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सारे बच्चे मुस्लिम, इसलिए रविवार को भी पढ़ाई: यूपी के भी एक स्कूल में ‘जुमे वाली छुट्टी’, संचालक ने कहा- अभी शिक्षा विभाग की मान्यता नहीं

झारखंड के कुछ इलाकों से बीते दिनों ऐसे स्कूलों का पता चला था जो इस्लामी स्कूल न होने के बावजूद इस्लामी नियमों से चल रहे थे। अब ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित सैंड़भर गाँव से सामने आया है। पता चला है कि वहाँ भी स्कूल में रविवार को नहीं बल्कि जुमे के दिन पर छुट्टी होती है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित प्रवीण वशिष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, गाँव का सैंडभर पब्लिक स्कूल अभी मान्यता प्राप्त भी नहीं हैं। लेकिन वहाँ मुस्लिम छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे में उन्हें साप्ताहिक अवकाश रविवार को नहीं बल्कि जुमे के दिन दिया जाता है।

रिपोर्ट बताती है कि ये गैर मान्यता प्राप्त स्कूल 2021 से संचालित हो रहा है। इसे किराए के भवन में चलाया जाता है। इसके संचालक हामिद अंसारी खुद कहते हैं स्कूल अभी मान्यता प्राप्त नहीं है और केवल सोसायटी रजिस्टर्ड है। मान्यता दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास आवेदन दिया गया है। लेकिन तब तक, यहाँ शुक्रवार के दिन छुट्टी इसलिए रखते हैं क्योंकि यहाँ आने वाले सारे बच्चे मुस्लिम हैं।

गौरतलब हो कि एक ओर स्कूल संचालक हामिद अंसारी कह रहे हैं कि मान्यता दिलाने के लिए आवेदन दे दिया गया है। वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि उन्हें ऐसे स्कूल की जानकारी नहीं है। शुक्रवार को छुट्टी और रविवार को स्कूल चलाना तो नियम के खिलाफ है। इसकी मामले में जाँच करवाकर आवश्यक कार्रवाई होगी।

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की कि वह बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में भेजें। गाँव के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाएँ। किसी भी ऐसे स्कूल में न भेजें जो मान्यता प्राप्त ही नहीं है। अधिकारी ने कहा कि राज्य में ऐसे स्कूलों को नहीं चलने दिया जाएगा जिन्हें मान्यता न प्राप्त हो।

बता दें कि इससे पहले खबर झारखंड से खबर आई थी कि वहाँ पर सरकारी स्कूलों को उर्दू स्कूल बनाने का प्रयास चल रहा है। छानबीन के दौरान मात्र 5 जिलों में 70 ऐसे स्कूल मिले थे जो सामान्य से उर्दू स्कूल बनाए गए और वहाँ बच्चों की छुट्टी का दिन, प्रार्थना का तरीका सब बदलता गया।

विकिपीडिया को IT मंत्रालय ने भेजा समन, अर्शदीप सिंह को बता दिया था खालिस्तानी: उच्च-स्तरीय समिति करेगी पूछताछ, Pak से हुआ पूरा खेला

एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार (4 सितंबर, 2022) को हुए मैच में भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह से फील्डिंग के दौरान एक कैच छूट गया। इस मैच में भारत की हार हुई, जिसके बाद फर्जी पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स से अर्शदीप सिंह के खिलाफ ज़हर उगला जाने लगा। अब ‘केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)’ ने इस मामले में सोमवार को विकिपीडिया को समन किया है।

भारत में विकिपीडिया के एग्जीक्यूटिव को समन भेजते हुए पूछा गया है कि आखिर उसकी साइट पर अर्शदीप सिंह के प्रोफ़ाइल को खालिस्तानी संगठन से कैसे जोड़ दिया गया? ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया प्लेटफॉर्म से भारत सरकार ने पूछा है कि अर्शदीप सिंह के पेज से आखिर छेड़छाड़ कैसे हुई और उनके पेज की एंट्री कुछ इस तरह से एडिट कर दिया गया, जिससे उनके खालिस्तानी कनेक्शन होने के दावे किए जाने लगे।

IT मंत्रालय के सचिव के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय समिति इस सम्बन्ध में विकिपीडिया के एग्जीक्यूटिव से पूछताछ करेगी। साथ ही कंपनी को ‘कारण बताओ नोटिस’ भी थमाया जा सकता है। उसे आगाह किया जाएगा कि आगे इस तरह के एडिट्स से बचने के उपाय किए जाएँ। पाकिस्तानी आईपी एड्रेस से अर्शदीप सिंह के पेज को एडिट कर उनका निवास स्थान ‘खालिस्तान’ दिखाया गया। जबकि AltNews के मोहम्मद जुबैर जैसों ने इसके लिए भारतीयों को ही दोषी ठहराया।

मध्य प्रदेश के गुना में 5 फरवरी, 1999 को जन्मे अर्शदीप सिंह 2018 में उस अंडर 19 वर्ल्ड कप की भारतीय टीम का हिस्सा थे, जिसने ट्रॉफी जीती थी। पंजाब के बाएँ हाथ के तेज़ गेंदबाज अर्शदीप सिंह को IPL में सबसे पहले ‘किंग्स XI पंजाब’ ने मौका दिया था। उन्होंने अपने पहले ही आईपीएल मैच में इंग्लैंड के धाकड़ विकेटकीपर बल्लेबाज जॉस बटलर और भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे का विकेट लिया था। जून 2022 में उन्हें भारतीय टीम से डेब्यू का मौका मिला।

पाकिस्तान के खिलाफ मैच में अर्शदीप ने सिंह 18वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद देखा गया कि अचानक उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए। जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए हैं, वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए हैं। याद दिला दें कि मोहम्मद शमी के समय भी इसी तरह पोस्ट कर करके भारतीयों को बदनाम करने का प्रयास हुआ था।

फैजल ने अथर्व बनकर योग टीचर को फँसाया, मंदिर में शादी के बाद इस्लाम कबूल करने का बनाया दबावः इनकार करने पर जलाने की धमकी, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से पहचान छिपाकर हिंदू युवती से शादी करने और धर्मांतरण (Religious conversion) का दबाव बनाने का मामला सामने आया है। घटना चिनहट थाना क्षेत्र की है। आरोपित फैजल अहमद है। पीड़िता के अनुसार अथर्व बनकर उसने पीड़िता से जान-पहचान की। उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। इसके अश्लील वीडियो बनाए।

पीड़िता के दबाव डालने के बाद उसने आर्य समाज मंदिर में शादी भी की। लेकिन शादी के बाद जब उसके फैजल अहमद होने का राज खुला तो वह युवती पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। युवती ने धर्मांतरण से इनकार किया तो उसके साथ मारपीट की। उसे गाली दी। उसका वीडियो वायरल करने और जलाकर मारने की धमकी दी। युवती की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता लखनऊ में योग टीचर है। उसका कहना है कि फैजल ने उसे अपना नाम अथर्व बताया था। वह एक जिम का संचालक है। उसने जिम में युवती की नौकरी लगवाई और उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा था। आरोपित ने युवती को अपनी माँ से भी मिलवाया था। भरोसा हासिल करने के बाद फैजल ने युवती से शारीरिक संबंध बनाए और उसका वीडियो बना लिया। पीड़िता ने जब उस पर शादी का दवाब बनाया, तो आरोपित ने जानकीपुरम स्थित आर्य समाज मंदिर में उससे शादी कर ली। लेकिन वह उसे अपने घर की जगह एक अपार्टमेंट में फ्लैट लेकर रहने लगा।

इस साल अप्रैल में जब फैजल की सच्चाई सामने आई तो युवती दंग रह गई। इसके बाद से आरोपित उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर जलाकर मारने की धमकी देने लगा। युवती के मुताबिक, आरोपित पहले भी दो हिंदू लड़कियों के साथ संबंध बना चुका है। डीसीपी (पूर्वी) प्राची सिंह ने बताया कि आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

हिंदू नाबालिग को रेप के बाद पेड़ से टाँगना झारखंड CM के लिए बस एक ‘घटना’, लड़की को जलाने के मामले में MLA भाई ने खोजा था ‘प्रेम प्रसंग’

दुमका झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला है। यहाँ हाल ही में हुई दो घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर रखा है। एक मामले में हिंदू लड़की को जलाकर मार डाला गया, दूसरी में हिंदू लड़की को बलात्कार के बाद हत्या कर शव को पेड़ से टाँग दिया गया। दोनों मामले में दरिंदगी की शिकार हुई लड़की नाबालिग थी। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह महज एक ‘घटना’ है। उनकी प्रतिक्रिया से जाहिर होता है कि ये कोई गंभीर मामले नहीं है। ऐसी सामान्य घटनाएँ हैं जो होती रहती हैं।

शनिवार (3 सितंबर 2022) को दुमका में जनजातीय समाज की 14 साल की लड़की का शव पेड़ से टँगा मिला था। आरोप है कि अरमान अंसारी ने बलात्कार के बाद हत्या कर लड़की का शव पेड़ से लटका दिया ताकि सुसाइड लगे। इस संबंध में रविवार को पत्रकारों ने सोरेन से सवाल पूछा। जवाब में उन्होंने कहा, “घटनाएँ तो होती रहती हैं। घटनाएँ कहाँ नहीं होती हैं। घटना तो बोलकर आता नहीं है।”

इससे पहले दुमका में एक हिंदू नाबालिग लड़की जलाकर मार डाली गई थी। इस मामले में शाहरुख हुसैन ने नईम के साथ घर में घुस हिंदू नाबालिग पर पेट्रोल छिड़क उसे आग लगा दी थी। बाद में इलाज के दौरान लड़की की मौत हो गई। अब तक जो जानकारी सामने आई है उससे पता चलता है कि शाहरुख हुसैन लड़की के पीछे पड़ा था। दोस्ती नहीं करने पर उसे जान से मारने की धमकी देता था।

इस मामले को लेकर भी हेमंत सोरेन की सरकार ने फौरन हरकत नहीं दिखाई थी। इस मामले में इलाज में लापरवाही से लेकर एक डीएसपी नूर मुस्तफा पर हिंदू लड़की को बालिग दिखाने तक के गंभीर आरोप है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के भाई बसंत सोरेन जो कि दुमका से ही विधायक हैं ने इस मामले के लिए ‘प्रेम प्रसंग’ को जिम्मेदार बताया था।

बसंत सोरेन ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “देखिए, प्रेम-प्रसंग का मामला है। इसमें व्यक्तिगत या सामाजिक तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। हमारा-आपका प्रेम है और हमारी-आपकी प्रतिक्रिया है – इसमें घटना को अंजाम देने का काम कोई समाज तो करेगा नहीं न, या कोई पार्टी तो करेगी नहीं न। दो लोग साथ बैठे हुए हैं और उन्होंने मारपीट कर ली। कोई विधायक या कोई पार्टी, इसे किसी चीज से जोड़ना गलत है।”

नृशंस घटनाओं से यह यह बात भी सामने आई है कि दुमका में ऐसे गिरोह काम कर रहे हैं जो छोटी उम्र के हिंदू लड़कियों को टारगेट करते हैं। दुमका की ही एक युवती ने सामने आकर बताया है कि नईम ने उसे अगवा कर जबरन निकाह करने की कोशिश थी। बावजूद इसके मुख्यमंत्री की इस तरह की टिप्पणी चिंताजनक है। साथ ही जिहादी तत्वों के साथ सख्ती से निपटने की सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति को भी दिखाता है।

भारतीय बनकर पाकिस्तानियों ने उगला अर्शदीप सिंह पर जहर, विकिपीडिया पर ‘खालिस्तानी’ बनाया: फैक्टचेक की जगह AltNews के जुबैर ने दी प्रोपेगेंडा को हवा

एशिया कप 2022 में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान भारतीय क्रिकेटर अर्शदीप सिंह से एक कैच छूटने का बवाल बन चुका है। ये बवाल भारतीयों ने नहीं बनाया बल्कि सारा किया धरा पाकिस्तान का है।

कल (4 सितंबर 2022) के मैच में अर्शदीप ने 18 वें ओवर की तीसरी गेंद में आसिफ अली का कैच छोड़ा था, जिसके बाद देखा गया कि अचानक उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा। कुछ अकॉउंट्स से उन्हें देश विरोधी जैसे शब्द तक कहे गए।

ट्विटर पर होते इन नेगेटिव पोस्ट के बाद अचानक से ऑल्ट न्यूज के फैक्टचेकर मोहम्मद जुबैर ने मोर्चे को संभाला और सारे ट्वीट इकट्ठा करके बताया कि देखो कैसे एक कैच मिस हुई तो अर्शदीप को भला-बुरा बोला जा रहा है।

जुबैर का ट्वीट

वहीं हरभजन सिंह भी इस बीच अर्शदीप के समर्थन में आ गए और उन्होंने बिना सारे मामले को समझे भारतीयों को फटकारते हुए कहा, 

“युवा अर्शदीप की आलोचनाएँ बंद करो। कोई जानबूझ कर कैच को नहीं छोड़ता है। हमें अपने लड़कों पर गर्व है। पाकिस्तान ने बढ़िया खेला। शर्म आनी चाहिए उन लोगों को जो अपने लोगों को ऐसा कहकर नीचा गिराते हैं। अर्शदीप सोना है।”

पाकिस्तानी अकॉउंट से हुए अर्शदीप को ‘खालिस्तान’ बताने वाले ट्वीट

अब इन्हीं ट्विट्स को लेकर ट्विटर यूजर ‘द हॉक आई’ ने जुबैर और हरभजन दोनों को आइना दिखाया। अपने ट्वीट में हॉक आई ने बताया कि कैसे ये जो ट्वीट अर्शदीप को देशद्रोही आदि बताते हुए किए गए हैं वो अधिकतर पाकिस्तान और अरब देशों के लोगों ने भारतीय बनकर किए हैं। उन्होंने याद दिलाया शमी के समय भी इसी तरह पोस्ट कर करके भारतीयों को बदनाम करने का प्रयास हुआ था।

देख सकते हैं कि पाकिस्तान के जैद हामिद ने ये सारा खेल शुरू किया था। अपने ट्वीट में उसने दिखाया कि पाकिस्तानियों की मदद सिख ने की। इसके बाद पाकिस्तान का जन्मा यूएस पत्रकार वीएस खान भी ऐसी हरकत करता पाया गया। पाकिस्तान के न्यूज चैनल से भी अर्शदीप को खालिस्तानी कहा गया।

इतने सारे सबूत होने के बावजूद ऑल्ट न्यूज के कथित फैक्ट चेकर्स ने इन पर रिपोर्ट नहीं की बल्कि अगर कोई एंगल खोजा तो केवल भारतीयों को कोसने का और उन्हें नीचा दिखाने का कि कैसे वो अपने क्रिकेटर के खिलाफ जहर उगलते हैं।

पाकिस्तान से बदला गया विकिपीडिया पर अर्शदीप का डाटा, लिखा गया खालिस्तानी

मालूम हो कि पाकिस्तानियों ने केवल सोशल मीडिया पर ही अर्शदीप को खालिस्तानी दिखाने की कोशिश नहीं की। बल्कि उन्होंने विकिपीडिया पर भी अर्शदीप का डाटा बदला। देख सकते हैं कि जहाँ-जहाँ अर्शदीप के नाम के साथ भारतीय होना चाहिए वहाँ जानबूझकर खालिस्तान लिखा गया।

अंशुल सक्सेना के ट्विटर हैंडल पर इस संबंध में स्क्रीनशॉट हैं। इनसे पता चलता है कि पहले अर्शदीप को खालिस्तान स्क्वॉड का बताया गया और फिर हर जगह भारत हटाकर उनके नाम के साथ खालिस्तान जोड़ा गया। ये सारी एडिटिंग जिस आईपी एड्रेस से की गई वो सर्च करने पर देख सकते हैं कि पाकिस्तान का मिला है।

याद दिला दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टी-20 वर्ल्ड कप मैच के दौरान भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी को इस तरह लोगों की नफरत का शिकार होना पड़ा था। बाद में पता चला था कि शमी के विरुद्ध किए गए ट्वीट ज्यादातर पाकिस्तानियों ने और विदेशी एजेंसियों ने किए थे। उस समय भी माहौल ऐसा बना दिया गया था कि सचिन, हरभजन सिंह जैसे खिलाड़ी शमी के समर्थन में उतर आए थे।

कंगना रनौत का दावा- असलम से महेश बने हैं ‘मूवी माफिया’, पूछा असली नाम क्यों छिपा रहे: बेटे राहुल ने भी बताया था- मेरा नाम मोहम्मद रखना चाहते थे

बॉलीवुड फिल्मकार महेश भट्ट (Mahesh Bhatt) का असली नाम ‘असलम’ है। यह दावा अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने किया है। इससे पहले खुद महेश भट्ट के बेटे राहुल ने बताया था कि उनके पिता उनका नाम ‘मोहम्मद’ रखना चाहते थे। इसी साल अप्रैल में जब आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर से शादी की थी तो कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि महेश भट्ट ने बेटी को फेरों के दौरान वचन देने से रोक दिया था।

अब कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी में महेश भट्ट का एक पुराना वीडियो शेयर किया है। रविवार (4 सितंबर 2022) को शेयर किए गए इस वीडियो में भट्ट मुस्लिमों को संबोधित करते दिख रहे हैं। इसके साथ कंगना ने लिखा है कि बॉलीवुड फिल्मकार का असलमी नाम ‘महेश’ नहीं बल्कि ‘असलम’ है और वे इसे छिपा रहे हैं।

कंगना का कहना है कि महेश भट्ट को असली नाम का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्हें खुद को उस धर्म का नहीं दिखाना चाहिए, जिसमें वे सोनी राजदान से शादी के लिए आए हैं। साथ ही महेश भट्ट पर सभ्य भाषा में लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। कंगना ने लिखा है, “मुझे बताया गया कि महेश भट्ट का असली नाम असलम है। उन्होंने सोनी राजदान से शादी करने के लिए अपना धर्म बदल लिया। यह खूबसूरत नाम था तो इसे छिपा क्यों रहे हैं। उन्हें अपना असली नाम ही इस्तेमाल करना चाहिए और किसी खास धर्म का होने का नहीं दिखाना चाहिए।”

कंगना रनौत की इंस्टाग्राम स्टोरी

गौरतलब है कि कंगना भट्ट कैंप की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। इसी कैंप की फिल्म ‘गैंगस्टर’ से उन्होंने डेब्यू किया था। बताया जाता है कि भट्ट कैंप की एक फिल्म का ऑफर कंगना ने ठुकरा दिया था। उसके बाद इनके रिश्तों में खटास शुरू हुई। कंगना महेश भट्ट को ‘मूवी माफिया’ बता चुकी हैं। कई मौकों पर आलिया भट्ट पर भी तंज कस चुकी हैं।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब महेश भट्ट पर इस तरह का आरोप लगा है। खुद उनके बेटे राहुल भट्ट ने कहा था, “मेरे पिता का नजरिया मेरे लिए कभी बहुत अच्छा नहीं रहा। वह मुझे अपने बेटे की तरह मानते ही नहीं थे और न ही वैसा बर्ताव करते थे। वह मेरा नाम मोहम्मद रखना चाहते थे। बहुत से लोगों को इस बात पर भरोसा नहीं होता, लेकिन यह सच है। वह हमेशा चाहते थे कि मेरी पहचान मोहम्मद नाम से हो। पड़ोस में रहने वाले महाराष्ट्र के लोगों ने मेरी एंग्लो इंडियन माँ से इस मुद्दे पर निवेदन किया और कहा कि महेश भट्ट के पास अपनी धर्म निरपेक्षता दिखाने के और भी मौके हैं।”

उस इंटरव्यू के दौरान राहुल ने यह भी कहा था कि अगर महेश भट्ट को ऐसा लगता है कि वह एक अच्छे मुस्लिम हैं तो उन्हें अपनी सभी औलादों के साथ एक जैसा व्यवहार करना चाहिए।

कनाडा में 13 जगहों पर चाकू से हमला, 10 की मौत-15 घायल: सड़कों पर घूम रहे 2 संदिग्ध, पुलिस ने लोगों से घरों में ही रहने को बोला

कनाडा में 13 जगहों से सड़क पर चलते लोगों पर मास स्टैबिंग यानी कि चाकू से हमला करने का मामला प्रकाश में आया है। घटना में 10 लोगों की मौत जबकि 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने 2 संदिग्धों की तस्वीर दिखाकर अलर्ट जारी कर दिया है। ये दोनों काले रंग की गाड़ी में बैठकर घटना को अंजाम दे रहे हैं। शहर में ‘सिविल इमरजेंसी’ भी लागू कर दी गई है।

रॉयल कनाडियन माउंटेड पुलिस की असिस्‍टेंट कमिश्‍नर रोंडा ब्‍लैकमोर ने इस घटना को हाल के वर्षों की बड़ी घटनाओं में से एक बताया है। ब्लैकमोर के मुताबिक उन लोगों के पास घटना की सूचना सबसे पहले (स्थानीय समयानुसार) सुबह 5:40 पर आई थी। इसके बाद पता चला कि इन्होंने सस्‍काचुवान में भी कम से कम 13 लोगों को अपना निशाना बनाया।

संदिग्धों की लोकेशन का नहीं चल पाया है पता

पुलिस द्वारा जारी की गई जानकारी के मुताबिक संदिग्धों के नाम डेमियन सैंडरसन और माइल्स सैंडरसन हैं। ये दोनों निसान रोग गाड़ी में बैठ इधर-उधर घूमकर घटना को अंजाम दे रहे हैं। इनका कुछ पता नहीं है कि आखिर वो अभी कहाँ है।

असिस्टेंट कमिश्नर बोलीं कि घटना देख ऐसा लगता है कि कइयों को संदिग्ध अपना निशाना बना चुके हैं और कइयों को और बनाएँगे। इन्हें पकड़े बिना इनके मकसद को बता पाना सच में मुश्किल है। अल्बर्टा और मनिटोबा के प्रांत की पुलिसें अपने काम पर लगी हैं। पर उनकी लोकेशन का अभी पता नहीं चल सका है। इसके अलावा डेमियन और माइल्स के रिश्तेदारों का पता लगाना भी अभी संभव नहीं हो पा रहा है और इनका आपस में क्या संबंध है ये भी नहीं पता चल सका है।

सुरागों से दूर पुलिस ने अभी केवल स्थानीयों को घर में रहने की सलाह दी है। हालाँकि सोशल मीडिया पर लोग बता रहे हैं कि इन दोनों संदिग्धों को रेगिना में देखा गया है। इस बीच कमिश्नर ब्लैकमोर ने आरोपितों को संदेश जारी कर कहा है, “डेमियन और माइल्स अगर हमारी बात सुन रहे हैं तो उनसे कहा जाता है कि वो फौरन खुद को पुलिस के हवाले कर दें।”

बता दें कि सड़क चलते लोगों पर इस तरह हमला कनाडा में पहली बार नहीं है। 2 साल पहले यहाँ एक मास शूटिंग की घटना हुई थी। तब नोवा स्कोटिया के एक व्यक्ति ने 14 घंटों में घूम घूमकर लोगों को मारा था।

कनाडा PM ने जताया दुख

इस बार भी दो दर्जन लोग निशाना बनाए जा चुके हैं। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने इसे भयावह और दिल तोड़ने वाली घटना कहा है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के साथ संवेदना व्यक्त की और आ बताया कि वह हालातों पर करीबी से नजर बनाए हुए हैं। पुलिस अपने प्रयास कर रही हैं।

‘इमरान हाशमी की फिल्म में काम देने का किया वादा, फोन पर अश्लील बातें की’ : अब यौन शोषण केस में KRK गिरफ्तार, पीड़िता ने कहा- जूस पिलाकर बनाए संबंध

कमाल राशिद खान उर्फ KRK की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। केआरके, ऋषि कपूर और इरफान खान पर विवादित टिप्पणी के मामले में पहले ही 30 अगस्त से न्यायिक हिरासत में थे। और अब, एक अभिनेत्री से कथित तौर पर छेड़छाड़ के मामले में मुंबई की वर्सोवा पुलिस ने हिरासत में लिया है।

इस मामले में, 27 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस से शिकायत की थी कि वह 2017 में मुंबई आई थी जहाँ वह एक हाउस पार्टी में केआरके से मिली थी। इस मुलाकात में, केआरके ने खुद को निर्माता निर्देशक बताया था जिसके बाद दोनों के बीच फोन नंबर्स एक्सचेंज हुए थे।

पीड़िता ने पुलिस से बताया है, साल 2017 में ही केआरके ने कहा कि वह इमरान हाशमी स्टारर कैप्टन नवाब नामक एक फिल्म में उसे मुख्य भूमिका देंगे और फोन पर अश्लील बातें की।

ऑरेंज जूस पीने के बाद आ गया था चक्कर

अभिनेत्री ने केआरके पर आरोप लगाते हुए कहा है, जनवरी 2019 में, केआरके ने उसे अपने जन्मदिन के लिए अपने बंगले में बुलाया था। हालाँकि, वह उस दिन केआरके के घर नहीं गई थी। लेकिन वह अगले दिन शाम 7 बजे के आसपास कमाल आर खान (केआरके) के बंगले में चली गई। उस दिन गर्मी बहुत अधिक थी, इसलिए वह उसे बंगले की पहली मंजिल के एक कमरे में ले गया।

पीड़िता अभिनेत्री ने आगे कहा है कि केआरके ने उसे वोदका लेने के लिए कहा लेकिन उसने मना कर दिया। फिर केआरके ने उसे ऑरेंज जूस दिया जिसे उसने पी लिया। अभिनेत्री ने आगे कहा, “जैसे ही मैंने ऑरेंज जूस पिया मुझे चक्कर आ गया। इसके बाद खान ने उसके साथ यौन संबंध बनाने की कोशिश की। जिससे वह बेहद डर गई और वहाँ से चली गई।”

पीड़िता ने बताया है कि, इस पूरी घटना को लेकर उसने अपने दोस्त को फोन किया था। दोस्त ने कहा कि केआरके का फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा दबदबा है इसलिए उसके बारे में शिकायत करने से उसका करियर प्रभावित हो सकता है।

पीड़िता का कहना है, साल 2021 में उसने एक अन्य दोस्त को अपनी आपबीती सुनाई, इस दोस्त ने उसे पुलिस में शिकायत करने की सलाह दी। जिसके बाद उसने वर्सोवा पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और कमाल आर खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न) और 509 के तहत एफआईआर दर्ज कराई।

इस मामले में शनिवार (3 सितंबर) को वर्सोवा पुलिस ने केआरके को जेल से ही हिरासत में ले लिया था। इसके बाद रविवार (4 सितंबर) को बांद्रा में एक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया। जहाँ से कोर्ट ने केआरके को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

पहले से ही न्यायिक हिरासत में था केआरके

गौरतलब है कि इससे पहले, कमाल राशिद खान उर्फ KRK को विवादित ट्वीट के चलते 30 अगस्त को मुंबई में गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, केआरके ने साल 2020 में ऋषि कपूर और इरफान खान जैसे दिवंगत अभिनेताओं के ऊपर विवादित ट्वीट किए थे। इसी के बाद उनके ऊपर मलाड थाने में शिकायत दर्ज हुई। पुलिस ने उसी मामले में केआरके से पूछताछ करके उनको गिरफ्तार किया था।

लंदन से चोरी हुई 2 करोड़ की कार कराची में ‘बंगले वाले’ के पास मिली: लोगों ने खूब उड़ाया Pak का मजाक, कहा- ‘ये तो सच में महाचोर निकले’

ब्रिटेन की राजधानी लंदन से चोरी हुई एक कार पाकिस्तान के कराची में मिली है। बताया जा रहा है कि लग्जरी कार ‘बेंटले मल्सैन’ सेडान को ब्रिटेन से चुराकर पाकिस्तान लाया गया था जो अब कराची के एक बंगले से बरामद हुई है।

बताया जा रहा है कि ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) ने पाकिस्तान के कस्टम विभाग को कार चोरी होने की सूचना दी थी। इस सूचना के बाद पाकिस्तानी कस्टम अधिकारियों ने कराची के एक बंगले में छापेमारी करते हुए यह कार बरामद की है।

लंदन से चोरी के बाद कराची में बरामद हुई इस लग्जरी कार की कीमत करीब 3,00,000 डॉलर से भी अधिक बताई जा रही है। भारतीय रुपयों में इस कार की कीमत 2,39,24,714 रुपए है। ‘बेंटले मल्सैन’ ब्रांड की सबसे बड़ी और सबसे महंगी सेडान है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार को जिस बंगले से बरामद किया गया है उसके मालिक से कस्टम विभाग के अधिकारियों ने कार के दस्तावेज माँगे थे। लेकिन, कार चोरी की होने के कारण वह दस्तावेज मुहैया नहीं करवा पाए। जिसके बाद अधिकारियों ने उसे और कार बेचने वाले दलाल को गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार चोरी करने वाले गैंग ने कार को पाकिस्तान ले जाने के लिए पूर्वी यूरोपीय देश के एक राजनयिक के दस्तावेजों का उपयोग किया था। फिलहाल, इस राजनयिक को उसकी सरकार ने वापस बुला लिया है। राजनयिक किस देश का था यह बात अब तक सामने नहीं आ सकी है।

इस मामले में, कस्टम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार का रजिस्ट्रेशन भी फर्जी है। कार चोरी के इस मामले में, दर्ज की गई एफआईआर (FIR) के मुताबिक, चुराई गई कार की तस्करी की वजह से करीब 30 करोड़ रुपए से ज्यादा के टैक्स की चोरी हुई है। कस्टम विभाग अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर रही है और इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की तलाश कर रही है। वहीं सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना को सुनने के बाद पाकिस्तान का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि हॉलीवुड तो ऐसी चोरियाँ सिर्फ फिल्मों में दिखा पाता है, लेकिन पाकिस्तान सच में इन्हें अंजाम दे देता है। कुछ यूजर्स हैरानी से कह रहे हैं कि पाकिस्तान तो सच में महाचोर निकला जो इतनी बड़ी गाड़ी को चुरा ले आए।

नहीं टूटी राधा-रानी मंदिर में 5000 साल पुरानी परंपरा, मीडिया ने झूठ फैलाया: समझें क्या है ‘सेवादार’ विवाद

बरसाने में राधा रानी के मंदिर में पूजा को लेकर उठे विवाद ने सोशल मीडिया पर तमाम सवालों को पैदा कर दिया था। कहीं कहा जा रहा था कि राधाष्टमी के मौके पर महिला पुजारी के पूजा करने से मंदिर की 5000 साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी, तो कहीं पूछा जा रहा था कि क्या ये सब मोदी सरकार का किया धरा है?

इन सब सवालों के जवाब आइए सरल भाषा में आपको देते हैं और जानते हैं कि क्या सच में इस विवाद में सरकार से जुड़ा कोई एंगल है और क्या सच में हजारों वर्ष पुरानी परंपर टूट गई?

कैसे शुरू हुआ राधा रानी मंदिर में सेवादार बनने का विवाद

बरसाने में स्थित राधा-रानी मंदिर में पूजा-अर्चना का काम गोस्वामी समुदाय के तीन ब्राह्मण परिवारों के पास है। हर साल इन्हें बारी-बारी से सेवादार बनने का मौका मिलता है। लेकिन इस बार परेशानी तब शुरू हुई जब नियम के मुताबिक हरबंस लाल गोस्वामी का नाम सेवादार बनने के लिए आया।

हरबंस लाल गोस्वामी का निधन 1999 में हो गया था। ऐसे में उनके भाई के पौत्र रास बिहारी गोस्वामी ने इस पद को संभाला और 20 अप्रैल से 20 अक्टूबर के लिए सेवादार नियुक्त हुए। लेकिन इसी बीच एक मायादेवी नाम की एक महिला ने खुद को दिवंगत हरबंस लाल गोस्वामी की विधवा बताकर दावा कर दिया कि सेवादार बनने का अधिकार उनका है।

कोर्ट में पहुँचा राधा रानी मंदिर का ‘सेवादार’ विवाद

केस पहले निचली कोर्ट में गया जहाँ अदालत ने पक्ष सुने और मायादेवी को हरबंस लाल की विधवा मानते हुए उन्हें तय अवधि के लिए सेवादार बनाने का आदेश दे दिया। लेकिन, बाद में अन्य पहलुओं को देखते हुए जिला अदालत ने इस आदेश को रद्द किया और आगे मंदिर प्रशासन का नियंत्रण लेने के लिए याचिकाएँ हाईकोर्ट में डाली गईं।

कायदे से ये सब कार्य राधाष्टमी से पहले पूर्ण होने थे लेकिन देरी के कारण ऐसा नहीं हुआ। 2 सितंबर को आदेश पारित होने की बजाय कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 8 सितंबर दे दी।

अब समस्या ये आई कि इसी बीच 4 अप्रैल को राधाष्टमी पड़ गई जिसे हर साल बरसाने में धूम-धाम से मनाया जाता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में रास बिहारी दोबारा कोर्ट गए और तत्काल सुनवाई की माँग की। कोर्ट ने इस बार मायादेवी को नोटिस भेज मामले को 12 सितंबर तक टाल दिया।

5000 साल पुरानी परंपरा टूटने की खबरें मीडिया में

अब राधाष्टमी और कोर्ट की सुनवाई में देरी के चलते जगह-जगह ये बातें फैल गईं कि अब राधा-रानी मंदिर में 5000 साल पुरानी परंपरा टूट जाएगी और ऐसा पहली बार होगा कि कोई महिला पूजा करेगी। देख सकते हैं कि न्यूज 18 जैसे संस्थानों ने इस खबर को खूब विस्तार से लिखकर चलाया।

यही सब देख सामान्य जन ने इस मुद्दे पर बोला शुरू कर दिया। धीरे-धीरे देखा गया कि लोग इस विवाद में राजनीति का एंगल घुसाकर सरकार की आलोचना करने लगे। पूरे मामले में मोदी सरकार, योगी सरकार, बीजेपी को दोषी बताया जाने लगा। हालाँकि, समझें तो पता चलेगा कि वास्तविकता में यह पूरा विवाद पारिवारिक है।

रास बिहारी गोस्वामी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने अधिकार के लिए दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने सुनवाई की और मायादेवी को नोटिस भेज दिया। इस बीच राधाष्टमी भी आई लेकिन 5000 साल पुरानी परंपरा नहीं टूटी। मंदिर में मौजूद गोस्वामी समाज के पुजारियों ने ही राधा अष्टमी के मौके पर मंदिर में पूजा संपन्न करवाई है।

फर्जी दस्तावेजों पर मायादेवी बनीं सेवादार: वकील आशुतोष शर्मा

मामले के वकील आशुतोष शर्मा ने बताया कि मायादेवी गोस्वामी समुदाय की नहीं हैं। उनका सेवादार बनना गलत था। ये बात कोर्ट ने मानी और निचली अदालत का फैसला खारिज हुआ। हालाँकि कानून प्रक्रिया के चलते रास बिहारी अपनी जगह नहीं ले पाए। आशुतोष ने दावा किया कि मायादेवी हरबंस लाल की पत्नी भी नहीं है। पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों का है। उन्होंने जानकारी दी कि मीडिया में चलाई जा रही खबरें पूरी तरह झूठी हैं। मायादेवी को पूजा-अर्चना का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना है कि रास बिहारी की याचिका सही है।

साधु-संतों के बीच बैठकर लिया जाए फैसला: पाताल पुरी मठ के महंत

पाताल पुरी मठ के महंत बालक दास जी ने इस मुद्दे पर बात करते हुए ऑपइंडिया से कहा कि महिलाओं के पूजा करने से कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन परंपरा को नहीं बदला जाना चाहिए। ऐसे मामले कोर्ट में न जाकर साधु-संतों के बीच ही सुलझ जाने चाहिए। जब आप कोर्ट जाएँगे तो फिर तो अदालत अपने हिसाब से फैसला देगी और उसके बाद आपको वो फैसला मानना ही होगा।