिधि होने के नाते राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। अपने सहयोगियों के माध्यम से साहिबगंज और उसके आसपास के इलाकों में अवैध खनन कारोबार और क्षेत्रीय नौका परिवहन सेवाओं को वहीं कंट्रोल करता है।”

ईडी का यह भी कहना है कि पंकज मिश्रा साहिबगंज में विभिन्न खनन स्थलों पर खनन की पूरी प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रखता है। ईडी के मुताबिक, आरोपित द्वारा अवैध गतिविधियों से लूटी गई लगभग 42 करोड़ रुपए की संपत्ति की भी पुष्टि हुई है।

वहीं एजेंसी ने यह भी बताया कि पंकज मिश्रा ने झारखंड में अब तक अवैध खनन से अर्जित लगभग एक हजार करोड़ रुपए की संपत्तियों की भी पहचान हुई है। ईडी ने 47 तलाशी अभियान के तहत 5.34 रुपए की नकदी, 13.32 करोड़ रुपए बैंक जमा राशि, 30 करोड़ रुपये मूल्य की नाव और 5 स्टोन क्रशर के साथ-साथ 2 ट्रक भी जब्त किए हैं। जाँच एजेंसी ने रेड में AK-47 राइफल भी जब्त की हैं।

ईडी ने जुलाई में पंकज मिश्रा को किया था गिरफ्तार

गौरतलब है कि इसी साल जुलाई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा हेमंत सोरेन विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को अवैध खनन के मामले में गिरफ्तार किया था। बता दें इस गिरफ्तारी से पहले ED ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत पंकज मिश्रा, दाहू यादव और उसके सहयोगियों के खातों की जाँच की थी। उस समय भी एजेंसी को इनके ठिकानों से करोड़ों रुपए भी बरामद हुए थे।

‘नेपाल से अपराधी को पकड़ कर लाना Pak से लाने के बराबर’: सीमा पर तैनात रहे DSP ने बताया – नेपाल पुलिस नहीं दिखाती हमारे जैसी सक्रियता – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल भारत बॉर्डर पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 19वीं रिपोर्ट:

इस बार हमने भारत और नेपाल की सीमाओं पर पदस्थापित करते उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों से संपर्क साध कर ये समझने का प्रयास किया कि वहाँ उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी क्रम में हमने महराजगंज जिले के तत्कालीन डिप्टी एसपी निचलौल (अब क्षेत्राधिकारी, पुलिस लाइंस) सुनील दत्त दुबे से बात की। उन्होंने हमें नेपाल सीमा पर तैनात पुलिस बल की चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

खुली सीमा और फ़ोर्स सीमित

ऑपइंडिया से बात करते हुए नेपाल बॉर्डर पर तैनात रहे तत्कालीन DSP सुनील दत्त ने हमें बताया कि सबसे बड़ी दिक्कत सीमाओं का खुला होना है। उन्होंने बताया कि पुलिस बल और पैरामिलिट्री SSB लगातार गश्त करती है, लेकिन फिर भी कई बार असामाजिक तत्व या तस्कर गाँव के रास्तों से चल कर एक देश से दूसरे देश में दाखिल हो ही जाते हैं। सुनील दत्त ने हमें बताया कि सीमित संख्या में फ़ोर्स की उपलब्धता से पूरे बॉर्डर पर एक साथ नजर रखने में थोड़ी परेशानी जरूर होती है।

हमने चलाया ‘पगडंडी अभियान’

DSP सुनील दत्त ने हमें बताया कि महराजगंज जिले की लगभग 65 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। उनके मुताबिक, सीमाओं की रक्षा के साथ पुलिस के पास लॉ एंड आर्डर से जुड़े कार्यभार भी होते हैं, अर्थात कानून-व्यवस्था सँभालने के साथ ही सीमा पर भी नजर रखनी होती है। सुनील दत्त के मुताबिक, नेपाल सीमा से भारत में किसी असामाजिक तत्व की एंट्री रोकने के लिए उन्होंने ‘पगडंडी अभियान’ शुरू किया था, जिसके तहत हाइवे और मुख्य मार्गों के साथ-साथ गाँव के छोटे- छोटे रास्तों पर भी नजर रखी जाने लगी।

DSP ने जानकारी दी कि इस अभियान से सीमा पर अवैध आवाजाही पर काफी हद तक अंकुश लगा है।

तस्करी का कोई भी ख़ास पैटर्न नहीं

सुनील दत्त दुबे ने सीमा पार तस्करी का कोई खास रूप होने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती देशों में जो भी चीज एक तरफ महंगी हो जाती है, उसे बॉर्डर पार से अवैध तौर पर खरीद कर दूसरे देश में बेचना ही तस्करी है। DSP सुनील दत्त के मुताबिक यह तस्करी चीनी से ले कर यूरिया खाद तक की होती है। उन्होंने कहा कि इन चीजों को सीमा पार करवाने के लिए तस्करों को वाहनों की जरूरत भी नहीं पड़ती, बल्कि वो कई इलाकों से बाइक, पैदल और साइकिल से इसे अंजाम देते रहते हैं। सुनील दत्त ने जानकारी देते हुए बताया कि चीनी जैसी वस्तुएँ केवल कस्टम चोरी के ही अंतर्गत आती हैं।

सीमा पार खड़े अपने ही मुल्जिम को हम केवल देख सकते हैं, पकड़ नहीं

DSP सुनील दत्त्त के अनुसार, भारत-नेपाल के बीच प्रत्यर्पण संधि न होने से पुलिस बल को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपने ही निचलौल सर्किल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वाहनों की चोरी में शामिल अपराधी मूल रूप से नेपाल के हैं, लेकिन भारत का पुलिस बल उनकी लोकेशन जानते हुए भी उन्हें पकड़ नहीं पाता। उन्होंने कहा कि न तो हम नेपाल में वर्दी में जा सकते हैं और न ही अपने हथियार ले कर।

उनके मुताबिक, अगर हमारा बड़ा से बड़ा अपराधी भी सीमा के उस पार खड़ा हो कर हमें ललकारे तो भी हमें उसे पकड़ने के लिए माफ़ी मशक्कत करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए कोर्ट से उसका इंटरपोल वॉरंट आदि जारी करवाना पड़ता है, जिसके बाद नेपाल के प्रशासन से निवेदन कर के उस पर कार्रवाई का अधिकार मिलता है। उन्होंने बताया कि नेपाल से अपराधी लाना ठीक उतना ही कठिन है, जितना पाकिस्तान या अरब देशों से।

भारत का प्रशासन सहयोगी पर नेपाल का नहीं

निचलौल बॉर्डर पर तैनात तत्कालीन DSP सुनील दत्त ने हमें बताया कि भारत से अपराध कर के नेपाल और नेपाल से अपराध कर के भारत में घुसने वाले अपराधियों की अच्छी-खासी संख्या है। उन्होंने ये भी बताया कि भारत का पुलिस बल नेपाल से आए अपराधियों पर काफी सख्त रहता है और सीमा पार से सहयोग माँगे जाने पर तत्काल कार्रवाई करता है। हालाँकि, DSP दुबे के अनुसार, यह सक्रियता और सहयोग नेपाल के प्रशासन द्वारा भारत से वहाँ गए अपराधियों के मामले में नहीं दिखता।

सुनील दत्त के मुताबिक, नेपाल पुलिस की SAF बटालियन की सशस्त्र होती है, जबकि बाकी पुलिस बल डंडे और खुकरी ले कर चलता है।

मानव तस्करी में लड़कियों का बड़ा हिस्सा

डिप्टी एसपी रहे सुनील दत्त ने नेपाल बॉर्डर से मानव तस्करी के खिलाफ पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई के बारे में भी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि मानव तस्करी का ज्यादातर शिकार नेपाली लड़कियाँ होतीं हैं। उनके मुताबिक, उन लड़कियों को बॉर्डर पार करवा कर कभी शादी, कभी डांस बार, तो कभी पार्लर में प्रयोग किया जाता है।

सीमा पर CCTV आदि का आभाव

एक माँग और सलाह के तौर पर DSP सुनील ने बॉर्डर इलाकों को CCTV से कवर करवाते हुए सीमावर्ती पुलिस थानों को सर्विलान्स सिस्टम से लैस करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों की बॉर्डर रखवाली करने वाली फ़ोर्स का संयुक्त गश्ती दल बनाया जाए तो संभवतः और बेहतर परिणाम सामने आएँगे।

कोरेक्स जैसी दवाओं के जरिए नशे का कारोबार

डिप्टी एस पी सुनील दत्त दुबे के मुताबिक, भारत और नेपाल के बीच नशे के कारोबार में खाँसी की दवा कोरेक्स भी शामिल है। उनके मुताबिक, दवा आदि मामलों में पुलिस के अधिकार सीमित होते हैं, लेकिन ड्रग्स इंस्पेक्टर को हम इस बात की हिदायत जरूर देते रहते हैं कि सीमावर्ती इलाकों में दवा के दुकानदारों को उनकी खपत के हिसाब से स्टॉक रखने के लिए कहा जाए। हालाँकि, उन्होंने बताया कि अभी तक इस मात्रा का कोई नियत पैमाना सामने नहीं आया है।

कई लोग उठा रहे दोहरी नागरिकता का लाभ

DSP सुनील दत्त दुबे ने हमें ये भी बताया कि कई लोग ऐसे भी हैं जो भारत और नेपाल दोनों देशों में वोट डालते हैं। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम से प्रशासन को नागरिकता निर्धारित में दिक्कत आती है।

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बिस्किट खरीदने निकला 5 साल का बच्चा, पड़ोसी रूबी बीबी की छत पर मिला क्षत-विक्षत शव: गला रेत कर की गई हत्या, बंगाल पुलिस पर लापरवाही के आरोप

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले (Birbhum) के शांति निकेतन इलाके में मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को 5 वर्षीय बच्चे का क्षत-विक्षत शव मिला। बच्चा रविवार (18 सितंबर, 2022) की सुबह से लापता था। नाबालिग का शव उसकी पड़ोसी रूबी बीबी के घर की छत पर मिला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब स्थानीय लोग पड़ोसी रूबी बीबी की छत पर गए, तो उन्हें नाबालिग का शव तिरपाल में लिपटा मिला। उसकी गला रेत कर हत्या की गई थी।

नाबालिग लड़के का शव मिलने की खबर फैलते ही गुस्साए ग्रामीण रूबी बीबी के घर के बाहर जमा हो गए और प्रदर्शन करने लगे। गुस्साई भीड़ ने रूबी के घर में आग लगा दी। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वे बच्चे के लापता होने के 50 घंटे से अधिक समय बाद भी उसका पता लगाने में नाकाम रहे।

जानकारी के अनुसार, शांतिनिकेतन थाना क्षेत्र के मोलडांगा गाँव के तालीपारा में रहने वाला 5 वर्षीय बच्चा रविवार (18 सितंबर, 2022) को बिस्किट खरीदने के लिए गया था और वापस घर नहीं लौटा। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर उसके परिजन चिंतित हो गए और उसकी तलाश करने लगे। उन्होंने गाँव और आसपास की कई जगहों पर उसको ढूँढा, लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस भी लापता बच्चे का पता नहीं लगा सकी। ज्यादा समय बीतने पर स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा। पश्चिम बंगाल पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने न्याय की माँग करते हुए सड़कों और हाईवे को जाम कर दिया।

आखिरकार, 20 सितंबर को रूबी बीबी के घर के टिन शेड पर एक बैग पड़ा हुआ देखकर कुछ स्थानीय लोगों को शक हुआ। जब वे वहाँ गए तो उन्हें तिरपाल में लिपटा हुआ नाबालिग का क्षत-विक्षत शव मिला। उसका गला रेता हुआ था। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।