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रेड के दौरान AAP विधायक अमानतुल्लाह के रिश्तेदारों ने ACP पर किया हमला: FIR के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई, कुल ₹24 लाख और दो अवैध हथियार जब्त

एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti Corruption Bureau- ACB) ने शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) को गिरफ्तार कर लिया। ये गिरफ्तारी उनके घर समेत कई जगहों पर छापेमारी के बाद हुई। छापेमारी के दौरान AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के करीबियों के घर से 2 अवैध पिस्टल और 24 लाख रुपए बरामद किए गए हैं।

जिस समय विधायक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार किया जा रहा था, उस समय ACB की टीम के साथ मौजूद पुलिस टीम पर हमला किया गया। इसके बाद मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। हमला करने वालों में अमानतुल्लाह के करीबी और रिश्तेदार शामिल हैं।

इस संबंध में दक्षिण-पूर्व जिले में ACB ने तीन एफआईआर दर्ज करवाईं हैं। इसमें अवैध हथियारों की बरामदगी के संबंध में 2 प्राथमिकी है। तीसरी एफआईआर अमानतुल्ला खान के रिश्तेदारों द्वारा पुलिस टीम के साथ मारपीट के संबंध में है।

जिन लोगों ने ACP और पुलिस टीम के साथ मारपीट की, उन लोगों की की पहचान कर ली गई है। उनके खिलाफ अलग से सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट करने और सुबूत मिटाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। इन लोगों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, ACB का लॉकअप नहीं होने के कारण अमानतुल्लाह को सिविल लाइन के लॉकअप में रखा गया। आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। छापेमारी में आम आदमी पार्टी के वार्ड प्रेसिडेंट और अमानतुल्लाह के करीबी कौशर इमाम सिद्दिकी के यहाँ से भी 12 लाख रुपए नकद, एक पिस्टल और कई कारतूस बरामद किए गए हैं।

वहीं, अमानतुल्लाह खान के एक और करीबी हामिद अली खान के पास से एक बिना लाइसेंस वाली बेरेटा पिस्टल और 12 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। इस तरह कुल 24 लाख नकद और 2 पिस्टल सहित कई कारतूस बरामद किए गए।

अमानतुल्लाह पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए 32 लोगों को नियमों के विरुद्ध भर्ती किया। इतना ही नहीं, दिल्ली वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों को किराए पर भी दिया। इसके अलावा, बोर्ड के धन का भी दुरुपयोग किया। इनमें सरकार द्वारा दिया गया अनुदान भी शामिल है।

बता दें कि 12 सितंबर 2022 को अमानतुल्ला खान के पर्सनल असिस्टेंट (PA) को पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसकी पहचान, दिल्ली के शाहीन बाग स्थित अबुल फजल एन्क्लेव निवासी नोमान अहमद के रूप में हुई थी।

नोमान अहमद दिल्ली के लिए स्पाइस जेट की फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुँचा था। इस दौरान, जब सीआईएसएफ (CISF) के अधिकारियों ने उसके सामान की जाँच की तो उन्हें 7.65 मिमी का एक जिंदा कारतूस मिला। पुलिस पूछताछ के दौरान ही नोमान ने बताया था कि वह दिल्ली के विधायक अमानतुल्ला खान का पर्सनल असिस्टेंट है। साथ ही, दावा किया था कि उसके जिस बैग से कारतूस बरामद हुआ है वह अमानतुल्लाह के ‘पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर’ का है।

मोदी 2024: जीत में TINA फैक्टर? राजनीति में इससे कहीं आगे की लकीर खींच चुके प्रधानसेवक

वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव को 3 वर्ष पूरे हो चुके हैं। ऐसा लगता है फिर भी जैसे कुछ महीने पहले ही ये चुनाव हुए हों। कोरोना महामारी ने मानो जीवन की रफ्तार पर ब्रेक-सा लगा दिया, लेकिन इन्हीं 2 सालों में चीजें काफी बदल चुकी हैं। देश काफी आगे निकल चुका है।

भारत में 5.4 मिलियन (54,00,000 लाख) घरों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 2020-2021 और 2021-2022 के बीच शौचालयों का निर्माण कराया गया। कोरोना संकट के बावजूद भारत में 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन मिला है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana) के तहत महामारी के दौरान गरीबों को 14 करोड़ मुफ्त एलपीजी सिलेंडर बाँटे गए।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जुलाई 2021 में सिलसिलेवार ट्वीट कर बताया था कि महामारी की अवधि के दौरान भी राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में काफी वृद्धि देखी गई। उन्होंने यह भी कहा था कि 2020-21 में राजमार्ग निर्माण की गति 36.5 किलोमीटर/प्रतिदिन रही। यह राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में अब तक की सबसे तेज गति थी।

इसके अलावा जिस वक्त देश कोरोना के प्रकोप से निपटने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा था, उस समय भी भारत ने बुनियादी ढाँचे के विकास को रफ्तार देने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। कोरोना काल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारत के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया। उस वक्त भारत की कुल आबादी लगभग 135 करोड़ आँक सकते हैं।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्र ने पहले लॉकडाउन (22 मार्च 2020) के कुछ दिनों बाद 26 मार्च 2020 को गरीबों के लिए पहली राहत पैकेज की घोषणा की। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारत के गरीब, जिनके सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना थी, उन्हें भोजन के लिए संघर्ष न करना पड़े।

महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन, 8 करोड़ परिवारों के लिए रसोई गैस और 40 करोड़ से अधिक किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों, गरीबों और जरूरतमंदों को सीधे नकद राशि उपलब्ध कराई। दो साल तक लगातार केंद्र सरकार ने राशन प्रदान किया, ताकि देश में कोई भी गरीब भूखे पेट न सो सके।

पिछले दो सालों में भारत ने विश्‍व के साथ-साथ महामारी की भयावहता का सामना किया। इस दौरान केन्‍द्र सरकार का मुख्‍य फोकस देशवासियों को सुरक्षा प्रदान करना और महामारी के दौरान उन्हें बुनियादी और बेहतर सुविधाएँ देने पर रहा। इसी क्रम में कोविड-19 से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीन का निर्माण किया गया, जिसमें घरेलू वैक्सीन, कोवैक्सिन भी शामिल है।

विपक्षी नेताओं द्वारा वैक्सीन पर देशवासियों को गुमराह करने और अपनी राजनीतिक लाभ के लिए इसका विरोध करने के बावजूद देश में केवल 8 महीनों में 100 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की डोज दी गई। देशवासियों के साथ-साथ केंद्र सरकार ने वैक्सीन डिप्लोमैसी पर भी ध्यान रखा। विपक्षी दलों ने इस पर भी बवाल किया लेकिन अंततः यह काम भारत और भारतवासियों के ही आया।

यह विगत वर्षों में मोदी सरकार द्वारा अन्य देशों से बनाए गए संबंध ही थे, जब अप्रैल 2021 में भारत में ऑक्सीजन संकट गहराया तो अन्य देश हमारी मदद के लिए आगे आए। कोरोना संकटकाल में उन्होंने हमें ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य जरूरत के सामान भेजकर हमारी मदद की।

मोदी ने हिंदुओं के लिए क्या किया?

पीएम मोदी को लेकर कुछ लोगों की कई शिकायतें हैं। इनमें से एक यह है कि उन्होंने हिंदुओं के लिए ऐसा क्या किया है? खैर, कुछ हिंदू बेशर्मी से अपनी धार्मिक पहचान का मजाक तक बनाते रहे हैं। हम जिस ‘धर्मनिरपेक्षता’ के साथ पले-बढ़े हैं, उसका तमाशा बनाया जा रहा है। अधिकतर लोग यह महसूस कर रहे हैं कि धर्मनिरपेक्षता को दोतरफा होना चाहिए।

‘जय श्री राम’ को आतंकी नारा तक कह रहे ‘उदारवादी’ और इस्लामवादी, जो ठीक नहीं है। मासूम लोगों का सिर काटकर बेरहमी से हत्या कर दी जाती है सिर्फ इस बात को लेकर कि जिन्हें वे अपना ईश्वर मानते हैं, उन्होंने उनके बारे में कुछ कह दिया। एक सभ्य समाज में यह स्वीकार्य नहीं है।

राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने भर का नहीं, बल्कि इससे ज्यादा है। नेताओं को एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जहाँ सभ्य समाज बनाने और इससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा सके। देश सिर्फ चुने हुए नेताओं से नहीं चलता। नौकरशाह हैं, सरकारी अधिकारी भी हैं, जो सत्ता में बैठे नेताओं के साथ ही देश की सेवा कर रहे हैं। ऐसा लग सकता है कि उन्होंने हिंदुओं के लिए ‘कुछ नहीं किया’, लेकिन वह निश्चित रूप से एक प्रेरक हैं, जिन्होंने कई मुद्दों को उठाया और उस पर तेजी से काम भी किया।

कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार के 32 साल बाद ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) जैसी फिल्म बनाई गई। पहली बार बहुसंख्यक भारतीयों को यह एहसास कराया गया कि उनका अतीत रक्तरंजित है। हालाँकि, इस तरह की चर्चा भी चली कि कुछ नहीं हो सकता है, लेकिन इसे एक शुरुआत तो कह ही सकते हैं। चर्चा, बहस और बातचीत होती रहती है।

इतिहास को फिर से ठीक किया जा रहा है। यह रातों-रात नहीं होगा। इसमें समय लगेगा, इसलिए हमें उम्मीद नहीं खोनी चाहिए। इसके अलावा भारत में बहुत सारे ऐसे विवादित ढाँचे हैं, जिनकी घर-वापसी जरूरी है।

सिर्फ ‘TINA’ ही नहीं

TINA फैक्टर का मतलब यहाँ किसी लड़की से नहीं है, यह एक राजनीतिक टर्म है। TINA मतलब – There is no alternative, जिसकी हिन्दी हुई – कोई विकल्प नहीं है। पीएम मोदी का भी कोई विकल्प नहीं है – तथाकथित राजनीतिक पंडितों ने इसे गढ़ा।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव जीता है। अगर चीजें ऐसी ही चलती रहीं तो तीसरी बार भी यानी 2024 में भी उनका जीतना तय है। इसके अलावा एक और सच यह भी है कि प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने लगातार तीन बार गुजरात का विधानसभा चुनाव जीता। यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने 2001 के बाद से जितने भी चुनाव लड़े हैं, उन सभी में जीत हासिल की है।

2001 से 2022 – किसी के लिए भी सत्ता में बने रहने के लिए यह एक लंबा समय है। ऐसे में कैसे माना जा सकता है कि यह सिर्फ और सिर्फ इसलिए संभव हुआ क्योंकि कोई दूसरा विकल्प नहीं है, TINA फैक्टर है… There is no alternative to Modi? यह मिथ्या है, गढ़ा गया है। CM से लेकर PM मोदी की उपलब्धियों को कैसे कम से कम दिखाया जा सके – TINA फैक्टर गढ़ने के पीछे की राजनीतिक मंशा सिर्फ और सिर्फ यही है।

नीतीश कुमार, केजरीवाल और ममता बनर्जी का सपना

ऐसा नहीं है कि इन वर्षों में अन्य नेताओं ने खुद को पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया है। नीतीश कुमार खुद पीएम बनना चाहते थे। वह अभी भी पीएम बनने का सपना देखते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी यही सपना है।

2014 में जब सोनिया गाँधी के पूर्व सहयोगी और मौसमी प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव केजरीवाल के करीबी थे, उस वक्त केजरीवाल ने वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए केवल 49 दिनों में ही दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। केजरीवाल बेशक चुनाव हार गए, लेकिन उनकी उम्मीद अभी भी जिंदा है। वह खुद को एक राष्ट्रीय नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

योगेंद्र यादव की बात करें तो वह फिर से गाँधी परिवार के साथ जुड़ गए हैं। राहुल गाँधी ने उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को अपनी ‘भारत जोड़ो’ कंटेनर यात्रा में शामिल किया है, जो काफी हद तक पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की ‘कंटेनर यात्रा’ से प्रेरित है, ऐसा आप देख सकते हैं।

राहुल गाँधी को भी एक न एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद है- आखिरकार, उनके पिता, दादी और परदादा भी प्रधानमंत्री रह चुके हैं। राहुल गाँधी को छोड़ कर, अन्य तीन अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले थे। राहुल गाँधी तो चार बार सांसद रह चुके हैं, मोदी से भी ज्यादा बार।

ये सभी विकल्प ही तो हैं। हो सकता है कि आप उन्हें वोट न दें, लेकिन ऐसे लोग भी हैं, जो उन्हें वोट देंगे, देते हैं। सिर्फ इसलिए कि आपको नहीं लगता कि वे पीएम बनने के योग्य हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे भी ऐसा ही सोचते हैं। उन लोगों से पूछिए, जिन्होंने इतने सालों में उन्हें वोट दिया है।

इस आर्टिकल को मूल तौर पर निरवा मेहता ने लिखा है, जिसका अनुवाद किया है सुनीता मिश्रा ने।

‘मेरी मौजूदगी में बेचे गए पार्टी के टिकट और पद’: गोवा में कॉन्ग्रेस छोड़ने वाले विधायक ने हाईकमान पर लगाए आरोप, कहा- करोड़ों में हुआ सौदा

हाल ही में भाजपा में शामिल हुए गोवा के विधायक संकल्प अमोनकर ने शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर इस साल फरवरी में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान पद और टिकट बेचने का आरोप लगाया। बता दें कि अमोनकर गोवा कॉन्ग्रेस के उन 8 विधायकों में शामिल हैं, जो 14 सितंबर 2022 को भाजपा में शामिल हुए थे।

एक फ्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए संकल्प अमोनकर ने अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी (AICC) गोवा के डेस्क प्रभारी दिनेश गुंडू राव पर अमीर व्यक्तियों को 12 विधानसभा क्षेत्रों के टिकट बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने ये टिकट करोड़ों रुपए में बेचे थे।

संकल्प अमोनकर ने कहा, “गोवा प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के प्रमुख और कॉन्ग्रेस विधायक दल के प्रमुख पद की बिक्री हुई है। जो लोग पार्टी में नए थे, उन्हें पैसे लेने के बाद इन पदों की पेशकश की गई थी। यह सौदा मेरी मौजूदगी में हुआ था।” उन्होंने हा कि कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को भी इसकी जानकारी थी।

गाँधी परिवार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रबर स्टैंप हो। वे चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस की विफलताओं के लिए कोई जिम्मेदारी और जवाबदेही ले। जब डॉक्टर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया था, तब भी उन्होंने यही किया था। पूरी सरकार गाँधी परिवार चलाती थी।”

गुजरात युवक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष ने भी लगाए थे पार्टी पर आरोप

बता दें इसी महीने 4 सितंबर को गुजरात युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह वाघेला ने भी कॉन्ग्रेस पर ऐसा ही आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के साथ वाघेला ने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस पार्टी में गाँधी परिवार की पूजा होती है। इनके मुख्य कार्यालयों में नेहरू, इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी की तस्वीरें हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, वाघेला ने अपने इस्तीफे के साथ बताया कि उन्हें धीरे-धीरे एहसास हुआ कि पार्टी की मूल विचारधारा का तो अब गला घोंटा जा चुका है। वाघेला ने यहाँ तक दावा किया कि कॉन्ग्रेस ने उन्हें पैसों के बदले अध्यक्ष पद दिया था। उन्होंने कहा था, “मेरे समूह ने युवा कॉन्ग्रेस चुनाव में पार्टी को 1 करोड़ 70 लाख रुपए दिए थे। इन्हीं पैसों के बदले कॉन्ग्रेस ने मुझे यह पद दिया था।”

विश्वनाथ वाघेला ने कॉन्ग्रेस पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा था, “जब भी युवाओं को जरूरत होती है तो कॉन्ग्रेस के नेता कभी मौजूद नहीं होते। युवा ब्रिगेड को पार्टी के नेताओं की गुटबाजी और पार्टी सिस्टम से घृणा होने लगी है। देश के युवा कॉन्ग्रेस पार्टी में इसका भविष्य नहीं देखते हैं। यहाँ ईमानदार कार्यकर्ताओं का अपमान होता है।”

‘4 और 14 वाली नीति से एकतरफा बढ़ रही आबादी… उस गाँव में मस्जिद बनाने की कोशिश, जहाँ नहीं एक भी मुस्लिम’ : UP-नेपाल बॉर्डर से OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 14वीं रिपोर्ट:

पिछली रिपोर्ट में हमने बलरामपुर जिला मुख्यालय से नेपाल बढ़नी बॉर्डर की तरफ जा रहे हाइवे पर बनी मज़ारों, मस्जिदों और मदरसों को स्थानों के नाम सहित बताया था। इस रिपोर्ट में हमने उसी राह में पड़ने वाले स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों से बात की। उन्होंने हमें एक स्वर में बताया कि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस्लामी इबादतगाहों के साथ-साथ मुस्लिम आबादी भी तेजी से बढ़ी है।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

दीन की बातों का इनकार करने वाला काफिर

गैंसड़ी के पास बने पेट्रोल पम्प पर अपने वाहन में डीजल डलवाते हुए हमें स्थानीय मदरसे के 2 छात्र आते दिखे। दोनों की उम्र 10 साल के आस-पास थी। उन दोनों ने खुद को बनकटवा गाँव का रहने वाला बताया। दोनों ने बताया कि वो कुरान की पढ़ाई कर रहे हैं। हमने उनसे काफिर की परिभाषा पूछी तो उन्होंने बतया कि जो दीन की बातों में से किसी बात को इनकार करे, वो ‘काफिर’ होता है।

मदरसा छात्र

आज़ादी के बाद से आज तक रँवरी गाँव में नहीं बना हिन्दू प्रधान

बलरामपुर तुलसीपुर मार्ग पर पड़ने वाले गाँव रँवारी में हम थोड़ी देर के लिए रुके। यहाँ हमारी मुलाकात कुछ काम से आए भगवानपुर गाँव के प्रधान प्रतिनधि अनूप पांडेय से हुई। अनूप की पत्नी ही भगवानपुर की प्रधान हैं। अपने पड़ोसी गाँव रँवारी के बारे में बात करते हुए अनूप पांडेय ने कहा कि इस गाँव में 80% आबादी मुस्लिमों की है।

इसी के साथ उन्होंने बताया कि आज़ादी के बाद आज तक कभी रँवारी गाँव में हिन्दू प्रधान बन ही नहीं पाया। अनूप के मुताबिक रँवारी गाँव में मुस्लिमों का दबदबा है और हिन्दू डर कर रहते हैं। उन्होंने कहा कि गाँव की आबादी 2645 है, जिसमें हिन्दू लगभग 600 ही हैं, इनमें पिछड़ी जाति के लोग अधिक हैं।

सऊदी से आने वाले मुस्लिम करते हैं हंगामा

भगवानपुर गाँव के प्रधान प्रतिनिधि अनूप पांडेय के मुताबिक पुराने मुस्लिम कुछ ठीक थे लेकिन जो नई पीढ़ी के मुस्लिम हैं, वो हंगामा करते हैं। अनूप के मुताबिक हंगामा मचाने वाले वो मुस्लिम हैं, जो सऊदी अरब या कहीं बाहर से कमा कर गाँव आते हैं, वो हमेशा लड़ाई-झगड़े के मूड में रहते हैं।

अनूप के मुताबिक रँवारी गाँव में 3 मस्जिदें और 3 ही मदरसे हैं। उन्होंने आगे बताया कि पहले की समाजवादी पार्टी और अब योगी सरकार में जमीन आसमान का अंतर है। उन्होंने बताया कि इस सरकार में हिन्दू खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है।

प्रधान प्रतिनिधि अनूप पांडेय

जिस गाँव में मुस्लिम नहीं, वहाँ भी मस्जिद बनाने की कोशिश

अनूप पांडेय ने बताया कि उनके गाँव भगवानपुर में मुस्लिम नहीं हैं लेकिन एक बार वहाँ भी मस्जिद बनाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने ये भी बताया कि गाँव वालों के विरोध के चलते मस्जिद नहीं बन पाई। हालाँकि अनूप ने बताया कि उस गाँव में पहले से ही कर्बला बने हुए थे, जहाँ मज़ार बनाने का प्रयास हुआ।

सरकार अपनी है, इसलिए हम सुरक्षित

रँवरी गाँव के रहने वाले दलित समुदाय के मंगल ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि हम सुरक्षित इसलिए हैं क्योंकि सरकार योगी जी की है। उन्होंने अपनी सुरक्षा के कारणों में आस-पास में कुछ हिन्दू बहुल गाँवों का भी होना भी बताया। मंगल ने कहा कि पिछली सरकार में उन सभी का जीना हराम हो गया था।

रँवारी गाँव के मंगल

हाँ, बढ़ी हैं मुस्लिमों की आबादी और इबादतगाहें

बलरामपुर जिले के पत्रकार सीपी मिश्रा हमें तुलसीपुर में मिले। उन्होंने हमसे बात करते हुए बताया कि इसमें कोई 2 राय नहीं है कि बलरामपुर जिले में मुस्लिमों की आबादी हिन्दू समाज की तुलना में तेजी से बढ़ी है। इसी के साथ सीपी मिश्रा ने हमें ये भी बताया कि उनके बचपन में जिले में इस्लामी इबादतगाहें कहीं-कहीं देखने को मिलती थी, आज वो कदम-कदम पर दिख जाया करती हैं।

पत्रकार सीपी मिश्रा

अभी भी लाउडस्पीकर बाँध कर होतीं हैं तकरीरें

बलरामपुर के सीमवर्ती पचपेड़वा थानाक्षेत्र के गाँव गणेशपुर धवाई के ग्राम प्रधान के भाई सरोज कुमार मिश्रा ने हमसे बात की। उन्होंने ये स्वीकार किया कि नेपाल बॉर्डर के सीमवर्ती क्षेत्रों में पिछले कुछ ही सालों के अंदर मुस्लिम आबादी और इबादतगाहें तेजी से बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार और पुलिस का डर गलत करने वालों में जरूर है लेकिन अभी भी कई क्षेत्रों में DJ और लाउडस्पीकरों की तेज आवाज में तकरीरें और अपने मज़हबी कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

गाँव में 30% से बढ़ कर 50% हो गए मुस्लिम

लगभग 40 वर्षीय सरोज मिश्रा ने हमें बताया कि उनके बचपन में उनके गाँव गणेशपुर धवाई में हिन्दू लगभग 70% और मुस्लिम लगभग 30% था लेकिन अब ये अंतर 50-50% का रह गया है। मिश्रा ने हमें बताया कि पहले की सरकारों में तो अज़ान के समय दुर्गापूजा का गाना भी बंद करवा दिया जाता था। उन्होंने बताया कि तब हालात ऐसे थे कि जेनरेटर को बंद करना पड़ता था और बैटरी की चिमटी उतार देनी पड़ती थी।

ऑपइंडिया से बात करते प्रधान परिवार के सरोज मिश्रा

बाहर से आता है चंदा

सरोज मिश्रा ने हमें बताया कि तकरीरों और अन्य मज़हबी गतिविधियों को संचालित करने के लिए उनके इलाके के मुस्लिमों को हैदराबाद जैसे शहरों से चंदा आता है। उनके मुताबिक ये चंदा कुछ गिने-चुने लोगों के पास ही आता है। सरोज ने ये भी कहा कि अभी भी लाउडस्पीकर पर अज़ान की आवाजें सुनाई देती हैं। मिश्रा ने कहा कि कभी-कभी तो लगता है कि हम हिंदुस्तान में हैं या पाकिस्तान में।

कभी मस्जिद से हुआ था हथियार लेकर निकलने का ऐलान

प्रधान परिवार के सरोज ने हमें बताया कि साल 2009 में उन लोगों ने पहली बार दुर्गापूजा स्थापित की थी तो उसमें विवाद खड़ा हो गया था। मिश्रा के मुताबिक तब बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी और उनके क्षेत्र के विधायक का नाम अलाउद्दीन था। सरोज ने बताया कि उस समय पुलिस के आगे ही मस्जिद से ऐलान हुआ था कि हथियार ले कर निकलो और मूर्ति न लगने दो। मिश्रा ने बताया कि इतने विरोध के बाद भी मूर्ति स्थापना गाँव में हुई।

मूर्ति जमा हो गई थी थाने में, जिसे लाना पड़ा कोर्ट से

2009 की घटना याद करते हुए सरोज मिश्रा ने कहा कि तब बसपा विधायक अलाउद्दीन ही इस साजिश के पीछे विरोधियों को समर्थन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय हम लोगों द्वारा स्थापित माँ दुर्गा की मूर्ति को पुलिस ने थाने में जमा कर दिया था, जिसे हम लोगों ने सम्मान बचाने के लिए हाईकोर्ट से रिलीज करवाया था।

अपने ही पूरे गाँव में नहीं घुमा पाते देवताओं की मूर्तियाँ

सरोज मिश्रा के मुताबिक माँ दुर्गा की मूर्ति की स्थापना लगभग 5 वर्षों तक गाँव में विवाद का विषय बनी रही, जो बाद में धीरे-धीरे नॉर्मल हुई। उन्होने बताया कि अभी भी वो मूर्ति अपने ही पूरे गाँव में इसलिए नहीं घुमा पाते हैं क्योंकि रास्ते में एक मस्जिद पड़ती है। सरोज ने बताया कि मस्जिद के बाद लगभग 40% हिन्दू आबादी है लेकिन फिर भी पुलिस उस मस्जिद के आगे से आज भी मूर्ति नहीं ले जाने देती जबकि उस पार के हिन्दू हमेशा माँग करते रहते हैं।

पचपेड़वा से हम सरोज मिश्रा से बात करके गैंसड़ी की तरफ कुछ ही आगे बढ़े, तभी हमें रजडेरवा नाम की जगह पर मूर्ति विसर्जन का एक जुलूस दिखा। जुलूस में जय श्री राम के नारे लग रहे थे, जिसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। हमें बताया गया कि वो लोग जन्माष्टमी के बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति विसर्जन करने जा रहे हैं। जुलूस के साथ पुलिस फ़ोर्स भी चल रही थी। हमने इस जुलूस के आयोजक से बात की।

रजडेरवा में जुलूस

यहाँ मुस्लिम 75% और हिन्दू 25%

जुलूस का नेतृत्व कर रहे कृष्णदेव यादव ने हमें बताया कि वो रजडेरवा के निवासी हैं जहाँ मुस्लिमों की आबादी 75% और हिन्दू 25% हैं। उन्होंने गाँव में अकरम की पत्नी को ग्राम प्रधान बताया और चुनाव में खुद को उन्हीं से हारा हुआ प्रत्याशी बताया। उन्होंने गाँव में कुल 1560 वोटरों में 870 मुस्लिमों का वोट बताया।

कृष्णदेव के मुताबिक वो बुलडोजर बाबा के भक्त हैं क्योंकि इस सरकार से पहले वहाँ के हिन्दुओ को बहुत दिक्क्तों से रूबरू होना पड़ता था। जब हमने दिक्क्तों के बारे में सवाल किया तब उन्होंने बताया कि पहले की सरकारों में वो अपने धार्मिक जुलूस तक नहीं निकाल पाते थे। इसी के साथ उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में उनकी सुनवाई नहीं होती थी लेकिन अब प्रशासन उनकी बातों पर गौर करता है।

नेपाल बॉर्डर पर तेजी से बढ़ रही मुस्लिमों की आबादी

हमसे बात करते हुए कृष्णदेव यादव ने कहा कि ये सच है कि नेपाल बॉर्डर पर तेजी से मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है। खुद को 50 साल का बताते हुए कृष्णदेव यादव ने कहा कि पहले न तो इतनी मुस्लिम आबादी थी और न ही इतने मस्जिद-मदरसे। उन्होंने कहा कि उनके बचपन में इस क्षेत्र में आबादी और इबादतगाहों का ये हाल नहीं था। भीड़ में से एक व्यक्ति ने इलाके में रोहिंग्या मुस्लिमों की भी घुसपैठ होना बताया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए कृष्णदेव यादव व अन्य ग्रामीण

हम पहले समाजवादी थे पर अब योगीवादी

जुलूस में शामिल एक अन्य व्यक्ति धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पहले वो समाजवादी पार्टी के समर्थक थे लेकिन उस सरकार में उन्हें मुस्लिमों ने बहुत सताया। अब धर्मेंद्र यादव ने खुद को योगीवादी बताते हुए 2024 में नरेंद्र मोदी को फिर से जिताने की बात कही। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में वो सुरक्षित हैं। उनके ऐसा कहने पर पूरे जुलूस में शामिल अन्य लोगों ने जिंदाबाद के नारे लगाए। जुलूस में शामिल अन्य लोगों ने कहा कि उनके 4 और 14 वाली नीति से आबादी तेजी से एकतरफा बढ़ रही है।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पढ़ें पाँचवीं रिपोर्ट : महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

पढ़ें छठी रिपोर्ट : बौद्ध-जैन मंदिरों के बीच दरगाह बनाई, जिस मजार को पुलिस ने किया ध्वस्त… वो फिर चकमकाई: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी – OpIndia Ground Report

पढ़ें सातवीं रिपोर्ट : हनुमान गढ़ी की जमीन पर कब्जा, झारखंडी मंदिर सरोवर में ताजिया: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, असर UP के बलरामपुर में – OpIndia Ground Report

पढ़ें आठवीं रिपोर्ट : पुरातत्व विभाग से संरक्षित जो जगह, वहाँ वक्फ की दरगाह-मजार: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, मुसीबत में बौद्ध धर्मस्थल – OpIndia Ground Report

पढ़ें नौवीं रिपोर्ट : 2 मीनारों वाली मस्जिदें लोकल, 1 मीनार वाली अरबी पैसे से… लगभग हर गाँव में मदरसे: नेपाल बॉर्डर के मौलाना ने बताया इसमें कमीशन का खेल – OpIndia Ground Report

पढ़ें दसवीं रिपोर्ट : SSB बेस कैंप हो या सड़क, गाँव हो या खेत-सुनसान… हर जगह मस्जिद-मदरसे-मजार: UP के बलरामपुर से नेपाल के जरवा बॉर्डर तक OpIndia Ground Report

पढ़ें 11वीं रिपोर्ट : हिंदू बच्चों का खतना, मंदिर में शादी के बाद लव जिहाद और आबादी असंतुलन के साथ बढ़ते पॉक्सो मामले: नेपाल बॉर्डर पर बलरामपुर जिले में OpIndia Ground Report

पढ़ें 12वीं रिपोर्ट : गाँवों में अरबी-उर्दू लिखे हुए नल, UAE के नाम की मुहर: ज्यादा दाम देकर जमीनें खरीद रहे नेपाली मुस्लिम – OpIndia Ground Report

पढ़ें 13वीं रिपोर्ट : नए बने ओवरब्रिज के नीचे मज़ार-कर्बला, सड़क किनारे मस्जिद-मदरसे-दरगाह: नेपाल के बढ़नी बॉर्डर हाइवे पर ‘हरा रंग’ हावी – OpIndia Ground Report

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान को ACB ने किया गिरफ्तार: छापेमारी में करीबी के ठिकाने पर मिला अवैध हथियार, 12 लाख रुपए भी बरामद

एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) ने शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) को गिरफ्तार कर लिया। ये गिरफ्तारी उनके घर समेत कई जगहों पर छापेमारी के बाद हुई। छापेमारी के दौरान AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के करीबी हामिद अली खान के पास से एक बिना लाइसेंस वाली बेरेटा पिस्टल और 12 लाख रुपए बरामद किए गए हैं।

बता दें, अमानतुल्ला खान दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि उनके घर यह छापेमारी वक्फ बोर्ड से जुड़े मामले को लेकर ही की जा रही है। इस मामले में, उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2020 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

इससे पहले एसीबी (ACB) ने उन्हें दोपहर 12 बजे पूछताछ के लिए बुलाया था। इस पूछताछ के बारे में, अमानतुल्लाह खान ने ट्वीट करते हुए बताया था कि उन्हें एसीबी का नोटिस मिला है। साथ ही, दावा किया था कि उन्हें वक्फ बोर्ड का नया कार्यालय बनवाने के लिए तलब किया जा रहा है।

इसके बाद, शुक्रवार को हुई छापेमारी को लेकर अमानतुल्लाह ने ट्वीट कर कहा है, “मेरे घरवालों को प्रताड़ित किया जा रहा है।” उन्होंने लिखा “मुझे पूछताछ के लिए एसीबी दफ़्तर बुलाया गया और पीछे से मेरे घरवालों को प्रताड़ित करने दिल्ली पुलिस को भेजा गया। उपराज्यपाल साहब, सच को कभी आँच नहीं आती है याद रखिएगा। मुझे इस देश के संविधान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।”

गौरतलब है, रविवार (12 सितंबर) को आप के विधायक अमानतुल्ला खान के पर्सनल असिस्टेंट (PA) को पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। जिसकी पहचान, दिल्ली के शाहीन बाग स्थित अबुल फजल एन्क्लेव निवासी नोमान अहमद के रूप में हुई थी।

नोमान अहमद दिल्ली के लिए स्पाइस जेट की फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुँचा था। इस दौरान, जब सीआईएसएफ (CISF) के अधिकारियों ने उसके सामान की जाँच की तो उन्हें 7.65 मिमी का एक जिंदा कारतूस मिला। पुलिस पूछताछ के दौरान ही नोमान ने बताया था कि वह दिल्ली के विधायक अमानतुल्ला खान का पर्सनल असिस्टेंट है। साथ ही, दावा किया था कि उसके जिस बैग से कारतूस बरामद हुआ है वह अमानतुल्लाह के ‘पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर’ का है।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने PM मोदी को कहा- ‘माई डियर फ्रेंड’: बोले- रूसी परंपरा के कारण नहीं दे सकता जन्मदिन की बधाई, पर भारत को शुभकामनाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित चीन, रूस, पाकिस्तान सहित 8 देशों के नेता उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे हैं। इस दौरान पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात हुई।

मुलाकात के दौरान पुतिन ने पीएम मोदी के जन्मदिन का भी जिक्र किया। पुतिन ने कहा कि उन्हें पता है कि कल 17 सितंबर को मित्र पीएम मोदी का जन्मदिन है, लेकिन वे इसकी बधाई नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि रूसी संस्कृति में जन्मदिन की अग्रिम बधाई नहीं दी जाती। उन्होंने

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पी भारत के समृद्धि और विकास की भी कामना की। उन्होंने कहा, “माई डियर फ्रेंड! आप कल अपना जन्मदिन मनाने वाले हैं। रूसी परंपरा के अनुसार हम एडवांस में हैप्पी बर्थडे नहीं कहते। इसलिए हम आपको जन्मदिन की शुभकामना नहीं दे सकते, लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि हमें इसकी जानकारी है। हम आपको शुभकामना देना चाहते हैं। हमारे मित्र देश भारत को शुभकामनाएँ देते हैं। हम आपके नेतृत्व में भारत की समृद्धि की कामना करते हैं।”

आपसी मुलाकात के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने यूक्रेन के साथ संघर्ष पर कहा, “आज का युग युद्ध का नहीं है। हमने फोन पर आपसे कई बार इस संबंध में बात की। इस मुद्दे को लोकतंत्र कूटनीति और संवाद के जरिए सुलझाने का आग्रह किया।”

यूक्रेन संकट के दौरान वहाँ फँसे भारतीय छात्रों को लेकर पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा, “मैं आपका और यूक्रेन का आभार व्यक्त करना चाहूँगा कि संकटकाल के शुरू में जब हमारे हजारों छात्र यूक्रेन में फँसे थे, तब आपकी और यूक्रेन की मदद से हम अपने छात्रों को वहाँ से निकाल पाए।”

बता दें कि रूस में जन्मदिन की अग्रिम बधाई को अपशकुन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति अपना जन्मदिन पहले मनाना शुरू करता है, वह असली जन्मतिथि तक जिंदा नहीं रहने का जोखिम उठाता है। रूसियों का मानना है कि जन्मदिन की पूर्व संध्या पर जन्मदिन मनाने वाला व्यक्ति बीमारियों की चपेट में सबसे पहले आ सकता है।

इसके साथ ही रूस में एक और परंपरा है। वहाँ के लोग अपना 40वाँ जन्मदिन नहीं मनाते। वे इसे दुर्भाग्य और अपशकुन मानते हैं। ईसाइयों की एक मान्यता के अनुसार, अंतिम संस्कार के 40वें दिन आत्मा पृथ्वी छोड़ देती है। 

नॉन-वेज माँगो तो परोसता था बीफ: सूरत में रेस्टोरेंट मालिक सरफराज मोहम्मद गिरफ्तार, छापे में 60 किलो मांस बरामद, कसाई फरार

गुजरात के सूरत में सरफराज मोहम्मद नाम के एक रेस्टोरेंट मालिक को गिरफ्तार किया गया है। सरफराज पर आरोप है कि वो अपने रेस्टोरेंट में नॉन वेज खाना माँगने वालों को बीफ परोस रहा था। उसकी इसी हरकत का पता जब हिंदू संगठनों को चला तो उन्होंने इसका विरोध किया और पुलिस में जानकारी देकर उसे गिरफ्तार करवाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सूरत में हिंदू संगठनों के तीन लोगों को सूचना मिली कि होदिबांग्ला इलाके में चल रहे एक नॉनवेज रेस्टोरेंट में बीफ परोसा जा रहा है। उन्होंने मामले की जाँच की और इस बात की पुष्टि की, कि जानकारी आखिर सही है या गलत? जब गौमांस की पुष्टि हुई तो उन्होंने पूरे मामले की सूचना लालगेट पुलिस स्टेशन को दी।

सूचना मिलते ही पुलिस ने रेस्टोरेंट में छापा मारा और तकरीबन 60 किलोग्राम मांस फ्रिज में से बरामद किया। रेस्टोरेंट मालिक के खिलाफ सूरत के लालगेट थाने में मामला दर्ज कर उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

बता दें रविवार (11 सितंबर 2022) को पुलिस ने यह कार्रवाई की और फिर बरामद किए गए बीफ को भी जाँच के लिए सैंपल लेकर फॉरेंसिक साइंटिफिक लेबोरेटरी भेज दिया।

बताया जा रहा है कि 14 सितंबर को एफएसएल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई थी कि फ्रिज में से जब्त किए गए मांस में से 20 किलो बीफ पाई गई। गुजरात पुलिस ने ‘गुजरात पशु संरक्षण संशोधन अधिनियम’ के तहत रेस्टोरेंट के मालिक सरफराज मोहम्मद वजीर खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं उसके बीफ सप्लाई करने वाला कसाई अंसार फरार घोषित कर दिया गया है।

इस मामले में लालगेट थाना के हेड कांस्टेबल यजेंद्र दादूभाई ने बताया कि 11 सितंबर को उन्हें शिकायत मिली थी कि ‘दिल्ली दस्तरखवां’ नामक रेस्टोरेंट में गौमांस रखा और परोसा जा रहा है, जिसके बाद उन्होंने अपनी टीम के साथ रेस्टोरेंट में जाकर तलाशी ली और तो मांस के छह पैकेट मिले। प्रत्येक का वजन दस किलो था।

सड़कों पर दंगा, रोका तो कपड़े उतारे: अहमदाबाद कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी को 6 महीने के लिए भेजा जेल, 2016 के केस में 19 लोगों को सजा

अहमदाबाद की एक अदालत ने शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को विधायक और गुजरात कॉन्ग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी को 2016 के एक मामले में 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है। गुजरात विश्वविद्यालय के कानून विभाग में एक इमारत का नाम डॉ. बी आर अंबेडकर के नाम पर रखने के लिए विरोध प्रदर्शन करते हुए रोड ब्लॉक और दंगा करने के मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी मामले में अदालत ने जिग्नेश मेवाणी समेत कुल 19 लोगों को भी दोषी ठहराया।

जिग्नेश मेवाणी समेत अन्य आरोपितों को गैर कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और दंगा करने के आरोप में दोषी ठहराया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पी एन गोस्वामी ने सभी आरोपियों को 6 महीने की जेल के साथ ही 700-700 रूपए जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में, गुजरात पुलिस ने कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें से एक की मौत हो चुकी है।

बता दें, साल 2016 में, अहमदाबाद के गुजरात विश्वविद्यालय पुलिस स्टेशन में जिग्नेश मेवाणी और राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ कानून विभाग के निर्माणाधीन भवन का नाम अम्बेडकर के नाम पर रखने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए एक शिकायत दर्ज की गई थी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मेवाणी समेत अन्य लोगों ने सड़क जाम कर दिया था। इसके बाद, जब पुलिस ने रास्ते को खाली कराने का प्रयास किया तो उन्होंने इसका विरोध करने के लिए कपड़े उतारने शुरू कर दिए थे।

2017 के केस में 3 महीने की हुई थी सजा

गौरतलब है, इससे पहले, इसी साल मई में साल 2017 के एक अन्य मामले भी जिग्नेश मेवाणी समेत नौ अन्य लोगों को को मेहसाणा कोर्ट ने 3 महीने की सजा सुनाई थी। इस मामले में, जिग्नेश व अन्य पर बिना अनुमति रैली आयोजित करने का आरोप था।

यही नहीं, इसी वर्ष अप्रैल में भी असम पुलिस ने आपत्तिजनक ट्वीट करने के आरोप में जिग्नेश मेवाणी को गिरफ्तार किया था। उन पर धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), धारा 153 (ए) (दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (ए), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था

63 वर्षीय अब्दुल्ला ने 43 सालों में 53 औरतों से किया निकाह, कुछ को 1 रात के बाद छोड़ा: बोला- जवान नहीं, बुजुर्ग महिला संग मिलता है सुकून

सऊदी अरब में 63 साल के अबू अब्दुल्ला नाम के व्यक्ति ने 53 महिलाओं से निकाह किया है। अब्दुल्ला ने 10 सितंबर को खुलासा किया कि 43 साल के अंतराल में ये निकाह ‘शांति और स्थिरता’ की खोज में की, न कि ‘व्यक्तिगत सुख’ की तलाश में।

‘पॉलीगमिस्ट ऑफ सेंचुरी’ (सदी के बहुविवाहवादी) के नाम से पहचाने जाने वाले अबू का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। नेटिज़न्स ने वीडियो को बड़े पैमाने पर साझा किया। इनमें से कुछ ने उनकी प्रशंसा की, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि इसमें गर्व करने लायक कोई बात नहीं है।

अबू अब्दुल्ला का सऊदी अरब की मीडिया कंपनी MBC ने साक्षात्कार किया गया था, जिसमें अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने 20 साल की उम्र में पहला निकाह किया था। उसके बाद फिर एक लड़की से निकाह किया, जो उनसे छह साल छोटी थी।

अब्दुल्ला ने कहा, “जब मैंने पहली बार निकाह किया तो मैंने एक से अधिक महिलाओं से शादी करने की योजना नहीं बनाई थी, क्योंकि मैं सहज महसूस कर रहा था और मेरे बच्चे थे। हालाँकि, बाद में समस्याएँ हुईं और मैंने 23 साल की उम्र में फिर से निकाह करने का फैसला किया। मैंने अपनी बीवी को इस फैसले के बारे में बता दिया।”

यहाँ आकर भी अब्दुल्ला की तलाश खत्म नहीं हुई। अब्दुल्ला ने खुलासा किया कि जब उनके पहली और दूसरी पत्नी के बीच समस्याएँ पैदा होने लगीं तो उन्होंने तीसरी और चौथी बार निकाह करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पहली दो बीवियों को तलाक दे दिया।

अब्दुल्ला ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी सभी बीवियों के साथ ठीक व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि उनकी अधिकांश बीवियाँ सऊदी की महिलाएँ थीं, लेकिन उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय महिलाओं से भी निकाह की थी। अब्दुल्ला जब काम से छुट्टी लेकर तीन-चार महीने के लिए विदेश गए तो उन्होंने वहाँ भी निकाह किया।

अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि उनकी 53 निकाहों में सबसे छोटा निकाह केवल एक रात ही चलीं। उन्होंने कहा, “दुनिया का हर पुरुष चाहता है कि एक महिला हो और वह हमेशा उसके साथ रहे। स्थिरता एक युवा महिला के साथ नहीं, बल्कि एक बूढ़ी के साथ मिलती है।” अब्दुल्ला अब एक महिला से निकाह कर चुके हैं और भविष्य में और निकाह की योजना नहीं है।

‘यौन शोषण पीड़िता के कपड़े उत्तेजक थे’: विवादित टिप्पणी करने वाले जज का नहीं होगा ट्रांसफर, केरल HC ने आदेश पर लगाई रोक

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को कोझीकोड के जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस कृष्णकुमार का ट्रांसफर कोल्लम लेबर कोर्ट में करने के आदेश पर रोक लगा दी। यौन शोषण के दो मामलों में आरोपित को जमानत देते हुए विवादित टिप्पणी करने के बाद एस कृष्ण कुमार का ट्रांसफर किया गया था। कृष्ण कुमार ने अपने फैसले में कहा था कि पीड़िता ने यौन उत्तेजक कपड़े पहने थे इसलिए प्रथम दृष्टया यौन उत्पीड़न का मामला नहीं बनता।

इसी विवादित टिप्पणी के मामले में सुनवाई के दौरान, अपने ट्रांसफर पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कृष्ण कुमार ने कहा था कि इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न्यायिक अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करेगी। साथ ही, उनके सामने आए मामलों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय लेने से भी रोकेगी।

बता दें, हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष पेश की गई अपनी याचिका में एस कृष्णकुमार ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी थी। इस याचिका में उन्होंने कहा था, उनका स्थानांतरण आदेश अवैध, मनमाना और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। एस कृष्ण कुमार ने यह भी तर्क दिया था कि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए एक न्यायाधीश द्वारा दिया गया एक गलत आदेश, ट्रांसफर करने का आधार कभी नहीं हो सकता।

इससे पहले एकल पीठ ने एस कृष्ण कुमार की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी, “जिला न्यायपालिका का एक जिम्मेदार सदस्य होने के नाते, याचिकाकर्ता से अपेक्षा की जाती है कि वह जहाँ भी तैनात हो, अपनी सेवाएँ प्रदान करें। मैं यह देखने में विफल हूँ कि याचिकाकर्ता का कानूनी अधिकार क्या है। मेरी राय है कि याचिका में बताए गए आधार किसी भी राहत के अनुदान को उचित नहीं ठहराते हैं।”

जज की विवादित टिप्पणी

गौरतलब है, यौन शोषण के दो मामलों के आरोपित सिविक चन्द्रन को जमानत देते हुए एस कृष्णकुमार ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि महिला अनुसूचित जाति की है इसलिए कौन उसे छुएगा। उन्होंने कहा था, आरोपित समाज सुधारक है और जातिप्रथा का विरोधी है इसलिए यह मानना सही नहीं है कि उसने अनुसूचित जाति की पीड़िता का यौन शोषण किया होगा। जातीय व्यवस्था को देखते हुए यह अविश्वसनीय है कि वह अनुसूचित जाति की महिला को छू भी सकता है।

इसके अलावा, जज एस कृष्ण कुमार ने पीड़िता के कपड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि महिला ने खुद ऐसे कपड़े पहने थे जो यौन उत्तेजक थे। जिला कोर्ट ने जमानत आदेश में कहा था कि जमानत याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों से पता चलता है कि शिकायतकर्ता खुद ऐसे कपड़े पहने हुए थी, जो उत्तेजक थे। इसलिए आरोपित के खिलाफ धारा-354 A का केस नहीं बनता।