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‘जिम ट्रेनर ने शादी का झाँसा देकर कई बार किया बलात्कार, निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी’: अभिनेत्री ने दर्ज कराई FIR, आरोपित गिरफ्तार

तेलुगू फिल्मों की एक अभिनेत्री (Telugu Actress) ने साउथ मुंबई के एक फिटनेस ट्रेनर पर बलात्कार का आरोप लगाया है। फिटनेस ट्रेनर आदित्य कपूर (Aditya Kapur) पर आरोप है कि उसने शादी का झाँसा देकर एक्ट्रेस के साथ कई बार रेप किया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता ने मुंबई के कफ परेड (Cuffe Parade) पुलिस थाने में आरोपित के खिलाफ रेप और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज कराया है।

पुलिस ने आईपीसी की धारा 376, 323, 504, 506 (2), 67 और 67 (ए) के तहत यह मामला दर्ज किया है। शिकायत के मुताबिक, आरोपित ने साल 2021 से 2022 के बीच एक्ट्रेस के साथ कथित तौर पर कई बार रेप किया।

पुलिस ने बताया कि 24 वर्षीय महिला अगस्त 2021 में एक मॉडल और अभिनेता के बांद्रा घर पर आदित्य से मिली थी। कफ परेड पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, “यहाँ उन्होंने एक दूसरे का फोन नंबर लिया था। लॉकडाउन के दौरान एक्ट्रेस फिटनेस ट्रेनर के कफ परेड में जेडी सोमानी मार्ग पर स्थित उसके घर पर मिली। यहाँ ट्रेनर ने उसे शादी का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।”

पुलिस के अनुसार, वे गोवा में भी मिले थे, जहाँ आरोपित ने कथित तौर पर एक लॉज में उसके साथ जबरदस्ती और मारपीट की। साथ ही उसे जान से मारने और उसकी निजी तस्वीरें वायरल करने की धमकी देते हुए उसने उसके साथ कई बार रेप किया। उसने महिला को उसके माता-पिता के खिलाफ भी उकसाया, जिसके बाद वह जनवरी 2022 में अपने अपार्टमेंट में चली गई। लेकिन यहाँ भी वह उसे तंग करता था। उसकी हरकतों से तंग आकर पीड़िता मार्च में अपने माता-पिता के घर वापस चली गई।

एक्ट्रेस ने पुलिस को अपनी शिकायत में यह भी बताया कि आरोपित उसे लगातार धमकी देता रहा। 3 सितंबर को उसने उसे मिलने के लिए बुलाया और कहा, अगर वह नहीं आई तो उसकी चाची की बेटी को जान से मार देगा। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया, “आदित्य मुझसे बांद्रा में मिला और मुझे कफ परेड में ले गया। जब मैंने उससे कहा कि मुझे उससे मिलने में कोई दिलचस्पी नहीं है तो वह मुझे लोअर परेल के एक रेस्टॉरेंट में ले गया और वहाँ उसने मेरे साथ मारपीट की।”

पुलिस ने आगे बताया कि जब ट्रेनर ने उसके खिलाफ चोरी की शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी, तो महिला ने अपने माता-पिता को अपनी आपबीती बताई और और पुलिस थाने में केस दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस पीड़िता को जाँच के लिए जे जे अस्पताल लेकर गई।

4 साधुओं को भीड़ ने सांगली में बेरहमी से मारा, वीडियो वायरल: महाराष्ट्र (पालघर) में ही ईसाई मिशनरी कनेक्शन से हुई थी साधुओं की मॉब लिंचिंग

महाराष्ट्र के सांगली (Sangli) जिले में 4 साधुओं को बच्चा चोरी के शक में बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। ये घटना सांगली की जाट तहसील के लवंगा गाँव की है। ये चारों साधु यहाँ उत्तर प्रदेश के मथुरा से आए थे और पंढरपुर दर्शन के लिए जा रहे थे।

बताया जा रहा है कि स्थानीय लोग इन साधुओं की भाषा नहीं समझ पाए और बच्चा चोर समझ कर इनकी लाठी-डंडों से पिटाई (Sangli mob thrashed sadhu) कर दी। अभी तक किसी के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया है। मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में पुलिस का रिएक्शन सामने आया है।

सांगली के एसपी दीक्षित गेदाम ने कहा, “हमें कोई शिकायत/औपचारिक रिपोर्ट नहीं मिली है। हम वायरल वीडियो की जाँच कर रहे हैं और तथ्यों की पुष्टि कर रहे हैं। इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।”

साधुओं के मुताबिक, वे उत्तर प्रदेश के मथुरा से कर्नाटक देवदर्शन के लिए आए थे। वहाँ से पंढरपुर दर्शन के लिए जा रहे थे। ये लोग रात को गाँव के एक मंदिर में ठहरे थे। दूसरे दिन सुबह एक बच्चे से रास्ता पूछते समय ग्रामीणों को लगा की वे बच्‍चा चोर हैं, जिसके बाद ग्रामीण उन्हें लाठी, डंडों से पीटने लगे।

जिन साधुओं के साथ यह घटना हुई, वे मथुरा के श्री पंचमनामा जूना अखाड़ा के हैं। गलतफहमी की वजह से हुई इस घटना की कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पूछताछ के बाद साधु पंढरपुर के लिए निकल गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुँची उमदी पुलिस ने घायल साधुओं का इलाज कराया। पुलिस ने बताया कि वो चारों साधु वहाँ से बिना शिकायत दर्ज कराए ही चले गए। लिखित शिकायत नहीं मिलने की वजह से पुलिस ने मारपीट करने वालों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की। जिले के एसपी ने भी वीडियो वायरल होने के बाद जाँच करने की बात कही है।

पालघर मॉब लिंचिंग

बता दें कि महाराष्ट्र में साधुओं के साथ मारपीट की ये पहली घटना नहीं है। दो साल पहले पालघर जिले में 2 साधुओं की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। जूना अखाड़ा के महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज (70 वर्ष) और महंत सुशील गिरी महाराज (35 वर्ष) अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे (30 वर्ष) के साथ मुंबई से गुजरात अपने गुरु भाई को समाधि देने के लिए जा रहे थे। लेकिन 16 अप्रैल 2020 की रात पालघर के दहानु तालुका के आदिवासी बहुल गडचिंचले गाँव में सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उन तीनों पर हमला किया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी।

पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि आदिवासी इलाकों में हिंदू संतों के खिलाफ एक हवा बनाई गई और इसी कारण संतों की मॉब लिंचिंग हुई। उस साजिश में ईसाई मिशनरियों के हाथ होने के भी संकेत मिले थे।

गैर-मुस्लिम एलिजाबेथ के लिए मक्का में उमराह, वीडियो वायरल होने के बाद सऊदी पुलिस ने किया गिरफ्तार

ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ (Queen Elizabeth II) की मौत के बाद उनके नाम पर उमराह करने गए यमन के एक नागरिक को सऊदी अरब पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति मक्का मस्जिद में एलिजाबेथ के नाम का बैनर ले कर घुसा था। इसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

हुआ यह कि गैर-मुस्लिम एलिजाबेथ के लिए उमराह (Umrah for Queen Elizabeth) करने के कारण इस व्यक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर मुस्लिम लोग कार्रवाई की माँग करने लगे। गिरफ्तार व्यक्ति पर अब सऊदी कानूनों के तहत मुकदमा चलेगा। यह मामला सोमवार (12 सितम्बर 2022) का है।

पकड़े गए यमनी नागरिक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वो सफेद रंग के कपड़े पहन रखा है और मक्का मस्जिद की दीवार से सट कर खड़ा हुआ है। उसके हाथों में एक बैनर है, जिस पर “क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के लिए उमराह, हम खुदा से उन्हें जन्नत में स्वीकार करने की कामना करते हैं” लिखा हुआ है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ के लिए उमराह करने वाले युवक का वीडियो कोई और व्यक्ति बना रहा है। वीडियो में वो व्यक्ति बैनर पर लिखे गए शब्दों को खुद भी दोहरा रहा है।

वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को गिरफ्तार करने के दौरान सऊदी पुलिस ने माना है कि आरोपित ने उमराह के नियमों का उल्लंघन किया है। सऊदी सरकार के सरकारी TV चैनल पर भी यह घटना चलाई गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उमराह केवल मुस्लिमों के लिए होता है और एलिजाबेथ ईसाई समुदाय से थीं। अब आरोपित पर फैसला सऊदी सरकार की अदालत को लेना है।

गौरतलब है कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) का गुरुवार (8 सितंबर 2022) को स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में निधन हो गया था। उनकी उम्र 96 साल थी। उनका जन्म 21 अप्रैल 1926 को हुआ था, जो अपने पिता जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद 1952 में मात्र 25 वर्ष की उम्र में ब्रिटेन की महारानी बनी थीं।

एलिजाबेथ द्वितीय न सिर्फ ब्रिटेन की महारानी थीं, बल्कि इसके अलावा वे 14 अन्य देशों की भी महारानी थीं। इस सूची में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जमैका, बहामास, ग्रेनेडा, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स, तुवालू, सैंट लूसिया, सेंट विंसेट एंड ग्रेनेजियन्स, एंटीगुआ और बारबुडा, बेलिज, सेंट किट्स एंड नेविस शामिल हैं। हालाँकि एलिजाबेथ द्वितीय इन देशों की सिर्फ सांकेतिक महारानी थीं। यहाँ के शासन या सरकार में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं था।

पैगंबर मुहम्मद की वंशज एलिजाबेथ?

मार्च 2018 में मोरक्कन अखबार अल-ओस्बो (Al-Ousboue) में यह दावा किया गया था कि महारानी के मुहम्मद की बेटी फातिमा से सम्बंध हैं और वह पैगंबर की 43वीं वंशज हैं। TOI ने भी मोरक्को की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा था कि ब्रिटेन की महारानी पैगंबर की 43वीं वंशज हैं।

दरअसल, साल 1986 में शाही वंश पर अध्ययन करने वाली संस्था बर्क्स पीरगे के पब्लिशिंग डायरेक्टर हैरल्ड बी ब्रूक्स बेकर ने यह दावा किया था। इसके बाद मोरक्को के एक अखबार ने अपने आर्टिकल में ऐसा ही दावा किया था।

दावा किया जा रहा है कि एलिजाबेथ द्वितीय की ब्‍लडलाइन 14वीं सदी के अर्ल ऑफ कैंब्रिज से है और यह मध्‍यकालीन इस्लामी स्‍पेन से लेकर पैगंबर मोहम्मद की बेटी फातिमा तक जाती है। फातिमा हजरत मोहम्मद की बेटी थीं और उनके वंशज स्पेन के राजा थे, जिनसे महारानी का संबंध बताया जा रहा है। इसी वजह से, महारानी को मोहम्मद का वंशज कहा जा रहा है।

दावों और रिपोर्टों से परे है सच्चाई। कैसे? 2018 में इस विषय पर द टाइम्स से बात करते हुए अंग्रेजी इतिहासकार और टेलीविजन पर्सनेल्टी डेविड स्टार्की ने कहा था कि एलिजाबेथ को पैगंबर मुहम्मद के वंश से जोड़ा गया। हालाँकि, इसे इतिहासकारों द्वारा सत्यापित नहीं किया गया था और न ही पूरी तरह से स्वीकार किया गया था।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ में बच्चों का दुरुपयोग, इस्तेमाल कर रही कॉन्ग्रेस: राहुल गाँधी के खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को NCPCR का पत्र

भारत जोड़ो यात्रा में नाबालिग बच्चों को राजनीतिक हथियार के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। यह कहना है राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) का। NCPCR ने इस संबंध में चुनाव आयोग से राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के खिलाफ कार्रवाई की माँग भी की है।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के मुताबिक उन्हें ऐसी शिकायतें मिली हैं। NCPCR का मानना है कि राहुल गाँधी के साथ कॉन्ग्रेस के जवाहर बाल मंच ने बच्चों को अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए प्रयोग किया है। NCPCR द्वारा चुनाव आयोग को यह पत्र मंगलवार (13 सितम्बर 2022) को लिखा गया है।

यह पत्र मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को सम्बोधित किया गया है। इसे बाल संरक्षण आयोग के चेयरमैन प्रियांक क़ानूनगो ने भेजा है। इस पत्र में बताया गया है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा राजनीति के लिए बच्चों के दुरुपयोग की शिकायत उन्हें 12 सितम्बर 2022 को प्राप्त हुई थी।

पत्र में कई CCTV और वीडियो फुटेज के अलावा तस्वीरों का हवाला भी दिया गया है, जिसमें ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ नाबालिग बच्चे दिखाई दे रहे हैं। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि बच्चों को न सिर्फ कॉन्ग्रेस का झंडा पकड़ा दिया गया बल्कि उनसे नारेबाजी भी करवाई जा रही।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के इसी शिकायती पत्र में आगे बताया गया है कि जिन बच्चों को कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा राजनीति में इस्तेमाल किया जा रहा है, उनकी उम्र 7 से 18 साल के बीच है। पत्र में यह भी बताया गया है कि जवाहर बाल मंच ने बच्चों को जुटाने के लिए स्कूलों का दौरा किया था। जवाहर बाल मंच द्वारा इस अभियान की शुरुआत 18 दिसंबर 2021 से ही होना बताया गया है। NCPCR ने इस बावत जवाहर बाल मंच द्वारा किए गए प्रचार के सोशल मीडिया लिंक को भी अटैच किया है।

कॉन्ग्रेस पार्टी की राजनैतिक पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए NCPCR ने चुनाव आयोग से मामले की जाँच करवाने की आशा जताते हुए उचित कार्रवाई की माँग की है। पार्टी अनुबंधों का जिक्र करते हुए प्रियांक कानूनगो ने लिखा है कि नियमानुसार कॉन्ग्रेस बालिगों का राजनैतिक संगठन है।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के इस पत्र पर कॉन्ग्रेस ने आयोग के सदस्यों को संघ के इशारे पर चलने वाला बताया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कॉन्ग्रेस नेता और राजयसभा सदस्य जयराम रमेश के मुताबिक यह प्रयास भारत जोड़ो यात्रा को उसके लक्ष्य से भटकाने के लिए किया जा रहा है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा चला रखी है। यह यात्रा पार्टी की छवि को मजबूत करने और लोगों से जमीन पर जुड़ने के लिए चल रही है। इसका आरंभ 7 सितम्बर 2022 को हुआ था। इसमें लगभग 3570 किलोमीटर का सफर कश्मीर से कन्याकुमारी तक तय करना है। यात्रा की अवधि 5 महीने रखी गई है।

गोलीकांड से थर्राया बेगूसराय, बाइक सवारों ने 40 km में 11 को बनाया शिकार: राह चलते लोगों पर बरसाई गोलियाँ, बिहार में लौटा जंगलराज

बिहार में अपराध पहले ही चरम पर है और अब बेगूसराय में मंगलवार (13 सितंबर 2022) को हुए गोलीकांड के बाद पूरे इलाके में सनसनी मची हुई है। यह गोलीकांड में बाइक सवार दो बदमाशों ने 40 किलोमीटर के दायरे में 11 लोगों को गोली मारी है, जिसमें से एक की मौत हो गई है। पुलिस इस मामले की जाँच में जुटी हुई है और दोनों बदमाशों को साइको बता रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाइक सवार दो बदमाशों ने बेगूसराय के आधे दर्जन इलाकों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की है। इस पूरी घटना में घायल हुए सभी लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। जबकि चंदन कुमार नामक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि इन दोनों साइको शूटर्स ने राह चलते लोगों को गोली मारी है। इनमें मल्हीपुर में 2 लोगों को, बरौनी थर्मल चौक के पास 3 लोगों को, बरौनी में 2 लोगों को, तेघड़ा में 2 और बछवाड़ा में भी 2 लोगों को गोली लगी है।

बाइक सवार दोनों बदमाशों के बारे में अब तक कोई भी सूचना सामने नहीं आयी है। फिलहाल, पुलिस फायरिंग के कारणों के बारे में जाँच पड़ताल करने में जुटी हुई है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज के जरिए बाइक सवार बदमाशों की तलाश भी जारी है।

वहीं, इस मामले में केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने इस घटना को बिहार का दुर्भाग्य बताया है। उन्होंने कहा, “बिहार का दुर्भाग्य है कि बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। बिहार के मुख्यमंत्री को भय लगता है ये कहने में कि मैं जंगल राज का हूँ, जिस दिन वे ऐसा कहेंगे, वहाँ के उपमुख्यमंत्री उन्हें सत्ता से हटा देंगे।”

गोलीकांड में बेगूसराय के एसपी योगेंद्र कुमार का कहना है, मोटरसाइकिल में सवार दो लोग लोगों को गोली मार रहे हैं। दोनों साइको किलर प्रतीत हो रहे हैं। सभी थानों की पुलिस को अलर्ट किया गया है. गाड़ियों की भी तलाशी ली जा रही है। बदमाशों को पकड़ने के लिए पूरे जिले में नाकेबंदी की गई है।

हिंदू बच्चों का खतना, मंदिर में शादी के बाद लव जिहाद और आबादी असंतुलन के साथ बढ़ते पॉक्सो मामले: नेपाल बॉर्डर पर बलरामपुर जिले में OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 11वीं रिपोर्ट:

बलरामपुर जिले में नेपाल सीमा के जरवा की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे जगह-जगह इबादतगाहों को लेकर हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में आपको बताया था। बढ़ती मुस्लिम आबादी के कारण नेपाल में हुए लव जिहाद के मामले पर भी हमने रिपोर्टिंग की थी। यही हालात सीमा के इस पार उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में भी हैं। यहाँ लव जिहाद के मामले भी बढ़े हैं और उससे एक कदम आगे बढ़ कर हिंदू बच्चों को भी कट्टरपंथी इस्लामी अपना निशाना बना रहे।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में जनसंख्या के असंतुलन के कारण किसी एक जाति-विशेष (पढ़ें थारू जनजाति वाली रिपोर्ट) या समाज विशेष को तकलीफ है, ऐसी बात नहीं है। बदलते हालातों से संघर्ष उन सभी को करना पड़ रहा है, जो सीमावर्ती इलाकों में रहते हैं। बॉर्डर पर न सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर कब्ज़ा कर अवैध इबादतगाहों का बनते चला जाना एक बड़ी समस्या है बल्कि यहाँ रह रहे लोगों को लव जिहाद जैसे मामलों से भी जूझना पड़ता है।

हिन्दू बच्चों के खतने की दी गई धमकी

ऑपइंडिया को मिली शिकायत कॉपी के मुताबिक अप्रैल 2022 में नेपाल बॉर्डर के जरवा इलाके में रहने वाले मुल्ला जमील ने अपने घर काम करने वाली हिन्दू महिला को बहला-फुसला लिया। इसके बाद मुल्ला उस महिला को और उनके 4 बच्चों को लेकर कहीं चला गया।

पुलिस को मिली शिकायत में कहा गया कि मुल्ला जमील उसकी पत्नी (शिकायतकर्ता की पत्नी), 2 बेटियों और 2 बेटों को इस्लाम कबूल करवाना चाहता था। शिकायत में आरोप ये भी लगाया गया था कि पीड़ित के सभी नाबालिग बच्चों को सगीर मौलाना नाम के आरोपित के घर तुलसीपुर बाजार के पास एक गाँव में रखा गया था।

पुलिस में दी गई शिकायत

पीड़ित ने इसी शिकायत कॉपी में सगीर मौलाना और मुल्ला जमील को आरोपित बनाते हुए लिखा कि इन दोनों ने उनके बच्चों के खतना करवा देने की धमकी दी थी। मिली जानकारी के मुताबिक इन बच्चों को मदरसे में उर्दू की शिक्षा भी दी जाने लगी थी और उन बच्चों के साथ उनकी माँ के बुलाने वाले नाम भी इस्लामी कर दिए गए थे। पीड़ित बॉर्डर क्षेत्र के हालौरा गाँव का निवासी है।

लड़की हिन्दू, मंदिर में अली से शादी… फिर इस्लाम कबूल नहीं करने की सजा

एक अन्य घटनाक्रम में वाराणसी की रहने वाली एक लड़की ने पुलिस में शिकायत दी कि उसे नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के पचपेड़वा के रहने वाले मुबारक अली ने शादी करके प्रताड़ित किया। पीड़िता ने वाराणसी पुलिस और मुख्यमंत्री को शिकायत देते हुए बताया कि ऑनलाइन ऐप से मिले मुबारक अली ने अपने परिवार सहित काशी आकर हिन्दू मंदिर से शादी की और अपने साथ घर ले गया। यहाँ तक सब ठीक था, दिक्कत इसके बाद शुरू हुई।

पीड़ित लड़की का कहना है कि शुरू में सभी धर्मों के लिए आस्था दिखाने वाला मुबारक अली नेपाल बॉर्डर इलाके में मौजूद गाँव खखादेई के अपने घर पर जाते ही बदल गया। आए दिन उसे प्रताड़ित करने लगा, इसके खिलाफ उसके घर वाले भी कभी कोई विरोध नहीं करते थे।

आरोपित मुबारक अली

पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया कि कुछ दिनों बाद उसे एक बेटी पैदा हुई तो उसके पति मुबारक ने बेटी को अमीना और उसे फातिमा के नाम से बुलाना शुरू किया। इस बीच मुबारक अली अपनी पत्नी और सास से भी काम-धंधे के नाम पर काफी पैसे ले चुका था।

पीड़िता ने रोते हुए हमें बताया कि गलती से अगर उसके मुँह से भगवान का नाम भी निकल जाता था तो उसको प्रताड़ना मिलनी शुरू हो जाती थी। लड़की ने कहा कि आखिरकार जब उसने मुस्लिम बनने से इनकार कर दिया, तब उसको घर से निकाल दिया गया। अब वो बेसहारा अपनी बेटी के साथ अपने मायके में रह रही हैं।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि अभी तक पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

आबादी का असंतुलन, बढ़ती लव जिहाद जैसी घटनाएँ

बलरामपुर जिला अदालत में पोक्सो मामलों के सरकारी वकील पवन शुक्ला ने ऑपइंडिया से बात करते हुए यह स्वीकार किया कि क्षेत्र में मुस्लिम आबादी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है। पवन शुक्ला ने यह भी बताया कि कई पीड़ित लड़कियों के साथ बहला-फुसला कर दुराचार होता है।

सरकारी वकील ने सीमावर्ती क्षेत्र के तुलसीपुर थानाक्षेत्र में एक हिन्दू परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उनकी नाबालिग बेटी को एक बालिग मुस्लिम ने कुछ वर्ष पहले अपने जाल में फँसाया था, जिसको सजा दिलाने के लिए वो अभी तक प्रयासरत हैं।

पवन शुक्ला के मुताबिक ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट काफी प्रभावी होता है, बशर्ते गवाह और पीड़ित अपने स्टैंड पर कायम रहें। तुलसीपुर लव जिहाद वाले प्रकरण में उन्होंने गोपनीयता के लिहाज से यह बताया कि लड़की के बयान हो चुके हैं और आशा है कि जेल में बंद आरोपित को सजा मिलेगी।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पढ़ें पाँचवीं रिपोर्ट : महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

पढ़ें छठी रिपोर्ट : बौद्ध-जैन मंदिरों के बीच दरगाह बनाई, जिस मजार को पुलिस ने किया ध्वस्त… वो फिर चकमकाई: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी – OpIndia Ground Report

पढ़ें सातवीं रिपोर्ट : हनुमान गढ़ी की जमीन पर कब्जा, झारखंडी मंदिर सरोवर में ताजिया: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, असर UP के बलरामपुर में – OpIndia Ground Report

पढ़ें आठवीं रिपोर्ट : पुरातत्व विभाग से संरक्षित जो जगह, वहाँ वक्फ की दरगाह-मजार: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, मुसीबत में बौद्ध धर्मस्थल – OpIndia Ground Report

पढ़ें नौवीं रिपोर्ट : 2 मीनारों वाली मस्जिदें लोकल, 1 मीनार वाली अरबी पैसे से… लगभग हर गाँव में मदरसे: नेपाल बॉर्डर के मौलाना ने बताया इसमें कमीशन का खेल – OpIndia Ground Report

पढ़ें दसवीं रिपोर्ट : SSB बेस कैंप हो या सड़क, गाँव हो या खेत-सुनसान… हर जगह मस्जिद-मदरसे-मजार: UP के बलरामपुर से नेपाल के जरवा बॉर्डर तक OpIndia Ground Report

वकील इरशाद अली ने माँ दुर्गा का टैटू बना कर हिन्दू युवती को फाँसा, पहले से दो बच्चों का अब्बा: 28 जख्म और टूटी हड्डी लेकर किसी तरह भागी पीड़िता

दिल्ली के ज्योति नगर इलाके से पुलिस ने लव जिहाद के मामले में इरशाद अली नामक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित इरशाद अली ने खुद को हिन्दू बताते हुए युवती को प्रेम जाल में फँसा कर शादी की थी। इसके बाद जब उसकी सच्चाई सामने आई तो धर्म परिवर्तन करने और नमाज पढ़वाने के लिए मारपीट करने लगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित इरशाद अली पेशे से वकील है। पीड़िता साल 2011 में उसके अंडर इंटर्नशिप करने के लिए गई थी। जहाँ, आरोपित ने खुद को हिन्दू और अपना नाम गुड्डू चौधरी बताया था। पीड़िता को अपने जाल में फँसाने और खुद को हिन्दू साबित करने के लिए उसने अपने शरीर पर माँ दुर्गा का टैटू भी बनवा लिया था। दोनों के बीच दोस्ती प्यार में बदल गई और फिर 2015 में शादी कर ली।

पीड़िता का कहना है कि शादी के कुछ दिन बाद तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन, जब वह इरशाद अली के घर गई तो उसे उसकी सच्चाई का पता लग गया। ये बात भी सामने आई कि कि वह पहले से ही शादी शुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। इसके बाद, आरोपित इरशाद पीड़िता को नमाज और कलमा पढ़ने के लिए दबाव डालने लगा। लेकिन, पीड़िता ने इसके लिए मना कर दिया। इस पर इरशाद पीड़िता के साथ मारपीट करने लगा और फिर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने लगा।

पीड़िता का कहना है कि कुछ दिनों बाद इरशाद उसे भोपाल ले आया और मुस्लिम बहुल्य इलाके के एक घर में रखकर बंद कर दिया। यहाँ भी वह उसके साथ मारपीट करता और इस्लाम न अपनाने पर प्राइवेट वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। इसके बाद मौका मिलते ही वह भागकर उत्तर प्रदेश के मेरठ पहुँच गई। वहाँ भी उसने पुलिस से शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी।

इन सब के बीच पीड़िता एक बार फिर दिल्ली आई और ज्योति नगर थाने में जाकर इरशाद के कारनामों की पोल खोल दी। पुलिस वाले उसके बयान और शरीर पर चोट के निशान देखकर दंग रह गए हैं। मेडिकल जाँच में सामने आया है कि महिला के शरीर पर 28 जगह जख्म हैं और मारपीट से उसकी हड्डी भी टूटी हुई है। पीड़िता के दोनों पैरों में भी काफी सूजन है। फिलहाल पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

बताया जा रहा है, पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जाँच के बाद इरशाद अली के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 323, 341, 342, 354D, 376, 377, 493, 495 और 506 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही उसके कुछ अन्य आपराधिक मामले भी सामने आए हैं।

जिसे ओवैसी कह रहे 8 साल का बच्चा, उसे बिहार पुलिस ने बताया 13 का: मस्जिद से महावीरी जुलूस पर हुआ था हमला, ईंट-पत्थर चलाने वालों में महिलाएँ भी

बिहार के सीवान में महावीरी जुलूस पर मस्जिद से हमला और पत्थरबाजी के बाद से ही तनाव बना हुआ है। इस मामले में एक बच्चे को भी गिरफ्तार किया गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जैसों का कहना है कि उसकी उम्र 8 साल है, जबकि पुलिस उसकी उम्र 13 साल बता रही है। पुलिस का कहना है कि उसके पास विज़ुअल्स हैं, जिसमें वो बच्चा पत्थरबाजी करते हुए दिख रहा है। हालाँकि, विरोध करने वाले इसे ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ बताते हुए इसकी निंदा कर रहे हैं।

इस घटना के जो वीडियोज सामने आए हैं, उनमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि मस्जिद की छत से पत्थरबाजी हो रही है। साथ ही आसपास के घरों की महिलाओं को भी पत्थर चलाते हुए देखा जा सकता है। एक इंस्पेक्टर और दो SI समेत 6 पुलिसकर्मी इस हमले में घायल हुए। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि कुछ कहासुनी के बाद ये मामला शुरू हुआ। पुलिस को घटना के बाद इलाके में कैंप करना पड़ा। अब बिहार पुलिस पर इस्लामी गिरोह और मीडिया का लिबरल गैंग सवाल उठा रहा है।

पुलिस के विरोध में क्या कह रहा है इस्लामी गिरोह

इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा, जब हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटना पर बयान दिया। उन्होंने ‘8 साल’ के बच्चे के पुलिस की गिरफ्त में होने का दावा करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा कि वो मुस्लिमों को सम्मान देंगे या नहीं? उन्होंने कहा कि पुलिस मीडिया को झूठ कह रही है कि लड़के की उम्र 13 साल है। उन्होंने बच्चे के जन्म प्रमाण-पत्र पर उसकी उम्र 8 साल होने का दावा किया।

ओवैसी ने नीतीश कुमार और उनकी सहयोगी पार्टी राजद पर सेक्युलरिज्म का नाटक करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समझना चाहिए कि उस ‘8 साल’ के लड़के की माँ पर क्या गुजर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसी और की होती तो यही लोग आसमान सिर पर उठा लिए रहते। उन्होंने बच्चे के घर वाले को मुआवजा देने की माँग करते हुए कहा कि पुलिस दंगाइयों को पकड़ने की बजाए मुस्लिमों को निशाना बना रही है।

सोशल मीडिया पर भी बच्चे के समर्थन में ट्रेंड चलाया गया। दावा किया गया कि उसे जेल में रखा गया है। परिवार ने आरोप लगा दिया कि पुलिस उसे छोड़ने के लिए पैसे माँग रही है। परिवार वाले ये मान रहे हैं कि उस दिन वो नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद गया था। बच्चे की अम्मी का कहना है कि पुलिस पकड़ कर ले जाते समय बोली थी कि बस लोगों को चिह्नित कराने के लिए ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो बच्चा है और कोर्ट में रो रहा था।

क्या कह रही है बिहार पुलिस

बिहार पुलिस का कहना है कि बच्चे की उम्र 13 साल है और उसे 8 साल का बताया जाने वाला दावा गलत है। साथ ही सीवान के बड़हरिया थाना क्षेत्र की पुलिस का ये भी कहना है कि उसे जेल में नहीं रखा गया है, बल्कि बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। थाना प्रभारी प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि बच्चे की गलत तस्वीर वायरल की जा रही है और पूछताछ में उसने खुद अपनी उम्र 13 साल होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि उसके पत्थरबाजी में शामिल होने के साक्ष्य पुलिस के पास मौजूद हैं।

उन्होंने रिश्वत माँगे जाने के आरोपों को भी नकार दिया। हालाँकि, पुलिस ये भी कह रही है कि आगे की बातें जाँच के दौरान सामने आएँगी। वहीं SP शैलेश कुमार सिन्हा ने बताया कि 13 साल के लड़के को हथकड़ी भी नहीं लगाई गई थी। न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसे ‘बाल सुधार गृह’ भेज दिया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया में वायरल हो रही बच्चे की तस्वीर को पुरानी करार देते हुए कहा कि ये भ्रामक है। पुलिस का कहना है कि उनके पास विज़ुअल्स हैं, जिनसे पता चलता है कि वो भी घटना में शामिल था।

वहीं बड़हरिया थाना की तरफ से ऑपइंडिया को बताया गया कि बिहार में गाँव में आंगनबाड़ी से लेकर प्रखंड स्तर तक पर जन्म प्रमाण पत्र बनते हैं, ऐसे में कोई उसे 5 साल का बताते हुए दस्तावेज लेकर आ जाए तो इसमें पुलिस कुछ नहीं कर सकती है। थानाध्यक्ष ने कहा कि बच्चे के साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई है और न ही कोई बल-प्रयोग किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि बच्चे ने खुद पूछताछ में अपनी उम्र 13 साल होने की बात कबूली।

थाना में स्थित एक अधिकारी ने नाम न छपने की शर्त पर ये भी बताया कि पुलिस अपनी अभिरक्षा में किसी को भी न्यायालय लेकर जाती है, ऐसे में ये आरोप गलत है कि उसे हथकड़ी पहनाया गया था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो न्यायालय ज़रूर पुलिस को फटकार लगाता। उन्होंने बताया बच्चे ने स्वीकार किया है कि उसे किसी ने पत्थर चलाने के लिए कहा था, लेकिन नाम नहीं बताया। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं की तरफ से जो अंत में पथराव हुआ, वो प्रतिक्रिया थी।

सीवान में सांप्रदायिक घटना: FIR में क्या लिखा है

सारण नगर प्रमंडल स्थित सीवान में कनीय अभियंता के पद पर काम कर रहे प्रेमचंद की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में 35 अज्ञात और 100 नामजद लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। इसमें दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं। मूल रूप से लखीसराय के रहने वाले प्रेमचंद को महावीरी झंडा अखाड़ा जुलूस के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंडाधिकारी नियुक्त किया गया था। इसीलिए, गुरुवार (8 सितंबर, 2022) को वो जुलूस के साथ ही चल रहे थे।

उनके साथ-साथ गश्ती दल में पुलिस के अधिकारी और जवान भी मौजूद थे। जुलूस को पुरानी बाजार से होकर हरदिया तक जाना था। इसी रास्ते में एक मस्जिद भी पड़ती है। उन्होंने FIR में लिखा है कि शाम के 4:30-5 बजे के आसपास अजान का समय हो जाने के कारण जुलूस को बड़हरिया स्थित पुरानी बाजार में ही रोक कर रखा गया था। अजान खत्म होने के बाद जुलूस धीरे-धीरे मुख्य सड़क से मस्जिद वाली गली में प्रवेश कर आगे बढ़ी।

FIR कॉपी में आगे लिखा है, “मस्जिद के पास दंडाधिकारी के रूप में बड़हरिया के SDPO मौजूद थे। जुलूस शांतिपूर्वक आगे बढ़ रही थी। जुलूस में एक ट्रैक्टर और ट्रॉली में महावीर जी की मूर्ति रखी हुई थी। जब गाड़ी आगे बढ़ गई और लाठी-डंडे से लैश लोग मस्जिद के पास पहुँचे, वहाँ पहले से घात लगाए असामाजिक तत्व के कुछ उपद्रवी मुस्लिमों ने हमला कर दिया। वो छत से ईंट-पत्थर चला रहे थे। असंवैधानिक और सांप्रदायिक नारा लगा रहे थे।”

FIR में ये भी लिखा है कि इस दौरान मुस्लिमों ने धर्म के खिलाफ नारे भी लगाए। FIR की मानें तो पुलिस बार-बार उन्हें समझाती रही कि वो उन्माद पैदा न करें और शांति से रहें, लेकिन इसके बावजूद जुलूस में शामिल लोगों और पुलिस-प्रशासन को निशाना बना कर ईंट-पत्थर चलाए जाते रहे। उन्होंने एक षड्यंत्र के तहत सरकारी कार्य में बाधा डाली। कई थानों की पुलिस के वहाँ पहुँचने के बावजूद हमला नहीं रुका। उन्होंने हिन्दू धर्म के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन के विरोध में भी नारेबाजी शुरू कर दी।

FIR में लिखा है कि इसके बाद दुकानों में तोड़फोड़ के साथ ही आगजनी भी शुरू कर दी गई। सांप्रदायिक दंगा की स्थिति बन गई थी। जुलूस पर हुए हमले में न सिर्फ आम लोगों, बल्कि कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। FIR में 25 मुस्लिम उपद्रवियों के नाम हैं, जिनमें बच्चे की उम्र 13 साल और कासिम मियाँ की उम्र 70 साल बताई गई है। पुलिस का कहना है कि उसने बल प्रयोग किया, जिसके बाद उपद्रवी वहाँ से भागे। हालाँकि, हमने जब FIR दर्ज करवाने वाले प्रेमचंद से बात की तो उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में पुलिस ही कुछ बताएगी, वो 1 दिन के लिए ही इस ड्यूटी पर थे।

मीडिया के लिबरल गिरोह का प्रोपेगंडा: उलटा हिन्दुओं को ही बता रहे हिंसक

FIR में दंडाधिकारी ने स्पष्ट लिखा है कि महावीरी अखाड़ा जुलूस पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा था और शाम की अजान के कारण मस्जिद से दूर रोक भी दिया गया था और अजान खत्म होने के इंतजार किया गया, इसके बावजूद मीर फैसल और अशरफ हुसैन जैसे लोग प्रोपेगंडा फैलाने में लगे हुए हैं। हमेशा की तरह पत्थरबाजों के परिजनों और घर की महिलाओं से बात कर के ‘ह्यूमन एंगल’ पेश किया जा रहा है।

FIR में स्पष्ट लिखा है कि वहाँ लगातार भड़काऊ नारेबाजी हो रही थी और हिन्दू धर्म के खिलाफ उकसाऊ नारे लगाए जा रहे थे। जबकि पुलिस ने हमें बताया कि जवाब में हिन्दुओं ने पत्थरबाजी की, जो प्रतिक्रिया भर थी। ऐसे में घटना के कारण और इसकी शुरुआत कैसे हुई, ये छिपाते हुए मीडिया गिरोह एजेंडा चला रहा है। ‘The Wire’ ने भी अपनी रिपोर्ट में ऐसे ही दावे किए। ‘मकदूत’ नाम का मीडिया हैंडल भी प्रोपेगंडा चला रहा है।

खेत में पटक कर जनजातीय समाज की विधवा से बलात्कार, डंडे से पीटा, गाली-गलौच भी: कॉन्ग्रेस नेता है आरोपित सुल्तान अंसारी, झारखंड की घटना

झारखंड में अराजकता और अपराध चरम पर है। यहाँ आए दिन मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं के साथ हिंसा, बलात्कार और हत्या जैसी घटनाएँ सामने आ रहीं हैं। ऐसा ही एक मामला लोहरदगा जिले से सामने आया है, जहाँ एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा जनजातीय विधवा महिला के साथ मारपीट कर बलात्कार किया गया है। आरोपित सुल्तान अंसारी कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी का जिला अध्यक्ष बताया जा रहा है।

यह घटना झारखंड के लोहरदगा जिले के कुडू थाने की है, जहाँ एक जनजातीय विधवा महिला ने सुल्तान अंसारी पर मारपीट करने और फिर बलात्कार करने का आरोप लगाया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला ने झारखंड पुलिस पर मुकदमा दर्ज न करने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि आरोपित सुल्तान अंसारी उससे कह रहा था कि उसने थाना खरीद लिया है, जिस कारण मुकदमा दर्ज नहीं हो रहा था। इसके बाद, वह कोर्ट गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है।

महिला ने इस मामले में अपने साथ हुई घटना को लेकर बताया है पाँच साल पहले उसके पति की मौत हो चुकी है। उसका दस साल का एक बेटा है। वह मेहनत करके अपने पुत्र का लालन-पालन कर रही है। पीड़िता ने बताया कि जब वह अपने खेत में काम कर रही थी, तब उडुमुडू गाँव का रहने वाला सुल्तान अंसारी वहाँ पहुँचा। वह अपने ट्रैक्टर में बालू भरा हुआ था। बकौल पीड़िता, सुल्तान ने कहा जिस खेत में तुम काम कर रही हो, इसी खेत से होकर मैं बालू की ढुलाई करता हूँ।

इसके बाद, जब महिला ने ट्रैक्टर खेत से निकालने का विरोध किया तो आरोपित ने हाथ पकड़ लिया। आरोप है कि इसके बाद हाथ खींचते हुए जाति सूचक गाली दी और फिर उठाकर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद डंडे से पिटाई करने लगा और कहा – ‘इसी खेत में तुमको दफन कर देंगे।’ आरोप है कि इसके बाद उसने विधवा महिला के साथ बलात्कार किया।

इस मामले में झारखंड भाजपा के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने ट्वीट करते हुए कहा है, “लोहरदगा के कुडू में एक जनजातीय विधवा महिला के साथ सुल्तान अंसारी द्वारा बलात्कार की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। झारखंड में लगातार एक समुदाय विशेष के द्वारा जनजातियों और दलितों पर अत्याचार किया जा रहा है। लेकिन, कॉन्ग्रेस की गोद में बैठी हेमंत सरकार वोटबैंक के लिए चुप्पी साधे है।”

इसके बाद उन्होंने अगले ट्वीट में आरोपित को ‘कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी’ का जिला अध्यक्ष बताते हुए ट्वीट किया, “खबर यह भी है कि जनजातीय महिला के साथ बलात्कार करने वाला सुल्तान अंसारी कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी का लोहरदगा जिला अध्यक्ष है। अब कॉन्ग्रेस पहले बलात्कारियों को संरक्षण देना बंद करे उसके बाद मुँह खोले। कॉन्ग्रेस के डीएनए में ही देश तोड़ना और देशवासियों पर अत्याचार करना है।”

जनजातीय महिला के साथ हुई मारपीट और दुष्कर्म के मामले में कुडू थाना प्रभारी अभिनव कुमार ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जाँच की जा रही है। इस संबंध में उचित कार्रवाई की जाएगी। आरोपित सुल्तान अंसारी अभी फरार है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। फरार होने के कारण आरोपित सुल्तान अंसारी का पक्ष सामने नहीं आया है। उससे पूछताछ के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

‘रमजान में सेक्स माँगता है मेरा शौहर, ये इस्लाम के खिलाफ’: तलाक के लिए महिला पहुँची शरिया कोर्ट, कहा – उसे संतुष्ट करना मेरे बस की नहीं

नाइजीरिया (Nigeria) के काडुना में एक महिला ने अपने शौहर की हरकतों से परेशान होकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ‘PM NEWS Nigeria’ के मुताबिक, महिला का नाम जैनब यूनुसा (Zainab Yunusa) है। उसने अपने शौहर के खिलाफ 7 सितंबर, 2022 को काडुना के मगाजिन गारी (Magajin Gari, Kaduna) में मौजूद एक शरिया कोर्ट का रुख किया, जहाँ उसने अदालत से अपने शौहर से तलाक की माँग की है।

याचिकाकर्ता महिला के शौहर का नाम अल्हाजी अली गरबा (Alhaji Ali Garba) है। महिला का कहना है कि उसका शौहर उसके साथ हद से ज्‍यादा सेक्‍स करता है। इस कारण उसको तलाक चाहिए। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि गरबा पीरियड्स और रमजान के दौरान भी सेक्स की डिमांड करता है। यूनुसा ने कहा कि वो दोनों सिर्फ एक साल तक ही साथ रहे हैं। उसकी हरकतों से तंग आकर वह अपने अम्मी-अब्बू के घर चली गई थी।

महिला ने अदालत में बताया कि जब वे दोनों साथ रहते थे, उस वक्त गरबा अक्सर दोपहर में घर आता था और पीरियड्स के दौरान भी उसके साथ सेक्स करने की डिमांड करता था, जो इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है। महिला का दावा है कि वह रमजान के वक्त भी सेक्स करने के लिए कहता था और जब यूनुसा उसे मना कर देती थी, तो वह गुस्सा हो जाता था।

यूनुसा ने अदालत को आगे बताया, “वह मुझ पर शक करता था। इसलिए, मुझे अपने रिश्तेदारों सहित किसी से भी नहीं मिलने देता था – फिर चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला। मैं उसके सेक्स की लत से बहुत परेशान हो गई थी। उसे संतुष्ट करना मेरे बस की बात नहीं थी इसलिए मैं अपने मायके चली आती थी।”

महिला के मुताबिक, इसीलिए उसने अदालत में अल्हाजी अली गरबा से तलाक की माँग करते हुए अर्जी दी है, क्योंकि वह अल्लाह के खिलाफ जाकर हद से ज्यादा सेक्स करने वाले अपने शौहर के आगे नहीं झुक सकती है।