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Engineer’s Day पर जानिए उस बाँध के बारे में, जो 2000 वर्षों से कर रहा काम: प्राचीन भारत की करिश्माई तकनीक, 10 लाख एकड़ की करता है सिंचाई

भारत 15 सितंबर को ‘Engineer’s Day’ मनाता है। कारण – इस दिन मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या की जयंती होती है। भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या, जो मैसूर के दीवान रहे थे। लेकिन, हम उन्हें इस रूप में नहीं याद करते। उन्हें याद किया जाता है एक उत्कृष्ट अभियंता के रूप में, जिनका जन्म कर्नाटक के मुद्देनाहल्ली में हुआ था। भारत उनकी 160वीं जयंती मना रहा है। मैसूर का कृष्णराज सागर बाँध हो या ग्वलियर का तिघरा बाँध, कई बड़े इलाकों की सिंचाई व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम पर उनकी छाप है।

इस ‘अभियंता दिवस’ पर हमें एक बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए कि रामायण-महाभारत के काल से लेकर हड़प्पा और मौर्य-गुप्त साम्राज्यों तक, प्राचीन काल में भी भारत इस क्षेत्र में दुनिया के बाकी हिस्सों से कई गुना आगे था। रामायण में समुद्र पर पुल बनाने का जिक्र हो या फिर महाभारत में लाक्षागृह निर्माण, ये सब कहानियाँ हमें बताती हैं कि हम उस वक्त कितने उन्नत थे। लेकिन, आज हम आपको जिस चीज के बारे में बताने जा रहे हैं, वो आज भी मौजूद है।

एक ऐसा बाँध, जो पिछले 1850 वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहा है और आगे भी कई वर्षों तक ये यूँ ही संचालित रहेगा, ऐसी उम्मीद है। इसे सन् 150 में बनवाया गया था। अब आप सोचिए, उस समय भारत के पास कितने उत्कृष्ट इंजीनियर्स हुआ करते थे। ये विश्व का चौथा सबसे पुराना ‘Water Diversion’ अथवा ऐसा ‘Water Regular Structure’ है, जो अभी भी काम कर रहा है। इतना ही नहीं, अपनी शानदार कलाकृति के लिए ये आज पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बना रहता है।

हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु में तिरुच्चिराप्पल्ली से तंजावुर की तरफ बहती कावेरी नदी में स्थित कल्लानाई बाँध की, जिसे ‘The Grand Anicut’ भी कहा जाता है। इसे महान चोल शासक करिकाल द्वारा बनवाया गया था। ये बाँध तिरुच्चिराप्पल्ली से 15 किलोमीटर और तंजावुर से 45 किलोमीटर की दूसरी पर स्थित है। एक बड़े क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की ज़रूरत पड़ने पर इस बाँध की आवश्यकता महसूस हुई। उस क्षेत्र को ‘चोला नाडु’ के रूप में भी जाना जाता है, जो डेल्टा वाला इलाका है और चोल साम्राज्य का सांस्कृतिक गढ़ भी रहा।

राजा करिकाल के बारे में बता दें कि उन्हें चोल राजवंश के महान शासकों में से एक माना जाता है। संगम साहित्य में उनके बारे में वर्णन है। उनका एक पाँव बचपन में ही किसी दुर्घटना में जल गया था, इसीलिए उनका ये नाम पड़ा। वहीं इस शब्द का एक अर्थ ‘हाथियों का संहारक’ भी बनता है। कम उम्र में ही उन्हें पिता की मृत्यु के बाद देश से निकाल दिया गया था और बाद में जेल में डाल दिया गया था, लेकिन वो दुश्मनों का नाश करने में सफल रहे।

उन्होंने वेन्नी के युद्ध में पंड्या और चेर राजाओं को हराया। दोनों के गठबंधन के साथ-साथ 11 छोटे-मोटे राजाओं ने उनके विरुद्ध इस अभियान में भाग लिया था, लेकिन इस गठबंधन की हार ने दक्षिण भारत में करिकाल को प्रसिद्ध कर दिया। उन्होंने पूरी की पूरी श्रीलंका को जीत लिया था। अधिकतर वहीं के मजदूरों का इस्तेमाल ‘The Grand Anicut’ को बनवाने में किया गया था। इसके लिए बड़े-बड़े पत्थरों को एक जगह से दूसरे जगह लेकर जाना था।

बताया जाता है कि कावेरी पर इस बाँध को बनाने के लिए श्रीलंका के 12,000 मजदूरों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने पानी की दिशा बदलने और बाढ़ से बचाने के साथ-साथ सिंचाई व्यवस्था के लिए वहाँ बड़ी-बड़ी दीवारें बनवाई थीं। इस बाँध को बनवाने के लिए एक विशाल पत्थर को एक खास रूप दिया गया, जो कि 1080 फ़ीट (329 मीटर) लंबा और 60 फ़ीट (20 मीटर) चौड़ा है। कावेरी नदी की मुख्य धारा के बीच में इस पत्थर को रखा गया था।

नहरों के जरिए फिर नदी के पानी को डेल्टा क्षेत्रों में पहुँचाया गया, ताकि कृषि उत्पादन बढ़े। हालाँकि, फिलहाल इसका गहन अध्ययन इसीलिए भी मुश्किल है, क्योंकि अंग्रेजों के आने के बाद आसपास भी कई संरचनाएँ बनवाई गई हैं। ये एक प्रकार के ‘चेक डैम’ है, जिसे पत्थरों या कंक्रीट से बनाया जाता है। इस तरह का बैरियर बना कर पानी की धारा को दूर के गाँवों में भेजा जाता है। शुरुआत में इस कल्लानाई बाँध से 69,000 एकड़ में सिंचाई की व्यवस्था हुई थी, जो अब बढ़ कर 10 लाख एकड़ हो गया है।

सिविल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों का भी मानना है कि इसका मूल डिजाइन अनूठा है, इसकी चिनाई थोड़ी टेढ़ी हुई है। इसमें एक स्लोप के आकर बनाते हुए पत्थर लगाए गए हैं। साथ ही आगे से पीछे तक एक अनियमित ढलाई है। इस बाँध के माध्यम से कावेरी नदी के पानी को कोल्लीडम नदी तक पहुँचाया गया। इसके लिए एक छोटी धारा का इस्तेमाल किया गया, जो दोनों को जोड़े। जब नदी में पानी का तर बढ़ जाता था, तब कोल्लीडम नदी चौड़ी हो जाती थी।

अतः ये ज्यादा तेज़ और सीधी दिशा में होने के साथ-साथ ढलान की तरफ जाती थी। सिविल इंजीनियरिंग की भाषा में ये ‘Flood Carrier’ बन जाती थी। बाढ़ की स्थिति में कोल्लीडम के माध्यम से सारा पानी समुद्र में चला जाता था और किसानों की फसल को नुकसान नहीं होता था। विशेषज्ञ चित्र कृष्णन ने पाया था कि ये बाँध इसीलिए अच्छी तरह काम करता था, क्योंकि सभी प्राकृतिक बलों को काबू में करने की बजाए ये सिर्फ अवसादन (Sedimentation) की प्रक्रिया और पानी की धारा को एक नया अकार देता था।

कल्लानाई बाँध सचमुच में ही एक ‘Engineering Marvel’ है। Mass और Gravity बढ़ाने के लिए नदी में सबसे पहले बड़े-बड़े पत्थरों को डाला गया, जिसके बाद उनके ऊपर छोटे-छोटे पत्थरों से चिनाई के के एक आधार तैयार किया गया, तब जाकर उसके ऊपर दीवार खड़ी की गई थी। अंग्रेज इस बाँध से इतने चकित हो गए थे कि उन्होंने अपने सैन्य अभियंताओं को इसके अध्ययन के काम पर लगा दिया। सर ऑर्थर कॉटन ने इसी की नकल करते हुए इसके एक छोटा रूप 19वीं सदी में कावेरी की एक शाखा नदी पर बनाया।

वहाँ पर एक भव्य मेमोरियल भी बनाया गया है, जिसमें हाथी पर बैठे करिकाल की प्रतिमा है। इसका नाम ‘करिकाल चोल मंडपम’ रखा गया है। इसके पास में ऑर्थर कॉटन की मूर्ति भी लगाई गई है, जिन्होंने उस बाँध की नकल कर दूसरा बाँध बनाया था। इस बाँध से न सिर्फ एक बड़ा क्षेत्र बाढ़ से तबाह होने से बचता है, बल्कि किसानों की सिंचाई की भी उत्तम व्यवस्था मिलती है। ये हमारे प्राचीन दूरदर्शी शासकों और महान इंजीनियरों का ही तो कमाल है।

आप भी इस बाँध को देखने के लिए तमिलनाडु घूमने जा सकते हैं। यहाँ का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन लालगुडी (Lalgudi) है, जो 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ये बाँध थोगुर गाँव में स्थित है, जो सरकारपलायम गाँव से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट यहाँ से 13 किलोमीटर की दूरी पर है। ये संरचना जवाब है उन लोगों को भी, जो ये दावे करते थकते नहीं कि भारतीय असभ्य थे और उन्हें बाहर से आए लोगों ने सब कुछ सिखाया।

‘पंजाब में नहीं लगा रहे कोई प्लांट’: इधर अपनी पीठ थपथपाते रहे CM भगवंत मान, उधर BMW ने पार्टी में डाल दी खलल तो हुई फजीहत

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी पार्टी AAP की एक बार फिर से फजीहत हो गई है। अबकी मामला BMW के पंजाब में प्लांट से जुड़ा हुआ है। दरअसल, पंजाब सरकार की ओर से यह दावा किया गया कि BMW पंजाब में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली है, लेकिन इस दावे की पोल बीएमडबल्यू ने अगले ही दिन खोल दी और इसे सिरे से नकार दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब सरकार की तरफ से मंगलवार (13 सितंबर, 2022) को एक प्रेस रिलीज जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता कंपनी BMW पंजाब में अपनी ऑटो पार्ट मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए सहमत हो गई है। सीएम मान की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की गई, जिसमें वे मीटिंग करते दिखाई दे रहे हैं।

इस मामले में सीएम भगवंत मान ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि कर डाली। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बीएमडबल्यू भारत के अंदर पंजाब में अपनी दूसरी इकाई लगाने जा रही है। उन्होंने बताया कि इसके पहले कंपनी का यूनिट सिर्फ चेन्नई में है। साथ ही कहा कि इससे राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

बताया जा रहा है कि ऑटो कंपनी बीएमडबल्यू के हेडक्वार्टर में सीएम भगवंत मान ने 13 सितंबर को एक दौरा किया। कहा यह भी जा रहा था कि वहीं इस संबंध में निर्णय लिया गया था। वहीं अब खबर यह आ रही है कि पंजाब सरकार के बड़े-बड़े दावों को ऑटो कंपनी ने नकार दिया है और इसे लेकर कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर प्रेस रिलीज की गई है।

बीएमडबल्यू ने इन दावों को नकारा

ऑटो कंपनी बीएमडबल्यू की ओर से बुधवार (14 सितंबर, 2022) को एक प्रेस रिलीज किया गया, जिसमें कंपनी ने स्पष्ट तौर पर बताया कि कंपनी पंजाब में कोई यूनिट नहीं लगा रही है। अब कंपनी के इस बयान के बाद कुछ घंटे पहले वाहवाही लूटने वाले सीएम भगवंत मान लोगों के निशाने पर आ गए और सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर खरी खोटी सुनाई।

पूर्व सांसद प्रताप सिंह बाजवा (Former MP Pratap Singh Bajwa) ने ट्वीट कर सीएम पर हमला बोला। उन्होंने लिखा कि बीएमडब्ल्यू ने पंजाब में किसी भी प्रोजेक्ट की स्थापना से इनकार किया है, जैसा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया है। उन्होंने पूछा कि क्या इस पर सीएम अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं या वह पूरे राज्य से झूठ बोल रहे थे?

भाजपा पंजाब के नेता परमिंदर सिंह बराड़ ने इस मुद्दे पर सीएम को घेरा। उन्होंने कहा, “पहले अरविंद केजरीवाल फर्जी दावे करते थे, अब दुनिया के नक्शे पर देश को शर्मसार करने के लिए अपने ‘गुरु’ के नक्शेकदम पर चल रहे हैं ‘डमी’ सीएम भगवंत मान! पंजाब में प्लांट लगाने के दावे को बीएमडब्ल्यू के खंडन ने मान का पर्दाफाश कर दिया है और देशवासी उन्हें इस झूठ के लिए माफ नहीं करेंगे।”

गाँवों में अरबी-उर्दू लिखे हुए नल, UAE के नाम की मुहर: ज्यादा दाम देकर जमीनें खरीद रहे नेपाली मुस्लिम – OpIndia Ground Report

हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 12वीं रिपोर्ट:

पिछली रिपोर्ट में हमने बलरामपुर जिला मुख्यालय से नेपाल के जरवा बॉर्डर की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे जगह-जगह पर बन चुकी मस्जिदों और इबादतगाहों के बारे में विस्तार से बताया था। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएँगे कि उन्हीं रास्तों पर पड़ने वाले गाँवों के ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधि क्या कहते हैं।

यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

हिन्दुओं से ज्यादा जमीनें मुस्लिम खरीद रहे

बलरामपुर जिले के महराजगंज तराई इलाके के निवासी और व्यापारी शिवेंद्र कसौधन हमें तुलसीपुर बाजार की तहसील में मिल गए। उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए ये माना कि जिले में मुस्लिम आबादी हिन्दू जनसंख्या के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने ये भी कहा कि मुस्लिम अपने रिश्तेदारों को बसा रहे हैं और अधिकतर यही लोग हिन्दुओं की जमीनें खरीद रहे हैं। शिवेंद्र के मुताबिक, कई हिन्दू अपनी जमीनें उन मुस्लिमों को बेच देते हैं क्योंकि वो सामान्य से ज्यादा दाम देते हैं।

ऑपइंडिया से बात करते शिवेंद्र कसौधन (दाएँ)

शिवेंद्र ने हमें आगे बताया कि इलाके के सबसे दबंग नेता रिज़वान जहीर हैं, जो सिर्फ इसी सरकार (योगी सरकार) में कंट्रोल में हैं। उन्होंने कहा कि सपा कार्यकाल में देवीपाटन जैसा प्रसिद्ध मंदिर यहाँ स्थित होने के बावजूद भी इलाके में इस्लामी इबादतगाहों की संख्या बढ़ी हैं।

शिवेंद्र का मानना है कि मुस्लिमों की जो भी आबादी बढ़ी है, उनमें सिर्फ स्थानीय लोग नहीं बल्कि बाहरी भी शामिल हैं। पहले के मुकाबले अब सांप्रदायिक तनाव अधिक होने की बात स्वीकारते हुए शिवेंद्र ने स्थानीय प्रशासन से इस तरफ ध्यान देने की भी अपील की है।

यहाँ मुस्लिम समुदाय हिन्दुओं से मजबूत

जरवा जाते हुए नेपाल की सीमा के पास मौजूद बाबा मुक्तेश्वर नाथ धाम के पुजारी प्रदीप कुमार ने हमें बताया कि ये मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके में बना हुआ है। महंत के मुताबिक, उस क्षेत्र में न सिर्फ मुस्लिम समुदाय के पास हिन्दुओं के मुकाबले अधिक संख्या बल है, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से भी वो हिन्दुओं से आगे निकल चुके हैं।

पुजारी प्रदीप कुमार ने बताया कि मंदिर आसपास के हिन्दुओं की आस्था का केंद्र है और यहाँ उन्हें धर्म की शिक्षा मिलती है। पुजारी ने जानकारी दी कि जिस ग्राम सभा में ये मंदिर स्थित है, वहाँ का प्रधान मुस्लिम है।

मंदिर मुक्तेश्वर धाम और पुजारी प्रदीप

10 वर्षों में बढ़ी मुस्लिम जनसंख्या

जरवा के पास नेपाल बॉर्डर से सटे गाँव रतनपुर झिंगहा के निवासी और स्थानीय ग्राम प्रधान के चाचा ननकन मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि वो ‘भगवती आदर्श विद्यालय’ नाम का एक स्कूल भी चलाते हैं।

ननकन मिश्रा के भतीजे ने सिराज खान को हरा कर प्रधानी का चुनाव जीता था। उनसे पहले उसी गाँव की प्रधान नूरजहाँ नाम की मुस्लिम महिला थीं। ननकन के अनुसार, उनके गाँव में मुस्लिमों की आबादी लगभग 50% है और ये आबादी पिछले लगभग 10 साल में बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि उनके गाँव में ज्यादातर मुस्लिम आबादी नेपाल से आकर बसी है और बाकी कुछ भारत के अन्य स्थानों से आए हैं। मिश्रा ने इन बाहरी मुस्लिमों को ‘NRI टाइप का लोग’ बताया।

बाहरी लोगों की किसी ने नहीं की जाँच-पड़ताल

ननकन मिश्रा ने बताया कि आज तक किसी अधिकारी या कर्मचारी ने भी ये जाँचने की जहमत नहीं उठाई कि ये बाहरी लोग कौन हैं और कहाँ से आए हैं। अपने इलाके को मिश्रा ने सराय बताया और कहा कि जिसे जैसे भी रहना है, वो बिना रोक-टोक के रह सकता है। मिश्रा के मुताबिक, आबादी के साथ-साथ इलाके में मस्जिद और मदरसे भी उसी अनुपात में बढ़े हैं।

ननकन मिश्रा

बॉर्डर के हर गाँव में बढ़ी मस्जिदें और मदरसे

ननकन मिश्रा ने हमें बताया कि सिर्फ उनके ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती हर गाँव में मस्जिद और मदरसों की संख्या बढ़ी है। 50 वर्षीय ननकन ने अपने बचपन की याद ताज़ा करते हुए बताया कि तब उनकी जानकारी में इलाके में सिर्फ 2 मस्जिदें हुआ करती थीं, लेकिन अब सऊदी मॉडल की मस्जिदें भी दिखाई पड़ती हैं। मिश्रा के अनुसार, पड़ोस में महादेऊआ गाँव का भी यही हाल है। उन्होंने टंडवा नाम के गाँव में लगभग शत-प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की होने का अनुमान लगाया।

उर्दू और अरबी में नेमप्लेट वाले नल

ननकन मिश्रा ने आगे बताया कि उनके गाँव और आसपास के इलाकों में ऐसे नल लगे हैं, जिन पर अरबी भाषा की नेमप्लेट लगी हुई है। मिश्रा ने दावा किया कि ये नल सऊदी अरब के पैसे से लगे हैं।

उन्होंने बताया कि कोई लोकल मौलाना है, जो इन नलों को लगवा रहा है लेकिन अभी तक उसकी जाँच किसी ने भी नहीं की है। मिश्रा के मुताबिक, स्थानीय लोग इसलिए अधिकारियों से कोई शिकायत नहीं करते क्योंकि उन्हें पता है कि कोई कार्रवाई नहीं होनी है, उलटे दुश्मनी बढ़ जाएगी सो अलग।

ऑपइंडिया को भी दिखे अरबी नेमप्लेट वाले नल

ननकन मिश्रा द्वारा बताए गए उर्दू और अरबी नेमप्लेट वाले नलों की पुष्टि के लिए हमने खुद से खोज शुरू की। इस दौरान हमें ऐसे कई नल सड़क के किनारे और गाँव के अंदर लगे मिले। तुलसीपुर थाना क्षेत्र में ही आने वाले एक गाँव प्रेमनगर में नल पर अरबी भाषा में ‘संयुक्त अरब अमीरात एसोसिएशन’ और इंग्लिश में ‘खैर टेक्निकल सोसाइटी इंडिया’ लिखा मिला।

ऐसा ही एक नल खैरी चौराहे पर डॉक्टर इबादुर रहमान की क्लिनिक के सामने मुख्य सड़क के बगल लगा हुआ था। उन्होंने हमें बताया कि इसे ‘जकात’ के पैसे से लगाया गया है और ऐसे नल हिन्दू और मुस्लिम दोनों के घरों पर लगाए जाते हैं।

‘खैर टेक्निकल सोसाइटी’ के बारे में जानकारी जुटाने पर हमें पता चला कि ये NGO सिद्धार्थनगर के मुस्लिम बहुल बाजार डुमरियागंज के किसी व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाता है।

पढ़ें पहली रिपोर्ट : कभी था हिंदू बहुल गाँव, अब स्वस्तिक चिह्न वाले घर पर 786 का निशान: भारत के उस पार भी डेमोग्राफी चेंज, नेपाल में घुसते ही मस्जिद, मदरसा और इस्लाम – OpIndia Ground Report

पढ़ें दूसरी रिपोर्ट : घरों पर चाँद-तारे वाले हरे झंडे, मस्जिद-मदरसे, कारोबार में भी दखल: मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही नेपाल में कपिलवस्तु के ‘कृष्णा नगर’ पर गाढ़ा हुआ इस्लामी रंग – OpIndia Ground Report

पढ़ें तीसरी रिपोर्ट : नेपाल में लव जिहाद: बढ़ती मुस्लिम आबादी और नेपाली लड़कियों से निकाह के खेल में ‘दिल्ली कनेक्शन’, तस्कर-गिरोह भारतीय सीमा पर खतरा – OpIndia Ground Report

पढ़ें चौथी रिपोर्ट : बौद्ध आस्था के केंद्र हों या तालाब… हर जगह मजार: श्रावस्ती में घरों की छत पर लहरा रहे इस्लामी झंडे, OpIndia Ground Report

पढ़ें पाँचवीं रिपोर्ट : महाराणा प्रताप के साथ लड़ी थारू जनजाति बहुल गाँव में 3 मस्जिद, 1 मदरसा: भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी का ये है ‘पैटर्न’ – OpIndia Ground Report

पढ़ें छठी रिपोर्ट : बौद्ध-जैन मंदिरों के बीच दरगाह बनाई, जिस मजार को पुलिस ने किया ध्वस्त… वो फिर चकमकाई: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी – OpIndia Ground Report

पढ़ें सातवीं रिपोर्ट : हनुमान गढ़ी की जमीन पर कब्जा, झारखंडी मंदिर सरोवर में ताजिया: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, असर UP के बलरामपुर में – OpIndia Ground Report

पढ़ें आठवीं रिपोर्ट : पुरातत्व विभाग से संरक्षित जो जगह, वहाँ वक्फ की दरगाह-मजार: नेपाल सीमा पर बढ़ती मुस्लिम आबादी, मुसीबत में बौद्ध धर्मस्थल – OpIndia Ground Report

पढ़ें नौवीं रिपोर्ट : 2 मीनारों वाली मस्जिदें लोकल, 1 मीनार वाली अरबी पैसे से… लगभग हर गाँव में मदरसे: नेपाल बॉर्डर के मौलाना ने बताया इसमें कमीशन का खेल – OpIndia Ground Report

पढ़ें दसवीं रिपोर्ट : SSB बेस कैंप हो या सड़क, गाँव हो या खेत-सुनसान… हर जगह मस्जिद-मदरसे-मजार: UP के बलरामपुर से नेपाल के जरवा बॉर्डर तक OpIndia Ground Report

पढ़ें 11वीं रिपोर्ट : हिंदू बच्चों का खतना, मंदिर में शादी के बाद लव जिहाद और आबादी असंतुलन के साथ बढ़ते पॉक्सो मामले: नेपाल बॉर्डर पर बलरामपुर जिले में OpIndia Ground Report

8 घंटे, 100 प्रश्न, 2 आरोपित: जैकलीन फर्नांडिस के जवाबों से संतुष्ट नहीं दिल्ली पुलिस, फिर भेजा जा सकता है समन

तिहाड़ जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) के साथ 215 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने बुधवार (14 सितंबर 2022) को बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) से लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की। एजेंसी को एक्ट्रेस के बयान में कई तरह की खामियाँ मिलीं।

दिल्ली पुलिस ने जैकलीन और पिंकी ईरानी के जवाबों में कई तरह की खामियाँ पाई हैं। बता दें कि जैकलीन के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने पिंकी ईरानी को भी समन भेजकर तलब किया था। पिंकी ईरानी ने ही जैकलीन को सुकेश से मिलवाया था। इसके लिए उसे करोड़ों रुपए दिए गए थे।

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को सुकेश चंद्रशेखर द्वारा ठगी के मामले में पूछताछ के लिए तीसरी बार बुलाया गया था। इस दौरान अभिनेत्री से लगभग आठ घंटे तक पूछताछ की गई। दोनों के जवाबों से असंतुष्ट दिल्ली पुलिस पूछताछ के लिए दोनों को फिर से बुला सकती है।

शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने जैकलीन फर्नांडिस और पिंकी ईरानी अलग-अलग बयान लिए। इसके बाद दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई। पूछताछ के लिए दिल्ली पुलिस ने 100 प्रश्नों की सूची तैयार की थी। बयान के दौरान दोनों के जवाब में फर्क पाया गया।

इस महीने की शुरुआत में बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही से भी सात घंटे तक पूछताछ की गई थी। ईडी के अनुसार, ठगी से मिले पैसे से सुकेश ने नोरा फतेही और जैकलीन को लग्जरी कारें और कई महंगे उपहार दिए थे। इतना ही नहीं, जैकलीन के घरवालों को भी कई महंगे उपहार दिए गए थे।

नोरा फतेही ने स्वीकार किया था कि उसकी अभिनेत्री पत्नी लीना से उपहार लिया था। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने 17 अगस्त 2022 को सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैकलीन फर्नांडिस को आरोपी बनाया था। ED ने कोर्ट में चार्जशीट भी दाखिल की थी।

इससे पहले जैकलीन ने कहा था कि महाठग सुकेश ने खुद को सन टीवी के मालिक और चेन्नई के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का सदस्य बताया था। जैकलीन ने ईडी को बताया था कि उसे हर हफ्ते सुकेश से लिमिटेड एडिशन के परफ्यूम, हर दूसरे दिन फूल, डिजाइनर बैग, डायमंड इयररिंग्स आदि मिलते थे।

जिस ज्ञानवापी में मिला शिवलिंग, वहाँ उर्स का आयोजन करवाना चाहता है मुस्लिम पक्ष: चादर चढ़ाने की अनुमति के लिए पहुँचा कोर्ट, हिन्दू पक्ष भी पहुँचा HC

वाराणसी जिला अदालत ने ज्ञानवापी शृंगार गौरी मामले की सुनवाई पर प्रश्न उठाने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी, लेकिन इसके बवजूद भी हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है। आइए, जानते हैं कि कैविएट याचिका क्या होती है और हिंदू पक्ष द्वारा इसे दाखिल करने के पीछे वजह क्या है?

सोमवार (12 सितंबर, 2022) को वाराणसी की जिला अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा-अर्चना की माँग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि वह देवी-देवताओं की दैनिक पूजा के अधिकार के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई जारी रखने वाली है।

वहीं इस दौरान मुस्लिम पक्ष याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने ऐलान किया था कि वो इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। लेकिन, उससे पहले ही हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक कैविएट याचिका दाखिल कर दी गई है।

हिंदू पक्ष ने दाखिल की कैविएट याचिका

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा का अधिकार माँगने वाली उन्हीं चार हिंदू महिलाओं की तरफ से ये कैविएट दाखिल की गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट से उनकी माँग यह है कि अगर मुस्लिम पक्ष की तरफ से ज्ञानवापी को लेकर जिला अदालत फैसले के खिलाफ कोई रिवजीन या एप्लिकेशन फाइल होती है, तो फिर बिना हिंदू पक्ष को सुने हुए कोर्ट इस मामले में कोई आदेश न जारी करे। इसके साथ ही याचिका की कॉपी भी दी जाए।

आखिर क्या होती है कैविएट याचिका?

एक रिपोर्ट के अनुसार ,कैविएट एक लैटिन वाक्यांश है जिसका अर्थ है एक व्यक्ति को चेतावनी या सावधान रहने दें। साधारण भाषा में समझें तो जब किसी व्यक्ति को यह लगता है कि कोई अन्य उसके खिलाफ अदालत में कोई मामला दायर करने जा रहा है या कर सकता है, तो वह एहतियाती उपाय यानी कि कैविएट पिटीशन के लिए जा सकता है।

इसके तहत कोर्ट उस व्यक्ति की बात सुने बिना कोई निर्देश जारी नहीं कर सकती। कोर्ट में डाला गया कैविएट अपने दाखिल किए जाने से 90 दिनों के अंदर वैध रहता है। 90 दिनों के बाद इसकी वैधता समाप्त हो जाती है। इसके बाद याचिकाकर्ता इसे फिर से दाखिल भी कर सकता है। हिंदू पक्ष की ओर से भी यही किया गया है। इस याचिका के तहत हिंदू पक्ष की बात सुने बिना हाई कोर्ट अब इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

मुस्लिम पक्ष को एक ओर झटका

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के परिसर में तीन मजारों पर चादर चढ़ाने के साथ-साथ अन्य धार्मिक गतिविधियों की अनुमति को लेकर भी कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की ओर से याचिका दायर की गई थी। इस पर बुधवार (14 सितंबर, 2022) को सुनवाई हुई, लेकिन कोई फैसला सुनाए बगैर अदालत ने इस मामले की सुनवाई को 3 अक्टूबर तक टाल दिया।

बताया जा रहा है कि सिविल जज फास्ट ट्रैक (सीनियर डिवीजन) की एक अदालत में ये याचिका मुख्तार अहमद समेत 4 लोगों ने दाखिल की थी। मुस्लिम पक्ष की ओर से इस याचिका में माँग की गई है कि उन्हें मस्जिद में बनी मजार पर चादर चढ़ाने, फातिहा पढ़ने और उर्स आयोजन समेत कई अन्य मजहबी कार्यों के लिए भी छूट दी जाए। साथ ही उर्स के आयोजन के लिए भी अनुमति माँगी गई है।

‘मैं शांति से जीना चाहता हूँ, मुझे जमानत दे दीजिए’: टीचर भर्ती घोटाले की सुनवाई के दौरान रोने लगे TMC के पूर्व नेता पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी

पश्चिम बंगाल में टीचर भर्ती घोटाले (West Bengal Teacher Recruitment Scam) में जेल में बंद तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पूर्व नेता और राज्य के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी (Arpita Mukherjee) अदालत की सुनवाई के दौरान रोने लगे।

दोनों आरोपित प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं। वर्चुअल सुनवाई के दौरान पार्थ चटर्जी ने अपनी छवि को लेकर चिंता जताई और सुनवाई के दौरान ही फुट-फुटकर रोने लगे। उन्होंने न्यायाधीश से कहा, “मैं अपनी सार्वजनिक छवि को लेकर बहुत चिंतित हूँ। मैं अर्थशास्त्र का छात्र था। मंत्री बनने से पहले मैं विपक्ष का नेता था।”

पार्थ चटर्जी ने खुद को राजनीति का शिकार बताया। उन्होंने कहा, “मैं राजनीति का शिकार हूँ। कृपया ED को एक बार मेरे घर और मेरे विधानसभा क्षेत्र का दौरा करने के लिए कहें। मैं LL.B हूँ और मुझे ब्रिटिश स्कॉलरशिप भी मिली थी। मेरी बेटी UK में रहती है। मैं इस तरह के घोटाले में खुद को कैसे शामिल कर सकता हूँ?”

जमानत के लिए कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान पार्थ चटर्जी ने खुद के लिए चिकित्सा उपचार की भी माँग की। कोर्ट में दलील देते हुए उनके वकील ने कहा, “मेरा मुवक्किल जाँच एजेंसी के साथ सहयोग कर रहा है। वह भविष्य में भी सहयोग करने को तैयार है। कृपया उन्हें किसी भी हालत में जमानत दें।”

पार्थ चटर्जी ने न्यायाधीश बिद्युत कुमार रॉय से अनुरोध किया, “मैं शांति से जीना चाहता हूँ। कृपया मुझे अपना जीवन जीने की इजाजत दें। मुझे किसी भी हालत में जमानत दीजिए। न्याय से पहले मुझे चिकित्सा उपचार दिया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि वे दिन में तीन बार दवा लेते हैं और उन्हें नियमित जाँच की जरूरत है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्थ चटर्जी के बाद उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी को जज के सामने पेश किया गया। अर्पिता ने अदालत से कहा, “मुझे नहीं पता कि यह सब मेरे साथ कैसे हुआ। मैं वास्तव में नहीं जानती कि प्रवर्तन निदेशालय ने मेरे घर से इतनी बड़ी रकम कैसे और कहाँ से बरामद की।”

अर्पिता की बात को सुनकर न्यायाधीश ने उनसे पूछा कि उन्हें पता है कि पैसे कहाँ मिले हैं। इस पर अर्पिता ने कहा, “मेरे निवास से।” न्यायाधीश के सवाल पर अर्पिता ने आगे बताया कि जहाँ से पैसे बरामद हुए वह घर उन्हीं का है। इसके बाद न्यायाधीश ने कहा, “फिर, कानून के अनुसार आप जवाबदेह हैं।”

इस पर अर्पिता ने कहा, “लेकिन, बरामद किए गए पैसे के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं एक साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हूँ। मेरे पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और मेरी माँ की उम्र 82 साल है और उनकी तबीयत ठीक नहीं है। ED मेरे घर पर छापेमारी कैसे कर सकती है?”

इस पर न्यायाधीश ने कहा, “ED किसी भी घर पर छापा मार सकता है, यदि उसे जाँच में इसकी जरूरत है तो। उसके पास इसकी शक्ति है।” इस दौरान अर्पिता मुखर्जी भी फुट-फुटकर रोने लगीं।

बता दें कि इसी साल जुलाई में अर्पिता मुखर्जी के घरों से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुआ था। ED ने अर्पिता के घरों से करीब 50 करोड़ रुपए नकद, सोना और आभूषण जब्त किए थे। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि एजेंसी को छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले थे, जो बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े हैं। 

 

‘नोटिस लेकर आएँ तो जूते-चप्पल से करो स्वागत’: यूपी के मदरसों में सर्वे को लेकर मौलाना के बिगड़े बोल, कहा – मुस्लिम अभी बर्दाश्त कर रहा है, जिस दिन…

मौलाना साजिद रशीदी (Maulana Sajid Rashidi) ने उत्तर प्रदेश में मदरसे सर्वे को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “मुस्लिम बहुत बर्दाश्त कर रहा है, जिस दिन अपने अधिकारों के लिए खड़ा हुआ, सरकार अपने आपको बचा नहीं पाएगी।” इसके साथ ही उन्होंने अन्य मुस्लिमों से अपील की है कि जो भी सर्वे का नोटिस लेकर आए, उसका चप्पल-जूतों से स्वागत करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर उनका सर्वे कराने जा रही है। इसे लेकर राज्य में 10 टीमें बनाई जा रही हैं, जो इसकी जाँच करेंगी कि कौन सा मदरसा मान्यता प्राप्त है और कौन सा नहीं। ये टीमें 5 अक्टूबर से सर्वे का काम शुरू करेंगी और रिपोर्ट 25 अक्टूबर तक देंगी। मौलाना मदरसों के सर्वे का विरोध कर रहे हैं। मौलाना रशीदी ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष हैं। उनके बयान पर यूपी सरकार के पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

रजा ने कहा कि रशीदी जैसे लोगों के विवादास्पद बयान छात्रों एवं मदरसों को भड़काने वाले हैं। सरकार सर्वे के जरिए मदरसों का भला करना चाहती है, लेकिन इस तरह के बयान जब आते हैं तो सरकार को कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। अब तो सर्वे बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान के लिए रशीदी पर कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश में मदरसों का सर्वे

बता दें कि 31 अगस्त को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया था कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में प्रयास कर रही है। मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है। यह सर्वे 5 अक्टूबर, 2022 से शुरू किया जाएगा और 25 अक्टूबर तक दी जाएगी। इसमें उन सभी मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं।

इस सम्बन्ध में एक बैठक भी हुई थी। उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। दरअसल, इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।

इन मदरसों में जिनका संचालन ठीक से हो रहा होगा, उन्हें मान्यता के दायरे में भी लाया जाएगा। किन मदरसों को कहाँ से फंडिंग मिल रही है, इसकी भी जाँच की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड’ से उन मदरसों को मान्यता दिलाई जाएगी, जो इसके योग्य होंगे। इतना ही नहीं, सरकार को ये जानकारी भी हासिल करनी है कि इन मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षक कौन हैं और वो क्या पढ़ा रहे हैं। मदरसों का सिलेबस क्या है, रिपोर्ट में ये भी जुटाया जाएगा।

अध्यक्ष-सचिव के पद पर 3 साल और बने रह सकते हैं सौरव गांगुली और जय शाह, सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के नए संविधान को दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा अपने संविधान में किए गए संशोधन को मंजूरी देते हुए अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और सचिव जय शाह (Jay Shah) को बड़ी राहत दी है। अब इनके अगले कार्यकाल का रास्ता साफ हो गया है। बोर्ड ने अपने अपने संविधान में अधिकारियों के कार्यकाल और कूलिंग पीरियड को ढील देने को लेकर ढील दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब पदाधिकारियों के पास BCCI और किसी भी राज्य एसोसिएशन में एक बार में अधिकतम 12 साल का कार्यकाल हो सकता है। इसके अलावा, BCCI में लगातार दो बार यानी 6 साल तक पद पर बने रहने पर तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड होगा।

BCCI बनाम बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के इस मामले में अदालत यह भी कहा कि बोर्ड के संविधान में कोई भी प्रकार का संशोधन अदालत की अनुमति के बिना प्रभावी नहीं होगा। बता दें कि सौरव गांगुली के अध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर BCCI के संविधान में बदलाव किया गया था। इसके बाद करीब तीन साल पहले यह याचिका दायर की गई थी।

दरअसल, 2018 में बीसीसीआई का नया संविधान लागू हुआ था। इसमें यह नियम था कि कोई भी अधिकारी जिसने राज्य या BCCI के स्तर पर अपने दो कार्यकाल पूरे कर लिए हों, उसे तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड पूरा करना होगा। इस नियम के तहत छह साल पूरे होने पर वह व्यक्ति खुद ही चुनाव की रेस से पूरी तरह बाहर हो जाएगा।

बीसीसीआई ने कोर्ट में याचिका देकर इन नियमों में बदलाव की माँग करते हुए कूलिंग ऑफ पीरियड को पूरी तरह से रद्द करने की माँग की थी। इसके साथ ही उसने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि इसके संविधान में बदलाव हो और सचिव को ज्यादा ताकत दी जाए, ताकि बोर्ड को बार-बार कोर्ट के पास न आना पड़े। 

दरअसल, BCCI ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि उसके अधिकारियों के लगातार दो कार्यकाल की इजाजत दी जाए। BCCI ने तर्क दिया कि राज्य क्रिकेट संघों में भी तीन साल का कूलिंग ऑफ पीरियड होता है। इसके कारण BCCI में उनके प्रमोशन में दिक्कतें आती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एक कार्यकाल के बजाय दो कार्यकाल के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड दी जा सकता है।

फैसले के साथ ही अब पदाधिकारियों के पास BCCI और किसी राज्य एसोसिएशन में एक बार में अधिकतम 12 साल का कार्यकाल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब BCCI के वर्तमान अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह के दूसरे कार्यकाल का रास्ता साफ हो गया है। वर्तमान में दोनों का पहला कार्यकाल है।

BCCI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ के सामने अपना तर्क रखा। उन्होंने कहा कि BCCI एक स्वायत्त संस्था है और सभी बदलावों पर क्रिकेट संस्था की वार्षिक आम बैठक (AGM) में विचार किया गया।

महारानी एलिजाबेथ के अंतिम संस्कार में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, भारत की तरफ से व्यक्त करेंगी संवेदना: PM मोदी ने भी जताया था शोक

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज कर बताया है कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी शामिल होने वाली हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया था। वहीं देश में 11 सितंबर को राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया गया था। क्वीन का फ्यूनरल 19 सितंबर, 2022 को होने वाला है।

विदेश मंत्रालय के प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू 17-19 सितंबर तक ब्रिटेन के दौरे पर रहने वाली हैं, जहाँ वो महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार में शामिल होंगी। वहीं भारत की ओर से संवेदना व्यक्त करेंगी। बता दें कि सोमवार (19 सितंबर 2022) को ब्रिटेन की क्वीन का फ्यूनरल लंदन स्थित वेस्टमिंस्टर एब्बे में होने वाला है।

इस प्रेस रिलीज में विदेश मंत्रालय ने बताया कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के 70 साल के शासनकाल में भारत-ब्रिटेन के संबंध अत्यधिक विकसित, फले-फूले और मजबूत हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल के प्रमुख के रूप में दुनिया भर के लाखों लोगों के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब महारानी का निधन हुआ था, तब भी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भी भारत की ओर से संवेदना व्यक्त की।

सूचना यह भी है की महारानी के अंतिम संस्कार के दौरान वहाँ कई देशों प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। बता दें कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का निधन 8 सितंबर को हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक क्वीन का अंतिम संस्कार भारतीय समयानुसार सुबह 3.30 बजे होने वाला है। वहीं इस दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन भी अपनी पत्नी जिल बायडेन के साथ मौजूद रहने वाले हैं।

पीएम मोदी ने जताया था शोक

गौरतलब है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मौत पर दुःख जताया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, “महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को हमारे समय की एक दिग्गज के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपने राष्ट्र और लोगों को प्रेरक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता का परिचय दिया। उनके निधन से आहत हूँ। दुखद की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और ब्रिटेन के लोगों के साथ हैं।”

आपको जानकारी देते चलें कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) का जन्म 21 अप्रैल 1926 को हुआ था। अपने पिता जॉर्ज षष्टम (Father George VI) की मौत के बाद वर्ष 1952 में वह ब्रिटेन (Britain) की महारानी बनी थीं। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। अब महारानी के निधन के बाद उनके बेटे प्रिंस चार्ल्स को ब्रिटेन का राजा बनाया गया है।

‘प्रधान पति असदुल्ला ने पीटा, फाड़ डाले कपड़े’: मुरादाबाद में दलित परिवार ने किया पलायन का ऐलान, कहा – हमें छोड़ कर गाँव में सभी मुस्लिम

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में एक दलित परिवार ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम ग्राम प्रधान पति और उनके लड़के उन्हें गाँव से निकाल देना चाहते हैं। उन्हें दलित कहकर बार-बार प्रताड़ित किया जाता है। पीड़ित का नाम राजेन्द्र है। उसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह अपनी आपबीती बता रहे हैं।

वीडियो में पीड़ित ने बताया, “गाँव में मैं और मेरा भाई नरेश रहते हैं। मैं गाँव में किसी काम से बाहर गया हुआ था, जब मैं वापस आया तो प्रधान के लड़कों ने मुझ पर हमला किया।” वह अपने जख्म दिखाते हुए कहता है, “देखो उन लोगों ने मुझे कितना मारा, मेरे कपड़े भी फाड़ दिए। ये सारे मुस्लिम हमें भगाना चाहते हैं और हमारे घर पर कब्जा करना चाहते हैं।” राजेन्द्र ने हाथ जोड़ कर निवेदन किया है कि उसे इन ‘दरिंदों’ से बचाया जाए, नहीं तो वे उसे भी उसकी माँ की तरह मार डालेंगे।

उसने बताया, “इन लोगों ने 2009 में मेरी माँ की हत्या की थी। ऐसे ही ये अब हमें मारना चाहते हैं और इस गाँव से भगाना चाहते हैं। इस गाँव में हमें छोड़कर सभी मुस्लिम परिवार रहते हैं। ये हमें यहाँ नहीं रहने देंगे। थाने में भी शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” इस मामले में थाना कुन्दारी में 11 सितंबर 2022 को शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह बाइक से 11 सितंबर को अपने गाँव पहुँचा तो दोपहर करीब 2 बजे पुरानी रंजिश को लेकर असदुल्ला और उसके लड़कों ने मुझे पीटा और गालियाँ दीं। यह सब देखकर जब मेरी बहन अनीता मुझे बचाने आई, तो उन लोगों ने उसके साथ भी गाली-गलौच की और उसको धक्का मारा।

फोटो साभार: दैनिक जागरण

बता दें कि इससे पहले जुलाई 2022 में ग्राम प्रधान पति असदुल्ला ने खुलेआम दबंगई दिखाई थी। उन्होंने दलित भाइयों के घर को तोड़कर उसमें ताला जड़ दिया था। उसने हिंदुओं को गाँव से भगाने की धमकी दी थी। दोनों भाई घटना के वक्त मजदूरी करने गए हुए था। प्रधान पति का कहना था कि अपनी बहन के मकान पर दोनों भाइयों ने कब्जा कर रखा था।