भारत में बैठे कुछ बुद्धिजीवी आज पाकिस्तान और पाकिस्तान में बैठे कट्टरपंथीयों के लिए प्रेम व भाईचारे की बातें करते हैं। उन सभी लोगों को हम आज 1934 की उस घटना के बारे में बताना चाहते हैं, जिसे ‘गंगा-जमुनी तहबीज’ के नीचे सालों पहले दबा दिया गया था और अब तक दबाए रखा गया। यह घटना कराची के एक मुस्लिम जमींदार और हिंदू बनिया की मौत की है।
इस घटना की चर्चा इतने सालों के बाद तब शुरू हुई, जब सोशल मीडिया पर एक समाचार क्लिपिंग वायरल होने लगी। इस समाचार क्लिपिंग में कराची के हिंदू बनिया साहूकार और मुस्लिम जमींदार के बीच हुए विवाद का जिक्र है, जिसमें बनिया को एक गाय की हत्या करने को कहा गया था। सोशल मीडिया पर क्लिपिंग को ‘धनी मारवाड़’ यूजर आईडी से शेयर किया गया है।
Sindh, 1934: Forced by a Muslim Zamindar to settle the dues by either burning the account books or killing a cow, Bania chose to settle the dues by killing three people, including the Muslim Zamindar. pic.twitter.com/Tj5pXPMeuV
इसी समाचार क्लिपिंग के अनुसार, कराची के एक बनिया साहूकार ने एक मुस्लिम जमींदार को कुछ पैसे उधार दिए। इसे वापस लेने के लिए जब बनिया जमींदार के पास गया तो उसने बनिया से एक गाय की तलवार से हत्या करने को कहा। मगर बनिया ने गाय की हत्या नहीं की, बल्कि उस मुस्लिम जमींदार को ही चाकू मार दिया।
जमींदार पर अचानक हुए इस हमले से उसकी मौत हो गई, वहीं बनिया ने जमींदार की हत्या करने के बाद उसके दो आदमियों को भी मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद हिंदू बनिया ने आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन गोहत्या नहीं की। (ऑपइंडिया इस घटना की ऑपइंडिया पुष्टि नहीं करता है)
गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। एक यूजर ने इसको लेकर कॉन्ग्रेस पर ही सवाल खड़ा किया और लिखा, “1947 में कॉन्ग्रेस ने इस तरह के बनियों को छोड़ दिया। सिंध का विभाजन होना चाहिए था, या एक हिस्सा जोधपुर राज्य में मिला दिया जाना चाहिए था, जैसा कि महाराजा ने माँग की थी।”
Banias like this were abandoned by the Congress in 1947.
Sindh should have been partitioned, or a portion merged with Jodhpur state, as was demanded by the Maharaja.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (8 सितंबर, 2022) को राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट के समीप स्थित भव्य और आकर्षक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण कर दिया। ये अनावरण समारोह बेहद खास रहा। प्रतिमा का अनावरण ‘आजाद हिंद फौज’ के पारंपरिक गीत ‘कदम, कदम बढ़ाए जा’ की धुन के बीच किया गया।
नेताजी सुभाष चंद्र बॉस ने ही अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध स्वतंत्रता से पहले ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन किया था। ऐसे वीर स्वतंत्रता सेनानी की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर श्रेष्ठ भारत और अनेकता में एकता की भावना को प्रदर्शित करने के लिए भारत के हर कोने से आए 500 नर्तकों द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।
अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज एक नई प्रेरणा और ऊर्जा मिली है। आज हम बीते हुए कल को छोड़कर आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आपको हर तरफ यह नई आभा दिख रही है। यह नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है। आज से किंग्सवे हमेशा के लिए मिट गया। मैं गुलामी की एक और पहचान से मुक्ति के लिए बधाई देता हूँ। आज इंडिया गेट के समीप राष्ट्रनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित हुई है। जहाँ कभी जॉर्ज पंचम की प्रतिमा थी, आज उसी स्थान पर नेताजी की प्रतिमा लगाकर आधुनिक और सशक्त भारत की प्राण प्रतिष्ठा कर दी है।”
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आजादी के साथ ही हमारे महानायक को भुला दिया गया और उनके प्रतीकों को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने याद किया कि उन्हें सुभाष बाबू की जन्मजयंती पर उनके घर जाने का मौका मिला था, जहाँ उन्होंने उनकी अनंत ऊर्जा को महसूस किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश का प्रयास है कि नेताजी की वह ऊर्जा देश का पथ प्रदर्शन करे। बकौल पीएम मोदी, ‘कर्तव्य पथ’ पर नेताजी की प्रतिमा इसका माध्यम बनेगी।
उन्होंने कहा कि देश की नीतियों में सुभाष बाबू की छाप रहे, यह प्रतिमा इसके लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष अखंड भारत के पहले प्रधान थे, जिन्होंने 1947 से भी पहले अंडमान को आजाद करके भारत का झंडा लहराया था। पीएम मोदी ने याद किया कि ‘आजाद हिंद ‘सरकार के 75 वर्ष होने पर उन्हें लाल किले पर तिरंगा लहराने का सौभाग्य मिला था। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के प्रयास से लाल किले में नेताजी और आजाद हिंद फौज से जुड़ा म्यूजियम बनाया गया।
पीएम मोदी ने कहा कि जब 2019 में गणतंत्र दिवस की परेड में आजाद हिंद फौज के सिपाहियों ने हिस्सा लिया था, वह क्षण भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जिन द्वीपों के नाम अंग्रेजी शासकों के नाम पर थे, उनकी सरकार ने उनके नाम बदलकर भारत की पहचान दी। उन्होंने ‘पंच प्रण’ की चर्चा करते हुए कहा कि इन पंच प्रणों में कर्तव्यों की प्रेरणा है, इसमें गुलामी की मानसिकता की त्याग का आह्वान है, अपनी विरासत पर गर्व की अनुभूति है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर ये भी कहा कि आज भारत के संकल्प अपने हैं, लक्ष्य अपने हैं, आज हमारे पथ अपने हैं और प्रतीक अपने हैं। उन्होंने कहा कि आज अगर राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्य पथ बना है और आज अगर जॉर्ज पंचम के निशान को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है तो यह गुलामी की मानसिकता की त्याग का पहला उदाहरण नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ना तो शुरुआत है और ना ही अंत है।
PM मोदी ने कहा, “हमने रेसकोर्स मार्ग को ‘लोक कल्याण मार्ग’ कर दिया। नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया गया। यह बदलाव केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की समृतियों का हिस्सा बन चुका है। भारतीय बजट में बदलाव किया गया। हमें सर्वश्रेष्ठ भारत का निर्माण करना है। इसका रास्ता ‘कर्तव्य पथ’ से होकर जाता है। यह सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है। यहाँ जब देश के लोग आएँगे और नेताजी की प्रतिमा, नेशनल वॉर मेमोरियल देखेंगे तो उन्हें कर्तव्यबोध से ओतप्रोत करेंगे। इसी स्थान पर देश की सरकार काम कर रही है। आप कल्पना करिए देश ने जिन्हें देश की सेवा का दायित्व सौंपा हो, उन्हें देश का सेवक होने का अहसास कैसे कराता। अगर पथ ही राजपथ हो तो लोगों को अहसास कैसे होता। राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था। इसकी संरचना भी गुलामी की प्रतीक थी। आज इसकी संरचना भी बदल गई और आत्मा भी बदल गई। अब देश के सांसद, मंत्री और अधिकारी इस पथ से गुजरेंगे तो देश के प्रति कर्तव्य का बोध होगा।”
पीएम मोदी ने श्रमजीवीयों से कही ये बात
इस अनावरण समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रमजीवीयों से भी बातचीत की। वहीं उन्होंने इस दौरान श्रमजीवीयों से कहा कि वह 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड के लिए सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास परियोजना पर काम करने वाले सभी लोगों को आमंत्रित करेंगे।
आपको बताते चलें कि मूर्तिकारों ने 26,000 घंटे के अथक कलात्मक प्रयासों से विशाल ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर 65 मीट्रिक टन वजन की इस प्रतिमा को तैयार किया है। काले रंग के ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित 28 फुट ऊँची यह प्रतिमा इंडिया गेट के समीप एक छतरी के नीचे स्थापित की जाएगी। संस्कृति मंत्रालय ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को इसकी जानकारी दी।
गौरतलब है कि आज ही दिन को ओर खास बनाने के लिए राजपथ का भी नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ किया गया है। यह इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन को जोड़ता है। इस सड़क के दोनों तरफ लॉन को विकसित किया गया है। हरियाली के साथ-साथ पैदल चलने वालों के लिये 15.5 किलोमीटर लंबा लाल ग्रेनाइट पत्थरों से बना पैदल पथ इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाता है।
देश भर से अब लव जेहाद (Love Jihad) की सच्चाई खुलकर सामने आने लगी है। उत्तराखंड के रुद्रपुर में शाहरुख नाम का शख्स अपनी पहचान छुपाकर दोस्ती की, उसके बाद बात नहीं मानने पर युवती को दुमका के अंकिता जैसी जलाकर मारने की धमकी दी।
उत्तराखंड में उधमसिंह नगर के रुद्रपुर में पुलिस ने 24 साल के शाहरुख को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से दो आधार कार्ड बरामद किया है। गौरतलब है कि अंकिता झारखंड के दुमका जिले की रहने वाली एक नाबालिग छात्रा थी। उस पर शाहरुख नाम का शख्स दोस्ती का दबाव डालता था। जब लड़की ने बात नहीं मानी तो उस पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया।
पुलिस के अनुसार, महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि गदरपुर थाना क्षेत्र में अपने भाई के साथ रहती है। उसके माता-पिता का निधन हो चुका है। एक साल पहले उसके भाई ने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। उस दौरान कैमरा लगाने आए शाहरुख ने अपना परिचय गदरपुर के रहने वाले राजकुमार के रूप में दिया था।
इसके बाद उसने महिला से पहचान बढ़ानी शुरू कर दी। धीरे-धीरे दोनों की फोन पर बातचीत होने लगी। बाद में पता चला कि इंस्टॉल करने आए आरोपित शाहरुख ने घर के कैमरों को अपने मोबाइल से भी कनेक्ट कर लिया था।
कुछ समय बाद में महिला को पता चला कि उसका असली नाम राजकुमार नहीं, शाहरुख है। महिला ने यह भी बताया कि वह लव जिहाद गैंग का सदस्य है और पहले भी कई हिंदू लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है। इसके बाद उसने शाहरुख का फोन उठाना बंद कर दिया।
महिला का कहना है कि जब आरोपित से उसने बात करना बंद कर दिया तो शाहरुख उसे ब्लैकमेल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगा। वह उसका पीछा भी करता था। वह झारखंड की अंकिता की तरह अंजाम भुगतने की धमकी देने लगा। वह युवती को जिंदा जलाने की धमकी देने लगा।
महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि शाहरुख उसे धमकी दे रहा था कि अगर मिलने नहीं आई तो घर आकर वह उसकी हत्या कर देगा। इसके बाद बाद महिला उसके बताए समय के अनुसार बुधवार (7 सितंबर 2022) को 9 बजे गाबा चौक आई तो शाहरुख ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और साथ चलने का दबाव भी बनाने लगा। महिला का कहना है कि जब उसने शोर मचाया तो शाहरुख वहाँ से भाग गया।
महिला की शिकायत पर पुलिस ने शाहरुख के खिलाफ IPC की धारा 153ए, 323, 354, 354 ए, 354 डी, 417, 420, 504, 506 और 386 के तहत FIR दर्ज कर ली है। उसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई।
उधमसिंह नगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मंजूनाथ टीसी ने बताया कि पुलिस की टीम ने आरोपित शाहरुख को काशीपुर रोड से गिरफ्तार कर लिया।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि पीएम मोदी बेहद शानदार काम कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस इंटरव्यू में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के साथ मेरे संबंध अच्छे रहे हैं। मोदी और मैं अच्छे दोस्त थे और आज भी हैं। मुझे लगता है कि मोदी बहुत शानदार व्यक्ति हैं और भारत के लिए बेहतरीन काम कर रहे हैं। उनके पास जो जवाबदारी है, वह आसान नहीं है। हम एक-दूसरे को बहुत लंबे समय से जानते हैं। मोदी एक अच्छे इंसान हैं।”
उन्होंने यह भी कहा ” मेरे कार्यकाल के दौरान भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते सबसे ज्यादा मजबूत हुए। मुझे लगता है कि भारत के पास मुझसे अच्छा दोस्त कभी नहीं रहा। ये उन रिश्तों में से एक है, जिन्हें मैंने मजबूत बनाया।”
इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2024 में अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को लेकर भी टिप्पणी की। ट्रंप ने कहा, “हर कोई यह चाहता है कि मैं चुनाव (राष्ट्रपति चुनाव) लड़ूँ। कई सारे सर्वे में मैं आगे भी हूँ। इस बारे में मैं जल्द ही कोई फैसला लूँगा।”
इस इंटरव्यू के दौरान, भारत और अमेरिका की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत अच्छा कर रहा है। उन्होंने कहा, “हालाँकि, मैं केवल अमेरिका की प्राथमिकताओं के बारे में बात कर सकता हूँ। अमेरिका के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता ऊर्जा है, इस मामले में हमें आत्मनिर्भर होना है। हमारी अर्थव्यवस्था अभी बेहद सुस्त पड़ी है, उसे फिर से मजबूत बनाना होगा।”
गौरतलब है, पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के संबंधों के बारे में पूरी दुनिया को पता है। अमेरिका में जब, ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम हुआ था, तब इस रैली में दोनों नेताओं ने एक साथ मंच साझा किया था। इस रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘अबकी बार मोदी सरकार’ के नारे की तर्ज पर अमेरिका में चल रहे ‘अबकी बार ट्रंप सरकार’ नारे का जिक्र भी किया था। यही नहीं, इसके बाद जब ट्रंप भारत आए थे तब भी अहमदाबाद में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप एक ही मंच पर थे। इस कार्यक्रम को पूरी दुनिया ने कवरेज मिली थी।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की छठी रिपोर्ट:
बौद्धों की आस्था के मुख्य केंद्रों में से एक है श्रावस्ती। यहीं है अंगुलिमाल गुफा। इसी गुफा से लगभग सटी है मीरा शाह नाम की एक बड़ी दरगाह। बौद्धों वाली जगह पर दरगाह का क्या काम? इसी सवाल को टटोलने के लिए हमने दरगाह के खादिम और संरक्षक के साथ वहाँ मौके पर मौजूद लोगों से उस जगह के बारे में जानने का प्रयास किया।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
भारत के साथ-साथ नेपाल के भी आते हैं जायरीन
दरगाह के संरक्षक मुश्ताक अहमद ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि हर जुम्मेरात को दरगाह पर भारी भीड़ लगती है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि हर साल माघ महीने की बसंत पंचमी (मतलब हर साल सरस्वती पूजा के दिन) को मज़ार पर साला उर्स भी लगता है।
मुश्ताक अहमद के मुताबिक इस दिन न सिर्फ भारत के कोने-कोने से बल्कि नेपाल से भी हजारों जायरीन दरगाह पर जुटते हैं। इनमें हिन्दू और मुस्लिम सभी होते हैं। अहमद के अनुसार इस भीड़ को कंट्रोल करने के लिए प्रशासन अपने स्तर से होमगार्ड आदि की तैनाती करता है।
पक्की बॉउंड्री से घिरी दरगाह
सालार गाज़ी से जुड़ी है दरगाह
मुश्ताक ने हमें आगे बताया कि मीरा शाह की दरगाह बहराइच के सालार गाज़ी वाली दरगाह से कनेक्टेड है। सालार गाज़ी को सरकार कहते हुए मुश्ताक ने कहा कि जब से बहराइच की दरगाह शरीफ है, तब से ये भी मजार यहीं हैं।
मुश्ताक अहमद ने दरगाह को वक्फ बोर्ड से रजिस्टर्ड और बाकायदा एक कमिटी द्वारा संचालित बताया। उन्होंने दरगाह के सदर जव्वाद और नायब सदर मुश्ताक रज़ा को बताया। दरगाह के ऊपर इस्लामी झंडे लगे हैं।
दरगाह के ऊपर हरे-लाल झंडे
दरगाह को मिले बौद्ध और जैन मंदिरों जैसी सुविधाएँ
बौद्धों के धर्मस्थलों पर सुरक्षा और अन्य जनसुविधाओं का जिक्र करते हुए दरगाह के संरक्षक मुश्ताक़ ने कहा कि उन्हें सब कुछ मिला है लेकिन दरगाह को कुछ भी नहीं। मुश्ताक के मुताबिक वहाँ कोई आता है तो खुले में सोता है और दरगाह कमिटी पूरी व्यवस्था करती है।
मुश्ताक अहमद ने कहा कि काफी दिन सुनवाई के बाद भी दरगाह को कुछ नहीं मिला है, इसलिए उन्होंने अब वक्फ बोर्ड को बताया है और वक्फ बोर्ड सरकार से ये सब सुविधाएँ माँगेगा। उनके मुताबिक दरगाह की पक्की बॉउंड्री और अंदर तमाम जनसुविधाओं की मॉंग सरकार को पूरी करनी चाहिए। मुश्ताक ने दरगाह से 200 मीटर की दूरी पर एक जैन मंदिर भी बताते हुए उसे सभी सरकारी सुविधाओं से पूर्ण बताया।
सरकारी नल गाँव वालों के लिए, लगा दिया दरगाह में
जब हमने दरगाह में लगे बल्बों के जलने के बारे में सवाल किया तब मुश्ताक अहमद ने कहा कि उन्हें सरकार ने अभी तक लाइट नहीं दी है। मुश्ताक के मुताबिक दरगाह कमिटी ने खुद से सोलर लाइट लगवा लिया है।
इसके अलावा दरगाह कैम्पस में 4 सरकारी नल और गाँव में प्रयोग होने वाली सरकारी डस्टबिन दिखने पर मुश्ताक ने खुद को हुसैनजोत गाँव का पूर्व प्रधान प्रतिनिधि बताया और लगे नल और डस्टबिन को उसी गाँव के लिए आए सामान से लगा बताया। दरगाह पर पानी का समर्सिबल चलाने के लिए जेनरेटर भी लगा है।
हैंड पंप
बसपा सांसद ने दिया है दरगाह को सुविधाएँ दिलाने का भरोसा
दरगाह के संरक्षक अहमद को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के स्थानीय सांसद राम शिरोमणि वर्मा ने काफी भरोसा दिया है। मुश्ताक के मुताबिक बसपा सांसद ने उन सभी को भरोसा दिया है कि वो दरगाह को तमाम सुविधाएँ शासन स्तर से दिलवाने में पूरी मदद करेंगे। हालाँकि मुश्ताक ने उनके द्वारा लम्बे समय से किए गए वादे पर अमल न करने पर अफसोस जताते हुए कहा कि वो सभी एक बार और उन्हें वादा याद दिलाने जाएँगे।
दरगाह में औरतों के जाने की इजाजत नहीं
मीरा शाह दरगाह के खादिम जव्वाद अली ने हमें बताया कि शरीयत के मुताबिक दरगाह में औरतों का जाना प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि बोर्ड लगा दिया गया है लेकिन फिर भी कई महिलाएँ अंदर चली जाती हैं। जब हमने उनसे सवाल किया कि क्या शरीयत कानून को तोड़ कर जो महिलाएँ अंदर चली जाती हैं, उनकी मुराद पूरी होगी? इस पर उनका जवाब था – “बेशक पूरी होगी।”
दरगाह के अंदर जाती महिला
भगवा गमछे में मौलाना
एक खास बात जो हमने इस मज़ार पर देखी, वो ये थी कि मजार के संरक्षक अहमद ने जिस हिन्दू श्रद्धालु को हमसे बात करने के लिए आगे किया, वो भगवा वस्त्रों में था। वह अपना नाम हरिहर बाबा बता रहा था और खुद को मीरा शाह दरगाह का भक्त बता रहा था। इसी के साथ एक अन्य मौलना जैसा दिख रहा व्यक्ति गले में भगवा गमछा डाल रखा था।
दरगाह के संरक्षक मुश्ताक (चश्मे में) और पीछे भगवा गमछे में एक मौलाना
पुरातत्व विभाग को अलर्ट, टूटी मजार फिर ‘पनपी’
ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक साल 2018 में श्रावस्ती पुलिस ने लिखित तौर पर पुरातत्व विभाग को क्षेत्र में बढ़ रही इबादतगाहों के बारे में अलर्ट भेजा था। उस अलर्ट पर पुरातत्व विभाग द्वारा क्या कार्रवाई हुई, ये जानकारी अभी नहीं मिल पाई है और उसे आते ही अपडेट किया जाएगा।
जानकारी यह भी मिली कि इस दरगाह के पास सड़क से सटा कर बनी मज़ार को साल 2020 में जिला प्रशासन ने ध्वस्त करवा दिया था। हालाँकि अब ध्वस्त करवाई गई मज़ार फिर से बन चुकी है और वहाँ भीड़ लगना भी चालू हो गया है।
ब्राजील की एक महिला के साथ हैरान कर देने वाला वाकया हुआ है। जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली 19 वर्षीय महिला का दावा कि उसके दोनों बच्चों के दो अलग-अलग पिता हैं। ‘ग्लोबो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गोआस (Goias) के मिनेरियोस (Minerios) की रहने वाली अज्ञात महिला ने एक ही दिन में दो पुरुषों के साथ सेक्स किया और नौ महीने बाद उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। महिला को अपने जुड़वा बच्चों के पिता को लेकर संदेह हुआ, तो उसने इसकी पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट कराया।
महिला उस वक्त दंग रह गई, जिस वक्त DNA टेस्ट की रिपोर्ट आई, क्योंकि यह रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। वह जिसे अपने बच्चों का पिता मान रही थी, उस व्यक्ति का डीएनए केवल एक बच्चे के साथ ही मैच हुआ। यानी, वह शख्स केवल एक ही बच्चे का पिता निकला। महिला ने बताया कि दो अलग-अलग पुरुषों द्वारा गर्भधारण करने के बावजूद दोनों बच्चे काफी हद तक एक जैसे दिखते हैं।
महिला ने दूसरे पुरुष को भी DNA टेस्ट के लिए बुलाया, जिसके साथ उसने सेक्स किया था। दूसरे बच्चे से उसका डीएनए मैच हो गया। महिला ने बताया कि वह इन परिणामों से बेहद हैरान थी, क्योंकि उसे नहीं पता था कि ऐसा भी हो सकता है। दो अलग-अलग पिता के बच्चे एक जैसे दिख सकते हैं।
बता दें कि यह एक दुर्लभ स्थिति है, लेकिन पूरी तरह से असंभव नहीं है। इसमें जुड़वा बच्चों में अलग-अलग पिता का DNA पाया जाता है। विज्ञान की भाषा में इसे ‘हेट्रोपैरेंटल सुपरफेक्यूंडेशन (Heteroparental Superfecundation)’ नाम दिया गया है। डॉक्टर टुलियो जॉर्ज फ्रेंको के मुताबिक, दस लाख में से किसी एक मामले में हेट्रोपैरेंटल सुपरफेक्यूंडेशन की स्थिति बनती है। उस वक्त माँ के शरीर में मौजूद अंडे दो अलग-अलग पुरुषों के जरिए फर्टिलाइज हो जाते हैं।
वहीं, महिला ने भी यह बात स्वीकार की है कि उसने दो अलग-अलग पुरुष के साथ सम्बंध बनाए थे। यही बच्चों में अलग-अलग डीएनए की वजह बने हैं।
संगठन ‘स्वराज इंडिया पार्टी’ के संस्थापक योगेंद्र यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में योगेंद्र यादव कहते दिख रहे हैं कि उनके दादा को मुस्लिमों की भीड़ ने मार डाला था। इस वीडियो को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
इस वीडियो में योगेंद्र यादव ने कहा है कि उनके दादा मुस्लिमों की ‘मॉब लिंचिंग’ का शिकार हुए थे। तब, उनके दादा का मुस्लिमों की भीड़ ने गला काट दिया था।
योगेंद्र यादव ने कहा है, “जैसे मैं अपने दादा के बारे में कहता हूँ कि मेरे दादाजी ने मुस्लिमों की भीड़ से कहा तुम इन बच्चों को मार नहीं सकते। ये मेरे बच्चे हैं, मेरा गला काट लो… और उस भीड़ ने मेरे दादा का गला काट दिया था। आज मैं उनका पोता गर्व से यह बात कहता हूँ। वैसे ही मैं चाहता हूँ मेरी आने वाली पीढ़ी ये कह सके हाँ मेरा दादा लड़ा था।”
योगेंद्र यादव के दादा की हत्या मुस्लिमों की भीड़ ने की थी, यह जानते हुए भी वह लगातार मुस्लिमों के पक्ष में और हिन्दुओं के विरोध में बोलते रहे हैं। ज्ञानवापी के मुद्दे पर हिन्दुओं से बदला लेने की बात इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
यही नहीं, योगेंद्र यादव पर कई बार खुले मंच से मुस्लिमों को भड़काने के आरोप भी लग चुके हैं। खासतौर से उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद योगेंद्र यादव ने मुस्लिमों को उकसाने वाले कारनामे किए हैं। योगेंद्र ने अपने एक लेख में कहा था “उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद अब मुसलमानों को भारत में लड़ने के लिए लोकतांत्रिक तरीके काफी नहीं हैं। मुस्लिमों की नई पीढ़ी को अब गैर लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।”
इसके अलावा, उन्होंने एक रैली में बताया था, “जब मेरे दादाजी की हत्या कर दी गई थी, उसके बाद मेरे पिता ने मेरा नाम सलीम, मेरी बहन का नाम नजमा रखा था। मेरे करीबी दोस्त, मेरा परिवार और मेरी पत्नी अब भी मुझे सलीम कहते हैं। यह मेरे परिवार का एक गुप्त रहस्य माना जाता था।”
योगेंद्र यादव के इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया सामने आयी है। श्यामल उपाध्याय नामक ट्विटर यूजर ने लिखा ” और ये आज तक उनसे डरा हुआ है….अब समझ में आया इस का मुस्लिम प्रेम का कारण।”
और ये आज तक उनसे डरा हुआ है….अब समझ में आया इस का मुस्लिम प्रेम का कारण
एक अन्य यूजर ने लिखा, “आजकल सलीम अपने फिरोज खान अंकल के पोते को प्रधानमंत्री बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है।” बता दें कि अब योगेंद्र यादव कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को सफल बनाने के लिए सक्रिय हैं। वो राहुल गाँधी के साथ घूम रहे हैं, सोशल मीडिया में इस यात्रा के लिए प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और भीड़ जुटाने में मदद कर रहे हैं।
आजकल सलीम अपने फिरोज खान अंकल के पोते को प्रधानमंत्री बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है pic.twitter.com/72DgjcfEl0
देश की राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में बने अवैध मदरसा जामिया अरबिया में 5 दिन पहले ‘हेडलाइंस इंडिया’ के रिपोर्टर और कैमरामैन को बंधक बनाकर मारपीट की गई थी। इस मदरसे को इलाके का कट्टरपंथी तौफील खान चलाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह जमीन ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ की है, जिस पर अवैध रूप से मदरसा चल रहा है। कोर्ट ने इस जमीन का सर्वे कराने के आदेश भी LnDO को दिए हैं।
इसी बात की जानकारी लेने और तौफील खान का पक्ष लेने ‘हेडलाइंस इंडिया’ के रिपोर्टर और कैमरामैन मौके पर पहुँचे थे। तौफील और उसके बेटों ने पहले तो रिपोर्टर विनोद शर्मा और कैमरामैन को कागजात दिखाने के बहाने ऑफिसनुमा घर में बुलाया। फिर दोनों को बंधक बना लिया। यही नहीं, कैमरा बंद करके दोनों के साथ मारपीट की। अवैध मदरसा संचालक ने अपने गुर्गों से कहा कि चापड़ (एक प्रकार का धारदार हथियार) लेकर आओ। इस तरह से दोनों को जान से मारने को लेकर धमकाया गया। साथ ही हिंदू होने पर तौफील और उसके साथियों ने गाली-गलौज की।
अवैध मदरसे के संचालक तौफील और उसके साथियों की मारपीट से घायल रिपोर्टर विनोद शर्मा और कैमरामैन तुषार शर्मा ने जो कहानी सुनाई, आप पर वह सुनेंगे तो होश उड़ जाएँगे, कि कैसे एक रिपोर्टर के हिंदू होने पर अवैध मदरसा संचालक उन्हें जान से मारने को आमादा हो गया।
समझिए पूरा घटनाक्रम, ‘हेडलाइंस इंडिया’ के रिपोर्टर विनोद शर्मा की जुबानी
हम लोगों को खबर मिली थी कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में एलएंडडीओ की जमीन पर एक अवैध मदरसा संचालित हो रहा है। कोर्ट ने तीन साल पहले इस जमीन पर सर्वे कराने के आदेश भी दिए थे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसी हकीकत को टटोलने मैं अपने कैमरामैन तुषार के साथ गया था। यह अवैध मदरसा निजामुद्दीन इलाके में DPS स्कूल के पास में है। इसका नाम ‘मदरसा जामिया अरबिया’ है।
मैं जैसे ही मदरसे के कैंपस में पहुँचा तो देखा कि यह करीब 2 हजार गज से ज्यादा की जमीन है, जिस पर मदरसे के नाम पर मकान बनाए गए हैं, जिनमें कई परिवार रहते हैं। हमारी मुलाकात अवैध मदरसे के संचालक तौफील खान से हुई। वह ही इसे संचालित करता है। हमने कैमरा ऑन करके तौफील से जमीन के बारे में सवाल पूछने शुरू किए। वह किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे सका। मैंने पूछा- क्या यह जमीन एलएंडडीओ की है तो उसने कहा- हाँ, लेकिन इस पर केस चल रहा है।
फिर मैंने पूछा कि जब आप कह रहे हैं कि यह जमीन एलएंडडीओ की है तो आपने फिर मदरसा क्यों खोल रखा है। मेरी इसी बात से तौफील भड़क गया। उसने कहा कि आप मेरे साथ ऑफिस में आइए मैं आपको अपने कागजात दिखाता हूं। मुझे और मेरे कैमरामैन तुषार को कागजात दिखाने के बहाने ऑफिसनुमा घर में ले गया। जैसे ही मैं अंदर पहुँचा तो देखा कि वहाँ ऑफिस नहीं, बल्कि घर था। उसके साथ 5-6 लोग पहले से ही बैठे थे।
मैंने ऑफिस में पहुँच कर फिर वही सवाल पूछा कि आपके पास जमीन का क्या रिकॉर्ड है। मैं सवाल पूछ ही रहा था तभी उसके एक साथी ने बाहर से दरवाजा बंद कर लिया। मैंने रोकने की कोशिश की तो मुझे धक्का देकर पीछे धकेल दिया। इसी बीच अंदर उसके दो से तीन साथियों ने पहले मुझसे माइक छीनने की कोशिश की, इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो गया है। उन्होंने मेरे हाथ को मोड़ा, मुझे धक्का देकर कुर्सी पर गिरा दिया।
इसके बाद हमारे कैमरामैन तुषार से कैमरा बंद करने को कहा, लेकिन तुषार ने कैमरा बंद करने की बजाए कैमरे को बचाने के लिए हाथों को उठा लिया, इस पर तौफील ने डंडे से तुषार पर हमला किया। इससे कैमरे के लेंस टूट गए। तौफील और उसके बेटों ने तुषार से कैमरा झपटा और उस पर हाथ-घूँसो से हमला कर दिया। मैं इधर बुरी तरह से फँस चुका था और पुलिस को फोन लगाने की कोशिश कर रहा था, ताकि किसी तरह हमारी जान बच सके।
तौफील और उसके साथियों ने तुषार के गले में ‘हेडलाइंस इंडिया’ का आईकार्ड देखा। इसमें उसका नाम देख लिया था। इस पर तौफील ने साथियों से कहा कि ये दोनों हिंदू हैं, इनको आज सबक सिखा दो। जाओ घर से चापड़ लेकर आओ। यह हालत देख हमारी साँसें अटक गई थीं। मैंने तुषार को इशारा किया वो गेट खोलकर बाहर भाग जाए। तुषार ने ऐसा ही किया, लेकिन तुषार जैसे ही भागा वैसे ही तौफील और उसके गुर्गों ने तुषार के पेट और प्राइवेट पार्ट पर लात-घूँसो से हमला कर दिया।
वह गिर गया। मैंने बीच-बचाव किया। तभी मौका पाकर तुषार ऑफिस का गेट खोलकर बाहर भाग निकला। उसने बचाने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। करीब एक घंटे तक तौफील और उसके गुर्गों ने हमारे साथ मारपीट की। फिर कुछ देर बाद दिल्ली पुलिस आ गई। वो हमें और तौफील को थाने ले आई। मारपीट में मेरे अंगूठे में काफी चोट लग गई। वहीं, हमारे कैमरामैन तुषार के गले, पेट और पैर में काफी चोट लगी। उसे चलने में भी दिक्कत हो रही थी। अवैध मदरसा संचालक तौफील की दबंगई देखकर आसपास के लोग भी दहशत में आ गए।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रशांत किशोर को अंड-बंड बोलने वाला बताने के बाद दोनों के बीच आरोपों का दौर जारी है। प्रशांत किशोर ने गुरुवार (8 सितंबर 2022) को एक ट्वीट मे नीतीश कुमार के चार फोटो साझा कर उन पर तंज कसा। इसके साथ ही विपक्षी दलों का नेता बनने की कोशिश का माखौल उड़ाया।
गुरुवार की सुबह प्रशांत किशोर ने पीएम मोदी के साथ नीतीश कुमार के चार फोटो साझा किए थे। हालाँकि, बाद में उन्होंने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया। इस फोटो में नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाथ जोड़कर नमस्कार करते, उनके सामने झुकते, उन्हें नमस्कार करते नजर आ रहे हैं।
प्रशांत किशोर द्वार किया गया ट्वीट
इतना ही नहीं, NDA के साथ गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार दिल्ली जाकर गैर-भाजपा दलों के नेताओं से भी मिल रहे हैं। इस क्रम में उन्होंने कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी से लेकर अरविंद केजरीवाल तक से मुलाकात की। इस मुलाकात पर भी प्रशांत किशोर ने तंज कसा है।
प्रशांत किशोर ने कहा, “बिहार में जो राजनीतिक घटनाक्रम है वो केवल राज्य विशिष्ट मद्दा है और मुझे नहीं लगता कि इससे राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा। कथित तौर पर जो आदमी अभी विपक्ष में है, वो दिल्ली जाकर दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात करता है तो केवल मुलाकात करने से विपक्ष नए तरीके और रणनीति के साथ खड़ा हो रहा है, ऐसा मुझे नहीं लगता है।”
बिहार के भागलपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैंने तो कहीं ऐसी घोषणा नहीं देखी जिसमें सारे विपक्ष के नेता एक साथ बैठकर किसी चेहरे आदि की घोषणा की हो। अभी मुझे इस प्रयास में कुछ नई बात नहीं दिखती है।”
तो केवल मुलाकात करने से विपक्ष नए तरीके और रणनीति के साथ खड़ा हो रहा है, ऐसा मुझे नहीं लगता है। मैंने तो कहीं ऐसी घोषणा नहीं देखी जिसमें सारे विपक्ष के नेता एक साथ बैठकर किसी चेहरे आदि की घोषणा की हो। अभी मुझे इस प्रयास में कुछ नई बात नहीं दिखती है: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर
बता दें कि बुधवार (7 सितंबर 2022) को नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को अंड-बंड बोलने आदमी और धंधेबाज बताया था। उन्होंने कहा था, “वो आदमी मेरे साथ भी आया। मैंने बाद में सुझाव दिया कि ये सब काम छोड़ दीजिए पर नहीं माने। वो देशभर में अलग-अलग पार्टी का प्रचार करते रहे। उनका ये एक धंधा है।”
नीतीश कुमार ने आगे कहा था, “प्रशांत किशोर बिहार में जो करना चाहते हैं वो करें। उनके स्टेटमेंट का कोई महत्व ही नहीं है। उन्हें क्या ABC भी मालूम है कि 2005 से क्या काम हुआ है? स्टेटमेंट देकर पब्लिसिटी देने का काम है। वो इसी सबके एक्सपर्ट हैं। कुछ भी अंड-बंड बोलते रहते हैं। अगर ऐसा कोई कुछ कहता है तो शायद अंदर से बीजेपी को मदद करने का मन होगा। इसीलिए कुछ बोल रहे हैं।”
काशी के शाही परिवार की बेटी ने पूजा स्थल अधिनियम 1991 को चुनौती देने वाली याचिका में हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है। इसके तहत काशी में विवादित ढाँचे रजिया मस्जिद (Razia Mosque) में बदलाव की माँग की गई है।
BREAKING: Daughter of Royal Family of Kashi’s head files Intervention application in plea challenging the Places of Worship Act; seeks reclamation of the alleged illegal structure, Razia Mosque, which is claimed to be the original site of #KashiVishwanathMandir
इसमें दावा किया गया है कि यहाँ मूल रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर है। हस्तक्षेप आवेदन के अनुसार, काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर 1194 ईस्वी में कुतुब-उद-दीन-ऐबक (Qutub-ud-Din Aibak) द्वारा रजिया मस्जिद का निर्माण किया गया था। ‘लॉ बीट’ के मुताबिक, रजिया मस्जिद के अलावा शाही परिवार धरहरा मस्जिद के मंदिर के रूप में पुनर्निर्माण की भी माँग कर रहा है, जिसे औरंगजेब ने 1682 में वाराणसी के पंचगंगा घाट पर बिंदु माधव मंदिर को तोड़कर बनाया था।
In addition to the Razia Mosque, the royal family also seeks reclamation of the Dhaurahra Mosque which was built by #Aurangzeb after the destruction of the Bindu Madhav Mandir in 1682 at the Panchaganga Ghat in Varanasi.
वहीं, इतिहासकारों का दावा है कि औरंगजेब ने न केवल ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को बनाया, बल्कि इसी तरह उसने हिंदुओं के दो बड़े मंदिरों समेत अन्य कई सनातन आस्था के केंद्रों को भी गिराया था और वहाँ मस्जिदें बनवाई थी। भगवान शिव की नगरी काशी के पंचगंगा घाट पर स्थित ‘बिंदु माधव का मंदिर’ अब ‘धरहरा मस्जिद’ के नाम से जाना जाता है।
औरंगजेब ने सन 1669 के आसपास बिंदु माधव का प्राचीन मंदिर तोड़कर यहाँ धरहरा मस्जिद बनवाई थी, जिसके बाद औंध नरेश ने मंदिर से बिंदु माधव की मूर्ति को बगल में एक अन्य जगह स्थानांतरित करा दिया था। यहाँ पर अभी भी उनकी (भगवान विष्णु) पूजा की जाती है। अब इसे आलमगीर मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है।
काशी को काफी नुकसान पहुँचाया
इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे ने भी बताया था कि औरंगजेब ने काशी को काफी नुकसान पहुँचाया था। उसने यहाँ के कृतिवाशेश्वर, बिंदु माधव और विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया था। इसके अलावा ओंकारेश्वर और लाटभैरव मंदिर को भी उसने नष्ट कर दिया था। साथ ही ओंकारेश्वर मंदिर के आसपास भी कई मंदिरों को नुकसान पहुँचाकर उन्हें पूरी तरह लुप्त कर दिया।