असम पुलिस ने बीते कुछ दिनों में मदरसों से चल रहे कई जिहादी आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इसी बीच खबर है कि पुलिस ने राज्य में अवैध रूप से इस्लाम का प्रचार करने के आरोप में 17 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। बांग्लादेशी नागरिकों पर पर्यटक वीजा मानदंडों का उल्लंघन कर इस्लाम का प्रचार करने का आरोप है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम के बिश्वनाथ जिले के बाघमारी से शनिवार (17 सितंबर 2022) को 17 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 11 को स्थानीय अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि बांग्लादेशी इस्लामिक प्रचारक सैयद अशरफुल आलम (Syed Ashraful Alam) समेत बाकी 6 को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इन सभी पर बिश्वनाथ जिले में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बाघमारी के एक सुदूर इलाके में शिविर लगाकर इस्लाम का प्रचार करने का आरोप है।
इनके अलावा इस्लाम का प्रचार करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को पनाह देने के आरोप में बाघमारी के दो स्थानीय व्यक्तियों जेहीरुल हक और समसुल अली को भी गिरफ्तार किया गया है। इस समूह का नेतृत्व इस्लामिक प्रचारक (मजहबी उलेमा) सैयद अशरफुल आलम ने किया था, जबकि अन्य उसके शागीर्द हैं।
गिरफ्तार किए गए लोगों में मसूद राणा, सबोज सरकार, सुल्तान ममूद, गुलाम आजम शेख, अजिबुर शेख, सुहाग चौधरी, अनवर हुसैन, मनन, अब्दुल हकीम, मकबूल हुसैन, शाह आलम सरकार, आलम तालुकदार जहाँगीर, बादशाह सरकार, फारूक मिकर, हाफिजुर रहमान और गुलाम रबानी शामिल हैं।
इनमें सैयद अशरफुल आलम, अनवर हुसैन, सुहाग चौधरी, अजिबुर शेख और मसूद राणा को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि बाकी 11 को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। वहीं उन्हें पनाह देने वाले जेहिरुल हक और समसुल अली को भी दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
असम पुलिस के स्पेशल सेल के अधिकारी बिश्वनाथ पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। इन लोगों ने पर्यटक वीजा के जरिए भारत में प्रवेश किया था। असम में प्रवेश करने से पहले इन्होंने दिल्ली, अजमेर शरीफ के अलावा विभिन्न स्थानों का दौरा किया था।
ये समूह असम के कूचबिहार से एक बस में चढ़ा था और 13 सितंबर को बिश्वनाथ पहुँचा था। अशरफुल आलम ने उसके बाद बाघमरी में इस्लाम का प्रचार करना शुरू किया और गिरफ्तारी से पहले ही लगभग 500 लोगों को अपने शागीर्द बना लिया था।
बिश्वनाथ जिले के पुलिस अधीक्षक नवीन सिंह ने बताया कि सुदूर इलाके में इस समूह की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। सिंह ने कहा, “हमें एक सूचना मिली थी कि ये 17 लोग इस्लाम का प्रचार कर रहे हैं, जिसकी अनुमति विदेशियों को पर्यटक वीजा पर नहीं है। हमने इस सूचना की पुष्टि करने के बाद इन सभी को गिरफ्तार कर लिया है।”
जाँच में पता चला है कि सैयद अशरफुल आलम (Syed Ashraful Alam ) पिछले महीने भी बांग्लादेश सीमा से सटे दक्षिण सलमारा (South Salmara) जिले में इस्लाम का प्रचार करते हुए पाया गया था और 28 अगस्त को उसे पुलिस ने असम छोड़ने के लिए कहा था। इसके बाद इस समूह ने असम छोड़ दिया था और भारत में अन्य स्थानों का दौरा किया, लेकिन कुछ दिनों बाद वह फिर यहाँ लौटकर आया और 13 सितंबर को बाघमरी पहुँचा।
बता दें कि जहाँ यह समूह रह रहा था, वह मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। हालाँकि, अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि क्या इस्लामिक प्रचारक समूह गैर-मुस्लिमों के धर्मांतरण की कोशिश कर रहा था या फिर मुस्लिमों को अपने मजहब के बारे बता रहा था।
देश की राजधानी दिल्ली में एक ‘लव जिहाद’ पीड़िता ने मीडिया के सामने आ कर अपनी आपबीती सुनाई है। पीड़िता के मुताबिक, इरशाद अली ने छद्म हिन्दू नाम गुड्डू चौधरी रख कर उससे मुलाकात की थी। पीड़िता ने बताया कि इरशाद उसे साथ साल 2015 से प्रताड़ित कर रहा है। बताया जा रहा है कि लड़की के पिता को इसी दुःख में हार्ट अटैक भी आ चुका है। फ़िलहाल इरशाद 8 सितम्बर, 2022 को गिरफ्तार हो चुका है।
इस घटना की रिपोर्टिंग करने वाली ‘हिंदी खबर’ की पत्रकार आँचल यादव ने हमें बताया कि मामला दिल्ली के कड़कड़ूमा क्षेत्र का है। पीड़िता के हवाले से आँचल ने ये भी बताया कि इरशाद जिस डिग्री पर वकालत करता है, वो फर्जी है और उसका नोटिस भी आया हुआ है। बताया जा रहा है कि इस नोटिस के जवाब में इरशाद ने अपने कागज़ात कहीं खो जाने का बहाना बनाया है। बताया जा रहा है कि लड़की उसी कोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस करने गई थी, जहाँ उसकी इरशाद से मुलाक़ात हुई थी।
धीरे-धीरे इरशाद ने उसे अपने झाँसे में लिया और 3 बच्चों का अब्बा होने के बाद भी खुद को कुँवारा बताया। पीड़िता ने पत्रकार से बात करते हुए ये भी दावा किया है कि इरशाद उसके अलावा पहले भी 3-4 हिन्दू लड़कियों को इसी तरह से अपना शिकार बना चुका है और उस पर दिल्ली में कहीं और रेप केस भी चल रहा है।
आँचल के अनुसार, पीड़िता ने उसे बताया कि वो इरशाद के झाँसे में आ गई और शादी बाद उसे न सिर्फ उसके मुस्लिम होने बल्कि पहले से शादीशुदा होने का पता चला। लड़की के मुताबिक, जब उसे घर ले जाया गया था तब इरशाद अपनी पहली बीवी और बच्चों को मायके छोड़ आया था। हालाँकि, पीड़िता का आरोप है कि पहली बार इरशाद ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और वीडियो बना लिया, जिसका डर दिखा कर उसने शादी भी की और लगातार यौन शोषण भी किया।
आँचल यादव ने पीड़िता से बातचीत का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। इस वीडियो में पीड़िता बता रही है कि इरशाद उस से नमाज़ पढ़वाता था और उसकी आपत्तिजनक वीडियो बनवा कर सबको दिखाता था। लड़की ने आगे बताया है कि उसे इरशाद के घर में गाय और भैंस का मांस जबरन खाने पर मजबूर किया जाता था और इनकार करने पर बुरी तरह से पिटाई कर के जबरन मुँह में गोश्त ठूँस दिया जाता था। लड़की ने ये भी बताया कि उसको बंदूक की बट से मार कर जबरन कलमा पढ़ाया गया और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया गया।
रो-रोकर हिंदू लड़की ने बताया मुंह में जबरन गाय का मीट डालता था,पति निकला मुल्ला.
वीडियो में लड़की ने आगे बताया कि उसे ऐसी प्रताड़ना मिली है जिसके बारे में वो बता भी नहीं सकती। लड़की ने रोते हुए कहा कि उसे जबरन मांस खिलाने की कोशिश के दौरान उलटी आ जाती थी और तब वो मदद के लिए चीखती थी, पर कोई भी उसका साथ नहीं देता था। पीड़िता ने यह भी बताया कि टॉर्चर के दौरान दरवाजा बंद कर दिया जाता था। लड़की ने बताया कि आरोपित इरशाद ने उसका प्राकृतिक और अप्राकृतिक, दोनों तरीके से यौन शोषण किया।
लड़की ने आगे यह भी बताया कि इरशाद पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली बीवी से उसको बच्चे भी हैं। पीड़िता के अनुसार, जब उसका टॉर्चर होता था तब इरशाद की पहली बीवी बचाने के बजाए उसे ठोकर मार कर ये कहते हुए चली जाती थी कि तेरे कर्म ही इसी लायक हैं। लड़की के मुताबिक, आरोपित इरशाद वकील है और उसका भाई भी वकील है। लड़की का दावा है कि इरशाद के उसका पूरा परिवार न सिर्फ उसके टॉर्चर में बल्कि शादी से पहली रची गई साजिश में भी शामिल रहा है।
पीड़िता की सहायता कर रहीं आस्था माँ ने ऑपइंडिया को बताया कि 8 सितम्बर, 2022 को इरशाद जेल जा चुका है लेकिन लड़की उसके जमानत से छूट कर आने के बाद के हालात को याद कर के डरी हुई है।
इंग्लैंड के लीसेस्टर शहर में रविवार (18 सितंबर 2022) को हिंदुओं के समूह पर कट्टरपंथियों द्वारा हमला किया गया। इस दौरान ‘अल्लाहु-अकबर’ नारा लगाते हुए मंदिर पर भी अटैक हुआ और उसके ऊपर लगे भगवा ध्वज को भी तोड़कर नीचे गिरा दिया गया।
घटना के विरोध में हिंदुओं ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। कट्टरपंथी भीड़ इतनी बेकाबू थी कि पुलिस ने जब उपद्रवियों को रोकने की कोशिश की, तो उन पर भी काँच की बोतलें फेंकी गई। लाठी- डंडों से लैस भीड़ ने संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुँचाया।
वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक धार्मिक स्थल के बाहर भगवा ध्वज फहराया गया है, जो हिंदुओं का मंदिर शिवालय है। कट्टरपंथी लोगों ने काले रंग का मास्क पहना हुआ था। उनका पूरा चेहरा ढका हुआ था। उन्होंने हुड लगा रखा था। इन सभी को शिवालय में घुसते और मंदिर के बाहर लगे झंडों को तोड़ते हुए देखा गया।
Shocking how Islamist Pakistani goons remove the pious Hindu religious flag from a temple in front of the Police in Leicester, UK. Why is the Govt in UK unable to control religious hatred and arrest Islamist goons responsible for these cowardly attacks?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हिंदुओं पर हमला करने के लिए दो झूठ का सहारा लिया। पहला ये कि उन्होंने (हिंदुओं) मस्जिद पर हमला किया और दूसरा हिदुओं द्वारा मुस्लिम लड़की का अपहरण किया गया।
स्थानीय लोगों ने टीओआई को बताया कि शनिवार (17 सितंबर 2022) को यह हिंसा तब शुरू हुई, जब बर्मिंघम में मुस्लिमों ने लीसेस्टर में ‘शांतिपूर्ण विरोध’ का आह्वान किया। इसके लिए उन्होंने एक पोस्टर बनाया, जिसमें उन्होंने कुछ मुद्दों का उल्लेख किया। पोस्टर में लिखा था, “हम लेस्टा में विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। आरएसएस हिंदुत्व चरमपंथियों को हमारी मुस्लिम, सिख महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के साथ खिलवाड़ नहीं करने देंगे।”
दरअसल, इन कट्टरपंथी मुस्लिमों ने एक फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया था, जिसमें दावा किया गया था कि तीन हिंदू युवकों ने एक मुस्लिम लड़की के अपहरण की कोशिश और उन्होंने मस्जिद पर हमला किया। जबकि, लीसेस्टरशायर पुलिस (Leicestershire Police) के एक प्रवक्ता ने मस्जिद पर हमला होने की खबरें को फर्जी बताया है।
मालूम हो कि बेलग्रेव रोड पर हिंदुओं ने भी एक मार्च निकला था। जब दोनों पक्ष आमने सामने आए, तो यह विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गया। एक तरफ जय श्री राम और वंदे मातरम और दूसरी तरफ ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगा। मंदिर से भगवा झंडे को तोड़ा गया। एक वीडियो में कार को तोड़ते और उसे पलटाते हुए भी दिखाया गया है।
एक व्यक्ति बेवजह सब्जी वाले को पीटते हुए देखा जा सकता है। पुलिस ने रोड पर बैरिकेडिंग लगा रखी थी। वो भीड़ को पीछे ढकेलने की कोशिश कर रहे थे, जबकि भीड़ काँच की बोतलें और कई अन्य चीजें उन पर फेंक रही थी। स्थानीय सांसद क्लाउडिया वेब्बे ने कहा कि 28 अगस्त को एशिया कप मैच से पहले से ही तनाव बढ़ गया था, जिससे हिंसा की पहली बार शुरुआत हुई।
मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने की माँग
लीसेस्टरशायर ब्रह्म समाज शिवालय (Leicestershire Brahma Samaj Shivalaya) के ट्रस्टियों की अध्यक्ष मधु शास्त्री ने लीसेस्टरशायर पुलिस को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि झंडा तोड़ने वाले को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि तनाव कम होने तक मंदिर को बंद करना पड़ सकता है। शास्त्री ने पुलिस से मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने की भी माँग की। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार, इस घटना में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
भारत-पाकिस्तान मैच के बाद भड़की थी हिंसा
गौरतलब है कि एशिया कप 2022 में हुए भारत-पाकिस्तान मैच के बाद पूर्वी इंग्लैंड के लीसेस्टर शहर में हिंसा भड़क गई थी। 28 अगस्त को भारत-पाक मैच के बाद यहाँ से हिंदुओं पर हिंसक हमले की खबर सामने आई थी। इसके विरोध में कार्रवाई की माँग लेकर प्रदर्शन कर रहे हिंदुओं के समूह पर कट्टरपंथियों ने हमला कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने भगवा ध्वज का भी अपमान कर उसे नीचे गिरा दिया था। बताया जा रहा है कि सैकड़ों कट्टरपंथियों ने हिंदुओं और उनके आसपास के घरों पर हमला किया था। मामले को शांत करवाने के लिए पुलिस ने भी भारी बल प्रयोग किया।
इससे पहले भी ब्रिटेन के लिसेस्टर शहर से हिंदुओं पर हमले की कई वीडियोज सामने आए थे। वीडियो में देखा जा सकता था कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ इकट्ठा करके हिंदुओं के घरों को निशाना बना रहे थे। उनके हाथों में हथियार और मुँह पर हिंदुओं के लिए गालियाँ थीं। सड़कों से पुलिस नदारद दिखाई दे रही थी। कोई उन्हें नहीं रोक रहा था। उस दौरान सोशल मीडिया पर वामपंथी हिंदुओं को ही इन हमलों का दोषी बताया गया था।
तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में एक महिला वकील पर कोर्ट परिसर में हमला होने की खबर सामने आई है। इस हमले में महिला वकील के साथ उनकी 20 साल की बेटी भी घायल हो गई है। आरोपित का नाम अब्दुल रहमान है जो खुद भी पेशे से वकील है।
आरोप है कि रहमान लम्बे समय से महिला वकील जमीला बानू की बेटी के पीछे पड़ा था। लेकिन जब उसकी शिकायत पुलिस में हुई और उसे गिरफ्तार किया गया तो वह भड़क गया। जेल से छूटने के बाद उसने रविवार (18 सितम्बर 2022) जमीला पर हमला कर दिया। हमले के बाद रहमान फरार है। अब पुलिस केस दर्ज करके उसे तलाश रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला वकील के साथ घायल हुई उनकी बेटी का नाम अमीर निशा है। अमीर निशा की उम्र 20 साल है। सालेम शहर में सीनियर एडवोकेट के तौर पर काम करने वाला अब्दुल रहमान काफी समय से अमीर निशा का पीछा कर रहा था। अमीर निशा सालेम शहर के ही लॉ कॉलेज में पढ़ाई करती थी।
अब्दुल रहमान की शिकायत अमीर निशा ने 22 अगस्त 2022 को सालेम पुलिस में की थी जिसके बाद वह गिरफ्तार हुआ था। बाद में रहमान को कोर्ट ने हर 16 दिन में पुलिस थाने में हाजिरी लगाने की शर्त पर जमानत दी।। लेकिन उसने सुधरने की बजाय माँ-बेटी पर हमला करने का मन बनाया।
वह रविवार को दोपहर में लगभग 2 बज कर 20 मिनट पर हँसिया (धारदार हथियार) लेकर तिरुप्पुर कोर्ट पहुँचा। वहाँ पर अमीर निशा अपनी माँ एडवोकेट जमीला के साथ कुछ मामलों की स्टडी कर रहीं थीं। इस दौरान आरोपित अब्दुल रहमान ने दोनों पर हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि रहमान ने धारदार हथियार का वार माँ-बेटी के गले, चेहरे और हाथों पर किया। हमले के बाद वो फरार हो गया। पीड़िता माँ और बेटी को अस्पताल पहुँचाया गया जहाँ दोनों का इलाज चल रहा है।
पीड़िता जमीला बानू कुमारन सलाई महिला कोर्ट में सरकारी वकील हैं। पुलिस ने रहमान के खिलाफ IPC की धारा 307, 294 (B) और 447 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस आरोपित अब्दुल रहमान की तलाश कर रही है।
पंजाब के चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (Chandigarh University) के हॉस्टल में रहनी वाली छात्राओं के नहाने के वीडियोज वायरल होने की खबर के मामले में पुलिस ने आरोपित छात्रा सहित उसके 2 दोस्तों को हिरासत में लिया है। आरोपित लड़कों के नाम सन्नी मेहता और रंकज वर्मा हैं।
सन्नी मेहता का नंबर आरोपित लड़की के मोबाईल में मिला जिसे ट्रेस करने पर पुलिस को उसकी लोकेशन शिमला में मिली। अब वो पंजाब पुलिस की हिरासत में है। इसी तरह 31 साल का रंकज वर्मा भी देर रात पकड़ा जा चुका है। उसकी तस्वीर लड़की ने ज्यादा सवाल पूछे जाने पर अपने फोन पर दिखाई थी, अब यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल है।
इस बीच दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कुछ चैट की फोटो सामने आई जिसमें आरोपित लड़की का ये BF रंकज वर्मा आरोपित लड़की से स्क्रीनशॉट और कॉल हिस्ट्री डिलीट करने को बोल रहा है। ये सब देखने के बाद पुलिस इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है कि आरोपितों द्वारा ये हरकत कहीं पैसे उगाही के लिए तो नहीं की गई थी।
तस्वीर साभार: दैनिक भास्कर
आत्महत्या की बात ‘निराधार’
बता दें कि इससे पहले मीडिया में लड़कियों के MMS वायरल होने के बाद आत्महत्या की बातें सामने आई थी। हालाँकि पुलिस के मुताबिक ये निराधार बातें हैं। महिला संबंधी मामलों की ADGP गुरप्रीत कौर देव के अनुसार लड़की का मोबाईल और लैपटॉप जब्त कर के उसको जाँच के लिए फॉरेंसिक टीम के पास भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया, “फ़िलहाल अभी तक हमें अन्य लड़कियों के बाथरूम में वीडियो बनाने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।”
पुलिस का कहना है कि अब तक हुई जाँच से पता चला है कि आरोपित लड़की ने अपना ही वीडियो बना कर उसे अपने दोस्त के पास भेजा है। हालाँकि हॉस्टल वार्डन की लड़की के साथ हो रही नोकझोंक के वायरल वीडियो पर पुलिस ने कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर आर एस बावा ने भी यूनिवर्सिटी में 60 आपत्तिजनक MMS बनने और कुछ लड़कियों की आत्महत्या के प्रयास जैसी खबरों को सरासर अफवाह बताया।
In the preliminary investigation, it came to light that the accused girl made some of her own videos and shared them with her boyfriend: Prof. R S BAWA, V-C Chandigarh University.@Gurpreet_Chhina and @anchoramitaw with more on the scandal. pic.twitter.com/3vY7caLv6I
इस मामले में पुलिस ने IPC की धारा 354- C के साथ IT एक्ट की धारा 66 (E) के तहत सदर खरार थाने में दर्ज किया है। इस केस में आरोपित लड़की के साथ उसके शिमला में रहने वाले दोस्त को भी नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार इस मामले की जाँच करवाई जा रही है और आगे निकले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
MMS कांड
गौरतलब है कि शनिवार (17 सितंबर, 2022) दोपहर कुछ लड़कियों ने हॉस्टल वार्डन राजविंदर कौर से शिकायत करते हुए कहा कि एक लड़की वॉशरूम में 6 लड़कियों का वीडियो बना रही थी। इसके बाद वार्डन राजविंदर कौर ने लड़की से पूछताछ की और फिर गर्ल्स हॉस्टल मैनेजर रीतू को इसकी जानकारी दी गई।
हॉस्टल मैनेजर के सामने आरोपित छात्रा ने फोटो या वीडियो बनाने से इनकार कर दिया। हालाँकि, हॉस्टल मैनेजर का कहना है कि जब उसने आरोपित छात्रा के मोबाइल की जाँच की थी तो उसमें से कई फोटो और वीडियो डिलीट किए हुए मिले। इस मामले में पंजाब महिला आयोग और पंजाब के मुख्यमंत्री ने भी पुलिस को कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
ईरान में सिर सही से न ढकने के कारण हुई महसा अमिनी की हत्या के बाद वहाँ महिलाओं में हिजाब को लेकर भारी गुस्सा है। सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियोज सामने आई हैं जिसमें औरतें खुले बाल लेकर अपने हिजाब को जला रही हैं और कुछ अपने बालों को काट कर घटना का विरोध कर रही हैं।
ये सारी वीडियोज इकट्ठा करके ईरान की पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा है, “ईरानी महिला अपने बाल काट कर और हिजाब जलाकर महसा अमिनी की हत्या पर अपना गुस्सा दिखा रही हैं।”
Iranian women show their anger by cutting their hair and burning their hijab to protest against the killing of #Mahsa_Amini by hijab police. From the age of 7 if we don’t cover our hair we won’t be able to go to school or get a job. We are fed up with this gender apartheid regime pic.twitter.com/nqNSYL8dUb
अलीनेजाद बताती हैं कि 7 की उम्र से अगर ईरान में लड़कियाँ अपने बाल को न ढकें तो उन्हें स्कूल नहीं जाने दिया जाता और कोई जॉब नहीं मिलती। ईरान में औरतें इस लैंगिक भेदभाव की व्यवस्था से तंग आ गई हैं।
वीडियो में देख सकते हैं कि औरतें कैंची लेकर अपनी पूरी चोटी काट रही हैं। वहीं कुछ औरतें खुली सड़क पर बाल खोलकर हिजाब को आग लगा रही हैं। सोशल मीडिया पर तमाम लोग इन औरतों का समर्थन कर रहे हैं। हालाँकि, ये सब देख कट्टरपंथी नेता कह रहे हैं कि इस तरह सिर खोल कर जो औरतें आ रही हैं, इसके कारण वो मुश्किल में पड़ सकती हैं, इन्हें जेल में डाला जा सकता है।
हिजाब उतारकर प्रदर्शन
बता दें कि इससे पहले महसा अमिनी के अंतिम संस्कार के दौरान सैंकड़ों औरतों ने हिजाब को उतारकर सड़कों पर ‘मोरल पुलिस’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसमें कई पुरुष भी शामिल थे। विरोध इतना बढ़ गया था कि पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए गोली चला दी थी, आँसू गैस छोड़ दिए थे। इन सबमें कई लोग बहुत घायल हुए थे। बावजूद इसके औरतों ने प्रदर्शन नहीं रोका। वह भीड़ में सड़क पर आईं और विरोध दर्ज कराने के लिए कहती रहीं, “डरना मत, हम सब एक साथ हैं।”
These brave women stormed into the streets on day 2 after #Mahsa_Amini was murdered by hijab police. They chant:
उल्लेखनीय है कि ईरान में कुछ दिन पहले 22 साल की महसा को निर्ममता से पीट पीटकर कोमा में पहुँचाया। कथिततौर पर महसा ने ईरान में रहकर सही से हिजाब नहीं पहना था इसलिए पुलिस ने उन पर हमला किया और उन्हें इतना मारा कि उनका पहले ब्रेन डेड हुआ, वो कोमा में गईं और उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।
पंजाब के मोहाली स्थित चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्राओं के नहाने का वीडियो वायरल होने का मामला बढ़ता जा रहा है। इस मामले में, रविवार (18 सितंबर, 2022) को यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। इस विरोध प्रदर्शन में छात्र-छात्राओं ने साथ आकर वीडियो लीक मामले में यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण माँगते हुए मामले की सच्चाई छिपाने को लेकर कई सवाल पूछे हैं। इस मामले में, पुलिस ने आरोपित छात्रा और उसके बॉयफ्रैंड सन्नी को गिरफ्तार किया है।
दरअसल, यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट बार-बार यह कहता नजर आ रहा है कि आरोपित छात्रा ने सिर्फ अपना वीडियो शूट करके अपने प्रेमी (बॉयफ्रेंड) को भेजा था। इसके अलावा किसी अन्य छात्रा का वीडियो रिकॉर्ड नहीं किया गया है।
यूनिवर्सिटी के इस दावे पर छात्राओं ने कई सवाल खड़े किए हैं। छात्राओं का सबसे बड़ा सवाल यह है कि किया है कि यदि किसी अन्य छात्रा का वीडियो नहीं बना है और कुछ भी नहीं हुआ है तो यूनिवर्सिटी को दो दिन के लिए बंद क्यों किया गया है। बता दें, यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने दो दिन पढ़ाई बंद करने का ऐलान करते हए बकायद 2 दिन नॉन टीचिंग डे घोषित किया है।
इसके अलावा, छात्राएँ सवाल कर रही हैं कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन किया तो उनके खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया गया? छात्रों का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए हैं। यही नहीं, यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने आरोपित छात्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक करने की भी माँग की है।
छात्राओं का आरोप है कि आत्महत्या (सुसाइड अटेम्प्ट) करने की कोशिश के मामले छुपाए जा रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि आत्महत्या की कोशिश करने वाली छात्राएं कौन है, ये सामने आना चाहिए। साथ ही, यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि यूनिवर्सिटी अपनी साख बचाने में जुटी हुई है। इसलिए वह किसी भी प्रकार का सच सामने नहीं आने देना चाहती।
हालाँकि, इन तमाम सवालों के बीच यूनिवर्सिटी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। पुलिस प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी ने उच्च स्तरीय जाँच का भरोसा दिलाया है। लेकिन, यूनिवर्सिटी के छात्र सच जानना चाहते हैं।
राजनीतिक एवं आर्थिक संकट का सामना कर रहे पड़ोसी देश श्रीलंका के लिए भारत सबसे बड़ा मददगार बनकर सामने आया है। हाल ही में सामने आयी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि संकट के समय भारत ने श्रीलंका को सबसे अधिक कर्ज देकर आर्थिक समस्याओं से उबारने का प्रयास किया है।
श्रीलंकाई थिंक टैंक ‘वेराइट रिसर्च’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि साल 2022 में भारत ने श्रीलंका को 37.7 करोड़ डॉलर (3002.82 करोड़ रुपए) का कर्ज दिया है। इस दौरान, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) श्रीलंका को 36 करोड़ डॉलर का कर्ज देने दूसरा बड़ा कर्जदाता रहा है। इतना ही नहीं, भारत ने श्रीलंका को 65,000 टन उर्वरक की खेप भी भेजी थी।
भारत और एडीबी, दोनों ने मिलकर इस साल जनवरी से अप्रैल के बीच श्रीलंका को दिए गए कुल कर्ज में 76 प्रतिशत का योगदान दिया है। साल के पहले चार महीनों में श्रीलंका को विभिन्न सरकारों एवं संस्थानों से कुल 96.8 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया गया था। बता दें कि 2017 और 2021 के बीच पिछले 5 वर्षों में चीन श्रीलंका का शीर्ष ऋणदाता रहा है। चीन ने 9.47 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया था। इसमें से 8.09 मिलियन डॉलर चीन विकास बैंक से बाजार उधार के रूप में।
गौरतलब है, इस साल की शुरुआत से ही श्रीलंका वित्तीय संकट से जूझ रहा था। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते वह जरूरी खानपान एवं ईंधन सामग्री भी नहीं खरीद पा रहा था। ऐसे समय में भारत ने पड़ोसी देश होने के नेता उसे ईंधन खरीदने और आर्थिक तंगी से उबारने के लिए कर्ज दिया था।
ज्ञात हो, श्रीलंका में वस्तुओं की कीमत में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण आंतरिक अशांति पैदा हो गई थी। इसके बाद व्यापक स्तर पर हुए हिंसक प्रदर्शनों के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था। हालाँकि, इसके बाद रानिल विक्रमसिंघे की अगुवाई में मौजूदा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के साथ 2.9 अरब डॉलर का एक ऋण समझौता किया है। इसके बाद से आर्थिक विश्लेषक श्रीलंका की आर्थिक स्थिति में सुधार के कयास लगा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में रहने वाले 13 साल के बच्चे ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे सड़कों, चौराहों या भीड़ वाले इलाकों पर होने वाली आतंकी घटनाएँ, दंगा, अपराध और एक्सीडेंट की जानकारी सीधे कमांड सेंटर या पुलिस के पास पहुँचेगी। इस मॉडल को तैयार करने वाले बच्चे का नाम राजवीर चौहान है। वह कक्षा 8वीं का छात्र है।
राजवीर ने यह मॉडल आर्टिफिशियल इंटिलिजेंट्स के आधार पर बनाया है। इस बेहतरीन इनोवेशन के लिए देश के 50 बच्चों में उज्जैन के राजवीर को भी शामिल किया गया है। साथ ही केन्द्र सरकार राजवीर को सम्मानित भी करेगी। राजवीर अपने माता-पिता के साथ फिलहाल दिल्ली में ही हैं। वह सरकार द्वारा मिलने वाले सम्मान के लिए ही दिल्ली आया हुआ है।
दरअसल, डिजिटल इंडिया के अंतर्गत विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने युवा इनोवेटर्स के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक प्रतियोगिता आयोजित की थी। इस प्रतियोगिता में देशभर के 200 छात्रों का सलेक्शन हुआ था। ट्रेनिंग के बाद 50 बच्चों को उनके आइडिया पर काम करने के लिए मेंटर दिए गए थे।
अपने इस मॉडल को लेकर राजवीर चौहान का कहना है कि उन्होंने अटैक डिटेक्टर मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तहत काम करेगा। इसके लिए शहर के प्रत्येक चौराहे पर लगे कैमरों को सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।
इन कैमरों में जैसे ही आतंकी घटना में गन या कोई अन्य हथियार, खून या एक्सीडेंट या फिर महिला अपराध की घटना के संकेत मिलेंगे, सॉफ्टवेयर तुरंत ही उनकी पहचान कर सिग्नल या अलार्म भेजा देगा। यह अलार्म सीधा कमांड सेंटर या संबंधित पुलिस स्टेशन में बजेगा। जिसके बाद थाने से सुरक्षा बल और अस्पताल से एम्बुलेंस जल्द से जल्द भेजी जा सकेगी। इसको ना सिर्फ चौराहे पर बल्कि भीड़ भरे बाजारों, सड़कों, अस्पताल, कोर्ट, मंदिर, या कहीं भी लगाया जा सकेगा।
राजवीर का कहना है कि उन्होंने दो वर्ष पहले ‘रेड बटन’ के नाम से एक मॉडल बनाया था, जिसमें चौराहे पर होने वाली घटना को लेकर कोई भी व्यक्ति बटन दबाकर पैनिक स्थिति में कंट्रोल रूम को खबर कर सकता था। ऐसे ही मॉडल अभी उज्जैन स्मार्ट सिटी के तहत लगाये जा चुके हैं। हर चौराहे पर रेड बटन (इमरजेंसी बटन) को लगाया गया है। इस मॉडल के लिए राजवीर को 10 हजार का इनाम भी मिला था।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 16वीं रिपोर्ट:
अपनी 15वीं रिपोर्ट में हमने नेपाल सीमा तुलसीपुर-हर्रैया मार्ग से कुछ ही दूरी पर समांतर बने तुलसीपुर-हर्रैया मार्ग पर मौजूद इबादतगाहों को प्रेम नगर तक दिखाया था। तब हमें न सिर्फ सुनसान में बनी मस्जिदें दिखीं थीं, बल्कि सड़कों के किनारे मदरसे और मज़ारें भी दिखाई पड़ी थीं। इस बार हमने उस राह पर मिले वहाँ के स्थानीय लोगों से बात की। उन्होंने हमें अपने गाँव और आस-पास के हालातों से परिचित करवाया।
उन्हीं लोगों में से एक हैं बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत अहलादडीह के ग्राम प्रधान हरीश चंद्र शर्मा। हमने उनसे सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। शर्मा के परिवार में प्रधानी लगभग 20 साल से है।
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20 साल में बढ़ी आबादी और साथ में दबदबा भी
प्रधान हरीश चंद्र शर्मा ने हमें बताया कि उनके क्षेत्र में आबादी का असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है और ये असंतुलन पिछले 20 सालों में बहुत ज्यादा गति से हुआ। प्रधान का दावा है कि उन्हीं के गाँव में कई बाहरी लोग आ कर बसे हुए हैं। इसी के साथ उन्होंने ये भी बताया कि मुस्लिमों के घर ज्यादा बच्चे पैदा होना अभी असंतुलन की एक वजह है। हरीश चंद्र के मुताबिक, उनके क्षेत्र में सिर्फ मुस्लिमों की आबादी ही नहीं बल्कि उनका राजनीतिक और आर्थिक दबदबा भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि बड़ी आबादी के बाद वो दंगा भी फैलाते हैं।
रिश्तेदार बता कर बाहरियों को बुलाते हैं स्थानीय मुस्लिम
अहलादडीह के ग्राम प्रधान के मुताबिक, जब वो किसी बाहरी के आने पर सवाल करने जाते हैं तो स्थानीय मुस्लिम उनको अपना रिश्तेदार बता कर आगे आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि तब कोई बेटी और कोई दामाद का रिश्ता बताने लगता है और बाद में उन्हें यहीं के लोगों की जमीन को खरीद कर के बसा दिया जाता है। हरीश चंद्र के अनुसार, कई बार तो कुछ लोग पहले से ही जमीनें ले कर रख लेते हैं। उनके मुताबिक जमीन बेचने वालों में हिन्दू भी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय मुस्लिम बाहरी लोगों के लिए पूरी तैयारी पहले से ही कर के रखते हैं।
बाहर से गरीब दिखने वाले मुस्लिम असल में सम्पन्न
जमीन खरीदने के लिए मुस्लिमों द्वारा खर्च की जा रही बड़ी रकम के मुद्दे पर प्रधान हरीश चंद्र ने कहा कि अक्सर यहाँ वो लोग दिखेंगे जो शक्ल से बेहद गरीब लगेंगे लेकिन, असल में उनके पास काफी पैसे हैं। उन्होंने बताया कि ये पैसे मुंबई जैसे बड़े शहरों में कमा कर जुटाए गए हैं। प्रधान के अनुसार, वो वर्तमान में 55 साल के हैं और उनके बचपन में लगभग 70% हिन्दू और 30% मुस्लिम हुआ करते थे जो अब बदल कर 50-50 प्रतिशत के अनुपात में आ गए हैं।
हाईवे और चौराहों की जमीनों पर विशेष नजर
प्रधान हरीश चंद्र ,के अनुसार अगर किसी मुस्लिम के पास कमरा या जमीन है तो उनका प्रयास रहता है कि वो किसी मुस्लिम को ही उसे दे। इसी के साथ उन्होंने बताया कि उनकी तरफ के मुस्लिमों की ये कोशिश हमेशा रहती है कि वो हाईवे और चौराहों की जमीनें खासतौर पर खरीद लें। प्रधान ने सरकार से अपने क्षेत्र की विशेष निगरानी की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी तक उनकी जानकारी में कोई भी ठोस प्रशासनिक कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है।
बॉर्डर पर कई गाँव मुस्लिम बाहुल्य
प्रधान हरीश चंद्र ने अपने गाँव के आस-पास मौजूद रेहरा गाँव और खपरी जैसे गाँवों को टोटल मुस्लिम बहुल वाला बताया। उन्होंने कहा कि इनके बीच हिन्दुओं के कुछ दलित परिवार ही रह गए हैं। हरीश चंद्र ने बताया कि इन गाँवों में कई हिन्दू अपना घर बेच कर कहीं और बस चुके हैं। प्रधान ने नजदीकी बाजार तुलसीपुर में भी जनसंख्या में तेजी से बदलाव होना बताया।
ग्राम प्रधान हरीश चंद्र
मेरे गाँव में 2 मस्जिद और 2 मदरसे
हरीश चंद्र ने अपने गाँव का जिक्र करते हुए बताया कि वहाँ पर 2 मदरसे और 2 मस्जिदें बनी हैं। उन्होंने बताया कि एक मस्जिद तो पुरानी है, लेकिन दूसरी उनके ही आगे बनी है। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि उनके गाँव के दोनों मदरसे भी उनके ही आगे 20 सालों के अंदर बने हैं। प्रधान ने कहा कि ये मदरसे सरकारी नहीं हैं बल्कि उन्हें कमेटी बना कर चलाया जा रहा है।
हिन्दू त्योहारों में डाला जाता है व्यवधान
प्रधान हरीश चंद्र ने बताया कि उनके क्षेत्र में हिन्दू त्योहारों में मेल-जोल नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि उनका पुरवा हिन्दू बहुल होने के चलते वहाँ कोई उत्पात नहीं हो पाता, लेकिन पड़ोस में खैरा जैसे गाँवों में हिन्दू अपने त्योहारों को खुल कर नहीं मना पाता। खैरा गाँव को उन्होंने लगभग 90% मुस्लिम आबादी वाला बताते हुए अपने गाँव से 1 किलोमीटर दूर होने की जानकारी दी।
बढ़ती इबादतगाहों पर प्रशासन नहीं लेता एक्शन
प्रधान हरीश चंद्र के अनुसार, जिस तेजी से उनके क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है उसी तेजी से वहाँ इबादतगाहें भी बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि मज़ारों, मस्जिदों और इबादतगाहों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है जो सड़कों तक के किनारे बन चुकी हैं। प्रधान के मुताबिक, इन हरकतों पर उनके यहाँ का शासन और प्रशासन कोई एक्शन नहीं लेता।
कोई भी जुड़वा लेता है वोटर लिस्ट और राशन कार्ड में नाम
प्रधान हरीश चंद्र ने हमें बताया कि उनकी तरफ कोई भी बाहरी आसानी से अपना नाम वोटर लिस्ट या राशन कार्ड में जुड़वा लेता है जो बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी नया नाम कड़ी जाँच के बाद ही जुड़े तो इस क्षेत्र के लिए अच्छा रहेगा। प्रधान ने इसके नुकसान बताते हुए कहा कि इसके चलते बाहरी लोगों को भी सरकार की सभी योजनाओं का फायदा मिलने लगता है। बाहरी लोगों की हरकतों की चर्चा करते हुए ग्राम प्रधान ने बताया कि बाहर से आए लोग पहले तो किसी परिवार के साथ जुड़ कर सरकारी कागजों में अपना नाम लिखवा लेते हैं और कुछ दिन बाद अपना परिवार अलग कर लेते हैं।
10 किलोमीटर में 20 गाँवों में 70% आबादी मुस्लिमों की
प्रधान ने गुडारिया, रजवापुर, खपरीपुर जैसे गाँवों को मुस्लिम बाहुल्य बताया। इसी के साथ उन्होंने कहा कि उनके आस-पास लगभग 10 किलोमीटर की परिधि में 20 गाँव ऐसे हैं जहाँ मुस्लिमों की आबादी 70% या उस से अधिक है। हरीश चंद्र के मुताबिक, वहाँ के प्रधान व बाकी अन्य पद मुस्लिमों के ही होते है और हालात तो ऐसे हैं वहाँ कि हिन्दू लड़ाई में ही नहीं होता। प्रधान ने कुछ गाँवों का नाम भी लिया जहाँ कोई हिन्दू चुनाव ही नहीं लड़ता।