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‘पाकिस्तान के एक जज को जानता हूँ, उनकी बेटियों को कभी हिजाब में नहीं देखा’: बोले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस – ऐसे कई मुस्लिम परिवार, जहाँ हिजाब नहीं

सुप्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच की सुनवाई का बुधवार (20 सितंबर, 2022) को नौवाँ दिन था। सरकारी और याचिकाकर्ता, दोनों पक्षों की तरफ से दलीलें दी गईं। कर्नाटक सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी ने बुधवार (21 सितंबर 2022) दलीलें पेश कीं। उच्चतम न्यायालय में हिजाब मामले पर गुरुवार को फिर सुनवाई होगी।

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, सुनवाई के दौरान कर्नाटक के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रभुलिंग नवदगी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत हर धार्मिक प्रथा संरक्षित नहीं है। नवदगी ने कहा कि कई मुस्लिम माताएँ और बहनें हिजाब नहीं पहनतीं। उन्होंने कहा कि तुर्की और फ्रांस जैसे देशों में हिजाब प्रतिबंधित है, फिर भी वहाँ इस्लाम फैल रहा है। साथ ही दलील दी कि इसे न पहनना किसी महिला को कम मुस्लिम नहीं बनाता।

सुनवाई के दौरान जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि वो हिजाब से जुड़े कुछ मामले साझा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो पाकिस्तान के लाहौर हाई कोर्ट के एक जज को जानते हैं, जो भारत आया करते थे। उन्होंने बताया कि उक्त जज की दो बेटियाँ भी थीं, लेकिन उन्होंने कभी उन बच्चियों को हिजाब पहनते नहीं देखा। इतना ही नहीं, जस्टिस गुप्ता ने बताया कि उन्होंने देश में कई मुस्लिम परिवार देखे हैं, जहाँ घर के मुखिया ने अपने बच्चियों के ऊपर हिजाब नहीं थोपा है।

वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि हिजाब का विवाद धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस केस को संवैधानिक बेंच में भेजा जाए। इस पर नवदगी ने कहा, “हमने हिजाब पर बैन नहीं लगाया है। स्कूल परिवहन में हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। स्कूल परिसर के अंदर भी हिजाब पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।”

कर्नाटक के एडवोकेट जनरल ने आगे कहा कि जहाँ अनुच्छेद-21 के तहत निजता के अधिकार का संबंध है, निजता के अधिकार को लेकर नियम-कानून अभी विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुट्टास्वामी के फैसले के अनुसार, सभी क्षेत्रों में इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। एजी ने इन आरोपों से भी इनकार किया कि राज्य ने एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया है। उनके शब्दों में, “मैं इसे सिरे से खारिज करता हूँ। बल्कि, राज्य सरकार अल्पसंख्यक समूहों के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रम चला रही है।”

जस्टिस गुप्ता ने पूछा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि हिजाब पहनना एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है, तो किस तरह की प्रथा है? उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के अनुसार, कुरान में कही गई हर बात अल्लाह की आयतें हैं और अनिवार्य हैं। इस पर एजी ने जवाब दिया कि इस्लाम में हिजाब एक अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है।

बता दें कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों द्वारा हिजाब पहनना इस्लाम में एक मौलिक धार्मिक प्रथा नहीं है।

‘मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए कर रही संघर्ष’: ‘ट्रॉलिंग’ के कारण डॉक्टरों के भरोसे स्वरा भास्कर, नई फिल्म रिलीज होते ही हो गई सुपर फ्लॉप

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा है कि ‘ट्रॉलिंग’ के कारण वो अपना मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए डॉक्टरों की मदद लेती हैं। उनकी फिल्म ‘जहाँ चार यार’ भी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो चुकी है। उन्होंने बॉलीवुड के सभी लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि एकता बनी रहेगी तो हमले कम होंगे। स्वरा भास्कर ने कहा कि ये फिल्म इंडस्ट्री के लिए सामान्य समय नहीं चल रहा है और इसे निशाना बनाया जा रहा है।

स्वरा भास्कर का दावा है कि उन्हें सोशल मीडिया पर खासा ट्रॉल किया जाता है और साथ ही उन्हें धमकियाँ भी मिलती हैं। ‘ABP News’ के अनुसार, स्वरा भास्कर ने कहा कि अपना मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए वो संघर्ष करती हैं और सभी मुद्दों पर अपने डॉक्टरों से बात करती रहती हैं। उन्होंने ‘कनेक्ट FM कनाडा’ से बात करते हुए ये कहा। उन्होंने कहा कि करण जौहर को कोई पसंद नहीं करता है, तो इसका मतलब ये नहीं कि वो हत्यारा हैं।

उन्होंने इस दौरान अक्षय कुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वो जिस तरह की फिल्मों का समर्थन करते हैं, उससे वो सहमत नहीं हैं। स्वरा भास्कर ने कहा कि बॉलीवुड में कोई एक सुर में नहीं बोलता है और यही दिक्कत है। हाल ही में स्वरा भास्कर ने अपनी ताज़ा फिल्म ‘जहाँ चार यार’ के स्क्रीनिंग में AAP (आम आदमी पार्टी) के विधायकों को बुलाया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता भी स्क्रीनिंग में मौजूद थीं।

हम आपको बता चुके हैं कि स्वरा भास्कर की फिल्म ‘जहाँ चार यार’ शुक्रवार (16 सितंबर, 2022) को रिलीज तो हो गई, लेकिन न तो थिएटर में दर्शकों का अता-पता है और न ही IMDb पर रेटिंग का। IMDb पर फिल्म को मात्र 4.5 रेटिंग मिली है। पहले ये 1.1 थी, लेकिन अचानक से 10 रेटिंग दे-दे कर इसे बढ़ाया गया। वहीं समीक्षकों ने भी इस फिल्म को बड़ी तरह नकारते हुए कहा है कि ये भद्दे डायलॉग्स और पकाऊ कॉमेडी से भरी पड़ी है।

शराब और बस के बाद अब दिल्ली में टॉयलेट घोटाला! डिप्टी CM मनीष सिसोदिया के खिलाफ जाँच की माँग, प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने का आरोप

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) पर कॉन्ग्रेस ने ‘टॉयलेट घोटाले’ का आरोप लगाया है। दिल्ली कॉन्ग्रेस के नेताओं ने मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को इस सिलसिले में उप-राज्यपाल (LG) वी के सक्सेना से मुलाकात की और पब्लिक टॉयलेट में कांट्रैक्ट की जाँच कराने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार शहर में सार्वजनिक शौचालयों का प्रबंधन गैर सरकारी संगठनों की जगह एक प्रतिबंधित कंपनी को सौंपने की योजना बना रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार की अध्यक्षता में पार्टी के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने एलजी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने दिल्ली सरकार की योजना में भ्रष्टाचार का दावा करते हुए पब्लिक टॉयलेट में वेस्टर्न टॉयलेट सीट लगाने के कांट्रैक्ट की जाँच कराने की माँग की है। अनिल कुमार ने सिसोदिया पर आरोप लगाते हुए पूछा कि जिस कंपनी को उन्होंने खुद प्रतिबंधित किया है, अब उसे टेंडर क्यों दिया जा रहा है?

कुमार के अनुसार, “18 अगस्त को 559 सार्वजनिक सुविधा परिसरों में 18620 शौचालयों के निर्माण के लिए एक डिबार्ड कंपनी को ठेका देने का निर्णय लिया गया था। दिल्ली सरकार टेंडर जारी करने के लिए पारंपरिक ई-प्रोक्योरमेंट वेबसाइट के बजाए GeM पोर्टल पर गई और सीधे एक प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की पेशकश की।”

दिल्ली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कुमार ने आगे आरोप लगाया कि सिसोदिया ने खुद 2021 में दो साल के लिए इस कंपनी को उसके खराब प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित किया था। वहीं, हाई कोर्ट ने भी उस कंपनी को अपने खराब रिकॉर्ड के लिए कोई क्लीन चिट नहीं दी है।

दिल्ली कॉन्ग्रेस के मुताबिक, 8 जून को आदेश में जब GeM पोर्टल की निविदा शर्तों में कहा गया था कि खराब प्रदर्शन के ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनी निविदा बोली में भाग नहीं ले सकती हैं, तो उस कंपनी को निविदा बोली में भाग लेने की अनुमति कैसे दी गई?

बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर इससे पहले शराब और बस घोटाले का आरोप भी लग चुका है। शराब पॉलिसी से किन-किन लोगों को लाभ पहुँचाने की कोशिश की गई और यह कैसे-कैसे अंजाम दिया गय, इसको लेकर एक शख्स ने विस्तार से बताया था। उसने बताया कि इसमें आम आदमी पार्टी के नेताओं को कई सौ करोड़ रुपए का लाभ पहुँचा है और जिनको फायदा पहुँचा है, उन सभी ने अरविंद केजरीवाल को पैसे दिए हैं।

वहीं, बीते दिनों दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना (Delhi Lieutenant Governor VK Saxena) ने आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा बस खरीद मामले से जुड़ी घोटाले की जाँच सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। 

अमानतुल्लाह खान का ‘बैग मैन’ तेलंगाना से धराया, कौसर सिद्दीकी की ‘लाल डायरी’ में करोड़ों के राज़: सऊदी-दुबई से पैसे आने का भी जिक्र

आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान के करीबी कौसर आलम सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया गया है। छापेमारी के दौरान उसके घर से हथियार और कैश बरामद किए गए थे। कौसर आलम सिद्दीकी को बुधवार (21 सितंबर, 2022) को दिल्ली पुलिस ने तेलंगाना से गिरफ्तार किया। कहा जाता है कि कौसर सिद्दीकी को AAP विधायक का ‘बैग मैन’ भी कहा जाता है। विधायक से पूछताछ के दौरान उसका नाम सामने आया था।

‘बैग मैन’ का मतलब ये हुआ कि अमानतुल्लाह खान के लिए गलत तरीकों से रुपए इकट्ठे करने का काम उसे ही सौंपा गया था। दोनों के बीच गहरे सम्बन्ध थे और उनमें परस्पर लेनदेन चलता रहता था। 12 लाख रुपए कैश, एक अवैध हथियार और कारतूस के अलावा उसके घर से एक लाल डायरी भी मिली थी, जिसमें करोड़ों के लेनदेन के हिसाब मौजूद हैं। ये भी सामने आया है कि पैसे गुजरात और यूपी-बिहार भी भेजे गए हैं।

साथ ही सऊदी अरब और दुबई से भी पैसे आने का जिक्र इस डायरी में है। हवाला डीलर के रूप में काम करने वाला कौसर आलम सिद्दीकी की लास्ट लोकेशन पुलिस को तेलंगाना में मिली थी, जिसके बाद एक टीम वहाँ के लिए निकल गई थी। अमानतुल्लाह खान के एक और करीबी हामिद अली को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों में गड़बड़ी के अलावा घोटालों की भी जाँच की जा रही है। अमानतुल्लाह पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

यह पता चला था कि विधायक की पत्नी मरियम के घर में भी कैश और अवैध हथियार रखे हुए हैं। इसके बाद एसीबी की टीम ने मरियम के घर में भी छापेमारी की थी। इस छापेमारी में मरियम के घर से एसीबी को कुछ खास हासिल नहीं हुआ था। लेकिन, जब एसीबी की टीम ने मरियम के फोन की तलाशी ली तो फोन गैलरी में नोटों की गड्डी और एक पिस्टल की फोटो मिली। जिस बेड पर रखकर नोटों की गड्डियों और पिस्टल की फोटो ली गई थी, उस चादर को भी रिकवर कर लिया है।

रतन टाटा को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी, बनाए गए ‘PM केयर्स’ फंड के ट्रस्टी: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी हुए शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ उद्योगपति रतन टाटा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें ‘PM केयर्स’ फंड का ट्रस्टी बनाया गया है। वो ट्रस्ट की हालिया बैठक में भी शामिल हुए। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्माता सीतारमण भी मौजूद रहीं। उनके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस और लोकसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर करिया मुंडा को भी पीएम केयर्स फंड का ट्रस्टी बनाया गया है।

देश के कई अन्य सम्मानित व्यक्तियों को भी ‘PM केयर्स’ फंड की सलाहकार समिति में नियुक्त किया गया है। एडवाइजरी बोर्ड में पूर्व कैग राजीव महर्षि, इन्फोसिस फाउंडेशन की पूर्व चेयरपर्सन सुधा मूर्ति, इंडिकॉर्प्स और पिरामल फाउंडेशन के पूर्व सीईओ आनंद शाह को भी नॉमिनेट किया गया है। मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इसकी एक बैठक भी संपन्न हुई है।

नए चुने गए सदस्यों ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री ने इस दौरान नए ट्रस्टियों का स्वागत किया। इस फंड को 2020 में कोरोना वायरस महामारी के दौरान जनता की मदद के लिए बनाया गया था। ये आपातकालीन राहत के रूप में कार्य करता है। रतन टाटा अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दान करने के लिए जाने जाते हैं और उनके बारे में कहा जाता है कि वो कर्मचारियों का भी खासा ख्याल रखते हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने पीएम केयर्स पर सवाल खड़े किए थे।

ज्ञात हो कि पीएम-केयर्स फंड ने कोरोना वैक्सीन अभियान के पहले चरण में 2200 करोड़ रुपए का योगदान दिया था। यह टीकाकरण के पहले चरण की लागत का 80 फीसदी से अधिक था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी निजी बचत से 2.25 लाख रूपए पीएम केयर्स फंड में दान कर के इसकी शुरुआत की थी। कॉन्ग्रेस पार्टी ने 11 मई को एक ट्वीट किया था, जिसमें पीएम केयर्स फंड के बारे में गलत जानकारी दी गई थी, जिसके बाद FIR भी दर्ज हुई थी।

यूनिवर्सिटी हॉस्टल में छात्र ने फाँसी लगा कर की आत्महत्या, छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन: मोहाली MMS कांड के बाद अब जालंधर में घटना

पंजाब के जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (Lovely Professional University) के एक छात्र ने मंगलवार (20 सितंबर 2022) देर रात आत्महत्या कर ली। बैचलर ऑफ डिजाइनिंग के एक प्रथम वर्ष का छात्र केरल का रहने था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने अपने हॉस्टल के कमरे में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के गुस्साए छात्रों ने कैंपस में जोरदार हंगामा किया। पुलिस ने उन्हें किसी तरह शांत कराकर हास्टल में भेजा। बीते 10 दिनों में इस यूनिवर्सिटी में आत्महत्या का यह दूसरा मामला है।

पुलिस के मुताबिक, छात्र से मिले सुसाइड नोट में आत्महत्या करने के निजी कारण बताए गए हैं। मृतक के परिजनों के आने पर ही जाँच आगे बढ़ेगी। फगवाडा पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “एलपीयू के बैचलर ऑफ डिजाइनिंग के प्रथम वर्ष के छात्र ने मंगलवार दोपहर को आत्महत्या कर ली। छात्र के सुसाइड नोट से पता चला है कि उसे कुछ निजी समस्याएँ थीं।”

छात्रों ने दावा किया है कि वे इस घटना को लेकर इसलिए विरोध कर रहे है, क्योंकि सभी आत्महत्या के दोनों मामलों के पीछे का कारण जानना चाहते हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे पर दबाव में है। दूसरी ओर विश्वविद्यालय और पुलिस दोनों ने छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। एलपीयू ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर दुख जताया है। एलपीयू ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए गए बयान में कहा, “पुलिस की प्रारंभिक जाँच और सुसाइड नोट में छात्र की निजी समस्याओं का जिक्र किया गया है। विश्वविद्यालय आगे की जाँच के लिए अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहा है।”

बयान के अनुसार, विश्वविद्यालय छात्र की मृत्यु पर शोक व्यक्त करता है और उसके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी वीडियो लीक मामला

बता दें कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वीडियो लीक मामले में पुलिस चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। तीनों आरोपितों यानी MBA की छात्रा, उसका बॉयफ्रेंड सनी मेहता और उसका दोस्त रंकज वर्मा से शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि उन्हें वीडियो बनाने के लिए ब्लैकमेल किया जा रहा था। आरोपित के पास से व्हाट्सऐप पर चैट के कुछ स्क्रीनशॉट भी मिले हैं। पुलिस को व्हाट्सऐप चैट से पता चला है कि छात्रा एक और फोन नंबर पर किसी मोहित से बात कर रही थी।

वह उसे फोटो और वीडियो डिलीट करने के लिए कह रहा था। आरोपित छात्रा बता रही थी कि उसने उसे मरवा दिया था, क्योंकि एक छात्रा ने उसे एक नहाती हुई छात्रा की फोटो लेते हुए देख लिया था। चौथे आरोपित का नाम मोहित है, वह यूनिवर्सिटी की मेस में काम करता है। उस पर आरोप है कि वह इस मामले में गिरफ्तार लड़की को हॉस्टल की लड़कियों का वीडियो बनाने के लिए ब्लैकमेल करता था।

‘वो शैतान था, इस्लाम विरोधी था’: राजू श्रीवास्तव के निधन पर जश्न मना रहे इस्लामी कट्टरपंथी, लिबरल गिरोह के कॉमेडियन ने लिखा – ‘Fu%k Him’

एक महीने तक अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत से जूझने के बाद कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का बुधवार (21 सितंबर, 2022) को निधन हो गया। अपनी कॉमेडी से दुनिया भर को हँसाने वाले राजू श्रीवास्तव ‘उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद’ के अध्यक्ष भी थे। जहाँ एक तरफ पूरा देश निधन के बाद गमगीन है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम कट्टरपंथी इसका जश्न मनाने में लगे हुए हैं। सोशल मीडिया पर ये असामाजिक तत्व उनकी मृत्यु पर खुश हो रहे हैं।

‘मुल्ला इब्राहिम’ नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “राजू श्रीवास्तव एक धर्मांध व्यक्ति थे। वो एक नस्लवादी थे, इस्लाम विरोधी थे।” बता दें कि राजू श्रीवास्तव ने कुछ महीनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी और नोएडा में प्रस्तावित फिल्म सिटी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी राय जानी थी। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर में ही हुआ था और वो राज्य में मनोरंजन इंडस्ट्री के विकास को लेकर मुखर थे।

वसीम अकरम नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “अपने जीवन के अंतिम चरण में राजू श्रीवास्तव ने मुस्लिमों को गालियाँ दी। कॉमेडी के चेहरे के पीछे एक शैतान छिपा हुआ था।” लिबरल गिरोह के पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने भी इस ट्वीट की रिप्लाई देते हुए लिखा कि पिछले 5-7 वर्षों में वो उनसे खासा नाराज़ थे, जब उन्होंने अपने ‘राक्षसी’ चेहरा दिखाया। उन्होंने दावा किया कि राजू श्रीवास्तव ने कला और सम्मान को खो दिया।

इसी तरह कॉमेडियन रोहन जोशी ने भी ज़हर उगलते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, “राजू श्रीवास्तव ने नए स्टैंड अप कॉमेडियनों को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हमने कुछ नहीं खोया है। Fu%k Him. उन्हें कॉमेडी की भावना के बारे में कुछ नहीं पता था, भले ही उन्होंने एकाध अच्छे चुटकुले मारे होंगे। जिन भक्तों ने आपदा के वक्त अपनों को खोया, वो तनाव न लें। उनके पापा और अक्षय कुमार एक मंदिर बनवा रहे हैं, वहाँ प्रार्थना कर लेना आत्मा की शांति के लिए। मुझे राजू श्रीवास्तव के जाने का कोई दुःख नहीं।”

राजू श्रीवास्तव के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं और सिनेमा के हस्तियों ने दुःख जताया है राजपाल यादव, कीकू शारदा, ऋतिक रोशन, सोनू सूद, अनुपम खेर और कैलाश खेर जैसे कलाकारों ने भी दुःख जताते हुए बयान जारी किया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कहा कि हम सब ‘गजोधर भैया’ को मिस करेंगे। लेकिन, इस्लामी कट्टरपंथी उनकी मौत का जश्न मना रहे हैं।

गुटखा गोदामों पर छापेमारी नहीं, तम्बाकू उत्पाद न किए जाएँ जब्त: तेलंगाना हाईकोर्ट ने पुलिस को दिया आदेश

तेलंगाना हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस बल को आदेश दिया है कि वो तम्बाकू से बने उत्पाद और गुटखा कंपनियों के कारखानों, स्टोरों आदि पर छापेमारी न करें। न्यायमूर्ति कन्नेगंती ललिता ने इस बावत मंगलवार (20 सितम्बर 2022) को तेलंगाना पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक पत्र भी जारी किया है।

तेलंगाना हाईकोर्ट के इस आदेश में यह भी कहा गया है कि राज्य की पुलिस तम्बाकू उत्पादों के ट्रांसपोर्ट में न तो अवरोध पैदा करें और न ही उन्हें ज़ब्त करे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यायमूर्ति ललिता ने यह भी कहा कि पुलिस को इस आदेश का सर्कुलर जारी करके उसे अगले दिन बुधवार तक हाईकोर्ट में पेश भी किया जाए।

हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना होने पर राज्य के DGP को कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा। इससे पहले तेलंगाना राज्य सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए प्रदेश में पैकेट और पाऊच में गुटखा और अन्य तम्बाकू उत्पाद की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया था।

राज्य सरकार के इस आदेश के खिलाफ कुछ गुटखा व्यापारी सुप्रीम कोर्ट गए थे। वहाँ से उन्हें बड़ी राहत मिली थी और उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

कुछ गुटखा व्यापारियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी पुलिस उनके कारखानों और गोदामों पर न सिर्फ छापेमारी कर रही है बल्कि उनके उत्पादों को ज़ब्त भी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने की शिकायत लेकर वही गुटखा व्यापारी हाईकोर्ट गए थे।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में गुटखा व्यापारियों का यह भी आरोप है कि पुलिस उनके स्टॉक को ज़ब्त कर के संबंधित कोर्ट के आगे पेश भी नहीं करती है। व्यापारियों ने हाईकोर्ट की एक खंडपीठ द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण का भी जिक्र किया, जिसमें यह कहा गया था कि तेलंगाना पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करेगी।

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। इस याचिका पर फैसला देते हुए न्यायमूर्ति ललिता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को आधार बनाया। पुलिस द्वारा ज़ब्त किए स्टॉक की जानकारी भी माँगी और उन दस्तावेजों को कोर्ट के आगे पेश करने के लिए कहा। कोर्ट ने तेलंगाना पुलिस पर सुप्रीम कोर्ट का सम्मान न करने की भी टिप्पणी की।

‘तुम लोगों को UK में नहीं आने देंगे’: दुर्गा मंदिर पर हमला करने वाले नकाबपोश की हिन्दुओं को धमकी, कहा – ‘हम यहीं हैं, नहीं करने देंगे कोई कार्यक्रम’

इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) में हिंदुओं और मंदिर पर हमला करने के बाद बर्मिंघम के स्मेथविक में मंगलवार (20 सितंबर, 2022) को लगभग 200 की मुस्लिम भीड़ ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए दुर्गा मंदिर को चारों तरफ से घेर लिया। इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स के स्मेथविक शहर के स्पॉनलेन में स्थित दुर्गा भवन हिंदू सेंटर में कथित तौर पर साध्वी ऋतंभरा के कार्यक्रम का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए इस्लामवादियों में से एक ने भाजपा और RSS के समर्थकों को धमकी दी।

ये सब इसके बावजूद किया गया, जब इस कार्यक्रम को पहले ही रद्द कर दिया गया था। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

वीडियो में नकाबपोश इस्लामवादी ने बीजेपी और आरएसएस के हिंदू समर्थकों को धमकी देते हुए कहा कि यूके में उनका स्वागत नहीं किया जाएगा। उसने कहा, “यह बर्मिंघम की ओर से बीजेपी और आरएसएस के हिंदू समर्थकों के लिए एक संदेश है। बर्मिंघम में तुम लोगों को नहीं आने दिया जाएगा है। लेस्टर में और यूके में कहीं भी तुम लोगों को नहीं आने देंगे। आपके किसी भी वक्ता को, नफरत फैलाने वाले को इस b*ls&&ht को आयोजित करने की अनुमति नहीं है।”

वह आगे कहता है कि वे लोग अब मंदिर के बाहर हैं। उसने दावा किया कि 200 से अधिक लोग कथित तौर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। नकाबपोश कहता है, “हम केवल यह बताना चाहते हैं कि यदि आप यहाँ आते हैं, तो हम सब आपके लिए यहाँ होंगे। यूके के हिंदुओं से हमें कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि हम उनके साथ बड़े हुए हैं, लेकिन हम ‘आरएसएस और बीजेपी के समर्थकों’ को यूके में नहीं आने देंगे।”

इस्लामवादियों ने हिंदू मंदिर में ‘शांतिपूर्ण विरोध’ का आह्वान किया

इससे पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि इस्लामवादियों ने बर्मिंघम में हिंदू मंदिर के बाहर विरोध करने का आह्वान किया था, जो साध्वी ऋतंभरा के कार्यक्रम के खिलाफ था, जिसे पहले से रद्द कर दिया गया था। हालाँकि, इसके बाद इस्लामवादी तथाकथित शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में आगे आए। यह लेस्टर (Leicester) में हुए हिंदू विरोधी हमलों के जैसा था।

तथाकथित शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में इंग्लैंड पुलिस की मौजूदगी में दुर्गा भवन को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेर लिया। इस दौरान उन्होंने जमकर हंगामा किया। कुछ तो मंदिर की दीवार पर भी चढ़ गए। मंदिर और मंदिर जाने वाले लोगों में खौफ पैदा करने के लिए इन लोगों ने ‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारे लगाए। साथ ही मंदिर की ओर मुँह करके हस्तमैथुन जैसे इशारे किए।

21 साल के यूसुफ को जेल: इंग्लैंड के लेस्टर में हिंदुओं पर हमले के समय हाथ में था चाकू – 2 दिन में दूसरी सजा

इंग्लैंड के लेस्टर (Leicester) शहर में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू लोगों पर हमला करने के मामले में एडम यूसुफ (Adam Yusuf) नाम के शख्स को एक साल की सजा सुनाई गई है। रविवार (18 सितंबर 2022) को लेस्टर में हिंदू लोगों पर हमले (मेनस्ट्रीम मीडिया इसे प्रदर्शन बता रही) में चाकू ले जाने का जुर्म कबूल करने के बाद 21 वर्षीय यूसुफ को लेस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक साल की जेल की सजा दी है। इस मामले में 2 दिन में सुनाई गई यह दूसरी सजा है।

पुलिस का कहना है कि शहर में अशांति फैलाने के आरोप में 28 अगस्त से अब तक 47 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से दो लोगों को शनिवार (17 सितंबर 2022 ) और रविवार (18 सितंबर 2022) को गिरफ्तार किया गया था। लेस्टर पुलिस ने सोमवार (19 सितंबर 2022) को ट्वीट कर यह जानकारी दी।

लेस्टर (Leicester) पुलिस ने अपने ट्वीट के साथ एक लिंक शेयर करते हुए लिखा, “पूर्वी लेस्टर शहर में फैली अशांति को लेकर लेटेस्ट अपडेट। अब तक इस मामले में कुल 47 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं। अगर आपने इस घटना के बारे में कुछ सुना है या फिर इससे सम्बंधित कोई और जानकारी आपके पास है, तो आप इसे हमारे रिपोर्ट लिंक के माध्यम से सबमिट कर सकते हैं।”

लेस्टर पुलिस के चीफ कॉन्स्टेबल रॉब निक्सन ने बीबीसी को बताया, “शहर में हिंसा भड़काने की सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया है।” लोगों पर हमले और धार्मिक स्थलों पर हमले को लेकर उन्होंने कहा, “वहाँ कुछ चीजों को लेकर झूठ फैलाया गया है।”

लेस्टर पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया कि अगर वे सोशल मीडिया पर लेस्टर से जुड़ी खबरें देख रहे हैं और वे इसकी पुष्टि नहीं कर सकते हैं, तो कृपया इसे शेयर न करें। उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि लोग क्या कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया की फर्जी खबरों को आगे शेयर कर रहे हैं। इसकी वजह से यहाँ हालात और खराब हो रहे हैं और लोगों में डर बढ़ रहा है।”

निक्सन ने कहा, “गिरफ्तारी आगे भी जारी रहेगी। हमारे पास लगभग 50-जाँच दल है, जो इन असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कस रहा है। हम लोगों की पहचान करना शुरू कर रहे हैं। 17 सितंबर 2022 को इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा हिंदुओं के समूह पर हमले को रोकने के दौरान 25 अधिकारी और पुलिस का एक कुत्ता घायल हो गया था।

आपको बता दें कि इससे पहले शहर में फैली अशांति के मामले में 20 वर्षीय ऐमॉस नोरोन्हा (Amos Noronha) को प्रतिबंधित हथियार रखने का दोषी पाया गया था। ऐमॉस नोरोन्हा को सोमवार (20 सितंबर 2022) को 10 महीने जेल की सजा सुनाई गई थी।

हिंदुओं पर ही हमला, हिंदू ही हमलावर: मीडिया का प्रोपेगेंडा

प्रत्यक्षदर्शी दिशिता सोलंकी ने लेस्टर शहर में हुई हिंसा पर मीडिया कवरेज को लेकर सवाल उठाते हुए कहा था, “क्या इस दौरान मीडिया कवरेज निष्पक्ष रहा है। मुझे लगता है कि रिपोर्टिंग ईमानदारी से होनी चाहिए, जो अब तक यहाँ देखने को नहीं मिली है। मैं कह सकती हूँ कि यहाँ रिपोर्टिंग हिंदू विरोधी रही है।”

उन्होंने बताया कि इंग्लैंड की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिंदू ही हमला कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शी होने के नाते दिशिता सोलंकी ने बताया कि उन्होंने सब कुछ अपनी आँखों से देखा है। जितना वो देखीं और जैसी रिपोर्टिंग हो रही, दोनों में उनको फर्क दिखा। उन्होंने खुल कर कहा कि वो महसूस कर रही हैं कि इस मामले पर की जा रही रिपोर्टिंग पूरी तरह से हिंदू विरोधी है।