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‘नहीं चाहिए आपकी सिक्योरिटी’: CM केजरीवाल ने गुजरात में पुलिस से की बदसलूकी, उनकी ही पार्टी ने पत्र लिख माँगी थी सुरक्षा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) सोमवार (12 सितंबर, 2022) को अहमदाबाद पुलिस से बदसलूकी करते हुए नजर आए। अरविंद केजरीवाल अपने होटल से एक ऑटो में बैठकर डिनर करने के लिए जा रहे थे। तभी पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान केजरीवाल ने कहा, “आप मुझे जबरदस्ती सुरक्षा दे रहे हैं। आपको शर्म आनी चाहिए। आपके ऊपर धब्बा है, ये गुजरात की सिक्योरिटी के ऊपर धब्बा है। मुझे नहीं चाहिए ये सिक्योरिटी।”

इसका वीडियो AAP ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर भी साझा किया है। वीडियो में दिल्ली के सीएम पुलिस के साथ बदसलूकी करते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसे लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने केजरीवाल पर ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

पार्टी ने अपनी ट्वीट में लिखा, “तानाशाह BJP ने अरविंद केजरीवाल जी को Auto Driver के घर डिनर पर जाने से रोका। अरविंद केजरीवाल ने कहा – मैं जनता का आदमी हूँ, जनता से मिलना चाहता हूँ। मुझे ऐसी सिक्योरिटी नहीं चाहिए। पुलिस सुरक्षा के नाम पर गिरफ्तार करना चाहती है। हमें नहीं चाहिए सिक्योरिटी। हमें जनता से मिलना हैं। कैसे रोक सकते हो?”

दरअसल, केजरीवाल आगामी गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पार्टी का प्रचार करने के लिए अहमदाबाद में थे। स्थानीय लोगों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने एक ऑटो ड्राइवर के घर डिनर का निमंत्रण ठीक उसी तरह स्वीकार किया, जैसे उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में किया था। केजरीवाल गुजरात के दो अन्य नेताओं के साथ ऑटो में बैठकर ड्राइवर के घर जाना चाहते थे, लेकिन अहमदाबाद पुलिस ने उनसे सुरक्षा कारणों से ऑटो में न जाने का आग्रह किया। इसे लेकर केजरीवाल पुलिसवालों पर आगबबूला हो गए और उन पर बरस पड़े।

केजरीवाल ने पुलिस अधिकारियों से कहा, “इसलिए गुजरात राज्य की जनता दुखी है, क्योंकि नेता जनता के बीच नहीं जाते और हम जनता के बीच जा रहे हैं तो आप हमें रोक रहे हैं। आपके इसी प्रोटोकॉल ने जनता को दुखी करके रखा है।” केजरीवाल बार-बार यह कहते रहे कि उन्हें पुलिस की सुरक्षा की जरूरत नहीं है।

जब लाख कोशिशों के बाद भी केजरीवाल नहीं माने तो पुलिस की दो गाड़ियाँ ऑटो के पीछे गई, ताकि वो दिल्ली के सीएम की सुरक्षा कर सकें। ऑटो के अंदर दिल्ली के सीएम के साथ एक पुलिस अधिकारी भी था। अफसोस की बात है कि केजरीवाल सहित आप के तीन नेता ऑटो की पिछली सीट पर बैठे थे, इसलिए पुलिस अधिकारी को ड्राइवर के साथ बेहद खतरनाक स्थिति में बैठना पड़ा था।

केजरीवाल के व्यवहार पर भड़के नेटिजन्स

असम के मंत्री पीयूष हजारिका ने तंज कसा, “दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कल गुजरात में जिस तरह से अपना मजाक बनाया, वह इस बात का प्रमाण है कि केजरीवाल कितने महान अभिनेता हैं! इस धरती पर कोई भी अवार्ड शो उनकी प्रतिभा को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।”

बीजेपी नेता तजिंदर सिंह बग्गा ने कहा, “ओए घटिया आदमी अरविंद केजरीवाल, गुजरात को बदनाम करना बंद कर। तुम्हारी पार्टी ने खुद चिट्ठी लिख कर गुजरात पुलिस से सुरक्षा माँगी थी और केजरीवाल पर हमले का अंदेशा जताया था। अब मीडिया के कैमरों के सामने पब्लिसिटी की भूख के कारण तुमने गुजरात पुलिस के सामने ड्रामा शुरू कर दिया।”

भाजपा नेता प्रीति गाँधी ने कहा, “आम आदमी पार्टी की गुजरात इकाई ने केजरीवाल के गुजरात दौरे पर विशेष सुरक्षा की माँग को लेकर पत्र लिखा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन पर हिंसक हमले की संभावना है। अब जब गुजरात पुलिस उन्हें सुरक्षा दे रही है तो वह उन पर बंधक बनाने का आरोप लगाया जा रहा है।”

AAP गुजरात ने केजरीवाल के लिए माँगी थी सुरक्षा

दिलचस्प बात यह है कि AAP गुजरात ने अरविंद केजरीवाल के लिए सुरक्षा माँगी थी। अप्रैल 2022 में, जब अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में अपना चुनाव प्रचार शुरू किया था, तो AAP की गुजरात विंग ने उनके लिए सुरक्षा माँगी थी। सुरक्षा की माँग करने वाले पत्र गुजरात में पार्टी के आधिकारिक हैंडल से साझा किया गया था।

बॉलीवुड स्टार्स गुटखा बेच रहे, फुर्सत मिलने पर कोई वाहियात फिल्म बना लेते हैं: प्रकाश झा ने कहा – अच्छी कहानियाँ लिखने वालों को कोई नहीं पूछता

“बॉलीवुड स्टार्स तो आजकल गुटखा बेच रहे हैं। उनको जब फुर्सत मिलती है, तब कोई रिमिक्स या फिर वाहियात फिल्म बना लेते हैं। 5-6 फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद भी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ये जवाबदेही फिल्म प्रोड्यूसर्स, कंटेंट राइटर्स और प्लेटफॉर्म (जिस मीडियम पर लोग फिल्में देखते हैं) की है।”

बॉलीवुड के डायरेक्टर-एक्टर प्रकाश झा (Prakash Jha) ने यह बातें कहीं हैं। इन दिनों प्रकाश झा अपनी फिल्म ‘मट्टो की साइकिल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी फिल्म 16 सितंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इससे पहले वो आश्रम, आरक्षण, गंगाजल और राजनीति जैसी सुपरहिट फिल्में और वेब सीरीज बना चुके हैं।

दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में प्रकाश झा ने कहा, “इन लोगों को (बॉलीवुड वालों को) लगता है कि बड़े स्टार्स की बदौलत किसी भी फिल्म को हिट करा लेंगे, लेकिन दर्शक अच्छी स्टोरी, अपने बीच की कहानी देखना पसंद करते हैं। ये वाकई में दयनीय स्थिति है। इंडस्ट्री को अपने भीतर चिंतन करने की जरूरत है, नहीं तो जिस जनता ने इन्हें स्टार बनाया हैं, वही इन्हें डुबो देगी।”

फिल्म ‘मट्टो की साइकिल (Matto ki Saikil)’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों के बायकॉट और एक के बाद एक बड़े स्टार्स की फ्लॉप हो रही फिल्मों के साथ-साथ साउथ इंडिया में बन रहे सिनेमा और उनके एक्सपेरिमेंट पर भी चर्चा की।

प्रकाश झा के अनुसार बॉलीवुड अच्छी कहानियाँ लिखने के मामले में साउथ इंडिया में बन रहे सिनेमा से कहीं पीछे हैं। इसका कारण उन्होंने बताया कि यहाँ (बॉलीवुड में) अच्छे स्क्रिप्ट राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को कोई पूछता ही नहीं है। इंटरव्यू के दौरान प्रकाश झा ने साउथ के फिल्मी इंडस्ट्री की जमकर तारीफ करते हुए कहा:

“साउथ इंडस्ट्री लगातार एक्सपेरिमेंट कर रही है, वो ऐसी कहानियाँ ला रहे हैं, जो दर्शकों को लुभाती हैं। साउथ के अलावा पंजाबी, तेलुगु, तमिल, बंगाली जैसी रीजनल फिल्मों में भी ऐसा ही है। लेकिन बॉलीवुड में ऐसा नहीं है। बॉलीवुड में जो अच्छी कहानियाँ कहने वाले डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, राइटर हैं, उन्हें तो कोई पूछता ही नहीं है।”

बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर लगातार सवाल उठते हैं। क्या वाकई में ऐसा है? इसके जवाब में प्रकाश झा ने कहा, “ऐसा हो भी सकता है, लेकिन मैंने इस पर कोई रिसर्च नहीं की है। मेरे परिवार का भी कोई इंडस्ट्री में नहीं रहा है, लेकिन मैं काम कर रहा हूँ।”

बता दें कि ‘मट्टो की साइकिल (Matto ki Saikil)’ फिल्म एक दिहाड़ी मजदूर की जद्दोजहद को दिखाती है। फिल्म की शूटिंग 2 साल पहले ही पूरी हो चुकी थी। कोरोना के दौरान इसे बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी भेजा गया था, जहाँ इसकी वर्चुअल स्क्रिनिंग हुई थी। दो साल तक सिनेमा हॉल बंद थे, इसलिए अब फिल्म को रिलीज किया जा रहा है।

दीर्घकालिक समान जनसंख्या नीति बने, वो सभी पर समान रूप से लागू भी हो: RSS ने बताया अपने अगले 50 वर्षों का लक्ष्य

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की 3 दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक 2022 का समापन 12 सितम्बर 2022 (सोमवार) को रायपुर में हुआ। इस अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने जनसंख्या नियंत्रण नीति बनाने पर जोर दिया। इसी के साथ उन्होंने न्यायपालिका में हिंदी भाषा के प्रयोग पर भी अपनी बात रखी। इस सम्मेलन में संघ से जुड़े 36 संगठनों के 240 से अधिक प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर डॉ मनमोहन वैद्य ने बताया कि जनसंख्या नीति के लिए संघ ने प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव में संघ ने अगले 50 वर्षों का लक्ष्य बना कर अपने संसाधनों की उपलब्धता और कामकाजी युवाओं की संख्या का अनुपात निकाला है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य के मुताबिक एक दीर्घकालिक समान जनसंख्या नीति बननी चाहिए और वो सभी पर समान रूप से लागू भी होनी चाहिए। इस संबंध में सवाल और जवाब नीचे के वीडियो में 28:45 के आगे सुना जा सकता है।

कुछ राजनैतिक दलों द्वारा संघ के विरोध और इसे नफरत फैलाने वाला बताने के सवाल पर भी डॉ वैद्य ने कहा, “नफरत वो पाल कर रखते हैं। उनके बाप-दादाओं ने भी संघ को रोकने का प्रयास किया और 2 बार बिना वजह प्रतिबंध लादे गए, फिर भी संघ आगे बढ़ता रहा। हम अपने सत्य के सिद्धांत और त्याग के दम पर आगे बढ़ते रहे। उन्हें तो ये भी नहीं पता कि संघ का गणवेश बदल गया है।”

जब डॉ वैद्य से हिन्दू राष्ट्र के मुद्दे पर सवाल हुआ, तब उन्होंने कहा कि राष्ट्र मतलब समाज होता है और वो पहले से ही हिन्दू है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि इस बात की घोषणा भी नहीं करनी है लेकिन हिंदुत्व को यहाँ के लोगों को अपने आचार-विचार में धारण करना होगा। उन्होंने ये भी कहा कि संघ सबको प्रेम और अपनेपन का आमंत्रण देगा। डॉ वैद्य ने जाति, लिंग और आर्थिक आधार पर भेदभाव को खत्म करने के बाद ही हिन्दू राष्ट्र हो पाना सम्भव बताया।

अन्य मुद्दों पर बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ मनमोहन वैद्य ने हिंदी भाषा के अधिक से अधिक प्रयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया है कि न्यायपालिका और अन्य प्रशासनिक काम हिंदी में होने चाहिए। भारतीय चिकित्सा पद्धति को उन्नत बताते हुए उन्होंने कहा कि आरोग्य भारती ने सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति को अपनाने का विचार रखा है।

संघ की समन्वय मीटिंग में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी जागरण मंच द्वारा जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही गई। डॉ वैद्य ने अर्थव्यवस्था को मापने का पैमाना सिर्फ GDP तक सीमित न रखने का विचार रखा।

डॉ. मनमोहन वैद्य ने कोरोना काल में देश की एकजुटता को याद दिलाते हुए न सिर्फ डॉक्टर और सुरक्षाकर्मियों की तारीफ की बल्कि आम नागरिकों द्वारा किए गए सहयोग को भी सराहा। उन्होंने कहा कि संघ कार्य कोरोना में थोड़ा बाधित हुआ था पर अब फिर जोर पकड़ चुका है।

CUET के हिसाब से हो सेंट स्टीफंस कॉलेज में एडमिशन, वापस ले 85%-15% वेटेज वाला प्रॉस्पेक्टस: दिल्ली HC का निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंट स्टीफंस कॉलेज (St. Stephen’s College) की दाखिला प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर अपना फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने कॉलेज को 2022-23 में दाखिले के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से तय की गई नीतियों का पालन करने को कहा। सोमवार (12 सितंबर 2022) को कोर्ट ने अपने दिए फैसले में सेंट स्टीफंस कॉलेज को अपना प्रॉस्पेक्टस वापस लेने का निर्देश दिया।

संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और उनके प्रशासन के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार को दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्ण स्वतंत्र (बिना शर्त के, निरंकुश) नहीं माना। इसी आधार पर कोर्ट ने सेंट स्टीफंस कॉलेज (St. Stephen’s College) को 2022-23 में दाखिले के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से तय की गई नीतियों का पालन करने कहा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों से जुड़े संस्थान (जैसा कि दिल्ली का सेंट स्टीफंस कॉलेज है) अपने हिसाब से छात्र-छात्राओं को दाखिला देने के लिए यूनिवर्सिटी पर दबाव नहीं डाल सकती है।

सेंट स्टीफंस कॉलेज और CUET से जुड़ा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने सेंट स्टीफंस कॉलेज को अपना प्रॉस्पेक्टस वापस लेने का निर्देश दिया। सेंट स्टीफंस कॉलेज (St. Stephen’s College) के प्रॉस्पेक्टस में लिखा हुआ था कि उनके यहाँ एडमिशन लेने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के 85% जबकि उनके खुद के कॉलेज वाले इंटरव्यू को 15% वेटेज दिया जाएगा। कोर्ट में याचिका दाखिल होने की वजह भी यही बनी।

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) के स्कोर को 100 पर्सेंट वेटेज देना है। यह नियम हर कॉलेज, हर यूनिवर्सिटी पर लागू है। सेंट स्टीफंस कॉलेज ने लेकिन इस नियम से अलग जाकर अपने लिए स्पेशल नियम खुद ही बनाया। और इसके लिए उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और उनके प्रशासन के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार का तर्क रखा।

दिल्ली हाई कोर्ट में इस संबंध में जो जनहित याचिका दाखिल की गई थी, वो कनिका पोद्दार नाम की एक लॉ स्टूडेंट ने दायर की थी। दूसरी याचिका सेंट स्टीफंस कॉलेज की थी। जनहित याचिका में कोर्ट से सेंट स्टीफंस कॉलेज को यह निर्देश दिए जाने की माँग की गई थी कि वह कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में मिले मार्क्स के आधार पर एडमिशन दे।

बता दें कि अनुच्छेद 30 देश में धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों को कई अधिकार देता है। इसके तहत सभी अल्पसंख्यकों को देश में अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थानों को स्थापित और संचालित करने का अधिकार होगा।

‘दंगाइयों और गुंडों का गढ़ बन गई है AAP’: केजरीवाल की पार्टी के 2 विधायक कोर्ट में दोषी करार, दंगा भड़काने और पुलिस पर पत्थरबाजी का मामला

दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने दंगा भड़काने और पुलिस पर हमला करने के मामले में सोमवार (12 सितंबर, 2022) को आम आदमी पार्टी (AAP) के दो विधायकों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने 7 साल पुराने मामले की सुनवाई के दौरान AAP विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी और संजीव झा व 15 अन्य लोगों को दोषी ठहराया है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इसी सुनवाई में सज़ा का भी ऐलान किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 7 सितंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि पुलिस की ओर से पेश किए गए सबूतों व गवाहों से साफ है कि दोनों AAP विधायक न केवल दंगाई भीड़ में शामिल थे बल्कि नारेबाजी कर भीड़ को भड़काने का काम भी किया था। इन दोनों विधायकों के उकसाने के बाद ही भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की थी।

बता दें, यह पूरा मामला 20 फरवरी, 2015 का है। इस मामले में जब एक बेक़ाबू भीड़ ने दिल्ली के बुराड़ी पुलिस स्टेशन पर हमला करते हुए पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। ये सभी दंगाई पुलिस से गिरफ्तार किए गए दो लोगों को छोड़ने की माँग कर रहे थे। इस हमले में हवलदार भारत रतन, मोहन लाल और कॉन्स्टेबल बाबू सहित कई जवान घायल हुए थे।

आम आदमी पार्टी के दो विधायकों को दोषी करार दिए जाने के बाद भाजपा अरविंद केजरीवाल की पार्टी पर हमलावर है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “फिर एक बार AAP का घिनौना चेहरा हुआ जग जाहिर हुआ है। AAP के 2 विधायकों को कोर्ट ने दंगा भड़काने और पुलिस के साथ मारपीट करने में दोषी करार दिया है। ऐसे ही दंगाइयों-गुंडों का आप गढ़ बन गई है। अरविंद केजरीवाल संविधान की धज्जियाँ उड़ाने वाले इन लोगों को पार्टी और विधायक पद से तुरंत बरख़ास्त करो।”

दंगा भड़काने के आरोपित अखिलेशपति त्रिपाठी दिल्ली की मॉडल टाउन सीट से विधायक हैं। जबकि दूसरे आरोपित संजय झा दिल्ली के ही बुराड़ी से विधायक हैं। इन दोनों AAP विधायकों के आलवा कोर्ट ने बलराम झा, श्याम गोपाल गुप्ता, किशोर कुमार, ललित मिश्रा, जगदीश चंद्र जोशी, नरेंद्र सिंह रावत, नीरज पाठक, राजू मलिक, अशोक कुमार, रवि प्रकाश झा, इस्माइल इस्लाम, मनोज कुमार, विजय प्रताप सिंह, हीरा देवी और यशवंत को भी दोषी ठहराया है। 

SSB बेस कैंप हो या सड़क, गाँव हो या खेत-सुनसान… हर जगह मस्जिद-मदरसे-मजार: UP के बलरामपुर से नेपाल के जरवा बॉर्डर तक OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की दसवीं रिपोर्ट:

बलरामपुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में मस्जिदें-मदरसे और मजारें बढ़ने की जमीनी सच्चाई का पता लगाने के लिए हमने इसके सीमावर्ती इलाकों का भी दौरा किया। बलरामपुर जिले के शहरी इलाकों में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उससे जुड़ी समस्याओं वाली हमारी रिपोर्ट आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

सीमावर्ती इलाकों में रिपोर्टिंग के दौरान हमने बलरामपुर जिले में नेपाल सीमा के सबसे अंतिम और बड़े मार्केट तुलसीपुर को केंद्र बनाया। यहीं से हमने बढ़नी बॉर्डर रोड, जरवा बॉर्डर रोड के साथ-साथ श्रावस्ती रोड पर दिखने वाली इबादतगाहों की जानकारी जुटाई।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

SSB बेस कैम्प से 1 किलोमीटर दूर मस्जिद

नेपाल बॉर्डर की रक्षा करती SSB कैम्प के बेस ऑफिस बलरामपुर शहर से जैसे ही हम तुलसीपुर की दिशा में सीमाओं की तरफ बढ़े, तब हमें मुख्य सड़क पर ही एक बड़ी मस्जिद दिखाई दी। ख़ास बात ये है कि ये मस्जिद SSB कैम्प और थाना कोतवाली देहात के बीच में बनी हुई है। इस मस्जिद के आस-पास जिला न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी हैं।

SSB बेस कैम्प के पास बनी मस्जिद

शिवा नगर इलाके में 2 मस्जिदें आस-पास

जैसे ही हम तुलसीपुर की तरफ आगे बढ़े, बलरामपुर शहर से लगभग 5 किलोमीटर बाद शिवा नगर इलाके में हमें 2 मस्जिदें आस-पास दिखाई दीं। सड़क से दोनों मस्जिदों की दूरी क्रमशः आधे और एक किलोमीटर थी। इनमें से एक तो खेतों के बीच नई बनी दिखाई दे रही थी। यहाँ यह बात गौर करने योग्य है कि यही रास्ता बढ़नी और जरवा जैसे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से भी जोड़ता है।

शिवा नगर इलाके में खेतों में बनी नई मस्जिद

इसी मस्जिद से बस कुछ ही मीटर की दूरी पर दूसरी मस्जिद साफ-साफ दिखाई देती है।

पहली मस्जिद सिंगल मीनार और दूसरी वाली डबल मीनार के साथ

सड़क से सटी मज़ार

इसी सड़क पर थोड़ा आगे बढ़ने के बाद हमें एक मज़ार दिखा। मज़ार के आस-पास सड़क पर कुछ गाएँ दिखाई दीं। मज़ार का हालत देख कर लगा कि उस पर रंग-रोशन नया हुआ था। आस-पास हमें कोई इस मज़ार का इतिहास नहीं बता पाया।

सड़क के किनारे बनी मज़ार

लौकहवा गाँव में 2 मस्जिदें

जरवा बॉर्डर पर बढ़ते हुए तुसलीपुर बाजार से लगभग 4 किलोमीटर पहले हमें लौकहवा नाम का गाँव दिखाई दिया। इस गाँव में हमें मुख्य सड़क से ही 4 मीनारें दिखीं। स्थानीय निवासी सीपी मिश्रा ने हमें बताया कि गाँव मुस्लिम बाहुल्य है और उसमें मस्जिदों के अलावा मदरसे भी हैं।

लौकहवा गाँव में इबादतगाहें

तुलसीपुर शहर में घुसते ही मदरसा

तुलसीपुर वैसे देवीपाटन मंदिर के लिए जाना जाता है। दुनिया भर के श्रद्धालु यहाँ आते रहते हैं। जैसे ही हम इस शहर में प्रवेश किए, वैसे ही हमें एक मदरसा दिखाई दिया। इस मदरसे का नाम ‘जमीयत बनत अल सलाहित सिन’ है। यह मदसा जरवा बॉर्डर जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित है। इसके आस-पास कुछ अन्य बोर्ड उर्दू भाषा में लिखे हुए थे।

तुलसीपुर स्थित मदरसा जमीयत बनत अल सलाहित सिन

जरवा की तरफ बढ़ते ही हमें तुलसीपुर बाजार के मुहाने पर एक और मदरसा दिखा। इस मदरसे का नाम मदरसा अहले सुन्नत फैज़ुल उलूम है। हरे रंग से रंगे इस मदरसे में फ़िलहाल ताला लगा हुआ था और छात्र नहीं दिखाई दिए।

मदरसा अहले सुन्नत फैज़ुल उलूम

तुलसीपुर बाजार के बाहर ही मुख्य सड़क पर हमें एक और ईमारत दिखी, जिस पर अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ था। हम हालाँकि यह नहीं पता लगा पाए कि वो इमारत किस काम में आती है।

अरबी में लिखे कुछ शब्द

तुलसीपुर जरवा रोड पर कई मज़ारें और इबादतगाहें

बलरामपुर-तुलसीपुर रोड से जब हम तुसलीपुर-जरवा रोड की तरफ आगे बढ़े, तब भी इबादतगाहों के मिलने का सिलसिला ज्यों का त्यों रहा। लगभग 15 किलोमीटर लम्बी नेपाल की ओर जाने वाली इस सड़क पर भी हमें जगह-जगह मस्जिदें, मदरसे और इबादतगाहें दिखीं। यहाँ ख़ास बात ये दिखी कि लोगों के घर भले ही टूटे-फूटे हों पर इबादतगाहें चमचमाती हालत में थीं।

जरवा रोड पर बनी इबादतगाह

हमें कई इबादतगाहें तो ऐसी जगहों पर दिखीं, जहाँ आस-पास आबादी ही नहीं थी। हमने वहाँ से गुजर रहे लोगों से पूछा कि उस जगह इबादत करने कौन आता है तो हमें किसी ने साप्तहिक तो किसी ने मासिक मेला लगना बताया।

एकांत में बनी इबादतगाह

तुलसीपुर बाजार खत्म होते ही हमें आउटर में एक दरगाह दिखाई दी। हमें बताया गया कि उस दरगाह पर मुस्लिमों से कहीं ज्यादा हिन्दू आते हैं। हमें ये भी बताया गया कि उस दरगाह पर अगरबत्ती और चादरपोशी आदि का टर्न ओवर लाखों रुपए महीने का है।

तुलसीपुर बाजार के बाहर बनी दरगाह

खाली स्थानों पर मज़ारों के पक्के और नए निर्माण भी जरवा बॉर्डर की तरफ बढ़ते हुए साफ देखे जा सकते हैं।

जरवा बॉर्डर मार्ग पर एक और मज़ार

इन मज़ारों के बारे में एक ख़ास बात का भी पता लगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले इन्हें एक निश्चित हिस्से में पक्का बनाया गया। फिर इनके आस-पास के एक बड़े हिस्सा का पक्का निर्माण करवाया गया। अधिकतर मामलों में यह निर्माण लगभग मुख्य सड़क तक पहुँचता दिखाई देता है।

सड़क से सटी ईदगाह

जरवा बॉर्डर की तरफ जाते हुए हमने पाया कि इबादतगाहों का निर्माण न सिर्फ सड़क के किनारे हुआ है बल्कि गाँवों के बीच में भी मस्जिदों को देखा जा सकता है। ऐसी मस्जिदें हमें कई गाँवों में दिखीं।

गाँव के बीच मस्जिद
मदरसातुल मुदा

जरवा बॉर्डर के रास्तों पर हमें कई मदरसे भी दिखाई दिए। इन मदरसों में पढ़ने वाले कई छात्र भी मौजूद थे।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पढ़ें पाँचवीं रिपोर्ट : महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

पढ़ें छठी रिपोर्ट : बौद्ध-जैन मंदिरों के बीच दरगाह बनाई, जिस मजार को पुलिस ने किया ध्वस्त… वो फिर चकमकाई: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी – OpIndia Ground Report

पढ़ें सातवीं रिपोर्ट : हनुमान गढ़ी की जमीन पर कब्जा, झारखंडी मंदिर सरोवर में ताजिया: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, असर UP के बलरामपुर में – OpIndia Ground Report

पढ़ें आठवीं रिपोर्ट : पुरातत्व विभाग से संरक्षित जो जगह, वहाँ वक्फ की दरगाह-मजार: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, मुसीबत में बौद्ध धर्मस्थल – OpIndia Ground Report

पढ़ें नौवीं रिपोर्ट : 2 मीनारों वाली मस्जिदें लोकल, 1 मीनार वाली अरबी पैसे से… लगभग हर गाँव में मदरसे: नेपाल बॉर्डर के मौलाना ने बताया इसमें कमीशन का खेल – OpIndia Ground Report

लाल किले की रामलीला, ‘आदिपुरुष’ प्रभास के हाथों रावण दहन: राष्ट्रपति मुर्मू और PM मोदी को भी आमंत्रण, कोरोना के कारण 2 साल से रुका हुआ था आयोजन

लाल किले में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘लव कुश रामलीला’ के दशहरा उत्सव में साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार प्रभास बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे और रावण दहन करेंगे। बता दें, बीते 2 सालों में कोरोना महामारी के चलते यह विशाल आयोजन नहीं हो सका था। लेकिन, इस बार होने वाली रामलीला और रावण दहन में कई सुपरस्टार शामिल होंगे।

ऐतिहासिक लव कुश रामलीला में रावण दहन के लिए प्रभास को चुने जाने पर बात करते हुए ‘लव कुश रामलीला’ समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने कहा, “साउथ फिल्म इंडस्ट्री में एक बहुत लोकप्रिय नाम होने के अलावा, प्रभास ऐसे प्रोजेक्ट कर रहे हैं जो हमारे भारतीय इतिहास में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। प्रभास ने बाहुबली फिल्म की और अपनी आगामी परियोजना आदिपुरुष में भी राम की भूमिका निभाते नजर आएँगे। इसलिए, हमें लगा कि इस साल रावण दहन करने के लिए वह सबसे बेहतर विकल्प हैं।”

अर्जुन कुमार ने यह भी कहा, “एक और कारण है कि हमने प्रभास को आमंत्रित किया है। यह कारण है उनकी लोकप्रियता। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के एक्टर्स ने आज पूरे भारत में इतनी लोकप्रियता हासिल की है। उनमें प्रभास सबसे आगे हैं। हमें अभी अन्य हस्तियों को आमंत्रित करना है, हम बेहद खुश हैं कि प्रभास आ रहे हैं। इस कार्यक्रम में आकर वह नई पीढ़ी और युवाओं को हमारी संस्कृति की ओर आकर्षित करेंगे।”

अर्जुन कुमार ने यह भी कहा है कि दशहरे में कुल तीन पुतले होंगे। एक पुतला रावण का, एक कुंभकरण का और एक मेघनाद का। प्रभास इन तीनों ही पुतलों का दहन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल के पुतले 100 फीट ऊँचे होंगे। लव कुश रामलीला समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी आमंत्रित किया है। हालाँकि, इन दोनों की उपस्थिति की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

गौरतलब है कि प्रभास अपनी आगामी फिल्म ‘आदिपुरुष’ के प्रमोशन में जुटे हुए हैं। आदिपुरुष हिंदुओं की आस्था और प्रेरणा के प्रतीक महाकाव्य रामायण पर आधारित है। इस फिल्म में प्रभास के अलावा सोनल चौहान, सैफ अली खान और कृति सेनन को अहम किरदारों में कास्ट किया गया है।फिल्म का निर्माण टी-सीरीज फिल्म्स और रेट्रोफाइल्स द्वारा किया जा रहा है। इसे एक ही समय में हिंदी और तेलुगु दोनों में शूट किया गया था। तमिल, मलयालम और कन्नड़ में भी इस फिल्म को डब करके रिलीज किया जाएगा।

पौराणिक ऐतिहासिक महाकाव्य रामायण पर आधारित इस फिल्म में प्रभास राम की भूमिका में नजर आएँगे। जबकि, कृति सेनन जानकी (सीता) और सैफ अली खान लंकेश (रावण) के रूप में दिखाई देंगे। आदिपुरुष 12 जनवरी, 2023 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज होगी।

पिता ने डाँटा तो घर छोड़ फरार हुई 17 साल की YouTuber, पुलिस को 500 किलोमीटर दूर मिली: 44 लाख हैं सब्सक्राइबर्स

महाराष्ट्र की एक 17 वर्षीय यूट्यूबर पिता की डाँट के बाद घर छोड़ कर भाग गई थी, जो कि अब प्रदेश के इटारसी स्टेशन में मिली है। बताया जा रहा है, घर में मिलीडाँट के बाद यह लड़की अपने पैतृक घर लखनऊ जा रही थी। इस लड़की को फैंस के बीच बिंदास काव्या के नाम से जाना जाता है। जबकि वास्तविक नाम काव्या यादव है। इसके यूट्यूब में 44 लाख सब्सक्राइबर्स हैं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में रहने वाली यूट्यूबर काव्या शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को दोपहर 2 बजे घर से निकल गई थी। जिसके बाद, उसके माता-पिता ने उसकी खोज करनी शुरू की। इसके बाद भी काव्या का कुछ पता नहीं चल रहा था।

काफी परेशान होने के बाद, काव्या के माता-पिता ने उसके यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो अपलोड करते हुए काव्या के लापता होने की जानकारी दी थी। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा था। काव्या के पैरेंट्स ने उसके गुम होने की सूचना औरंगाबाद के छौनी थाने में भी दी थी। इसके बाद औरंगाबाद पुलिस और जीआरपी ने उसे ढूँढने के लिए संयुक्त अभियान शुरू करते हुए कई थानों को सूचना दी थी।

इस सूचना और वायरल वीडियो के आधार पर ही जीआरपी को जानकारी मिली की काव्या महाराष्ट्र के भुसावल से आ रही कुशीनगर एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में है। इसके बाद इटारसी जीआरपी ने सक्रियता दिखाते हुए उसे ढूँढ लिया और फिर उसके पैरेंट्स को इसकी सूचना दी।

इस पूरे मामले में, भोपाल रेल एसपी हितेश चौधरी ने कहा है, “औरंगाबाद पुलिस ने सूचना दी थी कि 17 साल की किशोरी यूट्यूब स्टार है, और वहाँ से लापता हुई है। संभवत: वह एलटीटी-गोरखपुर कुशीनगर एक्सप्रेस में सवार हुई है। इटारसी में कुशीनगर एक्सप्रेस में सर्चिंग की तो किशोरी स्लीपर कोच में बैठी मिली। चाइल्ड लाइन की मदद से उसे थाने लाया गया। रात 12 बजे किशोरी के परिजन इटारसी पहुँचे।” उसके मिल जाने के बाद माता-पिता ने YouTube से सूचना दी कि वो उसे लेने जा रहे हैं।

कारतूस के साथ धराया AAP विधायक अमानतुल्लाह खान का PA, शाहीन बाग़ का रहने वाला है नोमान अहमद: पटना एयरपोर्ट पर पकड़ाया

बिहार की राजधानी पटना स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा’ पर AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के PA नोमान अहमद को हिरासत में लिया गया है। वो अपने साथ बैग में कारतूस लेकर जा रहा था। नोमान अहमद दिल्ली के शाहीन बाग़ स्थित अबुल फजल एन्क्लेव का रहने वाला है। वो स्पाइसजेट की फ्लाइट से पटना से दिल्ली जाने वाला था। सुरक्षा जाँच के दौरान CISF जवानों ने उसके बैग से कारतूस बरामद किया।

ओखला विधानसभा क्षेत्र से MLA अमानतुल्लाह खान ‘दिल्ली वक्फ बोर्ड’ के अध्यक्ष भी हैं। उन्हें AAP के टिकट और 2020 में लगातार दूसरी बार इस पद के लिए चुना गया। उनके PA के बैग से जो कारतूस मिला, वो 7.65 एमएम का है। उसके पास हथियार का कोई लाइसेंस भी नहीं था। रविवार (11 सितंबर, 2022) की रात उन्हें पटना पुलिस के हवाले कर दिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वो ‘आम आदमी पार्टी’ के विधायक का पर्सनल अस्सिस्टेंट है।

उसने दावा किया कि वो विधायक के ‘पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO)’ का बैग लेकर आया था, ऐसे में गलती से कारतूस उसके अंदर रह गया। पुलिस ने दिल्ली से PSO से हथियार का लाइसेंस मँगाया है। इसके बाद एक बॉन्ड भरवाया जाएगा, फिर नोमान अहमद को छोड़ दिया जाएगा। वो रात के 9:20 बजे SG-8390 फ्लाइट से दिल्ली जाने वाला था। सिक्योरिटी होल्ड एरिया में तलाशी के दौरान ये कारतूस मिला। पूछताछ में संतोषजनक जवाब न मिलने पर उसकी यात्रा रद्द कर दी गई।

अब उसके बयान की पुष्टि तभी हो पाएगी, जब दिल्ली से लाइसेंस की कॉपी पटना पुलिस को मिल जाती है। चेक-इन के बाद रात के करीब 8:23 बजे सिक्योरिटी जाँच के दौरान उसे रोका गया था। हाल ही में अमानतुल्लाह खान ISIS के आतंकी जामिया छात्र मोहसिन की गिरफ़्तारी पर उसका बचाव कर चुके हैं। अमानतुल्लाह खान अक्सर अपने कट्टरपंथी बयानों के कारण विवादों में रहते हैं। मोहसिन ट्यूशन के बहाने युवाओं को वीडियो दिखा कर ISIS से जोड़ रहा था।

‘अल्लाह ने जो भी कहा है, वो मानना ही पड़ेगा’: सुप्रीम कोर्ट को बुर्का पक्ष के वकील सलमान खुर्शीद ने दी कुरान, कहा – न मानने वालों को मिलता है दंड

सुप्रीम कोर्ट में आज हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनना इस्लाम में एक मौलिक मजहबी प्रथा नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता युसूफ मुछला पेश हुए। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के मुताबिक हिजाब उनके मजहब का हिस्सा है और पूर्व छात्र कई वर्षों से बिना किसी रोक-टोक हिजाब पहन रहे हैं।

इस पर जस्टिस गुप्ता ने कहा, “आपका तर्क क्या है? हम केवल उच्च न्यायालय के समक्ष की गई बातों को ध्यान में रख सकते हैं।” इस पर युसूफ कहते हैं कि इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। इस पर मेरे मित्र कामत ने निवेदन किया है, जिसे मैं दोहराऊँगा नहीं।” उन्होंने कहा, “यह मेरी प्राथमिकता है कि मैं हिजाब पहनूँ या नहीं। कुरान कहता है मर्यादा का पालन करो और उसका पालन करने के लिए मेरे पास यह व्यक्तिगत अधिकार होना चाहिए।”

मुछला ने आगे कहा अदालत को कुरान की व्याख्या का काम शुरू नहीं करना चाहिए और सिर्फ एक नजरिए को नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने यही किया है और अब्दुल्ला युसूफ अली के अनुवाद को अलग रूप में लिया गया है।

इस पर जस्टिस धूलिया ने कहा, “मैं इस बात को समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप मजहबी प्रथा के रूप में दावा करते हुए उच्च न्यायालय गए। HC के पास क्या विकल्प है? एचसी अपने तरीके से निर्णय देता है और आप कहते हैं कि यह नहीं किया जा सकता है।”

इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद इस मामले पर कहते हैं, “कुरान मानव निर्मित नहीं हैं। इसमें आयतें हैं, नियम हैं, जो पैगंबर के माध्यम से आए थे। यह सब उनके अनुसार बनाया गया है और यह अनिवार्य है।”

उन्होंने कहा, “अन्य धर्मों के उलट इस्लाम में अनिवार्य और गैर-अनिवार्य का कोई दोहरा मापदंड नहीं हैं। अल्लाह का कहा हुआ हर शब्द अनिवार्य है।” उनके मुताबिक पैगंबर ने जो किया वह कुरान के शब्द हैं। इस्लाम में अनिवार्य और गैर-अनिवार्य का बाइनरी नहीं है। इसके बाद खुर्शीद ने जजों को कुरान की प्रतियाँ सौंपी। उन्होंने कहा कि कुरान की बातें न मानने वालों के लिए दंड का भी प्रावधान है।

जस्टिस धूलिया ने इस पर खुर्शीद से पूछा कि आपकी क्या राय है? क्या यह एक धार्मिक मामला है? उन्होंने कहा, “इसे धर्म के रूप में देखा जा सकता है, विवेक के रूप में देखा जा सकता है, संस्कृति के रूप में देखा जा सकता है, व्यक्तिगत गरिमा और गोपनीयता के रूप में देखा जा सकता है।” इसके बाद खुर्शीद ने बेंच को बुर्का, जिलबाब, हिजाब के बीच के अंतर को समझाया। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में महिलाओं के लिए घूँघट बहुत जरूरी माना जाता है, जब वे बाहर जाती हैं।

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कामत ने भी संविधान के अनुच्छेद 25(2) के तहत अपनी दलीलों के दौरान सवाल उठाया, “अगर मैं एक स्कार्फ पहनता हूँ, तो मैं किसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहा हूँ।” सुप्रीम बता दें कि कोर्ट ने आठ सितंबर को राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध के राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। शीर्ष न्यायालय ने हिजाब बैन पर अगली सुनवाई आज (12 सितंबर 2022) तय की थी।

हिजाब विवाद पर हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

बता दें कि कर्नाटक में 14 मार्च, 2022 को हाई कोर्ट का फैसला आया था। इसमें कहा गया था कि छात्राएँ तय यूनिफॉर्म को पहनकर आने से मना नहीं कर सकती हैं। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में 23 याचिकाएँ डालकर चुनौती दी गई। इस मामले पर सुनवाई के दौरान हिजाब को उचित ठहराने के लिए पगड़ी और तिलक पर भी वकील राजीव धवन ने प्रश्न खड़े किए थे। हालाँकि जस्टिस गुप्ता ने कहा था , “पगड़ी को हिजाब के समान नहीं कहा जा सकता, वह धार्मिक नहीं होती। इसे राजशाही दरबारों में पहना जाता था। मेरे दादा जी कानून की प्रैक्टिस करते हुए उसे पहनते थे। इसकी तुलना हिजाब से मत कीजिए।”