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‘तुम्हें कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे के पास भेज दूँगा’: गाजियाबाद के डॉक्टर को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी, कहा – मोदी-योगी तुझे नहीं बचा पाएँगे

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले एक डॉक्टर को ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। डॉक्टर को यह धमकी व्हाट्सएप्प कॉल के जरिए दी गई है। जिस नंबर से धमकी वाला कॉल आया था, वह नंबर अमेरिका का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाजियाबाद के सिहानी गेट थाना क्षेत्र अंतर्गत रहने वाले डॉक्टर अरविंद वत्स अकेला को ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी मिली है। डॉक्टर ने बताया है कि उन्हें पहला कॉल 1 सितंबर को रात 11 बजे कॉल आया था। यह कॉल व्हाट्सएप्प पर था और डीपी में नकाब लगाए हुए किसी व्यक्ति की फोटो थी। इसलिए, उन्होंने फोन नहीं उठाया। लेकिन, अगले दिन यानी 2 सितंबर को एक बार फिर उन्हें कॉल आया।

डॉक्टर अरविंद वत्स अकेला ने का कहना है कि 2 सितंबर को आई कॉल में 5 मिनट 2 सेकंड बात हुई थी। इस बातचीत के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “जैसे ही मैंने फोन उठाया तो उधर से किसी ने कहा डॉक्टर अकेला बोल रहे हो। मैंने कहा, हाँ। इसके बाद उसने कहा कि मैं तुम्हें कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे के पास भेज रहा हूँ। तो मैंने बोला कि क्या बात हो गई। इस पर उसने कहा कि तुम हिंदू संगठन की बात करते हो। मैं देखता हूँ कि तुम्हारा मोदी-धोधी, योगी और यति नरसिंहानंद जो तेरा गुरु है वो खुद बिल में दुबका पड़ा है, तेरे को क्या बचाएगा।”

फोन में मिली धमकी के बारे में डॉक्टर ने आगे बताया, “धमकी देने वाले ने कहा हमने तुम्हारी सारी रेकी कर ली है। हमें पता है तू कहाँ रहता है, क्या करता है और कहाँ जाता है। गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा ,सर तन से जुदा। इस पर मैंने कहा कि मैंने तो ऐसी कोई पोस्ट भी नहीं डाली है। क्या बात हो गई? तो उसने कहा कि वो तुझे पता चल जाएगा। फोन करने वाले शख्स ने मुझे हिंदू संगठनों का समर्थन करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है।”

बताया जा रहा है कि डॉक्टर वत्स बीते करीब 24 सालों से क्लीनिक चला रहे हैं। वह कई हिंदू संगठनों से भी जुड़े हैं और ‘हिंदू स्वाभिमान मंच’ के उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रभारी भी हैं। इसी संगठन के संरक्षक डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी हैं। डॉक्टर का कहना है कि वह और उनका पूरा परिवार डरा हुआ है। उन्हें रास्ते बदलकर घर आना-जाना पड़ता है।

इस मामले में गाजियाबाद के एसएसपी मुनिराज ने कहा कि डॉक्टर की शिकायत के आधार पर सिहानी गेट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। साइबर सेल को भी इस मामले में जाँच करने के लिए कहा गया है। जिस नंबर से कॉल आया, था उसे ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है। टेक्नोलॉजी के जमाने में आज भारत में बैठकर ही अमेरिका के या किसी अन्य के नंबर से कॉल किया जा सकता है।

‘BJP कार्यकर्ताओं पर बमबारी कर रही ममता बनर्जी की पुलिस’: बंगाल में कई बड़े BJP नेता हिरासत में, सामने आए लाठीचार्ज के वीडियोज

पश्चिम बंगाल में मंगलवार (13 सितंबर, 2022) को ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ भाजपा द्वारा मार्च निकाला गया। भ्रष्टाचार के आरोप में निकाले गए मार्च को ‘सचिवालय चलो मार्च’ (नबन्ना चलो मार्च)’ नाम दिया गया था। लेकिन, पुलिस ने सचिवालय पहुँचने से पहले ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजमूदार और सांसद लॉकेट चटर्जी समेत पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

पुलिस कार्रवाई से भाजपा कार्यकर्ता भड़क उठे। उन्होंने बैरिकेड्स तोड़ दिए। कोलकाता में भाजपा समर्थकों ने पुलिस की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया। उन्हें रोकने के लिए आँसू गैस के गोले और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर बंगाल में हुए बवाल के वीडियोज तेज़ी से वायरल हो रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी तृणमूल (TMC) नेताओं के भ्रष्टाचार को लेकर बंगाल में यह प्रदर्शन कर रही है। भ्रष्टाचार के आरोप में तृणमूल के दो कद्दावर नेता पार्थ चटर्जी और अनुब्रत मंडल जेल में हैं। शांतिपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने ट्रेन में अर्पिता और पार्थ चटर्जी के पोस्टर लहराए। पोस्टर पर ‘चोर’ लिखा हुआ था। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजमूदार को कोलकाता पुलिस ने हावड़ा रेलवे स्टेशन पर ही रोककर हिरासत में ले लिया।

उन्होंने कहा, “यहाँ जुटे लोगों की ताकत देखकर सीएम डरी हुई हैं। यहाँ आज केवल 30% हैं, बाकी लोगों को सोमवार (12 सितंबर, 2022) को हिरासत में लिया गया था।”

सुकांता मजूमदार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण जुलूस को बाधित किया और पुलिस की ओर से बमबारी की जा रही है, आंदोलन का दमन किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “गणतंत्र का दमन कर दिया गया है, जिस तरह से पुलिस वाटर कैनन का इस्तेमाल कर रही थी, उससे करंट करने का खतरा था।” दरअसल, बीजेपी ने सचिवालय की तीन तरफ से घेराबंदी की प्लानिंग की थी। हावड़ा रेलवे स्टेशन से सुकांता मजूमदार, सांतरागाछी से शुभेंदु अधिकारी और स्क्वॉड से दिलीप घोष को सचिवालय जाना था, लेकिन पुलिस ने तीनों को रोक लिया। नेताओं को रोकने के लिए बंगाल पुलिस ने स्पेशल फोर्स तैनात की थी।

बता दें कि हिरासत में लेने के दौरान रानीगंज और बोलपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं की बंगाल पुलिस के साथ झड़प में कई समर्थकों के घायल होने की भी खबर है।

धराया मेवात के गिरोह का लुटेरा जावेद, पुलिस पर हमला कर के फरार हुआ था: 15 से अधिक मामले हैं दर्ज, महीनों से पीछे पड़ी थी दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लुटेरों के अंतरराज्यीय गिरोह के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है, जिसका नाम जावेद बताया जा रहा है। आरोपित जावेद साल 2021 में चार पीसीआर (पुलिस कंट्रोल रूम पेट्रोलिंग) वैन और पुलिस कर्मचारियों पर हमले के मामले में वॉन्टेड था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित जावेद मेवात के अंतरराज्यीय गिरोह का सदस्य है। यह जावेद जब्बी और जबीद नाम से लूट के अपराधों को अंजाम देता रहा है। 6 जून, 2021 में भी चोरी के मामले में पुलिस ने जावेद और इसके गिरोह के सदस्यों का पीछा किया था। लेकिन, तब ये लोग पीसीआर वैन और पुलिस पर हमला करके भाग खड़े हुए थे। इसके बाद पुलिस ने इसे और अन्य सदस्यों को भगोड़ा घोषित कर दिया था।

बताया जा रहा है कि कुछ माह पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों को भगोड़े आरोपित जावेद के बारे में कुछ सूचनाएँ मिली थीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर दिल्ली पुलिस गिरोह के सदस्यों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। इस दौरान स्पेशल सेल का यह प्रयास था कि गिरोह के अधिक से अधिक सदस्यों को गिरफ्तार किया जा सके। बीते, दो महीने के लगातार प्रयास के बाद पुलिस को सफलता हाथ लगी थी और दिल्ली में जावेद के कुछ ठिकानों की पहचान हुई थी।

इसके बाद सोमवार (12 सितंबर 2022) को स्पेशल सेल को गुप्त सूत्रों से जावेद के एमबी रोड (दिल्ली में टी पॉइंट मंदिर मार्ग के पास) में एक सहयोगी से मिलने की सूचना मिली थी। इस सूचना के बाद इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह के नेतृत्व में एक टीम तैयार की गई थी। इसमें सतविंदर सिंह, एएसआई साजिद, एचसी सचिन, एचसी हरविंदर, और एचसी मोहित को शामिल किया गया था। इस टीम ने टी-पॉइंट के पास से ही जावेद उर्फ ​​जबीद उर्फ जब्बी को गिरफ्तार किया है।

इस गिरफ्तारी में पुलिस को जावेद के पास से एक जिंदा कारतूस के साथ .32 बोर की एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल मिली है। जावेद पर दिल्ली और हरियाणा में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी, अपहरण, पुलिस पर हमला, चोट, साजिश, धमकी, हथियार अधिनियम समेत कुल 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

₹1.58 लाख करोड़ का निवेश, 1 लाख सीधी नौकरियाँ: सेमीकंडक्टर निर्माण का हब बनेगा गुजरात, वेदांता-Foxconn लगाएगी प्लांट

वेदांता लिमिटेड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात को अपने सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इस प्रोजेक्ट के लिए वेदांता ने ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर फॉक्सकॉन (Foxconn) के साथ 20 बिलियन डॉलर (1.58 लाख करोड़ रुपए) का करार किया है। वेदांता (Vedanta) समूह के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

उन्होंने लिखा, “भारत में एक मजबूत विनिर्माण आधार बनाने के लिए वेदांता-फॉक्सकॉन ने अपने सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट के लिए गुजरात को चुना है। लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपए की लागत से सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने के लिए राज्य सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।”

सीएम पटेल ने कहा कि राज्य सरकार इसके लिए पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने में मदद करेगी। इस परियोजना से 1 लाख प्रत्यक्ष कुशल रोजगार प्रदान करने के अलावा भारत के इलेक्ट्रॉनिक आयात को कम करने की उम्मीद है। यह देश के विनिर्माण क्षेत्र में मदद करेगी। अनिल अग्रवाल ने कहा, “गुजरात सरकार और केंद्रीय आईटी मंत्री के प्रति मेरी गहरी कृतज्ञता है, जिन्होंने वेदांता को इतनी जल्दी जोड़ने में मदद की है। भारत का तकनीकी तंत्र बढ़ेगा, जिससे हर राज्य नए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्रों के माध्यम से लाभान्वित होगा।”

वेदांता के अध्यक्ष ने ट्वीट करते हुए कहा कि भारत की अपनी सिलिकॉन वैली अब एक कदम और करीब है। उन्होंने कहा, “भारत न केवल अपने लोगों की, बल्कि समुद्र पार के लोगों की भी डिजिटल जरूरतों को पूरा करेगा। चिप टेकर से चिप मेकर बनने का सफर आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। जय हिंद!”

गाँधी नगर में आयोजित समारोह में रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस मौके पर कहा कि दोनों कंपनियाँ गुजरात में यह संयंत्र लगाने पर 20 बिलियन डॉलर का निवेश करेंगी। इससे एक लाख रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

बता दें कि रॉयटर्स ने अप्रैल में जानकारी दी थी कि कंपनी ने सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए गुजरात से फाइनेंशियल सब्सिडी और कम प्राइस पर इलेक्ट्रिसिटी की माँग की थी। वेदांता ने कॉस्ट के बिना लगभग 1000 एकड़ जमीन को 99 वर्ष की लीज पर माँगा था। इस प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य भी दौड़ में थे। कंपनी ने 20 वर्षों के लिए फिक्स्ड प्राइस पर इलेक्ट्रिसिटी देने को भी कहा था। वेदांता को सब्सिडी के साथ ही कम टैरिफ पर इलेक्ट्रिसिटी की भी स्वीकृति मिल गई है।

‘फासीवादियों का हौसला बढ़ाने वाला फैसला’: ज्ञानवापी मामले में अब PFI की एंट्री, बोला संगठन – ‘सदियों पुरानी मस्जिद’ की करेंगे रक्षा

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को लेकर सोमवार (12 सितंबर, 2022) को वाराणसी की जिला अदालत ने हिन्दुओं के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद से तमाम वामपंथी रुदन कर रहे हैं। AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के इस फैसले पर नाराजगी जताई है और इस्लामी चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने कहा है कि इससे फासीवादियों का हौसला मिलेगा।

‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ के मुखिया ओएमए सलाम ने कहा, “ज्ञानवापी के अंदर रोजाना पूजा के लिए दी गई हिंदू श्रद्धालुओं की याचिका को बरकरार रखने के वाराणसी जिला न्यायालय के फैसले से अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारों पर फासीवादी हमलों को और मजबूती मिलेगी। इस फैसले में पूजा स्थल एक्ट-1991 को नजरअंदाज किया है। इसे धार्मिक संपत्तियों पर सांप्रदायिक राजनीति को रोकने के लिए पारित किया गया था, जैसा कि बाबरी मस्जिद के साथ हुआ।”

ओएमए सलाम ने यह भी कहा, “देश को अब जरूरत है कि लोगों के एक वर्ग के द्वारा अन्य लोगों के धार्मिक स्थलों और संपत्तियों पर दावे करने का यह खतरनाक रुझान हमेशा के लिए खत्म हो। दुर्भाग्य से अदालत ने एक तंग नजरी भरा फैसला दिया है। ऐसा लगता है कि याचिका पर सुनवाई करते समय इस बात को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया गया कि किस तरह से सांप्रदायिक फासीवादियों ने भारतीय समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए दशकों तक बाबरी मस्जिद को इस्तेमाल किया, जिसके नतीजे में देश भर में कई निर्दोषों की जानें गईं और काफी तबाही भी मची।”

इस्लामी नेता ने कहा कि पॉपुलर फ्रंट इस ‘हमले’ के खिलाफ और सदियों पुरानी मस्जिद की रक्षा में मस्जिद कमेटी के संघर्ष का समर्थन करता है और हाईकोर्ट में इस आदेश को चैलेंज करने के कमेटी के फैसले के साथ खड़ा है।

वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है, “इस तरह के फैसले से 1991 के वर्शिप एक्ट का मतलब ही खत्म हो जाता है। ज्ञानवापी का केस बाबरी मस्जिद के रास्ते पर जाता दिख रहा है। ऐसे में 80-90 के दशक में वापस चला जाएगा।”

गौरतलब है कि ज्ञानवापी में श्रृंगार गौरी की पूजा करने के विरोध में मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया था कि 1991 का पूजा अधिनियम ज्ञानवापी पर लागू होता है। इसलिए, ज्ञानवापी की प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। हालाँकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि अब हिंदू पक्ष की पूजा का अधिकार माँगने वाले मामले की सुनवाई होगी। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की गई है।

यूपी की तर्ज पर उत्तराखंड के मदरसों का भी होगा सर्वे: बंद होंगे बिना रजिस्ट्रेशन वाले तालीमगाह, बोले CM धामी – मिल रही शिकायतें

उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी मदरसों का सर्वे कराया जाएगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिंता जताते हुए कहा है कि मदरसों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, इसलिए अब इन पर कड़ी नजर रखते हुए सर्वे करवाया जाएगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री मंगलवार (13 सितंबर, 2022) को सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा उत्तराखंड में मदरसों की गतिविधियों और काम को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसके लिए सभी मदरसों की जाँच की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों का सर्वे जरूरी हो गया है और इसके लिए जाँच प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह बयान तब आया है जब, एक दिन पहले ही सोमवार (12 सितंबर, 2022) को राज्य के नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शम्स ने कहा था कि राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मदरसों का सर्वे कराना चाहिए।

शम्स ने कहा था, “यूपी सरकार से सीख लेते हुए हम उत्तराखंड में चल रहे मदरसों का एक सर्वे कराएँगे। इसमें वो मदरसे शामिल होंगे जो यूएमबी या वक्फ बोर्ड से संबद्ध हैं। वो भी शामिल होंगे जो दोनों सरकारी संस्थाओं में से किसी के साथ रजिस्टर्ड नहीं हैं।”

उन्होंने यह भी कहा था, “किसी गैर-पंजीकृत मदरसे को उत्तराखंड में काम नहीं करने दिया जाएगा, चाहे कुछ भी हो जाए। मैंने सीएम से बात की है। सर्वे के लिए उन्हें जल्द ही एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। राज्य की मस्जिदों और मदरसों में सुरक्षा कैमरे लगाए जाएँगे, ताकि यदि कोई अवैध गतिविधियां होती हैं तो उन पर रोक लग सके।”

उत्तर प्रदेश में आज से शुरू हो रहा है मदरसों का सर्वे

बता दें, 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया था कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में प्रयास कर रही है। मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है। यह सर्वे मंगलवार (13 सितंबर) से शुरू हो रहा है और इसके लिए 5 अक्टूबर, 2022 तक की समयसीमा तय की गई है। इसमें उन सभी मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं।

इस सम्बन्ध में एक बैठक भी हुई थी। उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। दरअसल, इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।

इन मदरसों में जिनका संचालन ठीक से हो रहा होगा, उन्हें मान्यता के दायरे में भी लाया जाएगा। किन मदरसों को कहाँ से फंडिंग मिल रही है, इसकी भी जाँच की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड’ से उन मदरसों को मान्यता दिलाई जाएगी, जो इसके योग्य होंगे। इतना ही नहीं, सरकार को ये जानकारी भी हासिल करनी है कि इन मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षक कौन हैं और वो क्या पढ़ा रहे हैं। मदरसों का सिलेबस क्या है, रिपोर्ट में ये भी जुटाया जाएगा।

मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले आदिवासी युवक की पीट-पीट कर हत्या, नदी में फेंक दी लाश: लड़की के अब्बा सहित 7 गिरफ्तार

महाराष्ट्र के अहमदनगर में 1 महीने पहले मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले दीपक नाम के युवक की हत्या कर दी गई है। हत्या से पहले दीपक का अपहरण किया गया था और बाद में उसकी लाश गोदावरी नदी में फेंक दी गई। आदिवासी समुदाय का दीपक बर्डे पिछले 31 अगस्त से लापता था। इस मामले में मजनू शेख नाम के व्यक्ति को मुख्य आरोपित बताया जा रहा। पुलिस ने अब तक 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला श्रीरामपुर इलाके के भोकर का है। बताया जा रहा है कि दीपक का मजनू शेख की बेटी से लम्बे समय से प्रेम संबंध था। इस बात का मजनू के परिवार वाले विरोध कर रहे थे। लगभग 1 माह पहले दीपक ने लड़की से शादी कर ली, जिसके बाद मजनू शेख काफी नाराज था। आरोप है कि घटना के बाद मजनू शेख अपने रिश्तेदारों के साथ दीपक की तलाश में था।

मिली जानकारी के मुताबिक, पहले आरोपितों ने दीपक की पत्नी को अपने कब्ज़े में ले कर पुणे में रहने वाले उसके मामा के पास भेज दिया। जब दीपक को इसकी जानकारी हुई तब वह अपनी पत्नी को लेने पुणे गया। दीपक के परिवार वालों का आरोप है कि इसी दौरान लड़की के मामा ने उसका अपहरण कर लिया और उसकी पिटाई कर दी। माना जा रहा है कि इसी पिटाई के दौरान दीपक की मौत हो गई और आरोपितों ने उसकी लाश को गोदावरी नदी में फेंक दी।

भाजपा विधायक के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई थी FIR

पुलिस की जाँच में अब तक मजनू शेख के अलावा इमरान अब्बास शेख, समीर अहमद शेख, अजीत शेख के नाम सामने आए हैं। पुलिस द्वारा पकड़े गए इन सभी आरोपितों से पूछताछ की जा रही है। घटना के बाद आरोपितों पर कार्रवाई की माँग को ले कर भाजपा विधायक नितेश राणे ने जनाक्रोश मोर्चा निकाला था। भाजपा MLA की इस रैली के बाद पुलिस एक्टिव हुई थी और अपनी कार्रवाई में तेजी लाई थी। एकलव्य आदिवासी समाज भी 2 बार अहमदनगर के SP ऑफिस पर धरना दे चुका है।

पाकिस्तान में बाढ़ राहत शिविरों से हिन्दुओं को निकाला: उधर बिना भेदभाव सैकड़ों पीड़ितों की मदद कर रहा बलूचिस्तान का मंदिर, अधिकतर मुस्लिम

पाकिस्तान में आई बाढ़ (Pakistan Floods) से वहाँ के लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बाढ़ पीड़ितों को काफी समस्याएँ हो रही हैं। मुल्क के लोग पानी, भोजन और आश्रय सहित बुनियादी संसाधनों के लिए तरस रहे हैं। इसी बीच खबर है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाढ़ में फँसे पाकिस्तानी हिंदुओं की दुर्दशा को कवर करने के आरोप में पुलिस ने नसरल्लाह गद्दानी नाम के एक पत्रकार को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान पुलिस ने 7 सितंबर, 2022 को पत्रकार नसरल्लाह गद्दानी को गिरफ्तार किया था। उसे पाकिस्तानी हिंदुओं की स्टोरी को कवर करने के लिए 5 दिन के रिमांड पर लिया गया था। पत्रकार ने सिंध के मीरपुर मथेलो में भागरी समुदाय से जुड़े पाकिस्तानी हिंदुओं की दिल दहला देने वाली स्टोरी को कवर किया था। पत्रकार ने बताया कि स्थानीय प्रशासन ने भागरी समुदाय के लोगों को हिंदू होने के कारण बाढ़ राहत शिविर से निकाल दिया था।

सिंध में बाढ़ में फँसे भागरी समुदाय के लोगों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में हिंदू भागरी समुदाय के लोग अपनी भयावह स्थिति और स्थानीय प्रशासन के प्रति अपने व्यवहार को बताते हुए नजर आ रहे हैं। हिंदुओं ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें यह कहते हुए बाढ़ राहत शिविरों से निकाल दिया था कि वे बाढ़ पीड़ित नहीं हैं।

गौरतलब है कि इस बड़ी आपदा में बलूचिस्तान के कच्छी जिले का एक मंदिर अँधेरे में रोशनी बनकर सामने आया है। इस मंदिर में करीब 300 लोगों को आसरा मिला है, जिसमें अधिकांश मुस्लिम हैं। कच्छी जिले की भाग नारी तहसील के रतन कुमार इस समय इस मंदिर के प्रभारी हैं। रतन कुमार ने इस मंदिर को लेकर कहा है, “मंदिर में सौ से ज्यादा कमरे हैं। हर साल बलूचिस्तान और सिंध से बड़ी संख्या में लोग तीर्थयात्रा के लिए यहाँ आते हैं। बाढ़ से इस मंदिर को भी नुकसान हुआ है। हालाँकि, इस मंदिर का मूल ढाँचा सुरक्षित है। इसलिए, बाढ़ पीड़ितों को सहारा दिया जा रहा है।”

राजस्थान में खुलेआम ‘कॉन्ग्रेस तोड़ो’ अभियान, राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो’ भ्रमण पर: मंत्री ने सचिन पायलट को धमकाया – या तुम नहीं, या हम नहीं

राजस्थान के अजेमर में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) को चप्पल और जुतों का सामना करना पड़ा। इस अपमान को कॉन्ग्रेसी नेता अशोक चांदना शायद सहन भी कर लेते लेकिन जब चल रहे थे जूते-चप्पल… तभी सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे भी लग रहे थे।

राजस्थान सरकार के मंत्री अशोक चांदना ने इसके बाद पक्के कॉन्ग्रेसी के तौर पर ट्वीट किया। ट्वीट की भाषा में धमकी से लेकर कॉन्ग्रेस में फूट और सिर-फुटौवल की नौबत भी पढ़-समझ सकते हैं। इन सबसे परे वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस के सबसे ‘युवा’ नेता राहुल गाँधी भारत-जोड़ो यात्रा पर निकले हुए हैं।

मंत्री अशोक चांदना को अपना भाषण बीच में ही छोड़ना पड़ा। इस हंगामे से वो काफी नाराज हुए और उन्होंने 12 सितम्बर को ही रात 10:05 बजे ट्विटर पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “मुझ पर जूता फेंकवा कर सचिन पायलट यदि मुख्यमंत्री बने तो जल्दी से बन जाए क्योंकि आज मेरा लड़ने का मन नहीं है। जिस दिन मैं लड़ने पर आ गया तो फिर एक ही बचेगा और यह मैं चाहता नहीं हूँ।”

राजस्थान के मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) के साथ-साथ एक और मंत्री शकुंतला रावत को भी काले कपड़े और जूते दिखाए गए। अशोक चांदना ने इसके पीछे सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराते हुए लड़ाई होने पर एक के ही बचने की चेतावनी दे डाली। मामला सोमवार (12 सितम्बर 2022) की शाम का है।

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के अस्थि विसर्जन का कार्यक्रम पुष्कर मेला ग्राउंड में हुआ। इस सभा में जैसे ही मंच पर राजस्थान सरकार के मंत्री अशोक चांदना पहुँचे, वैसे ही नीचे मौजूद लोग जूते और अन्य सामान फेंकने लगे। इस दौरान अशोक चांदना का विरोध होने के साथ-साथ सचिन पायलट जिंदाबाद के नारे लगे।

विरोध कर रहे लोगों ने वहाँ मौजूद गहलोत सरकार में पर्यटन मंत्री शकुंतला रावत को भाषण देने से रोक दिया। इस दौरान वहाँ मौजूद भीड़ ने न सिर्फ मंत्री अशोक चांदना (Ashok Chandna) को जूते और काले कपड़े दिखाते रहे बल्कि पानी की बोतलें भी उनके ऊपर फेंकी गईं। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

गौरतलब है कि गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला को अंतिम विदाई देने के लिए उनके बेटे विजय बैंसला ने राजस्थान में अस्थि कलश यात्रा निकाली थी, जिसका सोमवार को पुष्कर सरोवर में विसर्जन हुआ। इसी दौरान एमबीसी वर्ग की जातियों को एकजुट करने के लिए इस सभा का आयोजन हुआ था। इस हंगामे को शांत करवाने का प्रयास करते पुलिस बल की लोगों से झड़प भी हुई।

देश में ‘भारत जोड़ो’, राजस्थान में कॉन्ग्रेस में तोड़ो

राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो’ यात्रा पर हैं। किस्मत ऐसी कि उन्हें आंदोलनजीवियों का समर्थन भी मिल गया है। अफसोस देखिए कि इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस पार्टी ‘भारत तोड़ो’ अभियान में जुटी हुई है। कभी कॉन्ग्रेसियों के सोशल मीडिया पोस्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमले को लेकर होते हैं तो कभी खुद राहुल गाँधी पादरी के सामने बैठ कर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान ध्यान से सुनते रहते हैं।

चरागाह की जमीन पर 25 साल से चल रहा था अवैध मदरसा, योगी सरकार के बुलडोजर ने ढाह दिया: संचालक हसन पर ₹2.24 लाख का जुर्माना भी

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में चरागाह की जमीन पर बने एक अवैध मदरसे को ढहा दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस मदरसे को सरकार द्वारा मान्यता भी नहीं मिली हुई थी। इसे हसन नाम का एक व्यक्ति संचालित कर रहा था। तहसीलदार कोर्ट ने 2 सितम्बर, 2022 को ही नोटिस जारी कर के अवैध निर्माण संचालक को खुद से हटाने का आदेश दिया था। ऐसा न होने के बाद प्रशासन ने अवैध मदरसे पर बुलडोजर चलवा दिया। यह कार्रवाई सोमवार (12 सितम्बर, 2022) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मदरसा चरागाह की जमीन पर लगभग 25 वर्षों से बना हुआ था। इसका निर्माण 1997 में अमेठी के टांडा-बांदा हाईवे के पास गूजरटोला में हुआ था। सरकारी कागजातों में यह जगह सरकारी चरागाह के तौर पर दर्ज थी। स्थानीय लोगों ने इस अवैध कब्ज़े की शिकायत की तो स्थानीय लेखपाल ने 27 जून, 2022 को इसकी रिपोर्ट तहसील में जमा की, जिसमें मदरसे के चरागाह की जमीन पर बने होने की पुष्टि की गई थी।

29 जून, 2022 को यह मामला जिले के तहसीलदार की अदालत में दर्ज हुआ। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 1 सितम्बर को मदरसा अवैध रूप से बना पाया और 2 सितम्बर तक उसको चलाने वाले हसन से उसे खुद से हटा लेने के कहा। जब हसन ने तय सीमा में अवैध मदरसे को नहीं हटाया, तब सोमवार को SDM भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और 35 मिनट तक चले बुलडोजर के बाद मदरसे को जमींदोज कर दिया गया।

इस ध्वस्तीकरण के लिए PAC का अतिरिक्त बल और 5 थानों की पुलिस बुलाई गई। सुबह 5:30 से ही बुलडोजर चलना शुरू हो गया था। मदरसा संचालक हसन पर 2 लाख 24 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। इस कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसा संचालक हसन का कहना है कि उसने मदरसे का निर्माण ग्राम सभा के प्रस्ताव पर करवाया था और इसके निर्माण के लिए गाँव वालों ने ही चंदा जुटाया था। हसन ने बताया कि मदरसे में लगभग 150 बच्चे तालीम हासिल करते थे, लेकिन कोरोना काल से यह बंद चल रहा था।